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महुआक_व्यथा_आ_मंशाक_काँसक_ढाल.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:12विमर्श में आहक स्वागता चे, आई हम सब एक ता बडगमभीर विष्यापर चरचा करव, कि निश्षल बाल प्रेम, वास्तों में समाज कदिवाल के खसासा कै ता चे?
  2. 0:12–0:15वा वा इी मात्र एक्ता सुखध ग्राम अच्ये
  3. 0:15–0:21जकर कीमत मतलप कुनु गरी बच्चा के आपन बच्पन गमा के चुकावे पडे तचे
  4. 0:21–0:24एक दम इी बहुत प्रसंगिक प्रश्नाची
  5. 0:24–0:28तग गजेंद्र थाकुर जीक रचित कता बाल गुरू
  6. 0:28–0:32अम्रा सब के दिल्लिक एक्ता एहन आवासी परिसर में लव जाए तची
  7. 0:32–0:36जताए बाहरा से तच्फ्लैट एक्के रंक छे
  8. 0:36–0:41मुदा भीट्र, सब दरवाजाग पाचा एक्ता अलक देश बसए तची
  9. 0:41–0:45सही कहलो वहा, जना की तेसर महला पर मित्ला बसए तची
  10. 0:45–1:15तस्मने बला ब्लोक में पन्जाब आव उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
  11. 1:15–1:19ता प्राक्रतिक, मतला सतस्वुर्त भावना एचु।
  12. 1:19–1:24आँ, आख, कहे बची, जे इप पुरन रूपेन प्राक्रतिक अची।
  13. 1:24–1:29आए, एक दम. इब भाल मनक प्राक्रतिक सम्रस्ताक विजे आची.
  14. 1:29–1:33जे भाशा आसंख्रतिक, क्रित्रम सीमा सा उपर उठीका,
  15. 1:33–1:35उगरा कियो सिखाभाएत नहीं ची?
  16. 1:35–1:38हम भूजी रहाल ची, जे हा एना की एक सोषेट ची
  17. 1:38–1:40मुदा हमर द्रिष्टी सदेखो
  18. 1:40–1:42इगता उही उटोप्या
  19. 1:42–1:45वा मानुजे आदर्ष लोकक ब्रम्किन तोडगी तची
  20. 1:45–1:47इस सम्रस्ता वास्तव में
  21. 1:47–1:49महुवाक छिपल उदासी
  22. 1:49–1:57वास्तव में महुवाक छिपल उदासी असुसेनक अक्रामकताक सोजा बल खम्जोर अखोखला सिद होईत अजे
  23. 1:57–2:00खोखला? आगी खोखला लामत अजे
  24. 2:00–2:02आआ, बिलकुल खोखला
  25. 2:02–2:07हमर मान बची जे इपरी सर्क शान्ती एक तनाजुक आवरन मात्र आची
  26. 2:07–2:13जे बाल, श्रमिक, मतलप महुवाजका बच्चाक मुख संगर्ष पर्टि काल आची.
  27. 2:13–2:15इकुनो प्राक्रितिक विजे न आची.
  28. 2:15–2:19अमरे एक दोसर द्श्टि कुन राखे दियों आची पर.
  29. 2:19–2:22कताक उही गासक पारक पर कनी द्यान दियों.
  30. 2:22–2:30अदे बज्चा सब कजी जमगध लागत अची तक कता कार उक्रा बज्चा सब का संसद कहच्छती
  31. 2:30–2:33अदे मुदा अहुन संसद जते
  32. 2:33–2:35करचयन बहुत गंभीर अची
  33. 2:35–2:40इक ता एहन संसद अची जते कोनो पक्ष्पात नहीं अची
  34. 2:40–2:45अता है मित्छला, पंजाब, उरीसा, अदिल्ली एक संगे खेले रहा लाची.
  35. 2:45–2:52अगता कार इस पश्ट लिखाई च्छा थींजे, कक्रो भुजले नहीं च्ले जे के के कते से आची.
  36. 2:52–2:54मुदा इत अग्यानता बोगिल ने?
  37. 2:54–2:57नहीं नहीं, इकेवल आग्यानता नहीं आची.
  38. 2:57–3:01इसल में भेद भावक पोडन अनुपस्तितिया ची,
  39. 3:01–3:05मनुश्षक मस्तिषक जक्धन समाजक विद्द्रिम नियम समुक्त रहे ता चीने,
  40. 3:05–3:08तकनो स्वाभाविक रोप से दोसर मनुश्ष से जोडे ची,
  41. 3:08–3:11उते कोनो दिवाल नहीं आची.
  42. 3:11–3:13हम एकरा दूसर तरहे से देखाएच्छी
  43. 3:13–3:15आहा जक्रा संसद कही रहाल ची
  44. 3:15–3:18उवो उते सबकर प्रत्निदिप तशमान नहीं है
  45. 3:19–3:21की उवी संसद में महुवा कुनो भोट आची
  46. 3:21–3:24आहा सोचुझूँ जे इस सम्रस्तक निरमाद कोना बहरा लाई
  47. 3:24–3:29मुदा महुवा तो उते चेने, उब उतो उहे पारक का हिस्सा आची?
  48. 3:29–3:37हिस्सा आची मुदा कोना, महुवा जे उडीसा सा आएल आची, उवते खेलेत नहीं उखेल आबे आची.
  49. 3:38–3:43हमरा सबहेक एटाम एक ता मनोब यग्यानिक और सामाजिक तन्तर के भुजवा का अची.
  50. 3:43–3:50जक्रा हम उदार लेल गेल बच्पन, वाई देलिगेटिट चाइलड़ूड कही सके ची.
