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- 0:00–0:07नमशकार, साहित्यक दुन्या में कखनो काल किछ एहन भोजाएच छेग, जे एक दम से इतिहास रच दे छेग.
- 0:07–0:12आई हम्रा सब एक ता एहन एतिहासिक पोती पर चर्चा करब, सहस्रा बाडनी.
- 0:12–0:17इक उनो आम पोती नै, बलकी मेठली भाशाक सरव प्रधम ग्राफिक अपन्याज थेक.
- 0:17–0:24सोचु तनी, इक केवल इक ता पोती नै चे, बलकी चित्र आग कताख एक ता एहन गजजब का संगम अचे,
- 0:24–0:29तो आउ सीथा एई में प्रवेश करी, अंतरिखष में औरएत इधूम के तु देखी का,
- 0:29–0:33एक ता महाकाभेसन विशाल अग गंबीर विशेक बोध बहुर आची.
- 0:33–0:37नहीं, जे ना इधूम के तु एक अनन्त यात्रा पर आची,
- 0:37–0:39गंबीर विशेक बोद भुर अलाची.
- 0:39–0:43नहीं, जे ना इदूम के तु एक ता अनन्त यात्रा पर अची,
- 0:43–0:47तीक तहनाई कता से हो, काल अ समय का एक ता पयग यात्रा फी.
- 0:47–0:52इस पष्ट को अलाची, जे हमरा सब कुनो चोट-मुट किस्सा नहीं,
- 0:52–0:58बलकी जीवन अ ब्रम्म्मान्द का विशाल्ता सजुडल एक ते पुरा का पुरा गाथा देखार रहा लखची.
- 0:58–1:04ता हम्रा संगे चलू एक ता यात्रा पर, सोजे 1850 इश्वि तरी,
- 1:04–1:10इखोनो सामान्ने परीचर्चा नही थेक, बलकी मैठली साहित्यक इपहल चित्र कता,
- 1:10–1:16अब दिना कोनोदेरी के आई आतिहासिक काल कहन्द के यात्रा प्रारम्ब करी आदेखी जे ओजमै असल में के तक विलक्षन चल.
- 1:17–1:20खन्द चारी बदलाइत समय में बाल्यकाल.
- 1:20–1:25अदेखी जे उसमय असल में के तक विलक्षन चल
- 1:25–1:29कंड चारी बदलाइत समय में बाल्यकाल
- 1:29–1:34आब देखी मुख्धे पात्र कलित कजीवन कष्वर्वाती चरन
- 1:34–1:38औहे समय से शुरू होई तचे जखन दूनिया बहुत थेजी सबडल रहल चल
- 1:38–1:46खलित कजन्म सन 1885 इश्वी में भेल ये ओजे वर्ष्च्चल जखन कुँग्रेस पार्टी का इस्थापना भेल्चल.
- 1:46–1:51आब एकोनो राजनेतिक बात नहीं बस वमै का एक ता सतीक पैमाना थे.
- 1:51–2:21तकर बाद, उनीस्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्
- 2:21–2:26तो बज्चा आपन चारु का तक दूईया के बुज्बाक प्रयास करहला ची, बडनीक लाग अच्ध.
- 2:26–2:30आए एज आच्छी यी बहुत नीक जका इस पस्त करहीत आची,
- 2:30–2:34जे कोना कली तक जीवन में सिक्षाक दूई गृद भिन्न स्वरूप चल,
- 2:34–2:38अप चारिक अंगरेजी सिक्षा, जटे दिख्षान् समारोग तोपी आगगाण अची
- 2:38–2:40इते प्राचीन माटिक सुगान्द आनवीन अपनिवेषिक्षा पद्दती कजजब मिलन बहरा हलच
- 2:40–2:42खंड आद, परमपरा, विवा, अकारे चित्र
- 2:42–2:47अप्चारिक अंग्रेजी सिक्षा जटे दिख्षान समारोग तोपी आगाण आची
- 2:47–2:53इते प्राचीन माटिक सुगान्द आ नवीन अप्निवेशिक सिक्षा पद्दती कजब मिलन बहरा हलच
- 2:53–2:57खंद आप परमपरा विवा आकारे छित्र
- 2:57–3:02बाल्या कालक खेल कुद्स आगा बडि के आपकली तक वैस्क जीवन पर आईवी.
- 3:02–3:05इजे उदारन अची अट्यंत उच्सा वर्दख छी.
