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नाग्राम_पंजीक_प्राचीन_ज़िप_फ़ाइल.m4a
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- 0:00–0:11मानिलीए, जे कोनो बहुत पुरान इक्टम दूल से भरल संदूक खोलना पर एक्टा प्राचीन जिप-प्फायल बहते या
- 0:11–0:12जिप-प्फायल
- 0:12–0:16बलको, आ हम कोनो कमपुटर वाला जिप-प्फायला गब नहीं कार रहल चे,
- 0:16–0:19बलकी एक्ता एहन प्राचीन दस्तावेज
- 0:19–0:22जताई बहुत रास गावक नाम,
- 0:22–0:24विवाहक, रेकोड, लोग कप पेशा
- 0:24–0:28आप मने जट्टिल समाजिक समबन्द सब के
- 0:28–0:31चोट-चोट कोड में संकुचित कोडे लेएल हो.
- 0:31–0:32संकुचित, फाज.
- 0:32–0:38आईकर इज हमर सब का गाँन चर्चा आचे, इबिलकु एहनी एक ता जिप फाणल पर आचे.
- 0:38–0:44हमरा सब लग श्रोता दवारा पट़्ायल किचु बहुत रोचक नोट्स आश्रोत आचे.
- 0:44–0:46इी गजद्र ताकुल दोरा संपादित
- 0:46–0:48दिकोडिं दपंजी अप मित्फिला
- 0:48–0:50वलुम फोर पर अदारे तचे
- 0:50–0:52जी, नागराम पंजी पर
- 0:52–0:55एक दम सई, आई जान्बाक लेल इश्वोता पट़्ाल गेल अचे
- 0:55–0:58जे, नागराम पंजीक इशंद्रचना
- 0:58–1:00अखर की कही तही है?
- 1:00–1:03बुजलीन, यी केवल पुर्खा सबाक एक ता नीरस
- 1:03–1:04वा सीथा सुची नहीं देख
- 1:04–1:08यी उही सा बहत पैक चीज अचे
- 1:08–1:10ता आव एक रा विस्तार से बूजी
- 1:10–1:12जे ए प्राचीन जिप फाट्ल
- 1:12–1:13अखर काज कोना करे तचे
- 1:13–1:15आईकर भीतर की चिपल अचे
- 1:15–1:18दिको, इस जिप फाइलक जे उपमा आचीने
- 1:18–1:21अमदा ए स्रोथ पर एक दम सतीक बैसे दची
- 1:21–1:22की? लागे दची निप?
- 1:22–1:23रिलकुल
- 1:23–1:25कोनो से हूँ जिप फाइल के दिकोट कर बाक लेल
- 1:25–1:26उक्रा खोल बाक लेल
- 1:26–1:28सब से पहली हम्रा सबखके
- 1:28–1:30उकर सही सुट्वेर भुजे परत
- 1:30–1:32अगर नाग्राम पन्जिक इजे सुट्वेर अचे
- 1:32–1:34उकोनो मशीम में नहीं
- 1:34–1:36बलकी एकर शब्दावली
- 1:36–1:38एकर विष्छ्ट व्याक्रण
- 1:38–1:40अएकर भोगोलिक संकेत में चिपल चे
- 1:40–1:42मैंने उकर जे आपन भाशा आचे
- 1:42–1:48स्रोथ अश्पष्ट करेत अच्छ, जे यी केखर बेटा खेचल तकर रेकोड नहीं आच्छे,
- 1:48–1:54बलकी यी समाज एक तुस्रा से की अख्कोना जुडल चल तकर एक ता सबहतागत पुरा लेक आच्छे.
- 1:54–1:59सगन सबहतागत पूरा लेक, बाब्रे, यी तो बहुत गंभीर सब्द भेल
- 1:59–2:04अमग्रेजी में कही तए एक तक खमप्रस्ट सिविलाईश्टनल आरकाईव थिक
- 2:04–2:04अच्छा
- 2:04–2:08एक रपभाक लेल भुजेलिय, औही चोट-चोट सबद सब भ्भेबईपरत
- 2:08–2:12जे पहल बर दिखाला पर केवल कोनो नाम जकल आगत छी
- 2:12–2:17मुदा असल में उपुरा कपूरा समाजिक देटा बेस के अपस में जोडी रहा ला ची
- 2:17–2:20तद तही इज शुरूत में किछ कोड शब्द चैए
- 2:20–2:23पहले उख्रा भुजवा कोसिष करी ची
- 2:23–2:25कि एक ता इस सत्ते में बहुत चकित करे ला ची.
- 2:25–2:27आउ देखे ची.
- 2:27–2:29जगन पन्जी कारा कोनु नाम लिखे चला,
- 2:29–2:32तो उसीदे-सीदे पन्नापर नाम नहीं उतारिद दे चला.
- 2:32–2:36उो किछ कीवर्द या माने कोड़क परे चला.
- 2:36–2:40जैना सुत वा सुतो लिखे ची.
- 2:40–2:44यकर आथता स्पष्ट जी जे एकर माने भेल बेतावा वन्चज
- 2:44–2:47फिर एक ता शबदची आपर वा आप्रा
- 2:47–2:49और एक ता प्रा आची
- 2:49–2:54इस भत बोज्वा में आभी रहे ले जे प्राव माने वैकल पिक नाम
- 2:54–2:58जेना मानी लिया कुनो रजिस्टर में कुनो व्यक्तिक नाम बबनू आची
- 2:58–3:01मुदा समाज में लोग हुनका तेकना रहन कहता ची
- 3:01–3:03ता पंजी कार उक्रा प्र लगा का जोडी देता
- 3:03–3:06एक दम यी तो एक ता ब्यवाबहरिक बाद भेल
- 3:06–3:08मुदा इजे अपर्वाला बाता ची
- 3:08–3:10तनी विस्तार से बुजायब
- 3:10–3:12जे इखुना काज करे चला
- 3:12–3:14इकी संक्यद दर रहले ची
- 3:14–3:16ता अव एक रा एक ता वेबारे एक स्तिती सबुजायची एं
- 3:16–3:18मानी लिया
- 3:18–3:20जे पनजी कार एक ता परिवारक लिख्वार लिख्वार जतिन
- 3:36–3:40आओ मुल गाच सं अलग आपने क्यटा पहचान बना रहला ची
- 3:40–3:42आब पनजिकार कोना बताव ता
- 3:42–3:45जे एक ते सं एक ता नाव शाखा शुरुभ हर रहला ची
- 3:45–3:48उसीदे एक ता नाव पनना नहीं जोडी देता
- 3:48–3:49तो उकी करता?
- 3:49–3:50उब लिखता हा आपर
- 3:50–3:55इआ पर जे आजे आजे ओब पडनिहारक लेल एक ता सीथा इशारा आजे,
- 3:55–4:00जे एते सहम मोल गाचक एक ता दूसर दाडी भिस गूमे रहल ची.
- 4:00–4:03ओओ, उआज, नव दाडी.
- 4:03–4:08आजे, एक रा हम सब रिलेशनल मारकर्स कही सकही ची,
- 4:08–4:10जे संबन दख दिशा तैकरे तची.
