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- 0:00–0:04नमस्कार, आए हम सब एक ता एहन असादारन गाता पर गब करव,
- 0:04–0:08जे आजादिक बाद के क्रामिद मितलाक उतल पुतल से भरल इतिहास के,
- 0:08–0:10बहुत निग जका समेटे तची.
- 0:10–0:13सच पुषुं दा एक कोनो सादारन जीवनी नहीं अची,
- 0:13–0:18बलकी यी पुरा समाजक आतमाक एक ता एक दम सपच्ट दर्पन अची
- 0:18–0:20जक्दिष प्रशाद मन्डलक जीवन असाहित्तिया
- 0:20–0:23ता सब सब पहले यी प्रष्नाउट हैता चे
- 0:23–0:28कोना कोनो एक गोताक जीवन पूरा चेत्रक समाजक
- 0:28–0:31अराजनीतिक विकासक पुर्न प्रतिदिम्ब बनी सकेते थाचे
- 0:31–0:34मतलब कुना एक ता बेक्तिक संगर्स में
- 0:34–0:37पुरा समाजक संगर्स जल की जाई थाची
- 0:37–0:40इस सूनी में कनी आस्चर जनक लगे ताची
- 0:40–0:42मुदाक इपुर्नता सत्ते ची
- 0:42–0:46तच्छलू सब से पहल महतपूर्न महागेख दिस बड़ज्छी
- 0:46–0:49जते एक ता नव राश्ट्रक उदेक संगे-संगे
- 0:49–0:51एक ता जीवन अग जन भहर अल्चल
- 0:51–0:55तच्छल। सब से पहल महत्पूर्न महागेक दिस बड़च्छी
- 0:55–0:58जते एक ता नव राश्ट्रक उदेक संगे संगे
- 0:58–1:00एक ता जीवन अग जन भहर अलचल
- 1:00–1:03आब एताई जे सब सरोचक बात आची
- 1:03–1:06से एजे जग्दीष प्रशाद मंडल जी के जन्म
- 1:06–1:11जदे एक ता नव राश्ट्रक उदेक संगे संगे एक ता जीवनक जन्बहरहल चल.
- 1:11–1:17आब एताई जे सब सर रोचक बात आची से एजे जग्दिष प्रशाद मंदल जी के जन्म,
- 1:17–1:22तीक उही सीमःपभेल जदे एक दिस अंगरेजी शासनक अंद भहरहल चल
- 1:22–1:26अदोसर्दिस लोक्तान्त्रिक भविश्षक पाएग प्रतिग गयाचल.
- 1:26–1:28उनीस्वस्थान्तालिस महेंकर जन्म,
- 1:28–1:30तीकोकर तीन साल बाद,
- 1:30–1:32उनीस्वस्थास में पिताग निदन,
- 1:32–1:34अप फिर उनीस्वस्थास्थब़री
- 1:34–1:36राजनतिक चेतनाक गेरा विकास.
- 1:36–1:41इस्तिति उईसमा एक मुल तनाव के बहुत नीक जकन दर्षावे तची
- 1:41–1:45जते एक दिस राश्ट्रियस्तर पर तिरंगा फेरायल जार अहल चल
- 1:45–1:49उते दोसर दिस गामक वास्तविकता अखनो अकाल
- 1:49–1:53कथोर जाती वेवस था आदूरी आजादी से गेरल चल
- 1:53–2:00अजादि तबहेकी गल चल मुदा लोक खलेल रोटी, शिक्षा अन्याय अखन्दरी बहुत दूर चल.
- 2:00–2:10तव आब आगु बड़ेच्छे और देखेच्छे जे इसव ग्रामीन मित्छला अर खासक जंजारपूर छेट्रक भेर्मागाँ क्या वास्तविक्ता में कोना बडलल.
- 2:10–2:17ये दे बूजबाक मुख्यबात यी आची जे भेर्मा गाम कोनु कल्पना शील सुन्दर वार रोमान्तिक जगान आचल.
- 2:17–2:24इग कडा परिष्श्रम शिक्षा पावेक लाल्सा आख कतोर जातिया विभाजनक एक ता जीवन्त केंध्र चल.
