MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID
SAHASRASHIRSHA MAITHILI.mp4
Timestamped machine output
- 0:00–0:30नमस्कार, एह प्रस्तुती में स्वागत आचि, मितलाक सम्रिद्ध परम्पराक, असली ध्वाज्वाग अनेको अनसुना व्यक्तित वच्छति, इपाती मात्र किचु सब्दक समहुनी आचि, वूजुत इई औही मुल भावना के दर्षावे तचि, जकर चारूकात, एक ता
- 0:30–0:34तच्छलू बिना कोनो देरी के शुरू करेट ची
- 0:34–0:37एही गब्षष्प में गजेंद्र ताकूर कप्रसिद्द
- 0:37–0:41मैठिली उपन्यास सहस्ट्र शिर्षा कर जिस सांस्क्रितेक
- 0:41–0:44ताना बाना अची, अकर हम सब पर्ताल करब
- 0:44–0:51इपो थे मित्हिला के लोक जीवन उतेक आपन भाशा आमाती के गंद का एक ता बडड जीवनत चित्र प्रस्थत करे तची.
- 0:51–0:55नीक आव एक वेर आएक रूप्रेखापर नजर्दूली.
- 0:55–0:58पहल अचे the thousand headed tail.
- 0:58–1:01तो सर voices of mithila.
- 1:01–1:03तेसर welcome to missivar,
- 1:03–1:06चारिम folklore and nature,
- 1:06–1:08आ अन्त मे the mathily legacy.
- 1:14–1:21महा कावियक अनावरन, एते हम सब एह विस्त्रित उपन्यासक उठपत्ती आ, उकर प्रकाषन के प्रिष्ट भूनी के भूजब.
- 1:21–1:27इजे अखर्षक गहिर रव्रन कावरन ची से सहस्र शीशा के मुख्ध्य प्रिष्ट ची.
- 1:27–1:322010 में शुती प्रपाशन्सा इप पहिल्भेर प्रकाषिद भेल चिल
- 1:32–1:35आफेर 2015 में एकर दोसर संस्क्रनाल
- 1:35–1:39एकर इफरीर रंग, सच पुच्षु तमितला का रीर भरल, लोग जीवन
- 1:39–1:42आप प्रक्रती का साख्षात प्रतीग भुजाईताच.
- 1:42–1:45अछा आप बात करे जी एकर शीर्षक पर
- 1:45–1:50सहस्र शीर्षक माने होई तची हजार मात्वाला
- 1:50–1:54मुदा नहीं इकोनो पोरानि कताक रावन वा दानव का कता नहीं आची
- 1:54–1:58बलकी इज समाज का औही अनगिनत स्वर समोही ख्स्म्रिती
- 1:58–2:03आम्मित्हिलाक एक दोस्रा सा गुन्तल, लोग कता सब का प्रतिनिदिद्व करेताची.
- 2:03–2:06मने, इक कतो सकोन एक गोटे कगवने आची.
- 2:06–2:09इपुरा समाच का समोही काख्यान ची.
- 2:09–2:11आब आवेट ची कंड्द्दूईपर,
- 2:11–2:14वोईसे अप मित्छला दे रील स्टोरी टेलर्ज
- 2:14–2:18अथे हम सब वास्तविक समाज शास्त्रीय अदारक बात करम
- 2:18–2:21जकर प्रेरना सां इपोती रचल गेल अची
- 2:21–2:24तो सब से महत्वपुन बाती अची
- 2:24–2:27जे लेक्ख गजेंद्र ताकृ आपन क्रित्गयदा ग्यापन में
- 2:27–2:29अगर उद्याग बाज़्ाद बाज़्ाद बूजी सक्ला
- 2:29–2:32आए एठा मिथफ पैग बाज़्ाद सामने आबाई तच्छे
- 2:32–2:35मोकिक लोग कथा और लिकहत आदूनिक साहित देख भीज
- 2:35–2:37इपोठी एटा बोछद पैग से तुबने थच्छे
- 2:37–2:47अप तरक लोकक संगे भेल गबष्षप आहूंकर सूनायल अतासा लेक्ख मितलाक अर्थवेवस्था समाज अस संस्क्रूती के इतेक निक चगा बूजी सक्ला.
