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इंटरनेट_पर_मैथिली_आ_कोसीक_प्रलय.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:18वर्ष 2008, जगन भारतक चंद्र्यान एक चान्दक कक्षादरी पहुच रहल चला, विश्वनात आनन्द, शत्रनजक विष्व चामप्यन्षिप जीत रहल चला, मने राश्ट्री एस तर पर पैक पैक साहित्तिक पुर्स्कार गूश्ना बहरल चल.
  2. 0:18–0:48आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  3. 0:48–0:54समर्पित लोक एक ता प्राचीन भाशा अवकर साहित्यक के अंटरनेट पर बचाई विकलेल
  4. 0:54–0:57एक ता अबहुत पूर्व संगर्ष करहल चला
  5. 0:57–1:01ता स्वागत अजी आहा सबख, हमरे स्गेर अनवेशवण में
  6. 1:01–1:08अर आई हम सब एक तब बहुत गेर अप प्रासंगिक स्रोट सामगरी पर विमर्ष करहल ची.
  7. 1:08–1:17ये आची विदे है, यी पत्रिका, मने मेठिलीक प्रथम पाखषिक यी पत्रिका, और उकर मुद्रित रुप सदे है.
  8. 1:17–1:21बूजु जे एकोनो सादारन पत्रिकाक पन्ना नहीं अचे
  9. 1:21–1:25हम्रा लेल ये एक ता ताइम क्यब्सूल्जका आचे
  10. 1:25–1:29हमर आई दे एक ची जे हम सभ एबूजी
  11. 1:29–1:32जे कोना एक ता प्राचीन भाशा आदूनिक तकनीककक संगे
  12. 1:32–1:35अपन अस्तित्वक लेल लडी रहल अचे
  13. 1:35–1:40आ, कोना साहित्य, संगीत, अप्राक्रोतिक आप्दाक संगर्ष्श से,
  14. 1:40–1:43कोना समाजक निरमाड वब पतन होईत आचे.
  15. 1:43–1:46एक दम सही कहलू, इश्रोथ समक्री,
  16. 1:46–1:51वास्तब में हम्रा सब के, एक तब बहुत व्यापक चित्र देखार अल आची.
  17. 1:51–1:57सादारनतिया होईत की आची, जे इतिहास के बस एक ता मुक दस्तावेज मानिलियल जाई तचे.
  18. 1:57–2:05मुदा विदेहे का इ अंग, जे मुख्हि रुप से 2008 और 2009 काल काल काचे,
  19. 2:05–2:09उस्पस्ट करेत अचे जे कोना तकनिक, संस्क्रिति
  20. 2:09–2:13अस्सरकारी नीति सब के एक दोस्रा से सीधा सरो का रची.
  21. 2:13–2:43आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
  22. 2:43–2:45ज़रक, चवपाल, वा भोज पत्र से निकल के,
  23. 2:45–2:48इंटरनेटजका आदूनिक पतल पर अबईतची,
  24. 2:48–2:50तो अगर यात्रा कहन होईतची,
  25. 2:50–2:52इस वच्ते गजब लागगेतची.
  26. 2:52–2:54इब भद रोचक यात्रा आचे.
  27. 2:54–2:55जो हम सव,
  28. 2:55–2:58दुई हाजार इस्विक आस्पास के बात करी,
  29. 3:13–3:17उ अ इंटरनेट पर मेठलिक उपस्तिती दर्ज करेबाक प्रे आश शुरुकेलनी
  30. 3:17–3:20शुरुमे तो यहु जीो सिटीच पर साइट बनाल गिल
  31. 3:20–3:24मुदा उसब मुझद साइट तक इचे दिन में दिलीट भजाई चल ना
  32. 3:24–3:26आप, यही ता समस्स्या चल
  33. 3:26–3:32तईी प्रक्रिया रुकल कोना, इदिजिटल उपस्तिती इस्थाइ कोना भेल इबुज़ब बहुत जरूरी एचे.
  34. 3:32–3:37उही समें सर्वर अ डोमेन आइकाल के जगा सुलभ वस सस्तानी चल.
  35. 3:37–3:38अग़ अग़
  36. 3:38–3:40मुदा संगर्ष जारी रहल
  37. 3:40–3:43आप पाज जुलाई 2004 के
  38. 3:43–3:45भाल सरीक गाच
  39. 3:45–3:48मने द्विदेग.com डोमेन अस्तित्मे आएल
  40. 3:48–3:51इंटरनेटक विषाल पतल पर
  41. 3:51–3:54मेठिलिक प्रतम अदिकारिक वेब उपस्तितिक रूप मे
  42. 3:54–3:56बहुत अटिहासिक कडम चल
  43. 3:56–4:26बाप्रे, तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
  44. 4:26–4:56बवाज्टा अगर बवाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्�
  45. 4:56–5:00तवास्तव में हो केवल एक ता चित्र वा दिसाईज्यन जेहन होई चल
  46. 5:00–5:03माने अकर कोनो दिजितल वाल्यू नहीं चल
  47. 5:03–5:04इक दम नहीं
  48. 5:04–5:08जा आहा अपन कमठूटर पर कोनो खास फाँंत में
  49. 5:08–5:10मैठली में किचु लिख लाँ
  50. 5:10–5:12आद दुस्रा व्यक्ती के एमेल के लाँ
  51. 5:12–5:42अगर अगर अगर कुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  52. 5:42–5:49तो बवागा दिलिक खुनो अख्चर युनी कोड़ मे लिखे ची तो दून्या कोनो भी कमपुटर वा मोबाल उक्रा उख्चराक रूप में पच्चानत.
  53. 5:49–5:54आप विदे ही काज कर कर मैठ्टिलिके अन्टरनेटक मुख्ध्य दारा में लाभी देलग.
  54. 5:54–5:55बलकुल
  55. 5:55–5:56आब भूजल हूँ
  56. 5:57–6:00आईजे तिरहुता से देवनागरी लिप्यान्तरन, काजबेल,
  57. 6:00–6:02उकर की आथ छल?
  58. 6:02–6:04तिरहुता ता हमर पुरान लिपी आची नहीं
  59. 6:04–6:08आआ, तिरहुता मैठिलीक आपन प्राचीन लिपी आची,
  60. 6:08–6:11जख्रा मितेलाक्षर से हो कहल जाईता चे.