- 2:24–2:32इए उ जमीन चल, जते आसल जीवनक पसीना आमात्ख गंद्ध्खोंजे चल, इएक ता अतिहासिक खिचाओ चल.
- 2:32–2:33अज़ाँ उचल
- 2:33–2:34उज़ाँ उचल
- 2:34–2:35उज़ाँ उचल
- 2:35–2:36उचल उचल
- 2:36–2:37उचल
- 2:37–2:38उचल
- 2:38–2:39उचल
- 2:39–2:40उचल
- 2:40–2:41उचल
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- 2:57–2:58उचल
- 2:58–2:59उचल
- 2:59–3:02बूदान अंदूलनजे का पैएग प्रेया सिधो भेल
- 3:02–3:04जेकर उद्धेश गरीब के
- 3:04–3:06जमीन के एक चथा हिस्टा लेनाई चल
- 3:06–3:09मुदा अकसर गामग इस्टर पर
- 3:09–3:11इन नीक विचार सिधो कानुनी दावपेच
- 3:11–3:14अ जमीनी विवादक शिकारभज
- 3:14–3:15ब्रमग कारन बनीगेल
- 3:15–3:20मतलब, जे योजना लाव के लेल चल, अहो उलजन बनी गेल.
- 3:20–3:25एक ता विषिष्ट व्रित्तान्त, आही संगर्ष के बहुत श्पष्ट रूप सां, हम्रा सब के सोजा राखे तचे.
- 3:26–3:30मंडल जी के चचेरा भाई, गोनोर मंडल को उकष्ट दाई,
- 3:30–3:35जवर समबरल यात्रा जे उ कोसिक बादी में दूभी चुकल आपन पूरनका पैत्रिक जमीन,
- 3:35–3:38हरेनाही के वापस पावक लेल केने चला.
- 3:38–3:43इखेबल माटिक लेल नेचल, इपसीदा सीदी अस्तित बचेबक लडाएचल.
- 3:43–3:46इजे लगतार चली रहल क्रिसी संकत चल,
- 3:46–3:50उस्वट्के दशकक उठल पुठल के लेल रस्ता तध्यार के लिक
- 3:50–3:52इक ता नवदशक के शुर्वार
- 3:52–3:56इत एक ता अस्पष्ट अंतर उभरी कशोजा अवाई तची
- 3:56–4:00एक दिस पुरानस्तापित सामन्ती अ राजनी तिक सता ची
- 4:00–4:08अदो सर्दिस, पानी, भिजली, अउचित मस्दूरी लेल संगर्ष करेत जमीनी किसानक बड़ेत क्रोद है ची.
- 4:08–4:12आब लोक भूजी रहल चल जे चुप रहला सकोनो काज नी चलत.
- 4:12–4:17यही बड़्लाउ के एक ता अदबूछ चोट सन उदारन बेर्मा गाँ मेही देखपा में आबहतषी,
- 4:17–4:21जते स्थानिये दुर्गा पुजा के कोना अयोजित केल जाए,
- 4:21–4:25ताहे पर दूई पीदिक वीच भ्यल विवाद गाँ के बाईट दिलक,
- 4:25–4:26गाँके बाद्तिलक
- 4:27–4:31अदेखे देखेद समाजक प्रभाव एक ता नवजवा पेडी के हाथ में आविगल
- 4:32–4:33इखेबल पूजा के गपने चल
- 4:33–4:37इसत्ता अविचार सा जुडल एक ता पैग समाजिक बडलाव चल
- 4:38–4:39आब आप जाए ची
- 4:39–4:44उनेज़््श्ट्ट्ट के अटिहासिक चूनाव पर जे जमीनी राजनितिक जाग्रूकन के लेल,
- 4:44–4:47एक तब बहुत पयग मोर साभित भेल.
- 4:47–4:49द्यान देभा योगे बात यह अच्छी,
- 4:49–4:53जे कोना उई समयक राजनितिक एक आदिकार तूटी रहल चल.
