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गंगा_ब्रिजक_मंचीय_आ_पात्र_समीक्षा.m4a

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Part 2 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 2
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  1. 0:00–0:05आ, गजेंद्र ताकृ रचित, गंगा ब्रिज एक ता मर्मस पर्षी नाटक अचि,
  2. 0:05–0:11जे ब्रष्ट विवस्ता और एक आदरष्वादी अजिन्यरक बलिदानक कता कहे दचि,
  3. 0:11–0:17तब पिना कोनो विलम्बक आँ सीदे आई रच्नाक समिक्षा शुरू करे चि,
  4. 0:17–0:22अद्रिश्य परिववर्तनक भीज्क प्रवाज के आरो सहज बनेवा काविष्खता आची.
  5. 0:22–0:26अग, येग ता अची के टाई नाटक बाल्यकालक आदर्ष्से लोका,
  6. 0:26–0:30कोलेजक दिन फिर गामक संगर्ष आन्तता, म्रित्य। दरिक,
  7. 0:30–0:37आदर्ष्छ लोका कोलेजक दिन फिर गामक संगर्ष आन्दता म्रित्य। दरिक एक तब बालेकालक दिष्छ समेटे तची
  8. 0:37–0:44आदर्ष्छ लोका कोलेजक दिन फिर गामक संगर्ष आन्दता म्रित्य। दरिक एक तब बहुत पैग काल्खन् समेटे तची
  9. 0:44–0:45उक तब विशाल कैनवास आची
  10. 0:45–0:47अई तब विशाल कैनवास
  11. 0:48–0:51एई समगरिक कमजोर बिन्दू से हो बनी रहा लगा ची
  12. 0:51–0:53कि एक तब बाले कालक दिश्षे
  13. 0:53–0:55कलेज, तकरबाद गाँ
  14. 0:55–0:57अफ फिर कार इस्थल दरिक जे चलाँँ आची
  15. 0:57–0:59उ कतो कतो बहुत अचानक लागता थाची
  16. 0:59–1:04मैंने आहा कहा वाची जे द्रिष्य सबख भीच का जे जंप आची उ
  17. 1:04–1:07आआ उ जंप बहुत अचानक अची
  18. 1:07–1:10दर्षक जगन कोनो नाटक देखाई तची
  19. 1:10–1:14तो पात्रके संग एक ता भावनात्मक याप्रा पर होई तची
  20. 1:14–1:20मुदा जगन भीना कुन शुगद्ध्ध्पूल के कता सीदे दस वर्ष आगु बही जाई तची,
  21. 1:20–1:23जाही से कता के गती के थेस पहुचे तची.
  22. 1:23–1:27अदर्षक कब हावनात्मक जोडाव भीच में तुटी जाई तची.
  23. 1:27–1:32जेना हम्रा लगाई तची इज समस्या विशेश रूप से रंग मंच्का अची
  24. 1:32–1:37जो इज सीनेमा रहेद तच समपादक सीदे एक तक कत लगा कद्रिष्ष्प बडल देद
  25. 1:37–1:43एक दम सीनेमा के व्याक्हन में तो दर्षक इमानी लए तची जे समई भीत गेल
  26. 1:43–1:49मुदा मन्च्पर जते सब किचु दर्षक के आखिक के सोजा बहुतिक रुप से उपस्तित अच्छे,
  27. 1:49–1:55उते पड़दाख हसाखग वा बत्ती निजा के द्रिष्ष बद्लापर द्रिष्ख के जध्का लगे तच्छी.
  28. 1:55–2:02सही बात अची, उ आंद्खार के किछु सेक्ट दर्षक के नाटक का सन्सार से बाहर निकाली दे तची.
  29. 2:02–2:07ते एकर समादान लेल, द्रिश्य परिवर्तनक के बीच मन्ची यप्रतीक,
  30. 2:07–2:11मने प्रकाश वा ध्वनीक उप्योग अधिक सुगमता से केल जाए तची.
  31. 2:11–2:15जाही से कता एक ता जेविक रूप से आगु बड़ेः
  32. 2:15–2:17आँ, जेविक रूप से आगु बड़ेः
  33. 2:17–2:22एकर मतलव आई चाही ची जे द्वनी वा प्रकाषके कता कवाक लिल प्रेव कलजा
  34. 2:22–2:25आँ, आँ बूजु जे द्वनी अप्रकाष्
  35. 2:25–2:29दर्षक कवछेतन मन पर सीथा प्रहार करेता ची
  36. 2:29–2:33बिना एकखोटा शब्द बजने आई दर्षक के ई महसुज करा सके ची
  37. 2:33–2:36जे समय वा परस्तिती बदली रहल ची
  38. 2:36–2:40मुदा जा हम हरेक द्रिष्ष परिवर्टन में द्वनीक प्योग करब
  39. 2:40–2:44तकी इगतो कतो कनी क्रित्रम नहीं भजेताई
  40. 2:44–3:14मने दर्षकक के एई नहीं लागत जे उ नाटकक बदला साूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
  41. 3:14–3:20अखर मुन में आदर्ष अची तकन नेपत्ठे से दारक एक ता मदूर अशान्त अवास सूनी पराए
  42. 3:20–3:23इद होनी बाल्ले कालक निष्षल्ताक प्रतीग बनत
  43. 3:23–3:27अहो अखर बात जकन कालेज कद्रिष आवेत अचे
  44. 3:27–3:30जदे जीवनक यतार्ट से साख्शात कार बहर हल अच्छे
  45. 3:30–3:33इक दम तकन उही दारक अवाज में,
  46. 3:33–3:37कनी तिवरता अबहवर के कोला हल आनी देल जाए.
