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३००_मजदूरक_नाम_आ_चन्ना_गाछीक_भूत.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:15आई हम्रा सब के भीच जल समादिः पर चर्चा कर रहल ची जाही में गंगाक पूल दूरगखतना, चन्ना गाछिक भूथ सब आ तीन सो मरित मस्दूरक नाम बचेबा के ले अब्यंता नंदक संगर्ष्का गब ची.
  2. 0:15–0:25तव, एही कताक सन्द्रच्ना अप्रवाह में जादूई अत्हारत्वाद अब भहोतिक संगर्ष्छ के भीच का संतुलन के और गेरा करबाक आवश्श्व्टा चे.
  3. 0:25–0:32रह, आम एक तप आग भिन्दू अची, पोठी में जे सबसे बड़ो कमजोरी अची,
  4. 0:32–0:39उ ईई, जखन हम्रा सब चन्ना गाची में उ बूडभा भूद अ पन्दुभ्भिक दून्या से निकलित कझ,
  5. 0:39–0:43माने जखन कता नंद क अदालती संगर्ष दिस आवे तची,
  6. 0:43–0:45तो उकर गती बद्दिमा भजाई तची.
  7. 0:45–0:48माने तुनो सन्सार अलगलक चली रहे लची नहीं.
  8. 0:48–0:56एक दम सही, दूनो सन्सार अलग-लग पत्री पर चले तची, बुजाई तची जेना हम्रा सब दूईता अलग-लग पोठी पडही रहल ची.
  9. 0:56–1:01एकर परनाम एह हो इच्छाए जे पाटक द्यान तूटीजाए चे
  10. 1:01–1:04तढ आँ एकर समादान की भही सकत अची
  11. 1:04–1:09हमर सुजाव एच्छी जे एही दूनू संसार माने यतार्त आपर अबहोतिक
  12. 1:09–1:14दून्नू के एक दूस्रापर सीथा असमानान्तर प्रभाव डाले देखाओल जाए.
  13. 1:14–1:16जही सक कताक तनाव बनल रहेत.
  14. 1:16–1:19आ, निरनतर बनल रहेत.
  15. 1:19–1:24अख्खन की हो इच्छे जगन नन्द दव्टर में संगर्ष करे तच्छे,
  16. 1:24–1:29तो बूथ सब चन्नागाची मे आपने दून मे कबद्टी के लिए रहले चे?
  17. 1:29–1:31इई नहीं हो बाक चाही.
  18. 1:31–1:36औ, एक ता बात कहो, कि इई अलग अलक दून्या नहीं आची.
  19. 1:36–1:42नंदक कानुनी दाव पैंच अ बूथ सब के कबद्टी दून्नुक यतार्थता बहिन आची.
  20. 1:42–1:47ज़ा हम सब दून्नू के मिलाएब माने की पाथक ब्रमित ना बोजाए.
  21. 1:47–1:51नहीं नहीं. ब्रमित करबाक बात नहीं आची.
  22. 1:51–1:54इता कार्य कारन समबंद भूजुल हूँ.
  23. 1:54–1:57कोज अन इप्टिस थापित करबाक बात छे.
  24. 1:57–2:00औ, माने यदार्त में जे भो आहल्च है.
  25. 2:00–2:03उकर सीदा असर बूछ सब के दून्यापर पड़ाई?
  26. 2:03–2:04बलकल.
  27. 2:04–2:08उदारनक लेल जगन नंद के दम्की बेटे च़े,
  28. 2:08–2:13जैना अक्रा हपसेशर का जुट्ता की भीतर राखल पची बेटे च़े,
  29. 2:13–2:15तक्खनो दरी जाई तचे.
  30. 2:15–2:19तो उकर सीथा असर भूज सब के कबड़ी में तुरत दिखाओल जाए.
  31. 2:19–2:24आई? माने नन्दक दर से भूज सब के दून्या में भूकम पाभी जाए?
  32. 2:24–2:26आई! एक दम!
