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अमर_बाबा_आ_कमला_धारक_गाथा.mp4
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- 0:00–0:05आए हम सब मितलाक एक तब बहुत पावन आएक अदबूत लोक कता कविषलेषन करब
- 0:05–0:09इग कता आचे, आमर भाबा आख कमला दारक
- 0:09–0:11इखोनो समन ने कता नहीं आचे
- 0:11–0:16इदार आद्धरम, जीवन आएक तब बहुत पैक बलिदान गाता थेक
- 0:16–0:26च्छु बिना कोन देरिक एही मिथकी एह दून्या में प्रवेश करेच्छी अब भुजहिच्छी जे इकता आयो कते नकते लोकक हिर्दे में कि आएक बसलाची.
- 0:26–0:31स्रोथ समग ग्रीक एक ता बहुत सकती शाली पंकती से शुएश्वात करेच्छी ए.
- 0:31–0:35वीर्ताक तरूवारी पर कखनो का लोरो दगर अची
- 0:35–0:37तनी वीचार कर वही पर
- 0:37–0:39इप पंक्ती वास्तो महम्रा सब के
- 0:39–0:41सोचे पर मजबोर कदई तची
- 0:41–0:45जे जगन कोनो रक्षा कले लव अस्त्र उठाल जाए तची
- 0:45–0:47तो उकर पाच्छा कते नकते
- 0:47–0:50बहुद्रास करूना अदूक सोची पल रहेताची
- 0:51–0:55इक दाता मात्र वीरताक नहीं बलकी उतबे करूनाक सोवाची
- 0:55–0:56आप देख।
- 0:56–1:00मित्लां के जीवन्त परमपरा में जे बात सबसे भेसी द्याना कर्षन करेताची
- 1:00–1:05उ य, जे एतरे दार, यानी नदी, कोनो सादारन पानेक स्रोत नहीं थेख,
- 1:05–1:10एतरे उ माए थेख, साख्षा देवी थेख, कमला दारक भीशाय में से हो एह सत्ते आची.
- 1:10–1:13इबात बहुत नीग जेंका स्पष्ट करेत आची,
- 1:13–1:18जे प्रक्रती आमनुश्यके भीच ये ते कें पावन आ आत्मिय सम्बन्त मानल गेल आची.
- 1:19–1:22मुदा जेना की स्रूतक का विव्रन स्पस्ट करेत आची.
- 1:23–1:25इस सम्बन्त सदिकन एहन हरीर नहीं चल.
- 1:26–1:30इक समे एहन आईल जकन मितलाक दर्ती पर बारी संकत कहसल.
- 1:30–1:42बर्खा जेना रूस्ये गेल, खेत जरजर भगेल, इनारक पानी सुखागेल, चारू दिस हाँखार मचल चल, दर्ती पाती गेल चल, जेना अपन जीवन कलेल पुकारी रहल हो.
- 1:42–1:45चारू कात बस एक ता गहीर निराशा पस्रल चल.
- 1:45–1:51इही गटनक्रम के ज़़ दियान से देखी तब सुवात होई तजी द़र्टिक उही आर्ट पुकार सा,
- 1:52–1:56शुन्ने दिन, जगन सब किच सुखावेल चल, अठक्हन तेसर दिन,
- 1:57–2:00जिना द़र्टिक पुकार सुनी कपहार स पानी उतरल,
- 2:00–2:08उदिन उदिन बीदर तजदे जदे कमला बहली उते उते जीवन फेर सज्जागी उप्टल.
- 2:08–2:15इगद्ना करम हमरा सब के दिखाई तजजई, जब प्रक्डद्टी कोना अपन संटान कर अप्टरीत होई तजई.
- 2:15–2:45इजेना साख्षात आसाक सुर्योदैच्छल, कम लाक पानिक सपर्ष भेडते सुखल केद फेर सहर्यागेल, इनार में पानिगुरियाग, गामक गाध पर जतेई सनाताच्छल, उतेई फेर सब बच्चा सपका हल्ला गुल्ला, अख्खिल कुज सुर्ब हैगेल, इओही निरम
- 2:45–2:51अब स्रोट समगरी बहुत रोचक दंशं कमला माइक दूटा बेटा को लेक करेत अची
- 2:51–2:59आब स्रोट समगरी बहुत रोचक दंख सं, कमला माएक दूटा बेटा को लेक करेत अची.
