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मैथिलीक_समानांतर_इतिहास_आ_हेरायत_लोकगीत.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:07तो, तो, कल्पना करूए जे एक ता वेक्ती प्छीस वर्स दहरी बाँक खेर मैनेजर के रूप में काज कराएत चत्छती.
  2. 0:07–0:11माने जीवन बर बस लिसाब किता बरा फाँल कब वोज?
  3. 0:11–0:14आए, एक दम दिन रात नोटक गन्ती चली रहाल चे,
  4. 0:14–0:18मुदद जी ना ही ओव आपन काज से रेटार होए च्छती,
  5. 0:18–0:20अपना गरग उसार पर भाईस,
  6. 0:20–0:21एक तनव पो थी,
  7. 0:21–0:23या अपन मोबाईल खोले च्छती.
  8. 0:23–0:24आई अचानक,
  9. 0:24–0:27एक तदोसर तरा कखाजाना बाटब शुभूगर देच्छती?
  10. 0:27–0:29चाहित खजाना नहीं.
  11. 0:29–0:32भिल्कुल, आई आई के अई रिस्त्रत् विमर्ष्छ में,
  12. 0:32–0:35हम्रा लोक्नी कोनो भव्य संग्र हालै,
  13. 0:35–0:38या इस्तापित इतिहासक काईचक बक्सा में बन्द,
  14. 0:38–0:41सुरक्षित साहित्यक चर्चा नहीं कराहल ची.
  15. 0:41–0:44आई हम सब उही इतिहास का पन्ना पल्टाब,
  16. 0:44–0:49जे अगोशेत आची, जे गामक दूरी, अशोशल मीट्या के दिवाल पर रचल जा रहा लगा चे.
  17. 0:49–0:54तो गजंद्र ताकुर दूरा समपादेद जे स्रोट समगरी हम्रा लोकनिक लगा आची,
  18. 0:54–0:59विदेह पारलेल हिस्ट्री माने समानानतर इतिहास कखंद दू,
  19. 0:59–1:02उ त्तिक आही समानान्तर दुन्याक दर्षन करभाई ताची
  20. 1:02–1:06आप खारन जे साहिते मुख्धारा सा बाहर रचल जारा रहा लगची
  21. 1:06–1:11उकर महत्व अकसर अकादमिक मन्चक चमक दमक में नुकाई जाई ताचे
  22. 1:11–1:12एक दम सही
  23. 1:12–1:17मुदद एही कھन्द में, दूगोट आन वक्तित्व ककाज सामने अवैत ची.
  24. 1:17–1:25हित नाज्जा अर्हिदा मराएंचा, जे साहित्टेक एही अगोषित विरासत कें चुप चाःसन रक्षित करहल्चतीं.
  25. 1:25–1:30देखो एक गोटे लिख का इक आज कर है जातिन अद दोसर गोटे गाँ का
  26. 1:30–1:39मुदा एक ते एक ता पहग प्रश्न उठहे था जे लोक जीवन भरी साहित्यास दूर बेंक का खाज में विस्त रहला
  27. 1:39–1:45अगई आचानक साहित्यक इतिहासक एहन महत्तपून हिस्सा कोना बहसके चतिन.
  28. 1:45–1:47आँ, ये एक ता बहुत नीक प्रशन ची.
  29. 1:47–1:55तः स्रोथ समद्द्री कहेत आचे जे हितनाद जाक जन्म उनने सुच्प्ष्पन में मदूबनिक कोलक गाम में भेल.
  30. 1:55–1:59उनकर पारिवारिक प्रिष्टबूमी तबहुत सम्रिद दचे
  31. 1:59–2:05माने उनकर पिता तारनात जा प्रभात नामक रस्त लिखित पत्रिकाक समपादन करे चला
  32. 2:05–2:11आउनकर वन्शावली तवूँतिस पिडी पूर्व प्रसिद्ध्विद्वान वाचस्पती दभी जाईताची
  33. 2:11–2:16बाप्रे उन्तीश पीडि मुदा जे सवसर रोचक गपचे
  34. 2:16–2:19जे हुँँकर अपन साहिट्टे क्यात्रा
  35. 2:19–2:22रेटारमेंटक बाद फेस्बुक सगती पक्ड़ाई तची
  36. 2:22–2:26बुजल हूना कते कलोग रेटारमेंटक बाद फुर्सत का जीवन जीए चाहे चति
  37. 2:26–2:29बिल्ल्कुल लोग सुचे चदीना वाराम करव
  38. 2:29–2:37अद अ अ पेस्बुक कुक उप्योग कग कग क, मैठिली साहेतिक समिक्षाक एक ता नव परमपरा शुरूके लनी.
  39. 2:37–2:38पाटकिये विदा
  40. 2:38–2:42इप पाटकिये दिभाजे आची, इब बहुत महतोपुन बिन्दू आची.
  41. 2:42–2:47विदेः विषेशांकक एक्ता लेक में, कल्पनाजा सबस्त रुब से लिख़े चती,
  42. 2:47–2:54जे लिटारमेंट के बाद, जटेए की चुलोग केवल पूरसकार वा मंज कलेल कता कविता लिखफ शूरू करे चती,
  43. 2:54–2:58उते हितनात जा ग्राम इतिहास आई पाटकिये लिखव चूनलेनी
  44. 2:59–3:03माने इक्ता सेवाबहल आत्मप्रचार नहीं?
  45. 3:03–3:06एक दम आई भूजनाई बहुत आवश्यका ची,
  46. 3:06–3:10जे इप पाटकिये आजे परमपरिक अकाटमिक समिक्षा आई ची,
  47. 3:10–3:11ताही में की अंतर आची?
  48. 3:11–3:20आँ, हम्रा लागे तचे, अकाटमिक समिक्षा में आलोचक एक ता अदिकार पून ववज ताम्सां बजे तचे.
  49. 3:20–3:29सही कलो, उजज जका ब्यवार करे तची, मुदा पाटके में आलोचक समान ने पाटक कस्तर पर राखी का पोठी का मुल्यांकन करे तची.
  50. 3:29–3:34तैतो एहन भेल जना कोनो अदालत मे भैसल कथोर जजक फैसला नहीं
  51. 3:34–3:39बलकी चाहक दुकान पर कोनो मित्र दूरा देलगिल निश्पक्ष पुस्तक समिक्षा
  52. 3:39–3:41बहुत नी कुप्मा देन वहा
  53. 3:41–3:43और उनकर जे य पाथठ की आची
  54. 3:43–3:49जाती के और लेक रेक नामक पोठी में संकलित कालनी आची 2020 में
  55. 3:49–3:58और ही में और नवकलेखक नन्दिपती डाज से लगक कुमार मनीश अर्विंदधरी के पोठी पर समान आदर से लिखचती.
