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मैथिलीक_विद्रोही_इतिहास_आ_विदेह_आंदोलन.m4a

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Collection
Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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asr-draft
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No
Editorial review
not-reviewed
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small
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hi (0.714529)
Duration
1:53
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  1. 0:00–0:05मैथिली साहित्यक नुकायल समानान्तर इतिहास पर एक्ता तवरिट सारची
  2. 0:05–0:12आप सोचु की हैते जा आहाक आस्ली विद्रोही इतिहास के पैग-पैग संस्त्ता सब नुकादै
  3. 0:13–0:17अबाद में एक्ता दिजिटल आन्दोलन अग्रा वापस दुन्याक सोजा लाबई
  4. 0:17–0:23पहल्बात मेठलिक मूलजरी आप्वाम सबारम सताबदेक चर्या पद्मेची
  5. 0:23–0:27जे आसल में बोद्भिख्षू लोकनेक एक्ता विद्रोही लोक गीच्छल
  6. 0:27–0:36मुददबहेल की, जए मुख्यदराक इतिहाँसकार सब महान लोग कवी विद्ध्यापती के बादक एक्ता दरबारी संस्क्रित लेखख के संग मिला देलक.
  7. 0:36–0:44माने बुजु जना कुनो सडगकक विद्रोही कवी के राजाक दरबारी मुन्षी बना का इतिहास बदल्देल गेल हो.
  8. 0:44–0:52तो सर इदमन कारी प्रभाव बहुत पेगज्धल की बाशा कचनो कुनो सीमा में बान्धल रही सकईता ची एक दम नहीं.
  9. 0:52–0:55मैत्हली कोनो चोट मोट बोली नहीं,
  10. 0:55–0:57बलकी नेपालक मल्लराजा सिल्ला का
  11. 0:57–1:02असमा बंगाल दरी भाजल जाईवाला दिक्ता विशाल समपर कब हाशाचल.
  12. 1:02–1:05मुदा साहित्या अकाद्मी जका संस्ता सब,
  13. 1:05–1:09एक रहा अगा साहित्यक दिजितल रोबिनहुड कही सकच्छी,
  14. 1:09–1:12जिस संस्त्धगत पहरेदार सब तै करेच्छल,
  15. 1:12–1:15जि की चफत अकी नहीं, अकर दिवार नाग्खा,
  16. 1:15–1:18इआन्दोलन प्राचीन तिरहुट प्राचीन तिरहुट ग़ाएग.
  17. 1:18–1:24आपाबन्दी सब बच्वा के लेल, दो हाँजार इस्वी में विदेह दिजितल आंदोलन का शुर्वात बहिल.
  18. 1:24–1:28एक रा आजा सहित्यक दिजितल रोबिनहुड कही सकत ची,
  19. 1:28–1:31जिस संस्त्थागत पहरेदार सब तै करे चल,
  20. 1:31–1:42अगर दिवार नागखा इआन्दोलन प्राछीन तिरहुता लिपी आजारो पोठी के जिटल करहे लची संगे हाँशे पर राखलगे लेखख लोकने के नव मच्दा रहे लची.
  21. 1:42–1:48इसमानान्तर इतिहास साव सावट करएत अची जे मेठली कोनो कुलीन वरग के जागीर नहीं
  22. 1:48–1:54बलकी लोग प्रतिरोदा अदिजितल क्रान्ति सबनल एक ता जेए अजीवन्त भाशा चे

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मैथिली साहित्यक नुकायल समानान्तर इतिहास पर एक्ता तवरिट सारची आप सोचु की हैते जा आहाक आस्ली विद्रोही इतिहास के पैग-पैग संस्त्ता सब नुकादै अबाद में एक्ता दिजिटल आन्दोलन अग्रा वापस दुन्याक सोजा लाबई पहल्बात मेठलिक मूलजरी आप्वाम सबारम सताबदेक चर्या पद्मेची जे आसल में बोद्भिख्षू लोकनेक एक्ता विद्रोही लोक गीच्छल मुददबहेल की, जए मुख्यदराक इतिहाँसकार सब महान लोग कवी विद्ध्यापती के बादक एक्ता दरबारी संस्क्रित लेखख के संग मिला देलक. माने बुजु जना कुनो सडगकक विद्रोही कवी के राजाक दरबारी मुन्षी बना का इतिहास बदल्देल गेल हो. तो सर इदमन कारी प्रभाव बहुत पेगज्धल की बाशा कचनो कुनो सीमा में बान्धल रही सकईता ची एक दम नहीं. मैत्हली कोनो चोट मोट बोली नहीं, बलकी नेपालक मल्लराजा सिल्ला का असमा बंगाल दरी भाजल जाईवाला दिक्ता विशाल समपर कब हाशाचल. मुदा साहित्या अकाद्मी जका संस्ता सब, एक रहा अगा साहित्यक दिजितल रोबिनहुड कही सकच्छी, जिस संस्त्धगत पहरेदार सब तै करेच्छल, जि की चफत अकी नहीं, अकर दिवार नाग्खा, इआन्दोलन प्राचीन तिरहुट प्राचीन तिरहुट ग़ाएग. आपाबन्दी सब बच्वा के लेल, दो हाँजार इस्वी में विदेह दिजितल आंदोलन का शुर्वात बहिल. एक रा आजा सहित्यक दिजितल रोबिनहुड कही सकत ची, जिस संस्त्थागत पहरेदार सब तै करे चल, अगर दिवार नागखा इआन्दोलन प्राछीन तिरहुता लिपी आजारो पोठी के जिटल करहे लची संगे हाँशे पर राखलगे लेखख लोकने के नव मच्दा रहे लची. इसमानान्तर इतिहास साव सावट करएत अची जे मेठली कोनो कुलीन वरग के जागीर नहीं बलकी लोग प्रतिरोदा अदिजितल क्रान्ति सबनल एक ता जेए अजीवन्त भाशा चे

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