  61. 6:11–6:14हमर सब के पाएक प्राचीन पोठी आपनजी
  62. 6:14–6:17जे मने वन सावलिक रिकोड चे
  63. 6:17–6:21उसब तिरहुता में ताल पत्र वा भूजपत्र पर लिख हल अचे
  64. 6:21–6:24मुदा आदूनिक पीडी तदेवनागरी पड़े तचे
  65. 6:24–6:27तिरहुता तब बहुत कम लोग जने चती
  66. 6:27–6:33यह तब आत आथ है, तगजेंदर ताकूर आ पनजिकार विद्यानन्द जाजी जे काजकेलनी
  67. 6:33–6:39उई चल जे उही पुरान पोथी सब के दिजितल इमेजिं, मने शकनिंग केल गेल
  68. 6:39–6:43आप फेर उक्रा तिरहुता से देव नागरी में लिप्यान्तरन करल गेल
  69. 6:43–6:46जाई से आदूनिक पाथक उक्रा पडी सकती
  70. 6:46–6:49इत तश्छ्मुज भगीरत प्रैयाश्चल
  71. 6:49–6:52राई शोलग हन्द में शब्द कोश बनावल गेल
  72. 6:52–6:56जते कमपूटर अविग्यानक शब्दावली से हो गड़ल गेल
  73. 6:56–6:59आई यस सब को मुज सरकारी संस्ता नहीं
  74. 6:59–7:02कि कि खिछु समर्पित लोग आपन स्थर पर कार अजला
  75. 7:02–7:04इब भद प्रेरना दाया कचे
  76. 7:04–7:07मुदा एता हमार एक ता प्रष्न छे
  77. 7:07–7:10आपना लागाई तचे जे पुछ़ा बहुत जरूरी आचे
  78. 7:10–7:11आपना पुछु
  79. 7:11–7:13श्रोथ सामगरी कहत ची
  80. 7:13–7:17जे ये एक ता विकिंद्रिक्री सहित्तिक आन्दोलन चल,
  81. 7:17–7:21जे ते प्रकाशक अपाट्खक बीचक दूरी कथम बहुगेल.
  82. 7:21–7:25मुदा जकन अंटनेट पर भिना कोन समपादकक वा गेट कीपरक,
  83. 7:25–7:27रोक तोकक लोक लिखाई लागल,
  84. 7:27–7:30तक की एक्रा से साहित्ते कस्तर नहीं कहसल
  85. 7:30–7:32मैं कोनो चननी ने रहला से
  86. 7:32–7:34ये तफ्री फरोल बहुगेल है थे
  87. 7:34–7:36ये एक तद सबहवी काशंका जे
  88. 7:36–7:39मुदा एही स्रोथ समगरेक परप्रेच्ष्चचन देखी
  89. 7:39–7:42तो उही समेख तपाग मिथाखी चल
  90. 7:42–7:45जे मैठ्री में जे लिख़च्छतें से उक्रा पड़़िच्छतें
  91. 7:45–7:49माने पात्ख आलेखच एक छोट चीन गुट्चल?
  92. 7:49–7:52एक दम. इंटरनेट उही एक अद्गार के तोड़्दिलक.
  93. 7:52–7:56विकेंद्री करन का अर्थ एई नहीं चल, जो गुणवत्ता कहसी गेल.
  94. 7:56–8:01बलकी एकर अर्थ एचल, जे प्रतिबा दूर दराजा गाँ मेवा विदेश मेवैसल चल,
  95. 8:01–8:04जक्रा कोनो पत्रिका चापे लेल तयान नहीं चल,
  96. 8:04–8:06उक्रा एक्तम वंच बेट गेल.
  97. 8:06–8:10तसाहित ते एक्ता चोट का गेरा से निकली कर वेष्विग बहुगेल?
  98. 8:10–8:40आदा राज्मोहन्जा जे आईस रोट समगरी मा बात उठाएट चतिन और हमरा सोचे बात मजबोर कोरई तच्छे तक्निक तब आशा के एक देध ड़ाउ दे लग, ब्रानत तच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्�
  99. 8:40–8:43अपकणे का भी जाएच्छी मित्लाक संगीत अ सहीत्यपर
  100. 8:43–8:45अब बड्द मार में क्हन्डाचे
  101. 8:45–8:50विदे हमें स्वर्गी या पन्टित रामाशेज्जा राम्रंक कजे सक्षाटकार आचे
  102. 8:50–8:53उस्पप्ष्ट रूपसे संगीत क्डोहनक बात करे तच्छित
  103. 8:53–8:57उ अई अई प्ष्ट रूप्से संगीत क दोहनक बात करे तच्ट.
  104. 8:57–9:00रामरंग जीक उ सक्षात कार बहुत गंभी रच्च,
  105. 9:00–9:04उ विद्यापती गीट के मुख्य रूप्स दूब भाग्म बाटे च्छतन,
  106. 9:04–9:09पहिल अची पदगायन शेली, जे पुनरूपस शास्त्री अग आर्दशास्त्री आच.
  107. 9:09–9:11एक रकोन उदारन आची स्रोट सामगरी में?
  108. 9:11–9:15आँ, जेना नंद्क नंदन कदम बक्तरुतर.
  109. 9:15–9:20इए उ रचना आएच जक्रा मे राग आतालक कथोर नियम आएच.
  110. 9:20–9:26अदुसर इज लोक वा ग्रामीन संगीत जना उगनारे मुर कती गिला
  111. 9:26–9:29आप, इद जनजन के कंच में आचे
  112. 9:29–9:35भिल्कुल, तर रामरंग जी का चिन्ता इएज जे विद्ध्यापतिक जे ग्रामीन गिद आच,
  113. 9:35–9:40अखरात महिला सब अगामक लोक बडनीग जगा अपने लोक कंथ में सुरक्षित रखने चाती.
  114. 9:40–9:44मुदा जे शास्त्रिया शेली करचना आईच अखर गयन उजरा रहा लेज.
  115. 9:44–9:46एत छिन्ताख विशय अचे.
  116. 9:46–9:50अ, मित्छिला वर्त्मान में शास्त्रीय संगीत सशुन्य भर्रहलेज
  117. 9:50–9:52मुदाएकर कारन की आचे,
  118. 9:52–9:55जे विद्ध्यापती समपुण मित्छिलाक प्रान चती,
  119. 9:55–9:59उनकर शास्त्रीय संगीत अचानक सविलुप्त कोना भर्रहलेज
  120. 9:59–10:01एकर कारन बहुत सब चतेज,
  121. 10:01–10:05जे रामरंग जी बतवएच्छती, पलायन आद उपभोक्ता वाद,
  122. 10:05–10:09पन्दित रामच्टर मलिक, आपन्दित स्याराम तिवारी जका,
  123. 10:09–10:13दिगगज लोकनिक जे द्रुपजशेली, वाशास्त्रिय परमपर आच्छल,
  124. 10:13–10:15उक्रा अगला पीडी ने अपना सकल.
  125. 10:15–10:18नवका पीड़ी उक्रा में समवे ने दे बचाहाता चे.
  126. 10:18–10:23आज संगे संग रामरंग जी एक ता कटू याथार्द ददिस इसारा करे चती.
