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सीत_बसंत_सँ_यमराजक_मुकुट_धरि.m4a
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- 0:00–0:04अगर मुल माए मरी गे लची जे नफसोतीली माए आई लचीने अब वच्चा सब के खिनाए कुआईबे तकाले,
- 0:04–0:12अपन महल सब बहर देखी रहल चफीन अपन गाज पर एक चीराएक खोता देखा पडे था चीनी
- 0:12–0:15उतेपर की चीराएक की चुबच्चा सब अची
- 0:15–0:17अपन पोर की चीरायक
- 0:17–0:19अखर मूल माए मरी गे लची
- 0:19–0:22जे नफसोती ली माए आए लचीने
- 0:22–0:24बच्च्चा सब के खिनाएक हूएबेद खाले
- 0:24–0:27उकर मूँ में आँ खाँट दोरा हल अची
- 0:27–0:29जाए सो मरी जाए
- 0:29–0:31बाप्रे यी तो बद
- 0:31–0:33खोफनाग अची
- 0:33–0:36आई देख के रानिक मन में एक टाशंका अबेच छीनी
- 0:36–0:38जे जा हम मरी जाएब
- 0:38–0:41ता हमर बच्चा सबक सम्से हो यही होईतकी
- 0:41–0:44अद्दुर्भाग्य सा किचु दिन के बाद उही रानिक मुद्टियो बहुजाएत छी
- 0:44–0:49उकर बच्चा जे चत्फी, सीदा बसंथ, उ तीक एहन परिस्तितिक शिकार होईच्चति
- 0:49–0:52मने उस्वाटेली माए वाला बात सच ब हो जाएत अची
- 0:52–0:55शिंदम नवकर रानी मने हुनकर जे सवाटेली माए चफी
- 0:55–0:57उ एक दिन गें देरे बाग बहाने
- 0:57–1:00राजासा उही दुन्नू बच्छा कलेजा माने लेई चफीन
- 1:00–1:02कलेजा माँले चफीन
- 1:02–1:04हाँ, इस शुनी में कोनो
- 1:19–1:23उगदाम और इवास्तवे में एक ता बहुत सशक्त शुर्वात आचे
- 1:23–1:27हम सब आई जिश्वोट समगरी पर चर्चा कर हल चिने
- 1:27–1:31उगजेंद्र ताक्र कर रचल कुरु छेत्रम अंप्र मनक आचे
- 1:31–1:342009 में स्रूती प्रकाशन से इए आए लचल
- 1:34–1:39तो उगजेंद्र ताक्र कर रचल कुरू छेत्रम अंटर मनक अचे
- 1:39–1:432009 में स्रूती प्रकाशन से इया आल्चल
- 1:43–1:45इक उनो सदारन पोती नहीं आचे
- 1:45–1:47तए एक इची टीक टीक
- 1:47–1:52इक रा आईक्ता मेटा टेक्स्ट वा महा पाट कही सके इची
- 1:52–1:57मैं इस सात्ता कहन्द में विस्तार पाभल इक ता एहन रचना जाही में निबंद,
- 1:57–2:02उपन्यास, कता, नातक, महाकाव्य, बाल साहित्य,
- 2:03–2:06सब कि चु एके ता जिल्द मैं, मैं एके बाइन्टिंग में आचे.
- 2:06–2:09बाप रे, इते कि चु एके पोठी में?
- 2:09–2:39आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
- 2:39–2:47ता एके ता पहग प्रष्न इई उठेता ची, जे एके ता पोठी में इत टेक विशाय राखवा की आवश्शकता चल,
- 2:47–2:52मुदा जेना जेना हम सवाई पोठी के भित्तर जाएत ची, ता बुजाई टा ची,
- 2:52–2:55बज़ाई तची जे इ ऱग रग विश्य नहीं आची
- 2:55–2:59बलकी मानव सवभाउ के बुजवाग ऱग रग माद्ध्ध्यम आची
- 2:59–3:00चहीद कहलीे
- 3:00–3:03तवही सीट बसन तक लोग कता पर वापस आबएची
- 3:03–3:06जे मनिपुर नगर के राजा महेश्वर सिंखा कता आचे
- 3:06–3:20कता सुने में बहुत रूमान्चक लागगता ची, रानिक शंका अ अंततः सत्माय द्वारा कलेजा मांगब, मुदा गजेंद्र ताकृरे ही पोत्ही में एक रा कोना प्रस्तृत करने चाती, की इमात्र एक ता संकलन ची?
- 3:20–3:27नहीं नहीं एदेई सब सरोचक बात अची एई आची जे एई मात्र संकलन नहीं आची
- 3:28–3:35आईई पोतिक एई आच्छ बहुत व्यापक फील्वक मने चेट्र कारेक आदार पर तटयार केल गल गेल एची
- 3:35–3:39एमें केशम मेहतोग बड महत्तोपोण सव्योग चलेनी
- 3:39–3:41मैंने, गाउं गाउं जाके कता जमा कैल गले?
- 3:41–3:42आए, एक दम.
- 3:42–3:47लिखख लुक्नी गाउं गाउं गुहीं के एक कता क मोगिक परमपराके जमा कैल नहीं.
- 3:47–3:51आद देखो, मोगिक परमपराक विषिष्ता इई होई देज,
- 3:51–3:54जे कोनु भी कता एके रूप में अस्तिर ने रहेते.
- 3:54–3:57आँ, लोग अपन रह साब से बदली देते शूक्रा.
- 3:57–4:01बलकु, जखन शूद करता फील्ड में जाए च्छती,
- 4:01–4:04तो उक्रा एक्ता कताक अनेक रूप में टेच्छे.
- 4:04–4:05जिना एक कता में,
- 4:05–4:11इकta संसकरन में इच्छे उजे सीता बसंट, इकta बयनक साप मारके हंसक बच्चक बच्चे वेच्छती.
- 4:11–4:12अच्छा.
- 4:12–4:17आपहे रोहन्स क्रिताग्न बहुके, औही दुनु भाइके, आपन पाखिपर भीसाके उडिया लेत अची.
- 4:17–4:18इदनीक बात भेल.
- 4:18–4:22मुता, दोसरक्ता प्रसंग में कता एक दम गलग मोड लेतेच.
- 4:22–4:26उते बसन्तक एक ता जहाज किले ल भली देवाग बात अवे देज.
- 4:26–4:28जक्हन जहाज भीछ दार में रुग जातेच.
- 4:28–4:29रुगी जाओ.
