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SADEHA 24 डीजेक_शोर_आ_मिथिलाक_कठघोड़वा_नाच.m4a

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Part 1 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 1
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  1. 0:00–0:02विबाव कराती आजे
  2. 0:02–0:04विबाव कराती आजे
  3. 0:04–0:06मुदा जते-जते पहले
  4. 0:06–0:08दफ्लिक औड़फ-दफ ताल हो चल
  5. 0:08–0:10बाव्स्लिक मदुर्दून पर काथक बनल रंगीन गोडा नाचाई चल
  6. 0:10–0:12आई उता एक की आजे
  7. 0:12–0:14आई उता दीजे कान भोडु शोर आजे
  8. 0:14–0:19बाँस्लिक मदुर्दून पर काथक बनल रंगीन गोडा नाचाई चल,
  9. 0:19–0:20आई उता एक की आचे?
  10. 0:20–0:23आई उता दीजे कान भोडु शोर आचे,
  11. 0:23–0:27आब आब आबाहर सावायल अरकिस्ट्राक फुवध पन चल रहा लाचे.
  12. 0:27–0:30आँ, इद्रिष्यत आब गाम गाम में आम भोगे लेचे.
  13. 0:30–0:32बिलकु आम भोगे लेचे.
  14. 0:32–0:36आई दिबेट में हमरा सब एही विशय पर चर्चा करो रहल ची.
  15. 0:36–0:38किषन कारीगर कक जी लेख है,
  16. 0:38–0:40विदेज सदेज चोबिस में,
  17. 0:40–0:43उ हमरा सबके एही तीद सत्टिदिस दھके लेत आचे
  18. 0:43–0:45सही कहली आचा
  19. 0:45–0:48उ लेक सप्ष्ष्ट्रूपें मित्लाक विलुप तोएत लोक संसक्रती
  20. 0:48–0:51जेना कथकोडवा अन नतुवा नाज पर किंद्रे ताचे
  21. 0:51–0:54मुदा मुदा मुख्या प्रष्न इया चे
  22. 0:54–0:58जे की इदीजे हमर लोक संसक्रतिक हद्या करो हो लग वा
  23. 0:58–1:02मने इगे वल हमर बदलेत रुचिक स्वबाविक परनाम थिक
  24. 1:02–1:07आप हमर ऐपर स्फ्ष्ट तरक आची जे इग कोनो क्रमिक विकास नहीं आची
  25. 1:07–1:11इग हमर मने हमर समूहिक सामाजिक उपेख्षा के कारने
  26. 1:11–1:14बहल एक ता अपुरनी या संस्क्रितिक हत्या थेक
  27. 1:14–1:17जक्रहा आदूनिकी करनक नाम पर सही तेरा एर रहल ची.
  28. 1:17–1:20मुदा देखू, हमेक्रा दोसर तरहे देखे थेखे छी.
  29. 1:20–1:24हमर तरक आची जे लोक कला कोनो रुकल पोख्री नहीं होई ता ची.
  30. 1:24–1:32जक्रहा बान्दिकर राखिलेब, लोक्कला सदे बाजार तकनीक अदर्षकक माग के अनुसार बदलेट्रहल अची.
  31. 1:32–1:33बाजारा कनुसार?
  32. 1:33–1:37रागा एक्दम आजुक जे परिवर्तन अची उकोनो त्रासदी नहीं अची,
  33. 1:37–1:41बलकी उही क्रमिक विकासक एक प्रा नवच्चरन मात्र थेख
  34. 1:41–1:45एक रा हत्या कहब मने अती भावुखता से प्रेरित अची
  35. 1:45–1:50करन कोनो से हो कला के जीवेट रहवाक पहल्षार्त उकर समकालिन प्रासंगिक्ता होई तची
  36. 1:50–1:57तै शुर्वात सम्कालिन प्रासंगिक तासे ही करी ची, भूजलीः, किशन कारिगरक लेक जखना हा पड़ेच ची,
  37. 1:57–2:02तो उगटा बहुत गमभीर मनोवेग्यानिक अ समाजिक तान्दिस इशारा करचती,
  38. 2:02–2:06कथ गोडवा वा नटूा नाज मात्र एक ता निर्थ तनही चल.
  39. 2:06–2:08ते आहा के अनुसारो की चल
  40. 2:08–2:21अव, मने उपनयन, विवा, आद्दुर्गा पूजाजकाउच्सव में, समाजक के एक सुत्र में बांद कर रक्वाक माद्ध्यम चल, मुदा एककर पतन कोना बहल, इस सुच्वाक बातच.
  41. 2:21–2:23मुदा पतन तरुची के कारने बहलने?
  42. 2:23–2:33नहीं नहीं सुनो, एक कर पतन उही मान्सिक्ता सब हेल जते गावा के प्रबूद आमद्ध्यवर गी आलोक आपन ही माटिक कलाकार सब के हतोट सहित करे लागला.
  43. 2:34–2:40लेक में सपष्ट लिखा लचे उ ताना मारे त्सला पडभे लिखवे की नच्निया बजनिया बनतें.
  44. 2:40–2:42आई, इवाके तब बहुत प्रचले चल.
  45. 2:42–2:46भिल्ल्कुल, आई वाके नाया चे,
  46. 2:46–2:48इवो ही समाजिक पाकहन्ट के परीचाय कचे,
  47. 2:48–2:53जते हम्रा अंग्रेजी भाजब या शेहर के भोपु बजाया वाला
  48. 2:53–2:57वाग्टी के दफली बजाया वाग्टी तचे.
  49. 2:57–2:58मुदाई तव...
  50. 2:58–3:02अगे कलाकार अजे कलाकारक के सम्मान देबा समना कर दिलक,
  51. 3:02–3:07तकन उस्मानुसैन, बनाया राम, राम्दुलार पास्वानजका दिगगज कलाकारक के,
  52. 3:07–3:09अपन पेट पालप कथिन बोगेल.
  53. 3:09–3:12इकोनो दर्षक के स्वाबहाविक बडलाउ नचल.
  54. 3:12–3:16इक ता बज़़़़ के स्वाभिक बदलाउ नचल
  55. 3:16–3:18ता आहा के नजरे में एक चल
  56. 3:18–3:20इपन उहीं बहावनाचल
  57. 3:20–3:23जे आपन ही चीच के नीचा दिखा का
  58. 3:23–3:26सुएंके आदूनिक सिथ करे चाहच्चल है
  59. 3:26–3:29देखू, जोन भोजपृरी समाज आपन
  60. 3:29–3:32अगरा पद्मश्री दहरी पूचा सकय तची
  61. 3:32–3:34तम मित्ला मैं एही कलाक विलुप्त होएब
  62. 3:34–3:37शत्प्रतीशत हमर उपेख्षक परडाम चे
  63. 3:37–3:39इएक ता प्रभाव्शाली तरक थची
  64. 3:39–3:41मुदा कि आहा विचार कैने ची
  65. 3:41–3:43जे मने आहा के इई तरक
  66. 3:43–3:55अगर ख़ा की आहा विचार कैने ची, जे मने आहा के एद्टर्क जे समाज के हीन भावना एक राम प्रदेलक, सूनी में बहुत नीक लगगे ता ची, मुडा एप पून सत्ते नहीं आची.
  67. 3:55–3:57अचा, को ना?
  68. 3:57–4:02आहा मनुरन्जनक इतिहास के केवस एक दिससन देखी रहल ची.
