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मैथिली_वेब_पत्रकारिताक_इतिहास_आ_फर्जीवाड़ा.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:09देबेट में आहक स्वागत अछी, सन 2005 में मैठलीक अछि। अछि। लगका मैं इक देबाईर खेल वेल चल,
  2. 0:09–0:18हमरे सब आज आशीश अचिनार जीक, लिकल, चर्चित पोती, मैठली वेप पत्रकारिता के डियास के आदार पर चर्चा कर है लची.
  3. 0:18–0:25ता उसमै एक ता मेठ्छली ब्लोगर अपन वेप्साइत के सबसे पहल साभित करवाग होड में
  4. 0:25–0:27अब बाक डेटिंग वला प्रकरन
  5. 0:27–0:30एक दम अपन ब्लोग पोस्ट के बाक डेट कर देलने
  6. 0:30–0:36माने पोस्ट लिखलने 2005 में मुदा उकर तिती बदल के 1999 वे कर देलने
  7. 0:36–1:06उक्र लागल जे अई अई अई अई बिसरी गेला जे अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अ�
  8. 1:06–1:10अगर जे क्रोनलोगी अची अची वैई अचर वास्तवेक इतिहास अची
  9. 1:10–1:15दिकू हम आहा के बाज से सहमत ची जे उ दिजिटल फुट्प्रिंट महत्टोपोन आची
  10. 1:15–1:21मुदा मात्र अंट्र अची पन्ना खोल लिभ इतिहास नहीं कहलाबे ताची
  11. 1:21–1:23अवर सोच एह पर कनी भिन्ना ची
  12. 1:23–1:25भिन्ना ची, कोना
  13. 1:25–1:29आना बुजु, जे खाली जमीन पर एक ता जंडा गार दिलासा
  14. 1:29–1:31कोनो शहर नहीं बसी जाई ता चे
  15. 1:31–1:33आहा उक्रा शहर तक्हन कहबे
  16. 1:33–1:35जक्हन उते रस्ता बनाइ ता चे
  17. 1:35–1:37लोकक लेल सुभीधा होई ता चे
  18. 1:37–1:40अद्या इतियास तो उजन्डाक सो हो है तचे जे सब सब शब यह गाडल गेल चल
  19. 1:40–1:45मैत्ली वेप पत्रकारिताक वास्त्विक स्रुवात उई चिट्पृपन्ना से नहीं
  20. 1:45–1:49बलकी तक्हन मानल जावाक चाही जक्हन एक ता संस्तागर दाचा आयल
  21. 1:49–1:53जक्हन मानकी करन भेल अ मैत्ली के अक पुन्ड धिजितल इको सिस्तम भेटल
  22. 1:53–1:58अमहा की जन्दा गाडवा बला आनालोजी भूजी रहल ची
  23. 1:58–2:02मुदा इतिहास तो उई जन्दाक सो हो है तचे
  24. 2:02–2:04जे सब से पहले गाडल गेल चल
  25. 2:04–2:08अनचीनार जिक पोती में बहुत सपष्ट रूपें दर जाचे
  26. 2:08–2:11जे सन दोहाजार में याहू सिटीस पर
  27. 2:11–2:14गजेंद्र ताकुरक भालसरी गाच
  28. 2:14–2:17और 2003 में दिरेंद्र प्रेमरशिक
  29. 2:17–2:18पल्लव मिठिला
  30. 2:18–2:20मेठिलिक पहल वेब उपस्तिती चल
  31. 2:20–2:23उदद चल, मुदा उकर प्रभाव कत एक चल
  32. 2:23–2:24प्रभाव पैग चल
  33. 2:24–2:26इए उवू समए चल
  34. 2:26–2:29जकन अंट्रनेड डालब कनेक्षिन्स
  35. 2:29–2:31अगर उद्यागा चाड़े चल
  36. 2:31–2:34मने एक ता पन्ना लोड हूवा में मिंटो लगे चल
  37. 2:34–2:38उवही समय में देवनागरी फाँड़् के प्मुटर पर देखाओब
  38. 2:38–2:41अपने आप में टकनी की चमतकार चल
  39. 2:41–2:45जा हम एही प्रारंभेग टकनी की संगर्षक के नकारभे
  40. 2:45–2:49अदेखु जा हम तकनी की तितिक के महतु नहीं देब,
  41. 2:49–2:54तलोक वही करता जे कतेक रास ब्लोगग के संचालक के लिनी।
  42. 2:54–2:57मने उ जूटक आदार पर पहिलेवाक दावा
  43. 2:57–3:02आप, सत्यक रक्षा के लेल एक्रोनोलोगी सर्वो परी आची
  44. 3:02–3:04इख्रोनोलोगी सर्वो परीया ची
  45. 3:04–3:05मुदा रुकु
  46. 3:05–3:07हम आहा के ते कनी तो कब
  47. 3:07–3:10आशीश अंचिनार जी
  48. 3:10–3:13जे उही भ्लोगर के परदाफाष केलनी
  49. 3:13–3:14उनिष्छित रूपेन
  50. 3:14–3:18एक ता गजब के दिजिटल धिटेक्तिट्टिप का जा ची
  51. 3:18–3:22मुदा आहके इबुजवक चाही जे उ परजीवाडा की एक भेल
  52. 3:22–3:25की एक ता हुनका पहल कहला वक चल
  53. 3:25–3:31एक दम लोके के लागे तची जे हम पहने आईल ची इबात हुनका इतिहाश में आमर करे देथ
  54. 3:31–3:37मुदा हम्रा लेल उ 2003 के पल्लब मिठिला वा 2000 के भाल सरीक गाछ
  55. 3:37–3:41जे मात्र किछ पन्नक चल आजकर कोनो दिरन्तरता ने चल,
  56. 3:41–3:43उक्रा पत्रकारिता कहब भेशी भाजाते.
  57. 3:43–3:46आहा जक्रा दिजितल फुट्प्रिंट कहेट ची,
  58. 3:46–3:49हम उक्रा अंटरनेट के दिजितल खंदार कहेट ची.
  59. 3:49–3:51दिजितल खंदार?
