MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

SADEHA 35 मैथिली_सम्मेलनमे_रामवरणक_नेपाली_भाषण_आ_पोशाक.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.650317)
Duration
14:23
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:06विमर्श विविद परीप्रिक्षक के कारेक्रम देबेट में आहाक स्वागत अचि।
  2. 0:06–0:12ता आई हम्रा सब एक ता बद रोचक, मने एक ता समवेदन्शील मुद्दा पर चर्चा के रल ची।
  3. 0:12–0:13बिल्कल
  4. 0:13–0:18आई मुद्दा निपाल के पहल राष्ट्रपती डुक्तर रामवरन यादव के लोक अचे
  5. 0:18–0:23विशेश रुब सा काट्मान्दू में जे अन्तराष्ट्रीये मेठली सम्मिलन भेल चल
  6. 0:23–0:25उते हुंकर सह भागिताक विश्यमें
  7. 0:25–0:30आप जते यो आपन मात्री भाशा मेठली चोडग का अचानक नेपाली में बाशन देलनी
  8. 0:30–0:37आआ आप केवल बाशाई ने पहरन में से हो पारंपर एक दोती कुरताक जगा दोरा सुर्वाल अद्धाका तोपी पहरनी
  9. 0:37–0:41जेकी सुजिद कुमार जाक आलेक्ह कमोख्य केंद्र बिन्दू अच्ये.
  10. 0:41–0:42सहीं कहली आहां.
  11. 0:42–0:45ता आएक बहस केंद्र यह जी,
  12. 0:45–0:47जेकी कोनो राश्ट्र द्यक्ष द्वारा,
  13. 0:47–0:51आपन मात्र भाशाक अंतर राश्ट्र्या सम्मिलन में,
  14. 0:51–0:54राश्ट्रिया बाशा अप्षाक कुप्योख करनाई
  15. 0:54–0:57आपन मुल सान्सक्रतिक पहचान से मुमोडनाई थेक
  16. 0:57–1:01वाफिर इप पदग गरीमा और राश्ट्रिया एक ताक लेल
  17. 1:01–1:04एक ता आवश्षक कुटनितिक कदम चल
  18. 1:04–1:06हमरत इए असपष्ट माननाय आची
  19. 1:06–1:12जि राश्ट्र पतिक इग कदम आपन भाशिक अ सान्स्क्रितिक ज़िक प्रति उपेख्षा थिक.
  20. 1:12–1:19इएक ता निरासा जनक कदम चल, जे-जे समावेशी गंतन्त्रेक मुल भावनाके आहत करे तची.
  21. 1:19–1:26आँ, आँ, के प्रस्तावना गंभीर जरूर आजी, मुदा हम इविशे पूनता भिनद्रिष्टी कोंषे देकेच्छी.
  22. 1:26–1:31रास्ट्रा देख्षक रूप में दुक्तर यादव के इगदम कुनो सांस्क्रितिक उपेख्षा नहीं चल.
  23. 1:31–1:39हमर் तर्क यह आची जे यी नवगतित रास्ट्रक निर्मान और एक ता अद्तेंत समवेदन शील काल में, कुतनीतिक अवश्षकताक निर्वाहन चल.
  24. 1:39–1:42इग कुतनीतिक अवश्षकता सुन्वा में नीक लगाई तची,
  25. 1:42–1:49मुदा देखु, यदार्त में एकर प्रभाव उही समुदाये पर की परएत अची, ताई पर विचार कर अब आवश्यक अची.
  26. 1:49–1:56मैत्फिल समुदाये क लेल यए अख्त्यन्त निरासा जनक की अच्छल, पहिल बात तइ कोनो सादारन सरकारी उद्खातन नहीं चल?
  27. 1:56–2:00आद्राश्वे मेठली सम्मेलन चल हम भूजी रहाल ची.
  28. 2:00–2:01एक दम.
  29. 2:01–2:03एहन विषिष्ट मनच पर,
  30. 2:03–2:05जटे दून्या बहरेक मेठल,
  31. 2:05–2:09अपन भाशा कुछ सब मनावे लेल एक द्रिद भेल चला,
  32. 2:09–2:11अथे नेपाली बासा में भाशन देना है,
  33. 2:11–2:22अव सरक सरवता प्रतिकूल चल, आलेक में साहित्यकार दोक्तर रेवती रमन लालक बयान एक ता बद्मारमिक यातार्थ दिस इशारा करतची,
  34. 2:22–2:27मुदा दोक्तर लालक बयान ता तनी हम्रा एबिन्दूर राके दिय,
  35. 2:27–2:29अपना बाज़्ाग बाज़्ा के त्याग दे बुजलिये।
  36. 2:29–2:31दोक्तर लालक असुरक्षाक बावनावाला तिपनी बावुक अवष्ष्य अची
  37. 2:31–2:33मुदा की इटार्किक अची
  38. 2:33–2:35हम्रा इई नहीं भी सर बाख चाही
  39. 2:35–2:39अद्र लालक असुरक्षाक बहावना वाला तिपनी बहवुक अवश्य अची
  40. 2:40–2:43मुदग की तार्किक अची
  41. 2:44–2:46हमरा इण नहीं भी सर बाख चाही
  42. 2:47–2:49आलेख में इस पष्ट अची
  43. 2:50–2:52जे राश्ट पती बनवासे पूर्व
  44. 2:52–2:54मुदा की यी तारकि का ची?