  69. 4:02–4:08लेक में स्वाईम उलेक अची जिन नतूा कला कुनो विषुद परमपरामे स्तिर नहीं चल.
  70. 4:08–4:11उ पहिने सही समजवता करे रहल चल.
  71. 4:11–4:14आहा चिनकी नतूा का बात किया बिसरी जाएची.
  72. 4:14–4:17चिनकी नत्वा एक ता अप्वाद चल
  73. 4:17–4:19नहीं, उवआब अप्वाद नहीं चल
  74. 4:19–4:22जखन उन नत्वा कोते उपर कोत्री
  75. 4:22–4:25जगक विशुद द फिल्मी गीत पर
  76. 4:25–4:26रिकोडिंग डान्स करे चल
  77. 4:26–4:28तकन उखोनो परम परागत
  78. 4:28–4:31लोक आत्माक प्रदर्षन नहीं करो राल्चल
  79. 4:31–4:35उ उही समय का बाजार वाद अदर्षक के मांके पूरा करहल चल.
  80. 4:35–4:38मुदा दर्षक उक्रा पसन्टता करे चलने.
  81. 4:38–4:43इक्दम दर्षक उही रेकोर्टिंग डान्स पर सीटी बजवाए चला.
  82. 4:43–4:47तजखन उक्ला स्वेंके भालेवूड की गीटक अनुसार बडली लिलक,
  83. 4:47–4:53अव आपन मुल स्वरुब छोरे दिलग, तकन उक्रा हम परम परागत कोना कह सके ची?
  84. 4:53–4:57मने आख कहे चाहा ची, जी उकल आप पहने ब्राष्ट बहाचु कल चल?
  85. 4:57–5:02हम ख्षमा चाहब मुदा हम एक रा ब्राष्ट कह भ नहीं माने ची.
  86. 5:02–5:04इब बदलाउ चल.
  87. 5:04–5:10आप जखन समाज उकर बदला सीदा दीजे वा औरकेस्टा के बज्वार आच्छी
  88. 5:10–5:13तकना उक्रा सांस्क्रेतिक पतन क्या कही रहाल ची
  89. 5:13–5:15कियाक जे उ...
  90. 5:15–5:19आँ... इम आत्र माद्ध्यमक बदला अच्छी भुजलिये
  91. 5:19–5:23अगर उखाख रूची बदलल, तकनीक सहज भेल, आमनुरनजनक सादन बदलल,
  92. 5:24–5:27जे दर्षक नट्वासे फिल्मी गीता का पेखषा रखे चल,
  93. 5:27–5:32औआ भ दीजे पर उई फिल्मी गीता के बेसी निक सावड कोल्ल्ती में सुनी रहा लगची.
  94. 5:32–6:02इसे इसे तो आपना दिलाग प्रादागा था जो जो बज़ागा था जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो �
  95. 6:02–6:14अखर जे स्थन्ये वाद्यन्त्र चल, जेना दाफ्ली, बाूंसली, अग कत गोडवाक अखात्खर बनल गोडा, इस सब विषुद रूपे मिठिलाक माटी कुपच्छल.
  96. 6:14–6:20अखर्ज शारीरिक अभिने चल, लोकक भीज जाक रुडक नाई, बच्चा सब के दरे नाई आहासे नाई.
  97. 6:20–6:22आहा, उएक ता अईंटराक्ष्चन चल.
  98. 6:22–6:25भिल्कुल, उस तानिताक प्रतीक चल.
  99. 6:25–6:30अगा अरकेस्ट्र से कर तुल्ना करोल ची, मुदा अरकेस्ट्रा में की आचे,
  100. 6:30–6:35एक ता मन्च ज़े, जटे दर्षक अकलाकारक भीट अक द्रिष्ष दिवाल लचे.
  101. 6:35–6:37मुदा अरकेस्ट्र से होत दा.
  102. 6:37–6:40एक सेक्ट्र, जखन रोल खेलनिहा नतुव,
  103. 6:40–6:45उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल,
  104. 6:45–6:49उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल,
  105. 6:49–6:53उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल,
  106. 6:53–6:56उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के चल,
  107. 6:56–6:58अगर उदारी पात यागा अवाक संखिले ताची
  108. 6:58–7:00जे उप फिल्मी गिट पर नाचीो रहल चल
  109. 7:00–7:02तो उप बडगगदक नाव डारी चल
  110. 7:02–7:04आ आरकेस्ट्रा
  111. 7:04–7:06अरकेस्ट्रा उवाक जोका ने थिक
  112. 7:06–7:08उठा प्लास्टिक का ज़ाज थिक
  113. 7:08–7:10अगर अवाक जोका ने थिक
  114. 7:10–7:15तची, मुदा नवका दारी पात समयक हवाक संजिले तची,
  115. 7:15–7:20जे उ फिल्मी गित पर नाचीो रहल चल, तची उ बडगगदक नोड दारी चल.
  116. 7:20–7:22आ आरकेस्ट्रा
  117. 7:22–7:24आरकेस्ट्रा उ हवाक जोका ने थिक,
  118. 7:24–7:28उता प्लास्टिक कगाच थिक, जक्रा शहर शकीनी का,
  119. 7:28–7:30गामक प्रांगन में रोपी देल गेल आची
  120. 7:30–7:32जक्रा में नहीं कोनो सोर आची
  121. 7:32–7:34नहीं कोनो जीवन्तता
  122. 7:34–7:37प्लास्टिक गाचक एरूपक सुन्बा में बन नीग कची
  123. 7:37–7:40मुदा वास्ट्विक्ता का दरातल पर इद्द्दर् क्तिकेख में आची
  124. 7:40–7:42केख नहीं तिकेख तची
  125. 7:42–7:45अहार रोल खेलनिहार नटूक बावनात्मक चित्रन तकोडिलिया
  126. 7:45–7:49मुदा उही लेक में लटकी नटूक जे स्पष्ट वरनन अची
  127. 7:49–7:51अख्रा हा कुना अंदेखा को सके चे
  128. 7:51–7:53अएक ता अलक पहलुचल
  129. 7:53–7:55बहुत महतपों पहलुचल
  130. 7:55–7:56अखर लटक चतक
  131. 7:56–8:00चवडा सबखग नटुवाख चोली मे आलपिन लगा कर उपभ्या राखभ,
  132. 8:00–8:05उख्रा कोरा मे उठालेब, आए बूद पुरान लोकक उईपर कामुख द्रुष्टी राखभ,
  133. 8:05–8:07इसब की देखावे तची?
  134. 8:07–8:09इस समाजक कमी चल, कलाक नहीं.
  135. 8:09–8:17मुदा इदेखावाई तची, जे इ मनुरन्जक कशाएली समयक संग आपन गरी माप्वन रोपेन गमा चुकल चल.
  136. 8:17–8:21जगन कोनो कला में एहन सपष्ट आश्लिलता प्रवेश कर जाई तची,
  137. 8:22–8:25तखन भद्र समाज उकर सन दूरी बने वाकले ल्विवश भाजाई तची.
  138. 8:25–8:27उक्राहा दूरी बने नहीं कहेवे
  139. 8:27–8:31आहा जक्रा बार बार उपेक्शा वहीं भावना कही रहल ची
  140. 8:31–8:35उवास्तव में समाजका के एक ता स्वा सुदार्वा प्रतिक्रीया चल
  141. 8:35–8:39समाज इदै करहल चल, जे उएहन फूहर्ड प्रदर्षनक के
  142. 8:39–8:45अपन पारमपर एक उट्सव अपन दिया पुताक विवाह में स्थान नहीं देबाकने लेलक.