  60. 3:51–3:53इद बहुत कदोर शब्वद़ूगेल
  61. 3:53–3:55कदोर अची मुदा सत्या अची
  62. 3:55–3:57उ मात्र एक ता प्रेयोग चल
  63. 3:57–3:59वास्तविक इतिहास तकन बने तची
  64. 3:59–4:01जकन त्ब जुहाँचार आप में
  65. 4:01–4:03विदेह इ पत्रिकाक शुर्वात होगी तची
  66. 4:03–4:05की आहां के इ भुजल अची
  67. 4:05–4:09की आहा के इबुजल आची, जे विदे, मातलिक पहिल पत्रिका चल,
  68. 4:09–4:11जक्रा अगर न्टन्ट्शन्ट्ट, सीर्यल नंबर,
  69. 4:11–4:14मने अईशसन भेटल चल.
  70. 4:14–4:17आआ, अईशसन भेटल महत्व पुरन आची,
  71. 4:17–4:19हमी मानेच ची, मुदा...
  72. 4:19–4:21इप आप आप आप पुरन नहीं आच,
  73. 4:21–4:26इप पूरा गेम चेंजर चल एक ता अईससन नमबर का अब अगट होई चे
  74. 4:26–4:29जे आहा के प्रकाशन के एक ता वेश्विक मानेता बहती रहला ची
  75. 4:29–4:32उो कोनो मन्मोजी भ्लोग नहीं गेल
  76. 4:32–4:35उो एक ता सन्रक्षित शोद समगरी बनी गेल
  77. 4:35–4:38जक्रा दून्या के कोनो लाइब्रेरी ट्रक कर सकेता ची
  78. 4:38–4:40विदेज मात्र एक ता वेप्साइत नहीं चल
  79. 4:40–4:44उ तिरहुता आ ब्रेल लिपी में से हो समगरी प्रकाषिद के लक
  80. 4:44–4:45औ, हो!
  81. 4:45–4:46ब्रेल लिपी में से हो?
  82. 4:46–4:47रा!
  83. 4:47–4:51उ मेठिलिक पहल एक अनलाई अर्काईव माने पुस्तकाले बनुलक
  84. 4:51–4:55अ सबो सब पएक बात उईक ता वेब अगरिगेटर बनुलक
  85. 4:55–4:57मुदा स्रोता सबक लेल ये सपर्ष्ट कर दिया
  86. 4:57–5:00जे उईजि समय में वेब अगरिगेटर कतिक जरूरी चल
  87. 5:00–5:30अगर नवा पोस्ट कर लिंक श्वचाली तरूग गब आप देखाँ आप देखाँ विश्टाग लिए ब्रदाग विश्टाग लिए ब्रदाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश
  88. 5:30–5:33अपे एक ताम एक ता पन्ना पर लाव आज्चल,
  89. 5:33–5:36एक रफ एभेल जे पाटख के,
  90. 5:36–5:40बीस्ता रगल अग़्ग यूरल मों राखवा कावषकतान न नहीच चल.
  91. 5:40–5:43इचे एक ता एको सिस्तम बने नाए.
  92. 5:43–5:45जंदागाए बसे शहर ने बने इत छी,
  93. 5:45–5:49वेब आग्रीगेटर जका रस्ता बने बसे शहर बनेद छी.
  94. 5:49–5:50निक्तर कछी.
  95. 5:50–5:55आव इदेखिरजे 2008 के संस्तागत सरुबत बात करोहल ची
  96. 5:55–5:56उप्रभाव्शाली आची.
  97. 5:56–6:00मुदा एई सिस्तम आचानक सै सुन्यसत नहीं कहसल चल.
  98. 6:00–6:01सुन्यसत नहीं मुदा.
  99. 6:01–6:03अम फेर से वही बात कहब
  100. 6:03–6:05जे जब भूनियाद नहीं रहीते
  101. 6:05–6:07तो महल कुना बनी ते
  102. 6:07–6:09आव उई दिजिटल कहन्दर के बात के लो
  103. 6:09–6:11मुदा वही खन्दर ता टकनिक के जनम देलक
  104. 6:11–6:13जकन कते करास बात
  105. 6:13–6:15ब्लोग अपन पोस्ट के
  106. 6:15–6:18अपन पोस्ट के 1999 कर दिखाबक प्रयास के लो,
  107. 6:18–6:22तप पोथिक लिखठ आशीश अंचिनार कोना अकर पकडलने,
  108. 6:22–6:25इभुजबा हम्रा सब के लेल बहुत जरूडी आची.
  109. 6:25–6:28आप अई अई सर्वर कर देटा से पकडलने.
  110. 6:28–6:29बलकोल.
  111. 6:29–6:31अई ब्लोगर दिस्पले डेट ता,
  112. 6:31–6:36उनिसनिन्यानवे कदेल लिनही मुदा बलोगर जे गुगलक पलट्फोम अची,
  113. 6:36–6:39उकर सर्वर अपने आप जे यूरल बनावेत अची,
  114. 6:39–6:42वही में वर्ष आमास आमबेट बहजाए ची,
  115. 6:42–6:45जना 2005 04 पोस्ट नेम.
  116. 6:45–6:50अचिनहर जी यूरल कोही 2005 अ 2013 के तिठी का देख्ये का,
  117. 6:50–6:57इस्सिद्दखेलिन ही जे कुस्टम लिंक वा फुछ्टर पोस्ट का सूविधा दूहाँजर आद सपोर ब्लोगर में चले नहीं
  118. 6:57–6:58उतो उई समय का लिमितेशन चल?
  119. 6:58–7:28आव उई चुट चुट तकनी की ज्यान अदिजिटल साखषे के भिना इतिहासक प्रमानिकता बचीनी सकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च
  120. 7:28–7:32विक्ति विशेसक जुनुन सबने तची, सिस्तम हमेशा पाचा आबे तची
  121. 7:32–7:34आग लागी तची, ज़व यकती सब कुछ करे तची
  122. 7:34–7:40शुरु मेत हा, पोठी मे राजीव रंजन लालजीक मेठिली लोकगीत, ब्लोगग चर्चा जी
  123. 7:40–7:45जर 2007 में बनेलन ही, उईक ता व्यक्तिगत प्रयास चल,
  124. 7:45–7:49जर बिना कोनो आर्थिक लाब हक, मैठिलिक पारमप्रिग गी तक,
  125. 7:49–7:51इंटनेट पर सन्रक्षित कर रहल चल,
  126. 7:51–7:55वाया आशीश अंचिनार स्वैम 2008 में,
  127. 7:55–7:59जर अंचिनार अखर शूग्यलनी उक्रा देखू.
