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PREETI KARAN SETU BANHAL MAITHILI.mp4
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- 0:00–0:05नमस्कार, आएकेर एह विषेष विष्लेषनात्मक प्रस्तृती में हार दिख सवागत अची.
- 0:05–0:10आए हम सब गब करम एक्ता एहन विषेपर जे सच्मुज प्रिरनादायक अची,
- 0:10–0:17कि कोना एक्ता समर्पित पर्वार अपने प्राषीन मेठिली विरासत के सीदा दिजिटल भविष्ष्ष्यक संगे जोड़ दे लग.
- 0:17–0:26ता आए बिना कोनो देरी के, आदनेक मेठिलीक इ महान पत, प्रदर्षक, गजेंद्र ताकृर, आप्रीती ताकृर के अथक प्रयास,
- 0:26–0:30आईनक जीवनक महत्व पुण काज पर गहीर सप्रकाष टाली
- 0:30–0:34इचर्चा अतीच सवर्त्मानक भीचेक्ता से तुजकान चे
- 0:34–0:36हमर सबख मुख्य बिन्दू अचे
- 0:36–0:39एक मेचली साहित्यक पुनर परीभाशा
- 0:39–0:42दू शेक्षिक प्रगती ज़र
- 0:42–0:45तीन प्रीती ताकूर यूवाक जुडाव
- 0:45–0:48चार गजेंद्र ताकूर दिजिटल पायोनेर
- 0:48–0:51पाच पनजी वेवस्ताक सन्रक्षन और अन्त में
- 0:51–0:54प्रत्धम होमवाक औए अद्बुद्विरासत्द
- 0:54–0:56बस अट्वेग गा बचे
- 0:56–0:57ता आव आगा बड़ी
- 0:57–1:04हमर सबख, जे मुखिश रोट पुस्तक अची, उकर नाम अची प्रीति कारन सेटु बान्धल, मने पुलक निरमाड.
- 1:04–1:09इजे नाम छीने उ एक्दम सती कची. इएक्दम बन्या सबजावे तची,
- 1:09–1:13ज़िए कोना सीमित अखास लोकग भीच रहेर ग्यान के आदूनिक,
- 1:13–1:18दिजितल और सर्व सुलप बनाख़ आम जन मानस दरी पूँचावल गे लेज.
- 1:18–1:20एक ता पैग जेटू बनावल गेल.
- 1:20–1:25तो चलू खंद एक सा शुरू करे ची मेठली साहित्यक पोनर परिभाशा
- 1:25–1:27इक ता अद्वित्य सहित्यक दंपती.
- 1:27–1:30सहित्यक एतेक विशाल परीद्रुष्यमे
- 1:30–1:33गजेंद्र ताकृर अप्रीती ताकृर अक इज़्ोडी
- 1:33–1:35आखिर एते खास क्या कची.
- 1:35–1:38कारन इए ची, जि मैठली सहित्यमे
- 1:38–1:40इक दम नव अवदारना चल,
- 1:40–1:42जते पती अपतनी,
- 1:42–1:47दून्नु गोटेक साहित्तिक योग्दानक मुल्यांकन एक संगे कैल गेल
- 1:47–1:51इदंपती इस सिद्ध कैडेलनी जे जा संगे मिलका काज कैल जाए,
- 1:51–1:54तरज्नाकार एतिहासक दारा बद्ली सकैच्छती.
- 1:54–1:57आब अवाएद ची खंद दूपर,
- 1:57–1:59शेक्षेक प्रगतिक जडी आ,
- 2:12–2:17अब बड़ेत ची खणद तीन देस प्रीती ताकोर यूगक जूडाव अप पहल भाल सहिते कार
- 2:17–2:21अब बड़ेत ची खणद तीन देस प्रीती ताकोर यूगक जूडाव अप पहल भाल सहिते कार
- 2:21–2:25अब बड़ेत अप बद़ेत बाल सहिते कार अप बदा पहल बाल सहिते कार
- 2:25–2:27अब बड़ेत ची कहन्द तीन देस
- 2:27–2:28प्रीती ताकृर
- 2:28–2:29यूवक कजूडाव
- 2:29–2:31अप पहल भाल सहिते कार
- 2:31–2:33अब एक ता पाइग सवाल उठाई तचे
- 2:33–2:36बच्चा सब के अपन मात्री भाशासा कोना जोड़ाए
- 2:36–2:39जकन की हूंकार सब का द्यान एते ओते भड़काई तचे
- 2:39–3:09अब यक ता पाइग सवाल उठाई तचे बच्चा सब के अपन मात्री भाशासा सा कोना जोड़ाए जगन की हुनकार सब का द्यान एते ओते भद्काई तचे एकर एक दम सुन्दर उप्र प्रीती तचाकृर दिलनी गोनुजा के ता हम सब जानी तेची मित्लाक अक्तिंद ल
- 3:09–3:11अपन भाशा दिस चुम्बक जका अकर्षिद भेलां
- 3:12–3:16मुदा प्रीति ताकृरा कुप लब्दी मात्र एक ता पूठी दरी सिम्थ नहीं रहें
- 3:16–3:20और मेद्हलीक पहल्पूर्न काल एक बाल सहेते कार चती
- 3:20–3:27तुईहाँजार दूई में चोड आप पैग आद तुईहाँजार आप में गुनु जासन अदबूप चित्र कताग रचना किलनी.
