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मैथिली_वेब_पत्रकारिताक_इतिहास_आ_एआई.mp4
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- 0:00–0:10अग्ड़्पना करू जे मैंने कोनो वेक्ती डावी करे चे ती, जे अख्णो पैग आविष्कार-गजानक चाती, आविच्कार-ईडावी मैंने वरसो दरी चले तरह चे.
- 0:10–0:16आद्टकन अचानक सा एक दिन कोनो पुरान दिजितल साक्ष.
- 0:16–0:20एक दम कोनो पुरान दिजितल साखषिमने अंट्रनेट पर
- 0:20–0:23चूटल एक टचूटस निशान सोजा अवेचे
- 0:23–0:26आवूनकर पूरा दावीके कखतम कर देचे
- 0:26–0:29सामान ने जीवन में ता हम सब जुत बाजी सकत ची
- 0:29–0:32मुदा एजे दिजितल दुनिया चाहीने
- 0:32–0:34उते मशीन जुत नहीं बजाए चाहे
- 0:34–0:35सही काली एं
- 0:35–0:38ता अएकर हमर सब एक एजे गेहन विष्लेशन चे
- 0:38–0:41से एहना एक ता अथ्यन्त रोचक
- 0:41–0:43विवादित
- 0:43–0:46अगगे सके ची अंच्वा विषे पर केंद्रिता ची
- 0:46–0:50इविषे चे मेठली वेप पत्र कारिता के इतिवास
- 0:50–0:53अईजे चर्चा हम सब कहर रहल चे
- 0:53–0:57एकर आदार समगरी अची आशीश अंचिनार जीक लिखिल पोती
- 0:57–1:15अगर इक्ड़नेट के अथा सागर में में बाशाग जे संगर्ष चे वूँजे विवाद ची और सप्फलताग जे गाता चे उकर एक्ट दस्टावेज मानी सकेचे.
- 1:15–1:18इक दम जक्खन हम सब वेप पत्रकाइता कक बात कर अच्छी
- 1:18–1:20तम मुन में मुक्खे लूप से अंग्रेजी
- 1:20–1:24वा अन्ने पाइग वेश्विग बाशा सब कच्ट्रोभर अच्छे
- 1:24–1:25रहां सब आबविख चे
- 1:25–1:27मुदा एक टा चेत्रीय बाशा
- 1:27–1:29जक्रा आपन लीपी कलेल
- 1:29–1:32अपन पहचान के लेल एतेख संगर्ष करेक पडल
- 1:32–1:35और अंटरनेट पर कोना अपन अस्थान बनलेक
- 1:35–1:36इज जानब अद्दुत अची
- 1:36–1:37भिल्कुल
- 1:37–1:40और हमर सब कम मिशन आए ए आची
- 1:40–1:43जे अंटरनेट पर मेठली कप पहल कदम से लोकः
- 1:43–1:49अजुक जे आट्टिश्यल अट्टेलिजन्स द्हरिक का यात्रा चे उक्रा तार के गुपे समजल जाए.
- 1:49–1:52तीक चे आव एक राविस्तार से बुजेई.
- 1:52–1:57ये यात्रा वास्तब में तकनीकी और मानविय जीजीवी शाह के टा बहुत पई गुदारन आची.
- 1:57–2:03आप आप पोती ग़राई में जाते देखाव, ता इी मातर किछ वेबसाइद बन बाख कता नी अची.
- 2:03–2:10इए उही समय कब आत आचे, जगन कमपूटर पर देवनागरी में ताइप करओप सुवैम में इक ता बहुत पएग चुनाती चल.
- 2:10–2:40अग, उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
- 2:40–2:42अहंकार सोब्विष्ट कर जाएच है
- 2:42–2:44आ, इत वो मनुश्शक सवबाव चै
- 2:44–2:46आ, ये कारन आची
- 2:46–2:49जे मैठली अंट्रनेट के शुर्वाती इतिहास
- 2:49–2:51बहुत रास विवाद सगेरा आची
- 2:51–2:53आ, ही विवाद केंद्र मा आची
- 2:53–2:55पहिल हेबाग होड
- 2:55–2:58मैंने कोनो भी यात्राक श्रूवात सबहिने
- 2:58–3:00यी जान बहुत जरूरी हो इच्चाए
- 3:00–3:02जे पहिल कदम की रख्लक
- 3:03–3:06जकन कोनो नवक शेत्र खूलेइच्चाए
- 3:06–3:08तलोक चाहित चाती
- 3:08–3:10जे इतिहास में हुंकर नाम
- 3:10–3:12स्वरनक्षर में लिक्ठल जाये
- 3:12–3:13सही बात अचे
- 3:13–3:17अदा अदार समगरी में इहो एस पष्ट रुपें लिखाला ची,
- 3:18–3:24जे कतेक रास बात नामग एक टाबी क्यलनी जे हुंकर साइत उनिस्वो निनाने लोकनी जाएगा.
- 3:25–3:28अदा अदार समगरी में इहो एस पष्ट रुपें लिखाला ची,
- 3:28–3:31इए उ समय चल जगन अदरनेद बहुत सिमित चल
- 3:31–3:35मुदा आदार समगरी मे इउ एस पष्ट रुपेन लिखाल अची
- 3:35–3:41जे कतेक रास बात नामग एक ता ब्लोगग संचारक लोकनी दाभी क्यलनी
- 3:41–3:43जे हुंकर साइत उनिस्षो निनानवे साची
- 3:43–3:44अच्छा
- 3:44–3:49तब ढब ढ़जार से पहले तव उनीसो निन्यानवे अबहत अच्छे
- 3:49–3:50इक दम
- 3:50–3:54तव समान ने गनी तिक हिसाब से तव उ बलोग पहल भेले
- 3:54–3:58मुदल लेक्धव एह दावे के बहुत रोचक तरीका से खारिज कर अच्छतीन
- 3:58–4:01इते जे बात सबे से जादा अकर्षक चे
- 4:01–4:07से एजे लेक्खक एह दाविक परिक्षन मात्र आरोप प्रत्ते आरोपक आदार पर नहीं
- 4:07–4:11बलकी कतोर तकनी की प्रमानक आदार पर किलनी आची
- 4:11–4:14माने उगडिजितल फुट्प्रिंट का उप्योग किलन?
- 4:14–4:19आप जखन कोनो व्यक्ती ब्लोगर्जा का प्लट्फुम पर कोनो पोस्त लिके चे
- 4:20–4:23तो उकर एक ते उवर्ल वा वेब अद्रेस जनरेट होई चे
- 4:23–4:24बुजलिये
- 4:24–4:29उही उवर्ल में उही साल आम महीनक नाम सुताह दर्ज बजगद चे
- 4:29–4:33ज़ेया उपोस्ट वास्टब में सर्वर पर सेव भिल हो.
- 4:33–4:40उब तल लेक्ख उही शक्रीन स्वाट्ट के पोठी में राके का सिद खिलनी अची जे उदावी गलत अचे.
