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मिथिलाक_दूषण_पंजीक_असल_सच.m4a
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- 0:00–0:04कालपना करु चवूदहमाश विश्वाव्दिक मित्ला कुनु पएग गाँ।
- 0:04–0:10हां, जते दूईगोट शकती शाली परिवारक भीच विवाहक मन्डब सजल छे
- 0:10–0:15बलकोल अप पूरोहित मन्त्र पडी रहे ल्छत्छती, वर्वदूद तयार चती,
- 0:15–0:20मुदा अचानक आई एक तालपत्रक एक ता पोठा लेई का प्रवेश करेच छती
- 0:20–0:24आ, उलोक मात्र एक ता नाम देखेच छती
- 0:24–0:26पोठा किच पन्ना पल्तेच छती
- 0:26–0:29अप पूरा विवाहक अनुश्चान के रोक देच छती
- 0:29–0:31आ, आश्चर अग बात इचे
- 0:31–0:35जे इख़ों ब्यानक अप्रादध करन नहीं बारहे लचाए
- 0:35–0:38बलकी दूटा परिवारक, भीच, रक्त, समबनदध
- 0:38–0:41एक ता जटिल गन्तिय गननाक आदार पर भेर रहे लचाए
- 0:41–0:42एक दम सही
- 0:42–0:46आजुक एक गहन चर्चा कोंण सादारन विषे पर नहीं चे
- 0:46–0:53नहीं, इबहुत विशेश चे, हमर श्रोथ समगरी चे, गजेंदर ताकृर दवारा लिखित,
- 0:53–0:56दिकोडिं दपंजी अप मितला, वल्युम सिक्स,
- 0:56–1:01जे विशेश रूपस, मितलाक रहस्यमए दूशनक पंजी परादारी चे.
- 1:01–1:04आयाते इस पष्ट कोदेनाई बहुत जरूरी चे,
- 1:04–1:10जे इचर्चा कोनो पुरान अटिहासिक कलंके नवहत्यार बनेवाके लेग भिल्कुल नहीं भो रहल चे.
- 1:10–1:16आ, मैंने एक कर उदेश यी बुजाब चै, जे सैंक्डो साल पूर्व जकन नहीं कोनो क्मटौटर चलिक,
- 1:16–1:22नहीं कोनो अख्सल शीट, तकन हमर समाज वन्शावलिक ये तेक विशाल डेटा बेस कोना तैयार के लग,
- 1:22–1:24अग्रा कोना प्रबंदित के लग.
- 1:24–1:29जान्कारी से प्रेम रक्बलाज जिग्यासू लोकनिक किलेल इक टा अद्बूत यात्रा चे.
- 1:29–1:32इमात्र वन्शावली गबनाई चे.
- 1:32–1:39नहीं, इविवाह, प्रवासन, आमानविय समवन्दक एक टा एहन वेवस्ता चै, जे शताब्दियों से सुरक्षिट चै.
- 1:39–1:42ता आव एक रानीक जका दिकोड करी.
- 1:42–1:47आप सब से पहले एबुजी जे एपूरा पनजी विवस्ता अखिर शूरू की एक भेल,
- 1:47–1:51अब बिना कोनो आदूनिक तकनीकक इस समबव कोना भेल.
- 1:51–1:57देखु, इव्यवस्त्तक शुर्वात समाजक एक ता बहुत व्यवाहारेक समस्याक समदान चल.
- 1:57–2:04जगन समाज चोट होईचे, तलोक मोकिक रूप से आपन पाथ सात पीडी की तिहास मोन रखईच छती.
- 2:04–2:06आप, उद वो मोकिक याद दाश्त से का चली जएच?
- 2:06–2:07बलकुल.
- 2:07–2:12तद 1326 इस्वी माने शाका बारा सुवार्त्तालिस में,
- 2:12–2:16करनात वन्शक महराज रही सिंदेव का समय में,
- 2:16–2:18मित्लाक विद्वान सभी महसुस केलनी,
- 2:18–2:21जे समाज इत्ते पैग बहगेल चत,
- 2:21–2:25जे केवल मोखिक परमपरापन निरभर रहभ खतरनाक चे.
- 2:25–2:31खदरनाक, एह लेल जी सगोत्र्वा सपिंद मने एक ही रक्त समबन्द मे विवाग दर्चल.
- 2:31–2:38आप, उही सब बच्वाख लेल एक ता लिखित सरवजनिक अभिलेक विवस्ता का अवशकता महसुस क्यल गेल,
- 2:38–2:40जिक्र हम सब पनजी विवस्ता कही चिये.
- 2:40–2:46मदाज़ा हैक्रा आजुक संदर्ब में देखी, ता यह एक ता बहुत पैग प्रसासनिक चुनोती बुजाई ची.
- 2:46–2:48एक दम बहुत पैग चुनोती.
- 2:48–2:54जैना जग कोनो लोक के ईने पता हो एन, जो उनकर परदादी कखकर भेटी चली,
- 2:54–2:57आँ कोनो अन्जान गव में विवाग करे जारा हल चती
- 2:57–3:00तो उकर सतिता प्रमानित कोना होई चल
- 3:00–3:03आआ, एते सब पंजी कारक बूमिका शुरू है च्या?
- 3:03–3:06हमरा एब उजवा में बहुत दिल्चस पीच आई
- 3:06–3:07जे उही समय का
- 3:07–3:10जे पंजी कार चला उई काज कोना करे चला
- 3:10–3:12के थो हुंकर लग सर्ज बटनत चल नाई,
- 3:12–3:16जे नाम ताईप केलनी अपुरा खंदानाक लिस्ट आबीगल?
- 3:16–3:17नाई.
- 3:17–3:18उआहें नाई चल.
- 3:18–3:22स्रोक सामगरी इए अस्पष्ट करे चे,
- 3:22–3:26जे एकर लेल पंजी कारक एक ता विशेश वर्ग तयार केल गल,
- 3:26–3:33जकर का चल वन्शावलिक तालपत्रक पोठी के अद्यतन रखभ अविवाह से पूर्व गडना करब
- 3:33–3:38मने जकन कोनो विवाह तई होई चल तो दूनो पक्ष पंजिकार लगजाई चला
- 3:38–3:45आप पंजिकार वर आ वदुक मात्रिक अप्पेट्रेक पीडी की गडना कर इत चला
- 3:45–3:47तो इगणना कुना हो यचल?
- 3:48–3:49इदेखल जाए चल,
- 3:49–3:52जे माता कदिस्सच कम सकम पाच पीदी,
- 3:52–3:55आप पिता कदिस्सच साथ पीदी दरी,
- 3:55–3:57कुनो समान रक्त समबन्द तद नहीं चे.
- 3:58–4:02बापरे, मने एत्तिक पाचा दरी जा के चेकल जाए चल.
- 4:02–4:02आई,
- 4:02–4:07आई पुरा गणना भेलाक बाद ही पन्जीकार एक ता अस्वाजनी पत्र
- 4:07–4:10वस सिद्धान्त पत्र निरगत करेत चला.
