MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

निर्दोषकें_जेल_आ_भ्रष्टाचारक_हिलैत_पुल.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.38867)
Duration
20:52
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:10विचार करु, अग्दिस दिल्लीक तिहार जेल के लिएक ता अनार कालकोट्री चे, अव ते एक ता पडिक पडिक आखिवला तमिल यूवक बने चे.
  2. 0:10–0:13जिकर आपन भाषा कलावा कुछोने बुजल चे.
  3. 0:13–0:16अखरा एदरी ने बुजल जे एग जेल में की आख चे
  4. 0:16–0:21करन मने अखर अद्योग भाशा ने वे चे, सब टक जे भाशा चे उने बुजल चे
  5. 0:21–0:26आद राज्जा की जे वेवस था चे, अखरा बनू राखवा में एक दम सटी का निपून चे
  6. 0:26–0:35ता एक दिस यी बहयनक द्रिष छे आद दूसर दिस उही जेल सब बहुत दूर गंगा नदी पर बनल एक ता नवूका पूल
  7. 0:35–0:37जे बने त देरी हीले लागल चे
  8. 0:37–0:42पलकु एक पूल आपन उदगातन सबःने ही कापी रहाल चे, हीली रहाल चे
  9. 0:42–0:46मस्दुर सब आनन्फानन में उकर मरमत करो हल चात.
  10. 0:46–0:48मैंने, इक कते क पैग विरोदा बहाँस चे ने.
  11. 0:48–0:50आद तो उते ता हम आबई चाही चे.
  12. 0:50–0:54हमरा सभे जे य वेवस्ताच है, जे य सिस्टम चे.
  13. 0:54–0:58उईक ता निर्दोष्की प्हसा का जेल मे रक्भा मे तब बहुत कुशल चे?
  14. 0:58–1:02मुदा अपन बनावल पुलक तब रक्भा मे पुरनता विफल चे.
  15. 1:02–1:07एक दम सही. अखिरी सिस्टम निर्दोष्क के कुईच्वा मे इते क ताकत्वर.
  16. 1:07–1:11मैंनिरमानक काज में इते खुकला की आख चे?
  17. 1:11–1:14देखो, इविरोदा भास कुनो संयोग नहीं चे.
  18. 1:14–1:19इवास्तव में इव्यवस्ताक मुल चरित्र चे.
  19. 1:19–1:22जकनम सब एई दूनो द्रष्यपर विचार करे ची,
  20. 1:22–1:26तई मात्र दूईता �alag alag कता नहीं रही जाए चे.
  21. 1:26–1:30इपने आपन शक्तिक उप्योग लोका के दरे बाकलिल करेच्छे
  22. 1:30–1:34मुदद उबही शक्तिक उप्योग समाजक नीव मजबोद करवाकले नेई करेच्छे
  23. 1:34–1:40बिल्कुल नहीं आए हम सब एही टीत यदार्थक उविस्त्रे परताल करब
  24. 1:40–2:10अगर बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा ब
  25. 2:10–2:14बुजलिया, इकोनो नीरस अकाद्मिक पोठी नहीं चे?
  26. 2:14–2:18एक दम नहीं, इत समाजक तीट यतार्त, ब्रष्टाचार,
  27. 2:18–2:22आम मानविय विडम बनाक एक ता मने सपष्ट दरपन चे.
  28. 2:22–2:27आ, इई पोठी साहित अकादिमिक जे एक ता संकीण दायरा चे ने,
  29. 2:27–2:57यक तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद
  30. 2:57–2:59बागल्पूर मे भेल नहीं
  31. 2:59–3:01आजे अखन दिल्वी में निवास रच्छत्छतिं
  32. 3:01–3:06आपन साहिट्त में विविद्ध्ता के बहुत प्रमुखता से अस्थान देने चतिम
  33. 3:06–3:09जो आप पोतिक अनुक्रमनिका पर द्यान देव
  34. 3:09–3:13तव इक उनो एक विदा वह एक विषेद रही सीमित नहीं चे.
  35. 3:13–3:18एक दम सही. एक रामे मचन्द जे का राजनितिक समाजिक नाटक चे,
  36. 3:18–3:23तव अपारा आत्रेइ सन अतिहासिक नारी वादी नाटक से हो ची.
  37. 3:23–3:28मैंने हम्रती एक तव जना साहितिक बफे हो इच्छे ने,
  38. 3:28–3:39अहन लागल, जते सबखलेल किछनकिछ च्छन, जिना कमलाग भक्ता जिसका बाल नातक च्छन, आदानवीर ददीची सन पोरानिक दाशनिक नातक से हो शामिल च्छन.
  39. 3:39–3:42आदानवीर ददीची सन पोरानिक दाशनिक नातक से हो शामिल च्छन.
  40. 3:42–4:12इद्र्ष्टिकोंक विविद्धात च्याजा बाथ च्याजा बाथ च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याज
  41. 4:12–4:16एक रा मात्र विद्रो कहब सत्यक एक ता पहलू देखव हैते
  42. 4:16–4:21इव आस्तरब में एक ता विस्तार चे एक ता लोग तान्त्री करन चे
  43. 4:21–4:23विस्तार? माने के न विस्तार?
  44. 4:23–4:30माने मुख्यदारक साहित्ते विषेशक साहित्ते अकाद्मीजे का संस्तान समानिता प्राप्तजे साहित्ते चै,
  45. 4:30–4:36प्राया एक्ता विष्यस्त समब्रान्त वर्ग के द्रोयंरुमक विमर्ष्धरी सिम्ध बहजाई चै.
  46. 4:36–4:43अथे बाशा के खास मानकी करन होईच्छे, विषे वस्तु एक खास वर्ग के इर्दगर्द गूमेच्छे.
  47. 4:43–4:48एक दम तव विदेः समानानतर साहित यान्दोलन कजए एई प्रयास च्ए,
  48. 4:48–4:53उसाहित के उही बन्द कमरा से निकाली का, उह खेट खलिहान,
  49. 4:53–4:58जेल का काल कोट्री अनिरमान अस्तल दरी लोजाबा केक्ता बोद्धिक प्रेयास चे.
  50. 4:58–5:03आच्छ, मानी यी समाजक उही लोकक अवाज सहित्ते में लाभे चाहे चे,
  51. 5:03–5:06जोक्डा एक्हन्दरी सहित्ते क विषे नहीं मानल गेल.
  52. 5:06–5:07आप, बलकोल.
  53. 5:07–5:15इजे आहा एश्या पर ताड लोकक अवाजक बात कहलो, से हम्रा सोजे मचन्द नाटकक पहल अंक्दिस लोग जाएच छे.
  54. 5:15–5:19उद्रिश उब शच में बहुत बेचैन करे योल आचे.
  55. 5:19–5:21उद्रिश तिहार जेल वल अद्रिश.
  56. 5:21–5:25आप दियान जेल में मुतलिफ नामके क्यक्ता यूग बनन चे
  57. 5:25–5:30पोथी में उकर शारिरेक चित्रन पैग पैग आखिवला केल गेल जे
  58. 5:30–5:35जे अपने आप में उकरा लाचारिया आश्चारिया के दिखार रहल चे जे उकते आबी गेल
  59. 5:35–5:40सो चुने, उक्रा हबी बुल्ला नामक एक तब पैग तस्कर फसा देने चे.
