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शादुल_भालु_आ_दू_एकड़_जमीन.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:16आँ, सुचु जे एक ता मानव स्त्री, अपने एक स्तन्से, अपने नवजात शिषू के दूद प्यारे चे थी, अब दोसर स्तन्से, एक ता भालुक बच्चा के, बापरे, इस सुन्ते में कते क अखल पनिया लागे तचे ना?
  2. 0:16–0:17आ, बलकल.
  3. 0:17–0:20मुदा इकोनो किवदन्ती वा गपनै आचे
  4. 0:20–0:23आज हमर सबख ये इगाहन चरचा आची
  5. 0:23–0:24मने इजी दीब डाई वचे
  6. 0:24–0:28उ एहेव दर्दनाक आसत दे गचना पर आदारे तचे
  7. 0:28–0:29इग्दाम
  8. 0:29–0:32इग्दाखा हमरा सबख जिस सब्या समाजग कानून आचे
  9. 0:32–0:36अखर ने तिक्ता पर एक ता बहुत पएग प्रष्न ख़ा करेत अचे
  10. 0:36–0:37शाए कर लो
  11. 0:37–0:42हम सब बात कर रहल ची तेलगु साहित्यक एक कबद्द प्रसिद्द अपन्यास जिगरी का
  12. 0:42–0:45पेदिन्टी अशोग कुमार एकर मूल लेक्खच चाती
  13. 0:45–0:51अगजेंद्र ताकुरेक्रा सदालेल मित्र का नाम सा मेठली में अनुवाद केने चाती.
  14. 0:52–0:57मैं इत इक यह एक दा मनुश्श और उकर पोसल भालो का कता नहीं अझे.
  15. 0:57–1:01इह उही तक्रावक कता आचे अते एक देस आदनिग राज्जक का कानून आचे.
  16. 1:01–1:04अदो सर्दिस स्माजक परम्परा
  17. 1:04–1:07अजकन इदनो तक्राएत छे
  18. 1:07–1:10तो अकर सबसक्रूर कीमत
  19. 1:10–1:12के कर चुकाभे परिछ्ख
  20. 1:12–1:13यो हम सभाई देखाओ
  21. 1:13–1:16तो शुर्वात करे ची कलंदर समुदाय सा
  22. 1:16–1:17कलंदर समुदाय
  23. 1:17–1:19माने अगुमन्तू लोग
  24. 1:19–1:21जे पीड़िदर पीड़ि
  25. 1:31–1:33बशु सन्रक्षन लेल कडा कानून
  26. 1:34–1:37मतलब, भालु पक्डब वा उक्रा नचायब
  27. 1:37–1:38पुरन रूपस अवैध भोगेल
  28. 1:39–1:41देखो, हमरा सब के लागे तची
  29. 1:41–1:44जे पशु अदिकारक कानून्त जानवरक भलाई ले बनला चे
  30. 1:44–1:49मुदा एक ता उही भलाई के पाजाजे अंदारव ची, उकरा सुजा अनीत ची.
  31. 1:49–1:50व्हुू।
  32. 1:50–1:58सो चू इगे टिक भ्याना का ची, रातो रात आहक पुष्तेइनी पेशा, आहक पहचान, सब गेर कानूनी गोषिद भाजाए.
  33. 1:58–2:02अग खलिन्दर लोग की करता, अपन परिवारक पेट कोना बहरता
  34. 2:02–2:06भिल्कुल, इख येखटा पेशाक अंत नहीं चल
  35. 2:06–2:09इग टा पुरा समुदायक पेट पर लाप मारव चल
  36. 2:09–2:12जा हम एक रा एक ता रूपक सबूजी
  37. 2:12–2:18अगर दोजर यह दोजर ज़ा लगाज नहीं ज़ा लगाज नहीं ज़ा उखाडी देटाखाज
  38. 2:18–2:25इक दम सहीं, कलंदर समुदाई भालुग भीज च्या नहीं अगर दोजर ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा च्या दोजर ज़ा प्रादाग नहीं
  39. 2:25–2:29इसे दोस्रा सज्ड़ाल अची उसीदे जरी सा उखाडी देत अची
  40. 2:29–2:30एक दम सही
  41. 2:30–2:35कलंदर समुदाई भालुग भीजे समबंद चे
  42. 2:35–2:38उवही गजिन जंगल के लत्ती जका चे
  43. 2:38–2:42तब कता केंद्र में जे परीवार अचे
  44. 2:42–2:46इमाम, हुंकार पतनी, भीभम्म, बेटा चान
  45. 2:46–2:49आ एक तब हालु, शादूल
  46. 2:49–2:52आ इस शादूल कोनो सादारन जानवर नही आची
  47. 2:52–2:55उ बीस वरस सव उही परिवारक संगे आची
  48. 2:55–2:58मानुश के भीच रहक, जंगल के जीवन
  49. 2:58–3:00पुन रुप सब भिसरी चुकलग
  50. 3:00–3:04मुदा कानून के नजरी मेता इमाम अप्रादी चत्थी नही
  51. 3:04–3:07कारन, उएक ता भालु के बन्दी बना के रकने चाती?
  52. 3:07–3:12हाँ. कानूनक लेल उबन्दी आची, मुदा इमामक लेल शादुल बन्दी नहीं,
  53. 3:12–3:14बलकी परिवारक जेट बेता आची.
