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गोहि_सभक_बीच_जलसमाधि.mp4
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- 0:00–0:13नमशकार, आई हम्रा सब गजेंद्र ताकृरेक लिखल एक ता बहुत चर्छित, गहन, और इक्दम जादूई यतार्ट्वाद सब रल मैठली उपन्यासक कता विस्लेषन करब, नाम अच्छे गोहिक सबबख भीच जल समादी.
- 0:13–0:16सच कहीराल ची, इकोनो सादारन कदा नहीं आच,
- 0:16–0:18इक टा एक एक एहन साहित टेक यात्रा आचे,
- 0:18–0:23जे वास्तविक्ता ककतू सत्त्य, अप्रक्रतिक इस्म्रती के भीच जूले तचे.
- 0:23–0:25तचलू, बिना कोनो देरी के ने,
- 0:25–0:33यही जादूई यतार्थ वादक गाराई में उत्री अदिकोट करेख ची, जे अखिर एग कता हमरा सब के की कह चाहत ची.
- 0:33–0:38कताक शुरूवात में, हे एग पाती देखू, एग लाईन मून में बैस्या वलाचे.
- 0:38–0:44जे सत्या देख़तति अच्छुप रहेतति उकर म्रित्यो दुईबार होईतति
- 0:44–0:46एक भेर देहिक एक भेर आत्माक
- 0:46–0:53सोचो जा इएक ता पाति पूरा उपन्यास के दार्षनिक संगर्ष के हम्रा सबक सोजा राखी देटेची
- 0:53–1:00चुप्रहव अस्सत्तिबाजब एकर भीचक्जे लडाय अच्छी से इस सोचे पर मजबोर करेट अच्छी
- 1:00–1:03जिकी केवल शरीरिक कथम हुना ही म्रित्टिव थेक
- 1:03–1:06या स्सत्तिव के दबा देनाई उही से हो पहग म्रित्टिव अच्छी
- 1:06–1:25एह जटिल कता के आसानी से बूजबाकलेल हमरा सब एक राज चार बहाग में बाईड़, पहिल गोई आज्जल समादी, दो सर चना गाच्छेक भूथ, ते सर माटिक सत्या अ कागजक जुट, आ अन्तमे भिसरल लोकक स्मती, ता अव पहिल हिस्सा सब शूरू करेच्छी.
- 1:25–1:29बाग ओख गोहेर आज्यल समादी
- 1:29–1:34दरशन सनिकल कें जगन हम्रा सब गंगापर बनेइत विशाल पुलक निरमान दिसबेच्छी
- 1:34–1:37तवसल वास्तविक्ता सुजहाँबेटची
- 1:37–1:42एही ताम सब सब पही ने भुजनाय ज़रूरी अची जे अखिर गोई अची की
- 1:42–1:48देखु एही उपन्यास में गोई मात्र पानिक जीव या कोनो मगर मच नहीं आची
- 1:48–1:51यी एक ता बहुत पेग रूपग आची, एक ता मेटफर आची
- 1:51–1:55इए उही सिस्तमे का कोरपूरेत ताकत का प्रतीक अची,
- 1:55–1:58जे हाँश्या पर रहल, गरीब मस्दूर सबक पहचान,
- 1:58–2:00आ अस्तितवके निगली जाई तची.
- 2:00–2:04जगन पूल सक हसी कोनो मस्दूरक जान जाई तची ना,
- 2:04–2:07तवास्तमे उक्रा इब्रह्ष्त विवस्त्ता रूपी गोई कहाईता ची.
