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गंगा_ब्रिज__एकटा_व्यवस्था.mp4

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Part 2 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 2
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  1. 0:00–0:12नमस्कार, आव आई इक ता बहुत ही रोचक विष्वे पर गब करे ची, सूचु एक ता आहन पुलक बारे में, जे बन्यो रहल चे अ साँगे साँग उकर मरमज सहो भह रहल चे. सूनी का अच्रस लागल ना?
  2. 0:12–0:19इसे बविश्लेशन कोनो सादारन गब्षष्प नहीं, बलकी हम्रा सबबग व्यवस्थाक एक ठपाकल यदारत अचे, ता आव बुजी जे इस नाटक कोना विकास, ब्रष्थाचार अव्यवस्थाक पोल खुलेचे.
  3. 0:19–0:21इविश्लेशन कोनो सादारन गब्षष्प नहीं
  4. 0:21–0:24बलकी हम्रा सबबग व्यवस्ताक एक तपाकल यदार्त अचे
  5. 0:24–0:30ता आउ बुजी जे इनाटक कोना विकास, ब्रष्ताचार अव्यवस्ताक पोल खूले चे.
  6. 0:30–0:34तए पुरा विश्याय मुख्यरूप से पाज्टा कहन्द में हम सब भूजज़ाब.
  7. 0:34–0:38पहल दे नेवर एंग्डिंग ब्रिज माने एक ता अंतहीन पुल.
  8. 0:38–0:42तो सर द्रीम्स अप नुून नेश्यन नवराश्ट्रक स्वपन.
  9. 0:42–0:46तेसर दे ब्लूप्रिंट अप करठ्षन ब्रष्टा चारक रूप्रेखा
  10. 0:46–0:51चारेम अईटिल्स वस प्रग्मातिसम, आदर्ष आ व्यवहारिक ताक तक्राव
  11. 0:51–0:56और अन्त में पाच्मम, रूलर्स आन दे रूल्ट, माने शासक अश्स्सित
  12. 0:56–1:00तचलु बिना दिलोयल करे आगा बडे ची.
  13. 1:00–1:05पहल कहन चे, दे नेवर एंगे ब्रिज, त्रूटी पून विकासक एक ता रुपग.
  14. 1:05–1:08नाटक के शुरवात होई चे गंगा पूलक निर मानस थल सं.
  15. 1:08–1:12जदा एक ता द्होल बजावे वाला अजज़बे गोशना को रहल चे.
  16. 1:12–1:42तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो �
  17. 1:42–1:46अब एतें देखु, सरकारी कथा आजमीनी सच्चाई में कित्तिक पैग फासला चाई.
  18. 1:47–1:51कागज पर दावी चाई जु जन्ता कलेल बहुत मजबूड डाचा बनाईल जारो हूल चे.
  19. 1:51–1:57अब एतें देखु, सरकारी कता अजमीनी सच्चाई में कित्तिक पैग फासला चाई,
  20. 1:57–2:02कागगज पर दावी चाई ज्जन्ता के लेल बहुत मज्बुद डाचा बनाई जारोज़ चाई.
  21. 2:02–2:07अब आई दोसर कहन्ट पर द्रीम्स अप नुनेशन शिक्षक वादा एताए कता हम्रा सब के पाचा लगाईचे,
  22. 2:07–2:12अद्रा अगस्त कष्वतन्द्रता दिवस समारोह में
  23. 2:12–2:23नाटक मे बदनीक विंग काल गल चै, जे मरम्मतक पइसा से पुलतने बनाई चै, मुदा हाखिम लोकनी गर पर चच्जा जरुर चम की जाए चै, कतिक पैक विदम बना चै.
  24. 2:23–2:53आब आई दोसर कहन्द पर, dreams of a new nation, शिक्षक वादा, एता एक कत्ठा हम्रा सब के पाचा लजाई चे, पंद्रा अगस्ट्क, स्वतन्द्रता दिवस समारोह में, नवका राश्ट्रक, आशा आगला पीडिक लेल जे वादा सब कयल गेल चल, उकर पर ताले तै बहर हे ल्चे.
