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मोतीदाइक_पीड़ी_कोड़नाइ_विद्रोह_वा_भक्ति.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:17अछि। बड़बेट बद्गमभीर आमर्मस परशी विशे पर विमर्ष करे जाराल ची एकदम एकदा आहन विशे जे सीदा हमरा सबक समाज आप माने अद्दियात्म सा जोडेला ची.
  2. 0:17–0:47तक खल्पना करु गाम का एक तब्रिध्ध्ध्स्त्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री �
  3. 0:47–0:50अगर सब गज्द्र ताकुरक कता मोतीदाई पर बात कर हैं जी
  4. 0:50–0:52जे विदे इप पत्रिका में प्रकाशित अची
  5. 0:52–0:54बडनीक कता आचे
  6. 0:54–0:58तवजैनी गामके क्यक तर रजक मेला चतीं मोतीदाई
  7. 0:58–1:01उजीवन बर गहिल माता के पुजाई चतीं
  8. 1:01–1:03मुदा संतान हीन रहबा कारन,
  9. 1:03–1:33गूवा तोली किस्त्री सब हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  10. 1:33–2:03अपन बिद्रो नहीं अपना अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अ�
  11. 2:03–2:33आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
  12. 2:33–2:42उनकर समपून जीवन सेवा में भीतल, सब हक कप्रा फीजब और गहल मातात पीडिली पब, मुदा समाज हुनका की दिलक?
  13. 2:42–2:43अप्मान
  14. 2:43–2:52इक दम, जगन गूर तोलिक यस्तरी सब मालजालग का अवेच छी, तव मोटीदाए के बाँज कई कई अप्मानित करे तची
  15. 2:52–2:58उस्ब कहेत थची जे मूती दायक च्या पर्लासं मालजाल से हु भाँज भाज बजाएत.
  16. 2:58–3:00जे की बद्ख्रूर अची.
  17. 3:00–3:02इकोनो सादारन गप नहीं आची.
  18. 3:02–3:06मालजाल गूर तोली कलेल दहन आची जीवीका आची.
  19. 3:06–3:15जखन उस्त्री सब हुंकर च्या के अशुब मानेत अची, तो उहुंका गामक अद्वेवस्ता में एक टा श्राब जगका गोषित कर अची.
  20. 3:15–3:21आप, आहा समाजिक प्रतारना कजे यतार्थ राखी रहल ची, उकर क्रूर्ता सा हम मुह नहीं बूरी रहल ची.
  21. 3:21–3:26तफिर आद्धात्म कोनाभेल यहूंकर अस्तितु पर प्रहार अची
  22. 3:26–3:31गोर तोलिक यस्त्री सबक उताना निस्टित रूप से मुतिदाई किर्दर के चलनी के लक
  23. 3:31–3:34यहूं मानेच फीट, मुदा उकर दिशा देखू
  24. 3:34–3:35दिशा
  25. 3:35–3:40अग, एक ता बिक्षिप्त या हताश लोक समाज पर प्रहार करेत अची.
  26. 3:40–3:43मूतिदाई समाज से लडबाक बद्ला में,
  27. 3:43–3:45उआई इस्त्री सब से जग्डा करबाक बद्ला में,
  28. 3:45–3:47सोजे माता लख्ये गेली.
  29. 3:47–3:50आँ, उद अ टा हताशा कारन गेली आँ.
  30. 3:50–3:55नहीं, इब अटाशा नहीं अची, इब विषेशा दिकारक बोद अची.
  31. 3:55–4:03जा इब मात्र सामाजिक कुन्ता रहीत, तो उ गूर तोली के जनामी सब के गारी देट ती, वो अपन भागे के को सत थी.
  32. 4:03–4:05मुदा हुनकर कुदारी उटाएब ता.
  33. 4:05–4:09रूकु कता कार गजेंदर ताकृर स्पस्ट रूप से लिखे चतिन,
  34. 4:09–4:13इविरोद नहीं चल, इबख्तिक अंतिम भाशा चल.
  35. 4:13–4:14अंतिम भाशा?
  36. 4:14–4:21रूकु, जकन सानसारिक भाशा जेना न्याय मांगब वाकान्दब अर्धिन भूजाई तची,
  37. 4:21–4:25तक्हन भक्त सोजे भगवानक दवार पर थाड होई तची
  38. 4:25–4:28मुदा उ भगवानक दवार पर कोना थाड होई चत्छी
  39. 4:28–4:30इतेईसे हमर प्रष्नची
  40. 4:30–4:31कहु
  41. 4:31–4:32कता सपष्ट कहे तची
  42. 4:32–4:34जे भोर मे उ माताक लग
  43. 4:34–4:36दीपक भेर नहीं
  44. 4:36–4:38हिसाप के भेर मे जाए चत्छी
  45. 4:38–4:42अगर बदला मेहाके कोनो पलक अपीख्षा होईता ची
  46. 4:42–4:44आखर लेंदेन मानी राल ची
  47. 4:44–4:46इएक्टा ट्रन्जाक्ष्यन नची
  48. 4:46–4:48माने एक्टा लेंदेन अची
  49. 4:48–4:50मोथी दाई आपन जीवन के आमुल ये समय
  50. 4:50–4:52वेदी के लिपा में लगा तेलनी
  51. 4:52–4:54आजकन उही बखष्य नची
  52. 4:54–5:04आजाखन उभक्तिक प्रतिपलक के नाम पर हुँँका बाज आशुभा होवा कलंक भेटल तक हनुँँका देर एक बान तुट केल.
  53. 5:04–5:07आजाखन वानन आजी जो अख्रोष मे चली.
  54. 5:07–5:09आजक्यक्न उही ब्वक्तिक प्रतिफलक के नाम पर
  55. 5:09–5:14उनका बाज आ अशुभा होगा कलंक भेटल तक हन हुनका देरे एक बान तुट गेल.