  143. 8:45–8:50इई उपेख्षा नहीं समाज के साझट रक्वा के एक ता सचेत प्रयाश चल.
  144. 8:50–8:52इब बहुति भिरुदा भासी तरक अची.
  145. 8:52–8:57मैं, जे आहा के कहा बच्छी, जे समाज के अश्लीलते से समस्या चल,
  146. 8:57–9:00उलतकी नतुवा का फूवर पनस से गरडा कर हल चल,
  147. 9:00–9:03तो उकर भिकल्प की चुनलक समाज अरकेस्ट्रा.
  148. 9:03–9:05आप, मुदा उ...
  149. 9:05–9:11अरकेस्त्राक अश्लिल्ता लटकी नट्वा से दस्गुना भेसी बहयंकर अविबध्स अची
  150. 9:11–9:17तई तर्कत अई ते पुंड्रुपें द्वस्त बहुजाई तची जे समाज साफ सुत्रा मन्रनजन चाहत चिल
  151. 9:17–9:23तई अहा कनु साप शाप शुत्रा मन्रनजन चाहत चिल
  152. 9:23–9:28अरकिस्ट्राक अश्लील्ता लटकी नट्वा से दस गुना भेसी बहयंकर अविबध्स शची
  153. 9:28–9:33तई तर्क तः एते पूं रुपें द्वस्त बहुजाई तची जे समाज साव सुत्रा मन्रजन चाहत चिल
  154. 9:34–9:37तः अहा कनुसार समाज अरकिस्ट्रा की अक्चुल्लक
  155. 9:37–9:45अपष्ट अची जे समाज के अष्लील्ता से चिडनाई चिल, समाज के अपन स्थानिया कलाकारक समाजिक इस्थितिसे चिर चिल,
  156. 9:45–9:50जे कलाकार दफली बजवाइत चिल, औद समाज के पिचटल वरक से अबाई चिल.
  157. 9:50–9:52इह आहा जाति वाद पर लजारोल ची.
  158. 9:52–9:57लेक एही दिशाए शारा करे तची, पदवें लिकतें के नचनीया बजनीया बनतें.
  159. 9:57–10:03इटान कला कारक कला वा पशलिलता पर नहीं, उक्रा जाती अ समाजिक हैसियत पर चल.
  160. 10:03–10:12जखन आहा शेहरक अरकेस्ट्रा बजवाइत ची तकन आहा के उई में आदूनिकता अरसुख दिखाई देची चाहे उ कत्बो अस्लिल क्यक नहीं होए.
  161. 10:12–10:18मुदा जखन आहा के गवार पन दिखाई देची तची.
  162. 10:18–10:20इनितान्त इनितान्त पाक्हन्द आजी
  163. 10:20–10:22एक रा समाजक स्वासुदार कहब
  164. 10:22–10:25हमर आपन आख पर पट्टी बानधब थेक
  165. 10:25–10:29दिखो, आहा अरकेस्ट्राक अष्लीलता दिस इशारा करहल ची
  166. 10:29–10:33आहा माने ची, जे अरकेस्ट्रा में फूँध पन आजे
  167. 10:33–10:39मुदे एक्रा केवल जातिक वावर्गक पाकहन्द मानी लेव से हो एक ता एकांगी द्रिष्टिकून आच्छे.
  168. 10:39–10:42कोना अर्थ शास्त्रक से हो तबहुमि काज.
  169. 10:42–10:48एक दम जगन हम दीजेव वा औरकेस्ट्राक बात करे थ्छी ते इदर्षक कचुनाव आच्छे.
  170. 10:48–10:52दर्शक स्वैंग लोजा राएज आ नवाचार के चुनलक अच्छ
  171. 10:52–10:56जते दरी उही तानाग बात अच्छ पडिभे लिखताए की
  172. 10:56–10:58इटान कोनु जाती विषेषक लेल नहें च्छल
  173. 10:58–10:59तक की च्छल?
  174. 10:59–11:03इक ता बदलेत आर्थिक द्रिष्टिकोनक परीचायक च्छल
  175. 11:03–11:10शिक्षक का प्रसार भ्हर रहल चल, लोग खेती किसानी, अगाम का चोट मोट पेशा चोडी का शहर दिस जार रहल चला.
  176. 11:10–11:16नतुवा वकद भूडवा नाज, कोनो एहन पेशा नहे चल, जे बार हो मास चलए.
  177. 11:16–11:18रहा है, इी मोस्मी का चल.
  178. 11:18–11:18बिल्कुल.
  179. 11:18–11:24जगन नफ पीडी देक लेग जे एही कलासा जीवन यापन समबहव नहें जे तो उक्र चोडी देलग.
  180. 11:24–11:26इआर्थ शास्तरक सीथा निया मचे.
  181. 11:26–11:32आदर्षक कन ज़रिस देखुता आजु क्यूवा पीडी गलोबल बीट्स पनाचा पसंट करे तचे.
  182. 11:32–11:36उ इंट्रनेट पजे देखे तचे, उही आपन विवाह में चाहे तचे.
  183. 11:36–11:39मुदा उआपन संसक्रती तगमा रहल अच्छने?
  184. 11:39–11:42जा उ दीजे पर नाचा भेशी पसंथ करी तच्छी,
  185. 11:42–11:45तो हम उक्रा एक अख्का अप्राद बोद में नहीं डारी सके ची,
  186. 11:45–11:48जे आहां आपन संसक्रती नश्ट कर रहल ची
  187. 11:48–11:51इत उही नभेल जे हम आदूनिक चे किछ्सा चोड का
  188. 11:51–11:54जडी बोटी पन निरभर रहा बाग जिद करी
  189. 11:54–11:56केछल एह लिल जे उहामर परम्प्रातेक
  190. 11:56–12:00चे किछ्सा विग्यानक उदेश रोग नीक के नाया ची
  191. 12:00–12:04मुदा कला असंख्रितिक उदेश्व समाजक समहिक स्मुरिति
  192. 12:04–12:09अकर प्यचान अकर अस्तानिय अर्ट्वेवस्ता में प्रान फुखनाई होई तची
  193. 12:09–12:12आहा आर्ट्शास्त्रक नियमक भात अथ अगे लहूं
  194. 12:12–12:14अभी पतन्क आप्दिक तन्त्र के निख जगाए ची
  195. 12:14–12:15आभ बता
  196. 12:15–12:19कत गोडवा मात्र एक्ता काटकर गोड़ा नहीं चल
  197. 12:19–12:22जे कोनो एक्ता कलाकारक के रोजगार देचल
  198. 12:22–12:24इक्ता पुरा एकोसिस्तम चल
  199. 12:24–12:27गाँक अथ निरबर अथवेवस्ता चल
  200. 12:27–12:29उता आची बहुत लोके काज भीडे चल
  201. 12:29–12:32उक काटकर गोडा बनवा में गाँ बड़ी काज लागेच
  202. 12:32–12:37उक्रा कप्रासा सजोवा में रंग रेज आर दरजी काज लागेच
  203. 12:37–12:39दपली बनावा में चरमकार
  204. 12:39–12:42बाउसली बनावा में बास काडिगर कोषल लागेच चल
  205. 12:42–12:43अम सहमाचे
  206. 12:43–12:48तब हुजु, पूरा ग्रामीन अर्थ्वेश्ता लोक कलाक चारू कात्खूमे चल
  207. 12:48–12:52अद्सव से आईल पैसा गाँवक ही सम्रुद करे चल
  208. 12:52–12:54मुदा जकन आई दीजेला आबेई ची
  209. 12:54–12:57ता आहां केवल एक ता नचन्या के नहीं बवगार एहल ची
  210. 12:57–13:01आहां उही पूरा परम परागत अर्थवेवस्ता में आगी लगा रहल ची.