- 3:05–3:12सबहागा चीक लेल एक अप्चारिक आमन्त्रन जे मेतली वन्सक प्राचीन जडी के सुरक्षित रखषे तचे.
- 3:12–3:16सबागा ची, मित्लाक उ पवित्र आ एतियासिक इस्तल,
- 3:16–3:19जते विवाहक लेल सिद्धान तक मिलान होई तची.
- 3:19–3:20इकोन आम जगग न नहीं,
- 3:20–3:25बलकी मेत्री समाजक वन्शावली अ परम्पराक उ एतियासिक द्रोहर थेक,
- 3:25–3:29जकर गेराई एह कताक अत्यंत महत्वपुडन हैसा जी
- 3:29–3:33इपारमपर इक तिरहुता लिपेक पत्र कोनो सदारन पन्ना न थेक
- 3:33–3:39इए ही चेतरक सम्रिद भाशिक अस्सान्स्क्रतिक विरासचतक एक दम सक्षात प्रमान थेक
- 3:39–3:52यही तरक पत्र, जहाहांपर भोज पत्र, वब पुरान पन्ना का अबास अच्छे, अट्तिर हुतलिपेक जे यसुन्दर उप्योग अच्छे, इग कता के अपन माटी के संगेराई से जोड़द अच्छे, अई ही कालक प्रमानिक्ता के स्थापित कर अच्छी.
- 3:52–4:03मेठली विवाहक रंग रूपत आहा जैनेते हूईवा, विवाहक रीटी रिवाज, बाजा गाजा, चाता, आप बर्याती के बहुट्च्मता साएति चित्रित कैल गले चे.
- 4:03–4:09इवही कालक सांसक्रतिक उच्सव, वेश भूशा, आओ लासक सजी उच्त्रन थिक.
- 4:09–4:15एक ता पात्रक मुख्मुद्रा उही समेख विवाजक उच्साहा के स्पस्थ रूपे प्रगट कर राचे.
- 4:16–4:21विवा बहुगेल और आप जीवनक वास्तविक संगर्ष आदाइत्व शूरू।
- 4:21–4:30ख़ित जमींदारी वेवस्त्ता अतत्कालीं ब्रितिष अपनी वेशिक प्रशासनक भीच अपन करीर बनेवाक लेल कतिहार में काज कर रहल चला.
- 4:30–4:38इई अद अर चल जखन नव वेवस्ता के समजनाई अव वसूली जहन जटल काज करब एक ता पैग चुनाती चल.
- 4:38–4:43उही तामक भवनक शेली, उही प्रशासनिक माहल के बदनीक सदेखावे तची.
- 4:43–4:48खंड तेरह, प्रक्रती और आप दास संगर्षह
- 4:48–4:54आब एक ता, जीवनक उही कदोर आमार मिक सत्य दिश मुडी रहल ची,
- 4:54–4:58जटै वि मनुक कन्यंत्रन कोनो काज नहीं करे तची.
- 4:58–5:05भीस्वे शताब्दिक प्रारंबेग भारत्मे जीवन बहुत धद्धरी प्रक्रतिक अनिष्छत शक्ती सब पर निरभर चल.
- 5:05–5:13कदोर वास्विक्ता, विनाशकारी प्रक्रतिक आपदा आ अनिष्छत वातावरन इस चब जीवन के हर पल प्रभावित करे चल.
- 5:13–5:19इई ता एहन समाइचल, जदे प्रक्रिती सा संगर्ष कैर का अपन अस्तित्व बचाईनाई,
- 5:19–5:22जीवनक एक ता बहुत पैग आ अनेवार येश्साचल.
- 5:22–5:25आब एताए जि सवस रोचक बातची,
- 5:25–5:29ओ ई जे ई दिख्हाू कहु नहीं का एक देजोड नमूना आचे.
- 5:29–5:38पर्वार उन्नीस्छु चौँटीस का उई भ्यानक महाबूकंप्सद बच्वाक लेल एक ते चुट्सं टीन वाफुसक चापरतर आस्रे लेप दिखल जासके तची.
- 5:38–5:43इद्रिश्ष बिना कुनो पैग सम्वादक उईई ख्फनाक च्चन के जीवन्त कोदे तची.
- 5:43–5:47जखन दर्ती दोली रहल चल, आच्छारू का तबाही मचल चल.
- 5:47–5:51मुदा प्राकिर्तिक प्रकोप खाली भूकंप दरीत ने चल,
- 5:51–5:58अस्तानिय नदी, जना भलान आखमला का अशान्त और विनाशकारी रुप के एते दर्षाल गेलच.