  60. 5:40–5:45मुतलिव के एक ता प्रेशर कुकर में नशाका पाअडर दोक एक हवाई जहाज से भेजल गेल चल.
  61. 5:45–5:52अज़़ सब से त्रासद बात तए चे उक्रा इबुजले ने चे उक्रा कुकर में की दोगे पट्हाँल गे चे
  62. 5:52–6:02आँ, उ मात्र तमिल भाजे चे आदिल्लिक जेल में अनुवादक के माद्धिम सा उकर वकील तरक दराल चे जे इनिर्दोष चे
  63. 6:02–6:06उतट बेरोजगार चल उक्रा काजक लोप्दा कब फसावेल गिल
  64. 6:06–6:12एता है माने लेक्हक बाशा के मात्र समवादक माद्ध्यम नहीं
  65. 6:12–6:16बलकी सत्ताक एक ता हत्यारक रूप में प्रस्त॥ कर रहल्चातीं
  66. 6:16–6:17अखो ना
  67. 6:17–6:20देखु मुतालिफिक जे इई बाशा संकर चा
  68. 6:20–6:26उ वास्तब में सत्ता और आम आदमी के बीच कषम्वाद हींतक प्रतीक चै.
  69. 6:26–6:30मुतालिक तमिल में कानिकानी के अस्पस्टी करनदर हलचा?
  70. 6:30–6:35मुदा जे व्यवस्ता उकर फैसला करल चै, उकर भाशा नईबुज़े च्छ.
  71. 6:35–6:43एक दम सही ये देखे च्छ, जे सिस्टम में निचात, गरीब और शोषित लोकक अवाज के ना अंसुना कर देल जाए च्छ.
  72. 6:43–6:47उव, उद पुरा तरे अनुवादक पन निरभर च्छै ना.
  73. 7:00–7:01आशा उक्रा पसोने चे
  74. 7:01–7:04बाप्रे, इता बहुत गेहर गब भेल
  75. 7:04–7:07मुदा उही नाटक में एक ता और प्रसंग चे
  76. 7:07–7:09जे हमरा बहुत चकेत के लग
  77. 7:09–7:10कुन प्रसंग
  78. 7:10–7:12उएक ता खौफ्या अदिकारी
  79. 7:12–7:15आ एक ता आतंकी लीडर अक भीचक चे समवाच चे
  80. 7:15–7:21उ आतंकी लीडर आपन बचाव में मीजोरमक लाल्डेंगा कब उदारन दे चे
  81. 7:21–7:26आ, आ, उ कहे चे जे लाल्डेंगा महान निता चला
  82. 7:26–7:28करन उ सरकार सा शांती समजोता किलनी
  83. 7:28–7:33एक दम, उ कहे चे जे लाल्डेंगा आपन जनता के मंजदार में नहीं चोडलनी
  84. 7:33–7:38मुदा हमरा इतर्क बहुत खोखला अप पाकहन्डी लागच छे
  85. 7:38–7:38के?
  86. 7:38–7:43मैंने एक दिस ओ अतंकी लीडर लाल्टिंगाक शान्ती समजोतक नीक माने चे
  87. 7:43–7:45अ सत्ताक शोषक कहे चे
  88. 7:45–7:48अ दो सर देस उक्छुद द्रग्स भेची का
  89. 7:48–7:52मुतालिव जका विरुजगार यूवा सबक भविष्वर्भाद कर आएच
  90. 7:52–7:54आएज एक दम विरुदा भाश चे
  91. 7:54–7:58जे क्रान्तिक नाम पर मुतालिव सन निसाहायक के मोहरा बना रहे लचे
  92. 7:58–8:01उके इख्रान्तिक कोना जायस भोसक अच्छे
  93. 8:01–8:07आजा जे इपाक्श्ण्डक बात उठहेलो, उवही पर गजंद्र थाकुर का प्रार बहुत टिक्षन चे.
  94. 8:07–8:14आपनकी लिटरक इजे तर्क चे, उआसल में उकर आपन आप्राद भोद्ध के चुपपयवाक डाल चे.
  95. 8:14–8:17आपन अवेद सथ्ता के जाएस थेरेवा के लिलने?
  96. 8:17–8:26उ बेवस्ता का कमी के सिस्तम के जे शोषक चरित्र चे तक्रा देखा का आपन गलत काज के सही सिध करे चाहचे.
  97. 8:26–8:35उ खौफिया अदिकारी कहे चे जे आहा के जे सिस्तम चे उ निरबलक सून्वाई नहीं करे चे, ताही लिल हम्रा हत्यार उठाए पडाले.
  98. 8:35–8:44उदा उखर इद तर्क तो उदै खन्द ब हो जाए चे, जगन हम देखे ची, जे उखर क्रान्तिक बुन्याद गरी मुतलिफिक कल्लाचारी पर्टिकल चे.
  99. 8:44–8:52एक दम सा, उखर क्रान्ति कालो पइसा पर चली रहो लखे, उहो एक ता दोसर मचन्द मने कलनायक बन गल चे.
  100. 8:52–8:57जे वेवस्त्तास लडवाक नाम पर वेवस्तास सब भेसी क्रूर भागेल चे
  101. 8:57–9:01बलकल. तई एते जे खुफ्या अदितारी सब देखी भुजी रहाल चे
  102. 9:01–9:04उकरा भुजल चे जे वेवस्ता ब्रष्त चे
  103. 9:04–9:09आँ उखुफिया अदिकारी तः आपन गामक एक तद्रिष्टान्त से हु दई चेने
  104. 9:09–9:11अ बावादाम वलद्रिष्टान्त
  105. 9:11–9:15आँ ख़े चे जे हमरा गामक एक तब लुल्हाजे आपांख चे
  106. 9:15–9:19उब भी सालस इमान्दारी सब पएदल बावादाम जाए चे
  107. 9:19–9:21वूदा उकर जोप्री के जोप्री ए रही गेल
  108. 9:21–9:22आद दूसर दिस
  109. 9:22–9:23दूसर दिस
  110. 9:23–9:25जे पीर बच्चा चे
  111. 9:25–9:27जे समपन आब भेमान चे
  112. 9:27–9:29उगाडी सा भाबा दाम जाए चे
  113. 9:29–9:31आउकर कोथा पर कोथा बनी रहल चे
  114. 9:31–9:33इज द्रिष्तान्त चे
  115. 9:33–9:45इस नाटक का किंद्रिय दर्षन चे, खुफ्या अदिकारी इद्रिष्टान्त दाक, सुईकार करहल चे, जे इस सिस्तम इमान्दारी के दन्दित करेचे अब बेमानी के पुरुसक्रत करेचे.
  116. 9:45–9:55अपीर बच्चा उही शोषक वर्ग कप्रतिक वेल, जे नियो मक पालन करे चे, कश्ट सहे चे, मुदा उकर प्रगती शून्य चे.
  117. 9:55–10:03अपीर बच्चा उही शोषक वर्ग कप्रतिक चे, जे विवस्थाक छिद्रक उप्योग का कच, तरक्की करहल चे.
  118. 10:03–10:09तल लेक्हक एताया स्पष्ट कर रहल चतीन जे आसली मच्चन्द कोनो एकता वकती नहीं चे
  119. 10:09–10:16नहीं चाहे वो हाभी बुल्ला हो वो उतातंकी लीडर इपुरा ब्रष्ट सिस्टमी मच्चन्द चे
  120. 10:16–10:23जाहे में आस्ली तस्कर पक्र सब बाहर रहे चे, आम उतालिव जका पाँ पैडल सिपाही जेल में सजी रहल चे.