  45. 2:55–2:56हमरा यी नहीं भी सरभाग चाही
  46. 2:57–2:57जे आलेख में
  47. 2:58–2:59यी सपष्ट ची
  48. 2:59–3:01जे राश्टपती बन्वासे पूर्व
  49. 3:01–3:02दोक्तर यादव
  50. 3:02–3:05मैठली आन्दोलनक मुख्य समर्थक चला.
  51. 3:05–3:06हा, उत चला है.
  52. 3:06–3:09अख्रा अख्रा अख्रा आपन भाशा से ग्रिना या भाई किया एक भाजाएत
  53. 3:09–3:11एकर उतर असुरक्षा नहीं आएच
  54. 3:11–3:14एकर उतर संस्तागत डाईत तो आची
  55. 3:14–3:19मने आहा कही रहल ची जे पद पहुच का मात्री भाशा भिसर जे नाई डाईत तो थेक
  56. 3:19–3:24एकर उतर असुरक्शा नहीं आईच, एकर उतर संस्थागत दाईत तो आची.
  57. 3:24–3:30मने आहा कही रहल ची जे पद पद पहुचका मात्री भाशा भिसर जे नाई दाईत तो थेक.
  58. 3:30–3:31नहीं, भिसर नाई नहीं.
  59. 3:31–3:35मुदा जकन आहा सरवोच्च समविदानिक पद पहुचे ची,
  60. 3:35–3:42ता आहा राम वरन यादव वा केवल इक ता मदेसी वा मेठिल से उपर उठका नेपालक राश्ट्र पती बनी जाएची.
  61. 3:42–3:54नेपाल जगा देश में जदे एक रोग बाजल जाए तची उते राश्टर द्ध्शक अदिकारिक उपस्तिती पुरन देश के समबोदित करे तची कोनो एक समवुदाए के नहीं
  62. 3:54–4:00मुदा वंच के संदरभख के कि कहवाहा सम्मेलनक उही बातावरनक कलपना करू
  63. 4:00–4:05नेपालक ततकालिन संस्क्रती मंत्री मिनेंद्र रीजाल मंच्पर आवेच्छतिन
  64. 4:05–4:11और इस पश्ट कहिच्छतिन, जे हमरा मैठली नहीं भाजी आवाईत छे, तटैं नेपाली में बजेच्छे.
  65. 4:11–4:15रहा, आई एक ता एमान दार स्विकार उक्ती चल हुंकर दिस्सा.
  66. 4:15–4:25भिल्कुल, मुदा इग कतेक पाएक विदंपना आची, जे संसक्रती मंत्री, जे मैठल नहीं चती, उआपन असमरत्ता व्यक्त कोरहल चती, जे हम्रा मैठली नहीं अवेत आची.
  67. 4:25–4:27मुदा जे वेक्ती सुयम मेतल चती,
  68. 4:27–4:30जेक्रा नीक जोको मेतली अवेद चनी,
  69. 4:30–4:32उ अपन भाशाक प्रयोग क्याने को रहल चती.
  70. 4:32–4:36क्याकता, मंत्री और रास्ट्पतिक भूमिका में अंथर होई तचे.
  71. 4:36–4:40प्राद्द्यापक चंद्रमोहन्जा पद्वाक निराशा एक दम जाएज अची एते
  72. 4:40–4:45उकहे चतीजे जकन कानूनन कोनो भाशा बाजा प्रतिबंदित नहीं आची
  73. 4:45–4:49ता अपन भाशा कियाने भाजल जाए, जए मंत्री अपन सीमा सुईकार का
  74. 4:49–4:52अप्रतेख्ष्रूप्सा मंज्क्ष्मान कोसके चति
  75. 4:52–4:55तराश्ट्र्पति आपन सांस्क्रितिक संपदाके
  76. 4:55–4:57उदे कियागने प्रदषित क्यालनी
  77. 4:57–4:59हम एक्रा दोसर्रूप में देखे चि
  78. 4:59–5:03आहां मंत्री और राश्ट्र्पतिग भूमिका मेंजे माले कनतर अची
  79. 5:03–5:14अगर नजर अंदास कर रहल ची, मंत्री सरकारक एक ता राजनेति कंग्धिक उ जन्ता के समबोदित कर अच्छे, मुदा राश्ट्र पती स्वयम राश्ट्र का साख्षात प्रतिरुप होए चती.
  80. 5:14–5:31इक्रा एक्ता द्रिश्टान्त सबूशू जैना कोनो सरवोच न्यायलैक न्यायादिश जकन इजलास मे बैसेत अची, तो उआपन निजी विचार वा अपन गामक परमपरास अपर उठीकः केवल समविदानक भाशा बाजाईत अची.
  81. 5:31–5:36इद्तटस्त्ता हुनका व्यक्ती साँस्तामे परिवर्तित करेद च्यक
  82. 5:36–5:41रूक। रूक। के न्याए देशा रास्ट्रपती पुर्नता समान च्यती
  83. 5:41–5:44आँम्रा आख ये न्याय देशक द्रुश्टानत तनी जतिल लगे तच
  84. 5:44–6:14अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ�
  85. 6:14–6:17तो उगी दिन उकर स्थान पर दोरा सुर्वाल अद्धाका तोपी के दारन करनाई कुनो सादारन बात नहीं चल.
