MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
दू_टा_विद्यापति_आ_साहित्यक_गड़बड़ी.m4a
Timestamped machine output
- 0:00–0:06आई हम सब एक ता बहुत गमभीर अविस्त्रिच चर्चा करे जार रहल्छि।
- 0:06–0:14जै, हमहा से कही जे मैठली साहित्यक सब सि पैग नाम, मैंने महाकवी विद्यापती,
- 0:14–0:20असल में एक व्यक्ती नहीं, बलकी दूटा पूँणत्या अलगल अग व्यक्ती च्लालां।
- 0:20–0:50आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
- 0:50–0:52अद्दख अनअद्द काईलाची
- 0:52–0:53एक दम
- 0:53–0:54दिखु
- 0:54–0:56इप पोठी मुख्य रूब से
- 0:56–0:58एही बात पर प्रखाष डाले तची
- 0:58–0:59जि कोना अनुवादक
- 0:59–1:01वा समपादक का
- 1:01–1:03उआपन जे समाजिक चष्मा होईचे
- 1:03–1:05उकुनो ग्रन्त का मुल भाँना के
- 1:05–1:07तजब वेदग भावानुवाद से करेच्छी
- 1:07–1:10आए काल ही तजव सोषल मीट्यापर बद्विमर्ष चलाई तची
- 1:10–1:13जे वेद में इस्त्री अशुद्रक अपमान काईल गेल आची
- 1:13–1:16आप मुदा श्रोथ सामगरी एक रा पुरा तरह ब्रामक कहत आची
- 1:16–1:17वान कायल गेल आची
- 1:17–1:21आप, मुदा श्रोथ सामगरी एक रा पूरा तरहे ब्रामक कहता ची
- 1:21–1:26शुक्ले यजुर्वेद, अख्धर्ववेद, आरिग्वेदक संदर्ब दख का
- 1:26–1:28एही मिस पष्ट कायल गेल आची
- 1:28–1:31जे वेद वानी कोनो एक वर्ग संपत्ती नहीं आची
- 1:31–1:34भिल्कुल, शुक्ले याजूर्वेदक चब भीस्मा द्याय,
- 1:34–1:36तब इते द़ी कहेत आची,
- 1:36–1:40जे इवानी, ब्राहमाडग, शत्रिये, वैश्य, शुद्र,
- 1:40–1:42आई अपरीचित सबके ले लग,
- 1:42–1:44मुदा उजे पुरुष सुक्तक संदर्भ आची,
- 1:44–1:47जे शूद्रक उप्पत्ती पैर सभेल आची,
- 1:47–1:49उख्रा लोग शब्दिक रूप सिला ले लग.
- 1:49–1:51तेद हाम तक गडववडी भेल,
- 1:51–1:54पैर सवॉपत्तिक अर्ठ कुनो अपमान जनक छोडे आची.
- 1:54–1:57जद दार्षनिक द्रष्टी कोन सदेखी,
- 1:57–2:01तपैर तः समपुन शरीरक मने समाजक बहार वहन करे तची
- 2:01–2:03उत आदार शिला भेल
- 2:03–2:03आँ
- 2:04–2:06माने उत समाजक पालक भेल
- 2:06–2:08मुदा पाष्चात ते विद्वान सव
- 2:08–2:11जकर अपन समाज में पदानुक्रम अच्वा चुछचल
- 2:11–2:13उसब अपन उही हीन भावना के
- 2:13–2:15पैर शब्द पर थोपी देलनी
- 2:15–2:17एक दम सही पकर लिये
- 2:17–2:19उसब शब्दक ता अनवाद कये लग
- 2:19–2:21मुदा उतर की कच्छे
- 2:21–2:23दार्षनिक बहाँ नई भूजी सकल
- 2:23–2:26उक्रा समाजक सब सनी चला ही समानी ले लग
- 2:26–2:28इत अहिना भेल जेना
- 2:28–2:30कोनो विदेशी लोक
- 2:30–2:33हमर मात पर भे साईबा मुहावरा के गुगल ट्रान्सलिट कल है
- 2:34–2:37अग कहे जे ये ते लोग सच्मे एक तुस्रक कपार पर भेसेट आची
- 2:37–2:38हा आ, बिलकुल
- 2:39–2:42बिना सांस्क्रितिक समजगक शब्द कंकाल बोजाई तची
- 2:43–2:45आ, एकर सब से हास्यास्पत उदाहरन
- 2:45–2:48ता उ धब वितनिक अठर्व वेदक अनुवाद में अची
- 2:48–2:51बाप्रे उ तो हमर आपनाकी पर विष्वास ने भिल
- 2:51–2:54उ एक ता मन्त्रक अनुवाद में लिखले नी अची
- 2:54–2:56जे हम थार्व हुई का पिशाब करब
- 2:56–2:58कोनो विद्वान एहन अर्थ कोना निकाली सकेटच
- 2:58–3:12सोचो कत्तिक प्यग त्रास्दी अची, असल में संस्क्रित कर दातु अची मिह, जकर अर्थ वर्शावा सिंचन्स होएच्छै, बारतिये परमपरा में अगर सिदा अर्थ प्रक्रितिक सक्ती आमेग अगर वर्शासा अची.