- 4:10–4:15बुजलिये इता एहन भेल जना गामक कोनो बूजुर्ग सनाता रिष्ता पुच्वाग बजाए
- 4:15–4:19विवाह लेल एक ता स्टेट इशुट पास्वोट वर देटाबेस अनिवार्र का दिल गिल हो.
- 4:19–4:25बहुत निक उपमा चाई, बिना उही पास्वोट अक कोन विवाह मान ने बहसकई चल.
- 4:25–4:31आ, सिद्धान्त पत्र वास्टब मे उही गनिती ए गननाक अन्तिम परिनाम,
- 4:31–4:34या कहुत अ नो अज्छ्छन सर्टिटिकर चल.
- 4:34–4:36मुदा एक ता प्रश्न चे,
- 4:36–4:38कि यी एटिक पैक वेवस था,
- 4:38–4:40मात्र एक ता खास वर्ग,
- 4:40–4:42जेना ब्राम्मन लेल सी मिच्छल?
- 4:42–4:45आहा, यी एक ता बहुत समान ने ब्रानती चै.
- 4:45–4:48गजेंद्र थाकुरक स्रोत अनुसार,
- 5:01–5:02अपक वेवस्ता चल?
- 5:02–5:03बलकोल
- 5:03–5:06ये एक ता विस्त्रत प्रशासनेक अ सामाजिक प्रनानी चल
- 5:06–5:09जे कर पूरा भगोलिक शेट्र में लागुकल गेल चल
- 5:09–5:14आज जते दरी हाजारो नामक्ध बिना क्मपुटरक खोजबाग बाच्च है
- 5:14–5:18अखरा लेल पंजिकार सब एक ता विष्छ्ट व्याक्रनक निरमाड की निचला
- 5:18–5:23व्याक्रन? विवाक का निरना लेल मात्र व्यक्तिक नाम काफी नहीं चल की?
- 5:23–5:26ना! नाम समात्र नहीं हो इच्छल
- 5:26–5:30उक्रा एक ता विशाल भगोलि का एतिहासिक नक्षा में खुज़ब जरूरी चल.
- 5:30–5:34तव उ नक्षा बहुतिक रूप सक कोना काज करे चल.
- 5:34–5:38माने जै हम कोनो प्राची न देटा बेसक बात कर रहल ची,
- 5:38–5:42तो उकर कोनो नक्चोनो एंटेक्सिंऽ्टमता हेभे करत,
- 5:42–5:47जक्रासा उपोठा में सही पन्नादरी पहुची सकती, उकर व्याकरन की चल?
- 5:47–5:48रह!
- 5:48–5:51उही अंटेक्सिंच सिस्तम के भुज्वाक लेल.
- 5:51–5:54पन्जीक सात प्रकार के भुजब आवष्षक चे.
- 5:54–5:56सात प्रकार क्पन्जी होई चल?
- 5:56–5:56रह!
- 5:56–6:05श्रोत में एकर वरनन, मुल शाखा, गोत्र, पत्र, दूशन, उतेद, और अस्वाजन्ने पत्रक के रूप में काईल गेल च्या.
- 6:05–6:07ता इस अब �alagalak श्रेनिया च्याए.
- 6:07–6:12बल्ल्कुल यता है गोत्र कर अर्थ चे प्राचीन वन्ष भोदख,
- 6:12–6:16जे कोनो प्राचीन रिषिक नाम सा जुडल होईत चे,
- 6:16–6:20मुदा सब समहत्झपों अंटेक्सिंच तूल चिल मूल.
- 6:20–6:22मूल मने जे रूट होए चे?
- 6:22–6:26हा, मूलक अर्थ भेल, उप्राचीन वन्ष मूल,
- 6:26–6:31वह उ पहल गाम जतेऊसा कोनो विशेश वन्शावलीक शूवात भेल
- 6:31–6:33तश्रोथ में कतिक मुलक चर्चा चे
- 6:33–6:37मेत्हिल ब्राम्मड में भीज गोत्र आ एकसो सरसत मुल दर्ज चे
- 6:37–6:39एकसो सरसत मुल
- 6:39–6:39बाप्रे
- 6:39–6:43आर प्रत्तेक वन्शावलिक एक ता भीजी पूरुष होईच्छि
- 6:43–6:44भीजी पूरुष माने की
- 6:44–6:51माने अपहल गयात पूर्वज जतेसा औही वन्शक गडना अदिकारी क्रुप सो शूरूइच्छे
- 6:51–6:54एति हम एक ता उप्मदव को एक रा समज वाचा हा
- 6:54–6:57इत यह ता एक ता विशाल कमपुटर नेट्वरक जगाम बहल
- 6:57–6:59आए एक दम सही
- 6:59–7:02गोत्र भोगेल एक ता पैक डोमेन
- 7:02–7:04और मूल भोगेल उकर रूट डारेक्ट्री
- 7:04–7:07जो तेईसा सब ता फाण निक लेएच चाहे
- 7:07–7:09बिल्कुल, उहना काश करे चल है
- 7:09–7:20मुदा एकta विवारेक प्रशन अथेच है, मानी लिया जे कोनो परिवार आपन मूल गाँ चोडी सोकोस दूर आबी बसल, तकी उकर मूल बदली जाच्छल?
- 7:20–7:22नहीं, एप बहुत सतेक प्रशन चाए.
- 7:22–7:26जिना लोक आपन शेहर बडलेच है, तो उकर पता बडली जाच है.
- 7:26–7:31तकी पनजी में से हो नवगामक नाम पर नव मूल बनी जाच चल.
- 7:31–7:35देखु, पनजी वेबस्ताक सब सबहल विषेष्ता इच्छल,
- 7:35–7:39जे अस्तानान्त्रन का बादो मूल नहीं बडलेच चल.
- 7:39–7:42आचा, मने उ फिक्स रहेत चल.
- 7:42–7:47आचा, स्रोथ एक रा स्पष्ट करेत चै, जे भुगोल हे वन्शावली चै.
- 7:47–7:51जकन लोक आपन मूल गाँ चोडी दो सर ठाम बसला,
- 7:51–7:54तनव मूल ग्राम वश्शाक्खाक जन्म भेल,
- 7:54–7:57मुदा प्राषीन मुल हमेशा सुरक्षित रहल.
- 7:57–7:59अगर कुनु उदारन चाय स्रोथ में?
- 7:59–8:00आआआआआआआआआआआआआआआआआ
- 8:00–8:03जेना मानडर मुलक लोग जखन दोसर ठामगे लाई
- 8:03–8:05तगगर आममंग्राँनी शाखा बनल
- 8:05–8:08मुदा उसब कहलाउ ता मानडर मुलक है
- 8:08–8:10आआआआआ, मुझे लिए
- 8:10–8:15ये ब्हेल जे प्रवासनक बादो सक्डो सालदरी रिष्ताक प्यचान बहुऽ सके चल.
- 8:15–8:16बलक्ल.
- 8:16–8:26मुल एक ता एहन रूट चै, जे अस्थानान्त्रनक बादो कोनो व्यक्तिके उकर प्राचीन इतिहास आब होगालिक उद्गमसन जोड कर अखाए चे.
