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दीना-भदरीक_कथा_आ_सलहेसक_धर्मसङ्कट.m4a
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- 0:00–0:05आजुक समिक्शा गजेंद्र ताकूर द्वारा सम्पादित दीना भद्री कतापर केंद्रित अची
- 0:06–0:15मने इजोग्या नगरक, दूता महाबल्षाली मुसहर भाएक वीर्ता, जाज्रक जमीदार क्रूर्ता, अ देवता सलहेशक विवष्ताक गाता थेक
- 0:15–0:23अब बिना कोनो विलंब के हमरा सब के सोजे कताक सन्दचना आप्रवाह पर बात करवाग चाही.
- 0:23–0:24एक दम.
- 0:24–0:31हमर पहल पिंदू एची जे कताक अन्तिम भाग में गतना क्रमक गती बहुत द्रुत बोजाई तची,
- 0:31–0:35जाही से पात्ख कब भावनात्मक जुडाव खन्दित भोसके तच्छे
- 0:35–0:39आहा पन्चम द्याए दिस इशारा कर रहे लची नहीं
- 0:39–0:44आहा पन्चम द्याए जते राजा सलहेस दीना भद्रीक सपना में अबई च्छती
- 0:44–0:48अवूनका कटया बोन में शिकारक लेल बजवैई चत्छी
- 0:48–0:49अवू द्रिष्ष दाईची है
- 0:49–0:52अद्तकर थीक बादक जे द्रिष्ष अची
- 0:52–0:54मने अदे कोनो संगर्ष नहीं अची
- 0:54–0:56सोजे देखाउन गेल अची
- 0:56–0:58जे दीना भद्रीक आत्मा
- 0:58–1:02अपन मामा भहुरन आव मत्र जीतन यादव लक पहुच चुकल आची
- 1:02–1:04अहो! माने सोजे आतमा
- 1:04–1:07एक दम! इक ता बहुत अचानक चलाँंग रह चे
- 1:07–1:10मुदा... मुदा रुकु
- 1:10–1:12हम्रायता एक ता प्रसना चे
- 1:12–1:15की इस समबब नहीं आची
- 1:15–1:17जे लेक्हक जानी भूजी का
- 1:17–1:19मुद्त्युक द्रिष्यके छूडि देलनी?
- 1:19–1:23जानी भूजी का? आहा का की तात परया चे?
- 1:23–1:29माने किचु लेक्ध मुद्युके बहुत रहस्यमै राखः पसंट करे चतिन ने
- 1:29–1:32की एक ता शल्पिक प्रेओग नहीं बहसकेत?
- 1:32–1:33आँ?
- 1:33–1:42जाही सब पुरा द्यान उनकर अन्तिम संसकार जीतन यादव का मित्रता और उही दुखानत प्रभाव पर केंद्रत भहुसा केया.
- 1:42–1:44इएक तर रोचक द्रिष्टिकोंध जरूर अचे.
- 1:44–1:49मुदा, मुदा हम्रा सब के इई सोचबाक आवश्षकता अचे,
- 1:49–1:54जे की इ प्रियोग एही विषेश कताके लेल काज कर रहा लाची
- 1:54–1:57आचा, आहाक लागे तची नहीं कर रहा लाची
- 1:57–2:02नहीं, कारन एही आलेखख का एक ता प्रमुक दूबलता एह आचे
- 2:02–2:08जे एता एक कतात्मक रिक्त स्थान, जे कर हम सब नरेटेव गआप कहेच ची
- 2:08–2:09उ बहुत पएग आचे.
- 2:09–2:11गयाप तो आचे.
- 2:11–2:13देखो पाथक पूरा कताक दोरान,
- 2:13–2:16उही वीर भाई सब कच्वीसा जुडल आचे,
- 2:16–2:19जे पाज पाच मुना कोदारर चलवेच चलाहा.
- 2:19–2:20एक दम,
- 2:20–2:24जे दमब से बभरल जमिन्दार कनक्सिंके मारी कबगा देने चलाहा.
- 2:24–2:38तेक उही ना ता उहीन महाबल शाली नायक कब बिना कोनो संगर्षक सुजे आत्मा रुप में देखा पडब इपातक कलेल एक ता असन्तोश जनक अनुबहव बहुव बहुज़ाई तचे.
- 2:38–2:42मुदा लोक कता में ता अकसर गतना सब द्रुत गती सा होई तचे नहीं.
- 2:42–2:49माने मोखिक परमपरा में लोक लंबा युद्ख द्रुष्षे भेसी परनाम पर दियान देचते.
- 2:49–2:52दीना भद्री मुल्ता हेक ता लोक गाता थेख.
- 2:52–2:57ता आहाक लागे तची, लेक हक मुल्क गती राखब चाहेत चला.
- 2:57–2:58आ, एक दम.
- 2:58–3:02आँ बहुत नीक संदर्ब उठेलू हूं, मोगिक परम्प्राक.
- 3:02–3:06मुदा एक तगा बुजू, मोगिक लोक कता में,
- 3:06–3:09जखन कुनो कता वाचक इग कता कही तचे,
- 3:09–3:12तो अपन स्वर्क उतार चरहाव से,
- 3:12–3:14उग्याप बहर देटचे.
- 3:14–3:16आप शारलिक भाँ भंगी मासों से हो?
- 3:16–3:17भिलकुल.