- 4:40–4:45एक दम उचाइत कजे पोस्ट उनी सो निन्यानवेकिर देखा रहा रहा लचे,
- 4:45–4:47अखर यूरेल में 2013 लिखाल अचे
- 4:47–4:49क्ये बात करे इची
- 4:49–4:51मने 14 साल पच्वक तारीक
- 4:51–4:51आँ
- 4:51–4:53एकर सोज आर्थ एची
- 4:53–4:58जे अ पोस्ट वास्टम में 2005 अ 2013 में लिखल गिल चल
- 4:58–5:00आव अखर प्रकाशनक तिती
- 5:00–5:01पच्वकर देल गिल चल
- 5:01–5:03जक्रा हम सा बैक्टेटिं कहेची
- 5:03–5:09इत उहना भेल जेना कोनो वक्ती आई के तारीक में बंकक चेक काटे
- 5:09–5:13मुदा उही पर तारीक आए से दस साल पहने के डोदे
- 5:13–5:16और कहे जी इच्चेक ते दस साल पुरान आचे
- 5:16–5:18बड नी कुप मा देलिये
- 5:18–5:21जो चेक बोख चपल आचे 2005 में
- 5:21–5:26तवोई पर उनिस्ट्ट्ट्ट्टनिनानवे के ती लिख्लासा उ उनिस्ट्ट्टनिनानवे के नहीं बहजेते
- 5:26–5:29आ एक तब बहुत पएक तत्ते इई हो आची
- 5:29–5:33जे गुगल द्बारा ब्लोगर के अदिग्रहन दोजार तीन में भेल चले
- 5:33–5:39तज्यों कुन उब उगी रूप में चलही नहीं, तो ते उनी सुनिनानवे में ब्लोक कुना बनी सकते ची?
- 5:39–5:43बिल्कुल, इटकनी की रूप सभमबह नहीं चहें.
- 5:43–5:48मुदा हमर प्रश्न इए जी, जे आखिर जे लोग भाशाक सेवा कर अचाती,
- 5:48–5:52जे साहित्यासन जोडल चाती, ओएहन तकनी की हेराफेरी के करता.
- 5:52–5:57देखाओ इपुरन रूपेन उही मनोवे गयानिक लाल्साक परनाम अचे,
- 5:57–5:59जकर चर्चा हम सब पहिने किलहूँ.
- 5:59–6:04इतिहास में पहल स्थान पाभेलेल मनुश्षक भूग बहुतीवर होए तचे
- 6:04–6:08रहा, साहित्यमें पहल पोठी के के लिखलक, पहल कता के के लिखलक
- 6:08–6:11एक्रा लका हमेशा से बहस होत रहा है ला चे
- 6:11–6:16तहीना, जखन लोक के लागल, ज़े अंटनेट पर सो हो इतिहास रचल जाई रहाला चे,
- 6:16–6:21आ आगाडिक पीडी एक रा देखध, तो उपहल बनबाग मोज नहीं चोडी सकला.
- 6:21–6:25मुदा उलोक नी एक ता पाएक बाद भिसरी गेला,
- 6:25–6:35जे प्रिंट मेड्या में बलही लोग तारीक बडली लेत, पन्नाक रंग पुरान कर लेत, मुदा दिजितल साखश सत्ते के सोजा आनी देते थाची.
- 6:35–6:42एक दम, अगर दीटार काईव वा वे बैक मशीन जगका तूल इक तर दीजिटल कम्रा जगका काज करे तची.
- 6:42–6:48जिस समें समें पर, वेप्साइटक फोटो खीच के अपना सरवर पर राखे ले तची.
- 6:48–6:52आ, उही सनेप्षोट के कोनो व्यकती नहीं बड़िली सके तची.
- 6:52–6:59इंटनेट पर कोनो काज जही होई तची, अकर ताईम् स्टम्प उते सरवदाक लेल दर्ज बहुजाई तची.
- 6:59–7:06इबरत महतो पुरन बात ची, जे इंटनेट कोनो भी जूथक के बहुत कालदरी चूपोई नहीं देटची.
- 7:06–7:12तो व्यक्तिगत भ्लोग आई हम पहल, हम पहल केर विवाद साएक्ता बात्त सब वोगल.
- 7:12–7:13की?
- 7:13–7:20ये जे जो भ्हाशा के दिजितल दुन्या में स्थाएत वचाईई तक्हन आवशकता होई चे संस्तागत प्रयासक.
- 7:20–7:25करन व्यक्ती ता आपन सुविदान उसार तत्यके मोडी सके तची
- 7:25–7:28आप, मुदा जक्शन कोनो संस्तागत काज होई तची
- 7:28–7:30तो उकर एक ता जवाब देई होई तची
- 7:30–7:34इम्मात्र एक दूटा ब्लोग के बात नहीं रही गे लचल
- 7:34–8:04तो अगर नहीं बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी ब
- 8:04–8:07आब इक भी होए चे उख्रा समजे जरूरी आचे
- 8:07–8:10इक टा आट्कंक विशेश कोड होए चे
- 8:10–8:12कोनु भी पत्रिकावा सीरीज के
- 8:12–8:16अंट्राश्ट्रीस तर पर एक दा अदिकारिक पहचान दे टचे
- 8:16–8:19आचा, एकर भिटबाक आरत इभेल
- 8:19–8:22जी आब विबेज मात्र कोनो शोक्या ब्लोगनी रहल
- 8:22–8:26एक दम आब एक रा वेश्विक पुस्तकाल वा आखाव में
- 8:26–8:29एक ता प्रमानिक स्रोत जकागी नलजा लागला
- 8:29–8:33आएकर आदार चल उई भाल सरिक गाजकेर शुर्वाती समगरी
- 8:33–8:37मुदा पोथी पडवा क्रम में जे बात हमरा सब सब एसी आश्ट्रेने चकित के लक.
- 8:37–8:38की चलो?
- 8:38–8:44उए विदे मात देव नागरी लिपी में नहीं प्रकाषिद भूरहल चल,
- 8:44–8:51इी तिरुब्ता मने मिठलाक्शर, कैती, नेवादी आ आईपी आदरी मे अपलड़ करोल गाईं.
- 8:51–8:56आई, इी बाशाक सन्रक्षन के लेल बहुत पैग कदम चल.
- 8:56–9:022003 में CK राउद द्वारा तिरुब्ताक पहल फाँंट पनोल गेल चल, जकर प्रयोग एताई भेल.
- 9:02–9:04इत निक बात आची
- 9:04–9:07मुदा एक ता बात जे पचवाई में कनी कष्फिन भेल
- 9:07–9:09उ ईई जे पोठी में लिखाल आची
- 9:09–9:12जे विदे ब्रेल लिपी में सु हो प्रकाषिद बेल
- 9:12–9:15आप इई सूने में कनी आश्चर ये जनक लगे चे
- 9:15–9:16एक दम
- 9:16–9:18मैंने अंटरनेट पर ब्रेल लिपी
- 9:19–9:20इद उहीना भेल
- 9:20–9:23जेना कुनो एहन ग़ोरे लिफ्ट लगावब
- 9:23–9:24जदे भिजली नहीं हो
- 9:24–9:24औग
- 9:24–9:27इवपमा तब बड नीक देली है
- 9:27–9:29मैंने हमर कहबाख तादपर इई
- 9:29–9:31जे वक्ती द्रिष्टी बाधिद शती
- 9:31–9:35उकुनु फलाट कुम्पुटर स्क्रीन वा मोबाल के चूकर कुना पड़ता?
- 9:35–9:37इसक्रीन पर तकुन उबार नहीं होईचे?
- 9:37–9:41जा हम सब एक रा पैग परीप्रेख्ष से जोडी,
- 9:41–9:45तब उजब जे अंटरनेट पर ब्रेल लिपिक उप्योग के पाजाक तकनिक
- 9:45–9:46कते क्रान्ति कारी आची
- 9:46–9:48आच्छा, उ कुना?
- 9:48–9:50आँ, इबाज सत्ति आचे,
- 9:50–9:53जे, सक्रीन पर उबार नहीं होईचे.
- 9:53–9:54मुदा एते,
- 9:54–9:58सक्रीन रीटर सोट्ट्वेर उग भूमी का महत्व पुर भव जाएत चे.
- 9:58–10:01जे, सक्रीन पर लिखल बात के पड़े चे.