- 4:29–4:31इते हमरा एक ता बाध्स पुष्ट करब,
- 4:31–5:01इसे बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खा�
- 5:01–5:03अदिम समाज में जीवन कतिन चल
- 5:03–5:05अब अच्छा सब के इभ भुजव आवश्ष्छल
- 5:05–5:07जे सन्सार में क्रूर्टा आण्याई अच्छी
- 5:07–5:09अच्छा
- 5:09–5:11मैंने सोतेली मोग कर अच्छा
- 5:11–5:13अच्छा
- 5:13–5:15अच्छा
- 5:15–5:17अच्छा
- 5:17–5:19अच्छा
- 5:19–5:21अच्छा
- 5:21–5:23अच्छा
- 5:23–5:25अच्छा
- 5:25–5:29अगर दूसर काछ सियो अची ने तिक्ताक अस्थापना
- 5:29–5:33अगर दूसर काछ सियो अची ने तिक्ताक अस्थापना
- 5:33–5:37अगर दूसर काछ सियो अची ने दूसर काछ सियो अची
- 5:37–5:44अगी अज़्ाउज़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ा।
- 5:44–5:49अग, आईकर दूसर काथ सियो अची ने तिक्ताक अस्थापना,
- 5:49–5:54एक अठा में जकन हन्स कबच्चा सीथ बसंद क मदद करबाग बाद करे थची,
- 5:54–5:59तकन उखहे थची जे खेनाई से भेसी प्रेम बाइग अची.
- 5:59–6:02बाए, इत बद गरा बाद बेल.
- 6:02–6:06जे खेनाई से बेसी प्रेम बाई गची
- 6:06–6:09बाँ इत बद ग़रा बाद बेल
- 6:09–6:13ता है जखन मनुश्वक समाज निष्ठूर भाजाई तची
- 6:13–6:16तचन इग ता प्रक्रती अजीव जन्थुक माद्धियम से
- 6:16–6:19प्रेम अख्रतक गताक पाध पाध पढ़ब़वेग तची
- 6:19–6:23ताहिली इे कता सब मोखिक रूप से इते एक दिंदरिक जिन्दा रहन.
- 6:23–6:34इब भह दिल्चस पची जे लोग कता कोनो तरसे आपन दारका अ खफनाक रूपक पाचा मानव सबावक सत्ते के नुका के रख है तची.
- 6:34–6:38मुदा एत्तेसे इविश्य आरो भेसी दिल्चस बहाजाई ताछे
- 6:38–6:38वो कै ना
- 6:38–6:46कारन, जखन इएही मानविय द्रिष्टिकोन इखल्पना आ पुर्वाग्रा हम्रा सबक थोस इतिहास में प्रवेश कर जाई ताछी
- 6:46–6:48तक्खन की हो ताछे
- 6:48–6:54आ, इतिहास क बात कर अहल ची, आ, इतिहास त सत्ते परादारी तो वाख चाही,
- 6:54–6:57मुदा एही पोतीक दोसर क्हन्ड देखावैं तची,
- 6:57–7:03जे इतिहास सहु बहुत हद्द्धरी ककरो नरेटीव वाद्द्श्टी कोण पर निरभर करे तची.
- 7:03–7:08ये तेई गजेंद्र थाकृर इतिहासक उही पन्नापर सीदा प्रहार करेच्छती
- 7:08–7:13जक्रा हम सब वर्षो सब भिद्याले में सथे मानीन कपड़ाई ताभी रहल ची.
- 7:13–7:18रहा, ये ही पोतिक सब सा विवादास पद आमहत तो पून खन्डचे.
- 7:18–7:24गजेंद्र ताकृर एते मायानन्द्मिष्र कचारीता एतिहासिक उपन्यास कचर्चा करे चती.
- 7:24–7:25कुन्चारीता?
- 7:25–7:30प्रथमम शेल्पुत्रीचा, मंद्र्पुत्र, पूरोहित, आश्रीदान.
- 7:30–7:35एही पोती सबख ताकृर जी एक ता बहुत गंभीर समिक्षा कैन अचे.
- 7:35–7:40अटाकुर का आलोचना केंद्र इण नहीं आची जे उपन्यासक बाशा कहरा वची
- 7:40–7:41तुफिर की आची
- 7:41–8:11आलोचना इची जे मायानन्द्मिष्र आपन उपन्यास के अटिहासिक आदार लेवाक ले पाश्चाते इठिहास कार सबख जेना मैक्स मुलर अव वीलरक जे आरे अक्रमन सिद्धान्त वा आरे इनवेजन थ्फीरी अची उक्रा बिना कुन उप्रष्नक सुईकार के ले लन.
- 8:11–8:16यह आपी आबी के द्रवी लोकनी पर आक्रमड कैलन ही
- 8:16–8:21एक दम यही हो कहात आचे जेक्रा पश्मी इतिहास कार च्तापित कैलन ही
- 8:21–8:26उनकर मानने चले जे हदब्पा सबयतक पतन आरे सबख आक्रमड सबहल
- 8:26–8:33बवाड़, मुदा जो हम एक राप पएग परप्रेच्ष जोडी, तपोठी मिठ्धाकृर एही अपने वेशिक या,
- 8:33–8:37कोलोनियल चश्मा के उतारी के साक्ष के आदार पर तरक दए च्छती.
- 8:37–8:38की साक्ष दे च्छतीो?
- 8:38–8:44उ बाशा विग्यान, शुति परमप्रा, अ विषेश रूप सब होगोलिख साखच के उप्योग कर इच्छती,
- 8:44–8:47जे ना सवसः पहेग तरक सरस्वती नदी कछी,
- 8:47–8:52पष्मी इतियास कार कहेच छती जे आर्या पन्दरसो इसा पूर्मे भारत आँल चला.
- 8:52–8:54आई, यहे ताईम लाईंता पडाला लाची
- 8:54–8:57मुदा रिगवेद में सरस्वती नदीक एक ता बहुत विशाल
- 8:57–8:59आप प्रवाइत नदीक रूप में वणन काईल गे लाची
- 8:59–9:01मुदा सरस्वती नदीक ता सुखाए लाची ने
- 9:01–9:07ता एकर काल निर्दारन सा आर्यक आक्रमण की समबंद यी मैकनिसम कोना काज करे ता ची.
- 9:07–9:12यह तो पोईंत आची. ये ताइसे यी तरक एक दम अकाट्टे बहुजाई ता ची.
- 9:12–9:17बूगर भी ये वा जीोलोगिकल अद्धायन यी प्रमानित करे ता ची,
- 9:17–9:20जो उग़ा बापरे देग पुरान आची
- 9:20–9:25तो उखरा लिखेवाला आरे पंद्रा सो इसापृपृप में बाजर से कोना आभी सके च्छला
- 9:25–9:29गजेंद्र ताकृर की इविसलेशन देखावाइत आची
- 9:29–9:33जो खोना एक ताकृर उपना आची तो उखरा लिखेवाला आरे
- 9:33–9:43तजव रीग वेद उतेक पुरान अची तो उक्रा लिखेवाला आरे 15-1600 इसापुर्प में बहर से कोना आभी सकेच छला
- 9:43–9:50गजेंद्र ताकृर की इविसलेशन देखावाई दची जो कोना एक ता नदीक सुखब मात्र एक ता भगोली गटना नहें
- 9:50–9:55बल की एक तपुरा एतिहासिक नरेटिव के द्वस्त करबाग प्रमान अची
- 9:55–9:56ये तबद तारकिक बात अची
- 9:56–10:00हुंकर तरक अची जे आरे एताई के मुल निवासी चला
- 10:00–10:05आस्सरस्वती नदी सुखबाग बाद उलोकनी जीवन यापन के लिल तो सर स्थान पर पलायन कलने
- 10:05–10:10इत पुरा स्तापित अक्ध्डमिक धाचा के मुब हरी खसावेत अच्छी
- 10:10–10:16तक एकर अच्छ एब हेल जि सदी कहन सप़डल जारहेल इतिहास एक ता गोसिप जगा ची
- 10:16–10:21पस चाते विद्वान एहन सिद्धानत दिलने की आख कि मात्र भारत के नीचा दिखे बाक लेल
- 10:21–10:29दिखु ताकुर के पोठी के अनुसार एकर पाचा उई विद्वान सबख आपन वैचारिक मजबूरी चल
- 10:29–10:38उदाहनां के लेल मैक्स्मूलर जकाम विद्वानक के बाईबिलिक काल गरनाक के भीतर दुनिया के इतिहास फिट करवाक चल
- 10:38–10:42आँ, माने आपन दर्म गरन्ताक हि साभ से
- 10:42–10:46इक्दम, उसमै के पष्च्ट्मी सोच यह नहीं मानी सकत चल,
- 10:46–10:53जि भारत में एक प्राचीन और विक्सित सबभेता बहुसकत अची जखन यूरोप पाशान युग में चल.
