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दूषण_पञ्जीक_अपमान_सँ_इतिहास_धरि.m4a
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- 0:00–0:04आई हम सब गजेंद्र ताकूर जीक उही काज पर गप कर हल ची,
- 0:04–0:08जे मित्लाक दूषन पनजीक कलंकित मानल जाए वाला अविलेक के,
- 0:08–0:13आदूनिक अपमानक बदला समाजिक इतिहासक रुप में स्थापित करेएच।
- 0:13–0:18पोथिक शक्तिशाली नेटिक दाचा अपन प्रभाव गमा सकत अच्छे,
- 0:18–0:23कि एक ता एकर पुनरा व्रित्ती प्राया सब अद्ध्याय में भेल अच्छी.
- 0:23–0:29आप वाणे हम इदेखल हु जे शुर्वात में इब रुद नीक संकाच करे तची.
- 0:29–0:36एक दम देख हु जे अद्द्याय दू अतीन अची उही में इब बहुत नीक सा अस्थापित कैल गे लगछी
- 0:36–0:43जे दूशन पंजीक शब्दावली जेना चर्म कारेनी, रजक, यवनी वा अग्यात
- 0:43–0:47इसब के गारी या अपमानक रूप में प्रेयोग नहीं कैल जाए.
- 0:47–0:50जे की बहुत आवश्वक सो हो आची बुजावे लेल.
- 0:50–0:52रहाँ, मुदा कमी इएची,
- 0:52–0:55जे अद्द्याए दस एग्डारा सलोके,
- 0:55–0:58पन्द्राद हरी सो बारा-बारा,
- 0:58–1:02एही नैतिक नियमक विस्त्रत उप्टेश दोरा एडी लची.
- 1:02–1:06इत पात्ख लेल थोड़भा भोजिल बोजात
- 1:06–1:07बलक्ल
- 1:07–1:10एह सपोथिक जगती अची अ भादित होगी तची
- 1:10–1:14अ पात्ख मूल अतिहासिक विष्लेशन सा बभटकी जाईत ची
- 1:14–1:17इब बहत इस पष्ट रूप सा राखल गेल अची
- 1:17–1:23मुदद, अगर बार बार देलगेल चेतावनी पात्खके मुल प्रवाखके नहीं रोकी रहल अची.
- 1:23–1:25एक दम रोकी रहल अची.
- 1:25–1:32इटो उहना भेल, जे कोनो एतिहासिक नाटक में सुत्रदार बार-बार मंच्पर आबिका,
- 1:32–1:36दर्षक के कहै, जे इप मात्र नाटक छेग, एक रा सत्ते नहीं मानव.
- 1:36–1:40बाप्रे, इई बहुत नीक उप्मा देल। वहां,
- 1:40–1:43सही में इपात्कग के इरिटेट काउसके तची,
- 1:55–1:59अगर बाद के अद्याय सब में एकर विस्त्रत व्याख्या करबाक बदला
- 1:59–2:01मात्र संख्षिप्त सांके तिक संदर्भ दी
- 2:01–2:04माने, बस एक ता हिंट दाका अगु बड़ी जाए
- 2:04–2:07आप, सीदे अटिहासिक विष्लेशन पर आबू
- 2:07–2:11माने, बस एक ता हेंट दाका आगु बड़ी जाए.
- 2:11–2:14आँ, सीदे अतिहासेक विष्लेशन पर आबू.
- 2:14–2:17कोनो तोस उदाहरन आहा कद्यान में आची एकर लेल?
- 2:17–2:18आ, बलकुल.
- 2:18–2:24उदाहरन के लेल अद्याय तेरा में चर्म कारिनी वा रजक का चर्चा करेत काल,
- 2:24–2:54इप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
- 2:54–2:55बहुत आमुर्त बजायत अची
- 2:55–2:57आप इत फमु मार्क केने चल हो
- 2:57–2:59इबहुत उज्रायल लागल
- 2:59–3:02दिहू, एकर कमी इए ची
- 3:02–3:04जे अद्द्याय साथ सुद्दस दरी
- 3:04–3:07गोत्र, मूल-मूल ग्राम, भीज्पूरुष,
- 3:07–3:12सुता अ उतेर जैस का कतिन पारिभाशिक सब्दक सद्धान्तिक चर्चा भेर अची
- 3:12–3:16जे अपने आप में बहुत कलिष्ट सब्द सब अची
- 3:16–3:22आप, मुदा सन्तानवे दूसन उदहरन में सा कोनो पुरन केस अताय न नहीं दिखाल गे लची
- 3:22–3:52जहाह सैं पात्खके भूजबा में काथिने भासके तची जे नियम सब वास्थविक पनजिक कोनो एक ता पाडी में, कोना काज करे तची तेने, बलकु, हम भूजी सके ची, जे है ता की कर चाह ची, मुदा हमरा लगाई तची, जे की हम सभ एविचार के लो हू, जे आमुरत �
- 3:52–3:56अदाईसा पातख के दिखाओ जे कोना इसब्त पुर्जा एक संगे जुड़ेईत आचे
- 3:56–3:59मुदा इक करम कोना कोना उदाईरना ची आलग
- 3:59–4:03तोस उदाईरना क लेल अद्दिया प्रजा पुर्जा एक संगे जुडईत आचे
- 4:03–4:11तुरन्त बाद एक ता विष्छ्ट अप्वन दूसन उदाहरन मने के स्टडी राखू, जाहिसा सिद्दान्त तुरन्त स्पष्ट बहुसके.