- 3:17–3:19उ जखन कहाई तची,
- 3:19–3:21जे आब हाई मरी गेल,
- 3:21–3:22उकर बाजबाक शैली,
- 3:22–3:25उते एक तग गहीर माँन पैदा करे तची.
- 3:25–3:28जे द्रुष्षे से बेसी प्रभाँ शाली होई तची,
- 3:28–3:28भुजलिये?
- 3:28–3:36मुदद जगन आहा उही कता के लिखित रूप में प्रस्तूत कराए ची, तकन आहा लग उ कता वाचक खस्वर नही आची.
- 3:36–3:40मने, शब्द के स्वैम अबार उभार उठावे पड़ी तचे.
- 3:40–3:46रिखित रूप में इडिक्त च्थान केवल एक ता खाली पन्जका लगे थची?
- 3:46–3:50हम्रा आब आब आगाक बात पूरन रूपें समज में आवे रहा लगची.
- 3:50–3:58जना कोनो पैग युद्धक गोशना होई, पात्धक अस्त्रष्त्र कजन्कार सुन्वाकलेल प्रतिचारत होई,
- 3:58–4:02आए युद्धक वरननक बदला सीदे शम्शान देखा देल जाए.
- 4:02–4:06इग्दम अब हाईजे माती के नरम कर दे चला,
- 4:06–4:10उनकर एी मान म्रित्तिव पात्खक अपेक्षाके संग नयाय नहीं करता ची.
- 4:10–4:13ताई लेल एह ते हमर सुजाव एची,
- 4:13–4:18जे कताक चर्मूत कर्ष माने, कलामेक्स के स्तापित कर्वाक लेल,
- 4:18–4:22एही कतात्मक रिक्तस्तान के बहरभ नितान्त अवष्षक अची.
- 4:22–4:24माने म्र्त्युक द्रुष्य दिखावल जाय.
- 4:24–4:54आप वीरक म्रित्यों पुड वीरता पुन द्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध
- 4:54–5:24तो हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 5:24–5:28वो दोगा बादीक आत्माक द्रिश्या पाथके रिधे दध्धे
- 5:28–5:31इवास्तों में बहुत प्रभाव शाली द्रिश्या बनी शाके दे
- 5:31–5:32दन्यवाद
- 5:32–5:37आजकन आहा एही अन्तिम संगर्ष के एते विराध बनेवा गब कर रहल ची
- 5:37–5:39तो बवाज़ा बाव शाली दिश्य बनी शाके ते.
- 5:39–5:40दन्यवाद.
- 5:40–5:42आजकन आहा एही अन्तिम संगर्ष के
- 5:42–5:44एते गविराट बनेवा गब करहल ची
- 5:44–5:46ता एते सा हम्रा सब के कताख
- 5:46–5:48तो सर महत्पुन पक्ष्टिस बडवाख
- 5:48–5:50सुत्र बहेते तचे.
- 5:50–5:55अग, उग़ान जर्क जमिन्दार कनक्सिं आ अवकर पतनी भुदनी,
- 5:55–6:01कता कहेत अजे उसब जन्मजात कुडष्छला, बोगन राड़ के मनुक नहीं बुजेच्छला.
- 6:01–6:03अग, उगे वल लालच मेचला.
- 6:03–6:10अग, जान्जर्क जमिन्दार कनक्सिंग आ उकर पतनी भुदनी कता कहेत अची जे उसब जन्मजात क्रूर चला बोगनार के मनुक नहीं भुजे चला.
- 6:10–6:13अग, उके वल लालच मे चला.
- 6:13–6:17अगर जण्मजात क्रूड चला, बोगनार के मनुख नहीं बुजे चला.
- 6:17–6:20आँ, उकेवल लालच मे चला.
- 6:20–6:23एक दम, दीना भद्रीक बलके गब सूनी का,
- 6:23–6:27कनक्सिंख कहेत अची जे बरद सन जोडी हमर खेत में जोता जाए.
- 6:27–6:30तने दूनु भाई के बर्दजक जोद्बा क्योजना
- 6:30–6:35आप मानित भिलाक बाद बूदनी सीदे सले सहुनकर प्रान मागी लेत अचे
- 6:35–6:39मुदा एते दूबलता की आची आँहा के विचार सा
- 6:39–6:42देखो हमरेक्ता प्रतिवाद आचे पहले
- 6:42–6:46तथा क्यानुसार, उसब अस्सिमित दन आ आप्हिंकार सब भरेल चतिन,
- 6:46–6:51कि इच्चरम क्रुदता दिना बद्रीक न्याए प्रियता के उबारभाग लेल सहीं नहीं आची?
- 6:51–6:57माने शोषक पून रुपे कालो होए, तन नायक उज्वल प्रकाष भेसी चम कै तची?
- 6:57–7:03अग, एक्रा बेसी मनोबज्यानिक बना का, कि हम सब कताक सब पष्ट्ता के कम तने कर देप.
- 7:03–7:10को ना, इटरक अकसर लोग कता सब में देल जाई तच्ये, जे दूश्त केवल दूश्त च्ये,
- 7:10–7:17मुदा जखन आहा एक रा एक ता गमभीर साहितिक आलेक्ह क्रूप में प्रस्तूत करएत छी,
- 7:17–7:20तई दूर्बलता बहुजाई तछे.
- 7:20–7:20कोना?