- 3:27–3:30आज सब साश्चर ये जनग गब की आचे अब जनाइ ची,
- 3:30–3:34ओआपन चित्र कता लेल चित्र से हो अपने बनवए चती.
- 3:34–3:40विशेश्वुप से मिठ्लाग औही नायक सब कलेल जकर कोनु कालपनिक चित्र पहलेसा उपलब्दन नहीं चल.
- 3:40–3:43हिनके इसमर पन सच्मुच हत्प्रब करे वाला चे.
- 3:44–3:49कंडिच्चार, गजिंद्र ताकृर, दिजिटल पाइनिर अ मेत्ली इंटिनेट सिल्पी.
- 3:49–3:56आप गब करे ची गजेंद्र ताकूरक, हिनक दिजिटल दुन्या कर काज एक दम आश्षर जनक हैज.
- 3:56–4:03वर्ष ढोहाजार में भाल सरीब गाज ब्लोक सं अंट्रेनेट पर मैत्लिक पहल उपस्तिती दर्जबहिल.
- 4:03–4:07तो हाजार चार में समथया नामक समाचार ब्लोग आईल.
- 4:19–4:21अगर मेठलिक अ आदार शिला रक्खिल नें
- 4:21–4:25जगर कलपना उई समय में बहुत कतिन बलकी असमबव जका चल.
- 4:26–4:28इक तगब आवर द्यान देबाभ योग योग याच्छे
- 4:28–4:32गजिन्द्र ठाकुरक काज मात्र नव रच्नादरी सीमित नहीं चल
- 4:32–4:38भी चल, बलकी प्राचीन वेदिक ग्रन्त अ एतिहासिक भाशा के सन्रक्षित करब से हो,
- 4:38–4:43हुनक मिशन चल. उआहन प्राचीन समगरी आब वेदिक मन्त्र सब के,
- 4:43–4:48यूनिकोड आब ब्लोग जका अथ्यादूनिक माद्यमक उप्योग कैन के सुरक्षित के लिनी.
- 4:48–4:52इस तच्मुच अतीत अबहविष्खे एक ता अदबूद संगम अच्ये.
- 4:52–4:58खन्द पाज पन्जी विवस्ताक सन्रक्षन वन्शावलिक लोक तन्त्री करम.
- 4:58–5:01मित्लाक चोदाहम शताब दीक एतियासेक वन्शावली रिकोड,
- 5:01–5:05जक्रा हम सब पन्जी कहाएची उसद्यों सर एक ता विवादक विषे रहा लक्च्छ.
- 5:06–5:09पारमपरिक पन्जी विवस्ता किचो खास लोकक भीच सीमिच चल,
- 5:10–5:14एक्रा बूदिक संपदा मानल जाएच्चल आब बिना पइसा के कर उप्योग नहीं करल जासकेच्चल.
- 5:14–5:19अगर विप्रीत गजेंद्र ताकुरक दिजितल पनजी पुर्ड रूप सक्फला,
- 5:19–5:23दिजितल अवविद्वानक संख संख आमजन मानस के लेल मुझ्दच,
- 5:23–5:25ज्यान पर सबख अदिकार भेल.
- 5:25–5:29समाजेक संजाल पर भेल चर्चा य अस्पष्ट करेत अची
- 5:29–5:59अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अ�
- 5:59–6:04अपन अद्वाँ प्रियास अन्तर राश्व्ट्यविद्वान सबहाग बिना कोनो बादाग इशेत्रक अद्दिश्वाग शक्ती देलग.