- 3:12–3:15तमने उकर अगर अगर उगर प्रक्रूतिक दवारा दधी के सिंचित करवचल
- 3:15–3:16एक दम
- 3:16–3:19मुदा विटनी एक रा मनुष्ष्षारीरी क्रिया सजोड जोड दिलनी
- 3:19–3:22आई स्थ विटनी नहें कीछ जे चला
- 3:22–3:26उ तेट्त्रीय सहीता में जूवूती के सीदा दासी लिग दिलनी
- 3:26–3:56आ उही साई अफ्वाव्डल जे वेदिक काल में दास प्रताष्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट
- 3:56–4:00जे बाल कता आची, माटिक भासन, उकर समिक्षा देखु।
- 4:00–4:07उकुमारक कताने, जे आदूनिक श्टील प्लास्टिक बरतन कारने अपन रूजगार गमार रहल आची,
- 4:07–4:10उता हाँशे पर रहे वाला लोकक बड निक कता चलू।
- 4:10–4:22उद्छ़ाग प्लोट्ट में बहुत ग़ेराई चल, मुदध अन्तिम में लेकग की कली नी, ख़दाग के एक ता सादारन उबदेष्दि स्मोड देलनी, जे पुरनताग भ्रम विकास रोकी देई तची.
- 4:22–4:27मने एक ता नीक यतार्थवादी कताख हत्या बोगेल उप्देशक चकर में
- 4:27–4:32सही कालिये, समालोचकक नजरी में ये एक ता सहित्तिक हत्या आची
- 4:32–4:36मुदलेकक कगल्ती सा पैग काज तकन हुई तची
- 4:36–4:42जगन सम्पादक बाशा के शुद करवाके नाम पर मूल चंद के नष्ट कर देताची
- 4:42–4:49गजेंद्र ताकृर एते लाल्दास कम मित्हिला रामायन कबात करे चती
- 4:49–4:55औही में कुंडलिया चंद कप्रयोग ची जि बुजो एक ता जतिल गनी ती एदान चाया चे
- 4:55–5:09अ, कुंडलियाक नियम बद कदगर होएचे, उ दोहा औरोला सबने तची, दोहाक अन्तिम चरन रोलाक पहल चरन होएचे, अ, कुंडलिया जेई शब्द सश्वू होईचे, उही पक भतम से हो होईचे.