- 4:11–4:16जाहिसा पाथक के दिखाओ जे कोना इस सब त पुर्जा एक संगे जुड़ेईता चे.
- 4:16–4:46अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ�
- 4:46–4:52अपने बाद्ट्र अची यी मात्रिक मारग अची अई प्रवासक सुचक अची
- 4:52–4:57एहे सा भोगोल कोना वन्शावली बनेट अची यी गप एक दम में सपष्ट बजाएत
- 4:57–5:03यी केवल एक तारीका अची, आहा आन उदाहरन से हो प्रईोग कर सके ची
- 5:03–5:05मुदा इस पष्ट्तानत
- 5:05–5:09अब हम एक ता और गंभीर विशे दिस आहक द्यान लेवाई चाहप
- 5:09–5:11जे पोतिक तोन से जुडल अचे
- 5:11–5:12आप, कहोना
- 5:12–5:15अभी लेखख बचाव करबाग किच रक्षात्मक स्वर
- 5:15–5:18उही मुख्य अइ तिहासे कुज के कमजोर कारे है लची
- 5:18–5:22जाही में महीला आहाश्यक समाजिक सकती उजागर भेल आचे.
- 5:22–5:25माने ई आखतेसर बिन्दू आचे?
- 5:25–5:26आ, बलकुल.
- 5:26–5:28एकर पैग कमी ई आची,
- 5:28–5:31जे लेक्ख बारभारी सिद्खरबाक प्रयास करेत शती,
- 5:31–5:33जे पनजी प्रनाली मूल्रुप में
- 5:33–5:36अब आद में पन्जी कारग कारने विक्रिद भेल
- 5:36–5:39जे की एक ता बहुत द्फेंसेव अप्रोच अची
- 5:39–5:43एक दम एक रक्षात्मक स्वर उही मुल बाद से द्यान अची
- 5:43–5:47जे या भी लेक अनजाने में महिला सब का अतथा कतित अग्यात लोकक
- 5:47–5:51अपन बज़्ाँ बद्यागु बद्ये बैइत खी हैत,
- 5:51–5:55जे हम सब एक ता अलक द्ष्टिकोन सा देखी,
- 5:55–6:00की इख्त्रा नहीं अची, जे हरिसिंग देवक विवस्ताग बचाव करवाक चकर में,
- 6:00–6:04हम सब उही महिला सब का गबके गोन करालची,
- 6:04–6:34अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्ज
- 6:34–6:37बल की मान्विय सम्मडक विजेए को रूप में प्रस्तूत करूँ
- 6:37–6:40जेना समाजक नियम तुटे चल
- 6:40–6:43आलोक अपना हिसाप सा सम्मन्द पन्वाई चलाहा
- 6:43–6:52अईकर लेल जे तोस उदाहरन अची औची दोलती जहां चामःो यवनी वाहादिनी रुद्रमतीक संदर्व में
- 6:52–6:54और ही में की बदलाव के लिए जासके अची
- 6:54–6:59एता ही लिखवाक बदला जे ईप्रनाली कठोर ताक शिकार चली है
- 6:59–7:02अहा एे लिखूँ जे एह उ एतिहासिक महला सब छतिन
- 7:02–7:05जे मित्लाक वन्शावली कठोर नियम के तोडी
- 7:05–7:09कर एतिहास में अपन उपस्तिती दर्ज कराओलीन
- 7:09–7:13बाप्रे इता पुरा नेरेटिव के एंपावर कोधेत
- 7:13–7:16अग्यात शब्दक बारे में की कहवा है
- 7:16–7:28अग्यात के केवल रेकोट के कमी नहीं मानी क, समाजिक सीमारे कहापार करबाक सहसिक प्रमाड करूप में लिखूँ, इई एही पोठिक सब साप्टाकत बनी सकेत अची.