- 2:47–2:50आ एता मिक्ठा पैग बाद सामने आबाई तच्छे,
- 2:50–2:56मुकेक लोक कता और लिखित आदूनेक साहिते एक भीच यी पोठी ये बोछ़ पैख से तु बनेदचे.
- 2:56–3:00जे गीद आखचता सब पीडिदर पीडि मात्र लोकक कंठ मे जी विच्छल,
- 3:00–3:02और कालक्रम मे विलुप्त भार रहल चल,
- 3:02–3:08उक्रा एक ता स्ताई लिखित रूप देनाई एक उत्फीक एक अट्यन्त महत्पून देश भुजना जाई तच्छे.
- 3:08–3:12कंड तीन मेहिस बार में स्वागत.
- 3:12–3:16बाहरी दून्याक तत्फे से निकली कैके आब हम सब सीदे उपन्यास के
- 3:16–3:20उई सम्द्द्ध और काल्पने गामक गेराई में प्रवेश करव,
- 3:20–3:22जदे ई पूरा कता पन्पे तची.
- 3:22–3:27सहस्त्र शीर्शा में एक सलगक आट्टारद हरिक अद्ध्याय अच्छे.
- 3:27–3:29एक अगर इजे विस्त्रट सुच्छी अच्छे,
- 3:29–3:34उ उपन्यास्क गती आोकर प्रभावशाली दाईरा के देखा रहला चे.
- 3:34–3:40सच कही तप्रतेक अद्याय गामक जीवन के एक ता नव और अनुखा पन्ना कोलग तचे.
- 3:40–3:43तआ अव देख है जे यी कथा कोना शुरू होई तची.
- 3:43–3:48उपन्यासक पहल अद्याय, ग़न नारकेल महिस्भारा ब्राहमिन गाम,
- 3:48–3:53के इश्वर्वात आहन अची, जते से पुरा कता कज़डी ग़ाल आची.
- 3:53–3:59पहल पन्ना से गामक अगगन्द आओत के वातावरन सीदे पाठकक के अपन दुन्या में खीच ले दची.
- 3:59–4:09मेठली लीपिक की सुंदरता अ वाख्यक जी लोया ची उम्हिस भार गामक परिद्रिश्च आ उते रहे वाला लोकक एक देट्वर्लन करे था ची.
- 4:09–4:19गामक लोकक बातविचार, आपसी गब्षव अच्छोट-चोट-गधन, बाशा की जतिलता आमदुरता गामके सक्षात सामने तठाड कराए दिताची.
- 4:19–4:23इपाती सब अपनाप में एक टा कताथा कहवाक सुखद अनुबवव देटाची.
- 4:23–4:28आब बरहेच्छी क्हन्ट चार्दिस, फोक्लोर अन नेच्छर मोटिव्ज़ाए,
- 4:28–4:33आईही कहन्ट में हम सब एदेखव, जे मिहिस्वार गामके जीवन्त बनावाख लेल,
- 4:33–4:37प्रक्रिती अलोग कताक सुंदर प्रतीक सबख कोना उप्योग भेल चाही.
- 4:37–4:42अच्छा चलू इदूनु माच के चिट्र पर द्यान देची
- 4:42–4:47येन्यांगजका गोलकार बनल इपारमपर एक माच कजे प्रती कचे
- 4:47–4:53उ मित्लाक प्राक्रतिक अस्सान्स्क्रतिक संटूलन के बहुत नीक जका दर्षा रहलाची
- 4:53–4:58मित्लाक लोग जीवन अतेके जल संसादन आजिश्व अश्वब मानेता सब आची,
- 4:58–5:03ताही में माच कच्टानत सर्वो परी आची, इबात सब के जन ले आची.