  54. 3:14–3:21इक ता अदिवासी गुमन्तू परीवेश अतत्ता कतित मुखेदारक समाजक बीच कसीदा तकर आवाच
  55. 3:21–3:24आप रहे हमेशा कमजोरो खोईता ची
  56. 3:24–3:30मुदा जकन पेट के आगी आग गरी भी सोजा आवाईता ची
  57. 3:30–3:33तकन तपैग सा पैग बन्धन सेहो तुटी जाईता ची
  58. 3:33–3:40बलकोल. आ एतेईसा इबाये सामाजिक संकत इमामक गरग भीतर एक तबयानक पारिवारी ध्वन्द बनी जाईतच.
  59. 3:40–3:42आ, जकनु अदिकारी आवाईतचे.
  60. 3:43–3:46मंडल राजच्व अदिकारी, जक्रा एमारो कहल गल जे,
  61. 3:46–3:50उ इमामक पर्वार के दो एकर जमीन का पट्टदेबाक प्रस्तावर अगच्छती.
  62. 3:50–3:57मदसर्त इरहीतच जे उसब के शादुल, मने उही भालु के रदाबे पडद.
  63. 3:57–4:04आ, इदूए एकर जमीन, इकोनो चोट बात्त नहीं आचे एही सीमान्द समुदायोक लेल.
  64. 4:04–4:06एकर की आद्ता ची हूंकर सब कर लेल?
  65. 4:06–4:09एमारू उते केवल एक टा अदिकारी नहीं आची
  66. 4:09–4:12उगो राज्य सथ्टाक छेहरा आची
  67. 4:12–4:15एक टा आफन समुदाय जिक्रा गाँक लोग पकीर
  68. 4:15–4:17वा मांगे वाला बुजेत आची
  69. 4:17–4:21उकर लेल इी दूई एकर जमीन जीवन्दान अची
  70. 4:21–4:27मने पहल बार समाज में एक ता स्ताई और सम्मानित नगरिक बन बाक मोगा
  71. 4:27–4:31एक दम! मता इी राज्य सत्ताक देया मुप्त नहीं आची
  72. 4:31–4:36एकर सर्त अची अपन अटी तक अपन वाफादार सातिक बलिदान
  73. 4:36–4:40इमाम तशादूल के बेज्बाक वाज्चोडबाक लेर गाँँगाँँगुरे चतिन
  74. 4:40–4:44मदो कानुन लक दरसां क्योगर नहीं लेत छी
  75. 4:44–4:48तब हारी का उशादूल के वापस गर लोब एच चतिन
  76. 4:48–4:50आजे कन इमाम वापस आवेच चतिन
  77. 4:50–4:53उ गर रक दूश बद विचलित करे वाला आची
  78. 4:53–4:57स्रोद समगरी में एक ता गजब विरोदा बहास आची
  79. 4:57–5:00आआ, उस सुगंद और दूर्गंदख तक्रा आची
  80. 5:00–5:04भिल्कुल, गर में दूद आसेवे खीर बनेत रहीत आची
  81. 5:04–5:09खिरक मदूर सुगन्त, अदूसर दिस भालुक पुरान् दूर्गन्त,
  82. 5:09–5:14इकेवल गंदध्तक्रान नहीं आची, इन नव आशा अ पुरान् यदार्तक्तक्राची.
  83. 5:14–5:20आभी बम्मा आचान्द, औस आप तो उही दो एकर जमीन लेल इतेक आतुर जतीन,
  84. 5:20–5:23जे शादूल के वापस देक के पागल बोजाएच है
  85. 5:23–5:26चान्त उ जमीन पर कुकुट पालन
  86. 5:26–5:28मैंने पूल्ट्री फाम खोला चाहता ची
  87. 5:28–5:31उशादूल के वापस नहीं देका चाहता ची
  88. 5:31–5:33चान्त इते क्रोदित होगी तची
  89. 5:33–5:36जे उशादूल के जीोते गार दिबाकलेल काती
  90. 5:36–5:44बाप्रे सोचु एक ता बेटा उही भालु के जीवोते गाडा लेल तधयार अची जेकर संगे उपाएग बहल अची
  91. 5:45–5:47इस सूनीते में कते क्रूर लागत अची
  92. 5:48–5:49लागत ता अची
  93. 5:50–5:54मुदा जा हम चान्द आबिबम्मा क्रूरताक पाचाक मनोविग्यान देखी
  94. 5:54–5:57अगाग मत्लव अची औदरीद्रता से मुक्ती पावे वाला बात
  95. 5:57–6:00आख, जीवन बहरी भोख जेल्लाक बाद
  96. 6:00–6:03जा अस्ताई जीवनक मुक्का बहिते तची
  97. 6:03–6:07तची बाज्बाक लाल्सा वा लालच जागवत बहुत स्वाबावी कचे
  98. 6:07–6:09ये एक ता हताश प्रयास छे
  99. 6:09–6:12अप्तद बहुत स्वाभीक अचे, ये एक ता हताश प्रयास छे.
  100. 6:12–6:16सही कालू, चान्द आप तमाशा देखा के भीक नहीं मागे चाहता चे.