  56. 3:58–4:00आए, कोनो भेदवाओ नहीं?
  57. 4:00–4:02अगाक इगाप एक दम सती कची
  58. 4:02–4:05पश्चमी साहित्य सिद्धान्त में
  59. 4:05–4:07एक्रा हन्स रोबट जाूस
  60. 4:07–4:11अवोफ गांइसर के रीडर रिस्पाँन्स �theory सजोडी कदेखल जासकेच
  61. 4:11–4:13पाटक प्रतिक्रिया सिद्धान्त
  62. 4:13–4:15रहा हन्स रोबट जाूस
  63. 4:15–4:45अपन अबवव का अदार पर उख्रा बुज़ेची अपन अपन अबवव का अदार पर उख्रा बुज़ेची अपन अपन अबवव का अदार पर उख्रा बुज़ेची अपन अपन अबवव का अदार पर अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन
  64. 4:45–4:48जेना श्रोतन में लफमड जासागर कहे चती
  65. 4:49–4:52हितना जग एही काज में एक ता साहितिक सत्वा
  66. 4:52–4:53वा पवित्रता आची
  67. 4:54–4:56मने इते बजार वाद
  68. 4:56–4:59वा खेमे भाजी कोनो सतान ने आचे
  69. 4:59–4:59बलकोल ने
  70. 5:00–5:01इपुरनता निसपक्षच
  71. 5:01–5:02अदेको
  72. 5:02–5:07जखनो दूसर्क पोथी पडी का पाटकी ए लिखभामे सिद्हस्त बोगिला
  73. 5:07–5:12तकनो अपन गाँँक जीवनी लिखबाक दिशे अग्रसर भिला
  74. 5:12–5:14रहा हूंकर पोथी कोई लक
  75. 5:14–5:15रहा हूंकर पोथी खुई लक
  76. 5:15–5:16रहा हूंकर पोथी खुई लक
  77. 5:16–5:18अगर बापरे एक ता गाँ में पचासी सो लोक
  78. 5:18–5:20अँ अशंगे उमा पती उपाद्ध्धिया सलग
  79. 5:20–5:22कलकता विष्वविद्याले एक प्रथम दूटा मैठिली प्रुफेसर
  80. 5:22–5:24कुदी जहां आब भाभुवाजी में प्रुप्वाद्धिया
  81. 5:24–5:33जे एह में गाँक भूगोल, जन सांखिकी, जै हमें 2011 गेर जनगरना के अनुसार लगबखबचास्त्री सो लोकक आबादी चे.
  82. 5:33–5:36बाप्रे, एक ता गाँ में पचास्ती सो लोक.
  83. 5:36–5:49अपने विज्टाले के प्रथम् दूता मैठिली प्रफेसर कुदी जाए आब भाभूजी मिष्र तरीक बोदिख परमपराक वरनन आचे
  84. 5:49–5:55इजे ग्राम इतिहास लिखबाग परमपराच अक्रा मानव शास्तर क्द्रिष्टिकोन से बुजनाया वश्च्यक अची
  85. 5:55–5:59पश्च्मि मानव्शास्त्री क्लिफर्ट गीट्स एक ता सिद्धान दिलने आची
  86. 5:59–6:02तिक दिस्क्रिष्ट्चन, मने सगन्विव्रन,
  87. 6:02–6:04इस सगन्विव्रन इब हिल,
  88. 6:04–6:09इकर आर्थ छे, जे कुनो समाज के मात्र सतही रुपे नहीं दिखनाई,
  89. 6:09–6:12जे ना जन गाँ में कुनो पाबनी तिहार भरहल अचे,
  90. 6:12–6:16तमात्र यी नहीं नहीं लिखभ जि लोग जमा भेला आ पुजा कल नहीं
  91. 6:16–6:18तफिर की लिखभ?
  92. 6:18–6:23सगन विव्रनक आर्थ अची जे उही पावनिक पाजुज ये सांस्क्रतिक आर्थ चुपल अची
  93. 6:23–6:29उक्रा क्रिषी पन्चांग, लोक कता, अ समाजिक बनोटक संग जोड कप्रस्थूत करभ,
  94. 6:29–6:33हितनात जाग कोलक में एही सगन विवरन कर उप्योक कल नहीं आची.
  95. 6:33–6:36मुदा एते हम्रा मोन में एक तगमभीर प्रष्नोट है तजे.
  96. 6:36–6:37कहु?
  97. 6:37–6:42जए कोनो गामक इतिहास में समाजक प्रतेक वर्ग कवरने नहीं अचे,
  98. 6:42–6:45तक की उक्रा पुन इतिहास मानल जासकई तजे?
  99. 6:45–6:47आजा आजा इशार की दर अची?
  100. 6:47–6:52देखू, श्रोथ सामगरी में प्रफेसर महेश्वर लाल दास पष्ट कहे चतिन,
  101. 6:52–6:57जे एही कोलक पोठी में गेर ब्रामवन जाती का वरनन न न जचे.
  102. 6:57–6:59आप इई आलोचना त अच्छे होते.
  103. 6:59–7:04आएकर संग है, दोक्तर केलाश कुमार मिष्र, इचिन्त व्यक्त करे चतिन,
  104. 7:04–7:12जे एक विध्वान लोकनी गाब हेला बादो 2018 में, एक साख्षरतदर मातर साथ प्रतिषत आचे.
  105. 7:12–7:16तक ये इतिहासक एक ता अपुण चित्र नहीं बहल?
  106. 7:16–7:27अहां की आलोचना एक्दम जाये ज़े, मुदः इतिहास लेखनक सीमा के देखे वत अची, कोनो सोव इतिहास कही यो शत प्रती सत पुरन नहीं हूँई तेई.
  107. 7:27–7:30मने इक ता निरन्तर चलेवला प्रक्री आची.
  108. 7:30–7:37एक दम, प्रफेसर दास अ दोक्टर मिस्र केर आलोचना पोठी के महत्तों के कम नहीं करएत ची,
  109. 7:37–7:42बल की देखाउत ची, जे हितनात जाग काज कते क इमान्दारी पोरन अची.
  110. 7:42–7:48उकोनो त्रूती वाक्कम शाख्षरता दरजका करवा सचके नुकावेत नहीं चतिन.
  111. 7:48–7:52अट्त्यके जस्ताक्तस राखी देच्छतिन
  112. 7:52–7:59इसमनान्तर इतिहासक अख रागी पन्ना जही पर भविश्यक सोजकरता लोकनिक के काज कर वाखाखाची
  113. 7:59–8:03इपोति एक ता नीव अचे पुर्न भवन्नाय
  114. 8:03–8:06हम्रा लागाई तचे इब रहुत नीक द्रिष्टी कोन अची
  115. 8:06–8:12इतिहासक कोनो पोठी के अन्तिम सत्य मानवाक बडला एक ता प्रस्थान बिन्दु मानल जाए.