- 5:03–5:08पोकरी जल्य जीवन अस्ठानिया वनस्पती जीव जन्तु,
- 5:08–5:12गामक ठेट बोलिक संगे थिटोली आा,
- 5:12–5:14अदिन प्रतिदिनक किसानी दिनचर्या
- 5:14–5:19इसब मिलिक मिहिस्वार गाँक समपुर्ण पारिस्तितिक तन्त्र बनभाईता चे
- 5:19–5:23इसब मात्र पोठिक कोनु निरजीव त्रिष्ट भूमी नहीं आचे
- 5:23–5:28बलके एहीक शेट्रक लोक कता समः इए एक्दम जीवन्त पात्रा क्रूप मकाज करेता चे
- 5:28–5:32बूजुद प्रकती स्वयमेते कताक मुख्या पात्रा चे
- 5:32–5:37खंद पाच द, द मात्ली लेगिसी प्रिसर्विंग दायास्पोरा
- 5:37–5:44एते हम सब गजें़र ताकुरक एही विस्त्रत कारक व्यापक संस्क्रितिक प्रभाव और उकर दरोहर पविचार करव.
- 5:44–5:51एही में सबसिन ध्यानाकर्षन करे वाला बात यी अच्छी जिलेखवक जानी बुजगगे किच वास्तवेक ताम,
- 5:51–5:56लोग, समाजिक, राजनेतिक संस्ता, अ लोग कत्ठा सबख्वग उप्योख केने चत्छीं,
- 5:56–5:59के एक तए यसब आएक सान्सक्रितिक प्रतीक चत्छीं.
- 5:59–6:04इविशेश शेली, तत्ध्या अ कल्पना के भीच के दूरी के कम करे दे दे थची,
- 6:04–6:08अ कता एक दम से अपन जगा लागे तची.
- 6:08–6:12इपो थी एक ता पैग सक्त्या अ प्रेडना आचे,
- 6:12–6:16जे कोना सांस्क्रितिक स्म्रती आमोखिक इतियास के,
- 6:16–6:19एक ता जीवन्त साहित्तिक क्रिती में बडल देल जा सकेज.
- 6:19–6:23ताकि आई वाली पीडि, एक रा नीक जका जानी सकेई.
- 6:23–6:27एक्ता अपन्यास, कोना एक्ता पूरा चेत्र के आत्मा,
- 6:27–6:31उकर संगर्ष अ संगीत के अपन भीतर समेट सकेई चेई.
- 6:31–6:35सहस रिशीर्शा उकर एक्ता उतक्रिस्ट उदारन आचे.
- 6:35–6:40अब अन्त में एक टागमभीर प्रश्न उठाइत ची, जकर उटर पर विचार करभ बहुत आवश्श्यक ची.
- 6:41–6:44अदनेक साहित तेजी सा दिजिटल होएत दूनिया में,
- 6:45–6:49प्राचीन अ अनसुना मोखिक परमपरा सबहिंक कोना जीवित राखी सके टाछी.
- 6:49–6:56इसी सा दिज़डल होएत दूनिया में प्राचीन आ अनसुना मुखिक परमपरा सबहंक कोना जीवित राखी सकेता ची.
- 6:57–7:00सहस्र शीज्शा हमरा सबहंके एक अक ता मार्ग दिखाएता ची.
- 7:00–7:06मोदा, इच्छेत्रिया कता वाच्टनक महत्वके आगु बड़बाक लेल सेहो प्रेरिद करेट करेचे.
- 7:06–7:10एह गवर विचार संगे हम इविवेचन एदे समाप्त करेट ची.
- 7:10–7:14आशा आची, जे इविष्लेशन एक ता नव द्रिष्टिक कोन देलक.