  47. 3:37–3:42आन्ततद जखन भ्रष्टाचार अखारे स्थल के रूर्टाक दिष्ट आएवे जे,
  48. 3:42–3:48तो उही गंगा कदार के सुखाईत वर दरोना दोनिक रूप में प्रस्थूत की अल जासकत अची.
  49. 3:48–3:54इत बहुत गहीर बात भिल, मतलब नदीक अवाज के वल एई नहीं बतार रहल आची,
  50. 3:54–4:01दिश्छ बदली रहल आची, बलकी इपात्रक मान से किस्ति असमाजक पतनक साईव प्रती बिम्भिद कर आचे.
  51. 4:01–4:06तीक अहिना, जगन दर्षक उ सुखाल वो दरोनादार का अबाज सुनत,
  52. 4:06–4:11तो उक्रा बिना कोबे बुजे में आवजते एग खोनो अनर्थ होने अला आचे.
  53. 4:11–4:16इबड नी कुपाया चे. कोनो दोसर उदाहरन जे एक्रा और सपष्ट करे चे?
  54. 4:16–4:21राँ, दोसर उपाय एग नाटक में दोनो देनार आची,
  55. 4:21–4:25अखर दंकाक अवाजक के समय के सुचक के रूप में प्रवोग के लिए जाए,
  56. 4:25–4:30जे हरे काल कहन्द के एक तुस्राक संग लेबद तरीका से जोडी देद.
  57. 4:30–4:33माने जेना जेना नाटक अपन चरम दिस बड़ाय,
  58. 4:33–4:39दंकाक ताल दीमा अशान्त सा बदल के तेज अकान पोडनी हार भजाए.
  59. 4:39–4:41आप, इस समय कब पाईमाना बनीजताई.
  60. 4:41–4:46इस सब चोड-चोड बदलाओ आची मुदानातक कप्रवाह कब बहुत सहज बनादेद.
  61. 4:46–4:49ता जँहां मनच के बहुतिक पर्यावरन,
  62. 4:49–4:55जेना दहनी अप्रकाषकिन इते क्यतार्थ्वादी अक्रमिक रुब से बड़ल बई,
  63. 4:55–4:58तव उई पर्यावरन में जब पात्र सब चत्थी,
  64. 4:58–5:01उनका सो हो उत्ब यतार्थ वादी होई परत
  65. 5:01–5:04इक्दम नका अत्मक पात्रक मनोवग्यानेक गेराई
  66. 5:04–5:07और विस्तारक मांग करेत अची
  67. 5:07–5:11आखन उो लोकनी पुन रुपेन इस पष्ट नहीं चती
  68. 5:11–5:14हम रात भुजेल ज़ मुक्य मंत्रे ब्रष्ट चती
  69. 5:14–5:17अमुक्य अबियंता स्वार्ती चती,
  70. 5:17–5:22दूनो मिली का आदर्ष्वादी इंजीन्यना कध्याक सचद्यान्त्र करई चती.
  71. 5:22–5:25कताक इस थूल आवश्च्ताता इत्भे अची,
  72. 5:25–5:28मदः प्रभावक लेल इप रेआपत नही अची.
  73. 5:28–5:30अखन जे कमजोरी अची,
  74. 5:30–5:39उईज मुख्यमन्त्री आमुख्य अवियन्ताक चरित्र चित्रन कतो कतो एक आयामी वविशुद खलनायक जका बहुगे लची.
  75. 5:39–5:42माने उ केवल स्वार्थ अक्रूर्ता से भरल चीत,
  76. 5:42–5:48जाहे सं समपोड व्रष्ट व्यवस्ताक अस्ली जटिल्ता कंभुजाई तची.
  77. 5:48–5:53अग, जगन कुनो पात्र केवल कब काज करे बकलेल कब काज करेताची,
  78. 5:53–5:55तो कार्टूंजा का लगेताची.
  79. 5:55–6:00दर्षक उनका ग्नाता करेताची, मुदा उ हुनका से देराइत नहीं अची.
  80. 6:00–6:02मुदा एते हमर एक ता शंका अची,
  81. 6:02–6:07जा आम कोनो ब्रष्ट नेता वा हत्यारा नोकर शाह के
  82. 6:07–6:09मनो वेग्यानिक रूप से जटिल दिखाएप
  83. 6:09–6:12हुनकर वितर का मजबूरी दिखाएप
  84. 6:12–6:14तक की एकर खत्रा एण आची
  85. 6:14–6:18जि दर्षक हुनकर प्रती सहान भूथी रक्छे लागत
  86. 6:18–6:20इशंका सवबहविक अची
  87. 6:20–6:25मुदा हमर सुजाव, ईई नहीं अची, जे आहां सहानु भूथी पैदा करू.