- 5:58–6:12नदिक इब हयानक रूप, उकर तेस्दार आ उही से हवेवाला कतान, समपुन समवदाई कप पर्यावरन आ जीवन पर जे व्यापक प्रभाव डाले चल, तक्रा इद्रिश्य बहुत मार्मिकता से सपपष्ट करे तची.
- 6:12–6:18बूजु, जे आईक शेत्र कल लोकक जीवन नदीक रद्र रूपक संग कोना बान्दल चल.
- 6:18–6:23खंड सत्रा, विज्यान, अंद्विष्वास आज्छती
- 6:23–6:30ख़िए जे महत्वोपुन बात आची उ इजे दुई भिन्न विचार्दाराका भीचिक तक्राव के बहुत सचक्त रूपे देखा वल गे लेची.
- 6:30–6:36एक दिस नर्मुद आम उमबत्ती आची जे पुरान अंद्विष्वास अ रहस्सिमएई अनुश्ठानक प्रती कची,
- 6:36–6:40अगर जे कदोर परिनाम उही सम्यक लोग सहिट चला उसूनी का मन बारी भाजाई तची.
- 6:40–6:43जिब पुरान अंदविष्वास अ रहेस सिमएई अनुश्ठानक प्रती कची
- 6:43–6:47अ दूसर दिस माइक्रुस्कोब गलोब आप फोती एची
- 6:47–6:49जे आदूनिक विग्यानक उदैके दर्षावेट ची
- 6:49–6:54कली तक जीवनक बादक वर्ष्ट एही नव्विचार्दाराक का संगर्ष्ख साखषी रहल.
- 6:54–6:56चिकिट्सा सूविदाक गोर अबहाव,
- 6:56–7:02अगर जे कठोर परिनाम उही समयक लोग सहिट चला उस्विनी का मन बारी बहुजाई तची.
- 7:02–7:09आजा प्लेग सन भीमारी सां परवार में जे बच्चक दुखद म्रित्यु भेल वो समपुर्द परवार के तोडग कर अग्धे लक.
- 7:09–7:16इओ दोर चल जते विग्यान विखसित भुरहल चल, मुददूर दराज के गाँ में चिकिच्सा खोर अबहाव चल.
- 7:16–7:21आपन प्र्यजन के गमवेख एक ता अट्यन्त दुख़ सत्ते चल
- 7:21–7:26कताक अन्त देस नेवृर असाप का इ एक ता प्रतिकात्मक द्रिष्य अची
- 7:26–7:31इजीवन्क निरंतर संगर्ष आ अस्तित बच्वाख लडाई के दर्षावे तची
- 7:31–7:36जेना नेवुर अ साप में सबहाविक तनाव अजीवन मरनक संगर्स होई तची,
- 7:36–7:42तहीना कलितक समपून जीवन में से हो समे समे पर संगर्ष अविकासक इचक्र चलईत रहल.
- 7:42–7:46इद्रिष्य प्रक्रती अजीवन कोही शाश्वत सत्यक छिनहित करे तची,
- 7:46–8:16अदियाँ देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देख
- 8:16–8:22अगा और अद्धियन करबाक लेल यी अटिहासिक पोत्फी निष्चित रूप से पडलजबाक चाही. तन्नेवाद
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नमशकार, साहित्यक दुन्या में कखनो काल किछ एहन भोजाएच छेग, जे एक दम से इतिहास रच दे छेग. आई हम्रा सब एक ता एहन एतिहासिक पोती पर चर्चा करब, सहस्रा बाडनी. इक उनो आम पोती नै, बलकी मेठली भाशाक सरव प्रधम ग्राफिक अपन्याज थेक. सोचु तनी, इक केवल इक ता पोती नै चे, बलकी चित्र आग कताख एक ता एहन गजजब का संगम अचे, तो आउ सीथा एई में प्रवेश करी, अंतरिखष में औरएत इधूम के तु देखी का, एक ता महाकाभेसन विशाल अग गंबीर विशेक बोध बहुर आची. नहीं, जे ना इधूम के तु एक अनन्त यात्रा पर आची, गंबीर विशेक बोद भुर अलाची. नहीं, जे ना इदूम के तु एक ता अनन्त यात्रा पर अची, तीक तहनाई कता से हो, काल अ समय का एक ता पयग यात्रा फी. इस पष्ट को अलाची, जे हमरा सब कुनो चोट-मुट किस्सा नहीं, बलकी