  33. 2:26–2:28या फिर आना दिखाओल जाए सकत छी,
  34. 2:28–2:32जे जगन नन आपन डारी में जल समादी लिख़े तखे,
  35. 2:32–2:39तीक उही शण चन्ना गाची के गाच के पात पर ओ अक्षर प्रत्यक्ष रूप से पभड़ाई लगे तची.
  36. 2:39–2:48बाप्रे, इत बद नीक द्रष्ष्वेल, इचोटो चोटो विव्रन दुन्नू दुन्या के एक दागा मे बान्दिद,
  37. 2:48–3:18रवाल जद्ते पातर रहत, वो ज़ाई बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बा�
  38. 3:18–3:20प्रभाव तते गेर परत
  39. 3:20–3:22दिकूँ लेक्हक
  40. 3:22–3:24तारीख के गोई भिला अद्याय में
  41. 3:24–3:26बूथ के अदालत के
  42. 3:26–3:29पेशकारक के रूप में दिखाएने चाथी
  43. 3:29–3:31इं बदनिक शुवात अची
  44. 3:31–3:34मुदा इता पोठी में बहुत पचाजा के अबाई तशी नाई
  45. 3:34–3:35तईटा
  46. 3:35–3:39वंगा लागत अची एक राप्रारम्ब सही अस्थापित के एल्जाबाग जाही
  47. 3:39–3:45आँ, जेना जखन दव्टर में कुनो मस्दूर कर नाम पनजी से कातल जाएत अची,
  48. 3:45–3:49तक्चन्न्ना गाची में कुनो बूथ के अवाज मद्द्यम बाजाए.
  49. 3:49–3:51अखर रूप दुंधला बाजाए.
  50. 3:51–3:54आँ, एह सा पाठकन के महसुस हैद,
  51. 3:54–4:00जे ये खेबल पालक लडाई नहीं आची ये आत्मा सबक अस्तित्वक लडाई आची
  52. 4:00–4:03जर नन्दारत तबहुज सब मिट जाएत
  53. 4:03–4:06ये निष्ष्त रूप सें पाथके के बान्द कर अखत
  54. 4:06–4:09आब आओ कताक कलनायक सबक दिस चलित ची
  55. 4:09–4:15कतھक मुक्य विरोदी पात्र सबक, द्रिष्टिकोन के और भेशी भोवायामी बनेलस है,
  56. 4:15–4:19इव्यवस्तागत आलोचना भेशी प्रभामकारी बनी सकेत अची.
  57. 4:19–4:23इएक तक गमभीर मुद्दाची, जे लेखखे के सुदारव परत,
  58. 4:23–4:26अगर खाज केवल लालच या दूष्तता के कारने भेल भुजाई तची
  59. 4:26–4:28तीन सो लोकग जान गे लचे
  60. 4:28–4:30एद पाएक कताख लेल
  61. 4:30–4:33इविरोदी पात्र बड़ हलका प्रती तची
  62. 4:33–4:35ता आहाके की सुजाव अच्या है पर
  63. 4:35–4:39अगर काज केवल लालच या दूष्तता के कारने भेल भुजाई तच्छी
  64. 4:39–4:41तीन सो लोकग जान्गे लच्छे
  65. 4:41–4:43एटिक पाएक कताक लेल
  66. 4:43–4:46इविरोदी पात्र बद्ध हल्का प्रतीथ होई तच्छी
  67. 4:46–4:48ता आहा के की सुजाव अच्छें है पर
  68. 4:48–4:51विरोदिः पात्र बद्ध हल्का प्रतीथ होईत अची
  69. 4:51–4:53ता आहा के की सुजाव अचहे हैं पर
  70. 4:53–4:55हमर सुजाव एची
  71. 4:55–4:57जे विरोदिः पात्र सब कभी तर्क
  72. 4:57–5:01अनकुर नेटिकता के गेराई सावभारल जाए
  73. 5:01–5:04उनका सब के इपुरन विष्वास हो बाक चाही
  74. 5:04–5:07जो जे करो हेल च्छती से व्यापक हित में आची
  75. 5:07–5:11मदा एता हम आहासा तनी आसाम अच्छी
  76. 5:11–5:16जे हमरा सव्विरोदी पात्रक तरक केन एतक मजबूत कदेब
  77. 5:16–5:19तकी पाट्ख अक्रासा सहान भूती नहीं राखे लागत
  78. 5:19–5:23अगरा कातून जे का लालची दिखाएनाई गलत कोना आची?