  88. 6:25–6:31हम हुनका बोद गम्या वा समज्मे आवे योग्य बनाई बाग बात का रहल ची.
  89. 6:31–6:35मतलब उख्रूर की एक चती, उखर पाच्ध राजनेटिक मजबूरी,
  90. 6:35–6:38वा आत्मर अख्षन के बहावना के स्पष्ट कल जाए?
  91. 6:38–6:44एक्दम! जाही से पात्र भेसी यठार्थ वादी और खतरनाक लागेद.
  92. 6:44–6:48कि अगत विषुद शैटान किवल कता सब में होई तची.
  93. 6:48–6:53यत्दार्त जीवन में ब्रष्टाचार सादारन लोग सब दोरा कल जाताची
  94. 6:53–6:57जे आपन कुक्रित्ते के न्यायोचित �theiraavatshati.
  95. 6:57–7:00ओ, मतलब जखन दर्षक य देखध
  96. 7:00–7:03जे एक ता सादारन पडल नुकर शाह
  97. 7:03–7:06कोना आपन कुरसी के बचाई बाक लेल
  98. 7:06–7:09व्यवस्त्ताक मशीनक एक तक ग्रूर पुजा बनी जाएत छी,
  99. 7:09–7:13तक हन त्राज्दिक प्रभाँ बहुत भेसी गहर होईत छी.
  100. 7:13–7:17राव, दर्षक के यी महसुस होई बाग चाही,
  101. 7:17–7:20जे यी व्यवस्त्ताक इतेक शक्तिषाली आची,
  102. 7:20–7:23जे इग खुनोभी लोकक राख्ष्ष बना सकैता ची
  103. 7:23–7:28इविचार एक ता कातून खलनायक सा बहुत भेशी दरावना आची
  104. 7:28–7:31इबहुत दिल्चस्प द्रिष्टी कोन आची
  105. 7:31–7:33माने बुराई का सामान्ने करन
  106. 7:33–7:40तलेक्हक आपन वर्त्मान सामाग्रीयमे इपरीवर्तन कोना के सकते चती, कोनो तो सुदाहरन?
  107. 7:40–7:45उदाहरना कलेल जहन मुख्य अब्यंता आपन पुरान कोलेज कर मित्र,
  108. 7:45–7:50जे अखन आदर्ष्वादी अजिन्यर अची, अगर हत्या क्योजना बनाई चतीन,
  109. 7:50–7:54तकन हुंका भीना कोनो हिचकी चाहतक सीदे मानिले देखाएल गेल अची.
  110. 7:54–8:00हा, मुखे मंत्री आदेश दाईत चतिन और मुखे अवियंता तुरनत राजी भाजाइत चति,
  111. 8:00–8:02इकनी अस्वभाविक अचे.
  112. 8:02–8:04एकदम अस्वभाविक अचे.
  113. 8:04–8:09एकरा सुदारेत उद्रिष्यमे मुख्य अवियंताके किचु शनिक पच्टावा
  114. 8:09–8:12कौलेचकर दिनक कोनो आदरष्वादी बातक समरन
  115. 8:12–8:16वा भितर का मानसिक द्वन्दों में देखाए जासकेईचे.
  116. 8:16–8:19मतलब, उग किचु शनक लेल इज सोच दी,
  117. 8:19–8:24जिग्रा हम मार जार हल ची उ एक समय में हमर कोलेच का गनिष्ट मित्र चल,
  118. 8:25–8:28उ शाएद मुक्यमंत्री से बहस्कर बाक प्रयास कर थी.
  119. 8:28–8:30भिल्कुल, उ कही सकेच छतीन,
  120. 8:30–8:37जे मुदा सर उहमर मित्र आएच कि उक्रा कोनो दोसर ताम त्रान्सपर नहीं के आजासकटाएच
  121. 8:37–8:44अद्ता कहन मुख्य मंत्री उकर उही मित्रता आदर्स के आपन क्रूर राजनेतिक तर्खसा कुछिली देताएच
  122. 8:44–8:49आ अन्ततः मुख्य अब्यन्ता इद्दर्क देप, देखायल जासके च्छती,
  123. 8:49–8:54जो हम एक रान नाई मारव, तई विवस्ता हम्रा मारी देप.
