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मृच्छकटिकम्_में_गुण_आ_धनक_द्वन्द्व.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:10दिदिबेट में आहाक स्वागत अछि। विमर्शक एही मन्च्पर, जटे हम्रा सब आव विविन्न द्रिष्टि कोण्चा तत्थ्यक विष्लेषन करे चिए.
  2. 0:10–0:13आग, आग, गमभीर विषे सब पर चर्चा करे चिए.
  3. 0:13–0:22भिल्कुल! आई हम्रा सब प्राचीन संस्क्रत साहित द्यक, उ सब स अद्बुत रच्ना, शुद्रक रच्छित म्रिच्ष कतिकम.
  4. 0:22–0:24आदात माटी खिलोना गाडी?
  5. 0:24–0:30आदात माटी खिलोना गाडी, अगरे प्रधम पाच अंक पर चर्चा कर रहल चे.
  6. 0:30–0:37मुदद चर्चासा पहने, आँ, कल्पना करू, जे आँ आँ आँ अपन जीवनक समपुरन समपती,
  7. 0:37–0:42आँपन एक-ेख पाई लोकक भलाई आप परोपकार में दान का देलें.
  8. 0:42–0:44जे की एक ता बहुत आदर्ष्वादी वात अच्छे.
  9. 0:44–0:55इक्दम, मुदबदले में समाज आहाक उही गरीभी के, मतलब चटम महापाप माने लेलक, आहाक मित्र आहासा दूर भोगेला.
  10. 0:55–0:58आहाक समाज आहाके एक ता अप्रादीजका देखे लागल.
  11. 0:58–1:02सही, तहमर विमर्ष्यक केंद्र बिन्दू आई यहा आची.
  12. 1:02–1:07मानव जीवन अ समाज के मुख्ध्य रूप्सा की संचालित करे ताची
  13. 1:07–1:12की व्यक्तिक अंटरनेद गुड़, उकर चरित्र आन नेटिक्ता सर्वो परी आच्छ
  14. 1:12–1:17वाअ, उकर भूटिक आ आर्थिक परिस्थिती उकर भागे तै करे ताची
  15. 1:17–1:19इक ता बहुत पुरान बहेस अची
  16. 1:19–1:20आँ
  17. 1:20–1:36आहम अर स्पश्ट पक्ष याची, जे चारुदत आवसंत सेना का यी कता यी प्रमानित करे तची, जे विशम से विशम भोतिक परस्थितिक बादो विक्तिक अंतर नहीत गुन आजेर अजेए तची.
  18. 1:36–2:06आपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अ�
  19. 2:06–2:09अगर बवाणवी ये नेटिक्ता अन्याई विवाष्ताके नियन्त्रित करी तची
  20. 2:09–2:13आप खाब अची जे नेटिक्ता कुनो महत्वन आई आची
  21. 2:13–2:16हमर कहब आची जे नेटिक्ता एक्ता विलासिता आची
  22. 2:16–2:20जे बिना भोथिक आदारक आए जीवित ने रही सके तची
  23. 2:20–2:21आआ
  24. 2:21–2:24ता आउ एह पर विस्तार से चर्चा करी,
  25. 2:24–2:27जा हम चारु दद्तक चारित्रिक सुद्रूर्ता का देखी,
  26. 2:27–2:31ता उ एक ता एहन ब्राम्मन व्यापारी चती,
  27. 2:31–2:34जे आपन उदारता कारन दरिद्र भही चुकल चती.
  28. 2:34–2:36दरिद्र? आए एक दम असहाए?
  29. 2:36–2:39मुदा की हुंकर पतन होईता ची?
  30. 2:39–2:44समाजक समान्यन नियमा कनुसारता पतन भोजे बाख चाही चल,
  31. 2:44–2:46मुदा अहन नही होईता ची.
  32. 2:46–2:49हुंकर दरिद्द्था हुंकर मर्यादा के नष्ट नहीं कषकल.
  33. 2:49–2:51हम्रा लागी तची हा?
  34. 2:51–2:53एक मिनेट, हम्रा पूरा करे दीए.
  35. 2:53–2:58उनकर गोन आप्रतिष्टा अद्यापी उज्यनी नगरीक अबुशर मानल जाईतची
  36. 2:58–3:02वसन्त सेना जेहन स्त्री जक्रालक समपूरन सुक्सुविदा आची
  37. 3:03–3:05उदरिद्र चारु दत्दिस आकर्षित हो इच्छती
  38. 3:05–3:09इदहन पर गुड़क्स पष्ट विजेन आई तो और की आच्छी?
  39. 3:09–3:13चमा करब मुदा हम्राई पुरा व्याख्यान बहुत आदर्ष्वादी लागी रहल आच्छे.
  40. 3:13–3:15आदर्ष्वादी? कोना?
  41. 3:15–3:18मतलब श्रोता सब से हो सुची रहल होता,
  42. 3:18–3:21जे इदकोनु सिन्माक कहनीजा का बहुगेल,
  43. 3:21–3:23जते गरीभ नायक के सब सम्मान देता चिक,
  44. 3:23–3:26मुदा शुद्रक को उजयनी एते खसरल नहीं आची,
  45. 3:26–3:29आहा कही ले जे चारुदद तक पतन नहीं वेल.
  46. 3:29–3:32आ, हा, हा, हुंकर गुडत बचले चल.
  47. 3:32–3:34स्वायम चारोदत्तक समबात पर द्यान दिया,
  48. 3:34–3:38उआपन दरिद्रताके चट्धम महाप पाप कहे च्छती,
  49. 3:38–3:41कि आजा सोचल अची जो ओएहन के च्छती?
  50. 3:41–3:43आज, कारनो उ दूखी च्छतीन,
  51. 3:43–3:45आपन मित्र सब कव्यवार से.