  121. 10:23–10:31अखुफिया अदिकारी इस सब भुजही चे, मुदा उएही सिस्तम का एक तप पुर्जा मात्र चे, जे चाही कसे हुए किछनो कसके चे.
  122. 10:31–10:44उ, इज इमन्दारी के दन्दित करबाक बात हा कहलाओ, इग गजेंद्द ठाक। दोसर्नातक गंगा ब्रिज में बहुत भेशी भेशी बहुंकर रूप में सोजा बैच्छे.
  123. 10:44–10:48अग, उनातक ता औरे विछलित करे वल अच्छे
  124. 10:48–10:52एही नातक पहल पलडवक जिद्रुष्ष जे
  125. 10:52–10:55उदिमाग में एक दम्स चब जाएचे
  126. 10:55–10:58गंगा नदी पर बनल एक ता नवका पुलक मरमच चली रहाल चे
  127. 10:58–11:01पुलक अखल उद्खातनो नी बहल चे
  128. 11:01–11:12अद्गातन नहीं भेल चे आँ पहिने ही रहाल चे चारो कात मस्दूर लागल चे मुदा एता है एक ता बहुत प्रतिकात्मग गतना हो इत चे
  129. 11:12–11:15जे उलोग द्हूल बजाईत रहे चे
  130. 11:15–11:19एक दम एक ता लोग जोर जोर सा द्हूल बजाए रहाल चे
  131. 11:19–11:22अखरा दोल बजाबाक काज एही लेल देल गेल चे
  132. 11:22–11:25जाए सव मज्दूरक द्यान बटल रहे
  133. 11:25–11:27दिको दोल बजाबाक एक आज
  134. 11:28–11:30मात्र द्यान बटेबाक लेल नहीं चे
  135. 11:30–11:32एकर निहितारत बहुत गहिर चे
  136. 11:33–11:34के हन निहितारत?
  137. 11:34–11:36उडोल मने विवस्ताक
  138. 11:36–11:39उ पबलिक रिलेशन वा प्रोपगेंडा चे
  139. 11:39–11:42जे पुलक कामपब जे सिस्टमक हिलप चे
  140. 11:42–11:45तक्रा चुपईबाक लेल शोर मचै बैचे
  141. 11:45–11:49आचा मने जकन सिस्टम भित्रुस खोखला बैजाई चे
  142. 11:49–11:51अखसे उ लागे चे
  143. 11:51–11:53तकन सत्ता एहन दोल बजे बैचे
  144. 11:53–11:58आप द़ाईसा आम लोकके उखसब वहिलब सूनाई नहीं पड़े
  145. 11:58–12:04शोरक नीचा भश्टा चारक दबादेवाक यी बहुत क्रूर मुदा यतार्थ वादी प्रतीच फ्रतीच फ्रतीच
  146. 12:04–12:09बाप्रे आओही शोरक भीच गावक दूईता लोकक जी समवाद चे
  147. 12:09–12:12उ कतिक मार्मेक अच्वबहेवाला व्यंगय चे
  148. 12:12–12:16इक दम उदुन्नु गामक लोक आपस में गब करे चे
  149. 12:16–12:19जे इप पुल लिएक रहल चे
  150. 12:19–12:21रहा उख़े चे जे
  151. 12:21–12:26पुलक सिमेंटा बालुसद ता इंजिन्यरा थेके दार गरक चजजआ बनी रहा लग चे
  152. 12:26–12:27तप्प्ल्त तरहिल्बे करत
  153. 12:27–12:31मुदा सबस्च पएग व्यंगयता वो कर उगप च्याए
  154. 12:31–12:33जे अंग्रेज कर बनल्पूल मजबूत हो च्ले
  155. 12:33–12:39आए, उगगे च्ये मुदा इस्वतन्त्र भारत का सरकार के उदुन वनुक माने च्ये
  156. 12:39–12:44इते मनुस्क शब्द का उप्योग उ उ स्वार्ति मनुश्वक अर्ठ्मे कर रहल चे.
  157. 12:44–12:50इसम्वाद स्वतन्त्रता के बादक जे मोहभंग चे उकर सब संस सतिक दस्तावेच चे.
  158. 12:50–12:52मोहभंग को ना?
  159. 12:52–12:57मैं, गामक लोकक लेल, सरकार कोनो दिल्ली में बैसल आमुर्द संस्थान थानेचे,
  160. 12:57–13:03उकर लिल सरकार उ इंजिनिर ठेके दार जे उकर सोजा दिन दहारे ब्रस्ताचार करो रलचे.
  161. 13:03–13:06आजे, जे क्राउ सोजा में देखी रहल चे.
  162. 13:06–13:16एक दम लोकक नजरी में जकन अंगरेज चल, विदेशी चल, शोषक चल, मुदा उकर बनल दाचा मस्वूत होई चल,
  163. 13:16–13:26मुदा अपन देशक स्वतन्त्र भारतक सरकार जकन आबीगेल, तो उनिजी स्वार्त में इतेग दुभीगेल जे लोक उक्रा मनुक कहे लागल.
  164. 13:26–13:31माने जे आपन स्वार्त सवृपर किछु सोची नहां सके चे
  165. 13:31–13:37आपेख्षाचल जिस वतन्त्रता का बाद लोकक हिद्कें प्रात्मिक्ता बहितत
  166. 13:37–13:40मुदबहल एक दिक विप्रीत
  167. 13:40–13:45सारविजनिक समपती केन निजी समपती में बदल्वाख जे इपरमपरा स्वुरुभहल
  168. 13:45–13:49उक्रा एही समवाद मे बहुत निक जका देखाओल गेल जै
  169. 13:49–13:51मुदा एते हमारेक ता प्रष्नच फैज्न चै
  170. 13:51–13:51की?
  171. 13:51–13:55जे नाटक कदोसर पल्लो दिस लजाएच छै
  172. 13:55–13:57की इ नजीन्यर इ �the के दार
  173. 13:57–13:59जे एते खब्रष्ट बहगेल चै तेन
  174. 13:59–14:01उसब शुरुस आहन चला
  175. 14:01–14:03उ ये बहुत निक प्रष्न चब च्याए
  176. 14:03–14:05माने कि उनका लोकनी में देश भक्ती
  177. 14:05–14:07या इमान्दारी कहीो चले नहीं
  178. 14:07–14:09एही प्रष्नकुत्तर
  179. 14:09–14:11नाटक का फ्लाष्बैक में बहेताइच छे
  180. 14:11–14:13आँ, उ पंद्रा अगस्ट उनीसो सभ्टालिस कद्रिष्ष्ः
  181. 14:13–14:15एक दम
  182. 14:15–14:18इंजीनरिं कौलेज मे दिख्षान समारोज चली रहा है जै,
  183. 14:18–14:23नवका इंजीन्यर सब जे स्वतन्त्र भारत का निरमाता चतिन, उशपत लइच्चतिन.