- 2:07–2:09एक रा एन है समजो,
- 2:09–2:11एक दिस अची अस्ली नदी गोई,
- 2:11–2:14जि पानी में खसल मस्टूर सब के देख कहाईता ची,
- 2:14–2:16मुदा दोसर दिजज़े करपूरेट कोई ची,
- 2:16–2:18उ कत्तव भेशी क्धरना कचे
- 2:18–2:22इगो ए कागस पर विशेशर पास्वान्सन मस्दूरक असल नाम
- 2:22–2:25और उकर पूरे इतिहास के खाजाए तचे
- 2:25–2:29उपन्यास में इंजीम्यर नंद अरूक्षन अही भ्यानक सत्तिकें देखाई चत्थी
- 2:29–2:32जि करपूरेद गो लोकक पहजाने मिता दितचे
- 2:32–2:34आब यी आग्ड़ा देख हूँ
- 2:34–2:35तिनन हन्रड
- 2:35–2:38इस उना में मात्र एक ता संख्या लागी सकएत चे
- 2:38–2:40मुदा इएक ता दरावना सत्या चे
- 2:40–2:42सरकारी रजिस्टर पल्ता के देखवत
- 2:42–2:46अब आबे ची दो सर भागपर दो चन्ना गाचिक भूथ
- 2:46–2:51इहिस्सा कताके एक ता रहस्से माए जादूई दून्या में लजाईता ची
- 2:51–2:54चन्ना गाचिक दून्या बिलकुल गजब अची
- 2:54–2:58जदे एक ता इन्सानक जान बस एक ता अक्डा बन के रहे जाई ता चे
- 2:58–3:03आब आबे ची दो सर भाग पर दो चन्ना गाच्छिक भूध
- 3:03–3:08इहिसा कता के एक ता रहस्से माए जादूई दून्या में लजाई ता ची
- 3:08–3:11चन्ना गाच्छिक दून्या बलकुल गजद अची
- 3:11–3:14एता य आत्मा सबख एक ता लक्स सन्सार चली रहा लगछी
- 3:14–3:17जता य भूद सब न्याय मागी रहा लगछी
- 3:17–3:20एता यहां के भिट्ता बुदबा भूद
- 3:20–3:22जे बारश्यो वर्ष पुरान्च छती
- 3:22–3:24एक ता रेफ्री काछ कर रहा लगछी
- 3:24–3:26फेर अची हुलासी
- 3:26–3:32इक ता बिना हात का भूद, इव उही लोके के प्रतीक चती जिनकर म्रत्यों गलत तरह से दरजबहल.
- 3:32–3:37पन्दुप भी, जे पानिक आत्मा ची अदूबट मस्दूरक नाम से उज्राया लची.
- 3:37–3:43आपीपर का ब्रम्हा जे चारी मुख से चुप्चाप इपूरा त्रास्दी देखी रहाल चाती.
- 3:43–3:46इसब्ता आत्मा एक ता पेग काजलेल जमा आची.
- 3:46–3:50आजाने ची इबूथ सब एते की करहे लची?
- 3:50–3:53उसब चन्ना गाची में कबद्टी केली रहा लची.
- 3:53–3:56अग, सूनिमा अजी ब्लागल हैद, मुदाई कोनो मनुरनजन ने आची,
- 3:56–4:00इग कबद्ध्धी असल मे इक ता रहस्स्समैं मुकद्मा आची.
- 4:00–4:04इम्रित मज्दूर सबके नाम के भिस्रैसे बच्टेबाक एक ता संगर्ष अची.
- 4:04–4:08लेखख जे एते कबद्धिक मेताफर लेलनी आची उ कमालक आची
- 4:08–4:12एक दी स्म्रित लोकक आत्मा अपन स्म्रिती के बचाबाक संगर्ष करोड़ आची
- 4:12–4:16अदोसर दीस इस सिस्तम अग्रा मिटाई वाख काज करोड़ आची
- 4:16–4:21ये बूट सब कजे ताईमलैन आचे ना उता आवरो दिमा गुमाबि वाला आचे
- 4:21–4:24एक ता बूट आटारज़ो पच्चासी में खेल में अंट्री करे तची
- 4:24–4:27उने सु चाँच्टिस में बाउन्डी सब बाहर बाईता ची
- 4:27–4:30उने सु सतत्तर में समयके पार करेता ची
- 4:30–4:32आप तेसर बाग दिस बद़ेई चीे
- 4:32–4:34तीन, माटिक सत्या, कागज़क जूट
- 4:34–4:36इते दर्तिक अस्लियत
- 4:36–4:38और कागज के जूट कर तक्राव वच्छी
- 4:38–4:40इप तुलना देखो इप आपी के
- 4:40–4:42एक ता मोबाईल चाँजर के
- 4:42–4:44लाल बतिके चूभगत छी चूचू
- 4:44–4:47सब के इखेल केमल अतीत नहीं बविश्यक धान्डली सोडेख हो देखाई तच्ये.
- 4:48–4:51चलू, आब तेसर भाग दिस वद़ेई च्ये.
- 4:51–4:54तीन, माटिक सत्या कागज़क जूथ.
- 4:55–4:58इते दर्तिक अस्लियत और कागज़के जूथकर तक्राववच्छी.
- 4:58–5:10इटुलना देखु, इटुरा हमरा सबहे के जगजोरी देद, वास्तविक्ता में की होई तची, मज्दूर नदी में कहसे तची, आम मर जाई तची, मुदद सरकारी रिकोड में की लिखल जाई तची, अनौपस थित.