- 5:09–5:13अ मात्रा कगडनात एक दम अचूक होग चाही
- 5:13–5:15नहीं तपुरा लए खन्दित बजेते
- 5:15–5:19मुदा मैत्ली अकादमिक जे समपादक सब चला
- 5:19–5:21उसब व्याकरन अवर्तनिक हिसाब सै
- 5:21–5:24मात्रा के रस्वसे दिर्ग कवत दिलनी
- 5:24–5:27उनका लोकनी कच्शन्दक अग्यानता चल
- 5:27–5:30उही चकर में च्ण्डो बंग बहगेल
- 5:30–5:32तकी एक्ता सम्पादक के इए अदिकार चे
- 5:32–5:36जे उ भाशा कष्च्ध कर वाखलेल
- 5:36–5:38मुल लेक्ह कच्छन्द बडली दै
- 5:38–5:40इस सम्पाद की अनुशासन अची
- 5:40–5:41वाद्तानाशाई
- 5:41–5:43इब रुकल तानाशाई आची
- 5:43–5:45जा आहा कुनो सुरीला गीतक
- 5:45–5:47बीच सेख्त भीट रदा देव
- 5:47–5:49तगीट तबे सुरा भजेतेने
- 5:49–5:50बाद मे राम देव जहां
- 5:50–5:55एक रा सुदारालनी मुदा उते सो हो मुल पाट से चेडचाड कविवाद तर रहले
- 5:55–5:57एत बहुल पूरान छन्दक बात
- 5:57–5:59मुदा नीक बात इए आची
- 5:59–6:04जिश्रोथ सामगरी नव विद्धा सबक उदेएक से हो स्वागत करेचे
- 6:04–6:08मैत्टली साहित्ते आप सिर्फ दोहा चोपाई में नई बान दल आच्छ.
- 6:08–6:12आप जेना गजल शास्ट्रक निरमाद बहरा लचे,
- 6:12–6:16जापानी विदा जेना हैकु शन्योग प्रेजोग होई तचे,
- 6:16–6:19आप पेना वा कोंक्रीट कविताक सुर्वाद बे लचे.
- 6:19–6:23मुदा सबसन महत्वापून आचे उ भीहन कता
- 6:23–6:27भीहन कता मानी जे माईक्रो फिक्षन होई तची
- 6:27–6:30सज्या रोपनी संगराग जे बात आची आई ही में
- 6:30–6:34येग्दंएँ वही संगरा में तालीस कोटे लेक्खाख चातीन
- 6:34–6:39अप्सन पाएक बाद जे भीजगोटे महला लेकि का चातिन इकोनो चोटमोड भात नहीं आची
- 6:39–6:42वाहा इत बहुत पाएक उपलप्डी आची
- 6:42–6:45आब भीहन कता दू मिनेट में पड़़ाल जासके तच
- 6:46–6:48मुदा उकर मारक शमता पाएक होए चे
- 6:48–6:51जिन अ उ मुन्नि काम तक कता जिन्दगिक मोल
- 6:51–6:53अ उ राम्रतन वाला कता
- 6:53–6:55जे ही माचलक दवाई कम्पनी में
- 6:55–6:58मात्र आथ हजा तकालेल
- 6:58–7:01नवा दवाएक, क्लिनिकल च्राल क गिनिपिक बने दखी
- 7:01–7:04आहा, मरी जाई तखी
- 7:04–7:06इता करपरेट शोषनक बहुत
- 7:06–7:09क्रूर और रोंग्टे ताड करे वाला याठार्त है ची
- 7:10–7:14इते गाजेंद्र ताग वर पर पर एक द्हुँआ दूदिदारी भाशाक जे विरोद करे च्छती
- 7:15–7:16उबहुद तार्किक्लागल
- 7:17–7:22उनकर तर्कची जे जकन भिशे इते क्कधोर और याठार्त वादी आची
- 7:22–7:28जेना गरीबक म्रित्तिव, तो उक्रा आहा क्रित्रिम आदर्ष्वादी मेत्ली में नहीं लिख सके ची.
- 7:28–7:34इतो बिल्कुल उहीना भेल जेना आहा कोनो मुमबाएक ग्रिट क्रिम सुस्पिन्स फिल्म बनारो होए,
- 7:34–7:37अप पात्र सब शेक्सप्यरक बाशा बाजे लागे.
