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ओम_आ_मंशाक_गजब_दोस्ती.m4a
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- 0:00–0:07आए, हम गजेंद्र ताकुरक लिखल चर्चित कता, बाल गुरुकर एक ता द्रुट् संकलन लोके आए जी.
- 0:07–0:12दिल्ली कर एक ता आवासी अपाट्मेंट में रचल इगआप आहाके दिखावत,
- 0:12–0:18जि कोना अलग-लग धामक बच्चा सब भीना कोनो भीदबाव के एक्दम पक्का दोस्त बनी जाएत ची.
- 0:19–0:24तपहिले एक ता ओम आमन्शाक गजब डोस्ती पर केंद्रित ची.
- 0:24–0:29सोचु, ओम एक टा एक दम शांत सबहावक मेठिल बच्चा चे आमन्शा.
- 0:29–0:32उएक ता चुल्बूली बातूनी पन्जाभी भूची
- 0:32–0:35दूनुक परवार अलग-लग महला पर रहे थ्छे
- 0:35–0:38मुदा उही चुट्का पार्क में दूनु संगे के लेद
- 0:38–0:41समपून भारत के एक थ्ट्टा को दे तची
- 0:41–0:45ये बिन्नता उनका सबक मित्रता के आवर पक्का बनेजचे
- 0:45–0:50दूसर बात यी कताक एक ता आवर महत्वपोँन हिस्सा चतिन महुवा
- 0:50–0:52जे मन्शाक आया चति
- 0:52–0:56औए उडिशा सायाल चे आदिन रात मन्शाक देख्रे चति
- 0:56–1:03आहा कलपना करु, पारक में मन्शा के जुला जुलैत महुवा जकन आपन गामक गीत गाएत उदास बहुजाएत चति,
- 1:03–1:10तो उकोना एक ता अद्दिश्ष द्हागा जका आपन उपस थितिसा इ अलग-लग संस्क्रति सबखके आपस में जोडके रखे चति.
- 1:10–1:18अंत में कहानी में मोर तक्हना बैत जगन सुसे नामक एक ता जग्डालू बच्चा पारकच शानती भंग को दे तची
- 1:18–1:21उसबसचा शानत उंके तंकरे लागत ची
- 1:21–1:27मुदा आहा के आश्चर्रे लागत तकने अबातुनी मन्शा अम लेल एक्दम दाल बनके तार्भ हो जाएत ची.
- 1:28–1:32एक ता बद्मास कर अगाडी अपन दूस्तक रक्षक बनब कतिक नीक लागे च्छै नहीं.
- 1:32–1:37तो कुल मिलाक बातीच है, जे दोस्ती ककरो शिक्हावल नहीं जाईताची,
- 1:37–1:42इत संकत कि समय में बिना कोनो भेद्बाव के अपने जन्मी जाईताची.
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आए, हम गजेंद्र ताकुरक लिखल चर्चित कता, बाल गुरुकर एक ता द्रुट् संकलन लोके आए जी. दिल्ली कर एक ता आवासी अपाट्मेंट में रचल इगआप आहाके दिखावत, जि कोना अलग-लग धामक बच्चा सब भीना कोनो भीदबाव के एक्दम पक्का दोस्त बनी जाएत ची. तपहिले एक ता ओम आमन्शाक गजब डोस्ती पर केंद्रित ची. सोचु, ओम एक टा एक दम शांत सबहावक मेठिल बच्चा चे आमन्शा. उएक ता चुल्बूली बातूनी पन्जाभी भूची दूनुक परवार अलग-लग महला पर रहे थ्छे मुदा उही चुट्का पार्क में दूनु संगे के लेद समपून भारत के एक थ्ट्टा को दे तची ये बिन्नता उनका सबक मित्रता के आवर पक्का बनेजचे दूसर बात यी कताक एक ता आवर महत्वपोँन हिस्सा चतिन महुवा जे मन्शाक आया चति औए उडिशा सायाल चे आदिन रात मन्शाक देख्रे चति आहा कलपना करु, पारक में मन्शा के जुला जुलैत महुवा जकन आपन गामक गीत गाएत उदास बहुजाएत चति, तो उकोना एक ता अद्दिश्ष द्हागा जका आपन उपस थितिसा इ अलग-लग संस्क्रति सबखके आपस में जोडके रखे चति. अंत में कहानी में मोर तक्हना बैत जगन सुसे नामक एक ता जग्डालू बच्चा पारकच शानती भंग को दे तची उसबसचा शानत उंके तंकरे लागत ची मुदा आहा के आश्चर्रे लागत तकने अबातुनी मन्शा अम लेल एक्दम दाल बनके तार्भ हो जाएत ची. एक ता बद्मास कर अगाडी अपन दूस्तक रक्षक बनब कतिक नीक लागे च्छै नहीं. तो कुल मिलाक बातीच है, जे दोस्ती ककरो शिक्हावल नहीं जाईताची, इत संकत कि समय में बिना कोनो भेद्बाव के अपने जन्मी जाईताची.