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SADEHA 31 परम्पराक_खण्डहर_आ_आधुनिकताक_नव_पिंजरा.m4a
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- 0:00–0:09वल्क्म तु दिबेट यी बादिक विमर्श आ बहु आयामी द्रुष्टि कोनक विषेश मंच्पर आहा सब क स्वागता ची
- 0:10–0:17मने जकन कुन पुरान खंदर भराल गरक देवाल खसेच्ट्चे, ता लोकक प्रतिक्रिया बध भिन होएच्ट्चे,
- 0:17–0:22किछु लोग उही खषल देवालक इंटक गर्दा के देखी का
- 0:22–0:26खषैत अशी अशोचे तशी जे नीक भेल
- 0:26–0:30इगुटन भरल बंद देवाल खषल अप कम से कम भाहर का ताजी हवा
- 0:30–0:32आए जो तभी तरावत
- 0:32–0:35मुदा उते किछु लोग एनो हो इच्छती
- 0:35–0:40जे उही खसल इंटक देरी पर भैस का नोर भाबएच्छती
- 0:40–0:44मने हुंका लेल उ देवाल मात्र इंट माटिक कोनो बन्दन नाई
- 0:44–0:46बलकी एक ता सुरक्षा कवछ्षल
- 0:46–0:51जे बाहरक आनधी, तूफान, रोद, अबरक्षा हुंका बचेनिच्छल
- 0:51–0:52बलकोल
- 0:52–0:57आब बन्दन अस्व्रक्षा का भीचक एजे महीन रेखा आची
- 0:57–0:59इं मनो विग्यानिक द्वंद बद्जती लाची
- 1:00–1:02ता आई हमर विमर्ष्ख किंदर में
- 1:02–1:04तीक एही द्वंद वक्छत्रन करेद
- 1:04–1:06दोक्टर कामिनी कमाएनी जीग
- 1:06–1:09अथ्यन्त मारमिक सहित्टिक क्रुती
- 1:09–1:11विदेह सदे एकती सची
- 1:11–1:13तिर ताकूपर गवोर करी
- 1:13–1:16ता एक ता बडज्वलन्त प्रश्ना हम्रा सब के सुजा बैतचे
- 1:16–1:18आव प्रश्ना ची
- 1:18–1:20जे की एक दासब
- 1:20–1:24परमपरिक, मेठिल, ग्रामीट, समाजग, पित्रि सतात्मक, बन्धन्स,
- 1:24–1:26मुक्तिक अनिवारेता के दर सावेता ची
- 1:26–1:27वाआ
- 1:27–1:30अजूनिक्ता और शहरी करनक अंद दोड में
- 1:30–1:34गमारहल मान्वीय सम्वेदना अ समुदाएक
- 1:34–1:36पतनक त्रासदी के चित्रित करेता ची
- 1:36–1:37इक्दम
- 1:37–1:39ता हमरी सपष्ट माता चे
- 1:39–1:44जे इ़र्ष्ना सब परमपरिक समाजक रूदिवादी आमानवीः
- 1:44–1:48आई शोशन कारी विवस्थक एक तेख्षन आलोचना जे
- 1:48–1:51विशेश रूप सब महिला सब के संदर्भ मैं
- 1:51–1:56इग्था सब इस पष्ट करे तच्छे जे उ पुरान दिवाल कहसव कते ख़रूरी चल
- 1:56–2:00के एक तवो दिवाल सुरक्षान ही बलकी एक तप पिंज राच्धल.
- 2:00–2:02आप आप मेंकर अगत दोसर द्रष्टीस देखाई ची.
- 2:02–2:06हम माने चीजे एक तफ सव वास्तम आदूनिक्ता खोख्लापन,
- 2:06–2:09नव दनाद दे वर्गक स्वार्त,
- 2:09–2:16आप पारमपर एक पारिवारिक समबन्दक, जे रदे विदारक पतन भरहल आची, तक अगटा शोक गीत आचे.
- 2:16–2:24आचा, इणवका युगक समवेदन हीनता पर कोल गेल विला पची, जक्रा हम विकास के नाम दोरोहल ची.
- 2:24–2:31अम भूजी रहल ची जाहा एना की एक सोचे ची, मुदा हमरा एक ता विन्न द्रिष्टी कोंड रख्वाक अनुमती दिया.
- 2:31–2:39चलू, सब सब फिले गामक उही आंगन पर बात करी, जक्रा हम सब भूजलिये समुदायक प्रतिक मानी कबड्द महिमा मन्लित करे ची.
- 2:39–2:40अगा कोई कोई?
- 2:40–2:42कोन दामर पर केकर खोता
- 2:42–2:44अगुईर ताकुजका कता सब में
- 2:44–2:47गामक बेटकीक छे चित्रन अची
- 2:47–2:49अख्रा गेहराई सब इस लेषित करूँ
- 2:49–2:52अख्रा डॉख सुख भाधवाक मंच कही सके ची
- 2:52–2:54मुदा लेक हक अथे जे मनोविग्यानिक
- 2:54–2:57अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन
- 2:57–2:59अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन
- 2:59–3:01अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन
- 3:01–3:03अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन
- 3:03–3:05अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन
- 3:05–3:10अगा गवर करुज ये उही बैट्खी में इस्ट्री सब की कर अच्छतीन?
- 3:10–3:15अव मात्र पर निन्दा विद्वा और निस्ठाहे लोकक उबहास कर अच्छतीन?
- 3:15–3:19इस्ट्री सब जे स्वाम उही पित्री सट्टाक शिकार अच्छतीन?
- 3:19–3:23उ आपस में एक दूसरक परहरी बनी का बैसल चतीन.
- 3:23–3:25मुदा उ समाजक अपन तरीका चल.
- 3:25–3:29जगन समाज कोनो वर्ग के वास्तविक सत्ता न नहीं देट जाएक,
- 3:29–3:34तवो वर्ग अपन कुन्ता तूसर कमजोर लोक पर निकाले तची.