  51. 3:50–3:54उदार लेल गेल बच्पन एकर की तात्पर्यब है?
  52. 3:54–3:56आग तात्पर्य की एक रासा?
  53. 3:56–4:00तात्पर्य एक जे जना हम सब अपन काज तेका पर दैई चिन,
  54. 4:00–4:04तहना एक विशेशा दिकार प्राप्त मद्ध्यम वर्ग,
  55. 4:04–4:06अपन बच्चाक बच्पन एक पुडद्टा क लिल,
  56. 4:06–4:36यक ता दोसर बच्चाक बच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्
  57. 4:36–4:39उक नाम लईते उकर गरा भारी आवे तची
  58. 4:39–4:42उफ उद्रिष्ष तब भड़ा मार में कछी
  59. 4:42–4:46तो हुँ, आहाग कत तथा कतित आदर समाज इए आची
  60. 4:46–4:50जे जे पारक बडखा लोक महुवा कोकर नाम सदरी नहीं जाने तची
  61. 4:50–4:53उकर आ वन्चावाली आया कहे तची
  62. 4:53–5:08इसम्रस्ता नहीं आची, ये टा वास्तू कला आची, जदे महुवा उ अद्रिष्छे भारवान कंभा आची, भूजलूने, जकर पसीना से इ उटोप्या थार आची, जई कंभा रदा दिल जाए, ता आहाक इशानती तुरत खसी परत.
  63. 5:08–5:21देखो महुवाक गराबरी याव आवकर वियता पूड्या थार्त है, हम उक्रा मकारी नहीं रहाल ची, मुदा की केवल ऐएई कारने, हम सब उही समबंद का सत्यता कं नकारी दी, जे अवम आमन्शा कभीच अची?
  64. 5:21–5:25सत्यता की अव समबंद पूँन रूपें सुतन्तर ची.
  65. 5:25–5:33अखालो जे महुवा एक ता खंभा आची, मुदा हमर मानव आची, जे मानवी या समबंद कोनो एट पत्धरक मकान नहीं आचे.
  66. 5:34–5:38हम एक रा उम एक ता मिश्र द्हातु अ अलाए करुप में देखे ची.
  67. 5:38–5:40मिश्र द्हातु. इक नी विस्तार से समजगा।
  68. 5:40–5:44अब विज्यान में मिश्रदातुक सिद्धान्त बुजेद होईब,
  69. 5:44–5:49जकन दूता भिन्न अख्क्नो काल कमजोर दातू आपस में मिलैत अचीने,
  70. 5:49–5:52तो एक ता अख्कल्पनियम जबूड स्वरुपला लैत अची,
  71. 5:52–5:55जेना की ताम्बा आराम्ग मिलीका कान्स बने तची.
  72. 5:55–6:25अदिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया �
  73. 6:25–6:32तो आप आप दिखाई ताई ताई ताई ताई तार काई जी इसम्मन्त केवल पार्क का ओई उदार लेल गल समएद हरी सीमित नहीं आची.
  74. 6:32–6:37जा इई केवल एक ता क्रित्रिम यूटोप्या रहीत ता इन निजी स्थान में कोना प्रवेष करेत.
  75. 6:37–6:41येवल पार्क का उही उदार लेल्गल समए दहरी सीमित नहीं आची
  76. 6:41–6:47जा यी केवल एक टाक्रित्रिम उटोप्या रहीत, ता इन निजी स्थान में कोना प्रवेश करेत.
  77. 6:47–6:50आहा अमक पाचम जन्मदिन गखतनाक विष्लेशन करू.
  78. 6:50–6:53आच्छा उजन्दिन वला पार्टी?
  79. 6:53–6:59अपन गर की भीटर, जटे संस्क्रिति अ संस्कारक पहरा सब सब भेशी कडा होई तची,
  80. 6:59–7:04जटे आरभा चावर आ तर्वा तिल्कुडक शुद्द्धा आ चे, उतै की होई तची.
  81. 7:04–7:11मन्शा समय सा पहले नहां सोना क, नवफ्रोक पहीर का औमक दरवजजा पर पहुची जाईतचे.
  82. 7:11–7:13सही भात चे, उप पहुचे दचे.
  83. 7:13–7:19आ दरवाजा खुजते, उव, आपी बर्टे ओँम चिच्याएत भीटर दूडी जाईतचे,
  84. 7:19–7:24कत्दाकारक पंक्ती पर द्यान दियो, जिना अ अतिती नहीं गरक भेटी हो,
  85. 7:24–7:27इक उनो आयाक बनाल शान्ती नहीं अछे,
  86. 7:27–7:30इबच्चाक भीट्र को प्रक्रितिक सहान भुती अछे,
  87. 7:30–7:33जे समाजक सब दिवाल के खसादी तचे.
  88. 7:33–7:35दूशिता सुन्दर आचे?
  89. 7:35–7:46ये खड़ाग बाद दुन्नु कोना मे बैस के जे एक दुसरा के के कुवायत छे उ देखायत छे जगन बच्चा के अपना हाल पर चोड देल जाएत छे
  90. 7:46–7:52तनो भेद्बहाँ नहीं प्रेम चुनेत छे ये एक ता स्वाबहावेक जैवेक प्रक्रिया आचे
  91. 7:52–7:54ये एक ता प्रभाव शाली तर कचे
  92. 7:54–7:56मुदा की आहा इ विचार के लो है जी
  93. 7:56–7:59जे औमक जनन्दिनक ये समपूरन द्रिष्य
  94. 7:59–8:01मतलब ये एक ता नियंद्रित वातावरन आचे
  95. 8:01–8:03अख्च्ट्रोल्ट एंवायण्मेंट
  96. 8:03–8:05नियंद्रित कोना भेल
  97. 8:05–8:07उतो स्वतन्द्र रूप से खेली रहाल चल?
