MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

मैथिली_का_ब्लॉग_से_एआई_तक_सफर.mp4

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.999074)
Duration
1:49
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:06आज हम आशीश अंचिनार की किताब मैठिली वेप पत्रकारिता का एतिहास का एक वटवववव ले रहे हैं.
  2. 0:07–0:11ये किताब हमे बताती है कि कैसे एक पारमपरेख शेत्री बाषाने,
  3. 0:11–0:17इंटनेट के शुवाती दोर से लेकर आजके अदवाश्ट एएएएए तक का शान्दार सबफर तैकिया,
  4. 0:17–0:21जो किसी भी भाशाके दिजितल वजुद को समजने के लिए कापी जरूरी है.
  5. 0:21–0:28पहला, चल ये अंटनेट पर मेठली की शुर्वात और पहला बनने की एक अजीब सी होड पर बात करते हैं.
  6. 0:28–0:34साल दो हजार में भाल सरी गाछ बलोक के सात ये भाशा पहली बार अंटनेट पर आई.
  7. 0:34–0:38पर क्या आप सोट सकते हैं कि अईन्टनेट पर खुद को पहला साभट करने के लिए
  8. 0:38–0:41लोग दिजितल इतिहाँस से भी चेडचार कर सकते हैं?
  9. 0:41–0:46जी हां, कतेक रास बात नाम के एक ब्लोग ने तो पहला बनने के चकर में
  10. 0:46–0:49अपनी पुरानी पोस्स की तारीके तक पीचे खिसका दी थी.
  11. 0:50–0:55तुस्रा, इस जूटी होड से अलग, असली तकनी की विकास कैसे हुए?
  12. 0:55–1:00विदे ही पत्रका और गजेंद तहाकुर जैसे लोगों की लगातार महनत से ही,
  13. 1:00–1:042014 में मैत्टिली विकी पीटीया को अफिषल मन्जूरी मिल पाई
  14. 1:04–1:08और तो और इनहीं प्रयासों से इंट्टनेट पर मैत्टिली की अपनी लिपी,
  15. 1:08–1:13तिरहुता के फाँट्ट और उनी कोड़ का देएल्प्मेंट भी समबभ हो पाया.
  16. 1:13–1:18अन्ततह आज ये बहाशा मोडन मशीन त्रान्सलेशन का एक सक्सेस्फल हिस्वाँ जुकी है
  17. 1:18–1:22अब मैठिली अई अई अई ती मद्रास के, आई आई फोर भारत प्रज्ट,
  18. 1:22–1:26JNU के सह्योख से बने माईक्रो सोझ्ट बिंक त्रान्सलेटर,
  19. 1:26–1:49और Google Translate जैसे Advanced AI tools से मस्वूथी से जुड़गगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग�

Plain text

आज हम आशीश अंचिनार की किताब मैठिली वेप पत्रकारिता का एतिहास का एक वटवववव ले रहे हैं. ये किताब हमे बताती है कि कैसे एक पारमपरेख शेत्री बाषाने, इंटनेट के शुवाती दोर से लेकर आजके अदवाश्ट एएएएए तक का शान्दार सबफर तैकिया, जो किसी भी भाशाके दिजितल वजुद को समजने के लिए कापी जरूरी है. पहला, चल ये अंटनेट पर मेठली की शुर्वात और पहला बनने की एक अजीब सी होड पर बात करते हैं. साल दो हजार में भाल सरी गाछ बलोक के सात ये भाशा पहली बार अंटनेट पर आई. पर क्या आप सोट सकते हैं कि अईन्टनेट पर खुद को पहला साभट करने के लिए लोग दिजितल इतिहाँस से भी चेडचार कर सकते हैं? जी हां, कतेक रास बात नाम के एक ब्लोग ने तो पहला बनने के चकर में अपनी पुरानी पोस्स की तारीके तक पीचे खिसका दी थी. तुस्रा, इस जूटी होड से अलग, असली तकनी की विकास कैसे हुए? विदे ही पत्रका और गजेंद तहाकुर जैसे लोगों की लगातार महनत से ही, 2014 में मैत्टिली विकी पीटीया को अफिषल मन्जूरी मिल पाई और तो और इनहीं प्रयासों से इंट्टनेट पर मैत्टिली की अपनी लिपी, तिरहुता के फाँट्ट और उनी कोड़ का देएल्प्मेंट भी समबभ हो पाया. अन्ततह आज ये बहाशा मोडन मशीन त्रान्सलेशन का एक सक्सेस्फल हिस्वाँ जुकी है अब मैठिली अई अई अई ती मद्रास के, आई आई फोर भारत प्रज्ट, JNU के सह्योख से बने माईक्रो सोझ्ट बिंक त्रान्सलेटर, और Google Translate जैसे Advanced AI tools से मस्वूथी से जुड़गगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगगग�

← Transcript index