  86. 6:17–6:19मुदा और रास्ट्रे पोशाक थे.
  87. 6:19–6:21रास्ट्रे पोशाक.
  88. 6:21–6:23अटिदासिक रूप सब उजु, तो तो उगे बाशाक देखाए.
  89. 6:23–6:39अग, दोरा सुर्वालक बात, इक्दम आव एक राए सा देखे, दोक्टर यादवक न्यमित अपारमपरिक पहरन दोती कुरता अगम्चा चल, उइ दिन अकर स्थान पर दोरा सुर्वाल अद्धाका तोपी के दारन करनाई कुनो सादारन बात नहीं चल.
  90. 6:39–6:41मुदा और रास्ट्रे पोषाक थेख
  91. 6:41–6:42रास्ट्रे पोषाक
  92. 6:42–6:44अटिरासिक रूप सब उजू
  93. 6:44–6:47तदोरा सुर्वालक निपाल में की आप छे
  94. 6:47–6:48इक केवल इक ता कप्डानी आचे
  95. 6:48–6:51इराना कालीन और राज्टंट्र कालीन सब तक
  96. 6:51–6:54उई कात्मान्दुक संब्रान्त वर्ख के पोशा करहलते
  97. 6:54–6:57जकर वर्च्छ स्वसा मदेसी मैठिल समवुदाय
  98. 6:57–6:59हमेशा प्रताडित मैएसुस करहलते
  99. 6:59–7:01मुदा आप समें बदली रहलते
  100. 7:01–7:06आलेक में सुरज यादवक फेज्बुक पोष्टक जे साख्षे देल गेलते
  101. 7:06–7:09उही मनुवग्यानिग भावके उजागर करे तचे
  102. 7:09–7:12जे लोका के एकनोदरी राश्पदिक विवार में
  103. 7:12–7:14राज्तन्त्रक उई राजा गंद भेटे तचे
  104. 7:14–7:17एक रंगी राश्ट्र्वाद थोपलजा रहले चे
  105. 7:17–7:20इक गन्तन्त्र थीक, जटे विविद्धाक सम्मान भेट्वाख चाही.
  106. 7:20–7:22हमहां के बाद भूजी रहाल ची,
  107. 7:22–7:26जे दोरा सुर्वालक एक ता विशेश इतिहास रहाल ची,
  108. 7:26–7:29मुदा इतिहास बदली सहोतर रहाल ची.
  109. 7:29–7:32आज एक रंकी राश्ट्रवाद कही रहाल ची,
  110. 7:32–7:40उ वास्तवे नव गड़ित गडदंट्र के तुट भासा बचाईबाक अग्टिट वास्त्टागत गोन्द
  111. 7:40–7:42अग्टिट गोन्द
  112. 7:42–7:47जकन दोक्तर यादव राश्त्र पती बनला निपाल एक ता अथ्यंत नाजुग दोर्सा गुजरी रहाल चल
  113. 7:47–7:51तुस्व्च्छाँईज्वर्स्पूरान राज्टन्त्र बरक्ध्ध भेल्च्छल
  114. 7:51–7:55आहन श्थितिमे नव्राज्ज्ग प्रतिक के स्तापित करव आनिवार्ये चल
  115. 7:55–8:00सत्या चे, मुदा प्रतिक कसरूबत समावेशि भ्हसके च्छल
  116. 8:00–8:05पद पर भेलक बाद दाका तोपी अद्ड़ारा सुर्वाल एक टा यूनिफाम जका बनीगेल,
  117. 8:05–8:07जे देशक समप्रबुताग दर सावेत अची,
  118. 8:07–8:09इराश्तन्तर के गंदनाई थिक,
  119. 8:09–8:12एक रे एही रूप में देखू जे एक ता मदेशी,
  120. 8:12–8:13एक ता मेठल पुत्र,
  121. 8:13–8:16जखन उईद़ारा सुर्वाल के पहिरे तची
  122. 8:16–8:19तो उवास्तब में उईपोशा का खात्माँदुस संब्रान्त वर्गक
  123. 8:19–8:23एक अग्डिकार सा खोस के समपुन निपाल का बनारा हल अची
  124. 8:23–8:26आ, इ निज्टाक भली वाला तर्क
  125. 8:26–8:28बगद सुन्दर दंग से प्रस्थूत कैल हैं।
  126. 8:28–8:31मुदा इस संस्तागत गोंद को अवदारना
  127. 8:31–8:35अकसर आल्प संक्यक संस्क्रतिक पझ्चानक के
  128. 8:35–8:38दबाविल एक ता हत्यार के रूप में प्रविक तोईताची
  129. 8:38–8:41आलेक में एक ता बद भ्यंग्यात्मक
  130. 8:41–9:11तो बाब बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बा
  131. 9:11–9:15वा अन्ने शब्द बजला हा तहुनक राश्ट पती पद नहीं चीनी गेल
  132. 9:15–9:17बलकी ओल लोग के हिर्दे जीत लेलनें
  133. 9:17–9:18ओए
  134. 9:18–9:23मुदा एद श्टान्त मने यी आनालजी एते काज नहीं करत
  135. 9:23–9:25की एक ना काज करत
  136. 9:25–9:29जग दून्याक सबसे सक्तिषाली राश्ट्ट्ध्ध्च्छ दोसर देश्बाशा बाजी का
  137. 9:29–9:32अपन मानवियक गध्राई दिखासकता ची
  138. 9:32–9:34तर दोक्तर यादव अपन देश्ग के भीटर
