MACHINE ASR ACCESSIBILITY AID

SADEHA 37 जमीनक_लेल_शादुलक_करुण_अंत.m4a

Not an editorially verified transcript. This text was generated automatically from the preserved recording and may contain recognition, language-detection, spelling, segmentation or name errors. Consult the source recording for authoritative content.
Collection
Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
Status
asr-draft
Human verified
No
Editorial review
not-reviewed
ASR model
small
Detected language
hi (0.374337)
Duration
11:13
Source
Open preserved recording

Timestamped machine output

  1. 0:00–0:02विमर्श में आहांक स्वागत अछी
  2. 0:03–0:07तनी कल्पना करू, जे आहांके एक ता गद्डा कोडी का,
  3. 0:07–0:10आपन उही सदस्यके जीवते गाडे लेल कहल जाता छी,
  4. 0:11–0:14जे बीस वर्ष दरी आहांक भरन पोषन के लक.
  5. 0:14–0:17उं, इशुनी कर रोंगता थाड़ हो जाए जाए जे.
  6. 0:17–0:23एक्दम! आ एसब मात्र एही लेल जे आहांके जीविकाक लेल एक ता जमीनक तुक्डा बेटी सकै.
  7. 0:24–0:27आईज हमरा सवक चर्चाक विषे एत वे मार्मिक अची.
  8. 0:27–0:40अंँ, हम सब तेलगु उपन्याज जिगरी सलेल गेल, श्रोथ समगरी सदालेल मित्र को उईप्रसंग पर बाद कर लहल ची, जटे एक ता अत्यंत जटिल नैतिक दुन्ध बद्धार भजाएच जे.
  9. 0:40–0:42ये प्रज्टी कोन से इकी च्छल
  10. 0:42–0:45इक ता गहीर पारीवारीक जुडाओ चल
  11. 0:45–0:48जक्रा कारन मात्र मंडल राज़ सो अदिकारी
  12. 0:48–0:50जक्रा मरो कहल जातची
  13. 0:50–0:53अगर तडूएकर जमीनक पता प्ता प्रज्टीग
  14. 0:53–0:55वह दिल्गा पारीवारीक जुडाओ चल
  15. 0:55–0:57तब आजा के द्रुष्टी कुन सर इगी च्छल
  16. 0:57–0:59इएक ता गहीर पारिवारिग जुडाओ चल
  17. 0:59–1:01जक्रा कारन मात्र मन्दल राजच्व अदिकारी
  18. 1:01–1:03जक्रा मानवीय समवेदनाक पतन अची
  19. 1:03–1:05इच्चरम स्वार्त छे
  20. 1:05–1:07देखू हम आख के बावना के बुजी सकेची
  21. 1:07–1:11अगर्त्त्त् 2 एकर जमीनक पट्ता पाभाई लेल,
  22. 1:11–1:1620 शाल पुराना सातिके, मारी देव मानविय समवेदनाक पतन अची,
  23. 1:16–1:18इच्चरम स्वार्त्ते चे.
  24. 1:18–1:21देखु हमहाके बावनाके बुची सकेची,
  25. 1:21–1:26मुदा हम इविशय के पुणता दोसर ध्श्टिकोन से देखाईची.
  26. 1:26–1:31जगन कोनो परिवार के आगा अपनन अस्तित्वक कषंकत होई तची,
  27. 1:31–1:34तचन भोखख व्याक्रन एक दंबबडली जाई तचे.
  28. 1:34–1:36वुदा...
  29. 1:36–1:41इमामक के पर्वार लगाश्ये पर रहे वाला गुमन्तु कलंदर समुदाय से अची
  30. 1:41–1:45यदे बात केवल एक तजान्वरा के त्यागबाक ने अची
  31. 1:45–1:51इब बद़्ी रहाज सरकारी कानून अप पीडी के बहयंकर गरीभी से बाहर निकलप कविवष्ता अची
  32. 1:51–1:53क्रुव्टा नहीं
  33. 1:53–1:54मुदद की विवस्ता
  34. 1:54–1:57हमरा सब के एतेक समवेदन हीन बना सके तची
  35. 1:57–2:00जे हम आपन रक्षक के बवक्षक बनी जाए
  36. 2:00–2:04मतलव, सादूल के औही बीस सववर्षक इतिहास पर गवर करूँ।
  37. 2:04–2:06हा अगरी तिहास लाम बच्छे
  38. 2:06–2:07एक दम
  39. 2:07–2:12जखन अकाल परल चल, जखन गाम गर में के एक मुछ्ठी अन नहीं रहल चल,
  40. 2:12–2:17तकनी शादूल चल, जगर खेल देखाक इमामक कपरिवार अपन पेट बरहे चल.