  79. 5:23–5:26ब्रष्ट दिखाएनाई गलत नहीं आचे,
  80. 5:26–5:29मुदा क्रुर्ता तकन ब्यानक लागे तचे,
  81. 5:29–5:32जकन अखरा पाचा एक तविक्रित न्याय हो.
  82. 5:32–5:35दून्याक सबसोपरा ब्यानक क्रुर्ता,
  83. 5:35–5:39उगर दिखान बाद्दिख बाद्दिख बाद्दिख ताचे तकन उकर एक ता मनुलोग राखल जाए.
  84. 5:39–5:41एक ता बेट्ख कद्रिष?
  85. 5:41–5:45जे सुचे चला जे ओड दून्याक भलाई करहल अचित
  86. 5:45–5:49माने ओआपन कुग्रित्यक के दाशनिक रुपसा सहीं माने थो
  87. 5:49–5:53बलक्ल एक ता थोस उदाहरन ससुचु
  88. 5:53–5:58एद्वर्द ब्रुम जगन मानाव गरीमा आव वेश्विक प्रगतिक बात करे ता चे
  89. 5:58–6:01तकन उकर एक्ता मनूलोग राखल जाए.
  90. 6:01–6:03एक्ता बेट्ख कद्रिश?
  91. 6:03–6:03आँ!
  92. 6:03–6:06उवातानो कुलित कम्रा में बैस का
  93. 6:06–6:09गंगादिज देखाइत तरक देरहल हो.
  94. 6:09–6:12जे एपूल लाक्फुलोकके गरीभी सा निकालत.
  95. 6:12–6:15आ उव तीन सो मस्दुरक म्रित्य।
  96. 6:15–6:20अख्रा लेल मात्र एक्ता की कहच्छी अंग्रेजी मे कोलाट्रल डामेज अच्छे.
  97. 6:20–6:21बाप्रे!
  98. 6:21–6:26माने 3 धार सालत प्रगतिक लेल अनिवार शती अवकारी होएत.
  99. 6:26–6:56आप आदा बद्वाग, आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
  100. 6:56–7:00अख्रा लगत हो जे ओ राज्यक रक्षा करर रहा लज्छी
  101. 7:00–7:04जा कोनो विरोदिक इपुरन विष्वास हो जे अजे करर रहा लज्छी
  102. 7:04–7:07से मानवताक भलाई ले लज्छी
  103. 7:07–7:11तो उ तीन सो नाम मिटेनाई और भेसी ख्फनाक बहुजाई तची
  104. 7:11–7:14अर भेसी खफनाक बहुजाई तची
  105. 7:14–7:15सत्यद
  106. 7:15–7:17असली खल नायक विध्ती नहीं
  107. 7:17–7:19बलकी वो व्यवस्ताः आची
  108. 7:19–7:22जे एहन्तर्ख के जन्मदेई तची
  109. 7:22–7:24एकर मतलब एई नहीं
  110. 7:24–7:26जे पाथक सहानुब होती राखत
  111. 7:26–7:30बलकी पाथक एही बाथ सा आरो भेसी आहत होएत
  112. 7:30–7:34जे एही व्यवस्ताक नजरी में मानव जीवन को कोनो मोल नहीं अच्छी.
  113. 7:34–7:44एक दम सही, यी बडलाव कता के एक ता सादारन ब्रस्त्रचार के पोठी से उठाख के एक ता मनोवे ग्यानिक उचाई दरी लोग जाएत.