  184. 14:23–14:26आए एक ता बच्चा बहुत जोश में कहे चै,
  185. 14:26–14:30उद्रिश्य देखे का लागत चे जी इसब कतिक आदर्ष्वादी चला
  186. 14:30–14:34उनका लोकनिक मोन में देश बनेला कतिक पेख सबना चल
  187. 14:34–14:38इद्रिश्य उही पीडिक आशावादेक देखा रहे लचे
  188. 14:38–14:42उनका लोकनिक मोन में देश बनेला कतिक पेख सपना चल
  189. 14:42–14:46इद्रिश्ख उही पीडिक आशावादेक देखा रहेल चे
  190. 14:46–14:51जक्रा लागल चल जा आब आंगरेज चली गेल तए देश सवर्ग बनी जात
  191. 14:51–14:55मुदा गजेंद्र ताकृर एते इदेखावे चाहत्छती
  192. 14:55–14:59जे कोना एक ता आदर्ष्वादी वेक्ती जगन असल सिस्तम में आवाई चे
  193. 14:59–15:02तव्योस्ता उकर आदर्ष्खे कोना कुईच देछे
  194. 15:02–15:05एक दम जगन उ एंजिन्यर काज पर आवाई चे
  195. 15:05–15:08आ इमान्दारी सब्पुल बनवाई चाहचे
  196. 15:08–15:10तवोकर सामना तधेकेडारसे होई चे
  197. 15:10–15:13जी, उही ब्रष्ट सिस्टम कप्रतिनी दी चे
  198. 15:13–15:16आधेकेडारक उ दमकी वाला द्रिष्च उ,
  199. 15:16–15:18सच में रोंग्टे कड़ा करे वाला चे
  200. 15:18–15:20तधेकेडार उक्रा अस्पष्ट कही चे,
  201. 15:20–15:23जजग आहा बालू में सीमेंट नहीं मिलायाब
  202. 15:23–15:27जग आहा हमर हिसाप सकाजना करब आउपर कमिष्छन नहीं देब
  203. 15:27–15:29ता हम आहा के जिन्द्गी हराम कदेब
  204. 15:29–15:34आई मात्र दमकी नहीं चे उवास्तामा उ इंजिनिरक वेतन रोक देच्छे
  205. 15:34–15:39इंजिन्यर के बच्चा सब के स्कूल से निकाले दिलजाएचे
  206. 15:39–15:42उक आपन बच्चा सब के गाँ पटाबे परएचे
  207. 15:42–15:46बुजू इतक। कुना आर्थिक ब्रस्टाचार मातर नहीं बहल
  208. 15:46–15:48इता सीथा सीथा ब्लैक मेल चे
  209. 15:48–15:50बिल्कुल ब्लैक मेल चे
  210. 15:50–15:55आई ब्लैक मेल इब ज़बेले पर्याप्त जे ब्रस्टाचार कुनो वक्तिगत पतन नहीं जे
  211. 15:55–15:57ये एक ता संस्तागत मजबूरी जे
  212. 15:57–15:59माने, सिस्तम का मजबूरी
  213. 15:59–16:04आँ, थेके दार कहे चे जे चीफ अईजिन्यर नेटाग दहना हात
  214. 16:04–16:08पहले हम्रे कहने रहे तोरा रोलर किछ नीचा में पिष़डा कदेले
  215. 16:08–16:09बाप रे!
  216. 16:09–16:14मने उपर चीफ इंजीनीरे सन्लोका नेता दरे सबक हिस्सा तैच्से
  217. 16:14–16:15एक दम तैच्से!
  218. 16:15–16:17इपुरा एक ता एक्ता सिस्टम चे
  219. 16:17–16:22यही इको सिस्तम में जगनो एक ता इंजीन्यर इमान्दार बनल रहे चाहे चे
  220. 16:22–16:26तो उई पूरा ब्रस्ष्रंख्लाग लेल एक ता खात्रा बनी जाच्चे
  221. 16:26–16:29असिस्तम उक्रा बड़ाश्ट नहीं करे सके चे
  222. 16:29–16:32उक्रा ब्रष्ट बने लिल मजबूर कदिल जाच्चे
  223. 16:32–16:34इत तो उहिना बेल जे
  224. 16:34–16:37तो उनो लोक के बन्दूक कन लोक पर
  225. 16:37–16:39तास्क महल बनेवागे लिल विवष्किल जाएं
  226. 16:39–16:40नीकूप माचेई
  227. 16:40–16:43जो उ तास्क महल खसी पड़ेद चे
  228. 16:43–16:46तदोश उही लोग पड़ेद जाएद
  229. 16:46–16:49जे उ इमान्दार नी चल वह अक्षम चल
  230. 16:49–16:51मुदगे उ महल बनेबस मना करेद चे
  231. 16:51–16:55तो उकर परिवार पर तुरन्त गोली चलाए दिलजाएत
  232. 16:55–16:57तो उगे अंजिनियराक लग विकल्प की चल?
  233. 16:57–16:58कि चो नहीं
  234. 16:58–17:02उकर अपन परिवार का अस्तित्व बच्ये बाकलेल
  235. 17:02–17:04अपन बचाक बविष्य बचाय बाकलेल
  236. 17:04–17:07अंतित भालु अ सिम्यंट में गपला करे या पडेच थे
  237. 17:07–17:15इई स्वतन्त्रता का बादक जे आदर्ष्चल उकर पतनक बहुत क्रूर मुदब बहुत सत्ति चित्रन चे
  238. 17:15–17:20आअ, आअअअक का इटास्क महल्वला उपमाजे हम दिलीयो,
  239. 17:20–17:25अखर आहा जेना सब खेलो जे ओ अंजीनेर सुईच्छा सब्रष्ट ने भेल,
  240. 17:25–17:27अखर ब्रष्ट बनायो ल्गेल.
  241. 17:27–17:31गजंद्र ताकृरक लेकनक इस सब सब पएक सकती चे,
  242. 17:31–17:35उ मात्र इने कहे चतिन जे समाज मे ब्रष्टाचार चे,
  243. 17:35–17:40उ एग ब्रेश्टाचार काज कोना करे चे
  244. 17:40–17:42एकर मेकनिसम की चे
  245. 17:42–17:47एक दम उ मानवी एक कमजोरी अब्रेश्ट वेवस्थागजे गध जोड चे
  246. 17:47–17:49तक्रा उगारी कर आखी देच चे
  247. 17:49–17:54उजो हम एदोनो नाटक मचन्द अ गंगा ब्रिज के एक संगे जोड का देखी
  248. 17:54–17:58ता एक ता बहाँ ब्यानक तस्विय उबरी के सोजा आवाएत चे.
  249. 17:58–18:02अग, अग, नाटक में एक ता समान्ता चेर.
  250. 18:02–18:06समान्ता एक गजेंद्र ताकृर हमरा सब के दिखाई रहल चती,
  251. 18:06–18:10जिक काना राजा मने जि सता का शीर्ष पर चेर.
  252. 18:10–18:13जैन तसकर हब भुल्ला, वब्रष्ट थेकिदार आन्नीता.
  253. 18:13–18:16अग, उप्यादा के कोईच रहल चेर.
  254. 18:16–18:20प्यादा मैं उ निर्दोश मुतालिफ वा उ विवष यंजीनिर
  255. 18:20–18:23इन आटक सब मातर मनुरंजन अक सादन नहीं चै
  256. 18:23–18:27एक दम नहीं, इजी हम्रा सब के समाजक पोस्ट मोटम चै
  257. 18:27–18:30इजी हम्रा सब के भित्रस जगजोरइत चै
  258. 18:30–18:38सोचु, मुतालिप, जक्राई नहीं भूजल चै, जो कर जिन्द की एक बरभाद भार रहल चै, कारनो सत्ता का बाशा नहीं भूजेच चै.