- 7:28–7:31इई बहत शान्दार अंटर द्रिष्टी अची.
- 7:31–7:39ता न्दिन के चर्चा मे हम सब तीन्ता मुख्या बात पर गोर किल हूं
- 7:39–7:46पहिल य जे नेटिक चितावनी सब के एक ठाम एकठ्रित का का पुन्राव्रुत्ती कम करव
- 7:46–7:48जाए सा फ्लो बनल रहे
- 7:48–7:52आदो सर जे आमुर्त व्याकरन के स्पष्ट करवा कले
- 7:52–7:57अद्याय सात, वानु में एक ठाट तोस के स्टडी प्रस्तूत करब
- 7:57–8:03अद्ते सर सब समहत्व पून जे अभिलेक्ख कब चाव करबाक बदला
- 8:03–8:08महिला आन्य वर्गक अटिहासिक उपस्तिती के आवर सशक्त स्वर में प्रस्तूत करब
- 8:08–8:09दिलकुल
- 8:09–8:15आहाई यी सब सुदार काका अपन समागरी फिर सा हम्रा सब के लगपठाव.
- 8:15–8:21हम सब आहाक एही उतक्रिष्ट काज कदोसर समिक्षा करवामे बहुत प्रसन्नता अनुबहव करव.
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आई हम सब गजेंद्र ताकूर जीक उही काज पर गप कर हल ची, जे मित्लाक दूषन पनजीक कलंकित मानल जाए वाला अविलेक के, आदूनिक अपमानक बदला समाजिक इतिहासक रुप में स्थापित करेएच। पोथिक शक्तिशाली नेटिक दाचा अपन प्रभाव गमा सकत अच्छे, कि एक ता एकर पुनरा व्रित्ती प्राया सब अद्ध्याय में भेल अच्छी. आप वाणे हम इदेखल हु जे शुर्वात में इब रुद नीक संकाच करे तची. एक दम देख हु जे अद्द्याय दू अतीन अची उही में इब बहुत नीक सा अस्थापित कैल गे लगछी जे दूशन पंजीक शब्दावली जेना चर्म कारेनी, रजक, यवनी वा अग्यात इसब के गारी या अपमानक रूप में प्रेयोग नहीं कैल जाए. जे की बहुत आवश्वक सो हो आची बुजावे लेल. रहाँ, मुदा कमी इएची, जे अद्द्याए दस एग्डारा सलोके, पन्द्राद हरी सो बारा-बारा, एही नैतिक नियमक विस्त्रत उप्टेश दोरा एडी लची. इत पात्ख लेल थोड़भा भोजिल बोजात बलक्ल एह सपोथिक जगती अची अ भादित होगी तची अ पात्ख मूल अतिहासिक विष्लेशन सा बभटकी जाईत ची इब बहत इस पष्ट रूप सा राखल गेल अची मुदद, अगर बार बार देलगेल चेतावनी पात्खके मुल प्रवाखके नहीं रोकी रहल अची. एक दम रोकी रहल अची. इटो उहना भेल, जे कोनो एतिहासिक नाटक में सुत्रदार बार-बार मंच्पर आबिका, दर्षक के कहै, जे इप मात्र नाटक छेग, एक रा सत्ते नहीं मानव. बाप्रे, इई बहुत नीक उप्मा देल। वहां, सही में इपात्कग के इरिटेट काउसके तची, अगर बाद के अद्याय सब में एकर विस्त्रत व्याख्या करबाक बदला मात्र संख्षिप्त सांके तिक संदर्भ दी माने, बस एक ता हिंट दाका अगु बड़ी जाए आप, सीदे अटिहासिक विष्लेशन पर आबू माने, बस एक ता हेंट दाका आगु बड़ी जाए. आँ, सीदे अतिहासेक विष्लेशन पर आबू. कोनो तोस उदाहरन आहा कद्यान में आची एकर लेल? आ, बलकुल. उदाहरन के लेल अद्याय तेरा में चर्म कारिनी वा रजक का चर्चा करेत काल, इप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � बहुत आमुर्त बजायत अची आप इत फमु मार्क केने चल हो इबहुत उज्रायल लागल दिहू, एकर कमी इए ची जे अद्द्याय साथ सुद्दस दरी गोत्र, मूल-मूल ग्राम, भीज्पूरुष, सुता अ उतेर जैस का कतिन पारिभाशिक सब्दक सद्धान्तिक चर्चा भेर अची जे अपने आप में बहुत कलिष्ट सब्द सब अची आप, मुदा सन्तानवे दूसन उदहरन में सा कोनो पुरन केस अताय न नहीं दिखाल गे लची जहाह सैं पात्खके भूजबा में काथिने भासके तची जे नियम सब वास्थविक