  116. 8:12–8:12दिलकुल.
  117. 8:12–8:15तब आब गामक गप से बाहर निकलेग कड,
  118. 8:15–8:19हम सब खोनी प्रवासी जीवन कडडद दिस मोड़ेई ची.
  119. 8:19–8:21आप, उआनुबाद वाला जे काजज़े उनकर.
  120. 8:21–8:30अग, हितनात जा रहाजारी बाग मे रहेत हिंदी के प्रगतिषील कवी शम्वू बादल कर उन्तीस्ता कविताक मैठली में अनुवाद केलन ही.
  121. 8:30–8:33पोठीग नाम चे कविता शम्वू बादलक.
  122. 8:33–8:36दूई हाजार तेश में आईल चल एई.
  123. 8:36–8:42मुदस्रोथ समगरी में अनुवादक संदरव में एक ता बाहरी भरकम शब्द का उप्योग भेल आची.
  124. 8:42–8:46दानामिक एक्वी वलन्स माने गतिषील समानता.
  125. 8:46–8:49इस अदारन शब्द दर शबद अनुवाद से कुना अलग अच्छे?
  126. 8:49–8:56दिखो, जो वहा कोनो कविताक मात्र शब्द दर शबद अनवाद करे ची, तो उकर आत्मा मरी जात अचे.
  127. 8:56–8:59आप, उो गुगल ट्रान्सलेट जका लगे लगे तचे.
  128. 8:59–9:04इग्दम, यूजिन निदागर यो सिद्धानत जे दानमिक एक्विवलन्स अचे,
  129. 9:04–9:15अखर मुल उद्देश्य अचे जे मुल कविता हिंदी पाथक के मुन में जे दर्द पैदा करे तचे त्छे त्छे तिक उही दर्द मैतली पाथक के मुन में उप्वाक चाही.
  130. 9:15–9:16अचा.
  131. 9:16–9:23शम्बूबादल के कविता सब जार्क्ण के आदिवासी जीवन, खतान के मस्दूर आप प्रक्रतिक परद्रष्षे पर आदारेत अचे.
  132. 9:23–9:30जोन हित नाज्जा अगरा मेठली मे आनाई चती, तो उषोशन के मेठली का आम बूल्टालक मुहावराक संग जोडद दे चती.
  133. 9:30–9:35इता एहन भेल जेना कोनो गाज के उखाडी के सावदानी पूरवक दूसर माटी में लगेना,
  134. 9:35–9:40आई सुनिष्ट करब जे उदूसर माटी में सोथबे नीगजगा का पूल्फूली आई.
  135. 9:40–9:43बहुत सुन्दर गब कहलू, एक राश्वोत में एको क्रितिसिзम
  136. 9:43–9:46वा पर्यावरन आलोचना से से हो जोडल गेल अच्छे.
  137. 9:46–9:49वने प्रक्रती आ साहित्यक भीचक सम्मन्द
  138. 9:49–9:51जगन जार्खन्डक पहाडक दर्द
  139. 9:51–9:54मेतलिक शब्द में गुईट आच्छे
  140. 9:54–9:57तकन उ केवल एक ता राजयक दर्द ने रही जात छी नहीं नहीं?
  141. 9:57–9:58बलकुल नहीं.
  142. 9:58–10:02उ मानाउ मात्रक पर्यावरन से जुडावक कता बोजाई तची.
  143. 10:02–10:06आ एते सा हम्रा लोकनी एक ता एहन शेतर में प्रवेश कर रहल ची ए
  144. 10:06–10:11जि हम्रा वीचार सव इस रोट समगरिक सबसा आश्चर जनक हिसा आची
  145. 10:11–10:12अगी आचे
  146. 10:12–10:18अव अची चोदवी सताबदिक निव्य न्याय सिद्दान तक आदूनिक सहत्य समिक्षा में प्रेईग
  147. 10:18–10:19एक मिनेट एक मिनेट
  148. 10:19–10:23चोदावी शताबदिक दर्षन अर तक्रीक शास्त्र का उप्योग
  149. 10:23–10:28एकीसवी शताबदिके, फेस्बुक पोस्ट, और आदूनिक पोठिक समिक्षापर
  150. 10:28–10:30इटालमेल कोना संबवाची?
  151. 10:30–10:31गमाल का गपची नहीं?
  152. 10:31–10:32रहीं
  153. 10:32–10:37आई इन्यव्य न्याय की च्योग्रा एते क महत्व देल जा रहलाच
  154. 10:37–10:43दिखो, इटाल्मेल एहले समबवाची कारन ज्यान के कुनो एकस्पारी देट नहीं होई तची
  155. 10:43–10:47गंगेश उपाद्याए, जे न्यव्य न्याय के संस्तापक चला,
  156. 10:47–10:51उच्व्दवी सताब्दी में, मित्हिलाक, कर्यों गाँ मेरहे चला.
  157. 10:51–10:55कर्यों. मुदा कर्यों ता हितनात जाकक गाँ कोलक से,
  158. 10:55–10:57मात्र किचु दूरी पर अचे.
  159. 10:57–11:01इक दम ताई एकोनो पच्मी वा बाही सिद्धानत नहीं
  160. 11:01–11:04बलकी आपन माडी की ज्यानक स्वदेश वाप्सी अची
  161. 11:04–11:06नव्व्य नयाय मुख्यताश आं
  162. 11:06–11:10सत्य प्राप्त करवाक चारी ता प्रमान पर काज करी तची
  163. 11:10–11:13प्रत्यक्ष अनुमान उपमान अश्व्द
  164. 11:13–11:19तकि हम यी मानी ले, जगन हितनात जगा, फेस्बुक पर कोनो पोतिक समिक्षा लिखाई चति,
  165. 11:19–11:24तो उ अचेतन रुप सा एही चारी प्रमान को प्योग कर रहल हो इच्चति.
  166. 11:24–11:27रहा, मुदा यी कोना होई तची उ भुजु.
  167. 11:27–11:33जखन उ लेक्ख़ च्छतिन जे इपोठी पडी के हम्रा एहन अनुबवेल ताई प्रत्यक्ष प्रमानवेल
  168. 11:33–11:35माने सीथा पटन अनुबव?
