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SADEHA 01_4 इंटरनेट_पर_मैथिली_आ_कोसीक_प्रलय.mp4
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- 0:00–0:18वर्ष 2008, जगन भारतक चंद्र्यान एक चान्दक कक्षादरी पहुच रहल चला, विश्वनात आनन्द, शत्रनजक विष्व चामप्यन्षिप जीत रहल चला, मने राश्ट्री इस्टर पर पैक पैक साहित्टिक पुस्कार गूश्ना बहरहल चल.
- 0:18–0:48आप, आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
- 0:48–0:54समर्पित लोक एक ता प्राचीन भाशा अवकर सहित्यक के अंटरनेट पर बचाई विकलेल
- 0:54–0:57एक ता अबहुत पूर्व संगर्ष करहल चला
- 0:57–1:01ता स्वागत अजी आहा सबख हमरे स्गेर अनवेशवेश्ड में
- 1:01–1:08आई हम सब एक तब बहुत गेर अप प्रासंगिक स्रोट सामगरी पर विमर्ष करहल ची.
- 1:08–1:17ये आची विदे है, यी पत्रिका, मने मेठिलीक प्रथम पाक्षिक यी पत्रिका, और उकर मुद्रित रुप सदे है.
- 1:17–1:21बूजु जे एकोनो सादारन पत्रिकाक पन्ना नहीं अचे
- 1:21–1:25हम्रा लेल ये एक ता ताइम क्यब्सूल्जका आचे
- 1:25–1:29हमर आई दे एक जी हम सभ एबूजी
- 1:29–1:32जे कोना एक प्राचीन भाशा आदूनिक तकनीकक संगे
- 1:32–1:35अपन अस्तित्वक लेल लडी रहल अचे
- 1:35–1:40आ, कोना साहिट्य, संगीत, अप्राक्रोटिक आप्दाक संगर्ष्श से,
- 1:40–1:43कोना समाजक निरमाड वब पतन होईत आच्छे.
- 1:43–1:48एक दम सही कहलू, इश्रोट समक्री वास्तब में हम्रा सब के
- 1:48–1:51एक तब वहपक जित्र देखार हा लगा ची.
- 1:51–1:57सादारनतिया होईत की अची, जे इतिहास के बस एक ता मुक दस्तावेज मानिलिल जाईत चे.
- 1:57–2:05मुदा विदेहे का इ अंग, जे मुख्हि रूप से 2008 और 2009 काल काल काचे,
- 2:05–2:13उ उस्पस्ट करेत अचे जे कोना तकनिक, संस्क्रिति अस्स्वरकारी नीति सब के एक दोस्रा से सीदा सरो का रची.
- 2:13–2:18आप, मने एही में भाशाक अंटनेट पर अटियासे कुपस्तिति के कता आचे.
- 2:18–2:26गजेंद्र ताकृर, नागेंद्र कुमारजा, अविद्यानन्द जाजी दुरा कैलगेल मेठली अंग्रेजी शब्द्कोष्का महा यग्या अचे,
- 2:26–2:32पन्दित रामाशीष, जार रामरंग, आर राज्मोहन जासन दिगगच के विचार अचे,
- 2:32–2:37अवकर संगे संग कोसिक उही भ्यावा ध्रास्दीक प्रमानेक विष्लेशन से होए चे.
- 2:37–2:39तार से समजगद ची.
- 2:39–2:45जखन कोनो प्राचीन भाशा अपना पारमपरिक गाम गरक, च्योपाल वा भोज पत्र से निकल के,
- 2:45–2:48इंटरनेट जगा आदूनिक पतल पर अबई तची
- 2:48–2:50तवो कर यात्रा कहन होई तची
- 2:50–2:52इस उच्ते गजब लागगे तची
- 2:52–2:54इब भद रोचक यात्रा आचे
- 2:54–2:58जो हम सव, 2000 इस वी का असपास के बात करी
- 2:58–3:01तो उईंटरनेटक एक दम शुर्वाती दोडचल
- 3:01–3:06आपन अपन उई आज्वस्थता आडामक समय में और इंटरनेट पर मेठलिक उपस्तिती दर्ज करेबाक प्रैःश शुरुकेलनी
- 3:07–3:09शुरु मे तो यहु जीो सिटीज पर साइट बनौल गिल
- 3:10–3:13मुदा उसब मुझ्त साइट तक इचे दिन में दिलीट भजगई चलना
- 3:13–3:43अगर उद्टा अद्टा प्रज़ाई तो बज़ा प्रज़ाई चल ना अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अग
- 3:43–3:48भाल सरीक गाच मने ।वीदे ।ट्कोम दोमेन अस्तित्मे आँल
- 3:48–3:54इंट्रनेटक विशाल पतल पर मेत्लिक प्रत्हम अदिकारिक वेब उपस्तितिक रूप में
- 3:54–3:56बहुत अतिहासिक कदम चल
- 3:56–3:58बाप्रे, 2004 में
- 3:58–4:03आएकर प्रभाओ एतेक व्यापक भेल चे एक जनवरी 2009 के
- 4:03–4:11जखन विदे इपत्रिकाग पचीसम अंख प्रकाषित भेल तो अकर आक्डा आश्चर जनक चल
- 4:11–4:12कते क्लोग देखिल नुक्रा
- 4:12–4:17मात्र 1 वर्ष में, मैंगे 2008 में, इसाइट सथटर देशक,
- 4:17–4:22चैसवक्तिधवटर अस्थान से एक लाक च्टीस हज्टार अच्टर भेड देखाल गल.
- 4:22–4:24आश्चर रे आची.
- 4:24–4:27इआख्डा उही समय के हिसाव से, बोहुत पेग आची.
- 4:27–4:32मुदा एहा, हमरा स्रोट सामागरी के उही हिस्सा से बेसी उट्सुक्ता बेरा लची,
- 4:32–4:37जते मैठली अंग्रेजी शब्द कोश आप पंजी प्रबंद का निर्मान का बात कहल गल ज़ाची.
- 4:37–4:40आप उईट्ता अलक स्थरक काज्षल.
- 4:40–4:43इते एक तकनी की शब्द को प्योग भेलाची
- 4:43–4:46उनी कोड मैपिंग अ तिरुता सा देवनागरी लिप्यान्तरन
- 4:47–4:52हमरे भुजहाओ, जे इनी कोड मैपिंग वास्तव में बाशाक लिए की काज करेता ची
- 4:52–4:55माने जे पहलेग फाँथ हो इच्छल, उहिसा ये लग कोना आची
- 4:55–4:57इब बहुत महत पुरन बात अचे
- 4:57–5:00दिखू, यूनिकोट से पहलेक समय में
- 5:00–5:03जगन लोक कमपुटर पर कुनोक छित्र यबहाशा लिके चला
- 5:03–5:06तवास्तव में उहो केवल एक ता चित्र
- 5:06–5:08वा दिसाईईजें होई चल
- 5:08–5:10माने उकर कोनो दिजितल वाल्यू नहीं चल
- 5:10–5:40इक्दम नहीं, जा आहा आपन कम्ठूर पर कुनो खास फाँथ में मैठली में की चू लिख लाओं आद दूस्रा व्यक्ती के एमेल के लाओं आजा अकर कम्ठूर में अई फाँथ नहीं आचे, तो उक्रा केवल की चू चूकोर दिभबा वाम आने कच्राजगा का दे खाओत
- 5:40–5:44बेल जे जा आहा मैठलीक कोनो अक्छर युनिकोड मे लिखे ची
- 5:44–5:49तो दून्या कोनो भी कमपुटर वा मोबाल उक्रा उही अक्छरक रूप में पहचानत.
- 5:49–5:54आप विदे ही काज कर कड, मैठलीक के अंट्रनेटक मुख्धारा में लाभी देलग.