- 3:34–3:42गुईर ताकू में चृटकी काखी जकां बोल पुरान लोक परमपराके नाम पर कुन्ता आए आन्द विश्वास के पोषे चती
- 3:42–3:48एक ता छोट बची के गुईर ताकू कहब अप्शकुन मानी के उक्रा गर्याबे लगे चती
- 3:48–3:50आ, इट अची
- 3:50–3:59इग्ता एहन विवस्ता आची जटै परमपराक दर दिखाखे लोकक मान्सिक विकास के रोक देल जाईत आची
- 3:59–4:02इग्ता प्रभाव शाली तर्क आची
- 4:02–4:08मुदाकी आहा इविचार कलोवा जे ओविवस्ताक विकल्प के रूप मेजे आदूनिक्ता आएल आची
- 4:08–4:09उ कतिक क्रूर थी?
- 4:09–4:10क्रूर? कोना?
- 4:10–4:16आप देखो, हम इमानत ची जे गामक बैटकी में परनिन्दाचल, कुन्ताचल,
- 4:16–4:21गामक उही पारमपर एक समाज के आहा एक ता प्रशर कुकर जका मानी सकत ची.
- 4:21–4:24उई में बद्द्ताब चल, सीटी बजेच्छल, हला हुएच्छल,
- 4:24–4:28मुदा कोन दामर पर कताग दोसर पाखी देखो
- 4:28–4:31उते जे नवका एट समेंटक गर बने तची
- 4:31–4:33उकी लाका आवी रहल अची
- 4:33–4:37उनवका गर विभाजन आए एच्षक प्रतीग बनी गल अची
- 4:37–4:40पश्चिम दिसाग भाट बन्द कर दिल जाए तची
- 4:40–4:42अहा, मुदा
- 4:42–4:53इणवका शहरी मान्सिक्ता एक ता माइक्रो वेवजका आची, बहार से एक दम्शान्त, कोनो हला नही, मुदा भीतर से इलोकक समवेदना के सुखाई रहा ला चे.
- 4:53–5:05मुदर उको, उ इटक देवाल इस्त्री सब के उही सामोए कुन्ता से एक ता नीजी स्पेस माने एक ता प्राईवेसी तदध आईता चे, मुदा उह नीजी स्पेस का कीमत की आचे,
- 5:05–5:08शेहरी करन उही स्ट्री सब के सुतन्तर नहीं केला चे
- 5:08–5:11बलकी हुनका नितानत एकाई की बने दलक अचे
- 5:11–5:13गाम को उही प्रशर कूकर में
- 5:13–5:16कम से कम जकन कोनो विपत्ती आवे चल
- 5:16–5:19तो ही कुंटित स्ट्री सट्री सब का हाथ
- 5:19–5:22ये दो सर के नोर पूच्वा लेल उठीजाएच्छल.
- 5:22–5:25आब नवका गरक बंद दर्वाज्जक पाचा,
- 5:25–5:29लोक अपन पडोसीग दुख से भेसी अपन तीवी अ पैसासी प्रेम करे तचे.
- 5:29–5:34इजे व्यक्तिवाद अच्छे उ मान्विय करूना के हत्या करहला चे.
- 5:34–5:39जे स्रोता गाम से शहर आएप के बसल चती उई बात नीगजगा का बुजगे थेदा
- 5:39–5:43जे गाम का उग करोना कितेख शर्टो सबसे बान्दल होई तची
- 5:43–5:47की हम उई साजापन के आदर्ष मानी सके ची
- 5:47–5:50जत ता इब भान्पूर वाली जका इस्त्रिक जीवन नष्ट कर देल जाईता चे
- 5:50–5:53उआ नष्ट नहीं उईक ता संगर्ष आचे
- 5:53–5:58अब माट्टिक मुरुत पराभी जे आही द्वंदुक सबसे सशक्त उदारन आची
- 5:58–6:00आहा गामक समदायक गब करे ची
- 6:00–6:03मुदा भान्पूर वाली संगे अते की भेल?
- 6:03–6:06दहेज अप पुत्त्रक लाल्सा कारने
- 6:06–6:08सासुर में कदं कदंपप्रताडित केल के लिये
- 6:09–6:11अज़ सब से क्रूर विदंवना तकन होईता ची
- 6:11–6:15जकन तुंटून भहीया उक्रा संथ जोर जबरदस्ती करबाक प्रयास करे तची
- 6:30–6:34अगर बाद के जे कता है अख्राहा कीक नजर अंदास कर अल ची
- 6:34–6:37भानपृाली गाम से बाहर शहर आवाई च्छती
- 6:37–6:39अख्र जूटाक फैक्त्री कोले च्छती
- 6:39–6:41जमीन कीने च्छती
- 6:41–6:44आपन दंपर आपन जीवन थाड करी च्छती
- 6:44–6:46इकोनो चोटमोद बाद नहीं अच्छी
- 7:00–7:03पारमपरिक गाम कहीो नहीं दसकाई चल
- 7:03–7:05उनकर यात्रा सबश्त रूप से
- 7:05–7:07पारमपरिक बन्दन से मुक्ती के
- 7:07–7:09आम महला सशक्ती करनक
- 7:09–7:11एक ता महान प्रमाना ची
- 7:11–7:14जो उगामक उही सुरक्छित आगन में
- 7:14–7:17रही ता गुती गुती का मरजे थाई
- 7:17–7:27गामक समाज एक ता श्ट्च्ज्यकेट जका चल, जे कर काज मात्र हुनका बान्दी कर अखब चल, शहर हुनका लेल एक ता खुला मेदान बनल.
- 7:27–7:31छमा करव, मुदा हम एबाज सरवता नहीं मानेची.
- 7:31–7:32केक?
- 7:32–7:39ता इज़ी जी केक आहा भानपूर वाली के संगर्ष के पूजीवाद आदूनिक तक विजैं मानी रहल ची
- 7:39–7:44हम माने ची जो उस संगर्ष केलनी आए आर्थिक रोप से स्वतन्द्र भेली है
- 7:44–7:48मुदा दोक्तर कामिनी कामाईनी कहानी की अंथ की आची
- 7:48–8:01इव उते दरी में रुके ता ची, बहानपूर वाली जे फक्तरी चलोली हा, आपन भेटा वरून के एक दम आदूनिक शिक्चा देलनी, उ आदूनिक ता रुनक या संगे की के लक.
- 8:01–8:06त अ बेटा के पडा लिखा का डौक्तर बनोलनी? इप त रुनकर सफल ता ची.