  52. 3:46–3:46भिल्कुल,
  53. 3:46–3:51के एक त समाज उक्रा दरिद्र हेबाख करन एक त अप्रादिक नजर्या से देखी रहा लाची.
  54. 3:51–3:54उविलाप करे चती जो दरिद्रता कारने,
  55. 3:54–3:58उनकर सब मित्र, केवल एक मेट्रेया के चोडी,
  56. 3:58–4:00उनका समुमोडी लनी अची.
  57. 4:00–4:03अगरा उत समाजग खोट अची चारुदद्टक ने
  58. 4:04–4:06मुदा प्रभाअउत चारुदटक पर पडी रहा ला ची
  59. 4:07–4:10उस पश्ट कहे चती जो दरद्र मनुश लज्जित रहे ता ची
  60. 4:10–4:13उक्रा जीवन एक ता जीवएट लाश जका बहुजाई ता ची
  61. 4:13–4:19जगुन एतेक शक्तिशाली चल, तो समाज के चारु दद्तक सम्मान करवासे केक नरोकी सकल.
  62. 4:19–4:23हमहाके बाद्भुज रहल ची, मुदा आश्विलाक के की एक विस्रे जाएची.
  63. 4:23–4:26शर्विलक एक ता कुलीन ब्राम्हन आची
  64. 4:26–4:31मुदा परिस्तिटिवाश उजोरी करे ले सिंद्भारे ताची
  65. 4:31–4:33आप चारु दद्टक गरा में
  66. 4:33–4:36तीक आजकनो भीतर प्रवेश करे ताची
  67. 4:36–4:39आजक्चारु दट्टक भ्यंकर गरी दी देखाताची
  68. 4:39–4:41तकनोकर प्रतिक्रिया की होई ताची?
  69. 4:41–4:43उठिटकी जाई ताची?
  70. 4:43–4:44उठिटकाई ताची मुदा?
  71. 4:44–4:48दिकू, जखन मैट्रै नीद मे भाजी रहाल चतें
  72. 4:48–4:52आश्विलक के सुवरन मन्जुशा दारा रहाल चतें
  73. 4:52–4:56तकन शर्विलक के भीट्रक संसकार जाग्रत होई ताची
  74. 4:56–5:02यी दिखावाई तचे, जे चारु दद्तग गोन एक ता चोरक हिर्दैमे से हु देया उपन करे चे.
  75. 5:02–5:08हम्रा एते यहा के रोके पडदत्, आहा कहली एं जे सर्विलक देलूब हो जाई तची.
  76. 5:08–5:12मुदा अंतता अ उकी करे तची, कि उ खाली हाथ कूर जाई तची?
  77. 5:12–5:16अगर तथा कथित संसकार अखरा चोरी करवासे रोकी नहीं सकल.
  78. 5:16–5:19कारन अखरा मदिनिका के मुक्त करावक चल.
  79. 5:19–5:22यह तबात अखरा दहन चाही चल.
  80. 5:22–5:26इठीक अहीना अचे जका मानुज गुन एक ता पुरान सिक्का होए.
  81. 5:26–5:28आहा लाकते को पुरान सिक्का होए,
  82. 5:28–5:34अखरा दन चाही चल ये थीक उहीना आचे जका मानुजे गून एक ता पुरान सिक्का होए
  83. 5:34–5:38आहा लाकते को पुरान सिक्का होए, अखर अटिहासिक महत्वक यहूए
  84. 5:38–5:42मुदा जकन आहा बजार में जाक पानी या अन्न खरी दे चाब
  85. 5:42–5:44तदूकंदार उसिक्का ने लेत
  86. 5:44–5:57इक्दम ने लेत, उक्रा वर्तमान मुद्रा चाही, चारू दद्तक लग गुनका कह जाना आची, मुदा उज्जेनी के समाज में उसिक्का चली ने रहाल ची, शर्विलकक बहुतिक आवश्षकता उकर नेतिकता परहावी भोगला.
  87. 5:57–6:00इपुरान सिक्का वाला विचार रोचा कची
  88. 6:00–6:02मुदा हम्रा लगे तची
  89. 6:02–6:04जे आहा वसन्सेना क्पात्रक के
  90. 6:04–6:08एही संदर में नजर अंदास कर अहल ची
  91. 6:08–6:10नजर अंदाज कोना
  92. 6:10–6:14जोन समाज में गुडक सिक्का आमान्यबा चुकल चल
  93. 6:14–6:18तवस्शन्ट्सेना चारु दद्तक गुडके की अक स्विकार करे च्छती?
  94. 6:18–6:24उत प्रमानित करे च्छती, जे प्रेम आ आदर दहन से नहीं कहरीदल जासके तचे.
  95. 6:24–6:27मुदा वस्शन्ट्सेना के स्थिती भिन्न अची?
  96. 6:27–6:29एक मिनेट, सूनी लियो.
  97. 6:29–6:34प्रत्हमंक में जखन राजाक साडू चन्स्तानक उक्रा दम्कार आहलाची,
  98. 6:34–6:39दस-हसार सुवरन मुद्रा मैं आबहुषनक प्रलोबंद आहलाचे,
  99. 6:39–6:42तकन उनिरभाइतास उक्र थुक्राई देच्छती.
  100. 6:42–6:44आ, उ तुक्राई देच्छती?
  101. 6:44–6:50वसन्सेना स्पष्ट कहे थ्छति, जि सच्च्या प्रेम गुन्से जीतल जाईता चि, हिन्सा या दन्सिने?