- 5:54–5:55बिलकल.
- 5:55–6:01आब भूजल हूँ, आईजे तिरहुता से देवनागरी लिप्यान्तरन काजबेल, अकर की आथ चल?
- 6:01–6:04तिरहुता ता हमर पुरान लिपी आची नहीं।
- 6:04–6:10आआ, तिरहुता मैठलीक आपन प्राछीन लिपी आची, जख्रा मित्यलाक्षर से हो कहल जाईता चे.
- 6:10–6:16अमर सब के पैक प्राचीन पोठी आपनजी जे मने वनसावलिक रिकोड चे,
- 6:16–6:20उसब तिरहुता में ताल पत्र वा भोजपत्र पर लिख हल अचे.
- 6:20–6:24मुदा आदूनिक पीडी तदेवनागरी पड़ेट चे,
- 6:24–6:27तिरहुता तई बहुत कम लोग जनेच फीज.
- 6:27–6:29यह तब आत आचे
- 6:29–6:32तगजेंदर ठाकूर पंजिकार विद्यानन्द जाजी
- 6:32–6:33जे काजकेलनी
- 6:34–6:34उईचल
- 6:34–6:37जे उही पुरान पोथी सब के दिजितल इमेजिं
- 6:37–6:38मने
- 6:38–6:39सकनिंग केल गेल
- 6:39–6:41आफ फेर उक्रा तिरहुता से
- 6:41–6:43देव नागरी में लिप्यान्तरन कर लगेल
- 6:43–6:46जाई से आदूनिक पात्ख उक्रा पडिसकती
- 6:46–6:49इत तश्छ्मुज भगीरत प्रैयाश्चल
- 6:49–6:52राई, सोलाग हन्द में शब्द कोश बनावल गेल
- 6:52–6:56जते कमपूटर अविग्यानक शब्दावली से हो गड़ल गेल
- 6:56–6:59आई यस सब को मुज सरकारी संस्ता नहीं
- 6:59–7:02कि कि खिल समर्पित लोग आपन स्थर पर कार अजला
- 7:02–7:04इब भद प्रेरना दाया कचे
- 7:04–7:07मुदा एता हमार एक ता प्रष्न चे
- 7:07–7:10आजम्रा लागाई तचे जे पुछा बहुत जरूरी आचे
- 7:10–7:11आजम्पुछु
- 7:11–7:13श्रोथ सामग्री कहत ची
- 7:13–7:17जे ये एक ता विकिंद्रिक्री सहित्तिक आन्दोलन चल
- 7:17–7:21जे ते प्रकाशक अपाट्धक बीचक दूरी कतम बहुगेल.
- 7:21–7:25मुदा जगन अंट्रनेट पर भिना कोन समपादकक वा गेट की परक,
- 7:25–7:27रोक तोकक लोक लिखाई लागल,
- 7:27–7:30तक की एक्रा से साहित्ते कस्तर नहीं कहसल
- 7:30–7:32मैं कोनो चननी ने रहला से
- 7:32–7:34इत फ्री फ्रोल बहुगेल है थे
- 7:34–7:36येक ता सबहावी काशंका आज है
- 7:36–7:39मुदा एही स्रोथ समगरेक परप्रेक्ष्चचन देखी
- 7:39–7:42तो उही समेख ता पाग मिथाखी चल
- 7:42–7:45जे मैठ्री में जे लिख़च्छतें से उक्रा पड़ेच्छतें
- 7:45–7:49माने पात्ख आलेखख एक छोट चीन गुट्चल
- 7:49–7:52एक दम अगी एक अदिकार के तोड़ दिलक
- 7:52–7:56विकेंद्री करन का अर्थ एई नहीं चल, जो गुणवत्ता कहसी गेल
- 7:56–8:01बलकी एकर अर्थ एच्छल, जे प्रतिबा दूर दराजा गाँ मेवा विदेश मेवैसल चल,
- 8:01–8:06जक्रा कोनो पत्रिका चापे लेल तयान नई चल, उक्रा एक्ता मन्च बहेत गेल.
- 8:06–8:10तसाहित ते एक्ता चोट का गेरा से निक्ली कर वेश्विग बहो गेल?
- 8:10–8:13आप यह यह एकर सबसे निक बाथ चल
- 8:13–8:17मुदा राज्मोहन जा जे एईस रोट समगरी मा बात उठाएट चतिन
- 8:17–8:20और हमरा सोचे बात मजबोर को रही तच्छे
- 8:20–8:23तकनिक तब आशा के एक देध ड़ाउ दे लग
- 8:23–8:26मुदा प्रान तध संस्क्रती मबसे तच्छी
- 8:26–8:27बेल्कुल सही बात
- 8:27–8:31और जाज महन्जाग जे सान्स्क्रतिक अन्नेटिक शरनक चिन्ता आचे
- 8:31–8:34उकोनो शुन्यमने भहुर हो रहा ल्चल
- 8:34–8:36इसान्स्क्रतिक पतन आउपेख्षा
- 8:36–8:39उही विवस्तागत उपेख्षाक सीथा प्रती रूप चे
- 8:39–8:43जे हम सब ए पत्रिकाक दोसर खण्ड में देखाएच्छी
- 8:43–8:46अपकने का भी जाएच्छी मित्लाक संगीत शाहित्यपर
- 8:46–8:49आँ उब बड्द मार में खण्डच्छी
- 8:49–8:53विदे हमें स्वर्गी या पन्दित रामाशेष्जा राम्रंक कजे सक्षात्कार आच्छे
- 8:53–8:57उ अई अई प्ष्ट रूप्से संगीत क दोहनक बात करे तच्ट
- 8:57–9:00रामरंग जीक उ सक्षात कार बहुत गंभी रच
- 9:00–9:04उ विद्यापती गीट के मुख्य रूपस दू भागम बाटे च्टन
- 9:04–9:06पहिल अची पद गायन शेली
- 9:06–9:09जे पुनरुप्स शास्त्रिये वा आर्द्शास्त्रिय आच्छ
- 9:09–9:11एकर कोनो उदारन आच्छ श्रोद सामगरी में?
- 9:11–9:12आच्छ
- 9:12–9:15जिना नंद्क नंदन कदम बक्तरुतर
- 9:15–9:20इु रच्ना आएच जक्रा में राग आ तालक कथोर नियम आच्छ
- 9:20–9:26अदुसर इच लोक वा ग्रामीन संगीत जना उगनारे मुर कती गिला
- 9:26–9:29आँ इट जनजन के कंच में आचे
- 9:29–9:35भिल्कु ता रामरंग जी का चिन्ता इएच जे विद्ध्यापतिक जे ग्रामीन गीट आच
- 9:35–9:40अखराता महिला सब अगामक लोक बडनीग जगा अपने लोक कंठ में सुरक्षित रक्षत रहा लेज.
- 9:40–9:44मुदा जे शास्त्रिया शेली करचना आईज अगर गयन उजरा रहा लेज.
- 9:44–9:46एत छिंताख विशय आचे.
- 9:46–9:50अ, मित्छिला वर्त्मान में शास्त्रिय संगीत सशुन्य भ़र रहलेज
- 9:50–9:52मुदाएकर कारन की आचे,
- 9:52–9:55जे विद्यापती समपुरन मित्छिलाक प्रान चती,
- 9:55–9:59उनकर शास्त्रिय संगीत अचानक सविलुप्त कोना भ़र रहलेज
- 9:59–10:01एकर कारन बहुत सब च्छतेज,
- 10:01–10:05जे रामरंग जी बतवएच्छती पलायन आद उपभोकता वाद
- 10:05–10:14पन्दित रामच्टर मल्लिक आपन्दित स्याराम तिवारी जका दिगगज लोकनिक जे द्रुपच्शेली वा शास्त्रिय परमपर अच्छल, अख्रा अगला पीडी ने अपना सकल.