- 7:20–7:25कारड कनक्सिंग आ बूदनेक क्रूरता केवल क्रूर हे बाकलेल दिखाओल गील चे.
- 7:25–7:29केवल उपष दूगुन्न करबाक लेल एतिक जिद्दी बहुज आना
- 7:29–7:30आँ...
- 7:30–7:32सीदे प्रान माग ले नहीं
- 7:32–7:33आँ...
- 7:33–7:35इपात्र के एक आयामी बना देई तची
- 7:35–7:37पाथक के लागग तची
- 7:37–7:41जे इपात्र सब केवल खलामेक्स दھके बाक लेल रचल गेल जे लेल जे थिन
- 7:41–7:44मैं हुंकर अपन कुनो अंत्रिक भध बहे नहीं अच्याई.
- 7:44–7:49एक दम, केवल आँकारक के लेल कुनो एटिक भध काज नहीं कराई तच्ये.
- 7:50–7:52उकर पाचु कुनो असुरक्षा अवश्य अवश्य तच्ये.
- 7:53–7:55ता आई आख कहबाक अरत अच्यी,
- 7:55–7:59जे एक आयामी खलनायक बिना खिचल गेल रबर जका आचए
- 7:59–8:00रबर जका आचए
- 8:00–8:06आचए, मने जखन आच़ा उक्रा चोडब, ता उकोनो चोट नहीं करत, बस एक ता मामुली आवाज हैत
- 8:06–8:07अगो!
- 8:07–8:10मुदा जखन खलनाय कोनो गंबहीर मजबूरी होई तजी
- 8:10–8:12तजी उ रबर कसी का खिचल जाई तजी
- 8:12–8:14आद उखन जे संगर्ष होई तजी
- 8:14–8:16उ पाथके जगजोरी देई तजी
- 8:16–8:18बहुत सुन्दर उप्मा अची
- 8:18–8:20इएक दम छीक
- 8:20–8:25बिना खिचल, रवर्सा अगात नहीं केल जासके ता ची.
- 8:25–8:27तो सुजाव की हो ये ते तै?
- 8:27–8:31हमर सुजाव यी अची, जे विरोदी पात्रक लेल,
- 8:31–8:34एक ता विषिष्ट अगम्दीर प्रेरना,
- 8:34–8:37जे क्रा हम सब हाई स्टेक्स कहे ची,
- 8:37–8:39उस थापित केल जाए.
- 8:39–8:42मने, हुंका भीतर कोनो मजबूरी दिक हावल जाए?
- 8:42–8:47हाँ, जाही सा हुंकर चरम कदमक वास्तविकता बुजल जाए.
- 8:47–8:53क्रोरता जक्हन मजबूरी सा उप्जे तची, तची तची नो भेसी भ्यावावावा जाए तची.
- 8:53–8:59तव एक ख़ाक संदरव में उ खिचल गिल रवर कोना तेयार काईल जा सके तची
- 8:59–9:03आ, की कोनो चोट सन परिवरतन इबहस कै तची
- 9:03–9:07जे हुंकर साम राज़पर मन्राएत कोनो खत्रा देखावल जाए
- 9:07–9:08जे ना की
- 9:08–9:20कल्प्ना करू, जे कताक शुर्वाते में इसंकेत दिल जाए, जे जानज्रक जमींदारी अखन बाहर सात भवे आची, मुदा भीतर सा उक्रपर कोनो पैग रेना ची.
- 9:20–9:25औ, औ, वा, कनक्सिंकर कोनो फसल लगातार बरबाद बहर रहा लची?
- 9:25–9:28इक्द्छन बूदनिक जे विवार अची उहो बेसी तार्किग भाँजाईत
- 9:28–9:30इक्द्छन बूदनिक खुड़ केवल इद्टाईग
- 9:30–9:32प्रद्छाए तच्छी
- 9:32–9:34इही हताशाक कारन उदीना भद्डीजका महाबल शाली लोग के
- 9:34–9:36बडदजका खटावर चाहे तच्छी
- 9:36–9:39ताकी कम समय में भेसी काज बहुत सके
- 9:39–9:43आ, अकर जमिंदारी दूबभासा बची सके
- 9:43–9:47इवकर केवल क्रूरता नहीं इस सरवाईवल अच्छे
- 9:47–9:52आ, तकन भूदनिक जे विवार अच्छी उहो भेसी तारकिग भूँजाईत
- 9:52–9:58इक्दम तक्खन भूदनिक क्रोद केवल इर्श्यावा अप्मानक प्रतिषोद नहीं रही जाएत
- 9:58–10:05जक्खन दीना भद्री हुंकर प्रस्ताव तुक्रावेच्चती तब भूदनिक के अपन जमिन्दारी समापत हो दिखाए देच्चे
- 10:05–10:14जखन उ सलेहेस लग जगी तख हो साम राजक रक्षा का अन्तिम हताश अस्त्रक रूप में प्रान मागगगी तख ही.
- 10:14–10:20इवास्तब में बहुत गंभीर परिप्रेखष छगी, जग खलनायक भैभी तख ही उबेसी क्षतर नाग होगी तख ही.