  127. 10:23–10:28उ कहे चतीन जिस समपूरन भारत में अपन संसक्रिती के चूरे में
  128. 10:28–10:32वोरे में जेते क मेठिल अगवाईल चातिन तेना आन कुनो देशक लोक नाए
  129. 10:32–10:35बाप्रे ये तो बहुत कढवा सत्या चे
  130. 10:35–10:39जे लोग मित्ला सा बाहर गेला हा रोजगार अख्लेल वाशिक्चाख्लेल
  131. 10:39–10:41वो आपन मात्री बाशा से एक दम कडी गेला
  132. 10:41–10:45उनका मम्मी ड़ादी संस्क्रितिक चकर में इखाई में गर वोई चनी
  133. 10:45–10:48जे हमर बच्चा कि त मैठली बाजब नाबई च्यक
  134. 10:48–10:49इस च्छ मुछ बहुत दुखगा दाछी
  135. 10:49–10:52आई आई मात्र संगी तक छिन्ता नया जे
  136. 10:52–10:56राज्मोहन जा जिनका विदेख का श्वोद समगरी में
  137. 10:56–10:59बोद सम्मान 2009 बाख लेक है जे
  138. 10:59–11:03हुंकर जे साख्षात का रख्छे उता साहित टिक वर्तमान इस्तिती पर
  139. 11:03–11:05बहुत बडगा प्रष्न्चिन लगा दित ची
  140. 11:05–11:07राज्मोहन जी क बात इक दम सपष्ट आचे
  141. 11:07–11:11उनकर मानबची जहना-जहना बहुतिक सुख्सविदा बड़ल अचे
  142. 11:11–11:14समाज में उचनेटिक मुल्ले का राज भेल अचे
  143. 11:14–11:19मुदा एहे से भेशी उ समिक्शा और समालोचनाक जे आदूनिक इस्तितिया चे
  144. 11:19–11:21उक्रापर जे भेबाक टिप्नी केलनिया चे
  145. 11:21–11:51अब भी देजान अखर अगर बाज़ा नाज़ा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा पर
  146. 11:51–11:55अगर रच्ना कतबो नीख है उक्रा दरकिनार कर देल जाते ची
  147. 11:55–11:58इक ता एहने कांगी द्रिष्टी आफी
  148. 11:58–12:01जते रच्ना के गुन्दोषक आदार पर नहीं
  149. 12:01–12:04बलकी गुट्बाजीक आदार पर मुल्यांकन भारो हो लगा ची
  150. 12:04–12:08बल की गुट्बाजिक आदार पर मुल्यांकन भारो हल अची
  151. 12:08–12:11इक कलब वली मान्सिकता सहिते कलेल जहर ची
  152. 12:11–12:16राम्रंग जीक शबद में विद्यापतिक गीत मात्र मनुरंजन नही अची
  153. 12:16–12:18इं मित्लाक परीचे पत्र चे
  154. 12:18–12:22आई, परिचे पत्र कतिक नीक बात कहलनी
  155. 12:22–12:28जई परिचे पत्र हिरागेल, जई कला गुट्भाजी अब रोतिक तक भेंट चडीगेल
  156. 12:28–12:33ता आहाक भाशा मात्र इंटरनेट का दिक्षनरी मसुरक्षित रहके की करत,
  157. 12:33–12:35उक रात्मा तम मरी चुकल रहत.
  158. 12:35–12:41यहे है उ बिन्दू अची जटे हमरा लागे तची जे इश्वोट समगरी
  159. 12:41–12:45अपन सबसन महत्वपून पक्ष दिस अवए तची.
  160. 12:45–12:49राम रंगजी आर राज मोहनजा जे एही सान्सक्रितिक अवएचारिक
  161. 12:49–12:53शरन के बात कोर अल चला उओ उई समझ में भहलो
  162. 12:53–12:59जकन मित्ला के माटी एक ता आखल्पने प्रक्रितिक अव्यवस्त्धागत त्रास्दी सजूज रहल जल.
  163. 12:59–13:00रहल जल.
  164. 13:00–13:02आप उदूहाद्धार आप कोसी कबाड.
  165. 13:02–13:03बलकुल.
  166. 13:03–13:10यलकुल, संस्क्रिति और कलाक पतन कगता अचानक से जीवन आम मरन का संगर्ष में बडली जाईता ची,
  167. 13:10–13:14जगन हम सब 2008 कखोसी बाध कविवरन परभाई ची.
  168. 13:14–13:1618 अगस्ट 2008.
  169. 13:16–13:21इटित्ति मित्हला का पूरा भारत का इतिहास में एक तक कर्या दिन के रुप में दर जाची.
  170. 13:22–13:25निपाल का कुशाह में कोसी का पूरवी तदबंद तुतल.
  171. 13:26–13:30श्रोथ समक्री में नासा का सेतलाइट चित्र का जे विष्लेशन आची,
  172. 13:30–13:35उ दिक्हार हो लग ची, जे कोसी आपन पुरान दार सदूसो किलमितर दूर
  173. 13:35–13:38एक ता सरवता नावदार पक्री ले लेग.
  174. 13:38–13:39तूसो किलमितर?
  175. 13:39–13:42राँ, इकोन या सादारन प्रक्रतिग बाना ने चल,
  176. 13:42–13:45ये एक ता मानाव निरमित प्रलै चल,
  177. 13:45–13:50जकर पाचा प्चास वर्षक नीतिगत विफलता अलल पितः शाही चल
  178. 13:50–13:54इक्रा कनेक विस्तार सवंजू जे इद्दबंद तुटलक कोना
  179. 13:54–13:57कारन्द बाडध तखोसी में हमेशा सो अबेच चल
  180. 13:57–14:02इदूहाजार आप मेजे भेल उकर तकनी की और राजनी तिख कारन्ग की चल
  181. 14:15–14:17उ मात्र तीस वर्ष्षल
  182. 14:17–14:18रूक। रूक।
  183. 14:18–14:19एक मिनेट
  184. 14:19–14:21मानेजे बैराज अईटावन में बनल
  185. 14:21–14:23अटीस सालक मियाच्छल
  186. 14:23–14:26तो उनीस्ट्टासी में एकसपार बहूगेल
  187. 14:26–14:27एक दम
  188. 14:27–14:28अटासी में उबैराज
  189. 14:28–14:31अपन तकनी की जीवन समापत कर चुकल चल
  190. 14:31–14:33सरकार के इबात पताचल
  191. 14:33–14:35एहलेल उननीस्सुछ्यासच्छ्मे
  192. 14:35–14:37कूर सेन आयोग
  193. 14:37–14:39एक्ता विकल्प के रूप में
  194. 14:39–14:41दग्मारा बैराज बने बाग प्रस्ताव देने चल
  195. 14:41–14:43तफ्वेरु बनल के एकना
  196. 14:43–14:45उडग्मारा बैराज कहीो नहीं बनल
  197. 14:45–14:46और राजनीतिक लाल पीता शाही
  198. 14:47–14:48बारता नेपाल के आपसी सन्शय
  199. 14:49–14:50और केंद्र अ राज्ज सरकार के भीच
  200. 14:51–14:53पायलेल ताना तानी में उजरागेल
  201. 14:53–14:53बाप्रे
  202. 14:54–14:56इत यह सीथा सीथा लापर वाही आची
  203. 14:56–14:57नतीजा ये भेल
  204. 14:57–14:59जे एक्त अईक्त पार बहुचुकल तद्बंद पर,
  205. 14:59–15:02बीसवष्दरी कोसिक पुरा दबाव रहल,
  206. 15:02–15:04आ अन्तह दूहाजार आप में तूटीगेल.