  259. 18:38–18:42आदोसर देस अ एंजीन्यर जक्र सब किछ भुजल च्याई
  260. 18:42–18:44जे जनद च्याई जे उ गलत करहल च्याई
  261. 18:44–18:46मुदाउकर कोनो उपाई नहीं च्याई
  262. 18:46–18:49करन्द सिस्टम उक्रा पाए काड दिने च्याई
  263. 18:49–18:51इपो थी विवस्ता कग्रुर्ता के
  264. 18:51–18:54बिना कोनो लाग लपे तुक उगारे चै.
  265. 18:54–18:58सत्ते कहलो, इजे मचन्द शब्दक प्रयोग ताकृ केने चैती,
  266. 18:58–19:03उ मात्र कोनो एक गुते, उगनो एक तस्कर वाठेके दार लेल नहीं चै.
  267. 19:03–19:06इस समपन विवस्ता, उपूरा तन्त्र लेल चै,
  268. 19:06–19:08ज़ाही विस्त्रत विष्लेषनक बाद
  269. 19:08–19:11गजिंद ताकूर के एही श्रोथ सामगरी के
  270. 19:11–19:13गजेराई से देखला द़ी
  271. 19:13–19:16इविमर्ष भी अंबिन्दुपला के ताडगा देचे
  272. 19:16–19:18जते इसे समाजक नेटिक दाचा पर
  273. 19:18–19:20एक ता बहुत गम्हीर प्रश्नो थे जे
  274. 19:20–19:25जदे इसे समाजक नेटिक दाचा पर एक तब बहुत गम्हीर प्रश्नोट है चे
  275. 19:25–19:26उकुन प्रश्न चे
  276. 19:26–19:32मने जखन कुनो सिस्तम कुनो व्यवस्ता एही तब दिसाईन केल गेल हूँ
  277. 19:32–19:35जही में लोकक ब्रिष्ट बनेबाग लेल मजबूर केल जाएचे
  278. 19:35–19:36हाँ
  279. 19:36–19:42तो तै इमाननार बनिल वरहब की मात्र उही लोकक विशेशा दिकार नहीं बनी जाएचे
  280. 19:42–19:46जक्रा लक पहिने ये सब बहुत्रास पैसा पावर वब पहुच चे
  281. 19:46–19:48माने एक ता प्रविलेज बनी जाएचे
  282. 19:48–19:52इक दम जक्रा �theके दारक दमकी सर दर नहीं चे
  283. 19:52–19:54कारन उक्रालक बैक्उप चे
  284. 19:54–19:56मुदा की एक ता सादारन लोग
  285. 19:56–19:59जकर परिवारेक जीवी का मात्र उकर वेतन परनिरबर चे
  286. 20:00–20:02औए ही सिस्तम में बिना बेईमान बनले
  287. 20:02–20:04बिना अपन आदर्ष्य समजोता के ने
  288. 20:05–20:06जीवित रही सके चे
  289. 20:06–20:06बाप्रे
  290. 20:06–20:09की एहन शोषक विवस्ताग भीतर,
  291. 20:09–20:12इमान्दारी अखनेक्ता नेटेक विकल्प रही गेल चे,
  292. 20:12–20:15वाई एक टा एहन विलासिता बन गेल चे,
  293. 20:15–20:17जक्रा आम आदमी अफोड ने कर सके चे?
  294. 20:17–20:20इस च्छ्मे बहुत बेच्झैंक रेवाला वीचार चे.
  295. 20:20–20:26एक ता आम आदमिक लेल इमान्दारी की सच्मे एक ता लक्जरी बनी गेल चे?
  296. 20:26–20:30जाहिले उक्रा आपन अस्तित्व कदाउपर लगाईना आवश्ष्ख चे?
  297. 20:30–20:34आई औई प्रष्न हम्रा सब के स्वाईम सब उच्वाए क्चाहिए.
  298. 20:34–20:35बलकुल.
  299. 20:35–20:39एही सुल्गाएत अ आत्मा के जगजोरे वला प्रष्नक संग
  300. 20:39–20:42हमरा सब की एक गहर चर्चा एते समआप थाई च्याए.
  301. 20:42–20:46इहन प्रष्नच आए जे ए पोत्हीसन निकली कर
  302. 20:46–20:49हमरा सब के देनिक जीवना क्यतार्ट सतक्राए च्ये
  303. 20:49–20:51एपर विचार जरूर हुभे कि चाही.

Plain text

विचार करु, अग्दिस दिल्लीक तिहार जेल के लिएक ता अनार कालकोट्री चे, अव ते एक ता पडिक पडिक आखिवला तमिल यूवक बने चे. जिकर आपन भाषा कलावा कुछोने बुजल चे. अखरा एदरी ने बुजल जे एग जेल में की आख चे करन मने अखर अद्योग भाशा ने वे चे, सब टक जे भाशा चे उने बुजल चे आद राज्जा की जे वेवस था चे, अखरा बनू राखवा में एक दम सटी का निपून चे ता एक दिस यी बहयनक द्रिष छे आद दूसर दिस उही जेल सब बहुत दूर गंगा नदी पर बनल एक ता नवूका पूल जे बने त देरी हीले लागल चे पलकु एक पूल आपन उदगातन सबःने ही कापी रहाल चे, हीली रहाल चे मस्दुर सब आनन्फानन में उकर मरमत करो हल चात. मैंने, इक कते क पैग विरोदा बहाँस चे ने. आद तो उते ता हम आबई चाही चे. हमरा सभे जे य वेवस्ताच है, जे य सिस्टम चे. उईक ता निर्दोष्की प्हसा का जेल मे रक्भा मे तब बहुत कुशल चे? मुदा अपन बनावल पुलक तब रक्भा मे पुरनता विफल चे. एक दम सही. अखिरी सिस्टम निर्दोष्क के कुईच्वा मे इते क ताकत्वर. मैंनिरमानक काज में इते खुकला की आख चे? देखो, इविरोदा भास कुनो संयोग नहीं चे. इवास्तव में इव्यवस्ताक मुल चरित्र चे. जकनम सब एई दूनो द्रष्यपर विचार करे ची, तई मात्र दूईता �alag alag कता नहीं रही जाए चे. इपने आपन शक्तिक उप्योग लोका के दरे बाकलिल करेच्छे मुदद उबही शक्तिक उप्योग समाजक नीव मजबोद करवाकले नेई करेच्छे बिल्कुल नहीं आए हम सब एही टीत यदार्थक उविस्त्रे परताल करब अगर बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा बादा ब बुजलिया, इकोनो नीरस अकाद्मिक पोठी नहीं चे? एक दम नहीं, इत समाजक तीट यतार्त, ब्रष्टाचार, आम मानविय विडम बनाक एक ता मने सपष्ट दरपन चे. आ, इई पोठी साहित अकादिमिक जे एक ता संकीण दायरा चे ने, यक तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद्याई तद बागल्पूर मे भेल नहीं आजे अखन दिल्वी में निवास रच्छत्छतिं आपन साहिट्त में