- 8:06–8:13अग, इह उनकर सब सपैएक तरास दिया ची, के एक तव उही आदूनिक शिक्षाक प्रतिपल के भेल,
- 8:13–8:17जब भीटा के ओए खुन पसीना एक कै कर डोक्तर बनालनेन,
- 8:17–8:20उप मेटिकल का पड़ाए कै निहार वरून के करे तची?
- 8:20–8:23अब भूजी रहल ची आहा कते जा रहल ची
- 8:23–8:27उआदूनिक ताक अंद्खार मे इते एक स्वार्थी भूजाई तची
- 8:27–8:29जे समपती गिस्सा मागगग तची
- 8:29–8:33आआ अपन भीमार माए के बरखा में गर सब बाहर निकाले दे तची
- 8:33–8:36आहा एकर सामाजिक तन्तर के बुजो
- 8:36–8:42पारमपर एक समाज में व्रद्ध्डलोकक एक अंतर नहित मूले होए चल, उ परिवारक दूरी होए चला.
- 8:42–8:49मुदा अदूनिक शिक्षा अपूंजीवाद व्यक्तिके के खईल आर्थिक उप्पादक्तास नापे तची,
- 8:49–8:53वरुनक लेल उकर भीमार माए आप कोनो आस्ट नहीं
- 8:53–8:55बलकी एक ता लाईबिलिती बनी गेल चली
- 8:55–8:57इआदूनिक सोच का क्रूरता आची
- 8:57–9:02जते खूनक संबंद सोगे बलंस शीद परता होई तची
- 9:02–9:06मुदा देखु इच्सत्ति आची जे वरुनक विवावार क्रूर चल
- 9:06–9:09मुदा इवरुनक ज्यक्तिगत चारित्रिक पतन अची
- 9:09–9:13एक रा आहा समपुन आदूनिक्ता का दोश नहीं कही सकची
- 9:13–9:15इव्यक्तिगत पतन आची
- 9:15–9:18इआदूनिक्ता क स्वभाविक परिनाम आचे
- 9:18–9:21आप रतिकात्मक रूपसा कहानिक अंतिम द्रिष्च देखु
- 9:21–9:24अदूँ जक्रा लेक्खक बद्कुशलता सा गडने चिति
- 9:25–9:27भानपृर वालिक म्रित्त्य। कोना हो इच्चने
- 9:27–9:29आप, हीटर के करेंट सा?
- 9:29–9:34एक दम, उएक ता खराब आदूनेक हीटर का करेंट से मरी जाए चति
- 9:34–9:36इकोनो सामान ने दूगतना नहीं आच्छे
- 9:36–9:39ये एक ता गमभीर मेताफर आची
- 9:39–9:42आदूनिक यंत्र जे सुक सूविदा का प्रती का चे
- 9:42–9:44उही उनकर प्रान लोले लक
- 9:44–9:48आदूनिक ता वादी सोच अभहुतिक ठा का जे आग हूना
- 9:48–9:49अपन भेटा में लगिलने
- 9:49–9:51उही आग ही उनका भास्म कदे लक
- 9:51–9:57अहा जक्रा खुला मेटान कहलो उ मेटान वास्तव में एक ता निर्वात अचे
- 9:57–10:03गाँउक जाडी में काट चलजे हूंका गडल मुदा उते श्वास लेबाक लेल अक्सिजन ता चल
- 10:03–10:06शहर के उही निर्वात मेता हूंकर प्रान हे राए गेल
- 10:06–10:11यह यह एक ता रोचक बिन्दू है चे मुता हम एक रादोसा रूप मेराख हव.
- 10:11–10:12कहो.
- 10:12–10:16आहा रीटर बाला मेताफर के बद नीक जका पक्डे लो है ची,
- 10:16–10:20मुदा हम्रा लगगत ची आहा एकर कारनके गलत दिस्लजा रहा रहा लगछी.
- 10:20–10:27वरुनक भीत्रक स्वार्त, वही पित्र सत्तात्मक विषेशा दिकारक आदूनिक रूप आची,
- 10:27–10:34जते एक ता पुरुश मानेत ची, जे इस्त्री च्ष्पत्ती पर उकर जन्मसिद अदिकार आची.
- 10:34–10:37वरुनक स्वार्त परम्पराक दोशू चे
- 10:37–10:43वरुनक भीत्रक स्वार्त उही पित्र सतत्मक विषेशा दिकारक आदूनिक रूप आची
- 10:43–10:48जते एक्ता पूरुष माने तची जे इस्त्रीट संपती पर उकर जन्मसिध अदिकार आची
- 10:48–10:52बान्पुर वालिक म्रित्यो उही उपेख्षाक परनाम आचे
- 10:52–10:52अच्छा
- 10:52–10:54मुदा जहाँ कह आची
- 10:54–10:57जे आदूनिक शिक्चा अश्वर करुना के मारिदे तची
- 10:57–11:00तची विलायत वाली कन्या कता पर आचा की बिचार आची
- 11:00–11:03उते ता कहानी सर्वता विप्रे दिशाम जाएत ची
- 11:03–11:06उकता से हो गम त्रास्ती पोन नहीं आची
- 11:06–11:09मुदा उई में एक ता स्पस्त आसा आची
- 11:09–11:13विलायत वाली कन्या में चिरनजी भाबुग बेटा वरून
- 11:13–11:17लन्दनक एक नर्स, हीना वा सकीना सविवाग करे तची
- 11:17–11:22गामक अ पारमपरिक लोककलेल ये एक ता बहंकर सद्माचल
- 11:22–11:27जे बेटा अपन जाती, अपन दर्म, अपन देस सब बहर निकली का विवाख कल लक
- 11:27–11:29एक दम सद्माचल
- 11:29–11:32पारमपरिक दिष्टी कोन सता ये समपून पतन अची
- 11:32–11:36मुदा जक्हन उ विलायत वाली हीना आवे तची, तो की करे तची?
- 11:36–11:38उ सासुक सेवा करे तची?
- 11:38–11:42उही अक्सीजन मशीन सासुक प्रान बचे वे तची?
- 11:42–11:47आहाजे यंत्र के प्रान लेवा कहे चलहू, एते उ यंत्र प्रान रक्षक बनी जाई तची?