- 8:26–8:33उदेता बे सक नियम आवकर सन्रचना, मुदा हम सब जाने ची, जे मानविय जीवन कोनो स्प्रेट्शीट तचे नहीं.
- 8:33–8:37एक दम नहीं, मानविय जीवन बहुज जतल होई चे.
- 8:37–8:40जतल नियम होई चे, उते नियम तुटैइत से होचे.
- 8:40–8:46लोक नियमक बहार जाक विवाह करेथ थी, प्रेम करेथ थी, दोसर समुदायक संज समपरक में आबे थी.
- 8:46–8:48आई, यी तो समाजक वास्ट्विक्ता चाई.
- 8:48–8:53आज समाजक वास्ट्विक्ता उही कदोर गनित या नियम सा, हमेशा तकराए चे.
- 8:53–9:23आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� �
- 9:23–9:25वाद्वालाईज रपचर कहे च्छाए
- 9:25–9:27वन्सा मे आईल चीर माने
- 9:27–9:29जते सकोनो ब्रेक आईल हो
- 9:29–9:30आँ
- 9:30–9:32ये उ जगछ आज़ जते कठार नियम
- 9:32–9:34आम मानविय जीवनिक
- 9:34–9:36जतिल ताक बीच तक्राउ बहल
- 9:36–9:37समाज कह चल
- 9:37–9:38जे विवा हमुक-मुक नियमक
- 9:38–9:43अग्यात्वन्च्छ दोसर समुदाये कि कन्या वा विद्वाविवास्व कोनो सन्तान बहल तो अख्रा पनजी सब बाहर नहीं किल गेल
- 9:43–9:45अच्छा अख्रा बाहर नहीं किल जाएच्छल
- 9:45–9:48नहीं बलकी अख्रा दूशन पनजी में दर्ज किल गेल
- 9:48–9:52कोनो सन்तान भेल, तो उक्रा पनजी सब बाहर नहीं कियल गेल.
- 9:52–9:54आचा, उक्रा बाहर नहीं कियल जाएच्छल.
- 9:54–9:58नहीं, बलकी उक्रा दूशन पनजी में दरज कियल गेल.
- 9:58–10:00मुदा एक्रा दरज करभा कुद्देशिख की जल.
- 10:00–10:02सादारन रुप से लोक यी सुच्ता,
- 10:02–10:05जे यी पन्जी मात्र एक ता ब्लाक्लिस्चल,
- 10:05–10:08जो करा सा नियम तोडे वाला लोग के निचा दिखा लिए जा सके.
- 10:08–10:12इदूशन पन्जीख बारे में सब सब पहे गल्त फहमी चे.
- 10:12–10:15मैं इप रिवार के समाज सक काटबाक हत्यार नहीं चल.
- 10:15–10:16बिलकुल नहीं.
- 10:16–10:19स्रोथ्त के गेराए सब पडला पर पता चले चे,
- 10:19–10:21जे यी बहिष्कारक नहीं,
- 10:21–10:23बलकी समावेशनक,
- 10:23–10:25मने अबजोप्षनक दस्तावेश चे.
- 10:25–10:27इदो बहुत नवद्द्रिष्टी कोंच है.
- 10:27–10:27हाँ.
- 10:27–10:30जा आहा एक्रा ब्लाकलिस्ट मानब,
- 10:30–10:33तए एकर अस्ली काज के नहीं बूजी पाएब.
- 10:33–10:36एक रा एक ता, सुझ्ट्वेर बुग्ड्ट्राकर,
- 10:36–10:38वा एक स्थ्ट्व्छन लोगजका समजू.
- 10:38–10:42मने जाते सिस्टम में कुनो एरर आवी गेल,
- 10:42–10:43अकर त्राक करब.
- 10:43–10:44एक दम सही.
- 10:44–10:58जक्रा पंजिका बाशा मे उतेड कहल जाएचे, तब पंजिकार के इभुजनाई आवश्यक चल, जे वन्ष मे कतेख से नव तत्व आयल चे, ताकी गरना सतीग भह सकया.
- 10:58–11:03तमने इदूशन पंजी कोनो गप्षाप वा अप्वाजक पोठी नई चल?
- 11:03–11:07अख्रा बिना कोनो उतल पुतल के अटिहासिक तत्या के रूप में दर्ज कयल जासकई.
- 11:08–11:12इतस शच्मुच कहीर बाच्छ है. माने समाज उही गटना के नुका कर नहीं रक्टा है.
- 11:13–11:17अख्रा बिना कोनो उतल पुतल के अटिहासिक तत्या के रूप में दर्ज कयल जासकाई.
- 11:33–11:38यक ता देटा कोईंट के रूप में
- 11:38–11:41मुदा जकन हम इस्रोत पडी रहल चलूँ
- 11:41–11:45ता एक ता बात बहत इस पष्ट रूप से हमर द्यान अक्रिष्ट के लक
- 11:45–11:50इदूशन अदिकाश ता महिलाक माद्धिम सब पनजी में दरज भेल चे
- 11:50–11:53वजल्येने पन्जी वेवस्ता मूल रूप सब पूरुष्प्रदान चे
- 11:53–11:56जते बाप से बेटा कवन्चावली चलएचे
- 11:56–11:58मुदा जकन नीम तूटेएचे
- 11:58–12:01तो उकर निशान प्राया महिलाक माद्धिम सदरज होईचे
- 12:01–12:03इकोना संबभ वेल
- 12:03–12:08मुदा जखन नीम तूटेइ चे तो उकर निशान प्राया महिलाक माद्ध्धिम सदर जोईचे.
- 12:08–12:09इकोना समबभेल.
- 12:09–12:13दिखु, तूश़ पनजी में बार-बार मात्ट्रिक सुता,
- 12:13–12:17जे करा भेटी कहल जाएचे, पतनी और दोहित्र,
- 12:17–12:21अज़्ित्र माने बेटिक भेटा जकान शब्द अबएच
- 12:21–12:24तब एकर मतलप ज़ महिलाक माद्धिमसा चिन त्रैक केल जाच्छल
- 12:24–12:29यद्यपी मुख्यपनजी पूरुष प्रदान दाचा पर थार चे
- 12:29–12:33मुदा जकन के होग वन्ष में कोनो चिन वर रप्चर आईल
- 12:33–12:38तव उकर पहचान अकसर माता वा पतनिक वंष्का अग्यात हेबासा
- 12:38–12:41वहुंकर दोसर समुदाई साविल हेबासा जुडल चन.
- 12:41–12:43तव महलाक उलेक के बिना,
- 12:43–12:45उही विसंगती के ट्रैक कर अप समबवने चल.
- 12:45–12:46एक दम सही.
- 12:46–13:16मुदा एता ही हमेक्ता बात पर द्याना कर्षन करे चाःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः
- 13:16–13:19ये शब्दावली के कुना सबष्ट करे चती.
- 13:19–13:22ये एक ता बहुत स्वाभिक प्रतिक्रिया चै,
- 13:22–13:24जे आजुक समय में उशब्द कटोर लागाए.