  102. 6:50–6:56आ उ एक ता दरिद्र ब्रामवनक गर में आपन आभूशन द्रोहरक रूप में राखिदे च्छति
  103. 6:56–7:00इब होतिक्ता पर ने पिक्ताक अकाट्ते विजयाया चि
  104. 7:00–7:07देखु, हम्रा इस पष्ट कराई दियों, बहुतारा श्रोता जे एही विशय के गेराई से ने जाने च्याति,
  105. 7:07–7:12वो वसन सेनाके एक ता साम्मने गनिका मानी सके च्याति, जो गलत अची.
  106. 7:12–7:17राचीन उजयनी में गनिका एक दा अच्यंत समब्रान्त प्रती कोई च्यल.
  107. 7:17–7:24एक दम, वसन सेनाक लग एक तविशाल प्रासाद आची, जटे 8 गोट आंगन आची.
  108. 7:24–7:30उ एक दनी च्छती ज़ उक्रा लेल 10,000 सुन्द्रा कोनु पैक बात ने आची.
  109. 7:30–7:31तकी भेल?
  110. 7:31–7:39भेल इजे जकर लग पहले ही से पेट बहरल अची, अगरे लग गुन चुनवाक इविलासिता, मतलब लगजरी होई तची.
  111. 7:40–7:47वसंच्सेना चारुदद तक गुनके एही लेल चुन्सकलनी, कारन हुनका अर्ठ, मतलप पैसा कुनु चिंताने चल.
  112. 7:47–7:53कि यहा वसंट से नाक निरने के, मात्र उकर आर्थिक स्वतन्द्रताक परिनाम मानी रहल ची?
  113. 7:53–7:57इतो हुनकर चारित्रिक साहस का अवमुल्लेन आची
  114. 7:57–7:59हम अवमुल्लेन ने कोई रहाल ची
  115. 7:59–8:01हम केवल यतार्थ बताई रहाल ची
  116. 8:01–8:05मुदा सोच्छू, जे उक देक पैक जोखिम लार्हल चाती
  117. 8:05–8:07उजे राजा के सादू के खुक्रावेइ चाती
  118. 8:07–8:12उकोन उ सामान्य व्यक्ती नहां जी, उएक ता क्रूर अख्दरनाक व्यक्ती आची,
  119. 8:13–8:18इते वसंट सेनाक निरने पूरन रूप से उकर नेटिक कमपास से संचाली तची.
  120. 8:18–8:21मुदा संस्तान के देखू, उमूरक अची,
  121. 8:21–8:24अख्रा रामायन आमहा भारत कर अंटर ने भुजल अची?
  122. 8:24–8:27बलकोल ओएग्दम हास्यास्पट अची
  123. 8:27–8:30मुदा औग हास्यास्पट भेलाग बादो सरे आम
  124. 8:30–8:32एक ता प्रतिष्थ गनी काक पीचा करे तची
  125. 8:32–8:33दमकावे तची
  126. 8:33–8:41उक्रा कानुना किया समाज कोनो भायनाया ची, के के कारनो राजाक साडू अची, अर अथा समपतिक मालिक अची.
  127. 8:41–8:44मुद़ समाज उक्रा सम्मान्त नहीं देते ची.
  128. 8:44–8:47सम्मान्त नहीं देते ची, मुद़ सत्तात अक्रे लगा चे.
  129. 8:47–8:53शूद्रक देखार रहल चतीन, जजते सता अदन अथे गुनक कुनो अखात नहीं अचे.
  130. 8:53–8:59संस्तान के बना कुनो गुनक समाज में अतंक मचे बाकिले स्वतन्त्र अचे.
  131. 8:59–9:03मुदः समाज के वल संस्तानक जहन उच्छ वर्ग से नहीं बने दचे.
  132. 9:03–9:09अम आहाके उजैनिक सदक पर लजाएचे निचला वरग में समवाहक के देखो
  133. 9:09–9:10आ, जे मसाच करे वाला आची
  134. 9:10–9:13आ, उजौवा में हारी चुकल आची
  135. 9:13–9:16आ, जौवा गरक मालिक मातूर से बहागी रहा लची
  136. 9:16–9:18उवसंत सेना गर में शरन ले तची
  137. 9:18–9:22अजगन वसंट सेना के चारुदद तक वरनन करे तची
  138. 9:22–9:23तो कहे तची
  139. 9:23–9:25जे चारुदद एते क्रिपालु चला
  140. 9:25–9:28जी अपन शरीर के अन्नक संपती भुजेच्चला
  141. 9:28–9:31मुदा उ इसब जौवा हारबाक बात कही रहा ला चे
  142. 9:31–9:32आ,
  143. 9:32–9:39मुदा समवाहक जौमा हारला पर से हो चारुदद तक क्रिपालु सवाहक के याद कर का आदर वेक्त करएत अची
  144. 9:39–9:45और सब से महत्वोपोन बात, जगन वसन्त सेना चारुदद तक नाम सुनेत चतिन,
  145. 9:45–9:49तो उतुरन तपन कंकरदग समवाहक के मातुर समुक्त करे वेची
  146. 9:49–9:52इच्छारुदद तक गुनक परिनाम नहें तक गी आची?
  147. 9:52–9:55आआ, उही द्रिष्ख सुंदरता देख रहल ची
  148. 9:55–10:00मुदा उही द्रिष्ख पचाडी जे भ्यानक अंप्त्र काज कर रहल आची
  149. 10:00–10:02उक्रा नजर अंदाज कर रहल ची
  150. 10:02–10:03कोनो तंट्र?
  151. 10:03–10:05मातूर के देखो
  152. 10:05–10:10जूवा गरक मालिक मातूर समवाहक के भीज सड़क पर गसीते ताछी
  153. 10:10–10:12समवाहक कक नाक से खून बहाईवे लगेच छे
  154. 10:12–10:14मातूर उक्रा लात मारे ताछी
  155. 10:14–10:18अग कहे ताछी जे आपन भाप के भेची कचुकाओ
  156. 10:18–10:19मुदा हमर दस्वान मुद्रा दियो
  157. 10:19–10:22अ, उद्रिश बहुत क्रूर आची.