  25. 2:53–2:58चोड़ पएग हो कोनो भेद नहीं रहत, पैग पैग बान्द बनत, पैग चिमनिवाला पैक्ट्री खुलत,
  26. 2:58–3:03इो स्वरनिम भविष्छे चल, जकर सपना आजादिक छीग बादक पीदी के दिखा एल गिल चल.
  27. 3:03–3:08उगर सोथ जे पैग भई के एहन मस्वूथ पूल बनाभी जे लोकक दुख दूर कर सके
  28. 3:08–3:14तो सर देस बच्चा दूच है, जकरा फक्त्रिक दुवाग गन्द और उचुछ दिवाल बड आकर शित करे चे
  29. 3:14–3:18जे लोकक दुख दूर कर सके, तो सर देस बच्चा दूच है,
  30. 3:18–3:22जकर आप फक्त्रिक धूवाक गन्द आर उचुछ दिवाल बड आकर्षिद करे चे.
  31. 3:22–3:27सबसे खास्गबी जे जे बच्चा एक उही धूवाक कडाई से विरोद करे चे.
  32. 3:27–3:31कारन, कारन جे, उही दूवासे अकर माके, कोखी बहजाएचचे.
  33. 3:31–3:35इछवट कसन गब आगा चलके, एक ता बहुत पैग वैचारिक संगरष्क नीव बनीचे.
  34. 3:35–3:40तेसर खन्द छे, दे बलूप्रेंट अप करठ्षन एक ता प्रनाली गत जाल.
  35. 3:40–4:10आब कता फेर वर्त्मान में अवेट छे, औही आदरश्वादी बच्चा एक अप पाएकभा का अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप �
  36. 4:10–4:25अदर महाबन्त भज़ेते आईत्बाद हरी ज़ आपन बच्चाक स्कूल काए फीस तक ने बहरी सकते इक ता एहन निर्मम सच्चाई चई जक्रा से मुन नहीं मोडल जासकत चे.
  37. 4:25–4:34एज आमुर्त अ उल्जल जामिती आकार चे, से हमरा सबख नोकर शाहिक अपार दर्षिता अजजटिल ववस्ताक बहुत सतीक प्रतीक चे.
  38. 4:34–4:40जेना इआकार सब उलजला कथोर चे, तिक तहीना इब्रष्त चारक जाल चे.
  39. 4:40–4:44इक्दम अपार्दर्शी अजक्रा से बचाब लगभग ना मुंकिन.
  40. 4:44–4:49इस सिस्तम आदर्श्वादी अव्यवाहारिक तेकेदार दूनूके एहन जक्रिलेच्टे,
  41. 4:49–4:52जैसे बहार निकलनाई अस्समभव जहन बुजाएच्टे.
  42. 4:52–4:54आप चलू चारिम ख्हन्द देस,
  43. 4:54–5:01आदर्श्वादी इंजिन्यर क्मानब एक्डम अतल चे, उगगे चे चे सब्फलता उ मस्वुद पुल बनेनाइ चे,
  44. 5:01–5:05जे लोकक काजाभे परिच्षाक अंक सकोन फरकने पड़े चे.
  45. 5:05–5:07अगर लिल आस्ली इंजिन्यरिं केवल लोकक सेवा थिक
  46. 5:07–5:09अगर अपन इता मस्वुत नेटिक माप्दंड चे
  47. 5:09–5:11आ अई कतो ने माने इचे
  48. 5:11–5:13चुर्सी पर बैसलपा एक लोग जे कहत से एकदम सही होत
  49. 5:13–5:15मुदा उही ताम दोसर दीस
  50. 5:15–5:17अखर लिल अस्ली इंजिन्यरिं के वल लोगक सेवा थीक
  51. 5:17–5:19अखर अपन इता मस्वुत नेतिक माप्दंद चे
  52. 5:19–5:21अखर अगी कतो नेमाने चे
  53. 5:21–5:23जे कुर्सी पर भैसलपाए गलोग जे कहत से
  54. 5:23–5:25एक्दम सही होत
  55. 5:25–5:27मुदा अगी ताम दोसर दीस
  56. 5:27–5:29अखर विगारेक मित्रक सोच
  57. 5:29–5:34उगर साफ कहब चे जो सफलता उपरक हाखिम सबख आधेशक पालन के नाएचे,
  58. 5:34–5:37जाए सब बची सकब आसत्ता प्राप्त कर सकब.