- 5:10–5:15वास्त्विक्ता में नदी शरीर के बहाँ के लज जाईतची, मुदध कागज परस़,
- 5:15–5:19उई कम्पनिक चवाब देही पुरा तरह से मिटाए दिल जाईतची.
- 5:19–5:22परिवार गाँम में बैसल भाट जोहाट रहतची,
- 5:22–5:27जब येटा गूर के आवड, मुदा विदेशी कमपनी अपन साव सुत्रा चबी बनावने रहताची.
- 5:27–5:33इआम आदमी खुन पसीना अखवरट दून्याग जूटख बहत क्रूर तस्वीर अची.
- 5:33–5:37कोनो इन्सान के इतिहाँ समेटाईवा के स्तेप बाई स्तेप तरीका देखूँ
- 5:37–5:39पहले पूल बने काल मस्दूरक जान जान जाईतचे
- 5:39–5:44तो सर एक ता इमान्दार इंजीन्यर उपोड बनवाइत है जी सुरक्षा भेवस्ता फेलच्छल
- 5:44–6:14तीसर स्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्
- 6:14–6:22गाम के उत्बे नुक्सान पूचावे तची जद्बा नदीक भाड, कागसकर प्रहार कतोसा पानिक प्रहार सिक्व नहीं होई तची.
- 6:22–6:27आब हम्रा सब आपन अंतिम भाग्मेच्यें, चार भिस्रल लोका के स्म्रिती.
- 6:27–6:30एही में बात होएत पहचान आपरम सत्यक.
- 6:30–6:33प्रक्रती आपन स्म्रिती कोना रखाईतचे?
- 6:33–6:36एकर एक तब बहुत नीकुदारन आची गडनारी केलकर गाच.
- 6:36–6:40गामक मान्नेता आए जे जगन कोनो समाज आपना हाँश्यापर रहल,
- 6:40–6:45गरीब लोका के भिसरी जाईतचे, तए गाच फल्दे बन्द कर देटचे.
- 6:45–6:50मुदा एकर पाज सब चुप्चाः उही सत्यके आपन दीतर दर्ज करेत रहेत रहेत ची.
- 6:50–6:52माने विवस्ता जुट बाजी सकेत ची.
- 6:52–6:57मुदा प्रक्रती आपन अबिलेखागार में सब किच सुरक्षित रहेत ची, बिना कोनो मिला वड़क.
- 6:57–7:02इग अत्ता अंतता हम्रा सब के एक ता बहुज सकार अत्मक विचार दीताची
- 7:02–7:05सत्या एक ता भीज दिख अजूथ एक ता पातर
- 7:05–7:10पातर जत्बो भारी होगे या भीज उकर नीचा जत्बो गहराई में तोपल होगे
- 7:10–7:15अबीज एक दिन अंकुरिद भाई के पातर के पार के बाहर आभी जाई तची.
- 7:15–7:20सत्यव अस्म्रिती अन्तदध, हर दमनकारी वेवस्ता सबेसी समएदरी जिन्दा रहे तची.
- 7:20–7:24कोनो नाम के हमेशा लेल मितायब समबहों नहीं आची.
- 7:24–7:27तच्छलाइत च्छलाइत यी सुच्वाग बात आची
- 7:27–7:31जगन कागजक लिकोड यते आसानी सब बदलल जासकई तच्छे
- 7:31–7:34जगन सत्यके लाल पिंसल सब काटल जासकई तच्छे
- 7:34–7:37तच्छन एक ता बिस्रल नामक अस्ली रजिस्टर के रखाई तच्छी
- 7:37–7:50अब आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आप आप आप आप आ� आ� आप आप आप आप आप आप आ
Plain text
नमशकार, आई हम्रा सब गजेंद्र ताकृरेक लिखल एक ता बहुत चर्छित, गहन, और इक्दम जादूई यतार्ट्वाद सब रल मैठली उपन्यासक कता विस्लेषन करब, नाम अच्छे गोहिक सबबख भीच जल समादी. सच कहीराल ची, इकोनो सादारन कदा नहीं आच, इक टा एक एक एहन साहित टेक यात्रा आचे, जे वास्तविक्ता ककतू सत्त्य, अप्रक्रतिक इस्म्रती के भीच जूले तचे. तचलू, बिना कोनो देरी के ने, यही जादूई यतार्थ वादक गाराई में उत्री अदिकोट करेख ची, जे अखिर एग कता हमरा सब के की कह चाहत ची. कताक शुरूवात में, हे एग पाती देखू, एग लाईन मून में बैस्या वलाचे. जे