- 10:01–10:02आँ,
- 10:02–10:07जखन कोनो पत्रिका ब्रेल अनुकुल दिजितल फोमाट में उपलप्ट करावल जायतचे
- 10:07–10:10तद्रिष्टी बादित लोकने क्मपुटर में लागल
- 10:10–10:13अगर बच्च्टबाद दूटा काज होएच्टें
- 10:13–10:17याता सुफ्ट्टवर उही टेक्स्ट के आवाज में बदल के पाडके सूनावे तचे
- 10:17–10:22वा उग्टी अपन कम्पुटर सा एक ता रिफ्श़बल ब्रेल दिस्पले मशीन जोडे रहे चे थें
- 10:22–10:24इी मशीन की करे तचे
- 10:24–10:26यी मशीन की करेते चे?
- 10:26–10:29यी मशीन उही दिजिटल टेक्स्ट के गरान करेते चे
- 10:29–10:32अवकर सताथव पर चोट-चोट प्लास्टिक का पिन
- 10:32–10:35उपर नीचा भखे ब्रेल अख्षर बना दे चे
- 10:35–10:38जक्रा उव्यक्ती चूके पडी सकतें
- 10:38–10:44और माने उसामगरी विशेश रुपसा उही सोफ्ट्ट्ट्वरक अनुकुल बनावल गेल चल
- 10:44–10:46इत बहुत अदबूत अचे
- 10:46–10:47बलकुल
- 10:47–10:51इब भाशा के समाज के उही राश्ये पर तार लोग दरी लेजायत चे
- 10:51–10:56ज़िश्टी बादद्च्छत्ण अजग्रालेल साहिट्च्छ दरी पहुच्व बहुत कथन चल.
- 10:56–10:59माने यी मात्र एक टकनी की चला ननी चल,
- 10:59–11:02अब अब अदाधा के कथम करो हल चल
- 11:02–11:06संगे संग विदे दूरा मेठलिक पहल दिजितल आरकाव से हो बनाुल गल
- 11:06–11:09आब अब अदाधा के कथम करो हल चल
- 11:09–11:12संगे संग विदे दूरा मेठलिक पहल दिजितल आरकाव से हो बनाूल गल
- 11:12–11:42अगर दोगागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागाग
- 11:42–11:45अगर संगे द़बाक लेल ये तभे पर्याप्त नहीं चल.
- 11:45–11:48अगरा गलोबल तूल्स के आवश्च्ता चल.
- 11:48–11:52अगर अगर गलोबल तूल्स के आवश्च्ता चल.
- 11:52–11:55अगर अगर गलोबल तूल्स के आवश्च्ता चल.
- 11:55–11:58अगर अगर गलोबल तूल्स के अवश्च्ता चल.
- 11:58–12:28अगर उगर बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाश
- 12:28–12:33अद्ता 2014 में एक्रा अदिकारिक स्विक्रती बेटल
- 12:33–12:33अद्ता 2014 में एक्रा अदिकारिक स्विक्रती बेटल
- 12:33–12:33अद्ता 2014 में एक्रा अदिकारिक स्विक्रती बेटल
- 12:33–12:33अद्ता 2014 में एक्रा अदिकारिक स्विक्रती बेटल
- 12:33–12:33अदिकारिक स्विक्रती बेटल
- 12:33–12:37और यह एक ता पूर्न रूपे सामूही काछचल
- 12:37–12:39जक्रा कम्युन्टी प्रोज्ट्ट कहल जाएचे
- 12:39–12:44एह में गजेंद्र ताको राजेश रंजनजका अनेक स्वेम सेवक लोकनी
- 12:44–12:46बिना कोनो स्वार्थ के काछकेलनी
- 12:46–12:50मैं, बिना कोन पविके आपन भाशाक लेल दिन रात काजकर राल चला.
- 12:50–12:51एक दम.
- 12:51–12:56मुदा आशीश अंचिनहारजिक पोत्फी, मात्र इतेवे दरी नहीं रुकाईता ची.
- 12:57–13:00उएक रा आवे वला बहविश्यसन जोडई इच्छती.
- 13:00–13:01बहविश्यसन. को ना?
- 13:01–13:08पोथी मैं आट्टेफिशल अड़ेलिजन्स आँ मशीं ट्रान्सलेशन तूल्स को से हो बहत गमभीर चर्चा आची
- 13:08–13:10मने एएएए के चर्चा आची
- 13:10–13:11हाँ
- 13:11–13:13एएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएए
- 13:13–13:14आन्दिक च्रान्स तूँ
- 13:14–13:18तो आजेन्यु के प्रफेसर दोक्ता गीरीषनात जागे निर्देशन में
- 13:18–13:21माईक्रोस्ट्ट्ट्बिंग कान्स्लेटर में में में द्लीक जोडब
- 13:21–13:25इसब औही गलोबल तूल्सक हिस्था जी
- 13:25–13:27एताई इ बात बड रोचक बहुजाएत चे
- 13:27–13:28की बात
- 13:28–13:35देखु, एक दिश मेठली भीकी पीडिया ज़े खाज निशुलक सामहूँएक प्रहासशब, भवर रहल अची.
- 13:35–13:39लोक आपन समेदे रहल चती, आपन भाशक प्रेम में.
- 13:39–13:40आच, सही बाच ज़े.
- 13:40–13:45मुदा दोसर दीस, AI tools अची, जखरा लेल कमपनी पाई देई तची,
- 13:45–13:49उ रईट ब़टेग तची, रईट ब़टेग तची, मने पेड प्रोजेक्त्स,
- 13:49–13:53इक करोडो आर्बो ड़ालर करपूरेत कमपनी सबक प्रोजेक्त थची,
- 13:53–13:57की पाई अनी सा भाशाक सेवाग जे मुल बहावना चल,
- 13:57–14:02जे निस्वार्त बहुश़ भ्लोगर लोकनी 2005 में काई शुरू करेने चला,
- 14:02–14:04उसमाप्त नहीं भाजाईता ची.
- 14:04–14:06ये एक ता बहुत नीक प्रश्न ची.
- 14:06–14:10मुदा पोती एही बातक पाच्ध जे कारन देट चे,
- 14:10–14:12उआर भीशी चोंका भेवला आची.
- 14:12–14:13आच्छा.
- 14:13–14:19अग, कम्युन्टी प्रोज्ट अप्प्ट प्रोज्ट के अंथर आर अवश्शकता के समजा बहुत जरूरी एचे.
- 14:20–14:25कोनो भी भाशाक दिजितल यात्रा के शुर्वात हमेशा स्वयम सेवक लोकनी करेट ची थी.
- 14:25–14:27उग्रा ता बहुत बेशी डेटा चाही
- 14:27–14:29एक तम उख्रा हजारो लाकोग शब्दक जोडा चाही
- 14:29–14:31उख्रा व्याकरनक पैत्रन समझबा क्लेल
- 14:31–14:33बारी मात्रा में डेटा प्रोसेसिंग
- 14:33–14:35अक्फ्टिंग की अवश्श्ख्ता होई तच्छा लिए था
- 14:35–14:37अगर दा बहुत बेशी डेटा चाही
- 14:37–14:41एक दंग, अगर अगर अजारो लाकोग सबदक जोडा चाही
- 14:41–14:44अगर व्याकरनक पैट्रन समझबाक लेल बारी मात्रा में
- 14:44–14:47देटा प्रोसिसिंग अग्वागा सर्वर अजारो अग्वागा
- 14:47–14:52अगर व्याकरनक पैट्रन समजबाक लेल भारी मात्रा में
- 14:52–14:55देटा प्रोसेसिंग अग्वाश्व्टा होई तची
- 14:55–14:58आपन गरग लाप्टोप पर नहीं का सवर अग्वाशाएक शोद अनिवार्य बहेजाई तची
- 14:58–14:59इत व्यावारिग बाच्चे
- 14:59–15:05अई काज कोनो स्वयम सेवक आपन गरक लाप्टोप पर नहीं कर सके तची
- 15:05–15:08उते व्यावसाएक शोद अनिवार्य बहेजाई तची
- 15:08–15:10इत व्यावारिक बाट चे
- 15:10–15:14मुदस सब से पैग विदंबना आ सुन्दरता की अचे जाने ची
- 15:14–15:15की?