- 4:53–5:02कोंगरस्विरोदी लहर उठल अच्छात्रतता किसान सबख सक्रियताक बल पर वामपन्ती अ समाज्वादी सबख जीत भेल
- 5:02–5:05गत्बन्दन सरकार सब उभरी कसामने आएल
- 5:05–5:10इस सब यवस्ताक खिलाफ जना क्रोष के एक ता नोव अकार दैरहल चल
- 5:10–5:16मन्दल्जीक राजनिती में सीदे जुडाव औही राद के इस्टेशन्वाला बैसार संभाल.
- 5:16–5:21सक्री इस्टेशन्पर नव निरवाचित सानसद भूगेंद्रजी संभाल गब्षप,
- 5:21–5:23हुनका वीतर एक्ता आगजका काम के लक.
- 5:23–5:33बूगेंद्रजीग एक दम अस्पस्ट कहब चिल, जे अस्ली राजनिती उही अच्छी, जे भूख्मरी आ अस्चिक्षा के दूर करे, इगाप हूनका मन में बैसी गेल.
- 5:33–5:39भोगेंदरी जी गाम कग कारे करता सबख के लेल, अस्पस्ट आख क्रान्तिकारी कदम ताई के लें.
- 5:39–5:44जना सब सब शपहील कदम चल गाम में पाटी बनेनाए, आए एक संगे भाईस कब वोजन करव,
- 5:44–5:49जाईसा चुवाचु जका गंभीर भीमारी के समाज सा जर सतोरल जासके.
- 5:49–5:55उही के बाद तोल महलाक समस्यापर विचार आब लोक स्टर पर एक जुट भोका विरोथ प्रदर्षन करव.
- 5:55–5:57इसब एक दम जमीनी काज चल.
- 5:57–5:59वान्ची तक आबाज सहित्तमे गुजे लगेल
- 5:59–6:02ए निरनायक विचार एक दम स्पस्ट करए तची
- 6:02–6:05जे मन्डल जी अपनो अनुवव के
- 6:05–6:08मैठली सहित्तमे एहन्तरही समाहित केलनिस
- 6:08–6:10जे उ पूरा तरह से
- 6:10–6:13मस्टूर आव वन्चित वर्ग पर केंद्रित बहुगेल
- 6:13–6:18वंदल जी अपनो अनुबव के मैठली साहित्ते में एहन तरहाई समाहित केलनिस,
- 6:18–6:23जे उ पुरा तरह से मस्दूर अ वंचित वरग पर केंद्रित भोगेल.
- 6:23–6:26हुंकर पात्र कोनो दयाक महताज नी चतिन.
- 6:26–6:31उ सोचे चतिन, सहिच चतिन, तरक करिच चतिन, गिरे चतिन,
- 6:31–6:38अउठीक समदान तकए चथिन, हुँँका सभी के बहुत सम्मान अगरीमा संग प्रस्थुत के लगेल.
- 6:38–6:43इचर्चा अंत में हमरा सब के एक ता बहुत गेहर विचार पर चोडी जाईत अची.
- 6:43–6:49तने क सोचु जे साहित ते कोना उही लोकनिक लेल अन्तिम अटिहाँसिक साखश बनी जाएत आची,
- 6:49–6:54जक्रा पहने अपन बात कहबाग वल्लिखबाग अदिकार केहीो नहीं भेटल चले.