सत्या देख़तति अच्छुप रहेतति उकर म्रित्यो दुईबार होईतति एक भेर देहिक एक भेर आत्माक सोचो जा इएक ता पाति पूरा उपन्यास के दार्षनिक संगर्ष के हम्रा सबक सोजा राखी देटेची चुप्रहव अस्सत्तिबाजब एकर भीचक्जे लडाय अच्छी से इस सोचे पर मजबोर करेट अच्छी जिकी केवल शरीरिक कथम हुना ही म्रित्टिव थेक या स्सत्तिव के दबा देनाई उही से हो पहग म्रित्टिव अच्छी एह जटिल कता के आसानी से बूजबाकलेल हमरा सब एक राज चार बहाग में बाईड़, पहिल गोई आज्जल समादी, दो सर चना गाच्छेक भूथ, ते सर माटिक सत्या अ कागजक जुट, आ अन्तमे भिसरल लोकक स्मती, ता अव पहिल हिस्सा सब शूरू करेच्छी. बाग ओख गोहेर आज्यल समादी दरशन सनिकल कें जगन हम्रा सब गंगापर बनेइत विशाल पुलक निरमान दिसबेच्छी तवसल वास्तविक्ता सुजहाँबेटची एही ताम सब सब पही ने भुजनाय ज़रूरी अची जे अखिर गोई अची की देखु एही उपन्यास में गोई मात्र पानिक जीव या कोनो मगर मच नहीं आची यी एक ता बहुत पेग रूपग आची, एक ता मेटफर आची इए उही सिस्तमे का कोरपूरेत ताकत का प्रतीक अची, जे हाँश्या पर रहल, गरीब मस्दूर सबक पहचान, आ अस्तितवके निगली जाई तची. जगन पूल सक हसी कोनो मस्दूरक जान जाई तची ना, तवास्तमे उक्रा इब्रह्ष्त विवस्त्ता रूपी गोई कहाईता ची. एक रा एन है समजो, एक दिस अची अस्ली नदी गोई, जि पानी में खसल मस्टूर सब के देख कहाईता ची, मुदा दोसर दिजज़े करपूरेट कोई ची, उ कत्तव भेशी क्धरना कचे इगो ए कागस पर विशेशर पास्वान्सन मस्दूरक असल नाम और उकर पूरे इतिहास के खाजाए तचे उपन्यास में इंजीम्यर नंद अरूक्षन अही भ्यानक सत्तिकें देखाई चत्थी जि करपूरेद गो लोकक पहजाने मिता दितचे आब यी आग्ड़ा देख हूँ तिनन हन्रड इस उना में मात्र एक ता संख्या लागी सकएत चे मुदा इएक ता दरावना सत्या चे सरकारी रजिस्टर पल्ता के देखवत अब आबे ची दो सर भागपर दो चन्ना गाचिक भूथ इहिस्सा कताके एक ता रहस्से माए जादूई दून्या में लजाईता ची चन्ना गाचिक दून्या बिलकुल गजब अची जदे एक ता इन्सानक जान बस एक ता अक्डा बन के रहे जाई ता चे आब आबे ची दो सर भाग पर दो चन्ना गाच्छिक भूध इहिसा कता के एक ता रहस्से माए जादूई दून्या में लजाई ता ची चन्ना गाच्छिक दून्या बलकुल गजद अची एता य आत्मा सबख एक ता लक्स सन्सार चली रहा लगछी जता य भूद सब न्याय मागी रहा लगछी एता यहां के भिट्ता बुदबा भूद जे बारश्यो वर्ष पुरान्च छती एक ता रेफ्री काछ कर रहा लगछी फेर अची हुलासी इक ता बिना हात का भूद, इव उही लोके के प्रतीक चती जिनकर म्रत्यों गलत तरह से दरजबहल. पन्दुप भी, जे पानिक आत्मा ची अदूबट मस्दूरक नाम से उज्राया लची. आपीपर का ब्रम्हा जे चारी मुख से चुप्चाप इपूरा त्रास्दी देखी रहाल चाती. इसब्ता आत्मा एक ता पेग काजलेल जमा आची. आजाने ची इबूथ सब एते की करहे लची? उसब चन्ना गाची में कबद्टी केली रहा लची. अग, सूनिमा अजी ब्लागल हैद, मुदाई कोनो मनुरनजन ने आची, इग कबद्ध्धी असल मे इक ता रहस्स्समैं मुकद्मा आची. इम्रित मज्दूर सबके नाम के भिस्रैसे बच्टेबाक एक ता संगर्ष अची. लेखख जे एते कबद्धिक मेताफर