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बाल_गरुु_-_एकटा_विश्लेषण.mp4
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- 0:00–0:09नमशकार, एही व्याख्या में हम्रा सब गजेंद्र ताकृव्र जीक लिखल एक तब बर सुन्दर मार्मेक आगेहेर कता बाल गुरूपर चर्चा करव.
- 0:09–0:11इखनो सादारन कता नहीं अची
- 0:11–0:14बलकी इप महान नगर को ही चोड-चोड-बात
- 0:14–0:16आजीवन को ही यधार्थ के सोजा रखे तची
- 0:16–0:19जक्रा हम्रा सब प्रायव अंदेखा कडदेट ची
- 0:19–0:22एक तएहन कता जट-चोड-चोड-खटना
- 0:22–0:24जीवन कपेग दरषन करा देट ची
- 0:24–0:28ता आओ हम्रा सब एहमे प्रवेष करी, आब वुजबाक प्र्यास करी,
- 0:28–0:31जे ई मूल कता आसल मे हम्रा सब के की सिखवेता चे?
- 0:31–0:37जा एही कताख पात्राक बात करी, ता एहमे दूटा मूल नाम आँजी,
- 0:37–0:38अम आम वन्शा.
- 0:38–0:44सोचोत तटव, तुनो नाम इत्तेक छोट अची जे कागस पर लिखल जायता आदा पाती में अंटी जै,
- 0:44–0:48मुदा इ छोट-छोट-बाल पात्र अपन सहज्जता सेंकता एहन,
- 0:48–0:52पहेग बात कही जाता ची, जक्रा बरका-बरका पोथी से हो कहत-कहत,
- 0:52–0:54तब देकार भजाता थाची, मने ताकी जाताची,
- 0:54–0:57पईक पए ग्रन्त जे बाध सब श्पष्ट नेग कपावे तची,
- 0:57–1:01औई बच्चा सब पन जीवन क उदारन सब जादे तची.
- 1:01–1:04इग कताख खास्यत छी जे चोट-चोट-सुख्ष्मता में
- 1:04–1:06समपुन्ताक कदर्षन करवैताचे
- 1:06–1:10इक ताख पडदा उठाई तची देशक राजदानी दिल्लेस
- 1:10–1:12इक ताईहन पएग आवास्या परीसर
- 1:12–1:15जकर भीच में एक ता गासक पार कचे
- 1:15–1:18आइइ शहर ता हम्रा सबजनेच इहन अची
- 1:18–1:21जदे सब कियो कतो नकतो सा आईलचे
- 1:21–1:27ये ये ये आपन बवाँशी जीवनक अगटाग चलगट रही तचे ये महानगरग प्रवासी जीवनक एक दम केंद्र बिन्दू अचे.
- 1:27–1:34आब जखन एही पएग पएग बिल्टिंके बाहर से देखल जाए तचे, तचे साब किछ एक के सन लगे तचे.
- 1:34–1:37इं महानग्रक प्रवासी जीवनक एक दम केंद्र बिन्दू अचे.
- 1:38–1:42आब जक्ञन एही पएग पएग बिल्टिंके बाहर से देखल जाई तचे,
- 1:42–1:45तचे साब किछ एक्के सन लगे तचे.
- 1:45–1:46एक दम सम्रूप.
- 1:46–1:47एक रंके मकान,
- 1:47–1:50इक्के सन बालकनी और इक्के सन दरवज्जा
- 1:50–1:54लगब जैना सब ता फ्लैट जोवा भाई जखन तफ्ड़ा चे
- 1:54–1:58शेहरी करनके इक्ता बहुत पयग विषेष्ता आचे
- 1:58–2:01जता बाहरी रूप से कुनो भिन्नता नहीं देखाई तचे
- 2:01–2:31तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा था थी आप दर्वाजा थी आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आ
- 2:31–2:35जदे कंक्रीटक पाच्जा बिन्नबिन लोक संस्क्रती सास लैईचे.
- 2:35–2:39आव तनी आगु बरही आदेखी जे भीटर असल में की चली रहा लाची.
- 2:39–2:42एही बिल्टिंक के तेस्रा महला पर जे फ्लात आची
- 2:42–2:44औही में स्वैम मित्हिला वसाइत आची.
- 2:44–2:46एए आची उकर गर.