- 7:37–7:41विश्य कत्होर आची तब भाशा से हो प्रामानिक हेबाख चाही
- 7:41–7:44हा रहा बहुत सती कुप्मा आची
- 7:45–7:48यद्हारत्वादी नातक अभीहन कता साभित करे तची
- 7:48–7:52जे मैठली सहित ते आब खाली ग्रामिन, आँस्टलज्या दरी सिमित नहीं आची
- 7:52–7:55इई आब आदूनिक संग्रष्क बाशा बनी रहिल अची
- 7:55–7:57सही बात
- 7:57–7:59मुदा आब हम्रा लागे तची
- 7:59–8:03एही चर्चाक सब सब पहिन आँ सब सब विवादित हिस्चापर आईप चाही
- 8:03–8:07जी, दीकोडिं रहम सब वेद और आदूनिक सहीट्ते में देखल ये
- 8:07–8:09उकर सब सच्चरम उदारन.
- 8:09–8:12आहा दूटा विद्यापतिक सिद्दान्द क बात करो हल चीने,
- 8:12–8:17इज्स्सता बुजु परमप्रागत इतिहास कार लेल एक ता भूकंप जका है।
- 8:17–8:21बिल्ल्कोल, दाबी इ आची जे महाकवी विद्यापती,
- 8:21–8:24विद्यापती, जे मैठली में पदावली लिखलन,
- 8:24–8:29विद्यापती तख्कृर, जे संस्क्रित वा अवहत्त में कीर्ती लता लिखलन,
- 8:29–8:31इदुनु एक नहीं चला.
- 8:31–8:34एक दम नहीं, स्रोत सामागरी क अनुसार,
- 8:34–8:36इदु अलग अलग व्यक्ती चला.
- 9:06–9:12अब हत करचना में राजज़रयक उलास अचे, मुल्लाक अख्रमनक राजनितिक पीडा आचे.
- 9:12–9:14आम मेठली पडावली में की आची.
- 9:14–9:16अथे तव सर्व भर्ग का दर्षक कले लग रचना के ने हुईट.
- 9:16–9:18आख प्रष्न बद्ध्वाजी बचे.
- 9:18–9:24वो दा गजेंदर जी लिव्द अपने जीवन्त अनुबवक बात करे चती
- 9:24–9:27अवहद कर अचना में राजाश्च्रेयक उलास अच्छे
- 9:27–9:30मुल्लाक अख्रमनक राजनी तिक पीडा आचे
- 9:30–9:33आँ मैठिली पदावली में की आची
- 9:33–9:36उते त, सर्व रारा वर्ग का दर्द आची
- 9:36–9:40अगर ब्राह्म्मिद बाबर जाद्टिका कवी चला
- 9:40–9:44आहुंकर गीत के बिदापत नाच जिवित राख्लक
- 9:44–9:48मुदा तक्हन इस संसक्ट्र बाबर जाद्टिका
- 9:48–9:52अगर ब्राह्मिद बाबर जाद्टिका कवी चला
- 9:52–9:56आहुंकर गीत के बिदापत नाच जिवित राख्लक
- 9:56–10:00अनान्तर परम्पराकगे गेर ब्रहमिद वा भाबर जातिका कवी चला
- 10:00–10:04आहुंकर गीत के बिदापत नाच जीवित राखलक
- 10:04–10:08मुदद तकहन इस संस्क्रित के विद्यापती तख्कुर
- 10:08–10:10के रहुंकर जगा कोनास्तापित का दिलगेला
- 10:10–10:16उत की कही चेख अप्रोप्रीयेशन वा सान्सक्रतिक अदिग्रानक लिएश्साचल
- 10:16–10:19जखन बंगाली विध्वान राज्क्रिष्ट मुखो पाद्ध्याय
- 10:19–10:24अन नगेंद्रनात गुप्त इग खोज कयली जे पदावली मित्ला कची
- 10:24–10:33तकन तत्कालीन सम्व्रान्त वर्ग, हद्बडी में संस्क्रित का विद्यापती तख्कुर के ओई पदावली कर अचाईता गुषित का दिलनिस.
- 10:33–10:38मैंने हुनका मात्ठा पर पाग पहराक, हम मर्विद्यापती बना लिल गेल.
- 10:38–10:43आई, इविशुद दिरूप सव इतिहासक वर्चस्वादी सन्रच्नाक बहस आची.