- 10:20–10:25इक दम आ इग ख़ाक दूंद के जथार तवादी बनादेत
- 10:25–10:29आजगन आहा खलनायक के इतिक मजबूत कारन दोदैट ची
- 10:29–10:33तर राजा सलेशक विवस्ता से हो उत्बे गंभीर भो जाई तची
- 10:33–10:34सही कहली एख
- 10:34–10:37एटेसा हम्रा सब के तेसर बिंदू आवाई तची
- 10:37–10:42राजा सलेशक दर्म संकत अविवस्ता का चित्रन कताक केंद्र बिन्दु फीख,
- 10:42–10:46मुदा एक्रा पुण रुपन भावनात्मक दरातल पर विखसित नहीं केल अची.
- 10:46–10:49इग्कताक सब से मार्मिक बिन्दु बहुश खेत अची,
- 10:49–10:52जाएक्रा सही दंख से पलडवित केल जाएता
- 10:52–10:57देखु अद्ध्याए चारी में जगन बुदनी प्रान मागेते इच्छी
- 10:57–11:01तद सलहेस आँ कै मुट्षित भोजाए च्छती
- 11:01–11:03आँ मुट्षित होई च्छतीन
- 11:03–11:09अग कत्ठाकार सीदे तोर पर कही देज चतिन जे देवता वचनक हारल चला.
- 11:09–11:16मुदा हमरा मन में इप प्रशन उठाए ते ची की इई अस्पष्ट उदबजोषना परयापत नही आची,
- 11:16–11:19जे बाग्यक आंगा देवता से हो विवष्च चति.
- 11:19–11:23माने, आहाके लागेत आची जे इत्बे काफी आची?
- 11:23–11:27आआ, माने लेखग दवारा यी बात अस्पष्ट कही देला पर,
- 11:27–11:30की इश्वरिये गरीमा वा रहेसे नहीं बनल रहेत आची?
- 11:30–11:33जा हम सब हुनक द्वंद के भेसी खोलब,
- 11:33–11:36तो उ रहेसे खन्दित नहीं बोजायते.
- 11:36–11:40आहाक प्रष्नज जायेज अची जे इश्वर्ये गर्मा बनल रहबाक चाही,
- 11:40–11:46मुदा साहित्तिक एक ता मुल्बूथ सिद्धान्त अची जे कहु नहीं देखाओ.
- 11:46–11:48माने, शो डोंट्तेल.
- 11:48–11:49आप उता अची है.
- 11:49–11:59आप आप पच्ट्मद्याय में जखन सलहेस दीना भद्री के सपना में बजाविज जधिन तकशन उही चल में उनकर मानसिक पीडा बिलकुगाया बच्टिए.
- 11:59–12:01अगरा महसुस नहीं करावल गेल अची
- 12:01–12:05एक दम, मुर्चित हेना एक ता शारीरेक प्रतिक्रिया आची
- 12:05–12:08मुदा अकर बादक मानसिक पीडा कते आची
- 12:08–12:14आप पन्चम द्याय में, जखन सलहेस दीना भद्री के सपना में बजाविज जखिन
- 12:14–12:22तखश्ध उईच्छल में हुंकर मान्सिक पीडा बिल्कुल गाया बच्छे ओईटा सादारन निर्देश जका लागत अचे.
- 12:22–12:29माने लेखख उविवष्ताक तत्तदार अच्छत्छिन मुदा अनुबव नुकार अच्छत्छिन पात्ख्सा.
- 12:29–12:39जे देवतान न्याय से प्रेम कराईता चे, उजगन अपन प्रीएवीर के नव्रित्योक मुह में दھके लिए रहाल चे, तो उकर शब्द उतिक सपात कोना भही सा कै टा चे.
- 12:39–12:43सही काली है, इत देवताक लेल सब से पएगट्रास दिया चे.
- 12:43–12:49ताही लेल, हमर सुजाव अच्छे जे देवताक विवस्ताक के केवल तत्यक रूप में लिखबाक बडला,
- 12:49–12:53उक्र व्ष्पनाक द्रिष्च्च्य में हुँखर संबादक माध्यम सा दिखावल जाए.
- 12:53–12:57जाए सा पाथक के सलहेस के रदैक उच्छट पताहत महसुस हुए.
- 12:57–13:01इक्दम उ आपना वचन अन्यायब्यत तक भीच पीस रहल चेत
- 13:01–13:05मुदा एक्रा उ सपनाक दिष्च में कोना प्रस्तृत कोल जाए,
- 13:05–13:09की देवता अपना मोहिसा कहो तु जे हम विवष्ची,
- 13:09–13:11उ तबहुत अस्वाब हविक लागत.
- 13:11–13:41अग, तख़न हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 13:41–13:45अदिना बद्री क्ष्टी के नजरन्दाज को देच्छती
- 13:45–13:49उक इच्छती जे जखन आहाक आशिर्वाद अची हे राजा,
- 13:49–13:53तक कोनो अदिन्खार हम्रा सब के नजरा सकताची
- 13:53–14:23वो देवड़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग �
- 14:23–14:32अग, और ये सम्पून कता के केवल एक ता परमपरागत लोक गाता से उटाक अग, एक ता शाश्वत सहित्तिक रच्ना में परनत कोडेत.
- 14:32–14:41सत कहली ए, अप अप उग्यानिक विस्तारक छम्ता ए कता में आची, जक्रा अख्चन तरी प�रा तरे दोहन न एक लगेल अचे.