- 4:20–4:31इक दम मुदा जगन आहा इ आपर वासुत जगका शब्द का अर्थ बुजीजाए ची तई भीड एक ता सु विवस्तित नेट्वोक कर रूप लेवाई लगाई तची
- 4:31–4:35जते प्रतेक विक्ती आपन सही जगः पर स्थापी तची
- 4:35–4:36बिल्कुल सही
- 4:36–4:39ये तब हेल व्यक्तिक अस्तर प्रक रग बात
- 4:39–4:42मुदव ये तई एक ता बात जे हमरा खटक लग
- 4:42–4:44आजी हमरा बूजलिये
- 4:44–4:46शौँँ सो भेसी आश्चर मे डल लग
- 4:46–4:49औव छी पंजी में स्थानक नाम
- 4:49–4:51वा गाँक नामक प्रियोग
- 4:51–4:53बहुगलिक संकेत
- 4:53–4:59स्रोथ पडला पर एक ता रूट फर्मूला वार रास्ताक सुत्र भेटे तची
- 4:59–5:03जिना लिख हल ची संदेपृषं सिंग्वार
- 5:03–5:05वा संदेपृषं शशीपृर
- 5:05–5:06थी
- 5:06–5:11पहने हम्रा लागल जे यी सीथा सीथा पलायन वा माइग्रेशन कर बात कोरावल जी
- 5:11–5:18जे ना मने कुनो परिवार संदेपृर सवुधल आसिंवार में जाक गर बना के बैसगेला
- 5:18–5:25मुदस्रोत स्पष्ट कोरे तची जे एकेवल भूगलक गप नहीं कि एई भूगलिक पलाये नहीं थेक
- 5:25–5:28नहीं, एकेवल पलाये नहीं गप नहीं भूरहो लगछी
- 5:28–5:31इए उही सा बहुत भेसी आची
- 5:31–5:35पनजी कार जखन एक गाम सा दोसर गाम लिख है च्छतीन
- 5:35–5:38तो उकर अर्थ केवल एई नहीं आची
- 5:38–5:42जे आपन भोर्या बिस्तर बान के दोसर ठाम चलिगे ला
- 5:42–5:43तो फिर की आची?
- 5:43–5:45उकर अर्थ उपत्ती बहुसके तची
- 5:45–5:50मुदा संगे संग, उकर अर्थ विवास संबन्द, नव शाखाक विस्तार,
- 5:50–5:54वा कोनो नव सामाजिक मानिता से हो भहुसकेत अची.
- 5:54–5:57मने गाँक नाम एक टाकोड अची.
- 5:57–5:58एक दम.
- 5:58–6:02गामजना, करमहा, सरी सब, पाली, शषीपृ।
- 6:02–6:07इसब केवल माड्टी अप पानीवला भगोलिक स्थान मात्र नहीं चती
- 6:07–6:12इसब सामाजिक निर्देशांक वा सोचल कोडिनेट चती
- 6:12–6:18रूको रूको, इक रातनी और सपष्ट करू, इस सामाजिक निर्देशांक कोना बहुल?
- 6:18–6:29देखु, जिना जखन आवंकी अलाल से भूगग, शाखा ननू अ गंगेश दरी पहुचे तची, तपनजा उक्रा कर्महा गाम से जोडे तची.
- 6:29–6:31रही, स्रोट मेहे ची बात.
- 6:31–6:37एकर एई अर्थ नही, जो सब कर्महा में जन्म लेलेनी, वा कर्महा में रहित चला.
- 6:37–6:42इबतार होल चत, जे एही दूटा परिवारक भीच जे समबन्दक पुल आची
- 6:42–6:44उ करमहा के माद्धिम सा आची
- 6:44–6:46मने कुनो कनेक्षन आची होते से
- 6:46–6:49हाँ, होई ते जे कुनो महत्पृर विवाहोते भेल हो
- 6:49–6:52वा उही गाम कोनो विषेश साखासा
- 6:52–6:54इपर्वार समाजिक रूप से जोडल हो
- 6:54–6:58तगाम का नाम एते एक ता समबन दख मुहर बनी जाईत छी
- 6:58–7:02बाप रे, हम एक रा आदूनिक दुन्या से जोडी के देके थी
- 7:02–7:04जकन हम सव फीजबुक वा अईँच्टाग्राम पे
- 7:04–7:34अपना, अग, रिलेशन्ट्टेट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्�
- 7:34–7:37अनेक अलग अलग शाखा मे आवद च्या
- 7:38–7:40उगब पालग शाखा मे से हो का महां
- 7:40–7:42बच्चा के शाखा मे से हो कर महां
- 7:43–7:46तक की इपडनी हारक लेल, वा स्वयम पंजी करक लेल
- 7:47–7:49बारी ब्रम पेडा नहीं करतेते
- 7:49–7:51उसव एक रह कोनो सपष्ट रह किच चला
- 7:51–7:53दिखु इब्रम तक्हन होईता ची
- 7:53–7:56जक्हन हम सब पनजी के उप्रस नीचा जाएत
- 7:56–7:58एक त़ सीदा गाज जका दिखे ची
- 7:58–7:59सीदा गाज
- 7:59–8:02अग मने, फैमली त्री
- 8:02–8:05मुदद पनजी कार एक राख खोल सीदा गाज जका नहीं
- 8:05–8:08बलकी एक ता विशाल जाल वा नेट्वोग जका देखे चला
- 8:08–8:10नेट्वोग अच्छा
- 8:10–8:13जखन कर्महा बार बार बार अलग गल शाखा में आवात अच्छे
- 8:13–8:17तेकर अद्ठ छी जे उ गाँँ अनेक परिवारक लेल
- 8:17–8:19वा अनेक पुष्द्दरी विवा
- 8:19–8:22वा सम्बन्दक एक ता पेग केंद्रवा हब च्यल
- 8:22–8:24हब च्यल आब उजलो
- 8:24–8:27राई पनजीकार बुजे च्यला है
- 8:27–8:30जे कोनो व्यक्ती के किवल उकर पिता के नाम से नहीं
- 8:30–8:34बलकी उकर गाँवक नेट्वर्क से भी चिन्हल जाई तची
- 8:34–8:43इएक ता दीटी मैप जगा चे, जटे कर्म हा अनेक लाईन के आपस में जुडी रहल आचे.
- 8:43–8:50औह, ता अर्थ इब हैल जे गाँ आशाखाक सन्रचना भूजला सं इए असपपस्ट होई तची,
- 8:50–8:54जे पनजी केवल रक्त संबंद वा दीने दरी सीमित नहीं चल.
- 8:54–8:55इक्दम नही!
- 8:55–8:57इस समाजक प्रत्स्टा समबन्द
- 8:57–8:59आब बदलित समें की सोह लेकोड करेच्छल
- 8:59–9:02आई हम्रा सबके उई विशे दिस लोगाई तची
- 9:02–9:04जे हम्रा लागे तची
- 9:04–9:07एस रोत में सब सब भेसी अचंबित करेवाला बात ची
- 9:07–9:08कोन बात?