पनजिक कोनो एक ता पाडी में, कोना काज करे तची तेने, बलकु, हम भूजी सके ची, जे है ता की कर चाह ची, मुदा हमरा लगाई तची, जे की हम सभ एविचार के लो हू, जे आमुरत � अदाईसा पातख के दिखाओ जे कोना इसब्त पुर्जा एक संगे जुड़ेईत आचे मुदा इक करम कोना कोना उदाईरना ची आलग तोस उदाईरना क लेल अद्दिया प्रजा पुर्जा एक संगे जुडईत आचे तुरन्त बाद एक ता विष्छ्ट अप्वन दूसन उदाहरन मने के स्टडी राखू, जाहिसा सिद्दान्त तुरन्त स्पष्ट बहुसके. जाहिसा पाथक के दिखाओ जे कोना इस सब त पुर्जा एक संगे जुड़ेईता चे. अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अग, अ� अपने बाद्ट्र अची यी मात्रिक मारग अची अई प्रवासक सुचक अची एहे सा भोगोल कोना वन्शावली बनेट अची यी गप एक दम में सपष्ट बजाएत यी केवल एक तारीका अची, आहा आन उदाहरन से हो प्रईोग कर सके ची मुदा इस पष्ट्तानत अब हम एक ता और गंभीर विशे दिस आहक द्यान लेवाई चाहप जे पोतिक तोन से जुडल अचे आप, कहोना अभी लेखख बचाव करबाग किच रक्षात्मक स्वर उही मुख्य अइ तिहासे कुज के कमजोर कारे है लची जाही में महीला आहाश्यक समाजिक सकती उजागर भेल आचे. माने ई आखतेसर बिन्दू आचे? आ, बलकुल. एकर पैग कमी ई आची, जे लेक्ख बारभारी सिद्खरबाक प्रयास करेत शती, जे पनजी प्रनाली मूल्रुप में अब आद में पन्जी कारग कारने विक्रिद भेल जे की एक ता बहुत द्फेंसेव अप्रोच अची एक दम एक रक्षात्मक स्वर उही मुल बाद से द्यान अची जे या भी लेक अनजाने में महिला सब का अतथा कतित अग्यात लोकक अपन बज़्ाँ बद्यागु बद्ये बैइत खी हैत, जे हम सब एक ता अलक द्ष्टिकोन सा देखी, की इख्त्रा नहीं अची, जे हरिसिंग देवक विवस्ताग बचाव करवाक चकर में, हम सब उही महिला सब का गबके गोन करालची, अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्जिक जे अपन्ज बल की मान्विय सम्मडक विजेए को रूप में प्रस्तूत करूँ जेना समाजक नियम तुटे चल आलोक अपना हिसाप सा सम्मन्द पन्वाई चलाहा अईकर लेल जे तोस उदाहरन अची औची दोलती जहां चामःो यवनी वाहादिनी रुद्रमतीक संदर्व में और ही में की बदलाव के लिए जासके अची एता ही लिखवाक बदला जे ईप्रनाली कठोर ताक शिकार चली है अहा एे लिखूँ जे एह उ एतिहासिक महला सब छतिन जे मित्लाक वन्शावली कठोर नियम के तोडी कर एतिहास में अपन उपस्तिती दर्ज कराओलीन बाप्रे इता पुरा नेरेटिव के एंपावर कोधेत अग्यात शब्दक बारे में की कहवा है अग्यात के केवल रेकोट के कमी नहीं मानी क, समाजिक सीमारे कहापार करबाक सहसिक प्रमाड करूप में लिखूँ, इई एही पोठिक सब साप्टाकत बनी सकेत अची. इई बहत शान्दार अंटर द्रिष्टी अची. ता न्दिन के चर्चा मे हम सब तीन्ता मुख्या बात पर गोर किल हूं पहिल य जे नेटिक चितावनी सब के एक ठाम एकठ्रित का का पुन्राव्रुत्ती कम करव जाए सा फ्लो बनल रहे आदो सर जे आमुर्त व्याकरन के स्पष्ट करवा कले अद्याय सात, वानु में एक ठाट तोस के स्टडी प्रस्तूत करब अद्ते सर सब समहत्व पून जे अभिलेक्ख कब चाव करबाक बदला महिला आन्य वर्गक अटिहासिक उपस्तिती के आवर सशक्त स्वर में प्रस्तूत करब दिलकुल आहाई यी सब सुदार काका अपन समागरी फिर सा हम्रा सब के लगपठाव. हम सब आहाक एही उतक्रिष्ट काज कदोसर समिक्षा करवामे बहुत प्रसन्नता अनुबहव करव.