  56. 5:15–5:17ता आहाख मानने आची जे उ आख्रोष मे चली.
  57. 5:18–5:24बिलकल. उ हिसाब मांगी रहाल चतिन जे हमर समपून जीवन के आसीम सेवाक मुले की यही आचे.
  58. 5:24–5:32यही आचे, एह उही लेंदेन की विपलताक अक्रोष अचे, यह भक्तिक अन्तिम भाशा नहीं यह व्यवस्ताक दिवाल्या पन अचे.
  59. 5:32–5:37आपा के यह मनोथी अल्लेंदेन वाला तरक सूनी मित बहुत व्यवावारिक लगे तची,
  60. 5:37–5:42मुदा इबखती जहन पावन भावना के एक ता व्यवसाएक सवदा में बदल देता ची?
  61. 5:42–5:45सवदा नहीं, एक ता समाएक यतार था चे?
  62. 5:45–5:47मुदा हम आहां के इबतावे चाह ची,
  63. 5:47–5:51जो लिजाब क अर्थ के वल बही खाता के देविट अक्रेटिट नहीं हो ता ची.
  64. 5:51–5:56मुदी दाएक उ हिसाब कोनो बनिया कि फिसाब ने चल, उईक ता अस्तिटवक प्रशनचल.
  65. 5:56–6:00अस्तिटवक प्रशनता चले जैहास उ तूटी गेली है.
  66. 6:00–6:07जैह आहा एक राक केवल लें देन माने ची, ततनी विचार करू जक्वन कोनो सवदा विफल होई तची,
  67. 6:07–6:09तब लोग आही ताम से मुगूमा लेते थी
  68. 6:09–6:10आही दा
  69. 6:10–6:15जैं मुती दाए के खें के अपन सेवाक फल नहीं भेटवाक कुन्ता रहीत
  70. 6:15–6:17तब अ माताक पीडी लिपनाई चोर देता
  71. 6:17–6:18नास्तिक भजेता
  72. 6:18–6:20वा पुजा करब बन कर देते
  73. 6:20–6:22मुदा उ पुजा बन नहीं कर ज़ती
  74. 6:37–6:40पीली कोडनाई कोनो सादारन बात नहीं आच्छी
  75. 6:40–6:42हम जानाई ची
  76. 6:42–6:46आहा के बुजनाई आच्छी, जे गाम गर में पीली लीपबाक अग्ध की होई तची
  77. 6:46–6:50इी माटी अग गोबर से बनल एक ता पविट्र वेदी होई तची
  78. 6:50–6:53मुती दाई बर्खों से आपन राथ से उक्र लीपिच छलीन
  79. 6:53–6:54एक दम सत्या
  80. 6:54–6:59उही में हुंकर श्रम, हुंकर पसीना, हुंकर विष्वास लागल चल
  81. 6:59–7:02आजे हात बर्खों से उक्रा सचार राल चल
  82. 7:02–7:04उही हात में भोर में कुदारी आची
  83. 7:04–7:06और उक्रा कोडी राल चती
  84. 7:06–7:06मुदा इई
  85. 7:06–7:12इशाक्शात इश्वर्य प्रतिकक विद्वन सच एक रहा भकती कोना कहे शकत ची
  86. 7:12–7:15इश पर्ष्ट्रुम सेक्ता अल्टीमेटम आच
  87. 7:15–7:16अल्टीमेटम
  88. 7:16–7:18हा, मने प्रकत हो माता
  89. 7:19–7:20आई हम्रा उत्र चाए
  90. 7:20–7:26जा आहा हम्रा न्याय नईदेप्ता आहांके एगाम में अस्तित्वा आहांकी पीडी मितादेप.
  91. 7:26–7:28इबड उगर व्याख्या आची.
  92. 7:28–7:35जखन आहा कोनो सत्ता से अदिकार मागे ची आो नहीं सूनेत आची, उखर प्रतीक के नष्ट करे ची.
  93. 7:35–7:38इआख्रो से उपजल दिस्ट्रक्ष्यन आज्ज
  94. 7:38–7:43वर्द शमा परब बुंदा आज्जा इद्टर्क्य अथार्थ से कोसो दूर अच्छी
  95. 7:43–7:46अब भक्तिक औई ग़राई के बुज्वामे असमर्त आज्छी
  96. 7:46–7:48अच्छ? कोना?
  97. 7:48–7:51इदिस्ट्रक्ष्चन नहीं इदीखंश्ट्रक्ष्चन अची
  98. 7:51–7:53पीडि की अची
  99. 7:53–7:57पीडि माटी या गोवरक एक ता बहुतिक अवरन अची
  100. 7:57–7:59जे माता अब भवक्तक भीच मे अची
  101. 7:59–8:01मुदा उकर पवित्रतात अची ना
  102. 8:01–8:04जखन भवक्तक प्रेम अ अधिकारक सीमा
  103. 8:04–8:12सब से उजबहे जायत जी, तकन औए इश्वरी सत्ता के उई माटी वब पात्रक वेदी में सीमित नहीं देखाई तची.
  104. 8:12–8:16मने आहा कहे जाय छी जे उशाक्षात भीट करे चाहच चलिया.
  105. 8:16–8:16एक दम.