  59. 5:37–5:40उई भूजी चुकल चे जिनने तिक्ता विक्ती परक्चे,
  60. 5:40–5:46उकर साव कहवब जे, जो सफलता उपरक हाखिम सबखग आदेशक पालन के नाई चे,
  61. 5:46–5:49जाई सब बची सकब आजचता प्राप्त कर सकब.
  62. 5:49–5:52उई भुजी चुकल चे, जिन नेतिकता विक्ती परक चे,
  63. 5:52–5:55उकर परिभाशा उभी लोग ताए कर इच्छे,
  64. 5:55–5:59अगर परनाम कत्तिक विनाशकारी होगत जे से सुचु।
  65. 5:59–6:03पानी में एक एक ब्लोक कखसी रहर इप पुलक कपाया
  66. 6:03–6:07इस समजोता वादी रवएयाग, भोतिक अनेटिक पतनक एक दम सीथा परनाम अची
  67. 6:07–6:10जखन कोनो सिस्तम में सत्ता औग राकिम का आदेश
  68. 6:10–6:15अब हम सब पहुच गिल छी अन्तिम और पाचम्खखंड पर,
  69. 6:15–6:19रूलर्ज आन दे रूल्ड, उतर अपनिवेश्षिक यधार्थ,
  70. 6:19–6:25एक ता पैएग सवाल की स्वतन्त्रता के बाद सच्मुच लोकक जीवन बडल्लव,
  71. 6:25–6:30आब हम सब पहुच गिल ची अन्तिम और पाचम्खशन्द पर,
  72. 6:30–6:34रूलर्ज आन द रूल्ड, उतर अपनीवेश्षिक यधार्त,
  73. 6:34–6:39एक ता पैग सवाल की स्वतन्त्रता के बाद सच्मुच लोकक जीवन बदल्लग,
  74. 6:39–6:43आप गान कस्तर पर स्पष्ट रूभ से सामने आभी रहल चें.
  75. 6:43–6:46गामक परिवेश में आदर्ष्वादी अंजीन्यर,
  76. 6:46–6:50करमाए अकाकिक भीचक गब्षव बहुत किच साव कदेच्छे.
  77. 6:50–6:54उसब भली बादी देखी रहल चे जि कोना गामक सादारन लोग,
  78. 6:54–6:59अपन शक्ति कुल्लं कुल्ला दूरूप्यो करो रहल चे आ आम जन मानस के सता रहल चे
  79. 6:59–7:06इस साव साव देखा रहल चे जि कुर्सी अस्सत्ता कोना एक ते सादारन लोकक मान्सिक्ता बदली कर अगी देचे
  80. 7:06–7:11आ आम जन मानस के सतार हल चे, इस साव साव देखार हल चे,
  81. 7:11–7:16जि कुरसी अससत्ता कोना एकते सादारन लोकक मानसिकता बदली कर अगी देचे.