- 13:24–13:27मुदा स्रोथ समगरीक अद्द्यन करे द्काल,
- 13:27–13:29लेक्ध एक ता मानव शास्तरी है,
- 13:29–13:33मैंने अन्त्रोपालोगीकल द्रिष्टिकोर रके चत्छती।
- 13:33–13:35माने इतिहासकार क्नजर्या से देख़ा।
- 13:35–13:41अआ, इतिहासकार वा अद्देता काज उही शब्दावली के दोराय कक्रो अप्मानित करभ नहीं चे,
- 13:41–13:45बलकी उही समएक प्रशास्निक असमाजिक दाचा के बुज़ब चे
- 13:45–13:50ते जखन स्रोत अग्यात माता कहे चे, ते एकर की अर्थ भेल?
- 13:50–13:56जखन स्रोत अग्यात माता कहे चे, ते एकर अर्थ एई नहीं जे उस्त्रिक समाज में कोनो अस्तित्वा नहीं चल.
- 13:56–14:01एकर अद्त इच है जे पन्जी विवस्ताक कथोर प्रशासनिक दाचा
- 14:01–14:05उही स्रीक परिचे के अपन पूर्व निर्दारित कोलमिन नहीं बान्सकल.
- 14:05–14:09अच्छा मैं उउ सिस्टमक लेल अब्ट्लायर चलिन समाजक लेल नहीं?
- 14:09–14:14एक्दम, उ अग्याट चली, उई सिस्टमक लेल, समाजक लेल नहीं.
- 14:14–14:18इश्वद उईशमै कः प्रशासनित लेबल चल.
- 14:18–14:21आ, सब से महत्टवों बातिया.
- 14:21–14:26जे एह महलाक उलेक के बिना, इपुरा वन्शावली लिखब असमबचल.
- 14:26–14:29बाप्रे यी तबहुत महतु पून गब चे
- 14:29–14:34आँ एही विशाल भवन को ही अद्रिष्य नीव के इईट जका चली
- 14:34–14:37जकर भिना दाचा खसी परेत
- 14:37–14:38आँ एक ठबाता और
- 14:38–14:43किछ महिला कनाम तबहुत सबष्ट रूप से एही अविलेक में दर्च चे
- 14:43–14:44बिलकु दर्च चे
- 14:44–14:52जैना हादिनी, रुद्रमती, आनन्दावल्लबा, मेदा, चामपो, इनाम सब सद्यों से सुरक्षिट छे.
- 14:52–14:57आँ, उ मुख्य नियम से बहर चली, उ दूशन पनजी में दर्जबेली,
- 14:57–15:06मुदर सोचुजे, अकर परिनाम इभेल, जे चोदामा वप पंद्रामा शताब्दिक इमहिला सब इतिहास का पन्नामे हमेशा लेलमर बोगे ली.
- 15:06–15:10इतेक ता बहुत पैग विडम्मना चे, मुदो बहुत सुन्दर बाथ से होचे.
- 15:10–15:17उएक ता प्रमानच्यती जे समाज में निमक बावजुद मानविय सम्मद अपन रास्ता निकाल लिबे करे चल.
- 15:17–15:20इमहिला सब उइ समाज का वास्त्विकता चली,
- 15:20–15:25जते कतोर निम आम मानविय प्रव्रित्तिक भीच हमेशा खिचाव रहित चल.
- 15:25–15:30आजे विद्वा विवावा वा पत्पतीता जका शब्द चाई
- 15:30–15:36आप, उई प्रमानित करे चे जि समाज आपन पाबंदिक बादो एहन सम्मत के पुरा तरा से मेटा नहीं सकल.
- 15:36–15:43उक्रा दर्ज करे परल, अदर्ज कर बाक मतलप चे उक्रा स्विकार करब, बहले इक्रा दूशन कर नाम देल गेल हो.
- 15:43–15:49इस पष्टी करन बहुत किछ बदली देच है, मुदा आब हम उही प्रष्न परभए ची,
- 15:49–15:53जे इपुरा चर्चा केंद्र चाई की इदूशन इस्थाई चल?
- 15:53–15:56आ, इबहुत महेंत्वपून करषने चे.
- 15:56–16:01मने जो कोनो इस्ट्ट्री कारनवा, कोनो अन्तर जातिये विवाह कारन,
- 16:01–16:03कोनो वन्ष में दूशन लागी गेल,
- 16:03–16:07तक उ परिवार हमेशा लेल अचुत वा कलंकित भोगेल
- 16:08–16:12की समाज में उक्रा लेल कुनो मापी वाप्सी कराश्ता च्याल?
- 16:12–16:15देखू, इदूशन कोनो स्ताई मोहर नहीं चल.
- 16:15–16:20आए दे, इश्रोथ अपनो सबसम महत्वपून अग्क्रान्तिकारी रहस्ये कोले चे.
- 16:20–16:21की रहेसे?
- 16:21–16:25श्रोद इस पष्ट करे चे, जे ब्रामब्र समाजक अन्ने समुदाय,
- 16:25–16:30जेना दलित, कारीगर, चमार, रजक, अ यहादर जे यवनी,
- 16:30–16:34माने मुसलिम समुदाय कसंव समबंदक लिखित प्रमाँण अही दूशन पनजी मे चे.
- 16:34–16:39अगी समवे में मुस्लिम समुदायक संख समबन्द से हो दर्ज चल
- 16:39–16:42जिना यमनी दोलती जँहा चामपो यमनीज का नाम दर्ज चे
- 16:42–16:45इसब अग्यात वा अन्ने श्वेनी में दर्ज बहल
- 16:45–16:47इत बहुत आश्चर यक बाथ चे
- 16:47–16:56मुदै इप्रमानित करे चे जे ओ समाच पूरन रूप सा बन्द वा प्योर नहीं चल, जिना की अकसर मिखक गड़ल जाएचे.
- 16:56–16:59लोकक के विवाज समपरक अप्रेम होत चल.
- 16:59–17:04एही सब के समाच वापस अपन भीतर सोखी लेट प्योट ने अबजोब करे चल.
- 17:04–17:05अग, बिल्कुल
- 17:05–17:08तव उ सुखबाख वा अवशोशिट करवाग नियम की चला
- 17:08–17:11कते क समें लगे चल एक तक कलंग के इतिहाज बन वा में
- 17:11–17:16एक राश श्रोथ मे चथफम पीडी वा शिक्स्थ जैनरेशन कर नियम कहल गिल चे
- 17:16–17:17चथफम पीडी?
- 17:17–17:19अग, उदूशनाग प्रुनता शुद्दा बहुजाईचा
- 17:19–17:21पूरनता शुद्दा मैं एक दम प्योर
- 17:21–17:22इक दम प्योर
- 17:22–17:26मैंने, अव वन्ष समाज में पूना पूरी तरह से अवशोषिद भजाईचाल
- 17:26–17:28पूरनता शुद्दा मैं एक दम प्योर
- 17:28–17:29एक दम प्योर
- 17:29–17:33मैंने अववन्श समाज में पुना पुरी तरह से अवशोषिद बहजाई चल
- 17:33–17:37औव परिवार फिर सा मुख्यदारक समान ने विवाह समबन्ध मे आभी जाई चल
- 17:37–17:52अदे चाँ बगती चोदाम सताबदी में कुनो भीवादास्पद भीवाज के लक, तो और पर पर पोटाख पोटादरी उही समाजिक टैक्स के चुका रहल चें.