- 10:43–10:48हम सब इताई इस सावित नहीं करहल ची, जे इह अकाट्य सत्या ची.
- 10:48–10:53मुदा इप पोथी साहित्ये के पडबाक, जे एक ता आलोचनात्मक त्रिष्टी दैप ची,
- 10:53–10:55उक्रा नकारल नहीं जासकता था ची.
- 10:55–10:56बिल्कोल.
- 10:56–10:58आए द्रिक यी गहन चर्चा
- 10:58–11:00इतस पष्ट कदईत ची
- 11:00–11:02जे चाहे कोनो ग्रन्त हो.
- 11:02–11:04वेद हो, लाल्दासकरा माएड हो
- 11:04–11:06वा विद्ध्यापतिक पदावली.
- 11:06–11:07आप.
- 11:07–11:10उक्र अर्थ उही बात पर निरवर करे चे
- 11:10–11:14जे उक्रा पड़ेईवाला, अनुवाद करेईवाला, अस्वम्पादन करेईवाला लोक कर,
- 11:14–11:16अपन समाजिक चष्मा के हैं आची.
- 11:16–11:17एक दम सही.
- 11:18–11:23तश्रोता गरन लेल, सोचबाक लेल, एक ता अंतिम विचार्द का हम सभी चर्चा कथम करब.
- 11:23–11:28आई जे हम सब आपन भ्लोग वा सोषल मीट्या पोस्ट मेजे लिखी रहल ची
- 11:28–11:31जे हमर आजुक दिजितल फुट्प्रिंट आची
- 11:31–11:39आआ, सोचु जे पाज्सो साल बाद जकन भविश्यक कोनो आटिफिष्यल अईटलिजन्स या नवा समाज एकर अनुवाद करत,
- 11:39–11:42तकी हो हमर मुल भावना के पकडी पावत
- 11:42–11:47वाज, कोनो दोसर अन्वादक कर या कोनो अलगरिदमक चोटसन गलती सा
- 11:47–11:51हमर आए कर लिखल सत्य बहुष्षक लिखोनो बहानक मिधग बनी जते
- 11:51–11:58एक दम, की हमर यतारत बहुष्ष मे सही-सही दीकोड भहबावत
- 11:58–12:04यही विचारो तेजक प्रष्नक संगे आई हम सब एही ग़ज़चर चासः विदाले ची
Plain text
आई हम सब एक ता बहुत गमभीर अविस्त्रिच चर्चा करे जार रहल्छि। जै, हमहा से कही जे मैठली साहित्यक सब सि पैग नाम, मैंने महाकवी विद्यापती, असल में एक व्यक्ती नहीं, बलकी दूटा पूँणत्या अलगल अग व्यक्ती च्लालां। आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� अद्दख अनअद्द काईलाची एक दम दिखु इप पोठी मुख्य रूब से एही बात पर प्रखाष डाले तची जि कोना अनुवादक वा समपादक का उआपन जे समाजिक चष्मा होईचे उकुनो ग्रन्त का मुल भाँना के तजब वेदग भावानुवाद से करेच्छी आए काल ही तजव सोषल मीट्यापर बद्विमर्ष चलाई तची जे वेद में इस्त्री अशुद्रक अपमान काईल गेल आची आप मुदा श्रोथ सामगरी एक रा पुरा तरह ब्रामक कहत आची वान कायल गेल आची आप, मुदा श्रोथ सामगरी एक रा पूरा तरहे ब्रामक कहता ची शुक्ले यजुर्वेद, अख्धर्ववेद, आरिग्वेदक संदर्ब दख का एही मिस पष्ट कायल गेल आची जे वेद वानी कोनो एक वर्ग संपत्ती नहीं आची भिल्कुल, शुक्ले याजूर्वेदक चब भीस्मा द्याय, तब इते द़ी कहेत आची, जे इवानी, ब्राहमाडग, शत्रिये, वैश्य, शुद्र, आई अपरीचित सबके ले लग, मुदा उजे पुरुष सुक्तक संदर्भ आची, जे शूद्रक उप्पत्ती पैर