- 2:46–2:55मित्हिला वस्टाइताची. इए आची उकर गर. दिल्ली कर उही कोलाहल आपा दापिक भीच इप्लाट अक्ता चोट चिन गाम कर प्रतिरुप बनी गे लची.
- 2:55–2:59इदेखाई रहा लची जे लोग कपन माटी सा कतेख दरी दूर चली जाए,
- 2:59–3:05अपन संस्क्रिति असंकार के हिर्देस लगाक नोधाम पर सह्यो एक तर नोगाम बसाहे लेतची.
- 3:06–3:11अमक गर एक भी प्रक वाथ्यावरन के चाब बात करी, तो उते चूलिपर अरभाचाउलक बहात बनाई टची.
- 3:11–3:15बर्खा दिन में तर्वा तिल्कोरग गन्द पूरा गर में पस्रल रहेताची
- 3:15–3:18जिस सीदे मित्लक गामक याद दिया देताची
- 3:18–3:22और सब से मदूर बाज जे, एमक माएक मूसा खसाइत
- 3:22–3:24मेत्ली लोरिक सुर सूर सूनल जासके तची
- 3:24–3:28अदा एक दोसर दून्या बसेत अथे, अदा एक बसेत अथे पन्जाब, इम मन्शाक गर अची.
- 3:29–3:32एक ता आवासी ये परिसर में कचना दूटा बिल्कुल अलगलक संस्क्रिती समनान्तर रूप से चली रहा लजे,
- 3:32–3:37इस सम्प्वेव्रन मित्लक विष्व्द गरेलू पर्वेशक प्रतिने देथ्तो करेता ची.
- 3:37–3:41आप टीक वोकर गरस निकल कद सामनेवला ब्लोग दिस्ताक।
- 3:41–3:44उता एक ता दोसर दून्या बसेत अचे,
- 3:44–3:46उता ए बसेत अचे पंजाब,
- 3:46–3:47इम मन्शाग गर ची.
- 3:47–3:53इकta आवासी ये परिसर में ककना दूटा बिलकुल अलगलक संसक्रिती समनान्तर रूप से चली रहाल अचे,
- 3:53–3:57इतकर बहुत सुन्दर उदाहरन अचे. इए अस्पष्ट करे तचे,
- 3:57–4:01जे ई महनगर अनेकता में एक ताक एक ताप पेग ज्यन्वास अचे,
- 4:01–4:06जदे मित्छला अपन्जाब दोनो आमने सामने शान्ती से अपन जीवन जी रहाल अचे.
- 4:07–4:10मन्शाक गरग दिनचर्या और उर्जा एक्दम अलगा ची.
- 4:11–4:13उते भोरे भोर तड़काक चोक महेखाई तची.
- 4:14–4:17मन्शाक पिताक और मुरेठा जे बानल जाई तची,
- 4:17–4:21तब लगगगतची जिना मात पर भोर का सूर्य उजियारी रहल होए.
- 4:21–4:26आ मन्शाक माय हूनाका, जगन सर्दारजी कहे का समबोदित करे चतीन,
- 4:26–4:31तव उते इतेक सने है तची, जो शब्द कोनो सामान्या नाम नही,
- 4:31–4:34बलकी एक ता मीट गीद बुजाई तची.
- 4:34–4:36दूनु पतिपतनी नोक्री करे च्छतीन
- 4:37–4:39आब होरे भोर काच पर निकले जाएच्छतीन
- 4:39–4:42मुदा एक ता बहुत गंभीर बाते चे
- 4:42–4:44जगन मन्शाक माता पिता तूनु गोते
- 4:44–4:46बोरे नोक्री पर निकले च्छतीन
- 4:46–4:49ता मन्शाक दिनक चाभी कख्रा लगेत रहेत चे
- 4:49–4:56इक तेसर हाथ में, उ बच्छिक समपुन दिन्ग दायत्व उकर सुख्दूक, खान्पान, सप्ता उही तेसर वेक्तिप निरभर करे तच्छे.