  114. 7:44–7:50अप तीसर बिन्दू पर अवेज्ची गोही के रूपक के बार भार सीधा दोराईभा के बडला
  115. 7:50–7:56एक रा और सुख्श्मता सब प्रस्थुटकरब पोठीक तोन अ सैली के और मारक बना सकता ची.
  116. 7:56–7:58इपोठीक केंद्रियः प्रतीक अची
  117. 7:58–8:01गोही माने विवस्थाक भूग
  118. 8:01–8:07मुदायकर उप्योग में जे कमजोरी अची उएजे गोही कषंदर्द,
  119. 8:07–8:11जना कागजक गोही, अदालतक गोही, पानी में गोही,
  120. 8:11–8:15इसब पोठी में एटेक बेरभेशी आभी गे लची,
  121. 8:15–8:19जे एकर प्रतिकात्मक शकती कमजोर भेगे लची.
  122. 8:19–8:22माने सब ताई गोहीक सीथा उलेक करलास हैं
  123. 8:22–8:23रहा से कम बहजाईता जी
  124. 8:23–8:24हाँ
  125. 8:24–8:27एकरा सीमेंटिक सैट्टीऊशन कहल जाईता जी
  126. 8:27–8:30जकन हा कोनो शकतीषाली शब्द
  127. 8:30–8:31बार भार दोहरावैची
  128. 8:31–8:34तो अपन अर्थ कोड़ेईता जी
  129. 8:34–8:35जाँ हा गोहीक नाम
  130. 8:35–8:39तव आप न्ना पर लेब तव उकर खफ कथम बहेजाएत.
  131. 8:39–8:41तए एक रा लेल की सुजाव अच्छी?
  132. 8:41–8:48हमर सुजाव ही आच्छी जे गोहीक रूपक के किचु विषेश अच्चरम बिन्दू लेल बचाकर रखखल जाए.
  133. 8:48–8:55उक्रा प्रत्यक्ष कहवाक बडला, उकर बहाजास मने सेंसरी दीटेल से चित्रित काई जाए.
  134. 8:55–9:00जे ना कोनो दरावना सिनेमा में दानव के पूरा सिनेमा में नहीं देखाएत का
  135. 9:00–9:04मात्रोकर परच्चाई दखाल जाएत छी तब एशी दर लगाएत छी.
  136. 9:04–9:21बिल्कोल है ना, मुदा एकर पन्ना परू तारब कोना, जगन नंद अदालत में जाईत छे, तकन सीथा सीथे गोई काबाग बडला, दव्तरक लाल पीता, रद्दी फाइल का गंद अपेष्कारक के टखडख के सुख्ष्मता सचित्रत केल जाए.
  137. 9:21–9:25अखरा कुनो दल्दलक गंद सा जोडल जासा के तची
  138. 9:25–9:29अगरा कुनो दल्दलक गंद सजोडल जासा के तची
  139. 9:29–9:33अगरा कुनो शिकारी के दाद के खन्खनाद जका मैंसुस कराओ.
  140. 9:33–9:35मुदा की पाथक इ भुजी पावेद,
  141. 9:35–9:37जे इ गोह कबात भर रहाल अचे,
  142. 9:37–9:39जे हम सीदे गोही नहीं लिखभ.
  143. 9:39–9:41बलकुल भुज़ात.
  144. 9:41–9:43पाथक के दिमाग बहुत जेज होई तचे,
  145. 9:43–9:45जे हम सीदे गोही नहीं लिखभ?
  146. 9:45–9:46बलकल भुजध!
  147. 9:46–9:49पात्धक के दिमाग बहुत जेज होईत जेज
  148. 9:49–9:53जगन माल खाना में रद्दी फायल कगं दावए थची
  149. 9:53–9:57अज्जा उही ताए केवल पानी तपकएद सूनाल जाए चपाक
  150. 9:57–10:01तब पाटक स्वेम महसुस करीजे इगोहिक शिकारक आहत अची.
