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PARVAT OOPAR MAITHILI.mp4

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:09अदूनिक ताक की कीमत चुकावे परे तच्छें, गामक छुटल गार सन्लाक, शहरक भीर भारदरी हमर समाज कते जार हल च्छें.
  2. 0:09–0:21आव, आई हम सब एही गज़ेर प्रष्न सबखक परताल करी आ अनवेशन करी जे कोना चेत्रीया कता सहेत या हमर सबखक बदलाइत दुन्याक लेल एक ता साव आईना जका काज करे ता चेन.
  3. 0:21–0:30यहे चर्चा केंद्र में अची गजेंदर ताकृर जीक लिखल एक ता बहुत उत्किष्ट मैठली कता संग्रा परवत उपर भमराजे सुतल.
  4. 0:30–0:33इगिताब मात्र किच्छु कताक संग्रा नहीं आची,
  5. 0:33–0:38बलकी इी गाम आश्वरक उही कथोर वास्ट्विक्ताक एक ता जीवन्त चित्रनाची
  6. 0:38–0:41जगरा हम सब राया नजर अंदाज कर देच्छी
  7. 0:41–0:46हम सब एही पोठीक प्रमुक विशेशव पर एक एक कबात करव
  8. 0:46–0:59मैतली साहिते के एही मील पातर से सुरूका क, आस्ता आलोबख धूंद, शहरक निष्ठूरता, महामारेक विपलता आ अंतता, परमपरा आ आदूनिक तक्राउद्हरी पहुचब.
  9. 0:59–1:05तन चलू, सुरूकरे ची पहल बाग एक मैतली साहिते क मील पातर.
  10. 1:05–1:11सब सब हैने गामक औँ समाजिक तानाबाना कि बुजी जेकरहाम पनजी वेवस्ताक रूप में जाने चीन.
  11. 1:11–1:17तसकर नामक कता में दिखबाई तची जे कोनाई पुरान परमपरा लोक के बाएंद कर अग़े थेज.
  12. 1:17–1:19इते विवा, कुनु दूता मन कम मिलन नहीं,
  13. 1:19–1:22बलकी एक ता करगर समाजिक लें देना ची,
  14. 1:22–1:27इस समाजक भीक्रुक कखोरता अब नदन के बहुत निखजगा का सुजानाई ताची.
  15. 1:27–1:30आब बड़ेई च्याई दो सर भाग दिस,
  16. 1:30–1:33दो आस्ता लोब आवएदबद.
  17. 1:33–1:41एही विशय के नीक सब बुजबाक लिल सिद्ध महावीर आर्ठात जाग्रत देवताक अव्दारना के मुन पारुक बहुत जरूरीय आचे.
  18. 1:41–1:46इविशे श्रुबस आमनका दीदी कता मे बहुत पैक भूमिकाने भववाईता चे.
  19. 1:46–1:53उएक ता एहन उपेक्षिद विद्वाच हती, जकर निश्षल भक्ती, उकर आपन लोकक लोबवक निसाना बनी जाई तचे.
  20. 1:53–2:00कता बहुत मार्मिक अचे, आमन का दीदी एक ता रन्मान मंदिर बनेवाग के लेल आपन जमीन देच्छ थीन.
  21. 2:00–2:05मुदा हुंकर आपन भतीजा चल कबट से उ जमीन आपन नामकोले तचे
  22. 2:05–2:10विश्वास कहातकर इचोट उई निस चल विद्वाक आस्था के आहन तोडे तचे
  23. 2:10–2:16जे उ आदाभनल मंदिरक भीच आपन भतीजा आ उई देवताक मुर्टी के श्राप्द ददे च्छतिन
  24. 2:16–2:21इब होत्तिक लोब आध्धियात्मेक विष्वास सक्भीचक इक ता दुखध तक्राव आचे.
  25. 2:21–2:26आप देख हूँ, जि गाम कि लोक मनू विग्यान कोना काज कर आई तचे.
  26. 2:26–2:31तीक पाध साल के बाद उही भतिजाग आचानक हिर्दे गाथ सां निद्थ्यो भजाई तचे.