  158. 10:22–10:24समाजक एही क्रूर याथार्त के बूजु,
  159. 10:24–10:27जे वसन सेना बहुतिक रूप से,
  160. 10:27–10:29उ कंकन, मतलब दहन, नहीं दिताएक,
  161. 10:29–10:33तकी चारुददद तक गुन समवाहक के मातूर के लाथ से बचाले तैक.
  162. 10:33–10:34मुदा.
  163. 10:34–10:40बिल्कुल नहीं, मात्फुरके दन चाही चल, ने तिक्ता नहीं, एते दन प्रान रक्षक अची गुडनहीं.
  164. 10:40–10:47हम नहीं ची जे मात्फुरक अट्याचार दनक लेल चल, मुदद चत्वुर्त अंक दिस नजर दिओ,
  165. 10:47–10:51जखन शर्विलक उ चूरायल आबूषन मदनिका लगला जाएचे.
  166. 10:51–10:54आप मदनिका के गयात होई चे,
  167. 10:54–10:57जे ओ आबूषन वास्तो में वस्थ सेना का चे,
  168. 10:57–10:59तम मदनिका की कर एच्छती?
  169. 10:59–11:01औ आबूषन गूराभे कहे तच्छती.
  170. 11:01–11:04आप मदनिका एक ता डासी च्छती,
  171. 11:04–11:12जक्रा लक् कोनो भूतिक संपत्ती नहां जे, मुदा उशर विलक्के चारूद्तक प्रतिष्था बचावक लेल उपाय सुजवाएच्छती.
  172. 11:12–11:19एते एक ता दासी चारूद्तक गुडकी चिंता करहला जे, इचारूद्तक अद्रश्चन नेपिक प्रभावाचे.
  173. 11:19–11:23मदनिकाक नियक नीक चल हमुक्रा नकारी नहीं रहल ची.
  174. 11:23–11:25मुदा आहाके यी देखाई परत,
  175. 11:25–11:29जे उही चोरिक बाद शारुदद तक अपन गरक अवस्ता की बहुगेल चल.
  176. 11:29–11:31उव मुर्चिद भाजाए चति इसक्ति आचे.
  177. 11:31–11:33आखा खार करे चति.
  178. 11:33–11:41उ कहे च्तिज़े इस अन्सार हम्रापर विश्वास नहीं करत, समास शोचजे इस गरीब गोगेला चे ताईले लि स्वम द्रोहर चोराएले लक,
  179. 11:41–11:46उनकर समपुन गुन उही एक्टा चूरी से दूल में मिले वाला चल.
  180. 11:46–11:48आतक हनका बचावेट की आचे.
  181. 11:48–12:18उनकर पतनी दूता आ उ कोना बचाभेचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच�
  182. 12:18–12:19ववश्ख्ता परल
  183. 12:19–12:22मुदा सोचु, जि दूता उ कंथाहार की एक तेलक?
  184. 12:22–12:25कि उ के वल एक टा आर्थिक लेंदें चल?
  185. 12:25–12:27नै, उ एक ता पतिव्रता स्ट्रीक,
  186. 12:27–12:30अपन पतिक सम्मान कलेल, कयल गल त्याग चल.
  187. 12:30–12:33जकन चारुदद तो कंथाहार के स्विकार करे चतीन,
  188. 12:33–12:37तो कहे चत्ही जे हम दरिद्र नैजी
  189. 12:37–12:39हमर लग एक ता एहन पतनी आची
  190. 12:39–12:43जे कर प्रेम हमर वेबवव का दिन से आगुद़ी रही तची
  191. 12:43–12:45इस सूनी में बहुत भावुक लगगगगगगगगगगगगगगगगगग
  192. 12:45–12:49इबहावुक्ता नै, इस समपतिक परीभाशा हे बदलो ची.
  193. 12:49–12:51चारुदद समाज के बतारहल चतीन,
  194. 12:51–12:55जे वास्त्रिक समपती मानविय संबन्त अनिष्टा ची.
  195. 12:55–12:59मुदा हम्रा मैट्रेक अक्रोष के नजर अंदाज नहीं कर बाख चाहे.
  196. 12:59–13:05पन्चम अंक में जखन मैट्रे वसंत सेना क्लग्स वापस आबे चतीन उ भयंकर क्रुद चती.
  197. 13:05–13:10आप, करन उ सोचे चतीन जे वसंत सेना लोभी आचे.
  198. 13:10–13:16मैट्रे कहे चतीन जे गनी का आजाक जूता भित्रक उही कंकर जका आची,
  199. 13:16–13:20जगखन्दरी बाहर नैक हसत आहाके चलवा में कष्ट दरहत.
  200. 13:20–13:22मैंत्रे उयतारत देखी रहाल चतिन,
  201. 13:22–13:26जगरीब चारुदत के एही उच्वर्गी समवन्द से
  202. 13:26–13:29केवल शोशनक सामना करे परी रहला ची.
  203. 13:29–13:33दरद्र व्यक्ती लेल इप रोमानी प्रेम एक ता ब्रहम मात्रा ची
  204. 13:33–13:38मुदा मैत्रेक इआक रोष्ता एक ता गलत फैहमी पर आदारित अचीना,
  205. 13:38–13:41वसन्त सेना उग कन्तार लोब से नहीं रखलनी,
  206. 13:41–13:44बलकी चारुदत के इमान्दारी से गदगद बहगर अखलनी.
  207. 13:44–13:55इपुरा नाटक एक ता निरन्तर संगर्ष अची जटे दरिद्रता चारुदत के तोडबाक प्रैआस करे तची, मुदा हुंकर सत्यवादिता हुंका प्रतेख भेर बचाले तची.