  151. 10:01–10:07माने लेखखकक इगवाख जरुरत नहीं आची, जे आदालत पे गोहिक नहीं देखे इत रहो.
  152. 10:07–10:08एक दम आई.
  153. 10:08–10:13उोही पानी तबकभा कावाज से पाटक खुद अपन दिमाग में गोहिक कगड़द.
  154. 10:13–10:19अज्यक्ध्ध पाथक अपन कल्पना से खोनो खोफनाक चीस का निर्मान करे तची,
  155. 10:19–10:23तो उलेक्धक शब्द से हजार गुना भेसी शक्ती शाली होगे तची.
  156. 10:23–10:25इख्वाँपना कची
  157. 10:25–10:29अकताक अन्त में जखन वास्तविक गोहिक उलेक होएत
  158. 10:29–10:31तकन उकर प्रभाव बद्ध बयानक होएत
  159. 10:31–10:33कि अक तपाट्ख पुरा पोथी बहरी
  160. 10:33–10:35उही गोहिक अहसाच से बागी रहल चेल
  161. 10:35–10:38आप एहे तशुक्ष्मता कस्ली कमाल अचे
  162. 10:38–10:43तसंच्छेप में कही तईसामगरी आपन विषे वस्तू मे बद्ध सक्ती शाली एची.
  163. 10:43–10:47एक रा ओर दारदार बनेवाक लेल तीन मुख्य बिन्दू अची.
  164. 10:47–10:53बज़़व दूज़व बज़वाद्रक तरक तर्क याँ और भहु आयामी बनेनाई, जाहे से हुंकर क्रूर्ता एक्ता विवस्तागत विदम बना लागे.
  165. 10:53–10:56जाईसा अक्ष्छन रीक्षन तुर्ण्थ होई
  166. 10:56–11:00तो सर, विरोदि पात्रक तर्क के आऔर भहु आयामी बनेनाई
  167. 11:00–11:04जाईसे हुंकर क्रूर्ता एक्टा विवस्थागत विडम बना लागे
  168. 11:04–11:08आ ते सर, गोही कर रूप के दोराएबाक बदला
  169. 11:08–11:11उकरा सुख्छ्मा आएन्द्रिया रूप में प्रस्तूत करव,
  170. 11:11–11:14जाहे सा पाथब उकर खौफ मजूस करए.
  171. 11:14–11:15ता हमर स्रोता,
  172. 11:15–11:19आहा अपना रचना के एही सुजाव सब के आदार पर संसोदित कगा,
  173. 11:19–11:21हमरा सब के फेर सा पथाव,
  174. 11:21–11:24रब वो बज़नीक लागत ज़ादा

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आई हम्रा सब के भीच जल समादिः पर चर्चा कर रहल ची जाही में गंगाक पूल दूरगखतना, चन्ना गाछिक भूथ सब आ तीन सो मरित मस्दूरक नाम बचेबा के ले अब्यंता नंदक संगर्ष्का गब ची. तव, एही कताक सन्द्रच्ना अप्रवाह में जादूई अत्हारत्वाद अब भहोतिक संगर्ष्छ के भीच का संतुलन के और गेरा करबाक आवश्श्व्टा चे. रह, आम एक तप आग भिन्दू अची, पोठी में जे सबसे बड़ो कमजोरी अची, उ ईई, जखन हम्रा सब चन्ना गाची में उ बूडभा भूद अ पन्दुभ्भिक दून्या से निकलित कझ, माने जखन कता नंद क अदालती संगर्ष दिस आवे तची, तो उकर गती बद्दिमा भजाई तची. माने तुनो सन्सार अलगलक चली रहे लची नहीं. एक दम सही, दूनो सन्सार अलग-लग पत्री पर चले तची, बुजाई तची जेना हम्रा सब दूईता अलग-लग पोठी पडही रहल ची. एकर परनाम एह हो इच्छाए जे पाटक द्यान तूटीजाए चे तढ आँ एकर समादान की भही सकत अची हमर सुजाव एच्छी जे एही दूनू संसार माने यतार्त आपर अबहोतिक दून्नू के एक दूस्रापर सीथा असमानान्तर प्रभाव डाले देखाओल जाए. जही सक कताक तनाव बनल रहेत. आ, निरनतर बनल रहेत. अख्खन की हो इच्छे जगन नन्द दव्टर में संगर्ष करे तच्छे, तो बूथ सब चन्नागाची मे आपने दून मे कबद्टी के लिए रहले चे? इई नहीं हो बाक चाही. औ, एक ता बात कहो, कि इई अलग अलक दून्या नहीं आची. नंदक कानुनी दाव पैंच अ बूथ सब के कबद्टी दून्नुक यतार्थता बहिन आची. ज़ा हम सब दून्नू के मिलाएब माने की पाथक ब्रमित ना बोजाए. नहीं नहीं. ब्रमित करबाक बात नहीं आची. इता कार्य कारन समबंद भूजुल हूँ. कोज अन इप्टिस थापित करबाक बात छे. औ, माने यदार्त में जे भो आहल्च है. उकर सीदा असर बूछ सब के दून्यापर पड़ाई? बलकल. उदारनक लेल जगन नंद के दम्की बेटे च़े, जैना अक्रा हपसेशर का जुट्ता की भीतर राखल पची बेटे च़े, तक्खनो दरी जाई तचे. तो उकर सीथा असर भूज सब के कबड़ी में तुरत दिखाओल जाए. आई? माने नन्दक दर से भूज सब के दून्या में भूकम पाभी जाए? आई! एक दम! या फिर आना दिखाओल जाए सकत छी, जे जगन नन आपन डारी में जल समादी लिख़े तखे, तीक उही शण चन्ना गाची के गाच के पात पर ओ अक्षर प्रत्यक्ष रूप से पभड़ाई लगे तची. बाप्रे, इत बद नीक द्रष्ष्वेल, इचोटो चोटो विव्रन दुन्नू दुन्या के एक दागा मे बान्दिद, रवाल जद्ते पातर रहत, वो ज़ाई बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बादर बा� प्रभाव तते गेर परत दिकूँ लेक्हक तारीख के गोई भिला अद्याय में बूथ के अदालत के पेशकारक के रूप में दिखाएने चाथी इं बदनिक शुवात अची मुदा इता पोठी में बहुत पचाजा के अबाई तशी नाई तईटा वंगा लागत अची एक राप्रारम्ब सही अस्थापित के एल्जाबाग जाही आँ, जेना जखन दव्टर में कुनो मस्दूर कर नाम पनजी से कातल जाएत अची, तक्चन्न्ना गाची में कुनो बूथ के अवाज मद्द्यम बाजाए. अखर रूप दुंधला बाजाए. आँ, एह सा पाठकन के महसुस हैद, जे ये खेबल पालक लडाई नहीं आची ये आत्मा सबक अस्तित्वक लडाई आची जर नन्दारत तबहुज सब मिट जाएत ये निष्ष्त रूप सें पाथके के बान्द कर अखत आब आओ कताक कलनायक सबक दिस चलित ची कतھक मुक्य विरोदी पात्र सबक, द्रिष्टिकोन के और भेशी भोवायामी बनेलस है, इव्यवस्तागत आलोचना भेशी प्रभामकारी बनी सकेत अची. इएक तक गमभीर मुद्दाची, जे लेखखे के सुदारव परत, अगर खाज केवल लालच या दूष्तता के कारने भेल भुजाई तची तीन सो लोकग जान गे लचे एद पाएक कताख लेल इविरोदी पात्र बड़ हलका प्रती तची ता आहाके की सुजाव अच्या है पर अगर काज केवल लालच या दूष्तता के कारने भेल भुजाई तच्छी तीन सो लोकग जान्गे लच्छे