  211. 13:01–13:03आगी लगा रहल ची.
  212. 13:03–13:05इब भड भारी शबद आची.
  213. 13:05–13:07दीजेक मषीन शहर से आवे तची.
  214. 13:07–13:10पेंडराइब में भरल गीट बाहर से आवे तची.
  215. 13:10–13:13गाँउ के पइसा गाँउ से बाहर जारहे लची
  216. 13:13–13:15इप पूँजी का पलाया नची
  217. 13:15–13:17सीरी दे पन्टेथ, बनिया राम
  218. 13:17–13:19इसब उही माटिक उपच चला
  219. 13:19–13:21जटे इसे दरषक आवे चला
  220. 13:21–13:23आजुब दीजे वाला की भुजेलजे
  221. 13:23–13:24मितलाक परिछन में
  222. 13:24–13:26वा उपनेन में केहन दून चाही
  223. 13:26–13:28उत जे पले करव उबाजत
  224. 13:28–13:29उत अ बस बटन दबादेत
  225. 13:29–13:31इख करमिक विकास नाए
  226. 13:31–13:33इप फास्ट फुट् संसक्रिती अची
  227. 13:33–13:35जदे हम आसानी से उपलप्ट चीज के लिल
  228. 13:35–13:38आपन पुष्टिकर भूजन नाली में पेक रेहल ची
  229. 13:38–13:45आहक य आर्थिक विश्ट्यश्चन बहुत सतीक आची जे एक टक कला के पाचा पूरा एक टक ग्रामेन आर्थ्वेश्ठा काज करे चल,
  230. 13:45–13:49उईही बड़ही, चरमकार, अदर्जिक योग्दान के नकारल नहीं जासकेई तची,
  231. 13:49–14:19मुदा अर्थ्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्
  232. 14:19–14:23तर कच्याए उ प्रतेक तकनी की बडलाउ पर लागो होई तच्ये
  233. 14:24–14:26आहा पास्ट फुट संसक्रितिक बात करे ची
  234. 14:26–14:28मुदा आहा इबात भिस्री रहाल ची
  235. 14:29–14:32जे चिन की नटूवा जकन फिल्मी गीट पर नाचे चल
  236. 14:32–14:35अहो उई समय के पास्ट फुट ही चल
  237. 14:35–14:37अम्रा लागगे तची, आहाँ.
  238. 14:37–14:43किशन कारीगर लेक, मुल रूब से अटीट के एक ता स्वरन युगक रूप में देखी रहाल चतेन,
  239. 14:43–14:45जते सब किच पवित्र चल.
  240. 14:45–14:51मुदा। स्वयमेव, अपन लेक में आश्लीलता अप फू़ड पनक उलेक कर रहाल चतेन.
  241. 14:51–14:53अपन उच्सब मनवएतचिन
  242. 14:53–14:55अपन अच्सब मनवएतचिन
  243. 14:55–14:57अपन अपन अच्सब मनवएतचिन
  244. 14:57–15:01अज़्े देखवाक चाही जे आज्ग़ कुई योवा कोना आपन उच्सव मनवएत अच्छन
  245. 15:01–15:05अटीट के महिमा मन्दित के नाय, अटीट के सनक्षित के नाय
  246. 15:05–15:08दूनु में पातर मुदबहुत गही रन्तर अच्छे
  247. 15:08–15:12हमीने के रहाल ची जे आहा समे में पाचा गूम जाव ये न्टनेट बंद कर दिओ.
  248. 15:12–15:14ता आहां के समवदहन की आच्छे?
  249. 15:14–15:19हमर पीरा उ चितावनी आच्छी जे किशन कारीगर आपन लेख में देल आच्छे.
  250. 15:19–15:23अज़्ा जखन कथगोडवा नाचेत नाचेत बच्चा सबक लियार फेकई चिल
  251. 15:23–15:27वा जखन नतूवा बीच भीच में दर्षक सा सीथा थिठोली करे चल
  252. 15:27–15:31तो ओ दर्षक अकलाकार के भीच जे एक दा आत्मिय सम्म्म्द बनाइच्चल
  253. 15:31–16:01अगर अर्केस्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्�
  254. 16:01–16:05अख्रा विलुप्त होईबाक कगार सा खिच का पद्मश्वी दरी पूचा दे लग.
  255. 16:06–16:09हमर समाज आपन राम्दुलार पास्वान वा उस्मान हुसेन लेल की के लग.
  256. 16:10–16:14जा सरकार, समाज आज सान्सक्रितिक संस्ता सब अगा आबी का
  257. 16:14–16:18यही कला के सन्रक्षित कराएत, ता यी आजुक दिन में सो जीवित रहेत.
  258. 16:18–16:24के पद्मिश्री भेटब निष्चित रूपेन एक ता एतेहासेक अस्सकारात्मक बात आची.
  259. 16:24–16:27मुदा हम्रा एक ता बात का अस्पष्ट उत्तर दिया,
  260. 16:27–16:34कि पद्मश्विष्ट्ब्हेत्लासा लोंडनाच अच्णानक आदूनक यूवा वर्गक पहल पसन्द बनीगेल?
  261. 16:34–16:36उक्रा सम्मान्तबहेचल
  262. 16:36–16:39कि गाू गाू में लोंडनाच फिर्सा होबल लागल?
  263. 16:39–16:40नाई!
  264. 16:40–16:43सम्मान्बेटब एक तब व्यक्तिगत उप्लप दियची?
  265. 16:43–16:47आखोनो कलाक अतिहासिक महत्वक सुईक्रूती आची
  266. 16:47–16:52मुदा इओही कलाक फेर सा बाजार मे वापस नहीं लाबी सके तची
  267. 16:52–16:56क्रित्रिम रूपसा कोनो कलाके ओही समाज में थोपब
  268. 16:56–16:59जते सा उकर स्वभाविक दर्षक कतम बहो चुकल आची
  269. 16:59–17:02अखुनो सार्थक समदान नहीं आची
  270. 17:02–17:04मुदा संस्त्था कनुदान सा
  271. 17:04–17:08कोनो कला संस्त्था कनुदान के बैसाखी पर कितिक दिंजी भी सकेत आची
  272. 17:08–17:13जो विवाह कुछ सो में यूवा पिडी के कत गोडवा नहीं देख बाक आची
  273. 17:13–17:15तकी सरकार अख्रा बाद्दे करत
  274. 17:15–17:17बाद्दे करवाग बात नहीं आची
  275. 17:17–17:20कलाक जीवन उकर जन मानसक माँग में आचे
  276. 17:20–17:23जखन हा लोक रंग मिट्वाग बाद करे ची
  277. 17:23–17:25ता आहा ई माने ले लोहा आची
  278. 17:25–17:28जे लोक रंग केवल उही ध्फली में चल
  279. 17:28–17:31मुदा लोक रंग और उच्सवत आई से हो आचे
  280. 17:31–17:33बस उक्र अबिवेक्ती बदल गेला चे
  281. 17:34–17:36जग कथ खोडवा के जीवित राखा बचे
  282. 17:36–17:38तो उक्रा आए के समयक मंच
  283. 17:38–17:39जिन न दिजितल प्लाट्फाम
  284. 17:39–17:42उटिट्युब वक्कला महोज्सब द़िले जाए पडद
  285. 17:42–17:49आगा की वाज जे एक रेग़े दिजितल प्लाट्फाम वा कला महोज्सो में लोजाई परत, इब वास्तो में हमर ही तरकक बल देता चे.