विविद्ध्ता के बहुत प्रमुखता से अस्थान देने चतिम जो आप पोतिक अनुक्रमनिका पर द्यान देव तव इक उनो एक विदा वह एक विषेद रही सीमित नहीं चे. एक दम सही. एक रामे मचन्द जे का राजनितिक समाजिक नाटक चे, तव अपारा आत्रेइ सन अतिहासिक नारी वादी नाटक से हो ची. मैंने हम्रती एक तव जना साहितिक बफे हो इच्छे ने, अहन लागल, जते सबखलेल किछनकिछ च्छन, जिना कमलाग भक्ता जिसका बाल नातक च्छन, आदानवीर ददीची सन पोरानिक दाशनिक नातक से हो शामिल च्छन. आदानवीर ददीची सन पोरानिक दाशनिक नातक से हो शामिल च्छन. इद्र्ष्टिकोंक विविद्धात च्याजा बाथ च्याजा बाथ च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याजा च्याज एक रा मात्र विद्रो कहब सत्यक एक ता पहलू देखव हैते इव आस्तरब में एक ता विस्तार चे एक ता लोग तान्त्री करन चे विस्तार? माने के न विस्तार? माने मुख्यदारक साहित्ते विषेशक साहित्ते अकाद्मीजे का संस्तान समानिता प्राप्तजे साहित्ते चै, प्राया एक्ता विष्यस्त समब्रान्त वर्ग के द्रोयंरुमक विमर्ष्धरी सिम्ध बहजाई चै. अथे बाशा के खास मानकी करन होईच्छे, विषे वस्तु एक खास वर्ग के इर्दगर्द गूमेच्छे. एक दम तव विदेः समानानतर साहित यान्दोलन कजए एई प्रयास च्ए, उसाहित के उही बन्द कमरा से निकाली का, उह खेट खलिहान, जेल का काल कोट्री अनिरमान अस्तल दरी लोजाबा केक्ता बोद्धिक प्रेयास चे. आच्छ, मानी यी समाजक उही लोकक अवाज सहित्ते में लाभे चाहे चे, जोक्डा एक्हन्दरी सहित्ते क विषे नहीं मानल गेल. आप, बलकोल. इजे आहा एश्या पर ताड लोकक अवाजक बात कहलो, से हम्रा सोजे मचन्द नाटकक पहल अंक्दिस लोग जाएच छे. उद्रिश उब शच में बहुत बेचैन करे योल आचे. उद्रिश तिहार जेल वल अद्रिश. आप दियान जेल में मुतलिफ नामके क्यक्ता यूग बनन चे पोथी में उकर शारिरेक चित्रन पैग पैग आखिवला केल गेल जे जे अपने आप में उकरा लाचारिया आश्चारिया के दिखार रहल चे जे उकते आबी गेल सो चुने, उक्रा हबी बुल्ला नामक एक तब पैग तस्कर फसा देने चे. मुतलिव के एक ता प्रेशर कुकर में नशाका पाअडर दोक एक हवाई जहाज से भेजल गेल चल. अज़़ सब से त्रासद बात तए चे उक्रा इबुजले ने चे उक्रा कुकर में की दोगे पट्हाँल गे चे आँ, उ मात्र तमिल भाजे चे आदिल्लिक जेल में अनुवादक के माद्धिम सा उकर वकील तरक दराल चे जे इनिर्दोष चे उतट बेरोजगार चल उक्रा काजक लोप्दा कब फसावेल गिल एता है माने लेक्हक बाशा के मात्र समवादक माद्ध्यम नहीं बलकी सत्ताक एक ता हत्यारक रूप में प्रस्त॥ कर रहल्चातीं अखो ना देखु मुतालिफिक जे इई बाशा संकर चा उ वास्तब में सत्ता और आम आदमी के बीच कषम्वाद हींतक प्रतीक चै. मुतालिक तमिल में कानिकानी के अस्पस्टी करनदर हलचा? मुदा जे व्यवस्ता उकर फैसला करल चै, उकर भाशा नईबुज़े च्छ. एक दम सही ये देखे च्छ, जे सिस्टम में निचात, गरीब और शोषित लोकक अवाज के ना अंसुना कर देल जाए च्छ. उव, उद पुरा तरे अनुवादक पन निरभर च्छै ना. आशा उक्रा पसोने चे बाप्रे, इता बहुत गेहर गब भेल मुदा उही नाटक में एक ता और प्रसंग चे जे हमरा बहुत चकेत के लग कुन प्रसंग उएक ता खौफ्या अदिकारी आ एक ता आतंकी लीडर अक भीचक चे समवाच चे उ आतंकी लीडर आपन बचाव में मीजोरमक लाल्डेंगा कब उदारन दे चे आ, आ, उ कहे चे जे लाल्डेंगा महान निता चला करन उ सरकार सा शांती समजोता किलनी एक दम, उ कहे चे जे लाल्डेंगा आपन जनता के मंजदार में नहीं चोडलनी मुदा हमरा इतर्क बहुत खोखला अप पाकहन्डी लागच छे के? मैंने एक दिस ओ अतंकी लीडर लाल्टिंगाक शान्ती समजोतक नीक माने चे अ सत्ताक शोषक कहे चे अ दो सर देस उक्छुद द्रग्स भेची का मुतालिव जका विरुजगार यूवा सबक भविष्वर्भाद कर आएच आएज एक दम विरुदा भाश चे जे क्रान्तिक नाम पर मुतालिव सन निसाहायक के मोहरा बना रहे लचे उके इख्रान्तिक कोना जायस भोसक अच्छे आजा जे इपाक्श्ण्डक बात उठहेलो, उवही पर गजंद्र थाकुर का प्रार बहुत टिक्षन चे. आपनकी लिटरक इजे तर्क चे, उआसल में उकर आपन आप्राद भोद्ध के चुपपयवाक डाल चे. आपन अवेद सथ्ता के जाएस थेरेवा के लिलने? उ बेवस्ता का कमी के सिस्तम के जे शोषक चरित्र चे तक्रा देखा का आपन गलत काज के सही सिध करे चाहचे. उ खौफिया अदिकारी कहे चे जे आहा के जे सिस्तम चे उ निरबलक सून्वाई नहीं करे चे, ताही लिल हम्रा हत्यार उठाए पडाले. उदा उखर इद तर्क तो उदै खन्द ब हो जाए चे, जगन हम देखे ची, जे उखर क्रान्तिक बुन्याद गरी मुतलिफिक कल्लाचारी पर्टिकल चे. एक दम सा, उखर क्रान्ति कालो पइसा पर चली रहो लखे, उहो एक ता दोसर मचन्द मने कलनायक बन गल चे. जे वेवस्त्तास लडवाक नाम पर वेवस्तास सब भेसी क्रूर भागेल चे बलकल. तई एते जे खुफ्या अदितारी सब देखी भुजी रहाल चे उकरा भुजल चे जे वेवस्ता ब्रष्त चे आँ उखुफिया अदिकारी तः आपन गामक एक तद्रिष्टान्त से हु दई चेने अ बावादाम वलद्रिष्टान्त आँ ख़े चे जे हमरा गामक एक तब लुल्हाजे आपांख चे उब भी सालस इमान्दारी सब पएदल