- 9:08–9:10जी विग्यान्सा आगा कगब
- 9:10–9:12आप, पेशा अ उपादिवाल अबात
- 9:12–9:17इग्दम, पनजी में जे उपादि अबूमिका सबक वरनन अची, उआदबूत अची
- 9:17–9:21हमरा लागल चल जे वन्शावली में किवनल नाम हे तै,
- 9:21–9:24यह ते ते लोकक पेशा आहुंकर विद्वाता सिव हो दर्ज आची.
- 9:24–9:27जखनम गिर्दारिक शाक्ठ देखे ची,
- 9:27–9:29तो उते एक ता नाम भेटे था ची कवी सुकानी,
- 9:29–9:34या फिर शषीपृ पिंदारुच शाक्ठ में जोतिषी बज्कुन,
- 9:34–9:35इसब की यह चे?
- 9:35–9:40पज्जिकार जखन कुनो व्यक्तिक नाम से पहले कवी लिख़े च्छती
- 9:40–9:46तो और असल मे उज़्िक समाजिक प्रमाण के उजिप फाटल मे दरज करहल च्छती
- 9:46–9:48अच्छा, सोषल प्रूएद.
- 9:48–9:49बलकुल.
- 9:49–9:52पज्जिकार एब दावे च्छती, च्छती, च्छती,
- 9:52–9:54अच्छा, सोचल प्रूव.
- 9:54–9:55बिलकुल
- 9:55–9:57पनजीकार इबतावे चाहे चाहे चाइच्छती
- 9:57–10:00चे इपरिवार केवल अपन वन्शावली
- 10:00–10:02वापन गाम से नहीं
- 10:02–10:03बलकी अपन विद्वत्टा
- 10:03–10:05अब बोद्धिक शमता कलेल सहो
- 10:05–10:07समाज में चिनहल जाएच्छल
- 10:07–10:10इए उही व्यक्तिक समाजिक पूंजी चल.
- 10:10–10:13मुदा जे बात हमरा सब से बेसी चांका दे लक
- 10:13–10:16उई आची जे एहे में केवल कवी
- 10:16–10:19वा जोतिषी जका प्राचीन पद्वी नहीं आची
- 10:19–10:22बलकी आदूनिक पेशा सबक सहो समावेश अचे.
- 10:22–10:24आई ये बहुत दिल चास्पाची
- 10:24–10:28जिन नागेश्वरक शाखामे वकील रही कान्तक उलेक है
- 10:28–10:32कोनो दोसर जग अगनेर अदोक्तर को सहो उलेक है
- 10:32–10:36आश़शी पृ सुर्वना ताकृ शाखामे त कान्त नाम्वाला वन्शच के
- 10:36–10:37इक ता पाएक समूह थे
- 10:37–10:40जेना मदन कान्त, रमा कान्त,
- 10:40–10:42जीव कान्त, आजे कान्त
- 10:42–10:45एक दम इस आद माम सुनिक लागता ची
- 10:45–10:48जेना हम कोनो आदूनिक युख के उपस्तिती देखिर रहा जी
- 10:48–10:51हमरा ता इ प्राचीन वन्शावलिक के संगजोडग लेक्ता
- 10:51–10:54प्राचीन लिंक्दिन प्रोफाईल जगा लगता शी
- 10:54–10:57जब लोक आपन मावनाव पेशा लिखिरहल चातिन
- 10:57–10:58एक दम सही
- 10:58–11:01इप पंजी कार सब इए आदूनिक उपादिक के
- 11:01–11:03कोना जोडी ले ले लिन?
- 11:03–11:06लिंक्दिन प्रोफाईल वाथ यह ते बहुत सतिक बआट हता ची
- 11:06–11:12अप्ट्ट्ट करेत अची जे पनजी कोनो पातर पर लिखल गेल एहन शिला लेक नहीं आची
- 11:12–11:15जे एक बर लिखल गेल अब बन बगगेल
- 11:15–11:16तए इखी आची
- 11:16–11:18इए ता जीवित दस्तावेज खेख
- 11:18–11:20लिविंग डोक्युमेंट
- 11:20–11:22जगन समाज में परिवर्तन भिलल
- 11:22–11:26जगन लोक ट्रिष्छनल विद्वत्ता चोडि का आदूनिक शिक्षा ग्रान करे लगला
- 11:26–11:29कल कता वा पतना जाक वकिला अंजिन्यर बनाई लगला
- 11:29–11:35तप पनजी कर उही आदूनिक उपादि के साहो अपनें पारमपरिक धाचा मे समाहित कर लेनिन
- 11:35–11:40जगन सब हाई चल अप परिवार के लोक अपन नफका पीडिकर रिकोट दरज करावे चला
- 11:40–11:41तो गर्व से कही चला
- 11:41–11:43जे हमर बेटा आब यंजीन्यर बहुगे लचे
- 11:43–11:45आप पनजीका रोक्रा दरज करे लचला
- 11:45–11:47बिना कोनो संको चक
- 11:47–11:53उही आदूनिक पोचान के उही पुरान पोठी में दरज करे चलाहा.
- 11:53–11:58आदूनिक अपादी जोला से पंजीक उमोल दाचा नष्ट नहीं बहर.
- 11:58–12:00मुदा एक ते हमरेक ता शंका जी.
- 12:00–12:03आई यी हमरात सत्यमे बहुत उलजन में डाल रहला ची.
- 12:03–12:05कहु की शंका जी.
- 12:05–12:11स्रोथ्त में उलेक आची, जे पन्जिग बहुत रास्खन्ड शिवक पवित्र नाम से शुरूइता ची,
- 12:11–12:15जेना उम रामेश्वर, वासुकि नात, कपीलेश्वर,
- 12:15–12:17जी, इपरम परा आची.
- 12:17–12:21इते एक ता पुर्न रूपन दारमिक आ पवित्र सवरूब भिलना
- 12:21–12:25ता जगन कोनो पोठी एक पवित्र नाम से शुरूँ होई ता ची
- 12:25–12:28आ उही में आचानक से हा इंजिनिर वावकील जका
- 12:28–12:32सानसारिक आदूनिक आ एक दम भोतिक उपादि लिखि देची
- 12:32–12:36तक यह उही पोथिक द्रमिक सवरुप से मेल कहाई ता ची
- 12:36–12:37अग!
- 12:37–12:42अग, बज़ा प्रम्पर एक सोच में पवित्र अस सान्सारिक के उना अलग नहीं करल गयलाची, जेना हम सब आएकाली करेची.
- 12:42–12:45आच्छ, माने सेपरेशन नहीं चल?
- 12:45–12:47वुद स्वबहावेख शंका ची
- 12:47–12:49मुदा एक्रा बुजवाक लेद
- 12:49–12:50हम्रा सब के
- 12:50–12:51उई समएक
- 12:51–12:53मित्लाक मान्सिक्ता के बुजगे पडद
- 12:53–12:55मान्सिक्ता? कोना?
