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मिथिलाक_पाँजीक_वंशावली_जाल_आ_डिकोडिंग.m4a
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- 0:00–0:06आई हम सब दिकोडिंग तपानजी अप मिठिला वलुम तीन पर चर्चा कर रहल ची,
- 0:06–0:12जे मिठिलाक वन्षावलिक जटिल नेट्वर्क का एक ता बहुत विस्त्रित विष्लेषना ची.
- 0:12–0:15रहा, ये बहुत गहीर शोद है ची.
- 0:15–0:21उगड़ा मतलब इप पन्डूलीपी पड़ाईत काल, हमरा सबसे पैग समस्या ही लागल,
- 0:21–0:25जे अथ्यदिक द्रिष्य आव अस्तानिक सम्मद के बुजेबाक लेल,
- 0:25–0:29आहा पुरन रूप्सा केवल गद्य पर निरभर कैनेची.
- 0:29–0:29एक्दम!
- 0:29–0:33रहा, इक तब बहुत, महत्वोपुरन अवलोकन अची.
- 0:33–0:37जकन हम, एही समगरिक विष्लेशन करहल चलो,
- 0:37–0:41तफम देखला जे लेखख सपष्ट रूप सवरनन कहने चती,
- 0:41–0:44जे पानजी कोनो सीदा वन्शावली नहीं अची.
- 0:44–0:46मने इग कोनो सीदा लाईन नहीं आचे.
- 0:46–0:48नहीं नहीं इग ता जाल आचे,
- 0:48–0:51जटै बेटिक माद्धिम से समबंद,
- 0:51–0:55ववेकल पिक शाखा गावोक विवाज मारगक दिषात आगटा ची.
- 0:55–0:57अई, उही सुत अपर्वाल अगप.
- 0:57–0:58बिल्कुल.
- 0:58–1:06मुदा जखन एक्रा केवल लिखेल शब्द्ब माद्धियम सब्रस्थ। कईल जाएता चिए ता पाथक के बहुत बेशी मान्सिक कस्रत करे पड़ाईता चिए.
- 1:06–1:09हमरनुबवब से हो एक दम एहन हो रहाल हो.
- 1:09–1:14माने जखन हम अद्याय नोव में प्रविस्टी एक सचाचाउदा दरी
- 1:14–1:20सरिसब सकरी पही तोल सलोग कडरहरा आसोदर्पूर्टक के गप पड़े रहल चला हूँ.
- 1:20–1:22खंदबल्ला दरीक के नेट्वर्क से हूँ?
- 1:22–1:25रहा, खंदबल्ला दरीक नेट्वर्क.
- 1:25–1:33अकर वरनन केवल पराग्राव में पड़ेत काल, हमरा अपन मात पर बहुत बेसी संज्यानात्मक बार महसुस भवेल.
- 1:33–1:35हा, मात बहारी बेजाईता छी.
- 1:35–1:38मतलब ये एक ता नक्सा आची, मुदा बिना कोनो छित्रक.
- 1:38–1:41इत सोट्वेर के कोड पडबाजा कभ होगे ला?
- 1:41–1:44इक दम होईना जदे अदफुट देखाए नहीं रहल होई
- 1:45–1:48हमरा एक संगे बहुत रास गब याद राखे पडी रहल चलूं
- 1:49–1:51जे कुन गाम सग, कुन साखा कते मुडल
- 1:51–1:54आगा एे कोडिंका साद्दरिष्य बहुत सती कची
- 1:55–1:58आगा कदिमाग एक संगे गाम और साखा
- 1:58–2:03अब आद्टीक के माद्टीम सभेल वन्ष परीवर्तन के ट्रैक करभा कोशिष कर रहाल चाहूं
- 2:03–2:07मुदा पाथ उक्रा एक रेखिय रुप में प्रस्थूत कर रहाल चाहूं
- 2:07–2:09जब भुजबा में बहुत कतिन आची
- 2:09–2:10रहां
- 2:10–2:16मस्तिष्क्के स्थानिक जान्कारी के रेख्या गद्यमे संसादित करभा में बहुत उर्जा लगा या तची.
- 2:16–2:18मुदा एक ता प्रश्न अच्छ?
- 2:18–2:18की?
- 2:18–2:25जा हम साग एही एतिहासिक धस्तावेज में, नोड और ब्राव्च आरेख या डायग्राम जोर देभ,
- 2:25–2:29तकी इग कोनो आदूने कोरप्रेट फ्लोचार जगका नहीं लागत?
- 2:29–2:31आँ, हमरा नहीं लागे तच्छे,
- 2:31–2:33जे गंविरता कम हैत,
- 2:33–2:38इग ता निक तर कहत जे एतिहासिक पाट्धेक पवित्रता बनल रबाक चाही.
- 2:38–2:42हा, लेक्षक कषे हो ही उदेष्बुजा एत च्छी.
- 2:42–2:49सत्ते बात अची, मुदा हमरा एहो भूजबावश्यक कचे जे मुल पानजी अपने आप में एक टेटा बेश चल.
- 2:49–2:51औह औह, हाँ, एट छै.
