
गजेन्द्र ठाकुर

मैथिलीक आइ धरिक सभसँ
पैघ उपन्यास-
न्याय दर्शन आ
समकालीन अपराध-गाथा
मैथिली कादम्बरी
गोहि सभक बीच जलसमाधि
गजेन्द्र ठाकुर
गोहि सभक बीच जलसमाधि
(उपन्यास)
गजेन्द्र ठाकुर
॥ २०० अध्याय-फकरा + आरम्भ + समापन ॥
आरम्भ-फकरा — पोथीक मुहसँ
(गढ़ नारिकेलक लोक-स्वर)
1.
पानि बजै छै, गाछ सुनै छै, पात तरि-तरि नाम लिखै छै, मुदा शिला चुप रहै छै।
2.
जे डुबल, से बजला; जे बाँचल, से बिसरला; आ नदी दुनूकेँ अपन पेटमे राखि लेलक।
3.
नारिकेल गाछ जखन बजै छै, तखन बुझिहऽ— गाम कोनो मुर्दा अपन एड़ी ताकि रहल अछि।
4.
सत्य बीज थीक, झूठ पाथर; पाथर भरि राति भारी, बीज भोरे-भोर हरियर।
5.
नाम बिनु भूत खेलमे नहि टिकै छै, नाम बिनु मनुक्खो इतिहासमे नहि टिकै छै।
6.
गज पकड़ै ग्राहकेँ, ग्राह पकड़ै बच्चाकेँ, बच्चा पकड़ै ओहि हाथकेँ जे शिलापर नाम नहि लिखलक।
7.
जे देखि कऽ चुप रहल, ओकर मृत्यु दू बेर; जे देखि कऽ बजल, ओकर नाम दू बेर।
खण्ड प्रथम — जलखण्ड
अध्याय 1 — चन्ना गाछीक कबड्डी
चन्ना गाछीमे राति उतरै छै, भूत घेरा बान्है छै, आ कबड्डी ओतय खेलाइ छै जतय खेल नहि— मुकदमा होइ छै।
अध्याय 2 — दहिन कातक गाम
नदी जखन दहिन फिरै छै, गाम बाम भऽ जाइ छै, मुदा मुर्दा सभ ओहिना अपन कात ताकैत रहै छै।
अध्याय 3 — छपाकक हिसाब
छपाक एकटा होइ छै, हिसाब सय बेर; पानि गनै नहि, मुदा माटि सभटा नाम मोन राखै छै।
अध्याय 4 — तीस नाम, तीन सय लाश
तीस गोट नाम लिखल, तीन सय गोट डुबल, आ रजिस्टर ओहि बीचक खाली ठाम चुप रहल।
अध्याय 5 — तारीखक गोहि
तारीख पर तारीख खसै छै, गोहि ओहि तारीखकेँ चिबा लै छै, आ इन्साफ पानि तरि सूति रहै छै।
अध्याय 6 — हार्वर्डक एथिक्स
एथिक्स ओहि देशसँ आबै छै जतय गाछ नहि बजै छै, मुदा हमर गाछ बाजि कऽ ओकर एथिक्स झूठ कऽ दै छै।
अध्याय 7 — श्वासक भाव
साँस गनल नहि जाइ छै, मुदा हरेक रुकल साँस कतहु ने कतहु एकटा नाम भऽ जाइ छै।
अध्याय 8 — स्क्रीनक गोहि
स्क्रीन ओहि गोहिक नव मुँह थीक, जे देह नहि, मन चिबाबै छै, आ चिबा कऽ हँसैत रहै छै।
अध्याय 9 — देहक बाजार
देह बिकाइ छै ओहि हाटमे जतय मोल लगबैबला अपन मुँह नुकाबै छै, आ खरीददार स्क्रीनक पाछाँ बैसल रहै छै।
अध्याय 10 — निजताक ब्लैकमेल
निजता बेचल नहि जाइ छै, छीनल जाइ छै; आ जे छीनै छै, ओ सभसँ पहिने अपन नाम मेटा लै छै।
अध्याय 11 — धनक कारी नदी
धनक नदी कारी होइ छै, ओहिमे ने माछ रहै छै ने मनुक्ख, खाली डुबल लोकक चप्पल बहैत रहै छै।
अध्याय 12 — डार्क-जालपर नारिकेल पात
डार्क-जालपर नारिकेलक पात तैरै छै, ओकर नस-नसमे गामक नाम लिखल, मुदा पढ़निहार दूर परदेस बैसल।
अध्याय 13 — सीलबन्द आवरण
सीलबन्द आवरणमे सत्य नहि, सत्यक लहाश राखल रहै छै, आ मोहर ओहि लहाशक पहरुआ बनि बैसल रहै छै।
अध्याय 14 — घर घुरबाक रस्ता
घर घुरबाक रस्ता ओ नहि जनैत जे नाम बिसरि गेल, कारण रस्ता नामकेँ चिन्है छै, पएरकेँ नहि।
अध्याय 15 — नामक जल
नामक जल ओहने थीक— ऊपरसँ शान्त, तरि-तरि भँवर, आ भँवरक भीतर एकटा डुबल हाथ इशारा करैत।
अध्याय 16 — चन्ना गाछीक अदालत
चन्ना गाछीक अदालतमे जज नहि, गवाह बैसै छै; आ फैसला ओतय लिखल जाइ छै जतय कागच नहि रहै छै।
अध्याय 17 — जीतक शोक
जीतक शोक ओकरे होइ छै जे लाश गनि कऽ जितल, कारण ओहन जीतमे हरेक अंक एकटा घरक चूल्हि बुझायल रहै छै।
अध्याय 18 — खाली अदालत
खाली अदालत सभसँ भरल होइ छै, ओतय कुर्सी खाली, मुदा हवा गवाहीसँ ठसाठस भरल रहै छै।
अध्याय 19 — नामक अभिलेख
नामक अभिलेख ओ पोथी थीक जे आगिमे नहि जरै छै, कारण ओकर अक्षर पानिक, आ पानि आगिकेँ चिन्है छै।
अध्याय 20 — स्क्रीनक विरुद्ध पाठशाला
स्क्रीनक विरुद्ध पाठशाला ओतय खुजै छै जतय बच्चा माटि छूबि कऽ अक्षर सिखै छै, परदा छूबि कऽ नहि।
अध्याय 21 — निजताक शपथ
निजताक शपथ ओ नहि लऽ सकै छै जे दोसरक नाम बेचि चुकल, कारण शपथ सेहो एकटा नाम मँगै छै।
अध्याय 22 — हार्वर्डक दोसर भाषण