  128. 7:59–8:01उ गजलक लेल नीक मंजचल
  129. 8:01–8:02बहुत नीक
  130. 8:02–8:04उ मात्र मैत्हिली गजल पर केंद्रच्छल
  131. 8:04–8:06उ मैत्हिली गजलक
  132. 8:06–8:08के अंट्टनेट पर नव जीवन देलक
  133. 8:08–8:10उनलाई भुशाएरा शूग्रूके लक
  134. 8:10–8:12गजलक व्याकरन पर चर्चा शूग्रूके लक
  135. 8:12–8:20इसब वन मैं आर्मी प्रयास चल, जो यी व्यक्तिगत ब्लोगज नहीं ते, ता हां के व्यब अग्रिगेटर की अग्रिगेट करीते.
  136. 8:20–8:24खाली पन्ना नहीं, व्यक्ति ही समुदाये के बाड देखाईता ची.
  137. 8:24–8:30देखो आह की इबात की चो हद्थरी सत्ते आची जे विक्ती बाट देखाई तची
  138. 8:30–8:33मुदा विक्तिगत प्रयासा के चीमा होईच है
  139. 8:33–8:37इंटरनेट एक ता मुक्त असमुहिक मने अपन सूर्स मन्चाची
  140. 8:37–8:41जोदरी एक ता विक्ती काज कर रहल आची उ ब्लोग आची
  141. 8:41–8:47जखन उ समुदाय में बदली जाएत छै, तकन वास्तनिक दिजितल संस्ता बनाई तच्छ.
  142. 8:47–8:52मैठली विकि पीटिया कु दाहरन लीजिया, इक उनो एक विक्ती नहीं बना सकै चल.
  143. 8:52–9:00पोथी में स्पस्ट देल गेल अची, जे 2008 में गजेंदर ताकृर एकर लिल विकी मीट्या फाँड़ेशन के आवीदन देलने.
  144. 9:00–9:01मुदा की उ तुरत बनिगल?
  145. 9:01–9:04नहीं, उही में तसमेल आगल चल.
  146. 9:04–9:13अव, विकी पीट्या क नियम होई चाए, जगन्दरी एक ता सक्रिया कम्युनिती हाजारों लेक नहीं लिखत, तक ठारी उक्रा अप्रुवल नहीं भेटत.
  147. 9:13–9:15आव, कम्युनिती कोना बनल?
  148. 9:15–9:18अगो कम्मिनूटी बनल उमेश मन्डल जगा लोखसा
  149. 9:18–9:21जे उही समें सथर प्रतिषत प्रिष्थक निरमार
  150. 9:21–9:23अकेले अपने नितुट्तो में केलनी
  151. 9:23–9:26राजेश रंजन आा आन अनेक योग्दान करताक
  152. 9:26–9:28अथक अनवाद अ लेकनिक बाद
  153. 9:28–9:30चो सालक संगर्षक बाद
  154. 9:30–9:332014 में मैत्टली विकिपीटीया का प्रूल भेटल
  155. 9:33–9:38Google Translation लेल 2011 में जे प्रयास भेल वो एक ता समहिक काच्छल
  156. 9:38–9:41जत यो अनेक लोग आपन समें देलनी
  157. 9:41–9:44बिना कोनो स्वार्थ वा पारिष्रमिक के
  158. 9:44–9:47आपन भाशा के digital सन्सार में स्तापित करभा लेल
  159. 9:47–9:49एकर अर्थ बुजेए थ्जिया हम?
  160. 9:49–9:53इंटनेट पर इतिहास समाजिक समहिक प्रयास सम बनल अची.
  161. 9:53–9:57विक्तिगद ब्लोग एक ता नीक डारी भोसके जे,
  162. 9:57–10:03मुता विकिपीटिया जका अपन सोर्स प्रोजेक्त एक तब आशाके दिजितल दुनिया में नमर कर देच.
  163. 10:03–10:11अहां की कमुनिटी प्रोजेक्त का बात हमरा सोजे पोथिक तेसर अ सब समहत्तूपन हिस्सादिस लोजाई चे
  164. 10:11–10:16अहां विकिपीटिया अ अनुवादकक जि समहिक प्रयासक बात करहल ची
  165. 10:16–10:22अगी बीटीया के देटा को प्योग की भेल, उकर परनाम की भेल,
  166. 10:22–10:25अही देटा से भाशा के दिजितल उपस्तिती पक्की भेल,
  167. 10:25–10:29मात्र उपस्तिती नहीं, अही समुदाए जे देटाबेस बनवलक,
  168. 10:29–10:33अग देटाबेस अन्ताथा आर्टिफिष्टलिटलिजन्स,
  169. 10:33–10:35या अजुक याई उख़ाग प्राश्टान्ति चल
  170. 10:35–10:37या बात हम माने ची जे यूनिकोड एक ता पाग क्रान्ति चल
  171. 10:37–10:38बिल्कुल
  172. 10:39–10:41अववग क्रान्ति आई एतदरी पहुच गेल अची
  173. 10:41–10:43जे ए आई फो भारत केर अईन्टिक ट्रान्स्टू जे दोहाँ जागा
  174. 10:43–11:13अब आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आ�
  175. 11:13–11:16बिश्विस्तर पर प्रस्थापित कर रहल चे दिन
  176. 11:16–11:19एड्तकनी की यात्रा में एक ता सीदा लगी रहाची
  177. 11:19–11:21आहा के एज़ सब सीदा लगे तिछे
  178. 11:22–11:22एक दाम
  179. 11:23–11:24पहले योनी कोडाल
  180. 11:24–11:25तकन भ्लोग्स बनल
  181. 11:26–11:28तकन विकी पीट्या जका कम्मुनिती देटा बनल
  182. 11:28–11:35आब उही देटा के आदार पर एक ता मशीन नाच्रल लंगुज जनरेशन करो लची.
  183. 11:35–11:40एकर माने आची जे मशीन आब मेठली भाशा में अपने वाख्य गडी रहो लची.