- 2:51–2:54पन्जिकार सब जखन एक्रा लिख़ चला
- 2:54–2:58तो उ साब एक्रा एक्रा एक्ता विषेश तरीका से दरज करे चला
- 2:58–3:28उगर उगर बाज़ाग तो बाज़ागी बाज़ागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो बाज़ागी तो बाज़ागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वो
- 3:28–3:30अदे यागरामक आवशकता चे
- 3:30–3:32कोनो विसिस्त उदारन आची यावबग
- 3:32–3:34जैना आवक समगरी में
- 3:34–3:36प्रविष्टी एक आची
- 3:36–3:38जते शक्तिनादख वन्शावली
- 3:38–3:40दरहरा और सोदर्पृर
- 3:40–3:42और करमक भीज गूमाइत आची
- 3:42–3:44आवतम बहुत उडजन बवजाइत आची
- 3:44–3:46भीज भीज गुमएत आची
- 3:46–3:48अवतम भुद उलजन भोजाई तची
- 3:48–3:50आप फेर प्रविष्टी आखारा में
- 3:50–3:53राजा विज़े गोविंद सिंगक मारग का वरन आची
- 3:53–3:56उताई एक ता चोट विज्वल डाइग्राम देल जासगाई तची
- 3:56–4:03अप भी बजी रहाड़ थी ज़ेखाग पहने येख निक्ली रहाड़ थी अप पाथ में पाथ में नहीं पाथ पाथ पहने अही डाइग्राम के देखख कर एक दीशा परिवरतन कते हुबे वाला थी.
- 4:03–4:11अं बूजी रहाल ची. जब पाटक पहने ये सा देख ले जे आमुख ठाम सा तीन ता वेकल पिक शाक्ठ निकली रहाल ची, ता ओ पाट्ठ मे नहीं फसत.
- 4:11–4:17आँ पाटक पाट पड़ा सा पहने उही डाएग्राम के देख कर एक ता मान्सिक चित्र बना लेद.
- 4:17–4:21अगरा पहने से बूजल रहा जे दिशा परवरतन कते हुबे वाला जी
- 4:21–4:25बलकु, अजकन उ उही मानसेख चित्रक संगे गद्धे पड़द,
- 4:25–4:28तवख्रा शब्द और भीसी सपष्ट लगत
- 4:28–4:31उगड्ध्या अखरा केवल जानकारी नहीं देद
- 4:31–4:34वल की उही डाइग्राम का व्याख्या जका लागत
- 4:34–4:38इग्रा सा पाथक द्यान भद्केबा कोनो समभावना नही रहत
- 4:39–4:45इबात तस बश्ट बहुगेल जे विज्योल डाइग्राम पाथक के लेल ये लिक ता बहुत पएग मददद बहुसके चे
- 4:45–4:47हा निष्चित रूप सा
- 4:47–4:52मुदा, आहा हमरा एक ता दोसर समस्या सा हो नजर या बी रहाल चे.
- 4:52–4:53की समस्या?
- 4:53–4:57मानी लिए जे हम सम डायगराम दे दिलिये, वा नक्षा बना दिलिये.
- 4:57–5:03मुदा जा पाथक के, औही नक्षा प्रतीक चिन्ध भुजबा मे नहीं अबेच छै, तो की फएदा?
- 5:03–5:06अ, प्रतिक छिन तो बुज्बा आवश्वक अचे
- 5:06–5:10जकन हम क्हन्द दूक अद्याय नोसा दीकोडिंग शुरू कैला
- 5:10–5:14ता हम्रा लागल जिना हम्रा कोनो गेर पानी में दھकेल दिलगेल होई
- 5:14–5:20अगा के इशारा अद्याय एकसा आट्थदरी दिल्गेल नियमक दिश अचीने?
- 5:20–5:25एक दम. अद्याय अद्याय अट्थदरी लेक्खषब्दावलिक बहुत नियम देल अची.
- 5:25–5:27अग, सब नियम वही अचे.
- 5:27–5:31मुददजकन अद्द्याय 9 सा वस्तविक दीकोडिं सूरू होई चे,
- 5:31–5:33तलेक्हक मानी लेद चतिन,
- 5:33–5:35जे पात्हक के उसब नियम मुजेवानी याद आजचे.
- 5:35–5:37इक ता बहुत पैग चलाँग आचे.
- 5:37–5:40इक ता बहुत सादारन अकादनक भूल आचे.
- 5:40–5:41माने कोना?
- 5:41–5:47मैंने लेक्हक अपन साम गरेक संगे एक देख बेशी समय भिताएद स्थी,
- 5:47–5:50जो उक्रालेल उन्नियम द्वित्यस्वभाव बहजायतची.
- 5:50–5:55हूंका लागच्चनी जे जैना हूंका सबता प्रतिक्चन याद ची,
- 5:55–5:57औहना पात्ख के से हो याद रहेत.
- 5:57–6:03मुदा, शुदकरता, पाथख, एह पुस्तक के कोनो उपन्यास जगा पन्नादर पन्ना नहीं पड़ेत चीने?
- 6:03–6:07बलकुल नहीं, उसन्दर्ब ग्रन्त जगा एक रा भीच सा खूलेत चीए.
- 6:07–6:11हमर विचार सत एकर समदान बहुत असान अचे.
- 6:11–6:11की?
- 6:11–6:15किताबक अंत मे एक टा गलोसरी वा शब्दावली दोदिल जैए
- 6:15–6:17जिन शब अकाद मे किताब मे होएत चे
- 6:17–6:21पाथक हो तेस देख लेद जिक कुन प्रतीक की अर्थ छे
- 6:21–6:23मुदकि यो पर्याब तहेत
- 6:23–6:28कल्प्ना करू, जे आहा अद्धाई इग्जारा मे दिगुंद कलस्टर होजी रहल ची.