- 12:55–12:57मित्ला पारमपर एक सोच में
- 12:57–12:59पवित्र आस सानसारिक के
- 12:59–13:01उना अलग नहीं करल गयल अची
- 13:01–13:03अग, माने सेपरेशन नहीं चल?
- 13:03–13:06नहीं, जखन पनजी कोनो पवित्र नाम,
- 13:06–13:09जैना वासुकी नात से शुरू होए तची,
- 13:09–13:12तो कर अद्त ची जि वन्शावली की पूरा काज,
- 13:12–13:15समाजक विवस्ता, विवाखनियम,
- 13:15–13:18आप पुर्खाक स्म्रिती के बचाख राखव,
- 13:18–13:21अपुर्खाक स्म्रिती के बचाक राखव,
- 13:21–13:24इस सब स्वयम में एक ता पवित्र आदार में कर्म थेग.
- 13:24–13:28औहो! माने रेकोड राखव सीहु दर्म अची.
- 13:28–13:33बलक्ल! आजकन कोनो वन्शज वकील वा एंजीन्यर बने तची,
- 13:33–13:39तवो एही समाजिक अवन्शावलिक पवित्र विवस्ता सब बाहर नहीं भवजाईत ची.
- 13:39–13:42पनजी कारक दिश्टी मे वो वेक्ती अखनो,
- 13:42–13:48वो ही वासुकिनात, वो रामेश्वर क्हन्दक अंटर्गद आईवाला एक ता नोड अची.
- 13:48–14:18जकर नव समाजिक पहचान अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब �
- 14:18–14:20भीच में के लगत चोर दिल गेल अची
- 14:20–14:22इकी आचे
- 14:22–14:24जी
- 14:24–14:26आप वी बिन्दू वा दोट्स
- 14:26–14:28अखाली जग़ सब बहुत कटकल
- 14:28–14:30रिक्त च्थान
- 14:30–14:32जते पताक नाम गाएब अची
- 14:32–14:34वा गाँँक नाम नाम नहीं आची
- 14:34–14:36एक ता शबदक बार बार प्रयोग भेल आची
- 14:36–14:42अगर तुरन्त बाद विवर नरोन आखवी सुखानी दिष चली जाएत अची
- 14:42–14:46बीच में के वल रिक्त चोड दिल गे लची
- 14:46–14:47इक यह चे
- 14:47–14:51जी, आई रिक्त कुनो त्रूटी वल लापरवाही नहीं थेक
- 14:51–14:57इतिहास कार अ समपादक लेल इदस्तावेजी इमान्दारी केर चरम सीमा थेक
- 14:57–15:00इमान्दारी मने दोक्युमेंट्री अनिस्टी
- 15:00–15:08लिक्त लिखाई च्छती वा उते केवल बिन्दू चोडी देच्छती
- 15:08–15:12तो उई सविकार को रहिल च्छती जे हमरा भुज्हल अच्छी
- 15:12–15:14जे एते कुनो शाखाव वन ना मची
- 15:14–15:17मुदा हमरा लग अकन तोस जानकरी नहीं अची
- 15:17–15:18अच्छ
- 15:18–15:21उकुनो अनुमान लगाकर वजुत गडकर
- 15:21–15:23उही खाली स्थान के नहीं बभरे चथिन
- 15:23–15:25इते क्त पुराना पोटो लबम जका बहल
- 15:25–15:28जिना आख लग एक ता बहुत पुराना पारिवारिक आलबम आची
- 15:28–15:30आख एक दम
- 15:30–15:32उही में सा किचु फृटुक हसी परल आची
- 15:32–15:34मुदा फृटुक जे फ्रेम आचे
- 15:34–15:36उ अखनो उते लावल आची
- 15:36–15:38आजा उही फ्रेम के पहर के नहीं फेखे इची
- 15:38–15:40आँ अक्रा उत्बे रखे ची
- 15:40–15:42इई याद रख बाक लेल
- 15:42–15:44जे एटे किछु चल
- 15:44–15:45जे आब नहीं आची
- 15:45–15:47बआत नी कुपमा आची
- 15:47–15:49मुदा हम एटे तनी असहमत ची
- 15:49–15:52वा कहु जे हमरा एक प्रष्न परशान कर रहल आची
- 15:52–15:54तनी सुचु
- 15:54–15:58जे आदूनिक समें में जे लोग आपन वन सावली खोजी रहल चती
- 15:58–16:02उनका लेल इक हाली स्थान बहुत निराशा जनक नहीं है तनी
- 16:02–16:06वं निराशा जनक तबहास अके तची
- 16:06–16:09मानिल्या हम आपन पर दादाक नाम खोजी रहल ची
- 16:09–16:12अवो ते स्रफ रिक्त लिखाल लगचे
- 16:12–16:19वी एटिहासिक तारकिक्ता वा दोसर साखाक अदार पर अनुमान लगाका एक राईच्छान के बहरभ बेसी उप्योगी नहीं हैत्
- 16:20–16:24जकन हमरा पता जे किचु भोस अकेत अची तो अक्रा बबब कीएक ने चाही
- 16:24–16:26इजिद कीएक जे खाली राखभ
- 16:26–16:29देखो आहा प्रश्नब बहुत व्यबारी कचे
- 16:29–16:33मुदा एक ता इतिहासकार ववन्शावली विषेषक गे किल
- 16:33–16:36अनुमान लगा के स्थान बरव सब सब पहेग पाप थेक
- 16:36–16:37पाप
- 16:37–16:41आँ जा आहा तारकिक तक आदार पर नाम भरी देब
- 16:41–16:45ता आहा एक ता कालपनेक पुर्खा ताड कदेब
- 16:45–16:51कालक्रम में साँ साल बाद लोग उही कालपनेक नाम के सत्तिमानी लेत
- 16:51–16:54ओ, ही ता बयंकर बाद भोजायत?
- 16:54–16:58एक दम, निराशा जनक होई बेक तालग बात अची
- 16:58–17:01मुदा जूट गडभ खतरना कची
- 17:01–17:08इग्त रिक्त स्थान इस्सिद करे तखी जे नाग्राम पन्जी कोनो गब्षप वाकालपने कता नहीं अची.
- 17:08–17:10इएक ता बहिलेक अची?
- 17:10–17:15आप एक ता कथोर अबहिलेक अची, जटे प्रमाँन नही, उते शबद नहीं.
- 17:15–17:20इक शाख़ी जग़, उही पन्जिकारक इमान्दारी गवाईद रहला ची.
- 17:20–17:23आजे सम्पादक चति, जे नगगजिन रधाकृ जी,
- 17:23–17:29उनकर से हो इक वर्टव्य बने तची, जे उही खाली फ्रेम के उईने चोड देथो.
- 17:29–17:32माने सम्पादन में सो चेडचार नेक?
- 17:32–17:36बलकुल नहीं, कोनो अनमान लगा कोही खाली स्थान के बरव
- 17:36–17:40या उक्रा हतादेब इतिहास के संगे चेरचाड ही दैक
- 17:40–17:45इशुन्य वर रिक्त स्थान अपने आप में एक टा एतिहासेख साख्षतेक
- 17:45–17:50इबात सुनक भार नज्री में उही प्राची इन पंजीकारक सम्मान और बड़े लची.