- 14:41–14:42यक दम सही
- 14:42–14:46तजग हमरा सब आजुक एज समपुन विमर्ष्छ के समेट अप चाही
- 14:46–14:49तजग हमरा सब तीन ता मुख्ध सुजाव पर बात केलों
- 14:49–14:50हाँ
- 14:50–14:53पहल, गटनाक्रमग गती के नियन्त्रित करेएत
- 14:54–14:56कतट्या बोनक मित्यों के जोडी का
- 14:56–14:59कताख चर्मोद कर्ष्के पूरा के नाई
- 14:59–15:01जैसो नारेटिव ग्याप भरल जास्सके
- 15:01–15:06तो सर, कनक्सिंग अ बुधनिक खुड्ड्दा पाचु एक ता थोस प्रेरना
- 15:06–15:10वा हाई स्टेक्स जोडी का रूँगर चरीट्र के गेराई देनाई
- 15:10–15:16मने बिना खिचल रवर जका नहीं, बलको हुंका एक अठाश विरोदी के रुप में स्थापित के नहीं.
- 15:16–15:25अट्ते सर सपनाग दिष्छ में राजा सलहे सक आन्तरिक दूंद अव्विवस्ता के हुंकर समवादक अबहावक माद्ध्यम से उबार नहीं.
- 15:25–15:32अ, कहु नहीं देखाओ सिद्धानतक पालन करेद, उही द्रिश्व में ज्यमातिक अईरनी अनने.
- 15:32–15:35इतीनो बिन्दु वास्तो में अपस में जुडल अची.
- 15:35–15:38यदि एक्रा दियान मेराखी का आलेक में संसोजन केल जाए,
- 15:38–15:42तई एक ख़ा पाथक्कर मोन पर एक ता उमिट चाप चोडत्त।
- 15:42–15:47एक तम आख़ख दुक्ठान्त प्रभाव पोडन रूपेन मुख्रित भोसकत।
- 15:47–15:53हमर य आग्रह आची, जे य आलेखख के जे समपादक वा रच्यता चती,
- 15:53–15:56उ एही रच्नात्मक सुजाओ सब पर विचार करत.
- 15:56–16:02आहा आपन कताक य सनशोदित रूप, हम्रा सबक लग वापस पता सके ची.
- 16:02–16:07ताकी भविश्छमे उही पर आवर गेहरिका सविमर्ष्कल जासकेद.
- 16:07–16:13हम्रा सब के आवाक साहितिक विकास यात्रक हिस्वा बन्वा में बहुत प्रसन्नता हैत.
- 16:13–16:19जगन पात्रक मनोविग्यान अग्धनाक सन्रचना एक दो सरक पूरक भजायत छी,
- 16:19–16:22तो उ रच्ना पाटख के भीतर दरी जगजोरी देता ची
- 16:22–16:28यह आहांका कठाक प्रतेक द्रिष्या उही पुरनतादरी पहुची चुकल अची
- 16:28–16:31विचार अवष्षकरव नमशकार
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आजुक समिक्शा गजेंद्र ताकूर द्वारा सम्पादित दीना भद्री कतापर केंद्रित अची मने इजोग्या नगरक, दूता महाबल्षाली मुसहर भाएक वीर्ता, जाज्रक जमीदार क्रूर्ता, अ देवता सलहेशक विवष्ताक गाता थेक अब बिना कोनो विलंब के हमरा सब के सोजे कताक सन्दचना आप्रवाह पर बात करवाग चाही. एक दम. हमर पहल पिंदू एची जे कताक अन्तिम भाग में गतना क्रमक गती बहुत द्रुत बोजाई तची, जाही से पात्ख कब भावनात्मक जुडाव खन्दित भोसके तच्छे आहा पन्चम द्याए दिस इशारा कर रहे लची नहीं आहा पन्चम द्याए जते राजा सलहेस दीना भद्रीक सपना में अबई च्छती अवूनका कटया बोन में शिकारक लेल बजवैई चत्छी अवू द्रिष्ष दाईची है अद्तकर थीक बादक जे द्रिष्ष अची मने अदे कोनो संगर्ष नहीं अची सोजे देखाउन गेल अची जे दीना भद्रीक आत्मा अपन मामा भहुरन आव मत्र जीतन यादव लक पहुच चुकल आची अहो! माने सोजे आतमा एक दम! इक ता बहुत अचानक चलाँंग रह चे मुदा... मुदा रुकु हम्रायता एक ता प्रसना चे की इस समबब नहीं आची जे लेक्हक जानी भूजी का मुद्त्युक द्रिष्यके छूडि देलनी? जानी भूजी का? आहा का की तात परया चे? माने किचु लेक्ध मुद्युके बहुत रहस्यमै राखः पसंट करे चतिन ने की एक ता शल्पिक प्रेओग नहीं बहसकेत? आँ? जाही सब पुरा द्यान उनकर अन्तिम संसकार जीतन यादव का मित्रता और उही दुखानत प्रभाव पर केंद्रत भहुसा केया. इएक तर रोचक द्रिष्टिकोंध जरूर अचे. मुदा, मुदा हम्रा सब के इई सोचबाक आवश्षकता अचे, जे की इ प्रियोग एही विषेश कताके लेल काज कर रहा लाची आचा, आहाक लागे तची नहीं कर रहा लाची नहीं, कारन एही आलेखख का एक ता प्रमुक दूबलता एह आचे जे