  27. 2:31–2:34गाम के लोग एक्रा कोनो मेटिकल कारन नहीं माने तची,
  28. 2:34–2:38बलकी गोशना का दैत जे सिद महावीर न्याए करवाक लेजाए गेला आची.
  29. 2:38–2:44इलोक विष्वास अप मानव सबहावाक एक ता बहुत सतीक मुदा जगजोर वैवाला चित्रन आची.
  30. 2:44–2:48ता आब गाँव से बहार निकली के शहरक बात करी
  31. 2:48–2:51तीन शहरक निस्ठूरता
  32. 2:51–2:56गाम आ नव दिल्ली जगा महानगरक भीज का अंटर एक दम साप अछी
  33. 2:56–2:59एक देस मिठिलाक गामक समुदाएक जुराव अची
  34. 2:59–3:01जटे लोग सुख दुख में संग ताड रहे थाची
  35. 3:01–3:05दो सर देस महानगर कठोर यान्त्रिक सुभाव आची
  36. 3:05–3:10जदे नियम कानुन्ता आची मुदा आत्मियताक नाम पर स्व्व आल्गाव आखाली पन भेटे दची.
  37. 3:10–3:14इस सहरी ध्शन्दा पन तकन और भेसी चुभे तची
  38. 3:14–3:17जकन एक तिस दिसमवर खंकनाइत राती में
  39. 3:17–3:20गाम में बैसल मोहिद बाबु के फोन अबेच्छानी
  40. 3:20–3:22फोन पर खवर भेटे तची जे
  41. 3:22–3:24दिल्ली काक सडग दुर खटना में
  42. 3:24–3:26उनक भेटाक निधन भोगे लची
  43. 3:26–3:28इक ता एहन मनहुस खवर ज़ी
  44. 3:28–3:30जे कोनो भी पिताक समपुन संसार के
  45. 3:30–3:32उजारी दशके तची
  46. 3:32–3:38दुख एत्वे नहीं अची, गुरुतेग भाहदुर अस्पतालक मुर्दा गर में,
  47. 3:38–3:47पूलीस अदालत के आदेशक हवाला देत बेटाख शव बिना रक्त समवन्दीक सवाँसा साफ मना का दे तची.
  48. 3:47–3:49एते अफसर शाहिक क्रुर्ता देखू,
  49. 3:49–3:58जे एक ता शोका कुल ब्रिध पिताके उही जारक राती में आपन म्रित भेटाक लेल एक ता कस्त दायक ट्रेन यात्रा करो परे च्छिन.
  50. 3:58–4:01आब अंत ता की होई तची?
  51. 4:01–4:07दिल्ली क्द्ण्द अद्दिख भीचा यमुना किनारा में एक्ता यान्त्रिक अबहावेहीं दास्स्व्कार
  52. 4:07–4:16गामक उही समुहीक शोक आपन पनक एक्दम विप्रीत आदूनिक शहर में मरनो परान्त से हो कोनो आत्मियता नहीं बहते दची
  53. 4:16–4:18इद्रिश्य सच्छ में मून के उदास कदेद अच्छी
  54. 4:19–4:21आप पहुँच च्छी एक ता एहन्त रासदी दीस
  55. 4:21–4:23जिक्रा हाम सब हाली में जीन अच्छीए
  56. 4:24–4:26चार महमारी अपलायन
  57. 4:26–4:31इग ता हम्रा सब खे कोविद महमारी क उही भ्यानक वास्तविकता में लेग जैट ची
  58. 4:31–4:36जखन सहर के सबता सादन जबाब दे चुकल चलन, सोचु उ उही इस्तितीके.
  59. 4:36–4:41असपताल में भेड नहीं, अक्सीजन लेवल अस्सी से नीचा खसी रहल अची,
  60. 4:41–4:46मुदा सिलिन्टर गाया बची, आप चीस से तीस हाजार में बलाक में रिम्दे सिवीर भिकार रहल अची,
  61. 4:46–4:51जे सहर पर हम सब एतेक गर्व करी ची, उकर अस्लियत बाहर आभी रहल चल.