बावादाम जाए चे वूदा उकर जोप्री के जोप्री ए रही गेल आद दूसर दिस दूसर दिस जे पीर बच्चा चे जे समपन आब भेमान चे उगाडी सा भाबा दाम जाए चे आउकर कोथा पर कोथा बनी रहल चे इज द्रिष्तान्त चे इस नाटक का किंद्रिय दर्षन चे, खुफ्या अदिकारी इद्रिष्टान्त दाक, सुईकार करहल चे, जे इस सिस्तम इमान्दारी के दन्दित करेचे अब बेमानी के पुरुसक्रत करेचे. अपीर बच्चा उही शोषक वर्ग कप्रतिक वेल, जे नियो मक पालन करे चे, कश्ट सहे चे, मुदा उकर प्रगती शून्य चे. अपीर बच्चा उही शोषक वर्ग कप्रतिक चे, जे विवस्थाक छिद्रक उप्योग का कच, तरक्की करहल चे. तल लेक्हक एताया स्पष्ट कर रहल चतीन जे आसली मच्चन्द कोनो एकता वकती नहीं चे नहीं चाहे वो हाभी बुल्ला हो वो उतातंकी लीडर इपुरा ब्रष्ट सिस्टमी मच्चन्द चे जाहे में आस्ली तस्कर पक्र सब बाहर रहे चे, आम उतालिव जका पाँ पैडल सिपाही जेल में सजी रहल चे. अखुफिया अदिकारी इस सब भुजही चे, मुदा उएही सिस्तम का एक तप पुर्जा मात्र चे, जे चाही कसे हुए किछनो कसके चे. उ, इज इमन्दारी के दन्दित करबाक बात हा कहलाओ, इग गजेंद्द ठाक। दोसर्नातक गंगा ब्रिज में बहुत भेशी भेशी बहुंकर रूप में सोजा बैच्छे. अग, उनातक ता औरे विछलित करे वल अच्छे एही नातक पहल पलडवक जिद्रुष्ष जे उदिमाग में एक दम्स चब जाएचे गंगा नदी पर बनल एक ता नवका पुलक मरमच चली रहाल चे पुलक अखल उद्खातनो नी बहल चे अद्गातन नहीं भेल चे आँ पहिने ही रहाल चे चारो कात मस्दूर लागल चे मुदा एता है एक ता बहुत प्रतिकात्मग गतना हो इत चे जे उलोग द्हूल बजाईत रहे चे एक दम एक ता लोग जोर जोर सा द्हूल बजाए रहाल चे अखरा दोल बजाबाक काज एही लेल देल गेल चे जाए सव मज्दूरक द्यान बटल रहे दिको दोल बजाबाक एक आज मात्र द्यान बटेबाक लेल नहीं चे एकर निहितारत बहुत गहिर चे के हन निहितारत? उडोल मने विवस्ताक उ पबलिक रिलेशन वा प्रोपगेंडा चे जे पुलक कामपब जे सिस्टमक हिलप चे तक्रा चुपईबाक लेल शोर मचै बैचे आचा मने जकन सिस्टम भित्रुस खोखला बैजाई चे अखसे उ लागे चे तकन सत्ता एहन दोल बजे बैचे आप द़ाईसा आम लोकके उखसब वहिलब सूनाई नहीं पड़े शोरक नीचा भश्टा चारक दबादेवाक यी बहुत क्रूर मुदा यतार्थ वादी प्रतीच फ्रतीच फ्रतीच बाप्रे आओही शोरक भीच गावक दूईता लोकक जी समवाद चे उ कतिक मार्मेक अच्वबहेवाला व्यंगय चे इक दम उदुन्नु गामक लोक आपस में गब करे चे जे इप पुल लिएक रहल चे रहा उख़े चे जे पुलक सिमेंटा बालुसद ता इंजिन्यरा थेके दार गरक चजजआ बनी रहा लग चे तप्प्ल्त तरहिल्बे करत मुदा सबस्च पएग व्यंगयता वो कर उगप च्याए जे अंग्रेज कर बनल्पूल मजबूत हो च्ले आए, उगगे च्ये मुदा इस्वतन्त्र भारत का सरकार के उदुन वनुक माने च्ये इते मनुस्क शब्द का उप्योग उ उ स्वार्ति मनुश्वक अर्ठ्मे कर रहल चे. इसम्वाद स्वतन्त्रता के बादक जे मोहभंग चे उकर सब संस सतिक दस्तावेच चे. मोहभंग को ना? मैं, गामक लोकक लेल, सरकार कोनो दिल्ली में बैसल आमुर्द संस्थान थानेचे, उकर लिल सरकार उ इंजिनिर ठेके दार जे उकर सोजा दिन दहारे ब्रस्ताचार करो रलचे. आजे, जे क्राउ सोजा में देखी रहल चे. एक दम लोकक नजरी में जकन अंगरेज चल, विदेशी चल, शोषक चल, मुदा उकर बनल दाचा मस्वूत होई चल, मुदा अपन देशक स्वतन्त्र भारतक सरकार जकन आबीगेल, तो उनिजी स्वार्त में इतेग दुभीगेल जे लोक उक्रा मनुक कहे लागल. माने जे आपन स्वार्त सवृपर किछु सोची नहां सके चे आपेख्षाचल जिस वतन्त्रता का बाद लोकक हिद्कें प्रात्मिक्ता बहितत मुदबहल एक दिक विप्रीत सारविजनिक समपती केन निजी समपती में बदल्वाख जे इपरमपरा स्वुरुभहल उक्रा एही समवाद मे बहुत निक जका देखाओल गेल जै मुदा एते हमारेक ता प्रष्नच फैज्न चै की? जे नाटक कदोसर पल्लो दिस लजाएच छै की इ नजीन्यर इ �the के दार जे एते खब्रष्ट बहगेल चै तेन उसब शुरुस आहन चला उ ये बहुत निक प्रष्न चब च्याए माने कि उनका लोकनी में देश भक्ती या इमान्दारी कहीो चले नहीं एही प्रष्नकुत्तर नाटक का फ्लाष्बैक में बहेताइच छे आँ, उ पंद्रा अगस्ट उनीसो सभ्टालिस कद्रिष्ष्ः एक दम इंजीनरिं कौलेज मे दिख्षान समारोज चली रहा है जै, नवका इंजीन्यर सब जे स्वतन्त्र भारत का निरमाता चतिन, उशपत लइच्चतिन. आए एक ता बच्चा बहुत जोश में कहे चै, उद्रिश्य देखे का लागत चे जी इसब कतिक आदर्ष्वादी चला उनका लोकनिक मोन में देश बनेला कतिक पेख सबना चल इद्रिश्य उही पीडिक आशावादेक देखा रहे लचे उनका लोकनिक मोन में देश बनेला कतिक पेख सपना चल इद्रिश्ख उही पीडिक आशावादेक देखा रहेल चे जक्रा लागल चल जा आब आंगरेज चली गेल तए देश सवर्ग बनी जात मुदा गजेंद्र ताकृर एते इदेखावे चाहत्छती जे कोना एक ता आदर्ष्वादी वेक्ती जगन असल सिस्तम में आवाई चे तव्योस्ता उकर आदर्ष्खे कोना कुईच देछे एक दम जगन उ एंजिन्यर काज पर आवाई चे आ इमान्दारी सब्पुल बनवाई चाहचे तवोकर सामना तधेकेडारसे होई चे जी, उही ब्रष्ट सिस्टम कप्रतिनी दी चे आधेकेडारक उ दमकी वाला