सभेल आची, उख्रा लोग शब्दिक रूप सिला ले लग. तेद हाम तक गडववडी भेल, पैर सवॉपत्तिक अर्ठ कुनो अपमान जनक छोडे आची. जद दार्षनिक द्रष्टी कोन सदेखी, तपैर तः समपुन शरीरक मने समाजक बहार वहन करे तची उत आदार शिला भेल आँ माने उत समाजक पालक भेल मुदा पाष्चात ते विद्वान सव जकर अपन समाज में पदानुक्रम अच्वा चुछचल उसब अपन उही हीन भावना के पैर शब्द पर थोपी देलनी एक दम सही पकर लिये उसब शब्दक ता अनवाद कये लग मुदा उतर की कच्छे दार्षनिक बहाँ नई भूजी सकल उक्रा समाजक सब सनी चला ही समानी ले लग इत अहिना भेल जेना कोनो विदेशी लोक हमर मात पर भे साईबा मुहावरा के गुगल ट्रान्सलिट कल है अग कहे जे ये ते लोग सच्मे एक तुस्रक कपार पर भेसेट आची हा आ, बिलकुल बिना सांस्क्रितिक समजगक शब्द कंकाल बोजाई तची आ, एकर सब से हास्यास्पत उदाहरन ता उ धब वितनिक अठर्व वेदक अनुवाद में अची बाप्रे उ तो हमर आपनाकी पर विष्वास ने भिल उ एक ता मन्त्रक अनुवाद में लिखले नी अची जे हम थार्व हुई का पिशाब करब कोनो विद्वान एहन अर्थ कोना निकाली सकेटच सोचो कत्तिक प्यग त्रास्दी अची, असल में संस्क्रित कर दातु अची मिह, जकर अर्थ वर्शावा सिंचन्स होएच्छै, बारतिये परमपरा में अगर सिदा अर्थ प्रक्रितिक सक्ती आमेग अगर वर्शासा अची. तमने उकर अगर अगर उगर प्रक्रूतिक दवारा दधी के सिंचित करवचल एक दम मुदा विटनी एक रा मनुष्ष्षारीरी क्रिया सजोड जोड दिलनी आई स्थ विटनी नहें कीछ जे चला उ तेट्त्रीय सहीता में जूवूती के सीदा दासी लिग दिलनी आ उही साई अफ्वाव्डल जे वेदिक काल में दास प्रताष्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट जे बाल कता आची, माटिक भासन, उकर समिक्षा देखु। उकुमारक कताने, जे आदूनिक श्टील प्लास्टिक बरतन कारने अपन रूजगार गमार रहल आची, उता हाँशे पर रहे वाला लोकक बड निक कता चलू। उद्छ़ाग प्लोट्ट में बहुत ग़ेराई चल, मुदध अन्तिम में लेकग की कली नी, ख़दाग के एक ता सादारन उबदेष्दि स्मोड देलनी, जे पुरनताग भ्रम विकास रोकी देई तची. मने एक ता नीक यतार्थवादी कताख हत्या बोगेल उप्देशक चकर में सही कालिये, समालोचकक नजरी में ये एक ता सहित्तिक हत्या आची मुदलेकक कगल्ती सा पैग काज तकन हुई तची जगन सम्पादक बाशा के शुद करवाके नाम पर मूल चंद के नष्ट कर देताची गजेंद्र ताकृर एते लाल्दास कम मित्हिला रामायन कबात करे चती औही में कुंडलिया चंद कप्रयोग ची जि बुजो एक ता जतिल गनी ती एदान चाया चे अ, कुंडलियाक नियम बद कदगर होएचे, उ दोहा औरोला सबने तची, दोहाक अन्तिम चरन रोलाक पहल चरन होएचे, अ, कुंडलिया जेई शब्द सश्वू होईचे, उही पक भतम से हो होईचे. अ मात्रा कगडनात एक दम अचूक होग चाही नहीं तपुरा