हार्वर्डक दोसर भाषणमे शब्द चिक्कन, मुदा ओहि शब्दक तरि गामक डुबल मजदूरक चप्पल फँसल रहल।
अध्याय 23 — बटुकनाथक खोज
बटुकनाथक खोज ओहि अन्हारमे शुरू भेल जतय दीप नहि, खाली पुरान कागचक गन्ध बाट देखबैत छल।
अध्याय 24 — उपन्यास फेर शुरू
उपन्यास फेर ओतहिसँ शुरू होइ छै जतय लेखक थाकि कऽ रुकल, मुदा पात्र सभ सुतबे ने केलक।
अध्याय 25 — मोन टांगल
मोन टांगल रहल ओहि खुँटीपर जतय कोनो तस्वीर नहि, खाली एकटा कील आ ओकर छाया लटकल छल।
अध्याय 26 — बटुकनाथ हरिहरनक यात्रा
बटुकनाथ हरिहरनक यात्रा गाछसँ शहर, शहरसँ स्क्रीन, आ स्क्रीनसँ घुरि कऽ ओहि ठूँठ धरि पहुँचल।
अध्याय 27 — चन्द्रपाल बत्राक स्क्रीन
चन्द्रपाल बत्राक स्क्रीनमे सय गोट चेहरा, मुदा ओकर अपन चेहरा कतहु ने, खाली परछाहीं टिमटिमाइत।
अध्याय 28 — राघव सिग्नलक चुप्पी
राघव सिग्नलक चुप्पी सभसँ ठोर बाजल, कारण जे संकेत बेचै छै ओ शब्दसँ बेसी मौनसँ डरै छै।
अध्याय 29 — लाउ किन-हंगक सपना
लाउ किन-हंगक सपनामे समुद्र पार करैत नाम, आ ओहि नामक देह गढ़ नारिकेलक पोखरिमे डुबल रहल।
अध्याय 30 — धूर्त सभक भीतरक अदालत
धूर्त सभक भीतरो एकटा अदालत होइ छै, जे राति-राति बैसै छै, मुदा फैसला सुनि ओ कानमे रुई दऽ लै छै।
अध्याय 31 — हारल लोक सभक काज
हारल लोक सभक काज जीतल लोकसँ पैघ होइ छै, कारण ओ हारि कऽ सेहो दोसरक नाम उठेने रहै छै।
खण्ड द्वितीय — श्वासखण्ड
अध्याय 32 — तेसर कबड्डी
तेसर कबड्डीमे भूत नहि, जीबित खेलाड़ी उतरल, आ ओकर पाला ओहि पार छल जतय नदी नाम गनैत बहै छल।
अध्याय 33 — चौठ साँस
चौठ साँस ओ थीक जे देह छोड़ि चुकल, मुदा गाछक पातमे अटकल, आ हवा ओकरा हरेक भोर दोहराबै छै।
अध्याय 34 — पाँचम साँस
पाँचम साँसमे नाम नहि, खाली एकटा हकमी रहल, आ ओहि हकमीकेँ पोखरि आइयो अपन तरि सुनै छै।
अध्याय 35 — छठम साँस
छठम साँस ओहि बच्चाक छल जे रजिस्टरमे अट्ठाइस बरख, मुदा माटिमे आठ बरखक पएर छोड़ि गेल।
अध्याय 36 — सातम साँस
सातम साँस गिनल गेल मुदा गनिनिहार बिसरि गेल, आ बिसरल अंक भँवर भऽ कऽ घुरि अबैत रहल।
अध्याय 37 — आठम साँस
आठम साँसक मोल लगल विदेशी दफ्तरमे, मुदा ओकर पसेना गढ़ नारिकेलक पोखरिमे ढरकल रहल।
अध्याय 38 — नवम साँस
नवम साँस ओतय रुकल जतय हेलमेट भीतरसँ बाजल, आ बाहरसँ ककरो किछु नहि सुनाइ देल।
अध्याय 39 — दसम साँस
दसम साँस फाइलमे ‘बरामद नहि’ लिखल गेल, मुदा नदी ओकरा बरामद कऽ अपन कातमे राखि लेलक।
अध्याय 40 — एगारहम साँस
एगारहम साँस अदालतक तारीखमे हेरायल, आ तारीख ओहि साँसकेँ गोहि जकाँ चिबा कऽ निगलि गेल।
अध्याय 41 — बारहम साँस
बारहम साँस ओहि माइक छल जे राति-राति देहरी पर पानि टपकैत देखलनि, मुदा दरबज्जा खोलिते केओ नहि।
अध्याय 42 — तेरहम साँस
तेरहम साँस ओहि पाँवक निशान छोड़ि गेल जे एड़ी बिनु छल, कारण एड़ी गोहि लऽ चुकल छल।
अध्याय 43 — चौदहम साँस
चौदहम साँस वकीलक कोटमे आयल, पएर गादसँ सनल, आ मुँहसँ खाली एकटा शब्द— ‘तारीख’— खसल।
अध्याय 44 — पन्द्रहम साँस
पन्द्रहम साँस फकीरा साहनीक डाँड़ जकाँ चरमरायल, आँखिमे बालु, मुदा स्मृति नदी जकाँ टटका।
अध्याय 45 — सोलहम साँस
सोलहम साँस ओहि कहबीमे जीबित रहल जे कहै छै— जे गाम इतिहास बिसरल, ओतुक्का गाछ फल देब बन्द कएलक।
अध्याय 46 — सत्रहम साँस
सत्रहम साँस ओहि शिलाकेँ कोसैत रहल जतय नाम नहि लिखायल, मुदा शिला सेहो मौनेँ पछताइत छल।
अध्याय 47 — अठारहम साँस
अठारहम साँस ओहि सूचनादाताक छल जकर चेहरा कतहु दर्ज नहि, मुदा सत्य पाथरो काटि बहरायल।
अध्याय 48 — उन्नैसम साँस
उन्नैसम साँसमे डर आ सत्य दुनू साँस लेलक, आ जे बजल, ओकर घर सुड्डाह, तैयो ओ बजिते रहल।
अध्याय 49 — बीसम साँस
बीसम साँसक बाद देह बिसरल जाइ छै, मुदा नाम ओहि साँसक ऊपर एकटा हरियर बिंदु भऽ उठै छै।
अध्याय 50 — एक्कैसम साँस : देहक बादक नाम
एक्कैसम साँस देहक बादक नाम थीक— जे देह बिनु जीबै छै, आ ओकरे चन्ना गाछी अपन खेलमे बजाबै छै।
अध्याय 51 — बाइसहम साँस : साक्षीक भार