  62. 4:51–4:56एही लाचारी के कता के एपंक्ती एक दम सतीक बयन करे तची.
  63. 4:56–5:01जे मेटिकल काून्सिल के नियम कहेच आई, जे रिपोट तक लेल टीन दिन रुकू,
  64. 5:01–5:05इलाज मे देरी होईताची, आद मरीज चोदाहमा दिन मरीज आईताची
  65. 5:05–5:09एते पैसा, रसुक, पैरवी, सब किच भेकार बचाईताची
  66. 5:09–5:14आदूनिक शहरक सबता गमन एही महामारिक आगा गुटना तेक ने नजरीवेताची
  67. 5:14–5:24इवाईरसक एक तब हयानक तामलाई, एक ता उल्ता गिन्ती जकाच्यल, संक्रमन शुरू होई तची, मुदा अस्पतालक प्रोटोकोल कर कारन टेस्ट में देरी होई तची.
  68. 5:24–5:54तचीज़गन हम सब गाँ अश्वरक तोल करेथ चीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तची
  69. 5:54–5:59अजगन सहरक इपुरा व्यवस्ता तूटीगेल तकन कीवेल
  70. 5:59–6:06रेडिो पर सूनी पड़ेट आची जे उने सुसभ्ष्टाडिस का विबाजनक बाद का सब सपाइग पलायान आची
  71. 6:06–6:11लाको लग़ लग़ शोषन अ रूडी वादी सोचक अपन समस्या अची
  72. 6:11–6:16अजगन सहरक इपुरा वेवस्ता तूटीगेल तखन कीवेल
  73. 6:16–6:23रेडिो पर सूनी पड़ेटाची जे उने चुस्छटादिस का विभाजनक बाद का सब सपाइग पलायान अची
  74. 6:23–6:28लाको लोग औहे सहरके चूडी आपन गाँ दिस पैडल चल देला
  75. 6:28–6:31जाई सहर्क हैं उ आपने खून पसीना से बने ने चला
  76. 6:31–6:32या सपस्त करेत अची
  77. 6:33–6:35जब पत्ती के समाए में लोक के अंतता अपन जर्ड
  78. 6:35–6:37और आपन गामे दिस खुरे परेचनी
  79. 6:38–6:41तआ अन्तिम में एक ता बहुत पैएग प्रष्न्ट्थार होताची
  80. 6:41–6:52जखन समाज गामक समवदाहिक बन्धन के चोरी आदूनिक दून्याक अपसर साही संद्रचना के अपना रहल आची, तकन की आदूनिक ताख पाचा हमर कोनो आवश्षक मानविय अन्श्छुटी रहल आची.
  81. 6:52–6:57आदूनेक जीवन की वास्ट्विक कीमत जीः जाई पर हमरा सबके गंभिरतास सब विचार कर बावष्ष्ष्खाची
  82. 6:57–6:58एक गहर चरचा सज्वर्बाक लिल बहुत-भहुत द्श्विक कीमत जीः जाई पर हमरा सबके गंभिरतास सब विचार कर बावष्ष्खाची
  83. 6:58–7:01एक गईर चर्चा से जुर्बाक लिल बहुत-बहुत दन्नेवाद

Plain text

अदूनिक ताक की कीमत चुकावे परे तच्छें, गामक छुटल गार सन्लाक, शहरक भीर भारदरी हमर समाज कते जार हल च्छें. आव, आई हम सब एही गज़ेर प्रष्न सबखक परताल करी आ अनवेशन करी जे कोना चेत्रीया कता सहेत या हमर सबखक बदलाइत दुन्याक लेल एक ता साव आईना जका काज करे ता चेन. यहे चर्चा केंद्र में अची गजेंदर ताकृर जीक लिखल एक ता बहुत उत्किष्ट मैठली कता संग्रा परवत उपर भमराजे सुतल. इगिताब मात्र किच्छु कताक संग्रा नहीं आची, बलकी इी गाम आश्वरक उही कथोर वास्ट्विक्ताक एक ता जीवन्त चित्रनाची जगरा हम सब राया नजर अंदाज