लए खन्दित बजेते मुदा मैत्ली अकादमिक जे समपादक सब चला उसब व्याकरन अवर्तनिक हिसाब सै मात्रा के रस्वसे दिर्ग कवत दिलनी उनका लोकनी कच्शन्दक अग्यानता चल उही चकर में च्ण्डो बंग बहगेल तकी एक्ता सम्पादक के इए अदिकार चे जे उ भाशा कष्च्ध कर वाखलेल मुल लेक्ह कच्छन्द बडली दै इस सम्पाद की अनुशासन अची वाद्तानाशाई इब रुकल तानाशाई आची जा आहा कुनो सुरीला गीतक बीच सेख्त भीट रदा देव तगीट तबे सुरा भजेतेने बाद मे राम देव जहां एक रा सुदारालनी मुदा उते सो हो मुल पाट से चेडचाड कविवाद तर रहले एत बहुल पूरान छन्दक बात मुदा नीक बात इए आची जिश्रोथ सामगरी नव विद्धा सबक उदेएक से हो स्वागत करेचे मैत्टली साहित्ते आप सिर्फ दोहा चोपाई में नई बान दल आच्छ. आप जेना गजल शास्ट्रक निरमाद बहरा लचे, जापानी विदा जेना हैकु शन्योग प्रेजोग होई तचे, आप पेना वा कोंक्रीट कविताक सुर्वाद बे लचे. मुदा सबसन महत्वापून आचे उ भीहन कता भीहन कता मानी जे माईक्रो फिक्षन होई तची सज्या रोपनी संगराग जे बात आची आई ही में येग्दंएँ वही संगरा में तालीस कोटे लेक्खाख चातीन अप्सन पाएक बाद जे भीजगोटे महला लेकि का चातिन इकोनो चोटमोड भात नहीं आची वाहा इत बहुत पाएक उपलप्डी आची आब भीहन कता दू मिनेट में पड़़ाल जासके तच मुदा उकर मारक शमता पाएक होए चे जिन अ उ मुन्नि काम तक कता जिन्दगिक मोल अ उ राम्रतन वाला कता जे ही माचलक दवाई कम्पनी में मात्र आथ हजा तकालेल नवा दवाएक, क्लिनिकल च्राल क गिनिपिक बने दखी आहा, मरी जाई तखी इता करपरेट शोषनक बहुत क्रूर और रोंग्टे ताड करे वाला याठार्त है ची इते गाजेंद्र ताग वर पर पर एक द्हुँआ दूदिदारी भाशाक जे विरोद करे च्छती उबहुद तार्किक्लागल उनकर तर्कची जे जकन भिशे इते क्कधोर और याठार्त वादी आची जेना गरीबक म्रित्तिव, तो उक्रा आहा क्रित्रिम आदर्ष्वादी मेत्ली में नहीं लिख सके ची. इतो बिल्कुल उहीना भेल जेना आहा कोनो मुमबाएक ग्रिट क्रिम सुस्पिन्स फिल्म बनारो होए, अप पात्र सब शेक्सप्यरक बाशा बाजे लागे. विश्य कत्होर आची तब भाशा से हो प्रामानिक हेबाख चाही हा रहा बहुत सती कुप्मा आची यद्हारत्वादी नातक अभीहन कता साभित करे तची जे मैठली सहित ते आब खाली ग्रामिन, आँस्टलज्या दरी सिमित नहीं आची इई आब आदूनिक संग्रष्क बाशा बनी रहिल अची सही बात मुदा आब हम्रा लागे तची एही चर्चाक सब सब पहिन आँ सब सब विवादित हिस्चापर आईप चाही जी, दीकोडिं रहम सब वेद और आदूनिक सहीट्ते में देखल ये उकर सब सच्चरम उदारन. आहा दूटा विद्यापतिक सिद्दान्द क बात करो हल चीने, इज्स्सता बुजु परमप्रागत इतिहास कार लेल एक ता भूकंप जका है। बिल्ल्कोल, दाबी इ आची जे महाकवी विद्यापती, विद्यापती, जे