- 17:52–17:54बलकल. मुदा अंतता?
- 17:54–17:54अन्तता?
- 17:55–17:57मुदा अन्तता सलेट साथ बजाए चे
- 17:58–18:00जे आई भ्यानक समाजिक अप्राद मनलगिल
- 18:00–18:05उ चोब पीडी बाद एक ता सम्मन अतियासिक तत्त्ध बंगेल, इस चच्मुच अदबुट चे.
- 18:05–18:09आप, इस पूरा तत्ध है उही पवित्रता के मिथाक के तोडे चे,
- 18:09–18:12जक्रा बहुत लोग आजुक समय में सच्माने च्तिः.
- 18:12–18:15इपन्जी व्वस्ता कषब्सा आखर्षक पहलू चे
- 18:15–18:19तई पोथी कोनो परिवार के नीचा दिखाईबाक ले नोच है
- 18:19–18:24बलक्ल नहीं, बलकी अटीट के एक तब बहुत ही मानविय द्रिष्टी कोन से बुज्वाक ले लचे
- 18:24–18:33कोनो लोग यी नहीं कही सके चती जे आमुख परिवार कलंकी चे के एक तप पनजी स्वयम कहे चे जे चथम पीडिक बाद सब शुद्द बहोगेल.
- 18:33–18:45इस समाजिक एकी करन अलचीला पनक एक ता एहन अतियासिक प्रमान चे जे दिखाईवे चे जे समाजिक नियम चाहे जठेक कथोर हो समाय आपीडियों के प्रभा सब किचुक के अपन भीतर समेट लेचे.
- 18:45–18:47एक दम सही कहली आ, हा.
- 18:47–18:59आजुक इच्र चा हम्रा सबह के लेल बहुत ग्यान वर्दख रहल, जे ब्लाक्बुक वा दूश्रन पंजी सलोक इत्तेग दरेच चला, वास्तव में कुनो ब्लाक्बुक चबी नहीं के लग.
- 18:59–19:05आप अब अन्त में जना की इगगन चर्चाक परमप्राचे, श्रोटा कि लिल एक तनव विचार चोडक जार है।
- 19:05–19:07आप अप अप ज़ुडी चे.
- 19:07–19:13जे देखावएज़े जे मनुश्शे हमेशासा नियमक परिदिसा बाहर निकलेत रहल चए
- 19:13–19:16अ समाज अंतत अख्रा अपना लेजचे.
- 19:16–19:20आब अंत में जना की इगज़न चर्चाक परमप्राचे
- 19:20–19:24शोटा किल एक तनव विचार चोडक जारहल ची.
- 19:24–19:31आई काली हम सब अपन जीवनक हर हिस्सा दिजितल रुप सद्दज करहल ची
- 19:31–19:37शोषल मीट्या पर दीटा बेस में हमर हर क्लिक अस्सर्च रिको़ड बहरहल चे
- 19:37–19:40आई यसब एक ता नुव पनजी हे तगयार करहल चे
- 19:40–19:58एक दम, सो चु आजुक साथ ससाल बाद जगन भविश्षेक इतिहास कार हमर आहाग इदिजिटल पनजी खूलता, तकी ओज़्म्रा सबख जटिल आमानविए भूल्चुक के बुष्टा, वा कुनो भविश्षेक अलगरिदम का आदार पर हमर सब पर दूशन लगा दिता.
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कालपना करु चवूदहमाश विश्वाव्दिक मित्ला कुनु पएग गाँ। हां, जते दूईगोट शकती शाली परिवारक भीच विवाहक मन्डब सजल छे बलकोल अप पूरोहित मन्त्र पडी रहे ल्छत्छती, वर्वदूद तयार चती, मुदा अचानक आई एक तालपत्रक एक ता पोठा लेई का प्रवेश करेच छती आ, उलोक मात्र एक ता नाम देखेच छती पोठा किच पन्ना पल्तेच छती अप पूरा विवाहक अनुश्चान के रोक देच छती आ, आश्चर अग बात इचे जे इख़ों ब्यानक अप्रादध करन नहीं बारहे लचाए बलकी दूटा परिवारक, भीच, रक्त, समबनदध एक ता जटिल गन्तिय गननाक आदार पर भेर रहे लचाए एक दम सही आजुक एक गहन चर्चा कोंण सादारन विषे पर नहीं चे नहीं, इबहुत विशेश चे, हमर श्रोथ समगरी चे, गजेंदर ताकृर दवारा लिखित, दिकोडिं दपंजी अप मितला, वल्युम सिक्स, जे विशेश रूपस, मितलाक रहस्यमए दूशनक पंजी परादारी चे. आयाते इस पष्ट कोदेनाई बहुत जरूरी चे, जे इचर्चा कोनो पुरान अटिहासिक कलंके नवहत्यार बनेवाके लेग भिल्कुल नहीं भो रहल चे. आ, मैंने एक कर उदेश यी बुजाब चै, जे सैंक्डो साल पूर्व जकन नहीं कोनो क्मटौटर चलिक, नहीं कोनो अख्सल शीट, तकन हमर समाज वन्शावलिक ये तेक विशाल डेटा बेस कोना तैयार के लग, अग्रा कोना प्रबंदित के लग. जान्कारी से प्रेम रक्बलाज जिग्यासू लोकनिक किलेल इक टा अद्बूत यात्रा चे. इमात्र वन्शावली गबनाई चे. नहीं, इविवाह, प्रवासन, आमानविय समवन्दक एक टा एहन वेवस्ता चै, जे शताब्दियों से सुरक्षिट चै. ता आव एक रानीक जका दिकोड करी. आप सब से पहले एबुजी जे एपूरा पनजी विवस्ता अखिर शूरू की एक भेल, अब बिना कोनो आदूनिक तकनीकक इस समबव कोना भेल. देखु, इव्यवस्त्तक शुर्वात समाजक एक ता बहुत व्यवाहारेक समस्याक समदान चल. जगन समाज चोट होईचे, तलोक मोकिक रूप से आपन पाथ सात पीडी की तिहास मोन रखईच छती. आप, उद वो मोकिक याद दाश्त से का चली जएच? बलकुल. तद 1326 इस्वी माने शाका बारा सुवार्त्तालिस में, करनात वन्शक महराज रही सिंदेव का समय में, मित्लाक विद्वान सभी महसुस केलनी, जे समाज इत्ते पैग बहगेल चत, जे केवल मोखिक परमपरापन निरभर रहभ खतरनाक चे. खदरनाक, एह लेल जी सगोत्र्वा सपिंद मने एक ही रक्त समबन्द मे विवाग दर्चल. आप, उही सब बच्वाख लेल एक ता लिखित सरवजनिक अभिलेक विवस्ता का अवशकता महसुस क्यल गेल, जिक्र हम सब पनजी विवस्ता कही चिये. मदाज़ा हैक्रा आजुक संदर्ब में देखी, ता यह एक ता बहुत पैग प्रसासनिक चुनोती