बाइसहम साँस साक्षीक भार थीक— जे देखलक से ढोबय पड़त, चाहे ओ भार ओकर आत्माकेँ झुका दिअय।
अध्याय 52 — तेइसहम साँस : अगिला आवाज
तेइसहम साँस अगिला आवाज थीक— एक डुबल मुँह चुप भेल, मुदा ओकर ठाम दोसर मुँह बाजय ठाढ़।
अध्याय 53 — कटानक बादक बिहान
कटानक बादक बिहान ओतय उगै छै जतय ठूँठ ठाढ़, कारण उगबाक हक गाछकेँ नहि, भोरकेँ रहै छै।
खण्ड तृतीय — नामखण्ड
अध्याय 54 — ठूँठक चारू कात
ठूँठक चारू कात माटि चुप, मुदा जरि भीतर स्मृति टटका, कारण गाछ कटि सकै छै, जरि नहि।
अध्याय 55 — नगरपालिकाक पीयर सूचना-पत्र
नगरपालिकाक पीयर कागच पर सूचना छपल, मुदा ओहि पीयरमे डुबल लोकक नाम कतहु नहि छपल।
अध्याय 56 — स्मृतिक पहिल नक्शा
स्मृतिक पहिल नक्शा माटि पर खींचल गेल, आ ओहि नक्शामे हरेक डुबल मुँह एकटा गाम भऽ उठल।
अध्याय 57 — गंगेशक प्रश्न
गंगेशक प्रश्न ओतय उठल जतय प्रमाण चुप, अनुमान अन्हार, आ सत्य खाली एकटा बीजमे नुकायल।
अध्याय 58 — चन्द्रपालक स्मारक-अनुप्रयोग
चन्द्रपालक स्मारक-अनुप्रयोगमे मुर्दाक नाम बिकाइ छल, आ बेचनिहार जीबित लोकक स्मृति चोरबैत छल।
अध्याय 59 — राघव सिग्नलक नव कोड
राघव सिग्नलक नव कोड ओहि संकेतकेँ नुकाबैत छल, मुदा संकेत गाछक पात जकाँ बहरा-बहरा अबैत छल।
अध्याय 60 — सत्यव्रत मेहताक दोसर मौन
सत्यव्रत मेहताक दोसर मौन पहिल मौनसँ भारी, कारण दोसर बेर चुप रहब अपराधक हस्ताक्षर थीक।
अध्याय 61 — पहिल नाम-उत्सव
पहिल नाम-उत्सवमे शिला नहि, स्वर बजल, आ हरेक डुबल नाम ओहि स्वरमे फेरसँ साँस लेलक।
अध्याय 62 — ठूँठमे हरियर बिंदु
ठूँठमे हरियर बिंदु फुटल— बीज जे पाथर तरि दबल छल, से एक दिन फुटिते अछि, सत्य जकाँ।
अध्याय 63 — गढ़ नारिकेल विरासत-परियोजना
गढ़ नारिकेल विरासत-परियोजना ओहि स्मृतिकेँ बचबैत छल जकरा बजार बेचय आ धूर्त मेटाबय चाहैत छल।
अध्याय 64 — स्मृति पर निविदा
स्मृति पर निविदा खुजल— जे स्मृति बेचय चाहलक, ओकर अपन नाम सभसँ पहिने निविदामे बिकाइल।
अध्याय 65 — ब्रूमक पुनरागमन
ब्रूमक पुनरागमन ओहि मुस्कीसँ भेल जे बच्चाक माथ सहलाबैत छल, मुदा माथ तरि नाम मेटायल छल।
अध्याय 66 — हार्वर्डक शोध-दल
हार्वर्डक शोध-दल आयल नाप-जोख लऽ, मुदा गढ़ नारिकेलक दुख कोनो रूलरमे नहि अँटल।
अध्याय 67 — मीरा आ दृष्टिक अधिकार
मीरा आ दृष्टिक अधिकार ओतय भिड़ल जतय देखब अपराध, आ नहि देखब ओहिसँ पैघ अपराध बनल।
अध्याय 68 — देविका बनाम श्रद्धांजलि-अनुप्रयोग
देविका बनाम श्रद्धांजलि-अनुप्रयोग— जीबित दुख आ नकली शोकक बीच, अदालत नकली शोककेँ चिन्हलक।
अध्याय 69 — नामक चोरी
नामक चोरी सभसँ अन्हरिया चोरी थीक, कारण ओहिमे देह नहि, मनुक्खक पूरा अस्तित्व चोरायल जाइ छै।
अध्याय 70 — पनिडुब्बीक गवाही
पनिडुब्बीक गवाही पानि तरिसँ आयल— ओकर झोँटासँ पोखरिक नहि, गंगाक गन्ध झरल, आ सत्य महकल।
अध्याय 71 — नकली भूतक जुलूस
नकली भूतक जुलूस सजल, मुदा बूढ़बा भूत चिन्हि लेलक— जे साँस बिनु नाचय, ओ भूत नहि, धन्धा थीक।
अध्याय 72 — चन्ना गाछीक हँसी
चन्ना गाछीक हँसी ओहि राति गूँजल जखन झूठक मुखौटा खसल, आ सत्य अपन उघार मुँहसँ हँसल।
अध्याय 73 — बटुकनाथक स्वप्न-दरबार
बटुकनाथक स्वप्न-दरबारमे कुर्सी धुआँक, फैसला धुआँक, मुदा गवाह सभ माटिक— ठोस आ अटल।
अध्याय 74 — चन्द्रपालक पहिल स्वीकार
चन्द्रपालक पहिल स्वीकार ठोरसँ नहि, आँखिसँ खसल, कारण स्वीकार ओहन सत्य थीक जे लाजसँ टपकै छै।
अध्याय 75 — राघव सिग्नलक बिना नेटवर्क
राघव सिग्नलक बिना नेटवर्क ओ नांगट भऽ गेल, कारण ओकर पूरा देह संकेतक छल, आत्मा कतहु नहि।
अध्याय 76 — लाउ किन-हंगक भारत-यात्रा
लाउ किन-हंगक भारत-यात्रा ओहि सपनाक पाछाँ छल जे समुद्र पार नाम बहा कऽ अनने छल।
अध्याय 77 — हवाई अड्डापर गोहि
हवाई अड्डापर गोहि नव रूपमे भेटल— पासपोर्ट, वीजा, मुदा ओकर पेटमे ओही गामक डुबल नाम।
अध्याय 78 — सत्यव्रत आ लाउक मौन-संवाद