- 6:05–6:10अब हम सब अन्तिम पडाव पर ची, कहन्थ चे प्रथम होमबाक विरासत,
- 6:10–6:13अप देखाँ बादाग यी शेट्रक अद्द्यन करबाक शक्ती देलक
- 6:13–6:15अब हम सब अन्तिम पडाव पर ची
- 6:15–6:17खंड चे प्रत्ठम होमबाक विरासत
- 6:17–6:19बविश्यक स्वरुप ताई करब
- 6:19–6:21अब देखो जि कतिक पैग उपलड़ दी सव
- 6:21–6:23मात्र एक ता गर से निक ले लची
- 6:23–6:25अद्र न्दिख प्रदी तागुर अप्रीज़ाग।
- 6:25–6:27तो वो बज़ाग।
- 6:27–6:29तो वो बज़ाग।
- 6:29–6:31तो वो बज़ाग।
- 6:31–6:33तो वो बज़ाग।
- 6:33–6:35तो वो बज़ाग।
- 6:35–6:37तो वो बज़ाग।
- 6:37–6:39तो वो बज़ाग।
- 6:39–6:41तो वो बज़ाग।
- 6:41–6:43तो वो बज़ाग।
- 6:43–6:47ताकृर और पहल मेठली अग्रिगेटर से हो गजिन्द्र ताकृर अग्दवारा
- 6:47–6:49इसब सुन क्या आश्चर्या होई ताच्छना
- 6:49–6:52इस पस्ट करेइ तच्छी जि कोना एक ता परिवार
- 6:52–6:56एक ता समपुरन संस्क्रतिक विरासत के नव्रुप दिला कची
- 6:56–6:59संक्या 11, इको नो सदारन संक्या नहीं आची,
- 6:59–7:04इवो कुल लिपिक संक्या आची, जाही में विदे ही पती का प्रकाषिथ होई तची.
- 7:04–7:08आई में तिरहुता, देवनागरी, ब्रेल, और क्या थी जकान लिपी शा मिल आची.
- 7:08–7:12इट्रान्स्लिट्रेश्यन माने लिप्यान्तरन तक्नीकक उप्योक कईएक
- 7:12–7:15के साहित्रेके सर्व सुलप बनेबाक
- 7:15–7:17गजें़र ताकुरक अटूट्स् समरपन के
- 7:17–7:19बहुत निकजका प्रमानित करेताची.
- 7:19–7:23रोबद लोए स्टीविंसन कर इपान्ती बहुत मार्मे कची.
- 7:23–7:27कोनो दिन के ओ़ी फसल से नहीं आखु, जे कातल गेल आखू,
- 7:27–7:30बलकी ओ़ी ब्या से आखू, जे रोपल गेल आखू.
- 7:30–7:34स्थोद पुस्तक से लेल गेल एपानती सती ख्रुब से सबष्ट करे तची,
- 7:34–7:37जिवन्दाई भी रोपलनी जीवन्दाई बीआ रोपलनी
- 7:37–7:40ता अन्तमे इप्रस्तुती एक ता विचारने प्रश्नक संक चोडी कजार है लाची
- 7:40–7:43दिजिटल संद्रक्षनक इउद्क्रिष्ट अप्रेन्नादायक रूप्रेखा के
- 7:43–7:48तब विच्वबरक अन्यशंकत गरस्त चेट्रिए बाचेवक लेल कोना लागु काईल जासके तची.
- 7:49–7:56गजेंद्र अप्रीती तब उगाज मात्र मेठ्लीग लेलनी,
- 7:56–8:01बल गी वेश्विक सान्सक्रितिक संद्रक्षनक लेल एक तजीवन्त उदाहरन अची.
- 8:01–8:03संद्रक्शनक्लेल एकता जीवन्त उदाहरनाची.
- 8:04–8:06इविष्लेशनात्मक प्रस्तुती देखवाक्लेल,
- 8:06–8:07बहुत-बहुत दंईवाद.