  106. 8:16–8:20उ उहे बहुत पर्दा के पाडी रहल चलिया
  107. 8:20–8:23ताकि उ साक्षात आपन माता सा भेद कर सकतिन
  108. 8:23–8:26करबया कताक उही पाती पर पुनादयान दिया
  109. 8:26–8:27आप ख़ो
  110. 8:27–8:29कताकार लिख़च छतिन
  111. 8:29–8:32जेना बच्चा माएक आचर गिंचे तची
  112. 8:32–8:34उत्तर दे नेता आच्रे ना चोडवो
  113. 8:34–8:36मुदा इब जच्चा के अनालोगी
  114. 8:36–8:39जगनेट अबूद बालक रूसाई तची
  115. 8:39–8:41काने तची आपन माएके मारे तची
  116. 8:41–8:43वाह मातरे तची
  117. 8:43–8:46तकी आहा उक्रा माएक अस्तित्व कविद्वन्स कहब
  118. 8:46–8:47नहीं
  119. 8:47–8:53मुदा की उ आल्टिमेतम आफ़ी? नहीं? उ प्रेम आर अदिकार क सरवोच प्रकती करनाची.
  120. 8:53–8:58बच्चा जनाई तची, जे माए उक्रा त्यागी ना सकई तची, ताहिले लो रद करए तची.
  121. 8:58–9:02रोकु हमाहागे बच्चा आम माएक आनालोगी के एते ही रोकग चाहब.
  122. 9:02–9:05की एक? इता कताक मुल बाव अची?
  123. 9:05–9:08इई आनलोगी सुनी में बद बावो कचे.
  124. 9:08–9:12मुदा इई मोती दाएक वेदना की बूच चोट का देटा चे.
  125. 9:12–9:13बुजल येने?
  126. 9:13–9:16मोती दाएक उनो अबोद बच्चा नहीं चेती.
  127. 9:16–9:18जे खिलाअना नहीं भिटला पर रूसी गेल चेती.
  128. 9:32–9:38वागात भेल आज उक्रा आहा बच्चाक हत कैकर रूमानी नहीं को सकते चे.
  129. 9:38–9:40रूमानी नहीं कोरहोल चाँ.
  130. 9:40–9:46कलपना करू जे आहाक अपन समपोन जीवनक पूंजी कोनो एक ता ताम निवेश केल हू,
  131. 9:46–9:52अज्खन आहा के सब सब भेसी आविषकता चा तकन आहा के दखक मारी का निकाल दिल गेल.
  132. 9:52–9:55मुदा समाज सनिकाल गेल इश्वर सनहीं.
  133. 9:55–10:02तकन जे अक्रोष होई तहीच, उहत नहीं, उविषुध, प्रतीषोध आए विष्वासक ज्वाला होई तची.
  134. 10:02–10:08कताकार स्वयम कहे चत्छ ही जे गोवर में सनल हात उतही तमी गेल.
  135. 10:08–10:10अशन बद्द मार्मी कची.
  136. 10:10–10:14अशन जकन हुंका माल जालक लेल अशुब मानल गेल
  137. 10:14–10:17हुंकर भीतरक सबता विष्वास तूटी गेल.
  138. 10:17–10:21जक्रा समाज पूरन रूपेंड बहिष्क्रित का चुका आची
  139. 10:21–10:25उकर यी हताशा चल, यी कोनो अद्यात्मिक सादना नहीं
  140. 10:25–10:28बलकी एक ता बहयंकर ब्रेक्डाउन चल.
  141. 10:28–10:31आख यी निवेश अप्रतिशोद का उदारन
  142. 10:31–10:35यी प्रमाडित करे तची जे आहा निरन्तर एही गटनाके
  143. 10:35–10:39एक ता बहुतिक असानसारिक चश्मासा देखर आल चीं.
  144. 10:51–11:21अब अपन सम्पुर्न उर्जाके एक था कोखो उही विदिप और प्राहर कोरहल चतिन, कि तो हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  145. 11:21–11:24इदबड आदर्श्वादी व्याख्या भेल
  146. 11:24–11:26आजिक्रा विश्वास कही रहल ची
  147. 11:26–11:29उ वास्तो में विश्वासक उवस्ता आचे
  148. 11:29–11:31जटि ए भक्त के इभान भोजाई तचे
  149. 11:31–11:34इश्वर अवकर भीच आब कुनो परदा नहीं आचे
  150. 11:34–11:38माने, आहा कह बच्ची जे इशिद भवक्ती कवस्ता आचे
  151. 11:38–11:42इगदम इशादारन भवक्ती से सिद भवक्ती दुष चलाँग आचे
  152. 11:42–11:47नीक आचे, जो इशिद भवक्ती आचे, आई पुरन विष्वासक चलाँँचे
  153. 11:47–11:51ता आव, हम्रा सब कताक निष्कर्ष पर बात कराई तची.
  154. 11:51–11:57तो उकर परिनाम की भेल, कताक अंत बद यतार्थ्वादी आज्रिदे विदारा कचे.
  155. 11:57–11:59आव, उदुखत तची.
  156. 11:59–12:04गहल माताक पीटी कोलाग बाद, हुनका सन्तानक प्राप्तीता होई चने.