- 6:28–6:30आहा दिगुंद कलस्टर बहुत जटी लचे.
- 6:30–6:35आहा थेसर लाइंग पर आहा की किताप के अन्त्मे पन्नपल्टे पडा था ची.
- 6:35–6:38इस संज्यानात्मक गर्षन पैदा करे तचे.
- 6:38–6:40अहो, हा, आहा की कह रहल ची?
- 6:40–6:44आहा क द्यान वन्शावलिक गुड रहस्से सहत्टके,
- 6:44–6:47केवल शब्दक अर्थ खोजवा में लागी जैत.
- 6:47–6:52इए ओहिना भोगे ले, जेना आहा कोनो विदेशी भाशाक फिल्म देखी रहल ची.
- 6:52–6:56आहा डालोगक लेल हम्रा शब्द्खोश पल्टे पडी रहल आची
- 6:56–6:57एक दम
- 6:57–7:03हम माने ची जि बार बार पन्ना पलडवा बहुत जुंजलाहत पडदा कर सके तची
- 7:03–7:06तची आहा के की प्रस्तावचे
- 7:06–7:11आँ, हमरा लागेत आची जे एक्रा लेल किछु दोसर करव आवश्षक आची
- 7:11–7:15की निमक एक्ता पन्ना के हर अद्याय में बार बार चापल जाए
- 7:15–7:21उक्रा साथ पन्ना बरभाद हेत अग्ताबक आकार से हो औग कारन्ट पैग भोजाएत
- 7:21–7:24नहीं नहीं पूरा नियम नहीं चापवाची
- 7:24–7:26हमर केवाक अर्थ अची
- 7:26–7:29एक ता मानकी क्रित दिकोडिं लेजंट
- 7:29–7:32जे प्रतेक महत्वपुन क्लुस्टर अद्याय का शुर्वात में होए
- 7:32–7:34दिकोडिं लेजंट
- 7:34–7:40अग, जेना अद्या ए नाँ, वादस, या अग्यारका पहल पन्ना पर एक तचोट बोक्स हो.
- 7:40–7:44आग सामगरी में एक ता इंटेक्स लिंक बोक्स पहले सा अची ना.
- 7:44–7:46अग, उो इंटेक्स लिंक बोक्स ता अची.
- 7:46–7:50बस उकर थीक नीचा एक तचोट सनबोक्स जोडल जासके तची
- 7:50–7:56जाए में लिखल होई जे सूथ मने बेटिक माद्धिम से संबंद
- 7:56–7:59राए और अपर मने वैकल पिक शाख हा
- 7:59–8:04और डोट डोट मने अग्यात नाम अशा मने स्रोट सन्दर्ब
- 8:04–8:10इक दम सही, मतलप किवल उही अद्धयाय में जे बेशी प्रयोग होगवे वाला प्रती कची,
- 8:10–8:12उकर एक तचोट सन सुची.
- 8:12–8:13बस एत बे.
- 8:13–8:15आ, बस एत बे.
- 8:15–8:18इचोट सन बोक्स पाटक के बधके पासे रोकत.
- 8:18–8:21एक रा ले पन्ना पीचा न नहीं पलताया परत.
- 8:21–8:23यह उप्योगिता के गब आची
- 8:23–8:25जकन पाथक उही पन्नापर आची
- 8:25–8:28उक्रा उते उकर समादान भेज्जिबाख चाही
- 8:28–8:30यह तो उईना भोगल
- 8:30–8:33जिना आहाक लग एक ता नवा भाशाग व्याक्रनत आची
- 8:33–8:35मुत शब्द्कोश पाचा शुटी गे लगछे
- 8:35–9:05अगी बोक्स उईज़़ शब्द कोशक एक तजीट शीट जे जे आहां कान्द मेराखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल �
- 9:05–9:12मुदा जकन हम ए नक्षाक माद्धम से यात्रा करोल चलू ता हमरा किच एन भिटल जे बहुत चोकाभे वाला चल.
- 9:12–9:14की बिटल हांके?
- 9:14–9:20मने समगरी में प्राचीन उपादी और आदूनिक व्यवसाई कुपादी दूनो एक संगे अची.
- 9:20–9:21हा अई तो चै.
- 9:21–9:25मुदहुंकर वरनन इत्तिक सपात विष्लेषनात्मक सवर में कैल गेला ची,
- 9:25–9:30जे हमरा लागल जना लेक हक एकर महत्वके नजर अंदास कर रहल चाती.
- 9:30–9:33रहां, हमरा बुजवा में नहीं आवी रहा लाची,
- 9:33–9:36जे हां एमे चोकावे वाला की देक रहा लाची?
- 9:36–9:38आखाक नहीं लागल चो कापेवाला?
- 9:38–9:45नहीं ताओ, पांजीत चार सो पचास इस्वी सिले के 2009 इस्वी दहरी अद्यतन होई त्रहला ची
- 9:45–9:49तेई स्वबहावी काची जे औही में दूनु तरहक उपादी दरज हैत
- 9:49–9:51आप, उता चे
- 9:51–9:55वैया करन आमी मान सक सिले के प्रोपेसर दहरी
- 9:55–9:59एकरा एतिहासिक रूप सी दरज करव, तलेक्ख का जा जा जीने?