सत्यव्रत आ लाउक मौन-संवादमे शब्द नहि चलल, मुदा दुनूक चुप्पी एक-दोसराक अपराध पढ़ि लेलक।
अध्याय 79 — ब्रूमक दान-पत्र
ब्रूमक दान-पत्र ओहि हाथसँ लिखल जे पहिने नाम मेटौने छल, आ दान ओहि मेटायल नामक मोल छल।
अध्याय 80 — हरिहरनक संतान
हरिहरनक संतान ओहि गाँठकेँ भेटलक जे पुरखा बान्हि गेल छलाह, आ गाँठ खोलब ओकर भार बनल।
अध्याय 81 — बत्राक अधूरा नाम
बत्राक अधूरा नाम ओहि रजिस्टरमे आधा लिखल रहल, आ आधा नाम पूरा झूठसँ बेसी खतरनाक होइ छै।
अध्याय 82 — अंदरक गज-ग्राह
अंदरक गज-ग्राह ओहि भीतर लड़ल जतय बच्चाक हाथ फँसल, आ बच्चा बजल— छोड़ू, हमर नाम लिखू।
अध्याय 83 — नारिकेल पात पाठशाला
नारिकेल पात पाठशाला ओतय खुजल जतय परदा नहि, पात पर अक्षर, आ माटिमे पहिल पाठ रोपल गेल।
अध्याय 84 — पहिल पाठ : उपस्थित
पहिल पाठ ‘उपस्थित’ थीक— जे बजल ‘हम छी’, ओकर नाम ओहि दिनसँ केओ मेटा नहि सकल।
अध्याय 85 — स्त्री सभक राति-सभा
स्त्री सभक राति-सभामे बा बजली— जे साँस हम राति-राति सुनै छी, से कोनो डुबल आदमक हकमी थीक।
अध्याय 86 — मजदूरक पाँव
मजदूरक पाँव ओहि निशानमे जीबल जे एड़ी बिनु छल, कारण एड़ी पुल बनबैत-बनबैत पानिमे रहि गेल।
अध्याय 87 — स्क्रीनक उपवास
स्क्रीनक उपवास ओ राखलक जे परदा छोड़ि माटि छूलक, आ माटि छुइते ओकर भूख सत्यसँ भरल।
अध्याय 88 — ईराक पत्र विदेशक बच्चा सभकेँ
ईराक पत्र विदेशक बच्चा सभकेँ— तोहर खेलौना हमर गामक डुबल हाथसँ बनल, ताहि पर ध्यान दिहऽ।
अध्याय 89 — सत्यव्रतक जन-सुनवाई
सत्यव्रतक जन-सुनवाई ओतय भेल जतय जज नहि, गाम बैसल, आ गामक फैसला कोनो ऊपरी अदालत नहि पलटि सकल।
अध्याय 90 — नामक संविधान
नामक संविधान ओहि माटि पर लिखल गेल जाहिमे हरेक डुबल मुँहक एकटा अनुच्छेद छल— मेटायब अपराध।
अध्याय 91 — धूर्त सभक अनुपस्थिति
धूर्त सभक अनुपस्थिति ओहि दिन देखाइ देल जहिया गाम हाजिरी बजौलक, आ धूर्त जवाब देबय नहि आयल।
अध्याय 92 — ठूँठक छाँह
ठूँठक छाँह छोट, मुदा सत्यक, आ सत्यक छोट छाँह झूठक नमहर अन्हारसँ बेसी भरोसा दै छै।
अध्याय 93 — पुनः बाढ़ि
पुनः बाढ़ि आयल— कमला फेर दहिनसँ बाम, गाम फेर काँपल, मुदा एहि बेर नाम पानिमे नहि डुबल।
अध्याय 94 — गोहि सभक वापसी
गोहि सभक वापसी भेल, मुदा एहि बेर गाम तैयार छल, कारण गामकेँ आब अपन हरेक नाम मोन छल।
अध्याय 95 — लाउ किन-हंगक अंतिम सौदा
लाउ किन-हंगक अंतिम सौदा टुटल, कारण जे नाम बेचय चाहलक, ओहि नामक मालिक आब जीबित ठाढ़ छल।
अध्याय 96 — बटुकनाथक देर-सँ-आयल क्षमा
बटुकनाथक देर-सँ-आयल क्षमा ओहि गाँठकेँ ने खोलि सकल जे पुरखा बान्हने, मुदा कानय तँ देलक।
अध्याय 97 — चन्द्रपालक म्यूल अकाउण्ट
चन्द्रपालक म्यूल अकाउण्ट ओहि मुर्दाक नाम पर खुजल छल जे बाजि नहि सकल, मुदा गाम बाजि देलक।
अध्याय 98 — राघवक अंतिम संदेश
राघवक अंतिम संदेश बिना नेटवर्क पहुँचल— माटिक रस्ता, मुँहक स्वर, आ सत्य कोनो टावर नहि मँगै छै।
अध्याय 99 — सत्यव्रत मेहताक गवाही
सत्यव्रत मेहताक गवाही ओहि मौनकेँ तोड़लक जे दू बेर साधल छल, आ तेसर बेर ओ बाजिते रहल।
अध्याय 100 — गज, ग्राह, आ बच्चाक हाथ
गज, ग्राह, आ बच्चाक हाथ— गज थाकल, ग्राह छोड़लक, आ बच्चाक हाथ ऊपर उठल, नाम लऽ कऽ।
अध्याय 101 — अनाम ग्रहक आमन्त्रण
अनाम ग्रहक आमन्त्रण आयल— जतय नाम नहि, ओतय चलू, मुदा गढ़ नारिकेल अपन नाम संग लऽ चलल।
अध्याय 102 — ग्रहक बीच कबड्डी
ग्रहक बीच कबड्डी ओतहु ओही नियमसँ भेल— पाला पार करबाक हेतु एकटा नाम बचा कऽ घुरय पड़ल।
अध्याय 103 — अनाम ग्रह पर नाम-पाठ
अनाम ग्रह पर नाम-पाठ भेल, आ अनाम ग्रह नाम सुनिते अपन अनामी छोड़ि एकटा गाम बनय चाहलक।
खण्ड चतुर्थ — पहराखण्ड
अध्याय 104 — गढ़ नारिकेल फेर पृथ्वी चुनैत अछि
पृथ्वीक पहिल पहरा ओ थीक जे माटिकेँ जगा कऽ राखै छै, कारण सुतल माटि अपन डुबल नाम बिसरि जाइ छै।
अध्याय 105 — पृथ्वीक पहिल पहरा
दोसरा पहरा बीजक गवाही— बीज बाजल, हम पाथर तरि छलहुँ, मुदा हम फुटब, कारण फुटब हमर सत्य थीक।