- 15:15–15:18अग तारीक में जे A.I मेठली सीखी रहे लाची
- 15:18–15:21अख्रा देटा तते सबहित रहल चे
- 15:21–15:23औही शुर्वाती ब्लोगर लोकनेक
- 15:23–15:25लिखल समगरी सा सीखी रहा लाची
- 15:25–15:29जे उ बिना कोनो लाबख अंटनेट पर दलानी
- 15:29–15:30इत बहुत गज़बाद भिल
- 15:30–15:33माने स्वेम सेवक लोकनिक 2005
- 15:33–15:35वा 2008 में
- 15:35–15:39राती राती बहर जगिक कगज लगोलनी
- 15:39–15:40जे ताइपिंकिलनी
- 15:40–15:41हां
- 15:41–15:43आजुक बहुराश्ट्र्या कंपनीक एएई
- 15:43–15:46उही गाज कप्फल सा आपन पेट भरी रहल आची
- 15:46–15:48आप मेठली सीखी रहल आची
- 15:48–15:49भिल्कुल
- 15:49–15:52बिना उही शुर्वाती निश्वल्क काजक
- 15:52–15:55आजुक एएए के मेठली क माँ मे से हो नहीं भुजना जाएएद
- 15:55–15:58माने इब भाशाक व्याउसाई करन नहीं
- 15:58–16:02बलकी बाशाक तकनीकी उन्नेया नची जे समयक मागग अची
- 16:02–16:03इक्दम!
- 16:03–16:07मुदा जेहना हर चमकेत चीज सोना नहीं होई चे
- 16:07–16:10तेहना अंटरनेट मेठिली के वैश्विक्त बने लक
- 16:10–16:13तकनीक के उचस्टर पर तलह गेल
- 16:13–16:15मुदेकर किछु नुक्सान से हो भेल?
- 16:15–16:15हा!
- 16:15–16:22लेखक आशीश अन्चिनार, एही पोठी में एकर नकरात्मक प्रवावक से होग कलवा सत्ती सोजा राक है चती,
- 16:22–16:27जा हम सब अंट्रनेट केर मात्र महीमा मन्दन करव, तो उ अदूरा विष्लेशन है तै.
- 16:27–16:31जी, ये एक ता बहुत पैग चिंताक विशाय अची,
- 16:31–16:36हमर प्रश्न यी आचे, जे पोठी में इंट्रनेट केर नकरात्मक प्रभावक विशाय में
- 16:36–16:39लेखक अक मुख्य चिंता की आची.
- 16:39–16:46उंँ लेखक स्पष्ट कर चतिन जे अंटरनेट रातो राद सुचनाक आम्बार लगा दिलगा ची
- 16:46–16:49मुदा सुचना अग्यान में बहुत पैगंतर अच्छे
- 16:49–16:52मने अन्पुमेशन आण नोलेज में अन्तर चे
- 16:52–16:54तकनिकत सबे के जोड रहल चे
- 16:54–16:56तकनी गातक कोन भरहल अची
- 16:56–16:58वम्रा सब के लागेत अची
- 16:58–17:01जे हम सब बहुत गयनी भोर हो अची
- 17:01–17:03मुदा वास्तव में
- 17:03–17:06हम सब मात्र सुचना का उबहोगता बनी गेल ची
- 17:06–17:09आप, फेक नुूज, साईबर आतंगवाद
- 17:09–17:12अश्लील्ताक प्रहार समाज पर निरन्तर भाई रहा लची
- 17:12–17:18एक दम, वाट्साप उन्वार्स्टी सा निकली रहाल गलत सुचना समाज में ब्रम्पसारी रहा लची
- 17:18–17:22लोग सोषल साइट्स पर एतेक सक्री अबहुगे ला आची
- 17:22–17:25जे वास्तविक समाजिक्ता खतम भो रहल आची
- 17:25–17:27तए सबख अर्द की भाल
- 17:27–17:30की सोषल मीट्या हमर वैचारीक समता के कम कर रहल आची
- 17:30–17:32बिल्कुल कर रहल चे
- 17:32–17:34आप आमरा तद सबसे बेसी भयानक लागल
- 17:34–17:36फेस बुक कल लाएक बटन कचर्चा
- 17:36–17:38पोती में लिख हल आची
- 17:38–17:42जे अब इलाएक लोकक जीवनक बद्खारा बनी गेल अची
- 17:42–17:44हा, ये एक ता बहुत पाएक बिमारी चे
- 17:44–17:46हमरा इस समज्वा का ची
- 17:46–17:49जे एक ता चोट संथ धमजजब बतन
- 17:49–17:52कोना साहित्या समाजग गुडवत्ता के कतम कर रहा लची
- 17:52–17:54ये एक ता महत्वपून प्रश्नट्धाल करे थे
- 17:55–18:00और एक तर वड़द हम्रा सबख मनो विग्यान और मस्तिष्ट कर दोपामा हर्मोन में चूपल आची
- 18:00–18:02दोपामाई? उ कोना?
- 18:02–18:08लेकख उदाहरन दैच्छतीं जे कोना एक ता नीक गजल कार या कता कार
- 18:08–18:12जखन आपन गमभीर रचना फिस्बूक पर डालै चतिन
- 18:12–18:15आवक्रा लाएक कम बहितेत छे
- 18:15–18:17तो उहा तुद साहित बहुजाएच चतिन
- 18:17–18:19आँ, दूसर दीस
- 18:19–18:21जे नोक बहुथ सादारन
- 18:21–18:23या सनसनी खेज भात लिखाएच चतिन
- 18:23–18:25उबेसी लाएक पाभेग
- 18:25–18:29ब्रहम् में जीवी रहल चतीन जो पैग सहित्तिकार बन गला
- 18:29–18:31एक दम सही पकर लियाई
- 18:31–18:33इए एलगारिदम के खेल अची
- 18:33–18:36एलगारिदम उही चीस के प्रमोट कर अचे
- 18:36–18:39जे क्राप पर लोक तुरन्त प्रतिक्री आदग
- 18:39–18:41एकर परिनाम एब हो रहल ची
- 18:41–18:45जे लेख्ह क्लोकनी आब आपन कलात्मकता से भीशी
- 18:45–18:47लग़गरिदम के खौश करेला लिखिरहल चातिन.
- 18:47–18:52आप, कविता चोट भरहल जी, शबद हलक भहरहल जी,
- 18:52–18:56एते दरी की पोठी में इहो बतावल गेल आची,
- 18:56–19:03जे लाएक बतनक आविष्कारक जस्टिन रोसिन्स्टीन स्वयम एक्रा समाजलिल गातक मने लेलीन
- 19:03–19:07की बात करी ची? लाएक बतनक आविष्कारक स्वयम एक्रा गातक मने लीन
- 19:08–19:11हा? आ अवापन फोंसर शोषिल मीट्या दिलीट कर लेलीन
- 19:11–19:17जखन उकर आविष कारक स्वयम दरायलची, ता हम सब के तसतर्क होगई परत्
- 19:17–19:23मने हम सब अपनन रचनात्मक तक रिमूट कंट्रोल एक ता मशीन वा कोड के हाथ मिद्वा दिलिये अची
- 19:23–19:24बिलकुल
- 19:24–19:28बाप्रे एक ता एक ता दूदारी तर्वारी भोगेला
- 19:28–19:31अंटरनेट भाशा के बचास हो रहा लची
- 19:31–19:34और समाजक वेचारी गेराई के काटी सो रहा लची
- 19:34–19:36एक दम सतीक विष्लेषन आची
- 19:36–19:38और आही लेल पोठी में सुजाओ देल गेल आची
- 19:38–19:40जे साईबर कानुन के मस्वूट कल जाए,
- 19:40–19:44मुदा मात्र सरकार के बहुज़े नहीं रहा लना जासके तची.