- 9:59–10:04राँ, स्वाबहावे का ची, मुदा मतलप एकोनो म्रित एतिहास नहीं आची
- 10:04–10:09औह, औह, आजक अर्ख आची जे एकरा और निक से बतेवाख चाही चल
- 10:09–10:16अग, इत कोनो प्राछीं जन्त्र वा अस्ट्रोलेब में आदूनिक वीवेद्वाजका आची,
- 10:16–10:20जे इप्रमानित करे तची, जे इई आजक दिन्दरी उप्योग में आची.
- 10:20–10:23इबहुत नीक साद्रिश्या ची.
- 10:23–10:28जखन हम हाजार साल पुरान दस्तावेज मे आदूनिक नोक्रिक पद देखे ची
- 10:28–10:31तो एक तप पएग संस्क्रितिक बडलाव दिस शिशारा करे तची
- 10:31–10:33हाँ एक दम
- 10:33–10:39एक्रा केवल नाम आव उपादिक सुचिजका प्रस्थ। करब हमरा एक्ता अवसर गमेवाजका लगे तची.
- 10:39–10:42औग, औग, आब हम आहा कब भुजलहूं.
- 10:42–10:46आहा कह वची जे लेखख केवल देटा दरज करहल चतिन,
- 10:46–10:49उक्र सामाजिक अतिहाँसिक महत्टोके दिकोड नहीं करो हल चतिन.
- 10:49–10:50एक दम.
- 10:50–10:52उपादि सब कोना बदलल,
- 10:52–10:55उक्रा की कारन्चल इसब गप नदारा तच्छे.
- 10:55–10:58आप, जखन हम प्रविष्टी प्यटिस पड़े च्छी,
- 10:58–11:04जते, दीजी पी आशिक्षा मंत्री आशाहित्य सरोज जोहान उपादी आची.
- 11:04–11:09वाज, प्रविष्टी तेंटालीस जते प्रुफेसर आप मेठली लेखख के चर्चा आचे.
- 11:09–11:15तलेखख उक्रा उईना लिखिदेई चति जिना उ कोनो प्राषीन पन्दि तक उपादि है.
- 11:15–11:21मुदा इत मितलाक समाजक अदूनिक राज्ज नोकर शाही में प्रवेस के दरसा रहला ची ने.
- 11:21–11:23बिलकुल दरसा रहला ची.
- 11:23–11:28इत देखा रहा लाची जे कोना समाज के उच्वर्ग आपन पारमपरे ग्यानक छेटर सन्निकल का,
- 11:28–11:32आदूनिक प्रसासन आज्सिक्छा ब्यवस्था मे आपन स्थान बना रहा लाची.
- 11:32–11:36रहा आपन इगे बल उपादिक बडलाव नहीं आची.
- 11:36–11:42इज्यानक माप्दन्न मेवेल परिवर्तनक दस्ता वेज अच्छे
- 11:42–11:48मुदा अई हमे ते लेक्खक कपक्ष्सां एक जागब कहे चाहब
- 11:48–11:49के?
- 11:49–11:54शालत उआपना विष्लेशनात्मक स्वर कर जानी भुजी कर सपाट रखने चातेन
- 11:54–11:57ताके उद्तस्त रहे सकत
- 11:57–12:00उ इतिहास कार चतिन समाज शास्त्री नहीं
- 12:00–12:02आई इबात से हो आची
- 12:02–12:06उ केबल जे पानजी में दर्ज अचे उक्रा दिकोड कर आजा चतिन
- 12:06–12:08उक्र व्याख्या नहीं कर आजा चतिन
- 12:08–12:11हम सहमच जे ततस्तता आवश्चयक आचे
- 12:11–12:13मुदा ततस्तता क अर्थ इई नहीं आचे
- 12:27–12:31अगर संख्रतिक वजन के से हो दिकोड करब आवश्यक अच्ये
- 12:31–12:37जना पर प्रवाग लें चल, अखला में शिक्छा मंत्री वा दीजीपी जना पदक का की काज
- 12:37–12:39अगर सामाजेक अटिहासिक व्याख्या जोडल जासकी तची
- 12:39–12:41मतलब एक ता संछिप्त साराव्स जेगा
- 12:41–12:43आप ख़ब उपादी बतावाई सकाज नहीं चलत
- 12:43–12:45अखर सांस्क्रतिक वजन के से हो दिकोड करभ आवश्यक अचे
- 12:45–12:49अगर संस्क्रतिक वजन के से हो दिकोड कर अवश्यक अचे
- 12:49–12:53जेना प्रविष्ती प्यतीसक अन्तमे एक पाराग्राब जोड देल जाए
- 12:53–12:56जे यी स्पस्ट करे ये कोना पांजी जे पहले केवल
- 12:56–12:59दर्बार आ अनुस्तानक अपादी दर्ज करे चल
- 12:59–13:03ये बतिबाक लेल जे मित्हिलाक समाज में सम्मानक मान्दन्द कोना बदल लगची
- 13:03–13:06ये इक तब भेहत्रीन तरीका आची
- 13:06–13:10ये पाथक के उप्रष्नक उट़्र देद जे करहाम सब कह़ चीजे तक्की बहल
- 13:10–13:11वसो वडड
- 13:11–13:14मतलब ये उपाथी सब आची तव आची
- 13:14–13:16अगा नक मान्दन्द कोना बदल अची
- 13:16–13:17लगा
- 13:17–13:19इक तब भेहत्रीन तरीका आची
- 13:19–13:22इपाठक के औही प्रश्नक उध्धर देद
- 13:22–13:24जेकरा हम सब कही चीजे तक्की भेल
- 13:24–13:26वो सो वोट
- 13:26–13:29मतलब इउपादी सब अची तव ची
- 13:29–13:32मुदा एकर एतिहासिक अर्थ की आची
- 13:32–13:36या केवल सुची देट खी ता पाटख एक रहेक ता फों दीरेक्टी जका देखध.