  157. 12:04–12:08मुदा कता स्पस्ट करेत जे चोदिनक भेटा गेल
  158. 12:08–12:09सत्या
  159. 12:09–12:11आहा बूजी रहल ची एकर आद्ध
  160. 12:11–12:15हमरा सबक मिठला में चथ्यार दरी बच्चाक जीवित रहभ
  161. 12:15–12:18बड महत्व पुन मानल जाई तचे
  162. 12:18–12:21मुदा उ बच्चा चोदिनक बाद मरज जाई तचे
  163. 12:21–12:23मुदा एक्रा केवल जैविक हार
  164. 12:23–12:29अथात बुध्टिक सन्सार में जीव विग्यान असमाजक नियती अंतता हावी रहल
  165. 12:29–12:34उनकर जे तताखच्त विद्ड्रोज या आहाक शबद में उनकर रथ चल
  166. 12:34–12:37उनका बुध्टिक सुख नहीं दे सकल
  167. 12:37–12:40मुदा कता अदे कथम नहे हुई तची
  168. 12:40–12:43इश्वर उही लेंदेन मेसे हो हूंका तखी लेलक
  169. 12:43–12:46उसंटान देलक मुदा मातर चो दिनक लेल
  170. 12:46–12:50तई इद्यात मेक अदिकारक विजै कुना बहल
  171. 12:50–12:53तई तई आमान विय यतार्ध का विजै जी
  172. 12:53–12:56जते सीमान्त्क्रितक हार निष्चित अच्छे
  173. 12:56–12:58समाज हुनका बाज कहलक
  174. 12:58–13:01अन्यती हुनका मातर चोडिनकक मात्रित्वदवक
  175. 13:01–13:04उही कलंकके इस्थाई कदलक
  176. 13:04–13:07इए ता बहुत प्रभ्शाली आ तारकिक द्रिष्टी कोन अच्छी
  177. 13:07–13:13आब भद्तिक स्थर पर इस सत्य आची ज्यो सन्तान चोदिन कबाद चले जाई तची
  178. 13:13–13:18मुदा की यहा कथाक अन्तिम आश्भ़स महत्तूपून पांती के भिस्री रही जी
  179. 13:18–13:19कुन पांती
  180. 13:19–13:20गजंद्र ताकृ लिखाई च्थिन
  181. 13:20–13:23जे विद्हान जे नहीं दई तची
  182. 13:23–13:25से भक्ती दोसर रूप में दोजाईता ची
  183. 13:25–13:29चोदिन का भेटा गेल मुदा माए आमर भोगेली है
  184. 13:29–13:32उ आमर भोगेली है इता एक टसान्त वना आचे
  185. 13:32–13:34जै एक वल यतार्थ वादी त्राज्दी रहित
  186. 13:34–13:37जै एक वल सीमान्त क्रितक कर हार रहित
  187. 13:37–14:07तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक �
  188. 14:07–14:09इसान्सारिक सीमाक अतिक्रमन आची
  189. 14:09–14:14आमुदा हमरा इस आमर माए वाला तर्क एक ता चल बुजना जाते चे
  190. 14:14–14:15चल कोना
  191. 14:15–14:19आहा गोर करु इस आमरता कखरा काजा भी रहाल आचे
  192. 14:19–14:25कि इस आमरता हुनका उही समाजिक अप्मानक गाउसा मुक्त कसकलन
  193. 14:25–14:29जखन उज्यान जब बडला में न्याय नहीं बलकी एक ता मिठक बना दिल गेल
  194. 14:29–14:33हम्रा लगगे तच्छे के समाजक एक ता बडभ पुरान कुतिल चाल अचे
  195. 14:33–14:35आहा एक रा समाजक चाली कही राल ची
  196. 14:35–14:37अगर समाज इक चाली कही राल ची
  197. 14:37–14:38एक दम
  198. 14:38–14:43जकन समाज कोनो सीमान्द क्रित पर आमानवी अथ्याचार करे तची
  199. 14:43–14:45आवकर सर्वनाश कर दी तची
  200. 14:45–14:48तकन अपन अप्राद बुधख के कम करबाक लेल
  201. 14:48–14:51समाज उक्रा आमर वा पुजनिय बना दी तची
  202. 14:51–14:55यह उद्याग विष्च्ट्द समाज शास्त्रिय द्रिष्टि कोण भेल
  203. 14:55–14:58औरे हूंकर तब ज़ा मरीगेल समाज हूंकर तुक्रा देलक
  204. 14:58–15:01मुदा देखू आब उ आमर माए बहगे लिए
  205. 15:01–15:05यह तसमाजक उही क्रूर्ताक अद्यात्मिक आवरन पहिरावक प्रास आजे
  206. 15:05–15:09अभी तद्याएक प्रज़ाएक उही क्रूर्ताक अद्यात्मेक अवरन पहिरावक प्रायास अचे
  207. 15:09–15:11मुदा कता कारता
  208. 15:11–15:13मुदी दाएक अखाएक ज़ा हम शुद रुब सपड़ी
  209. 15:13–15:18तई एक्ता इस्त्रीक समाजिक प्रतानास अभजल वेदनाक शषक्त दस्तावेज अचे
  210. 15:18–15:48दर्म आ भक्तिक आवरन में हम्रा सब हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  211. 15:48–16:18ज़़ा समाज हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
  212. 16:18–16:22जे अस्त्री के समाज आपन परीदी सब बहर कदे लक,
  213. 16:22–16:24औए अस्त्री आपन भक्तिक सामच्सद,
  214. 16:24–16:27उई समाजक इश्ट देवी के आपन निंट्रन मेलो ले लक.
  215. 16:27–16:32मानी, उस समाज पर अपना तरीका सब विजे प्राप्त किलनी.
  216. 16:32–16:38सत्त्य, उ गावक लोकक के इी मानवाक लेल विवष्क गडे लक, जे माता हुंकर आची.
  217. 16:38–16:42इकोनो पित्र सत्तात्मक समाजक गास्लाइटिंग नहीं आची.
  218. 16:42–16:47इी मोटिदाएकर अद्यात्मिक विजगय आची, जटे विदान रार मानी लेत आची.
  219. 16:47–16:54आा, आा, उनकार आई हे आद्यात्मिक विज़ाय के बड़ सुन्दरता सब प्रस्तुत के लूँ.
  220. 16:54–16:57मुदा हम अगनो आपन उही विन्दू पर कायम ची,
  221. 16:57–17:03जे मोथी दाएक इग्रित्य, बख्तिक उही परम्परागत स्वरुप के कन्धित करे तची.
  222. 17:03–17:07उता अची, हमी मानेद ची जे इपरम्प्रागत नहीं चे.