अध्याय 106 — दोसरा पहरा : बीजक गवाही
तेसर पहरा बीजक चोरी देखलक— जे बीज चोरबय गेल, से अपन हाथमे माटि भरि कऽ घुरल, फसल नहि।
अध्याय 107 — तेसर पहरा : बीजक चोरी
चौठ पहरा माटिक मुँह खोललक— माटि बजली, हम हरेक डुबल देहक एड़ी अखनो धरि सम्हारने छी।
अध्याय 108 — चौठ पहरा : माटिक मुँह
पाँचम पहरा जलक स्मृति थीक— पानि किछु नहि बिसरै छै, ओ हरेक छपाक, हरेक भँवर मोन राखै छै।
अध्याय 109 — पाँचम पहरा : जलक स्मृति
छठम पहरा आगिक साक्षी— आगि नाम नहि जरबै छै, ओ खाली झूठक आवरण जरा कऽ सत्य उघार करै छै।
अध्याय 110 — छठम पहरा : आगिक साक्षी
सातम पहरा वायुक प्रश्न— हवा पुछलक, जे साँस रुकल, से कतय गेल? आ गाछ ओकर उत्तर बनल।
अध्याय 111 — सातम पहरा : वायुक प्रश्न
आठम पहरा आकाशक रिक्ति— आकाश खाली देखाइ छै, मुदा ओहि खालीमे हरेक उठल नाम टँगल रहै छै।
अध्याय 112 — आठम पहरा : आकाशक रिक्ति
नवम पहरा शब्दक देह थीक— शब्द बिनु देहक मुर्दा, आ देह बिनु शब्दक एकटा अधूरा साँस मात्र।
अध्याय 113 — नवम पहरा : शब्दक देह
दसम पहरा अर्थक आत्मा— शब्द शरीर, अर्थ प्राण, आ झूठ ओ थीक जे शब्द राखि अर्थ निकालि लै छै।
अध्याय 114 — दसम पहरा : अर्थक आत्मा
एगारहम पहरा कण्ठक पहरा— जे कण्ठ सत्य रोकि लेलक, ओ राति-राति अपने स्वरसँ घोंटायल रहल।
अध्याय 115 — एगारहम पहरा : कण्ठक पहरा
बारहम पहरा मौनक उत्तराधिकार— जे चुप रहल, ओकर चुप्पी बेटाकेँ भेटल, आ बेटा ओहि चुप्पी तोड़लक।
अध्याय 116 — बारहम पहरा : मौनक उत्तराधिकार
तेरहम पहरा स्मृतिक ऋण— जे गाम मोन राखलक, ओकरा पुरखा आशीष देलक; जे बिसरल, ओकरा गाछ शाप।
अध्याय 117 — तेरहम पहरा : स्मृतिक ऋण
चौदहम पहरा देहक अधिकार— जे देह डुबल, ओकरो अपन नामक हक रहल, आ हक मरलापर नहि मरै छै।
अध्याय 118 — चौदहम पहरा : देहक अधिकार
पन्द्रहम पहरा श्रमक देह— पुल जे हाथ बनौलक, ओहि हाथक पसेना सीमेण्टमे, मुदा नाम कतहु नहि।
अध्याय 119 — पन्द्रहम पहरा : श्रमक देह
सोलहम पहरा न्यायक देह— न्याय ओहि दिन देह पओलक जहिया गाम बजल, आ गामक स्वर ओकर प्राण बनल।
अध्याय 120 — सोलहम पहरा : न्यायक देह
सत्रहम पहरा जातिक पिंजरा— जे पिंजरा देह बान्हलक, से नाम बान्हि नहि सकल, कारण नाम मुक्त उड़ल।
अध्याय 121 — सत्रहम पहरा : जातिक पिंजरा
अठारहम पहरा गंगेशक मुक्ति— जे ने प्रमाणसँ बान्हल, ने अनुमानसँ, ओ सत्य ओकरा बीजमे भेटल।
अध्याय 122 — अठारहम पहरा : गंगेशक मुक्ति
उन्नैसम पहरा तत्त्वचिन्तामणिक पात— जे पात तर्कसँ लिखल, से माटिमे रोपिते फसल भऽ उठल।
अध्याय 123 — उन्नैसम पहरा : तत्त्वचिन्तामणिक पात
बीसम पहरा प्रमाणक अग्नि— प्रमाण ओहि आगिसँ तपल, आ जे झूठ छल, से ओहि आगिमे राख भऽ उड़ल।
अध्याय 124 — बीसम पहरा : प्रमाणक अग्नि
एक्कैसम पहरा निर्णयक धान— निर्णय ओतय फलल जतय अन्न उगल, कारण भूखल पेट सभसँ सच्चा न्यायाधीश।
अध्याय 125 — एक्कैसम पहरा : निर्णयक धान
बाइसहम पहरा अन्नक न्याय— जे थारी बँटलक, से न्याय बँटलक; जे भूख देखि चुप रहल, से अपराधी।
अध्याय 126 — बाइसहम पहरा : अन्नक न्याय
तेइसहम पहरा भूखक नाम— भूखक अपन कोनो जाति नहि, ओ हरेक खाली पेटमे एक्के नाम बाजै छै।
अध्याय 127 — तेइसहम पहरा : भूखक नाम
चौबीसम पहरा प्यासक नाम— प्यास पानि मँगै छै, मुदा जे पानि डुबा कऽ मारलक, से प्यासक उत्तर नहि।
अध्याय 128 — चौबीसम पहरा : प्यासक नाम
पच्चीसम पहरा नूनक शपथ— नून जकाँ साधारण सत्य, जे थारीमे नहि, से पूरा भोजन फीका कऽ दै छै।
अध्याय 129 — पच्चीसम पहरा : नूनक शपथ
छब्बीसम पहरा स्वादक न्याय— जे साझा थारीक स्वाद चिखलक, से जातिक पिंजरा अपने मुँहसँ तोड़लक।
अध्याय 130 — छब्बीसम पहरा : स्वादक न्याय
सताइसहम पहरा साझा थारी— एक थारीमे जखन सभ हाथ अबैत, तखन गोहि सेहो ओहि ठाम नहि पैसि सकल।
अध्याय 131 — सताइसहम पहरा : साझा थारी
अट्ठाइसहम पहरा रसोइक गणराज्य— जतय चूल्हि साझा, ओतय न्याय साझा, आ ओतय कोनो नाम नहि डुबल।