- 10:14–10:17मरे नवका पीडी उक्रा में समझ ने दे बचाहात अचे.
- 10:17–10:23आश्ँंगे संग, रामरंग जी एक ता कतु याठार्द ददेस इसारा करे चती.
- 10:23–10:28उक एच छतीन जिस समपुरन भारत में अपन संसक्रिती के चूरे में
- 10:28–10:32जे तेक मेठिलग वाल चातिन तिना आन कुनो देशक लोक नाए.
- 10:32–10:34बाप्रे, ये तो बहुत कढवा सत्या चे.
- 10:34–10:39जे लोग मित्ला सा बाहर गेला हा, रोजगार अख्लेल वाशिक्चाख लेल,
- 10:39–10:41वो आपन मात्री बाशा से एक दम कडी गेला.
- 10:41–10:45उनका मम्मी ड़ादी संस्क्रितिक चकर में इक है में गर वोईच्छनी
- 10:45–10:47जे हमर बच्चा कि ता मैठली बाजब नाभई च्यक
- 10:47–10:49इस च्छ मुछ बहुत दुखगद आची
- 10:49–10:52आआ इ मात्र संगी तक छिंता नया जे
- 10:52–10:56राज मोहन जा जिनका विदेख का श्रोट समगरी में
- 10:56–10:59बोद समान 2009 बेद्बा कुलेक है
- 10:59–11:01रूँगर जे साख्शात कार आचे
- 11:01–11:03उता साहित टिक वर्तमान अस्तितिपर
- 11:03–11:05बहुत बडगा प्रश्न चिन लगा दिताची
- 11:05–11:07राज मोहन जीग बात एक दम सपष्त आचे
- 11:07–11:09रूँगर माना बचीजे जहीना जहीना
- 11:09–11:14बवाद्या बहुतिक सुख्सविधा बद़ल अचे, समाज में उच्णैट्णेग मुल्ले का राज भेल अचे,
- 11:14–11:19मुदा एही से भेशी उ समिक्षा और समालोचनाक जे आदूनिक इस्तितिया चे,
- 11:19–11:23उख्रापर जे बिबाक टिपनी किलनी आचे उबआद द्यानाक्रिष्ट करेता चे
- 11:23–11:30राज मोहन जाजी कहबईच जे आएकाल हिक समिक्षा खुलल द्रिष्टी से नहीभ हो रहलाच
- 11:30–11:33लोक ततस्त आ निश्पक्ष नहीं चतीन
- 11:33–11:38समिक्षक आपन राग्द्वेश आपुर्वाग्र सग्रस्छतिन
- 11:38–11:42माने, इत आहन भोगे लन, जना आदूनिक सहित समिक्षा
- 11:42–11:46एक ता प्रवेट्ख्लब वा इको चेमबर बनी गेल होए
- 11:46–11:48एक दम सही शबदक प्रियोग कलूहा
- 11:48–11:52जटे लोग खाली आपन गुटक्वा आपन मित्रक पीट खोगाएज्चष्धिन
- 11:52–11:55जक्रा साहाक विचार नहीं मिलगताची
- 11:55–11:57वोकर रचना कतबोनी क्वाई
- 11:57–11:59वोकर दरकिनार कर देल जाताची
- 11:59–12:01इक ता आहने काँगी द्रिष्टी आची
- 12:01–12:04जदे रच्ना के गुण्दोषक आदार पर नहीं
- 12:04–12:08बलकी गुट्बाजीक आदार पर मुल्यांकन भारो हल अची
- 12:08–12:11इक कलब वली मान्सिकता सहिते कले लेल जहर ची
- 12:11–12:16राम्रंगजीक शब्द में विद्ध्यापतिक गीत मात्र मनुरंजन नही अची
- 12:16–12:18इं मित्लाक परीचे पत्र चे
- 12:18–12:22राग, परीचे पत्र कतिक नीक बात कहलनी
- 12:22–12:24जए परीचे पत्र हेरागेल
- 12:24–12:28जए खला गुट्बाजी अब रोतिक तक भेंट चडीगेल
- 12:28–12:32ता आहाक भाशा मात्र इंटरनेट का दिक्षनरी में सुरक्षित रोग के की करत?
- 12:32–12:35उ करात्मा तं मरी चुकल रहत्
- 12:35–12:36एक दम टीक कहल हूँ
- 12:36–12:38आ यहे उ भिन्दू अची
- 12:38–12:41जते हमरा लागे तची जे इश्वोट समगरी
- 12:41–12:45अपन सबसन महत्वपून पक्ष दिस अवए तची
- 12:45–12:47राम रंग जी आ राज मोहनजा
- 12:47–12:51जे एही संस्क्रितिक अवेचारिक शरन के बात कोर हल चला
- 12:51–12:53औओ उजी समवे भहल हल चल
- 12:53–12:55जकन मित्ला के माटी
- 12:55–13:00एक ता आखल्पनिय प्रक्रितिक अव्यवस्तागत त्रास्दी सजुज रहल चल
- 13:00–13:02आप उग, उग, 2008 कोसी कबाड
- 13:02–13:14बलकुल, संस्क्रिति और कलाक पतन का कता अचानक से जीवन आम नण का संगर्ष में बड़ी जाएत अची, जगन हम सब 2008 कखोसी बाड़ का विवरन परभए ची.
- 13:14–13:1618 अगस् 2008.
- 13:16–13:21इदिति थी मिठिला का पुरा भारत का इतिहास में एक तक कर्या दिन के रूप में दर जाची.
- 13:22–13:25निपाल का कुशाह में कोसी का पूरवी तदबंद तुतल.
- 13:26–13:30श्रोथ समक्री में नासा का सेतलाइट चित्र का जे विष्लेशन आची,
- 13:30–13:35उ दिखार हो लग ची, जे कोसी आपन पुरान दार सदूसो किलमिटर दूर
- 13:35–13:38एक ता सरवता नावदार पक्री ले ले ले.
- 13:38–13:39दूसो किलमिटर?
- 13:39–13:42राँ, इकोन यो सादारन प्रक्रतिग बाना नेचल,
- 13:42–13:45इक ता मानाव निरमित प्रलैचल,
- 13:45–13:50जकर पाचा प्चास वर्षक नीतिगत विफलता अलल पितः शाही चल
- 13:50–13:58इक्रा कनेक विस्तार सशमजू, जे इददबन्द तुटलक कोना, कारन्द बाडध कोसी में हमेशा सो अबेच चल,
- 13:58–14:03इदूहाजार आप में भेल, उकर तकनी की और राजनी तिक कारन्ग की चल.
- 14:03–14:06स्रोथ सामद्री एकर बहुत स्पष्ट उत्तर देताची
- 14:06–14:12बारत आनेपाल के सीमा पर जे भिमनगर भैराज बनल चल, उ उनीस्व्ववन मे बनल चल
- 14:12–14:16उकर जे आयु वा म्या तैकेल गेल चल, उ मातर तीस वर्ष्चल
- 14:16–14:18रूकु रूकु एक मिनेट
- 14:18–14:21माने जे बैराज आईटावन में बनल
- 14:21–14:23अटीस सालक मियाच्छल
- 14:23–14:25तो उनीस्ट्टासी में एकसपार बहुगेल?
- 14:25–14:26एक दम
- 14:26–14:28अटासी में अबैराज
- 14:28–14:30अपन तकनी की जीवन समापत कर चुकल चल
- 14:30–14:32सरकार के इबात पताचल
- 14:32–14:40एहलेल 1966 में कूर सेन आयोग एक्ता विकल्प के रूप में दग्मारा बैराज बने बाग प्रस्ताव देने चल.