- 19:44–19:46तो हम्रा सब की गी करे पडद.
- 19:46–19:47विक्तिदाथ स्थर पर स्थु हो,
- 19:47–19:50हम सब के अपन अपन इंटनेट उप्योग के संथुलित करे पडद,
- 19:50–19:53आई आलोचनात्मक छिन्तन के विक्सित करे पडद्त।
- 19:53–19:57मने क्रितिकल फिंकिंक्ग, बिना एकर हम सब मात्र मशीना गुलाम बनी कर रही जै.
- 19:57–19:58एक दम सही.
- 19:58–20:01तए ही पुरा गेहन विमर्स के जिस समेटी,
- 20:01–20:06तई इस पश्ट भेल ज़ वर्ष् 2 धार का ओई सादारन आज्टी मल साईट सा
- 20:06–20:10जितें लोक जेना तेना संगर्ष्क का देवनागरी लिखेई चला?
- 20:10–20:14अथाईस लोक का, 2020 का AI अनुवाद
- 20:14–20:19और मशीन लरनिंग दरी मेठिलिक यात्रा अत्यंत प्रेणा दाया का ची.
- 20:19–20:25इई इतिहास मात्र वेब पेज कव, ब्लोग कव, वा यौरल केर नहीं अची.
- 20:25–20:29बलकल नहीं, इई उही जिद्दी लोकनिक इतिहास अची,
- 20:29–20:32जे अपन भाशा के मरतेन देके चाहलनी.
- 20:32–20:35उो लोकनिक, जे बिना कोनो आर्थिक लाबख,
- 20:35–21:05अपन रात दिन एक को कव अपन रात दिन एक अगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग
- 21:05–21:09अदेटा जमा बेरालाची अद पशीनोगरा पडी रहालाची
- 21:09–21:13हमर आबई वाला पीडी या भविश्यक एएई
- 21:13–21:16औही देटा के हमर समाजक अख्स मानत
- 21:16–21:19जा हम सब अब अब इंटरनेट पर गर्या मारी करब
- 21:19–21:21गलत शब्दक प्रेयोग करब
- 21:21–21:30ज़ाहम सब यंटरनेट पर गर्या मारी करव, गलत शब्दक प्रियोग करव, तो बहुविश्ष्वक यंटरनेट मैठिलीके उहीने बुजधत।
- 21:30–21:34माने, हमर आएके ताइपिंग काल ही की तिहास अच्छी
- 21:34–21:35एक्दम
- 21:35–21:40बवविश्ष्ख एएई इश्वद सूनिका एक ता अजीपसन विचार मन में आवाई तची
- 21:40–21:43जे हम स्रोता लोकनिग विचार आर्ठ छोड़े चाहब
- 21:43–21:45अव एक रा एहीना सोची
- 21:45–21:49जे आप्टिफिश्छल अंटलिजन्स बविश्ष्छे में एतेक उन्नत बहजाए
- 21:49–21:52जे उक्रा मेठलीक सब्टा देटा बेटी जाए,
- 21:52–21:56उले, ताल, आलंका, रस, सब सीख लिये,
- 21:56–22:00और उस्वेम महाकवी विद्यापतिक शेली में
- 22:00–22:03एकदम सतीक, रस पून, और व्याक्रनिक रूप से
- 22:03–22:05पून शुद मेठलीक कविता लागे.
- 22:05–22:07बाप्रे तकन की हैते?
- 22:07–22:13इह तप्रश्च्च आप तकन साहित्त में मानविय समवेदना किर की स्थान रहत,
- 22:13–22:19की बहुष्यक, दिजितल इतिहास कार, मनुश्यक लिखल उहे साहित्ते के पडदता,
- 22:19–22:22जे में तूटल, फुटल मुदा अस्ली भावना आची,
- 22:22–22:52अगर बाद्ता था जे अगर अद्तर समय देत अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर
- 22:52–22:54बदिए बदिए रहल अची
- 22:54–22:57आ, एहे बात सबसे बेशी महतुपोरना आची
Plain text
अग्ड़्पना करू जे मैंने कोनो वेक्ती डावी करे चे ती, जे अख्णो पैग आविष्कार-गजानक चाती, आविच्कार-ईडावी मैंने वरसो दरी चले तरह चे. आद्टकन अचानक सा एक दिन कोनो पुरान दिजितल साक्ष. एक दम कोनो पुरान दिजितल साखषिमने अंट्रनेट पर चूटल एक टचूटस निशान सोजा अवेचे आवूनकर पूरा दावीके कखतम कर देचे सामान ने जीवन में ता हम सब जुत बाजी सकत ची मुदा एजे दिजितल दुनिया चाहीने उते मशीन जुत नहीं बजाए चाहे सही काली एं ता अएकर हमर सब एक एजे गेहन विष्लेशन चे से एहना एक ता अथ्यन्त रोचक विवादित अगगे सके ची अंच्वा विषे पर केंद्रिता ची इविषे चे मेठली वेप पत्र कारिता के इतिवास अईजे चर्चा हम सब कहर रहल चे एकर आदार समगरी अची आशीश अंचिनार जीक लिखिल पोती अगर इक्ड़नेट के अथा सागर में में बाशाग जे संगर्ष चे वूँजे विवाद ची और सप्फलताग जे गाता चे उकर एक्ट दस्टावेज मानी सकेचे. इक दम जक्खन हम सब वेप पत्रकाइता कक बात कर अच्छी तम मुन में मुक्खे लूप से अंग्रेजी वा अन्ने पाइग वेश्विग बाशा सब कच्ट्रोभर अच्छे रहां सब आबविख चे मुदा एक टा चेत्रीय बाशा जक्रा आपन लीपी कलेल अपन पहचान के लेल एतेख संगर्ष करेक पडल और अंटरनेट पर कोना अपन अस्थान बनलेक इज जानब अद्दुत अची भिल्कुल और हमर सब कम मिशन आए ए आची जे अंटरनेट पर मेठली कप पहल कदम से लोकः अजुक जे आट्टिश्यल अट्टेलिजन्स द्हरिक का यात्रा चे उक्रा तार के गुपे समजल जाए. तीक चे आव एक राविस्तार से बुजेई. ये यात्रा वास्तब में तकनीकी और मानविय जीजीवी शाह के टा बहुत पई गुदारन आची. आप आप पोती ग़राई में जाते देखाव, ता इी मातर किछ वेबसाइद बन बाख कता नी अची. इए उही समय कब आत आचे, जगन कमपूटर पर देवनागरी में ताइप करओप सुवैम में इक ता बहुत पएग चुनाती चल. अग, उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई अहंकार सोब्विष्ट कर जाएच है आ, इत वो मनुश्शक सवबाव चै आ, ये कारन आची जे मैठली अंट्रनेट के शुर्वाती इतिहास बहुत रास विवाद सगेरा आची आ, ही विवाद केंद्र मा आची पहिल हेबाग होड मैंने कोनो भी यात्राक श्रूवात सबहिने यी जान बहुत जरूरी हो इच्चाए जे पहिल कदम की रख्लक जकन कोनो नवक शेत्र खूलेइच्चाए तलोक चाहित चाती जे इतिहास में हुंकर नाम स्वरनक्षर में लिक्ठल जाये सही बात अचे अदा अदार समगरी में इहो एस पष्ट रुपें लिखाला ची, जे कतेक रास बात नामग एक टाबी क्यलनी जे हुंकर साइत उनिस्वो