- 4:56–5:08महानगरग ये एक ता बहुत पैग यादार थाचे जबपन बच्चक लालन पालन के लेल माता पिता के कुनो तेसर वेक्ती पर निरभर रहापर एत चे ये अस्तिती अदूनिक जीवनच्यले क असल जटिलता के सोजा रहा रहा थाचे
- 5:08–5:11यी तेसर हात है थी महुवाक
- 5:11–5:16महुवा एक दाख सबसन चुप और सबसन जरूँरी पात्रा चे
- 5:16–5:20उरीसा से आएल चती आ मन्शा गर में देखरेक काखाज करेच छती
- 5:20–5:28उ एक ता प्रवासी अच्छे जे अद्रिश रूप से एह शहरी एको सिस्टम्क एक ता बोछत मस्वुट भादनात्मक आदारस्तम्भ बनी गेल चतिन.
- 5:28–5:34बिना महुवाक समरपनक, मन्शाक गरक अ दिनचरया कल्पना सोह नहीं केल जासके तचे.
- 5:34–5:38उ उही महानगरी एजीवनक नेपत्थ्यक अस्ली नाई का जी.
- 5:39–5:43ये ते सबसे भेसी मोन के चुबई वाला बात्त, महुवाक अपन अवस्ता आचे.
- 5:44–5:45महुवाक उमेर भेसी नहीं आचे.
- 5:46–5:50कता कनुसार, अपन गाँमे रही ते, तो अपनो कख्रो कोरा काच चे लिते.
- 5:50–5:54मुदा एते यो स्वयम एक ता बचीक डाएत्व उठार रहला चे,
- 5:54–5:59आपन भालपन के पाचा चोडिक, ओएक ता आया, एक ता अभीभावक बनी गे लची.
- 5:59–6:02इपंक्ती प्रवासी काज करे वला लोकनिक,
- 6:02–6:08उही हेरायल, बालपन, त्याग, अजीवन कख़्फर संगरस कब बहुत मार्मिक गदा कहेते चे.
- 6:08–6:12महुवाक तींचर्या एक्दम बनल बनायल अव्यस्त ची.
- 6:12–6:20बोरे मन्शा के उठाएप, उकर केश बनाक, प्रेम सदूजुटी भानध, दूद गरम करब, असानच्खन गासक पारक में लजाएप.
- 6:20–6:23इस सबता महुवाग जिमवारी अछी.
- 6:23–6:26मन्शाक माई पिता जक्ठन दरी नोकरी से नहीं गुरती,
- 6:26–6:30तावत मन्चा पूरा देन महुवाक आचर में इक्दम सुरक्षिद भीतेई तची.
- 6:30–6:36महुवा कर लेल एक ता मा, एक ता दोस्त, औक एक ता रक्षक कब हुमिका निभावे तची.
- 6:36–6:39एक ता बहुत गहेर बाबनात्मक जूडा अची.
- 6:39–7:09यक नद्याग बाद़ाई तची तची वो देश तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची त�
- 7:09–7:11ताल्ज्या नुकायल रहेते थाची
- 7:11–7:13इपुरा व्याख्या हम्रा सबके अन्त में
- 7:13–7:15एक तापैग सोच में दाली दे थाची
- 7:15–7:17इच्वचाः गावल गेल, और्या गीत
- 7:17–7:19अखिर कखर कता कहते थाची
- 7:19–7:21की इओही प्रवासी लोकनीग कता आची
- 7:21–7:26अवही प्रवासी लोकनी कता आची, जे बर बर शहर के एक कही सद दर्वाजाग पाचा,
- 7:26–7:31अपन जीवन के पीडा, अपन भाल पन, और अपन संसक्रिती के चुपाची,
- 7:31–7:36इवही अनाम बाल पात्र सब के कता आची, जे दोसर के गर के दीपक जर्वेत अची,
- 7:36–7:48वो बवागा वो बवागा वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो
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नमशकार, एही व्याख्या में हम्रा सब गजेंद्र ताकृव्र जीक लिखल एक तब बर सुन्दर मार्मेक आगेहेर कता बाल गुरूपर चर्चा करव. इखनो सादारन कता नहीं अची बलकी इप महान नगर को ही चोड-चोड-बात आजीवन को ही यधार्थ के सोजा रखे तची जक्रा हम्रा सब प्रायव अंदेखा कडदेट ची एक तएहन कता जट-चोड-चोड-खटना जीवन कपेग दरषन करा देट ची ता आओ हम्रा सब एहमे प्रवेष करी, आब वुजबाक प्र्यास करी, जे ई मूल कता आसल मे हम्रा सब के की सिखवेता चे? जा एही कताख पात्राक बात करी, ता एहमे दूटा मूल नाम आँजी, अम आम वन्शा. सोचोत तटव, तुनो नाम इत्तेक छोट अची जे कागस पर लिखल जायता आदा पाती में अंटी जै, मुदा इ छोट-छोट-बाल पात्र अपन सहज्जता सेंकता एहन, पहेग बात कही जाता ची, जक्रा बरका-बरका पोथी से हो कहत-कहत, तब देकार भजाता थाची, मने ताकी जाताची, पईक पए ग्रन्त जे बाध सब श्पष्ट नेग कपावे तची, औई बच्चा सब पन जीवन क उदारन सब जादे तची. इग कताख खास्यत छी जे चोट-चोट-सुख्ष्मता में समपुन्ताक कदर्षन करवैताचे इक ताख पडदा उठाई तची देशक राजदानी दिल्लेस इक ताईहन पएग आवास्या परीसर जकर भीच में एक ता गासक पार कचे आइइ शहर ता हम्रा सबजनेच इहन अची जदे सब कियो कतो नकतो सा आईलचे ये ये ये आपन बवाँशी जीवनक अगटाग चलगट रही तचे ये महानगरग प्रवासी जीवनक एक दम केंद्र बिन्दू अचे. आब जखन एही पएग पएग बिल्टिंके बाहर से देखल जाए तचे, तचे साब किछ एक के सन लगे तचे. इं महानग्रक प्रवासी जीवनक एक दम केंद्र बिन्दू अचे. आब जक्ञन एही पएग पएग बिल्टिंके बाहर से देखल जाई तचे, तचे साब किछ एक्के सन लगे तचे. एक दम सम्रूप. एक रंके मकान, इक्के सन बालकनी और इक्के सन दरवज्जा लगब जैना सब ता फ्लैट जोवा भाई जखन तफ्ड़ा चे शेहरी करनके इक्ता बहुत पयग विषेष्ता आचे जता बाहरी रूप से कुनो भिन्नता नहीं देखाई तचे तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा था थी आप दर्वाजा थी आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आप दर्वाजा तब आ जदे कंक्रीटक पाच्जा बिन्नबिन लोक संस्क्रती सास लैईचे. आव तनी आगु बरही आदेखी जे भीटर असल में की चली रहा लाची. एही बिल्टिंक के तेस्रा महला पर जे फ्लात आची औही में स्वैम मित्हिला वसाइत आची. एए आची उकर गर. मित्हिला वस्टाइताची. इए आची उकर गर. दिल्ली कर उही कोलाहल आपा दापिक भीच इप्लाट अक्ता चोट चिन गाम कर प्रतिरुप बनी गे लची. इदेखाई रहा लची जे लोग कपन माटी सा कतेख दरी दूर चली जाए, अपन संस्क्रिति असंकार के हिर्देस लगाक नोधाम पर सह्यो एक तर नोगाम बसाहे लेतची. अमक गर एक भी प्रक वाथ्यावरन के चाब बात करी, तो उते चूलिपर अरभाचाउलक बहात बनाई टची. बर्खा दिन में तर्वा तिल्कोरग गन्द पूरा गर में पस्रल रहेताची जिस सीदे मित्लक गामक याद दिया देताची और सब से मदूर बाज जे, एमक माएक मूसा खसाइत मेत्ली लोरिक सुर सूर सूनल जासके तची अदा एक दोसर दून्या बसेत अथे, अदा एक बसेत अथे पन्जाब, इम मन्शाक गर अची. एक ता आवासी ये परिसर में कचना दूटा बिल्कुल अलगलक संस्क्रिती समनान्तर रूप से चली रहा लजे, इस सम्प्वेव्रन मित्लक विष्व्द गरेलू पर्वेशक प्रतिने देथ्तो करेता ची. आप टीक वोकर गरस निकल कद सामनेवला ब्लोग दिस्ताक। उता एक ता दोसर दून्या बसेत अचे, उता ए बसेत अचे पंजाब, इम मन्शाग गर ची. इकta आवासी ये परिसर में ककना दूटा बिलकुल अलगलक संसक्रिती समनान्तर रूप से चली रहाल अचे, इतकर बहुत सुन्दर उदाहरन अचे. इए अस्पष्ट करे तचे, जे ई महनगर अनेकता