- 14:40–14:42तफ्फिर उ बनल के एकना?
- 14:42–14:44उ दग्मारा बैराज कहीो नहीं बनल.
- 14:44–14:46उ राजनितिक लाल फीता शाही.
- 14:46–14:48बारता निपाल के आपसी सन्श्याय
- 14:48–14:51और केंद्र अ राज्य सरकार के बीच
- 14:51–14:53पायलेल ताना तानी में उजरा गेल
- 14:53–14:54बाप्रे
- 14:54–14:56इत यत सीथा सीथा लापर वाही आची
- 14:56–14:57नतीजा ये भेल
- 14:57–14:59जे एक ता एकसपार भोच्षुकल तदबंद पर
- 14:59–15:01बीसवश्दरी कोसिक पुरा दबावरहल
- 15:01–15:04आ अंतह दूहाजार आप में तूटीगेल
- 15:04–15:08जे ततबंद उनीस्ट्टासी में रेटायर भाज़े बखचाही चेल
- 15:08–15:13अख्रापर दूहाजार आप में लाको लोकक जीवन तिकायल जेल
- 15:13–15:17इत सीथा सीथा हत्याक प्र्यास जकान ची
- 15:17–15:22आए दे स्रोथ समागरी में एं विश्वेशरीया का जे उदारन देल गयला ची
- 15:22–15:24उबहुत सतीक लागे दची
- 15:24–15:28आप विश्वेश्वराईया जी के उदारन एक दम आखी खोले वाला ची
- 15:28–15:31उ जे क्रिष्नराज सागर बान्द बनेने चला
- 15:31–15:32उकर प्रक्रिया की चल?
- 15:33–15:35जे एकर तुलना एक टेल गयला ची?
- 15:35–15:39देखु, विष्विष्वरया बारत का महांतम अजिन्ँर चला
- 15:39–15:43जकन उ कावेरी नदी पर क्रिष्नराज सागर बानेने चला
- 15:43–16:13तो उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
- 16:13–16:16तदबन्द्सं करे थी तक्की देखा बैतची
- 16:16–16:19कोसिक ब्रस्ट तदबन्द निरमाड में
- 16:19–16:22तेके दार आ आवियंताक मिली भगत सां
- 16:22–16:24कच्चा काजभेल
- 16:24–16:25बालुक बूरिक बडला में
- 16:25–16:27ब्रस्ट चारभेल
- 16:27–16:29तई अस्पष्ट बहजाइत ची
- 16:29–16:34जि समस्या कोसी नदिक पानी मनही, बलकी हमर वेवस्ताक नियत मिचल.
- 16:34–16:37इबहत पएग अंतर विरोद है ची.
- 16:37–16:43और जो हम एही पत्रिकाक उही अंककक राश्ट्रिये अ अंतर अपरिद्रिष्य दिस दिस देखी,
- 16:43–16:46ते इई अंतर विरोद और गेहर ब हो जाए तची.
- 16:46–16:53अग दिस हम पडे ची जे भारत कचंद्रयान एक सब्ठलता पूर्वक चान्दक कच्चामे पहुज गे लच्छे.
- 16:53–16:57अग अन्तरिक्ष में हम सब जंडागार रहल ची.
- 16:57–17:02एक दम विष्वनात आनद, शत्रनजक विष्व चंप्यंष्प जीत रहल चतिन.
- 17:02–17:09अर्विन्द अदिगा के हुंकर उपन्यास दवाईट ताइगर लेल मैंबुकर पूरसकार भेटी रहल चनी
- 17:09–17:16अस सब से महतपों एही काल कहन्द में भारतक सरवोच सहेट्टिक समान ज्यान पीट पूरसकार
- 17:16–17:20अलग अलक भाशाक दिगगज सहतेकार लोकनी के देल जार है लग ची
- 17:20–17:24हाँ स्रोथ सामगरी अगर विस्त्रत सुची दैद अची
- 17:24–17:29चालिस्मा ज्यान पीट पूरसकार कशमीरी कवी रहमान रही के भेटे चनी
- 17:29–17:31एक चालिस्मा कूर नारायन के
- 17:31–17:36और ब्यालिस्मा ग्यान पीट सन्युक्त रूप से कुंकनी के रविंद्र के लेकर
- 17:36–17:39और संस्क्रित के सत्यवरत शास्त्री के दिल जादची
- 17:39–17:41आई ये हमर मुख्यविन्दू अचे
- 17:41–17:44इग कतिक अजीब विरुद़ा बास अची
- 17:44–17:48जे एक दिस राश्ट्रिया आंतर राश्ट्रिया स्टर पर
- 17:48–17:51साहित्तिक सरवोच्ट समान बातल जार है लगजी
- 17:51–17:53साहित्तिक उच्सव मनोल जार है लगजी
- 17:53–17:56मुदद दो सर दिस मित्ला मेजे साहित्ते कार
- 17:56–18:00अपन भाशा अशास्त्रिया संगीत ले लडी रहल चती
- 18:00–18:02अग्रालेल कोनो सरकारी लिएवच्तान नहें जे.
- 18:02–18:03बिलकुल.
- 18:03–18:08एक दिस भारत का टकनीक चान्द पर चंद्रयान पुजाव रहल अची,
- 18:08–18:09मुदद दोसर देज जमीन पर,
- 18:09–18:13पचास वषके बादु एक्ता नदीक एकस्पार बहचुकिल,
- 18:13–18:15तदबन्त के मजबुत करवा किच्छा सकती नया ची
- 18:15–18:19ये विदंबना वास्तब में उही समय का समपुन भारत का याठारत है ची
- 18:20–18:23और संगे संग एई अंक में मुमबैक आतंक्वादी हमला
- 18:24–18:27जे छब भी सिगारा के भेल चलो उक्रो जिक्र आची
- 18:27–18:29अद पुर देशके हिलादेने चलो
- 18:29–18:30नन पुर देशके हिलादेने चलो
- 18:30–18:30नन पुर देशके हिलादेने चलो
- 18:30–18:31नन पुर देशके हिलादेने चलो
- 18:31–18:31नन पुर देशके हिलादेने चलो
- 18:31–18:31नन पुर देशके हिलादेने चलो
- 18:31–18:32नन पुर देशके हिलादेने चलो
- 18:32–18:39अपना अब आपन अब़े के जे श्रदानजली देल गेल अची औदेखावे तची जे इसमें राश़् लेल कतिक पैग उठल पुठल के चल,
- 18:39–18:44एक दिस कोसी के बाडिग विवीशिका जटे लोक आपन गर आगन हेरा रहल चला.
- 18:44–18:47दो सर्दिस मुमबई में आतंकवाद से संधर्ष्
- 18:47–18:50जते लोक आपन प्रानक आहुती दे रहल चला
- 18:50–18:53आत्ते सर्दिस अंतरिक्ष आखेल में
- 18:53–18:55राश्रिय गवरव जि देशके उमीद दरहल चल.
- 18:55–18:58बूजवजे य पत्रिका जगन य सब गतना के
- 18:58–19:01इक कद्धा कका प्रस्तूट करेत थाची
- 19:01–19:02ते इस सही आर्ठ में
- 19:02–19:05एक ता जीवन्त ताईं कैप्सूल बनी जाए थाची
- 19:05–19:08मुदा एक ते हमरा एक ता बातक प्रशंसा करे परत
- 19:08–19:08की
- 19:08–19:10स्रोत सामगरी में
- 19:10–19:12कोसी वकोनो विखलता कलेल
- 19:12–19:14कोनो राजनेतिक दलक आलोचना
- 19:14–19:16वब प्रशन्सा नहीं केल गेल गछी
- 19:16–19:18इब बहुत निश्पक शुरूप से
- 19:18–19:20केवल शासन तन्तरक विफलता
- 19:20–19:23अक्केंद्र राज्ग नीतिगत कमी के दिखावे तची
- 19:23–19:24इग्दम
- 19:24–19:26इग्दा विषुध दविष्लिषन आची
- 19:26–19:28बादेक समय में
- 19:28–19:29इस्कूल कोलज में
- 19:29–19:35गर्मिक छुट्टिक बदला बादिक छुट्टी दबाक जे व्यवाहारिक सुजाओ एह में देलगे लची
- 19:35–19:39उजन जीवन अक यतार्त सज्जुल सोच के देखावैं तची
- 19:39–19:44जे दिल्लिक वातानु कुलित कमरा में बैसल योजना कार नहीं सोची सके चे छे थी
- 19:44–19:47आँ, उ ग्राँई र्यालिति आची.