कर देच्छी हम सब एही पोठीक प्रमुक विशेशव पर एक एक कबात करव मैतली साहिते के एही मील पातर से सुरूका क, आस्ता आलोबख धूंद, शहरक निष्ठूरता, महामारेक विपलता आ अंतता, परमपरा आ आदूनिक तक्राउद्हरी पहुचब. तन चलू, सुरूकरे ची पहल बाग एक मैतली साहिते क मील पातर. सब सब हैने गामक औँ समाजिक तानाबाना कि बुजी जेकरहाम पनजी वेवस्ताक रूप में जाने चीन. तसकर नामक कता में दिखबाई तची जे कोनाई पुरान परमपरा लोक के बाएंद कर अग़े थेज. इते विवा, कुनु दूता मन कम मिलन नहीं, बलकी एक ता करगर समाजिक लें देना ची, इस समाजक भीक्रुक कखोरता अब नदन के बहुत निखजगा का सुजानाई ताची. आब बड़ेई च्याई दो सर भाग दिस, दो आस्ता लोब आवएदबद. एही विशय के नीक सब बुजबाक लिल सिद्ध महावीर आर्ठात जाग्रत देवताक अव्दारना के मुन पारुक बहुत जरूरीय आचे. इविशे श्रुबस आमनका दीदी कता मे बहुत पैक भूमिकाने भववाईता चे. उएक ता एहन उपेक्षिद विद्वाच हती, जकर निश्षल भक्ती, उकर आपन लोकक लोबवक निसाना बनी जाई तचे. कता बहुत मार्मिक अचे, आमन का दीदी एक ता रन्मान मंदिर बनेवाग के लेल आपन जमीन देच्छ थीन. मुदा हुंकर आपन भतीजा चल कबट से उ जमीन आपन नामकोले तचे विश्वास कहातकर इचोट उई निस चल विद्वाक आस्था के आहन तोडे तचे जे उ आदाभनल मंदिरक भीच आपन भतीजा आ उई देवताक मुर्टी के श्राप्द ददे च्छतिन इब होत्तिक लोब आध्धियात्मेक विष्वास सक्भीचक इक ता दुखध तक्राव आचे. आप देख हूँ, जि गाम कि लोक मनू विग्यान कोना काज कर आई तचे. तीक पाध साल के बाद उही भतिजाग आचानक हिर्दे गाथ सां निद्थ्यो भजाई तचे. गाम के लोग एक्रा कोनो मेटिकल कारन नहीं माने तची, बलकी गोशना का दैत जे सिद महावीर न्याए करवाक लेजाए गेला आची. इलोक विष्वास अप मानव सबहावाक एक ता बहुत सतीक मुदा जगजोर वैवाला चित्रन आची. ता आब गाँव से बहार निकली के शहरक बात करी तीन शहरक निस्ठूरता गाम आ नव दिल्ली जगा महानगरक भीज का अंटर एक दम साप अछी एक देस मिठिलाक गामक समुदाएक जुराव अची जटे लोग सुख दुख में संग ताड रहे थाची दो सर देस महानगर कठोर यान्त्रिक सुभाव आची जदे नियम कानुन्ता आची मुदा आत्मियताक नाम पर स्व्व आल्गाव आखाली पन भेटे दची. इस सहरी ध्शन्दा पन तकन और भेसी चुभे तची जकन एक तिस दिसमवर खंकनाइत राती में गाम में बैसल मोहिद बाबु के फोन अबेच्छानी फोन पर खवर भेटे तची जे दिल्ली काक सडग दुर खटना में उनक भेटाक निधन भोगे लची इक ता एहन मनहुस खवर ज़ी जे कोनो भी पिताक समपुन संसार के उजारी दशके तची दुख एत्वे नहीं अची, गुरुतेग भाहदुर अस्पतालक मुर्दा गर में, पूलीस अदालत के आदेशक हवाला देत बेटाख शव बिना रक्त समवन्दीक सवाँसा साफ मना का दे तची. एते अफसर शाहिक क्रुर्ता देखू, जे एक ता शोका