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उल्कामुख__स्मृति-विस्मृति.mp4

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Part 2 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 2
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  1. 0:00–0:07नमश्कार, आई हम सब गजेंद्र ताकृर दोरा समपादित आब भेचन् ताकृर निर्देष्ष्ट आदूनिक मेठली नाटक उल्का मुख्क कगेराई में जा रहे ल्छी.
  2. 0:07–0:12इगोनो सादारन कथा नहीं आची. इबहति मार्मिक द्धंग से इदेख्वेत आची,
  3. 0:12–0:16जे कोना इतिहास बाएक-बाएक पोठी आब बवदिक उपलब्धिया के ता आमर कदैता ची
  4. 0:16–0:20मुदद अकर पच्षाक मानविय समवेदना अबहाँना के बेरहमी से मेटी दैता ची
  5. 0:20–0:22तचलू बिना कोना देरी के एक रष शूरू करेच छी
  6. 0:22–0:24तए एक ता बाथ सोचु
  7. 0:24–0:27जो कुनो महान, क्रिती, वा मास्तर पीस रचल जाएच,
  8. 0:27–0:30तकी इतिहास उही प्रतिबहा के मुन राखत,
  9. 0:30–0:33वा उकर पाच्छा के मानवता के एक दम्समिता देट,
  10. 0:33–0:35मंच पर द्रिष्च देखभा सब पहिने ये,
  11. 0:35–0:38इदार्षनिक प्रषन जगगुजोरी कर रखिदे थच,
  12. 0:54–0:56इनु मुख्य पात्रक परिचे होई तची
  13. 0:56–0:59एक दिस चतिन महान तरक शास्तरी गंगेश
  14. 0:59–1:03जद्त तचिन्ता मनी जगा महान ग्रन्द लिखे रहल चतिन
  15. 1:03–1:07आद दूसर दिस चतिन हूंकर प्रेमिका कवेट्री वल्लब हा
  16. 1:07–1:10खंड एक प्रेम बनाम तरक
  17. 1:10–1:15यहे वैचारिक संगर्ष्के नीक जगा समजू, एक दिस गंगेशक नव्या नयाई तर्कच्छी,
  18. 1:15–1:19जे पुणता हाकाद्मिक, सूव्यावस्तित अएग्दम कठोर आची.
  19. 1:19–1:27दोसर्दिस अची वल्लब्बाग कविता, जे भावनात्मक, मदूर अप्रक्रितिसद गेराए सजोडे लची, दूनो एक्दम अलग्थ रलग दूनिया ची.
  20. 1:27–1:37मुदा एही ताम जे बात सबसे बेसी दिल्चास पची, से ई जे दुन्नु भिप्रीइत भेलाक बाद हो एक दोस्रापर कतेक निरभर चती.
  21. 1:37–1:45गंगेश सुम वल्लभा से कही चतिन जों आअके गीत नहीं रहात, तोई हमर ग्रन्त आदा रहे जाएत.
  22. 1:45–1:49ये ये ता बवड़ पयग बात अची
  23. 1:49–1:56कथोर तरक के से हो जीवित रहवाक लेल, पूरन होमे लेल, कला अप्रेम के अवष्वक्ता हो इच्छै
  24. 1:56–2:03वल्लबाक शेलिक बात करी, तो औआ आपन गीत में अस्थानिये लोक कताक बहुत शुन्दर उप्यो करे चती
  25. 2:03–2:12जिना दिना अ भदरिक उकता जते दुन्नो भाई वन में शिकार लेल जाई च्छती, मुदा दामन साप उनका दन्सी लेच्छनी.
  26. 2:12–2:16शास्त्रार्त अ कतोर तर्ख से भरल दून्या क छिक विप्रीत,
  27. 2:16–2:23अद्लबा एई मदूर लोक दून कमाद्यम से सान्सक्रतिक स्म्रितिक दधडगनक के जीवित रखबा काज करे चतिन.
  28. 2:23–2:25कहन्दुई शत्रन्ज ग्रुपक
  29. 2:26–2:30आब मन्च पर वस्तित एह शत्रन्ज गंपर गोर करू,
  30. 2:30–2:35इएदार्त्त, तर्क, अग्क्धोर गडनाकर खफनाक प्रतीक अची
  31. 2:35–2:37अदे प्रवेश हुई तची देव दद्धक
  32. 2:37–2:41जे समाज कर कधोर यदार्त्वादी अनिन्दक स्वर चतीन
  33. 2:41–2:44औग गंगेशकेन एक ता चेतावनी देइ चतीन
  34. 2:44–2:50जि समाज शताब्दियक दरी हुंकर दर्षन गरन्त तत्व चिन्तामनी पर तिका टिपनी लिखत,
  35. 2:50–2:54मुदा गंगेश आववल्लभाक आही प्रेम कताकेन पुर्ण रुपस विसरी जाएत.