  207. 15:04–15:08जे तद्बंद उनीस्वट्फी में रेटायर भोज़ बखचा ही चेल,
  208. 15:08–15:13अखरा पर 2008 दरी लाको लोकक जीवन तिकायल जेल
  209. 15:13–15:17इत सीथा सीथा हत्याक प्र्यास जकान ची
  210. 15:17–15:22आएते स्रोट समागरी में आम विश्वेशरीया का जे उदारन देल गयला ची
  211. 15:22–15:24उबहुत सतिक लागे ता ची
  212. 15:24–15:28अग, विश्वेश्वरएईजा जी के उदारन एक दम आखी खोले वाला ची
  213. 15:28–15:31अजे ख्रिष्न राज सागर बान्द बनेने चला
  214. 15:31–15:35उकर प्रक्रिया की चल, जे एकर तुलना एक ते केल गयला ची
  215. 15:35–15:39देख।, विश्वेष्वरएईआ बारत कमहांतम अंजीनेर चला
  216. 15:39–15:43जखन उ कावेरी नदी पर क्रिषन राज सागर बान्द बनेने चला
  217. 15:43–15:48तो उवही समयक महांगा विदेशी सीमंट कप प्रतिच्छा नहीं केलनी
  218. 15:48–15:55उ अस्तानिय बालु पातर आ इटक बुकनी कम मिला कई इक ता विषेश प्रकार एक सुर्की तयार केलनी
  219. 15:55–15:59उ एक मजबुद चल जब बान्द आएदरी ताड अची
  220. 16:00–16:01सब से पहिग बात इचल
  221. 16:02–16:06जब उस्वेम राती राती बहरी लंपक इंजोत में ताड बहुक
  222. 16:06–16:09मस्दूर इंजीनेर संकाज करभाई चला
  223. 16:09–16:11हुनकर नियत साफ चल
  224. 16:11–16:16आ एकर तुलना जखन हम कोसिक तटबंध संक रेए ची तक्की देखा बैटची.
  225. 16:16–16:23कोसिक ब्रस्ट तटबंध निरमाड में थेके दार आ अवियंताक मिली भगद सं कच्चा काजबहल.
  226. 16:23–16:29बालुक भूरिक बडला में ब्रस्ट चारबहल ता इ अस्पष्ट बहजाइत ची,
  227. 16:29–16:34जि समस्या कोसी नदिक पानी मनही, बलकी हमर वेवस्ताक नियत में चल.
  228. 16:34–16:37इबहत पएग अंतर विरोद है ची.
  229. 16:37–16:43और जो हम एही पत्रिकाक उही अंककक राश्ट्रिये आ अंतर राश्ट्रिये परिद्रिष्य दिस देखी,
  230. 16:43–16:46ते इ अंतर विरोद और गेहर ब हो जाएत छी.
  231. 16:46–16:53एक दिस हम पडे ची, जे बारत कचंद्रयान एक सबھलता पुरवक चान्दक कच्चामे पहुच गे लच्छे.
  232. 16:53–16:57आप अंतरिखष में हम सब जंडागार रहल ची.
  233. 16:57–17:02एक्दम विश्वनात आनद, शत्रन्जक विश्व चंप्यंशिप जीत रहल चतिन,
  234. 17:02–17:09अर्विन्द अदिगा के हुंकर उपन्यास दवाइत ताइगर लेल मैन भुकर पूरसकार बेटी रहल चनी,
  235. 17:09–17:39अज़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़�
  236. 17:39–17:41आई ये हमर मुख्यविन्दू अचे
  237. 17:41–17:44इक कतिक अजीब विरुद़ा बास अची
  238. 17:44–17:48जे एक दिस राश्ट्रिया आ अन्तर राश्ट्रिया स्थर पर
  239. 17:48–17:51साहित्तिक सरवोच्य सम्मान बातल जार है लची
  240. 17:51–17:53साहित्तिक उच्सव मनोल जार है लची
  241. 17:53–17:56मुदद दो सर देस मिठला में जे सहित्ते कार
  242. 17:56–17:59अपन भाशा अश्वास्त्रीय संगीत ले लडी रहल चती
  243. 17:59–18:02अग्रालेल कोनो सरकारी वेवस्तान नहें चे.
  244. 18:02–18:03दिलकुल.
  245. 18:03–18:05एक दिस भारत का तकनीक चान्द पर
  246. 18:05–18:07चंद्र यान पुचाओ रहल अची
  247. 18:07–18:15विदंबना वास्तब में उही समे का समपुन भारत का याथार्त है थाथ है और संगे संग एई अंक में मुमबैक आतंग्वादी हम्ला जे चब्भी सिगारा के भेल चलो उक्रो जिक्र आचे.
  248. 18:15–18:18आप उत पुर देश के हिलादेने चलो.
  249. 18:18–18:26अद्र तब बवाद का यादार्त छ़ी और संगे संग एई अंक में मुमबैक आतंगवादी हम्ला जे शबभी सिगारा के भेल चलो उक्रो जिक्र अचे
  250. 18:26–18:29आप उत पुर देश के हिलादेने चलो
  251. 18:29–18:34बूजोजे इ पत्रिका जगन इसब गतना के एक कथा कर करे तुकराम उम्बले के जे श्रद्धानजली देल गेल अची
  252. 18:34–18:39औदेखावे तची जे इसमय राश्ष्र लेल कतिक पैग उतल पुतल के चल
  253. 18:39–18:44इक दिस कोसी के बादिग विवीशिका, जटे लोक आपन गर आगन हेरा रहल चला.
  254. 18:44–18:50तो सर्दिस मुमभी में आतंगवाद से संगर्ष, जटे लोक आपन प्रानक आहुती दे रहल चला.
  255. 18:50–18:56अते सर्देस अंप्रिक्ष आखेल में राश्व्री ए गव्रव्जि देश के उमीद्द दराहल चेल.
  256. 18:56–19:01बूजोजे य पत्रिका जगन य सब गटना के एक कथा कगग प्रस्तूत करओत छी,
  257. 19:01–19:05ते इस सही आर्ठ में एक जीवन्त ताईं कैप्सूल बनी जाईत छी.
  258. 19:05–19:08मुदा एते हमरा एक्ता बातक प्रशंसा करे परत
  259. 19:08–19:08की?
  260. 19:08–19:16स्रोत समगरी में कोसी वा कोनो विफलता कलेल, कोनो राजनेटिक दलक आलोचना वा प्रशंसा नहीं केल गेल गछी
  261. 19:16–19:24इबहुत निश्पक्ष रूप से केवल शासन तन्तरक विफलता अ केंद्र राजक नीतिगत कमी के दिखावैं तची.