  286. 17:49–17:54हम से हो यह नहीं कही रहा है लची जे उक्रा उहीना गामक दूरा में लाचार चोली दिल जाए.
  287. 17:54–17:56ता हम दुन। ते एक हे बात कही रहल ची?
  288. 17:56–17:58नहीं फरक अचे
  289. 17:58–18:00वो कर महोट्सब दही लोजाईबाक लेल
  290. 18:00–18:02वो ही कलाकारेक सम्मन्त देवे पडद
  291. 18:02–18:05वो ही रहीं भावना गरन्स चेक्तबार आबे पडद
  292. 18:05–18:08जते हम आपन माटिक कलाके नीचा देखेच ची
  293. 18:08–18:12किशन कारिगरक लेग मुलते एही दर्दक बयां करेता चे.
  294. 18:12–18:14आ, उ दर्दस पष्ट जे.
  295. 18:14–18:18उ इ नहीं कही रहल चाइ थीन, जि तकनी क्हराब चे.
  296. 18:18–18:21उ इखल रहल चाइ थीन, जि तकनी कक आंदर अनुकरन में,
  297. 18:21–18:24हम जे आपन सांस्क्रतिक जड काटी रहल ची,
  298. 18:24–18:28अखर कीमत हमरा पहचानक संकत के रूप में चुकावे परत.
  299. 18:28–18:30चर्चा सही अस पस्ट आची,
  300. 18:30–18:32जे कत भूलवा अ नट्वाक पतन,
  301. 18:32–18:36मित्लाक एक ठा जीवंत लोक रंगक अपुरूनी अच्छती आची.
  302. 18:36–18:39जा हम आपन माटिक कलाकारक समान नहीं देप,
  303. 18:39–18:42ता हमर सांस्क्रतिक पहचान निष्चित रूपेन दरिद्रभाजायात
  304. 18:42–18:48आहमर पक्षक सारान्श यह जे यद्द्यपी अटीत लेल नोस्ताल्चिक होएभ
  305. 18:48–18:50एक ता मान्विय स्वबाव अच्छे
  306. 18:50–18:53मुदा लोक कला कोनो संग्रहालेक जर्वस्तू नहीं आची
  307. 18:53–18:57इसमेख चटान से तक्राएत अपन रस्ता बडलेत रहेज
  308. 18:57–18:59मुदा कोनो दिश्वारेट्त बडलत
  309. 18:59–19:03इपेहनु बडली रहल चल जगनी फिल्मी गीट अपना रहल चल
  310. 19:03–19:06आआभ इ दिजितल वन नव मन्चिये स्वरुपलेल बडली रहल अची
  311. 19:06–19:09जक्रा सहच्ता से स्विकार के नाई आवष्षक अचे
  312. 19:09–19:12समाजक वा अकर क्रमिक विकासक
  313. 19:12–19:15हत्या जका बारी शब्द से दोष्दे बाग बडला
  314. 19:15–19:20हम्रा सब के परिवर्तनक उही आर्थिका समाजिक मनुवि ज्यानक के बुज्बाक प्रयास कर बाख चाही
  315. 19:20–19:22ये दर्षक्के दीजे दिस्लोगेल
  316. 19:22–19:25जे होए, हम दुन्नो गोते ये जरुर मानव
  317. 19:25–19:28जे विदे, सदे, चोवीस के ये लेक
  318. 19:28–19:31हमरा सवके अपन सांस्क्रितिक दरोहर
  319. 19:31–19:34अब बदलगत समय के बीच का तक्राहत पर
  320. 19:34–19:37गंभीरता संस शुच्पाक लेल विवष करेता ची
  321. 19:37–19:42इक्दम, इक ता बहुत नीक विमर्ष्छल, आश्वोता पर इनरने चोडल जाएत,
  322. 19:42–19:48जे उ कलाक संग्रक्षन आख्रमिक विकासक एही द्वन्द के कुना देखच छती?
  323. 19:48–19:53ता अगली बेर जखन आहा कोनो गाब का प्रंगन सा गुजरव आए दीजेएक शोर सूनब,
  324. 19:53–19:58ता एक बेरा आखी बंद का उएक खाटख गवडा अदफ्लिक दून के जरुर मोन पाडब
  325. 19:58–20:04कि उवव दून सदाकलेल मरीगले वा उकोनो नव रूप में जन्म लेबाक प्रतिक्षामे ची
  326. 20:04–20:06देबेट सुन्बाक लेए दंनेवाद

Plain text

विबाव कराती आजे विबाव कराती आजे मुदा जते-जते पहले दफ्लिक औड़फ-दफ ताल हो चल बाव्स्लिक मदुर्दून पर काथक बनल रंगीन गोडा नाचाई चल आई उता एक की आजे आई उता दीजे कान भोडु शोर आजे बाँस्लिक मदुर्दून पर काथक बनल रंगीन गोडा नाचाई चल, आई उता एक की आचे? आई उता दीजे कान भोडु शोर आचे, आब आब आबाहर सावायल अरकिस्ट्राक फुवध पन चल रहा लाचे. आँ, इद्रिष्यत आब गाम गाम में आम भोगे लेचे. बिलकु आम भोगे लेचे. आई दिबेट में हमरा सब एही विशय पर चर्चा करो रहल ची. किषन कारीगर कक जी लेख है, विदेज सदेज चोबिस में, उ हमरा सबके एही तीद सत्टिदिस दھके लेत आचे सही कहली आचा उ लेक सप्ष्ष्ट्रूपें मित्लाक विलुप तोएत लोक संसक्रती जेना कथकोडवा अन नतुवा नाज पर किंद्रे ताचे मुदा मुदा मुख्या प्रष्न इया चे जे की इदीजे हमर लोक संसक्रतिक हद्या करो हो लग वा मने इगे वल हमर बदलेत रुचिक स्वबाविक परनाम थिक आप हमर ऐपर स्फ्ष्ट तरक आची जे इग कोनो क्रमिक विकास नहीं आची इग हमर मने हमर समूहिक सामाजिक उपेख्षा के कारने बहल एक ता अपुरनी या संस्क्रितिक हत्या थेक जक्रहा आदूनिकी करनक नाम पर सही तेरा एर रहल ची. मुदा देखू, हमेक्रा दोसर तरहे देखे थेखे छी. हमर तरक आची जे लोक कला कोनो रुकल पोख्री नहीं होई ता ची. जक्रहा बान्दिकर राखिलेब, लोक्कला सदे बाजार तकनीक अदर्षकक माग के अनुसार बदलेट्रहल अची. बाजारा कनुसार? रागा एक्दम आजुक जे परिवर्तन अची उकोनो त्रासदी नहीं अची, बलकी उही क्रमिक विकासक एक प्रा नवच्चरन मात्र थेख एक रा हत्या कहब मने अती भावुखता से प्रेरित अची करन कोनो से हो कला के जीवेट रहवाक पहल्षार्त उकर समकालिन प्रासंगिक्ता होई तची तै शुर्वात सम्कालिन प्रासंगिक तासे ही करी ची, भूजलीः, किशन कारिगरक लेक जखना हा पड़ेच ची, तो उगटा बहुत गमभीर मनोवेग्यानिक अ समाजिक तान्दिस इशारा करचती, कथ गोडवा वा नटूा नाज मात्र एक ता निर्थ तनही चल. ते आहा के अनुसारो की चल