Plain text
नमस्कार, आएकेर एह विषेष विष्लेषनात्मक प्रस्तृती में हार दिख सवागत अची. आए हम सब गब करम एक्ता एहन विषेपर जे सच्मुज प्रिरनादायक अची, कि कोना एक्ता समर्पित पर्वार अपने प्राषीन मेठिली विरासत के सीदा दिजिटल भविष्ष्ष्यक संगे जोड़ दे लग. ता आए बिना कोनो देरी के, आदनेक मेठिलीक इ महान पत, प्रदर्षक, गजेंद्र ताकृर, आप्रीती ताकृर के अथक प्रयास, आईनक जीवनक महत्व पुण काज पर गहीर सप्रकाष टाली इचर्चा अतीच सवर्त्मानक भीचेक्ता से तुजकान चे हमर सबख मुख्य बिन्दू अचे एक मेचली साहित्यक पुनर परीभाशा दू शेक्षिक प्रगती ज़र तीन प्रीती ताकूर यूवाक जुडाव चार गजेंद्र ताकूर दिजिटल पायोनेर पाच पनजी वेवस्ताक सन्रक्षन और अन्त में प्रत्धम होमवाक औए अद्बुद्विरासत्द बस अट्वेग गा बचे ता आव आगा बड़ी हमर सबख, जे मुखिश रोट पुस्तक अची, उकर नाम अची प्रीति कारन सेटु बान्धल, मने पुलक निरमाड. इजे नाम छीने उ एक्दम सती कची. इएक्दम बन्या सबजावे तची, ज़िए कोना सीमित अखास लोकग भीच रहेर ग्यान के आदूनिक, दिजितल और सर्व सुलप बनाख़ आम जन मानस दरी पूँचावल गे लेज. एक ता पैग जेटू बनावल गेल. तो चलू खंद एक सा शुरू करे ची मेठली साहित्यक पोनर परिभाशा इक ता अद्वित्य सहित्यक दंपती. सहित्यक एतेक विशाल परीद्रुष्यमे गजेंद्र ताकृर अप्रीती ताकृर अक इज़्ोडी आखिर एते खास क्या कची. कारन इए ची, जि मैठली सहित्यमे इक दम नव अवदारना चल, जते पती अपतनी, दून्नु गोटेक साहित्तिक योग्दानक मुल्यांकन एक संगे कैल गेल इदंपती इस सिद्ध कैडेलनी जे जा संगे मिलका काज कैल जाए, तरज्नाकार एतिहासक दारा बद्ली सकैच्छती. आब अवाएद ची खंद दूपर, शेक्षेक प्रगतिक जडी आ, अब बड़ेत ची खणद तीन देस प्रीती ताकोर यूगक जूडाव अप पहल भाल सहिते कार अब बड़ेत ची खणद तीन देस प्रीती ताकोर यूगक जूडाव अप पहल भाल सहिते कार अब बड़ेत अप बद़ेत बाल सहिते कार अप बदा पहल बाल सहिते कार अब बड़ेत ची कहन्द तीन देस प्रीती ताकृर यूवक कजूडाव अप पहल भाल सहिते कार अब एक ता पाइग सवाल उठाई तचे बच्चा सब के अपन मात्री भाशासा कोना जोड़ाए जकन की हूंकार सब का द्यान एते ओते भड़काई तचे अब यक ता पाइग सवाल उठाई तचे बच्चा सब के अपन मात्री भाशासा सा कोना जोड़ाए जगन की हुनकार सब का द्यान एते ओते भद्काई तचे एकर एक दम सुन्दर उप्र प्रीती तचाकृर दिलनी गोनुजा के ता हम सब जानी तेची मित्लाक अक्तिंद ल अपन भाशा दिस चुम्बक जका अकर्षिद भेलां मुदा प्रीति ताकृरा कुप लब्दी मात्र एक ता पूठी दरी सिम्थ नहीं रहें और मेद्हलीक पहल्पूर्न काल एक बाल सहेते कार चती तुईहाँजार दूई में चोड आप पैग आद तुईहाँजार आप में गुनु जासन अदबूप चित्र कताग रचना किलनी. आज सब साश्चर ये जनग गब की आचे अब जनाइ ची, ओआपन चित्र कता लेल चित्र से हो अपने बनवए चती. विशेश्वुप से मिठ्लाग औही नायक सब कलेल जकर कोनु कालपनिक चित्र पहलेसा उपलब्दन नहीं चल. हिनके इसमर पन सच्मुच हत्प्रब करे वाला चे. कंडिच्चार, गजिंद्र ताकृर, दिजिटल पाइनिर अ मेत्ली इंटिनेट सिल्पी. आप गब करे ची गजेंद्र ताकूरक, हिनक दिजिटल दुन्या कर काज एक दम आश्षर जनक हैज. वर्ष ढोहाजार में भाल सरीब गाज ब्लोक सं अंट्रेनेट पर मैत्लिक पहल