  184. 11:40–11:43आहा मेठली बजाएच छी, आज स्पीच रिकश्निशन से,
  185. 11:43–11:45अद्विश्वास्ट शिसामतने आजी
  186. 11:45–11:47अद्विश्वास
  187. 11:47–11:49अद्विश्वास
  188. 11:49–11:51अद्विश्वास
  189. 11:51–11:53अद्विश्वास
  190. 11:53–11:55अद्विश्वास
  191. 11:55–11:57अद्विश्वास
  192. 11:57–11:59अद्विश्वास
  193. 11:59–12:01अद्विश्वास
  194. 12:01–12:03अद्विश्वास
  195. 12:03–12:05अद्विश्वास
  196. 12:05–12:07अद्विश्वास
  197. 12:07–12:37उद्यागा के अगा के अगा इंटरनेट कर उआनियार पक्ष नहीं देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखा�
  198. 12:37–12:39अग्यानी सुब बनार होलाचा
  199. 12:39–12:41फेख नुज का प्रसार भोर होलाचा
  200. 12:41–12:43मुदा सबसे पएग ख़सोट जे साहिट्टिक भोलाची
  201. 12:43–12:45ओए ची फेज्बुकक लाएक बटन
  202. 12:45–12:47फेज्बुक लाएक बटन से साहिट्टिक की नुच्सान बोल सके तची
  203. 12:47–12:53अप्से पएग खषोट जे साहिट्टिक भाल अची अची फेस्बुकक लाएक बतन
  204. 12:53–12:56फेस्बुक लाएक बतन से साहिट्टिक की नुक्सान बहुत सके तची
  205. 12:56–13:00इत तब पाथका के लेखक से सोजे जोडे तची
  206. 13:00–13:04नहीं, नहीं, इवास्तविक सहितिक आलोचना के नष्ट करोल अचा
  207. 13:04–13:08अचिन हार जी आपन पोठी में एक तब बहुत मारभिक उदारन देलनी एची
  208. 13:08–13:14उब लिखे चदी कोना एक तब नवगजल कार अक के फिस्बुक पर बेशी लाइक भेट्बा कारने
  209. 13:14–13:18इक तब बहुत पुराना अन्निक गजलकार सद्मा में चलीगला
  210. 13:18–13:21उ, उ गजल लिखभ कम को दिलने
  211. 13:21–13:26रह, फेस्बुक का रिए ल्ग़रिदम गुनबत्ता नहीं देखेत अची
  212. 13:26–13:31उ मात्र इगे देखेत ची, जे के कते खाथेग हाहा ही करहल अची
  213. 13:31–13:40अपन पोईट्ट्टानक अविश्कारक जे चती जस्टिन रोजन्स्टीन उस्वेम एक्रा समाजक लेल गातक मानी अपन फोंसर फेश्बुक फ्यट्टा देलने.
  214. 13:40–13:42आश्चर्यक बात अची
  215. 13:42–13:45अखल नी जे एई लोकक कन्टीशन करहला ची
  216. 13:45–13:53जखन मेठलिक नव लेखक मात्र पच्चास लाइक बेट्वापर अपने आपके महां कवी बुजे लगए चती, तो वैचारिक शुन्नेता ची.
  217. 13:53–13:58मात्र एएए दवारा मशीन अनुवाद भहजे वासे भाशाक आत्मा नहीं बचेचा.
  218. 13:58–14:03पत्रकारिताक आर्थ अछी सत्यक कोज अवेचारिग गेराई
  219. 14:03–14:06जे ईग लाएक बतनीया संस्क्रती निगली रहा लगा जी
  220. 14:06–14:09बुजलिय, आगाक छिंता जाएज अछी
  221. 14:09–14:13अप फेसबुक लाएक कजे मनोवेग्यानिक प्रभाओ लेक्खख पर पर पर पर पच्छी
  222. 14:13–14:16उ पोथिक अक ता बहुत मस्वूथ अवलोकन अच्छे
  223. 14:16–14:19मुदा एक मिनेद, हमरे इबाद स्पष्ट करे दिया
  224. 14:19–14:25कि इद तकनिक का दोश अच्छे, वाई हमरा सबक मान्विय मनोविग्यान का दोश अच्छे
  225. 14:25–14:27मुदा तकनिक तोक्र बड़ावा दार अच्छे
  226. 14:27–14:35मुदा जे लाएक बटन कोज जस्टिन, रोसेंस्टीन, केलनिन, उ तक नीक ता मात्र एक ता तूल आचे.
  227. 14:35–14:44जो एक ता लेक्ख लाएक कर लालच में नीक गजल लिख़ब चोड दे ता चे, तो लेक्ख का समस्स्या जे अगर नहीं.
  228. 14:44–14:47जखन चापाखाना मने प्रिंटिंग प्रेस
  229. 14:47–14:51आयल चल तकनो बदपैक पैक विद्वान लोकन के लागल चल
  230. 14:51–14:54जे बाशाक मोलिक्ता कथम बजेते
  231. 14:54–14:56अग, इतियास ता एह कही चे?
  232. 14:56–15:01एक दम, लोग सोच चल जे हाथ से लिखल पोठिक जे सम्मान अचे
  233. 15:01–15:07अद शापाखचाना की के लेक उ ग्यान के आम लोग दरी पहुज़ा।
  234. 15:07–15:11मुदद देखु चापाखचाना में एक ता समपादख होई चल,
  235. 15:11–15:14जित ताये कर चल जिक की चबता की नाये,
  236. 15:14–15:16फेजबुक पर के समपादख अचे?
  237. 15:16–15:19समपादख पाटख सवयम अचे.
  238. 15:19–15:21अहां मात्र नकार आत्मक पक्ष देख रहल ची
  239. 15:21–15:25जक्चन अहां मेठिली स्वास्त परी चर्चा जकां
  240. 15:25–15:28ब्लोग देखछ ची, जटे रमाकर चोदरी जी
  241. 15:28–15:31मेठिली भाशा में रोग, आवकर निदानक
  242. 15:31–15:33विस्तार से चर्चा कर अच्छती
  243. 15:33–15:35तो इंट्रनेट के कारने समबभ्यल
  244. 15:35–15:37उनिश्छे ही एक ता निक का जा चे
  245. 15:37–15:39आज जकन आहा इसमाद
  246. 15:39–15:43वा मित्ला मिरर जका निउस पोटल देखे ची
  247. 15:43–15:45जे मित्लाक गाम गामक खभरी
  248. 15:45–15:49दून्याक कोना कोना में बैसल मेठिल दरी पहुचा रहले ची
  249. 15:49–15:52तक्की इंट्रनेट कर सकारात्मक्षक्ती नहीं तेक
  250. 15:52–15:56इसब समबभ्भ्यल की अक्त, कोनो गजंद्र ताकोर,
  251. 15:56–15:59कोनो आशीश अंचनार, कोनो रोशन चोद्री,
  252. 15:59–16:03तक्नी की रुपेन पहल्देग उठेबाक साहस केलन ही.