- 11:47–11:57इख ता सपष्ट रूपस इसिद करेता ची जी मानविय करूना आप प्रेम, कोनो परमपरा जाती या गोत्र का महताज नही आची.
- 11:57–12:04परमपरिक मेठल विवार्वेवस्ता का बाहर जेवासा एक ता नव, नीक अबेसी मानविय संबंद बनी सकेता ची.
- 12:04–12:07रहीना आदूनिक विष्वव्यापी नागरी का प्रतीक अची
- 12:07–12:07आप अगर आप प्रदीग आग्विश्वापी नागरी का प्रतीक अची
- 12:07–12:10अजी ब्याद्ती जे अकर ब्रत्तिः पुता हो आची
- 12:10–12:15आद ब्रति ब्रति कोनो गामक अनपार इस्त्री नहीं है आची
- 12:15–12:18अब भारती आची शिक्षित आची भीएड कैने आची
- 12:18–12:22आए एक्दम आदूनिक समाजक कतू आलोचना आची
- 12:22–12:24मुदाहा भार्ती के भिस्री रहल ची
- 12:24–12:27भार्ती, जो अकर भार्ती पूता हो आची
- 12:27–12:32आद, भार्ती, भार्ती कोनो गामक अनपार इस्त्री नहीं आची
- 12:32–12:35उ भार्ती आची, शिक्षित आची, भीएड कैने आची
- 12:35–12:37आए, एक दम आदूनिक आची
- 12:37–12:42अदूरा भूपाल मे रही रहल, उ आदूनिक शिक्षिद बेटी अपुतो,
- 12:42–12:45अपन बिमार सासुक सेवा करभा मे बार भुजे चती.
- 12:45–12:51अपन सासुक दम्मा अगध्याक बिमारी मे उ एक ता स्वार्ती दर्षक बनी जाएच छती.
- 12:51–13:21इते लेखा की देखावेई चाहचात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्�
- 13:21–13:26कताकारी देखर आल्चतीन, जे एक ता विदेशी अस्त्री, ही ना,
- 13:26–13:33जक्रा हमर महान भार्तिय परमपरा, अस्सोप प्तोख पदानुक्रमक कुनो गयान नहीं अची,
- 13:33–13:36उसासुक निस्वार्त सेवा करेत अची.
- 13:37–13:41एक रार्ती अची जे बार्ती अवरुन्जका का लोक,
- 13:41–13:46अदूनिक्ता अशिक्षक नाम पर जे नवका समाज गडिराल चितिन,
- 13:46–13:52औही में भार्तिय परिवार अपन मुल मानविय करूना द्गमा चुकल आची.
- 13:52–13:56रही नाक उपस्तितिये इप रमानित करेत आची,
- 13:56–14:01जे हमर आपन आदूनिक स्त्री पूरुश कतेक संवेदन हीन भोगे लाहा आची
- 14:01–14:08इखता आदूनिक ताक विजैन आई, बल की हमर आपन खोखला पनाक एक ता भयानक दर पना ची.
- 14:08–14:13हमरा माने पडद जे आहा की भीसलेशन, जे हीना कुपस्तिती,
- 14:13–14:18वास्त्तम में बार्तिक सम्वेदन हींता के उजागर करवाक लेल आची
- 14:18–14:20बद्गंभीर आव विचारनी आची
- 14:20–14:23इस सत्ते आची जे बार्तिय मद्दिवर्ग
- 14:23–14:27आदूनिक्ता क उप्योग मात्र आपन सुविदा लेल कर रहा आची
- 14:27–14:28बलकोल
- 14:28–14:31मुदा तए यो हमरा इस पस्ट करे दिया
- 14:31–14:35जे कामिनी जी कता सब में जे पारंपरिक जीवन के विसंगती सववची
- 14:35–14:40वो करा हम आदूनिकता कोट देखा कर नयोचित नहीं तरासा के ची
- 14:40–14:44गुईर ताकू में जना बचुदाए के बिना कोनो दोषक गर्याल जायता ची
- 14:44–14:50वा मादिक मुरूत में एक ता निर्दोश स्त्री पर चरित्र हींताक जे लान्चन लगाया जाई ता ची,
- 14:50–14:54उ ईप्रमानित करे ता ची जे उ समाज भीतर से सडी जुकल चल.
- 14:54–14:56रहा, उ सरल ता चल.
- 14:56–14:59उ ताईसर निकलेच एक दम अनिवार ये चल.
- 14:59–15:04अजगन आहा कोनो सरल वेवस्था के तोडी का नव वेवस्था बने वेची
- 15:04–15:07तसंक्रमड काल में किछ त्रासदी अवश्छे होई तची
- 15:07–15:12भान्पूर वालिग भेटाक स्वार्थ वा भार्तिक समवेदन हींता
- 15:12–15:15उही संक्रमड कालक कोल अट्रल दामेज भहुसचा कै तची
- 15:29–15:59अभी उद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्या�
- 15:59–16:07तो निंदनी आचे, मुदा जक्हनो आद्निक्ताक नाम पर मरी जाईता चे, तो आरो भेशी त्रासद आची.
- 16:08–16:12खियकता आजनिक्ता ता हमरा सब के भेशी जाग्रू का विवेकी बने वाक दावा कर रहे तची.
- 16:13–16:17कोन दामर पर केकर कोता, एकर जिवन्त उदाहरन आची.
- 16:17–16:19एकर जिवन्त उदाहरन आची
- 16:19–16:23जता एक ता दिवालक निरमाड दूई परिवारक भीचकर करूना के
- 16:23–16:25इट सिमेंट से चिना देताची
- 16:25–16:28इजे आत्म केंद्रिद समाज हम सब गड़र हैल ची
- 16:28–16:30उब हविश्षक लेल बदड खदर नाग आची
- 16:30–16:34इसत्या ची जे दूनु वेवस्तामे आपन अपन खोटा ची
- 16:34–16:38परमपरिक समाजक रूड़ा आ आदूनिक समाजक समवेदन हीनता
- 16:38–16:42दूनु अपना पना टाम प्र प्रान लेवा बहुऽ सकए चे
- 16:42–16:43बलकुल
- 16:43–16:45आ-ा-
- 16:45–16:49समबवतः एही टाम हम दूनु गोते एकमत भारहल ची
- 17:00–17:04अपुरान देवाल खषब आवश्ख्छल किटो वही में बहुत्रास लोक बशेशकर इस्ट्री सब गुटन महसुश कर रहल चलया.