कुल ब्रिध पिताके उही जारक राती में आपन म्रित भेटाक लेल एक ता कस्त दायक ट्रेन यात्रा करो परे च्छिन. आब अंत ता की होई तची? दिल्ली क्द्ण्द अद्दिख भीचा यमुना किनारा में एक्ता यान्त्रिक अबहावेहीं दास्स्व्कार गामक उही समुहीक शोक आपन पनक एक्दम विप्रीत आदूनिक शहर में मरनो परान्त से हो कोनो आत्मियता नहीं बहते दची इद्रिश्य सच्छ में मून के उदास कदेद अच्छी आप पहुँच च्छी एक ता एहन्त रासदी दीस जिक्रा हाम सब हाली में जीन अच्छीए चार महमारी अपलायन इग ता हम्रा सब खे कोविद महमारी क उही भ्यानक वास्तविकता में लेग जैट ची जखन सहर के सबता सादन जबाब दे चुकल चलन, सोचु उ उही इस्तितीके. असपताल में भेड नहीं, अक्सीजन लेवल अस्सी से नीचा खसी रहल अची, मुदा सिलिन्टर गाया बची, आप चीस से तीस हाजार में बलाक में रिम्दे सिवीर भिकार रहल अची, जे सहर पर हम सब एतेक गर्व करी ची, उकर अस्लियत बाहर आभी रहल चल. एही लाचारी के कता के एपंक्ती एक दम सतीक बयन करे तची. जे मेटिकल काून्सिल के नियम कहेच आई, जे रिपोट तक लेल टीन दिन रुकू, इलाज मे देरी होईताची, आद मरीज चोदाहमा दिन मरीज आईताची एते पैसा, रसुक, पैरवी, सब किच भेकार बचाईताची आदूनिक शहरक सबता गमन एही महामारिक आगा गुटना तेक ने नजरीवेताची इवाईरसक एक तब हयानक तामलाई, एक ता उल्ता गिन्ती जकाच्यल, संक्रमन शुरू होई तची, मुदा अस्पतालक प्रोटोकोल कर कारन टेस्ट में देरी होई तची. तचीज़गन हम सब गाँ अश्वरक तोल करेथ चीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तचीज़गन तची अजगन सहरक इपुरा व्यवस्ता तूटीगेल तकन कीवेल रेडिो पर सूनी पड़ेट आची जे उने सुसभ्ष्टाडिस का विबाजनक बाद का सब सपाइग पलायान आची लाको लग़ लग़ शोषन अ रूडी वादी सोचक अपन समस्या अची अजगन सहरक इपुरा वेवस्ता तूटीगेल तखन कीवेल रेडिो पर सूनी पड़ेटाची जे उने चुस्छटादिस का विभाजनक बाद का सब सपाइग पलायान अची लाको लोग औहे सहरके चूडी आपन गाँ दिस पैडल चल देला जाई सहर्क हैं उ आपने खून पसीना से बने ने चला या सपस्त करेत अची जब पत्ती के समाए में लोक के अंतता अपन जर्ड और आपन गामे दिस खुरे परेचनी तआ अन्तिम में एक ता बहुत पैएग प्रष्न्ट्थार होताची जखन समाज गामक समवदाहिक बन्धन के चोरी आदूनिक दून्याक अपसर साही संद्रचना के अपना रहल आची, तकन की आदूनिक ताख पाचा हमर कोनो आवश्षक मानविय अन्श्छुटी रहल आची. आदूनेक जीवन की वास्ट्विक कीमत जीः जाई पर हमरा सबके गंभिरतास सब विचार कर बावष्ष्ष्खाची एक गहर चरचा सज्वर्बाक लिल बहुत-भहुत द्श्विक कीमत जीः जाई पर हमरा सबके गंभिरतास सब विचार कर बावष्ष्खाची एक गईर चर्चा से जुर्बाक लिल बहुत-बहुत दन्नेवाद

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