- 6:54–7:02तब आप ज़़, तब आप वो प्रद़, तब आप वो प्रद़, तब वो बग़, तब बग़, तब बग़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ़़, तब
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नमस्कार, आए हम सब एक ता एहन असादारन गाता पर गब करव, जे आजादिक बाद के क्रामिद मितलाक उतल पुतल से भरल इतिहास के, बहुत निग जका समेटे तची. सच पुषुं दा एक कोनो सादारन जीवनी नहीं अची, बलकी यी पुरा समाजक आतमाक एक ता एक दम सपच्ट दर्पन अची जक्दिष प्रशाद मन्डलक जीवन असाहित्तिया ता सब सब पहले यी प्रष्नाउट हैता चे कोना कोनो एक गोताक जीवन पूरा चेत्रक समाजक अराजनीतिक विकासक पुर्न प्रतिदिम्ब बनी सकेते थाचे मतलब कुना एक ता बेक्तिक संगर्स में पुरा समाजक संगर्स जल की जाई थाची इस सूनी में कनी आस्चर जनक लगे ताची मुदाक इपुर्नता सत्ते ची तच्छलू सब से पहल महतपूर्न महागेख दिस बड़ज्छी जते एक ता नव राश्ट्रक उदेक संगे-संगे एक ता जीवन अग जन भहर अल्चल तच्छल। सब से पहल महत्पूर्न महागेक दिस बड़च्छी जते एक ता नव राश्ट्रक उदेक संगे संगे एक ता जीवन अग जन भहर अलचल आब एताई जे सब सरोचक बात आची से एजे जग्दीष प्रशाद मंडल जी के जन्म जदे एक ता नव राश्ट्रक उदेक संगे संगे एक ता जीवनक जन्बहरहल चल. आब एताई जे सब सर रोचक बात आची से एजे जग्दिष प्रशाद मंदल जी के जन्म, तीक उही सीमःपभेल जदे एक दिस अंगरेजी शासनक अंद भहरहल चल अदोसर्दिस लोक्तान्त्रिक भविश्षक पाएग प्रतिग गयाचल. उनीस्वस्थान्तालिस महेंकर जन्म, तीकोकर तीन साल बाद, उनीस्वस्थास में पिताग निदन, अप फिर उनीस्वस्थास्थब़री राजनतिक चेतनाक गेरा विकास. इस्तिति उईसमा एक मुल तनाव के बहुत नीक जकन दर्षावे तची जते एक दिस राश्ट्रियस्तर पर तिरंगा फेरायल जार अहल चल उते दोसर दिस गामक वास्तविकता अखनो अकाल कथोर जाती वेवस था आदूरी आजादी से गेरल चल अजादि तबहेकी गल चल मुदा लोक खलेल रोटी, शिक्षा अन्याय अखन्दरी बहुत दूर चल. तव आब आगु बड़ेच्छे और देखेच्छे जे इसव ग्रामीन मित्छला अर खासक जंजारपूर छेट्रक भेर्मागाँ क्या वास्तविक्ता में कोना बडलल. ये दे बूजबाक मुख्यबात यी आची जे भेर्मा गाम कोनु कल्पना शील सुन्दर वार रोमान्तिक जगान आचल. इग कडा परिष्श्रम शिक्षा पावेक लाल्सा आख कतोर जातिया विभाजनक एक ता जीवन्त केंध्र चल. इए उ जमीन चल, जते आसल जीवनक पसीना आमात्ख गंद्ध्खोंजे चल, इएक ता अतिहासिक खिचाओ चल. अज़ाँ उचल उज़ाँ उचल उज़ाँ उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल उचल बूदान अंदूलनजे का पैएग प्रेया सिधो भेल जेकर उद्धेश गरीब के जमीन के एक चथा हिस्टा लेनाई चल मुदा अकसर गामग इस्टर पर इन नीक विचार सिधो कानुनी दावपेच अ जमीनी विवादक शिकारभज ब्रमग कारन बनीगेल मतलब, जे योजना लाव के लेल चल, अहो उलजन बनी गेल. एक ता विषिष्ट व्रित्तान्त, आही संगर्ष के बहुत श्पष्ट रूप सां, हम्रा सब के सोजा राखे तचे. मंडल जी के चचेरा भाई, गोनोर मंडल को उकष्ट दाई, जवर समबरल यात्रा जे उ कोसिक बादी में दूभी चुकल आपन पूरनका पैत्रिक जमीन, हरेनाही के वापस