  36. 2:54–2:58इस उनक देज में एक ता सिहरन दोडजाएच.
  37. 2:58–3:04अखिर कोनो साद्धारन अन्सान के पुरन रूप सबिसर्भा में इतिहास के कतिक समय लागेत अची.
  38. 3:04–3:11मन्च पर शत्रन्ज के माद्ध्यम सवमएक पैमानाक एक ता अदबूत अद़्ारावना रूपक प्रस्थूत कायल गेल अची.
  39. 3:11–3:24दिव्दत चोंसत् का एक ता बहंकर गनित समजगावे चतिन, उष्ट्रन्ज का चोंसत् कानक बात करे चतिन, जटे पहिल काना में दानक, एक ता दाना राकि, अक्रा अगला काना में दुगना कायल जाएचे.
  40. 3:24–3:37इग्ता गनित्या असमबवता आची इदानक पहार दरसल समय कवही गातियवा एकस्पनिन्शिल भारक देखार आल आची, जे अनतता उनकर प्रेमक विरासत के कुची कर राखिदित.
  41. 3:37–3:41कान्द तीन प्रतीक आविस्म्रती
  42. 3:41–3:47इद्रिश्छ परवर्तन नाटक का औही मनो वेग्यानिक बडलावा के बहुत नीग जागादर सावेत आची.
  43. 3:47–3:52दिखु, कोना मंच का जामीतिया द्रिश्छ, एक तक कतोर गन से बदलिक,
  44. 3:52–3:55एक ता औमुर्त गुलाड़ मे परिनत भैजाट आची.
  45. 3:55–4:02वरिनत भजायत ज़ेना जेना अस्म्रिती मेटे तची, समःे भीते तची, यथारत आमुर्त कलपना में बदली जायचे.
  46. 4:02–4:07एही भीच्वल लबहाके यह सास हुईत चनी जे हुंकर सुंदर लोक गीत,
  47. 4:07–4:11जेना बाल गुरयावाला गीत आब भास भिट्टी में हेरा जाएत.
  48. 4:25–4:34तए आप यी सब समहत्पूडन बात यी आची जे गंगे सक पुट्र विश्मान ग्रन्त के पहुचान के कडाईस स्सीमित कदईत चाती.
  49. 4:34–4:40परनाम, आसली जीवनक जे प्रतिदुन्दी विद्वान चला, जना आचारे व्यागर आआचारे सिंग,
  50. 4:40–4:46आचारे सिंग उ समय भीतला पर मात्र भाग आशिंग जगा जान्वर बनी कर रही जाईत चती
  51. 4:46–4:50आचारे सरब ता एक ता पुडनता है कालपनिक जीब बनी जाईत चती
  52. 4:50–4:54इतिहास हुंकर असल इनसानियत के बिलकुल मिता दैत छी
  53. 4:54–5:01आप ए आचारे व्यागर आआचारे सिंखख उ हास्यास्पद मुदा खफनाक गब्राहाथ पर दियान दी.
  54. 5:01–5:09जकन हुंका सब कि इएईआसास हुईच्छनी जे समय के संग हुंकर आस्ली नाम अप पहचान पूनता मितादिल गेल आची
  55. 5:09–5:16अव वाद्र एक ता औमूर्त पूरानिक कता, वा तरक के हिस्सा बनिका रही गेल चती, ता इस थी बडविजित्र बहुजाएच.
  56. 5:16–5:24खंड पाच अद्यातमिक वाप से आब एते उलकामुक शब्द क अस्ली अद्ध कोजी का सामने अवे तची.
  57. 5:24–5:27इपने विश्म्रित्ती आची जे फेर समों राखल जीबाक माग करे थेची,
  58. 5:27–5:29आव उई विद्वान सबखे दरावाई तची,
  59. 5:29–5:32जिस सतिके दबभाग प्रयास केने चला.