  41. 2:17–2:22इमामक के पतनी भिममा, शादूल के अपना अस्तनक दूद दरी प्या कजी आए चल.
  42. 2:22–2:25अएक तविक्त समएचल हम मानेच्छी
  43. 2:25–2:30इमाम स्वेम मानेच्छतीं जे शादूल हुनका लोकनिक अंधार जीवन में इजोत आनलक
  44. 2:30–2:35शादूल उई गरक एट्टा उहें सेवानिव्रित कमाउ सदस्जग जका आची
  45. 2:35–2:38जकर जमानी उई परिवारक सेवा में बीती गेल
  46. 2:38–2:43आप जखन उकर आवेशक्ता कतम भगेल, तकन उकर रस्ता पर चोर देल जाए.
  47. 2:43–2:47आजा की सेवाने व्रित कमाउ सदस्यावाला उप्मा,
  48. 2:47–2:51सून्वा मेत बहुत निक लागाल मुदा यो यदार्थ से बहुत दूर अचे.
  49. 2:52–2:53कोना? इत टत्तिया जे?
  50. 2:53–3:00मतलव, जे श्रोता इसुनी रहल चे फीन, हुनका लागा इत हे तनी, जे शादूल इसब अपन इच्चासे करराल चल.
  51. 3:01–3:05मुदा की वास्तो मे इस भन्द कयो समान्ता परादारिट चल?
  52. 3:05–3:11श्रोथ समवन्गे अस्पष्ट करेत अचे जे यी प्रेम नहीं बलकी शोशन परदाश्ता चल.
  53. 3:11–3:14दास्ता? इबहुत पैक शब्दा चे.
  54. 3:14–3:19मुदा सत्य अचे, आहां के याद अची जे इमाम शादूल के न जंगल से कोन आनन ने चल?
  55. 3:19–3:21अगर पारमपर एक तरीका चल
  56. 3:21–3:25अके सब सा ख्रूर बात इमाम अकरा नियंट्रन मेरख्वाक लेल
  57. 3:25–3:29उप्पी आब ब्रहम दन्दिजका जंगली जडी भूटी कूवाके
  58. 3:29–3:31अकर परुषत्त्त्तु समाप्त कर दिल
  59. 3:31–3:35उकर कुमल नाक किन लोहेक सुईसे चेडि दिल गेल.