अव, मने उपनयन, विवा, आद्दुर्गा पूजाजकाउच्सव में, समाजक के एक सुत्र में बांद कर रक्वाक माद्ध्यम चल, मुदा एककर पतन कोना बहल, इस सुच्वाक बातच. मुदा पतन तरुची के कारने बहलने? नहीं नहीं सुनो, एक कर पतन उही मान्सिक्ता सब हेल जते गावा के प्रबूद आमद्ध्यवर गी आलोक आपन ही माटिक कलाकार सब के हतोट सहित करे लागला. लेक में सपष्ट लिखा लचे उ ताना मारे त्सला पडभे लिखवे की नच्निया बजनिया बनतें. आई, इवाके तब बहुत प्रचले चल. भिल्ल्कुल, आई वाके नाया चे, इवो ही समाजिक पाकहन्ट के परीचाय कचे, जते हम्रा अंग्रेजी भाजब या शेहर के भोपु बजाया वाला वाग्टी के दफली बजाया वाग्टी तचे. मुदाई तव... अगे कलाकार अजे कलाकारक के सम्मान देबा समना कर दिलक, तकन उस्मानुसैन, बनाया राम, राम्दुलार पास्वानजका दिगगज कलाकारक के, अपन पेट पालप कथिन बोगेल. इकोनो दर्षक के स्वाबहाविक बडलाउ नचल. इक ता बज़़़़ के स्वाभिक बदलाउ नचल ता आहा के नजरे में एक चल इपन उहीं बहावनाचल जे आपन ही चीच के नीचा दिखा का सुएंके आदूनिक सिथ करे चाहच्चल है देखू, जोन भोजपृरी समाज आपन अगरा पद्मश्री दहरी पूचा सकय तची तम मित्ला मैं एही कलाक विलुप्त होएब शत्प्रतीशत हमर उपेख्षक परडाम चे इएक ता प्रभाव्शाली तरक थची मुदा कि आहा विचार कैने ची जे मने आहा के इई तरक अगर ख़ा की आहा विचार कैने ची, जे मने आहा के एद्टर्क जे समाज के हीन भावना एक राम प्रदेलक, सूनी में बहुत नीक लगगे ता ची, मुडा एप पून सत्ते नहीं आची. अचा, को ना? आहा मनुरन्जनक इतिहास के केवस एक दिससन देखी रहल ची. लेक में स्वाईम उलेक अची जिन नतूा कला कुनो विषुद परमपरामे स्तिर नहीं चल. उ पहिने सही समजवता करे रहल चल. आहा चिनकी नतूा का बात किया बिसरी जाएची. चिनकी नत्वा एक ता अप्वाद चल नहीं, उवआब अप्वाद नहीं चल जखन उन नत्वा कोते उपर कोत्री जगक विशुद द फिल्मी गीत पर रिकोडिंग डान्स करे चल तकन उखोनो परम परागत लोक आत्माक प्रदर्षन नहीं करो राल्चल उ उही समय का बाजार वाद अदर्षक के मांके पूरा करहल चल. मुदा दर्षक उक्रा पसन्टता करे चलने. इक्दम दर्षक उही रेकोर्टिंग डान्स पर सीटी बजवाए चला. तजखन उक्ला स्वेंके भालेवूड की गीटक अनुसार बडली लिलक, अव आपन मुल स्वरुब छोरे दिलग, तकन उक्रा हम परम परागत कोना कह सके ची? मने आख कहे चाहा ची, जी उकल आप पहने ब्राष्ट बहाचु कल चल? हम ख्षमा चाहब मुदा हम एक रा ब्राष्ट कह भ नहीं माने ची. इब बदलाउ चल. आप जखन समाज उकर बदला सीदा दीजे वा औरकेस्टा के बज्वार आच्छी तकना उक्रा सांस्क्रेतिक पतन क्या कही रहाल ची कियाक जे उ... आँ... इम आत्र माद्ध्यमक बदला अच्छी भुजलिये अगर उखाख रूची बदलल, तकनीक सहज भेल, आमनुरनजनक सादन बदलल, जे दर्षक नट्वासे फिल्मी गीता का पेखषा रखे चल, औआ भ दीजे पर उई फिल्मी गीता के बेसी निक सावड कोल्ल्ती में सुनी रहा लगची. इसे इसे तो आपना दिलाग प्रादागा था जो जो बज़ागा था जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो � अखर जे स्थन्ये वाद्यन्त्र चल, जेना दाफ्ली, बाूंसली, अग कत गोडवाक अखात्खर बनल गोडा, इस सब विषुद रूपे मिठिलाक माटी कुपच्छल. अखर्ज शारीरिक अभिने चल, लोकक भीज जाक रुडक नाई, बच्चा सब के दरे नाई आहासे नाई. आहा, उएक ता अईंटराक्ष्चन चल. भिल्कुल, उस तानिताक प्रतीक चल. अगा अरकेस्ट्र से कर तुल्ना करोल ची, मुदा अरकेस्ट्रा में की आचे, एक ता मन्च ज़े, जटे दर्षक अकलाकारक भीट अक द्रिष्ष दिवाल लचे. मुदा अरकेस्ट्र से होत दा. एक सेक्ट्र, जखन रोल खेलनिहा नतुव, उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के बावुख करे चल, उदर्षक के चल, अगर उदारी पात यागा अवाक संखिले ताची जे उप फिल्मी गिट पर नाचीो रहल चल तो उप बडगगदक नाव डारी चल आ आरकेस्ट्रा अरकेस्ट्रा उवाक जोका ने थिक उठा प्लास्टिक का ज़ाज थिक अगर अवाक जोका ने थिक तची, मुदा नवका दारी पात समयक हवाक संजिले तची, जे उ फिल्मी गित पर नाचीो रहल चल, तची उ बडगगदक नोड दारी चल. आ आरकेस्ट्रा आरकेस्ट्रा उ हवाक जोका ने थिक, उता प्लास्टिक कगाच थिक, जक्रा शहर शकीनी का, गामक प्रांगन में रोपी देल गेल आची जक्रा में नहीं कोनो सोर आची नहीं कोनो जीवन्तता प्लास्टिक गाचक एरूपक सुन्बा में बन नीग कची मुदा वास्ट्विक्ता का दरातल पर इद्द्दर् क्तिकेख में आची केख नहीं तिकेख तची अहार रोल खेलनिहार नटूक बावनात्मक चित्रन तकोडिलिया मुदा उही लेक में लटकी नटूक जे स्पष्ट वरनन अची अख्रा हा कुना अंदेखा को सके चे अएक ता अलक पहलुचल बहुत महतपों पहलुचल अखर लटक चतक चवडा सबखग नटुवाख चोली मे आलपिन लगा कर उपभ्या राखभ, उख्रा कोरा मे उठालेब, आए बूद पुरान लोकक उईपर कामुख द्रुष्टी राखभ, इसब की देखावे तची? इस समाजक कमी चल, कलाक नहीं. मुदा इदेखावाई तची, जे इ मनुरन्जक कशाएली समयक संग आपन गरी माप्वन रोपेन गमा चुकल चल. जगन कोनो कला में एहन सपष्ट आश्लिलता प्रवेश कर जाई तची, तखन भद्र समाज उकर सन दूरी बने वाकले ल्विवश भाजाई तची. उक्राहा दूरी बने नहीं