- 17:50–17:51आप उना चाही.
- 17:51–17:53तईहे सबख अर्थ की वेल?
- 17:53–17:57जकन हम नाग्राम पंजीक आई पुरा दिकोडिंग प्रक्रिया के देखाई ची,
- 17:57–18:03ते इी सपष्ट होईता ची, जे इी केवल उपर से नीचा जाईत पारिवारिक व्रिक्ष नहीं थेक.
- 18:03–18:06नहीं, ये एक ता विशाल नेटवर का ची.
- 18:06–18:08जतःी प्रतेक वेक्ती एक ता नोड आची.
- 18:08–18:15जना आन्की, लाल, मदूर्पती, सर्वान रायन, इसब कुनो सादारन नाम नहीं,
- 18:15–18:22इसब जंख्छन चती, और इजंख्छन, गाँ, विवाह, पेशा, और उपादिसे जुडल चतीं.
- 18:22–18:27आ एही लेल स्रोत इस पष्ट करे तजे, जे जगनाहा पनजी पड हू,
- 18:27–18:29तकेवल नाम पर द्यान नहीं दियो.
- 18:29–18:30तफिर
- 18:30–18:34गामक नाम जना कर महाँ, शशीपोर, पिंडारुज, पदवी,
- 18:34–18:38जना ठाकुर, चोद्री, जोतिषी, आ और रिक्त च्थान,
- 18:38–18:42इसम मिलका इस सगन पुरा लेक के दिकोड करओट आईत छी.
- 18:42–18:44इएक ता समाजक स्म्रिती मान्चित्र थेख,
- 18:44–18:47जक्रा बहुत साव्दानी सक्फोल बावष्ष्यक अच्छी.
- 18:47–18:49स्म्रिती मान्चित्र मेमरी माप.
- 18:49–18:52आँ, इजी हमरा सब के बुज्हावाय आची,
- 18:52–18:55जिस्म्रिती कोनो स्तिर वस्तू नहीं आची.
- 18:55–18:59इलोक स्थान अ समेक संगे यात्रा करे तची
- 18:59–19:02आप पनजी उही यात्राग दिशा सुचक देख
- 19:02–19:04इसब सुन्कष इबुज़पाबे तची
- 19:04–19:08जे हमर पहचान, हमर संबंद सा होई तची
- 19:08–19:11हम कते सची, केक्रा से जोडल ची
- 19:11–19:13असमाज मैं हमर की भूमी का आची
- 19:13–19:20इबात आई जितेक प्रासंगी कची, तते सद्यो पहने मित्लाक अ पंजी कार भुजे चला.
- 19:20–19:21एक दम सही बात.
- 19:21–19:23हम सब एक आस्टिट्तो में नहीं आए ची.
- 19:23–19:26हम सब एह विशाल नेट्वर के खिस्सा ची.
- 19:26–19:30और ये हमरा एक तब बहुत रोचक विचार दिस लोज आईता ची
- 19:30–19:33जिक्रा हम स्रोटा सब के लिए चोडे चाहे ची
- 19:33–19:34की विचार अचे
- 19:34–19:38तनी सोचु जे आए हम सब यंटरनेट दिजितल दुईया मैं
- 19:38–19:41अपन देटा, अपन पसंद, अपन फोटो
- 19:41–19:44आपन विचार सजे एक नाव पनजी
- 19:44–19:46जेकर रहाम दिजितल फुट्प्रिंट कहे ची
- 19:46–19:47तेयार करे रहाल ची
- 19:47–19:49आआ, दिजितल फुट्प्रिंट
- 19:49–19:52की ओ, सद्यो बाद के वन्षज के
- 19:52–19:53हमर समाजा कहन
- 19:53–19:56सशक्त आ इमान्दार चित्र दोसकत
- 19:56–19:59जेहन मित्लाक औरिक्त स्थान्वाला पंजी दोर हल अची
- 19:59–20:04वहमर देटा किवल कोनो सर्वर पर एक ता भिख्रल अब्रामग भंडार बनी कर रही जैत
- 20:04–20:06जोकर कोनो मानविय अर्थ नहीं है तेख
- 20:06–20:08इतो सोचने वाला बात अची
- 20:08–20:09एक दम
- 20:09–20:14उही पुरान पंजी कारग के मानदारी हमर आदूनिक डेटा बेस में भेटत की नहीं
- 20:14–20:16एही पर जरुर विचार करव.
- 20:16–20:21आइके रेस गईन्वि वेचना में हमरा सबख संगे बनल रवाकिल बहुत-बहुत द्द्दिवाद
Plain text
मानिलीए, जे कोनो बहुत पुरान इक्टम दूल से भरल संदूक खोलना पर एक्टा प्राचीन जिप-प्फायल बहते या जिप-प्फायल बलको, आ हम कोनो कमपुटर वाला जिप-प्फायला गब नहीं कार रहल चे, बलकी एक्ता एहन प्राचीन दस्तावेज जताई बहुत रास गावक नाम, विवाहक, रेकोड, लोग कप पेशा आप मने जट्टिल समाजिक समबन्द सब के चोट-चोट कोड में संकुचित कोडे लेएल हो. संकुचित, फाज. आईकर इज हमर सब का गाँन चर्चा आचे, इबिलकु एहनी एक ता जिप फाणल पर आचे. हमरा सब लग श्रोता दवारा पट़्ायल किचु बहुत रोचक नोट्स आश्रोत आचे. इी गजद्र ताकुल दोरा संपादित दिकोडिं दपंजी अप मित्फिला वलुम फोर पर अदारे तचे जी, नागराम पंजी पर एक दम सई, आई जान्बाक लेल इश्वोता पट़्ाल गेल अचे जे, नागराम पंजीक इशंद्रचना अखर की कही तही है? बुजलीन, यी केवल पुर्खा सबाक एक ता नीरस वा सीथा सुची नहीं देख यी उही सा बहत पैक चीज अचे ता आव एक रा विस्तार से बूजी जे ए प्राचीन जिप फाट्ल अखर काज कोना करे तचे आईकर भीतर की चिपल अचे दिको, इस जिप फाइलक जे उपमा आचीने अमदा ए स्रोथ पर एक दम सतीक बैसे दची की? लागे दची निप? रिलकुल कोनो से हूँ जिप फाइल के दिकोट कर बाक लेल उक्रा खोल बाक लेल सब से पहली हम्रा सबखके उकर सही सुट्वेर भुजे परत अगर नाग्राम पन्जिक इजे सुट्वेर अचे उकोनो मशीम में नहीं बलकी एकर शब्दावली एकर विष्छ्ट व्याक्रण अएकर भोगोलिक संकेत में चिपल चे मैंने उकर जे आपन भाशा आचे स्रोथ अश्पष्ट करेत अच्छ, जे यी केखर बेटा खेचल तकर रेकोड नहीं आच्छे, बलकी यी समाज एक तुस्रा से की अख्कोना जुडल चल तकर एक ता सबहतागत पुरा लेक आच्छे. सगन सबहतागत पूरा लेक, बाब्रे, यी तो बहुत गंभीर सब्द भेल अमग्रेजी में कही तए एक तक खमप्रस्ट सिविलाईश्टनल आरकाईव थिक अच्छा एक रपभाक लेल