- 13:36–13:37एक दम, फों दीरेक्टी जका.
- 13:37–13:43मुदा जा आहा संदर बदेखची ता इस समाज के एक ता सजीव ताईमलाईं बनी जाईत छी.
- 13:43–13:49आईी तामलाईन इप्रमानित करीता ची जे पाजी वेवस्ता कोनो संग्रहाल्यक वस्तू नहीं आची
- 13:49–13:53इस समय के संगे सास लोर आची समाजक संगे बदल्लक आची
- 13:53–13:56और नव उपादी के अपन भीतर समेट आची
- 13:56–13:58बहुत नीक सकह लिए आहा
- 13:58–14:06यी विश्लेशनात्मक परत एही शोद के केवल एक ता अनुवाद से उटागटे एक अतिहासिक व्याख्या के अस्तर दरी लोजा एत.
- 14:06–14:10मुदा एते लेखख के बहुत संतुलित रहे परत.
- 14:10–14:14उ व्याख्या देतू, मुदा अपन मुल काज जँए,
- 14:14–14:17दिकोडिंग अची उक्रा से बहुत दूर नहीं भद्की जातू,
- 14:17–14:21या व्याख्या बहुत संछिप्त और सतीख हो वाख चाही.
- 14:21–14:22एक दम सही.
- 14:22–14:25हमर विचार सा, हम सब एक ता बहुत नीकनिस करष पर
- 14:25–14:55भी बज़़ बवाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग
- 14:55–15:25बज़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़�
- 15:25–15:28एक ता विष्लेशनात्मक संदर्ब्देव,
- 15:28–15:30ताकि ये इस पष्ट भहे सकः,
- 15:30–15:34जे पांजी कोना आदूनीक समाजक संगे विखसित भहलचे.
- 15:34–15:35हम्रा पूल विष्वास अच्छी,
- 15:35–15:39जे इसुज़्ाव आहाग काजके आवर भेसी निक्ठारत.
- 15:39–15:47आए एक्रा एहन रूप देत, जो कोनो शो हु नवषोद करता, वा इतिहास कारकलेल, बहुत उप्योगी साभित हैत.
- 15:47–15:53हम चाहब जे आहां एह सुजाव सब पर काज कै, अपन समगरी फिरसा हम्रा सब लक पताओ,
- 15:53–15:56ताकी हम सब एक्रा और गेराए सब देखी सकी.
- 15:56–15:58आ, फेर सा जरुर पठाव.
- 15:58–16:00आईलेल बस एटबे.
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आई हम सब दिकोडिंग तपानजी अप मिठिला वलुम तीन पर चर्चा कर रहल ची, जे मिठिलाक वन्षावलिक जटिल नेट्वर्क का एक ता बहुत विस्त्रित विष्लेषना ची. रहा, ये बहुत गहीर शोद है ची. उगड़ा मतलब इप पन्डूलीपी पड़ाईत काल, हमरा सबसे पैग समस्या ही लागल, जे अथ्यदिक द्रिष्य आव अस्तानिक सम्मद के बुजेबाक लेल, आहा पुरन रूप्सा केवल गद्य पर निरभर कैनेची. एक्दम! रहा, इक तब बहुत, महत्वोपुरन अवलोकन अची. जकन हम, एही समगरिक विष्लेशन करहल चलो, तफम देखला जे लेखख सपष्ट रूप सवरनन कहने चती, जे पानजी कोनो सीदा वन्शावली नहीं अची. मने इग कोनो सीदा लाईन नहीं आचे. नहीं नहीं इग ता जाल आचे, जटै बेटिक माद्धिम से समबंद, ववेकल पिक शाखा गावोक विवाज मारगक दिषात आगटा ची. अई, उही सुत अपर्वाल अगप. बिल्कुल. मुदा जखन एक्रा केवल लिखेल शब्द्ब माद्धियम सब्रस्थ। कईल जाएता चिए ता पाथक के बहुत बेशी मान्सिक कस्रत करे पड़ाईता चिए. हमरनुबवब से हो एक दम एहन हो रहाल हो. माने जखन हम अद्याय नोव में प्रविस्टी एक सचाचाउदा दरी सरिसब सकरी पही तोल सलोग कडरहरा आसोदर्पूर्टक के गप पड़े रहल चला हूँ. खंदबल्ला दरीक के नेट्वर्क से हूँ? रहा, खंदबल्ला दरीक नेट्वर्क. अकर वरनन केवल पराग्राव में पड़ेत काल, हमरा अपन मात पर बहुत बेसी संज्यानात्मक बार महसुस भवेल. हा, मात बहारी बेजाईता छी. मतलब ये एक ता नक्सा आची, मुदा बिना कोनो छित्रक. इत सोट्वेर के कोड पडबाजा कभ होगे ला? इक दम होईना जदे अदफुट देखाए नहीं रहल होई हमरा एक संगे बहुत रास गब याद राखे पडी रहल चलूं जे कुन गाम सग, कुन साखा कते मुडल आगा एे कोडिंका साद्दरिष्य बहुत सती कची आगा कदिमाग एक संगे गाम और साखा अब आद्टीक के माद्टीम सभेल वन्ष परीवर्तन के ट्रैक करभा कोशिष कर रहाल चाहूं