- 17:04–17:34तो आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
- 17:34–17:40अद आदनिक्ताक दोड में, हमरा सब के परिवार मानविय समवेदनाहीं भराल ची.
- 17:40–17:43हम उही रही टरक आगी सक्छेली रहल ची,
- 17:43–17:48जे हमर देख के गरम कम करत ची, अहमर प्रान भेशी लेत ची.
- 17:48–17:51पुरान दिवाल कहसब जनाय आवश्षक चेल,
- 17:51–17:56अहने नवका गर में प्रेम अक करूना क्डिडकी राखफ से हो आवश्शक अची
- 17:56–17:57जे हम गमाई रहल जी
- 17:57–17:59इं निष्चित रूप से सत्ते आची
- 18:00–18:02जे दोक्तर कामिनी जीक इशाहित ते
- 18:02–18:06एक ता अतीव जटिल संक्रमन कालक समाजक जीवन्त चित्रनाच
- 18:06–18:14उ समाज जे परमपरा क्शन्दर्सन्निक्ली का पूंजीवाद अ आदूनिक्ता का बहुल भूलेाम प्रविश कर रहा लगच.
- 18:14–18:18आए ही लंभा यात्रा में हम की पेल हूं अग की गमल हूं,
- 18:18–18:22हम कतेक सशक्त भेलूं, अग कतेक एका की भूगिल हूं,
- 18:22–18:27एक रब बुछ शुख्श्म अई इमान्दार है साब किताब इक ता सब करेताच्छ।
- 18:27–18:28बलकु।
- 18:28–18:32तजा जा हम उही खसल दिवाल वाल उदारहन पर वापस जाए
- 18:32–18:35जकर चर्चा हम सब विमर्षक आरमभ मेकेन रही
- 18:35–18:37ता अन्तिम सवाल इई नहीं आची
- 18:37–18:40जए उ देवाल खसब निक भेल वख्राब
- 18:40–18:44चवाल इए आची जए देवाल खसला दरीता थीक चल
- 18:44–18:49मुदा अकर इट सजे नवका गगं चुमभी आट्तालिका हम बना रहल ची
- 18:49–18:53की उही में एक दूसर के लेल करुना कुनो बाथ आची
- 18:53–18:59वा वाँ बस एक ता बेसी पेग, बेसी चम्किला, अब बेसी मजबुद पिंज्रा तैयार कर हल ची,
- 18:59–19:04जता इ लोग अचीत सोटन्त्र मुददा पुरुनते आ एक दुखका असुन।
- 19:04–19:09इएक्ता एहन प्रष्ना आची जकरुद्तर हम्रा सब के अपन-पन गरक भीतर ताके परत
- 19:09–19:10सत्तिवचन
- 19:10–19:18हमाशा करेच खी जे आहा सब इविमर्ष् सुन्ला आए मार्मिक साहितिक गेराई पर स्वेम विचार करव
- 19:18–19:21सत्तिव कोनो एक दिस नहीं आची
- 19:21–19:24इद्वंदक भीच में कतहु नुकाया लची
- 19:24–19:27हम्रा सबक संगे जुडबाक लेल द्धन्निवाद
Plain text
वल्क्म तु दिबेट यी बादिक विमर्श आ बहु आयामी द्रुष्टि कोनक विषेश मंच्पर आहा सब क स्वागता ची मने जकन कुन पुरान खंदर भराल गरक देवाल खसेच्ट्चे, ता लोकक प्रतिक्रिया बध भिन होएच्ट्चे, किछु लोग उही खषल देवालक इंटक गर्दा के देखी का खषैत अशी अशोचे तशी जे नीक भेल इगुटन भरल बंद देवाल खषल अप कम से कम भाहर का ताजी हवा आए जो तभी तरावत मुदा उते किछु लोग एनो हो इच्छती जे उही खसल इंटक देरी पर भैस का नोर भाबएच्छती मने हुंका लेल उ देवाल मात्र इंट माटिक कोनो बन्दन नाई बलकी एक ता सुरक्षा कवछ्षल जे बाहरक आनधी, तूफान, रोद, अबरक्षा हुंका बचेनिच्छल बलकोल आब बन्दन अस्व्रक्षा का भीचक एजे महीन रेखा आची इं मनो विग्यानिक द्वंद बद्जती लाची ता आई हमर विमर्ष्ख किंदर में तीक एही द्वंद वक्छत्रन करेद दोक्टर कामिनी कमाएनी जीग अथ्यन्त मारमिक सहित्टिक क्रुती विदेह सदे एकती सची तिर ताकूपर गवोर करी ता एक ता बडज्वलन्त प्रश्ना हम्रा सब के सुजा बैतचे आव प्रश्ना ची जे की एक दासब परमपरिक, मेठिल, ग्रामीट, समाजग, पित्रि सतात्मक, बन्धन्स, मुक्तिक अनिवारेता के दर सावेता ची वाआ अजूनिक्ता और शहरी करनक अंद दोड में गमारहल मान्वीय सम्वेदना अ समुदाएक पतनक त्रासदी के चित्रित करेता ची इक्दम ता हमरी सपष्ट माता चे जे इ़र्ष्ना सब परमपरिक समाजक रूदिवादी आमानवीः आई शोशन कारी विवस्थक एक तेख्षन आलोचना जे विशेश रूप सब महिला सब के संदर्भ मैं इग्था सब इस पष्ट करे तच्छे जे उ पुरान दिवाल कहसव कते ख़रूरी चल के एक तवो दिवाल सुरक्षान ही बलकी एक तप पिंज राच्धल. आप आप मेंकर अगत दोसर द्रष्टीस देखाई ची. हम माने चीजे एक तफ सव वास्तम आदूनिक्ता खोख्लापन, नव दनाद दे वर्गक स्वार्त, आप पारमपर एक पारिवारिक समबन्दक, जे रदे विदारक पतन भरहल आची, तक अगटा शोक गीत आचे. आचा, इणवका युगक समवेदन हीनता पर कोल गेल विला पची, जक्रा हम विकास के नाम दोरोहल ची. अम भूजी रहल ची जाहा एना की एक सोचे ची, मुदा हमरा एक ता विन्न द्रिष्टी कोंड रख्वाक अनुमती दिया. चलू, सब सब फिले गामक उही आंगन पर बात