- 10:53–10:58ताहे लेल उसब बारत के प्राषीन्ता के कम करवाग प्रैयास कलने.
- 10:58–11:00इबुजनाई बहुत जरूरी आची.
- 11:00–11:04आब हम्रा एस जोडल एक ता दूसर बात पर आवे दिया.
- 11:04–11:08पोठी में ताकृर महाबारत के चर्चा से हो कैने चती.
- 11:08–11:10हाँ. उहो बद रोचा कची.
- 11:10–11:17अम पडलों जे पश्च्मी विद्वान के लेल इमानब कष्ण चल जे महाभारत जका विशाल महाग काव्या
- 11:17–11:21जाहे में एक लाक श्लोक अची उ पोना लिखल जासकत ची
- 11:21–11:29ताहे लेल उ सब कहले नहीं, जे महाभारत मुल रूप से मात्र 8800 श्लोकक जैसहीता चल.
- 11:29–11:31आप फिर उ चाभी सजार भेल?
- 11:31–11:38इक दम चाभी सजार श्लोकक भारत बनल, आप फिर विस्तारद भहे के एक लाक श्लोकक महाभारत बनल.
- 11:38–11:42पश्च्ट्मी विद्वान एक राख शेपक वा अईंटर्पूलेशन कहे चत्छती
- 11:42–11:46माने बाद में जोडल गेल मिलावाटी चीज
- 11:46–11:49मुदा ताकूर एक राख चत्छतीन
- 11:49–11:51एते हम्रतनी शंका आचे
- 11:51–11:53गनित्य रुप से देखी
- 11:53–12:00तंजकोनो ग्रन्त 18,101,00,000 लोकक बहजायता ची, तो अख्रा ख्षेपक नहीं तक भी कहल जायता.
- 12:00–12:05कोनो चीज मूल सा एटिक पैग कोना बहसके तची बिना बहर से किचु जोड ले.
- 12:05–12:11यी बहुत तरक संगत प्रष्न अची और ताकृर की ये हे उतर हुनक मेधा के दर्शावाई तची
- 12:11–12:15देखो पच्च्मी भिद्वान लिक्ध परमपरा का आदी चला
- 12:15–12:17माने जे लिखल गेल से फिक्स बहुगेल
- 12:17–12:21अग, ज़हां एक बार जे पन्नापर लिखल गेल उप्रीस बहुजायताची
- 12:22–12:24औई में किचु जोड़ा ब माने उख्रा दूषित करेप
- 12:25–12:28मुदा भारत कपरमपरा श्रूती आएस्मिरती कपरमपरा आची
- 12:29–12:31येक ता मोखिक असांगीतिक परमपरा आची
- 12:31–12:36ताकृर स्पष्ट करे चतिन ज़े श्रूति परमपरामे कता विस्तारीत होई ताची
- 12:36–12:39मुदा उमुल कता सबारक नय होई ताची
- 12:39–12:42एक रा एक ता भीज आग गाचकर रूप मे देखू
- 12:42–12:44भीज शोथ होई ताची
- 12:44–12:46मुदा जकनो विषाल गाच बने ताची
- 12:46–12:50तो उगाज कर दारी पात उई भीज का चेपक नय आची
- 12:50–12:53औग उगरे हिस्चा जी
- 12:53–12:56इग्दम उगरे सबहाविक विस्टा रची
- 12:56–12:59महाकावे में जखन नव प्रसंग जोडे तची
- 12:59–13:04तो उसमाज के नव यधारत, नव दर्षने के उवी मूल कता
- 13:04–13:07अगरा गोसिप या मिलावद कही देनाई
- 13:07–13:12भार्तिय ग्यान मिमान्सा के पश्च्मी लिखित मानक पर तोलवाके क्ता बेतु का प्रयास अची
- 13:12–13:15ये तेक्ता बहुत पए एक वैचारी क्षिझ्ट अची
- 13:15–13:18मने हम सब इतिहास आस यहते के
- 13:18–13:21अपने अपने बज़ाग बज़ाग लगाई आची
- 13:21–13:24जे नरेटेव पर कबजा करवा खेल आचे
- 13:24–13:27औईसा निकली कर जो हम सब आजुक समे में आबी
- 13:27–13:29तकी इखेल बदल गेल आची
- 13:29–13:31अपने अपने आची
- 13:31–13:33अपने अपने आची
- 13:33–13:35अपने आची अपने आची
- 13:35–13:42अगाडि क्शड़द में गजेंद्धाक। के दारनात चोद्री का उपन्यास चमेली रानी अवकर दोसर भाग माहुर कषमिक्षा कर अच्छती
- 13:42–13:45अव, इव पन्यास ता बहुत चर्चीत रहे लाची
- 13:45–13:56अगारी क्श्ड़द में गजेंद्र ताकृर के दारनात चोद्री के उपन्यास चमेली रानी आोकर दोसर भाग माहुर के समिक्षा कर अच्छती
- 13:56–13:59अग, इउपन्यास ता बहुत चर्चित रहे लाची
- 13:59–14:12इक्दम, इते इ गुलाब मिसर, नांगन नतनात, और चमेली रानी जका पात्रक माद्ध्यम से, आदूनिक राजनितिक जे पोस्ट्मातम कैल्गेल चे, उ एक्दम सकीक लागे तची.
- 14:12–14:18इपने आजा बवाद इजे चमेली रानी उक्राज़े चार साल पहने लिखल गल जल
- 14:18–14:22इदिख हवे तखछी जे चेत्रीय साहित्यद कतक जीवन्त अची
- 14:22–14:27आउ समाजक जमीनी यदारत के कतक जल्दी पक्डिले तखछी
- 14:27–14:37ये दिख है ता ची जे चेत्रीय साहित्या कतक जीवन्त आची, आ उ समाजक जमीनी यधारत के कतक जल्दी पक्रिले ता ची.
- 14:37–14:40चमीनी रानी कुनो सादारन राजनी तिक कता नहीं आची.
- 14:40–14:42तक की आची ये में ते खास.