  208. 13:55–13:58आग द्रिष्टी कोंई से गुनक विज़ाय होई ता ची
  209. 13:58–14:00मुदा हमर गंभीर मान आची
  210. 14:00–14:03जे गरीभी एक ता एहन् दुष्चक्र आची
  211. 14:03–14:05जे मनुश्छे के लाचार बनादे ता ची
  212. 14:05–14:08जन वसंत सेना स्वयम दनी नाय होई तीन
  213. 14:08–14:14अदूता लग उ अंतिम कन्तार नहीं ता चारुदत कर कोनो गुन हुनका कलंक से नहीं बचापायावे
  214. 14:14–14:16इशुद्रकक समाजक यधारत ची.
  215. 14:16–14:21अम फम्रा सबख विमर्षक सम है आप समापती दिश अची
  216. 14:21–14:28ता हम आपन पक्ष्का सारान्श राखत इगभ जि तमाम भुधेक कतिनाई अदरिद्रताक बादो,
  217. 14:28–14:34म्रिज कतिकम में चारुदत आवस्सन्त सेना का चरित्र इस ठापित करेताचे,
  218. 14:34–14:38जिस सच्चा मुल्या अंतरनेथ गुनक अची, दन खसी सकएताची,
  219. 14:38–14:44मित्र چھोडी सकैताची, मुदा व्यक्तिक गरीमा, आवकर नेटिक प्रभाव अजेयर आईताची.
  220. 14:44–14:52आहम आपन पक्षक अंत में कहेब जे शुद्रक कई नातक, समाजक अग कतु अन नगन सक्ते दिखावैताची,
  221. 14:52–14:57जत्यद्रिद्रता व्यक्तिके लाचार अदन्वानक अथ्याचारी बनादे तची.
  222. 14:57–15:03भूटिक यत्फार्त आ आर्थेक इस्तिती मानविय आदर्ष्सक कते को भेसी शक्तिषाली अची,
  223. 15:03–15:08अनाइतिक्ता के जीवित रक्वाक लिसहु दन्ध आवशक्ता पडे तची.
  224. 15:08–15:14मुदाः जते दरी हम भूज़े ची, हम दोनो गोते एही बात पर अवश्शह सहमत ची,
  225. 15:14–15:22चि शुद्रक, ततकालीन उज्यनीक एक्ता अछ्ट्यन्त जतल, भहु आयामी आयतार्त बादी चित्र प्रस्तुत करे लेने चे.
  226. 15:22–15:26उपुरा समाज के एक जिन्दा दस्तावेज प्रस्तूत काई लेनाची,
  227. 15:26–15:31जते प्रतेक वर्ग आपन-पन आर्थिक अनेतिक विवष्ताक संगर्ष्कर रहा लगाजी.
  228. 15:31–15:36बिल्कुल, तवेमर्ष्ख अन्त में हम शुता के औही प्रष्नपर वापस लजाएप,
  229. 15:36–15:40उआजा के अजा सब के अर्थे किस्तिति, इजा सब के स्वयम चिन्तन करवाक लिल चोड देखच्छि,
  230. 15:40–15:45अज़़च्च्चा हमरा सब आर्मभ में कयल चलो
  231. 15:45–15:49समाज मे आहा के वास्तविक नियंतर किया ची
  232. 15:49–15:55आहा के चारिट्रिगबल, आहा के नेतिक्ता, वा आहा के आर्थे किस्तिटी
  233. 15:55–16:00इह हम आहा सब के स्वयम चिंतन कर वागलिल चोड देच्ची

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दिदिबेट में आहाक स्वागत अछि। विमर्शक एही मन्च्पर, जटे हम्रा सब आव विविन्न द्रिष्टि कोण्चा तत्थ्यक विष्लेषन करे चिए. आग, आग, गमभीर विषे सब पर चर्चा करे चिए. भिल्कुल! आई हम्रा सब प्राचीन संस्क्रत साहित द्यक, उ सब स अद्बुत रच्ना, शुद्रक रच्छित म्रिच्ष कतिकम. आदात माटी खिलोना गाडी? आदात माटी खिलोना गाडी, अगरे प्रधम पाच अंक पर चर्चा कर रहल चे. मुदद चर्चासा पहने, आँ, कल्पना करू, जे आँ आँ आँ अपन जीवनक समपुरन समपती, आँपन एक-ेख पाई लोकक भलाई आप परोपकार में दान का देलें. जे की एक ता बहुत आदर्ष्वादी वात अच्छे. इक्दम, मुदबदले में समाज आहाक उही गरीभी के, मतलब चटम महापाप माने लेलक, आहाक मित्र आहासा दूर भोगेला. आहाक समाज आहाके एक ता अप्रादीजका देखे लागल. सही, तहमर विमर्ष्यक केंद्र बिन्दू आई यहा आची. मानव जीवन अ समाज के मुख्ध्य रूप्सा की संचालित करे ताची की व्यक्तिक अंटरनेद गुड़, उकर चरित्र आन नेटिक्ता सर्वो परी आच्छ वाअ, उकर भूटिक आ आर्थिक परिस्थिती उकर भागे तै करे ताची इक ता बहुत पुरान बहेस अची आँ आहम अर स्पश्ट पक्ष याची, जे चारुदत आवसंत सेना का यी कता यी प्रमानित करे तची, जे विशम से विशम भोतिक परस्थितिक बादो विक्तिक अंतर नहीत गुन आजेर अजेए तची. आपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अपा अ� अगर बवाणवी ये नेटिक्ता अन्याई विवाष्ताके नियन्त्रित करी तची आप खाब अची जे नेटिक्ता कुनो महत्वन आई आची हमर कहब आची जे नेटिक्ता एक्ता