कहेवे आहा जक्रा बार बार उपेक्शा वहीं भावना कही रहल ची उवास्तव में समाजका के एक ता स्वा सुदार्वा प्रतिक्रीया चल समाज इदै करहल चल, जे उएहन फूहर्ड प्रदर्षनक के अपन पारमपर एक उट्सव अपन दिया पुताक विवाह में स्थान नहीं देबाकने लेलक. इई उपेख्षा नहीं समाज के साझट रक्वा के एक ता सचेत प्रयाश चल. इब बहुति भिरुदा भासी तरक अची. मैं, जे आहा के कहा बच्छी, जे समाज के अश्लीलते से समस्या चल, उलतकी नतुवा का फूवर पनस से गरडा कर हल चल, तो उकर भिकल्प की चुनलक समाज अरकेस्ट्रा. आप, मुदा उ... अरकेस्त्राक अश्लिल्ता लटकी नट्वा से दस्गुना भेसी बहयंकर अविबध्स अची तई तर्कत अई ते पुंड्रुपें द्वस्त बहुजाई तची जे समाज साफ सुत्रा मन्रनजन चाहत चिल तई अहा कनु साप शाप शुत्रा मन्रनजन चाहत चिल अरकिस्ट्राक अश्लील्ता लटकी नट्वा से दस गुना भेसी बहयंकर अविबध्स शची तई तर्क तः एते पूं रुपें द्वस्त बहुजाई तची जे समाज साव सुत्रा मन्रजन चाहत चिल तः अहा कनुसार समाज अरकिस्ट्रा की अक्चुल्लक अपष्ट अची जे समाज के अष्लील्ता से चिडनाई चिल, समाज के अपन स्थानिया कलाकारक समाजिक इस्थितिसे चिर चिल, जे कलाकार दफली बजवाइत चिल, औद समाज के पिचटल वरक से अबाई चिल. इह आहा जाति वाद पर लजारोल ची. लेक एही दिशाए शारा करे तची, पदवें लिकतें के नचनीया बजनीया बनतें. इटान कला कारक कला वा पशलिलता पर नहीं, उक्रा जाती अ समाजिक हैसियत पर चल. जखन आहा शेहरक अरकेस्ट्रा बजवाइत ची तकन आहा के उई में आदूनिकता अरसुख दिखाई देची चाहे उ कत्बो अस्लिल क्यक नहीं होए. मुदा जखन आहा के गवार पन दिखाई देची तची. इनितान्त इनितान्त पाक्हन्द आजी एक रा समाजक स्वासुदार कहब हमर आपन आख पर पट्टी बानधब थेक दिखो, आहा अरकेस्ट्राक अष्लीलता दिस इशारा करहल ची आहा माने ची, जे अरकेस्ट्रा में फूँध पन आजे मुदे एक्रा केवल जातिक वावर्गक पाकहन्द मानी लेव से हो एक ता एकांगी द्रिष्टिकून आच्छे. कोना अर्थ शास्त्रक से हो तबहुमि काज. एक दम जगन हम दीजेव वा औरकेस्ट्राक बात करे थ्छी ते इदर्षक कचुनाव आच्छे. दर्शक स्वैंग लोजा राएज आ नवाचार के चुनलक अच्छ जते दरी उही तानाग बात अच्छ पडिभे लिखताए की इटान कोनु जाती विषेषक लेल नहें च्छल तक की च्छल? इक ता बदलेत आर्थिक द्रिष्टिकोनक परीचायक च्छल शिक्षक का प्रसार भ्हर रहल चल, लोग खेती किसानी, अगाम का चोट मोट पेशा चोडी का शहर दिस जार रहल चला. नतुवा वकद भूडवा नाज, कोनो एहन पेशा नहे चल, जे बार हो मास चलए. रहा है, इी मोस्मी का चल. बिल्कुल. जगन नफ पीडी देक लेग जे एही कलासा जीवन यापन समबहव नहें जे तो उक्र चोडी देलग. इआर्थ शास्तरक सीथा निया मचे. आदर्षक कन ज़रिस देखुता आजु क्यूवा पीडी गलोबल बीट्स पनाचा पसंट करे तचे. उ इंट्रनेट पजे देखे तचे, उही आपन विवाह में चाहे तचे. मुदा उआपन संसक्रती तगमा रहल अच्छने? जा उ दीजे पर नाचा भेशी पसंथ करी तच्छी, तो हम उक्रा एक अख्का अप्राद बोद में नहीं डारी सके ची, जे आहां आपन संसक्रती नश्ट कर रहल ची इत उही नभेल जे हम आदूनिक चे किछ्सा चोड का जडी बोटी पन निरभर रहा बाग जिद करी केछल एह लिल जे उहामर परम्प्रातेक चे किछ्सा विग्यानक उदेश रोग नीक के नाया ची मुदा कला असंख्रितिक उदेश्व समाजक समहिक स्मुरिति अकर प्यचान अकर अस्तानिय अर्ट्वेवस्ता में प्रान फुखनाई होई तची आहा आर्ट्शास्त्रक नियमक भात अथ अगे लहूं अभी पतन्क आप्दिक तन्त्र के निख जगाए ची आभ बता कत गोडवा मात्र एक्ता काटकर गोड़ा नहीं चल जे कोनो एक्ता कलाकारक के रोजगार देचल इक्ता पुरा एकोसिस्तम चल गाँक अथ निरबर अथवेवस्ता चल उता आची बहुत लोके काज भीडे चल उक काटकर गोडा बनवा में गाँ बड़ी काज लागेच उक्रा कप्रासा सजोवा में रंग रेज आर दरजी काज लागेच दपली बनावा में चरमकार बाउसली बनावा में बास काडिगर कोषल लागेच चल अम सहमाचे तब हुजु, पूरा ग्रामीन अर्थ्वेश्ता लोक कलाक चारू कात्खूमे चल अद्सव से आईल पैसा गाँवक ही सम्रुद करे चल मुदा जकन आई दीजेला आबेई ची ता आहां केवल एक ता नचन्या के नहीं बवगार एहल ची आहां उही पूरा परम परागत अर्थवेवस्ता में आगी लगा रहल ची. आगी लगा रहल ची. इब भड भारी शबद आची. दीजेक मषीन शहर से आवे तची. पेंडराइब में भरल गीट बाहर से आवे तची. गाँउ के पइसा गाँउ से बाहर जारहे लची इप पूँजी का पलाया नची सीरी दे पन्टेथ, बनिया राम इसब उही माटिक उपच चला जटे इसे दरषक आवे चला आजुब दीजे वाला की भुजेलजे मितलाक परिछन में वा उपनेन में केहन दून चाही उत जे पले करव उबाजत उत अ बस बटन दबादेत इख करमिक विकास नाए इप फास्ट फुट् संसक्रिती अची जदे हम आसानी से उपलप्ट चीज के लिल आपन पुष्टिकर भूजन नाली में पेक रेहल ची आहक य आर्थिक विश्ट्यश्चन बहुत सतीक आची जे एक टक कला के पाचा पूरा एक टक ग्रामेन आर्थ्वेश्ठा काज करे चल, उईही बड़ही, चरमकार, अदर्जिक योग्दान के नकारल नहीं जासकेई तची, मुदा अर्थ्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट् तर कच्याए उ प्रतेक तकनी की बडलाउ पर लागो होई