भुजेलिय, औही चोट-चोट सबद सब भ्भेबईपरत जे पहल बर दिखाला पर केवल कोनो नाम जकल आगत छी मुदा असल में उपुरा कपूरा समाजिक देटा बेस के अपस में जोडी रहा ला ची तद तही इज शुरूत में किछ कोड शब्द चैए पहले उख्रा भुजवा कोसिष करी ची कि एक ता इस सत्ते में बहुत चकित करे ला ची. आउ देखे ची. जगन पन्जी कारा कोनु नाम लिखे चला, तो उसीदे-सीदे पन्नापर नाम नहीं उतारिद दे चला. उो किछ कीवर्द या माने कोड़क परे चला. जैना सुत वा सुतो लिखे ची. यकर आथता स्पष्ट जी जे एकर माने भेल बेतावा वन्चज फिर एक ता शबदची आपर वा आप्रा और एक ता प्रा आची इस भत बोज्वा में आभी रहे ले जे प्राव माने वैकल पिक नाम जेना मानी लिया कुनो रजिस्टर में कुनो व्यक्तिक नाम बबनू आची मुदा समाज में लोग हुनका तेकना रहन कहता ची ता पंजी कार उक्रा प्र लगा का जोडी देता एक दम यी तो एक ता ब्यवाबहरिक बाद भेल मुदा इजे अपर्वाला बाता ची तनी विस्तार से बुजायब जे इखुना काज करे चला इकी संक्यद दर रहले ची ता अव एक रा एक ता वेबारे एक स्तिती सबुजायची एं मानी लिया जे पनजी कार एक ता परिवारक लिख्वार लिख्वार जतिन आओ मुल गाच सं अलग आपने क्यटा पहचान बना रहला ची आब पनजिकार कोना बताव ता जे एक ते सं एक ता नाव शाखा शुरुभ हर रहला ची उसीदे एक ता नाव पनना नहीं जोडी देता तो उकी करता? उब लिखता हा आपर इआ पर जे आजे आजे ओब पडनिहारक लेल एक ता सीथा इशारा आजे, जे एते सहम मोल गाचक एक ता दूसर दाडी भिस गूमे रहल ची. ओओ, उआज, नव दाडी. आजे, एक रा हम सब रिलेशनल मारकर्स कही सकही ची, जे संबन दख दिशा तैकरे तची. इक दम मुदा जगन आहा इ आपर वासुत जगका शब्द का अर्थ बुजीजाए ची तई भीड एक ता सु विवस्तित नेट्वोक कर रूप लेवाई लगाई तची जते प्रतेक विक्ती आपन सही जगः पर स्थापी तची बिल्कुल सही ये तब हेल व्यक्तिक अस्तर प्रक रग बात मुदव ये तई एक ता बात जे हमरा खटक लग आजी हमरा बूजलिये शौँँ सो भेसी आश्चर मे डल लग औव छी पंजी में स्थानक नाम वा गाँक नामक प्रियोग बहुगलिक संकेत स्रोथ पडला पर एक ता रूट फर्मूला वार रास्ताक सुत्र भेटे तची जिना लिख हल ची संदेपृषं सिंग्वार वा संदेपृषं शशीपृर थी पहने हम्रा लागल जे यी सीथा सीथा पलायन वा माइग्रेशन कर बात कोरावल जी जे ना मने कुनो परिवार संदेपृर सवुधल आसिंवार में जाक गर बना के बैसगेला मुदस्रोत स्पष्ट कोरे तची जे एकेवल भूगलक गप नहीं कि एई भूगलिक पलाये नहीं थेक नहीं, एकेवल पलाये नहीं गप नहीं भूरहो लगछी इए उही सा बहुत भेसी आची पनजी कार जखन एक गाम सा दोसर गाम लिख है च्छतीन तो उकर अर्थ केवल एई नहीं आची जे आपन भोर्या बिस्तर बान के दोसर ठाम चलिगे ला तो फिर की आची? उकर अर्थ उपत्ती बहुसके तची मुदा संगे संग, उकर अर्थ विवास संबन्द, नव शाखाक विस्तार, वा कोनो नव सामाजिक मानिता से हो भहुसकेत अची. मने गाँक नाम एक टाकोड अची. एक दम. गामजना, करमहा, सरी सब, पाली, शषीपृ। इसब केवल माड्टी अप पानीवला भगोलिक स्थान मात्र नहीं चती इसब सामाजिक निर्देशांक वा सोचल कोडिनेट चती रूको रूको, इक रातनी और सपष्ट करू, इस सामाजिक निर्देशांक कोना बहुल? देखु, जिना जखन आवंकी अलाल से भूगग, शाखा ननू अ गंगेश दरी पहुचे तची, तपनजा उक्रा कर्महा गाम से जोडे तची. रही, स्रोट मेहे ची बात. एकर एई अर्थ नही, जो सब कर्महा में जन्म लेलेनी, वा कर्महा में रहित चला. इबतार होल चत, जे एही दूटा परिवारक भीच जे समबन्दक पुल आची उ करमहा के माद्धिम सा आची मने कुनो कनेक्षन आची होते से हाँ, होई ते जे कुनो महत्पृर विवाहोते भेल हो वा उही गाम कोनो विषेश साखासा इपर्वार समाजिक रूप से जोडल हो तगाम का नाम एते एक ता समबन दख मुहर बनी जाईत छी बाप रे, हम एक रा आदूनिक दुन्या से जोडी के देके थी जकन हम सव फीजबुक वा अईँच्टाग्राम पे अपना, अग, रिलेशन्ट्टेट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्� अनेक अलग अलग शाखा मे आवद च्या उगब पालग शाखा मे से हो का महां बच्चा के शाखा मे से हो कर महां तक की इपडनी हारक लेल, वा स्वयम पंजी करक लेल बारी ब्रम पेडा नहीं करतेते उसव एक रह कोनो सपष्ट रह किच चला दिखु इब्रम तक्हन होईता ची जक्हन हम सब पनजी के उप्रस नीचा जाएत एक त़ सीदा गाज जका दिखे ची सीदा गाज अग मने, फैमली त्री मुदद पनजी कार एक राख खोल सीदा गाज जका नहीं बलकी एक ता विशाल जाल वा नेट्वोग जका देखे चला नेट्वोग अच्छा जखन कर्महा बार बार बार अलग गल शाखा में आवात अच्छे तेकर अद्ठ छी जे उ गाँँ अनेक परिवारक लेल वा अनेक पुष्द्दरी विवा वा सम्बन्दक एक ता पेग केंद्रवा हब च्यल हब च्यल आब उजलो राई पनजीकार बुजे च्यला है जे कोनो व्यक्ती के किवल उकर पिता के नाम से नहीं बलकी उकर गाँवक नेट्वर्क से भी चिन्हल जाई तची इएक ता दीटी मैप जगा चे, जटे कर्म हा अनेक लाईन के आपस में जुडी रहल