- 7:14–7:16बहुत-बहुत दन्यवाद
Plain text
नमस्कार, एह प्रस्तुती में स्वागत आचि, मितलाक सम्रिद्ध परम्पराक, असली ध्वाज्वाग अनेको अनसुना व्यक्तित वच्छति, इपाती मात्र किचु सब्दक समहुनी आचि, वूजुत इई औही मुल भावना के दर्षावे तचि, जकर चारूकात, एक ता तच्छलू बिना कोनो देरी के शुरू करेट ची एही गब्षष्प में गजेंद्र ताकूर कप्रसिद्द मैठिली उपन्यास सहस्ट्र शिर्षा कर जिस सांस्क्रितेक ताना बाना अची, अकर हम सब पर्ताल करब इपो थे मित्हिला के लोक जीवन उतेक आपन भाशा आमाती के गंद का एक ता बडड जीवनत चित्र प्रस्थत करे तची. नीक आव एक वेर आएक रूप्रेखापर नजर्दूली. पहल अचे the thousand headed tail. तो सर voices of mithila. तेसर welcome to missivar, चारिम folklore and nature, आ अन्त मे the mathily legacy. महा कावियक अनावरन, एते हम सब एह विस्त्रित उपन्यासक उठपत्ती आ, उकर प्रकाषन के प्रिष्ट भूनी के भूजब. इजे अखर्षक गहिर रव्रन कावरन ची से सहस्र शीशा के मुख्ध्य प्रिष्ट ची. 2010 में शुती प्रपाशन्सा इप पहिल्भेर प्रकाषिद भेल चिल आफेर 2015 में एकर दोसर संस्क्रनाल एकर इफरीर रंग, सच पुच्षु तमितला का रीर भरल, लोग जीवन आप प्रक्रती का साख्षात प्रतीग भुजाईताच. अछा आप बात करे जी एकर शीर्षक पर सहस्र शीर्षक माने होई तची हजार मात्वाला मुदा नहीं इकोनो पोरानि कताक रावन वा दानव का कता नहीं आची बलकी इज समाज का औही अनगिनत स्वर समोही ख्स्म्रिती आम्मित्हिलाक एक दोस्रा सा गुन्तल, लोग कता सब का प्रतिनिदिद्व करेताची. मने, इक कतो सकोन एक गोटे कगवने आची. इपुरा समाच का समोही काख्यान ची. आब आवेट ची कंड्द्दूईपर, वोईसे अप मित्छला दे रील स्टोरी टेलर्ज अथे हम सब वास्तविक समाज शास्त्रीय अदारक बात करम जकर प्रेरना सां इपोती रचल गेल अची तो सब से महत्वपुन बाती अची जे लेक्ख गजेंद्र ताकृ आपन क्रित्गयदा ग्यापन में अगर उद्याग बाज़्ाद बाज़्ाद बूजी सक्ला आए एठा मिथफ पैग बाज़्ाद सामने आबाई तच्छे मोकिक लोग कथा और लिकहत आदूनिक साहित देख भीज इपोठी एटा बोछद पैग से तुबने थच्छे अप तरक लोकक संगे भेल गबष्षप आहूंकर सूनायल अतासा लेक्ख मितलाक अर्थवेवस्था समाज अस संस्क्रूती के इतेक निक चगा बूजी सक्ला. आ एता मिक्ठा पैग बाद सामने आबाई तच्छे, मुकेक लोक कता और लिखित आदूनेक साहिते एक भीच यी पोठी ये बोछ़ पैख से तु बनेदचे. जे गीद आखचता सब पीडिदर पीडि मात्र लोकक कंठ मे जी विच्छल, और कालक्रम मे विलुप्त भार रहल चल, उक्रा एक ता स्ताई लिखित रूप देनाई एक उत्फीक एक अट्यन्त महत्पून देश भुजना जाई तच्छे. कंड तीन मेहिस बार में स्वागत. बाहरी दून्याक तत्फे से निकली कैके आब हम सब सीदे उपन्यास के उई सम्द्द्ध और काल्पने गामक गेराई में प्रवेश करव, जदे ई पूरा कता पन्पे तची. सहस्त्र शीर्शा में एक सलगक आट्टारद हरिक अद्ध्याय अच्छे. एक अगर इजे विस्त्रट सुच्छी अच्छे, उ उपन्यास्क गती आोकर प्रभावशाली दाईरा के देखा रहला चे. सच कही तप्रतेक अद्याय गामक जीवन के एक ता नव और अनुखा पन्ना कोलग तचे. तआ अव देख है जे यी कथा कोना शुरू होई