मुदा पाथ उक्रा एक रेखिय रुप में प्रस्थूत कर रहाल चाहूं जब भुजबा में बहुत कतिन आची रहां मस्तिष्क्के स्थानिक जान्कारी के रेख्या गद्यमे संसादित करभा में बहुत उर्जा लगा या तची. मुदा एक ता प्रश्न अच्छ? की? जा हम साग एही एतिहासिक धस्तावेज में, नोड और ब्राव्च आरेख या डायग्राम जोर देभ, तकी इग कोनो आदूने कोरप्रेट फ्लोचार जगका नहीं लागत? आँ, हमरा नहीं लागे तच्छे, जे गंविरता कम हैत, इग ता निक तर कहत जे एतिहासिक पाट्धेक पवित्रता बनल रबाक चाही. हा, लेक्षक कषे हो ही उदेष्बुजा एत च्छी. सत्ते बात अची, मुदा हमरा एहो भूजबावश्यक कचे जे मुल पानजी अपने आप में एक टेटा बेश चल. औह औह, हाँ, एट छै. पन्जिकार सब जखन एक्रा लिख़ चला तो उ साब एक्रा एक्रा एक्ता विषेश तरीका से दरज करे चला उगर उगर बाज़ाग तो बाज़ागी बाज़ागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो बाज़ागी तो बाज़ागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वोगागी तो वो अदे यागरामक आवशकता चे कोनो विसिस्त उदारन आची यावबग जैना आवक समगरी में प्रविष्टी एक आची जते शक्तिनादख वन्शावली दरहरा और सोदर्पृर और करमक भीज गूमाइत आची आवतम बहुत उडजन बवजाइत आची भीज भीज गुमएत आची अवतम भुद उलजन भोजाई तची आप फेर प्रविष्टी आखारा में राजा विज़े गोविंद सिंगक मारग का वरन आची उताई एक ता चोट विज्वल डाइग्राम देल जासगाई तची अप भी बजी रहाड़ थी ज़ेखाग पहने येख निक्ली रहाड़ थी अप पाथ में पाथ में नहीं पाथ पाथ पहने अही डाइग्राम के देखख कर एक दीशा परिवरतन कते हुबे वाला थी. अं बूजी रहाल ची. जब पाटक पहने ये सा देख ले जे आमुख ठाम सा तीन ता वेकल पिक शाक्ठ निकली रहाल ची, ता ओ पाट्ठ मे नहीं फसत. आँ पाटक पाट पड़ा सा पहने उही डाएग्राम के देख कर एक ता मान्सिक चित्र बना लेद. अगरा पहने से बूजल रहा जे दिशा परवरतन कते हुबे वाला जी बलकु, अजकन उ उही मानसेख चित्रक संगे गद्धे पड़द, तवख्रा शब्द और भीसी सपष्ट लगत उगड्ध्या अखरा केवल जानकारी नहीं देद वल की उही डाइग्राम का व्याख्या जका लागत इग्रा सा पाथक द्यान भद्केबा कोनो समभावना नही रहत इबात तस बश्ट बहुगेल जे विज्योल डाइग्राम पाथक के लेल ये लिक ता बहुत पएग मददद बहुसके चे हा निष्चित रूप सा मुदा, आहा हमरा एक ता दोसर समस्या सा हो नजर या बी रहाल चे. की समस्या? मानी लिए जे हम सम डायगराम दे दिलिये, वा नक्षा बना दिलिये. मुदा जा पाथक के, औही नक्षा प्रतीक चिन्ध भुजबा मे नहीं अबेच छै, तो की फएदा? अ, प्रतिक छिन तो बुज्बा आवश्वक अचे जकन हम क्हन्द दूक अद्याय नोसा दीकोडिंग शुरू कैला ता हम्रा लागल जिना हम्रा कोनो गेर पानी में दھकेल दिलगेल होई अगा के इशारा अद्याय एकसा आट्थदरी दिल्गेल नियमक दिश अचीने? एक दम. अद्याय अद्याय अट्थदरी लेक्खषब्दावलिक बहुत नियम देल अची. अग, सब नियम वही अचे. मुददजकन अद्द्याय 9 सा वस्तविक दीकोडिं सूरू होई चे, तलेक्हक मानी लेद चतिन, जे पात्हक के उसब नियम मुजेवानी याद आजचे. इक ता बहुत पैग चलाँग आचे. इक ता बहुत सादारन अकादनक भूल आचे. माने कोना? मैंने लेक्हक अपन साम गरेक संगे एक देख बेशी समय भिताएद स्थी, जो उक्रालेल उन्नियम द्वित्यस्वभाव बहजायतची. हूंका लागच्चनी जे जैना हूंका सबता प्रतिक्चन याद ची, औहना पात्ख के से हो याद रहेत. मुदा, शुदकरता, पाथख, एह पुस्तक के कोनो उपन्यास जगा पन्नादर पन्ना नहीं पड़ेत चीने? बलकुल नहीं, उसन्दर्ब ग्रन्त जगा एक रा भीच सा खूलेत चीए. हमर विचार सत एकर समदान बहुत असान अचे. की? किताबक अंत मे एक टा गलोसरी वा शब्दावली दोदिल जैए जिन शब अकाद मे किताब मे होएत चे