एता एक कतात्मक रिक्त स्थान, जे कर हम सब नरेटेव गआप कहेच ची उ बहुत पएग आचे. गयाप तो आचे. देखो पाथक पूरा कताक दोरान, उही वीर भाई सब कच्वीसा जुडल आचे, जे पाज पाच मुना कोदारर चलवेच चलाहा. एक दम, जे दमब से बभरल जमिन्दार कनक्सिंके मारी कबगा देने चलाहा. तेक उही ना ता उहीन महाबल शाली नायक कब बिना कोनो संगर्षक सुजे आत्मा रुप में देखा पडब इपातक कलेल एक ता असन्तोश जनक अनुबहव बहुव बहुज़ाई तचे. मुदा लोक कता में ता अकसर गतना सब द्रुत गती सा होई तचे नहीं. माने मोखिक परमपरा में लोक लंबा युद्ख द्रुष्षे भेसी परनाम पर दियान देचते. दीना भद्री मुल्ता हेक ता लोक गाता थेख. ता आहाक लागे तची, लेक हक मुल्क गती राखब चाहेत चला. आ, एक दम. आँ बहुत नीक संदर्ब उठेलू हूं, मोगिक परम्प्राक. मुदा एक तगा बुजू, मोगिक लोक कता में, जखन कुनो कता वाचक इग कता कही तचे, तो अपन स्वर्क उतार चरहाव से, उग्याप बहर देटचे. आप शारलिक भाँ भंगी मासों से हो? भिलकुल. उ जखन कहाई तची, जे आब हाई मरी गेल, उकर बाजबाक शैली, उते एक तग गहीर माँन पैदा करे तची. जे द्रुष्षे से बेसी प्रभाँ शाली होई तची, भुजलिये? मुदद जगन आहा उही कता के लिखित रूप में प्रस्तूत कराए ची, तकन आहा लग उ कता वाचक खस्वर नही आची. मने, शब्द के स्वैम अबार उभार उठावे पड़ी तचे. रिखित रूप में इडिक्त च्थान केवल एक ता खाली पन्जका लगे थची? हम्रा आब आब आगाक बात पूरन रूपें समज में आवे रहा लगची. जना कोनो पैग युद्धक गोशना होई, पात्धक अस्त्रष्त्र कजन्कार सुन्वाकलेल प्रतिचारत होई, आए युद्धक वरननक बदला सीदे शम्शान देखा देल जाए. इग्दम अब हाईजे माती के नरम कर दे चला, उनकर एी मान म्रित्तिव पात्खक अपेक्षाके संग नयाय नहीं करता ची. ताई लेल एह ते हमर सुजाव एची, जे कताक चर्मूत कर्ष माने, कलामेक्स के स्तापित कर्वाक लेल, एही कतात्मक रिक्तस्तान के बहरभ नितान्त अवष्षक अची. माने म्र्त्युक द्रुष्य दिखावल जाय. आप वीरक म्रित्यों पुड वीरता पुन द्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध्ध तो हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� वो दोगा बादीक आत्माक द्रिश्या पाथके रिधे दध्धे इवास्तों में बहुत प्रभाव शाली द्रिश्या बनी शाके दे दन्यवाद आजकन आहा एही अन्तिम संगर्ष के एते विराध बनेवा गब कर रहल ची तो बवाज़ा बाव शाली दिश्य बनी शाके ते. दन्यवाद. आजकन आहा एही अन्तिम संगर्ष के एते गविराट बनेवा गब करहल ची ता एते सा हम्रा सब के कताख तो सर महत्पुन पक्ष्टिस बडवाख सुत्र बहेते तचे. अग, उग़ान जर्क जमिन्दार कनक्सिं आ अवकर पतनी भुदनी, कता कहेत अजे उसब जन्मजात कुडष्छला, बोगन राड़ के मनुक नहीं बुजेच्छला. अग, उगे वल लालच मेचला. अग, जान्जर्क जमिन्दार कनक्सिंग आ उकर पतनी भुदनी कता कहेत अची जे उसब जन्मजात क्रूर चला बोगनार के मनुक नहीं भुजे चला. अग, उके वल लालच मे चला. अगर जण्मजात क्रूड चला, बोगनार के मनुख नहीं बुजे चला. आँ, उकेवल लालच मे चला. एक दम, दीना भद्रीक बलके गब सूनी का, कनक्सिंख कहेत अची जे बरद सन जोडी हमर खेत में जोता जाए. तने दूनु भाई के बर्दजक जोद्बा क्योजना आप मानित भिलाक बाद बूदनी सीदे सले सहुनकर प्रान मागी लेत अचे मुदा एते दूबलता की आची आँहा के विचार सा देखो हमरेक्ता प्रतिवाद आचे पहले तथा क्यानुसार, उसब अस्सिमित दन आ आप्हिंकार सब भरेल चतिन, कि इच्चरम क्रुदता दिना बद्रीक न्याए प्रियता के उबारभाग लेल सहीं नहीं आची? माने शोषक पून रुपे कालो होए, तन नायक उज्वल प्रकाष भेसी चम कै तची? अग, एक्रा बेसी मनोबज्यानिक बना का, कि हम सब कताक सब पष्ट्ता के कम तने कर देप. को ना, इटरक अकसर लोग कता