करी, जक्रा हम सब भूजलिये समुदायक प्रतिक मानी कबड्द महिमा मन्लित करे ची. अगा कोई कोई? कोन दामर पर केकर खोता अगुईर ताकुजका कता सब में गामक बेटकीक छे चित्रन अची अख्रा गेहराई सब इस लेषित करूँ अख्रा डॉख सुख भाधवाक मंच कही सके ची मुदा लेक हक अथे जे मनोविग्यानिक अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन अगी बद्खी में इस्ट्री सब की करेच्छतिन अगा गवर करुज ये उही बैट्खी में इस्ट्री सब की कर अच्छतीन? अव मात्र पर निन्दा विद्वा और निस्ठाहे लोकक उबहास कर अच्छतीन? इस्ट्री सब जे स्वाम उही पित्री सट्टाक शिकार अच्छतीन? उ आपस में एक दूसरक परहरी बनी का बैसल चतीन. मुदा उ समाजक अपन तरीका चल. जगन समाज कोनो वर्ग के वास्तविक सत्ता न नहीं देट जाएक, तवो वर्ग अपन कुन्ता तूसर कमजोर लोक पर निकाले तची. गुईर ताकू में चृटकी काखी जकां बोल पुरान लोक परमपराके नाम पर कुन्ता आए आन्द विश्वास के पोषे चती एक ता छोट बची के गुईर ताकू कहब अप्शकुन मानी के उक्रा गर्याबे लगे चती आ, इट अची इग्ता एहन विवस्ता आची जटै परमपराक दर दिखाखे लोकक मान्सिक विकास के रोक देल जाईत आची इग्ता प्रभाव शाली तर्क आची मुदाकी आहा इविचार कलोवा जे ओविवस्ताक विकल्प के रूप मेजे आदूनिक्ता आएल आची उ कतिक क्रूर थी? क्रूर? कोना? आप देखो, हम इमानत ची जे गामक बैटकी में परनिन्दाचल, कुन्ताचल, गामक उही पारमपर एक समाज के आहा एक ता प्रशर कुकर जका मानी सकत ची. उई में बद्द्ताब चल, सीटी बजेच्छल, हला हुएच्छल, मुदा कोन दामर पर कताग दोसर पाखी देखो उते जे नवका एट समेंटक गर बने तची उकी लाका आवी रहल अची उनवका गर विभाजन आए एच्षक प्रतीग बनी गल अची पश्चिम दिसाग भाट बन्द कर दिल जाए तची अहा, मुदा इणवका शहरी मान्सिक्ता एक ता माइक्रो वेवजका आची, बहार से एक दम्शान्त, कोनो हला नही, मुदा भीतर से इलोकक समवेदना के सुखाई रहा ला चे. मुदर उको, उ इटक देवाल इस्त्री सब के उही सामोए कुन्ता से एक ता नीजी स्पेस माने एक ता प्राईवेसी तदध आईता चे, मुदा उह नीजी स्पेस का कीमत की आचे, शेहरी करन उही स्ट्री सब के सुतन्तर नहीं केला चे बलकी हुनका नितानत एकाई की बने दलक अचे गाम को उही प्रशर कूकर में कम से कम जकन कोनो विपत्ती आवे चल तो ही कुंटित स्ट्री सट्री सब का हाथ ये दो सर के नोर पूच्वा लेल उठीजाएच्छल. आब नवका गरक बंद दर्वाज्जक पाचा, लोक अपन पडोसीग दुख से भेसी अपन तीवी अ पैसासी प्रेम करे तचे. इजे व्यक्तिवाद अच्छे उ मान्विय करूना के हत्या करहला चे. जे स्रोता गाम से शहर आएप के बसल चती उई बात नीगजगा का बुजगे थेदा जे गाम का उग करोना कितेख शर्टो सबसे बान्दल होई तची की हम उई साजापन के आदर्ष मानी सके ची जत ता इब भान्पूर वाली जका इस्त्रिक जीवन नष्ट कर देल जाईता चे उआ नष्ट नहीं उईक ता संगर्ष आचे अब माट्टिक मुरुत पराभी जे आही द्वंदुक सबसे सशक्त उदारन आची आहा गामक समदायक गब करे ची मुदा भान्पूर वाली संगे अते की भेल? दहेज अप पुत्त्रक लाल्सा कारने सासुर में कदं कदंपप्रताडित केल के लिये अज़ सब से क्रूर विदंवना तकन होईता ची जकन तुंटून भहीया उक्रा संथ जोर जबरदस्ती करबाक प्रयास करे तची अगर बाद के जे कता है अख्राहा कीक नजर अंदास कर अल ची भानपृाली गाम से बाहर शहर आवाई च्छती अख्र जूटाक फैक्त्री कोले च्छती जमीन कीने च्छती आपन दंपर आपन जीवन थाड करी च्छती इकोनो चोटमोद बाद नहीं अच्छी पारमपरिक गाम कहीो नहीं दसकाई चल उनकर यात्रा सबश्त रूप से पारमपरिक बन्दन से मुक्ती के आम महला सशक्ती करनक एक ता महान प्रमाना ची जो उगामक उही सुरक्छित आगन में रही ता गुती गुती का मरजे थाई गामक समाज एक ता श्ट्च्ज्यकेट जका चल, जे कर काज मात्र हुनका बान्दी कर अखब चल, शहर हुनका लेल एक ता खुला मेदान बनल. छमा करव, मुदा हम एबाज सरवता नहीं मानेची. केक? ता इज़ी जी केक आहा भानपूर वाली के संगर्ष के पूजीवाद आदूनिक तक विजैं मानी रहल ची हम माने ची जो उस संगर्ष केलनी आए आर्थिक रोप से स्वतन्द्र भेली है मुदा दोक्तर कामिनी कामाईनी कहानी की अंथ की आची इव उते दरी में रुके ता ची, बहानपूर वाली जे फक्तरी चलोली हा, आपन भेटा वरून के एक दम आदूनिक शिक्चा देलनी, उ आदूनिक ता रुनक या संगे की के लक. त अ बेटा के पडा लिखा