मैठली में पदावली लिखलन, विद्यापती तख्कृर, जे संस्क्रित वा अवहत्त में कीर्ती लता लिखलन, इदुनु एक नहीं चला. एक दम नहीं, स्रोत सामागरी क अनुसार, इदु अलग अलग व्यक्ती चला. अब हत करचना में राजज़रयक उलास अचे, मुल्लाक अख्रमनक राजनितिक पीडा आचे. आम मेठली पडावली में की आची. अथे तव सर्व भर्ग का दर्षक कले लग रचना के ने हुईट. आख प्रष्न बद्ध्वाजी बचे. वो दा गजेंदर जी लिव्द अपने जीवन्त अनुबवक बात करे चती अवहद कर अचना में राजाश्च्रेयक उलास अच्छे मुल्लाक अख्रमनक राजनी तिक पीडा आचे आँ मैठिली पदावली में की आची उते त, सर्व रारा वर्ग का दर्द आची अगर ब्राह्म्मिद बाबर जाद्टिका कवी चला आहुंकर गीत के बिदापत नाच जिवित राख्लक मुदा तक्हन इस संसक्ट्र बाबर जाद्टिका अगर ब्राह्मिद बाबर जाद्टिका कवी चला आहुंकर गीत के बिदापत नाच जिवित राख्लक अनान्तर परम्पराकगे गेर ब्रहमिद वा भाबर जातिका कवी चला आहुंकर गीत के बिदापत नाच जीवित राखलक मुदद तकहन इस संस्क्रित के विद्यापती तख्कुर के रहुंकर जगा कोनास्तापित का दिलगेला उत की कही चेख अप्रोप्रीयेशन वा सान्सक्रतिक अदिग्रानक लिएश्साचल जखन बंगाली विध्वान राज्क्रिष्ट मुखो पाद्ध्याय अन नगेंद्रनात गुप्त इग खोज कयली जे पदावली मित्ला कची तकन तत्कालीन सम्व्रान्त वर्ग, हद्बडी में संस्क्रित का विद्यापती तख्कुर के ओई पदावली कर अचाईता गुषित का दिलनिस. मैंने हुनका मात्ठा पर पाग पहराक, हम मर्विद्यापती बना लिल गेल. आई, इविशुद दिरूप सव इतिहासक वर्चस्वादी सन्रच्नाक बहस आची. हम सब इताई इस सावित नहीं करहल ची, जे इह अकाट्य सत्या ची. मुदा इप पोथी साहित्ये के पडबाक, जे एक ता आलोचनात्मक त्रिष्टी दैप ची, उक्रा नकारल नहीं जासकता था ची. बिल्कोल. आए द्रिक यी गहन चर्चा इतस पष्ट कदईत ची जे चाहे कोनो ग्रन्त हो. वेद हो, लाल्दासकरा माएड हो वा विद्ध्यापतिक पदावली. आप. उक्र अर्थ उही बात पर निरवर करे चे जे उक्रा पड़ेईवाला, अनुवाद करेईवाला, अस्वम्पादन करेईवाला लोक कर, अपन समाजिक चष्मा के हैं आची. एक दम सही. तश्रोता गरन लेल, सोचबाक लेल, एक ता अंतिम विचार्द का हम सभी चर्चा कथम करब. आई जे हम सब आपन भ्लोग वा सोषल मीट्या पोस्ट मेजे लिखी रहल ची जे हमर आजुक दिजितल फुट्प्रिंट आची आआ, सोचु जे पाज्सो साल बाद जकन भविश्यक कोनो आटिफिष्यल अईटलिजन्स या नवा समाज एकर अनुवाद करत, तकी हो हमर मुल भावना के पकडी पावत वाज, कोनो दोसर अन्वादक कर या कोनो अलगरिदमक चोटसन गलती सा हमर आए कर लिखल सत्य बहुष्षक लिखोनो बहानक मिधग बनी जते एक दम, की हमर यतारत बहुष्ष मे सही-सही दीकोड भहबावत यही विचारो तेजक प्रष्नक संगे आई हम सब एही ग़ज़चर चासः विदाले ची