  253. 16:03–16:04वो साहस तचल.
  254. 16:04–16:09तद इतिहास में उही पहल देगी केर महत्व सबसो भेशी होता ची
  255. 16:09–16:17कतेक रास बात केर फर्जी दावास लक भाल सरी गाज केर वास्तविक साख्षदरी हमर इस पष्ट मानबची
  256. 16:17–16:25जे तक्नीकी तत्या, सर्वर्क, क्रोनोलगी आ एएगजका नव उपकरनक, क्रमिक इतिहास ही अस्ली तिहास आची.
  257. 16:25–16:29इसब निर्विवाद तत्या पर आदारे तची, बहावना पर नहीं.
  258. 16:29–16:34दिखू, हम तक्नीक वा पहल्डेक महत्व के शुन्यने कार रहल ची.
  259. 16:34–16:41आहा जे सर्वर क्रनोलोजी वत्तत्ध आदार पर अनवेशनक बात के लोग, उनिष्छित रूपेन एतिहासिक अची.
  260. 16:41–16:46और आशीश अचन्चनार जिक पोती एह मैने में एक ता पैग माझल स्टोन अची.
  261. 16:46–16:47बिलको लची.
  262. 16:47–16:58मुदा हमर्पक्ष आयु वहे चही जे मैत्फिली भे पत्रकारी ताक, वास्तविक शक्ती, अकर सामोहिक संस्तापन आईही मंच्के वैचारी गुडवत्तामी आची.
  263. 16:58–17:02जगन विदेजगाका पत्रिका बारा-बारा लिपिसव में
  264. 17:02–17:07जामे तिरहुता, ब्रेल, कैठी, निवादी शामिल अची, प्रकाषिद भोरहल अची,
  265. 17:07–17:11जगन मैठिली विकिपीटिया पर हादारो लोग बिना कोनो स्वार्थ रकल,
  266. 17:11–17:14अपन भाशा ग्यान सहेज रहल चती,
  267. 17:14–17:19तकन हम्रा सब के बुजबाग चाही जे इतिहास केवल पहले के आयल तकर नाम नहीं थिक
  268. 17:19–17:27इतिहास केकी निरमान के लक संस्ता कोना बनल आवकर समाज पर की प्रवाव पडल तकर नाम अची
  269. 17:27–17:31जे वेचारिग गुन्वत्ता अच्छिनार अखर गजल के व्याक्रन्ध के लोके स्तापिद के लक,
  270. 17:31–17:34वा विदे आपन समानानतर सहित ते अकाद्मी सम्मान से,
  271. 17:34–17:38नव लेक्ह सब के स्तापिद के लक, उ अस्ली वेवितिहास अच्छी.
  272. 17:38–17:43नहींटर अंटरनेट फ्रेक नुज अलाएक बद्नाग भ्रमग भवर बनी कर रही जते.
  273. 17:43–18:13उआँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  274. 18:13–18:19अशीश अनचिनार जी के ईपो थी मात्र इतिहास के ठेखवा नहीं अची,
  275. 18:19–18:22बलकी ईप हम्रा सब कर दिजितल वेबहार,
  276. 18:22–18:28हम्रा सब के मनो वेग्यानिक पतन अ सामोहिक उठान के एक तस पश्ट आरसी अची.
  277. 18:28–18:32इदेखावे तखी जे एक तब भाशा कोना संगर्ष को को,
  278. 18:43–18:49वहले की आयल, आहा के लेल की बेशी महत्वपुना ची, की ओडिजितल फृट्प्रिंट आग्क्रोनोलोगी,
  279. 18:49–18:52जे तिहास के नीव रख है चे आजुट कें पक्रडाई तची.
  280. 18:52–18:56वा! उएको सिस्तम आज संस्तागत प्र्यास,
  281. 18:56–19:00जो उही नीव पर एक ता बहव्या इमारत ठाड करेता ची.
  282. 19:00–19:04आहा एह पोती की तत्फ्यस स्वयम विचार करूं, आआ अपन निषकर्ष निकालूं.
  283. 19:04–19:10विमर शक एही मनच सा आई एतभे, इचर्चा आहा की कनालागल आपन विचार जरूर साजा करब.
  284. 19:10–19:12इक्दम दश्वाद

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देबेट में आहक स्वागत अछी, सन 2005 में मैठलीक अछि। अछि। लगका मैं इक देबाईर खेल वेल चल, हमरे सब आज आशीश अचिनार जीक, लिकल, चर्चित पोती, मैठली वेप पत्रकारिता के डियास के आदार पर चर्चा कर है लची. ता उसमै एक ता मेठ्छली ब्लोगर अपन वेप्साइत के सबसे पहल साभित करवाग होड में अब बाक डेटिंग वला प्रकरन एक दम अपन ब्लोग पोस्ट के बाक डेट कर देलने माने पोस्ट लिखलने 2005 में मुदा उकर तिती बदल के 1999 वे कर देलने उक्र लागल जे अई अई अई अई बिसरी गेला जे अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अई अ� अगर जे क्रोनलोगी अची अची वैई अचर वास्तवेक इतिहास अची दिकू हम आहा के बाज से सहमत ची जे उ दिजिटल फुट्प्रिंट महत्टोपोन आची मुदा मात्र अंट्र अची पन्ना खोल लिभ इतिहास नहीं कहलाबे ताची अवर सोच एह पर कनी भिन्ना ची भिन्ना ची, कोना आना बुजु, जे खाली जमीन पर एक ता जंडा गार दिलासा कोनो शहर नहीं बसी जाई ता चे आहा उक्रा शहर तक्हन कहबे जक्हन उते रस्ता बनाइ ता चे लोकक लेल सुभीधा होई ता चे अद्या इतियास तो उजन्डाक सो हो है तचे जे सब सब शब यह गाडल गेल चल मैत्ली वेप पत्रकारिताक वास्त्विक स्रुवात उई चिट्पृपन्ना से नहीं बलकी तक्हन मानल जावाक चाही जक्हन एक ता संस्तागर दाचा आयल जक्हन मानकी करन भेल अ मैत्ली के अक पुन्ड धिजितल इको सिस्तम भेटल अमहा की जन्दा गाडवा बला आनालोजी भूजी