- 2:59–3:03एक दिस किसान अदूसर दिस मला.
- 3:03–3:07बोरे-बोरे जकन किसान रारलो का खेद दिस जाए चला,
- 3:07–3:14आब स्रोथ समगरी बहुत रोचक दंषं कमला माएक दूटा बेटा कु लेक करेत अची
- 3:14–3:17एक दिस किसान अदूसर दिस मला
- 3:17–3:21बोरे-बोरे जगन किसान रार लोका खेद दिस जाए चला
- 3:21–3:24तम मला आपन जाल लोका गाड दिस
- 3:24–3:28दून्नु समवदायक जीवन के केंदर एकरी चल कमला
- 3:28–3:31इआपन आप में एक तपःी गुदारन आची
- 3:31–3:34जो दून्नु समवदायक कोना नदीक सूंग
- 3:34–3:37एक तप्षन्तुलित आपुरन समजसक जीवन जीभी रहा जल
- 3:37–3:40इओई सान्तिपृरन युग कषाख ची आची
- 3:40–4:10तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
- 4:10–4:20इसान्ती बेशी देन नहीं तिकल, एक ता एहन समयाल, जकन एक ता एहंकार आलालज सबबरल व्यक्तिक, कुद्रिष्टी एही पावन नदीपर परल.
- 4:20–4:26स्रोटा कनुसार, व्यक्ती प्रक्रती सन अजये सक्ती के जीतबाग दुश्ठास के लक.
- 4:26–4:31इही ताम्सा इह कता एक ता बहुत गेहीर अग गेहमभीर मोर लेईता ची
- 4:31–4:34जते प्रक्रतिक मर्यादा पर सीधा प्रहार भेल
- 4:34–4:36वही आधंकारी गोशना की चल
- 4:36–4:38इसुनबत आस्चर लागत
- 4:38–4:40हम कमला समभ्याज करभ
- 4:40–4:41बलजोडी
- 4:41–5:11इस्व्द्य सुन्ते गामक गाँ सुन्न भगल, बल जोडी मने जबरजस्ती, देविदार सजबरजस्ती विवा, इस कोनो सादारन एंकार नहीं चल, इस प्रक्रतिक पावन समान कगोर लंगन चल, लोकक समज में नहीं आभी रहल चल जी इस की बहरहल आची, अख कोनो मनुश
- 5:11–5:17दंका पीट दिलक जे हुनक रूकत उक्रा पहीने हूनक आस्त्र से लडाई परत
- 5:17–5:22कमला के उही गहात पर जते साज में लोक श्रद्धा से दीप जर्वेइत चल
- 5:22–5:24उते आब लाथी चमके लागल
- 5:24–5:27शांत जलक चारुदिस आतंग अबहेच आगल
- 5:27–5:35इज़ संकत काल में एक ता बड़का प्रष्न थाद भेल आब कमला माएक पावन सम्मानक रक्छा के करत,
- 5:35–5:42शान्त किसान आँ मलाहक भीच्सं के उही बरबर ताकतक सामना करवाक साहस जुता पाबत,
- 5:42–5:46इप्रष्न जेना पूरा मित्लाक अंतरात्मा सो पूचल जारहल चेल,
- 5:57–6:05दार उमरे गूमरे लागल जिना कहत होत जे हमर संटान सब सूने चाँ हमर लाज आव तोरे सब के हाथ में आची
- 6:05–6:09इप्रक्रतिया मनुश्षिक बीच समवादक एक अटबुत उदारन आची
- 6:09–6:13जते नदी सुम आपन रक्षक के पुकार रहे लचली
- 6:13–6:19आत्तक्हन एही प्रकारक उतर भईतल, एही कताक नायक सिवरा गाूंक आमर्सिं,
- 6:19–6:24जिनका लोग स्रद्धासे आमर भाबा कहेत अचिन उठाडबेला.
- 6:24–6:30उईही आंकारी आक्रमडकारीक विरुद, कमलादारक रक्चक बनी कषुजा आईल चला.
- 6:30–6:38इक उनो सदारन सहस नचल, बलकी आपन माएक सम्मानक लेल, आपन प्राणक भाजी लगई बाक एक ता बहुत पाइक निरने चल.