  124. 8:54–8:58आ, इछोड छोड परी मारजन, उनका एक ता कार्टून कलनायक सा,
  125. 8:58–9:02इक ता वास्तबिक विवष आग खतरनाक नुकर सामे बदली देद
  126. 9:02–9:07इद्रिश्ष्ष्ट् कल्पना करे ते हम्रा गोहीर तनाव महसुस भोर अहलाच है
  127. 9:07–9:14जक्ञन मुख्य अब्यंताक हाथ कापत मुदा उ अपन मित्र के मारबाक आदेश पर हस्ताक्षर कर देद
  128. 9:14–9:20तक्हन दर्षक्क्के उकर स्वार्त अवेवस्ताक दान्वी करन दोनुक अजास है तै
  129. 9:20–9:22इक दम सतीक पकर लहूँ आहा
  130. 9:22–9:25इकेवल मुख्य पात्रक त्रास्दी नहीं जे तै
  131. 9:25–9:28बलकी उही मुख्य अवियंता का सुहुत रास्दी भोजे तै
  132. 9:28–9:31जे आपन आत्मा बेची देलक
  133. 9:31–9:35आजगा हम आई प्रासदिक व्यापकता कबात करहल चिया
  134. 9:35–9:39तई केवल की चु गिनल चुनल पात्रदरी सीमित नहीं अच्छी
  135. 9:39–9:44इपुरा समाजिक प्रासदिय आच्छ जकर प्रतिनदिदच्वन नाटक में सुत्रदार
  136. 9:44–9:49वद तिप्पनी कारजेना एक ता लोक, दोसर लोक आद धोल हो देनार करज चती.
  137. 9:49–9:56आद ता, एते हमार तेसर बिन्दु अवेतच, जे नाटकक सुत्रदार अ तिप्पनी कारग के,
  138. 9:56–10:01मुक्khya कता वस्तू अत्रास्दिक संग और गेराई सद्न्ध्बाक दरकार आज.
  139. 10:01–10:05आई, एते से हो सन्रचनात्मक समस्याज.
  140. 10:05–10:09इलोकनी ता अपन व्यंगे बहुत नीक जका प्रस्तूत कर अच्छे ती नाटक में.
  141. 10:09–10:15समस्या हुंकर व्यंगे में नहीं, मंज पर हुंकर उपस्तितिक शेली में आची.
  142. 10:15–10:20अखन कमजोरी इए आची, जे एक्ता लोक, दोसर लोक, आद्धोल हो देनार के,
  143. 10:20–10:25दिश्य सबख़ शुर्वात, वा अंत में, एक्ता अलग परत जका राखल गेल आची.
  144. 10:25–10:31जे मुख्य गधना क्रम के रोकाई तच अक्कतो कता सकनी अलक खलक बुजाई तच
  145. 10:31–10:35मने नाटक चली रहा जच अचानक मंज कक्रिया रुकी जाई तच
  146. 10:35–10:41इलोकने आवेका आपन कवीतावा तिपनी पडे चती आप फेर नाटक पुनाज शुरू होग तच
  147. 10:41–11:11आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ
  148. 11:11–11:41अद्र बच्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट
  149. 11:41–11:43विव्वस्त्ता पर कोनु तीख्ष्न व्यंग कर लक्तिन,
  150. 11:43–11:46तक की इदर्षक के क्रोदित नहीं करत?
  151. 11:46–11:48आहाक प्रष्न बरनी का ची.
  152. 11:48–11:58मने की, दर्षक के इं नहीं लागत जे, एक ता महिलाक सोग के दिश्छ में इव्यंग बादा बनी रहाला चे, अद्दिश्ख भावनात्मा गेराई के नष्ट कर रहाला चे.
  153. 11:58–12:09अग, तो ज़ाएज ज़े परमप्रागत रंग मंच मे एकरा बादा मानल जाएची, मुदा अदूनिक नाटक में येगता बहुच शकतिशाली उपकरन जी.
  154. 12:09–12:16ब्रेइख्त कक रंग मंची ए सिद्दान तक के याद करू जे अल्येनेशन इप्ट अचे.
  155. 12:16–12:46उुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुु�
  156. 12:46–12:56अगर विद्वा पतनी आ बती ही माए विलाप करहल चती तकन मन्च्ये क्रिया के फ्रीज करबाग बदला
  157. 12:56–13:05अशोग कद्रष चलते काल एक ता लोक अ दोसर लोक मन्च के कोना में कडाब है कड़, विवस्ता करुरता पर विंज्यात्मक टिप्पनी करती
  158. 13:05–13:11अग, मतलब एक दिस मनच पर हरदे विदारक क्रन्दन भाई रहल चे
  159. 13:11–13:18अट्फीक उई समें मनच के दूसर दिस विवस्ता कखोखलापन पर तीखा व्यंगे चले रहल आचे
  160. 13:18–13:20इद बाल गेर कंट्रास्ट वेल
  161. 13:20–13:27अब उद्रिष्य कल्पना करू, जते रोडलर सम वप्चा कर इंजीन्यर का हत्या होईता ची.
  162. 13:27–13:34अखने उद्रिष्य में केवल हाहा कार अची, मुदा एकरा और प्रभावी बने वाखलेल,
  163. 13:34–13:42उही रक्त्पात आहाहा कारक थीक भीच में दोलो देनार प्रवेश करे, अन नया विकास कर दोल पीटे लागे.
  164. 13:42–13:46इता सच्छ मुछ रोंगता थार कदेवाला कलपना है ची.
  165. 13:46–13:52एक दिस मंज्के जमीम पर एक ता इमान्दार लोक कर रगत पसर रहल है ची.