  101. 6:16–6:20उमुक्य दाराक अर्ठवास्ता कहस्सा बनाई चाहता चे.
  102. 6:20–6:22मुदद दोसर दिस इमाम चात्फीं.
  103. 6:22–6:24इमाम चान्द के तोगगष्थें
  104. 6:24–6:27जे सादूल कनियो दोसरक श्रम नहीं चोरे लक
  105. 6:28–6:30जकन की मनुश्ष स्वार्थी होई तोछी
  106. 6:30–6:34इमामक इगठ मनुश्ष जातिक स्वार्थ पर पैग चोट अची
  107. 6:35–6:36उदिखी रोहल चन्थें
  108. 6:36–6:38जु दूई एकर जमीन कल ले
  109. 6:38–6:44प्रलोबन भिट्ते कोना मनुश्व आपन सबह से वफादार सात्फी के मारे लिल तयार बगल.
  110. 6:44–6:48आ, इमामक इप्रेम, इकोनो बस भावुखता नहीं आची.
  111. 6:48–6:54एकवर ज़ी बद गेरी आची, जे भीस साल के सहा अस्तित्वपर बनल आची.
  112. 6:54–7:01आउ जेडी कती ग़ेरी आची इतकन बुजाएत आची जकन हम सब आती तक औही फ्लेश्बैक में जाएची.
  113. 7:01–7:03बीस साल पहले को गगतना
  114. 7:03–7:06उप फ्लेश्बैक तर रुंक्ते ताड़ा कर दे तची
  115. 7:06–7:11इमाम अ भीविम्मा चान्दनी रात मे जंगल मे भालु कषिकार करे जाएच्छतीन.
  116. 7:12–7:18आ, उसब देखे च्छन, जे एक ता माय भालु इप्पा गाचक फुल अ तारी पीव रहल अच्छी.
  117. 7:18–7:23आजकन इमामक जाल मे उ बच्छा भालु जे बाद में शादूल बने तची,
  118. 7:23–7:27उ पझेसे ही तची, तची माई भालु क्रोद से जब्टे ही तची
  119. 7:27–7:31मुदद भीभिम्मा तुरन्त ताल कब आजी जरा कवक्रा बगादे ची
  120. 7:31–7:35मुदद वक्रा भाजे होई तची, उ सबह से आश्चर जनक अची
  121. 7:35–7:39हा, इमाम उई बच्चा भालु के शान्त करबाक लेल
  122. 7:39–7:43उक्रा मूँ में ताडी मैं देशी शराब उडेली देच्छतीं.
  123. 7:43–7:47दिखू इक कलंदर समुदायक आपन पारमपर इग्यान चल,
  124. 7:47–7:51जानमर के वष्मे करबाक लेल उप्रक्रितिक के हत्यार बने लक.
  125. 7:51–7:55मुदा अस्ली दर्दना गटना उकर बाद गटल,
  126. 7:55–7:59जखन उ बच्चा भालु बिमार पडिगेल, मरन सन भागेल
  127. 7:59–8:06एक दम उ जंगल सा लग भही के हद्दिक दाचा बनी गेल, गाई भहेंस के दूद उक्रा पचाइत नी चल
  128. 8:06–8:16आतकने उ अकल्पनी अ गतन गतल, बीबम्मा अपन एकता स्तन्सा अपन भेटा चान्द के, आत दो सर स्तन्सा भालुग बच्चा शादूल के दूध पियोलिन.
  129. 8:16–8:20इसी मान्तलोक सह अस्तित्वका चरम उदारना ची
  130. 8:20–8:24बीवम्मा लेल भालु आवकर बेटा मे कुनो भेदनी रहल
  131. 8:24–8:27उआपना प्रजातिक सीमा लांगी बिल चली ए.
  132. 8:27–8:31सोचुता जाही भालु के बीवम्मा अपन दूद प्यालनी
  133. 8:31–8:33अपन रकत सजीवन दल नहीं
  134. 8:33–8:39जग्रा जम्यनक तुक्रा लेल जीयते गारबाक लेल तट्यार चातिं यी विरोदा भास दिमाक की सुन्का देता थी
  135. 8:39–8:48आ इहो ता सोचु जे जग्रन गाम में अकाल पडल चल, लोग भोख्सा मरी रहल चल, तकनी शादूली चल, जे परिवारक पेट बर लक?
  136. 8:48–8:56अग, शादुल आपन खेल देखा कब यान लग, माने जेक्रा मनुश्ष्ष पोसलग, अकाल मे उ जान्वर मनुश्ष्षपालग बनी गेल.
  137. 8:56–9:03शादुल कोनो जंगली जान्वर नहीरहल, उ चान्दा सांगे खेलग चल, मनुशक भाशा बुज़इ चल.
  138. 9:03–9:11मुदा अत्तिक इहे बन्दनक बादो, वर्त मानक राती में जे भह रहल अची, उ मानव सवबावक सब से अंदार पक्ष्छ देखा रहल अची.
  139. 9:11–9:18बल्कुल, चान्द शादूल के उही गड्ड्ड्डामे दखेल बाक प्रयास करे तची, जे ओ उक्रा गाले लेल खुनने आची.