  139. 9:34–9:36अपन मात्र बाशा में बाजी का
  140. 9:36–9:38मेत्हिल के रह्दिर की एक नहीं जीज सकत चला है
  141. 9:38–9:41कि आएक तव अबामा के हिंदी भाजनाय
  142. 9:41–9:43विदेशी कुटनी ती
  143. 9:43–9:45माने फोरें दिपलमेसी चल
  144. 9:45–9:47जखन कोनो विदेशी मंच पर
  145. 9:47–9:50राश्टर द्यक्ष आही देश भाशा बाजे तची
  146. 9:50–9:53तव उह सम्मानत प्रतिक मानल जाईता थाची
  147. 9:53–9:55जखन की डाक्तर यादव की इस्तिती
  148. 9:55–9:59नेपाल के भीतर आन्तरिक राश्टर निरमान का जी
  149. 9:59–10:01इदुनु भिन्न वस्तू थेक
  150. 10:01–10:05मुदः प्रभावत जन्ताप्र समान होगी तजीने संचारक कप्रभाव
  151. 10:05–10:09नहीं, आन्त्रिक राजनिती में प्रभाव पुनता भिन रही ता ची,
  152. 10:09–10:11एक ता बहुभाशी देश में,
  153. 10:11–10:17जर राश्ट्र पती आपन विशिष्ट शेत्रे प्च्चानक के सरवजनिक रूप से प्राथमित्ता देता,
  154. 10:17–10:20तब अनने समुहो असन्तुष्ट भहसा कै ता ची.
  155. 10:20–10:29इन्ना सोचों, जो अबामा अमेरिका के भीटर अदिकारिक स्टेट अब देवाय लक्तिन तक्हन की होईत.
  156. 10:29–10:35मने आहा कहे चाहा चीजे, अब अमेरिकाक अन्तरिक राजनीती में बूकंप लावी देत.
  157. 10:35–10:41लो कहत जी राश्ट्पती एक ता विषिष्ट भाशिट क आल्प संक्खे गिक तोश्ट कर रहाल चतिन.
  158. 10:41–10:45विदेशी मंज पर दोसर भाशा भाजाव सद्भावन थेक,
  159. 10:45–10:49मुदा स्वदेश में विषेश कर नवगण तन्त्र में
  160. 10:49–10:52अगर में राश्टबती के सुपर नुट्रल रहे परएच्छेक
  161. 10:53–10:57दक्तर यादव आपन अदिरेक्त पहचान देखावे किस्तिती में नहीं चला हा
  162. 10:58–11:02आग के बाद ज़े अन्त्रिक राजनिती में राश्टबती के सुपर नुट्रल रहे बाखचाही
  163. 11:02–11:06अगर बाखचाही यी सैद्धानते क्रुप संथ नी कची
  164. 11:06–11:09मुदा समस्स्या उते वेत अची
  165. 11:09–11:12जकन उ तटस्थता वा नुट्रालिती
  166. 11:12–11:15केवल बहु संख्यक वा सत्तादारी वर्गक संस्क्रिती वोजाए ची
  167. 11:15–11:16मुजलिये
  168. 11:16–11:19अम भूज्रहल थी आगा के इशारा कते अची
  169. 11:19–11:21जखन दोक्तर लाल इगगगगगगगगगग
  170. 11:21–11:24जे राश्पती महोदेव कपद छिन्बाक दर भोगे लन ही
  171. 11:25–11:28तो वास्तव में उईदबाव तन्त्र की यतार्थ्ख उजागर कर रहल चतिन
  172. 11:28–11:36जददाई एक्ता मदेशी वो मैत्फिल राजनिता के कात्मान्दू के संटुष्ट राख्वागलेल नेपाली पन प्रदर्षन करे परच्छेक.
  173. 11:36–11:42ज़र राश्ट्पती स्वोयम एक्ता विषिष्ट मंच्पर अपन मात्र भाजा में प्रतिबंदित महसुज कर अच्छती,
  174. 11:58–12:03तची जो हिंदिक वर्च्छव समाथकर मैठली के स्थापित करभा में
  175. 12:03–12:06महत्पुपुन भूमी का निरवाख कईने चथी.
  176. 12:06–12:10अता जी, हम वही योग्दान के ने विसरी रहल ची.
  177. 12:10–12:13तपिर हूनाक नियत में कोट नहीं आच.
  178. 12:13–12:16अगना हा राश्पती भवन में प्रविष्ट होईच्छी,
  179. 12:16–12:20ताहक प्रतेक शब्द प्रतेक वेश भूशा कै,
  180. 12:20–12:22माइक्रुस्कोप से देखल जाएदच.
  181. 12:22–12:26अहन में स्तापित राश्ट्रे प्रोटोकोल के पालन कोनो दर नहीं,
  182. 12:26–12:29बलकी राजनीतिक परी पक्वता थेख.
  183. 12:29–12:39दोक्तर यादवकर इतिहाज बतावेता ची, जो नीतिक इस्टर पर मेठ्फ्रीक योद्धा चती, मुदा राश्पती कोर्सी पर उन्नेपाल का सन्रक्षक चती.
  184. 12:39–12:46अम आख एबात स्विकार करे ची जे नीतिक इस्टर पर हुंकर योग्दान के भिस्रल नहीं जासकए तज.