  82. 7:16–7:19आही पूरा कताक सबसे मार्मिक बिन्दु इचे,
  83. 7:20–7:23हमर जे इविवस्ता चे, उविदेशी शासकक स्थान पर,
  84. 7:23–7:26केवल अस्तानिया कुलीन सब के बसाए दिलक,
  85. 7:26–7:28अंग्रेस्तन चली गे लहा,
  86. 7:28–7:31मुदा इनाखर शाही, अषिक्षा विवस्ता,
  87. 7:31–7:35अपने ही नागरिक के भीच सनवका नवका जमिन्दार पहला कर दिलक,
  88. 7:35–7:37आब हमर समाज फेर सें,
  89. 7:37–7:41शासक अशासित नामक दूटा वर्ग में बती गेल चे
  90. 7:41–7:44सच कहीता विवस्ता नहीं बदलल,
  91. 7:44–7:47केवल शोशक करेवालाक अनुहार बदली गेल अचे
  92. 7:47–7:50अनत दह, इविश्लेशन एक ता बहुत पध्ग,
  93. 7:50–7:53अविचरनी अ प्रषना हम्रा सबख्य सुज्या चोडी जाए चे,
  94. 7:53–7:57कि हमर शिक्षा आई शोषक वेवस्था के कतम करेच्छे,
  95. 7:57–7:59वाग केवल एक रा पोषिट करेच्छे,
  96. 7:59–8:03कि हमर इसंस्थान एहन नाग्रिक तयार करेच्छे,
  97. 8:03–8:06जे वेवस्था के सुदारत, वापहर एहन पुर्ज़ बने रहल चे,
  98. 8:06–8:13जे आही ब्रष्ट मशीन के आप पैग करत, उत्तर अपने वेशिक दुन्या में अस्ली विकासक परिबाशा अकिर चै की,
  99. 8:13–8:18इप्रष्न मन में अवश्षिगुज्यत रहत, सोचब जरूर इतबे कही के आई विदाले चै.

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नमस्कार, आव आई इक ता बहुत ही रोचक विष्वे पर गब करे ची, सूचु एक ता आहन पुलक बारे में, जे बन्यो रहल चे अ साँगे साँग उकर मरमज सहो भह रहल चे. सूनी का अच्रस लागल ना? इसे बविश्लेशन कोनो सादारन गब्षष्प नहीं, बलकी हम्रा सबबग व्यवस्थाक एक ठपाकल यदारत अचे, ता आव बुजी जे इस नाटक कोना विकास, ब्रष्थाचार अव्यवस्थाक पोल खुलेचे. इविश्लेशन कोनो सादारन गब्षष्प नहीं बलकी हम्रा सबबग व्यवस्ताक एक तपाकल यदार्त अचे ता आउ बुजी जे इनाटक कोना विकास, ब्रष्ताचार अव्यवस्ताक पोल खूले चे. तए पुरा विश्याय मुख्यरूप से पाज्टा कहन्द में हम सब भूजज़ाब. पहल दे नेवर एंग्डिंग ब्रिज माने एक ता अंतहीन पुल. तो सर द्रीम्स अप नुून नेश्यन नवराश्ट्रक स्वपन. तेसर दे ब्लूप्रिंट अप करठ्षन ब्रष्टा चारक रूप्रेखा चारेम अईटिल्स वस प्रग्मातिसम, आदर्ष आ व्यवहारिक ताक तक्राव और अन्त में पाच्मम, रूलर्स आन दे रूल्ट, माने शासक अश्स्सित तचलु बिना दिलोयल करे आगा बडे ची. पहल कहन चे, दे नेवर एंगे ब्रिज, त्रूटी पून विकासक एक ता रुपग. नाटक के शुरवात होई चे गंगा पूलक निर मानस थल सं. जदा एक ता द्होल बजावे वाला अजज़बे गोशना को रहल चे. तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो तो � अब एतें देखु, सरकारी कथा आजमीनी सच्चाई में कित्तिक पैग फासला चाई. कागज पर दावी चाई जु जन्ता कलेल बहुत मजबूड