  140. 9:18–9:23आईी द्रिश्छ बाप्रे शादूल जे एक दिन से च्प्छाप सही रहल चल,
  141. 9:23–9:29उकर अखर अखर सुप्त जंगली व्रित्ती जागी जाए तची,
  142. 9:29–9:31बहालु चानपर हावी भोजाए तची.
  143. 9:31–9:36आए उचान्द के पचाडे का उकर गर्दनान आपन मुमे पक्रि ले तची,
  144. 9:36–9:40चान्द का जान संकत मैं आची, वी भम्मा तदपी रहल चाती.
  145. 9:40–9:45मुदा तकने, एक ता चमतकार हुई तची, एमाम चिल लएच छती, शादूल.
  146. 9:45–9:49आो भालु तुरन्त आपन शिकारिक गर्दनन छूडी दे तची,
  147. 9:49–9:52मात्र आपन मालिक क एक ता अवाज पर.
  148. 9:52–9:57सोचु जे एक्ता जान्वर अपन व्रित्ती पर विजे प्राप्त्ते लेलक
  149. 9:57–10:00मुदा मनुश्य चान्द नहीं रुकेत अची
  150. 10:00–10:05नहीं चान्द बच्लाक बादो रस्सा लोग आत्महत्या कदम्की दे तची
  151. 10:05–10:08उक्छे तची जे याते शादुल रहत या हम
  152. 10:08–10:15इमाम एक टा एहन दोरहा पर ख़ा चती जदे कोनु विकल्प नहीं आचें
  153. 10:15–10:20एक दिस सगर बेटा दूसर दिस बीस साल से पोसर गालू।
  154. 10:20–10:25एमारो कषर्त जमीनग पट्ता पतनिक विलाप आप भेटाग ध्वम की
  155. 10:25–10:28इमाम चारो दिस सक हिराय जाए चती
  156. 10:28–10:33अई अन्तता इमाम के एक तक कदोर रिदे विदारक निने लेवे परे च्याएक
  157. 10:33–10:37आउ निने म्रुत्ति से हो बत्तर अचे
  158. 10:37–10:41इमाम अख्रा जियोते गाडाय से ता लामा कदाई च्याती
  159. 10:41–10:43मुदा अख्रा जंगल में च्योडवाक निने लेई च्याती
  160. 10:43–10:51असामान ने रुब से नहीं इमाम शादूल के उपीक च्याल अतमाकू कुवा का चोडवाक योजना बनाइ च्याती
  161. 10:51–10:55इपीक च्याल अतमाकू एकर के काज चे?
  162. 10:55–10:59इमिश्रन भालु के बोवा देपची माने पागल का देची
  163. 10:59–11:05जहेसा उ आपन स्म्रती, आपन याद्दाश्त रहादेत, आग खयो गर गुरी कन नहीं आभी पावत.
  164. 11:05–11:07इबात हमरा बद जगजोरी देलक.
  165. 11:07–11:11पहले इमाम शादूलक यो निच्छा मार्वाक लेल,
  166. 11:11–11:14ब्रमबदन्दी या उपीजका का जडी भूटी देलन ही,
  167. 11:14–11:17अब अगर याद्दाश्त मार्वाख्लेल
  168. 11:17–11:22अग, इस स्वदेशी चिकिच्या ज्यान के कते क्रूर उप्योग अची
  169. 11:22–11:28ज्यान जीवन रक्षक चल आयो जीवित प्रानी के पहचान च्हिन वाख्लेल प्रियोग बहुर अची
  170. 11:28–11:34माने, इमाम जनची ती जे जै शादूल के याद रहत, तो उवापस आवी जाएर.
  171. 11:34–11:38बलकु, मुदा इस मरत छिनाई कोनो दयान नहीं आची.
  172. 11:38–11:46जे भालु भीस साल मानुस के बोजन खेलक, जे करा शिकार करब नहीं अवे च्यक, उजंगल में कोना जीयत.
  173. 11:46–11:48अद्दुखद अन्त अद्दे समाप्त नहीं होईताची
  174. 11:48–11:52जक्चन इमाम अन्त्म बेर शादूलक मुँपर हाथ फेरे च्छतीं
  175. 11:52–11:54तो हुँँख अह्सास होईताची
  176. 11:54–11:57जे शादूल के कान के सोना चान्दी के बाली गाए बची
  177. 11:57–11:59आप चान्द अहो निकाली लेने आची
  178. 11:59–12:02अम अंतिम बेर शादुलक मुबपर हाथ फेरे च्छतिम
  179. 12:02–12:07तो हुंका कहजास होई तची, जे शादुल के कान के सोना चांदी के बाली गाए बची
  180. 12:07–12:10आँ, चांद औहो निकाली लेने आची
  181. 12:10–12:13चांद भालु के गर से तन निकाली रहा लगी
  182. 12:13–12:17अकर महनत से कमायल अंतिम निशानीष से हो चीने रहल अची
  183. 12:17–12:23अबाली जे शादूल मला रेदीजका पहल्वान के दरा कजीतना चल, अकर श्रमक प्रतीक शल
  184. 12:23–12:27चान्दक इखाज मान्वताक अंतिम पतन दिखा बैत अची
  185. 12:27–12:30लालच नव्युवक के इतेक निष्टूर बनादे लक,
  186. 12:30–12:34जे उ उ ही बहलुक न्यूंतम सम्मान से हो नहीके लक,
  187. 12:34–12:36जिक्रा कमाई से उ पलल अचे.