विलासिता आची जे बिना भोथिक आदारक आए जीवित ने रही सके तची आआ ता आउ एह पर विस्तार से चर्चा करी, जा हम चारु दद्तक चारित्रिक सुद्रूर्ता का देखी, ता उ एक ता एहन ब्राम्मन व्यापारी चती, जे आपन उदारता कारन दरिद्र भही चुकल चती. दरिद्र? आए एक दम असहाए? मुदा की हुंकर पतन होईता ची? समाजक समान्यन नियमा कनुसारता पतन भोजे बाख चाही चल, मुदा अहन नही होईता ची. हुंकर दरिद्द्था हुंकर मर्यादा के नष्ट नहीं कषकल. हम्रा लागी तची हा? एक मिनेट, हम्रा पूरा करे दीए. उनकर गोन आप्रतिष्टा अद्यापी उज्यनी नगरीक अबुशर मानल जाईतची वसन्त सेना जेहन स्त्री जक्रालक समपूरन सुक्सुविदा आची उदरिद्र चारु दत्दिस आकर्षित हो इच्छती इदहन पर गुड़क्स पष्ट विजेन आई तो और की आच्छी? चमा करब मुदा हम्राई पुरा व्याख्यान बहुत आदर्ष्वादी लागी रहल आच्छे. आदर्ष्वादी? कोना? मतलब श्रोता सब से हो सुची रहल होता, जे इदकोनु सिन्माक कहनीजा का बहुगेल, जते गरीभ नायक के सब सम्मान देता चिक, मुदा शुद्रक को उजयनी एते खसरल नहीं आची, आहा कही ले जे चारुदद तक पतन नहीं वेल. आ, हा, हा, हुंकर गुडत बचले चल. स्वायम चारोदत्तक समबात पर द्यान दिया, उआपन दरिद्रताके चट्धम महाप पाप कहे च्छती, कि आजा सोचल अची जो ओएहन के च्छती? आज, कारनो उ दूखी च्छतीन, आपन मित्र सब कव्यवार से. भिल्कुल, के एक त समाज उक्रा दरिद्र हेबाख करन एक त अप्रादिक नजर्या से देखी रहा लाची. उविलाप करे चती जो दरिद्रता कारने, उनकर सब मित्र, केवल एक मेट्रेया के चोडी, उनका समुमोडी लनी अची. अगरा उत समाजग खोट अची चारुदद्टक ने मुदा प्रभाअउत चारुदटक पर पडी रहा ला ची उस पश्ट कहे चती जो दरद्र मनुश लज्जित रहे ता ची उक्रा जीवन एक ता जीवएट लाश जका बहुजाई ता ची जगुन एतेक शक्तिशाली चल, तो समाज के चारु दद्तक सम्मान करवासे केक नरोकी सकल. हमहाके बाद्भुज रहल ची, मुदा आश्विलाक के की एक विस्रे जाएची. शर्विलक एक ता कुलीन ब्राम्हन आची मुदा परिस्तिटिवाश उजोरी करे ले सिंद्भारे ताची आप चारु दद्टक गरा में तीक आजकनो भीतर प्रवेश करे ताची आजक्चारु दट्टक भ्यंकर गरी दी देखाताची तकनोकर प्रतिक्रिया की होई ताची? उठिटकी जाई ताची? उठिटकाई ताची मुदा? दिकू, जखन मैट्रै नीद मे भाजी रहाल चतें आश्विलक के सुवरन मन्जुशा दारा रहाल चतें तकन शर्विलक के भीट्रक संसकार जाग्रत होई ताची यी दिखावाई तचे, जे चारु दद्तग गोन एक ता चोरक हिर्दैमे से हु देया उपन करे चे. हम्रा एते यहा के रोके पडदत्, आहा कहली एं जे सर्विलक देलूब हो जाई तची. मुदा अंतता अ उकी करे तची, कि उ खाली हाथ कूर जाई तची? अगर तथा कथित संसकार अखरा चोरी करवासे रोकी नहीं सकल. कारन अखरा मदिनिका के मुक्त करावक चल. यह तबात अखरा दहन चाही चल. इठीक अहीना अचे जका मानुज गुन एक ता पुरान सिक्का होए. आहा लाकते को पुरान सिक्का होए, अखरा दन चाही चल ये थीक उहीना आचे जका मानुजे गून एक ता पुरान सिक्का होए आहा लाकते को पुरान सिक्का होए, अखर अटिहासिक महत्वक यहूए मुदा जकन आहा बजार में जाक पानी या अन्न खरी दे चाब तदूकंदार उसिक्का ने लेत इक्दम ने लेत, उक्रा वर्तमान मुद्रा चाही, चारू दद्तक लग गुनका कह जाना आची, मुदा उज्जेनी के समाज में उसिक्का चली ने रहाल ची, शर्विलकक बहुतिक आवश्षकता उकर नेतिकता परहावी भोगला. इपुरान सिक्का वाला विचार रोचा कची मुदा हम्रा लगे तची जे आहा वसन्सेना क्पात्रक के एही संदर में नजर अंदास कर अहल ची नजर अंदाज कोना जोन समाज में गुडक सिक्का आमान्यबा चुकल चल तवस्शन्ट्सेना चारु दद्तक गुडके की अक स्विकार करे च्छती? उत प्रमानित करे च्छती, जे प्रेम आ आदर दहन से नहीं कहरीदल जासके तचे. मुदा वस्शन्ट्सेना के स्थिती भिन्न अची? एक मिनेट, सूनी लियो. प्रत्हमंक में जखन राजाक साडू चन्स्तानक उक्रा दम्कार आहलाची, दस-हसार सुवरन मुद्रा मैं आबहुषनक प्रलोबंद आहलाचे, तकन उनिरभाइतास उक्र थुक्राई देच्छती. आ, उ तुक्राई