बुजाई ची. एक दम बहुत पैग चुनोती. जैना जग कोनो लोक के ईने पता हो एन, जो उनकर परदादी कखकर भेटी चली, आँ कोनो अन्जान गव में विवाग करे जारा हल चती तो उकर सतिता प्रमानित कोना होई चल आआ, एते सब पंजी कारक बूमिका शुरू है च्या? हमरा एब उजवा में बहुत दिल्चस पीच आई जे उही समय का जे पंजी कार चला उई काज कोना करे चला के थो हुंकर लग सर्ज बटनत चल नाई, जे नाम ताईप केलनी अपुरा खंदानाक लिस्ट आबीगल? नाई. उआहें नाई चल. स्रोक सामगरी इए अस्पष्ट करे चे, जे एकर लेल पंजी कारक एक ता विशेश वर्ग तयार केल गल, जकर का चल वन्शावलिक तालपत्रक पोठी के अद्यतन रखभ अविवाह से पूर्व गडना करब मने जकन कोनो विवाह तई होई चल तो दूनो पक्ष पंजिकार लगजाई चला आप पंजिकार वर आ वदुक मात्रिक अप्पेट्रेक पीडी की गडना कर इत चला तो इगणना कुना हो यचल? इदेखल जाए चल, जे माता कदिस्सच कम सकम पाच पीदी, आप पिता कदिस्सच साथ पीदी दरी, कुनो समान रक्त समबन्द तद नहीं चे. बापरे, मने एत्तिक पाचा दरी जा के चेकल जाए चल. आई, आई पुरा गणना भेलाक बाद ही पन्जीकार एक ता अस्वाजनी पत्र वस सिद्धान्त पत्र निरगत करेत चला. बुजलिये इता एहन भेल जना गामक कोनो बूजुर्ग सनाता रिष्ता पुच्वाग बजाए विवाह लेल एक ता स्टेट इशुट पास्वोट वर देटाबेस अनिवार्र का दिल गिल हो. बहुत निक उपमा चाई, बिना उही पास्वोट अक कोन विवाह मान ने बहसकई चल. आ, सिद्धान्त पत्र वास्टब मे उही गनिती ए गननाक अन्तिम परिनाम, या कहुत अ नो अज्छ्छन सर्टिटिकर चल. मुदा एक ता प्रश्न चे, कि यी एटिक पैक वेवस था, मात्र एक ता खास वर्ग, जेना ब्राम्मन लेल सी मिच्छल? आहा, यी एक ता बहुत समान ने ब्रानती चै. गजेंद्र थाकुरक स्रोत अनुसार, अपक वेवस्ता चल? बलकोल ये एक ता विस्त्रत प्रशासनेक अ सामाजिक प्रनानी चल जे कर पूरा भगोलिक शेट्र में लागुकल गेल चल आज जते दरी हाजारो नामक्ध बिना क्मपुटरक खोजबाग बाच्च है अखरा लेल पंजिकार सब एक ता विष्छ्ट व्याक्रनक निरमाड की निचला व्याक्रन? विवाक का निरना लेल मात्र व्यक्तिक नाम काफी नहीं चल की? ना! नाम समात्र नहीं हो इच्छल उक्रा एक ता विशाल भगोलि का एतिहासिक नक्षा में खुज़ब जरूरी चल. तव उ नक्षा बहुतिक रूप सक कोना काज करे चल. माने जै हम कोनो प्राची न देटा बेसक बात कर रहल ची, तो उकर कोनो नक्चोनो एंटेक्सिंऽ्टमता हेभे करत, जक्रासा उपोठा में सही पन्नादरी पहुची सकती, उकर व्याकरन की चल? रह! उही अंटेक्सिंच सिस्तम के भुज्वाक लेल. पन्जीक सात प्रकार के भुजब आवष्षक चे. सात प्रकार क्पन्जी होई चल? रह! श्रोत में एकर वरनन, मुल शाखा, गोत्र, पत्र, दूशन, उतेद, और अस्वाजन्ने पत्रक के रूप में काईल गेल च्या. ता इस अब �alagalak श्रेनिया च्याए. बल्ल्कुल यता है गोत्र कर अर्थ चे प्राचीन वन्ष भोदख, जे कोनो प्राचीन रिषिक नाम सा जुडल होईत चे, मुदा सब समहत्झपों अंटेक्सिंच तूल चिल मूल. मूल मने जे रूट होए चे? हा, मूलक अर्थ भेल, उप्राचीन वन्ष मूल, वह उ पहल गाम जतेऊसा कोनो विशेश वन्शावलीक शूवात भेल तश्रोथ में कतिक मुलक चर्चा चे मेत्हिल ब्राम्मड में भीज गोत्र आ एकसो सरसत मुल दर्ज चे एकसो सरसत मुल बाप्रे आर प्रत्तेक वन्शावलिक एक ता भीजी पूरुष होईच्छि भीजी पूरुष माने की माने अपहल गयात पूर्वज जतेसा औही वन्शक गडना अदिकारी क्रुप सो शूरूइच्छे एति हम एक ता उप्मदव को एक रा समज वाचा हा इत यह ता एक ता विशाल कमपुटर नेट्वरक जगाम बहल आए एक दम सही गोत्र भोगेल एक ता पैक डोमेन और मूल भोगेल उकर रूट डारेक्ट्री जो तेईसा सब ता फाण निक लेएच चाहे बिल्कुल, उहना काश करे चल है मुदा एकta विवारेक प्रशन अथेच है, मानी लिया जे कोनो परिवार आपन मूल गाँ चोडी सोकोस दूर आबी बसल, तकी उकर मूल बदली जाच्छल? नहीं, एप बहुत सतेक प्रशन चाए. जिना लोक आपन शेहर बडलेच है, तो उकर पता बडली जाच है. तकी पनजी में से हो नवगामक नाम पर नव मूल बनी जाच चल. देखु, पनजी वेबस्ताक सब सबहल विषेष्ता इच्छल, जे अस्तानान्त्रन का बादो मूल नहीं बडलेच चल. आचा, मने उ फिक्स रहेत चल. आचा, स्रोथ एक रा स्पष्ट करेत चै, जे भुगोल हे वन्शावली चै. जकन लोक आपन मूल गाँ चोडी दो सर ठाम बसला, तनव मूल ग्राम वश्शाक्खाक जन्म भेल, मुदा प्राषीन मुल हमेशा सुरक्षित रहल. अगर कुनु उदारन चाय स्रोथ में? आआआआआआआआआआआआआआआआआ जेना मानडर मुलक लोग जखन दोसर ठामगे लाई तगगर आममंग्राँनी शाखा बनल मुदा उसब कहलाउ ता मानडर मुलक है आआआआआ, मुझे लिए ये ब्हेल जे प्रवासनक बादो सक्डो सालदरी रिष्ताक प्यचान बहुऽ सके चल. बलक्ल. मुल एक ता एहन रूट चै, जे अस्थानान्त्रनक बादो कोनो व्यक्तिके उकर प्राचीन इतिहास आब होगालिक उद्गमसन जोड कर अखाए