आचे. औह, ता अर्थ इब हैल जे गाँ आशाखाक सन्रचना भूजला सं इए असपपस्ट होई तची, जे पनजी केवल रक्त संबंद वा दीने दरी सीमित नहीं चल. इक्दम नही! इस समाजक प्रत्स्टा समबन्द आब बदलित समें की सोह लेकोड करेच्छल आई हम्रा सबके उई विशे दिस लोगाई तची जे हम्रा लागे तची एस रोत में सब सब भेसी अचंबित करेवाला बात ची कोन बात? जी विग्यान्सा आगा कगब आप, पेशा अ उपादिवाल अबात इग्दम, पनजी में जे उपादि अबूमिका सबक वरनन अची, उआदबूत अची हमरा लागल चल जे वन्शावली में किवनल नाम हे तै, यह ते ते लोकक पेशा आहुंकर विद्वाता सिव हो दर्ज आची. जखनम गिर्दारिक शाक्ठ देखे ची, तो उते एक ता नाम भेटे था ची कवी सुकानी, या फिर शषीपृ पिंदारुच शाक्ठ में जोतिषी बज्कुन, इसब की यह चे? पज्जिकार जखन कुनो व्यक्तिक नाम से पहले कवी लिख़े च्छती तो और असल मे उज़्िक समाजिक प्रमाण के उजिप फाटल मे दरज करहल च्छती अच्छा, सोषल प्रूएद. बलकुल. पज्जिकार एब दावे च्छती, च्छती, च्छती, अच्छा, सोचल प्रूव. बिलकुल पनजीकार इबतावे चाहे चाहे चाइच्छती चे इपरिवार केवल अपन वन्शावली वापन गाम से नहीं बलकी अपन विद्वत्टा अब बोद्धिक शमता कलेल सहो समाज में चिनहल जाएच्छल इए उही व्यक्तिक समाजिक पूंजी चल. मुदा जे बात हमरा सब से बेसी चांका दे लक उई आची जे एहे में केवल कवी वा जोतिषी जका प्राचीन पद्वी नहीं आची बलकी आदूनिक पेशा सबक सहो समावेश अचे. आई ये बहुत दिल चास्पाची जिन नागेश्वरक शाखामे वकील रही कान्तक उलेक है कोनो दोसर जग अगनेर अदोक्तर को सहो उलेक है आश़शी पृ सुर्वना ताकृ शाखामे त कान्त नाम्वाला वन्शच के इक ता पाएक समूह थे जेना मदन कान्त, रमा कान्त, जीव कान्त, आजे कान्त एक दम इस आद माम सुनिक लागता ची जेना हम कोनो आदूनिक युख के उपस्तिती देखिर रहा जी हमरा ता इ प्राचीन वन्शावलिक के संगजोडग लेक्ता प्राचीन लिंक्दिन प्रोफाईल जगा लगता शी जब लोक आपन मावनाव पेशा लिखिरहल चातिन एक दम सही इप पंजी कार सब इए आदूनिक उपादिक के कोना जोडी ले ले लिन? लिंक्दिन प्रोफाईल वाथ यह ते बहुत सतिक बआट हता ची अप्ट्ट्ट करेत अची जे पनजी कोनो पातर पर लिखल गेल एहन शिला लेक नहीं आची जे एक बर लिखल गेल अब बन बगगेल तए इखी आची इए ता जीवित दस्तावेज खेख लिविंग डोक्युमेंट जगन समाज में परिवर्तन भिलल जगन लोक ट्रिष्छनल विद्वत्ता चोडि का आदूनिक शिक्षा ग्रान करे लगला कल कता वा पतना जाक वकिला अंजिन्यर बनाई लगला तप पनजी कर उही आदूनिक उपादि के साहो अपनें पारमपरिक धाचा मे समाहित कर लेनिन जगन सब हाई चल अप परिवार के लोक अपन नफका पीडिकर रिकोट दरज करावे चला तो गर्व से कही चला जे हमर बेटा आब यंजीन्यर बहुगे लचे आप पनजीका रोक्रा दरज करे लचला बिना कोनो संको चक उही आदूनिक पोचान के उही पुरान पोठी में दरज करे चलाहा. आदूनिक अपादी जोला से पंजीक उमोल दाचा नष्ट नहीं बहर. मुदा एक ते हमरेक ता शंका जी. आई यी हमरात सत्यमे बहुत उलजन में डाल रहला ची. कहु की शंका जी. स्रोथ्त में उलेक आची, जे पन्जिग बहुत रास्खन्ड शिवक पवित्र नाम से शुरूइता ची, जेना उम रामेश्वर, वासुकि नात, कपीलेश्वर, जी, इपरम परा आची. इते एक ता पुर्न रूपन दारमिक आ पवित्र सवरूब भिलना ता जगन कोनो पोठी एक पवित्र नाम से शुरूँ होई ता ची आ उही में आचानक से हा इंजिनिर वावकील जका सानसारिक आदूनिक आ एक दम भोतिक उपादि लिखि देची तक यह उही पोथिक द्रमिक सवरुप से मेल कहाई ता ची अग! अग, बज़ा प्रम्पर एक सोच में पवित्र अस सान्सारिक के उना अलग नहीं करल गयलाची, जेना हम सब आएकाली करेची. आच्छ, माने सेपरेशन नहीं चल? वुद स्वबहावेख शंका ची मुदा एक्रा बुजवाक लेद हम्रा सब के उई समएक मित्लाक मान्सिक्ता के बुजगे पडद मान्सिक्ता? कोना? मित्ला पारमपर एक सोच में पवित्र आस सानसारिक के उना अलग नहीं करल गयल अची अग, माने सेपरेशन नहीं चल? नहीं, जखन पनजी कोनो पवित्र नाम, जैना वासुकी नात से शुरू होए तची, तो कर अद्त ची जि वन्शावली की पूरा काज, समाजक विवस्ता, विवाखनियम, आप पुर्खाक स्म्रिती के बचाख राखव, अपुर्खाक स्म्रिती के बचाक राखव, इस सब स्वयम में एक ता पवित्र आदार में कर्म थेग. औहो! माने रेकोड राखव सीहु दर्म अची. बलक्ल! आजकन कोनो वन्शज वकील वा एंजीन्यर बने तची, तवो एही समाजिक अवन्शावलिक पवित्र विवस्ता सब बाहर नहीं भवजाईत ची. पनजी कारक दिश्टी मे वो वेक्ती अखनो, वो ही वासुकिनात, वो रामेश्वर क्हन्दक अंटर्गद आईवाला एक ता नोड अची. जकर नव समाजिक पहचान अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब अब � भीच में के लगत चोर दिल गेल अची इकी आचे जी आप वी बिन्दू वा दोट्स अखाली जग़ सब बहुत कटकल रिक्त च्थान जते पताक नाम गाएब अची वा गाँँक नाम नाम नहीं आची एक ता शबदक बार बार प्रयोग भेल आची अगर तुरन्त बाद विवर नरोन