निनाने लोकनी जाएगा. अदा अदार समगरी में इहो एस पष्ट रुपें लिखाला ची, इए उ समय चल जगन अदरनेद बहुत सिमित चल मुदा आदार समगरी मे इउ एस पष्ट रुपेन लिखाल अची जे कतेक रास बात नामग एक ता ब्लोगग संचारक लोकनी दाभी क्यलनी जे हुंकर साइत उनिस्षो निनानवे साची अच्छा तब ढब ढ़जार से पहले तव उनीसो निन्यानवे अबहत अच्छे इक दम तव समान ने गनी तिक हिसाब से तव उ बलोग पहल भेले मुदल लेक्धव एह दावे के बहुत रोचक तरीका से खारिज कर अच्छतीन इते जे बात सबे से जादा अकर्षक चे से एजे लेक्खक एह दाविक परिक्षन मात्र आरोप प्रत्ते आरोपक आदार पर नहीं बलकी कतोर तकनी की प्रमानक आदार पर किलनी आची माने उगडिजितल फुट्प्रिंट का उप्योग किलन? आप जखन कोनो व्यक्ती ब्लोगर्जा का प्लट्फुम पर कोनो पोस्त लिके चे तो उकर एक ते उवर्ल वा वेब अद्रेस जनरेट होई चे बुजलिये उही उवर्ल में उही साल आम महीनक नाम सुताह दर्ज बजगद चे ज़ेया उपोस्ट वास्टब में सर्वर पर सेव भिल हो. उब तल लेक्ख उही शक्रीन स्वाट्ट के पोठी में राके का सिद खिलनी अची जे उदावी गलत अचे. एक दम उचाइत कजे पोस्ट उनी सो निन्यानवेकिर देखा रहा रहा लचे, अखर यूरेल में 2013 लिखाल अचे क्ये बात करे इची मने 14 साल पच्वक तारीक आँ एकर सोज आर्थ एची जे अ पोस्ट वास्टम में 2005 अ 2013 में लिखल गिल चल आव अखर प्रकाशनक तिती पच्वकर देल गिल चल जक्रा हम सा बैक्टेटिं कहेची इत उहना भेल जेना कोनो वक्ती आई के तारीक में बंकक चेक काटे मुदा उही पर तारीक आए से दस साल पहने के डोदे और कहे जी इच्चेक ते दस साल पुरान आचे बड नी कुप मा देलिये जो चेक बोख चपल आचे 2005 में तवोई पर उनिस्ट्ट्ट्ट्टनिनानवे के ती लिख्लासा उ उनिस्ट्ट्टनिनानवे के नहीं बहजेते आ एक तब बहुत पएक तत्ते इई हो आची जे गुगल द्बारा ब्लोगर के अदिग्रहन दोजार तीन में भेल चले तज्यों कुन उब उगी रूप में चलही नहीं, तो ते उनी सुनिनानवे में ब्लोक कुना बनी सकते ची? बिल्कुल, इटकनी की रूप सभमबह नहीं चहें. मुदा हमर प्रश्न इए जी, जे आखिर जे लोग भाशाक सेवा कर अचाती, जे साहित्यासन जोडल चाती, ओएहन तकनी की हेराफेरी के करता. देखाओ इपुरन रूपेन उही मनोवे गयानिक लाल्साक परनाम अचे, जकर चर्चा हम सब पहिने किलहूँ. इतिहास में पहल स्थान पाभेलेल मनुश्षक भूग बहुतीवर होए तचे रहा, साहित्यमें पहल पोठी के के लिखलक, पहल कता के के लिखलक एक्रा लका हमेशा से बहस होत रहा है ला चे तहीना, जखन लोक के लागल, ज़े अंटनेट पर सो हो इतिहास रचल जाई रहाला चे, आ आगाडिक पीडी एक रा देखध, तो उपहल बनबाग मोज नहीं चोडी सकला. मुदा उलोक नी एक ता पाएक बाद भिसरी गेला, जे प्रिंट मेड्या में बलही लोग तारीक बडली लेत, पन्नाक रंग पुरान कर लेत, मुदा दिजितल साखश सत्ते के सोजा आनी देते थाची. एक दम, अगर दीटार काईव वा वे बैक मशीन जगका तूल इक तर दीजिटल कम्रा जगका काज करे तची. जिस समें समें पर, वेप्साइटक फोटो खीच के अपना सरवर पर राखे ले तची. आ, उही सनेप्षोट के कोनो व्यकती नहीं बड़िली सके तची. इंटनेट पर कोनो काज जही होई तची, अकर ताईम् स्टम्प उते सरवदाक लेल दर्ज बहुजाई तची. इबरत महतो पुरन बात ची, जे इंटनेट कोनो भी जूथक के बहुत कालदरी चूपोई नहीं देटची. तो व्यक्तिगत भ्लोग आई हम पहल, हम पहल केर विवाद साएक्ता बात्त सब वोगल. की? ये जे जो भ्हाशा के दिजितल दुन्या में स्थाएत वचाईई तक्हन आवशकता होई चे संस्तागत प्रयासक. करन व्यक्ती ता आपन सुविदान उसार तत्यके मोडी सके तची आप, मुदा जक्शन कोनो संस्तागत काज होई तची तो उकर एक ता जवाब देई होई तची इम्मात्र एक दूटा ब्लोग के बात नहीं रही गे लचल तो अगर नहीं बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी बाद लिए तो वी ब आब इक भी होए चे उख्रा समजे जरूरी आचे इक टा आट्कंक विशेश कोड होए चे कोनु भी पत्रिकावा सीरीज के अंट्राश्ट्रीस तर पर एक दा अदिकारिक पहचान दे टचे आचा, एकर भिटबाक आरत इभेल जी आब विबेज मात्र कोनो शोक्या ब्लोगनी रहल एक दम आब एक रा वेश्विक पुस्तकाल वा आखाव में एक ता प्रमानिक स्रोत जकागी नलजा लागला आएकर आदार चल उई भाल सरिक गाजकेर शुर्वाती समगरी मुदा पोथी पडवा क्रम में जे बात हमरा सब सब एसी आश्ट्रेने चकित के लक. की चलो? उए विदे मात देव नागरी लिपी में नहीं प्रकाषिद भूरहल चल, इी तिरुब्ता मने मिठलाक्शर, कैती, नेवादी आ आईपी आदरी मे अपलड़ करोल गाईं. आई, इी बाशाक सन्रक्षन के लेल बहुत पैग कदम चल. 2003 में CK राउद द्वारा तिरुब्ताक पहल फाँंट पनोल गेल चल, जकर प्रयोग एताई भेल. इत निक बात आची मुदा एक ता बात जे पचवाई में कनी कष्फिन भेल उ ईई जे पोठी में लिखाल आची जे विदे ब्रेल लिपी में सु हो प्रकाषिद बेल आप इई सूने में कनी आश्चर ये जनक लगे चे एक दम मैंने अंटरनेट पर ब्रेल लिपी इद उहीना भेल जेना कुनो एहन ग़ोरे लिफ्ट लगावब जदे भिजली नहीं हो औग इवपमा तब बड नीक देली है मैंने हमर कहबाख तादपर इई जे वक्ती द्रिष्टी बाधिद शती उकुनु फलाट कुम्पुटर स्क्रीन वा मोबाल के चूकर कुना पड़ता? इसक्रीन पर तकुन उबार नहीं होईचे? जा हम सब एक रा पैग परीप्रेख्ष से जोडी, तब उजब जे अंटरनेट पर ब्रेल लिपिक उप्योग के पाजाक तकनिक कते क्रान्ति कारी आची आच्छा, उ कुना? आँ, इबाज सत्ति आचे, जे, सक्रीन पर उबार नहीं होईचे. मुदा एते, सक्रीन रीटर सोट्ट्वेर उग भूमी का महत्व पुर भव जाएत चे. जे, सक्रीन पर लिखल बात के पड़े चे. आँ, जखन कोनो पत्रिका ब्रेल अनुकुल दिजितल फोमाट में उपलप्ट करावल जायतचे तद्रिष्टी बादित लोकने क्मपुटर में लागल अगर बच्च्टबाद दूटा काज होएच्टें याता सुफ्ट्टवर उही टेक्स्ट के आवाज में बदल के पाडके सूनावे तचे वा उग्टी अपन कम्पुटर सा एक ता रिफ्श़बल ब्रेल दिस्पले मशीन जोडे रहे चे थें इी मशीन की करे तचे यी मशीन की करेते चे? यी मशीन उही दिजिटल टेक्स्ट के गरान करेते चे अवकर सताथव पर चोट-चोट प्लास्टिक का पिन उपर नीचा भखे ब्रेल अख्षर बना दे चे जक्रा उव्यक्ती चूके पडी सकतें और माने उसामगरी विशेश रुपसा उही सोफ्ट्ट्ट्वरक अनुकुल बनावल गेल चल इत बहुत अदबूत अचे बलकुल इब भाशा के समाज के उही राश्ये पर तार लोग दरी लेजायत चे ज़िश्टी बादद्च्छत्ण अजग्रालेल साहिट्च्छ दरी पहुच्व बहुत कथन चल. माने यी मात्र एक टकनी की चला ननी चल, अब अब अदाधा के कथम करो हल चल संगे संग विदे दूरा मेठलिक पहल दिजितल आरकाव से हो बनाुल गल आब अब अदाधा के कथम करो हल चल संगे संग विदे दूरा मेठलिक पहल दिजितल आरकाव से हो बनाूल गल अगर दोगागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागाग अगर संगे द़बाक लेल ये तभे पर्याप्त नहीं चल. अगरा गलोबल तूल्स के आवश्च्ता चल. अगर अगर गलोबल तूल्स के आवश्च्ता चल. अगर अगर गलोबल तूल्स के आवश्च्ता चल. अगर अगर गलोबल तूल्स के अवश्च्ता चल. अगर उगर बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाशागा लेल तो बाश अद्ता 2014 में एक्रा अदिकारिक स्विक्रती बेटल अद्ता 2014 में एक्रा अदिकारिक स्विक्रती बेटल अद्ता 2014 में एक्रा अदिकारिक स्विक्रती बेटल अद्ता 2014 में एक्रा अदिकारिक स्विक्रती बेटल अदिकारिक स्विक्रती बेटल और यह एक ता पूर्न रूपे सामूही काछचल जक्रा कम्युन्टी प्रोज्ट्ट कहल जाएचे एह में गजेंद्र ताको राजेश रंजनजका अनेक स्वेम सेवक लोकनी बिना कोनो स्वार्थ के काछकेलनी मैं, बिना कोन पविके आपन भाशाक लेल दिन रात काजकर राल चला. एक दम. मुदा आशीश अंचिनहारजिक पोत्फी, मात्र इतेवे दरी नहीं रुकाईता ची. उएक रा आवे वला बहविश्यसन जोडई इच्छती. बहविश्यसन. को ना? पोथी मैं आट्टेफिशल अड़ेलिजन्स आँ मशीं ट्रान्सलेशन तूल्स को से हो बहत गमभीर चर्चा आची मने एएएए के चर्चा आची हाँ एएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएए आन्दिक च्रान्स तूँ तो आजेन्यु के प्रफेसर दोक्ता गीरीषनात जागे निर्देशन में माईक्रोस्ट्ट्ट्बिंग कान्स्लेटर में में में द्लीक जोडब इसब औही गलोबल तूल्सक हिस्था जी एताई इ बात बड रोचक बहुजाएत चे की बात देखु, एक दिश मेठली भीकी पीडिया ज़े खाज निशुलक सामहूँएक प्रहासशब, भवर रहल अची. लोक आपन समेदे रहल चती, आपन भाशक प्रेम में. आच, सही बाच ज़े. मुदा दोसर दीस, AI tools अची, जखरा लेल कमपनी पाई देई तची, उ रईट ब़टेग तची, रईट ब़टेग तची, मने पेड प्रोजेक्त्स, इक करोडो आर्बो ड़ालर करपूरेत कमपनी सबक प्रोजेक्त थची, की पाई अनी सा भाशाक सेवाग जे मुल बहावना चल, जे निस्वार्त बहुश़ भ्लोगर लोकनी 2005 में काई शुरू करेने चला, उसमाप्त नहीं भाजाईता ची. ये एक ता बहुत नीक प्रश्न ची. मुदा पोती एही बातक पाच्ध जे कारन देट चे, उआर भीशी चोंका भेवला आची. आच्छा. अग, कम्युन्टी प्रोज्ट अप्प्ट प्रोज्ट के अंथर आर अवश्शकता के समजा बहुत जरूरी एचे. कोनो भी भाशाक दिजितल यात्रा के शुर्वात हमेशा स्वयम सेवक लोकनी करेट ची थी. उग्रा ता बहुत बेशी डेटा चाही एक तम उख्रा हजारो लाकोग शब्दक जोडा चाही उख्रा व्याकरनक पैत्रन समझबा क्लेल बारी मात्रा में डेटा प्रोसेसिंग अक्फ्टिंग की अवश्श्ख्ता होई तच्छा लिए था अगर दा बहुत बेशी डेटा चाही एक दंग, अगर अगर अजारो लाकोग सबदक जोडा चाही अगर व्याकरनक पैट्रन समझबाक लेल बारी मात्रा में देटा प्रोसिसिंग अग्वागा सर्वर अजारो अग्वागा अगर व्याकरनक पैट्रन समजबाक लेल भारी मात्रा में देटा प्रोसेसिंग अग्वाश्व्टा होई तची आपन गरग लाप्टोप पर नहीं का सवर अग्वाशाएक शोद अनिवार्य बहेजाई तची इत व्यावारिग बाच्चे अई काज कोनो स्वयम सेवक आपन गरक लाप्टोप पर नहीं कर सके तची उते व्यावसाएक शोद अनिवार्य बहेजाई तची इत व्यावारिक बाट चे मुदस सब से पैग विदंबना आ सुन्दरता की अचे जाने ची की? अग तारीक में जे A.I मेठली सीखी रहे लाची अख्रा देटा तते सबहित रहल चे औही शुर्वाती ब्लोगर लोकनेक लिखल समगरी सा सीखी रहा लाची जे उ बिना कोनो लाबख अंटनेट पर दलानी इत बहुत गज़बाद भिल माने स्वेम सेवक लोकनिक 2005 वा 2008 में राती राती बहर जगिक कगज लगोलनी जे ताइपिंकिलनी हां आजुक बहुराश्ट्र्या कंपनीक एएई उही गाज कप्फल सा आपन पेट भरी रहल आची आप मेठली सीखी रहल आची भिल्कुल बिना उही शुर्वाती निश्वल्क काजक आजुक एएए के मेठली क माँ मे से हो नहीं भुजना जाएएद माने इब भाशाक व्याउसाई करन नहीं बलकी बाशाक तकनीकी उन्नेया नची जे समयक मागग अची इक्दम! मुदा जेहना हर चमकेत चीज सोना नहीं होई चे तेहना अंटरनेट मेठिली के वैश्विक्त बने लक तकनीक के उचस्टर