- 19:47–19:51तजेहन हमर उद्देश शिचल आएक इगाहन विमर्ष
- 19:51–19:55हम्रा सब के विदेज को ही दिजिटल क्रान्ती सलोग को
- 19:55–19:59विद्यापतिक विलुप्त होएच शास्त्रिय दून्दरी पहुच्लक.
- 19:59–20:03राज्मोंजाग साहितिक भिबाकी के परखलों
- 20:03–20:10एक्दम अकोषिक भ्यावत रास्दिक पच्ध्हांकः पच्च्चास वरस्कलाल फीता साही के देख्लों
- 20:10–20:14अगर निरमान मात्र इटा पाथरक मकान से नहीं होईताची
- 20:14–20:16अगर वाद्र अगर पतन कोना होईताची
- 20:16–20:18अगर निरमान मात्र इटा पाथरक मकान से नहीं होईताची
- 20:18–20:20उक्रो एक ता अबूद्पृर यात्रा के लो
- 20:20–20:23इजे ग्यान हम सभ आई ए स्रोथ सप्राप्त के लो
- 20:23–20:27उसमाजक लेल मात्र किचु पुरान गटनाक सुचना नही आची
- 20:27–20:30इघ्हम्रा सब के इबुज्वाक मोका देत ची
- 20:30–20:34जे कुनो समाजक निर्मान वा उकर पतन कोना होई तची
- 20:34–20:39अगर निर्मान मात्र इधा पात्धरक मकान से नहीं होई तची
- 20:39–20:43उकर निर्मान होई तची आपन भाशाक सन्रक्षन से
- 20:43–20:46आपन कला अ संगी तक सम्मान से
- 20:46–20:51आपन मुल भूड दाचा जिना बाद, नहीर आन नीतिक मजबूती से
- 20:51–20:55जकन एमे से कोनु एक ता कھम्बा कमजोर होई तची
- 20:55–20:58तची समाज्क सवरूत दग्मगा जाई तचे
- 20:58–21:02जक्रा हम सब कोसिक भाडी आर राम रांगजी क पीडा मे देख लहूँ.
- 21:02–21:04बलकुल सही बात.
- 21:04–21:07आब ए विमर्श्छ से विदालिबाक समयावी गे लच्छे,
- 21:07–21:12मुदा राज मोहनजा को अबात हम्रा बार बार मोन पडे रहल चे,
- 21:12–21:17उ कहने चला हा जजते एक बहुतिक सुक्स विदा बड़ल नैतिक मुल्यक हरास भेल.
- 21:17–21:47आई, ये गब आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आ�
- 21:47–21:54जते हमरा सबखलगस सुचना कबाड अचे, तकनिक कबहरमार अचे, यूनिकोड अचे, इंटनेट अचे,
- 21:54–22:00की हम सब आपन भाशा असंसक्रिती के वास्तव में जीवित राखी रहो लची?
- 22:00–22:06आप वा मात्र अग्रा दिजिटल आरकाय में एक टा दिजिटल मुज्यम कवस्तू में बडली रहल ची?
- 22:06–22:12ये एक टा एहन प्रष्न ची जक्रापर समाजेक गंभीता सा विचार करभा कावषकता एची.
- 22:12–22:16जे की ये तकनिक हमर कलाक आत्मा के बचार रहल ची,
- 22:16–22:20वा बस वो कर एक स्रे निकाली का सहेज रहल अची
- 22:20–22:22जकर भीतर प्राड नहीं अची
- 22:22–22:24एक रपर विचार ज़ोर का इलजाए
- 22:24–22:27हमर यी विमर्ष सुन्बाकलेल बहुत-बहुत दन्नेवाद
Plain text
वर्ष 2008, जगन भारतक चंद्र्यान एक चान्दक कक्षादरी पहुच रहल चला, विश्वनात आनन्द, शत्रनजक विष्व चामप्यन्षिप जीत रहल चला, मने राश्ट्री इस्टर पर पैक पैक साहित्टिक पुस्कार गूश्ना बहरहल चल. आप, आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� समर्पित लोक एक ता प्राचीन भाशा अवकर सहित्यक के अंटरनेट पर बचाई विकलेल एक ता अबहुत पूर्व संगर्ष करहल चला ता स्वागत अजी आहा सबख हमरे स्गेर अनवेशवेश्ड में आई हम सब एक तब बहुत गेर अप प्रासंगिक स्रोट सामगरी पर विमर्ष करहल ची. ये आची विदे है, यी पत्रिका, मने मेठिलीक प्रथम पाक्षिक यी पत्रिका, और उकर मुद्रित रुप सदे है. बूजु जे एकोनो सादारन पत्रिकाक पन्ना नहीं अचे हम्रा लेल ये एक ता ताइम क्यब्सूल्जका आचे हमर आई दे एक जी हम सभ एबूजी जे कोना एक प्राचीन भाशा आदूनिक तकनीकक संगे अपन अस्तित्वक लेल लडी रहल अचे आ, कोना साहिट्य, संगीत, अप्राक्रोटिक आप्दाक संगर्ष्श से, कोना समाजक निरमाड वब पतन होईत आच्छे. एक दम सही कहलू, इश्रोट समक्री वास्तब में हम्रा सब के एक तब वहपक जित्र देखार हा लगा ची. सादारनतिया होईत की अची, जे इतिहास के बस एक ता मुक दस्तावेज मानिलिल जाईत चे. मुदा विदेहे का इ अंग, जे मुख्हि रूप से 2008 और 2009 काल काल काचे, उ उस्पस्ट करेत अचे जे कोना तकनिक, संस्क्रिति अस्स्वरकारी नीति सब के एक दोस्रा से सीदा सरो का रची. आप, मने एही में भाशाक अंटनेट पर अटियासे कुपस्तिति के कता आचे. गजेंद्र ताकृर, नागेंद्र कुमारजा, अविद्यानन्द जाजी दुरा कैलगेल मेठली अंग्रेजी शब्द्कोष्का महा यग्या अचे, पन्दित रामाशीष, जार रामरंग, आर राज्मोहन जासन दिगगच के विचार अचे, अवकर संगे संग कोसिक उही भ्यावा ध्रास्दीक प्रमानेक विष्लेशन से होए चे. तार से समजगद ची. जखन कोनो प्राचीन भाशा अपना पारमपरिक गाम गरक, च्योपाल वा भोज पत्र से निकल के, इंटरनेट जगा आदूनिक पतल पर अबई तची तवो कर यात्रा कहन होई तची इस उच्ते गजब लागगे तची इब भद रोचक यात्रा आचे जो हम सव, 2000 इस वी का असपास के बात करी तो उईंटरनेटक एक दम शुर्वाती दोडचल आपन अपन उई आज्वस्थता आडामक समय में और इंटरनेट पर मेठलिक उपस्तिती दर्ज करेबाक प्रैःश शुरुकेलनी शुरु मे तो यहु जीो सिटीज पर साइट बनौल गिल मुदा उसब मुझ्त साइट तक इचे दिन में दिलीट भजगई चलना अगर उद्टा अद्टा प्रज़ाई तो बज़ा प्रज़ाई चल ना अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अग भाल सरीक गाच मने ।वीदे ।