खण्ड पञ्चम — न्यायखण्ड
अध्याय 132 — अट्ठाइसहम पहरा : रसोइक गणराज्य
उनतीसम पहरा विदेह नाट्य उत्सवक बुलाहट— गाम बजौलक, आउ, अपन कथा अपने मुँहसँ मंचपर कहू।
अध्याय 133 — उनतीसम पहरा : विदेह नाट्य उत्सवक बुलाहट
तिसम पहरा कबड्डी खेलनिहार सभक नाट्य-पाठ— जे भूत खेलमे डुबल, से आब मंच पर अपन नाम पढ़लक।
अध्याय 134 — तिसम पहरा : कबड्डी खेलनिहार सभक नाट्य-पाठ
एकतीसम पहरा विदेह नाट्य उत्सवक मंचन— परदा उठल, आ परदाक पाछाँसँ डुबल लोकक स्वर बहरायल।
अध्याय 135 — एकतीसम पहरा : विदेह नाट्य उत्सवक मंचन
बत्तीसहम पहरा तालीक बादक सन्नाटा— ताली थमल, मुदा सन्नाटामे हरेक दर्शकक भीतर एकटा प्रश्न जागल।
अध्याय 136 — बत्तीसहम पहरा : तालीक बादक सन्नाटा
तेतीसम पहरा दर्शकक गवाही— जे देखलक, से आब साक्षी, आ साक्षी बनब ओहि राति सभक हक बनल।
अध्याय 137 — तेतीसम पहरा : दर्शकक गवाही
चौतीसम पहरा मंचसँ बाहरक जुलूस— नाटक मंच पर ने रुकल, ओ बाटपर उतरि कऽ गामक रंगमंच बनल।
अध्याय 138 — चौतीसम पहरा : मंचसँ बाहरक जुलूस
पैंतीसम पहरा बाटक रंगमंच— बाट अपने मंच बनल, आ हरेक डेग पर एकटा डुबल नाम ठाढ़ भऽ बाजल।
अध्याय 139 — पैंतीसम पहरा : बाटक रंगमंच
छत्तीसहम पहरा बरामदाक फैसला— जे फैसला अदालतमे नहि भेल, से गामक बरामदामे माटि पर लिखायल।
अध्याय 140 — पैंतीसम पहरा : बाटक रंगमंच
सैंतीसहम पहरा रेकर्ड-घरक अन्हार— जतय कागच राखल, ओतय अन्हार बेसी, कारण सत्य ओतय बन्द कएल गेल।
अध्याय 141 — छत्तीसहम पहरा : बरामदाक फैसला
अड़तीसहम पहरा रद्दी बोराक गवाही— फेकल बोरामे ओ कागच भेटल जे डुबल नामकेँ जीबित प्रमाणित कएलक।
अध्याय 142 — सैंतीसहम पहरा : रेकर्ड-घरक अन्हार
चालीसहम पहरा नामक यात्रा— एकटा नाम गामसँ शहर, शहरसँ अदालत, आ अदालतसँ घुरि माटि धरि आयल।
अध्याय 143 — अड़तीसहम पहरा : रद्दी बोराक गवाही
एकचालीसहम पहरा डरक पहिल दरार— जे डर सभकेँ चुप रखने छल, ओहिमे पहिल दरार एकटा स्त्रीक स्वरसँ पड़ल।
अध्याय 144 — चालीसहम पहरा : नामक यात्रा
तैंतालीसहम पहरा घर-घरक दस्तक— जाँच घर-घर पहुँचल, आ हरेक दरबज्जा पर एकटा नुकायल सत्य भेटल।
अध्याय 145 — एकचालीसहम पहरा : डरक पहिल दरार
चवालीसहम पहरा मिलावटक पहिचान— जे कागच साँचसँ मिलल, ओहिमे मिलावट छल, आ मिलावट अपराध बाजल।
अध्याय 146 — तैंतालीसहम पहरा : घर-घरक दस्तक
पैंतालीसहम पहरा जालक नक्शा— एकटा जाल पसरल छल, आ नक्शा बनिते हरेक धागा एकटा हाथ धरि पहुँचल।
अध्याय 147 — चवालीसहम पहरा : मिलावटक पहिचान
छियालीसहम पहरा मुहरक छाया— मुहर ने बाजल, मुदा ओकर छाया ओहि हाथ धरि गेल जे मुहर चलौने छल।
अध्याय 148 — पैंतालीसहम पहरा : जालक नक्शा
सैंतालीसहम पहरा मुहर चलौनिहार हाथ— हाथ भेटल, मुदा हाथक पाछाँ आदेश, आ आदेशक पाछाँ नाम छल।
अध्याय 149 — छियालीसहम पहरा : मुहरक छाया
अड़तालीसहम पहरा आदेशक स्रोत— जे आदेश ऊपरसँ आयल, ओकर स्रोत ओहि कुर्सी धरि गेल जे धुआँक छल।
अध्याय 150 — सैंतालीसहम पहरा : मुहर चलौनिहार हाथ
उनचासहम पहरा संकेतक पाछाँ नाम— हरेक संकेतक पाछाँ एकटा नाम नुकायल, आ नाम उघरिते सत्य ठाढ़ भेल।
अध्याय 151 — अड़तालीसहम पहरा : आदेशक स्रोत
पचासहम पहरा बाबाक वचन— जे बाबा वचन देने छल, से वचन ओहि सेवाक खातामे झूठ भऽ दर्ज भेल छल।
अध्याय 152 — उनचासहम पहरा : संकेतक पाछाँ नाम
इकावनहम पहरा सेवाक खाता— जे खाता सेवाक नामपर खुजल, ओहिमे सेवा नहि, डुबल नामक मोल लिखल छल।
अध्याय 153 — पचासहम पहरा : बाबाक वचन
बावनहम पहरा दानक ऋण— जे दान देखाओल गेल, से दान नहि, ऋण छल, आ ऋण डुबल लोकक नामपर चढ़ल।
अध्याय 154 — इकावनहम पहरा : सेवाक खाता
तिरपनहम पहरा लोहेक संदूक— संदूक बन्द छल, मुदा भीतर ओ कागच जे हरेक झूठक मुहर सम्हारने छल।
अध्याय 155 — बावनहम पहरा : दानक ऋण
चौवनहम पहरा सहमति-कापीक मिलान— जे सहमति देखाओल, ओहि कापीमे मृतकक हस्ताक्षर मिलल, सत्यक नहि।