  169. 11:35–11:41बलकल. तो सर अची अनुमान, जखन उ पोठी क कोनो एक ता प्रसंगक आदार पर,
  170. 11:41–11:44लेखकक समपून विचार्दाराक अनुमान लगाई च्छती
  171. 11:44–11:44आच्छा
  172. 11:45–11:46अ तेसर
  173. 11:46–11:47तेसर उप्मान
  174. 11:47–11:48माने तुल्ना करवः
  175. 11:49–11:51उन्या लेखक ककत्थुल्ना पुरान
  176. 11:51–11:53स्तापित लेखक कक शेली सकर इच्छती
  177. 11:54–11:55आच्छारिम शब्द
  178. 11:55–12:01जखन उ आपन समिक्षा केन प्रमानित करवाक लेल महान गरन्तक संदर बदेच्छती.
  179. 12:01–12:04इगव हम्रा सोचने पर मजबोर कर अल आची,
  180. 12:04–12:10जि कोना हम सब आपन दैनिक जीवन में से हो ए प्राचीन तरक शास्तर कुप्योग कर इच्छे.
  181. 12:10–12:40आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
  182. 12:40–12:46अब एक्हिन दरे हम सब लिखित शब्द, अनुवाद अ आलोचना कगब करहल चलू हूं
  183. 12:46–12:52मुदा साहित्यके एक टा एहन रूप से हो अची, जि पन्ना पर नहीं, बलकी लोकक कंट मे बसे तची
  184. 12:52–12:55गाँउके उसार पर अखेत खलिहान में
  185. 12:55–13:02अँ, स्रोथ सामग्री हम्रा लोक्नी के, अक्षर से आगा बहडीकर, स्वर अद्वनी के रदूनिया में लोजा तची.
  186. 13:03–13:08एते चर्चा आवग तची, हम्रा सबख दोसर मुक्छ वेक्तित्वकक, हिर्दे नरायन जा.
  187. 13:08–13:13रदेना रायडजा जे मदुबनी के एक ता लोग संसक्रती कर्मी
  188. 13:13–13:17और आकाश्वानी एक बी हाई ग्रेट कलाकार चाती
  189. 13:17–13:21संगे हुंका परम परागत योगक सिक्षासो हो प्रापत छी.
  190. 13:21–13:51वो लेक तकुनो समाने संकलन नहीं आई आई आई आई आई ता आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आ�
  191. 13:51–13:53बोर के समे गाओल जाएत अची
  192. 13:53–13:56प्रक्रती आदेवताक के जगेवाक लेल
  193. 13:56–13:58आप, वा गुसाअनिक गीत
  194. 13:58–14:00जे कुल्देवीक आवान अची
  195. 14:00–14:01सोहर
  196. 14:01–14:03जे जनम के समे गाओल जाएत अची
  197. 14:03–14:06और जाई में नवज जीवनक उलास के संच्संच
  198. 14:06–14:08या दर्द से हो समाहित रहेता थाची
  199. 14:08–14:16एकर अतिरिक्त कुमार, दहकन, विशहरा गीत, चमासा, लगनी, एस सब मात्र दून्ने चाती
  200. 14:16–14:17बिल्कुल नहीं
  201. 14:17–14:25जन कोनो सोहर ने गाल जायतची, वा पोनो पराती के क्रो यादने रहतची, तो केवल एक ता गीतक मरिनाए ने थीक.
  202. 14:25–14:33इप उही सांगितेक सम्रितिक मितानाए भेल, जे शताब्दी सा एक पीडी सा दोसर पीडी दरी मोखे करुप सा अवेच्छल.
  203. 14:33–14:38आईले रेदे नारायन जा एक रा अडीो वीटियो रूप में सन्रक्षित करवाक आवाहन करे चतीन.
  204. 14:38–14:44इता एक ता और रोचक गब वची, उो इगीट सबख मित्लाक शाक्ते परिव्रुष्ष्चसा सा जोडे चतीन.
  205. 14:44–14:45शाक्ते परिव्रुष्च्चा.
  206. 14:45–14:47माने शक्ती लान्स्केप
  207. 14:47–14:52आँ, जना कुनो गीत मद्वनिक दूर्गास्थान में गावल जाएत अची
  208. 14:52–14:57तो कुनो कोलक भद्र काली में वा मंग्रोनिक बूडि माइक प्राँगन में
  209. 14:57–15:01इगीत मितलाक भुगलाक जीवन्त नक्षा जे थी
  210. 15:01–15:02कमाला आचे
  211. 15:02–15:06उ नोटा विशिष्ट गीट के लिपिबद स्यो कलन्या चे
  212. 15:06–15:15आ औही नोटा गीट में महाकवी विद्यापती आ चंदा जाग रचनाक संच्संग, आ नाम पुरुखाख रचल पारमपरि गीट स्यो शामिल अचे
  213. 15:15–15:22एक कर मानी इजि लोक परमपरा में शास्त्री आम मोक्खिक दुन्नुदारा एक संब है तच्छे.
  214. 15:22–15:23एक दम सही बात.
  215. 15:23–15:28मुदा यते हम एक ता गमभीर संकत दिस द्यान लिबा चाभ.
  216. 15:28–15:29कहूना.
  217. 15:29–15:35जगन आहा कोनो जीवित मोक्खिक गीप के एक ता पन्नापर लिखिक भान दी देच्छी,
  218. 15:35–15:38तो की उकर स्वबहावेक आत्मा नहीं मरजाईत अच्छे.
  219. 15:38–15:41आहाग प्रष्ट बहुत तार्किक अच्छे.
  220. 15:41–15:45मैंने, इत एहन भेल जना कुन न्रित्त करे नर्तिकिक फोटो की चीची लेब.
  221. 15:45–15:48आहा उकर शारीरिक मुद्रात कैद कलेब.
  222. 15:48–15:53मुदा उकर लैए, संगीत, अग्गती उही इस छिर चित्र से हमेशा कले लेए गाएब ब हो जाएद.
  223. 15:53–15:56इआब हि लेक्हा गारक सब सब पेग विदम्मना आची
  224. 15:56–16:00आहाज नर्टकीक उप्मा देलूं उगडम सती का ची
  225. 16:00–16:04आजगन कुनो जीवित गीट पनापर अवेत ची
  226. 16:04–16:08तो अकर सामूइक उर्जा और उईश्णक बाव मर जाए तची
  227. 16:08–16:10तफेर एकर समादान की आची
  228. 16:10–16:21देखो, बेसी पहंक संकत इए ची जे आहा औो फोटो नहीं किचबम, तब हविष्षेक पीडी के इहो नहीं जनतब, जे अट खेहिो कुनो नरतकी निर्त सो हो कनक चेल.
  229. 16:21–16:24औहो, इट बहुत गम्हेर गब अची.