का डौक्तर बनोलनी? इप त रुनकर सफल ता ची. अग, इह उनकर सब सपैएक तरास दिया ची, के एक तव उही आदूनिक शिक्षाक प्रतिपल के भेल, जब भीटा के ओए खुन पसीना एक कै कर डोक्तर बनालनेन, उप मेटिकल का पड़ाए कै निहार वरून के करे तची? अब भूजी रहल ची आहा कते जा रहल ची उआदूनिक ताक अंद्खार मे इते एक स्वार्थी भूजाई तची जे समपती गिस्सा मागगग तची आआ अपन भीमार माए के बरखा में गर सब बाहर निकाले दे तची आहा एकर सामाजिक तन्तर के बुजो पारमपर एक समाज में व्रद्ध्डलोकक एक अंतर नहित मूले होए चल, उ परिवारक दूरी होए चला. मुदा अदूनिक शिक्षा अपूंजीवाद व्यक्तिके के खईल आर्थिक उप्पादक्तास नापे तची, वरुनक लेल उकर भीमार माए आप कोनो आस्ट नहीं बलकी एक ता लाईबिलिती बनी गेल चली इआदूनिक सोच का क्रूरता आची जते खूनक संबंद सोगे बलंस शीद परता होई तची मुदा देखु इच्सत्ति आची जे वरुनक विवावार क्रूर चल मुदा इवरुनक ज्यक्तिगत चारित्रिक पतन अची एक रा आहा समपुन आदूनिक्ता का दोश नहीं कही सकची इव्यक्तिगत पतन आची इआदूनिक्ता क स्वभाविक परिनाम आचे आप रतिकात्मक रूपसा कहानिक अंतिम द्रिष्च देखु अदूँ जक्रा लेक्खक बद्कुशलता सा गडने चिति भानपृर वालिक म्रित्त्य। कोना हो इच्चने आप, हीटर के करेंट सा? एक दम, उएक ता खराब आदूनेक हीटर का करेंट से मरी जाए चति इकोनो सामान ने दूगतना नहीं आच्छे ये एक ता गमभीर मेताफर आची आदूनिक यंत्र जे सुक सूविदा का प्रती का चे उही उनकर प्रान लोले लक आदूनिक ता वादी सोच अभहुतिक ठा का जे आग हूना अपन भेटा में लगिलने उही आग ही उनका भास्म कदे लक अहा जक्रा खुला मेटान कहलो उ मेटान वास्तव में एक ता निर्वात अचे गाँउक जाडी में काट चलजे हूंका गडल मुदा उते श्वास लेबाक लेल अक्सिजन ता चल शहर के उही निर्वात मेता हूंकर प्रान हे राए गेल यह यह एक ता रोचक बिन्दू है चे मुता हम एक रादोसा रूप मेराख हव. कहो. आहा रीटर बाला मेताफर के बद नीक जका पक्डे लो है ची, मुदा हम्रा लगगत ची आहा एकर कारनके गलत दिस्लजा रहा रहा लगछी. वरुनक भीत्रक स्वार्त, वही पित्र सत्तात्मक विषेशा दिकारक आदूनिक रूप आची, जते एक ता पुरुश मानेत ची, जे इस्त्री च्ष्पत्ती पर उकर जन्मसिद अदिकार आची. वरुनक स्वार्त परम्पराक दोशू चे वरुनक भीत्रक स्वार्त उही पित्र सतत्मक विषेशा दिकारक आदूनिक रूप आची जते एक्ता पूरुष माने तची जे इस्त्रीट संपती पर उकर जन्मसिध अदिकार आची बान्पुर वालिक म्रित्यो उही उपेख्षाक परनाम आचे अच्छा मुदा जहाँ कह आची जे आदूनिक शिक्चा अश्वर करुना के मारिदे तची तची विलायत वाली कन्या कता पर आचा की बिचार आची उते ता कहानी सर्वता विप्रे दिशाम जाएत ची उकता से हो गम त्रास्ती पोन नहीं आची मुदा उई में एक ता स्पस्त आसा आची विलायत वाली कन्या में चिरनजी भाबुग बेटा वरून लन्दनक एक नर्स, हीना वा सकीना सविवाग करे तची गामक अ पारमपरिक लोककलेल ये एक ता बहंकर सद्माचल जे बेटा अपन जाती, अपन दर्म, अपन देस सब बहर निकली का विवाख कल लक एक दम सद्माचल पारमपरिक दिष्टी कोन सता ये समपून पतन अची मुदा जक्हन उ विलायत वाली हीना आवे तची, तो की करे तची? उ सासुक सेवा करे तची? उही अक्सीजन मशीन सासुक प्रान बचे वे तची? आहाजे यंत्र के प्रान लेवा कहे चलहू, एते उ यंत्र प्रान रक्षक बनी जाई तची? इख ता सपष्ट रूपस इसिद करेता ची जी मानविय करूना आप प्रेम, कोनो परमपरा जाती या गोत्र का महताज नही आची. परमपरिक मेठल विवार्वेवस्ता का बाहर जेवासा एक ता नव, नीक अबेसी मानविय संबंद बनी सकेता ची. रहीना आदूनिक विष्वव्यापी नागरी का प्रतीक अची आप अगर आप प्रदीग आग्विश्वापी नागरी का प्रतीक अची अजी ब्याद्ती जे अकर ब्रत्तिः पुता हो आची आद ब्रति ब्रति कोनो गामक अनपार इस्त्री नहीं है आची अब भारती आची शिक्षित आची भीएड कैने आची आए एक्दम आदूनिक समाजक कतू आलोचना आची मुदाहा भार्ती के भिस्री रहल ची भार्ती, जो अकर भार्ती पूता हो आची आद, भार्ती, भार्ती कोनो गामक अनपार इस्त्री नहीं आची उ भार्ती आची, शिक्षित आची, भीएड कैने आची आए, एक दम आदूनिक आची अदूरा भूपाल मे रही रहल, उ आदूनिक शिक्षिद बेटी अपुतो, अपन बिमार सासुक सेवा करभा मे बार भुजे चती. अपन सासुक दम्मा अगध्याक बिमारी मे उ एक ता स्वार्ती दर्षक बनी जाएच छती. इते