एटिक पाएक कताक लेल इविरोदी पात्र बद्ध हल्का प्रतीथ होई तच्छी ता आहा के की सुजाव अच्छें है पर विरोदिः पात्र बद्ध हल्का प्रतीथ होईत अची ता आहा के की सुजाव अचहे हैं पर हमर सुजाव एची जे विरोदिः पात्र सब कभी तर्क अनकुर नेटिकता के गेराई सावभारल जाए उनका सब के इपुरन विष्वास हो बाक चाही जो जे करो हेल च्छती से व्यापक हित में आची मदा एता हम आहासा तनी आसाम अच्छी जे हमरा सव्विरोदी पात्रक तरक केन एतक मजबूत कदेब तकी पाट्ख अक्रासा सहान भूती नहीं राखे लागत अगरा कातून जे का लालची दिखाएनाई गलत कोना आची? ब्रष्ट दिखाएनाई गलत नहीं आचे, मुदा क्रुर्ता तकन ब्यानक लागे तचे, जकन अखरा पाचा एक तविक्रित न्याय हो. दून्याक सबसोपरा ब्यानक क्रुर्ता, उगर दिखान बाद्दिख बाद्दिख बाद्दिख ताचे तकन उकर एक ता मनुलोग राखल जाए. एक ता बेट्ख कद्रिष? जे सुचे चला जे ओड दून्याक भलाई करहल अचित माने ओआपन कुग्रित्यक के दाशनिक रुपसा सहीं माने थो बलक्ल एक ता थोस उदाहरन ससुचु एद्वर्द ब्रुम जगन मानाव गरीमा आव वेश्विक प्रगतिक बात करे ता चे तकन उकर एक्ता मनूलोग राखल जाए. एक्ता बेट्ख कद्रिश? आँ! उवातानो कुलित कम्रा में बैस का गंगादिज देखाइत तरक देरहल हो. जे एपूल लाक्फुलोकके गरीभी सा निकालत. आ उव तीन सो मस्दुरक म्रित्य। अख्रा लेल मात्र एक्ता की कहच्छी अंग्रेजी मे कोलाट्रल डामेज अच्छे. बाप्रे! माने 3 धार सालत प्रगतिक लेल अनिवार शती अवकारी होएत. आप आदा बद्वाग, आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ अख्रा लगत हो जे ओ राज्यक रक्षा करर रहा लज्छी जा कोनो विरोदिक इपुरन विष्वास हो जे अजे करर रहा लज्छी से मानवताक भलाई ले लज्छी तो उ तीन सो नाम मिटेनाई और भेसी ख्फनाक बहुजाई तची अर भेसी खफनाक बहुजाई तची सत्यद असली खल नायक विध्ती नहीं बलकी वो व्यवस्ताः आची जे एहन्तर्ख के जन्मदेई तची एकर मतलब एई नहीं जे पाथक सहानुब होती राखत बलकी पाथक एही बाथ सा आरो भेसी आहत होएत जे एही व्यवस्ताक नजरी में मानव जीवन को कोनो मोल नहीं अच्छी. एक दम सही, यी बडलाव कता के एक ता सादारन ब्रस्त्रचार के पोठी से उठाख के एक ता मनोवे ग्यानिक उचाई दरी लोग जाएत. अप तीसर बिन्दू पर अवेज्ची गोही के रूपक के बार भार सीधा दोराईभा के बडला एक रा और सुख्श्मता सब प्रस्थुटकरब पोठीक तोन अ सैली के और मारक बना सकता ची. इपोठीक केंद्रियः प्रतीक अची गोही माने विवस्थाक भूग मुदायकर उप्योग में जे कमजोरी अची उएजे गोही कषंदर्द, जना कागजक गोही, अदालतक गोही, पानी में गोही, इसब पोठी में एटेक बेरभेशी आभी गे लची, जे एकर प्रतिकात्मक शकती कमजोर भेगे लची. माने सब ताई गोहीक सीथा उलेक करलास हैं रहा से कम