जीवन अ ब्रम्म्मान्द का विशाल्ता सजुडल एक ते पुरा का पुरा गाथा देखार रहा लखची. ता हम्रा संगे चलू एक ता यात्रा पर, सोजे 1850 इश्वि तरी, इखोनो सामान्ने परीचर्चा नही थेक, बलकी मैठली साहित्यक इपहल चित्र कता, अब दिना कोनोदेरी के आई आतिहासिक काल कहन्द के यात्रा प्रारम्ब करी आदेखी जे ओजमै असल में के तक विलक्षन चल. खन्द चारी बदलाइत समय में बाल्यकाल. अदेखी जे उसमय असल में के तक विलक्षन चल कंड चारी बदलाइत समय में बाल्यकाल आब देखी मुख्धे पात्र कलित कजीवन कष्वर्वाती चरन औहे समय से शुरू होई तचे जखन दूनिया बहुत थेजी सबडल रहल चल खलित कजन्म सन 1885 इश्वी में भेल ये ओजे वर्ष्च्चल जखन कुँग्रेस पार्टी का इस्थापना भेल्चल. आब एकोनो राजनेतिक बात नहीं बस वमै का एक ता सतीक पैमाना थे. तकर बाद, उनीस्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ्छ् तो बज्चा आपन चारु का तक दूईया के बुज्बाक प्रयास करहला ची, बडनीक लाग अच्ध. आए एज आच्छी यी बहुत नीक जका इस पस्त करहीत आची, जे कोना कली तक जीवन में सिक्षाक दूई गृद भिन्न स्वरूप चल, अप चारिक अंगरेजी सिक्षा, जटे दिख्षान् समारोग तोपी आगगाण अची इते प्राचीन माटिक सुगान्द आनवीन अपनिवेषिक्षा पद्दती कजजब मिलन बहरा हलच खंड आद, परमपरा, विवा, अकारे चित्र अप्चारिक अंग्रेजी सिक्षा जटे दिख्षान समारोग तोपी आगाण आची इते प्राचीन माटिक सुगान्द आ नवीन अप्निवेशिक सिक्षा पद्दती कजब मिलन बहरा हलच खंद आप परमपरा विवा आकारे छित्र बाल्या कालक खेल कुद्स आगा बडि के आपकली तक वैस्क जीवन पर आईवी. इजे उदारन अची अट्यंत उच्सा वर्दख छी. सबहागा चीक लेल एक अप्चारिक आमन्त्रन जे मेतली वन्सक प्राचीन जडी के सुरक्षित रखषे तचे. सबागा ची, मित्लाक उ पवित्र आ एतियासिक इस्तल, जते विवाहक लेल सिद्धान तक मिलान होई तची. इकोन आम जगग न नहीं, बलकी मेत्री समाजक वन्शावली अ परम्पराक उ एतियासिक द्रोहर थेक, जकर गेराई एह कताक अत्यंत महत्वपुडन हैसा जी इपारमपर इक तिरहुता लिपेक पत्र कोनो सदारन पन्ना न थेक इए ही चेतरक सम्रिद भाशिक अस्सान्स्क्रतिक विरासचतक एक दम सक्षात प्रमान थेक यही तरक पत्र, जहाहांपर भोज पत्र, वब पुरान पन्ना का अबास अच्छे, अट्तिर हुतलिपेक जे यसुन्दर उप्योग अच्छे, इग कता के अपन माटी के संगेराई से जोड़द अच्छे, अई ही कालक प्रमानिक्ता के स्थापित कर अच्छी. मेठली विवाहक रंग रूपत आहा जैनेते हूईवा, विवाहक रीटी रिवाज, बाजा गाजा, चाता, आप बर्याती के बहुट्च्मता साएति चित्रित कैल गले चे. इवही कालक सांसक्रतिक उच्सव, वेश भूशा, आओ लासक सजी उच्त्रन थिक. एक ता पात्रक मुख्मुद्रा उही समेख विवाजक उच्साहा के स्पस्थ रूपे प्रगट कर राचे. विवा बहुगेल और आप जीवनक वास्तविक संगर्ष आदाइत्व शूरू। ख़ित जमींदारी वेवस्त्ता अतत्कालीं ब्रितिष अपनी वेशिक प्रशासनक भीच अपन करीर बनेवाक लेल कतिहार में काज कर रहल चला. इई अद अर चल जखन नव वेवस्ता के समजनाई अव वसूली जहन जटल काज करब एक ता