ट्कोम दोमेन अस्तित्मे आँल इंट्रनेटक विशाल पतल पर मेत्लिक प्रत्हम अदिकारिक वेब उपस्तितिक रूप में बहुत अतिहासिक कदम चल बाप्रे, 2004 में आएकर प्रभाओ एतेक व्यापक भेल चे एक जनवरी 2009 के जखन विदे इपत्रिकाग पचीसम अंख प्रकाषित भेल तो अकर आक्डा आश्चर जनक चल कते क्लोग देखिल नुक्रा मात्र 1 वर्ष में, मैंगे 2008 में, इसाइट सथटर देशक, चैसवक्तिधवटर अस्थान से एक लाक च्टीस हज्टार अच्टर भेड देखाल गल. आश्चर रे आची. इआख्डा उही समय के हिसाव से, बोहुत पेग आची. मुदा एहा, हमरा स्रोट सामागरी के उही हिस्सा से बेसी उट्सुक्ता बेरा लची, जते मैठली अंग्रेजी शब्द कोश आप पंजी प्रबंद का निर्मान का बात कहल गल ज़ाची. आप उईट्ता अलक स्थरक काज्षल. इते एक तकनी की शब्द को प्योग भेलाची उनी कोड मैपिंग अ तिरुता सा देवनागरी लिप्यान्तरन हमरे भुजहाओ, जे इनी कोड मैपिंग वास्तव में बाशाक लिए की काज करेता ची माने जे पहलेग फाँथ हो इच्छल, उहिसा ये लग कोना आची इब बहुत महत पुरन बात अचे दिखू, यूनिकोट से पहलेक समय में जगन लोक कमपुटर पर कुनोक छित्र यबहाशा लिके चला तवास्तव में उहो केवल एक ता चित्र वा दिसाईईजें होई चल माने उकर कोनो दिजितल वाल्यू नहीं चल इक्दम नहीं, जा आहा आपन कम्ठूर पर कुनो खास फाँथ में मैठली में की चू लिख लाओं आद दूस्रा व्यक्ती के एमेल के लाओं आजा अकर कम्ठूर में अई फाँथ नहीं आचे, तो उक्रा केवल की चू चूकोर दिभबा वाम आने कच्राजगा का दे खाओत बेल जे जा आहा मैठलीक कोनो अक्छर युनिकोड मे लिखे ची तो दून्या कोनो भी कमपुटर वा मोबाल उक्रा उही अक्छरक रूप में पहचानत. आप विदे ही काज कर कड, मैठलीक के अंट्रनेटक मुख्धारा में लाभी देलग. बिलकल. आब भूजल हूँ, आईजे तिरहुता से देवनागरी लिप्यान्तरन काजबेल, अकर की आथ चल? तिरहुता ता हमर पुरान लिपी आची नहीं। आआ, तिरहुता मैठलीक आपन प्राछीन लिपी आची, जख्रा मित्यलाक्षर से हो कहल जाईता चे. अमर सब के पैक प्राचीन पोठी आपनजी जे मने वनसावलिक रिकोड चे, उसब तिरहुता में ताल पत्र वा भोजपत्र पर लिख हल अचे. मुदा आदूनिक पीडी तदेवनागरी पड़ेट चे, तिरहुता तई बहुत कम लोग जनेच फीज. यह तब आत आचे तगजेंदर ठाकूर पंजिकार विद्यानन्द जाजी जे काजकेलनी उईचल जे उही पुरान पोथी सब के दिजितल इमेजिं मने सकनिंग केल गेल आफ फेर उक्रा तिरहुता से देव नागरी में लिप्यान्तरन कर लगेल जाई से आदूनिक पात्ख उक्रा पडिसकती इत तश्छ्मुज भगीरत प्रैयाश्चल राई, सोलाग हन्द में शब्द कोश बनावल गेल जते कमपूटर अविग्यानक शब्दावली से हो गड़ल गेल आई यस सब को मुज सरकारी संस्ता नहीं कि कि खिल समर्पित लोग आपन स्थर पर कार अजला इब भद प्रेरना दाया कचे मुदा एता हमार एक ता प्रष्न चे आजम्रा लागाई तचे जे पुछा बहुत जरूरी आचे आजम्पुछु श्रोथ सामग्री कहत ची जे ये एक ता विकिंद्रिक्री सहित्तिक आन्दोलन चल जे ते प्रकाशक अपाट्धक बीचक दूरी कतम बहुगेल. मुदा जगन अंट्रनेट पर भिना कोन समपादकक वा गेट की परक, रोक तोकक लोक लिखाई लागल, तक की एक्रा से साहित्ते कस्तर नहीं कहसल मैं कोनो चननी ने रहला से इत फ्री फ्रोल बहुगेल है थे येक ता सबहावी काशंका आज है मुदा एही स्रोथ समगरेक परप्रेक्ष्चचन देखी तो उही समेख ता पाग मिथाखी चल जे मैठ्री में जे लिख़च्छतें से उक्रा पड़ेच्छतें माने पात्ख आलेखख एक छोट चीन गुट्चल एक दम अगी एक अदिकार के तोड़ दिलक विकेंद्री करन का अर्थ एई नहीं चल, जो गुणवत्ता कहसी गेल बलकी एकर अर्थ एच्छल, जे प्रतिबा दूर दराजा गाँ मेवा विदेश मेवैसल चल, जक्रा कोनो पत्रिका चापे लेल तयान नई चल, उक्रा एक्ता मन्च बहेत गेल. तसाहित ते एक्ता चोट का गेरा से निक्ली कर वेश्विग बहो गेल? आप यह यह एकर सबसे निक बाथ चल मुदा राज्मोहन जा जे एईस रोट समगरी मा बात उठाएट चतिन और हमरा सोचे बात मजबोर को रही तच्छे तकनिक तब आशा के एक देध ड़ाउ दे लग मुदा प्रान तध संस्क्रती मबसे तच्छी बेल्कुल सही बात और जाज महन्जाग जे सान्स्क्रतिक अन्नेटिक शरनक चिन्ता आचे उकोनो शुन्यमने भहुर हो रहा ल्चल इसान्स्क्रतिक पतन आउपेख्षा उही विवस्तागत उपेख्षाक सीथा प्रती रूप चे जे हम सब ए पत्रिकाक दोसर खण्ड में देखाएच्छी अपकने का भी जाएच्छी मित्लाक संगीत शाहित्यपर आँ उब बड्द मार में खण्डच्छी विदे हमें स्वर्गी या पन्दित रामाशेष्जा राम्रंक कजे सक्षात्कार आच्छे उ अई अई प्ष्ट रूप्से संगीत क दोहनक बात करे तच्ट रामरंग जीक उ सक्षात कार बहुत गंभी रच उ विद्यापती गीट के मुख्य रूपस दू भागम बाटे च्टन पहिल अची पद गायन शेली जे पुनरुप्स शास्त्रिये वा आर्द्शास्त्रिय आच्छ एकर कोनो उदारन आच्छ श्रोद सामगरी में? आच्छ जिना नंद्क नंदन कदम बक्तरुतर इु रच्ना आएच जक्रा में राग आ तालक कथोर नियम आच्छ अदुसर इच लोक वा ग्रामीन संगीत जना उगनारे मुर कती गिला आँ इट जनजन के कंच में आचे भिल्कु ता रामरंग जी का चिन्ता इएच जे विद्ध्यापतिक जे ग्रामीन गीट आच अखराता महिला सब अगामक लोक बडनीग जगा अपने लोक कंठ में सुरक्षित रक्षत रहा लेज. मुदा जे शास्त्रिया शेली करचना आईज अगर गयन उजरा रहा लेज. एत छिंताख विशय आचे. अ, मित्छिला वर्त्मान में शास्त्रिय संगीत सशुन्य भ़र रहलेज मुदाएकर कारन की आचे, जे विद्यापती समपुरन मित्छिलाक प्रान चती, उनकर शास्त्रिय संगीत अचानक सविलुप्त कोना भ़र रहलेज एकर कारन बहुत सब च्छतेज, जे रामरंग जी