  230. 16:24–16:36अग, जा हिर्दे नारायन जा एक रा लिपी बद्ध नहीं करते, तई भविष्षेक लेल हमेशाक लेल मिता जाएत. इआमुर्त सांस्क्रतिक भीरासत के बचाईवाक एक ता अनन्तिम प्रयास ची.
  231. 16:36–16:38इबहुत मार्मेक अची.
  232. 16:38–16:43तई यदी हम सब एह समपुन विमर्ष्ख के समेट्वा में आवी
  233. 16:43–16:46तई एस पष्ट होई तखछी जे हित नात जा
  234. 16:46–16:48आह्र्देना रायान जाजका सादھक
  235. 16:48–16:51जे मुख्यदारा का साहित्टिक पूरस्कार
  236. 16:51–16:53वं मन्च्छे दूर चतिन
  237. 16:53–16:57अज़े आगे ता चाईट बाग्चाग पक्लिख्षा नहीं के लेनी
  238. 16:57–17:01अगे प्वेस्बूक येजरनल आमाव्खिक सन्रक्षन के माद्दियम से अपन काईच के लेनी
  239. 17:01–17:05येजरनल आमाव्खिक सन्रक्षन के माद्दियम से अपन काईच के लेनी
  240. 17:05–17:18ये हमरा लोक्निकन ये सिक्बाएत अची जे साहित टिक असली जीवन औईई सन्स्तागत भववे भवन से बाहर गांके माटी आ लोका किस्म्रती में बसेट अची
  241. 17:18–17:24सही कहल हूँ इतिहास किछु नहीं मात्र सन्रक्षित इस्म्रती के दिल गयल एक ता नाम अची
  242. 17:24–17:37तः आई काल के सुचनाक बाड में जदे हर सेक्ट रहारो पोस्ट अब विट्टियो आईब रहल अच्छी, हम्रा लोकनी के सुचना चाही, जे हम सब आपन पुर्खा किस्म्रती के कोना सन रक्षित कराज़ ची.
  243. 17:37–17:41अग, कि हम सब आपन दादी नानी कदीत रेकोड कर रहल ची?
  244. 17:41–17:43ये एक ता एहन दाइत तो या ची,
  245. 17:43–17:46जे हर नागरिक के निभायाक चाही.
  246. 17:46–17:49साहित निरमान केवल अकादमिक लोकनी काजना थेक.
  247. 17:49–17:50बिल्कुल.
  248. 17:50–17:54आएते से हमरा दिमाग मेक ता विचार अबएत ची,
  249. 17:54–17:57जेक्रा पर हम चाहाप जिस्रोता लुकने एकान्त में सुच्तें
  250. 17:57–17:59की विचारा चीो?
  251. 17:59–18:01जब साहेत्ते आ एतिहास
  252. 18:01–18:04वास्तो में एक ता समानन्तर प्रक्रीया थिक
  253. 18:04–18:06तक की एक हसार वर्ष कि बाद
  254. 18:06–18:09आई के हम्रा सबक एजे दिजितल पदचिन्ना अची
  255. 18:09–18:13जेना हितनाद जाक फेस्बुक पोस्ट या मोबाईल में रिकोड कलल गेल
  256. 18:13–18:18रिदे नार आईन जाक गीत, औही युग के लेल कोनो पवित्र ग्रन्त मानल जाएत.
  257. 18:18–18:22बाप्रे, यी तो बहुत गंभीर प्रष्नाची.
  258. 18:22–18:26जखनम सब श्रूवात स्तापित इतिहासक काचक बक्सा से केने रही
  259. 18:26–18:31तस शोची जिकी एक दिन हमर आवाक इदिजिटल फुल्टर
  260. 18:31–18:34उही बक्सा से भेशी कीमती सिद्ध नहीं होएत
  261. 18:34–18:38इएक ता ऐहन प्रष्न ची जब है पर सब के सोचबाक चाही
  262. 18:38–18:40इग्दम सुच्बाक चाही
  263. 18:40–18:43अईकेर ही विस्त्रत्विमर्ष में बस अप्टवे

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तो, तो, कल्पना करूए जे एक ता वेक्ती प्छीस वर्स दहरी बाँक खेर मैनेजर के रूप में काज कराएत चत्छती. माने जीवन बर बस लिसाब किता बरा फाँल कब वोज? आए, एक दम दिन रात नोटक गन्ती चली रहाल चे, मुदद जी ना ही ओव आपन काज से रेटार होए च्छती, अपना गरग उसार पर भाईस, एक तनव पो थी, या अपन मोबाईल खोले च्छती. आई अचानक, एक तदोसर तरा कखाजाना बाटब शुभूगर देच्छती? चाहित खजाना नहीं. भिल्कुल, आई आई के अई रिस्त्रत् विमर्ष्छ में, हम्रा लोक्नी कोनो भव्य संग्र हालै, या इस्तापित इतिहासक काईचक बक्सा में बन्द, सुरक्षित साहित्यक चर्चा नहीं कराहल ची. आई हम सब उही इतिहास का पन्ना पल्टाब, जे अगोशेत आची, जे गामक दूरी, अशोशल मीट्या के दिवाल पर रचल जा रहा लगा चे. तो गजंद्र ताकुर दूरा समपादेद जे स्रोट समगरी हम्रा लोकनिक लगा आची, विदेह पारलेल हिस्ट्री माने समानानतर इतिहास कखंद दू, उ त्तिक आही समानान्तर दुन्याक दर्षन करभाई ताची आप खारन जे साहिते मुख्धारा सा बाहर रचल जारा रहा लगची उकर महत्व अकसर अकादमिक मन्चक चमक दमक में नुकाई जाई ताचे एक दम सही मुदद एही कھन्द में, दूगोट आन वक्तित्व ककाज सामने अवैत ची. हित नाज्जा अर्हिदा मराएंचा, जे साहित्टेक एही अगोषित विरासत कें चुप चाःसन रक्षित करहल्चतीं. देखो एक गोटे लिख का इक आज कर है जातिन अद दोसर गोटे गाँ का मुदा एक ते एक ता पहग प्रश्न उठहे था जे लोक जीवन भरी साहित्यास दूर बेंक का खाज में विस्त रहला अगई आचानक साहित्यक इतिहासक एहन महत्तपून हिस्सा कोना बहसके चतिन. आँ, ये एक ता बहुत नीक प्रशन ची. तः स्रोथ समद्द्री कहेत आचे जे हितनाद जाक जन्म उनने सुच्प्ष्पन में मदूबनिक कोलक गाम में भेल. उनकर पारिवारिक प्रिष्टबूमी तबहुत