- 6:38–6:45इएक ता ब्यानक संगर सक काल चल, आमर भाभा और उही लटहेत सब के भीच भीषन लडाई भेल,
- 6:45–6:53न्याय और्द्र्म के रक्षा के ले तर्वारी उठल, मुदा जेना की हम सब श्रवाते में चर्चा केने चलू, रक्षा कपन यक्ता बारी मुल्लि होएच है.
- 6:53–7:00सम्मान्त बच्गेल, आहंकारी पराजद भेल, मुदा एही क्रम में कते को निर्दोषक रक्त से हो बहल.
- 7:00–7:05ये ये एक ता एहन की मच्चल जे पूरा गाँके रदैके सदिक्हन लेल बदली देलक.
- 7:05–7:09स्रोटक एक ता बहुत मार्मिक बात जे द्याना कर्षन कराईता ची,
- 7:09–7:14उववची एकर अंतिम सीख तर्वारीक नहीं तराजुक छिख.
- 7:14–7:17इह एही पुरन गात्ख नेटिक केंदर आची
- 7:17–7:20रक्षा द्रम थेख इस्सक्तिया चे
- 7:20–7:23मुदा रक्षा करम में जे रक्टपात होई तची
- 7:23–7:25उक्रा सिहो तोलजाई तची
- 7:25–7:28कोनो भी हिन्सा चाहे उ द्रमेक रक्षाक ले लेक येक नहो
- 7:28–7:30अकर एक तदुखत पक्ष होई तची
- 7:30–7:34इलोक कता उई उदास पक्ष के सि हो स्विकार करी तची
- 7:34–7:39आए ही कारन जे आयो एही ताम किछ विषित विदान मानाल जै तची
- 7:39–7:44कहल जै तची जे आय दरी आमर भाबाबा गजमर पर दीप जरवैद काल
- 7:44–7:47बूड मला सब दूता प्रार्ठना करे च्छती,
- 7:47–7:50पहल कमला माएकसा सतत रक्षा कलेल,
- 7:50–7:54आदो सर उहे दीन जे निर्दुष रक्ट बहल उकर चमा कलेल,
- 7:54–7:59ये स्म्रिती आप पश्चताप दूनुके के अग्ट्बुद प्रतीक चे जे आएद्दरी जीवित छे.
- 7:59–8:02हमर सबक एई व्याख्या आप समापन देस अची
- 8:02–8:05मुदा इकता एक तब बहुत गहीर प्रषन चोडगा जार है लची
- 8:05–8:09कि कोनो सच्चा रक्षा बिना दुख का बोच समब हव अची
- 8:09–8:12पमित्रता का रक्षा के लिल की की बलिडान करे पडे तची
- 8:12–8:23आमर बाबाक इकता हम्रा सब के सोचे पर विवष करे तची, जे नायकत्व आव पर्यावरन सन्रक्षन मात्र उच्सव नहीं, बलकी एक ता बहुत पहग जिम्मेडारी और भलिदानक मांक रे तची.
- 8:23–8:27यही विचारनी प्रश्न का संगे आई हम सब एते विदा लेए ची.
- 8:27–8:31विचार करेत रहू आई एई तरहक अबबुट्स्रोट समगरी विष्लेशन लेज जुडल रहू.
