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सरकारी_फाइलक_गोहि_आ_मरल_मजदूर.m4a

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Collection
Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
Status
asr-draft
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No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.634008)
Duration
1:57
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  1. 0:00–0:08इगजेंद्र ठाकुरक चर्चित उपन्यास गोही सबक भीच जल समादिक सब से जरूरी बातक एक ता चोट समसार आची.
  2. 0:08–0:16इप मार्मिक पोठी आहांके देखावत, जे किना तथा कथित विकासक पाचु गरी मस्दूरक शोशन चूपल चे.
  3. 0:16–0:23और किना इब्रष्ट विवस्था हुनकर जान गेलाग बादो उक्रा सरकारी फाइलक निचा दवाददद चे
  4. 0:23–0:29तपहिल बात इग गठा गंगा नदी पर बनेद एक ता भिशाल पुल्सा शुरू होएच चे
  5. 0:29–0:34जतटी काज करेद काल सेक्रो मस्दूर कहसी कमरी जाएद छतिन
  6. 0:34–0:38मुदा की आहांके लागत अची सरकारी रजिष्टर मे सबक नाम चे
  7. 0:38–0:43एक दम नही, तीन सो से बेसी मरल लोकक बदला मात्र तीस्टा नाम
  8. 0:43–0:48आब आही सोचु नदी कोही तमात्र देख हाएचे
  9. 0:48–0:54मुदा इ सरकारी पाईलग गोही तलोकक अस्तित्वे काजाए चे, तः असल गोही के भेल,
  10. 0:54–1:03दो सर जखन इ सिस्टम अपन जूट गड़ाइच चे, तखन नंद अरक्षन नामक एक ता इंजिन्यर असल नाम खोजबाक लेड थाड होई चतिन.
  11. 1:03–1:08मुदा सिस्तम उनका आदालत दारीख का जाल में पसा दैच्छे
  12. 1:08–1:16आहा इसो चु जक्ठ ब्यवस्ता सब गवाही मेटा दै तक्ठ की एक ता साव सुत्रा सरकारी कागज सत्ते मानल जाए
  13. 1:16–1:20या उही मरल मस्दूरक चूटल जूता आसल गवाही चे
  14. 1:20–1:34अन्त में जखन मनुश्षक अदालत फेल भाजाइ चे तकन गावक चन्ना गाची में भूद प्रेत और पाने दुभभी जखा एस्ठानिया जलात्मा सब म्रित मस्दुरक नाम बचेबाकलेल कबद्टी खेले च्थिन.
  15. 1:34–1:39सूनी में आजीब लागल हैंँ, मुदा ई प्रक्रतिक उही लोक इस्म्रितिक रूप चे,
  16. 1:39–1:46जे ई सुनिष्चित करेच्छे, जे समाजक दवाल कुछलल लोकक इतिहास कहीो शुन्ये में नहीं बिलाए.
  17. 1:46–1:57कूल मिलाक, मनुशक बनाल कागज बहले ही जुट बाजी लेल, मुदद प्रक्रती आ इतिहाज कोनो सत्यक जल समादी कहीं नहीं होगाए दाए चे.

Plain text

इगजेंद्र ठाकुरक चर्चित उपन्यास गोही सबक भीच जल समादिक सब से जरूरी बातक एक ता चोट समसार आची. इप मार्मिक पोठी आहांके देखावत, जे किना तथा कथित विकासक पाचु गरी मस्दूरक शोशन चूपल चे. और किना इब्रष्ट विवस्था हुनकर जान गेलाग बादो उक्रा सरकारी फाइलक निचा दवाददद चे तपहिल बात इग गठा गंगा नदी पर बनेद एक ता भिशाल पुल्सा शुरू होएच चे जतटी काज करेद काल सेक्रो मस्दूर कहसी कमरी जाएद छतिन मुदा की आहांके लागत अची सरकारी रजिष्टर मे सबक नाम चे एक दम नही, तीन सो से बेसी मरल लोकक बदला मात्र तीस्टा नाम आब आही सोचु नदी कोही तमात्र देख हाएचे मुदा इ सरकारी पाईलग गोही तलोकक अस्तित्वे काजाए चे, तः असल गोही के भेल, दो सर जखन इ सिस्टम अपन जूट गड़ाइच चे, तखन नंद अरक्षन नामक एक ता इंजिन्यर असल नाम खोजबाक लेड थाड होई चतिन. मुदा सिस्तम उनका आदालत दारीख का जाल में पसा दैच्छे आहा इसो चु जक्ठ ब्यवस्ता सब गवाही मेटा दै तक्ठ की एक ता साव सुत्रा सरकारी कागज सत्ते मानल जाए या उही मरल मस्दूरक चूटल जूता आसल गवाही चे अन्त में जखन मनुश्षक अदालत फेल भाजाइ चे तकन गावक चन्ना गाची में भूद प्रेत और पाने दुभभी जखा एस्ठानिया जलात्मा सब म्रित मस्दुरक नाम बचेबाकलेल कबद्टी खेले च्थिन. सूनी में आजीब लागल हैंँ, मुदा ई प्रक्रतिक उही लोक इस्म्रितिक रूप चे, जे ई सुनिष्चित करेच्छे, जे समाजक दवाल कुछलल लोकक इतिहास कहीो शुन्ये में नहीं बिलाए. कूल मिलाक, मनुशक बनाल कागज बहले ही जुट बाजी लेल, मुदद प्रक्रती आ इतिहाज कोनो सत्यक जल समादी कहीं नहीं होगाए दाए चे.

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