  188. 12:36–12:39आ, इमा मी देखी का कानी उठैच्छत,
  189. 12:39–12:42उ अश्श्व केवल बहलुक विदाएक नहीं आची,
  190. 12:42–12:45अआपन परिवारक आपन मुल्यक पतन्गष्रू अची
  191. 12:45–12:46बिल्ल्कुल सही
  192. 12:46–12:48इपूरी चर्चा
  193. 12:48–12:50सदालेल मित्रक इग कता
  194. 12:50–12:52हम्रा सब के इस्पस्ट देखार अल अची
  195. 12:52–12:54जे तता कतित विकास
  196. 12:54–12:55और कानुन कनीचा
  197. 12:55–12:58कतिक दर्ध दबआब जाए तची
  198. 12:58–13:01कलंदर समदाया और उकर जान्वर का इवियोग,
  199. 13:01–13:03इकोनो एक्ता परिवारक दुखान्त नहीं है,
  200. 13:03–13:05एक्ता पुरा युख का अन्त ची.
  201. 13:05–13:09सरकार कागच पर साव कानून बना दे तची,
  202. 13:09–13:12मुदद जमीन पर उकर मानवी एकिमत की होई तची.
  203. 13:12–13:15इवातानु पूलित कम्रा में बैसलोक नाई भूजी सके चदिः।
  204. 13:15–13:18आ, उही आदूनिक्ता का गती में
  205. 13:18–13:23सीमान्त लोक के परमपरा और सा अस्तिट्व का गजंजंगल नस्ट बाजाई तची
  206. 13:23–13:28आ, सबसे बशी पीडा उक्रा होई तची जे भेजुबान अची
  207. 13:28–13:31जे आपना लेल लड़ने सके तची जणा शादूल
  208. 13:31–13:35एक्दम, तए ते से एक ता बहुत प्यग प्रश्न उठहेता ची,
  209. 13:35–13:38जे हम्रा सब के लेल एक ता गेर चिंतनक विशया ची.
  210. 13:38–13:39हा, कहू?
  211. 13:39–13:43जग्खन कोनो प्रनालीगत कानुन, पशु सबख,
  212. 13:43–13:46स्वतन्त्रता और सन्रक्षन का लेल बनेता ची,
  213. 13:46–13:55तक की यो ब्यवस्त्ता यी भूजाईत आची, जे अकर दया कतू कोनो प्रानिक लिल यातनात नहीं रहा लाची.
  214. 13:55–13:57यी बहुत महतपून बात आची.
  215. 13:57–14:04जे जान्वर भीस वरष्स मानव समाजक हिस्सा आची, जे अपन व्रित्ती भिसरी चुकला आची.
  216. 14:04–14:08अखरा ज़ी भूटी सब पागल कग जंगल में चोडनाए,
  217. 14:08–14:10की अखर स्वाटन्द्रता अची,
  218. 14:10–14:12वा दिमा दर्दनाक म्रित्यो,
  219. 14:12–14:14की नियाय और कानुनक आएक,
  220. 14:14–14:18एहन जटिल अबहावनात्मक सत्टिके देखि पावित अची.
  221. 14:18–14:21शादोल क सुनापन और इमामक अश्रू,
  222. 14:34–14:37जाही पर सबके विचार करवा कावष्ख्टाजी

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आँ, सुचु जे एक ता मानव स्त्री, अपने एक स्तन्से, अपने नवजात शिषू के दूद प्यारे चे थी, अब दोसर स्तन्से, एक ता भालुक बच्चा के, बापरे, इस सुन्ते में कते क अखल पनिया लागे तचे ना? आ, बलकल. मुदा इकोनो किवदन्ती वा गपनै आचे आज हमर सबख ये इगाहन चरचा आची मने इजी दीब डाई वचे उ एहेव दर्दनाक आसत दे गचना पर आदारे तचे इग्दाम इग्दाखा हमरा सबख जिस सब्या समाजग कानून आचे अखर ने तिक्ता पर एक ता बहुत पएग प्रष्न ख़ा करेत अचे शाए कर लो हम सब बात कर रहल ची तेलगु साहित्यक एक कबद्द प्रसिद्द अपन्यास जिगरी का पेदिन्टी अशोग कुमार एकर मूल लेक्खच चाती अगजेंद्र ताकुरेक्रा सदालेल मित्र का नाम सा मेठली में अनुवाद केने चाती. मैं इत इक यह एक दा मनुश्श और उकर पोसल भालो का कता नहीं अझे. इह उही तक्रावक कता आचे अते एक देस आदनिग राज्जक का कानून आचे. अदो सर्दिस स्माजक परम्परा अजकन इदनो तक्राएत छे तो अकर सबसक्रूर कीमत के कर चुकाभे परिछ्ख यो हम सभाई देखाओ तो शुर्वात करे ची कलंदर समुदाय सा कलंदर समुदाय माने अगुमन्तू लोग जे पीड़िदर पीड़ि बशु सन्रक्षन लेल कडा कानून मतलब, भालु पक्डब वा उक्रा नचायब पुरन रूपस अवैध भोगेल देखो, हमरा सब के लागे तची जे पशु अदिकारक कानून्त