  60. 5:32–5:35चलू आगु बड़े ची आद देखेख ची,
  61. 5:35–5:41तखन विस्म्रित्ति आपन चरम सीमाः पर पहुज जाई तखन विस्म्रूति हिसाब मागे लेल वापा सबई तखन
  62. 5:41–5:46इवल्लबहक उ अन्तिम प्रतिग्या जी जाहे साथ सो साल लागी जाए
  63. 5:46–5:51मुदा सच्चा प्रेम आइस्म्रिति इतिहासक दिवालक के तोगा
  64. 5:51–5:56अद्र अद्र बाद ये जीच जे हमरा सब के हमाँ नितिहास का उकोन-कोन प्हिसा जीच जे मातर प्रतीग बनी कर अगीज अचीच
  65. 5:56–5:59अजक्रा पच्च्या यक दागार बिस्रल गेल मानव्ता नुकाए जीच
  66. 5:59–6:02इक ता हमरा सब के इज्सुचे प्रतीग बनी कर अचीच
  67. 6:02–6:07अद्याप्रेम अईस्म्रिति इतिहासक दिवालक्के तोडके बहुर आविये कराथ
  68. 6:07–6:15तब अन्त्मे सुच्बाग बात यए चीच जे हम्रा सब के हम्पन इतिहासका उकोन-कोन हिसा चीच जे मात्र प्रतीग बनिकर अगी टीच
  69. 6:15–6:19अजक्रा पच्ठा एक ता गधर बिस्रल गेल मानवता नुकायल अचीच
  70. 6:19–6:22इक ता हमरा सब के इस सोचे पर मजबोर करे तचीच
  71. 6:22–6:25जे आई हम सब इतिहास के कोना गरहन करे ची
  72. 6:25–6:27इही स्रोट समगरीक नाट इ विसलेशन में
  73. 6:27–6:29हमरा संग बनल राबाकले दहने वाद
  74. 6:29–6:31तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �

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नमश्कार, आई हम सब गजेंद्र ताकृर दोरा समपादित आब भेचन् ताकृर निर्देष्ष्ट आदूनिक मेठली नाटक उल्का मुख्क कगेराई में जा रहे ल्छी. इगोनो सादारन कथा नहीं आची. इबहति मार्मिक द्धंग से इदेख्वेत आची, जे कोना इतिहास बाएक-बाएक पोठी आब बवदिक उपलब्धिया के ता आमर कदैता ची मुदद अकर पच्षाक मानविय समवेदना अबहाँना के बेरहमी से मेटी दैता ची तचलू बिना कोना देरी के एक रष शूरू करेच छी तए एक ता बाथ सोचु जो कुनो महान, क्रिती, वा मास्तर पीस रचल जाएच, तकी इतिहास उही प्रतिबहा के मुन राखत, वा उकर पाच्छा के मानवता के एक दम्समिता देट, मंच पर द्रिष्च देखभा सब पहिने ये, इदार्षनिक प्रषन जगगुजोरी कर रखिदे थच, इनु मुख्य पात्रक परिचे होई तची एक दिस चतिन महान तरक शास्तरी गंगेश जद्त तचिन्ता मनी जगा महान ग्रन्द लिखे रहल चतिन आद दूसर दिस चतिन हूंकर प्रेमिका कवेट्री वल्लब हा खंड एक प्रेम बनाम तरक यहे वैचारिक संगर्ष्के नीक जगा समजू, एक दिस गंगेशक नव्या नयाई तर्कच्छी, जे पुणता हाकाद्मिक, सूव्यावस्तित अएग्दम कठोर आची. दोसर्दिस अची वल्लब्बाग कविता, जे भावनात्मक, मदूर अप्रक्रितिसद गेराए सजोडे लची, दूनो एक्दम अलग्थ रलग दूनिया ची. मुदा एही ताम जे बात सबसे बेसी दिल्चास पची, से ई जे दुन्नु भिप्रीइत भेलाक बाद हो एक दोस्रापर कतेक निरभर चती. गंगेश सुम वल्लभा से कही चतिन जों आअके गीत नहीं रहात, तोई हमर ग्रन्त आदा रहे जाएत. ये ये ता बवड़ पयग बात अची कथोर तरक के से हो जीवित रहवाक लेल, पूरन होमे लेल, कला अप्रेम के अवष्वक्ता हो इच्छै वल्लबाक शेलिक बात करी, तो औआ आपन गीत में अस्थानिये लोक कताक बहुत शुन्दर उप्यो करे चती जिना दिना अ भदरिक उकता जते दुन्नो भाई वन में शिकार लेल जाई च्छती, मुदा दामन साप उनका दन्सी लेच्छनी. शास्त्रार्त अ कतोर तर्ख से भरल दून्या क छिक विप्रीत, अद्लबा एई मदूर लोक दून कमाद्यम से सान्सक्रतिक स्म्रितिक दधडगनक के जीवित रखबा काज करे चतिन. कहन्दुई शत्रन्ज ग्रुपक आब मन्च पर वस्तित एह शत्रन्ज गंपर गोर करू, इएदार्त्त, तर्क, अग्क्धोर गडनाकर खफनाक प्रतीक अची अदे प्रवेश हुई