सम्रिद दचे माने उनकर पिता तारनात जा प्रभात नामक रस्त लिखित पत्रिकाक समपादन करे चला आउनकर वन्शावली तवूँतिस पिडी पूर्व प्रसिद्ध्विद्वान वाचस्पती दभी जाईताची बाप्रे उन्तीश पीडि मुदा जे सवसर रोचक गपचे जे हुँँकर अपन साहिट्टे क्यात्रा रेटारमेंटक बाद फेस्बुक सगती पक्ड़ाई तची बुजल हूना कते कलोग रेटारमेंटक बाद फुर्सत का जीवन जीए चाहे चति बिल्ल्कुल लोग सुचे चदीना वाराम करव अद अ अ पेस्बुक कुक उप्योग कग कग क, मैठिली साहेतिक समिक्षाक एक ता नव परमपरा शुरूके लनी. पाटकिये विदा इप पाटकिये दिभाजे आची, इब बहुत महतोपुन बिन्दू आची. विदेः विषेशांकक एक्ता लेक में, कल्पनाजा सबस्त रुब से लिख़े चती, जे लिटारमेंट के बाद, जटेए की चुलोग केवल पूरसकार वा मंज कलेल कता कविता लिखफ शूरू करे चती, उते हितनात जा ग्राम इतिहास आई पाटकिये लिखव चूनलेनी माने इक्ता सेवाबहल आत्मप्रचार नहीं? एक दम आई भूजनाई बहुत आवश्यका ची, जे इप पाटकिये आजे परमपरिक अकाटमिक समिक्षा आई ची, ताही में की अंतर आची? आँ, हम्रा लागे तचे, अकाटमिक समिक्षा में आलोचक एक ता अदिकार पून ववज ताम्सां बजे तचे. सही कलो, उजज जका ब्यवार करे तची, मुदा पाटके में आलोचक समान ने पाटक कस्तर पर राखी का पोठी का मुल्यांकन करे तची. तैतो एहन भेल जना कोनो अदालत मे भैसल कथोर जजक फैसला नहीं बलकी चाहक दुकान पर कोनो मित्र दूरा देलगिल निश्पक्ष पुस्तक समिक्षा बहुत नी कुप्मा देन वहा और उनकर जे य पाथठ की आची जाती के और लेक रेक नामक पोठी में संकलित कालनी आची 2020 में और ही में और नवकलेखक नन्दिपती डाज से लगक कुमार मनीश अर्विंदधरी के पोठी पर समान आदर से लिखचती. आए, कोनो भेदवाओ नहीं? अगाक इगाप एक दम सती कची पश्चमी साहित्य सिद्धान्त में एक्रा हन्स रोबट जाूस अवोफ गांइसर के रीडर रिस्पाँन्स �theory सजोडी कदेखल जासकेच पाटक प्रतिक्रिया सिद्धान्त रहा हन्स रोबट जाूस अपन अबवव का अदार पर उख्रा बुज़ेची अपन अपन अबवव का अदार पर उख्रा बुज़ेची अपन अपन अबवव का अदार पर उख्रा बुज़ेची अपन अपन अबवव का अदार पर अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन अपन जेना श्रोतन में लफमड जासागर कहे चती हितना जग एही काज में एक ता साहितिक सत्वा वा पवित्रता आची मने इते बजार वाद वा खेमे भाजी कोनो सतान ने आचे बलकोल ने इपुरनता निसपक्षच अदेको जखनो दूसर्क पोथी पडी का पाटकी ए लिखभामे सिद्हस्त बोगिला तकनो अपन गाँँक जीवनी लिखबाक दिशे अग्रसर भिला रहा हूंकर पोथी कोई लक रहा हूंकर पोथी खुई लक रहा हूंकर पोथी खुई लक अगर बापरे एक ता गाँ में पचासी सो लोक अँ अशंगे उमा पती उपाद्ध्धिया सलग कलकता विष्वविद्याले एक प्रथम दूटा मैठिली प्रुफेसर कुदी जहां आब भाभुवाजी में प्रुप्वाद्धिया जे एह में गाँक भूगोल, जन सांखिकी, जै हमें 2011 गेर जनगरना के अनुसार लगबखबचास्त्री सो लोकक आबादी चे. बाप्रे, एक ता गाँ में पचास्ती सो लोक. अपने विज्टाले के प्रथम् दूता मैठिली प्रफेसर कुदी जाए आब भाभूजी मिष्र तरीक बोदिख परमपराक वरनन आचे इजे ग्राम इतिहास लिखबाग परमपराच अक्रा मानव शास्तर क्द्रिष्टिकोन से बुजनाया वश्च्यक अची पश्च्मि मानव्शास्त्री क्लिफर्ट गीट्स एक ता सिद्धान दिलने आची तिक दिस्क्रिष्ट्चन, मने सगन्विव्रन, इस सगन्विव्रन इब हिल, इकर आर्थ छे, जे कुनो समाज के मात्र सतही रुपे नहीं दिखनाई, जे ना जन गाँ में कुनो पाबनी तिहार भरहल अचे, तमात्र यी नहीं नहीं लिखभ जि लोग जमा भेला आ पुजा कल नहीं तफिर की लिखभ? सगन विव्रनक आर्थ अची जे उही पावनिक पाजुज ये सांस्क्रतिक आर्थ चुपल अची उक्रा क्रिषी पन्चांग, लोक कता, अ समाजिक बनोटक संग जोड कप्रस्थूत करभ, हितनात जाग कोलक में एही सगन विवरन कर उप्योक कल नहीं आची. मुदा एते हम्रा मोन में एक तगमभीर प्रष्नोट है तजे. कहु? जए कोनो गामक इतिहास में समाजक प्रतेक वर्ग कवरने नहीं अचे, तक की उक्रा पुन इतिहास मानल जासकई तजे? आजा आजा इशार की दर अची? देखू, श्रोथ सामगरी में प्रफेसर महेश्वर लाल दास पष्ट कहे चतिन, जे एही कोलक पोठी में गेर ब्रामवन जाती का वरनन न न जचे. आप इई आलोचना त अच्छे होते. आएकर संग है, दोक्तर केलाश कुमार मिष्र, इचिन्त व्यक्त करे चतिन, जे एक विध्वान लोकनी गाब हेला बादो 2018 में, एक साख्षरतदर मातर साथ प्रतिषत आचे. तक ये इतिहासक एक ता अपुण चित्र नहीं बहल? अहां की आलोचना एक्दम जाये ज़े, मुदः इतिहास लेखनक सीमा के देखे वत अची, कोनो सोव इतिहास कही यो शत प्रती सत पुरन नहीं हूँई तेई. मने इक ता निरन्तर चलेवला प्रक्री आची. एक दम, प्रफेसर दास अ दोक्टर मिस्र केर आलोचना