  185. 12:46–12:51मुदा सार्वजनिक पद पर बैसल व्यक्ति के प्रतिक कि शक्ती से हो भुज्वाख चाही.
  186. 12:51–12:57जो आहा आपन लोका के भीच आपन मात्र भाशा नहीं बाजब तो उप्रतिक नकरात्मक बनेदच
  187. 12:57–12:58आपन अपन लोका के भीच आपन मात्र भाशा नहीं बाजब तो उप्रतिक नकरात्मक बनेदच
  188. 12:58–13:00उएक ता कतेन स्तेदिता आच
  189. 13:00–13:04मेठिल समदायक निराशा अकारन नहीं आची
  190. 13:04–13:06इवो ही आकांच्या प्रस्तुती फिक
  191. 13:06–13:08जते लोग चाहत आचे
  192. 13:08–13:10जे सरबोच पद पर पहुचल आपन लोग
  193. 13:10–13:13आपन भाशा आप पुषाक के सोब सम्मान दियवाए
  194. 13:13–13:17ता आएक विमर्ष्छ के समेटइत हम्रा सब इक रही सके च्छी
  195. 13:17–13:21जे डोक्तर यादवक कदमक दूनु तरहा से देखल जासके तची
  196. 13:21–13:26एक दीस यी आपन संस्क्रतिक जडी के दरकिनार करवाक गतना भुजना जाई तची
  197. 13:26–13:29जते एक रंगी रास्ट्रवादक दबाव अस्पष्ट चे
  198. 13:29–13:31आदो सर दीज
  199. 13:31–13:34इई नवगद्हित गन्तन्त्र कषर्वोच्प पदक गर्मा
  200. 13:34–13:42आर राश्च्च्रिय एक्ता के अक्षुन राख्वाक लेल वेक्तिगत पहचान के तिलानजली देबाग एक ता कते निरने से अप्रतीत होई तचे.
  201. 13:42–13:49दोक्तर यादव राश्ट्रक वर्दी दारन का अपन आन्तरिक मेठिल के किच कालक लेल नेपत्त में राखी दिलने,
  202. 13:49–13:54जाहिसन नेपाल क नवगन्तन्त्र मंच पर सुरक्षित रही सके.
  203. 13:54–13:58बिल्कुल कि कोनो लोक तान्त्रिक संस्त्ठा में समावेसी भेलाक अर्थ,
  204. 13:58–14:02अपन निजता के पुनतः मेटनाई अची
  205. 14:02–14:03वा उक्रा संग लोकर
  206. 14:03–14:05एक तव्रहत पहचान गडव
  207. 14:05–14:07सुजीत कुमार जहाक आलेएक
  208. 14:07–14:10एही गमभीर सांस्क्रितिक विमर्ष्के
  209. 14:10–14:11सतेब पर लावे में
  210. 14:11–14:13पुनतः सफल रहे लची
  211. 14:13–14:14और यी निरने
  212. 14:14–14:17हम्रा सब आपन स्रोटा पर चोडी दैची
  213. 14:17–14:19आई हम्रा संग एही बोद्धिक मन्तन में
  214. 14:19–14:20जुर्बा के लिल
  215. 14:20–14:22आहा सब कक बहुत-बहुत द्धन्निवाद

Plain text

विमर्श विविद परीप्रिक्षक के कारेक्रम देबेट में आहाक स्वागत अचि। ता आई हम्रा सब एक ता बद रोचक, मने एक ता समवेदन्शील मुद्दा पर चर्चा के रल ची। बिल्कल आई मुद्दा निपाल के पहल राष्ट्रपती डुक्तर रामवरन यादव के लोक अचे विशेश रुब सा काट्मान्दू में जे अन्तराष्ट्रीये मेठली सम्मिलन भेल चल उते हुंकर सह भागिताक विश्यमें आप जते यो आपन मात्री भाशा मेठली चोडग का अचानक नेपाली में बाशन देलनी आआ आप केवल बाशाई ने पहरन में से हो पारंपर एक दोती कुरताक जगा दोरा सुर्वाल अद्धाका तोपी पहरनी जेकी सुजिद कुमार जाक आलेक्ह कमोख्य केंद्र बिन्दू अच्ये. सहीं कहली आहां. ता आएक बहस केंद्र यह जी, जेकी कोनो राश्ट्र द्यक्ष द्वारा, आपन मात्र भाशाक अंतर राश्ट्र्या सम्मिलन में, राश्ट्रिया बाशा अप्षाक कुप्योख करनाई आपन मुल सान्सक्रतिक पहचान से मुमोडनाई थेक वाफिर इप पदग गरीमा और राश्ट्रिया एक ताक लेल एक ता आवश्षक कुटनितिक कदम चल हमरत इए असपष्ट माननाय आची जि राश्ट्र पतिक इग कदम आपन भाशिक अ सान्स्क्रितिक ज़िक प्रति उपेख्षा थिक. इएक ता निरासा जनक कदम चल, जे-जे समावेशी गंतन्त्रेक मुल भावनाके आहत करे तची. आँ, आँ, के प्रस्तावना गंभीर जरूर आजी, मुदा हम इविशे पूनता भिनद्रिष्टी कोंषे देकेच्छी. रास्ट्रा देख्षक रूप में दुक्तर यादव के इगदम कुनो सांस्क्रितिक उपेख्षा नहीं चल. हमर் तर्क