- 14:42–14:44अग, उजे बाहुबली आचे?
- 14:44–14:51अग, अपन चाला की अब बाहुबल से विवस्ताक कमजोर करी के पक्ड़ाई तची अविदाएक बन जाई तची.
- 14:51–14:57आच, चमिली रानी जे एक ता सादारन इस्त्त्री से सथ्ताक शिक्फर दरी पहुचे क्चत्ती.
- 14:57–15:01अद चमिली रानी जे एक ता सादारन इस्त्री से सत्ताक शिक्र दरी पूचेक चत्थी.
- 15:01–15:03इमात्र कल्पना नहीं आची.
- 15:03–15:05मुदा एहे में व्यंगय कत्ता या ची.
- 15:05–15:09इता मात्र जे बहुर आची तकर ब्र्पोटिंग बहल ने.
- 15:09–15:13विंग ये ही बात में अची जिजे लोक वेवस्ता से शोषित चला
- 15:13–15:17जकन उस सत्ता में आवएज चतीन, तो वेवस्ता के बडलेइत चतीन
- 15:17–15:47अग, उज़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़
- 15:47–15:50अग्व्ख्लापनक इचर्चा हम्रा एहिपोतिके सबसे बेतुका,
- 15:50–15:54वा कहु सबसे अबसर्ट आजास्स्पड हिस्पद हिस्चा दिस्लोजी,
- 15:54–15:58गुलाब मिस्र कब बअद्धिक ब्रष्टा चार होए,
- 15:58–16:00वा नांक्तन नाथक बाहुबल,
- 16:00–16:04इद बहुत दरावना यधार्त्ताची
- 16:04–16:09अद्धाकुरक समिक्चा एह यधार्तक के बड निरभिक्ता से सामने रखाई तची
- 16:09–16:13अख्ख्लापनक इचर्चा हमरा एह पोती के सबसे बेतुका
- 16:13–16:18वा कहु सबसे अबसर्ट आहास्स्यास्पद हिस्सा दिस लोग जाए तची
- 16:18–16:48आँ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ �
- 16:48–16:56अद्रिश्य बहुत लोग दार्क कोमेटी फिम्जगा जे जब तेम रिट्युक बादो लोग लोग लाईन में तादबख़ आपन रुत्बा दिखा रहा लाईची
- 16:56–16:59इएक ता महत्टूपुन प्रष्न तादख रहा थची
- 16:59–17:03इद्रिश्य ता एक दम कोनो दार्क कोमेटी फिम्जगा आजे
- 17:03–17:07जद्यते म्रित्युक बादो लोक लाईन में तारदबखा आपन रुत्भा दिखा रहा लाईची
- 17:07–17:10इएक ता महत्तुपुन प्रष्न तारद करा तची
- 17:10–17:18इद्रिश्य मानवक अस्तिट्वगत भेतुकापन माने अग्जिस्टेंचल अबज़र्टी के बहुत नीगजगा का दिखावी तची
- 17:18–17:19अख्चोना
- 17:19–17:24दिखो, साद्दारने ता हम सब माने ची जे म्रित्त्य। सब के समान कदेई तची
- 17:24–17:27मुद्त्य। सब सुपेग इक्वलाईजर आची
- 17:27–17:31राजा रंक सब के एके गाट उतारे तची
- 17:31–17:37मुदा एहे नाटक में, मुद्त्य। उही लोंकिक प्रपंच्या के समाथ नहीं करे तची
- 17:37–18:07मनुस्से अपना संगे अपन वर्ग भेद, अपना अहंकार, अपन भ्रष्टाचारक आदद, उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
- 18:07–18:11यहे नाटकक सब सब पएी के कलाईमेखस तखन अबईतची
- 18:11–18:13जकन उ सवर्ग कक अदिकारी सब
- 18:13–18:15जे न्याए करेला बैसल चतिन
- 18:15–18:17उ सब अवाख कर देच चतिन
- 18:17–18:20एक दम उसीन तवास्टर पीस अची
- 18:20–18:23चित्रगुफत आपन नमहर दाडी उतारी लेच चतिन
- 18:23–18:28अर स्वयम यम्राज आपन मुक्ट उतारी के कात मेरखी दे च्छतिन
- 18:28–18:31अजक्चनो आपन एई रूप ये मेक्ट उतारे च्छतिन
- 18:31–18:35तो एक दम सदारन मनुस से जे का देखाई च्छतिन
- 18:35–18:38आप जकन दूटी से थाकल कोनो क्लर क्हाँ
- 18:38–19:08आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
- 19:08–19:12चाहे उ दर्तिक राजनेतिक वेवस्ता हो, वह स्वर्गक न्याएक वेवस्ता
- 19:12–19:16उ सव मात्र एक ता मेकः वची एक ता अवरन अची
- 19:16–19:17माने सब नाटा कची
- 19:17–19:21बलकल, जखन कुनो अदिकारी आपन कुर्सी से उठाइ तची
- 19:21–19:24जखन न्यायादिश आपन गाँन उतारे तची
- 19:24–19:27वा जखन राजा आपन मुकुट खोले तची
- 19:27–19:30तो उ तीक उत्बे लाचार असादारन होई तची
- 19:30–19:33जे तेक उ लाईन में थारब हैल पोकेट मार
- 19:33–19:34वा सादारन नागरेक
- 19:34–19:37बाप्रे, इप बोहुत गेहरा बात ची
- 19:37–19:42इनातक इस्तापित करेत अची, जिस संस्तागत शक्ती मानव निर्मेत अची,
- 19:42–19:44ओ इश्वरिय वाशाश्वत नहीं अची.
- 19:44–19:48मुक्ष पहर्ला से लोक यम्राज नहीं बनी जाथ अची,
- 19:48–19:53बलकी कुर्सिक अआबहमंडल अख्रायम्राज बनेवक ब्रहम पैदा करेता ची.
- 19:53–19:56इद्त सच्मे एक ता बहुत पैइग रहस्योट गातन आची.
- 19:56–19:59ता एस बआक मुल अर्थ की भेल,
- 19:59–20:02जोहां एली समपून विस्त्रित चर्चा के समेटी,
- 20:02–20:07तकुरुक्षेत्रम अंतर मनक कोनो एक्ता विशयक पोती नहीं अची.
- 20:07–20:09रहा है, एक्ता समपूरन यात्रा.
- 20:09–20:14एक्ता एहन यात्रा, जे हम्रा सब के सीट बसंत के लोग कताक माद्यम सा,
- 20:14–20:19मानव मनक पाइग असुरक्षा अननेतिक तक दर्षन करावी तची.
- 20:19–20:22उतेई से इतिहास के मेदान में प्रवेश करेताची
- 20:22–20:25जताई इ आर्या अक्रमण सिद्धान्त,
- 20:25–20:27सरसोती नदिक साख्षा का आदार पर,
- 20:27–20:31पाष्चात्ते विद्वानक उही नेरेटिव के द्वस्त करोताची
- 20:31–20:34जक्रा हम सब सदिखन सा मानेत आबिरहल ची.