डाचा बनाईल जारो हूल चे. अब एतें देखु, सरकारी कता अजमीनी सच्चाई में कित्तिक पैग फासला चाई, कागगज पर दावी चाई ज्जन्ता के लेल बहुत मज्बुद डाचा बनाई जारोज़ चाई. अब आई दोसर कहन्ट पर द्रीम्स अप नुनेशन शिक्षक वादा एताए कता हम्रा सब के पाचा लगाईचे, अद्रा अगस्त कष्वतन्द्रता दिवस समारोह में नाटक मे बदनीक विंग काल गल चै, जे मरम्मतक पइसा से पुलतने बनाई चै, मुदा हाखिम लोकनी गर पर चच्जा जरुर चम की जाए चै, कतिक पैक विदम बना चै. आब आई दोसर कहन्द पर, dreams of a new nation, शिक्षक वादा, एता एक कत्ठा हम्रा सब के पाचा लजाई चे, पंद्रा अगस्ट्क, स्वतन्द्रता दिवस समारोह में, नवका राश्ट्रक, आशा आगला पीडिक लेल जे वादा सब कयल गेल चल, उकर पर ताले तै बहर हे ल्चे. चोड़ पएग हो कोनो भेद नहीं रहत, पैग पैग बान्द बनत, पैग चिमनिवाला पैक्ट्री खुलत, इो स्वरनिम भविष्छे चल, जकर सपना आजादिक छीग बादक पीदी के दिखा एल गिल चल. उगर सोथ जे पैग भई के एहन मस्वूथ पूल बनाभी जे लोकक दुख दूर कर सके तो सर देस बच्चा दूच है, जकरा फक्त्रिक दुवाग गन्द और उचुछ दिवाल बड आकर शित करे चे जे लोकक दुख दूर कर सके, तो सर देस बच्चा दूच है, जकर आप फक्त्रिक धूवाक गन्द आर उचुछ दिवाल बड आकर्षिद करे चे. सबसे खास्गबी जे जे बच्चा एक उही धूवाक कडाई से विरोद करे चे. कारन, कारन جे, उही दूवासे अकर माके, कोखी बहजाएचचे. इछवट कसन गब आगा चलके, एक ता बहुत पैग वैचारिक संगरष्क नीव बनीचे. तेसर खन्द छे, दे बलूप्रेंट अप करठ्षन एक ता प्रनाली गत जाल. आब कता फेर वर्त्मान में अवेट छे, औही आदरश्वादी बच्चा एक अप पाएकभा का अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप � अदर महाबन्त भज़ेते आईत्बाद हरी ज़ आपन बच्चाक स्कूल काए फीस तक ने बहरी सकते इक ता एहन निर्मम सच्चाई चई जक्रा से मुन नहीं मोडल जासकत चे. एज आमुर्त अ उल्जल जामिती आकार चे, से हमरा सबख नोकर शाहिक अपार दर्षिता अजजटिल ववस्ताक बहुत सतीक प्रतीक चे. जेना इआकार सब उलजला कथोर चे, तिक तहीना इब्रष्त चारक जाल चे. इक्दम अपार्दर्शी अजक्रा से बचाब लगभग ना मुंकिन. इस सिस्तम आदर्श्वादी अव्यवाहारिक तेकेदार दूनूके एहन जक्रिलेच्टे, जैसे बहार निकलनाई अस्समभव जहन बुजाएच्टे. आप चलू चारिम ख्हन्द देस, आदर्श्वादी इंजिन्यर क्मानब एक्डम अतल चे, उगगे चे चे सब्फलता उ मस्वुद पुल बनेनाइ चे, जे लोकक काजाभे परिच्षाक अंक सकोन फरकने पड़े चे. अगर लिल आस्ली इंजिन्यरिं केवल लोकक सेवा थिक अगर अपन इता मस्वुत नेटिक माप्दंड चे आ अई कतो ने माने इचे चुर्सी पर बैसलपा एक लोग जे कहत से एकदम सही होत मुदा उही ताम दोसर दीस अखर लिल अस्ली इंजिन्यरिं के वल लोगक सेवा थीक अखर अपन इता