यह आची जे यी नवगतित रास्ट्रक निर्मान और एक ता अद्तेंत समवेदन शील काल में, कुतनीतिक अवश्षकताक निर्वाहन चल. इग कुतनीतिक अवश्षकता सुन्वा में नीक लगाई तची, मुदा देखु, यदार्त में एकर प्रभाव उही समुदाये पर की परएत अची, ताई पर विचार कर अब आवश्यक अची. मैत्फिल समुदाये क लेल यए अख्त्यन्त निरासा जनक की अच्छल, पहिल बात तइ कोनो सादारन सरकारी उद्खातन नहीं चल? आद्राश्वे मेठली सम्मेलन चल हम भूजी रहाल ची. एक दम. एहन विषिष्ट मनच पर, जटे दून्या बहरेक मेठल, अपन भाशा कुछ सब मनावे लेल एक द्रिद भेल चला, अथे नेपाली बासा में भाशन देना है, अव सरक सरवता प्रतिकूल चल, आलेक में साहित्यकार दोक्तर रेवती रमन लालक बयान एक ता बद्मारमिक यातार्थ दिस इशारा करतची, मुदा दोक्तर लालक बयान ता तनी हम्रा एबिन्दूर राके दिय, अपना बाज़्ाग बाज़्ा के त्याग दे बुजलिये। दोक्तर लालक असुरक्षाक बावनावाला तिपनी बावुक अवष्ष्य अची मुदा की इटार्किक अची हम्रा इई नहीं भी सर बाख चाही अद्र लालक असुरक्षाक बहावना वाला तिपनी बहवुक अवश्य अची मुदग की तार्किक अची हमरा इण नहीं भी सर बाख चाही आलेख में इस पष्ट अची जे राश्ट पती बनवासे पूर्व मुदा की यी तारकि का ची? हमरा यी नहीं भी सरभाग चाही जे आलेख में यी सपष्ट ची जे राश्टपती बन्वासे पूर्व दोक्तर यादव मैठली आन्दोलनक मुख्य समर्थक चला. हा, उत चला है. अख्रा अख्रा अख्रा आपन भाशा से ग्रिना या भाई किया एक भाजाएत एकर उतर असुरक्षा नहीं आएच एकर उतर संस्तागत डाईत तो आची मने आहा कही रहल ची जे पद पहुच का मात्री भाशा भिसर जे नाई डाईत तो थेक एकर उतर असुरक्शा नहीं आईच, एकर उतर संस्थागत दाईत तो आची. मने आहा कही रहल ची जे पद पद पहुचका मात्री भाशा भिसर जे नाई दाईत तो थेक. नहीं, भिसर नाई नहीं. मुदा जकन आहा सरवोच्च समविदानिक पद पहुचे ची, ता आहा राम वरन यादव वा केवल इक ता मदेसी वा मेठिल से उपर उठका नेपालक राश्ट्र पती बनी जाएची. नेपाल जगा देश में जदे एक रोग बाजल जाए तची उते राश्टर द्ध्शक अदिकारिक उपस्तिती पुरन देश के समबोदित करे तची कोनो एक समवुदाए के नहीं मुदा वंच के संदरभख के कि कहवाहा सम्मेलनक उही बातावरनक कलपना करू नेपालक ततकालिन संस्क्रती मंत्री मिनेंद्र रीजाल मंच्पर आवेच्छतिन और इस पश्ट कहिच्छतिन, जे हमरा मैठली नहीं भाजी आवाईत छे, तटैं नेपाली में बजेच्छे. रहा, आई एक ता एमान दार स्विकार उक्ती चल हुंकर दिस्सा. भिल्कुल, मुदा इग कतेक पाएक विदंपना आची, जे संसक्रती मंत्री, जे मैठल नहीं चती, उआपन असमरत्ता व्यक्त कोरहल चती, जे हम्रा मैठली नहीं अवेत आची. मुदा जे वेक्ती सुयम मेतल चती, जेक्रा नीक जोको मेतली अवेद चनी, उ अपन भाशाक प्रयोग क्याने को रहल चती. क्याकता, मंत्री और रास्ट्पतिक भूमिका में अंथर होई तचे. प्राद्द्यापक चंद्रमोहन्जा पद्वाक निराशा एक दम जाएज अची एते उकहे चतीजे जकन कानूनन कोनो भाशा बाजा प्रतिबंदित नहीं आची ता अपन भाशा कियाने भाजल जाए, जए मंत्री अपन सीमा सुईकार का अप्रतेख्ष्रूप्सा मंज्क्ष्मान कोसके चति तराश्ट्र्पति आपन सांस्क्रितिक संपदाके उदे कियागने प्रदषित क्यालनी हम एक्रा दोसर्रूप में देखे चि आहां मंत्री और राश्ट्र्पतिग भूमिका मेंजे माले कनतर अची अगर नजर अंदास कर रहल ची, मंत्री सरकारक एक ता राजनेति कंग्धिक उ जन्ता के समबोदित कर अच्छे, मुदा राश्ट्र पती स्वयम राश्ट्र का साख्षात प्रतिरुप होए चती. इक्रा एक्ता द्रिश्टान्त सबूशू जैना कोनो सरवोच न्यायलैक न्यायादिश जकन इजलास मे बैसेत अची, तो उआपन निजी विचार वा अपन गामक परमपरास अपर उठीकः केवल