  60. 3:35–3:38आ, हा, उतो पारमपरिक तरीका च्यल,
  61. 3:38–3:41अके सबसा क्रूर बातिमा मुक्रा नियन्त्रन्मे रख्वाक लेल,
  62. 3:41–3:44उप्पी आप ब्रहम्दन्दिजका जंगली जडिबूटी क्हूगा,
  63. 3:44–3:47अब ब्रह्म दन्दीजका जंगली ज़ी भूटी कुवाके
  64. 3:47–3:49उकर पारुषत्त्त्त्समाप्त कर दिलनें
  65. 3:49–3:52जक्रा हा प्रेम कहीरहल्ची
  66. 3:52–3:55उवास्तो में एक्ता बंद्ख कें जीवित रक्वाक निवेश च्ल
  67. 3:55–3:56रूकु- रूकु
  68. 3:56–3:58आहाजे कहीरहल्ची
  69. 3:58–4:28अग, उगर नशा मे राखभ पूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  70. 4:28–4:31अद्रुश़् आमरा भीतर द़री हिलादे लक
  71. 4:31–4:33आहा उही द्रुश़् बात कोर हल चें
  72. 4:33–4:36जते चान्द लाटी से शादूल पर प्रहार करे ता ची
  73. 4:36–4:40आ, अद्रुश़् ता पूरा नेतिक तक पतल के बडली दे ता ची
  74. 4:40–4:44चान्द जे शादूल संगे भायजै का पाएक भेल
  75. 4:58–5:01शादुलक दात चान्दक कंथ पर रहेता चे
  76. 5:01–5:05मुदा तकने इमाम दूर से जोर से बजे चती शादुल
  77. 5:05–5:10अब बस एक ता अवाज पर ओ ब्यंकर भालु अपन क्रूरता चोडी देता चे
  78. 5:10–5:14तनेक सोचू, इते पशु मनुख से बेशी नैति का मानविय दिखाई ता चे
  79. 5:14–5:16वो उआप द्यान्त बावुग द्रिष्टी कोन आची
  80. 5:16–5:20मुदा हम चाहव जहाग एक बेर चान्दक जुता मेटार भाका सुचु।
  81. 5:20–5:23हम्रा चान्द कोनो कलनायक नी लागे तची
  82. 5:23–5:25तकी उज़ समविदन हीन नहीं आची
  83. 5:25–5:27आई, उज़ समविदन हीन नहीं आची
  84. 5:27–5:29अगर उदाने लेलतर से देखलक अचे
  85. 5:29–5:31पूलिसक लाथिख है देखलक अचे
  86. 5:31–5:33गरी भी तच्छल
  87. 5:33–5:35अगर बुची चुका लागी गेल
  88. 5:35–5:37तो उखरे दूए एकर जमीन के पट्टक कही वो लगा
  89. 5:37–5:39वो लगा वो लगा
  90. 5:39–5:41वो वो लगा वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो
  91. 5:57–6:03मुदा की उही जमीन के लें उह भालु के मारी देद की इह उही समस्या के समादान अची
  92. 6:03–6:06आज समस्या के ज़ड के नजर अंदास कर रहल ची
  93. 6:06–6:11ज़ड अची उही समुदा एक चारो दिस पसरल, कानूनी असमाजिक जाल
  94. 6:11–6:13अदर्त पर्वार में स्पस्ट चल
  95. 6:13–6:16एक दम जां पुलिस उक्रा भालु संगे देख लेद
  96. 6:16–6:19उसीदा जेल जायतक, चान जेनाई तची
  97. 6:19–6:22बालु आप उनका लोकनिक जीविका नहीं
  98. 6:22–6:24बलकी उनका लोकनिक काल बनी चुकलगष
  99. 6:24–6:26चान एक ता अस्ठाए जीवन चाहे तची
  100. 6:26–6:31उ सीदा जेल जायतक चान जेनायत छी जे भालु आप हुनका लोकनिक जीविका नहीं
  101. 6:31–6:36बलकी हुनका लोकनिक काल बनी चुकलेच चान एक ता अस्ठाए जीवन चायत छी
  102. 6:36–6:43एक ता मुर्गी फाम खेती इप पीडियक दरदसा बाहर निकलप के हिताशा पोन प्रयास छी
  103. 6:43–6:46आईक एतर क्हम्रा आन्शिक रूप सबुजाला बत अची
  104. 6:46–6:47मदा भीबमाख की
  105. 6:47–6:51मदलब भीबमत सादूल के चान से बेशी माने चलीा
  106. 6:51–6:53आँ माने चली
  107. 6:53–6:56जखन सादूल भीमार परलचलन
  108. 6:56–6:59तकन और राती राती बहर जाएक को कर सेवा करे चली
  109. 6:59–7:05आब उब उब वी मम्मा चान्द के योजना मसामती दोदे च्छती की इलालच नहीं आची.
  110. 7:05–7:08उआँ सोचे च्छती जब बेटाक मुर्गी फार्म हे ताक,
  111. 7:08–7:10आई टानीक पुतो हूए ताक.
  112. 7:10–7:13इटा बहुतिक प्रगतिक लाल्सा आची.
  113. 7:13–7:15आँ, इलालच नहीं आची.
  114. 7:15–7:19इक ता माताक औई आदिम व्रित्ती के दर्षावे तची
  115. 7:19–7:23जतःई उ आपन मानव संटानक सुरक्षित भविश्ष्षलेल
  116. 7:23–7:25कोनो से हो त्याक करे बाकले तए आर अची
  117. 7:25–7:27मुदा त्याक आपन सातिक
  118. 7:27–7:33देखु जखन आपन बच्चाक भविष्ष्व आए एक ता पशूमे सकोनो एक की चुन्बाग होताएच
  119. 7:33–7:36तकन आदर्ष्वादक विलासीता समाप्त पोजाएत छी
  120. 7:36–7:39भी मम्मा एक कत्फोर वास्तविक्ता बुजे चति
  121. 7:39–7:43जे उ शादुल संगे चान्दक भविश्य सुरक्षित नहीं का सके चथिन
  122. 7:43–7:45ती कच मानी ले लाओ।
  123. 7:45–7:50जे परिस्तिति हुनका सब के एक ता देवालक आगा थाड़ कोडे लक्छला
  124. 7:50–7:53मुदा इमाम जे अन्तिम निरने ले ले लें
  125. 7:53–7:56उक्रा की कहाव की उक्रुर्ता नहीं चले?
  126. 7:56–8:00कोना, उता इमामक असमन्जसक दूखद मद्यम मार्ग चल.
  127. 8:00–8:02दूखद मद्यम मार्ग.
  128. 8:02–8:05उआ, इप पुरन रूपसक कायरता आची.
  129. 8:05–8:11इमाम सादूल के उपी कच्छाल अद तमाकू कुवाक पागल बनादेवे चाहत ची
  130. 8:11–8:13ताकी उक्रा जंगल में चोडल जासकःए
  131. 8:13–8:16जे भालु मनुस्सजका मकए के भाशी
  132. 8:16–8:18और भात ख्यवाक अब्यास्त बहुगे लची
  133. 8:18–8:21उक्रा जंगल में कुना चोडल जासकत आची
  134. 8:21–8:23तो की करेता? उक्रा मारी देद?
  135. 8:23–8:24जे कुछ
  136. 8:24–8:30मुदा उ मासुम जीव जनी तो नहीं आची, जे उकर म्रित्तिव के गडड़ा खोरल जा रहे लची.
  137. 8:30–8:36उकर अस्म्रिति हीन कर पागल कर जंगल में चोडब सीदे-सीदे म्रित्तिव दंद देवसमान आची.
  138. 8:36–8:39इमामक अपना पापक छुपायवाक प्र्यास आची.
  139. 8:39–8:41इमानवता कहार आची
  140. 8:41–8:45देखो, आहा इमामक अस्तितिके गेराई सा नहीं बुज रहे लची
  141. 8:45–8:47इमाम लग दोसर विकल्प की चल
  142. 8:47–8:50आहा इमामक आदर श्वादी चश्मासा देख रहा आची
  143. 8:50–8:54मुदा इमाम एक ता गरीब गुमन्तु वेक्ती चतिन
  144. 8:54–8:57समाज हुंका पतकीर कहात अच्चनी
  145. 8:57–9:00हुंकर अपन नामदरी लोक नहीं जानता ची
  146. 9:00–9:04मुदा हो शादूल के कतो सुरक्षित श्धान पर से होता दसके चला
  147. 9:04–9:05कते दे ता
  148. 9:05–9:11श्रोद सामगरी स्पष्ट करत अची जे इमाम दस दिन दरी शादूल के बेचलेल दरदर बदकला
  149. 9:11–9:14चिर्चिन्ता मुदुकास लेकबदुनाकल दरी
  150. 9:14–9:16आप याज तो केली नहीं
  151. 9:16–9:21मुदा कानुन कदरे के अक्रा क्हरिदवाक लेज तब तधयार नहीं चल
  152. 9:21–9:32पशुलस, आर्थात पूलिस के दर, सब के चल, आजकन क्यो लेबाक लिल तधयार नहीं भल, अब आब आब एटा जीूते गाला पर उतारु चल, तकन इमाम की करते है।
  153. 9:32–9:34इस थी तो जतिल चल
  154. 9:34–9:40शादुल के पागल के जंगल पथेबा से उक्कम से कम चान्दा कोई बहयंकर गद्धा से बचिगेल,
  155. 9:40–9:45एक संगे परवार के दुए एकर जमीन भेट्बाक रस्ता से हो साफ पोगेल.
  156. 9:45–9:49एते विकल्प, खराब अब बहुत खराब के बीच चुनाव अख्छल.
  157. 9:49–9:53अब भूजाएच फीज जे इदूई खराव विकलप के बीच का चुनाव चल
  158. 9:53–9:56मुदद जखन आहा कुनो जीव के अपन आश्रित बना लेजचची
  159. 9:56–10:00तखन आहा के जिम्मदारी उकर प्रती आजीवन है तखछी
  160. 10:00–10:03जखन शादूल के कारने परिवार भूँकमरी से बचल
  161. 10:03–10:06पचल तक्हन उ सदा लेल मिथ कहल गिल
  162. 10:06–10:08और जक्हन जमीन भेट्बाक आशा जागिल
  163. 10:09–10:10तक्हन उ भोज बनी गिल
  164. 10:10–10:14स्वार्त मनुश्य से उकर सबसे नीक गुन चीन लेत अची
  165. 10:14–10:15इस स्वार्त नहीं अची
  166. 10:15–10:18मतलब इगरीबी की चक्रसे बहार निकलवाग अची
  167. 10:18–10:25चान्दक लेई शादुल उही कलंकित अतीत के प्रतीक अची जाही से उ मुक्त होबाई चाहे तची
  168. 10:25–10:33आ इमाम अतता बुजला जे उहेक ता पशू रूपी अतीत के पकडे का अपन मानाव संटानक भविष्यके नहीं मारी सकची थी
  169. 10:33–10:38त्स्तित्वक संगर्श आ खरूनाक भीज के इरेक्षा के तिख जटिल अची
  170. 10:39–10:43इमामक परिवार आ शादूलक इ कता सिद्ध करेट अची
  171. 10:43–10:46जे जगन भूख आ विवस्ता प्रहार करेट अची
  172. 10:47–10:50तकन प्रेम की परीबाशाय चकना चूर भजगे तची
  173. 10:50–10:51एक दम सही काल हूँ
  174. 10:51–10:55इको नो सरल हर जी तक प्रष्ने नहीं आची
  175. 10:55–10:57इख रहाँ सब किन दिखावे तची
  176. 10:57–11:01जे कतना गरीभी कठोर निरनै लेवे लेल विवष करे तची
  177. 11:01–11:04स्रोट सामगरी में आगो आएो बहुत रास अनुट्तरित प्रष्न ची
  178. 11:04–11:08जिश्रोदा सब केन आपन द्रुष्टि कोंषा विह्षार करवाकलेल प्रेरिट करेत अची.
  179. 11:08–11:09बिल्कोल.
  180. 11:09–11:13आप विमर्ष में हम्रा सब संगे जुडबाकलेल बहुत-बहुत द्श्नवाद.

Plain text

विमर्श में आहांक स्वागत अछी तनी कल्पना करू, जे आहांके एक ता गद्डा कोडी का, आपन उही सदस्यके जीवते गाडे लेल कहल जाता छी, जे बीस वर्ष दरी आहांक भरन पोषन के लक. उं, इशुनी कर रोंगता थाड़ हो जाए जाए जे. एक्दम! आ एसब मात्र एही लेल जे आहांके जीविकाक लेल एक ता जमीनक तुक्डा बेटी सकै. आईज हमरा सवक चर्चाक विषे एत वे मार्मिक अची. अंँ, हम सब तेलगु उपन्याज जिगरी सलेल गेल, श्रोथ समगरी सदालेल मित्र को उईप्रसंग पर बाद कर लहल ची, जटे एक ता अत्यंत जटिल नैतिक दुन्ध बद्धार भजाएच जे. ये प्रज्टी कोन से इकी च्छल इक ता गहीर पारीवारीक जुडाओ चल जक्रा कारन मात्र मंडल राज़ सो अदिकारी जक्रा मरो कहल जातची अगर तडूएकर जमीनक पता प्ता प्रज्टीग वह दिल्गा पारीवारीक जुडाओ चल तब आजा के द्रुष्टी कुन सर इगी च्छल इएक ता गहीर पारिवारिग जुडाओ चल जक्रा कारन मात्र मन्दल राजच्व अदिकारी जक्रा मानवीय समवेदनाक पतन अची इच्चरम स्वार्त छे देखू हम आख के बावना के बुजी सकेची अगर्त्त्त् 2 एकर जमीनक पट्ता पाभाई लेल, 20 शाल पुराना सातिके, मारी देव मानविय समवेदनाक पतन अची, इच्चरम स्वार्त्ते चे. देखु हमहाके बावनाके बुची सकेची, मुदा हम इविशय के पुणता दोसर ध्श्टिकोन से देखाईची. जगन कोनो परिवार के आगा अपनन अस्तित्वक कषंकत होई तची, तचन भोखख व्याक्रन एक दंबबडली जाई तचे. वुदा... इमामक के पर्वार लगाश्ये पर रहे वाला गुमन्तु कलंदर समुदाय से अची यदे बात केवल एक तजान्वरा के त्यागबाक ने अची इब बद़्ी रहाज सरकारी कानून अप पीडी के बहयंकर गरीभी से बाहर निकलप कविवष्ता अची क्रुव्टा नहीं मुदद की विवस्ता हमरा सब के एतेक समवेदन हीन बना सके तची जे हम आपन रक्षक के बवक्षक बनी जाए मतलव, सादूल के औही बीस सववर्षक इतिहास पर गवर करूँ। हा अगरी तिहास लाम बच्छे एक दम जखन अकाल परल चल, जखन गाम गर में के एक मुछ्ठी अन नहीं रहल चल, तकनी शादूल चल, जगर खेल देखाक इमामक कपरिवार अपन पेट बरहे चल. इमामक के पतनी भिममा, शादूल के अपना अस्तनक दूद दरी प्या कजी आए चल. अएक तविक्त समएचल हम मानेच्छी इमाम स्वेम मानेच्छतीं जे शादूल हुनका लोकनिक अंधार जीवन में इजोत आनलक शादूल उई गरक एट्टा उहें सेवानिव्रित कमाउ सदस्जग जका आची जकर जमानी उई परिवारक सेवा में बीती गेल आप जखन उकर आवेशक्ता कतम भगेल, तकन उकर रस्ता पर चोर देल जाए. आजा की सेवाने व्रित कमाउ सदस्यावाला उप्मा, सून्वा मेत बहुत निक लागाल मुदा यो यदार्थ से बहुत दूर अचे. कोना? इत टत्तिया जे? मतलव, जे श्रोता इसुनी रहल चे फीन, हुनका लागा इत हे तनी, जे शादूल इसब अपन इच्चासे करराल चल. मुदा की वास्तो मे इस भन्द कयो समान्ता परादारिट चल? श्रोथ समवन्गे अस्पष्ट करेत अचे जे यी प्रेम नहीं बलकी शोशन परदाश्ता चल. दास्ता? इबहुत पैक शब्दा चे. मुदा सत्य अचे, आहां के याद अची जे इमाम शादूल के न जंगल से कोन आनन ने चल? अगर पारमपर एक तरीका चल अके सब सा ख्रूर बात इमाम अकरा नियंट्रन मेरख्वाक लेल उप्पी आब ब्रहम दन्दिजका जंगली जडी भूटी कूवाके अकर परुषत्त्त्तु समाप्त कर दिल उकर कुमल नाक किन लोहेक सुईसे चेडि दिल गेल. आ, हा, उतो पारमपरिक तरीका च्यल, अके सबसा क्रूर बातिमा मुक्रा नियन्त्रन्मे रख्वाक लेल, उप्पी आप ब्रहम्दन्दिजका जंगली जडिबूटी क्हूगा, अब ब्रह्म दन्दीजका जंगली ज़ी भूटी कुवाके उकर पारुषत्त्त्त्समाप्त कर दिलनें जक्रा हा प्रेम कहीरहल्ची उवास्तो में एक्ता बंद्ख कें जीवित रक्वाक निवेश च्ल रूकु- रूकु आहाजे कहीरहल्ची अग, उगर नशा मे राखभ पूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� अद्रुश़् आमरा भीतर द़री हिलादे लक आहा उही द्रुश़् बात कोर हल चें जते चान्द लाटी से शादूल पर प्रहार करे ता ची आ, अद्रुश़् ता पूरा नेतिक तक पतल के बडली दे ता ची चान्द जे शादूल संगे भायजै का पाएक भेल शादुलक दात चान्दक कंथ पर रहेता चे मुदा तकने इमाम दूर से जोर से बजे चती शादुल अब बस एक ता अवाज पर ओ ब्यंकर भालु अपन क्रूरता चोडी देता चे तनेक सोचू, इते पशु मनुख से बेशी नैति का मानविय दिखाई ता चे वो उआप द्यान्त बावुग द्रिष्टी कोन आची मुदा हम चाहव जहाग एक बेर चान्दक जुता मेटार भाका सुचु। हम्रा चान्द कोनो कलनायक नी लागे तची तकी उज़ समविदन हीन नहीं आची आई, उज़ समविदन हीन नहीं आची अगर उदाने लेलतर से देखलक अचे पूलिसक लाथिख है देखलक अचे गरी भी तच्छल अगर बुची चुका लागी गेल तो उखरे दूए एकर जमीन के पट्टक कही वो लगा वो लगा वो लगा वो वो लगा वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो मुदा की उही जमीन के लें उह भालु के मारी देद की इह उही समस्या के समादान अची आज समस्या के ज़ड के नजर अंदास कर रहल ची ज़ड अची उही समुदा एक चारो दिस पसरल, कानूनी असमाजिक जाल अदर्त पर्वार में स्पस्ट चल एक दम जां पुलिस उक्रा भालु संगे देख लेद उसीदा जेल जायतक, चान जेनाई तची बालु आप उनका लोकनिक जीविका नहीं बलकी उनका लोकनिक काल बनी चुकलगष चान एक ता अस्ठाए जीवन चाहे तची उ सीदा जेल जायतक चान जेनायत छी जे भालु आप हुनका लोकनिक जीविका नहीं बलकी हुनका लोकनिक काल बनी चुकलेच चान एक ता अस्ठाए जीवन चायत छी एक ता मुर्गी फाम खेती इप पीडियक दरदसा बाहर निकलप के हिताशा पोन प्रयास छी आईक एतर क्हम्रा आन्शिक रूप सबुजाला बत अची मदा भीबमाख की मदलब भीबमत सादूल के चान से बेशी माने चलीा आँ माने चली जखन सादूल भीमार परलचलन तकन और राती राती बहर जाएक को कर सेवा करे चली आब उब उब वी मम्मा चान्द के योजना मसामती दोदे च्छती की इलालच नहीं आची. उआँ सोचे च्छती जब बेटाक मुर्गी फार्म हे ताक, आई टानीक पुतो हूए ताक. इटा बहुतिक प्रगतिक लाल्सा आची. आँ, इलालच नहीं आची. इक ता माताक औई आदिम व्रित्ती के दर्षावे तची जतःई उ आपन मानव संटानक सुरक्षित भविश्ष्षलेल कोनो से हो त्याक करे बाकले तए आर अची मुदा त्याक आपन सातिक देखु जखन आपन बच्चाक भविष्ष्व आए एक ता पशूमे सकोनो एक की चुन्बाग होताएच तकन आदर्ष्वादक विलासीता समाप्त पोजाएत छी भी मम्मा एक कत्फोर वास्तविक्ता बुजे चति जे उ शादुल संगे चान्दक भविश्य सुरक्षित नहीं का सके चथिन ती कच मानी ले लाओ। जे परिस्तिति हुनका सब के एक ता देवालक आगा थाड़ कोडे लक्छला मुदा इमाम जे अन्तिम निरने ले ले लें उक्रा की कहाव की उक्रुर्ता नहीं चले? कोना, उता इमामक असमन्जसक दूखद मद्यम मार्ग चल. दूखद मद्यम मार्ग. उआ, इप पुरन रूपसक कायरता आची. इमाम सादूल के उपी कच्छाल अद तमाकू कुवाक पागल बनादेवे चाहत ची ताकी उक्रा जंगल में चोडल जासकःए जे भालु मनुस्सजका मकए के भाशी और भात ख्यवाक अब्यास्त बहुगे लची उक्रा जंगल में कुना चोडल जासकत आची तो की करेता? उक्रा मारी देद? जे कुछ मुदा उ मासुम जीव जनी तो नहीं आची, जे उकर म्रित्तिव के गडड़ा खोरल जा रहे लची. उकर अस्म्रिति हीन कर पागल कर जंगल में चोडब सीदे-सीदे म्रित्तिव दंद देवसमान आची. इमामक अपना पापक छुपायवाक प्र्यास आची. इमानवता कहार आची देखो, आहा इमामक अस्तितिके गेराई सा नहीं बुज रहे लची इमाम लग दोसर विकल्प की चल आहा इमामक आदर श्वादी चश्मासा देख रहा आची मुदा इमाम एक ता गरीब गुमन्तु वेक्ती चतिन समाज हुंका पतकीर कहात अच्चनी हुंकर अपन नामदरी लोक नहीं जानता ची मुदा हो शादूल के कतो सुरक्षित श्धान पर से होता दसके चला कते दे ता श्रोद सामगरी स्पष्ट करत अची जे इमाम दस दिन दरी शादूल के बेचलेल दरदर बदकला चिर्चिन्ता मुदुकास लेकबदुनाकल दरी आप याज तो केली नहीं मुदा कानुन कदरे के अक्रा क्हरिदवाक लेज तब तधयार नहीं चल पशुलस, आर्थात पूलिस के दर, सब के चल, आजकन क्यो लेबाक लिल तधयार नहीं भल, अब आब आब एटा जीूते गाला पर उतारु चल, तकन इमाम की करते है। इस थी तो जतिल चल शादुल के पागल के जंगल पथेबा से उक्कम से कम चान्दा कोई बहयंकर गद्धा से बचिगेल, एक संगे परवार के दुए एकर जमीन भेट्बाक रस्ता से हो साफ पोगेल. एते विकल्प, खराब अब बहुत खराब के बीच चुनाव अख्छल. अब भूजाएच फीज जे इदूई खराव विकलप के बीच का चुनाव चल मुदद जखन आहा कुनो जीव के अपन आश्रित बना लेजचची तखन आहा के जिम्मदारी उकर प्रती आजीवन है तखछी जखन शादूल के कारने परिवार भूँकमरी से बचल पचल तक्हन उ सदा लेल मिथ कहल गिल और जक्हन जमीन भेट्बाक आशा जागिल तक्हन उ भोज बनी गिल स्वार्त मनुश्य से उकर सबसे नीक गुन चीन लेत अची इस स्वार्त नहीं अची मतलब इगरीबी की चक्रसे बहार निकलवाग अची चान्दक लेई शादुल उही कलंकित अतीत के प्रतीक अची जाही से उ मुक्त होबाई चाहे तची आ इमाम अतता बुजला जे उहेक ता पशू रूपी अतीत के पकडे का अपन मानाव संटानक भविष्यके नहीं मारी सकची थी त्स्तित्वक संगर्श आ खरूनाक भीज के इरेक्षा के तिख जटिल अची इमामक परिवार आ शादूलक इ कता सिद्ध करेट अची जे जगन भूख आ विवस्ता प्रहार करेट अची तकन प्रेम की परीबाशाय चकना चूर भजगे तची एक दम सही काल हूँ इको नो सरल हर जी तक प्रष्ने नहीं आची इख रहाँ सब किन दिखावे तची जे कतना गरीभी कठोर निरनै लेवे लेल विवष करे तची स्रोट सामगरी में आगो आएो बहुत रास अनुट्तरित प्रष्न ची जिश्रोदा सब केन आपन द्रुष्टि कोंषा विह्षार करवाकलेल प्रेरिट करेत अची. बिल्कोल. आप विमर्ष में हम्रा सब संगे जुडबाकलेल बहुत-बहुत द्श्नवाद.

← Transcript index