  98. 8:07–8:11देखू, आहा मिश्र दातुक जे उप्मा देलो हूँ
  99. 8:11–8:12उखुब सुन्दर अचे
  100. 8:12–8:14मुदा कोनु मिश्र दातुक आस्ली परिक्षन
  101. 8:15–8:17उकर निरमान काल में नहीं होईता चे
  102. 8:17–8:19उकर परिक्षन तो तकन होईता चे
  103. 8:19–8:22जखन उही पर बहाई प्रहार होई तचे
  104. 8:22–8:26इजनम देनक पार्टी, इपार्क, इसब एक ता सुरक्षिद बुल्बुला आचे
  105. 8:26–8:29मुदा, उ बुल्बुला बच्छा सुएम बनीने आची
  106. 8:29–8:31भास कै तची
  107. 8:31–8:33मुदा प्रष्न इए ची
  108. 8:33–8:40जगन कोनो अनियंत्रित अक्रामक तत्व एही भुल्बुला में प्रवेश करेई तची, तोखन की होई तची?
  109. 8:40–8:43आ एठम प्रवेश होई तची सुसेनक.
  110. 8:43–8:49आ, आ, सुसेन, औ नव बच्चाज परिसर में आवी का अशान्ती फैलेगे तची.
  111. 8:49–8:52मुदा उक्रा सकी प्रमानी थोई ताची
  112. 8:52–8:55सुसेनक प्रवेश एह बातक अकाट्ते प्रमान चे
  113. 8:55–8:58जे यी समरस्ता सुत्तह सुरक्षित नहीं आई आची
  114. 8:58–9:01सुसेनक दे हम जबूत आची आजीवे में काट आची
  115. 9:02–9:03उखेलाइत कम आची
  116. 9:03–9:05खेल भिगाडाइत बेसी आची
  117. 9:05–9:08आप अगर बूलीं कही सकै चही है हम सब
  118. 9:08–9:09भिलकुल
  119. 9:09–9:12कक्रो साएकल अगंटी तुंटूना का पडाजाएब
  120. 9:12–9:14कक्रो पैर सब भालुग गर मितादेब
  121. 9:14–9:17जगन सुसेन भालुग गर मितादेइ तची
  122. 9:17–9:20तक तकाथकार लिख ही चती हवाख नी भारी भागेल
  123. 9:20–9:21इभारी पन की यह चे?
  124. 9:21–9:23एक ता अशानती यह चे
  125. 9:23–9:25नहीं, यो ही ब्रमक तुटना यह चे
  126. 9:25–9:27और सब से महतुपुरन बात आची
  127. 9:27–9:31जे, जे, सुसेनक एही अक्रामकता पर
  128. 9:31–9:33वयस्क लोकनी क प्रतिक्रिया की होई तची
  129. 9:33–9:35बदका लोक की कहे चती?
  130. 9:35–9:39उसब कहे च्छतीन जे नव अच्छे आस्टे आस्टे सिखी जात.
  131. 9:39–9:44एक दम बडखा लोका की पंटी केवल उदासीनता नहीं आची.
  132. 9:44–9:48इएक ता बहेंकर मनोविग्यानिक सत्या के उजागर करे तची.
  133. 9:48–9:52वयस्क लोकनी आक्रमकता के की एक अंदेका करे च्छतीन,
  134. 9:52–9:56कारन, उ अपन उई पर्फेक्ट समाजक जे मित्या चित्र बनेने च्छतिन,
  135. 9:56–9:59उगरा तूटेइत नहीं देखे च्छतिन.
  136. 9:59–10:01मतलव, उ विवाद सब च्छतिन च्छतिन?
  137. 10:01–10:04हा, इद्वन्द सब बच्वाक मनो विग्यान अची.
  138. 10:04–10:07उ अन्याय के सामन ने मान ले च्छतिन.
  139. 10:07–10:10अर एकर तन्त्र कोना काज करे तची
  140. 10:10–10:13सुसेंजका शिकारी सबसा पहले उक्रे ताके तची
  141. 10:13–10:15जे सबसा शान्त वब कम्जोर हो
  142. 10:15–10:18जेना की अम एक दम सही
  143. 10:18–10:20सुसेंजक आखी अम पर गडल
  144. 10:20–10:22करन अम कोनो प्रतिकार नहीं करे चल
  145. 10:22–10:24इप्रमाडित करे तची
  146. 10:24–10:29जे समाजक तता कतित समर्सता कम्जोरक के बचेबामे पुरनतविफल आची
  147. 10:29–10:32जा समर्सता एतेक स्वाबी कची
  148. 10:32–10:36तो सुसेंजका बच्चा उक्राए एतेक आसानी सकोना भेद देट आची
  149. 10:36–10:39हम आगा के इतरक से पुर सहमत नहीं ची
  150. 10:39–10:43कारन, आहा अक्रामकताक प्रभाव कित देखी रहल ची,
  151. 10:43–10:46मुदा अकर विरुदद जे प्रतिरोद उपन्वेल,
  152. 10:46–10:48अकर तन्द्र के अंदेखा कर रहल ची.
  153. 10:48–10:51प्रतिरोद वयस्क तविफल रहला ना?
  154. 10:51–10:52आहा की बाज सत्य ची,
  155. 10:52–10:54जे वयस्क समाच विफल रहा ले,
  156. 10:54–10:58बदका लोग आपन सुविदाक लेल माँन रही किला
  157. 10:58–11:01मुदा की उही बुल्बुला के फुटे दिल गिल?