  262. 19:24–19:27इग्दम इएक ता विषुद्द विष्लिषन अची.
  263. 19:27–19:32बादिक समय में इस्कूल कौलेज में गर्मिक शुट्टिक बदला, बादिक शुट्टी दबाक,
  264. 19:32–19:35जे व्यवाहारिक सुजाव एह में देलगेल अची,
  265. 19:35–19:39उजन जीवन क्यतार्थ सज्जुल शोच के देखावैं तची,
  266. 19:39–19:44जे दिल्लिक वातानु कुलित कमरा में भैसल योजना कार नहीं सुची सके चे थी
  267. 19:44–19:47आँ, उ ग्राउन्ट र्यालिती आची
  268. 19:47–19:51तजेहन हमर उद्देश शिचल, आएक एगाहन विमर्ष
  269. 19:51–19:55हमरा सब के विदेज को ही, दिजिटल क्रान्ती सलोग को,
  270. 19:55–19:59विद्यापतिक विलुप्त होएज शास्त्रिय दूंदरी पहुच्लक
  271. 19:59–20:03हम सब गजेंद्र ताकृर्क तकनीकी महा यग्यके बुजलों
  272. 20:03–20:06राज्मोहनजाख साहितिक भिबाकी के परखलों
  273. 20:06–20:13एक्दम, अकोशिक भ्यावत रास्दिक पच्धांक, पच्चास वरसक लाल फीता साही के देखलो,
  274. 20:13–20:20एकर संगे संग राश्ट्री या गोरव अ बलीदानक जे परीद्रिष्च्छल उक्रो एक ता अबहुद्पृ यात्रा केलो.
  275. 20:20–20:27इजे ग्यान हम सब आई एश रोथ सप्राब्द किलू, उ समाजक लेल मात्र किचु पुरान गटनाक सुचना नहीं आची,
  276. 20:27–20:34इजे हमरा सवके एबुजवाक मुखा देत ची, जे कुनो समाजक निरमान वा उकर पतन कोना होई तची.
  277. 20:34–20:35आची
  278. 20:35–20:39उकर निर्मान मात्र एटा पाथरक मकान से नहीं होई तची
  279. 20:39–20:43उकर निर्मान होई तची अपन भाशाक सन्रक्षन से
  280. 20:43–20:46अपन कला अ संगी तक सम्मान से
  281. 20:46–20:51अपन मुल भुद दाचा जिना बाद, नहीर, अन नीतिक मजबुती से
  282. 20:51–21:02जखन ए में से कुनु एक ता क्हम्बा कमजोर होई तची, तची समाज्क सवरुद दग्मगा जाई तचे, जगरा हम सब कोसिक भाडी आराम रांगजिक पीडा में देख लहु।
  283. 21:02–21:07बिल्कुल सही बात, आब ए विमर्ष्छ से विदालिबाक समयाविगे लच्छे,
  284. 21:07–21:11मुदा राज मोहनजा को उबात हम्रा बार बार मोन पडे रहल आच्छे,
  285. 21:11–21:17उखने चला हा, जजदे एक बहुतिक सुख सुविदा बड़ल, नैतिक मुल्यक हरास भेल.
  286. 21:17–21:47आप आप आप अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अ�
  287. 21:47–22:00जते हमरा सबखलगस सुचना कबाड आचे, तकनिक कबहरमार आचे, यूनिकोड आचे, इंटनेट आचे, की हम सब आपन भाशा असंसक्रिती के वास्तों में जीवित राखी रहो लग ची?
  288. 22:00–22:06अग, वह मात्र उक्रा दिजिटल आरकाय में एक टिजिटल मुजिम कवस्तू में बडली रहल ची?
  289. 22:06–22:12इएक टा एहन प्रश्न ची जक्रापर समाजेक गंभीता सा विचार करभा कावषकता आची.
  290. 22:12–22:16जे की इटकनीक हमर कलाक आतमा के बचार रहल ची,
  291. 22:16–22:20वा बस वो कर एक स्रे निकाली का सहेज रहल अची
  292. 22:20–22:22जकर भीतर प्रान नहीं अची
  293. 22:22–22:24एक रपर विचार ज़ोर काईल जाए
  294. 22:24–22:27हमर यी विमर्ष सून्बाकलेल बहुत-बहुत दन्नेवाद

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वर्ष 2008, जगन भारतक चंद्र्यान एक चान्दक कक्षादरी पहुच रहल चला, विश्वनात आनन्द, शत्रनजक विष्व चामप्यन्षिप जीत रहल चला, मने राश्ट्री एस तर पर पैक पैक साहित्तिक पुर्स्कार गूश्ना बहरल चल. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� समर्पित लोक एक ता प्राचीन भाशा अवकर साहित्यक के अंटरनेट पर बचाई विकलेल एक ता अबहुत पूर्व संगर्ष करहल चला ता स्वागत अजी आहा सबख, हमरे स्गेर अनवेशवण में अर आई हम सब एक तब बहुत गेर अप प्रासंगिक स्रोट सामगरी पर विमर्ष करहल ची. ये आची विदे है, यी पत्रिका, मने मेठिलीक प्रथम पाखषिक यी पत्रिका, और उकर मुद्रित रुप सदे है. बूजु जे एकोनो सादारन पत्रिकाक पन्ना नहीं अचे हम्रा लेल ये एक ता ताइम क्यब्सूल्जका आचे हमर आई दे एक ची जे हम सभ एबूजी जे कोना एक ता प्राचीन भाशा आदूनिक तकनीककक संगे अपन अस्तित्वक लेल लडी रहल अचे आ, कोना साहित्य, संगीत, अप्राक्रोतिक आप्दाक संगर्ष्श से, कोना समाजक निरमाड वब पतन होईत आचे. एक दम सही कहलू, इश्रोथ समक्री, वास्तब में हम्रा सब के, एक तब बहुत व्यापक चित्र देखार अल आची. सादारनतिया होईत की आची, जे इतिहास के बस एक ता मुक दस्तावेज मानिलियल जाई तचे. मुदा विदेहे का इ अंग, जे मुख्हि रुप से 2008 और 2009 काल काल काचे, उस्पस्ट करेत अचे जे कोना तकनिक, संस्क्रिति अस्सरकारी नीति सब के एक दोस्रा से सीधा सरो का रची. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ ज़रक, चवपाल, वा भोज पत्र से निकल के, इंटरनेटजका आदूनिक पतल पर अबईतची, तो अगर यात्रा कहन होईतची, इस वच्ते गजब लागगेतची. इब भद रोचक यात्रा आचे. जो हम सव, दुई हाजार इस्विक आस्पास के बात करी, उ अ इंटरनेट पर मेठलिक उपस्तिती दर्ज करेबाक प्रे आश शुरुकेलनी शुरुमे तो यहु जीो सिटीच पर साइट बनाल गिल मुदा उसब मुझद साइट तक इचे दिन में दिलीट भजाई चल ना आप, यही ता समस्स्या चल तईी प्रक्रिया रुकल कोना, इदिजिटल उपस्तिती इस्थाइ कोना भेल इबुज़ब बहुत जरूरी एचे. उही समें सर्वर अ डोमेन आइकाल के जगा सुलभ वस सस्तानी चल. अग़ अग़ मुदा संगर्ष जारी रहल आप पाज जुलाई 2004 के भाल सरीक गाच मने द्विदेग.com डोमेन अस्तित्मे आएल इंटरनेटक विषाल पतल पर मेठिलिक प्रतम अदिकारिक वेब उपस्तितिक रूप मे बहुत अटिहासिक कडम चल बाप्रे, तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � बवाज्टा अगर बवाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्टावाज्� तवास्तव में हो केवल एक ता चित्र वा दिसाईज्यन जेहन होई चल माने अकर कोनो दिजितल वाल्यू नहीं चल इक दम नहीं जा आहा अपन कमठूटर पर कोनो खास फाँंत में मैठली में किचु लिख लाँ आद दुस्रा व्यक्ती के एमेल के लाँ अगर अगर अगर कुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� तो बवागा दिलिक खुनो अख्चर युनी कोड़ मे लिखे ची तो दून्या कोनो भी कमपुटर वा मोबाल उक्रा उख्चराक रूप में पच्चानत. आप विदे ही काज कर कर मैठ्टिलिके अन्टरनेटक मुख्ध्य दारा में लाभी देलग. बलकुल आब भूजल हूँ आईजे तिरहुता से देवनागरी लिप्यान्तरन, काजबेल, उकर की आथ छल? तिरहुता ता हमर पुरान लिपी आची नहीं आआ, तिरहुता मैठिलीक आपन प्राचीन लिपी आची, जख्रा मितेलाक्षर से हो कहल जाईता चे. हमर सब के पाएक प्राचीन पोठी आपनजी जे मने वन सावलिक रिकोड चे उसब तिरहुता में ताल पत्र वा भूजपत्र पर लिख हल अचे मुदा आदूनिक पीडी तदेवनागरी पड़े तचे तिरहुता तब बहुत कम लोग जने चती यह तब आत आथ है, तगजेंदर ताकूर आ पनजिकार विद्यानन्द जाजी जे काजकेलनी उई चल जे उही पुरान पोथी सब के दिजितल इमेजिं, मने शकनिंग केल गेल आप फेर उक्रा तिरहुता से देव नागरी में लिप्यान्तरन करल गेल जाई से आदूनिक पाथक उक्रा पडी सकती इत तश्छ्मुज भगीरत प्रैयाश्चल राई शोलग हन्द में शब्द कोश बनावल गेल जते कमपूटर अविग्यानक शब्दावली से हो गड़ल गेल आई यस सब को मुज सरकारी संस्ता नहीं कि कि खिछु समर्पित लोग आपन स्थर पर कार अजला इब भद प्रेरना दाया कचे मुदा एता हमार एक ता प्रष्न छे आपना लागाई तचे जे पुछ़ा बहुत जरूरी आचे आपना पुछु श्रोथ सामगरी कहत ची जे ये एक ता विकिंद्रिक्री सहित्तिक आन्दोलन चल, जे ते प्रकाशक अपाट्खक बीचक दूरी कथम बहुगेल. मुदा जकन अंटनेट पर भिना कोन समपादकक वा गेट कीपरक, रोक तोकक लोक लिखाई लागल, तक की एक्रा से साहित्ते कस्तर नहीं कहसल मैं कोनो चननी ने रहला से ये तफ्री फरोल बहुगेल है थे ये एक तद सबहवी काशंका जे मुदा एही स्रोथ समगरेक परप्रेच्ष्चचन देखी तो उही समेख तपाग मिथाखी चल जे मैठ्री में जे लिख़च्छतें से उक्रा पड़़िच्छतें माने पात्ख आलेखच एक छोट चीन गुट्चल? एक दम. इंटरनेट उही एक अद्गार के तोड़्दिलक. विकेंद्री करन का अर्थ एई नहीं चल, जो गुणवत्ता कहसी गेल. बलकी एकर अर्थ एचल, जे प्रतिबा दूर दराजा गाँ मेवा विदेश मेवैसल चल, जक्रा कोनो पत्रिका चापे लेल तयान नहीं चल, उक्रा एक्तम वंच बेट गेल. तसाहित ते एक्ता चोट का गेरा से निकली कर वेष्विग बहुगेल? आदा राज्मोहन्जा जे आईस रोट समगरी मा बात उठाएट चतिन और हमरा सोचे बात मजबोर कोरई तच्छे तक्निक तब आशा के एक देध ड़ाउ दे लग, ब्रानत तच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्� अपकणे का भी जाएच्छी मित्लाक संगीत अ सहीत्यपर अब बड्द मार में क्हन्डाचे विदे हमें स्वर्गी या पन्टित रामाशेज्जा राम्रंक कजे सक्षाटकार आचे उस्पप्ष्ट रूपसे संगीत क्डोहनक बात करे तच्छित उ अई अई प्ष्ट रूप्से संगीत क दोहनक बात करे तच्ट. रामरंग जीक उ सक्षात कार बहुत गंभी रच्च, उ विद्यापती गीट के मुख्य रूप्स दूब भाग्म बाटे च्छतन, पहिल अची पदगायन शेली, जे पुनरूपस शास्त्री अग आर्दशास्त्री आच. एक रकोन उदारन आची स्रोट सामगरी में? आँ, जेना नंद्क नंदन कदम बक्तरुतर. इए उ रचना आएच जक्रा मे राग आतालक कथोर नियम आएच. अदुसर इज लोक वा ग्रामीन संगीत जना उगनारे मुर कती गिला आप, इद जनजन के कंच में आचे भिल्कुल, तर रामरंग जी का चिन्ता इएज जे विद्ध्यापतिक जे ग्रामीन गिद आच, अखरात महिला सब अगामक लोक बडनीग जगा अपने लोक कंथ में सुरक्षित रखने चाती. मुदा जे शास्त्रिया शेली करचना आईच अखर गयन उजरा रहा लेज. एत छिन्ताख विशय अचे. अ, मित्छिला वर्त्मान में शास्त्रीय संगीत सशुन्य भर्रहलेज मुदाएकर कारन की आचे, जे विद्ध्यापती समपुण मित्छिलाक प्रान चती, उनकर शास्त्रीय संगीत अचानक सविलुप्त कोना भर्रहलेज एकर कारन बहुत सब चतेज, जे रामरंग जी बतवएच्छती, पलायन आद उपभोक्ता वाद, पन्दित रामच्टर मलिक, आपन्दित स्याराम तिवारी जका, दिगगज लोकनिक जे द्रुपजशेली, वाशास्त्रिय