उपस्तिती दर्जबहिल. तो हाजार चार में समथया नामक समाचार ब्लोग आईल. अगर मेठलिक अ आदार शिला रक्खिल नें जगर कलपना उई समय में बहुत कतिन बलकी असमबव जका चल. इक तगब आवर द्यान देबाभ योग योग याच्छे गजिन्द्र ठाकुरक काज मात्र नव रच्नादरी सीमित नहीं चल भी चल, बलकी प्राचीन वेदिक ग्रन्त अ एतिहासिक भाशा के सन्रक्षित करब से हो, हुनक मिशन चल. उआहन प्राचीन समगरी आब वेदिक मन्त्र सब के, यूनिकोड आब ब्लोग जका अथ्यादूनिक माद्यमक उप्योग कैन के सुरक्षित के लिनी. इस तच्मुच अतीत अबहविष्खे एक ता अदबूद संगम अच्ये. खन्द पाज पन्जी विवस्ताक सन्रक्षन वन्शावलिक लोक तन्त्री करम. मित्लाक चोदाहम शताब दीक एतियासेक वन्शावली रिकोड, जक्रा हम सब पन्जी कहाएची उसद्यों सर एक ता विवादक विषे रहा लक्च्छ. पारमपरिक पन्जी विवस्ता किचो खास लोकक भीच सीमिच चल, एक्रा बूदिक संपदा मानल जाएच्चल आब बिना पइसा के कर उप्योग नहीं करल जासकेच्चल. अगर विप्रीत गजेंद्र ताकुरक दिजितल पनजी पुर्ड रूप सक्फला, दिजितल अवविद्वानक संख संख आमजन मानस के लेल मुझ्दच, ज्यान पर सबख अदिकार भेल. समाजेक संजाल पर भेल चर्चा य अस्पष्ट करेत अची अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अ� अपन अद्वाँ प्रियास अन्तर राश्व्ट्यविद्वान सबहाग बिना कोनो बादाग इशेत्रक अद्दिश्वाग शक्ती देलग. अब हम सब अन्तिम पडाव पर ची, कहन्थ चे प्रथम होमबाक विरासत, अप देखाँ बादाग यी शेट्रक अद्द्यन करबाक शक्ती देलक अब हम सब अन्तिम पडाव पर ची खंड चे प्रत्ठम होमबाक विरासत बविश्यक स्वरुप ताई करब अब देखो जि कतिक पैग उपलड़ दी सव मात्र एक ता गर से निक ले लची अद्र न्दिख प्रदी तागुर अप्रीज़ाग। तो वो बज़ाग। तो वो बज़ाग। तो वो बज़ाग। तो वो बज़ाग। तो वो बज़ाग। तो वो बज़ाग। तो वो बज़ाग। तो वो बज़ाग। तो वो बज़ाग। ताकृर और पहल मेठली अग्रिगेटर से हो गजिन्द्र ताकृर अग्दवारा इसब सुन क्या आश्चर्या होई ताच्छना इस पस्ट करेइ तच्छी जि कोना एक ता परिवार एक ता समपुरन संस्क्रतिक विरासत के नव्रुप दिला कची संक्या 11, इको नो सदारन संक्या नहीं आची, इवो कुल लिपिक संक्या आची, जाही में विदे ही पती का प्रकाषिथ होई तची. आई में तिरहुता, देवनागरी, ब्रेल, और क्या थी जकान लिपी शा मिल आची. इट्रान्स्लिट्रेश्यन माने लिप्यान्तरन तक्नीकक उप्योक कईएक के साहित्रेके सर्व सुलप बनेबाक गजें़र ताकुरक अटूट्स् समरपन के बहुत निकजका प्रमानित करेताची. रोबद लोए स्टीविंसन कर इपान्ती बहुत मार्मे कची. कोनो दिन के ओ़ी फसल से नहीं आखु, जे कातल गेल आखू, बलकी ओ़ी ब्या से आखू, जे रोपल गेल आखू. स्थोद पुस्तक से लेल गेल एपानती सती ख्रुब से सबष्ट करे तची, जिवन्दाई भी रोपलनी जीवन्दाई बीआ रोपलनी ता अन्तमे इप्रस्तुती एक ता विचारने प्रश्नक संक चोडी कजार है लाची दिजिटल संद्रक्षनक इउद्क्रिष्ट अप्रेन्नादायक रूप्रेखा के तब विच्वबरक अन्यशंकत गरस्त चेट्रिए बाचेवक लेल कोना लागु काईल जासके तची. गजेंद्र अप्रीती तब उगाज मात्र मेठ्लीग लेलनी, बल गी वेश्विक सान्सक्रितिक संद्रक्षनक लेल एक तजीवन्त उदाहरन अची. संद्रक्शनक्लेल एकता जीवन्त उदाहरनाची. इविष्लेशनात्मक प्रस्तुती देखवाक्लेल, बहुत-बहुत दंईवाद.