  158. 11:01–11:02नहीं
  159. 11:02–11:06आसल रक्षा कोनो वयस्क वा संस्त्ता नहीं किलाक
  160. 11:06–11:10रक्षा उतसे आएल जकर कलपना के अ निकने चल
  161. 11:10–11:13उही सुबहाविक मित्रताक गर्वसा
  162. 11:13–11:19अग, एक रा एक ता बच्चक उप प्रतिरोद ही पुरा समाज के विफलताक दोसकत अची, एक ता चोट कदना सा.
  163. 11:19–11:27आग, एक रा केवल एक ता बच्चक काज नहीं मानू, एक रा एक ता उम्मविकास वादी मनो वेग्ग्यानिक प्रतिक्रिया क्रुब में देखो.
  164. 11:27–11:34जखन् सुसेन औम के शिकार बनवे चाहे तची, तची औम के डाल बनी का सुजान आवे तची.
  165. 11:34–11:35मनशा.
  166. 11:35–11:37आव, उदूजूटी बाली मनशा.
  167. 11:37–11:42मनशा जे औम से एक दं भिन्ना अची, औड्ड़ बनी का सुजान आवे.
  168. 11:42–11:47अम जे मिश्र दातुक बातके नि रहीने अकर प्रमाड अहीत हा मैं ची.
  169. 11:47–11:57तामाजग का शान्त अम और रांगजग का चन्चल मन्शा दुन्नू मिली का कास्क ओडाल बनल, जे सुसेंजग का हत्षोडाक प्रहार सही ले लक.
  170. 11:57–12:01मुदा इत एक तक शनिक प्रतिक्रिया भिलने?
  171. 12:01–12:03नहीं इक शनिक नहीं आची
  172. 12:03–12:11मनुश्यक मस्तिष्क में अन्याइ से लडबाके लेल एक ता स्वताः प्रतिरोद वा इम्यूनिती होई तची
  173. 12:11–12:13जखन विवस्ता विफल भोजाई तची
  174. 12:13–12:18तकन इनिश्छल प्रेम आस्धेज गधबंदन सोजा आवाई तची
  175. 12:18–12:21मन्शा के कियो सिखाने नहीं चल
  176. 12:21–12:23जे ओम उकर दोसर प्रान तक अची
  177. 12:23–12:25तो उकर रक्षा नहीं करी
  178. 12:25–12:27इसिद कराई तची
  179. 12:27–12:31जे प्राक्रितिक प्रेम अन्याय से लडबाक ताकत रखाई तची
  180. 12:31–12:34चमाकरव, मुदा हमराई बात पचाइत नहीं आची.
  181. 12:34–12:35हम बतावे ची की एक,
  182. 12:35–12:40मन्शा द्हाल बनीगिल इद्रिष्य निश्चाई भावुख करे वलाची.
  183. 12:40–12:43बाल मना की साहस प्रशन सनीया आचे.
  184. 12:43–12:47मुदा हमरा एक ता गमवीर याठार्थ से आचीने चुरवाग चाही.
  185. 12:47–12:54उगड़ा बच्चाक वयक्तिक सहस पूरा दाचाका खोखला पनके बहरी नहीं सकेता ची
  186. 12:54–13:00आहा सोचु मन्शाक प्रतिरोदख बाद की सुसें का अक्रमकता जर से कतम वोगेल
  187. 13:00–13:03कतम तनही भेल मुदा एक ता सन्देश्त गेल
  188. 13:03–13:05मुदा की वयस्क लोकनिक सोच बडली गेल
  189. 13:05–13:13नही, सुसेंजका बच्चा समाज में निरन्तर पेदाब हो रहे लची, जक्रा बदका लोकनेक माँन सहमती बहेट रहे लची.
  190. 13:13–13:18मुदा मन्शा ता थाद भेल, की पर्याप्त आशा नही आची आमरे सबखले ले.
  191. 13:18–13:21इआशा के टा चोट सन किरन मात्र आची
  192. 13:21–13:25मुदा उही किरन के पाचाक अन्यार देखूँँँँ
  193. 13:25–13:28जकन मन्शा अम लेल डाल बनी रहल आची
  194. 13:28–13:31तीक उही समय महुवा कते आची
  195. 13:31–13:33महुवा उते उते थार चाल
  196. 13:33–13:38अद, महुवा उते थार अपना गाम के मोन पाडी रहल आची
  197. 13:38–13:41मुदा महुवाक बच्पनलेल डाल बनी कगे थार चे?
  198. 13:41–13:42क्यो नहीं?
  199. 13:42–13:46महुवाक मोन्विःता अ बडगका लोकनिक उदासीनता
  200. 13:46–13:48हम्रा सचेट करे तची
  201. 13:48–13:50जे केवल भाल सुलभ प्रेम
  202. 13:50–13:53समाजक गहीरा गाव के नहीं भ़ी सके तची
  203. 13:53–14:23सूसेन आ औम जगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग
  204. 14:23–14:34आँ, इसत्त्यची, जे महुवा जकार जतिल ताक आसु शेंजका विगधन कारी तत्तो को पस्तिती समाज में आचे आएक्रा नकारा नहीं जासके तची.
  205. 14:34–14:39मुदा हमर निषकर्ष यह ची जे भलही यथार्थ कथोड अची
  206. 14:39–14:45अम आमन्शाक मित्रता अविशेश रूप से मन्शाक डाल बने का कार्द होनाई
  207. 14:45–14:50यी इस्तापित करे तची जी मानविय एक ता में एक ता स्वानिर्मित शक्ती आची
  208. 14:50–14:53बहुँद उस्शक्ती सबखख्लेल लिन दची ना?
  209. 14:53–14:55बहुँद सके तची सबखख्लेल लिन हो.