जानवरक भलाई ले बनला चे मुदा एक ता उही भलाई के पाजाजे अंदारव ची, उकरा सुजा अनीत ची. व्हुू। सो चू इगे टिक भ्याना का ची, रातो रात आहक पुष्तेइनी पेशा, आहक पहचान, सब गेर कानूनी गोषिद भाजाए. अग खलिन्दर लोग की करता, अपन परिवारक पेट कोना बहरता भिल्कुल, इख येखटा पेशाक अंत नहीं चल इग टा पुरा समुदायक पेट पर लाप मारव चल जा हम एक रा एक ता रूपक सबूजी अगर दोजर यह दोजर ज़ा लगाज नहीं ज़ा लगाज नहीं ज़ा उखाडी देटाखाज इक दम सहीं, कलंदर समुदाई भालुग भीज च्या नहीं अगर दोजर ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा ज़ा च्या दोजर ज़ा प्रादाग नहीं इसे दोस्रा सज्ड़ाल अची उसीदे जरी सा उखाडी देत अची एक दम सही कलंदर समुदाई भालुग भीजे समबंद चे उवही गजिन जंगल के लत्ती जका चे तब कता केंद्र में जे परीवार अचे इमाम, हुंकार पतनी, भीभम्म, बेटा चान आ एक तब हालु, शादूल आ इस शादूल कोनो सादारन जानवर नही आची उ बीस वरस सव उही परिवारक संगे आची मानुश के भीच रहक, जंगल के जीवन पुन रुप सब भिसरी चुकलग मुदा कानून के नजरी मेता इमाम अप्रादी चत्थी नही कारन, उएक ता भालु के बन्दी बना के रकने चाती? हाँ. कानूनक लेल उबन्दी आची, मुदा इमामक लेल शादुल बन्दी नहीं, बलकी परिवारक जेट बेता आची. इक ता अदिवासी गुमन्तू परीवेश अतत्ता कतित मुखेदारक समाजक बीच कसीदा तकर आवाच आप रहे हमेशा कमजोरो खोईता ची मुदा जकन पेट के आगी आग गरी भी सोजा आवाईता ची तकन तपैग सा पैग बन्धन सेहो तुटी जाईता ची बलकोल. आ एतेईसा इबाये सामाजिक संकत इमामक गरग भीतर एक तबयानक पारिवारी ध्वन्द बनी जाईतच. आ, जकनु अदिकारी आवाईतचे. मंडल राजच्व अदिकारी, जक्रा एमारो कहल गल जे, उ इमामक पर्वार के दो एकर जमीन का पट्टदेबाक प्रस्तावर अगच्छती. मदसर्त इरहीतच जे उसब के शादुल, मने उही भालु के रदाबे पडद. आ, इदूए एकर जमीन, इकोनो चोट बात्त नहीं आचे एही सीमान्द समुदायोक लेल. एकर की आद्ता ची हूंकर सब कर लेल? एमारू उते केवल एक टा अदिकारी नहीं आची उगो राज्य सथ्टाक छेहरा आची एक टा आफन समुदाय जिक्रा गाँक लोग पकीर वा मांगे वाला बुजेत आची उकर लेल इी दूई एकर जमीन जीवन्दान अची मने पहल बार समाज में एक ता स्ताई और सम्मानित नगरिक बन बाक मोगा एक दम! मता इी राज्य सत्ताक देया मुप्त नहीं आची एकर सर्त अची अपन अटी तक अपन वाफादार सातिक बलिदान इमाम तशादूल के बेज्बाक वाज्चोडबाक लेर गाँँगाँँगुरे चतिन मदो कानुन लक दरसां क्योगर नहीं लेत छी तब हारी का उशादूल के वापस गर लोब एच चतिन आजे कन इमाम वापस आवेच चतिन उ गर रक दूश बद विचलित करे वाला आची स्रोद समगरी में एक ता गजब विरोदा बहास आची आआ, उस सुगंद और दूर्गंदख तक्रा आची भिल्कुल, गर में दूद आसेवे खीर बनेत रहीत आची खिरक मदूर सुगन्त, अदूसर दिस भालुक पुरान् दूर्गन्त, इकेवल गंदध्तक्रान नहीं आची, इन नव आशा अ पुरान् यदार्तक्तक्राची. आभी बम्मा आचान्द, औस आप तो उही दो एकर जमीन लेल इतेक आतुर जतीन, जे शादूल के वापस देक के पागल बोजाएच है चान्त उ जमीन पर कुकुट पालन मैंने पूल्ट्री फाम खोला चाहता ची उशादूल के वापस नहीं देका चाहता ची चान्त इते क्रोदित होगी तची जे उशादूल के जीोते गार दिबाकलेल काती बाप्रे सोचु एक ता बेटा उही भालु के जीवोते गाडा लेल तधयार अची जेकर संगे उपाएग बहल अची इस सूनीते में कते क्रूर लागत अची लागत ता अची मुदा जा हम चान्द आबिबम्मा क्रूरताक पाचाक मनोविग्यान देखी अगाग मत्लव अची औदरीद्रता से मुक्ती पावे वाला बात आख, जीवन बहरी भोख जेल्लाक बाद जा अस्ताई जीवनक मुक्का बहिते तची तची बाज्बाक