पोठी के महत्तों के कम नहीं करएत ची, बल की देखाउत ची, जे हितनात जाग काज कते क इमान्दारी पोरन अची. उकोनो त्रूती वाक्कम शाख्षरता दरजका करवा सचके नुकावेत नहीं चतिन. अट्त्यके जस्ताक्तस राखी देच्छतिन इसमनान्तर इतिहासक अख रागी पन्ना जही पर भविश्यक सोजकरता लोकनिक के काज कर वाखाखाची इपोति एक ता नीव अचे पुर्न भवन्नाय हम्रा लागाई तचे इब रहुत नीक द्रिष्टी कोन अची इतिहासक कोनो पोठी के अन्तिम सत्य मानवाक बडला एक ता प्रस्थान बिन्दु मानल जाए. दिलकुल. तब आब गामक गप से बाहर निकलेग कड, हम सब खोनी प्रवासी जीवन कडडद दिस मोड़ेई ची. आप, उआनुबाद वाला जे काजज़े उनकर. अग, हितनात जा रहाजारी बाग मे रहेत हिंदी के प्रगतिषील कवी शम्वू बादल कर उन्तीस्ता कविताक मैठली में अनुवाद केलन ही. पोठीग नाम चे कविता शम्वू बादलक. दूई हाजार तेश में आईल चल एई. मुदस्रोथ समगरी में अनुवादक संदरव में एक ता बाहरी भरकम शब्द का उप्योग भेल आची. दानामिक एक्वी वलन्स माने गतिषील समानता. इस अदारन शब्द दर शबद अनुवाद से कुना अलग अच्छे? दिखो, जो वहा कोनो कविताक मात्र शब्द दर शबद अनवाद करे ची, तो उकर आत्मा मरी जात अचे. आप, उो गुगल ट्रान्सलेट जका लगे लगे तचे. इग्दम, यूजिन निदागर यो सिद्धानत जे दानमिक एक्विवलन्स अचे, अखर मुल उद्देश्य अचे जे मुल कविता हिंदी पाथक के मुन में जे दर्द पैदा करे तचे त्छे त्छे तिक उही दर्द मैतली पाथक के मुन में उप्वाक चाही. अचा. शम्बूबादल के कविता सब जार्क्ण के आदिवासी जीवन, खतान के मस्दूर आप प्रक्रतिक परद्रष्षे पर आदारेत अचे. जोन हित नाज्जा अगरा मेठली मे आनाई चती, तो उषोशन के मेठली का आम बूल्टालक मुहावराक संग जोडद दे चती. इता एहन भेल जेना कोनो गाज के उखाडी के सावदानी पूरवक दूसर माटी में लगेना, आई सुनिष्ट करब जे उदूसर माटी में सोथबे नीगजगा का पूल्फूली आई. बहुत सुन्दर गब कहलू, एक राश्वोत में एको क्रितिसिзम वा पर्यावरन आलोचना से से हो जोडल गेल अच्छे. वने प्रक्रती आ साहित्यक भीचक सम्मन्द जगन जार्खन्डक पहाडक दर्द मेतलिक शब्द में गुईट आच्छे तकन उ केवल एक ता राजयक दर्द ने रही जात छी नहीं नहीं? बलकुल नहीं. उ मानाउ मात्रक पर्यावरन से जुडावक कता बोजाई तची. आ एते सा हम्रा लोकनी एक ता एहन शेतर में प्रवेश कर रहल ची ए जि हम्रा वीचार सव इस रोट समगरिक सबसा आश्चर जनक हिसा आची अगी आचे अव अची चोदवी सताबदिक निव्य न्याय सिद्दान तक आदूनिक सहत्य समिक्षा में प्रेईग एक मिनेट एक मिनेट चोदावी शताबदिक दर्षन अर तक्रीक शास्त्र का उप्योग एकीसवी शताबदिके, फेस्बुक पोस्ट, और आदूनिक पोठिक समिक्षापर इटालमेल कोना संबवाची? गमाल का गपची नहीं? रहीं आई इन्यव्य न्याय की च्योग्रा एते क महत्व देल जा रहलाच दिखो, इटाल्मेल एहले समबवाची कारन ज्यान के कुनो एकस्पारी देट नहीं होई तची गंगेश उपाद्याए, जे न्यव्य न्याय के संस्तापक चला, उच्व्दवी सताब्दी में, मित्हिलाक, कर्यों गाँ मेरहे चला. कर्यों. मुदा कर्यों ता हितनात जाकक गाँ कोलक से, मात्र किचु दूरी पर अचे. इक दम ताई एकोनो पच्मी वा बाही सिद्धानत नहीं बलकी आपन माडी की ज्यानक स्वदेश वाप्सी अची नव्व्य नयाय मुख्यताश आं सत्य प्राप्त करवाक चारी ता प्रमान पर काज करी तची प्रत्यक्ष अनुमान उपमान अश्व्द तकि हम यी मानी ले, जगन हितनात जगा, फेस्बुक पर कोनो पोतिक समिक्षा लिखाई चति, तो उ अचेतन रुप सा एही चारी प्रमान को प्योग कर रहल हो इच्चति. रहा, मुदा यी कोना होई तची उ भुजु. जखन उ लेक्ख़ च्छतिन जे इपोठी पडी के हम्रा एहन अनुबवेल ताई प्रत्यक्ष प्रमानवेल माने सीथा पटन अनुबव? बलकल. तो सर अची अनुमान, जखन उ पोठी क कोनो एक ता प्रसंगक आदार पर, लेखकक समपून विचार्दाराक अनुमान लगाई च्छती आच्छा अ तेसर तेसर उप्मान माने तुल्ना करवः उन्या लेखक ककत्थुल्ना पुरान स्तापित लेखक कक शेली सकर इच्छती आच्छारिम शब्द जखन उ आपन समिक्षा केन प्रमानित करवाक लेल महान गरन्तक संदर बदेच्छती. इगव हम्रा सोचने पर मजबोर कर अल आची, जि कोना हम सब आपन दैनिक जीवन में से हो ए प्राचीन तरक शास्तर कुप्योग कर इच्छे. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � अब एक्हिन दरे हम सब लिखित शब्द, अनुवाद अ आलोचना कगब करहल चलू हूं मुदा साहित्यके एक टा एहन रूप से हो अची, जि पन्ना पर नहीं, बलकी लोकक कंट मे बसे तची गाँउके उसार पर अखेत खलिहान में अँ, स्रोथ सामग्री हम्रा लोक्नी के, अक्षर से आगा बहडीकर, स्वर अद्वनी के रदूनिया में लोजा तची. एते चर्चा आवग तची, हम्रा सबख दोसर मुक्छ वेक्तित्वकक, हिर्दे नरायन जा. रदेना रायडजा जे मदुबनी के एक ता लोग संसक्रती कर्मी और आकाश्वानी एक बी हाई ग्रेट कलाकार चाती संगे हुंका परम परागत योगक सिक्षासो हो प्रापत छी. वो लेक तकुनो समाने संकलन नहीं आई आई आई आई आई ता आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आ� बोर के समे गाओल जाएत अची प्रक्रती आदेवताक के जगेवाक लेल आप, वा गुसाअनिक गीत जे कुल्देवीक आवान अची सोहर जे जनम के समे गाओल जाएत अची और जाई में नवज जीवनक उलास के संच्संच या दर्द से हो समाहित रहेता थाची एकर अतिरिक्त कुमार, दहकन, विशहरा गीत, चमासा, लगनी, एस सब मात्र दून्ने चाती बिल्कुल नहीं जन कोनो सोहर ने गाल जायतची, वा पोनो पराती के क्रो यादने रहतची, तो केवल एक ता गीतक मरिनाए ने थीक. इप उही सांगितेक सम्रितिक मितानाए भेल, जे शताब्दी सा एक पीडी सा दोसर पीडी दरी मोखे करुप सा अवेच्छल. आईले रेदे नारायन जा एक रा अडीो वीटियो रूप में सन्रक्षित करवाक आवाहन करे चतीन. इता एक ता और रोचक गब वची, उो इगीट सबख मित्लाक शाक्ते परिव्रुष्ष्चसा सा जोडे चतीन. शाक्ते परिव्रुष्च्चा. माने शक्ती लान्स्केप आँ, जना कुनो गीत मद्वनिक दूर्गास्थान में गावल जाएत अची तो कुनो कोलक भद्र काली में वा मंग्रोनिक बूडि माइक प्राँगन में इगीत मितलाक भुगलाक जीवन्त नक्षा जे थी कमाला आचे उ नोटा विशिष्ट गीट के लिपिबद स्यो कलन्या चे आ औही नोटा गीट में महाकवी विद्यापती आ चंदा जाग रचनाक संच्संग, आ नाम पुरुखाख रचल पारमपरि गीट स्यो शामिल अचे एक कर मानी इजि लोक परमपरा में शास्त्री आम मोक्खिक दुन्नुदारा एक संब है तच्छे. एक दम सही बात. मुदा यते हम एक ता गमभीर संकत दिस द्यान लिबा चाभ. कहूना. जगन आहा कोनो जीवित मोक्खिक गीप के एक ता पन्नापर लिखिक भान दी देच्छी, तो की उकर स्वबहावेक आत्मा नहीं मरजाईत अच्छे. आहाग प्रष्ट बहुत तार्किक अच्छे. मैंने, इत एहन भेल जना कुन न्रित्त करे नर्तिकिक फोटो की चीची लेब. आहा उकर शारीरिक मुद्रात कैद कलेब. मुदा उकर लैए, संगीत, अग्गती उही इस छिर चित्र से हमेशा कले लेए गाएब ब हो जाएद. इआब हि लेक्हा गारक सब सब पेग विदम्मना आची आहाज नर्टकीक उप्मा देलूं उगडम सती का ची आजगन कुनो जीवित गीट पनापर अवेत ची तो अकर सामूइक उर्जा और उईश्णक बाव मर जाए तची तफेर एकर समादान की आची देखो, बेसी पहंक संकत इए ची जे आहा औो फोटो नहीं किचबम, तब हविष्षेक पीडी के इहो नहीं जनतब, जे अट खेहिो कुनो नरतकी निर्त सो हो कनक चेल. औहो, इट बहुत गम्हेर गब अची. अग, जा हिर्दे नारायन जा एक रा लिपी बद्ध नहीं करते, तई भविष्षेक लेल हमेशाक लेल मिता जाएत. इआमुर्त सांस्क्रतिक भीरासत के बचाईवाक एक ता अनन्तिम प्रयास ची. इबहुत मार्मेक अची. तई यदी हम सब एह समपुन विमर्ष्ख के समेट्वा में आवी तई एस पष्ट होई तखछी जे हित नात जा आह्र्देना रायान जाजका सादھक जे मुख्यदारा का साहित्टिक पूरस्कार वं मन्च्छे दूर चतिन अज़े आगे ता चाईट बाग्चाग पक्लिख्षा नहीं के लेनी अगे प्वेस्बूक येजरनल आमाव्खिक सन्रक्षन के माद्दियम से अपन काईच के लेनी येजरनल आमाव्खिक सन्रक्षन के माद्दियम से अपन काईच के लेनी ये हमरा लोक्निकन ये सिक्बाएत अची जे साहित टिक असली जीवन औईई सन्स्तागत भववे भवन से बाहर गांके माटी आ लोका किस्म्रती में बसेट अची सही कहल हूँ इतिहास किछु नहीं मात्र सन्रक्षित इस्म्रती के दिल गयल एक ता नाम अची तः आई काल के सुचनाक बाड में जदे हर सेक्ट रहारो पोस्ट अब विट्टियो आईब रहल अच्छी, हम्रा लोकनी के सुचना चाही, जे हम सब आपन पुर्खा किस्म्रती के कोना सन रक्षित कराज़ ची. अग, कि हम सब आपन दादी नानी कदीत रेकोड कर रहल ची? ये एक ता एहन दाइत तो या ची, जे हर नागरिक के निभायाक चाही. साहित निरमान केवल अकादमिक लोकनी काजना थेक. बिल्कुल. आएते से हमरा दिमाग मेक ता विचार अबएत ची, जेक्रा पर हम चाहाप जिस्रोता लुकने एकान्त में सुच्तें की विचारा चीो? जब साहेत्ते आ एतिहास वास्तो में एक ता समानन्तर प्रक्रीया थिक तक की एक हसार वर्ष कि बाद आई के हम्रा सबक एजे दिजितल पदचिन्ना अची जेना हितनाद जाक फेस्बुक पोस्ट या मोबाईल में रिकोड कलल गेल रिदे नार आईन जाक गीत, औही युग के लेल कोनो पवित्र ग्रन्त मानल जाएत. बाप्रे, यी तो बहुत गंभीर प्रष्नाची. जखनम सब श्रूवात स्तापित इतिहासक काचक बक्सा से केने रही तस शोची जिकी एक दिन हमर आवाक इदिजिटल फुल्टर उही बक्सा से भेशी कीमती सिद्ध नहीं होएत इएक ता ऐहन प्रष्न ची जब है पर सब के सोचबाक चाही इग्दम सुच्बाक चाही अईकेर ही विस्त्रत्विमर्ष में बस अप्टवे

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