  166. 13:52–13:55उ पीडा सच्ट पटाय रहल आची
  167. 13:55–13:59अदो सर दिस एक ता व्यक्ती निर लज्टा सद्वल पीटी रहल आची
  168. 13:59–14:03जे देखु हमर गाँमक कतिक सुन्दर विकास बहर आची
  169. 14:03–14:07एक दम गतना अ व्यंग्यक इस समनान्तर प्रस्तूती
  170. 14:07–14:10द्रिश्खे और रिदे विदारक बनाए देद
  171. 14:10–14:15इजे विशम्ता आची उदर्षकक मोन में जे विद्रोगक बहावना पैदा करत
  172. 14:15–14:18उखोनो सीथा समवाज्सा समवव नहीं आची
  173. 14:18–14:23एकरा लेल प्रकाषक के से हुब बहुतनी को प्योग भहस आची अची हम्रा लगे दची
  174. 14:37–14:49इसम्पूर्न चर्चा सा एक्ता बात सबस्छ्द बागे लच्छे, जे गंगा ब्रिज पहने सा एक्ता बहुत शक्तिषाली और मार्मिक सामगरी अच्छी.
  175. 14:49–14:51अर मार्मिक सामगरी अची
  176. 14:51–14:53मुदा एक्रा मनच पर
  177. 14:53–14:55अपन पूर्न समभावना के
  178. 14:55–14:57प्राप्त करवाखले
  179. 14:57–14:58कि चु मनच्ये
  180. 14:58–15:00अर मनोवेग्यानिक परी मारजन के
  181. 15:00–15:02अविष्च्ता अची
  182. 15:02–15:03बिलकुल सही कालो
  183. 15:03–15:05ता अई हम्रा लोक्नी
  184. 15:05–15:16अग्राम सन्श्प में राखा चाहित अच्छे, पहल द्रिश्य अर समय के परिवर्तन के द्हनेक वप्रतीकक माद्ध्यम से और सहेज बनेनाई,
  185. 15:16–15:24जेना गंगाक दारक द्हनी वडंकाक तालक प्रियोग के दर्षक के अव छेतन मन के समय की यात्रा कराएनाई.
  186. 15:24–15:35अदोसर भिन्दी चल जी मुक्य मंत्री और मुक्य अभिविंटाजे का नकरात्मक पातर सब मैं, मनोवेग्याने गेराई और मानसिक धुन्द जोडनै.
  187. 15:35–15:41उनका लोक्नि क्रुर्ताक पाच्वाक राजनेतिक दबाव और आत्म रक्षन बावना के स्तापित करब,
  188. 15:41–15:47यह से उ विषुद काटून कलनायक केन बदला यतात वादी और खतरनाक लागती।
  189. 15:48–15:55एक दम अ अन्त मेट तिप पनी कार वसुत्र दार लोकनी के अलक थलक दिष्च मे रख्बाक बदला
  190. 15:55–16:25वो उग़ाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजा
  191. 16:25–16:32अब आपन समगरी फेर से हमरा लोकनिक लग एक आरेक्रम में समीख्षा कलेल अवष्षे पथाप थी.
  192. 16:32–16:34श्रवन करभाकलेल द्श्वाद

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आ, गजेंद्र ताकृ रचित, गंगा ब्रिज एक ता मर्मस पर्षी नाटक अचि, जे ब्रष्ट विवस्ता और एक आदरष्वादी अजिन्यरक बलिदानक कता कहे दचि, तब पिना कोनो विलम्बक आँ सीदे आई रच्नाक समिक्षा शुरू करे चि, अद्रिश्य परिववर्तनक भीज्क प्रवाज के आरो सहज बनेवा काविष्खता आची. अग, येग ता अची के टाई नाटक बाल्यकालक आदर्ष्से लोका, कोलेजक दिन फिर गामक संगर्ष आन्तता, म्रित्य। दरिक, आदर्ष्छ लोका कोलेजक दिन फिर गामक संगर्ष आन्दता म्रित्य। दरिक एक तब बालेकालक दिष्छ समेटे तची आदर्ष्छ लोका कोलेजक दिन फिर गामक संगर्ष आन्दता म्रित्य। दरिक एक तब बहुत पैग काल्खन् समेटे तची उक तब विशाल कैनवास आची अई तब विशाल कैनवास एई समगरिक कमजोर बिन्दू से हो बनी रहा लगा ची कि एक तब बाले कालक दिश्षे कलेज, तकरबाद गाँ अफ फिर कार इस्थल दरिक जे चलाँँ आची उ कतो कतो बहुत अचानक लागता थाची मैंने आहा कहा वाची जे द्रिष्य सबख भीच का जे जंप आची उ आआ उ जंप बहुत अचानक अची दर्षक जगन कोनो नाटक देखाई तची तो पात्रके संग एक ता भावनात्मक याप्रा पर होई तची मुदा जगन भीना कुन शुगद्ध्ध्पूल के कता सीदे दस वर्ष आगु बही जाई तची, जाही से कता के गती के थेस पहुचे तची. अदर्षक कब हावनात्मक जोडाव भीच में तुटी जाई तची. जेना हम्रा लगाई तची इज समस्या विशेश रूप से रंग मंच्का अची जो इज सीनेमा रहेद तच समपादक सीदे एक तक कत लगा कद्रिष्ष्प बडल देद एक दम सीनेमा के व्याक्हन में तो दर्षक इमानी लए तची जे समई भीत गेल मुदा मन्च्पर जते सब किचु दर्षक के आखिक के सोजा बहुतिक रुप से उपस्तित अच्छे, उते पड़दाख हसाखग वा बत्ती निजा के द्रिष्ष बद्लापर द्रिष्ख के जध्का लगे तच्छी. सही बात अची, उ आंद्खार के किछु सेक्ट दर्षक के नाटक का सन्सार से बाहर निकाली दे तची. ते एकर समादान लेल, द्रिश्य परिवर्तनक के बीच मन्ची यप्रतीक, मने प्रकाश वा ध्वनीक उप्योग अधिक सुगमता से केल जाए तची. जाही से कता एक ता जेविक रूप से आगु बड़ेः आँ, जेविक रूप से आगु बड़ेः एकर मतलव आई चाही ची जे द्वनी वा प्रकाषके कता कवाक लिल प्रेव कलजा आँ, आँ बूजु जे द्वनी अप्रकाष् दर्षक कवछेतन मन पर सीथा प्रहार करेता ची बिना एकखोटा शब्द बजने आई दर्षक के ई महसुज करा सके ची जे समय वा परस्तिती बदली रहल ची मुदा जा हम हरेक द्रिष्ष परिवर्टन में द्वनीक प्योग करब तकी इगतो कतो कनी क्रित्रम नहीं भजेताई मने दर्षकक के एई नहीं लागत जे उ नाटकक बदला साूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� अखर मुन में आदर्ष अची तकन नेपत्ठे से दारक एक ता मदूर अशान्त अवास सूनी पराए इद होनी बाल्ले कालक निष्षल्ताक प्रतीग बनत अहो अखर बात जकन कालेज कद्रिष आवेत अचे जदे जीवनक यतार्ट से साख्शात कार बहर हल अच्छे इक दम तकन उही दारक अवाज में, कनी तिवरता अबहवर के कोला हल आनी देल जाए. आन्ततद जखन भ्रष्टाचार अखारे स्थल के रूर्टाक दिष्ट आएवे जे, तो उही गंगा कदार के सुखाईत वर दरोना दोनिक रूप में प्रस्थूत की अल जासकत अची. इत बहुत गहीर बात भिल, मतलब नदीक अवाज के वल एई नहीं बतार रहल आची, दिश्छ बदली रहल आची, बलकी इपात्रक मान से किस्ति असमाजक पतनक साईव प्रती बिम्भिद कर आचे. तीक अहिना, जगन दर्षक उ सुखाल वो दरोनादार का अबाज सुनत, तो उक्रा बिना कोबे बुजे में आवजते एग खोनो अनर्थ होने अला आचे. इबड नी कुपाया चे. कोनो दोसर उदाहरन जे एक्रा और सपष्ट करे चे? राँ, दोसर उपाय एग नाटक में दोनो देनार आची, अखर दंकाक अवाजक के समय के सुचक के रूप में प्रवोग के लिए जाए, जे हरे काल कहन्द के एक तुस्राक संग लेबद तरीका से जोडी देद. माने जेना जेना नाटक अपन चरम दिस बड़ाय, दंकाक ताल दीमा अशान्त सा बदल के तेज अकान पोडनी हार भजाए. आप, इस समय कब पाईमाना बनीजताई. इस सब चोड-चोड बदलाओ आची मुदानातक कप्रवाह कब बहुत सहज बनादेद. ता जँहां मनच के बहुतिक पर्यावरन, जेना दहनी अप्रकाषकिन इते क्यतार्थ्वादी अक्रमिक रुब से बड़ल बई, तव उई पर्यावरन में जब पात्र सब चत्थी, उनका सो हो उत्ब यतार्थ वादी होई परत इक्दम नका अत्मक पात्रक मनोवग्यानेक गेराई और विस्तारक मांग करेत अची आखन उो लोकनी पुन रुपेन इस पष्ट नहीं चती हम रात भुजेल ज़ मुक्य मंत्रे ब्रष्ट चती अमुक्य अबियंता स्वार्ती चती, दूनो मिली का आदर्ष्वादी इंजीन्यना कध्याक सचद्यान्त्र करई चती. कताक इस थूल आवश्च्ताता इत्भे अची, मदः प्रभावक लेल इप रेआपत नही अची. अखन जे कमजोरी अची, उईज मुख्यमन्त्री आमुख्य अवियन्ताक चरित्र चित्रन कतो कतो एक आयामी वविशुद खलनायक जका बहुगे लची. माने उ केवल स्वार्थ अक्रूर्ता से भरल चीत, जाहे सं समपोड व्रष्ट व्यवस्ताक अस्ली जटिल्ता कंभुजाई तची. अग, जगन कुनो पात्र केवल कब काज करे बकलेल कब काज करेताची, तो कार्टूंजा का लगेताची. दर्षक उनका ग्नाता करेताची, मुदा उ हुनका से देराइत नहीं अची. मुदा एते हमर एक ता शंका अची, जा आम कोनो ब्रष्ट