  223. 17:07–17:11हमरा सब दूनुगोटे आईबात पर अवश्श्य सेमद भज्सजेच्छी
  224. 17:11–17:16जे मुतिदाएक पीडी कोडबाक गतना, सादारन दार्मिक माननेता सबक्के
  225. 17:16–17:18जबर दस चुनाूती देट अची.
  226. 17:18–17:23एक दम, एक्रा कुनो से हो द्रुष्टी कून से देखी, ये एक्ता जुनाती ता अच्छी.
  227. 17:23–17:28चाहे आहा एक्रा बवगतक इश्वरी सत्तापर परम अदिकार मानी
  228. 17:28–17:35वहमर द्रुष्ती सा एक्ता सीमान्तकरत कतुतेद अस्तरीक लें देन के हिसाप के माग मानी
  229. 17:35–17:41इत्ताय अची जे इई परम परागत पुजा पाथक सीमासा बहुत आगुक वस्तूचल.
  230. 17:41–17:42सत्ते बात.
  231. 17:42–17:46इदर्मक ओर उप आजी, जटे विनम्रता वध याचना कस्थान,
  232. 17:46–17:49हद्ट, अख्रोष अ अदिकार लोले तची.
  233. 17:49–17:52मोथी दाई एक नव्प परिपातिक रचना करे थचती.
  234. 17:52–17:54पुन रुप प्यन सहमत ची.
  235. 17:54–17:57इग खता हम्रा सब के इजोच्वाक लेल विवष करे तची,
  236. 17:57–18:02जे बख्तिक वास्तविक सुरुप की आची? की आख के वल याचना आची? नहीं?
  237. 18:02–18:03बलकुल नहीं
  238. 18:03–18:09मोती दाई के जे दिन इग्यान भेल, जे हुनका आब याचना नहीं करवाख चनी,
  239. 18:09–18:14जे दिन हुन का इबुजना गेल, जे समाजक नियम भवानक दरबार में लागु नहीं होई तची,
  240. 18:14–18:17उही दिन उ पीटी कोडवाख सहस खेलनी.
  241. 18:17–18:23आ ये है जटिल्ता गजेंद्र ताकृ की कता मुतिदाएक के इतिक सशक्त बनावे तची.
  242. 18:23–18:24एक दम.
  243. 18:24–18:33आहा एक रा समाजिक कुन्ता माने तची, आहाम अंतरंकता माने तची, मुदा इदुनु द्रिष्टी कोस, उही इस्त्रिक अस आदारन शक्ती के स्तापित करे तची.
  244. 18:33–18:45सत्त्या चे, बहुतेक अलोकिक सन्सारक अन्याय, आर अद्यात्मिक सन्सारक प्रतिफलक बीच्क जे इद्वन्द आचे उक्रा कोनो एक्ता सिद्धान्त मे बानल नहीं जासके तची.
  245. 18:45–19:15आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  246. 19:15–19:21अगर निदाए आजा श्रोता सबूब़ चोड़े ची, जे आहा मुतिदाएक इग्रिते के की माने ची?
  247. 19:21–19:24की इजामाजिक प्रताडना से उप्जल चरम विद्रोज़्,
  248. 19:24–19:28वा बबक्तिक अन्तिम भाशा जते विदान हारी जाएत ची?
  249. 19:28–19:30आमाए आमर भाईजाइ चतिन.
  250. 19:30–19:38जखन समाज आहा कस तिद्द उपर प्रष्नचिन लगादिन, तखन की आहा इश्वरक उत्र दिबाकले ल्विवष्कसके ची.
  251. 19:38–19:39इएक ता पैग प्रष्नची.
  252. 19:39–19:45आहे प्रष्नक संग देबेट के एविमर्ष, हमरा सब एते ही समाप्त करे ची.
  253. 19:45–19:46दश्निवाद

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अछि। बड़बेट बद्गमभीर आमर्मस परशी विशे पर विमर्ष करे जाराल ची एकदम एकदा आहन विशे जे सीदा हमरा सबक समाज आप माने अद्दियात्म सा जोडेला ची. तक खल्पना करु गाम का एक तब्रिध्ध्ध्स्त्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री च्ट्री � अगर सब गज्द्र ताकुरक कता मोतीदाई पर बात कर हैं जी जे विदे इप पत्रिका में प्रकाशित अची बडनीक कता आचे तवजैनी गामके क्यक तर रजक मेला चतीं मोतीदाई उजीवन बर गहिल माता के पुजाई चतीं मुदा संतान हीन रहबा कारन, गूवा तोली किस्त्री सब हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� अपन बिद्रो नहीं अपना अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अपना बिद्रो अ� आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � उनकर समपून जीवन सेवा में भीतल, सब हक कप्रा फीजब और गहल मातात पीडिली पब, मुदा समाज हुनका की दिलक? अप्मान इक दम, जगन गूर तोलिक यस्तरी सब मालजालग का अवेच छी, तव मोटीदाए के बाँज कई कई अप्मानित करे तची उस्ब कहेत थची जे मूती दायक च्या पर्लासं मालजाल से हु भाँज भाज बजाएत. जे की बद्ख्रूर अची. इकोनो सादारन गप नहीं आची. मालजाल गूर तोली कलेल दहन आची जीवीका आची. जखन उस्त्री सब हुंकर च्या के अशुब मानेत अची, तो उहुंका गामक अद्वेवस्ता में एक टा