तची देव दद्धक जे समाज कर कधोर यदार्त्वादी अनिन्दक स्वर चतीन औग गंगेशकेन एक ता चेतावनी देइ चतीन जि समाज शताब्दियक दरी हुंकर दर्षन गरन्त तत्व चिन्तामनी पर तिका टिपनी लिखत, मुदा गंगेश आववल्लभाक आही प्रेम कताकेन पुर्ण रुपस विसरी जाएत. इस उनक देज में एक ता सिहरन दोडजाएच. अखिर कोनो साद्धारन अन्सान के पुरन रूप सबिसर्भा में इतिहास के कतिक समय लागेत अची. मन्च पर शत्रन्ज के माद्ध्यम सवमएक पैमानाक एक ता अदबूत अद़्ारावना रूपक प्रस्थूत कायल गेल अची. दिव्दत चोंसत् का एक ता बहंकर गनित समजगावे चतिन, उष्ट्रन्ज का चोंसत् कानक बात करे चतिन, जटे पहिल काना में दानक, एक ता दाना राकि, अक्रा अगला काना में दुगना कायल जाएचे. इग्ता गनित्या असमबवता आची इदानक पहार दरसल समय कवही गातियवा एकस्पनिन्शिल भारक देखार आल आची, जे अनतता उनकर प्रेमक विरासत के कुची कर राखिदित. कान्द तीन प्रतीक आविस्म्रती इद्रिश्छ परवर्तन नाटक का औही मनो वेग्यानिक बडलावा के बहुत नीग जागादर सावेत आची. दिखु, कोना मंच का जामीतिया द्रिश्छ, एक तक कतोर गन से बदलिक, एक ता औमुर्त गुलाड़ मे परिनत भैजाट आची. वरिनत भजायत ज़ेना जेना अस्म्रिती मेटे तची, समःे भीते तची, यथारत आमुर्त कलपना में बदली जायचे. एही भीच्वल लबहाके यह सास हुईत चनी जे हुंकर सुंदर लोक गीत, जेना बाल गुरयावाला गीत आब भास भिट्टी में हेरा जाएत. तए आप यी सब समहत्पूडन बात यी आची जे गंगे सक पुट्र विश्मान ग्रन्त के पहुचान के कडाईस स्सीमित कदईत चाती. परनाम, आसली जीवनक जे प्रतिदुन्दी विद्वान चला, जना आचारे व्यागर आआचारे सिंग, आचारे सिंग उ समय भीतला पर मात्र भाग आशिंग जगा जान्वर बनी कर रही जाईत चती आचारे सरब ता एक ता पुडनता है कालपनिक जीब बनी जाईत चती इतिहास हुंकर असल इनसानियत के बिलकुल मिता दैत छी आप ए आचारे व्यागर आआचारे सिंखख उ हास्यास्पद मुदा खफनाक गब्राहाथ पर दियान दी. जकन हुंका सब कि इएईआसास हुईच्छनी जे समय के संग हुंकर आस्ली नाम अप पहचान पूनता मितादिल गेल आची अव वाद्र एक ता औमूर्त पूरानिक कता, वा तरक के हिस्सा बनिका रही गेल चती, ता इस थी बडविजित्र बहुजाएच. खंड पाच अद्यातमिक वाप से आब एते उलकामुक शब्द क अस्ली अद्ध कोजी का सामने अवे तची. इपने विश्म्रित्ती आची जे फेर समों राखल जीबाक माग करे थेची, आव उई विद्वान सबखे दरावाई तची, जिस सतिके दबभाग प्रयास केने चला. चलू आगु बड़े ची आद देखेख ची, तखन विस्म्रित्ति आपन चरम सीमाः पर पहुज जाई तखन विस्म्रूति हिसाब मागे लेल वापा सबई तखन इवल्लबहक उ अन्तिम प्रतिग्या जी जाहे साथ सो साल लागी जाए मुदा सच्चा प्रेम आइस्म्रिति इतिहासक दिवालक के तोगा अद्र अद्र बाद ये जीच जे हमरा सब के हमाँ नितिहास का उकोन-कोन प्हिसा जीच जे मातर प्रतीग बनी कर अगीज अचीच अजक्रा पच्च्या यक दागार बिस्रल गेल मानव्ता नुकाए जीच इक ता हमरा सब के इज्सुचे प्रतीग बनी कर अचीच अद्याप्रेम अईस्म्रिति इतिहासक दिवालक्के तोडके बहुर आविये कराथ तब अन्त्मे सुच्बाग बात यए चीच जे हम्रा सब के हम्पन इतिहासका उकोन-कोन हिसा चीच जे मात्र प्रतीग बनिकर अगी टीच अजक्रा पच्ठा एक ता गधर बिस्रल गेल मानवता नुकायल अचीच इक ता हमरा सब के इस सोचे पर मजबोर करे तचीच जे आई हम सब इतिहास के कोना गरहन करे ची इही स्रोट समगरीक नाट इ विसलेशन में हमरा संग बनल राबाकले दहने वाद तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �

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