सब में देल जाई तच्ये, जे दूश्त केवल दूश्त च्ये, मुदा जखन आहा एक रा एक ता गमभीर साहितिक आलेक्ह क्रूप में प्रस्तूत करएत छी, तई दूर्बलता बहुजाई तछे. कोना? कारड कनक्सिंग आ बूदनेक क्रूरता केवल क्रूर हे बाकलेल दिखाओल गील चे. केवल उपष दूगुन्न करबाक लेल एतिक जिद्दी बहुज आना आँ... सीदे प्रान माग ले नहीं आँ... इपात्र के एक आयामी बना देई तची पाथक के लागग तची जे इपात्र सब केवल खलामेक्स दھके बाक लेल रचल गेल जे लेल जे थिन मैं हुंकर अपन कुनो अंत्रिक भध बहे नहीं अच्याई. एक दम, केवल आँकारक के लेल कुनो एटिक भध काज नहीं कराई तच्ये. उकर पाचु कुनो असुरक्षा अवश्य अवश्य तच्ये. ता आई आख कहबाक अरत अच्यी, जे एक आयामी खलनायक बिना खिचल गेल रबर जका आचए रबर जका आचए आचए, मने जखन आच़ा उक्रा चोडब, ता उकोनो चोट नहीं करत, बस एक ता मामुली आवाज हैत अगो! मुदा जखन खलनाय कोनो गंबहीर मजबूरी होई तजी तजी उ रबर कसी का खिचल जाई तजी आद उखन जे संगर्ष होई तजी उ पाथके जगजोरी देई तजी बहुत सुन्दर उप्मा अची इएक दम छीक बिना खिचल, रवर्सा अगात नहीं केल जासके ता ची. तो सुजाव की हो ये ते तै? हमर सुजाव यी अची, जे विरोदी पात्रक लेल, एक ता विषिष्ट अगम्दीर प्रेरना, जे क्रा हम सब हाई स्टेक्स कहे ची, उस थापित केल जाए. मने, हुंका भीतर कोनो मजबूरी दिक हावल जाए? हाँ, जाही सा हुंकर चरम कदमक वास्तविकता बुजल जाए. क्रोरता जक्हन मजबूरी सा उप्जे तची, तची तची नो भेसी भ्यावावावा जाए तची. तव एक ख़ाक संदरव में उ खिचल गिल रवर कोना तेयार काईल जा सके तची आ, की कोनो चोट सन परिवरतन इबहस कै तची जे हुंकर साम राज़पर मन्राएत कोनो खत्रा देखावल जाए जे ना की कल्प्ना करू, जे कताक शुर्वाते में इसंकेत दिल जाए, जे जानज्रक जमींदारी अखन बाहर सात भवे आची, मुदा भीतर सा उक्रपर कोनो पैग रेना ची. औ, औ, वा, कनक्सिंकर कोनो फसल लगातार बरबाद बहर रहा लची? इक्द्छन बूदनिक जे विवार अची उहो बेसी तार्किग भाँजाईत इक्द्छन बूदनिक खुड़ केवल इद्टाईग प्रद्छाए तच्छी इही हताशाक कारन उदीना भद्डीजका महाबल शाली लोग के बडदजका खटावर चाहे तच्छी ताकी कम समय में भेसी काज बहुत सके आ, अकर जमिंदारी दूबभासा बची सके इवकर केवल क्रूरता नहीं इस सरवाईवल अच्छे आ, तकन भूदनिक जे विवार अच्छी उहो भेसी तारकिग भूँजाईत इक्दम तक्खन भूदनिक क्रोद केवल इर्श्यावा अप्मानक प्रतिषोद नहीं रही जाएत जक्खन दीना भद्री हुंकर प्रस्ताव तुक्रावेच्चती तब भूदनिक के अपन जमिन्दारी समापत हो दिखाए देच्चे जखन उ सलेहेस लग जगी तख हो साम राजक रक्षा का अन्तिम हताश अस्त्रक रूप में प्रान मागगगी तख ही. इवास्तब में बहुत गंभीर परिप्रेखष छगी, जग खलनायक भैभी तख ही उबेसी क्षतर नाग होगी तख ही. इक दम आ इग ख़ाक दूंद के जथार तवादी बनादेत आजगन आहा खलनायक के इतिक मजबूत कारन दोदैट ची तर राजा सलेशक विवस्ता से हो उत्बे गंभीर भो जाई तची सही कहली एख एटेसा हम्रा सब के तेसर बिंदू आवाई तची राजा सलेशक दर्म संकत अविवस्ता का चित्रन कताक केंद्र बिन्दु फीख, मुदा एक्रा पुण रुपन भावनात्मक दरातल पर विखसित नहीं केल अची. इग्कताक सब से मार्मिक बिन्दु बहुश खेत अची, जाएक्रा सही दंख से पलडवित केल जाएता देखु अद्ध्याए चारी में जगन बुदनी प्रान मागेते इच्छी तद सलहेस आँ कै मुट्षित भोजाए च्छती आँ मुट्षित होई च्छतीन अग कत्ठाकार सीदे तोर पर कही देज चतिन जे देवता वचनक हारल चला. मुदा हमरा मन में इप प्रशन उठाए ते ची की इई अस्पष्ट उदबजोषना परयापत नही आची, जे बाग्यक आंगा देवता से हो विवष्च चति. माने, आहाके लागेत आची जे इत्बे काफी आची? आआ, माने लेखग दवारा यी बात अस्पष्ट कही देला पर, की