पर तलह गेल मुदेकर किछु नुक्सान से हो भेल? हा! लेखक आशीश अन्चिनार, एही पोठी में एकर नकरात्मक प्रवावक से होग कलवा सत्ती सोजा राक है चती, जा हम सब अंट्रनेट केर मात्र महीमा मन्दन करव, तो उ अदूरा विष्लेशन है तै. जी, ये एक ता बहुत पैग चिंताक विशाय अची, हमर प्रश्न यी आचे, जे पोठी में इंट्रनेट केर नकरात्मक प्रभावक विशाय में लेखक अक मुख्य चिंता की आची. उंँ लेखक स्पष्ट कर चतिन जे अंटरनेट रातो राद सुचनाक आम्बार लगा दिलगा ची मुदा सुचना अग्यान में बहुत पैगंतर अच्छे मने अन्पुमेशन आण नोलेज में अन्तर चे तकनिकत सबे के जोड रहल चे तकनी गातक कोन भरहल अची वम्रा सब के लागेत अची जे हम सब बहुत गयनी भोर हो अची मुदा वास्तव में हम सब मात्र सुचना का उबहोगता बनी गेल ची आप, फेक नुूज, साईबर आतंगवाद अश्लील्ताक प्रहार समाज पर निरन्तर भाई रहा लची एक दम, वाट्साप उन्वार्स्टी सा निकली रहाल गलत सुचना समाज में ब्रम्पसारी रहा लची लोग सोषल साइट्स पर एतेक सक्री अबहुगे ला आची जे वास्तविक समाजिक्ता खतम भो रहल आची तए सबख अर्द की भाल की सोषल मीट्या हमर वैचारीक समता के कम कर रहल आची बिल्कुल कर रहल चे आप आमरा तद सबसे बेसी भयानक लागल फेस बुक कल लाएक बटन कचर्चा पोती में लिख हल आची जे अब इलाएक लोकक जीवनक बद्खारा बनी गेल अची हा, ये एक ता बहुत पाएक बिमारी चे हमरा इस समज्वा का ची जे एक ता चोट संथ धमजजब बतन कोना साहित्या समाजग गुडवत्ता के कतम कर रहा लची ये एक ता महत्वपून प्रश्नट्धाल करे थे और एक तर वड़द हम्रा सबख मनो विग्यान और मस्तिष्ट कर दोपामा हर्मोन में चूपल आची दोपामाई? उ कोना? लेकख उदाहरन दैच्छतीं जे कोना एक ता नीक गजल कार या कता कार जखन आपन गमभीर रचना फिस्बूक पर डालै चतिन आवक्रा लाएक कम बहितेत छे तो उहा तुद साहित बहुजाएच चतिन आँ, दूसर दीस जे नोक बहुथ सादारन या सनसनी खेज भात लिखाएच चतिन उबेसी लाएक पाभेग ब्रहम् में जीवी रहल चतीन जो पैग सहित्तिकार बन गला एक दम सही पकर लियाई इए एलगारिदम के खेल अची एलगारिदम उही चीस के प्रमोट कर अचे जे क्राप पर लोक तुरन्त प्रतिक्री आदग एकर परिनाम एब हो रहल ची जे लेख्ह क्लोकनी आब आपन कलात्मकता से भीशी लग़गरिदम के खौश करेला लिखिरहल चातिन. आप, कविता चोट भरहल जी, शबद हलक भहरहल जी, एते दरी की पोठी में इहो बतावल गेल आची, जे लाएक बतनक आविष्कारक जस्टिन रोसिन्स्टीन स्वयम एक्रा समाजलिल गातक मने लेलीन की बात करी ची? लाएक बतनक आविष्कारक स्वयम एक्रा गातक मने लीन हा? आ अवापन फोंसर शोषिल मीट्या दिलीट कर लेलीन जखन उकर आविष कारक स्वयम दरायलची, ता हम सब के तसतर्क होगई परत् मने हम सब अपनन रचनात्मक तक रिमूट कंट्रोल एक ता मशीन वा कोड के हाथ मिद्वा दिलिये अची बिलकुल बाप्रे एक ता एक ता दूदारी तर्वारी भोगेला अंटरनेट भाशा के बचास हो रहा लची और समाजक वेचारी गेराई के काटी सो रहा लची एक दम सतीक विष्लेषन आची और आही लेल पोठी में सुजाओ देल गेल आची जे साईबर कानुन के मस्वूट कल जाए, मुदा मात्र सरकार के बहुज़े नहीं रहा लना जासके तची. तो हम्रा सब की गी करे पडद. विक्तिदाथ स्थर पर स्थु हो, हम सब के अपन अपन इंटनेट उप्योग के संथुलित करे पडद, आई आलोचनात्मक छिन्तन के विक्सित करे पडद्त। मने क्रितिकल फिंकिंक्ग, बिना एकर हम सब मात्र मशीना गुलाम बनी कर रही जै. एक दम सही. तए ही पुरा गेहन विमर्स के जिस समेटी, तई इस पश्ट भेल ज़ वर्ष् 2 धार का ओई सादारन आज्टी मल साईट सा जितें लोक जेना तेना संगर्ष्क का देवनागरी लिखेई चला? अथाईस लोक का, 2020 का AI अनुवाद और मशीन लरनिंग दरी मेठिलिक यात्रा अत्यंत प्रेणा दाया का ची. इई इतिहास मात्र वेब पेज कव, ब्लोग कव, वा यौरल केर नहीं अची. बलकल नहीं, इई उही जिद्दी लोकनिक इतिहास अची, जे अपन भाशा के मरतेन देके चाहलनी. उो लोकनिक, जे बिना कोनो आर्थिक लाबख, अपन रात दिन एक को कव अपन रात दिन एक अगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग अदेटा जमा बेरालाची अद पशीनोगरा पडी रहालाची हमर आबई वाला पीडी या भविश्यक एएई औही देटा के हमर समाजक अख्स मानत जा हम सब अब अब इंटरनेट पर गर्या मारी करब गलत शब्दक प्रेयोग करब ज़ाहम सब यंटरनेट पर गर्या मारी करव, गलत शब्दक प्रियोग करव, तो बहुविश्ष्वक यंटरनेट मैठिलीके उहीने बुजधत। माने, हमर आएके ताइपिंग काल ही की तिहास अच्छी एक्दम बवविश्ष्ख एएई इश्वद सूनिका एक ता अजीपसन विचार मन में आवाई तची जे हम स्रोता लोकनिग विचार आर्ठ छोड़े चाहब अव एक रा एहीना सोची जे आप्टिफिश्छल अंटलिजन्स बविश्ष्छे में एतेक उन्नत बहजाए जे उक्रा मेठलीक सब्टा देटा बेटी जाए, उले, ताल, आलंका, रस, सब सीख लिये, और उस्वेम महाकवी विद्यापतिक शेली में एकदम सतीक, रस पून, और व्याक्रनिक रूप से पून शुद मेठलीक कविता लागे. बाप्रे तकन की हैते? इह तप्रश्च्च आप तकन साहित्त में मानविय समवेदना किर की स्थान रहत, की बहुष्यक, दिजितल इतिहास कार, मनुश्यक लिखल उहे साहित्ते के पडदता, जे में तूटल, फुटल मुदा अस्ली भावना आची, अगर बाद्ता था जे अगर अद्तर समय देत अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर बदिए बदिए रहल अची आ, एहे बात सबसे बेशी महतुपोरना आची