चे. उदेता बे सक नियम आवकर सन्रचना, मुदा हम सब जाने ची, जे मानविय जीवन कोनो स्प्रेट्शीट तचे नहीं. एक दम नहीं, मानविय जीवन बहुज जतल होई चे. जतल नियम होई चे, उते नियम तुटैइत से होचे. लोक नियमक बहार जाक विवाह करेथ थी, प्रेम करेथ थी, दोसर समुदायक संज समपरक में आबे थी. आई, यी तो समाजक वास्ट्विक्ता चाई. आज समाजक वास्ट्विक्ता उही कदोर गनित या नियम सा, हमेशा तकराए चे. आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� � वाद्वालाईज रपचर कहे च्छाए वन्सा मे आईल चीर माने जते सकोनो ब्रेक आईल हो आँ ये उ जगछ आज़ जते कठार नियम आम मानविय जीवनिक जतिल ताक बीच तक्राउ बहल समाज कह चल जे विवा हमुक-मुक नियमक अग्यात्वन्च्छ दोसर समुदाये कि कन्या वा विद्वाविवास्व कोनो सन्तान बहल तो अख्रा पनजी सब बाहर नहीं किल गेल अच्छा अख्रा बाहर नहीं किल जाएच्छल नहीं बलकी अख्रा दूशन पनजी में दर्ज किल गेल कोनो सन்तान भेल, तो उक्रा पनजी सब बाहर नहीं कियल गेल. आचा, उक्रा बाहर नहीं कियल जाएच्छल. नहीं, बलकी उक्रा दूशन पनजी में दरज कियल गेल. मुदा एक्रा दरज करभा कुद्देशिख की जल. सादारन रुप से लोक यी सुच्ता, जे यी पन्जी मात्र एक ता ब्लाक्लिस्चल, जो करा सा नियम तोडे वाला लोग के निचा दिखा लिए जा सके. इदूशन पन्जीख बारे में सब सब पहे गल्त फहमी चे. मैं इप रिवार के समाज सक काटबाक हत्यार नहीं चल. बिलकुल नहीं. स्रोथ्त के गेराए सब पडला पर पता चले चे, जे यी बहिष्कारक नहीं, बलकी समावेशनक, मने अबजोप्षनक दस्तावेश चे. इदो बहुत नवद्द्रिष्टी कोंच है. हाँ. जा आहा एक्रा ब्लाकलिस्ट मानब, तए एकर अस्ली काज के नहीं बूजी पाएब. एक रा एक ता, सुझ्ट्वेर बुग्ड्ट्राकर, वा एक स्थ्ट्व्छन लोगजका समजू. मने जाते सिस्टम में कुनो एरर आवी गेल, अकर त्राक करब. एक दम सही. जक्रा पंजिका बाशा मे उतेड कहल जाएचे, तब पंजिकार के इभुजनाई आवश्यक चल, जे वन्ष मे कतेख से नव तत्व आयल चे, ताकी गरना सतीग भह सकया. तमने इदूशन पंजी कोनो गप्षाप वा अप्वाजक पोठी नई चल? अख्रा बिना कोनो उतल पुतल के अटिहासिक तत्या के रूप में दर्ज कयल जासकई. इतस शच्मुच कहीर बाच्छ है. माने समाज उही गटना के नुका कर नहीं रक्टा है. अख्रा बिना कोनो उतल पुतल के अटिहासिक तत्या के रूप में दर्ज कयल जासकाई. यक ता देटा कोईंट के रूप में मुदा जकन हम इस्रोत पडी रहल चलूँ ता एक ता बात बहत इस पष्ट रूप से हमर द्यान अक्रिष्ट के लक इदूशन अदिकाश ता महिलाक माद्धिम सब पनजी में दरज भेल चे वजल्येने पन्जी वेवस्ता मूल रूप सब पूरुष्प्रदान चे जते बाप से बेटा कवन्चावली चलएचे मुदा जकन नीम तूटेएचे तो उकर निशान प्राया महिलाक माद्धिम सदरज होईचे इकोना संबभ वेल मुदा जखन नीम तूटेइ चे तो उकर निशान प्राया महिलाक माद्ध्धिम सदर जोईचे. इकोना समबभेल. दिखु, तूश़ पनजी में बार-बार मात्ट्रिक सुता, जे करा भेटी कहल जाएचे, पतनी और दोहित्र, अज़्ित्र माने बेटिक भेटा जकान शब्द अबएच तब एकर मतलप ज़ महिलाक माद्धिमसा चिन त्रैक केल जाच्छल यद्यपी मुख्यपनजी पूरुष प्रदान दाचा पर थार चे मुदा जकन के होग वन्ष में कोनो चिन वर रप्चर आईल तव उकर पहचान अकसर माता वा पतनिक वंष्का अग्यात हेबासा वहुंकर दोसर समुदाई साविल हेबासा जुडल चन. तव महलाक उलेक के बिना, उही विसंगती के ट्रैक कर अप समबवने चल. एक दम सही. मुदा एता ही हमेक्ता बात पर द्याना कर्षन करे चाःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःःः ये शब्दावली के कुना सबष्ट करे चती. ये एक ता बहुत स्वाभिक प्रतिक्रिया चै, जे आजुक समय में उशब्द कटोर लागाए. मुदा स्रोथ समगरीक अद्द्यन करे द्काल, लेक्ध एक ता मानव शास्तरी है, मैंने अन्त्रोपालोगीकल द्रिष्टिकोर रके चत्छती। माने इतिहासकार क्नजर्या से देख़ा। अआ, इतिहासकार वा अद्देता काज उही शब्दावली के दोराय कक्रो अप्मानित करभ नहीं चे, बलकी उही समएक प्रशास्निक असमाजिक दाचा के बुज़ब चे ते जखन स्रोत अग्यात माता कहे चे, ते एकर की अर्थ भेल? जखन स्रोत अग्यात माता कहे चे, ते एकर अर्थ एई नहीं जे उस्त्रिक समाज में कोनो अस्तित्वा नहीं चल. एकर अद्त इच है जे पन्जी विवस्ताक कथोर प्रशासनिक दाचा उही स्रीक परिचे के अपन पूर्व निर्दारित कोलमिन नहीं बान्सकल. अच्छा मैं उउ सिस्टमक लेल अब्ट्लायर चलिन समाजक लेल नहीं? एक्दम, उ अग्याट चली, उई सिस्टमक लेल, समाजक लेल नहीं. इश्वद उईशमै कः प्रशासनित लेबल चल. आ, सब से महत्टवों बातिया. जे एह महलाक उलेक के बिना, इपुरा वन्शावली लिखब असमबचल. बाप्रे यी तबहुत महतु पून गब चे आँ एही विशाल भवन को ही अद्रिष्य नीव के इईट जका चली जकर भिना दाचा खसी परेत आँ एक