पाथक हो तेस देख लेद जिक कुन प्रतीक की अर्थ छे मुदकि यो पर्याब तहेत कल्प्ना करू, जे आहा अद्धाई इग्जारा मे दिगुंद कलस्टर होजी रहल ची. आहा दिगुंद कलस्टर बहुत जटी लचे. आहा थेसर लाइंग पर आहा की किताप के अन्त्मे पन्नपल्टे पडा था ची. इस संज्यानात्मक गर्षन पैदा करे तचे. अहो, हा, आहा की कह रहल ची? आहा क द्यान वन्शावलिक गुड रहस्से सहत्टके, केवल शब्दक अर्थ खोजवा में लागी जैत. इए ओहिना भोगे ले, जेना आहा कोनो विदेशी भाशाक फिल्म देखी रहल ची. आहा डालोगक लेल हम्रा शब्द्खोश पल्टे पडी रहल आची एक दम हम माने ची जि बार बार पन्ना पलडवा बहुत जुंजलाहत पडदा कर सके तची तची आहा के की प्रस्तावचे आँ, हमरा लागेत आची जे एक्रा लेल किछु दोसर करव आवश्षक आची की निमक एक्ता पन्ना के हर अद्याय में बार बार चापल जाए उक्रा साथ पन्ना बरभाद हेत अग्ताबक आकार से हो औग कारन्ट पैग भोजाएत नहीं नहीं पूरा नियम नहीं चापवाची हमर केवाक अर्थ अची एक ता मानकी क्रित दिकोडिं लेजंट जे प्रतेक महत्वपुन क्लुस्टर अद्याय का शुर्वात में होए दिकोडिं लेजंट अग, जेना अद्या ए नाँ, वादस, या अग्यारका पहल पन्ना पर एक तचोट बोक्स हो. आग सामगरी में एक ता इंटेक्स लिंक बोक्स पहले सा अची ना. अग, उो इंटेक्स लिंक बोक्स ता अची. बस उकर थीक नीचा एक तचोट सनबोक्स जोडल जासके तची जाए में लिखल होई जे सूथ मने बेटिक माद्धिम से संबंद राए और अपर मने वैकल पिक शाख हा और डोट डोट मने अग्यात नाम अशा मने स्रोट सन्दर्ब इक दम सही, मतलप किवल उही अद्धयाय में जे बेशी प्रयोग होगवे वाला प्रती कची, उकर एक तचोट सन सुची. बस एत बे. आ, बस एत बे. इचोट सन बोक्स पाटक के बधके पासे रोकत. एक रा ले पन्ना पीचा न नहीं पलताया परत. यह उप्योगिता के गब आची जकन पाथक उही पन्नापर आची उक्रा उते उकर समादान भेज्जिबाख चाही यह तो उईना भोगल जिना आहाक लग एक ता नवा भाशाग व्याक्रनत आची मुत शब्द्कोश पाचा शुटी गे लगछे अगी बोक्स उईज़़ शब्द कोशक एक तजीट शीट जे जे आहां कान्द मेराखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल आखल � मुदा जकन हम ए नक्षाक माद्धम से यात्रा करोल चलू ता हमरा किच एन भिटल जे बहुत चोकाभे वाला चल. की बिटल हांके? मने समगरी में प्राचीन उपादी और आदूनिक व्यवसाई कुपादी दूनो एक संगे अची. हा अई तो चै. मुदहुंकर वरनन इत्तिक सपात विष्लेषनात्मक सवर में कैल गेला ची, जे हमरा लागल जना लेक हक एकर महत्वके नजर अंदास कर रहल चाती. रहां, हमरा बुजवा में नहीं आवी रहा लाची, जे हां एमे चोकावे वाला की देक रहा लाची? आखाक नहीं लागल चो कापेवाला? नहीं ताओ, पांजीत चार सो पचास इस्वी सिले के 2009 इस्वी दहरी अद्यतन होई त्रहला ची तेई स्वबहावी काची जे औही में दूनु तरहक उपादी दरज हैत आप, उता चे वैया करन आमी मान सक सिले के प्रोपेसर दहरी एकरा एतिहासिक रूप सी दरज करव, तलेक्ख का जा जा जीने? राँ, स्वाबहावे का ची, मुदा मतलप एकोनो म्रित एतिहास नहीं आची औह, औह, आजक अर्ख आची जे एकरा और निक से बतेवाख चाही चल अग, इत कोनो प्राछीं जन्त्र वा अस्ट्रोलेब में आदूनिक वीवेद्वाजका आची, जे इप्रमानित करे तची, जे इई आजक दिन्दरी उप्योग में आची. इबहुत नीक साद्रिश्या ची. जखन हम हाजार साल पुरान दस्तावेज मे आदूनिक नोक्रिक पद देखे ची तो एक तप पएग संस्क्रितिक बडलाव दिस शिशारा करे तची हाँ एक दम एक्रा केवल नाम आव उपादिक सुचिजका प्रस्थ। करब हमरा एक्ता अवसर गमेवाजका लगे तची. औग, औग, आब हम आहा कब भुजलहूं. आहा कह वची जे लेखख केवल देटा दरज करहल चतिन, उक्र सामाजिक अतिहाँसिक महत्टोके दिकोड नहीं करो हल चतिन. एक दम. उपादि