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मैथिली_का_ब्लॉग_से_एआई_तक_सफर.m4a

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Collection
Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.999246)
Duration
1:49
Source
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Timestamped machine output

  1. 0:00–0:06आज हम आशीश अंचिनार की किताब मैठिली वेप्पत्र कारिता का इतिहास का एक वटवववव ले रहे हैं.
  2. 0:07–0:11ये किताब हमे बताती है कि कैसे एक पारमपरेक शेत्री बाषाने,
  3. 0:11–0:41इंटनेट के शुवाती दोर से लेकर आजके अदवाश्ट एएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएए
  4. 0:41–0:46जी हा, कते क्रास बात नाम के एक ब्लोग ने तो पहला बनने के चकर में
  5. 0:46–0:50अपनी पुरानी पोस्स की तारीक हे तक पीचे खिषका दी थी.
  6. 0:50–0:55तुस्रा, इस जूटी होड से अलग असली तकनी की विकास कैसे हुए?
  7. 0:55–1:04विदे ही पत्रका और गजेंद ताकुड जैसे लोगों की लगातार महनत से ही 2014 में मेठली विकी पीटिया को अफिषल मनजूरी मिल पाई
  8. 1:04–1:13और तो और इनी प्रयासों से इंटनेट पर मेठली की अपनी लिपी, तिरहुता के फाँट, और उनी कोड का देएलप्मेंट भी समबभ हो पाया.
  9. 1:13–1:18अनततह, आज ये भाशा मोडन मचीन ट्रान्सलेशन का एक सक्सेस्फल हिस्वा बन चुकी है.
  10. 1:18–1:30अब मैठिली अई अई अई ती मद्रास के एएी फोर भारत प्रज्यक्त जे आन्यू के सह्योग से बने माईक्रो सोझ्ट बिंक ट्रन्स्लेटर और गुगल ट्रन्स्लेट जैसे अईद्वान्स्त एएी तुल से मस्बुती से जुडगगगे है.
  11. 1:30–1:33ज़रा सोचीए, ये बिलकल वैसा ही है,
  12. 1:33–1:37जैसे किसी पुरानी पन्दूलिपी को सीदी आजके समाथ स्पीकर से जोड दिया गया हो.
  13. 1:37–1:39हैना कितनी शान्दार चलाँग?
  14. 1:39–1:42मैतिली का ये दिजिटल सफर साभित करता है,
  15. 1:42–1:44कि अगर समवुदाए तान लेना,
  16. 1:44–1:49तो कोई भी प्राचीन भाशा आजके च्टेक युग में भी शान से अपना परचम लहरा सकती है.

Plain text

आज हम आशीश अंचिनार की किताब मैठिली वेप्पत्र कारिता का इतिहास का एक वटवववव ले रहे हैं. ये किताब हमे बताती है कि कैसे एक पारमपरेक शेत्री बाषाने, इंटनेट के शुवाती दोर से लेकर आजके अदवाश्ट एएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएएए जी हा, कते क्रास बात नाम के एक ब्लोग ने तो पहला बनने के चकर में अपनी पुरानी पोस्स की तारीक हे तक पीचे खिषका दी थी. तुस्रा, इस जूटी होड से अलग असली तकनी की विकास कैसे हुए? विदे ही पत्रका और गजेंद ताकुड जैसे लोगों की लगातार महनत से ही 2014 में मेठली विकी पीटिया को अफिषल मनजूरी मिल पाई और तो और इनी प्रयासों से इंटनेट पर मेठली की अपनी लिपी, तिरहुता के फाँट, और उनी कोड का देएलप्मेंट भी समबभ हो पाया. अनततह, आज ये भाशा मोडन मचीन ट्रान्सलेशन का एक सक्सेस्फल हिस्वा बन चुकी है. अब मैठिली अई अई अई ती मद्रास के एएी फोर भारत प्रज्यक्त जे आन्यू के सह्योग से बने माईक्रो सोझ्ट बिंक ट्रन्स्लेटर और गुगल ट्रन्स्लेट जैसे अईद्वान्स्त एएी तुल से मस्बुती से जुडगगगे है. ज़रा सोचीए, ये बिलकल वैसा ही है, जैसे किसी पुरानी पन्दूलिपी को सीदी आजके समाथ स्पीकर से जोड दिया गया हो. हैना कितनी शान्दार चलाँग? मैतिली का ये दिजिटल सफर साभित करता है, कि अगर समवुदाए तान लेना, तो कोई भी प्राचीन भाशा आजके च्टेक युग में भी शान से अपना परचम लहरा सकती है.

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