परमपर आच्छल, उक्रा अगला पीडी ने अपना सकल. नवका पीड़ी उक्रा में समवे ने दे बचाहाता चे. आज संगे संग रामरंग जी एक ता कटू याथार्द ददिस इसारा करे चती. उ कहे चतीन जिस समपूरन भारत में अपन संसक्रिती के चूरे में वोरे में जेते क मेठिल अगवाईल चातिन तेना आन कुनो देशक लोक नाए बाप्रे ये तो बहुत कढवा सत्या चे जे लोग मित्ला सा बाहर गेला हा रोजगार अख्लेल वाशिक्चाख्लेल वो आपन मात्री बाशा से एक दम कडी गेला उनका मम्मी ड़ादी संस्क्रितिक चकर में इखाई में गर वोई चनी जे हमर बच्चा कि त मैठली बाजब नाबई च्यक इस च्छ मुछ बहुत दुखगा दाछी आई आई मात्र संगी तक छिन्ता नया जे राज्मोहन जा जिनका विदेख का श्वोद समगरी में बोद सम्मान 2009 बाख लेक है जे हुंकर जे साख्षात का रख्छे उता साहित टिक वर्तमान इस्तिती पर बहुत बडगा प्रष्न्चिन लगा दित ची राज्मोहन जी क बात इक दम सपष्ट आचे उनकर मानबची जहना-जहना बहुतिक सुख्सविदा बड़ल अचे समाज में उचनेटिक मुल्ले का राज भेल अचे मुदा एहे से भेशी उ समिक्शा और समालोचनाक जे आदूनिक इस्तितिया चे उक्रापर जे भेबाक टिप्नी केलनिया चे अब भी देजान अखर अगर बाज़ा नाज़ा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा परजादा पर अगर रच्ना कतबो नीख है उक्रा दरकिनार कर देल जाते ची इक ता एहने कांगी द्रिष्टी आफी जते रच्ना के गुन्दोषक आदार पर नहीं बलकी गुट्बाजीक आदार पर मुल्यांकन भारो हो लगा ची बल की गुट्बाजिक आदार पर मुल्यांकन भारो हल अची इक कलब वली मान्सिकता सहिते कलेल जहर ची राम्रंग जीक शबद में विद्यापतिक गीत मात्र मनुरंजन नही अची इं मित्लाक परीचे पत्र चे आई, परिचे पत्र कतिक नीक बात कहलनी जई परिचे पत्र हिरागेल, जई कला गुट्भाजी अब रोतिक तक भेंट चडीगेल ता आहाक भाशा मात्र इंटरनेट का दिक्षनरी मसुरक्षित रहके की करत, उक रात्मा तम मरी चुकल रहत. यहे है उ बिन्दू अची जटे हमरा लागे तची जे इश्वोट समगरी अपन सबसन महत्वपून पक्ष दिस अवए तची. राम रंगजी आर राज मोहनजा जे एही सान्सक्रितिक अवएचारिक शरन के बात कोर अल चला उओ उई समझ में भहलो जकन मित्ला के माटी एक ता आखल्पने प्रक्रितिक अव्यवस्त्धागत त्रास्दी सजूज रहल जल. रहल जल. आप उदूहाद्धार आप कोसी कबाड. बलकुल. यलकुल, संस्क्रिति और कलाक पतन कगता अचानक से जीवन आम मरन का संगर्ष में बडली जाईता ची, जगन हम सब 2008 कखोसी बाध कविवरन परभाई ची. 18 अगस्ट 2008. इटित्ति मित्हला का पूरा भारत का इतिहास में एक तक कर्या दिन के रुप में दर जाची. निपाल का कुशाह में कोसी का पूरवी तदबंद तुतल. श्रोथ समक्री में नासा का सेतलाइट चित्र का जे विष्लेशन आची, उ दिक्हार हो लग ची, जे कोसी आपन पुरान दार सदूसो किलमितर दूर एक ता सरवता नावदार पक्री ले लेग. तूसो किलमितर? राँ, इकोन या सादारन प्रक्रतिग बाना ने चल, ये एक ता मानाव निरमित प्रलै चल, जकर पाचा प्चास वर्षक नीतिगत विफलता अलल पितः शाही चल इक्रा कनेक विस्तार सवंजू जे इद्दबंद तुटलक कोना कारन्द बाडध तखोसी में हमेशा सो अबेच चल इदूहाजार आप मेजे भेल उकर तकनी की और राजनी तिख कारन्ग की चल उ मात्र तीस वर्ष्षल रूक। रूक। एक मिनेट मानेजे बैराज अईटावन में बनल अटीस सालक मियाच्छल तो उनीस्ट्टासी में एकसपार बहूगेल एक दम अटासी में उबैराज अपन तकनी की जीवन समापत कर चुकल चल सरकार के इबात पताचल एहलेल उननीस्सुछ्यासच्छ्मे कूर सेन आयोग एक्ता विकल्प के रूप में दग्मारा बैराज बने बाग प्रस्ताव देने चल तफ्वेरु बनल के एकना उडग्मारा बैराज कहीो नहीं बनल और राजनीतिक लाल पीता शाही बारता नेपाल के आपसी सन्शय और केंद्र अ राज्ज सरकार के भीच पायलेल ताना तानी में उजरागेल बाप्रे इत यह सीथा सीथा लापर वाही आची नतीजा ये भेल जे एक्त अईक्त पार बहुचुकल तद्बंद पर, बीसवष्दरी कोसिक पुरा दबाव रहल, आ अन्तह दूहाजार आप में तूटीगेल. जे तद्बंद उनीस्वट्फी में रेटायर भोज़ बखचा ही चेल, अखरा पर 2008 दरी लाको लोकक जीवन तिकायल जेल इत सीथा सीथा हत्याक प्र्यास जकान ची आएते स्रोट समागरी में आम विश्वेशरीया का जे उदारन देल गयला ची उबहुत सतिक लागे ता ची अग, विश्वेश्वरएईजा जी के उदारन एक दम आखी खोले वाला ची अजे ख्रिष्न राज सागर बान्द बनेने चला उकर प्रक्रिया की चल, जे एकर तुलना एक ते केल गयला ची देख।