लेखा की देखावेई चाहचात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्चात्� कताकारी देखर आल्चतीन, जे एक ता विदेशी अस्त्री, ही ना, जक्रा हमर महान भार्तिय परमपरा, अस्सोप प्तोख पदानुक्रमक कुनो गयान नहीं अची, उसासुक निस्वार्त सेवा करेत अची. एक रार्ती अची जे बार्ती अवरुन्जका का लोक, अदूनिक्ता अशिक्षक नाम पर जे नवका समाज गडिराल चितिन, औही में भार्तिय परिवार अपन मुल मानविय करूना द्गमा चुकल आची. रही नाक उपस्तितिये इप रमानित करेत आची, जे हमर आपन आदूनिक स्त्री पूरुश कतेक संवेदन हीन भोगे लाहा आची इखता आदूनिक ताक विजैन आई, बल की हमर आपन खोखला पनाक एक ता भयानक दर पना ची. हमरा माने पडद जे आहा की भीसलेशन, जे हीना कुपस्तिती, वास्त्तम में बार्तिक सम्वेदन हींता के उजागर करवाक लेल आची बद्गंभीर आव विचारनी आची इस सत्ते आची जे बार्तिय मद्दिवर्ग आदूनिक्ता क उप्योग मात्र आपन सुविदा लेल कर रहा आची बलकोल मुदा तए यो हमरा इस पस्ट करे दिया जे कामिनी जी कता सब में जे पारंपरिक जीवन के विसंगती सववची वो करा हम आदूनिकता कोट देखा कर नयोचित नहीं तरासा के ची गुईर ताकू में जना बचुदाए के बिना कोनो दोषक गर्याल जायता ची वा मादिक मुरूत में एक ता निर्दोश स्त्री पर चरित्र हींताक जे लान्चन लगाया जाई ता ची, उ ईप्रमानित करे ता ची जे उ समाज भीतर से सडी जुकल चल. रहा, उ सरल ता चल. उ ताईसर निकलेच एक दम अनिवार ये चल. अजगन आहा कोनो सरल वेवस्था के तोडी का नव वेवस्था बने वेची तसंक्रमड काल में किछ त्रासदी अवश्छे होई तची भान्पूर वालिग भेटाक स्वार्थ वा भार्तिक समवेदन हींता उही संक्रमड कालक कोल अट्रल दामेज भहुसचा कै तची अभी उद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्याँ बाद्या� तो निंदनी आचे, मुदा जक्हनो आद्निक्ताक नाम पर मरी जाईता चे, तो आरो भेशी त्रासद आची. खियकता आजनिक्ता ता हमरा सब के भेशी जाग्रू का विवेकी बने वाक दावा कर रहे तची. कोन दामर पर केकर कोता, एकर जिवन्त उदाहरन आची. एकर जिवन्त उदाहरन आची जता एक ता दिवालक निरमाड दूई परिवारक भीचकर करूना के इट सिमेंट से चिना देताची इजे आत्म केंद्रिद समाज हम सब गड़र हैल ची उब हविश्षक लेल बदड खदर नाग आची इसत्या ची जे दूनु वेवस्तामे आपन अपन खोटा ची परमपरिक समाजक रूड़ा आ आदूनिक समाजक समवेदन हीनता दूनु अपना पना टाम प्र प्रान लेवा बहुऽ सकए चे बलकुल आ-ा- समबवतः एही टाम हम दूनु गोते एकमत भारहल ची अपुरान देवाल खषब आवश्ख्छल किटो वही में बहुत्रास लोक बशेशकर इस्ट्री सब गुटन महसुश कर रहल चलया. तो आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� अद आदनिक्ताक दोड में, हमरा सब के परिवार मानविय समवेदनाहीं भराल ची. हम उही रही टरक आगी सक्छेली रहल ची, जे हमर देख के गरम कम करत ची, अहमर प्रान भेशी लेत ची. पुरान दिवाल कहसब जनाय आवश्षक चेल, अहने नवका गर में प्रेम अक करूना क्डिडकी राखफ से हो आवश्शक अची जे हम गमाई रहल जी इं निष्चित रूप से सत्ते आची जे दोक्तर कामिनी जीक इशाहित ते एक ता अतीव जटिल संक्रमन कालक समाजक जीवन्त चित्रनाच उ समाज जे परमपरा क्शन्दर्सन्निक्ली का पूंजीवाद अ आदूनिक्ता का बहुल भूलेाम प्रविश कर रहा लगच. आए ही लंभा यात्रा में हम की पेल हूं अग की गमल हूं, हम कतेक सशक्त भेलूं, अग कतेक एका की भूगिल हूं, एक रब बुछ शुख्श्म अई इमान्दार है साब किताब इक ता सब करेताच्छ। बलकु। तजा जा हम उही खसल दिवाल वाल उदारहन पर वापस जाए जकर चर्चा हम सब विमर्षक आरमभ मेकेन रही ता अन्तिम सवाल इई नहीं आची जए उ देवाल खसब निक भेल वख्राब चवाल इए आची जए देवाल खसला दरीता थीक चल मुदा अकर इट सजे नवका गगं चुमभी आट्तालिका हम बना रहल ची की उही में एक दूसर के लेल करुना कुनो बाथ आची वा वाँ बस एक ता बेसी पेग, बेसी चम्किला, अब बेसी मजबुद पिंज्रा तैयार कर हल ची, जता इ लोग अचीत सोटन्त्र मुददा पुरुनते आ एक दुखका असुन। इएक्ता एहन प्रष्ना आची जकरुद्तर हम्रा सब के अपन-पन गरक भीतर ताके परत सत्तिवचन हमाशा करेच खी जे आहा सब इविमर्ष् सुन्ला आए मार्मिक साहितिक गेराई पर स्वेम विचार करव सत्तिव कोनो एक दिस नहीं आची इद्वंदक भीच में कतहु नुकाया लची हम्रा सबक संगे जुडबाक लेल द्धन्निवाद