रहल ची मुदा इतिहास तो उई जन्दाक सो हो है तचे जे सब से पहले गाडल गेल चल अनचीनार जिक पोती में बहुत सपष्ट रूपें दर जाचे जे सन दोहाजार में याहू सिटीस पर गजेंद्र ताकुरक भालसरी गाच और 2003 में दिरेंद्र प्रेमरशिक पल्लव मिठिला मेठिलिक पहल वेब उपस्तिती चल उदद चल, मुदा उकर प्रभाव कत एक चल प्रभाव पैग चल इए उवू समए चल जकन अंट्रनेड डालब कनेक्षिन्स अगर उद्यागा चाड़े चल मने एक ता पन्ना लोड हूवा में मिंटो लगे चल उवही समय में देवनागरी फाँड़् के प्मुटर पर देखाओब अपने आप में टकनी की चमतकार चल जा हम एही प्रारंभेग टकनी की संगर्षक के नकारभे अदेखु जा हम तकनी की तितिक के महतु नहीं देब, तलोक वही करता जे कतेक रास ब्लोगग के संचालक के लिनी। मने उ जूटक आदार पर पहिलेवाक दावा आप, सत्यक रक्षा के लेल एक्रोनोलोगी सर्वो परी आची इख्रोनोलोगी सर्वो परीया ची मुदा रुकु हम आहा के ते कनी तो कब आशीश अंचिनार जी जे उही भ्लोगर के परदाफाष केलनी उनिष्छित रूपेन एक ता गजब के दिजिटल धिटेक्तिट्टिप का जा ची मुदा आहके इबुजवक चाही जे उ परजीवाडा की एक भेल की एक ता हुनका पहल कहला वक चल एक दम लोके के लागे तची जे हम पहने आईल ची इबात हुनका इतिहाश में आमर करे देथ मुदा हम्रा लेल उ 2003 के पल्लब मिठिला वा 2000 के भाल सरीक गाछ जे मात्र किछ पन्नक चल आजकर कोनो दिरन्तरता ने चल, उक्रा पत्रकारिता कहब भेशी भाजाते. आहा जक्रा दिजितल फुट्प्रिंट कहेट ची, हम उक्रा अंटरनेट के दिजितल खंदार कहेट ची. दिजितल खंदार? इद बहुत कदोर शब्वद़ूगेल कदोर अची मुदा सत्या अची उ मात्र एक ता प्रेयोग चल वास्तविक इतिहास तकन बने तची जकन त्ब जुहाँचार आप में विदेह इ पत्रिकाक शुर्वात होगी तची की आहां के इ भुजल अची की आहा के इबुजल आची, जे विदे, मातलिक पहिल पत्रिका चल, जक्रा अगर न्टन्ट्शन्ट्ट, सीर्यल नंबर, मने अईशसन भेटल चल. आआ, अईशसन भेटल महत्व पुरन आची, हमी मानेच ची, मुदा... इप आप आप आप पुरन नहीं आच, इप पूरा गेम चेंजर चल एक ता अईससन नमबर का अब अगट होई चे जे आहा के प्रकाशन के एक ता वेश्विक मानेता बहती रहला ची उो कोनो मन्मोजी भ्लोग नहीं गेल उो एक ता सन्रक्षित शोद समगरी बनी गेल जक्रा दून्या के कोनो लाइब्रेरी ट्रक कर सकेता ची विदेज मात्र एक ता वेप्साइत नहीं चल उ तिरहुता आ ब्रेल लिपी में से हो समगरी प्रकाषिद के लक औ, हो! ब्रेल लिपी में से हो? रा! उ मेठिलिक पहल एक अनलाई अर्काईव माने पुस्तकाले बनुलक अ सबो सब पएक बात उईक ता वेब अगरिगेटर बनुलक मुदा स्रोता सबक लेल ये सपर्ष्ट कर दिया जे उईजि समय में वेब अगरिगेटर कतिक जरूरी चल अगर नवा पोस्ट कर लिंक श्वचाली तरूग गब आप देखाँ आप देखाँ विश्टाग लिए ब्रदाग विश्टाग लिए ब्रदाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश्टाग विश अपे एक ताम एक ता पन्ना पर लाव आज्चल, एक रफ एभेल जे पाटख के, बीस्ता रगल अग़्ग यूरल मों राखवा कावषकतान न नहीच चल. इचे एक ता एको सिस्तम बने नाए. जंदागाए बसे शहर ने बने इत छी, वेब आग्रीगेटर जका रस्ता बने बसे शहर बनेद छी. निक्तर कछी. आव इदेखिरजे 2008 के संस्तागत सरुबत बात करोहल ची उप्रभाव्शाली आची. मुदा एई सिस्तम आचानक सै सुन्यसत नहीं कहसल चल. सुन्यसत नहीं मुदा. अम फेर से वही बात कहब जे जब भूनियाद नहीं रहीते तो महल कुना बनी ते आव उई दिजिटल कहन्दर के बात के लो मुदा वही खन्दर ता टकनिक के जनम देलक जकन कते करास बात ब्लोग अपन पोस्ट के अपन पोस्ट के 1999 कर दिखाबक प्रयास के लो, तप पोथिक लिखठ आशीश अंचिनार कोना अकर पकडलने, इभुजबा हम्रा सब के लेल बहुत जरूडी आची. आप अई अई सर्वर कर देटा से पकडलने. बलकोल. अई ब्लोगर दिस्पले डेट ता, उनिसनिन्यानवे कदेल लिनही मुदा बलोगर जे गुगलक पलट्फोम अची, उकर सर्वर अपने आप जे यूरल बनावेत अची, वही में वर्ष आमास आमबेट बहजाए ची, जना 2005 04 पोस्ट नेम. अचिनहर जी यूरल कोही 2005 अ 2013 के तिठी का देख्ये का, इस्सिद्दखेलिन ही जे कुस्टम लिंक वा फुछ्टर पोस्ट का सूविधा दूहाँजर आद सपोर ब्लोगर में चले नहीं उतो उई समय का लिमितेशन चल? आव उई चुट चुट तकनी की ज्यान अदिजिटल साखषे के भिना इतिहासक प्रमानिकता बचीनी सकच्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च विक्ति विशेसक जुनुन सबने तची, सिस्तम हमेशा पाचा आबे तची आग लागी तची, ज़व यकती सब कुछ करे तची शुरु मेत हा, पोठी मे राजीव रंजन लालजीक मेठिली लोकगीत, ब्लोगग