- 20:34–20:41आई इहोँ स्तापित करेत आफी, जिश्वॉती परमपराके पाश्चाते लिखित मानक पर नहीं तोलल जासकत आफी.
- 20:41–20:47इग्दम. उकर बादि आदूनिक राजनेती अचमेली रानी का बाहुबली यदार्थ दर्यबेत आफी.
- 20:47–20:52अद्तत्ह नो एंट्री मावेश का मद्ध्यम्सद यी अस्पस्ट कर देताची
- 20:52–20:55जे यी जे सब ता सत्ता अशक्ती अची
- 20:55–20:58उ मात्र एक ता मुक्ष अची एक ता मेखव अची
- 20:58–21:01सही कहली, गजेंद्र ताकृर के यी पोठी
- 21:01–21:04इपोत्ती वास्तव में हम्रा सब के सोच्बाक नव्दिशादवित आजी
- 21:05–21:09इक ता आवान आजी, क्रितिकल फिंकिंग या आलोचनात्मक दिष्टी के ले
- 21:09–21:13मने जे, सूनु, उक्रा आख मुनके नहीं मानो
- 21:13–21:14हाँ
- 21:14–21:18इपोत्ती सिख्वाइत आजी, जे कोनो भी सुच्ना,
- 21:18–21:22चाहे उ इतिहासक मोट-मोट पुस्तक में फैक्त कैके लिखल हो,
- 21:22–21:24चाहे उ कुनो निता कबाशन हो,
- 21:24–21:28वा परमपरा से चली आएब्रहल, कुनो कता हो,
- 21:28–21:31उक्रा आख मुनके स्विकार नहीं केल जाए.
- 21:31–21:33इज्यान तकने सार्थक होईत आची,
- 21:33–21:36जगन उक्रा तर्ख ककसी पर कसल जाए.
- 21:36–21:41इच्चर्चा हमरा सब के एक ता बहुत महत्वपूँन मोड पर लोके आवी गेल अच्छी.
- 21:41–21:46इसब सुनिलाक बाद एक ता स्वबहाविक विचार मन में उठाई तची.
- 21:46–21:47कुन विचार
- 21:47–21:54देनिक जीवन में चारो काथ से एतेक सुचना, एतेक समाचार, एतेक इतिहासक दावा आवी रहल आचे.
- 21:54–22:00की इसमबहव नहीं आची? जे जे चीस के हम सब अतल सत्यमान के बेठल ची,
- 22:00–22:05उो कक्रो दवारा अपन सूविदाकलेल रचेल गेल एक ता नरेटिव मात्र हो?
- 22:05–22:09इसमबावनात सदा सरवदा बनले रही तची
- 22:09–22:13जक्रा हम स्तापित इतिहास माने ची
- 22:13–22:15कतवू उहो तख कक्रो दवारा मात्र
- 22:15–22:19अपन एजेंडाक लेल जोडल गेल चेपक नहीं ची
- 22:19–22:21सब सब पैग बात
- 22:21–22:23जे व्यवस्ता जे अदिकारी
- 22:23–22:25वा जे विचारक
- 22:25–22:28के हम सब यम्राज जका सक्तिषाली अ दरावना मानिक के,
- 22:28–22:31उकर अग्याक पालन करहल ची,
- 22:31–22:36कतव उ उहो तमात्र एक ता नकली डाडी आमुकुट पहीरी के नहीं बैसला ची.
- 22:36–22:38एक दम सत्या.
- 22:38–22:40जो उ आवरन उतारी देजाए,
- 22:40–22:46तकियो सत्य वास्तव में उत्बे पैग रहत, एही पर विचार अवष्षे केल जाए.
- 22:46–22:51यही उदेड भूनके संग आएक की यी विस्त्रिच चर्चा हम सब एते समाप्त करे ची.
- 22:51–22:58तक्हन्दरी अपना चारो तातक दून्याके एक ता नवद्द्रिष्टी सा देकहीत तरहू, अप प्रश्नपुचहीत तरहू.
Plain text
अगर मुल माए मरी गे लची जे नफसोतीली माए आई लचीने अब वच्चा सब के खिनाए कुआईबे तकाले, अपन महल सब बहर देखी रहल चफीन अपन गाज पर एक चीराएक खोता देखा पडे था चीनी उतेपर की चीराएक की चुबच्चा सब अची अपन पोर की चीरायक अखर मूल माए मरी गे लची जे नफसोती ली माए आए लचीने बच्च्चा सब के खिनाएक हूएबेद खाले उकर मूँ में आँ खाँट दोरा हल अची जाए सो मरी जाए बाप्रे यी तो बद खोफनाग अची आई देख के रानिक मन में एक टाशंका अबेच छीनी जे जा हम मरी जाएब ता हमर बच्चा सबक सम्से हो यही होईतकी अद्दुर्भाग्य सा किचु दिन के बाद उही रानिक मुद्टियो बहुजाएत छी उकर बच्चा जे चत्फी, सीदा बसंथ, उ तीक एहन परिस्तितिक शिकार होईच्चति मने उस्वाटेली माए वाला बात सच ब हो जाएत अची शिंदम नवकर रानी मने हुनकर जे सवाटेली माए चफी उ एक दिन गें देरे बाग बहाने राजासा उही दुन्नू बच्छा कलेजा माने लेई चफीन कलेजा माँले चफीन हाँ, इस शुनी में कोनो उगदाम और इवास्तवे में एक ता बहुत सशक्त शुर्वात आचे हम सब आई जिश्वोट समगरी पर चर्चा कर हल चिने उगजेंद्र ताक्र कर रचल कुरु छेत्रम अंप्र मनक आचे 2009 में स्रूती प्रकाशन से इए आए लचल तो उगजेंद्र ताक्र कर रचल कुरू छेत्रम अंटर मनक अचे 2009 में स्रूती प्रकाशन से इया आल्चल इक उनो सदारन पोती नहीं आचे तए एक इची टीक टीक इक रा आईक्ता मेटा टेक्स्ट वा महा पाट कही सके इची मैं इस सात्ता कहन्द में विस्तार पाभल इक ता एहन रचना जाही में निबंद, उपन्यास, कता, नातक, महाकाव्य, बाल साहित्य, सब कि चु एके ता जिल्द मैं, मैं एके बाइन्टिंग में आचे. बाप रे, इते कि चु एके पोठी में? आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ ता एके ता पहग प्रष्न इई उठेता ची, जे एके ता पोठी में इत टेक विशाय राखवा की आवश्शकता चल, मुदा जेना जेना हम सवाई पोठी के भित्तर जाएत ची, ता बुजाई टा ची, बज़ाई तची जे इ ऱग रग विश्य नहीं आची बलकी मानव सवभाउ के बुजवाग ऱग रग माद्ध्ध्यम आची चहीद कहलीे तवही सीट बसन तक लोग कता पर वापस आबएची जे मनिपुर नगर के राजा महेश्वर सिंखा कता आचे कता सुने में बहुत रूमान्चक लागगता ची, रानिक शंका अ अंततः सत्माय द्वारा कलेजा मांगब, मुदा गजेंद्र ताकृरे ही पोत्ही में एक रा कोना प्रस्तृत करने चाती, की इमात्र एक ता संकलन ची? नहीं