श्राब जगका गोषित कर अची. आप, आहा समाजिक प्रतारना कजे यतार्थ राखी रहल ची, उकर क्रूर्ता सा हम मुह नहीं बूरी रहल ची. तफिर आद्धात्म कोनाभेल यहूंकर अस्तितु पर प्रहार अची गोर तोलिक यस्त्री सबक उताना निस्टित रूप से मुतिदाई किर्दर के चलनी के लक यहूं मानेच फीट, मुदा उकर दिशा देखू दिशा अग, एक ता बिक्षिप्त या हताश लोक समाज पर प्रहार करेत अची. मूतिदाई समाज से लडबाक बद्ला में, उआई इस्त्री सब से जग्डा करबाक बद्ला में, सोजे माता लख्ये गेली. आँ, उद अ टा हताशा कारन गेली आँ. नहीं, इब अटाशा नहीं अची, इब विषेशा दिकारक बोद अची. जा इब मात्र सामाजिक कुन्ता रहीत, तो उ गूर तोली के जनामी सब के गारी देट ती, वो अपन भागे के को सत थी. मुदा हुनकर कुदारी उटाएब ता. रूकु कता कार गजेंदर ताकृर स्पस्ट रूप से लिखे चतिन, इविरोद नहीं चल, इबख्तिक अंतिम भाशा चल. अंतिम भाशा? रूकु, जकन सानसारिक भाशा जेना न्याय मांगब वाकान्दब अर्धिन भूजाई तची, तक्हन भक्त सोजे भगवानक दवार पर थाड होई तची मुदा उ भगवानक दवार पर कोना थाड होई चत्छी इतेईसे हमर प्रष्नची कहु कता सपष्ट कहे तची जे भोर मे उ माताक लग दीपक भेर नहीं हिसाप के भेर मे जाए चत्छी अगर बदला मेहाके कोनो पलक अपीख्षा होईता ची आखर लेंदेन मानी राल ची इएक्टा ट्रन्जाक्ष्यन नची माने एक्टा लेंदेन अची मोथी दाई आपन जीवन के आमुल ये समय वेदी के लिपा में लगा तेलनी आजकन उही बखष्य नची आजाखन उभक्तिक प्रतिपलक के नाम पर हुँँका बाज आशुभा होवा कलंक भेटल तक हनुँँका देर एक बान तुट केल. आजाखन वानन आजी जो अख्रोष मे चली. आजक्यक्न उही ब्वक्तिक प्रतिफलक के नाम पर उनका बाज आ अशुभा होगा कलंक भेटल तक हन हुनका देरे एक बान तुट गेल. ता आहाख मानने आची जे उ आख्रोष मे चली. बिलकल. उ हिसाब मांगी रहाल चतिन जे हमर समपून जीवन के आसीम सेवाक मुले की यही आचे. यही आचे, एह उही लेंदेन की विपलताक अक्रोष अचे, यह भक्तिक अन्तिम भाशा नहीं यह व्यवस्ताक दिवाल्या पन अचे. आपा के यह मनोथी अल्लेंदेन वाला तरक सूनी मित बहुत व्यवावारिक लगे तची, मुदा इबखती जहन पावन भावना के एक ता व्यवसाएक सवदा में बदल देता ची? सवदा नहीं, एक ता समाएक यतार था चे? मुदा हम आहां के इबतावे चाह ची, जो लिजाब क अर्थ के वल बही खाता के देविट अक्रेटिट नहीं हो ता ची. मुदी दाएक उ हिसाब कोनो बनिया कि फिसाब ने चल, उईक ता अस्तिटवक प्रशनचल. अस्तिटवक प्रशनता चले जैहास उ तूटी गेली है. जैह आहा एक राक केवल लें देन माने ची, ततनी विचार करू जक्वन कोनो सवदा विफल होई तची, तब लोग आही ताम से मुगूमा लेते थी आही दा जैं मुती दाए के खें के अपन सेवाक फल नहीं भेटवाक कुन्ता रहीत तब अ माताक पीडी लिपनाई चोर देता नास्तिक भजेता वा पुजा करब बन कर देते मुदा उ पुजा बन नहीं कर ज़ती पीली कोडनाई कोनो सादारन बात नहीं आच्छी हम जानाई ची आहा के बुजनाई आच्छी, जे गाम गर में पीली लीपबाक अग्ध की होई तची इी माटी अग गोबर से बनल एक ता पविट्र वेदी होई तची मुती दाई बर्खों से आपन राथ से उक्र लीपिच छलीन एक दम सत्या उही में हुंकर श्रम, हुंकर पसीना, हुंकर विष्वास लागल चल आजे हात बर्खों से उक्रा सचार राल चल उही हात में भोर में कुदारी आची और उक्रा कोडी राल चती मुदा इई इशाक्शात इश्वर्य प्रतिकक विद्वन सच एक रहा भकती कोना कहे शकत ची इश पर्ष्ट्रुम सेक्ता अल्टीमेटम आच अल्टीमेटम हा, मने प्रकत हो माता आई हम्रा उत्र चाए जा आहा हम्रा न्याय नईदेप्ता आहांके एगाम में अस्तित्वा आहांकी पीडी मितादेप. इबड उगर व्याख्या आची. जखन आहा कोनो सत्ता से अदिकार मागे ची आो नहीं सूनेत आची, उखर प्रतीक के नष्ट करे ची. इआख्रो से उपजल दिस्ट्रक्ष्यन आज्ज वर्द शमा परब बुंदा आज्जा इद्टर्क्य अथार्थ से कोसो दूर अच्छी अब भक्तिक औई ग़राई के बुज्वामे असमर्त आज्छी अच्छ? कोना? इदिस्ट्रक्ष्चन नहीं इदीखंश्ट्रक्ष्चन अची पीडि की अची पीडि माटी या गोवरक एक ता बहुतिक अवरन अची जे माता अब भवक्तक भीच मे अची मुदा उकर पवित्रतात अची ना जखन भवक्तक प्रेम अ अधिकारक सीमा सब से उजबहे