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आए हम सब मितलाक एक तब बहुत पावन आएक अदबूत लोक कता कविषलेषन करब इग कता आचे, आमर भाबा आख कमला दारक इखोनो समन ने कता नहीं आचे इदार आद्धरम, जीवन आएक तब बहुत पैक बलिदान गाता थेक च्छु बिना कोन देरिक एही मिथकी एह दून्या में प्रवेश करेच्छी अब भुजहिच्छी जे इकता आयो कते नकते लोकक हिर्दे में कि आएक बसलाची. स्रोथ समग ग्रीक एक ता बहुत सकती शाली पंकती से शुएश्वात करेच्छी ए. वीर्ताक तरूवारी पर कखनो का लोरो दगर अची तनी वीचार कर वही पर इप पंक्ती वास्तो महम्रा सब के सोचे पर मजबोर कदई तची जे जगन कोनो रक्षा कले लव अस्त्र उठाल जाए तची तो उकर पाच्छा कते नकते बहुद्रास करूना अदूक सोची पल रहेताची इक दाता मात्र वीरताक नहीं बलकी उतबे करूनाक सोवाची आप देख। मित्लां के जीवन्त परमपरा में जे बात सबसे भेसी द्याना कर्षन करेताची उ य, जे एतरे दार, यानी नदी, कोनो सादारन पानेक स्रोत नहीं थेख, एतरे उ माए थेख, साख्षा देवी थेख, कमला दारक भीशाय में से हो एह सत्ते आची. इबात बहुत नीग जेंका स्पष्ट करेत आची, जे प्रक्रती आमनुश्यके भीच ये ते कें पावन आ आत्मिय सम्बन्त मानल गेल आची. मुदा जेना की स्रूतक का विव्रन स्पस्ट करेत आची. इस सम्बन्त सदिकन एहन हरीर नहीं चल. इक समे एहन आईल जकन मितलाक दर्ती पर बारी संकत कहसल. बर्खा जेना रूस्ये गेल, खेत जरजर भगेल, इनारक पानी सुखागेल, चारू दिस हाँखार मचल चल, दर्ती पाती गेल चल, जेना अपन जीवन कलेल पुकारी रहल हो. चारू कात बस एक ता गहीर निराशा पस्रल चल. इही गटनक्रम के ज़़ दियान से देखी तब सुवात होई तजी द़र्टिक उही आर्ट पुकार सा, शुन्ने दिन, जगन सब किच सुखावेल चल, अठक्हन तेसर दिन, जिना द़र्टिक पुकार सुनी कपहार स पानी उतरल, उदिन उदिन बीदर तजदे जदे कमला बहली उते उते जीवन फेर सज्जागी उप्टल. इगद्ना करम हमरा सब के दिखाई तजजई, जब प्रक्डद्टी कोना अपन संटान कर अप्टरीत होई तजई. इजेना साख्षात आसाक सुर्योदैच्छल, कम लाक पानिक सपर्ष भेडते सुखल केद फेर सहर्यागेल, इनार में पानिगुरियाग, गामक गाध पर जतेई सनाताच्छल, उतेई फेर सब बच्चा सपका हल्ला गुल्ला, अख्खिल कुज सुर्ब हैगेल, इओही निरम अब स्रोट समगरी बहुत रोचक दंशं कमला माइक दूटा बेटा को लेक करेत अची आब स्रोट समगरी बहुत रोचक दंख सं, कमला माएक दूटा बेटा को लेक करेत अची. एक दिस किसान अदूसर दिस मला. बोरे-बोरे जकन किसान रारलो का खेद दिस जाए चला, आब स्रोथ समगरी बहुत रोचक दंषं कमला माएक दूटा बेटा कु लेक करेत अची एक दिस किसान अदूसर दिस मला बोरे-बोरे जगन किसान रार लोका खेद दिस जाए चला तम मला आपन जाल लोका गाड दिस दून्नु समवदायक जीवन के केंदर एकरी चल कमला इआपन आप में एक तपःी गुदारन आची जो दून्नु समवदायक कोना नदीक सूंग एक तप्षन्तुलित आपुरन समजसक जीवन जीभी रहा जल इओई सान्तिपृरन युग कषाख ची आची तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � इसान्ती बेशी देन नहीं तिकल, एक ता एहन समयाल, जकन एक ता एहंकार आलालज सबबरल व्यक्तिक, कुद्रिष्टी एही पावन नदीपर परल. स्रोटा कनुसार, व्यक्ती प्रक्रती सन अजये सक्ती के जीतबाग दुश्ठास के लक. इही ताम्सा इह कता एक ता बहुत गेहीर