नेता वा हत्यारा नोकर शाह के मनो वेग्यानिक रूप से जटिल दिखाएप हुनकर वितर का मजबूरी दिखाएप तक की एकर खत्रा एण आची जि दर्षक हुनकर प्रती सहान भूथी रक्छे लागत इशंका सवबहविक अची मुदा हमर सुजाव, ईई नहीं अची, जे आहां सहानु भूथी पैदा करू. हम हुनका बोद गम्या वा समज्मे आवे योग्य बनाई बाग बात का रहल ची. मतलब उख्रूर की एक चती, उखर पाच्ध राजनेटिक मजबूरी, वा आत्मर अख्षन के बहावना के स्पष्ट कल जाए? एक्दम! जाही से पात्र भेसी यठार्थ वादी और खतरनाक लागेद. कि अगत विषुद शैटान किवल कता सब में होई तची. यत्दार्त जीवन में ब्रष्टाचार सादारन लोग सब दोरा कल जाताची जे आपन कुक्रित्ते के न्यायोचित �theiraavatshati. ओ, मतलब जखन दर्षक य देखध जे एक ता सादारन पडल नुकर शाह कोना आपन कुरसी के बचाई बाक लेल व्यवस्त्ताक मशीनक एक तक ग्रूर पुजा बनी जाएत छी, तक हन त्राज्दिक प्रभाँ बहुत भेसी गहर होईत छी. राव, दर्षक के यी महसुस होई बाग चाही, जे यी व्यवस्त्ताक इतेक शक्तिषाली आची, जे इग खुनोभी लोकक राख्ष्ष बना सकैता ची इविचार एक ता कातून खलनायक सा बहुत भेशी दरावना आची इबहुत दिल्चस्प द्रिष्टी कोन आची माने बुराई का सामान्ने करन तलेक्हक आपन वर्त्मान सामाग्रीयमे इपरीवर्तन कोना के सकते चती, कोनो तो सुदाहरन? उदाहरना कलेल जहन मुख्य अब्यंता आपन पुरान कोलेज कर मित्र, जे अखन आदर्ष्वादी अजिन्यर अची, अगर हत्या क्योजना बनाई चतीन, तकन हुंका भीना कोनो हिचकी चाहतक सीदे मानिले देखाएल गेल अची. हा, मुखे मंत्री आदेश दाईत चतिन और मुखे अवियंता तुरनत राजी भाजाइत चति, इकनी अस्वभाविक अचे. एकदम अस्वभाविक अचे. एकरा सुदारेत उद्रिष्यमे मुख्य अवियंताके किचु शनिक पच्टावा कौलेचकर दिनक कोनो आदरष्वादी बातक समरन वा भितर का मानसिक द्वन्दों में देखाए जासकेईचे. मतलब, उग किचु शनक लेल इज सोच दी, जिग्रा हम मार जार हल ची उ एक समय में हमर कोलेच का गनिष्ट मित्र चल, उ शाएद मुक्यमंत्री से बहस्कर बाक प्रयास कर थी. भिल्कुल, उ कही सकेच छतीन, जे मुदा सर उहमर मित्र आएच कि उक्रा कोनो दोसर ताम त्रान्सपर नहीं के आजासकटाएच अद्ता कहन मुख्य मंत्री उकर उही मित्रता आदर्स के आपन क्रूर राजनेतिक तर्खसा कुछिली देताएच आ अन्ततः मुख्य अब्यन्ता इद्दर्क देप, देखायल जासके च्छती, जो हम एक रान नाई मारव, तई विवस्ता हम्रा मारी देप. आ, इछोड छोड परी मारजन, उनका एक ता कार्टून कलनायक सा, इक ता वास्तबिक विवष आग खतरनाक नुकर सामे बदली देद इद्रिश्ष्ष्ट् कल्पना करे ते हम्रा गोहीर तनाव महसुस भोर अहलाच है जक्ञन मुख्य अब्यंताक हाथ कापत मुदा उ अपन मित्र के मारबाक आदेश पर हस्ताक्षर कर देद तक्हन दर्षक्क्के उकर स्वार्त अवेवस्ताक दान्वी करन दोनुक अजास है तै इक दम सतीक पकर लहूँ आहा इकेवल मुख्य पात्रक त्रास्दी नहीं जे तै बलकी उही मुख्य अवियंता का सुहुत रास्दी भोजे तै जे आपन आत्मा बेची देलक आजगा हम आई प्रासदिक व्यापकता कबात करहल चिया तई केवल की चु गिनल चुनल पात्रदरी सीमित नहीं अच्छी इपुरा समाजिक प्रासदिय आच्छ जकर प्रतिनदिदच्वन नाटक में सुत्रदार वद तिप्पनी कारजेना एक ता लोक, दोसर लोक आद धोल हो देनार करज चती. आद ता, एते हमार तेसर बिन्दु अवेतच, जे नाटकक सुत्रदार अ तिप्पनी कारग के, मुक्khya कता वस्तू अत्रास्दिक संग और गेराई सद्न्ध्बाक दरकार आज. आई, एते से हो सन्रचनात्मक समस्याज. इलोकनी ता अपन व्यंगे बहुत नीक जका प्रस्तूत कर अच्छे ती नाटक में. समस्या हुंकर व्यंगे में नहीं, मंज पर हुंकर उपस्तितिक शेली में आची. अखन कमजोरी इए आची, जे एक्ता लोक, दोसर लोक, आद्धोल