नहीं एदेई सब सरोचक बात अची एई आची जे एई मात्र संकलन नहीं आची आईई पोतिक एई आच्छ बहुत व्यापक फील्वक मने चेट्र कारेक आदार पर तटयार केल गल गेल एची एमें केशम मेहतोग बड महत्तोपोण सव्योग चलेनी मैंने, गाउं गाउं जाके कता जमा कैल गले? आए, एक दम. लिखख लुक्नी गाउं गाउं गुहीं के एक कता क मोगिक परमपराके जमा कैल नहीं. आद देखो, मोगिक परमपराक विषिष्ता इई होई देज, जे कोनु भी कता एके रूप में अस्तिर ने रहेते. आँ, लोग अपन रह साब से बदली देते शूक्रा. बलकु, जखन शूद करता फील्ड में जाए च्छती, तो उक्रा एक्ता कताक अनेक रूप में टेच्छे. जिना एक कता में, इकta संसकरन में इच्छे उजे सीता बसंट, इकta बयनक साप मारके हंसक बच्चक बच्चे वेच्छती. अच्छा. आपहे रोहन्स क्रिताग्न बहुके, औही दुनु भाइके, आपन पाखिपर भीसाके उडिया लेत अची. इदनीक बात भेल. मुता, दोसरक्ता प्रसंग में कता एक दम गलग मोड लेतेच. उते बसन्तक एक ता जहाज किले ल भली देवाग बात अवे देज. जक्हन जहाज भीछ दार में रुग जातेच. रुगी जाओ. इते हमरा एक ता बाध्स पुष्ट करब, इसे बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खाँ बद्खा� अदिम समाज में जीवन कतिन चल अब अच्छा सब के इभ भुजव आवश्ष्छल जे सन्सार में क्रूर्टा आण्याई अच्छी अच्छा मैंने सोतेली मोग कर अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अगर दूसर काछ सियो अची ने तिक्ताक अस्थापना अगर दूसर काछ सियो अची ने तिक्ताक अस्थापना अगर दूसर काछ सियो अची ने दूसर काछ सियो अची अगी अज़्ाउज़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ाउग़्ा। अग, आईकर दूसर काथ सियो अची ने तिक्ताक अस्थापना, एक अठा में जकन हन्स कबच्चा सीथ बसंद क मदद करबाग बाद करे थची, तकन उखहे थची जे खेनाई से भेसी प्रेम बाइग अची. बाए, इत बद गरा बाद बेल. जे खेनाई से बेसी प्रेम बाई गची बाँ इत बद ग़रा बाद बेल ता है जखन मनुश्वक समाज निष्ठूर भाजाई तची तचन इग ता प्रक्रती अजीव जन्थुक माद्धियम से प्रेम अख्रतक गताक पाध पाध पढ़ब़वेग तची ताहिली इे कता सब मोखिक रूप से इते एक दिंदरिक जिन्दा रहन. इब भह दिल्चस पची जे लोग कता कोनो तरसे आपन दारका अ खफनाक रूपक पाचा मानव सबावक सत्ते के नुका के रख है तची. मुदा एत्तेसे इविश्य आरो भेसी दिल्चस बहाजाई ताछे वो कै ना कारन, जखन इएही मानविय द्रिष्टिकोन इखल्पना आ पुर्वाग्रा हम्रा सबक थोस इतिहास में प्रवेश कर जाई ताछी तक्खन की हो ताछे आ, इतिहास क बात कर अहल ची, आ, इतिहास त सत्ते परादारी तो वाख चाही, मुदा एही पोतीक दोसर क्हन्ड देखावैं तची, जे इतिहास सहु बहुत हद्द्धरी ककरो नरेटीव वाद्द्श्टी कोण पर निरभर करे तची. ये तेई गजेंद्र थाकृर इतिहासक उही पन्नापर सीदा प्रहार करेच्छती जक्रा हम सब वर्षो सब भिद्याले में सथे मानीन कपड़ाई ताभी रहल ची. रहा, ये ही पोतिक सब सा विवादास पद आमहत तो पून खन्डचे. गजेंद्र ताकृर एते मायानन्द्मिष्र कचारीता एतिहासिक उपन्यास कचर्चा करे चती. कुन्चारीता? प्रथमम शेल्पुत्रीचा, मंद्र्पुत्र, पूरोहित, आश्रीदान. एही पोती सबख ताकृर जी एक ता बहुत गंभीर समिक्षा कैन अचे. अटाकुर का आलोचना केंद्र इण नहीं आची जे उपन्यासक बाशा कहरा वची तुफिर की आची आलोचना इची जे मायानन्द्मिष्र आपन उपन्यास के अटिहासिक आदार लेवाक ले पाश्चाते इठिहास कार सबख जेना मैक्स मुलर अव वीलरक जे आरे अक्रमन सिद्धान्त वा आरे इनवेजन थ्फीरी अची उक्रा बिना कुन उप्रष्नक सुईकार के ले लन. यह आपी आबी के द्रवी लोकनी पर आक्रमड कैलन ही एक दम यही हो कहात आचे जेक्रा पश्मी इतिहास कार च्तापित कैलन ही उनकर मानने चले जे हदब्पा सबयतक पतन आरे सबख आक्रमड सबहल बवाड़, मुदा जो हम एक राप पएग परप्रेच्ष जोडी, तपोठी मिठ्धाकृर एही अपने वेशिक या, कोलोनियल चश्मा के उतारी के साक्ष के आदार पर तरक दए च्छती. की साक्ष दे च्छतीो? उ बाशा विग्यान, शुति परमप्रा, अ विषेश रूप सब होगोलिख साखच के उप्योग कर इच्छती, जे ना सवसः पहेग तरक सरस्वती नदी कछी, पष्मी इतियास कार कहेच छती जे आर्या पन्दरसो इसा पूर्मे भारत आँल चला. आई, यहे ताईम लाईंता पडाला लाची मुदा रिगवेद में सरस्वती नदीक एक ता बहुत विशाल आप प्रवाइत नदीक रूप में वणन काईल गे लाची मुदा सरस्वती नदीक ता सुखाए लाची ने ता एकर काल निर्दारन सा आर्यक आक्रमण की समबंद यी मैकनिसम कोना काज करे ता ची. यह तो पोईंत आची. ये ताइसे यी तरक एक दम अकाट्टे बहुजाई ता ची. बूगर भी ये वा जीोलोगिकल अद्धायन यी प्रमानित करे ता ची, जो उग़ा बापरे देग पुरान आची तो उखरा लिखेवाला आरे पंद्रा सो इसापृपृप में बाजर से कोना आभी सके च्छला गजेंद्र ताकृर की इविसलेशन देखावाइत आची जो खोना एक ताकृर उपना आची तो उखरा लिखेवाला आरे तजव रीग वेद उतेक पुरान अची तो उक्रा लिखेवाला आरे 15-1600 इसापुर्प में बहर से कोना आभी सकेच छला गजेंद्र ताकृर की इविसलेशन देखावाई दची जो कोना एक ता नदीक सुखब मात्र एक ता भगोली गटना