तच्ये आहा पास्ट फुट संसक्रितिक बात करे ची मुदा आहा इबात भिस्री रहाल ची जे चिन की नटूवा जकन फिल्मी गीट पर नाचे चल अहो उई समय के पास्ट फुट ही चल अम्रा लागगे तची, आहाँ. किशन कारीगर लेक, मुल रूब से अटीट के एक ता स्वरन युगक रूप में देखी रहाल चतेन, जते सब किच पवित्र चल. मुदा। स्वयमेव, अपन लेक में आश्लीलता अप फू़ड पनक उलेक कर रहाल चतेन. अपन उच्सब मनवएतचिन अपन अच्सब मनवएतचिन अपन अपन अच्सब मनवएतचिन अज़्े देखवाक चाही जे आज्ग़ कुई योवा कोना आपन उच्सव मनवएत अच्छन अटीट के महिमा मन्दित के नाय, अटीट के सनक्षित के नाय दूनु में पातर मुदबहुत गही रन्तर अच्छे हमीने के रहाल ची जे आहा समे में पाचा गूम जाव ये न्टनेट बंद कर दिओ. ता आहां के समवदहन की आच्छे? हमर पीरा उ चितावनी आच्छी जे किशन कारीगर आपन लेख में देल आच्छे. अज़्ा जखन कथगोडवा नाचेत नाचेत बच्चा सबक लियार फेकई चिल वा जखन नतूवा बीच भीच में दर्षक सा सीथा थिठोली करे चल तो ओ दर्षक अकलाकार के भीच जे एक दा आत्मिय सम्म्म्द बनाइच्चल अगर अर्केस्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्ट्राक येल्� अख्रा विलुप्त होईबाक कगार सा खिच का पद्मश्वी दरी पूचा दे लग. हमर समाज आपन राम्दुलार पास्वान वा उस्मान हुसेन लेल की के लग. जा सरकार, समाज आज सान्सक्रितिक संस्ता सब अगा आबी का यही कला के सन्रक्षित कराएत, ता यी आजुक दिन में सो जीवित रहेत. के पद्मिश्री भेटब निष्चित रूपेन एक ता एतेहासेक अस्सकारात्मक बात आची. मुदा हम्रा एक ता बात का अस्पष्ट उत्तर दिया, कि पद्मश्विष्ट्ब्हेत्लासा लोंडनाच अच्णानक आदूनक यूवा वर्गक पहल पसन्द बनीगेल? उक्रा सम्मान्तबहेचल कि गाू गाू में लोंडनाच फिर्सा होबल लागल? नाई! सम्मान्बेटब एक तब व्यक्तिगत उप्लप दियची? आखोनो कलाक अतिहासिक महत्वक सुईक्रूती आची मुदा इओही कलाक फेर सा बाजार मे वापस नहीं लाबी सके तची क्रित्रिम रूपसा कोनो कलाके ओही समाज में थोपब जते सा उकर स्वभाविक दर्षक कतम बहो चुकल आची अखुनो सार्थक समदान नहीं आची मुदा संस्त्था कनुदान सा कोनो कला संस्त्था कनुदान के बैसाखी पर कितिक दिंजी भी सकेत आची जो विवाह कुछ सो में यूवा पिडी के कत गोडवा नहीं देख बाक आची तकी सरकार अख्रा बाद्दे करत बाद्दे करवाग बात नहीं आची कलाक जीवन उकर जन मानसक माँग में आचे जखन हा लोक रंग मिट्वाग बाद करे ची ता आहा ई माने ले लोहा आची जे लोक रंग केवल उही ध्फली में चल मुदा लोक रंग और उच्सवत आई से हो आचे बस उक्र अबिवेक्ती बदल गेला चे जग कथ खोडवा के जीवित राखा बचे तो उक्रा आए के समयक मंच जिन न दिजितल प्लाट्फाम उटिट्युब वक्कला महोज्सब द़िले जाए पडद आगा की वाज जे एक रेग़े दिजितल प्लाट्फाम वा कला महोज्सो में लोजाई परत, इब वास्तो में हमर ही तरकक बल देता चे. हम से हो यह नहीं कही रहा है लची जे उक्रा उहीना गामक दूरा में लाचार चोली दिल जाए. ता हम दुन। ते एक हे बात कही रहल ची? नहीं फरक अचे वो कर महोट्सब दही लोजाईबाक लेल वो ही कलाकारेक सम्मन्त देवे पडद वो ही रहीं भावना गरन्स चेक्तबार आबे पडद जते हम आपन माटिक कलाके नीचा देखेच ची किशन कारिगरक लेग मुलते एही दर्दक बयां करेता चे. आ, उ दर्दस पष्ट जे. उ इ नहीं कही रहल चाइ थीन, जि तकनी क्हराब चे. उ इखल रहल चाइ थीन, जि तकनी कक आंदर अनुकरन में, हम जे आपन सांस्क्रतिक जड काटी रहल ची, अखर कीमत हमरा पहचानक संकत के रूप में चुकावे परत. चर्चा सही अस पस्ट आची, जे कत भूलवा अ नट्वाक पतन, मित्लाक एक ठा जीवंत लोक रंगक अपुरूनी अच्छती आची. जा हम आपन माटिक कलाकारक समान नहीं देप, ता हमर सांस्क्रतिक पहचान निष्चित रूपेन दरिद्रभाजायात आहमर पक्षक सारान्श यह जे यद्द्यपी अटीत लेल नोस्ताल्चिक होएभ एक ता मान्विय स्वबाव अच्छे मुदा लोक कला कोनो संग्रहालेक जर्वस्तू नहीं आची इसमेख चटान से तक्राएत अपन रस्ता बडलेत रहेज मुदा कोनो दिश्वारेट्त बडलत इपेहनु बडली रहल चल जगनी फिल्मी गीट अपना रहल चल आआभ इ दिजितल वन नव मन्चिये स्वरुपलेल बडली रहल अची जक्रा सहच्ता से स्विकार के नाई आवष्षक अचे समाजक वा अकर क्रमिक विकासक हत्या जका बारी शब्द से दोष्दे बाग बडला हम्रा सब के परिवर्तनक उही आर्थिका समाजिक मनुवि ज्यानक के बुज्बाक प्रयास कर बाख चाही ये दर्षक्के दीजे दिस्लोगेल जे होए, हम दुन्नो गोते ये जरुर मानव जे विदे, सदे, चोवीस के ये लेक हमरा सवके अपन सांस्क्रितिक दरोहर अब बदलगत समय के बीच का तक्राहत पर गंभीरता संस शुच्पाक लेल विवष करेता ची इक्दम, इक ता बहुत नीक विमर्ष्छल, आश्वोता पर इनरने चोडल जाएत, जे उ कलाक संग्रक्षन आख्रमिक विकासक एही द्वन्द के कुना देखच छती? ता अगली बेर जखन आहा कोनो गाब का प्रंगन सा गुजरव आए दीजेएक शोर सूनब, ता एक बेरा आखी बंद का उएक खाटख गवडा अदफ्लिक दून के जरुर मोन पाडब कि उवव दून सदाकलेल मरीगले वा उकोनो नव रूप में जन्म लेबाक प्रतिक्षामे ची देबेट सुन्बाक लेए दंनेवाद

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