बतवएच्छती पलायन आद उपभोकता वाद पन्दित रामच्टर मल्लिक आपन्दित स्याराम तिवारी जका दिगगज लोकनिक जे द्रुपच्शेली वा शास्त्रिय परमपर अच्छल, अख्रा अगला पीडी ने अपना सकल. मरे नवका पीडी उक्रा में समझ ने दे बचाहात अचे. आश्ँंगे संग, रामरंग जी एक ता कतु याठार्द ददेस इसारा करे चती. उक एच छतीन जिस समपुरन भारत में अपन संसक्रिती के चूरे में जे तेक मेठिलग वाल चातिन तिना आन कुनो देशक लोक नाए. बाप्रे, ये तो बहुत कढवा सत्या चे. जे लोग मित्ला सा बाहर गेला हा, रोजगार अख्लेल वाशिक्चाख लेल, वो आपन मात्री बाशा से एक दम कडी गेला. उनका मम्मी ड़ादी संस्क्रितिक चकर में इक है में गर वोईच्छनी जे हमर बच्चा कि ता मैठली बाजब नाभई च्यक इस च्छ मुछ बहुत दुखगद आची आआ इ मात्र संगी तक छिंता नया जे राज मोहन जा जिनका विदेख का श्रोट समगरी में बोद समान 2009 बेद्बा कुलेक है रूँगर जे साख्शात कार आचे उता साहित टिक वर्तमान अस्तितिपर बहुत बडगा प्रश्न चिन लगा दिताची राज मोहन जीग बात एक दम सपष्त आचे रूँगर माना बचीजे जहीना जहीना बवाद्या बहुतिक सुख्सविधा बद़ल अचे, समाज में उच्णैट्णेग मुल्ले का राज भेल अचे, मुदा एही से भेशी उ समिक्षा और समालोचनाक जे आदूनिक इस्तितिया चे, उख्रापर जे बिबाक टिपनी किलनी आचे उबआद द्यानाक्रिष्ट करेता चे राज मोहन जाजी कहबईच जे आएकाल हिक समिक्षा खुलल द्रिष्टी से नहीभ हो रहलाच लोक ततस्त आ निश्पक्ष नहीं चतीन समिक्षक आपन राग्द्वेश आपुर्वाग्र सग्रस्छतिन माने, इत आहन भोगे लन, जना आदूनिक सहित समिक्षा एक ता प्रवेट्ख्लब वा इको चेमबर बनी गेल होए एक दम सही शबदक प्रियोग कलूहा जटे लोग खाली आपन गुटक्वा आपन मित्रक पीट खोगाएज्चष्धिन जक्रा साहाक विचार नहीं मिलगताची वोकर रचना कतबोनी क्वाई वोकर दरकिनार कर देल जाताची इक ता आहने काँगी द्रिष्टी आची जदे रच्ना के गुण्दोषक आदार पर नहीं बलकी गुट्बाजीक आदार पर मुल्यांकन भारो हल अची इक कलब वली मान्सिकता सहिते कले लेल जहर ची राम्रंगजीक शब्द में विद्ध्यापतिक गीत मात्र मनुरंजन नही अची इं मित्लाक परीचे पत्र चे राग, परीचे पत्र कतिक नीक बात कहलनी जए परीचे पत्र हेरागेल जए खला गुट्बाजी अब रोतिक तक भेंट चडीगेल ता आहाक भाशा मात्र इंटरनेट का दिक्षनरी में सुरक्षित रोग के की करत? उ करात्मा तं मरी चुकल रहत् एक दम टीक कहल हूँ आ यहे उ भिन्दू अची जते हमरा लागे तची जे इश्वोट समगरी अपन सबसन महत्वपून पक्ष दिस अवए तची राम रंग जी आ राज मोहनजा जे एही संस्क्रितिक अवेचारिक शरन के बात कोर हल चला औओ उजी समवे भहल हल चल जकन मित्ला के माटी एक ता आखल्पनिय प्रक्रितिक अव्यवस्तागत त्रास्दी सजुज रहल चल आप उग, उग, 2008 कोसी कबाड बलकुल, संस्क्रिति और कलाक पतन का कता अचानक से जीवन आम नण का संगर्ष में बड़ी जाएत अची, जगन हम सब 2008 कखोसी बाड़ का विवरन परभए ची. 18 अगस् 2008. इदिति थी मिठिला का पुरा भारत का इतिहास में एक तक कर्या दिन के रूप में दर जाची. निपाल का कुशाह में कोसी का पूरवी तदबंद तुतल. श्रोथ समक्री में नासा का सेतलाइट चित्र का जे विष्लेशन आची, उ दिखार हो लग ची, जे कोसी आपन पुरान दार सदूसो किलमिटर दूर एक ता सरवता नावदार पक्री ले ले ले. दूसो किलमिटर? राँ, इकोन यो सादारन प्रक्रतिग बाना नेचल, इक ता मानाव निरमित प्रलैचल, जकर पाचा प्चास वर्षक नीतिगत विफलता अलल पितः शाही चल इक्रा कनेक विस्तार सशमजू, जे इददबन्द तुटलक कोना, कारन्द बाडध कोसी में हमेशा सो अबेच चल, इदूहाजार आप में भेल, उकर तकनी की और राजनी तिक कारन्ग की चल. स्रोथ सामद्री एकर बहुत स्पष्ट उत्तर देताची बारत आनेपाल के सीमा पर जे भिमनगर भैराज बनल चल, उ उनीस्व्ववन मे बनल चल उकर जे आयु वा म्या तैकेल गेल चल, उ मातर तीस वर्ष्चल रूकु रूकु एक मिनेट माने जे बैराज आईटावन में बनल अटीस सालक मियाच्छल तो उनीस्ट्टासी में एकसपार बहुगेल? एक दम अटासी में अबैराज अपन तकनी की जीवन समापत कर चुकल चल सरकार के इबात पताचल एहलेल 1966 में कूर सेन आयोग एक्ता विकल्प के रूप में दग्मारा बैराज बने बाग प्रस्ताव देने चल. तफ्फिर उ बनल के एकना? उ दग्मारा बैराज कहीो नहीं बनल. उ राजनितिक लाल फीता शाही. बारता निपाल के आपसी सन्श्याय और केंद्र अ राज्य सरकार के बीच पायलेल ताना तानी में उजरा गेल बाप्रे इत यत सीथा सीथा लापर वाही आची नतीजा ये भेल जे एक ता एकसपार भोच्षुकल तदबंद पर बीसवश्दरी कोसिक पुरा दबावरहल आ अंतह दूहाजार आप में तूटीगेल जे ततबंद उनीस्ट्टासी में रेटायर भाज़े बखचाही चेल अख्रापर दूहाजार आप में लाको लोकक जीवन तिकायल जेल इत सीथा सीथा हत्याक प्र्यास जकान ची आए दे स्रोथ समागरी में एं विश्वेशरीया का जे उदारन देल गयला ची उबहुत सतीक लागे दची आप विश्वेश्वराईया जी के उदारन एक दम आखी खोले वाला ची उ जे क्रिष्नराज सागर बान्द बनेने चला उकर प्रक्रिया की चल? जे एकर तुलना एक टेल गयला ची? देखु, विष्विष्वरया बारत का महांतम अजिन्ँर चला जकन उ कावेरी नदी पर क्रिष्नराज सागर बानेने चला तो उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई तदबन्द्सं करे थी तक्की देखा बैतची कोसिक ब्रस्ट तदबन्द निरमाड में तेके दार आ आवियंताक