समविदानक भाशा बाजाईत अची. इद्तटस्त्ता हुनका व्यक्ती साँस्तामे परिवर्तित करेद च्यक रूक। रूक। के न्याए देशा रास्ट्रपती पुर्नता समान च्यती आँम्रा आख ये न्याय देशक द्रुश्टानत तनी जतिल लगे तच अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ� तो उगी दिन उकर स्थान पर दोरा सुर्वाल अद्धाका तोपी के दारन करनाई कुनो सादारन बात नहीं चल. मुदा और रास्ट्रे पोशाक थे. रास्ट्रे पोशाक. अटिदासिक रूप सब उजु, तो तो उगे बाशाक देखाए. अग, दोरा सुर्वालक बात, इक्दम आव एक राए सा देखे, दोक्टर यादवक न्यमित अपारमपरिक पहरन दोती कुरता अगम्चा चल, उइ दिन अकर स्थान पर दोरा सुर्वाल अद्धाका तोपी के दारन करनाई कुनो सादारन बात नहीं चल. मुदा और रास्ट्रे पोषाक थेख रास्ट्रे पोषाक अटिरासिक रूप सब उजू तदोरा सुर्वालक निपाल में की आप छे इक केवल इक ता कप्डानी आचे इराना कालीन और राज्टंट्र कालीन सब तक उई कात्मान्दुक संब्रान्त वर्ख के पोशा करहलते जकर वर्च्छ स्वसा मदेसी मैठिल समवुदाय हमेशा प्रताडित मैएसुस करहलते मुदा आप समें बदली रहलते आलेक में सुरज यादवक फेज्बुक पोष्टक जे साख्षे देल गेलते उही मनुवग्यानिग भावके उजागर करे तचे जे लोका के एकनोदरी राश्पदिक विवार में राज्तन्त्रक उई राजा गंद भेटे तचे एक रंगी राश्ट्र्वाद थोपलजा रहले चे इक गन्तन्त्र थीक, जटे विविद्धाक सम्मान भेट्वाख चाही. हमहां के बाद भूजी रहाल ची, जे दोरा सुर्वालक एक ता विशेश इतिहास रहाल ची, मुदा इतिहास बदली सहोतर रहाल ची. आज एक रंकी राश्ट्रवाद कही रहाल ची, उ वास्तवे नव गड़ित गडदंट्र के तुट भासा बचाईबाक अग्टिट वास्त्टागत गोन्द अग्टिट गोन्द जकन दोक्तर यादव राश्त्र पती बनला निपाल एक ता अथ्यंत नाजुग दोर्सा गुजरी रहाल चल तुस्व्च्छाँईज्वर्स्पूरान राज्टन्त्र बरक्ध्ध भेल्च्छल आहन श्थितिमे नव्राज्ज्ग प्रतिक के स्तापित करव आनिवार्ये चल सत्या चे, मुदा प्रतिक कसरूबत समावेशि भ्हसके च्छल पद पर भेलक बाद दाका तोपी अद्ड़ारा सुर्वाल एक टा यूनिफाम जका बनीगेल, जे देशक समप्रबुताग दर सावेत अची, इराश्तन्तर के गंदनाई थिक, एक रे एही रूप में देखू जे एक ता मदेशी, एक ता मेठल पुत्र, जखन उईद़ारा सुर्वाल के पहिरे तची तो उवास्तब में उईपोशा का खात्माँदुस संब्रान्त वर्गक एक अग्डिकार सा खोस के समपुन निपाल का बनारा हल अची आ, इ निज्टाक भली वाला तर्क बगद सुन्दर दंग से प्रस्थूत कैल हैं। मुदा इस संस्तागत गोंद को अवदारना अकसर आल्प संक्यक संस्क्रतिक पझ्चानक के दबाविल एक ता हत्यार के रूप में प्रविक तोईताची आलेक में एक ता बद भ्यंग्यात्मक तो बाब बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बार बा वा अन्ने शब्द बजला हा तहुनक राश्ट पती पद नहीं चीनी गेल बलकी ओल लोग के हिर्दे जीत लेलनें ओए मुदा एद श्टान्त मने यी आनालजी एते काज नहीं करत की एक ना काज करत जग दून्याक सबसे सक्तिषाली राश्ट्ट्ध्ध्च्छ दोसर देश्बाशा बाजी का अपन मानवियक गध्राई दिखासकता ची तर दोक्तर यादव अपन देश्ग के भीटर अपन मात्र बाशा में बाजी का मेत्हिल के रह्दिर की एक नहीं जीज सकत चला है कि आएक तव अबामा के हिंदी भाजनाय विदेशी कुटनी ती माने फोरें दिपलमेसी चल जखन कोनो विदेशी मंच पर राश्टर द्यक्ष आही देश भाशा बाजे तची तव उह सम्मानत प्रतिक मानल जाईता थाची जखन की डाक्तर यादव की इस्तिती नेपाल के भीतर आन्तरिक राश्टर निरमान का जी इदुनु भिन्न वस्तू थेक मुदः प्रभावत जन्ताप्र समान होगी तजीने संचारक कप्रभाव नहीं, आन्त्रिक राजनिती में प्रभाव पुनता भिन रही ता ची, एक ता बहुभाशी देश में, जर