नहें बल की एक तपुरा एतिहासिक नरेटिव के द्वस्त करबाग प्रमान अची ये तबद तारकिक बात अची हुंकर तरक अची जे आरे एताई के मुल निवासी चला आस्सरस्वती नदी सुखबाग बाद उलोकनी जीवन यापन के लिल तो सर स्थान पर पलायन कलने इत पुरा स्तापित अक्ध्डमिक धाचा के मुब हरी खसावेत अच्छी तक एकर अच्छ एब हेल जि सदी कहन सप़डल जारहेल इतिहास एक ता गोसिप जगा ची पस चाते विद्वान एहन सिद्धानत दिलने की आख कि मात्र भारत के नीचा दिखे बाक लेल दिखु ताकुर के पोठी के अनुसार एकर पाचा उई विद्वान सबख आपन वैचारिक मजबूरी चल उदाहनां के लेल मैक्स्मूलर जकाम विद्वानक के बाईबिलिक काल गरनाक के भीतर दुनिया के इतिहास फिट करवाक चल आँ, माने आपन दर्म गरन्ताक हि साभ से इक्दम, उसमै के पष्च्ट्मी सोच यह नहीं मानी सकत चल, जि भारत में एक प्राचीन और विक्सित सबभेता बहुसकत अची जखन यूरोप पाशान युग में चल. ताहे लेल उसब बारत के प्राषीन्ता के कम करवाग प्रैयास कलने. इबुजनाई बहुत जरूरी आची. आब हम्रा एस जोडल एक ता दूसर बात पर आवे दिया. पोठी में ताकृर महाबारत के चर्चा से हो कैने चती. हाँ. उहो बद रोचा कची. अम पडलों जे पश्च्मी विद्वान के लेल इमानब कष्ण चल जे महाभारत जका विशाल महाग काव्या जाहे में एक लाक श्लोक अची उ पोना लिखल जासकत ची ताहे लेल उ सब कहले नहीं, जे महाभारत मुल रूप से मात्र 8800 श्लोकक जैसहीता चल. आप फिर उ चाभी सजार भेल? इक दम चाभी सजार श्लोकक भारत बनल, आप फिर विस्तारद भहे के एक लाक श्लोकक महाभारत बनल. पश्च्ट्मी विद्वान एक राख शेपक वा अईंटर्पूलेशन कहे चत्छती माने बाद में जोडल गेल मिलावाटी चीज मुदा ताकूर एक राख चत्छतीन एते हम्रतनी शंका आचे गनित्य रुप से देखी तंजकोनो ग्रन्त 18,101,00,000 लोकक बहजायता ची, तो अख्रा ख्षेपक नहीं तक भी कहल जायता. कोनो चीज मूल सा एटिक पैग कोना बहसके तची बिना बहर से किचु जोड ले. यी बहुत तरक संगत प्रष्न अची और ताकृर की ये हे उतर हुनक मेधा के दर्शावाई तची देखो पच्च्मी भिद्वान लिक्ध परमपरा का आदी चला माने जे लिखल गेल से फिक्स बहुगेल अग, ज़हां एक बार जे पन्नापर लिखल गेल उप्रीस बहुजायताची औई में किचु जोड़ा ब माने उख्रा दूषित करेप मुदा भारत कपरमपरा श्रूती आएस्मिरती कपरमपरा आची येक ता मोखिक असांगीतिक परमपरा आची ताकृर स्पष्ट करे चतिन ज़े श्रूति परमपरामे कता विस्तारीत होई ताची मुदा उमुल कता सबारक नय होई ताची एक रा एक ता भीज आग गाचकर रूप मे देखू भीज शोथ होई ताची मुदा जकनो विषाल गाच बने ताची तो उगाज कर दारी पात उई भीज का चेपक नय आची औग उगरे हिस्चा जी इग्दम उगरे सबहाविक विस्टा रची महाकावे में जखन नव प्रसंग जोडे तची तो उसमाज के नव यधारत, नव दर्षने के उवी मूल कता अगरा गोसिप या मिलावद कही देनाई भार्तिय ग्यान मिमान्सा के पश्च्मी लिखित मानक पर तोलवाके क्ता बेतु का प्रयास अची ये तेक्ता बहुत पए एक वैचारी क्षिझ्ट अची मने हम सब इतिहास आस यहते के अपने अपने बज़ाग बज़ाग लगाई आची जे नरेटेव पर कबजा करवा खेल आचे औईसा निकली कर जो हम सब आजुक समे में आबी तकी इखेल बदल गेल आची अपने अपने आची अपने अपने आची अपने आची अपने आची अगाडि क्शड़द में गजेंद्धाक। के दारनात चोद्री का उपन्यास चमेली रानी अवकर दोसर भाग माहुर कषमिक्षा कर अच्छती अव, इव पन्यास ता बहुत चर्चीत रहे लाची अगारी क्श्ड़द में गजेंद्र ताकृर के दारनात चोद्री के उपन्यास चमेली रानी आोकर दोसर भाग माहुर के समिक्षा कर अच्छती अग, इउपन्यास ता बहुत चर्चित रहे लाची इक्दम, इते इ गुलाब मिसर, नांगन नतनात, और चमेली रानी जका पात्रक माद्ध्यम से, आदूनिक राजनितिक जे पोस्ट्मातम कैल्गेल चे, उ एक्दम सकीक लागे तची. इपने आजा बवाद इजे चमेली रानी उक्राज़े चार साल पहने लिखल गल जल इदिख हवे तखछी जे चेत्रीय साहित्यद कतक जीवन्त अची आउ समाजक जमीनी यदारत के कतक जल्दी पक्डिले तखछी ये दिख है ता ची जे चेत्रीय साहित्या कतक जीवन्त आची, आ उ समाजक जमीनी यधारत के कतक जल्दी पक्रिले ता ची. चमीनी रानी कुनो सादारन राजनी तिक कता नहीं आची. तक की आची ये में ते खास. अग, उजे बाहुबली आचे? अग, अपन चाला की अब बाहुबल से विवस्ताक कमजोर करी के पक्ड़ाई तची अविदाएक बन जाई तची. आच, चमिली रानी जे एक ता सादारन इस्त्त्री से सथ्ताक शिक्फर दरी पहुचे क्चत्ती. अद चमिली रानी जे एक ता सादारन इस्त्री से सत्ताक शिक्र दरी पूचेक चत्थी. इमात्र कल्पना नहीं आची. मुदा एहे में व्यंगय कत्ता या ची. इता मात्र जे बहुर आची तकर ब्र्पोटिंग बहल ने. विंग ये ही बात में अची जिजे लोक वेवस्ता से शोषित चला जकन उस सत्ता में आवएज चतीन, तो वेवस्ता के बडलेइत चतीन अग, उज़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़ अग्व्ख्लापनक इचर्चा हम्रा एहिपोतिके सबसे बेतुका, वा कहु सबसे अबसर्ट आजास्स्पड हिस्पद हिस्चा दिस्लोजी, गुलाब मिस्र कब बअद्धिक ब्रष्टा चार होए, वा नांक्तन नाथक बाहुबल, इद बहुत दरावना यधार्त्ताची