इश्वरिये गरीमा वा रहेसे नहीं बनल रहेत आची? जा हम सब हुनक द्वंद के भेसी खोलब, तो उ रहेसे खन्दित नहीं बोजायते. आहाक प्रष्नज जायेज अची जे इश्वर्ये गर्मा बनल रहबाक चाही, मुदा साहित्तिक एक ता मुल्बूथ सिद्धान्त अची जे कहु नहीं देखाओ. माने, शो डोंट्तेल. आप उता अची है. आप आप पच्ट्मद्याय में जखन सलहेस दीना भद्री के सपना में बजाविज जधिन तकशन उही चल में उनकर मानसिक पीडा बिलकुगाया बच्टिए. अगरा महसुस नहीं करावल गेल अची एक दम, मुर्चित हेना एक ता शारीरेक प्रतिक्रिया आची मुदा अकर बादक मानसिक पीडा कते आची आप पन्चम द्याय में, जखन सलहेस दीना भद्री के सपना में बजाविज जखिन तखश्ध उईच्छल में हुंकर मान्सिक पीडा बिल्कुल गाया बच्छे ओईटा सादारन निर्देश जका लागत अचे. माने लेखख उविवष्ताक तत्तदार अच्छत्छिन मुदा अनुबव नुकार अच्छत्छिन पात्ख्सा. जे देवतान न्याय से प्रेम कराईता चे, उजगन अपन प्रीएवीर के नव्रित्योक मुह में दھके लिए रहाल चे, तो उकर शब्द उतिक सपात कोना भही सा कै टा चे. सही काली है, इत देवताक लेल सब से पएगट्रास दिया चे. ताही लेल, हमर सुजाव अच्छे जे देवताक विवस्ताक के केवल तत्यक रूप में लिखबाक बडला, उक्र व्ष्पनाक द्रिष्च्च्य में हुँखर संबादक माध्यम सा दिखावल जाए. जाए सा पाथक के सलहेस के रदैक उच्छट पताहत महसुस हुए. इक्दम उ आपना वचन अन्यायब्यत तक भीच पीस रहल चेत मुदा एक्रा उ सपनाक दिष्च में कोना प्रस्तृत कोल जाए, की देवता अपना मोहिसा कहो तु जे हम विवष्ची, उ तबहुत अस्वाब हविक लागत. अग, तख़न हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अदिना बद्री क्ष्टी के नजरन्दाज को देच्छती उक इच्छती जे जखन आहाक आशिर्वाद अची हे राजा, तक कोनो अदिन्खार हम्रा सब के नजरा सकताची वो देवड़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग बज़ाग � अग, और ये सम्पून कता के केवल एक ता परमपरागत लोक गाता से उटाक अग, एक ता शाश्वत सहित्तिक रच्ना में परनत कोडेत. सत कहली ए, अप अप उग्यानिक विस्तारक छम्ता ए कता में आची, जक्रा अख्चन तरी प�रा तरे दोहन न एक लगेल अचे. यक दम सही तजग हमरा सब आजुक एज समपुन विमर्ष्छ के समेट अप चाही तजग हमरा सब तीन ता मुख्ध सुजाव पर बात केलों हाँ पहल, गटनाक्रमग गती के नियन्त्रित करेएत कतट्या बोनक मित्यों के जोडी का कताख चर्मोद कर्ष्के पूरा के नाई जैसो नारेटिव ग्याप भरल जास्सके तो सर, कनक्सिंग अ बुधनिक खुड्ड्दा पाचु एक ता थोस प्रेरना वा हाई स्टेक्स जोडी का रूँगर चरीट्र के गेराई देनाई मने बिना खिचल रवर जका नहीं, बलको हुंका एक अठाश विरोदी के रुप में स्थापित के नहीं. अट्ते सर सपनाग दिष्छ में राजा सलहे सक आन्तरिक दूंद अव्विवस्ता के हुंकर समवादक अबहावक माद्ध्यम से उबार नहीं. अ, कहु नहीं देखाओ सिद्धानतक पालन करेद, उही द्रिश्व में ज्यमातिक अईरनी अनने. इतीनो बिन्दु वास्तो में अपस में जुडल अची. यदि एक्रा दियान मेराखी का आलेक में संसोजन केल जाए, तई एक ख़ा पाथक्कर मोन पर एक ता उमिट चाप चोडत्त। एक तम आख़ख दुक्ठान्त प्रभाव पोडन रूपेन मुख्रित भोसकत। हमर य आग्रह आची, जे य आलेखख के जे समपादक वा रच्यता चती, उ एही रच्नात्मक सुजाओ सब पर विचार करत. आहा आपन कताक य सनशोदित रूप, हम्रा सबक लग वापस पता सके ची. ताकी भविश्छमे उही पर आवर गेहरिका सविमर्ष्कल जासकेद. हम्रा सब के आवाक साहितिक विकास यात्रक हिस्वा बन्वा में बहुत प्रसन्नता हैत. जगन पात्रक मनोविग्यान अग्धनाक सन्रचना एक दो सरक पूरक भजायत छी, तो उ रच्ना पाटख के भीतर दरी जगजोरी देता ची यह आहांका कठाक प्रतेक द्रिष्या उही पुरनतादरी पहुची चुकल अची विचार अवष्षकरव नमशकार