मस्वुत नेतिक माप्दंद चे अखर अगी कतो नेमाने चे जे कुर्सी पर भैसलपाए गलोग जे कहत से एक्दम सही होत मुदा अगी ताम दोसर दीस अखर विगारेक मित्रक सोच उगर साफ कहब चे जो सफलता उपरक हाखिम सबख आधेशक पालन के नाएचे, जाए सब बची सकब आसत्ता प्राप्त कर सकब. उई भूजी चुकल चे जिनने तिक्ता विक्ती परक्चे, उकर साव कहवब जे, जो सफलता उपरक हाखिम सबखग आदेशक पालन के नाई चे, जाई सब बची सकब आजचता प्राप्त कर सकब. उई भुजी चुकल चे, जिन नेतिकता विक्ती परक चे, उकर परिभाशा उभी लोग ताए कर इच्छे, अगर परनाम कत्तिक विनाशकारी होगत जे से सुचु। पानी में एक एक ब्लोक कखसी रहर इप पुलक कपाया इस समजोता वादी रवएयाग, भोतिक अनेटिक पतनक एक दम सीथा परनाम अची जखन कोनो सिस्तम में सत्ता औग राकिम का आदेश अब हम सब पहुच गिल छी अन्तिम और पाचम्खखंड पर, रूलर्ज आन दे रूल्ड, उतर अपनिवेश्षिक यधार्थ, एक ता पैएग सवाल की स्वतन्त्रता के बाद सच्मुच लोकक जीवन बडल्लव, आब हम सब पहुच गिल ची अन्तिम और पाचम्खशन्द पर, रूलर्ज आन द रूल्ड, उतर अपनीवेश्षिक यधार्त, एक ता पैग सवाल की स्वतन्त्रता के बाद सच्मुच लोकक जीवन बदल्लग, आप गान कस्तर पर स्पष्ट रूभ से सामने आभी रहल चें. गामक परिवेश में आदर्ष्वादी अंजीन्यर, करमाए अकाकिक भीचक गब्षव बहुत किच साव कदेच्छे. उसब भली बादी देखी रहल चे जि कोना गामक सादारन लोग, अपन शक्ति कुल्लं कुल्ला दूरूप्यो करो रहल चे आ आम जन मानस के सता रहल चे इस साव साव देखा रहल चे जि कुर्सी अस्सत्ता कोना एक ते सादारन लोकक मान्सिक्ता बदली कर अगी देचे आ आम जन मानस के सतार हल चे, इस साव साव देखार हल चे, जि कुरसी अससत्ता कोना एकते सादारन लोकक मानसिकता बदली कर अगी देचे. आही पूरा कताक सबसे मार्मिक बिन्दु इचे, हमर जे इविवस्ता चे, उविदेशी शासकक स्थान पर, केवल अस्तानिया कुलीन सब के बसाए दिलक, अंग्रेस्तन चली गे लहा, मुदा इनाखर शाही, अषिक्षा विवस्ता, अपने ही नागरिक के भीच सनवका नवका जमिन्दार पहला कर दिलक, आब हमर समाज फेर सें, शासक अशासित नामक दूटा वर्ग में बती गेल चे सच कहीता विवस्ता नहीं बदलल, केवल शोशक करेवालाक अनुहार बदली गेल अचे अनत दह, इविश्लेशन एक ता बहुत पध्ग, अविचरनी अ प्रषना हम्रा सबख्य सुज्या चोडी जाए चे, कि हमर शिक्षा आई शोषक वेवस्था के कतम करेच्छे, वाग केवल एक रा पोषिट करेच्छे, कि हमर इसंस्थान एहन नाग्रिक तयार करेच्छे, जे वेवस्था के सुदारत, वापहर एहन पुर्ज़ बने रहल चे, जे आही ब्रष्ट मशीन के आप पैग करत, उत्तर अपने वेशिक दुन्या में अस्ली विकासक परिबाशा अकिर चै की, इप्रष्न मन में अवश्षिगुज्यत रहत, सोचब जरूर इतबे कही के आई विदाले चै.

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