सब कोना बदलल, उक्रा की कारन्चल इसब गप नदारा तच्छे. आप, जखन हम प्रविष्टी प्यटिस पड़े च्छी, जते, दीजी पी आशिक्षा मंत्री आशाहित्य सरोज जोहान उपादी आची. वाज, प्रविष्टी तेंटालीस जते प्रुफेसर आप मेठली लेखख के चर्चा आचे. तलेखख उक्रा उईना लिखिदेई चति जिना उ कोनो प्राषीन पन्दि तक उपादि है. मुदा इत मितलाक समाजक अदूनिक राज्ज नोकर शाही में प्रवेस के दरसा रहला ची ने. बिलकुल दरसा रहला ची. इत देखा रहा लाची जे कोना समाज के उच्वर्ग आपन पारमपरे ग्यानक छेटर सन्निकल का, आदूनिक प्रसासन आज्सिक्छा ब्यवस्था मे आपन स्थान बना रहा लाची. रहा आपन इगे बल उपादिक बडलाव नहीं आची. इज्यानक माप्दन्न मेवेल परिवर्तनक दस्ता वेज अच्छे मुदा अई हमे ते लेक्खक कपक्ष्सां एक जागब कहे चाहब के? शालत उआपना विष्लेशनात्मक स्वर कर जानी भुजी कर सपाट रखने चातेन ताके उद्तस्त रहे सकत उ इतिहास कार चतिन समाज शास्त्री नहीं आई इबात से हो आची उ केबल जे पानजी में दर्ज अचे उक्रा दिकोड कर आजा चतिन उक्र व्याख्या नहीं कर आजा चतिन हम सहमच जे ततस्तता आवश्चयक आचे मुदा ततस्तता क अर्थ इई नहीं आचे अगर संख्रतिक वजन के से हो दिकोड करब आवश्यक अच्ये जना पर प्रवाग लें चल, अखला में शिक्छा मंत्री वा दीजीपी जना पदक का की काज अगर सामाजेक अटिहासिक व्याख्या जोडल जासकी तची मतलब एक ता संछिप्त साराव्स जेगा आप ख़ब उपादी बतावाई सकाज नहीं चलत अखर सांस्क्रतिक वजन के से हो दिकोड करभ आवश्यक अचे अगर संस्क्रतिक वजन के से हो दिकोड कर अवश्यक अचे जेना प्रविष्ती प्यतीसक अन्तमे एक पाराग्राब जोड देल जाए जे यी स्पस्ट करे ये कोना पांजी जे पहले केवल दर्बार आ अनुस्तानक अपादी दर्ज करे चल ये बतिबाक लेल जे मित्हिलाक समाज में सम्मानक मान्दन्द कोना बदल लगची ये इक तब भेहत्रीन तरीका आची ये पाथक के उप्रष्नक उट़्र देद जे करहाम सब कह़ चीजे तक्की बहल वसो वडड मतलब ये उपाथी सब आची तव आची अगा नक मान्दन्द कोना बदल अची लगा इक तब भेहत्रीन तरीका आची इपाठक के औही प्रश्नक उध्धर देद जेकरा हम सब कही चीजे तक्की भेल वो सो वोट मतलब इउपादी सब अची तव ची मुदा एकर एतिहासिक अर्थ की आची या केवल सुची देट खी ता पाटख एक रहेक ता फों दीरेक्टी जका देखध. एक दम, फों दीरेक्टी जका. मुदा जा आहा संदर बदेखची ता इस समाज के एक ता सजीव ताईमलाईं बनी जाईत छी. आईी तामलाईन इप्रमानित करीता ची जे पाजी वेवस्ता कोनो संग्रहाल्यक वस्तू नहीं आची इस समय के संगे सास लोर आची समाजक संगे बदल्लक आची और नव उपादी के अपन भीतर समेट आची बहुत नीक सकह लिए आहा यी विश्लेशनात्मक परत एही शोद के केवल एक ता अनुवाद से उटागटे एक अतिहासिक व्याख्या के अस्तर दरी लोजा एत. मुदा एते लेखख के बहुत संतुलित रहे परत. उ व्याख्या देतू, मुदा अपन मुल काज जँए, दिकोडिंग अची उक्रा से बहुत दूर नहीं भद्की जातू, या व्याख्या बहुत संछिप्त और सतीख हो वाख चाही. एक दम सही. हमर विचार सा, हम सब एक ता बहुत नीकनिस करष पर भी बज़़ बवाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बाग बज़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़� एक ता विष्लेशनात्मक संदर्ब्देव, ताकि ये इस पष्ट भहे सकः, जे पांजी कोना आदूनीक समाजक संगे विखसित भहलचे. हम्रा पूल विष्वास अच्छी, जे इसुज़्ाव आहाग काजके आवर भेसी निक्ठारत. आए एक्रा एहन रूप देत, जो कोनो शो हु नवषोद करता, वा इतिहास कारकलेल, बहुत उप्योगी साभित हैत. हम चाहब जे आहां एह सुजाव सब पर काज कै, अपन समगरी फिरसा हम्रा सब लक पताओ, ताकी हम सब एक्रा और गेराए सब देखी सकी. आ, फेर सा जरुर पठाव. आईलेल बस एटबे.