चर्चा जी जर 2007 में बनेलन ही, उईक ता व्यक्तिगत प्रयास चल, जर बिना कोनो आर्थिक लाब हक, मैठिलिक पारमप्रिग गी तक, इंटनेट पर सन्रक्षित कर रहल चल, वाया आशीश अंचिनार स्वैम 2008 में, जर अंचिनार अखर शूग्यलनी उक्रा देखू. उ गजलक लेल नीक मंजचल बहुत नीक उ मात्र मैत्हिली गजल पर केंद्रच्छल उ मैत्हिली गजलक के अंट्टनेट पर नव जीवन देलक उनलाई भुशाएरा शूग्रूके लक गजलक व्याकरन पर चर्चा शूग्रूके लक इसब वन मैं आर्मी प्रयास चल, जो यी व्यक्तिगत ब्लोगज नहीं ते, ता हां के व्यब अग्रिगेटर की अग्रिगेट करीते. खाली पन्ना नहीं, व्यक्ति ही समुदाये के बाड देखाईता ची. देखो आह की इबात की चो हद्थरी सत्ते आची जे विक्ती बाट देखाई तची मुदा विक्तिगत प्रयासा के चीमा होईच है इंटरनेट एक ता मुक्त असमुहिक मने अपन सूर्स मन्चाची जोदरी एक ता विक्ती काज कर रहल आची उ ब्लोग आची जखन उ समुदाय में बदली जाएत छै, तकन वास्तनिक दिजितल संस्ता बनाई तच्छ. मैठली विकि पीटिया कु दाहरन लीजिया, इक उनो एक विक्ती नहीं बना सकै चल. पोथी में स्पस्ट देल गेल अची, जे 2008 में गजेंदर ताकृर एकर लिल विकी मीट्या फाँड़ेशन के आवीदन देलने. मुदा की उ तुरत बनिगल? नहीं, उही में तसमेल आगल चल. अव, विकी पीट्या क नियम होई चाए, जगन्दरी एक ता सक्रिया कम्युनिती हाजारों लेक नहीं लिखत, तक ठारी उक्रा अप्रुवल नहीं भेटत. आव, कम्युनिती कोना बनल? अगो कम्मिनूटी बनल उमेश मन्डल जगा लोखसा जे उही समें सथर प्रतिषत प्रिष्थक निरमार अकेले अपने नितुट्तो में केलनी राजेश रंजन आा आन अनेक योग्दान करताक अथक अनवाद अ लेकनिक बाद चो सालक संगर्षक बाद 2014 में मैत्टली विकिपीटीया का प्रूल भेटल Google Translation लेल 2011 में जे प्रयास भेल वो एक ता समहिक काच्छल जत यो अनेक लोग आपन समें देलनी बिना कोनो स्वार्थ वा पारिष्रमिक के आपन भाशा के digital सन्सार में स्तापित करभा लेल एकर अर्थ बुजेए थ्जिया हम? इंटनेट पर इतिहास समाजिक समहिक प्रयास सम बनल अची. विक्तिगद ब्लोग एक ता नीक डारी भोसके जे, मुता विकिपीटिया जका अपन सोर्स प्रोजेक्त एक तब आशाके दिजितल दुनिया में नमर कर देच. अहां की कमुनिटी प्रोजेक्त का बात हमरा सोजे पोथिक तेसर अ सब समहत्तूपन हिस्सादिस लोजाई चे अहां विकिपीटिया अ अनुवादकक जि समहिक प्रयासक बात करहल ची अगी बीटीया के देटा को प्योग की भेल, उकर परनाम की भेल, अही देटा से भाशा के दिजितल उपस्तिती पक्की भेल, मात्र उपस्तिती नहीं, अही समुदाए जे देटाबेस बनवलक, अग देटाबेस अन्ताथा आर्टिफिष्टलिटलिजन्स, या अजुक याई उख़ाग प्राश्टान्ति चल या बात हम माने ची जे यूनिकोड एक ता पाग क्रान्ति चल बिल्कुल अववग क्रान्ति आई एतदरी पहुच गेल अची जे ए आई फो भारत केर अईन्टिक ट्रान्स्टू जे दोहाँ जागा अब आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आद आ� बिश्विस्तर पर प्रस्थापित कर रहल चे दिन एड्तकनी की यात्रा में एक ता सीदा लगी रहाची आहा के एज़ सब सीदा लगे तिछे एक दाम पहले योनी कोडाल तकन भ्लोग्स बनल तकन विकी पीट्या जका कम्मुनिती देटा बनल आब उही देटा के आदार पर एक ता मशीन नाच्रल लंगुज जनरेशन करो लची. एकर माने आची जे मशीन आब मेठली भाशा में अपने वाख्य गडी रहो लची. आहा मेठली बजाएच छी, आज स्पीच रिकश्निशन से, अद्विश्वास्ट शिसामतने आजी अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास अद्विश्वास उद्यागा के अगा के अगा इंटरनेट कर उआनियार पक्ष नहीं देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई देखा� अग्यानी सुब बनार होलाचा फेख नुज का प्रसार भोर होलाचा मुदा सबसे पएग ख़सोट जे साहिट्टिक भोलाची ओए ची फेज्बुकक लाएक बटन फेज्बुक लाएक बटन से साहिट्टिक की नुच्सान बोल सके तची अप्से पएग खषोट जे साहिट्टिक भाल अची अची फेस्बुकक लाएक बतन फेस्बुक लाएक बतन से साहिट्टिक की नुक्सान बहुत सके तची इत तब पाथका के लेखक से सोजे जोडे तची नहीं, नहीं, इवास्तविक सहितिक आलोचना के नष्ट करोल अचा अचिन हार जी आपन पोठी में एक तब बहुत मारभिक उदारन देलनी एची उब लिखे चदी कोना एक तब नवगजल कार अक के फिस्बुक पर बेशी लाइक भेट्बा कारने इक तब बहुत पुराना अन्निक गजलकार सद्मा में चलीगला उ, उ गजल लिखभ कम को दिलने रह, फेस्बुक का रिए ल्ग़रिदम गुनबत्ता नहीं देखेत अची उ मात्र इगे देखेत ची, जे के कते खाथेग हाहा ही करहल अची अपन पोईट्ट्टानक अविश्कारक जे चती जस्टिन