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मैथिलीक_विद्रोही_इतिहास_आ_विदेह_आंदोलन.mp4

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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hi (0.678127)
Duration
1:54
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  1. 0:00–0:05मैथिली साहित्यक नुकायल समानान्तर इतिहास पर एक्ता तवरिट सारची
  2. 0:05–0:17आप सोचु की हैते, जा आहाक अस्ली विद्रोही इतिहास के पैग-पैग संस्त्ता सब नुकादे, अबाद में एक्ता दिजिटल आन्दोलन अख्रा वापस दुन्याक सोजा लाबई.
  3. 0:17–0:23पहल्बात मेठलिक मूलजरी आप्वाम सबारम सताबदिक चर्या पद्मेची
  4. 0:23–0:27जे आसल में बोद्भिख्षू लोकनेक एक्ता विद्रोही लोक गीच्छल
  5. 0:27–0:36मुद़ भेल की जे मुख्यद्हराक इतिहास कार सब महान लोग कवी विद्ध्यापती के बादक एक्ता दरबारी संस्क्रित लेखख के संग मिला देलक.
  6. 0:36–0:44माने भूजु जना कुनो सड़कक विद्रोही कवी के राजाक दरबारी मुन्षी बना का इतिहास बदल्देल गेल हो.
  7. 0:44–0:52तो सर इदमनकारी प्रभाव बहुत पेगजल की बाशा कचनो कुनो सीमा में बान्धल रही सकईता ची एक दम नहीं.
  8. 0:52–0:57मैत्हली कोनो चोट मोट बोली नहीं, बलकी निपालक मल्लराजा सिल्ला का,
  9. 0:57–1:02असमा बंगाल दरी भाजल जाईवाला दिक्ता विशाल समपर कब हाँशाचल.
  10. 1:02–1:05मुदा साहित्या अकाद्मी जका संस्ता सब,
  11. 1:05–1:09एक रहा अहा साहित्यक दिजितल रोबिनहुड कही सकच्छी,
  12. 1:09–1:12जिस संस्त्खत पहरेदार सब तै करेच्छल,
  13. 1:12–1:15जि की चफत अकी नहीं, अगर दिवार नाग्ग का,
  14. 1:15–1:18इ आंदोलन प्राछीन तिरहुता अगर दिवार नाग्ग का,
  15. 1:18–1:23अबन्दी सब बच्वाके लेल, दो हाँजार इस्वी में विदेह दिजितल आन्दोलन का शुर्वात भेल,
  16. 1:24–1:27एक रा आहा साहित्यक दिजितल रोबिनहुड कही सकत्ची,
  17. 1:27–1:30जिस संस्त्थागत पहरेदार सब तै करे चल,
  18. 1:30–1:31जिक की चबत अकी नहीं,
  19. 1:31–1:38अखर दिवार नागख का इआन्दोलन प्राचीन तिरहुता लिपी आधारो पोठी के जिटल करहे लची
  20. 1:38–1:42संगे हाँशे पर राखल गे लेखख लोकने के नव मच्दा रहे लची
  21. 1:42–1:45इसमानानतर इतिहास साव सावबित करहे तची
  22. 1:45–1:48जे मेठली कोनो कुलीन वर्ग के जागीर नहीं
  23. 1:48–1:51बलकी लोग प्रतिरोदा अदिजिटल क्रान्ती सबनल
  24. 1:51–1:54एक ता जेए अजीवन्त भाशा चे.

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मैथिली साहित्यक नुकायल समानान्तर इतिहास पर एक्ता तवरिट सारची आप सोचु की हैते, जा आहाक अस्ली विद्रोही इतिहास के पैग-पैग संस्त्ता सब नुकादे, अबाद में एक्ता दिजिटल आन्दोलन अख्रा वापस दुन्याक सोजा लाबई. पहल्बात मेठलिक मूलजरी आप्वाम सबारम सताबदिक चर्या पद्मेची जे आसल में बोद्भिख्षू लोकनेक एक्ता विद्रोही लोक गीच्छल मुद़ भेल की जे मुख्यद्हराक इतिहास कार सब महान लोग कवी विद्ध्यापती के बादक एक्ता दरबारी संस्क्रित लेखख के संग मिला देलक. माने भूजु जना कुनो सड़कक विद्रोही कवी के राजाक दरबारी मुन्षी बना का इतिहास बदल्देल गेल हो. तो सर इदमनकारी प्रभाव बहुत पेगजल की बाशा कचनो कुनो सीमा में बान्धल रही सकईता ची एक दम नहीं. मैत्हली कोनो चोट मोट बोली नहीं, बलकी निपालक मल्लराजा सिल्ला का, असमा बंगाल दरी भाजल जाईवाला दिक्ता विशाल समपर कब हाँशाचल. मुदा साहित्या अकाद्मी जका संस्ता सब, एक रहा अहा साहित्यक दिजितल रोबिनहुड कही सकच्छी, जिस संस्त्खत पहरेदार सब तै करेच्छल, जि की चफत अकी नहीं, अगर दिवार नाग्ग का, इ आंदोलन प्राछीन तिरहुता अगर दिवार नाग्ग का, अबन्दी सब बच्वाके लेल, दो हाँजार इस्वी में विदेह दिजितल आन्दोलन का शुर्वात भेल, एक रा आहा साहित्यक दिजितल रोबिनहुड कही सकत्ची, जिस संस्त्थागत पहरेदार सब तै करे चल, जिक की चबत अकी नहीं, अखर दिवार नागख का इआन्दोलन प्राचीन तिरहुता लिपी आधारो पोठी के जिटल करहे लची संगे हाँशे पर राखल गे लेखख लोकने के नव मच्दा रहे लची इसमानानतर इतिहास साव सावबित करहे तची जे मेठली कोनो कुलीन वर्ग के जागीर नहीं बलकी लोग प्रतिरोदा अदिजिटल क्रान्ती सबनल एक ता जेए अजीवन्त भाशा चे.

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