पैग चुनाती चल. उही तामक भवनक शेली, उही प्रशासनिक माहल के बदनीक सदेखावे तची. खंड तेरह, प्रक्रती और आप दास संगर्षह आब एक ता, जीवनक उही कदोर आमार मिक सत्य दिश मुडी रहल ची, जटै वि मनुक कन्यंत्रन कोनो काज नहीं करे तची. भीस्वे शताब्दिक प्रारंबेग भारत्मे जीवन बहुत धद्धरी प्रक्रतिक अनिष्छत शक्ती सब पर निरभर चल. कदोर वास्विक्ता, विनाशकारी प्रक्रतिक आपदा आ अनिष्छत वातावरन इस चब जीवन के हर पल प्रभावित करे चल. इई ता एहन समाइचल, जदे प्रक्रिती सा संगर्ष कैर का अपन अस्तित्व बचाईनाई, जीवनक एक ता बहुत पैग आ अनेवार येश्साचल. आब एताए जि सवस रोचक बातची, ओ ई जे ई दिख्हाू कहु नहीं का एक देजोड नमूना आचे. पर्वार उन्नीस्छु चौँटीस का उई भ्यानक महाबूकंप्सद बच्वाक लेल एक ते चुट्सं टीन वाफुसक चापरतर आस्रे लेप दिखल जासके तची. इद्रिश्ष बिना कुनो पैग सम्वादक उईई ख्फनाक च्चन के जीवन्त कोदे तची. जखन दर्ती दोली रहल चल, आच्छारू का तबाही मचल चल. मुदा प्राकिर्तिक प्रकोप खाली भूकंप दरीत ने चल, अस्तानिय नदी, जना भलान आखमला का अशान्त और विनाशकारी रुप के एते दर्षाल गेलच. नदिक इब हयानक रूप, उकर तेस्दार आ उही से हवेवाला कतान, समपुन समवदाई कप पर्यावरन आ जीवन पर जे व्यापक प्रभाव डाले चल, तक्रा इद्रिश्य बहुत मार्मिकता से सपपष्ट करे तची. बूजु, जे आईक शेत्र कल लोकक जीवन नदीक रद्र रूपक संग कोना बान्दल चल. खंड सत्रा, विज्यान, अंद्विष्वास आज्छती ख़िए जे महत्वोपुन बात आची उ इजे दुई भिन्न विचार्दाराका भीचिक तक्राव के बहुत सचक्त रूपे देखा वल गे लेची. एक दिस नर्मुद आम उमबत्ती आची जे पुरान अंद्विष्वास अ रहस्सिमएई अनुश्ठानक प्रती कची, अगर जे कदोर परिनाम उही सम्यक लोग सहिट चला उसूनी का मन बारी भाजाई तची. जिब पुरान अंदविष्वास अ रहेस सिमएई अनुश्ठानक प्रती कची अ दूसर दिस माइक्रुस्कोब गलोब आप फोती एची जे आदूनिक विग्यानक उदैके दर्षावेट ची कली तक जीवनक बादक वर्ष्ट एही नव्विचार्दाराक का संगर्ष्ख साखषी रहल. चिकिट्सा सूविदाक गोर अबहाव, अगर जे कठोर परिनाम उही समयक लोग सहिट चला उस्विनी का मन बारी बहुजाई तची. आजा प्लेग सन भीमारी सां परवार में जे बच्चक दुखद म्रित्यु भेल वो समपुर्द परवार के तोडग कर अग्धे लक. इओ दोर चल जते विग्यान विखसित भुरहल चल, मुददूर दराज के गाँ में चिकिच्सा खोर अबहाव चल. आपन प्र्यजन के गमवेख एक ता अट्यन्त दुख़ सत्ते चल कताक अन्त देस नेवृर असाप का इ एक ता प्रतिकात्मक द्रिष्य अची इजीवन्क निरंतर संगर्ष आ अस्तित बच्वाख लडाई के दर्षावे तची जेना नेवुर अ साप में सबहाविक तनाव अजीवन मरनक संगर्स होई तची, तहीना कलितक समपून जीवन में से हो समे समे पर संगर्ष अविकासक इचक्र चलईत रहल. इद्रिष्य प्रक्रती अजीवन कोही शाश्वत सत्यक छिनहित करे तची, अदियाँ देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देखानादा देख अगा और अद्धियन करबाक लेल यी अटिहासिक पोत्फी निष्चित रूप से पडलजबाक चाही. तन्नेवाद