अद्धाकुरक समिक्चा एह यधार्तक के बड निरभिक्ता से सामने रखाई तची अख्ख्लापनक इचर्चा हमरा एह पोती के सबसे बेतुका वा कहु सबसे अबसर्ट आहास्स्यास्पद हिस्सा दिस लोग जाए तची आँ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ आ � अद्रिश्य बहुत लोग दार्क कोमेटी फिम्जगा जे जब तेम रिट्युक बादो लोग लोग लाईन में तादबख़ आपन रुत्बा दिखा रहा लाईची इएक ता महत्टूपुन प्रष्न तादख रहा थची इद्रिश्य ता एक दम कोनो दार्क कोमेटी फिम्जगा आजे जद्यते म्रित्युक बादो लोक लाईन में तारदबखा आपन रुत्भा दिखा रहा लाईची इएक ता महत्तुपुन प्रष्न तारद करा तची इद्रिश्य मानवक अस्तिट्वगत भेतुकापन माने अग्जिस्टेंचल अबज़र्टी के बहुत नीगजगा का दिखावी तची अख्चोना दिखो, साद्दारने ता हम सब माने ची जे म्रित्त्य। सब के समान कदेई तची मुद्त्य। सब सुपेग इक्वलाईजर आची राजा रंक सब के एके गाट उतारे तची मुदा एहे नाटक में, मुद्त्य। उही लोंकिक प्रपंच्या के समाथ नहीं करे तची मनुस्से अपना संगे अपन वर्ग भेद, अपना अहंकार, अपन भ्रष्टाचारक आदद, उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई यहे नाटकक सब सब पएी के कलाईमेखस तखन अबईतची जकन उ सवर्ग कक अदिकारी सब जे न्याए करेला बैसल चतिन उ सब अवाख कर देच चतिन एक दम उसीन तवास्टर पीस अची चित्रगुफत आपन नमहर दाडी उतारी लेच चतिन अर स्वयम यम्राज आपन मुक्ट उतारी के कात मेरखी दे च्छतिन अजक्चनो आपन एई रूप ये मेक्ट उतारे च्छतिन तो एक दम सदारन मनुस से जे का देखाई च्छतिन आप जकन दूटी से थाकल कोनो क्लर क्हाँ आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � चाहे उ दर्तिक राजनेतिक वेवस्ता हो, वह स्वर्गक न्याएक वेवस्ता उ सव मात्र एक ता मेकः वची एक ता अवरन अची माने सब नाटा कची बलकल, जखन कुनो अदिकारी आपन कुर्सी से उठाइ तची जखन न्यायादिश आपन गाँन उतारे तची वा जखन राजा आपन मुकुट खोले तची तो उ तीक उत्बे लाचार असादारन होई तची जे तेक उ लाईन में थारब हैल पोकेट मार वा सादारन नागरेक बाप्रे, इप बोहुत गेहरा बात ची इनातक इस्तापित करेत अची, जिस संस्तागत शक्ती मानव निर्मेत अची, ओ इश्वरिय वाशाश्वत नहीं अची. मुक्ष पहर्ला से लोक यम्राज नहीं बनी जाथ अची, बलकी कुर्सिक अआबहमंडल अख्रायम्राज बनेवक ब्रहम पैदा करेता ची. इद्त सच्मे एक ता बहुत पैइग रहस्योट गातन आची. ता एस बआक मुल अर्थ की भेल, जोहां एली समपून विस्त्रित चर्चा के समेटी, तकुरुक्षेत्रम अंतर मनक कोनो एक्ता विशयक पोती नहीं अची. रहा है, एक्ता समपूरन यात्रा. एक्ता एहन यात्रा, जे हम्रा सब के सीट बसंत के लोग कताक माद्यम सा, मानव मनक पाइग असुरक्षा अननेतिक तक दर्षन करावी तची. उतेई से इतिहास के मेदान में प्रवेश करेताची जताई इ आर्या अक्रमण सिद्धान्त, सरसोती नदिक साख्षा का आदार पर, पाष्चात्ते विद्वानक उही नेरेटिव के द्वस्त करोताची जक्रा हम सब सदिखन सा मानेत आबिरहल ची. आई इहोँ स्तापित करेत आफी, जिश्वॉती परमपराके पाश्चाते लिखित मानक पर नहीं तोलल जासकत आफी. इग्दम. उकर बादि आदूनिक राजनेती अचमेली रानी का बाहुबली यदार्थ दर्यबेत आफी. अद्तत्ह नो एंट्री मावेश का मद्ध्यम्सद यी अस्पस्ट कर देताची जे यी जे सब ता सत्ता अशक्ती अची उ मात्र एक ता मुक्ष अची एक ता मेखव अची सही कहली, गजेंद्र ताकृर के यी पोठी इपोत्ती वास्तव में हम्रा सब के सोच्बाक नव्दिशादवित आजी इक ता आवान आजी, क्रितिकल फिंकिंग या आलोचनात्मक दिष्टी के ले मने जे, सूनु, उक्रा आख मुनके नहीं मानो हाँ इपोत्ती सिख्वाइत आजी, जे कोनो भी सुच्ना, चाहे उ इतिहासक मोट-मोट पुस्तक में फैक्त कैके लिखल हो, चाहे उ कुनो निता कबाशन हो, वा परमपरा से चली आएब्रहल, कुनो कता हो, उक्रा आख मुनके स्विकार नहीं केल जाए. इज्यान तकने सार्थक होईत आची, जगन उक्रा तर्ख ककसी पर कसल जाए. इच्चर्चा हमरा सब के एक ता बहुत महत्वपूँन मोड पर लोके आवी गेल अच्छी. इसब सुनिलाक बाद एक ता स्वबहाविक विचार मन में उठाई तची. कुन विचार देनिक जीवन में चारो काथ से एतेक सुचना, एतेक समाचार, एतेक इतिहासक दावा आवी रहल आचे. की इसमबहव नहीं आची? जे जे चीस के हम सब अतल सत्यमान के बेठल ची, उो कक्रो दवारा अपन सूविदाकलेल रचेल गेल एक ता नरेटिव मात्र हो? इसमबावनात सदा सरवदा बनले रही तची जक्रा हम स्तापित इतिहास माने ची कतवू उहो तख कक्रो दवारा मात्र अपन एजेंडाक लेल जोडल गेल चेपक नहीं ची सब सब पैग बात जे व्यवस्ता जे अदिकारी वा जे विचारक के हम सब यम्राज जका सक्तिषाली अ दरावना मानिक के, उकर अग्याक पालन करहल ची, कतव उ उहो तमात्र एक ता नकली डाडी आमुकुट पहीरी के नहीं बैसला ची. एक दम सत्या. जो उ आवरन उतारी देजाए, तकियो सत्य वास्तव में उत्बे पैग रहत, एही पर विचार अवष्षे केल जाए. यही उदेड भूनके संग आएक की यी विस्त्रिच चर्चा हम सब एते समाप्त करे ची. तक्हन्दरी अपना चारो तातक दून्याके एक ता नवद्द्रिष्टी सा देकहीत तरहू, अप प्रश्नपुचहीत तरहू.