  210. 14:55–15:00बहुद जकन सब वयस्क अपना सुविदाख लिल मुन भोजा एच्छती,
  211. 15:00–15:04तचन एक ता बच्चाक निश्छल प्रेम उही प्रती रोदख जनम दे तची.
  212. 15:04–15:16इक ता इसन्देश देतची जे मनुश्शे मुलता हा एक दोस्राक रक्षालेल बनल आची, आजा हम सब उही भाल मन के न जी विट्राखी ता समाजक देवाल कहसे सके तची.
  213. 15:16–15:21अहमर निशकर सी रहेद जे अआशाक किरन महत्पूर नची
  214. 15:21–15:24मुदा हमरा यतालत्वादी होबा कवषकता आची
  215. 15:24–15:27मन्शाक धाल बनव एक ता सुन्दर वयक्तिक गतना आची
  216. 15:27–15:31मुदा उकोनो संस्तागत वा समाजिक समवदान नई आची
  217. 15:31–15:35आँा की बिन्दू से हो विचारनी आची
  218. 15:35–15:39जखंदरी मनसाभाली आयाजका समबोदन समाज मेरहेद
  219. 15:39–15:44जखंदरी कोनो बच्चा के अपन बच्पन उदार दोग कदोसर कबच्पन सजजेभे परत
  220. 15:44–15:50आज्सुसेनक आख्रामक्ता के आस्ते-ास्ते सीखी जाएत, कही कर तालल जाएत,
  221. 15:50–15:55तक्हन्धरी हमर आहाक कोनो भी समरस्ता केवल एक तब्रम बनल रहेत.
  222. 15:55–16:00बालगुर। हमरा इसचेत करेत आची, जिस समरस्ताक आवरन बहुत मोहक होएत आची.
  223. 16:00–16:04मुदा उकर कीमत के चुकार हल हैच, इपुछवा बेसी आवश्षा कची.
  224. 16:04–16:10आप, इबहुत सपष्ट ची, जे बाल गुरु कता, केवल बच्चा केल कुदक सादारन्क्हन्ध नही आची.
  225. 16:10–16:16इस्वाज्ग इक्ता गंभीर मतलप मनोवेग्यानिक अस्वाज्ग दर्पन अची
  226. 16:16–16:21जते उमक शान्ती इची, मन्चाक प्रतीरोदख, कासक धाल अची,
  227. 16:21–16:25महुआक मुख संगर्ष अची, अस्सेनक अवाख्रामक्ता ची,
  228. 16:25–16:28जे वयस्कन क्मून से पूषीत होगी तची.
  229. 16:28–16:40बिल्ल्कुल सही, तश्रोता लोकनिके हम सब याग्रह करेप जी आहा सब एही चारो पात्रक माद्ध्यम सब आपन आबास्ये परिसर आ आस समाजक धाचाक स्वैम्मुल्यांकन करू.
  230. 16:40–16:45आजग आस्पासक औए द्रिशशबार वहन्खम्बख के आची इसोच्वाग विषे आची.
  231. 16:45–16:48आई जखन कोनो सुशेन अक्रामक होई तची,
  232. 16:48–16:52तक की हम सब औही माँन वयस ककतर है वैवार करे ची,
  233. 16:52–16:57वह औही दूजूटी वाली मन्शाजका दाल बनी कथार होई तची.
  234. 16:57–17:01एही गंभीर विचार संगे आई हम सब आहा से विदा लेजची
  235. 17:01–17:05चर्चा के सुनीभा के लिल आहा सब के बहुत-बहुत द्धन्नवाद

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विमर्श में आहक स्वागता चे, आई हम सब एक ता बडगमभीर विष्यापर चरचा करव, कि निश्षल बाल प्रेम, वास्तों में समाज कदिवाल के खसासा कै ता चे? वा वा इी मात्र एक्ता सुखध ग्राम अच्ये जकर कीमत मतलप कुनु गरी बच्चा के आपन बच्पन गमा के चुकावे पडे तचे एक दम इी बहुत प्रसंगिक प्रश्नाची तग गजेंद्र थाकुर जीक रचित कता बाल गुरू अम्रा सब के दिल्लिक एक्ता एहन आवासी परिसर में लव जाए तची जताए बाहरा से तच्फ्लैट एक्के रंक छे मुदा भीट्र, सब दरवाजाग पाचा एक्ता अलक देश बसए तची सही कहलो वहा, जना की तेसर महला पर मित्ला बसए तची तस्मने बला ब्लोक में पन्जाब आव उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई ता प्राक्रतिक, मतला सतस्वुर्त भावना एचु। आँ, आख, कहे बची, जे इप पुरन रूपेन प्राक्रतिक अची। आए, एक दम. इब भाल मनक प्राक्रतिक सम्रस्ताक विजे आची. जे भाशा आसंख्रतिक, क्रित्रम सीमा सा उपर उठीका, उगरा कियो सिखाभाएत नहीं ची? हम भूजी रहाल ची, जे हा एना की एक सोषेट ची मुदा हमर द्रिष्टी सदेखो इगता उही उटोप्या वा मानुजे आदर्ष लोकक ब्रम्किन तोडगी तची इस सम्रस्ता वास्तव में महुवाक छिपल उदासी वास्तव में महुवाक छिपल उदासी असुसेनक अक्रामकताक सोजा बल खम्जोर अखोखला सिद होईत अजे खोखला? आगी खोखला लामत अजे आआ, बिलकुल खोखला हमर मान बची जे इपरी सर्क शान्ती एक तनाजुक आवरन मात्र आची जे बाल, श्रमिक, मतलप महुवाजका बच्चाक मुख संगर्ष