हो देनार के, दिश्य सबख़ शुर्वात, वा अंत में, एक्ता अलग परत जका राखल गेल आची. जे मुख्य गधना क्रम के रोकाई तच अक्कतो कता सकनी अलक खलक बुजाई तच मने नाटक चली रहा जच अचानक मंज कक्रिया रुकी जाई तच इलोकने आवेका आपन कवीतावा तिपनी पडे चती आप फेर नाटक पुनाज शुरू होग तच आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ अद्र बच्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट विव्वस्त्ता पर कोनु तीख्ष्न व्यंग कर लक्तिन, तक की इदर्षक के क्रोदित नहीं करत? आहाक प्रष्न बरनी का ची. मने की, दर्षक के इं नहीं लागत जे, एक ता महिलाक सोग के दिश्छ में इव्यंग बादा बनी रहाला चे, अद्दिश्ख भावनात्मा गेराई के नष्ट कर रहाला चे. अग, तो ज़ाएज ज़े परमप्रागत रंग मंच मे एकरा बादा मानल जाएची, मुदा अदूनिक नाटक में येगता बहुच शकतिशाली उपकरन जी. ब्रेइख्त कक रंग मंची ए सिद्दान तक के याद करू जे अल्येनेशन इप्ट अचे. उुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुुु� अगर विद्वा पतनी आ बती ही माए विलाप करहल चती तकन मन्च्ये क्रिया के फ्रीज करबाग बदला अशोग कद्रष चलते काल एक ता लोक अ दोसर लोक मन्च के कोना में कडाब है कड़, विवस्ता करुरता पर विंज्यात्मक टिप्पनी करती अग, मतलब एक दिस मनच पर हरदे विदारक क्रन्दन भाई रहल चे अट्फीक उई समें मनच के दूसर दिस विवस्ता कखोखलापन पर तीखा व्यंगे चले रहल आचे इद बाल गेर कंट्रास्ट वेल अब उद्रिष्य कल्पना करू, जते रोडलर सम वप्चा कर इंजीन्यर का हत्या होईता ची. अखने उद्रिष्य में केवल हाहा कार अची, मुदा एकरा और प्रभावी बने वाखलेल, उही रक्त्पात आहाहा कारक थीक भीच में दोलो देनार प्रवेश करे, अन नया विकास कर दोल पीटे लागे. इता सच्छ मुछ रोंगता थार कदेवाला कलपना है ची. एक दिस मंज्के जमीम पर एक ता इमान्दार लोक कर रगत पसर रहल है ची. उ पीडा सच्ट पटाय रहल आची अदो सर दिस एक ता व्यक्ती निर लज्टा सद्वल पीटी रहल आची जे देखु हमर गाँमक कतिक सुन्दर विकास बहर आची एक दम गतना अ व्यंग्यक इस समनान्तर प्रस्तूती द्रिश्खे और रिदे विदारक बनाए देद इजे विशम्ता आची उदर्षकक मोन में जे विद्रोगक बहावना पैदा करत उखोनो सीथा समवाज्सा समवव नहीं आची एकरा लेल प्रकाषक के से हुब बहुतनी को प्योग भहस आची अची हम्रा लगे दची इसम्पूर्न चर्चा सा एक्ता बात सबस्छ्द बागे लच्छे, जे गंगा ब्रिज पहने सा एक्ता बहुत शक्तिषाली और मार्मिक सामगरी अच्छी. अर मार्मिक सामगरी अची मुदा एक्रा मनच पर अपन पूर्न समभावना के प्राप्त करवाखले कि चु मनच्ये अर मनोवेग्यानिक परी मारजन के अविष्च्ता अची बिलकुल सही कालो ता अई हम्रा लोक्नी अग्राम सन्श्प में राखा चाहित अच्छे, पहल द्रिश्य अर समय के परिवर्तन के द्हनेक वप्रतीकक माद्ध्यम से और सहेज बनेनाई, जेना गंगाक दारक द्हनी वडंकाक तालक प्रियोग के दर्षक के अव छेतन मन के समय की यात्रा कराएनाई. अदोसर भिन्दी चल जी मुक्य मंत्री और मुक्य अभिविंटाजे का नकरात्मक पातर सब मैं, मनोवेग्याने गेराई और मानसिक धुन्द जोडनै. उनका लोक्नि क्रुर्ताक पाच्वाक राजनेतिक दबाव और आत्म रक्षन बावना के स्तापित करब, यह से उ विषुद काटून कलनायक केन बदला यतात वादी और खतरनाक लागती। एक दम अ अन्त मेट तिप पनी कार वसुत्र दार लोकनी के अलक थलक दिष्च मे रख्बाक बदला वो उग़ाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजाजा अब आपन समगरी फेर से हमरा लोकनिक लग एक आरेक्रम में समीख्षा कलेल अवष्षे पथाप थी. श्रवन करभाकलेल द्श्वाद

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