देच्छती? वसन्सेना स्पष्ट कहे थ्छति, जि सच्च्या प्रेम गुन्से जीतल जाईता चि, हिन्सा या दन्सिने? आ उ एक ता दरिद्र ब्रामवनक गर में आपन आभूशन द्रोहरक रूप में राखिदे च्छति इब होतिक्ता पर ने पिक्ताक अकाट्ते विजयाया चि देखु, हम्रा इस पष्ट कराई दियों, बहुतारा श्रोता जे एही विशय के गेराई से ने जाने च्याति, वो वसन सेनाके एक ता साम्मने गनिका मानी सके च्याति, जो गलत अची. राचीन उजयनी में गनिका एक दा अच्यंत समब्रान्त प्रती कोई च्यल. एक दम, वसन सेनाक लग एक तविशाल प्रासाद आची, जटे 8 गोट आंगन आची. उ एक दनी च्छती ज़ उक्रा लेल 10,000 सुन्द्रा कोनु पैक बात ने आची. तकी भेल? भेल इजे जकर लग पहले ही से पेट बहरल अची, अगरे लग गुन चुनवाक इविलासिता, मतलब लगजरी होई तची. वसंच्सेना चारुदद तक गुनके एही लेल चुन्सकलनी, कारन हुनका अर्ठ, मतलप पैसा कुनु चिंताने चल. कि यहा वसंट से नाक निरने के, मात्र उकर आर्थिक स्वतन्द्रताक परिनाम मानी रहल ची? इतो हुनकर चारित्रिक साहस का अवमुल्लेन आची हम अवमुल्लेन ने कोई रहाल ची हम केवल यतार्थ बताई रहाल ची मुदा सोच्छू, जे उक देक पैक जोखिम लार्हल चाती उजे राजा के सादू के खुक्रावेइ चाती उकोन उ सामान्य व्यक्ती नहां जी, उएक ता क्रूर अख्दरनाक व्यक्ती आची, इते वसंट सेनाक निरने पूरन रूप से उकर नेटिक कमपास से संचाली तची. मुदा संस्तान के देखू, उमूरक अची, अख्रा रामायन आमहा भारत कर अंटर ने भुजल अची? बलकोल ओएग्दम हास्यास्पट अची मुदा औग हास्यास्पट भेलाग बादो सरे आम एक ता प्रतिष्थ गनी काक पीचा करे तची दमकावे तची उक्रा कानुना किया समाज कोनो भायनाया ची, के के कारनो राजाक साडू अची, अर अथा समपतिक मालिक अची. मुद़ समाज उक्रा सम्मान्त नहीं देते ची. सम्मान्त नहीं देते ची, मुद़ सत्तात अक्रे लगा चे. शूद्रक देखार रहल चतीन, जजते सता अदन अथे गुनक कुनो अखात नहीं अचे. संस्तान के बना कुनो गुनक समाज में अतंक मचे बाकिले स्वतन्त्र अचे. मुदः समाज के वल संस्तानक जहन उच्छ वर्ग से नहीं बने दचे. अम आहाके उजैनिक सदक पर लजाएचे निचला वरग में समवाहक के देखो आ, जे मसाच करे वाला आची आ, उजौवा में हारी चुकल आची आ, जौवा गरक मालिक मातूर से बहागी रहा लची उवसंत सेना गर में शरन ले तची अजगन वसंट सेना के चारुदद तक वरनन करे तची तो कहे तची जे चारुदद एते क्रिपालु चला जी अपन शरीर के अन्नक संपती भुजेच्चला मुदा उ इसब जौवा हारबाक बात कही रहा ला चे आ, मुदा समवाहक जौमा हारला पर से हो चारुदद तक क्रिपालु सवाहक के याद कर का आदर वेक्त करएत अची और सब से महत्वोपोन बात, जगन वसन्त सेना चारुदद तक नाम सुनेत चतिन, तो उतुरन तपन कंकरदग समवाहक के मातुर समुक्त करे वेची इच्छारुदद तक गुनक परिनाम नहें तक गी आची? आआ, उही द्रिष्ख सुंदरता देख रहल ची मुदा उही द्रिष्ख पचाडी जे भ्यानक अंप्त्र काज कर रहल आची उक्रा नजर अंदाज कर रहल ची कोनो तंट्र? मातूर के देखो जूवा गरक मालिक मातूर समवाहक के भीज सड़क पर गसीते ताछी समवाहक कक नाक से खून बहाईवे लगेच छे मातूर उक्रा लात मारे ताछी अग कहे ताछी जे आपन भाप के भेची कचुकाओ मुदा हमर दस्वान मुद्रा दियो अ, उद्रिश बहुत क्रूर आची. समाजक एही क्रूर याथार्त के बूजु, जे वसन सेना बहुतिक रूप से, उ कंकन, मतलब दहन, नहीं दिताएक, तकी चारुददद तक गुन समवाहक के मातूर के लाथ से बचाले तैक. मुदा. बिल्कुल नहीं, मात्फुरके दन चाही चल, ने तिक्ता नहीं, एते दन प्रान रक्षक अची गुडनहीं. हम नहीं ची जे मात्फुरक अट्याचार दनक लेल चल, मुदद चत्वुर्त अंक दिस नजर दिओ, जखन शर्विलक उ चूरायल आबूषन मदनिका लगला जाएचे. आप मदनिका के गयात होई चे, जे ओ आबूषन वास्तो में वस्थ सेना का चे, तम मदनिका की कर एच्छती? औ आबूषन गूराभे कहे तच्छती. आप मदनिका एक ता डासी च्छती, जक्रा लक् कोनो भूतिक संपत्ती नहां जे, मुदा उशर विलक्के चारूद्तक प्रतिष्था बचावक लेल उपाय सुजवाएच्छती. एते एक ता