द्रिष्च उ, सच में रोंग्टे कड़ा करे वाला चे तधेकेडार उक्रा अस्पष्ट कही चे, जजग आहा बालू में सीमेंट नहीं मिलायाब जग आहा हमर हिसाप सकाजना करब आउपर कमिष्छन नहीं देब ता हम आहा के जिन्द्गी हराम कदेब आई मात्र दमकी नहीं चे उवास्तामा उ इंजिनिरक वेतन रोक देच्छे इंजिन्यर के बच्चा सब के स्कूल से निकाले दिलजाएचे उक आपन बच्चा सब के गाँ पटाबे परएचे बुजू इतक। कुना आर्थिक ब्रस्टाचार मातर नहीं बहल इता सीथा सीथा ब्लैक मेल चे बिल्कुल ब्लैक मेल चे आई ब्लैक मेल इब ज़बेले पर्याप्त जे ब्रस्टाचार कुनो वक्तिगत पतन नहीं जे ये एक ता संस्तागत मजबूरी जे माने, सिस्तम का मजबूरी आँ, थेके दार कहे चे जे चीफ अईजिन्यर नेटाग दहना हात पहले हम्रे कहने रहे तोरा रोलर किछ नीचा में पिष़डा कदेले बाप रे! मने उपर चीफ इंजीनीरे सन्लोका नेता दरे सबक हिस्सा तैच्से एक दम तैच्से! इपुरा एक ता एक्ता सिस्टम चे यही इको सिस्तम में जगनो एक ता इंजीन्यर इमान्दार बनल रहे चाहे चे तो उई पूरा ब्रस्ष्रंख्लाग लेल एक ता खात्रा बनी जाच्चे असिस्तम उक्रा बड़ाश्ट नहीं करे सके चे उक्रा ब्रष्ट बने लिल मजबूर कदिल जाच्चे इत तो उहिना बेल जे तो उनो लोक के बन्दूक कन लोक पर तास्क महल बनेवागे लिल विवष्किल जाएं नीकूप माचेई जो उ तास्क महल खसी पड़ेद चे तदोश उही लोग पड़ेद जाएद जे उ इमान्दार नी चल वह अक्षम चल मुदगे उ महल बनेबस मना करेद चे तो उकर परिवार पर तुरन्त गोली चलाए दिलजाएत तो उगे अंजिनियराक लग विकल्प की चल? कि चो नहीं उकर अपन परिवार का अस्तित्व बच्ये बाकलेल अपन बचाक बविष्य बचाय बाकलेल अंतित भालु अ सिम्यंट में गपला करे या पडेच थे इई स्वतन्त्रता का बादक जे आदर्ष्चल उकर पतनक बहुत क्रूर मुदब बहुत सत्ति चित्रन चे आअ, आअअअक का इटास्क महल्वला उपमाजे हम दिलीयो, अखर आहा जेना सब खेलो जे ओ अंजीनेर सुईच्छा सब्रष्ट ने भेल, अखर ब्रष्ट बनायो ल्गेल. गजंद्र ताकृरक लेकनक इस सब सब पएक सकती चे, उ मात्र इने कहे चतिन जे समाज मे ब्रष्टाचार चे, उ एग ब्रेश्टाचार काज कोना करे चे एकर मेकनिसम की चे एक दम उ मानवी एक कमजोरी अब्रेश्ट वेवस्थागजे गध जोड चे तक्रा उगारी कर आखी देच चे उजो हम एदोनो नाटक मचन्द अ गंगा ब्रिज के एक संगे जोड का देखी ता एक ता बहाँ ब्यानक तस्विय उबरी के सोजा आवाएत चे. अग, अग, नाटक में एक ता समान्ता चेर. समान्ता एक गजेंद्र ताकृर हमरा सब के दिखाई रहल चती, जिक काना राजा मने जि सता का शीर्ष पर चेर. जैन तसकर हब भुल्ला, वब्रष्ट थेकिदार आन्नीता. अग, उप्यादा के कोईच रहल चेर. प्यादा मैं उ निर्दोश मुतालिफ वा उ विवष यंजीनिर इन आटक सब मातर मनुरंजन अक सादन नहीं चै एक दम नहीं, इजी हम्रा सब के समाजक पोस्ट मोटम चै इजी हम्रा सब के भित्रस जगजोरइत चै सोचु, मुतालिप, जक्राई नहीं भूजल चै, जो कर जिन्द की एक बरभाद भार रहल चै, कारनो सत्ता का बाशा नहीं भूजेच चै. आदोसर देस अ एंजीन्यर जक्र सब किछ भुजल च्याई जे जनद च्याई जे उ गलत करहल च्याई मुदाउकर कोनो उपाई नहीं च्याई करन्द सिस्टम उक्रा पाए काड दिने च्याई इपो थी विवस्ता कग्रुर्ता के बिना कोनो लाग लपे तुक उगारे चै. सत्ते कहलो, इजे मचन्द शब्दक प्रयोग ताकृ केने चैती, उ मात्र कोनो एक गुते, उगनो एक तस्कर वाठेके दार लेल नहीं चै. इस समपन विवस्ता, उपूरा तन्त्र लेल चै, ज़ाही विस्त्रत विष्लेषनक बाद गजिंद ताकूर के एही श्रोथ सामगरी के गजेराई से देखला द़ी इविमर्ष भी अंबिन्दुपला के ताडगा देचे जते इसे समाजक नेटिक दाचा पर एक ता बहुत गम्हीर प्रश्नो थे जे जदे इसे समाजक नेटिक दाचा पर एक तब बहुत गम्हीर प्रश्नोट है चे उकुन प्रश्न चे मने जखन कुनो सिस्तम कुनो व्यवस्ता एही तब दिसाईन केल गेल हूँ जही में लोकक ब्रिष्ट बनेबाग लेल मजबूर केल जाएचे हाँ तो तै इमाननार बनिल वरहब की मात्र उही लोकक विशेशा दिकार नहीं बनी जाएचे जक्रा लक पहिने ये सब बहुत्रास पैसा पावर वब पहुच चे माने एक ता प्रविलेज बनी जाएचे इक दम जक्रा �theके दारक दमकी सर दर नहीं चे कारन उक्रालक बैक्उप चे मुदा की एक ता सादारन लोग जकर परिवारेक जीवी का मात्र उकर वेतन परनिरबर चे औए ही सिस्तम में बिना बेईमान बनले बिना अपन आदर्ष्य समजोता के ने जीवित रही सके चे बाप्रे की एहन शोषक विवस्ताग भीतर, इमान्दारी अखनेक्ता नेटेक विकल्प रही गेल चे, वाई एक टा एहन विलासिता बन गेल चे, जक्रा आम आदमी अफोड ने कर सके चे? इस च्छ्मे बहुत बेच्झैंक रेवाला वीचार चे. एक ता आम आदमिक लेल इमान्दारी की सच्मे एक ता लक्जरी बनी गेल चे? जाहिले उक्रा आपन अस्तित्व कदाउपर लगाईना आवश्ष्ख चे? आई औई प्रष्न हम्रा सब के स्वाईम सब उच्वाए क्चाहिए. बलकुल. एही सुल्गाएत अ आत्मा के जगजोरे वला प्रष्नक संग हमरा सब की एक गहर चर्चा एते समआप थाई च्याए. इहन प्रष्नच आए जे ए पोत्हीसन निकली कर हमरा सब के देनिक जीवना क्यतार्ट सतक्राए च्ये एपर विचार जरूर हुभे कि चाही.

← Transcript index