मिली भगत सां कच्चा काजभेल बालुक बूरिक बडला में ब्रस्ट चारभेल तई अस्पष्ट बहजाइत ची जि समस्या कोसी नदिक पानी मनही, बलकी हमर वेवस्ताक नियत मिचल. इबहत पएग अंतर विरोद है ची. और जो हम एही पत्रिकाक उही अंककक राश्ट्रिये अ अंतर अपरिद्रिष्य दिस दिस देखी, ते इई अंतर विरोद और गेहर ब हो जाए तची. अग दिस हम पडे ची जे भारत कचंद्रयान एक सब्ठलता पूर्वक चान्दक कच्चामे पहुज गे लच्छे. अग अन्तरिक्ष में हम सब जंडागार रहल ची. एक दम विष्वनात आनद, शत्रनजक विष्व चंप्यंष्प जीत रहल चतिन. अर्विन्द अदिगा के हुंकर उपन्यास दवाईट ताइगर लेल मैंबुकर पूरसकार भेटी रहल चनी अस सब से महतपों एही काल कहन्द में भारतक सरवोच सहेट्टिक समान ज्यान पीट पूरसकार अलग अलक भाशाक दिगगज सहतेकार लोकनी के देल जार है लग ची हाँ स्रोथ सामगरी अगर विस्त्रत सुची दैद अची चालिस्मा ज्यान पीट पूरसकार कशमीरी कवी रहमान रही के भेटे चनी एक चालिस्मा कूर नारायन के और ब्यालिस्मा ग्यान पीट सन्युक्त रूप से कुंकनी के रविंद्र के लेकर और संस्क्रित के सत्यवरत शास्त्री के दिल जादची आई ये हमर मुख्यविन्दू अचे इग कतिक अजीब विरुद़ा बास अची जे एक दिस राश्ट्रिया आंतर राश्ट्रिया स्टर पर साहित्तिक सरवोच्ट समान बातल जार है लगजी साहित्तिक उच्सव मनोल जार है लगजी मुदद दो सर दिस मित्ला मेजे साहित्ते कार अपन भाशा अशास्त्रिया संगीत ले लडी रहल चती अग्रालेल कोनो सरकारी लिएवच्तान नहें जे. बिलकुल. एक दिस भारत का टकनीक चान्द पर चंद्रयान पुजाव रहल अची, मुदद दोसर देज जमीन पर, पचास वषके बादु एक्ता नदीक एकस्पार बहचुकिल, तदबन्त के मजबुत करवा किच्छा सकती नया ची ये विदंबना वास्तब में उही समय का समपुन भारत का याठारत है ची और संगे संग एई अंक में मुमबैक आतंक्वादी हमला जे छब भी सिगारा के भेल चलो उक्रो जिक्र आची अद पुर देशके हिलादेने चलो नन पुर देशके हिलादेने चलो नन पुर देशके हिलादेने चलो नन पुर देशके हिलादेने चलो नन पुर देशके हिलादेने चलो नन पुर देशके हिलादेने चलो नन पुर देशके हिलादेने चलो अपना अब आपन अब़े के जे श्रदानजली देल गेल अची औदेखावे तची जे इसमें राश़् लेल कतिक पैग उठल पुठल के चल, एक दिस कोसी के बाडिग विवीशिका जटे लोक आपन गर आगन हेरा रहल चला. दो सर्दिस मुमबई में आतंकवाद से संधर्ष् जते लोक आपन प्रानक आहुती दे रहल चला आत्ते सर्दिस अंतरिक्ष आखेल में राश्रिय गवरव जि देशके उमीद दरहल चल. बूजवजे य पत्रिका जगन य सब गतना के इक कद्धा कका प्रस्तूट करेत थाची ते इस सही आर्ठ में एक ता जीवन्त ताईं कैप्सूल बनी जाए थाची मुदा एक ते हमरा एक ता बातक प्रशंसा करे परत की स्रोत सामगरी में कोसी वकोनो विखलता कलेल कोनो राजनेतिक दलक आलोचना वब प्रशन्सा नहीं केल गेल गछी इब बहुत निश्पक शुरूप से केवल शासन तन्तरक विफलता अक्केंद्र राज्ग नीतिगत कमी के दिखावे तची इग्दम इग्दा विषुध दविष्लिषन आची बादेक समय में इस्कूल कोलज में गर्मिक छुट्टिक बदला बादिक छुट्टी दबाक जे व्यवाहारिक सुजाओ एह में देलगे लची उजन जीवन अक यतार्त सज्जुल सोच के देखावैं तची जे दिल्लिक वातानु कुलित कमरा में बैसल योजना कार नहीं सोची सके चे छे थी आँ, उ ग्राँई र्यालिति आची. तजेहन हमर उद्देश शिचल आएक इगाहन विमर्ष हम्रा सब के विदेज को ही दिजिटल क्रान्ती सलोग को विद्यापतिक विलुप्त होएच शास्त्रिय दून्दरी पहुच्लक. राज्मोंजाग साहितिक भिबाकी के परखलों एक्दम अकोषिक भ्यावत रास्दिक पच्ध्हांकः पच्च्चास वरस्कलाल फीता साही के देख्लों अगर निरमान मात्र इटा पाथरक मकान से नहीं होईताची अगर वाद्र अगर पतन कोना होईताची अगर निरमान मात्र इटा पाथरक मकान से नहीं होईताची उक्रो एक ता अबूद्पृर यात्रा के लो इजे ग्यान हम सभ आई ए स्रोथ सप्राप्त के लो उसमाजक लेल मात्र किचु पुरान गटनाक सुचना नही आची इघ्हम्रा सब के इबुज्वाक मोका देत ची जे कुनो समाजक निर्मान वा उकर पतन कोना होई तची अगर निर्मान मात्र इधा पात्धरक मकान से नहीं होई तची उकर निर्मान होई तची आपन भाशाक सन्रक्षन से आपन कला अ संगी तक सम्मान से आपन मुल भूड दाचा जिना बाद, नहीर आन नीतिक मजबूती से जकन एमे से कोनु एक ता कھम्बा कमजोर होई तची तची समाज्क सवरूत दग्मगा जाई तचे जक्रा हम सब कोसिक भाडी आर राम रांगजी क पीडा मे देख लहूँ. बलकुल सही बात. आब ए विमर्श्छ से विदालिबाक समयावी गे लच्छे, मुदा राज मोहनजा को अबात हम्रा बार बार मोन पडे रहल चे, उ कहने चला हा जजते एक बहुतिक सुक्स विदा बड़ल नैतिक मुल्यक हरास भेल. आई, ये गब आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आई आ� जते हमरा सबखलगस सुचना कबाड अचे, तकनिक कबहरमार अचे, यूनिकोड अचे, इंटनेट अचे, की हम सब आपन भाशा असंसक्रिती के वास्तव में जीवित राखी रहो लची? आप वा मात्र अग्रा दिजिटल आरकाय में एक टा दिजिटल मुज्यम कवस्तू में बडली रहल ची? ये एक टा एहन प्रष्न ची जक्रापर समाजेक गंभीता सा विचार करभा कावषकता एची. जे की ये तकनिक हमर कलाक आत्मा के बचार रहल ची, वा बस वो कर एक स्रे निकाली का सहेज रहल अची जकर भीतर प्राड नहीं अची एक रपर विचार ज़ोर का इलजाए हमर यी विमर्ष सुन्बाकलेल बहुत-बहुत दन्नेवाद