पावक लेल केने चला. इखेबल माटिक लेल नेचल, इपसीदा सीदी अस्तित बचेबक लडाएचल. इजे लगतार चली रहल क्रिसी संकत चल, उस्वट्के दशकक उठल पुठल के लेल रस्ता तध्यार के लिक इक ता नवदशक के शुर्वार इत एक ता अस्पष्ट अंतर उभरी कशोजा अवाई तची एक दिस पुरानस्तापित सामन्ती अ राजनी तिक सता ची अदो सर्दिस, पानी, भिजली, अउचित मस्दूरी लेल संगर्ष करेत जमीनी किसानक बड़ेत क्रोद है ची. आब लोक भूजी रहल चल जे चुप रहला सकोनो काज नी चलत. यही बड़्लाउ के एक ता अदबूछ चोट सन उदारन बेर्मा गाँ मेही देखपा में आबहतषी, जते स्थानिये दुर्गा पुजा के कोना अयोजित केल जाए, ताहे पर दूई पीदिक वीच भ्यल विवाद गाँ के बाईट दिलक, गाँके बाद्तिलक अदेखे देखेद समाजक प्रभाव एक ता नवजवा पेडी के हाथ में आविगल इखेबल पूजा के गपने चल इसत्ता अविचार सा जुडल एक ता पैग समाजिक बडलाव चल आब आप जाए ची उनेज़््श्ट्ट्ट के अटिहासिक चूनाव पर जे जमीनी राजनितिक जाग्रूकन के लेल, एक तब बहुत पयग मोर साभित भेल. द्यान देभा योगे बात यह अच्छी, जे कोना उई समयक राजनितिक एक आदिकार तूटी रहल चल. कोंगरस्विरोदी लहर उठल अच्छात्रतता किसान सबख सक्रियताक बल पर वामपन्ती अ समाज्वादी सबख जीत भेल गत्बन्दन सरकार सब उभरी कसामने आएल इस सब यवस्ताक खिलाफ जना क्रोष के एक ता नोव अकार दैरहल चल मन्दल्जीक राजनिती में सीदे जुडाव औही राद के इस्टेशन्वाला बैसार संभाल. सक्री इस्टेशन्पर नव निरवाचित सानसद भूगेंद्रजी संभाल गब्षप, हुनका वीतर एक्ता आगजका काम के लक. बूगेंद्रजीग एक दम अस्पस्ट कहब चिल, जे अस्ली राजनिती उही अच्छी, जे भूख्मरी आ अस्चिक्षा के दूर करे, इगाप हूनका मन में बैसी गेल. भोगेंदरी जी गाम कग कारे करता सबख के लेल, अस्पस्ट आख क्रान्तिकारी कदम ताई के लें. जना सब सब शपहील कदम चल गाम में पाटी बनेनाए, आए एक संगे भाईस कब वोजन करव, जाईसा चुवाचु जका गंभीर भीमारी के समाज सा जर सतोरल जासके. उही के बाद तोल महलाक समस्यापर विचार आब लोक स्टर पर एक जुट भोका विरोथ प्रदर्षन करव. इसब एक दम जमीनी काज चल. वान्ची तक आबाज सहित्तमे गुजे लगेल ए निरनायक विचार एक दम स्पस्ट करए तची जे मन्डल जी अपनो अनुवव के मैठली सहित्तमे एहन्तरही समाहित केलनिस जे उ पूरा तरह से मस्टूर आव वन्चित वर्ग पर केंद्रित बहुगेल वंदल जी अपनो अनुबव के मैठली साहित्ते में एहन तरहाई समाहित केलनिस, जे उ पुरा तरह से मस्दूर अ वंचित वरग पर केंद्रित भोगेल. हुंकर पात्र कोनो दयाक महताज नी चतिन. उ सोचे चतिन, सहिच चतिन, तरक करिच चतिन, गिरे चतिन, अउठीक समदान तकए चथिन, हुँँका सभी के बहुत सम्मान अगरीमा संग प्रस्थुत के लगेल. इचर्चा अंत में हमरा सब के एक ता बहुत गेहर विचार पर चोडी जाईत अची. तने क सोचु जे साहित ते कोना उही लोकनिक लेल अन्तिम अटिहाँसिक साखश बनी जाएत आची, जक्रा पहने अपन बात कहबाग वल्लिखबाग अदिकार केहीो नहीं भेटल चले. तब आप ज़़, तब आप वो प्रद़, तब आप वो प्रद़, तब वो बग़, तब बग़, तब बग़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ़़, तब ब़़, तब ब़़, तब ़़, तब