में एक ताक एक ताप पेग ज्यन्वास अचे, जदे मित्छला अपन्जाब दोनो आमने सामने शान्ती से अपन जीवन जी रहाल अचे. मन्शाक गरग दिनचर्या और उर्जा एक्दम अलगा ची. उते भोरे भोर तड़काक चोक महेखाई तची. मन्शाक पिताक और मुरेठा जे बानल जाई तची, तब लगगगतची जिना मात पर भोर का सूर्य उजियारी रहल होए. आ मन्शाक माय हूनाका, जगन सर्दारजी कहे का समबोदित करे चतीन, तव उते इतेक सने है तची, जो शब्द कोनो सामान्या नाम नही, बलकी एक ता मीट गीद बुजाई तची. दूनु पतिपतनी नोक्री करे च्छतीन आब होरे भोर काच पर निकले जाएच्छतीन मुदा एक ता बहुत गंभीर बाते चे जगन मन्शाक माता पिता तूनु गोते बोरे नोक्री पर निकले च्छतीन ता मन्शाक दिनक चाभी कख्रा लगेत रहेत चे इक तेसर हाथ में, उ बच्छिक समपुन दिन्ग दायत्व उकर सुख्दूक, खान्पान, सप्ता उही तेसर वेक्तिप निरभर करे तच्छे. महानगरग ये एक ता बहुत पैग यादार थाचे जबपन बच्चक लालन पालन के लेल माता पिता के कुनो तेसर वेक्ती पर निरभर रहापर एत चे ये अस्तिती अदूनिक जीवनच्यले क असल जटिलता के सोजा रहा रहा थाचे यी तेसर हात है थी महुवाक महुवा एक दाख सबसन चुप और सबसन जरूँरी पात्रा चे उरीसा से आएल चती आ मन्शा गर में देखरेक काखाज करेच छती उ एक ता प्रवासी अच्छे जे अद्रिश रूप से एह शहरी एको सिस्टम्क एक ता बोछत मस्वुट भादनात्मक आदारस्तम्भ बनी गेल चतिन. बिना महुवाक समरपनक, मन्शाक गरक अ दिनचरया कल्पना सोह नहीं केल जासके तचे. उ उही महानगरी एजीवनक नेपत्थ्यक अस्ली नाई का जी. ये ते सबसे भेसी मोन के चुबई वाला बात्त, महुवाक अपन अवस्ता आचे. महुवाक उमेर भेसी नहीं आचे. कता कनुसार, अपन गाँमे रही ते, तो अपनो कख्रो कोरा काच चे लिते. मुदा एते यो स्वयम एक ता बचीक डाएत्व उठार रहला चे, आपन भालपन के पाचा चोडिक, ओएक ता आया, एक ता अभीभावक बनी गे लची. इपंक्ती प्रवासी काज करे वला लोकनिक, उही हेरायल, बालपन, त्याग, अजीवन कख़्फर संगरस कब बहुत मार्मिक गदा कहेते चे. महुवाक तींचर्या एक्दम बनल बनायल अव्यस्त ची. बोरे मन्शा के उठाएप, उकर केश बनाक, प्रेम सदूजुटी भानध, दूद गरम करब, असानच्खन गासक पारक में लजाएप. इस सबता महुवाग जिमवारी अछी. मन्शाक माई पिता जक्ठन दरी नोकरी से नहीं गुरती, तावत मन्चा पूरा देन महुवाक आचर में इक्दम सुरक्षिद भीतेई तची. महुवा कर लेल एक ता मा, एक ता दोस्त, औक एक ता रक्षक कब हुमिका निभावे तची. एक ता बहुत गहेर बाबनात्मक जूडा अची. यक नद्याग बाद़ाई तची तची वो देश तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची तची त� ताल्ज्या नुकायल रहेते थाची इपुरा व्याख्या हम्रा सबके अन्त में एक तापैग सोच में दाली दे थाची इच्वचाः गावल गेल, और्या गीत अखिर कखर कता कहते थाची की इओही प्रवासी लोकनीग कता आची अवही प्रवासी लोकनी कता आची, जे बर बर शहर के एक कही सद दर्वाजाग पाचा, अपन जीवन के पीडा, अपन भाल पन, और अपन संसक्रिती के चुपाची, इवही अनाम बाल पात्र सब के कता आची, जे दोसर के गर के दीपक जर्वेत अची, वो बवागा वो बवागा वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो