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मैथिली_वेब_पत्रकारिताक_इतिहास_आ_फर्जीवाड़ा.mp4
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- 0:00–0:19देबेट में आहक स्वागत अछी, सन 2005 में मैठलीक अछिण अछिण लगा, मैं इक दब बाईर खेल वेल चल, हमरे सब आज आशीश अचिनार जीक, लिखल, चर्चिट पोती, मैठली वेप पत्रकारिता के डिहास के आदार पर चर्चा कर है लची.
- 0:19–0:25ता उसमै एक तव मेठ्टली ब्लोगर अपन वेप्साइत के सबसे पहल साभित करवाग होड में
- 0:25–0:27अब बाक डेटिंग वला प्रकरन
- 0:27–0:30एक दम अबन ब्लोग पोस्ट के बाक डेट कर देलने
- 0:30–0:36माने पोस्ट लिखलने 2005 में मुदा उकर तिती बदल के 1999 वे कर देलने
- 0:36–0:40उक्र लागल, जे अई अई अई उई बजान जाएच्छे
- 0:40–0:48मुदा उए भिसरी गेला जे अईटनेट पर दिजिटल फुटप्रिंट माने जे तकनी की साखषा अचे उगगे जुड नहीं बजगे थाची.
- 0:48–0:52कमपुटर के सरवर सब ताचीज सुब्षित रखषित रखइथ ची.
- 0:52–0:54आप एक पएग भात चल.
- 0:54–0:57बिल्कुल, ता हमरे विशेपर सपष्ट मानाव अची,
- 0:57–1:02जे इतिहास सरवदा कालक्रम, तत्ध्या अटकनीकी साख्ष्पर अदहरीत होई चे,
- 1:03–1:08जे पहिले आयल उपही रचे, इन्टनेट पर उकर जे क्रोनलोगी एची,
- 1:08–1:10वैई उकर वास्तविक इतिहास अची.
- 1:10–1:15दिकु हम आहा के बाज से सहमत ची जे उ दिजिटल फुट्प्रिंट महत्टोपोना आची
- 1:15–1:21मुदा मात्र इंट्रनेट पर एक ता पन्ना खोल लिब इतिहास नहीं कहला बे ता ची
- 1:21–1:23हमर सोच एही पर कनी भिन आची
- 1:23–1:25भिन आची, कोना
- 1:25–1:29अगरा शहर तक्हन कहबे जक्हन उते रस्ता बनाइता चे लोकक लेल सूभीधा होईता चे आर मने एक तप पूरा व्यबस्ता थाड होईता चे.
- 1:29–1:31मैतली वेप पत्रकारिताक वास्त्विक स्रुवात उई चिट्पृपन्ना से नहीं,
- 1:31–1:37अहा उक्रा शहर तक्हन कहबे जक्हन उते रस्ता बनाइता चे, लोकक लेल सूभीधा होईता चे,
- 1:37–1:40और मने एक तप पुरा व्यवस्त्धा थाड होईता चे.
- 1:40–1:44मेतली वेप पत्रकारिताक वास्त्विक सुवात उई चिट्फुट पन्ना से नहीं,
- 1:44–1:47अपने नहीं बलकी तखन मानल जावाग चाही
- 1:47–1:49जगन एक तद संस्तागर दाचा आयल
- 1:49–1:51जगन मानकी करन भेल
- 1:51–1:53आम्मेठली के एक तप पुन दिजितल एको सिस्तम भेटल
- 1:53–2:23वूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 2:23–2:53यह उसमए चल जखन अगट दालब कनेक्ष्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्
- 2:53–3:23वो उगर ब्रजीवाडा के प्रदाफाश केलनी उगर ब्रजीवाडा के प्रदाफाश केलनी उगर ब्रजीवाडा के प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलन
- 3:23–3:26अगरा पत्रकारिता कहब भेशी बहाजाते
- 3:26–3:28आहा जकरा दिजितल फुट्प्रिंट कहेत फीट
- 3:28–3:31हम अखरा अंटरनेट के दिजितल कहन्दार कहत फीट
- 3:31–3:35दिजितल कहन्दार यह तब बहुत कठोर शब्वगल
- 3:35–3:37कछो रच्ट बहुगल
- 3:37–3:39अगरा अगरा अगरा वोगल
- 3:39–3:43अखरा पत्रकारिता कहब भेशी बहाजाते
- 3:43–3:45अहा जक्रा दिजितल फुट्प्रिंट कहेट ची
- 3:45–3:48हम अखरा अंटरनेट के दिजितल कहन्दार कहट ची
- 3:48–3:52दिजितल कहन्दार इप बहुत कदोर शब्द बहगल
- 3:52–3:54कदोर अची मुदः सथ्य अची
- 3:54–4:24अग वाज्त्ट्विक इतिहास तकन बने तची जक्चन तवाज्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्�
- 4:24–4:26अगर ब्रेड़ लिपी में से हो सामगरी प्रकाषित के लग.
- 4:26–4:28अगर ब्रेड़ लिपी में से हो आप आप आप लग.
- 4:28–4:58अगर नदा बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बा
- 4:58–5:02वेब अग्रिगेटर कतिक ज़रूरी चल किकता अई काली लोके क्रा भिसरी गेल चातीने.
- 5:02–5:08एक दम सही कोलू वहा, आई हम्रा सब सोषल मीट्या पर सब किचु एक ठाम देखी लेच्ची.
- 5:08–5:12मुदा 2008 सब लहने अंटरनेट पर कोनो मैठली बलोक कोजब,
- 5:12–5:17वेब एक्रिगेटर एक तक्निकी वेवस्ता चल, जे RSSpeed के उप्योग करे चल
- 5:17–5:20माने, अटोमेटेड अब्टेट्स
- 5:20–5:28अगर नवा पोस्ट कर लिंक श्वचालित रूपे एक ताम एक तापन नापर लाव आवे चल.
- 5:28–5:35एक रफ एब हेल जि पाथख के बीस्ता रगल लग यूरल मों राखवा कावषकता न नहीं चल.
- 5:35–5:38इचे एक ता एको सिस्तम बने नाई.
- 5:38–5:45यह च़ाब बज़ाद बसे शहर नहीं तची वेब आग्रीगेटर जगाँ रस्ता बने बसे शहर बने नहीं तची
- 5:45–5:49निक्तर कची आव विदेखिर जे 2008 के संस्तागत सरुबत बात करोहल ची उप्रभाव्शाली आची
- 5:49–5:55अविदेखिरजे 2008 के संस्तागत सरुबत बात करोहल ची उप्रभाव्शाली आची
- 5:55–5:59मुदा यी सिस्तम अचानक सै सुन्यसत नहीं कहसल चल
- 5:59–6:00सुन्यसत नहीं मुदा
- 6:00–6:02हम फेर सै वही बात कहब
- 6:02–6:06जे जब भूनियाद नहीं रहीते तो महल कुना बनी ते
- 6:06–6:11आव उही दिजिटल क्हन्दर के बात के लो, मुदा वही खन्दर ता तकनिक के जनम देलक.
- 6:12–6:17जकन कते करास बात ब्लोग अपन पोस्ट के 1999 कर दिखाबक प्रयास के लो,
- 6:18–6:21तब पोतिक लिखभ आशीश अंचिनार कोना अकर पकडलने,
- 6:21–6:25इबुज्बा हम्रा सब के लेल बहुत जरूरी आची
- 6:25–6:28अव, सर्वर कर देटा से पकडल लें
- 6:28–6:31बलक्डुल, अव, भ्लोगर दिस्पले देट ता
- 6:31–6:33उनि सनिन्यानवे का देल इनही
- 6:33–6:35मुदा भ्लोगर जे गुगलक प्लैट्फोम अची
- 6:35–6:39उकर सर्वर अपने आप जे यूरल बनावेत अच्छी
- 6:39–6:41वही में वर्श आमास आमबेट बहजाई ची
- 6:41–6:44जना, 2005-04, POST NAME
- 6:44–6:49अच्छिनहर जी ए यूरल कोही 2005-2013 के तिखी का
- 6:49–6:53इस सिथद के लिन ही जे कुस्टम लिंक वा फुच्छर POST का सूभिदा
- 6:53–6:56तुवहाँद्सार आपोर ब्लोगर में चले नहीं
- 6:56–6:58उतो उई समय कर लिमितेशन चल
- 6:58–7:02आव उई चुट चुट तकनी की ज्यान अ दिजितल साखषे के बिना
- 7:02–7:04इतियासक प्रमानिक्ता बची नहीं सकचल
- 7:04–7:07तुवहाँद्सार चार में गजेंद ताकूर कष्म्दिया
- 7:07–7:12अदो हदर पाच में प्रकारान्तर जगका भ्लोग्स पत्रकारिता का भीआ बोने चल.
- 7:12–7:15बीआ बोना या अप्सल काटा में बहुत.
- 7:15–7:19नहीं ये तए भीआ अप्सल का बात नहीं अची.
- 7:19–7:21इपहिल देग का बात अची.
- 7:21–7:23व्यक्तिग जुनुन का बात अची.
- 7:23–7:27आहा व्यवस्ता आहा एको सिस्तम गब करे ची
- 7:27–7:30मुदाई तिहास हमेशा व्यक्ती विशेसक जुनुन सबने तची
- 7:30–7:32सिस्तम हमेशा पाच्धा आबे तची
- 7:32–7:35आहाग लागी तची जब व्यक्ती सब कुछ करे तची
- 7:35–7:36शुरु मेता हाँ
- 7:36–7:41पोठी मे राजीव रंजन लालजीक मेत्छली लोकगीत ब्लोगग चर्चा ची
- 7:41–7:43जर 2007 में बने लन ही
- 7:43–7:45उएक ता व्यक्तिगत प्रयास चल
- 7:45–7:49जर बिना कोनो आर्थिक लाबख, मेत्छलिक पारमप्रीग गीतक
- 7:49–7:51अंटनेट पर सन्रक्षिट कर रहल चल
- 7:51–7:59वाया आशीश अंचिनार स्वैंम 2008 में जर अंचिनार अखर स्वूग्र यानी उक्रा देखू.
- 7:59–8:01उगजलक लेल नीक मंज्चल.
- 8:01–8:02बहुत नीक.
- 8:02–8:04उ मात्र मैठिली गजल पर केंद्रच्छल.
- 8:04–8:08उ मैठिली गजलक के अंटनेट पन नव जीवन देलक.
- 8:08–8:20अनलाई मुशाईरा शुरूके लक, गजलक व्याकरन पर चर्चा शूके लक, इसब वन मैन आर्मी प्रयाश चल, जो इव्यक्तिगत ब्लोगज नहीं ते ताहां के वेब अग्रिगेटर की अग्रिगेट करी ते.
- 8:20–8:24अगर उद्दरी एक ता विक्ती काज कर रहल अची उब्लोग अची
- 8:24–8:26जखन उस समुडाय में बदली जाई तच है तच हन वास्तनिक दिजितल संस था बनाई तच
- 8:26–8:28मैठ्छली विक्पीट्या कु दाहरन लीजिया
- 8:28–8:32जोदरी एकता विक्ती काज कर रहलाची उ ब्लोग अची
- 8:32–8:34जक्हन उ समुडाय में बदली जाई तच है, तच हन वास्तनिक दिजितल संस्ता बनाई तच
- 8:34–8:36मैठ्फली विक्पीट्या कु दाहरन लीजिया
- 8:36–8:38इक उनो एक विक्ती नहीं बनाचा कै चल
- 8:38–8:48जोदरी एकता विक्ती काज कर रहल अची उ ब्लोग अची जक्हन उ समुदाई में बदली जाई तच्हन वास्तनिक दिजितल संस्ता बनाई तच्हन.
- 8:48–8:53मैठली विक्की पीट्या कु दाहरन लीजिया एक उनो एक विक्ती नहीं बना सकै चल.
- 8:53–8:55पोथी में स्पस्ट देल गेल अची
- 8:55–8:58जे 2008 में गजेंदर ताकृर एकर लिल
- 8:58–9:00विकी मीट्या फाँड़ेशन के आवीदन देलने
- 9:00–9:02मुदा की उद्रत बनिगल?
- 9:02–9:04नहीं, उही में तसमेल आगल चल
- 9:04–9:07आए, विकी पीट्याक नियम होई चाए
- 9:07–9:13जखन्दरी एक ता सक्रीया कम्युनिती हाजारों लेक नहीं लिखत तक्धारी उक्रा अप्रूवल नहीं भेटत.
- 9:13–9:15आव कम्युनिती कोना बनल?
- 9:15–9:18उ कम्मिनूटी बनल उमेश मन्डल जका लोखसा,
- 9:18–9:23जे उही समें सत्टर प्रतिषत प्रिष्टक निरमार अकेले अपने नितुट्तो में केलनी,
- 9:23–9:28राजेश रंजन आा आन अनेक योग्दान करताक अथक अनवाद अ लेकनिक बाद,
- 9:28–9:33वो सालक संगर्षक बाद 2014 में मैठली विकी पीटीया के प्रूल बेटल
- 9:33–9:38गूगल त्रान्सलेशन लेल 2011 में जे प्रयास भेल उहो एक ता सामूहिक काच्छल
- 9:38–9:41जत यो अनेक लोग अपन समेदेलनी
- 9:41–9:44बिना कोनो स्वार्थ वा पारिष्रमिक के
- 9:44–9:47अपन बाशा के digital सन्सार में स्तापित करभा लेल
- 9:48–9:49एकर अर्थ बुजेए चीया हम
- 9:50–9:51इंटनेट पर इतिहास
- 9:51–9:54समाजिक समहिक प्रयास्सम बनल अची
- 9:54–9:57विक्तिगद ब्लोग एक ता नीक डारी भोसा की जे
- 9:58–10:01मुदा विक्पीटिया जका अपन सोर्स प्रोजेक्
- 10:01–10:04इक तब भाशा के दिजितल दुनिया में नमर कर देच
- 10:04–10:08अहा की कमुनिटी प्रोजेक्त का बाद
- 10:08–10:12हम्रा सोजे पोथिक तेसर अ सबसा महत्तूपों हिस्सा दिस्स्लोजाए चे
- 10:12–10:17अहा विकिपीटिया आ अनुवादकक जि समहिक प्रयासक बात कर रहल ची
- 10:17–10:23हम्रा एक तब आत बताओ, औही विकिपीटिया का देटा को प्योग की भेल, उकर परिनाम की भेल,
- 10:23–10:26औही देटा से भाशा के दिजितल उपस्तिती पक की भेल.
- 10:26–10:30मात्र उपस्तिती नहीं, औही समुदाए जे देटाभेस बनवलक,
- 10:30–10:37उ देटाबेस अंताथा आट्फिशल अंटलिजन्स माने AI केर मशीन लेणिन्ग लेल ट्रेनिग देटा बनल
- 10:37–10:42जाए आहा तकनी की विकासक क्रमेक यात्रा कत देखफ ता इसभ एक तुसरा सजुड़ा लची
- 10:42–10:482005 में अम विकाज जी दवारा मैठिली उनी कोट के लेल जे मानक प्रैयाज भेल चल,
- 10:48–10:50उ आजुक आयुकक फाँडशन चल.
- 10:50–10:54इबात हम माने ची जे उनी कोट एक ता पाग करानती चल.
- 10:54–10:59बलकल. अव वैग करानती आई एतदरी पहुच गेल अची,
- 10:59–11:29जे एक एक आई फो भारत केर अगर नदिक त्रान्स तु जे तो हैसार तीस में आएल वा माईक्रो सोफ्त बिंक त्रान्सलेटर जकर नेट्रत्व जे अन यूखेर दोक्तर गीरीषनात जाएक रहल चतिन उब मेत्फिली के विष्विस्तर पर प्रस्थापित कर रहल चतिन ए
- 11:29–11:35अब उजी देटा के आदार पर एक ता मशीन नाच्रल लंगविज जनरेशन कर हो लची
- 11:35–11:40एकर माने अची जे मशीन अब मेठली भाशा में अपने वाख्ये गडी रहा लची
- 11:40–11:46आहा मेठली बजाएची आज स्पीच लिकशनिशन स कमपुटर उकरा ताइप कर हो लची
- 11:46–11:48यी तक्निक्यात्रा के च्रम अची
- 11:48–11:50जाहम क्रोनोलोगी के नकारभे
- 11:50–11:52तई भुजबेने करब
- 11:52–11:55जे आए जे आए मेठली भुजी रहल अची
- 11:55–11:59उकर जर उही दूहाजार केर भालसरी गाज जका साइट मे आची
- 11:59–12:03खेर, हम आहाके तक्निक केर आही अंद्विस्वासस से सामतने आची
- 12:03–12:04अंद्विष्वास?
- 12:04–12:08आहा, आहा एए आदेटाबिस्क बात करो लची
- 12:08–12:13मुदा की आहाके अंटरनेट कर ओ अनिहार पक्ष नहीं देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई
- 12:13–12:18जकर चर्चा आशिश अंचिनहार जी पोठी में बिस्तार से केलने आची
- 12:18–12:22तकनिक मात्र भाशाके सम्रिद नहीं करोलची
- 12:22–12:25इबाशाक आतमा के सिवो मारी रोलची
- 12:25–12:28इद बहुत निराशावादी द्रिष्टि कोंड भोगेला
- 12:28–12:30नहीं, इई यतार थाची
- 12:30–12:35अहां जे विकी पीड्याक बात के लो, उईक ता समपाद की फिल्तर का खाज कर इच्छल.
- 12:35–12:39मुदा आई अई अईट्रनेट अई सोचल मीट्या बिना कोनु फिल्तर कछी.
- 12:39–12:44इंट्रनेट लोकके ग्यानी संगे अग्यानी सुह बनार हो लगचा.
- 12:44–12:47पेख नुज़ का प्रसार भूर होलत्चा
- 12:47–12:50मुदा सबसे पएग खसोट जे साहिट्टिक भूल अची
- 12:50–12:53उआची फेस्बूकक लाएक बतन
- 12:53–12:56फेस्बूक लाएक बतन से साहिट्टिक की नुखसान बोज़ सके तची
- 12:56–13:00इत पाटका के लेखक से सोजे जोडे तची
- 13:00–13:04नहीं, नहीं, इवास्तविक सहितिक आलोचना के नष्ट करोल अच्छा
- 13:04–13:08अच्चिन राद्ची आपन पोठी में एक तब बहुत मारभिक उदारन देलनी एची
- 13:08–13:14उब लिखे चदी जे कोना एक तब नवगजल कार अक के फिस्बुक पर बेशी लाइक भेट्बा कारने
- 13:14–13:18इक तब बहुत पुराना अन्निक गजल कार सद्मा में चलीगला
- 13:18–13:21उ, उ गजल लिखभ कम को दिलने
- 13:21–13:26अ, फेस्बुक का लिएल्ग़रिदम गुनबता नहीं देखे तची
- 13:26–13:31उ मात्र इई देखे तची, जे के कते खाहा ही ही करहल अची
- 13:31–13:40वेस्बूक के लाएक बटनक आविशकारक जे चती, जस्टिन रोजन्स्टीन उस्वेम एक्रा समाजक लेल गातक मानी, अपन फोंसर फेस्बूक हता देलने.
- 13:40–13:42आश्चर्यक बात अची
- 13:42–13:45उकहल नी जे एई लोकक कन्टीशन करहल अची.
- 13:45–13:52जखन मेठलिक नव लेखक मात्र पच्चास लाइक बेट्वापर अपने आपके महां कवी बुजह लगए चती,
- 13:52–13:54तो वैचारिक शुन्नेता ची.
- 13:54–13:59मात्र एए द्वारा मशीन अनुवाद भजजेवासे भाशाक आत्मा नहीं बचेचा.
- 13:59–14:03पत्रकारिताक आर्थ आची सत्यक कोज अवेचारिक गेराई
- 14:03–14:06जे ईई लाएक बतन्या संस्क्रती निगली रहा लची
- 14:06–14:09बुजलिय, आख छिंता जाएज आची
- 14:09–14:13अप्छ्बुक लाएक कजे मनोवेग्यानेक प्रभाँ लेक्खख़ पर पर पडेत अच्छी
- 14:13–14:16उपोथिक अक ता बहुत मस्वूत अवलोकन अच्छी
- 14:16–14:19मुदा एक मिनेट, हमरे इबाद स्पष्ट करे दिया
- 14:19–14:21कि इद तकनीक कदोश अच्छी
- 14:21–14:24वाई हम्रा सबक मान्विय मनोविज्यान कदोष अची
- 14:24–14:27मुदा तकनिक तोक्र बड़ावा दार अलचने
- 14:27–14:32मुदा जे लाएक बटन कोज जस्टिन, रोसिन, स्टीन, केलनिन
- 14:32–14:35उ तकनिक तमात्रेक्ता तूल अचे
- 14:35–14:38जो एक ता लेक्ख लाएक कर लालच में
- 14:38–14:43नीक गजल लिख़़ जोड़ देता चे, तो लिखख का समस्या जे, इंटनेट कर नहीं.
- 14:43–14:51जकन चापा कहना मने प्रिंटिंग प्रेस, आयल चल, तकनो बदपैग पैग विद्वान लोकन के लागल चल,
- 14:51–14:53जे बाशाक मोलिकता क्टम बजेते.
- 14:53–14:55आँ, इतिहास ता यह कही चे?
- 14:55–15:02एक दम, लोग सोच च्छल, जे हाज से लिखल पोठिक जे सम्मान अचे, उच्छल पोठिक नहीं रहत.
- 15:02–15:07मुदद च्छापा क्शना की के लक, उग्यान के आम लोक दरी पहुज़ाू लक.
- 15:07–15:14उनिश्छे ही एक निक काज़ाचा जाचा जाचा विस्तार से चाचा कर अच्छा थी तो इन्ट्रनेट के कारने संबहुभ भेल.
- 15:14–15:44अद्र बाशा बाशा बाशा निक बाशा बाशा निक बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाश
- 15:44–15:49गाम्ग्ख्खब्री दून्याक कोना कोना में बैसल मेठिल दरी पूँचा रहल अची
- 15:49–15:52तकी इंट्रनेट कर सकारात्मक्षकती नहीं तेक
- 15:52–15:57इसब समबभ्भ्भ्यल की अक्त कोनो गजंद्र ताकोर, कोनो आशीश अंचनार,
- 15:57–16:02तच्निक रूपेन पहल देग उठेबाक साहस केलन ही
- 16:02–16:04वो साहस तच्छल
- 16:04–16:09तद इतिहास में उई पहल देगी केर महत्व सबसो भेशी होता ची
- 16:09–16:15कत देख रास बात केर फर्जी दावास लक भालसरी गाज केर वास्तविक साख्ष्दरी
- 16:15–16:17हमर इस पष्ट माना बची
- 16:17–16:25जे तक्नीकी तत्या सर्वर्क क्रोनोलगी अ एएगजका नव उपकरनक क्रमिक इतिहासी अस्ली तिहास अची
- 16:25–16:29इसब निर्विवात तत्या पर आदारे तची बहावना पर नहीं
- 16:29–16:34दिखू, हम तक्नीक वा पहल्डेक महत्व के शुन्यने कारहल ची
- 16:34–16:41आहा जे सर्वर क्रनोलोजी वत्तथ थेक आदार पर अनवेशनक बात के लोग, उनिष्चित रूपेन एतिहासिक अची.
- 16:41–16:46और आशिश अचनार जिक पोठी एह मैने में एक ता पैग माँल्स्टोन अची.
- 16:46–16:47बिलको अची.
- 16:47–17:17अगर सामोहिक संस्तापन आए ही मंज के वैचारे गुडवत्तामि आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी
- 17:17–17:21यह तर इंटर इंटरनेट फ्रेक नुज अलाएक ब्रमग भवर बनी कर रही जते.
- 17:22–17:25इएक ता बहुत नीक बहास अच्छे.
- 17:25–17:28या उगटा बहुत नीक बहास अच्छे आम्रा लागे तची,
- 17:28–17:32जे आहा के बाथ सहम एदबदरी पुन्ता सुमज्छिया,
- 17:32–17:37जे अगटा जटिल आ बहुत नीक बहास अच्छे,
- 17:37–17:43आम्रा लागे तची जे आहा के बाथ सहम एदबदरी पुन्ता सुमज्छिया,
- 17:43–18:13अब आप बद्यादा देखादा बाद्सा लगा प्रद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा
- 18:13–18:19अशीश अनचिनार जी के ईपो थी मात्र इतिहास कथेखवा नहीं आची,
- 18:19–18:22बलकी ईप हम्रा सब कर दिजितल वेबहार,
- 18:22–18:24हम्रा सब कर मनो वेग्यानिक पतन,
- 18:24–18:28अस सामोहिक उठान के एक तस पष्ट आरिसी आची.
- 18:28–18:33तजगन हमरा सब मेठली वेप पत्रकारिता के इतिहास दिस दिस दिखाई च्या,
- 18:33–18:36तई मात्रे इक तप्रष्न नहीं रहे जाई तची.
- 18:36–18:40जे पहले की आयल आहाके लेल की बेशी महत्वपुन ची,
- 18:40–18:43कि उ दिजिटल फुट्प्रिंट आग्ख्रोनोलोगी,
- 18:43–18:49यह की आयल आहा के लेल की बेशी महत्वपुना ची की और दिजिटल फुट्प्रिंट आग्क्रोनोलोगी
- 18:49–18:53जे तिहास के नीव रख है चे आजुट कें पक्रडाई तची
- 18:53–19:00उ इको सिस्तम आँ संस्त्तागत प्र्यास जो उही नीव पर एक ता बहव्य इमारत थाड करेताची
- 19:00–19:04आहा एहे पोती के तत्यस स्वयम विचार करूं आए आपन निष्कर्ष निकालूं
- 19:04–19:10विमर शक्क एही मन्च्सा आई एतबे, इचर चाहां की कनालागल आपन विचार जरुर साजा करब.
- 19:10–19:12एक्दम दन्निवाद.
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देबेट में आहक स्वागत अछी, सन 2005 में मैठलीक अछिण अछिण लगा, मैं इक दब बाईर खेल वेल चल, हमरे सब आज आशीश अचिनार जीक, लिखल, चर्चिट पोती, मैठली वेप पत्रकारिता के डिहास के आदार पर चर्चा कर है लची. ता उसमै एक तव मेठ्टली ब्लोगर अपन वेप्साइत के सबसे पहल साभित करवाग होड में अब बाक डेटिंग वला प्रकरन एक दम अबन ब्लोग पोस्ट के बाक डेट कर देलने माने पोस्ट लिखलने 2005 में मुदा उकर तिती बदल के 1999 वे कर देलने उक्र लागल, जे अई अई अई उई बजान जाएच्छे मुदा उए भिसरी गेला जे अईटनेट पर दिजिटल फुटप्रिंट माने जे तकनी की साखषा अचे उगगे जुड नहीं बजगे थाची. कमपुटर के सरवर सब ताचीज सुब्षित रखषित रखइथ ची. आप एक पएग भात चल. बिल्कुल, ता हमरे विशेपर सपष्ट मानाव अची, जे इतिहास सरवदा कालक्रम, तत्ध्या अटकनीकी साख्ष्पर अदहरीत होई चे, जे पहिले आयल उपही रचे, इन्टनेट पर उकर जे क्रोनलोगी एची, वैई उकर वास्तविक इतिहास अची. दिकु हम आहा के बाज से सहमत ची जे उ दिजिटल फुट्प्रिंट महत्टोपोना आची मुदा मात्र इंट्रनेट पर एक ता पन्ना खोल लिब इतिहास नहीं कहला बे ता ची हमर सोच एही पर कनी भिन आची भिन आची, कोना अगरा शहर तक्हन कहबे जक्हन उते रस्ता बनाइता चे लोकक लेल सूभीधा होईता चे आर मने एक तप पूरा व्यबस्ता थाड होईता चे. मैतली वेप पत्रकारिताक वास्त्विक स्रुवात उई चिट्पृपन्ना से नहीं, अहा उक्रा शहर तक्हन कहबे जक्हन उते रस्ता बनाइता चे, लोकक लेल सूभीधा होईता चे, और मने एक तप पुरा व्यवस्त्धा थाड होईता चे. मेतली वेप पत्रकारिताक वास्त्विक सुवात उई चिट्फुट पन्ना से नहीं, अपने नहीं बलकी तखन मानल जावाग चाही जगन एक तद संस्तागर दाचा आयल जगन मानकी करन भेल आम्मेठली के एक तप पुन दिजितल एको सिस्तम भेटल वूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� यह उसमए चल जखन अगट दालब कनेक्ष्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श्ट्श् वो उगर ब्रजीवाडा के प्रदाफाश केलनी उगर ब्रजीवाडा के प्रदाफाश केलनी उगर ब्रजीवाडा के प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलनी उगर प्रदाफाश केलन अगरा पत्रकारिता कहब भेशी बहाजाते आहा जकरा दिजितल फुट्प्रिंट कहेत फीट हम अखरा अंटरनेट के दिजितल कहन्दार कहत फीट दिजितल कहन्दार यह तब बहुत कठोर शब्वगल कछो रच्ट बहुगल अगरा अगरा अगरा वोगल अखरा पत्रकारिता कहब भेशी बहाजाते अहा जक्रा दिजितल फुट्प्रिंट कहेट ची हम अखरा अंटरनेट के दिजितल कहन्दार कहट ची दिजितल कहन्दार इप बहुत कदोर शब्द बहगल कदोर अची मुदः सथ्य अची अग वाज्त्ट्विक इतिहास तकन बने तची जक्चन तवाज्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्� अगर ब्रेड़ लिपी में से हो सामगरी प्रकाषित के लग. अगर ब्रेड़ लिपी में से हो आप आप आप लग. अगर नदा बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बाद बा वेब अग्रिगेटर कतिक ज़रूरी चल किकता अई काली लोके क्रा भिसरी गेल चातीने. एक दम सही कोलू वहा, आई हम्रा सब सोषल मीट्या पर सब किचु एक ठाम देखी लेच्ची. मुदा 2008 सब लहने अंटरनेट पर कोनो मैठली बलोक कोजब, वेब एक्रिगेटर एक तक्निकी वेवस्ता चल, जे RSSpeed के उप्योग करे चल माने, अटोमेटेड अब्टेट्स अगर नवा पोस्ट कर लिंक श्वचालित रूपे एक ताम एक तापन नापर लाव आवे चल. एक रफ एब हेल जि पाथख के बीस्ता रगल लग यूरल मों राखवा कावषकता न नहीं चल. इचे एक ता एको सिस्तम बने नाई. यह च़ाब बज़ाद बसे शहर नहीं तची वेब आग्रीगेटर जगाँ रस्ता बने बसे शहर बने नहीं तची निक्तर कची आव विदेखिर जे 2008 के संस्तागत सरुबत बात करोहल ची उप्रभाव्शाली आची अविदेखिरजे 2008 के संस्तागत सरुबत बात करोहल ची उप्रभाव्शाली आची मुदा यी सिस्तम अचानक सै सुन्यसत नहीं कहसल चल सुन्यसत नहीं मुदा हम फेर सै वही बात कहब जे जब भूनियाद नहीं रहीते तो महल कुना बनी ते आव उही दिजिटल क्हन्दर के बात के लो, मुदा वही खन्दर ता तकनिक के जनम देलक. जकन कते करास बात ब्लोग अपन पोस्ट के 1999 कर दिखाबक प्रयास के लो, तब पोतिक लिखभ आशीश अंचिनार कोना अकर पकडलने, इबुज्बा हम्रा सब के लेल बहुत जरूरी आची अव, सर्वर कर देटा से पकडल लें बलक्डुल, अव, भ्लोगर दिस्पले देट ता उनि सनिन्यानवे का देल इनही मुदा भ्लोगर जे गुगलक प्लैट्फोम अची उकर सर्वर अपने आप जे यूरल बनावेत अच्छी वही में वर्श आमास आमबेट बहजाई ची जना, 2005-04, POST NAME अच्छिनहर जी ए यूरल कोही 2005-2013 के तिखी का इस सिथद के लिन ही जे कुस्टम लिंक वा फुच्छर POST का सूभिदा तुवहाँद्सार आपोर ब्लोगर में चले नहीं उतो उई समय कर लिमितेशन चल आव उई चुट चुट तकनी की ज्यान अ दिजितल साखषे के बिना इतियासक प्रमानिक्ता बची नहीं सकचल तुवहाँद्सार चार में गजेंद ताकूर कष्म्दिया अदो हदर पाच में प्रकारान्तर जगका भ्लोग्स पत्रकारिता का भीआ बोने चल. बीआ बोना या अप्सल काटा में बहुत. नहीं ये तए भीआ अप्सल का बात नहीं अची. इपहिल देग का बात अची. व्यक्तिग जुनुन का बात अची. आहा व्यवस्ता आहा एको सिस्तम गब करे ची मुदाई तिहास हमेशा व्यक्ती विशेसक जुनुन सबने तची सिस्तम हमेशा पाच्धा आबे तची आहाग लागी तची जब व्यक्ती सब कुछ करे तची शुरु मेता हाँ पोठी मे राजीव रंजन लालजीक मेत्छली लोकगीत ब्लोगग चर्चा ची जर 2007 में बने लन ही उएक ता व्यक्तिगत प्रयास चल जर बिना कोनो आर्थिक लाबख, मेत्छलिक पारमप्रीग गीतक अंटनेट पर सन्रक्षिट कर रहल चल वाया आशीश अंचिनार स्वैंम 2008 में जर अंचिनार अखर स्वूग्र यानी उक्रा देखू. उगजलक लेल नीक मंज्चल. बहुत नीक. उ मात्र मैठिली गजल पर केंद्रच्छल. उ मैठिली गजलक के अंटनेट पन नव जीवन देलक. अनलाई मुशाईरा शुरूके लक, गजलक व्याकरन पर चर्चा शूके लक, इसब वन मैन आर्मी प्रयाश चल, जो इव्यक्तिगत ब्लोगज नहीं ते ताहां के वेब अग्रिगेटर की अग्रिगेट करी ते. अगर उद्दरी एक ता विक्ती काज कर रहल अची उब्लोग अची जखन उस समुडाय में बदली जाई तच है तच हन वास्तनिक दिजितल संस था बनाई तच मैठ्छली विक्पीट्या कु दाहरन लीजिया जोदरी एकता विक्ती काज कर रहलाची उ ब्लोग अची जक्हन उ समुडाय में बदली जाई तच है, तच हन वास्तनिक दिजितल संस्ता बनाई तच मैठ्फली विक्पीट्या कु दाहरन लीजिया इक उनो एक विक्ती नहीं बनाचा कै चल जोदरी एकता विक्ती काज कर रहल अची उ ब्लोग अची जक्हन उ समुदाई में बदली जाई तच्हन वास्तनिक दिजितल संस्ता बनाई तच्हन. मैठली विक्की पीट्या कु दाहरन लीजिया एक उनो एक विक्ती नहीं बना सकै चल. पोथी में स्पस्ट देल गेल अची जे 2008 में गजेंदर ताकृर एकर लिल विकी मीट्या फाँड़ेशन के आवीदन देलने मुदा की उद्रत बनिगल? नहीं, उही में तसमेल आगल चल आए, विकी पीट्याक नियम होई चाए जखन्दरी एक ता सक्रीया कम्युनिती हाजारों लेक नहीं लिखत तक्धारी उक्रा अप्रूवल नहीं भेटत. आव कम्युनिती कोना बनल? उ कम्मिनूटी बनल उमेश मन्डल जका लोखसा, जे उही समें सत्टर प्रतिषत प्रिष्टक निरमार अकेले अपने नितुट्तो में केलनी, राजेश रंजन आा आन अनेक योग्दान करताक अथक अनवाद अ लेकनिक बाद, वो सालक संगर्षक बाद 2014 में मैठली विकी पीटीया के प्रूल बेटल गूगल त्रान्सलेशन लेल 2011 में जे प्रयास भेल उहो एक ता सामूहिक काच्छल जत यो अनेक लोग अपन समेदेलनी बिना कोनो स्वार्थ वा पारिष्रमिक के अपन बाशा के digital सन्सार में स्तापित करभा लेल एकर अर्थ बुजेए चीया हम इंटनेट पर इतिहास समाजिक समहिक प्रयास्सम बनल अची विक्तिगद ब्लोग एक ता नीक डारी भोसा की जे मुदा विक्पीटिया जका अपन सोर्स प्रोजेक् इक तब भाशा के दिजितल दुनिया में नमर कर देच अहा की कमुनिटी प्रोजेक्त का बाद हम्रा सोजे पोथिक तेसर अ सबसा महत्तूपों हिस्सा दिस्स्लोजाए चे अहा विकिपीटिया आ अनुवादकक जि समहिक प्रयासक बात कर रहल ची हम्रा एक तब आत बताओ, औही विकिपीटिया का देटा को प्योग की भेल, उकर परिनाम की भेल, औही देटा से भाशा के दिजितल उपस्तिती पक की भेल. मात्र उपस्तिती नहीं, औही समुदाए जे देटाभेस बनवलक, उ देटाबेस अंताथा आट्फिशल अंटलिजन्स माने AI केर मशीन लेणिन्ग लेल ट्रेनिग देटा बनल जाए आहा तकनी की विकासक क्रमेक यात्रा कत देखफ ता इसभ एक तुसरा सजुड़ा लची 2005 में अम विकाज जी दवारा मैठिली उनी कोट के लेल जे मानक प्रैयाज भेल चल, उ आजुक आयुकक फाँडशन चल. इबात हम माने ची जे उनी कोट एक ता पाग करानती चल. बलकल. अव वैग करानती आई एतदरी पहुच गेल अची, जे एक एक आई फो भारत केर अगर नदिक त्रान्स तु जे तो हैसार तीस में आएल वा माईक्रो सोफ्त बिंक त्रान्सलेटर जकर नेट्रत्व जे अन यूखेर दोक्तर गीरीषनात जाएक रहल चतिन उब मेत्फिली के विष्विस्तर पर प्रस्थापित कर रहल चतिन ए अब उजी देटा के आदार पर एक ता मशीन नाच्रल लंगविज जनरेशन कर हो लची एकर माने अची जे मशीन अब मेठली भाशा में अपने वाख्ये गडी रहा लची आहा मेठली बजाएची आज स्पीच लिकशनिशन स कमपुटर उकरा ताइप कर हो लची यी तक्निक्यात्रा के च्रम अची जाहम क्रोनोलोगी के नकारभे तई भुजबेने करब जे आए जे आए मेठली भुजी रहल अची उकर जर उही दूहाजार केर भालसरी गाज जका साइट मे आची खेर, हम आहाके तक्निक केर आही अंद्विस्वासस से सामतने आची अंद्विष्वास? आहा, आहा एए आदेटाबिस्क बात करो लची मुदा की आहाके अंटरनेट कर ओ अनिहार पक्ष नहीं देखाई देखाई देखाई देखाई देखाई जकर चर्चा आशिश अंचिनहार जी पोठी में बिस्तार से केलने आची तकनिक मात्र भाशाके सम्रिद नहीं करोलची इबाशाक आतमा के सिवो मारी रोलची इद बहुत निराशावादी द्रिष्टि कोंड भोगेला नहीं, इई यतार थाची अहां जे विकी पीड्याक बात के लो, उईक ता समपाद की फिल्तर का खाज कर इच्छल. मुदा आई अई अईट्रनेट अई सोचल मीट्या बिना कोनु फिल्तर कछी. इंट्रनेट लोकके ग्यानी संगे अग्यानी सुह बनार हो लगचा. पेख नुज़ का प्रसार भूर होलत्चा मुदा सबसे पएग खसोट जे साहिट्टिक भूल अची उआची फेस्बूकक लाएक बतन फेस्बूक लाएक बतन से साहिट्टिक की नुखसान बोज़ सके तची इत पाटका के लेखक से सोजे जोडे तची नहीं, नहीं, इवास्तविक सहितिक आलोचना के नष्ट करोल अच्छा अच्चिन राद्ची आपन पोठी में एक तब बहुत मारभिक उदारन देलनी एची उब लिखे चदी जे कोना एक तब नवगजल कार अक के फिस्बुक पर बेशी लाइक भेट्बा कारने इक तब बहुत पुराना अन्निक गजल कार सद्मा में चलीगला उ, उ गजल लिखभ कम को दिलने अ, फेस्बुक का लिएल्ग़रिदम गुनबता नहीं देखे तची उ मात्र इई देखे तची, जे के कते खाहा ही ही करहल अची वेस्बूक के लाएक बटनक आविशकारक जे चती, जस्टिन रोजन्स्टीन उस्वेम एक्रा समाजक लेल गातक मानी, अपन फोंसर फेस्बूक हता देलने. आश्चर्यक बात अची उकहल नी जे एई लोकक कन्टीशन करहल अची. जखन मेठलिक नव लेखक मात्र पच्चास लाइक बेट्वापर अपने आपके महां कवी बुजह लगए चती, तो वैचारिक शुन्नेता ची. मात्र एए द्वारा मशीन अनुवाद भजजेवासे भाशाक आत्मा नहीं बचेचा. पत्रकारिताक आर्थ आची सत्यक कोज अवेचारिक गेराई जे ईई लाएक बतन्या संस्क्रती निगली रहा लची बुजलिय, आख छिंता जाएज आची अप्छ्बुक लाएक कजे मनोवेग्यानेक प्रभाँ लेक्खख़ पर पर पडेत अच्छी उपोथिक अक ता बहुत मस्वूत अवलोकन अच्छी मुदा एक मिनेट, हमरे इबाद स्पष्ट करे दिया कि इद तकनीक कदोश अच्छी वाई हम्रा सबक मान्विय मनोविज्यान कदोष अची मुदा तकनिक तोक्र बड़ावा दार अलचने मुदा जे लाएक बटन कोज जस्टिन, रोसिन, स्टीन, केलनिन उ तकनिक तमात्रेक्ता तूल अचे जो एक ता लेक्ख लाएक कर लालच में नीक गजल लिख़़ जोड़ देता चे, तो लिखख का समस्या जे, इंटनेट कर नहीं. जकन चापा कहना मने प्रिंटिंग प्रेस, आयल चल, तकनो बदपैग पैग विद्वान लोकन के लागल चल, जे बाशाक मोलिकता क्टम बजेते. आँ, इतिहास ता यह कही चे? एक दम, लोग सोच च्छल, जे हाज से लिखल पोठिक जे सम्मान अचे, उच्छल पोठिक नहीं रहत. मुदद च्छापा क्शना की के लक, उग्यान के आम लोक दरी पहुज़ाू लक. उनिश्छे ही एक निक काज़ाचा जाचा जाचा विस्तार से चाचा कर अच्छा थी तो इन्ट्रनेट के कारने संबहुभ भेल. अद्र बाशा बाशा बाशा निक बाशा बाशा निक बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाशा बाश गाम्ग्ख्खब्री दून्याक कोना कोना में बैसल मेठिल दरी पूँचा रहल अची तकी इंट्रनेट कर सकारात्मक्षकती नहीं तेक इसब समबभ्भ्भ्यल की अक्त कोनो गजंद्र ताकोर, कोनो आशीश अंचनार, तच्निक रूपेन पहल देग उठेबाक साहस केलन ही वो साहस तच्छल तद इतिहास में उई पहल देगी केर महत्व सबसो भेशी होता ची कत देख रास बात केर फर्जी दावास लक भालसरी गाज केर वास्तविक साख्ष्दरी हमर इस पष्ट माना बची जे तक्नीकी तत्या सर्वर्क क्रोनोलगी अ एएगजका नव उपकरनक क्रमिक इतिहासी अस्ली तिहास अची इसब निर्विवात तत्या पर आदारे तची बहावना पर नहीं दिखू, हम तक्नीक वा पहल्डेक महत्व के शुन्यने कारहल ची आहा जे सर्वर क्रनोलोजी वत्तथ थेक आदार पर अनवेशनक बात के लोग, उनिष्चित रूपेन एतिहासिक अची. और आशिश अचनार जिक पोठी एह मैने में एक ता पैग माँल्स्टोन अची. बिलको अची. अगर सामोहिक संस्तापन आए ही मंज के वैचारे गुडवत्तामि आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी आफ़ी यह तर इंटर इंटरनेट फ्रेक नुज अलाएक ब्रमग भवर बनी कर रही जते. इएक ता बहुत नीक बहास अच्छे. या उगटा बहुत नीक बहास अच्छे आम्रा लागे तची, जे आहा के बाथ सहम एदबदरी पुन्ता सुमज्छिया, जे अगटा जटिल आ बहुत नीक बहास अच्छे, आम्रा लागे तची जे आहा के बाथ सहम एदबदरी पुन्ता सुमज्छिया, अब आप बद्यादा देखादा बाद्सा लगा प्रद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा बाद्सा नाद्यादा अशीश अनचिनार जी के ईपो थी मात्र इतिहास कथेखवा नहीं आची, बलकी ईप हम्रा सब कर दिजितल वेबहार, हम्रा सब कर मनो वेग्यानिक पतन, अस सामोहिक उठान के एक तस पष्ट आरिसी आची. तजगन हमरा सब मेठली वेप पत्रकारिता के इतिहास दिस दिस दिखाई च्या, तई मात्रे इक तप्रष्न नहीं रहे जाई तची. जे पहले की आयल आहाके लेल की बेशी महत्वपुन ची, कि उ दिजिटल फुट्प्रिंट आग्ख्रोनोलोगी, यह की आयल आहा के लेल की बेशी महत्वपुना ची की और दिजिटल फुट्प्रिंट आग्क्रोनोलोगी जे तिहास के नीव रख है चे आजुट कें पक्रडाई तची उ इको सिस्तम आँ संस्त्तागत प्र्यास जो उही नीव पर एक ता बहव्य इमारत थाड करेताची आहा एहे पोती के तत्यस स्वयम विचार करूं आए आपन निष्कर्ष निकालूं विमर शक्क एही मन्च्सा आई एतबे, इचर चाहां की कनालागल आपन विचार जरुर साजा करब. एक्दम दन्निवाद.