जायत जी, तकन औए इश्वरी सत्ता के उई माटी वब पात्रक वेदी में सीमित नहीं देखाई तची. मने आहा कहे जाय छी जे उशाक्षात भीट करे चाहच चलिया. एक दम. उ उहे बहुत पर्दा के पाडी रहल चलिया ताकि उ साक्षात आपन माता सा भेद कर सकतिन करबया कताक उही पाती पर पुनादयान दिया आप ख़ो कताकार लिख़च छतिन जेना बच्चा माएक आचर गिंचे तची उत्तर दे नेता आच्रे ना चोडवो मुदा इब जच्चा के अनालोगी जगनेट अबूद बालक रूसाई तची काने तची आपन माएके मारे तची वाह मातरे तची तकी आहा उक्रा माएक अस्तित्व कविद्वन्स कहब नहीं मुदा की उ आल्टिमेतम आफ़ी? नहीं? उ प्रेम आर अदिकार क सरवोच प्रकती करनाची. बच्चा जनाई तची, जे माए उक्रा त्यागी ना सकई तची, ताहिले लो रद करए तची. रोकु हमाहागे बच्चा आम माएक आनालोगी के एते ही रोकग चाहब. की एक? इता कताक मुल बाव अची? इई आनलोगी सुनी में बद बावो कचे. मुदा इई मोती दाएक वेदना की बूच चोट का देटा चे. बुजल येने? मोती दाएक उनो अबोद बच्चा नहीं चेती. जे खिलाअना नहीं भिटला पर रूसी गेल चेती. वागात भेल आज उक्रा आहा बच्चाक हत कैकर रूमानी नहीं को सकते चे. रूमानी नहीं कोरहोल चाँ. कलपना करू जे आहाक अपन समपोन जीवनक पूंजी कोनो एक ता ताम निवेश केल हू, अज्खन आहा के सब सब भेसी आविषकता चा तकन आहा के दखक मारी का निकाल दिल गेल. मुदा समाज सनिकाल गेल इश्वर सनहीं. तकन जे अक्रोष होई तहीच, उहत नहीं, उविषुध, प्रतीषोध आए विष्वासक ज्वाला होई तची. कताकार स्वयम कहे चत्छ ही जे गोवर में सनल हात उतही तमी गेल. अशन बद्द मार्मी कची. अशन जकन हुंका माल जालक लेल अशुब मानल गेल हुंकर भीतरक सबता विष्वास तूटी गेल. जक्रा समाज पूरन रूपेंड बहिष्क्रित का चुका आची उकर यी हताशा चल, यी कोनो अद्यात्मिक सादना नहीं बलकी एक ता बहयंकर ब्रेक्डाउन चल. आख यी निवेश अप्रतिशोद का उदारन यी प्रमाडित करे तची जे आहा निरन्तर एही गटनाके एक ता बहुतिक असानसारिक चश्मासा देखर आल चीं. अब अपन सम्पुर्न उर्जाके एक था कोखो उही विदिप और प्राहर कोरहल चतिन, कि तो हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� इदबड आदर्श्वादी व्याख्या भेल आजिक्रा विश्वास कही रहल ची उ वास्तो में विश्वासक उवस्ता आचे जटि ए भक्त के इभान भोजाई तचे इश्वर अवकर भीच आब कुनो परदा नहीं आचे माने, आहा कह बच्ची जे इशिद भवक्ती कवस्ता आचे इगदम इशादारन भवक्ती से सिद भवक्ती दुष चलाँग आचे नीक आचे, जो इशिद भवक्ती आचे, आई पुरन विष्वासक चलाँँचे ता आव, हम्रा सब कताक निष्कर्ष पर बात कराई तची. तो उकर परिनाम की भेल, कताक अंत बद यतार्थ्वादी आज्रिदे विदारा कचे. आव, उदुखत तची. गहल माताक पीटी कोलाग बाद, हुनका सन्तानक प्राप्तीता होई चने. मुदा कता स्पस्ट करेत जे चोदिनक भेटा गेल सत्या आहा बूजी रहल ची एकर आद्ध हमरा सबक मिठला में चथ्यार दरी बच्चाक जीवित रहभ बड महत्व पुन मानल जाई तचे मुदा उ बच्चा चोदिनक बाद मरज जाई तचे मुदा एक्रा केवल जैविक हार अथात बुध्टिक सन्सार में जीव विग्यान असमाजक नियती अंतता हावी रहल उनकर जे तताखच्त विद्ड्रोज या आहाक शबद में उनकर रथ चल उनका बुध्टिक सुख नहीं दे सकल मुदा कता अदे कथम नहे हुई तची इश्वर उही लेंदेन मेसे हो हूंका तखी लेलक उसंटान देलक मुदा मातर चो दिनक लेल तई इद्यात मेक अदिकारक विजै कुना बहल तई तई आमान विय यतार्ध का विजै जी जते सीमान्त्क्रितक हार निष्चित अच्छे समाज हुनका बाज कहलक अन्यती हुनका मातर चोडिनकक मात्रित्वदवक उही कलंकके इस्थाई कदलक इए ता बहुत प्रभ्शाली आ तारकिक द्रिष्टी कोन अच्छी आब भद्तिक स्थर पर इस सत्य आची ज्यो सन्तान चोदिन कबाद चले जाई तची मुदा की यहा कथाक अन्तिम आश्भ़स महत्तूपून पांती के भिस्री रही जी कुन पांती गजंद्र ताकृ लिखाई च्थिन जे विद्हान जे नहीं दई तची से भक्ती दोसर रूप में दोजाईता ची चोदिन का भेटा गेल मुदा माए आमर भोगेली है उ आमर भोगेली है इता एक टसान्त वना आचे जै एक वल यतार्थ वादी त्राज्दी रहित जै एक वल सीमान्त क्रितक कर हार रहित तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक तक � इसान्सारिक सीमाक अतिक्रमन आची आमुदा हमरा इस आमर माए वाला तर्क एक ता चल बुजना जाते चे चल कोना आहा गोर करु इस आमरता कखरा काजा भी रहाल आचे कि इस आमरता हुनका उही समाजिक अप्मानक गाउसा मुक्त कसकलन जखन उज्यान जब बडला में न्याय नहीं बलकी एक ता मिठक बना दिल गेल हम्रा लगगे तच्छे के समाजक एक ता बडभ पुरान कुतिल चाल अचे आहा एक रा समाजक चाली कही राल ची अगर समाज इक चाली कही राल ची एक दम जकन समाज कोनो सीमान्द क्रित पर आमानवी अथ्याचार करे तची आवकर सर्वनाश कर दी तची तकन अपन अप्राद बुधख के कम करबाक लेल समाज उक्रा आमर वा पुजनिय बना दी तची यह उद्याग विष्च्ट्द समाज शास्त्रिय द्रिष्टि कोण भेल औरे हूंकर तब ज़ा मरीगेल समाज हूंकर तुक्रा देलक मुदा देखू आब उ आमर माए बहगे लिए यह तसमाजक उही क्रूर्ताक अद्यात्मिक आवरन पहिरावक प्रास आजे अभी तद्याएक प्रज़ाएक उही क्रूर्ताक अद्यात्मेक अवरन पहिरावक प्रायास अचे मुदा कता कारता मुदी दाएक अखाएक ज़ा हम शुद रुब सपड़ी तई एक्ता इस्त्रीक समाजिक प्रतानास अभजल वेदनाक शषक्त दस्तावेज अचे दर्म आ भक्तिक आवरन में हम्रा सब हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� ज़़ा समाज हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ जे अस्त्री के समाज आपन परीदी सब बहर कदे लक, औए अस्त्री आपन भक्तिक सामच्सद, उई समाजक इश्ट देवी के आपन निंट्रन मेलो ले लक. मानी, उस समाज पर अपना तरीका सब विजे प्राप्त किलनी. सत्त्य, उ गावक लोकक के इी मानवाक लेल विवष्क गडे लक, जे माता हुंकर आची. इकोनो पित्र सत्तात्मक समाजक गास्लाइटिंग नहीं आची. इी मोटिदाएकर अद्यात्मिक विजगय आची, जटे विदान रार मानी लेत आची. आा, आा, उनकार आई हे आद्यात्मिक विज़ाय के बड़ सुन्दरता सब प्रस्तुत के लूँ. मुदा हम अगनो आपन उही विन्दू पर कायम ची, जे मोथी दाएक इग्रित्य, बख्तिक उही परम्परागत स्वरुप के कन्धित करे तची. उता अची, हमी मानेद ची जे इपरम्प्रागत नहीं चे. हमरा सब दूनुगोटे आईबात पर अवश्श्य सेमद भज्सजेच्छी जे मुतिदाएक पीडी कोडबाक गतना, सादारन दार्मिक माननेता सबक्के जबर दस चुनाूती देट अची. एक दम, एक्रा कुनो से हो द्रुष्टी कून से देखी, ये एक्ता जुनाती ता अच्छी. चाहे आहा एक्रा बवगतक इश्वरी सत्तापर परम अदिकार मानी वहमर द्रुष्ती सा एक्ता सीमान्तकरत कतुतेद अस्तरीक लें देन के हिसाप के माग मानी इत्ताय अची जे इई परम परागत पुजा पाथक सीमासा बहुत आगुक वस्तूचल. सत्ते बात. इदर्मक ओर उप आजी, जटे विनम्रता वध याचना कस्थान, हद्ट, अख्रोष अ अदिकार लोले तची. मोथी दाई एक नव्प परिपातिक रचना करे थचती. पुन रुप प्यन सहमत ची. इग खता हम्रा सब के इजोच्वाक लेल विवष करे तची, जे बख्तिक वास्तविक सुरुप की आची? की आख के वल याचना आची? नहीं? बलकुल नहीं मोती दाई के जे दिन इग्यान भेल, जे हुनका आब याचना नहीं करवाख चनी, जे दिन हुन का इबुजना गेल, जे समाजक नियम भवानक दरबार में लागु नहीं होई तची, उही दिन उ पीटी कोडवाख सहस खेलनी. आ ये है जटिल्ता गजेंद्र ताकृ की कता मुतिदाएक के इतिक सशक्त बनावे तची. एक दम. आहा एक रा समाजिक कुन्ता माने तची, आहाम अंतरंकता माने तची, मुदा इदुनु द्रिष्टी कोस, उही इस्त्रिक अस आदारन शक्ती के स्तापित करे तची. सत्त्या चे, बहुतेक अलोकिक सन्सारक अन्याय, आर अद्यात्मिक सन्सारक प्रतिफलक बीच्क जे इद्वन्द आचे उक्रा कोनो एक्ता सिद्धान्त मे बानल नहीं जासके तची. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� अगर निदाए आजा श्रोता सबूब़ चोड़े ची, जे आहा मुतिदाएक इग्रिते के की माने ची? की इजामाजिक प्रताडना से उप्जल चरम विद्रोज़्, वा बबक्तिक अन्तिम भाशा जते विदान हारी जाएत ची? आमाए आमर भाईजाइ चतिन. जखन समाज आहा कस तिद्द उपर प्रष्नचिन लगादिन, तखन की आहा इश्वरक उत्र दिबाकले ल्विवष्कसके ची. इएक ता पैग प्रष्नची. आहे प्रष्नक संग देबेट के एविमर्ष, हमरा सब एते ही समाप्त करे ची. दश्निवाद

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