बहजाईता जी हाँ एकरा सीमेंटिक सैट्टीऊशन कहल जाईता जी जकन हा कोनो शकतीषाली शब्द बार भार दोहरावैची तो अपन अर्थ कोड़ेईता जी जाँ हा गोहीक नाम तव आप न्ना पर लेब तव उकर खफ कथम बहेजाएत. तए एक रा लेल की सुजाव अच्छी? हमर सुजाव ही आच्छी जे गोहीक रूपक के किचु विषेश अच्चरम बिन्दू लेल बचाकर रखखल जाए. उक्रा प्रत्यक्ष कहवाक बडला, उकर बहाजास मने सेंसरी दीटेल से चित्रित काई जाए. जे ना कोनो दरावना सिनेमा में दानव के पूरा सिनेमा में नहीं देखाएत का मात्रोकर परच्चाई दखाल जाएत छी तब एशी दर लगाएत छी. बिल्कोल है ना, मुदा एकर पन्ना परू तारब कोना, जगन नंद अदालत में जाईत छे, तकन सीथा सीथे गोई काबाग बडला, दव्तरक लाल पीता, रद्दी फाइल का गंद अपेष्कारक के टखडख के सुख्ष्मता सचित्रत केल जाए. अखरा कुनो दल्दलक गंद सा जोडल जासा के तची अगरा कुनो दल्दलक गंद सजोडल जासा के तची अगरा कुनो शिकारी के दाद के खन्खनाद जका मैंसुस कराओ. मुदा की पाथक इ भुजी पावेद, जे इ गोह कबात भर रहाल अचे, जे हम सीदे गोही नहीं लिखभ. बलकुल भुज़ात. पाथक के दिमाग बहुत जेज होई तचे, जे हम सीदे गोही नहीं लिखभ? बलकल भुजध! पात्धक के दिमाग बहुत जेज होईत जेज जगन माल खाना में रद्दी फायल कगं दावए थची अज्जा उही ताए केवल पानी तपकएद सूनाल जाए चपाक तब पाटक स्वेम महसुस करीजे इगोहिक शिकारक आहत अची. माने लेखखकक इगवाख जरुरत नहीं आची, जे आदालत पे गोहिक नहीं देखे इत रहो. एक दम आई. उोही पानी तबकभा कावाज से पाटक खुद अपन दिमाग में गोहिक कगड़द. अज्यक्ध्ध पाथक अपन कल्पना से खोनो खोफनाक चीस का निर्मान करे तची, तो उलेक्धक शब्द से हजार गुना भेसी शक्ती शाली होगे तची. इख्वाँपना कची अकताक अन्त में जखन वास्तविक गोहिक उलेक होएत तकन उकर प्रभाव बद्ध बयानक होएत कि अक तपाट्ख पुरा पोथी बहरी उही गोहिक अहसाच से बागी रहल चेल आप एहे तशुक्ष्मता कस्ली कमाल अचे तसंच्छेप में कही तईसामगरी आपन विषे वस्तू मे बद्ध सक्ती शाली एची. एक रा ओर दारदार बनेवाक लेल तीन मुख्य बिन्दू अची. बज़़व दूज़व बज़वाद्रक तरक तर्क याँ और भहु आयामी बनेनाई, जाहे से हुंकर क्रूर्ता एक्ता विवस्तागत विदम बना लागे. जाईसा अक्ष्छन रीक्षन तुर्ण्थ होई तो सर, विरोदि पात्रक तर्क के आऔर भहु आयामी बनेनाई जाईसे हुंकर क्रूर्ता एक्टा विवस्थागत विडम बना लागे आ ते सर, गोही कर रूप के दोराएबाक बदला उकरा सुख्छ्मा आएन्द्रिया रूप में प्रस्तूत करव, जाहे सा पाथब उकर खौफ मजूस करए. ता हमर स्रोता, आहा अपना रचना के एही सुजाव सब के आदार पर संसोदित कगा, हमरा सब के फेर सा पथाव, रब वो बज़नीक लागत ज़ादा

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