अग गेहमभीर मोर लेईता ची जते प्रक्रतिक मर्यादा पर सीधा प्रहार भेल वही आधंकारी गोशना की चल इसुनबत आस्चर लागत हम कमला समभ्याज करभ बलजोडी इस्व्द्य सुन्ते गामक गाँ सुन्न भगल, बल जोडी मने जबरजस्ती, देविदार सजबरजस्ती विवा, इस कोनो सादारन एंकार नहीं चल, इस प्रक्रतिक पावन समान कगोर लंगन चल, लोकक समज में नहीं आभी रहल चल जी इस की बहरहल आची, अख कोनो मनुश दंका पीट दिलक जे हुनक रूकत उक्रा पहीने हूनक आस्त्र से लडाई परत कमला के उही गहात पर जते साज में लोक श्रद्धा से दीप जर्वेइत चल उते आब लाथी चमके लागल शांत जलक चारुदिस आतंग अबहेच आगल इज़ संकत काल में एक ता बड़का प्रष्न थाद भेल आब कमला माएक पावन सम्मानक रक्छा के करत, शान्त किसान आँ मलाहक भीच्सं के उही बरबर ताकतक सामना करवाक साहस जुता पाबत, इप्रष्न जेना पूरा मित्लाक अंतरात्मा सो पूचल जारहल चेल, दार उमरे गूमरे लागल जिना कहत होत जे हमर संटान सब सूने चाँ हमर लाज आव तोरे सब के हाथ में आची इप्रक्रतिया मनुश्षिक बीच समवादक एक अटबुत उदारन आची जते नदी सुम आपन रक्षक के पुकार रहे लचली आत्तक्हन एही प्रकारक उतर भईतल, एही कताक नायक सिवरा गाूंक आमर्सिं, जिनका लोग स्रद्धासे आमर भाबा कहेत अचिन उठाडबेला. उईही आंकारी आक्रमडकारीक विरुद, कमलादारक रक्चक बनी कषुजा आईल चला. इक उनो सदारन सहस नचल, बलकी आपन माएक सम्मानक लेल, आपन प्राणक भाजी लगई बाक एक ता बहुत पाइक निरने चल. इएक ता ब्यानक संगर सक काल चल, आमर भाभा और उही लटहेत सब के भीच भीषन लडाई भेल, न्याय और्द्र्म के रक्षा के ले तर्वारी उठल, मुदा जेना की हम सब श्रवाते में चर्चा केने चलू, रक्षा कपन यक्ता बारी मुल्लि होएच है. सम्मान्त बच्गेल, आहंकारी पराजद भेल, मुदा एही क्रम में कते को निर्दोषक रक्त से हो बहल. ये ये एक ता एहन की मच्चल जे पूरा गाँके रदैके सदिक्हन लेल बदली देलक. स्रोटक एक ता बहुत मार्मिक बात जे द्याना कर्षन कराईता ची, उववची एकर अंतिम सीख तर्वारीक नहीं तराजुक छिख. इह एही पुरन गात्ख नेटिक केंदर आची रक्षा द्रम थेख इस्सक्तिया चे मुदा रक्षा करम में जे रक्टपात होई तची उक्रा सिहो तोलजाई तची कोनो भी हिन्सा चाहे उ द्रमेक रक्षाक ले लेक येक नहो अकर एक तदुखत पक्ष होई तची इलोक कता उई उदास पक्ष के सि हो स्विकार करी तची आए ही कारन जे आयो एही ताम किछ विषित विदान मानाल जै तची कहल जै तची जे आय दरी आमर भाबाबा गजमर पर दीप जरवैद काल बूड मला सब दूता प्रार्ठना करे च्छती, पहल कमला माएकसा सतत रक्षा कलेल, आदो सर उहे दीन जे निर्दुष रक्ट बहल उकर चमा कलेल, ये स्म्रिती आप पश्चताप दूनुके के अग्ट्बुद प्रतीक चे जे आएद्दरी जीवित छे. हमर सबक एई व्याख्या आप समापन देस अची मुदा इकता एक तब बहुत गहीर प्रषन चोडगा जार है लची कि कोनो सच्चा रक्षा बिना दुख का बोच समब हव अची पमित्रता का रक्षा के लिल की की बलिडान करे पडे तची आमर बाबाक इकता हम्रा सब के सोचे पर विवष करे तची, जे नायकत्व आव पर्यावरन सन्रक्षन मात्र उच्सव नहीं, बलकी एक ता बहुत पहग जिम्मेडारी और भलिदानक मांक रे तची. यही विचारनी प्रश्न का संगे आई हम सब एते विदा लेए ची. विचार करेत रहू आई एई तरहक अबबुट्स्रोट समगरी विष्लेशन लेज जुडल रहू.