पर्टि काल आची. इकुनो प्राक्रितिक विजे न आची. अमरे एक दोसर द्श्टि कुन राखे दियों आची पर. कताक उही गासक पारक पर कनी द्यान दियों. अदे बज्चा सब कजी जमगध लागत अची तक कता कार उक्रा बज्चा सब का संसद कहच्छती अदे मुदा अहुन संसद जते करचयन बहुत गंभीर अची इक ता एहन संसद अची जते कोनो पक्ष्पात नहीं अची अता है मित्छला, पंजाब, उरीसा, अदिल्ली एक संगे खेले रहा लाची. अगता कार इस पश्ट लिखाई च्छा थींजे, कक्रो भुजले नहीं च्ले जे के के कते से आची. मुदा इत अग्यानता बोगिल ने? नहीं नहीं, इकेवल आग्यानता नहीं आची. इसल में भेद भावक पोडन अनुपस्तितिया ची, मनुश्षक मस्तिषक जक्धन समाजक विद्द्रिम नियम समुक्त रहे ता चीने, तकनो स्वाभाविक रोप से दोसर मनुश्ष से जोडे ची, उते कोनो दिवाल नहीं आची. हम एकरा दूसर तरहे से देखाएच्छी आहा जक्रा संसद कही रहाल ची उवो उते सबकर प्रत्निदिप तशमान नहीं है की उवी संसद में महुवा कुनो भोट आची आहा सोचुझूँ जे इस सम्रस्तक निरमाद कोना बहरा लाई मुदा महुवा तो उते चेने, उब उतो उहे पारक का हिस्सा आची? हिस्सा आची मुदा कोना, महुवा जे उडीसा सा आएल आची, उवते खेलेत नहीं उखेल आबे आची. हमरा सबहेक एटाम एक ता मनोब यग्यानिक और सामाजिक तन्तर के भुजवा का अची. जक्रा हम उदार लेल गेल बच्पन, वाई देलिगेटिट चाइलड़ूड कही सके ची. उदार लेल गेल बच्पन एकर की तात्पर्यब है? आग तात्पर्य की एक रासा? तात्पर्य एक जे जना हम सब अपन काज तेका पर दैई चिन, तहना एक विशेशा दिकार प्राप्त मद्ध्यम वर्ग, अपन बच्चाक बच्पन एक पुडद्टा क लिल, यक ता दोसर बच्चाक बच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च् उक नाम लईते उकर गरा भारी आवे तची उफ उद्रिष्ष तब भड़ा मार में कछी तो हुँ, आहाग कत तथा कतित आदर समाज इए आची जे जे पारक बडखा लोक महुवा कोकर नाम सदरी नहीं जाने तची उकर आ वन्चावाली आया कहे तची इसम्रस्ता नहीं आची, ये टा वास्तू कला आची, जदे महुवा उ अद्रिष्छे भारवान कंभा आची, भूजलूने, जकर पसीना से इ उटोप्या थार आची, जई कंभा रदा दिल जाए, ता आहाक इशानती तुरत खसी परत. देखो महुवाक गराबरी याव आवकर वियता पूड्या थार्त है, हम उक्रा मकारी नहीं रहाल ची, मुदा की केवल ऐएई कारने, हम सब उही समबंद का सत्यता कं नकारी दी, जे अवम आमन्शा कभीच अची? सत्यता की अव समबंद पूँन रूपें सुतन्तर ची. अखालो जे महुवा एक ता खंभा आची, मुदा हमर मानव आची, जे मानवी या समबंद कोनो एट पत्धरक मकान नहीं आचे. हम एक रा उम एक ता मिश्र द्हातु अ अलाए करुप में देखे ची. मिश्र द्हातु. इक नी विस्तार से समजगा। अब विज्यान में मिश्रदातुक सिद्धान्त बुजेद होईब, जकन दूता भिन्न अख्क्नो काल कमजोर दातू आपस में मिलैत अचीने, तो एक ता अख्कल्पनियम जबूड स्वरुपला लैत अची, जेना की ताम्बा आराम्ग मिलीका कान्स बने तची. अदिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया दिया � तो आप आप दिखाई ताई ताई ताई ताई तार काई जी इसम्मन्त केवल पार्क का ओई उदार लेल गल समएद हरी सीमित नहीं आची. जा इई केवल एक ता क्रित्रिम यूटोप्या रहीत ता इन निजी स्थान में कोना प्रवेष करेत. येवल पार्क का उही उदार लेल्गल समए दहरी सीमित नहीं आची जा यी केवल एक टाक्रित्रिम उटोप्या रहीत, ता इन निजी स्थान में कोना प्रवेश करेत. आहा अमक पाचम जन्मदिन गखतनाक विष्लेशन करू. आच्छा उजन्दिन वला पार्टी? अपन गर की भीटर, जटे संस्क्रिति अ संस्कारक पहरा सब सब भेशी कडा होई तची, जटे आरभा चावर आ तर्वा तिल्कुडक शुद्द्धा आ चे, उतै की होई तची. मन्शा समय सा पहले नहां सोना क, नवफ्रोक पहीर का औमक दरवजजा पर पहुची जाईतचे. सही भात चे, उप पहुचे दचे. आ दरवाजा खुजते, उव, आपी बर्टे ओँम चिच्याएत भीटर दूडी जाईतचे, कत्दाकारक पंक्ती पर द्यान दियो, जिना अ अतिती नहीं गरक भेटी हो, इक उनो आयाक बनाल शान्ती नहीं अछे, इबच्चाक भीट्र को प्रक्रितिक सहान भुती अछे, जे