आखवी सुखानी दिष चली जाएत अची बीच में के वल रिक्त चोड दिल गे लची इक यह चे जी, आई रिक्त कुनो त्रूटी वल लापरवाही नहीं थेक इतिहास कार अ समपादक लेल इदस्तावेजी इमान्दारी केर चरम सीमा थेक इमान्दारी मने दोक्युमेंट्री अनिस्टी लिक्त लिखाई च्छती वा उते केवल बिन्दू चोडी देच्छती तो उई सविकार को रहिल च्छती जे हमरा भुज्हल अच्छी जे एते कुनो शाखाव वन ना मची मुदा हमरा लग अकन तोस जानकरी नहीं अची अच्छ उकुनो अनुमान लगाकर वजुत गडकर उही खाली स्थान के नहीं बभरे चथिन इते क्त पुराना पोटो लबम जका बहल जिना आख लग एक ता बहुत पुराना पारिवारिक आलबम आची आख एक दम उही में सा किचु फृटुक हसी परल आची मुदा फृटुक जे फ्रेम आचे उ अखनो उते लावल आची आजा उही फ्रेम के पहर के नहीं फेखे इची आँ अक्रा उत्बे रखे ची इई याद रख बाक लेल जे एटे किछु चल जे आब नहीं आची बआत नी कुपमा आची मुदा हम एटे तनी असहमत ची वा कहु जे हमरा एक प्रष्न परशान कर रहल आची तनी सुचु जे आदूनिक समें में जे लोग आपन वन सावली खोजी रहल चती उनका लेल इक हाली स्थान बहुत निराशा जनक नहीं है तनी वं निराशा जनक तबहास अके तची मानिल्या हम आपन पर दादाक नाम खोजी रहल ची अवो ते स्रफ रिक्त लिखाल लगचे वी एटिहासिक तारकिक्ता वा दोसर साखाक अदार पर अनुमान लगाका एक राईच्छान के बहरभ बेसी उप्योगी नहीं हैत् जकन हमरा पता जे किचु भोस अकेत अची तो अक्रा बबब कीएक ने चाही इजिद कीएक जे खाली राखभ देखो आहा प्रश्नब बहुत व्यबारी कचे मुदा एक ता इतिहासकार ववन्शावली विषेषक गे किल अनुमान लगा के स्थान बरव सब सब पहेग पाप थेक पाप आँ जा आहा तारकिक तक आदार पर नाम भरी देब ता आहा एक ता कालपनेक पुर्खा ताड कदेब कालक्रम में साँ साल बाद लोग उही कालपनेक नाम के सत्तिमानी लेत ओ, ही ता बयंकर बाद भोजायत? एक दम, निराशा जनक होई बेक तालग बात अची मुदा जूट गडभ खतरना कची इग्त रिक्त स्थान इस्सिद करे तखी जे नाग्राम पन्जी कोनो गब्षप वाकालपने कता नहीं अची. इएक ता बहिलेक अची? आप एक ता कथोर अबहिलेक अची, जटे प्रमाँन नही, उते शबद नहीं. इक शाख़ी जग़, उही पन्जिकारक इमान्दारी गवाईद रहला ची. आजे सम्पादक चति, जे नगगजिन रधाकृ जी, उनकर से हो इक वर्टव्य बने तची, जे उही खाली फ्रेम के उईने चोड देथो. माने सम्पादन में सो चेडचार नेक? बलकुल नहीं, कोनो अनमान लगा कोही खाली स्थान के बरव या उक्रा हतादेब इतिहास के संगे चेरचाड ही दैक इशुन्य वर रिक्त स्थान अपने आप में एक टा एतिहासेख साख्षतेक इबात सुनक भार नज्री में उही प्राची इन पंजीकारक सम्मान और बड़े लची. आप उना चाही. तईहे सबख अर्थ की वेल? जकन हम नाग्राम पंजीक आई पुरा दिकोडिंग प्रक्रिया के देखाई ची, ते इी सपष्ट होईता ची, जे इी केवल उपर से नीचा जाईत पारिवारिक व्रिक्ष नहीं थेक. नहीं, ये एक ता विशाल नेटवर का ची. जतःी प्रतेक वेक्ती एक ता नोड आची. जना आन्की, लाल, मदूर्पती, सर्वान रायन, इसब कुनो सादारन नाम नहीं, इसब जंख्छन चती, और इजंख्छन, गाँ, विवाह, पेशा, और उपादिसे जुडल चतीं. आ एही लेल स्रोत इस पष्ट करे तजे, जे जगनाहा पनजी पड हू, तकेवल नाम पर द्यान नहीं दियो. तफिर गामक नाम जना कर महाँ, शशीपोर, पिंडारुज, पदवी, जना ठाकुर, चोद्री, जोतिषी, आ और रिक्त च्थान, इसम मिलका इस सगन पुरा लेक के दिकोड करओट आईत छी. इएक ता समाजक स्म्रिती मान्चित्र थेख, जक्रा बहुत साव्दानी सक्फोल बावष्ष्यक अच्छी. स्म्रिती मान्चित्र मेमरी माप. आँ, इजी हमरा सब के बुज्हावाय आची, जिस्म्रिती कोनो स्तिर वस्तू नहीं आची. इलोक स्थान अ समेक संगे यात्रा करे तची आप पनजी उही यात्राग दिशा सुचक देख इसब सुन्कष इबुज़पाबे तची जे हमर पहचान, हमर संबंद सा होई तची हम कते सची, केक्रा से जोडल ची असमाज मैं हमर की भूमी का आची इबात आई जितेक प्रासंगी कची, तते सद्यो पहने मित्लाक अ पंजी कार भुजे चला. एक दम सही बात. हम सब एक आस्टिट्तो में नहीं आए ची. हम सब एह विशाल नेट्वर के खिस्सा ची. और ये हमरा एक तब बहुत रोचक विचार दिस लोज आईता ची जिक्रा हम स्रोटा सब के लिए चोडे चाहे ची की विचार अचे तनी सोचु जे आए हम सब यंटरनेट दिजितल दुईया मैं अपन देटा, अपन पसंद, अपन फोटो आपन विचार सजे एक नाव पनजी जेकर रहाम दिजितल फुट्प्रिंट कहे ची तेयार करे रहाल ची आआ, दिजितल फुट्प्रिंट की ओ, सद्यो बाद के वन्षज के हमर समाजा कहन सशक्त आ इमान्दार चित्र दोसकत जेहन मित्लाक औरिक्त स्थान्वाला पंजी दोर हल अची वहमर देटा किवल कोनो सर्वर पर एक ता भिख्रल अब्रामग भंडार बनी कर रही जैत जोकर कोनो मानविय अर्थ नहीं है तेख इतो सोचने वाला बात अची एक दम उही पुरान पंजी कारग के मानदारी हमर आदूनिक डेटा बेस में भेटत की नहीं एही पर जरुर विचार करव. आइके रेस गईन्वि वेचना में हमरा सबख संगे बनल रवाकिल बहुत-बहुत द्द्दिवाद