, विश्वेष्वरएईआ बारत कमहांतम अंजीनेर चला जखन उ कावेरी नदी पर क्रिषन राज सागर बान्द बनेने चला तो उवही समयक महांगा विदेशी सीमंट कप प्रतिच्छा नहीं केलनी उ अस्तानिय बालु पातर आ इटक बुकनी कम मिला कई इक ता विषेश प्रकार एक सुर्की तयार केलनी उ एक मजबुद चल जब बान्द आएदरी ताड अची सब से पहिग बात इचल जब उस्वेम राती राती बहरी लंपक इंजोत में ताड बहुक मस्दूर इंजीनेर संकाज करभाई चला हुनकर नियत साफ चल आ एकर तुलना जखन हम कोसिक तटबंध संक रेए ची तक्की देखा बैटची. कोसिक ब्रस्ट तटबंध निरमाड में थेके दार आ अवियंताक मिली भगद सं कच्चा काजबहल. बालुक भूरिक बडला में ब्रस्ट चारबहल ता इ अस्पष्ट बहजाइत ची, जि समस्या कोसी नदिक पानी मनही, बलकी हमर वेवस्ताक नियत में चल. इबहत पएग अंतर विरोद है ची. और जो हम एही पत्रिकाक उही अंककक राश्ट्रिये आ अंतर राश्ट्रिये परिद्रिष्य दिस देखी, ते इ अंतर विरोद और गेहर ब हो जाएत छी. एक दिस हम पडे ची, जे बारत कचंद्रयान एक सबھलता पुरवक चान्दक कच्चामे पहुच गे लच्छे. आप अंतरिखष में हम सब जंडागार रहल ची. एक्दम विश्वनात आनद, शत्रन्जक विश्व चंप्यंशिप जीत रहल चतिन, अर्विन्द अदिगा के हुंकर उपन्यास दवाइत ताइगर लेल मैन भुकर पूरसकार बेटी रहल चनी, अज़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़� आई ये हमर मुख्यविन्दू अचे इक कतिक अजीब विरुद़ा बास अची जे एक दिस राश्ट्रिया आ अन्तर राश्ट्रिया स्थर पर साहित्तिक सरवोच्य सम्मान बातल जार है लची साहित्तिक उच्सव मनोल जार है लची मुदद दो सर देस मिठला में जे सहित्ते कार अपन भाशा अश्वास्त्रीय संगीत ले लडी रहल चती अग्रालेल कोनो सरकारी वेवस्तान नहें चे. दिलकुल. एक दिस भारत का तकनीक चान्द पर चंद्र यान पुचाओ रहल अची विदंबना वास्तब में उही समे का समपुन भारत का याथार्त है थाथ है और संगे संग एई अंक में मुमबैक आतंग्वादी हम्ला जे चब्भी सिगारा के भेल चलो उक्रो जिक्र आचे. आप उत पुर देश के हिलादेने चलो. अद्र तब बवाद का यादार्त छ़ी और संगे संग एई अंक में मुमबैक आतंगवादी हम्ला जे शबभी सिगारा के भेल चलो उक्रो जिक्र अचे आप उत पुर देश के हिलादेने चलो बूजोजे इ पत्रिका जगन इसब गतना के एक कथा कर करे तुकराम उम्बले के जे श्रद्धानजली देल गेल अची औदेखावे तची जे इसमय राश्ष्र लेल कतिक पैग उतल पुतल के चल इक दिस कोसी के बादिग विवीशिका, जटे लोक आपन गर आगन हेरा रहल चला. तो सर्दिस मुमभी में आतंगवाद से संगर्ष, जटे लोक आपन प्रानक आहुती दे रहल चला. अते सर्देस अंप्रिक्ष आखेल में राश्व्री ए गव्रव्जि देश के उमीद्द दराहल चेल. बूजोजे य पत्रिका जगन य सब गटना के एक कथा कगग प्रस्तूत करओत छी, ते इस सही आर्ठ में एक जीवन्त ताईं कैप्सूल बनी जाईत छी. मुदा एते हमरा एक्ता बातक प्रशंसा करे परत की? स्रोत समगरी में कोसी वा कोनो विफलता कलेल, कोनो राजनेटिक दलक आलोचना वा प्रशंसा नहीं केल गेल गछी इबहुत निश्पक्ष रूप से केवल शासन तन्तरक विफलता अ केंद्र राजक नीतिगत कमी के दिखावैं तची. इग्दम इएक ता विषुद्द विष्लिषन अची. बादिक समय में इस्कूल कौलेज में गर्मिक शुट्टिक बदला, बादिक शुट्टी दबाक, जे व्यवाहारिक सुजाव एह में देलगेल अची, उजन जीवन क्यतार्थ सज्जुल शोच के देखावैं तची, जे दिल्लिक वातानु कुलित कमरा में भैसल योजना कार नहीं सुची सके चे थी आँ, उ ग्राउन्ट र्यालिती आची तजेहन हमर उद्देश शिचल, आएक एगाहन विमर्ष हमरा सब के विदेज को ही, दिजिटल क्रान्ती सलोग को, विद्यापतिक विलुप्त होएज शास्त्रिय दूंदरी पहुच्लक हम सब गजेंद्र ताकृर्क तकनीकी महा यग्यके बुजलों राज्मोहनजाख साहितिक भिबाकी के परखलों एक्दम, अकोशिक भ्यावत रास्दिक पच्धांक, पच्चास वरसक लाल फीता साही के देखलो, एकर संगे संग राश्ट्री या गोरव अ बलीदानक जे परीद्रिष्च्छल उक्रो एक ता अबहुद्पृ यात्रा केलो. इजे ग्यान हम सब आई एश रोथ सप्राब्द किलू, उ समाजक लेल मात्र किचु पुरान गटनाक सुचना नहीं आची, इजे हमरा सवके एबुजवाक मुखा देत ची, जे कुनो समाजक निरमान वा उकर पतन कोना होई तची. आची उकर निर्मान मात्र एटा पाथरक मकान से नहीं होई तची उकर निर्मान होई तची अपन भाशाक सन्रक्षन से अपन कला अ संगी तक सम्मान से अपन मुल भुद दाचा जिना बाद, नहीर, अन नीतिक मजबुती से जखन ए में से कुनु एक ता क्हम्बा कमजोर होई तची, तची समाज्क सवरुद दग्मगा जाई तचे, जगरा हम सब कोसिक भाडी आराम रांगजिक पीडा में देख लहु। बिल्कुल सही बात, आब ए विमर्ष्छ से विदालिबाक समयाविगे लच्छे, मुदा राज मोहनजा को उबात हम्रा बार बार मोन पडे रहल आच्छे, उखने चला हा, जजदे एक बहुतिक सुख सुविदा बड़ल, नैतिक मुल्यक हरास भेल. आप आप आप अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अ� जते हमरा सबखलगस सुचना कबाड आचे, तकनिक कबहरमार आचे, यूनिकोड आचे, इंटनेट आचे, की हम सब आपन भाशा असंसक्रिती के वास्तों में जीवित राखी रहो लग ची? अग, वह मात्र उक्रा दिजिटल आरकाय में एक टिजिटल मुजिम कवस्तू में बडली रहल ची? इएक टा एहन प्रश्न ची जक्रापर समाजेक गंभीता सा विचार करभा कावषकता आची. जे की इटकनीक हमर कलाक आतमा के बचार रहल ची, वा बस वो कर एक स्रे निकाली का सहेज रहल अची जकर भीतर प्रान नहीं अची एक रपर विचार ज़ोर काईल जाए हमर यी विमर्ष सून्बाकलेल बहुत-बहुत दन्नेवाद

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