समाजक सब दिवाल के खसादी तचे. दूशिता सुन्दर आचे? ये खड़ाग बाद दुन्नु कोना मे बैस के जे एक दुसरा के के कुवायत छे उ देखायत छे जगन बच्चा के अपना हाल पर चोड देल जाएत छे तनो भेद्बहाँ नहीं प्रेम चुनेत छे ये एक ता स्वाबहावेक जैवेक प्रक्रिया आचे ये एक ता प्रभाव शाली तर कचे मुदा की आहा इ विचार के लो है जी जे औमक जनन्दिनक ये समपूरन द्रिष्य मतलब ये एक ता नियंद्रित वातावरन आचे अख्च्ट्रोल्ट एंवायण्मेंट नियंद्रित कोना भेल उतो स्वतन्द्र रूप से खेली रहाल चल? देखू, आहा मिश्र दातुक जे उप्मा देलो हूँ उखुब सुन्दर अचे मुदा कोनु मिश्र दातुक आस्ली परिक्षन उकर निरमान काल में नहीं होईता चे उकर परिक्षन तो तकन होईता चे जखन उही पर बहाई प्रहार होई तचे इजनम देनक पार्टी, इपार्क, इसब एक ता सुरक्षिद बुल्बुला आचे मुदा, उ बुल्बुला बच्छा सुएम बनीने आची भास कै तची मुदा प्रष्न इए ची जगन कोनो अनियंत्रित अक्रामक तत्व एही भुल्बुला में प्रवेश करेई तची, तोखन की होई तची? आ एठम प्रवेश होई तची सुसेनक. आ, आ, सुसेन, औ नव बच्चाज परिसर में आवी का अशान्ती फैलेगे तची. मुदा उक्रा सकी प्रमानी थोई ताची सुसेनक प्रवेश एह बातक अकाट्ते प्रमान चे जे यी समरस्ता सुत्तह सुरक्षित नहीं आई आची सुसेनक दे हम जबूत आची आजीवे में काट आची उखेलाइत कम आची खेल भिगाडाइत बेसी आची आप अगर बूलीं कही सकै चही है हम सब भिलकुल कक्रो साएकल अगंटी तुंटूना का पडाजाएब कक्रो पैर सब भालुग गर मितादेब जगन सुसेन भालुग गर मितादेइ तची तक तकाथकार लिख ही चती हवाख नी भारी भागेल इभारी पन की यह चे? एक ता अशानती यह चे नहीं, यो ही ब्रमक तुटना यह चे और सब से महतुपुरन बात आची जे, जे, सुसेनक एही अक्रामकता पर वयस्क लोकनी क प्रतिक्रिया की होई तची बदका लोक की कहे चती? उसब कहे च्छतीन जे नव अच्छे आस्टे आस्टे सिखी जात. एक दम बडखा लोका की पंटी केवल उदासीनता नहीं आची. इएक ता बहेंकर मनोविग्यानिक सत्या के उजागर करे तची. वयस्क लोकनी आक्रमकता के की एक अंदेका करे च्छतीन, कारन, उ अपन उई पर्फेक्ट समाजक जे मित्या चित्र बनेने च्छतिन, उगरा तूटेइत नहीं देखे च्छतिन. मतलव, उ विवाद सब च्छतिन च्छतिन? हा, इद्वन्द सब बच्वाक मनो विग्यान अची. उ अन्याय के सामन ने मान ले च्छतिन. अर एकर तन्त्र कोना काज करे तची सुसेंजका शिकारी सबसा पहले उक्रे ताके तची जे सबसा शान्त वब कम्जोर हो जेना की अम एक दम सही सुसेंजक आखी अम पर गडल करन अम कोनो प्रतिकार नहीं करे चल इप्रमाडित करे तची जे समाजक तता कतित समर्सता कम्जोरक के बचेबामे पुरनतविफल आची जा समर्सता एतेक स्वाबी कची तो सुसेंजका बच्चा उक्राए एतेक आसानी सकोना भेद देट आची हम आगा के इतरक से पुर सहमत नहीं ची कारन, आहा अक्रामकताक प्रभाव कित देखी रहल ची, मुदा अकर विरुदद जे प्रतिरोद उपन्वेल, अकर तन्द्र के अंदेखा कर रहल ची. प्रतिरोद वयस्क तविफल रहला ना? आहा की बाज सत्य ची, जे वयस्क समाच विफल रहा ले, बदका लोग आपन सुविदाक लेल माँन रही किला मुदा की उही बुल्बुला के फुटे दिल गिल? नहीं आसल रक्षा कोनो वयस्क वा संस्त्ता नहीं किलाक रक्षा उतसे आएल जकर कलपना के अ निकने चल उही सुबहाविक मित्रताक गर्वसा अग, एक रा एक ता बच्चक उप प्रतिरोद ही पुरा समाज के विफलताक दोसकत अची, एक ता चोट कदना सा. आग, एक रा केवल एक ता बच्चक काज नहीं मानू, एक रा एक ता उम्मविकास वादी मनो वेग्ग्यानिक प्रतिक्रिया क्रुब में देखो. जखन् सुसेन औम के शिकार बनवे चाहे तची, तची औम के डाल बनी का सुजान आवे तची. मनशा. आव, उदूजूटी बाली मनशा. मनशा जे औम से एक दं भिन्ना अची, औड्ड़ बनी का सुजान आवे. अम जे मिश्र दातुक बातके नि रहीने अकर प्रमाड अहीत हा मैं ची. तामाजग का शान्त अम और रांगजग का चन्चल मन्शा दुन्नू मिली का कास्क ओडाल बनल, जे सुसेंजग का हत्षोडाक प्रहार सही ले लक. मुदा इत एक तक शनिक प्रतिक्रिया भिलने? नहीं इक शनिक नहीं आची