रोजन्स्टीन उस्वेम एक्रा समाजक लेल गातक मानी अपन फोंसर फेश्बुक फ्यट्टा देलने. आश्चर्यक बात अची अखल नी जे एई लोकक कन्टीशन करहला ची जखन मेठलिक नव लेखक मात्र पच्चास लाइक बेट्वापर अपने आपके महां कवी बुजे लगए चती, तो वैचारिक शुन्नेता ची. मात्र एएए दवारा मशीन अनुवाद भहजे वासे भाशाक आत्मा नहीं बचेचा. पत्रकारिताक आर्थ अछी सत्यक कोज अवेचारिग गेराई जे ईग लाएक बतनीया संस्क्रती निगली रहा लगा जी बुजलिय, आगाक छिंता जाएज अछी अप फेसबुक लाएक कजे मनोवेग्यानिक प्रभाओ लेक्खख पर पर पर पर पच्छी उ पोथिक अक ता बहुत मस्वूथ अवलोकन अच्छे मुदा एक मिनेद, हमरे इबाद स्पष्ट करे दिया कि इद तकनिक का दोश अच्छे, वाई हमरा सबक मान्विय मनोविग्यान का दोश अच्छे मुदा तकनिक तोक्र बड़ावा दार अच्छे मुदा जे लाएक बटन कोज जस्टिन, रोसेंस्टीन, केलनिन, उ तक नीक ता मात्र एक ता तूल आचे. जो एक ता लेक्ख लाएक कर लालच में नीक गजल लिख़ब चोड दे ता चे, तो लेक्ख का समस्स्या जे अगर नहीं. जखन चापाखाना मने प्रिंटिंग प्रेस आयल चल तकनो बदपैक पैक विद्वान लोकन के लागल चल जे बाशाक मोलिक्ता कथम बजेते अग, इतियास ता एह कही चे? एक दम, लोग सोच चल जे हाथ से लिखल पोठिक जे सम्मान अचे अद शापाखचाना की के लेक उ ग्यान के आम लोग दरी पहुज़ा। मुदद देखु चापाखचाना में एक ता समपादख होई चल, जित ताये कर चल जिक की चबता की नाये, फेजबुक पर के समपादख अचे? समपादख पाटख सवयम अचे. अहां मात्र नकार आत्मक पक्ष देख रहल ची जक्चन अहां मेठिली स्वास्त परी चर्चा जकां ब्लोग देखछ ची, जटे रमाकर चोदरी जी मेठिली भाशा में रोग, आवकर निदानक विस्तार से चर्चा कर अच्छती तो इंट्रनेट के कारने समबभ्यल उनिश्छे ही एक ता निक का जा चे आज जकन आहा इसमाद वा मित्ला मिरर जका निउस पोटल देखे ची जे मित्लाक गाम गामक खभरी दून्याक कोना कोना में बैसल मेठिल दरी पहुचा रहले ची तक्की इंट्रनेट कर सकारात्मक्षक्ती नहीं तेक इसब समबभ्भ्यल की अक्त, कोनो गजंद्र ताकोर, कोनो आशीश अंचनार, कोनो रोशन चोद्री, तक्नी की रुपेन पहल्देग उठेबाक साहस केलन ही. वो साहस तचल. तद इतिहास में उही पहल देगी केर महत्व सबसो भेशी होता ची कतेक रास बात केर फर्जी दावास लक भाल सरी गाज केर वास्तविक साख्षदरी हमर इस पष्ट मानबची जे तक्नीकी तत्या, सर्वर्क, क्रोनोलगी आ एएगजका नव उपकरनक, क्रमिक इतिहास ही अस्ली तिहास आची. इसब निर्विवाद तत्या पर आदारे तची, बहावना पर नहीं. दिखू, हम तक्नीक वा पहल्डेक महत्व के शुन्यने कार रहल ची. आहा जे सर्वर क्रनोलोजी वत्तत्ध आदार पर अनवेशनक बात के लोग, उनिष्छित रूपेन एतिहासिक अची. और आशीश अचन्चनार जिक पोती एह मैने में एक ता पैग माझल स्टोन अची. बिलको लची. मुदा हमर्पक्ष आयु वहे चही जे मैत्फिली भे पत्रकारी ताक, वास्तविक शक्ती, अकर सामोहिक संस्तापन आईही मंच्के वैचारी गुडवत्तामी आची. जगन विदेजगाका पत्रिका बारा-बारा लिपिसव में जामे तिरहुता, ब्रेल, कैठी, निवादी शामिल अची, प्रकाषिद भोरहल अची, जगन मैठिली विकिपीटिया पर हादारो लोग बिना कोनो स्वार्थ रकल, अपन भाशा ग्यान सहेज रहल चती, तकन हम्रा सब के बुजबाग चाही जे इतिहास केवल पहले के आयल तकर नाम नहीं थिक इतिहास केकी निरमान के लक संस्ता कोना बनल आवकर समाज पर की प्रवाव पडल तकर नाम अची जे वेचारिग गुन्वत्ता अच्छिनार अखर गजल के व्याक्रन्ध के लोके स्तापिद के लक, वा विदे आपन समानानतर सहित ते अकाद्मी सम्मान से, नव लेक्ह सब के स्तापिद के लक, उ अस्ली वेवितिहास अच्छी. नहींटर अंटरनेट फ्रेक नुज अलाएक बद्नाग भ्रमग भवर बनी कर रही जते. उआँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� अशीश अनचिनार जी के ईपो थी मात्र इतिहास के ठेखवा नहीं अची, बलकी ईप हम्रा सब कर दिजितल वेबहार, हम्रा सब के मनो वेग्यानिक पतन अ सामोहिक उठान के एक तस पश्ट आरसी अची. इदेखावे तखी जे एक तब भाशा कोना संगर्ष को को, वहले की आयल, आहा के लेल की बेशी महत्वपुना ची, की ओडिजितल फृट्प्रिंट आग्क्रोनोलोगी, जे तिहास के नीव रख है चे आजुट कें पक्रडाई तची. वा! उएको सिस्तम आज संस्तागत प्र्यास, जो उही नीव पर एक ता बहव्या इमारत ठाड करेता ची. आहा एह पोती की तत्फ्यस स्वयम विचार करूं, आआ अपन निषकर्ष निकालूं. विमर शक एही मनच सा आई एतभे, इचर्चा आहा की कनालागल आपन विचार जरूर साजा करब. इक्दम दश्वाद

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