अध्याय 156 — तिरपनहम पहरा : लोहेक संदूक
पचपनहम पहरा मृतकक सहमति— मुर्दा सहमति नहि दऽ सकै छै, मुदा धूर्त मुर्दाक नामपर सहमति गढ़ि लेलक।
अध्याय 157 — चौवनहम पहरा : सहमति-कापीक मिलान
छप्पनहम पहरा गोदामक छाया— गोदाममे माल नहि, छाया राखल छल, आ ओहि छायामे डुबल लोकक नाम बन्द।
अध्याय 158 — पचपनहम पहरा : मृतकक सहमति
सन्तावनहम पहरा फोनक कैद— एकटा फोनमे सय गोट आवाज कैद, आ हरेक आवाज एकटा मँगनीक मुँह छल।
अध्याय 159 — छप्पनहम पहरा : गोदामक छाया
अठावनहम पहरा आवाजक मोहर— जे आवाज रेकर्ड भेल, से मोहर बनल, आ मोहर सत्यकेँ अदालत धरि अनलक।
अध्याय 160 — सन्तावनहम पहरा : फोनक कैद
उनसठहम पहरा हटायल कागजक निशान— जे कागच हटायल गेल, ओकर निशान रहि गेल, आ निशान बाजल।
अध्याय 161 — अठावनहम पहरा : आवाजक मोहर
साठिम पहरा चन्द्रपालक छायाक पेट— छायाक पेटमे ओ सभ नाम भरल जे चन्द्रपाल मेटाबय चाहैत छल।
खण्ड षष्ठ — पंजीखण्ड
अध्याय 162 — उनसठहम पहरा : हटायल कागजक निशान
एकसठिम पहरा छायाक देह— छाया देह पओलक जखन गाम ओकरा नाम देलक, आ नाम बिनु छाया अधूरा रहल।
अध्याय 163 — साठिम पहरा : चन्द्रपालक छायाक पेट
बासठिम पहरा इमली घाटक कोठार— घाटक कोठारमे ओ अन्न नहि, डुबल लोकक नामक बोरा राखल छल।
अध्याय 164 — एकसठिम पहरा : छायाक देह
तिरसठिम पहरा नदी पारक आवाज— नदी पारसँ आवाज आयल, आ ओ आवाज ओही गामक छल जे डुबि गेल छल।
अध्याय 165 — बासठिम पहरा : इमली घाटक कोठार
चौंसठिम पहरा शहरक गला— शहरक गलामे गामक नाम अँटकल, आ अँटकल नाम शहरकेँ बजय नहि देलक।
अध्याय 166 — तिरसठिम पहरा : नदी पारक आवाज
पैंसठिम पहरा चन्द्र दूक दरबज्जा— दू दरबज्जाक पाछाँ एक्के धन्धा, आ धन्धाक पेटमे डुबल नाम।
अध्याय 167 — चौंसठिम पहरा : शहरक गला
छियासठिम पहरा चन्द्र एकक खोल— खोल उतरल, आ खोलक तरि ओ चेहरा भेटल जे नाम बेचैत छल।
अध्याय 168 — पैंसठिम पहरा : चन्द्र दूक दरबज्जा
सड़सठिम पहरा चन्ना गाछीक अदृश्य अदालत— जे अदालत आँखिसँ नहि देखाइ, ओ हरेक झूठ चिन्हि लै छै।
अध्याय 169 — छियासठिम पहरा : चन्द्र एकक खोल
अड़सठिम पहरा गाँठक पढ़नाइ— जे गाँठ पुरखा बान्हने, ओकर पढ़नाइ सीखब हरेक संतानक भार थीक।
अध्याय 170 — सड़सठिम पहरा : चन्ना गाछीक अदृश्य अदालत
उनहत्तरिम पहरा पंजीक पहरा— पंजी ओ पहरुआ थीक जे हरेक नाम, हरेक वंश, हरेक सत्य मोन राखै छै।
अध्याय 171 — अड़सठिम पहरा : गाँठक पढ़नाइ
सत्तरिम पहरा अदृश्य अदालतक चौखट— चौखट पर जे डेग देलक सत्यक संग, ओकरे भीतर प्रवेश भेटल।
अध्याय 172 — उनहत्तरिम पहरा : पंजीक पहरा
एकहत्तरिम पहरा मुहरबाहकक नाम— जे मुहर ढोलक, ओकर अपन नाम मुहरक तरि नुकायल, मुदा उघरल।
अध्याय 173 — सत्तरिम पहरा : अदृश्य अदालतक चौखट
बहत्तरिम पहरा सेवा-समारोहक अन्हार— जे समारोह इजोरमे सजल, ओकर पाछाँ अन्हारमे सौदा भेल।
अध्याय 174 — एकहत्तरिम पहरा : मुहरबाहकक नाम
तिहत्तरिम पहरा घर-घरक कागज— हरेक घरमे एकटा कागज नुकायल छल, आ ओहि कागजमे एकटा सत्य।
अध्याय 175 — बहत्तरिम पहरा : सेवा-समारोहक अन्हार
चौहत्तरिम पहरा ऊपरक कोठरी— ऊपरक कोठरीमे ओ बैसल जे तरक हरेक नाम बेचैत-बेचैत धनी भेल।
अध्याय 176 — तिहत्तरिम पहरा : घर-घरक कागज
पचहत्तरिम पहरा मुहरक पगचिन्ह— मुहर जे-जे ठाम पड़ल, ओकर पगचिन्ह ओहि हाथ धरि गेल जे दोषी छल।
अध्याय 177 — चौहत्तरिम पहरा : ऊपरक कोठरी
छिहत्तरिम पहरा शहरक खाता— शहरक खातामे गामक नाम कर्ज भऽ चढ़ल, आ कर्ज मुर्दाक माथ पर लदल।
अध्याय 178 — पचहत्तरिम पहरा : मुहरक पगचिन्ह
सतहत्तरिम पहरा सिमक छाया— एकटा सिम, सय गोट नाम, आ हरेक नामक पाछाँ एकटा डुबल मुँह।
अध्याय 179 — छिहत्तरिम पहरा : शहरक खाता
अठहत्तरिम पहरा हरिहर सेवा केंद्रक दरबाजा— सेवाक नामपर खुजल दरबाजाक पाछाँ धन्धाक अन्हार।
अध्याय 180 — सतहत्तरिम पहरा : सिमक छाया
उनासीम पहरा फोनक भीतरक चेहरा— फोनक भीतर ओ चेहरा कैद छल जे गामक नाम बेचि चुकल छल।