राश्ट्र पती आपन विशिष्ट शेत्रे प्च्चानक के सरवजनिक रूप से प्राथमित्ता देता, तब अनने समुहो असन्तुष्ट भहसा कै ता ची. इन्ना सोचों, जो अबामा अमेरिका के भीटर अदिकारिक स्टेट अब देवाय लक्तिन तक्हन की होईत. मने आहा कहे चाहा चीजे, अब अमेरिकाक अन्तरिक राजनीती में बूकंप लावी देत. लो कहत जी राश्ट्पती एक ता विषिष्ट भाशिट क आल्प संक्खे गिक तोश्ट कर रहाल चतिन. विदेशी मंज पर दोसर भाशा भाजाव सद्भावन थेक, मुदा स्वदेश में विषेश कर नवगण तन्त्र में अगर में राश्टबती के सुपर नुट्रल रहे परएच्छेक दक्तर यादव आपन अदिरेक्त पहचान देखावे किस्तिती में नहीं चला हा आग के बाद ज़े अन्त्रिक राजनिती में राश्टबती के सुपर नुट्रल रहे बाखचाही अगर बाखचाही यी सैद्धानते क्रुप संथ नी कची मुदा समस्स्या उते वेत अची जकन उ तटस्थता वा नुट्रालिती केवल बहु संख्यक वा सत्तादारी वर्गक संस्क्रिती वोजाए ची मुजलिये अम भूज्रहल थी आगा के इशारा कते अची जखन दोक्तर लाल इगगगगगगगगगग जे राश्पती महोदेव कपद छिन्बाक दर भोगे लन ही तो वास्तव में उईदबाव तन्त्र की यतार्थ्ख उजागर कर रहल चतिन जददाई एक्ता मदेशी वो मैत्फिल राजनिता के कात्मान्दू के संटुष्ट राख्वागलेल नेपाली पन प्रदर्षन करे परच्छेक. ज़र राश्ट्पती स्वोयम एक्ता विषिष्ट मंच्पर अपन मात्र भाजा में प्रतिबंदित महसुज कर अच्छती, तची जो हिंदिक वर्च्छव समाथकर मैठली के स्थापित करभा में महत्पुपुन भूमी का निरवाख कईने चथी. अता जी, हम वही योग्दान के ने विसरी रहल ची. तपिर हूनाक नियत में कोट नहीं आच. अगना हा राश्पती भवन में प्रविष्ट होईच्छी, ताहक प्रतेक शब्द प्रतेक वेश भूशा कै, माइक्रुस्कोप से देखल जाएदच. अहन में स्तापित राश्ट्रे प्रोटोकोल के पालन कोनो दर नहीं, बलकी राजनीतिक परी पक्वता थेख. दोक्तर यादवकर इतिहाज बतावेता ची, जो नीतिक इस्टर पर मेठ्फ्रीक योद्धा चती, मुदा राश्पती कोर्सी पर उन्नेपाल का सन्रक्षक चती. अम आख एबात स्विकार करे ची जे नीतिक इस्टर पर हुंकर योग्दान के भिस्रल नहीं जासकए तज. मुदा सार्वजनिक पद पर बैसल व्यक्ति के प्रतिक कि शक्ती से हो भुज्वाख चाही. जो आहा आपन लोका के भीच आपन मात्र भाशा नहीं बाजब तो उप्रतिक नकरात्मक बनेदच आपन अपन लोका के भीच आपन मात्र भाशा नहीं बाजब तो उप्रतिक नकरात्मक बनेदच उएक ता कतेन स्तेदिता आच मेठिल समदायक निराशा अकारन नहीं आची इवो ही आकांच्या प्रस्तुती फिक जते लोग चाहत आचे जे सरबोच पद पर पहुचल आपन लोग आपन भाशा आप पुषाक के सोब सम्मान दियवाए ता आएक विमर्ष्छ के समेटइत हम्रा सब इक रही सके च्छी जे डोक्तर यादवक कदमक दूनु तरहा से देखल जासके तची एक दीस यी आपन संस्क्रतिक जडी के दरकिनार करवाक गतना भुजना जाई तची जते एक रंगी रास्ट्रवादक दबाव अस्पष्ट चे आदो सर दीज इई नवगद्हित गन्तन्त्र कषर्वोच्प पदक गर्मा आर राश्च्च्रिय एक्ता के अक्षुन राख्वाक लेल वेक्तिगत पहचान के तिलानजली देबाग एक ता कते निरने से अप्रतीत होई तचे. दोक्तर यादव राश्ट्रक वर्दी दारन का अपन आन्तरिक मेठिल के किच कालक लेल नेपत्त में राखी दिलने, जाहिसन नेपाल क नवगन्तन्त्र मंच पर सुरक्षित रही सके. बिल्कुल कि कोनो लोक तान्त्रिक संस्त्ठा में समावेसी भेलाक अर्थ, अपन निजता के पुनतः मेटनाई अची वा उक्रा संग लोकर एक तव्रहत पहचान गडव सुजीत कुमार जहाक आलेएक एही गमभीर सांस्क्रितिक विमर्ष्के सतेब पर लावे में पुनतः सफल रहे लची और यी निरने हम्रा सब आपन स्रोटा पर चोडी दैची आई हम्रा संग एही बोद्धिक मन्तन में जुर्बा के लिल आहा सब कक बहुत-बहुत द्धन्निवाद

← Transcript index