लाल्सा वा लालच जागवत बहुत स्वाबावी कचे ये एक ता हताश प्रयास छे अप्तद बहुत स्वाभीक अचे, ये एक ता हताश प्रयास छे. सही कालू, चान्द आप तमाशा देखा के भीक नहीं मागे चाहता चे. उमुक्य दाराक अर्ठवास्ता कहस्सा बनाई चाहता चे. मुदद दोसर दिस इमाम चात्फीं. इमाम चान्द के तोगगष्थें जे सादूल कनियो दोसरक श्रम नहीं चोरे लक जकन की मनुश्ष स्वार्थी होई तोछी इमामक इगठ मनुश्ष जातिक स्वार्थ पर पैग चोट अची उदिखी रोहल चन्थें जु दूई एकर जमीन कल ले प्रलोबन भिट्ते कोना मनुश्व आपन सबह से वफादार सात्फी के मारे लिल तयार बगल. आ, इमामक इप्रेम, इकोनो बस भावुखता नहीं आची. एकवर ज़ी बद गेरी आची, जे भीस साल के सहा अस्तित्वपर बनल आची. आउ जेडी कती ग़ेरी आची इतकन बुजाएत आची जकन हम सब आती तक औही फ्लेश्बैक में जाएची. बीस साल पहले को गगतना उप फ्लेश्बैक तर रुंक्ते ताड़ा कर दे तची इमाम अ भीविम्मा चान्दनी रात मे जंगल मे भालु कषिकार करे जाएच्छतीन. आ, उसब देखे च्छन, जे एक ता माय भालु इप्पा गाचक फुल अ तारी पीव रहल अच्छी. आजकन इमामक जाल मे उ बच्छा भालु जे बाद में शादूल बने तची, उ पझेसे ही तची, तची माई भालु क्रोद से जब्टे ही तची मुदद भीभिम्मा तुरन्त ताल कब आजी जरा कवक्रा बगादे ची मुदद वक्रा भाजे होई तची, उ सबह से आश्चर जनक अची हा, इमाम उई बच्चा भालु के शान्त करबाक लेल उक्रा मूँ में ताडी मैं देशी शराब उडेली देच्छतीं. दिखू इक कलंदर समुदायक आपन पारमपर इग्यान चल, जानमर के वष्मे करबाक लेल उप्रक्रितिक के हत्यार बने लक. मुदा अस्ली दर्दना गटना उकर बाद गटल, जखन उ बच्चा भालु बिमार पडिगेल, मरन सन भागेल एक दम उ जंगल सा लग भही के हद्दिक दाचा बनी गेल, गाई भहेंस के दूद उक्रा पचाइत नी चल आतकने उ अकल्पनी अ गतन गतल, बीबम्मा अपन एकता स्तन्सा अपन भेटा चान्द के, आत दो सर स्तन्सा भालुग बच्चा शादूल के दूध पियोलिन. इसी मान्तलोक सह अस्तित्वका चरम उदारना ची बीवम्मा लेल भालु आवकर बेटा मे कुनो भेदनी रहल उआपना प्रजातिक सीमा लांगी बिल चली ए. सोचुता जाही भालु के बीवम्मा अपन दूद प्यालनी अपन रकत सजीवन दल नहीं जग्रा जम्यनक तुक्रा लेल जीयते गारबाक लेल तट्यार चातिं यी विरोदा भास दिमाक की सुन्का देता थी आ इहो ता सोचु जे जग्रन गाम में अकाल पडल चल, लोग भोख्सा मरी रहल चल, तकनी शादूली चल, जे परिवारक पेट बर लक? अग, शादुल आपन खेल देखा कब यान लग, माने जेक्रा मनुश्ष्ष पोसलग, अकाल मे उ जान्वर मनुश्ष्षपालग बनी गेल. शादुल कोनो जंगली जान्वर नहीरहल, उ चान्दा सांगे खेलग चल, मनुशक भाशा बुज़इ चल. मुदा अत्तिक इहे बन्दनक बादो, वर्त मानक राती में जे भह रहल अची, उ मानव सवबावक सब से अंदार पक्ष्छ देखा रहल अची. बल्कुल, चान्द शादूल के उही गड्ड्ड्डामे दखेल बाक प्रयास करे तची, जे ओ उक्रा गाले लेल खुनने आची. आईी द्रिश्छ बाप्रे शादूल जे एक दिन से च्प्छाप सही रहल चल, उकर अखर अखर सुप्त जंगली व्रित्ती जागी जाए तची, बहालु चानपर हावी भोजाए तची. आए उचान्द के पचाडे का उकर गर्दनान आपन मुमे पक्रि ले तची, चान्द का जान संकत मैं आची, वी भम्मा तदपी रहल चाती. मुदा तकने, एक ता चमतकार हुई तची, एमाम चिल लएच छती, शादूल. आो भालु तुरन्त आपन शिकारिक गर्दनन छूडी दे तची, मात्र आपन मालिक क एक ता अवाज पर. सोचु जे एक्ता जान्वर अपन व्रित्ती पर विजे प्राप्त्ते लेलक मुदा मनुश्य चान्द नहीं रुकेत अची नहीं चान्द बच्लाक बादो रस्सा लोग आत्महत्या कदम्की दे तची उक्छे तची जे याते शादुल रहत या हम इमाम एक टा एहन दोरहा पर ख़ा चती जदे कोनु विकल्प नहीं आचें एक दिस सगर