ठबाता और किछ महिला कनाम तबहुत सबष्ट रूप से एही अविलेक में दर्च चे बिलकु दर्च चे जैना हादिनी, रुद्रमती, आनन्दावल्लबा, मेदा, चामपो, इनाम सब सद्यों से सुरक्षिट छे. आँ, उ मुख्य नियम से बहर चली, उ दूशन पनजी में दर्जबेली, मुदर सोचुजे, अकर परिनाम इभेल, जे चोदामा वप पंद्रामा शताब्दिक इमहिला सब इतिहास का पन्नामे हमेशा लेलमर बोगे ली. इतेक ता बहुत पैग विडम्मना चे, मुदो बहुत सुन्दर बाथ से होचे. उएक ता प्रमानच्यती जे समाज में निमक बावजुद मानविय सम्मद अपन रास्ता निकाल लिबे करे चल. इमहिला सब उइ समाज का वास्त्विकता चली, जते कतोर निम आम मानविय प्रव्रित्तिक भीच हमेशा खिचाव रहित चल. आजे विद्वा विवावा वा पत्पतीता जका शब्द चाई आप, उई प्रमानित करे चे जि समाज आपन पाबंदिक बादो एहन सम्मत के पुरा तरा से मेटा नहीं सकल. उक्रा दर्ज करे परल, अदर्ज कर बाक मतलप चे उक्रा स्विकार करब, बहले इक्रा दूशन कर नाम देल गेल हो. इस पष्टी करन बहुत किछ बदली देच है, मुदा आब हम उही प्रष्न परभए ची, जे इपुरा चर्चा केंद्र चाई की इदूशन इस्थाई चल? आ, इबहुत महेंत्वपून करषने चे. मने जो कोनो इस्ट्ट्री कारनवा, कोनो अन्तर जातिये विवाह कारन, कोनो वन्ष में दूशन लागी गेल, तक उ परिवार हमेशा लेल अचुत वा कलंकित भोगेल की समाज में उक्रा लेल कुनो मापी वाप्सी कराश्ता च्याल? देखू, इदूशन कोनो स्ताई मोहर नहीं चल. आए दे, इश्रोथ अपनो सबसम महत्वपून अग्क्रान्तिकारी रहस्ये कोले चे. की रहेसे? श्रोद इस पष्ट करे चे, जे ब्रामब्र समाजक अन्ने समुदाय, जेना दलित, कारीगर, चमार, रजक, अ यहादर जे यवनी, माने मुसलिम समुदाय कसंव समबंदक लिखित प्रमाँण अही दूशन पनजी मे चे. अगी समवे में मुस्लिम समुदायक संख समबन्द से हो दर्ज चल जिना यमनी दोलती जँहा चामपो यमनीज का नाम दर्ज चे इसब अग्यात वा अन्ने श्वेनी में दर्ज बहल इत बहुत आश्चर यक बाथ चे मुदै इप्रमानित करे चे जे ओ समाच पूरन रूप सा बन्द वा प्योर नहीं चल, जिना की अकसर मिखक गड़ल जाएचे. लोकक के विवाज समपरक अप्रेम होत चल. एही सब के समाच वापस अपन भीतर सोखी लेट प्योट ने अबजोब करे चल. अग, बिल्कुल तव उ सुखबाख वा अवशोशिट करवाग नियम की चला कते क समें लगे चल एक तक कलंग के इतिहाज बन वा में एक राश श्रोथ मे चथफम पीडी वा शिक्स्थ जैनरेशन कर नियम कहल गिल चे चथफम पीडी? अग, उदूशनाग प्रुनता शुद्दा बहुजाईचा पूरनता शुद्दा मैं एक दम प्योर इक दम प्योर मैंने, अव वन्ष समाज में पूना पूरी तरह से अवशोषिद भजाईचाल पूरनता शुद्दा मैं एक दम प्योर एक दम प्योर मैंने अववन्श समाज में पुना पुरी तरह से अवशोषिद बहजाई चल औव परिवार फिर सा मुख्यदारक समान ने विवाह समबन्ध मे आभी जाई चल अदे चाँ बगती चोदाम सताबदी में कुनो भीवादास्पद भीवाज के लक, तो और पर पर पोटाख पोटादरी उही समाजिक टैक्स के चुका रहल चें. बलकल. मुदा अंतता? अन्तता? मुदा अन्तता सलेट साथ बजाए चे जे आई भ्यानक समाजिक अप्राद मनलगिल उ चोब पीडी बाद एक ता सम्मन अतियासिक तत्त्ध बंगेल, इस चच्मुच अदबुट चे. आप, इस पूरा तत्ध है उही पवित्रता के मिथाक के तोडे चे, जक्रा बहुत लोग आजुक समय में सच्माने च्तिः. इपन्जी व्वस्ता कषब्सा आखर्षक पहलू चे तई पोथी कोनो परिवार के नीचा दिखाईबाक ले नोच है बलक्ल नहीं, बलकी अटीट के एक तब बहुत ही मानविय द्रिष्टी कोन से बुज्वाक ले लचे कोनो लोग यी नहीं कही सके चती जे आमुख परिवार कलंकी चे के एक तप पनजी स्वयम कहे चे जे चथम पीडिक बाद सब शुद्द बहोगेल. इस समाजिक एकी करन अलचीला पनक एक ता एहन अतियासिक प्रमान चे जे दिखाईवे चे जे समाजिक नियम चाहे जठेक कथोर हो समाय आपीडियों के प्रभा सब किचुक के अपन भीतर समेट लेचे. एक दम सही कहली आ, हा. आजुक इच्र चा हम्रा सबह के लेल बहुत ग्यान वर्दख रहल, जे ब्लाक्बुक वा दूश्रन पंजी सलोक इत्तेग दरेच चला, वास्तव में कुनो ब्लाक्बुक चबी नहीं के लग. आप अब अन्त में जना की इगगन चर्चाक परमप्राचे, श्रोटा कि लिल एक तनव विचार चोडक जार है। आप अप अप ज़ुडी चे. जे देखावएज़े जे मनुश्शे हमेशासा नियमक परिदिसा बाहर निकलेत रहल चए अ समाज अंतत अख्रा अपना लेजचे. आब अंत में जना की इगज़न चर्चाक परमप्राचे शोटा किल एक तनव विचार चोडक जारहल ची. आई काली हम सब अपन जीवनक हर हिस्सा दिजितल रुप सद्दज करहल ची शोषल मीट्या पर दीटा बेस में हमर हर क्लिक अस्सर्च रिको़ड बहरहल चे आई यसब एक ता नुव पनजी हे तगयार करहल चे एक दम, सो चु आजुक साथ ससाल बाद जगन भविश्षेक इतिहास कार हमर आहाग इदिजिटल पनजी खूलता, तकी ओज़्म्रा सबख जटिल आमानविए भूल्चुक के बुष्टा, वा कुनो भविश्षेक अलगरिदम का आदार पर हमर सब पर दूशन लगा दिता.