लेलनी आची उ कमालक आची एक दी स्म्रित लोकक आत्मा अपन स्म्रिती के बचाबाक संगर्ष करोड़ आची अदोसर दीस इस सिस्तम अग्रा मिटाई वाख काज करोड़ आची ये बूट सब कजे ताईमलैन आचे ना उता आवरो दिमा गुमाबि वाला आचे एक ता बूट आटारज़ो पच्चासी में खेल में अंट्री करे तची उने सु चाँच्टिस में बाउन्डी सब बाहर बाईता ची उने सु सतत्तर में समयके पार करेता ची आप तेसर बाग दिस बद़ेई चीे तीन, माटिक सत्या, कागज़क जूट इते दर्तिक अस्लियत और कागज के जूट कर तक्राव वच्छी इप तुलना देखो इप आपी के एक ता मोबाईल चाँजर के लाल बतिके चूभगत छी चूचू सब के इखेल केमल अतीत नहीं बविश्यक धान्डली सोडेख हो देखाई तच्ये. चलू, आब तेसर भाग दिस वद़ेई च्ये. तीन, माटिक सत्या कागज़क जूथ. इते दर्तिक अस्लियत और कागज़के जूथकर तक्राववच्छी. इटुलना देखु, इटुरा हमरा सबहे के जगजोरी देद, वास्तविक्ता में की होई तची, मज्दूर नदी में कहसे तची, आम मर जाई तची, मुदद सरकारी रिकोड में की लिखल जाई तची, अनौपस थित. वास्त्विक्ता में नदी शरीर के बहाँ के लज जाईतची, मुदध कागज परस़, उई कम्पनिक चवाब देही पुरा तरह से मिटाए दिल जाईतची. परिवार गाँम में बैसल भाट जोहाट रहतची, जब येटा गूर के आवड, मुदा विदेशी कमपनी अपन साव सुत्रा चबी बनावने रहताची. इआम आदमी खुन पसीना अखवरट दून्याग जूटख बहत क्रूर तस्वीर अची. कोनो इन्सान के इतिहाँ समेटाईवा के स्तेप बाई स्तेप तरीका देखूँ पहले पूल बने काल मस्दूरक जान जान जाईतचे तो सर एक ता इमान्दार इंजीन्यर उपोड बनवाइत है जी सुरक्षा भेवस्ता फेलच्छल तीसर स्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट् गाम के उत्बे नुक्सान पूचावे तची जद्बा नदीक भाड, कागसकर प्रहार कतोसा पानिक प्रहार सिक्व नहीं होई तची. आब हम्रा सब आपन अंतिम भाग्मेच्यें, चार भिस्रल लोका के स्म्रिती. एही में बात होएत पहचान आपरम सत्यक. प्रक्रती आपन स्म्रिती कोना रखाईतचे? एकर एक तब बहुत नीकुदारन आची गडनारी केलकर गाच. गामक मान्नेता आए जे जगन कोनो समाज आपना हाँश्यापर रहल, गरीब लोका के भिसरी जाईतचे, तए गाच फल्दे बन्द कर देटचे. मुदा एकर पाज सब चुप्चाः उही सत्यके आपन दीतर दर्ज करेत रहेत रहेत ची. माने विवस्ता जुट बाजी सकेत ची. मुदा प्रक्रती आपन अबिलेखागार में सब किच सुरक्षित रहेत ची, बिना कोनो मिला वड़क. इग अत्ता अंतता हम्रा सब के एक ता बहुज सकार अत्मक विचार दीताची सत्या एक ता भीज दिख अजूथ एक ता पातर पातर जत्बो भारी होगे या भीज उकर नीचा जत्बो गहराई में तोपल होगे अबीज एक दिन अंकुरिद भाई के पातर के पार के बाहर आभी जाई तची. सत्यव अस्म्रिती अन्तदध, हर दमनकारी वेवस्ता सबेसी समएदरी जिन्दा रहे तची. कोनो नाम के हमेशा लेल मितायब समबहों नहीं आची. तच्छलाइत च्छलाइत यी सुच्वाग बात आची जगन कागजक लिकोड यते आसानी सब बदलल जासकई तच्छे जगन सत्यके लाल पिंसल सब काटल जासकई तच्छे तच्छन एक ता बिस्रल नामक अस्ली रजिस्टर के रखाई तच्छी अब आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आप आप आप आप आ� आ� आप आप आप आप आप आप आ