दासी चारूद्तक गुडकी चिंता करहला जे, इचारूद्तक अद्रश्चन नेपिक प्रभावाचे. मदनिकाक नियक नीक चल हमुक्रा नकारी नहीं रहल ची. मुदा आहाके यी देखाई परत, जे उही चोरिक बाद शारुदद तक अपन गरक अवस्ता की बहुगेल चल. उव मुर्चिद भाजाए चति इसक्ति आचे. आखा खार करे चति. उ कहे च्तिज़े इस अन्सार हम्रापर विश्वास नहीं करत, समास शोचजे इस गरीब गोगेला चे ताईले लि स्वम द्रोहर चोराएले लक, उनकर समपुन गुन उही एक्टा चूरी से दूल में मिले वाला चल. आतक हनका बचावेट की आचे. उनकर पतनी दूता आ उ कोना बचाभेचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचचच� ववश्ख्ता परल मुदा सोचु, जि दूता उ कंथाहार की एक तेलक? कि उ के वल एक टा आर्थिक लेंदें चल? नै, उ एक ता पतिव्रता स्ट्रीक, अपन पतिक सम्मान कलेल, कयल गल त्याग चल. जकन चारुदद तो कंथाहार के स्विकार करे चतीन, तो कहे चत्ही जे हम दरिद्र नैजी हमर लग एक ता एहन पतनी आची जे कर प्रेम हमर वेबवव का दिन से आगुद़ी रही तची इस सूनी में बहुत भावुक लगगगगगगगगगगगगगगगगगग इबहावुक्ता नै, इस समपतिक परीभाशा हे बदलो ची. चारुदद समाज के बतारहल चतीन, जे वास्त्रिक समपती मानविय संबन्त अनिष्टा ची. मुदा हम्रा मैट्रेक अक्रोष के नजर अंदाज नहीं कर बाख चाहे. पन्चम अंक में जखन मैट्रे वसंत सेना क्लग्स वापस आबे चतीन उ भयंकर क्रुद चती. आप, करन उ सोचे चतीन जे वसंत सेना लोभी आचे. मैट्रे कहे चतीन जे गनी का आजाक जूता भित्रक उही कंकर जका आची, जगखन्दरी बाहर नैक हसत आहाके चलवा में कष्ट दरहत. मैंत्रे उयतारत देखी रहाल चतिन, जगरीब चारुदत के एही उच्वर्गी समवन्द से केवल शोशनक सामना करे परी रहला ची. दरद्र व्यक्ती लेल इप रोमानी प्रेम एक ता ब्रहम मात्रा ची मुदा मैत्रेक इआक रोष्ता एक ता गलत फैहमी पर आदारित अचीना, वसन्त सेना उग कन्तार लोब से नहीं रखलनी, बलकी चारुदत के इमान्दारी से गदगद बहगर अखलनी. इपुरा नाटक एक ता निरन्तर संगर्ष अची जटे दरिद्रता चारुदत के तोडबाक प्रैआस करे तची, मुदा हुंकर सत्यवादिता हुंका प्रतेख भेर बचाले तची. आग द्रिष्टी कोंई से गुनक विज़ाय होई ता ची मुदा हमर गंभीर मान आची जे गरीभी एक ता एहन् दुष्चक्र आची जे मनुश्छे के लाचार बनादे ता ची जन वसंत सेना स्वयम दनी नाय होई तीन अदूता लग उ अंतिम कन्तार नहीं ता चारुदत कर कोनो गुन हुनका कलंक से नहीं बचापायावे इशुद्रकक समाजक यधारत ची. अम फम्रा सबख विमर्षक सम है आप समापती दिश अची ता हम आपन पक्ष्का सारान्श राखत इगभ जि तमाम भुधेक कतिनाई अदरिद्रताक बादो, म्रिज कतिकम में चारुदत आवस्सन्त सेना का चरित्र इस ठापित करेताचे, जिस सच्चा मुल्या अंतरनेथ गुनक अची, दन खसी सकएताची, मित्र چھोडी सकैताची, मुदा व्यक्तिक गरीमा, आवकर नेटिक प्रभाव अजेयर आईताची. आहम आपन पक्षक अंत में कहेब जे शुद्रक कई नातक, समाजक अग कतु अन नगन सक्ते दिखावैताची, जत्यद्रिद्रता व्यक्तिके लाचार अदन्वानक अथ्याचारी बनादे तची. भूटिक यत्फार्त आ आर्थेक इस्तिती मानविय आदर्ष्सक कते को भेसी शक्तिषाली अची, अनाइतिक्ता के जीवित रक्वाक लिसहु दन्ध आवशक्ता पडे तची. मुदाः जते दरी हम भूज़े ची, हम दोनो गोते एही बात पर अवश्शह सहमत ची, चि शुद्रक, ततकालीन उज्यनीक एक्ता अछ्ट्यन्त जतल, भहु आयामी आयतार्त बादी चित्र प्रस्तुत करे लेने चे. उपुरा समाज के एक जिन्दा दस्तावेज प्रस्तूत काई लेनाची, जते प्रतेक वर्ग आपन-पन आर्थिक अनेतिक विवष्ताक संगर्ष्कर रहा लगाजी. बिल्कुल, तवेमर्ष्ख अन्त में हम शुता के औही प्रष्नपर वापस लजाएप, उआजा के अजा सब के अर्थे किस्तिति, इजा सब के स्वयम चिन्तन करवाक लिल चोड देखच्छि, अज़़च्च्चा हमरा सब आर्मभ में कयल चलो समाज मे आहा के वास्तविक नियंतर किया ची आहा के चारिट्रिगबल, आहा के नेतिक्ता, वा आहा के आर्थे किस्तिटी इह हम आहा सब के स्वयम चिंतन कर वागलिल चोड देच्ची

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