अध्याय 181 — अठहत्तरिम पहरा : हरिहर सेवा केंद्रक दरबाजा
असीम पहरा आवाजक नकाब— आवाज नकाब पहिरने छल, मुदा गाम ओहि नकाबक तरिक स्वर चिन्हि लेलक।
अध्याय 182 — उनासीम पहरा : फोनक भीतरक चेहरा
एकासीम पहरा मास्टरक कमरा— कमरामे ओ बैसल जे पूरा जालकेँ चलबैत छल, मुदा हाथ कतहु नहि लगबैत।
अध्याय 183 — असीम पहरा : आवाजक नकाब
बयासीम पहरा मधवेशक असली नाम— जे नाम सय मुखौटा तरि नुकायल छल, से एक राति उघरल आ काँपल।
अध्याय 184 — एकासीम पहरा : मास्टरक कमरा
तिरासीम पहरा छत्ताक भीतरक रानी— छत्ता टुटल जखन रानी देखाइ देल, आ रानी डुबल नामक मोल खाइत छल।
अध्याय 185 — बयासीम पहरा : मधवेशक असली नाम
चौरासीम पहरा महेश्वरक मुहर— जे मुहर सभसँ ऊपर छल, ओकरो छाया ओही माटि धरि गेल जतय नाम डुबल।
अध्याय 186 — तिरासीम पहरा : छत्ताक भीतरक रानी
पचासीम पहरा लोहेक पेटी— पेटी खुजल, आ भीतरसँ ओ नील पंजी भेटल जे हरेक झूठ दर्ज कएने छल।
अध्याय 187 — चौरासीम पहरा : महेश्वरक मुहर
छियासीम पहरा नील पंजी— नील पंजीमे लिखल छल हरेक डुबल नाम, हरेक बेचनिहार, हरेक मौनक मोल।
अध्याय 188 — पचासीम पहरा : लोहेक पेटी
सतासीम पहरा ध्रुवेशक कुर्सी— कुर्सी जे अटल बुझाइ छल, ओ डुबल नामक भारसँ एक राति डोलि गेल।
अध्याय 189 — छियासीम पहरा : नील पंजी
अठासीम पहरा बन्द रेकॉर्डरक स्वर— बन्द रेकॉर्डरो बाजल, कारण सत्यकेँ बन्द करब सत्यकेँ मारब नहि।
अध्याय 190 — सतासीम पहरा : ध्रुवेशक कुर्सी
नवासीम पहरा आवाजक चेहरा— आवाज जखन चेहरा पओलक, तखन ओ चेहरा गामक सोझाँ खाली ठाढ़ रहि गेल।
अध्याय 191 — अठासीम पहरा : बन्द रेकॉर्डरक स्वर
नब्बैम पहरा साँसक समन— जे साँस रुकल छल, ओ आब समन भऽ कऽ हरेक दोषीक दरबज्जा खटखटौलक।
अध्याय 192 — नवासीम पहरा : आवाजक चेहरा
एकानब्बैम पहरा रोकल खाता— जे खाता रोकल गेल, ओहिमे ओ धन फँसल जे डुबल नामसँ कमायल छल।
अध्याय 193 — नब्बैम पहरा : साँसक समन
बानब्बैम पहरा जलसमाधिक अर्थ— जलसमाधि मृत्यु नहि, ओ ओहि नामक प्रतीक्षा थीक जे फेर ऊपर उठत।
अध्याय 194 — एकानब्बैम पहरा : रोकल खाता
तिरानब्बैम पहरा ऊपर उठल नाम— जे नाम पानि तरि डुबल छल, से आब गामक मुँहसँ ऊपर उठि बाजल।
अध्याय 195 — बानब्बैम पहरा : जलसमाधिक अर्थ
चौरानब्बैम पहरा अपराधीक धरती— जे धरती अपराधी ठाढ़ छल, ओ धरती ओकर पएर तरि डोलय लागल।
अध्याय 196 — तिरानब्बैम पहरा : ऊपर उठल नाम
पंचानब्बैम पहरा संदूकक भीतरक बिहान— बन्द संदूक खुजल, आ भीतरसँ डुबल नामक एकटा नव भोर बहरायल।
अध्याय 197 — चौरानब्बैम पहरा : अपराधीक धरती
छियानब्बैम पहरा नामक पहरुआ— जे नामक पहरुआ बनल, से कहलक— आब कोनो नाम एहि गाममे नहि डुबत।
अध्याय 198 — पंचानब्बैम पहरा : संदूकक भीतरक बिहान
गढ़ नारिकेल फेर जागल, गाछ फेर फल देलक, आ शिलापर पहिल बेर सभ डुबल नाम संग-संग लिखायल।
अध्याय 199 — छियानब्बैम पहरा : नामक पहरुआ
जे पोथी एतय खतम होइ छै, ओ ओतय शुरू होइ छै जतय एकटा नाम बाजै छै— हम छी, हमरा मेटाउ नहि।
अध्याय 200 — फकरा-संग्रह
ई दू सय फकरा गढ़ नारिकेलक दू सय साँस थीक, एक ठाम राखल, ताकि कोनो नाम फेर ने डुबय, आ कोनो स्वर फेर ने हेरा जाय।
समापन-फकरा — पोथीक अन्तिम स्वर
1.
पानि घुरल, गाछ हँसल, आ डुबल नाम सभ एक-एक कऽ ऊपर उठि अपन घर घुरल।
2.
जे शिला कहियो चुप छल, से आब बाजय लागल, कारण ओहिपर आब सभक नाम लिखायल अछि।
3.
गोहि गेल, ग्राह गेल, मुदा बच्चाक ओ हाथ रहि गेल जे ऊपर उठि कऽ नाम मँगने छल।
4.
जे गाम अपन इतिहास मोन राखलक, ओतुक्का नारिकेल गाछ फेर फल देबय लागल।
5.
सत्य बीज छल, फुटल; नाम जल छल, उठल; आ गढ़ नारिकेल फेर पृथ्वी चुनलक।
6.
जे देखि कऽ बजल, ओकर नाम दू बेर जीबल— एक बेर देहमे, एक बेर गामक स्मृतिमे।
7.
ई कथा एतय खतम नहि होइ छै, ई ओहि हरेक मुँहमे जीबित रहै छै जे कहै छै— हम छी।
[ऐ कादम्बरीक अंश]
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।