मनुश्यक मस्तिष्क में अन्याइ से लडबाके लेल एक ता स्वताः प्रतिरोद वा इम्यूनिती होई तची जखन विवस्ता विफल भोजाई तची तकन इनिश्छल प्रेम आस्धेज गधबंदन सोजा आवाई तची मन्शा के कियो सिखाने नहीं चल जे ओम उकर दोसर प्रान तक अची तो उकर रक्षा नहीं करी इसिद कराई तची जे प्राक्रितिक प्रेम अन्याय से लडबाक ताकत रखाई तची चमाकरव, मुदा हमराई बात पचाइत नहीं आची. हम बतावे ची की एक, मन्शा द्हाल बनीगिल इद्रिष्य निश्चाई भावुख करे वलाची. बाल मना की साहस प्रशन सनीया आचे. मुदा हमरा एक ता गमवीर याठार्थ से आचीने चुरवाग चाही. उगड़ा बच्चाक वयक्तिक सहस पूरा दाचाका खोखला पनके बहरी नहीं सकेता ची आहा सोचु मन्शाक प्रतिरोदख बाद की सुसें का अक्रमकता जर से कतम वोगेल कतम तनही भेल मुदा एक ता सन्देश्त गेल मुदा की वयस्क लोकनिक सोच बडली गेल नही, सुसेंजका बच्चा समाज में निरन्तर पेदाब हो रहे लची, जक्रा बदका लोकनेक माँन सहमती बहेट रहे लची. मुदा मन्शा ता थाद भेल, की पर्याप्त आशा नही आची आमरे सबखले ले. इआशा के टा चोट सन किरन मात्र आची मुदा उही किरन के पाचाक अन्यार देखूँँँँ जकन मन्शा अम लेल डाल बनी रहल आची तीक उही समय महुवा कते आची महुवा उते उते थार चाल अद, महुवा उते थार अपना गाम के मोन पाडी रहल आची मुदा महुवाक बच्पनलेल डाल बनी कगे थार चे? क्यो नहीं? महुवाक मोन्विःता अ बडगका लोकनिक उदासीनता हम्रा सचेट करे तची जे केवल भाल सुलभ प्रेम समाजक गहीरा गाव के नहीं भ़ी सके तची सूसेन आ औम जगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग आँ, इसत्त्यची, जे महुवा जकार जतिल ताक आसु शेंजका विगधन कारी तत्तो को पस्तिती समाज में आचे आएक्रा नकारा नहीं जासके तची. मुदा हमर निषकर्ष यह ची जे भलही यथार्थ कथोड अची अम आमन्शाक मित्रता अविशेश रूप से मन्शाक डाल बने का कार्द होनाई यी इस्तापित करे तची जी मानविय एक ता में एक ता स्वानिर्मित शक्ती आची बहुँद उस्शक्ती सबखख्लेल लिन दची ना? बहुँद सके तची सबखख्लेल लिन हो. बहुद जकन सब वयस्क अपना सुविदाख लिल मुन भोजा एच्छती, तचन एक ता बच्चाक निश्छल प्रेम उही प्रती रोदख जनम दे तची. इक ता इसन्देश देतची जे मनुश्शे मुलता हा एक दोस्राक रक्षालेल बनल आची, आजा हम सब उही भाल मन के न जी विट्राखी ता समाजक देवाल कहसे सके तची. अहमर निशकर सी रहेद जे अआशाक किरन महत्पूर नची मुदा हमरा यतालत्वादी होबा कवषकता आची मन्शाक धाल बनव एक ता सुन्दर वयक्तिक गतना आची मुदा उकोनो संस्तागत वा समाजिक समवदान नई आची आँा की बिन्दू से हो विचारनी आची जखंदरी मनसाभाली आयाजका समबोदन समाज मेरहेद जखंदरी कोनो बच्चा के अपन बच्पन उदार दोग कदोसर कबच्पन सजजेभे परत आज्सुसेनक आख्रामक्ता के आस्ते-ास्ते सीखी जाएत, कही कर तालल जाएत, तक्हन्धरी हमर आहाक कोनो भी समरस्ता केवल एक तब्रम बनल रहेत. बालगुर। हमरा इसचेत करेत आची, जिस समरस्ताक आवरन बहुत मोहक होएत आची. मुदा उकर कीमत के चुकार हल हैच, इपुछवा बेसी आवश्षा कची. आप, इबहुत सपष्ट ची, जे बाल गुरु कता, केवल बच्चा केल कुदक सादारन्क्हन्ध नही आची. इस्वाज्ग इक्ता गंभीर मतलप मनोवेग्यानिक अस्वाज्ग दर्पन अची जते उमक शान्ती इची, मन्चाक प्रतीरोदख, कासक धाल अची, महुआक मुख संगर्ष अची, अस्सेनक अवाख्रामक्ता ची, जे वयस्कन क्मून से पूषीत होगी तची. बिल्ल्कुल सही, तश्रोता लोकनिके हम सब याग्रह करेप जी आहा सब एही चारो पात्रक माद्ध्यम सब आपन आबास्ये परिसर आ आस समाजक धाचाक स्वैम्मुल्यांकन करू. आजग आस्पासक औए द्रिशशबार वहन्खम्बख के आची इसोच्वाग विषे आची. आई जखन कोनो सुशेन अक्रामक होई तची, तक की हम सब औही माँन वयस ककतर है वैवार करे ची, वह औही दूजूटी वाली मन्शाजका दाल बनी कथार होई तची. एही गंभीर विचार संगे आई हम सब आहा से विदा लेजची चर्चा के सुनीभा के लिल आहा सब के बहुत-बहुत द्धन्नवाद

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