तची. उपन्यासक पहल अद्याय, ग़न नारकेल महिस्भारा ब्राहमिन गाम, के इश्वर्वात आहन अची, जते से पुरा कता कज़डी ग़ाल आची. पहल पन्ना से गामक अगगन्द आओत के वातावरन सीदे पाठकक के अपन दुन्या में खीच ले दची. मेठली लीपिक की सुंदरता अ वाख्यक जी लोया ची उम्हिस भार गामक परिद्रिश्च आ उते रहे वाला लोकक एक देट्वर्लन करे था ची. गामक लोकक बातविचार, आपसी गब्षव अच्छोट-चोट-गधन, बाशा की जतिलता आमदुरता गामके सक्षात सामने तठाड कराए दिताची. इपाती सब अपनाप में एक टा कताथा कहवाक सुखद अनुबवव देटाची. आब बरहेच्छी क्हन्ट चार्दिस, फोक्लोर अन नेच्छर मोटिव्ज़ाए, आईही कहन्ट में हम सब एदेखव, जे मिहिस्वार गामके जीवन्त बनावाख लेल, प्रक्रिती अलोग कताक सुंदर प्रतीक सबख कोना उप्योग भेल चाही. अच्छा चलू इदूनु माच के चिट्र पर द्यान देची येन्यांगजका गोलकार बनल इपारमपर एक माच कजे प्रती कचे उ मित्लाक प्राक्रतिक अस्सान्स्क्रतिक संटूलन के बहुत नीक जका दर्षा रहलाची मित्लाक लोग जीवन अतेके जल संसादन आजिश्व अश्वब मानेता सब आची, ताही में माच कच्टानत सर्वो परी आची, इबात सब के जन ले आची. पोकरी जल्य जीवन अस्ठानिया वनस्पती जीव जन्तु, गामक ठेट बोलिक संगे थिटोली आा, अदिन प्रतिदिनक किसानी दिनचर्या इसब मिलिक मिहिस्वार गाँक समपुर्ण पारिस्तितिक तन्त्र बनभाईता चे इसब मात्र पोठिक कोनु निरजीव त्रिष्ट भूमी नहीं आचे बलके एहीक शेट्रक लोक कता समः इए एक्दम जीवन्त पात्रा क्रूप मकाज करेता चे बूजुद प्रकती स्वयमेते कताक मुख्या पात्रा चे खंद पाच द, द मात्ली लेगिसी प्रिसर्विंग दायास्पोरा एते हम सब गजें़र ताकुरक एही विस्त्रत कारक व्यापक संस्क्रितिक प्रभाव और उकर दरोहर पविचार करव. एही में सबसिन ध्यानाकर्षन करे वाला बात यी अच्छी जिलेखवक जानी बुजगगे किच वास्तवेक ताम, लोग, समाजिक, राजनेतिक संस्ता, अ लोग कत्ठा सबख्वग उप्योख केने चत्छीं, के एक तए यसब आएक सान्सक्रितिक प्रतीक चत्छीं. इविशेश शेली, तत्ध्या अ कल्पना के भीच के दूरी के कम करे दे दे थची, अ कता एक दम से अपन जगा लागे तची. इपो थी एक ता पैग सक्त्या अ प्रेडना आचे, जे कोना सांस्क्रितिक स्म्रती आमोखिक इतियास के, एक ता जीवन्त साहित्तिक क्रिती में बडल देल जा सकेज. ताकि आई वाली पीडि, एक रा नीक जका जानी सकेई. एक्ता अपन्यास, कोना एक्ता पूरा चेत्र के आत्मा, उकर संगर्ष अ संगीत के अपन भीतर समेट सकेई चेई. सहस रिशीर्शा उकर एक्ता उतक्रिस्ट उदारन आचे. अब अन्त में एक टागमभीर प्रश्न उठाइत ची, जकर उटर पर विचार करभ बहुत आवश्श्यक ची. अदनेक साहित तेजी सा दिजिटल होएत दूनिया में, प्राचीन अ अनसुना मोखिक परमपरा सबहिंक कोना जीवित राखी सके टाछी. इसी सा दिज़डल होएत दूनिया में प्राचीन आ अनसुना मुखिक परमपरा सबहंक कोना जीवित राखी सकेता ची. सहस्र शीज्शा हमरा सबहंके एक अक ता मार्ग दिखाएता ची. मोदा, इच्छेत्रिया कता वाच्टनक महत्वके आगु बड़बाक लेल सेहो प्रेरिद करेट करेचे. एह गवर विचार संगे हम इविवेचन एदे समाप्त करेट ची. आशा आची, जे इविष्लेशन एक ता नव द्रिष्टिक कोन देलक. बहुत-बहुत दन्यवाद