बेटा दूसर दिस बीस साल से पोसर गालू। एमारो कषर्त जमीनग पट्ता पतनिक विलाप आप भेटाग ध्वम की इमाम चारो दिस सक हिराय जाए चती अई अन्तता इमाम के एक तक कदोर रिदे विदारक निने लेवे परे च्याएक आउ निने म्रुत्ति से हो बत्तर अचे इमाम अख्रा जियोते गाडाय से ता लामा कदाई च्याती मुदा अख्रा जंगल में च्योडवाक निने लेई च्याती असामान ने रुब से नहीं इमाम शादूल के उपीक च्याल अतमाकू कुवा का चोडवाक योजना बनाइ च्याती इपीक च्याल अतमाकू एकर के काज चे? इमिश्रन भालु के बोवा देपची माने पागल का देची जहेसा उ आपन स्म्रती, आपन याद्दाश्त रहादेत, आग खयो गर गुरी कन नहीं आभी पावत. इबात हमरा बद जगजोरी देलक. पहले इमाम शादूलक यो निच्छा मार्वाक लेल, ब्रमबदन्दी या उपीजका का जडी भूटी देलन ही, अब अगर याद्दाश्त मार्वाख्लेल अग, इस स्वदेशी चिकिच्या ज्यान के कते क्रूर उप्योग अची ज्यान जीवन रक्षक चल आयो जीवित प्रानी के पहचान च्हिन वाख्लेल प्रियोग बहुर अची माने, इमाम जनची ती जे जै शादूल के याद रहत, तो उवापस आवी जाएर. बलकु, मुदा इस मरत छिनाई कोनो दयान नहीं आची. जे भालु भीस साल मानुस के बोजन खेलक, जे करा शिकार करब नहीं अवे च्यक, उजंगल में कोना जीयत. अद्दुखद अन्त अद्दे समाप्त नहीं होईताची जक्चन इमाम अन्त्म बेर शादूलक मुँपर हाथ फेरे च्छतीं तो हुँँख अह्सास होईताची जे शादूल के कान के सोना चान्दी के बाली गाए बची आप चान्द अहो निकाली लेने आची अम अंतिम बेर शादुलक मुबपर हाथ फेरे च्छतिम तो हुंका कहजास होई तची, जे शादुल के कान के सोना चांदी के बाली गाए बची आँ, चांद औहो निकाली लेने आची चांद भालु के गर से तन निकाली रहा लगी अकर महनत से कमायल अंतिम निशानीष से हो चीने रहल अची अबाली जे शादूल मला रेदीजका पहल्वान के दरा कजीतना चल, अकर श्रमक प्रतीक शल चान्दक इखाज मान्वताक अंतिम पतन दिखा बैत अची लालच नव्युवक के इतेक निष्टूर बनादे लक, जे उ उ ही बहलुक न्यूंतम सम्मान से हो नहीके लक, जिक्रा कमाई से उ पलल अचे. आ, इमा मी देखी का कानी उठैच्छत, उ अश्श्व केवल बहलुक विदाएक नहीं आची, अआपन परिवारक आपन मुल्यक पतन्गष्रू अची बिल्ल्कुल सही इपूरी चर्चा सदालेल मित्रक इग कता हम्रा सब के इस्पस्ट देखार अल अची जे तता कतित विकास और कानुन कनीचा कतिक दर्ध दबआब जाए तची कलंदर समदाया और उकर जान्वर का इवियोग, इकोनो एक्ता परिवारक दुखान्त नहीं है, एक्ता पुरा युख का अन्त ची. सरकार कागच पर साव कानून बना दे तची, मुदद जमीन पर उकर मानवी एकिमत की होई तची. इवातानु पूलित कम्रा में बैसलोक नाई भूजी सके चदिः। आ, उही आदूनिक्ता का गती में सीमान्त लोक के परमपरा और सा अस्तिट्व का गजंजंगल नस्ट बाजाई तची आ, सबसे बशी पीडा उक्रा होई तची जे भेजुबान अची जे आपना लेल लड़ने सके तची जणा शादूल एक्दम, तए ते से एक ता बहुत प्यग प्रश्न उठहेता ची, जे हम्रा सब के लेल एक ता गेर चिंतनक विशया ची. हा, कहू? जग्खन कोनो प्रनालीगत कानुन, पशु सबख, स्वतन्त्रता और सन्रक्षन का लेल बनेता ची, तक की यो ब्यवस्त्ता यी भूजाईत आची, जे अकर दया कतू कोनो प्रानिक लिल यातनात नहीं रहा लाची. यी बहुत महतपून बात आची. जे जान्वर भीस वरष्स मानव समाजक हिस्सा आची, जे अपन व्रित्ती भिसरी चुकला आची. अखरा ज़ी भूटी सब पागल कग जंगल में चोडनाए, की अखर स्वाटन्द्रता अची, वा दिमा दर्दनाक म्रित्यो, की नियाय और कानुनक आएक, एहन जटिल अबहावनात्मक सत्टिके देखि पावित अची. शादोल क सुनापन और इमामक अश्रू, जाही पर सबके विचार करवा कावष्ख्टाजी

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