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राजा_सलहेस__लोकक_राजा.mp4

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Part 2 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 2
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  1. 0:00–0:06मोरंग छेत्रक अत्यंत सम्रुद आप रबाव शाली मैठिली लोक गात्ठाक एही प्रस्तुती में स्वागत अची.
  2. 0:06–0:10आई हम सब सी दे एक ता एहन एतिहासे कठाक अनवेशन करब,
  3. 0:10–0:15जते तन्त्र विद्या, न्याय, आलोक तन्त्री ए भावनाक अध्वुत विज़े भेल्चल,
  4. 0:15–0:20इकोनो साद्दारन गप नहीं, इई उ कता आची, जि सद्दिो सा लोक खिर्दे में इक्डम भसे लची,
  5. 0:20–0:23आओ बिना कुनो देरीक शुरू करे ची.
  6. 0:23–0:53तीक अच्छे आँ हम सब एही विश्यक गेराई में प्रवेश करी आए ही मूल प्रष्नपर विचार करी जे की इस समबाव अच्छे जे कोनो साद्दारन सिपाही बिना कोनो राज सिंगासन पर भेस ने राजा भजाए इप्रष्नप वास्तव में कताक मूल तनाव के रेखा
  7. 0:53–0:58तुसाद जातिक एक ता अथ्यन्त सुन्दर वीर अन्याई प्रीय सिपाही
  8. 0:58–1:02उनक सरल ता आ लोकक प्रती सीवा भाउ इतिक च्यल
  9. 1:02–1:05जि जन्ता हुनका स्वें मोन कराजा मानी लागल
  10. 1:05–1:07आद � thad hridayak raja
  11. 1:07–1:09इ कोनो राजने तिक पदने च्यल
  12. 1:09–1:17इतलोकष्रद्धासा स्वता हुप्जल एक ता बोहुत पैग समान चल, आ एताई सा हमर कताख पहल अदधाई शुरू होई तची.
  13. 1:18–1:20राज सिंहासन भिना राजा.
  14. 1:20–1:28आई बहुत नीक जंका सबस्ट करेत अच्छे जे उहे समय के समाज में कित टिक तरह के प्रव्रुत्या एक संचली रहल चल.
  15. 1:28–1:33एक दिस देखुता सलहे सक प्रजा के प्रती निस्वार्त सेवा,
  16. 1:33–1:36तो सर देस राजा के वेद्ध्यक अट्यंत दुखदात महत्या,
  17. 1:36–1:45तबनाक अस्विक्रति कारन आपन प्रानत्यागी देलने आत्ते सर्दिसन सत्ता में बैसल्तालुक दारक अत्तिन्त कम्зोर आगंकार.
  18. 1:45–1:51इस सब्ता मिलका कही सके ची जे एकता पैग विप्लवक प्रिष्त भूमी तध्यार कै रहाल चल.
  19. 1:51–2:21एती हमर परीछे होईता ची दबना सा, दबना जी मुरंग राजाक मालिन चल ही, अट्यन्त सुन्दर अट्तेज़स्विनी, उसलहे सा अगाद प्रेम करिचल ही, मुदा सलहे सक्द्यान आपन प्रजाक सिवा मैं एते एक भेशी लींच्छल, जे हुनका दबनाक दिस कोनो द्
  20. 2:21–2:26इर्शा कारन निर्वासन जेना की सत्टाक चरित्र होई तच्छी,
  21. 2:26–2:30अस्तानिय शासक तालोक्दार नूरंगी बहादुर थापसा,
  22. 2:30–2:34इस सहन नईभेल, जे हुनक एक्ता सादारन सिपाही के,
  23. 2:34–2:36जन्ता राजा कही कस समवूदित करें.
  24. 2:36–2:39यही के जन्ता राजा कही कषम्बूदित करें.
  25. 2:39–2:41यह उ तीवर इश्या चल,
  26. 2:41–2:43जते एक टाश्षक का हंकार के
  27. 2:43–2:46लोकक जन्मस सं सीथा टेस पूँचे तची.
  28. 2:46–2:49हुनक ख्रोदखत कुनुसी में नहीं गेल.
  29. 2:49–2:52यह अत्यनत महत्व पूँबनक शन्चल,
  30. 2:52–2:58जखन थापा आदेश देल कै, जे सलहेस आपन नाम सन इराजा शब्द हतालीो.
  31. 2:58–3:02मुदा सलहेसक शान्त आद्द्रिड उत्टर सुन्बायो गय ची.
  32. 3:02–3:06उ कहलनी जे इप पद्वी ची जन्द वारा देल पद्वी.
  33. 3:06–3:10कोना چोड़बेक्रा, हम چोड़ियो देब, लोक तक कहबेकरत,
  34. 3:10–3:16इई हुनक उही शान्त, शक्ती, आल लोकक प्रेम के प्रती हुनक सम्मान के,
  35. 3:16–3:18बहुथ सपष्त रूप से दिखावे तैएच.
  36. 3:18–3:22एही विवादक बाद, सलहीस अथ्ट्ष्छालीं तासा,
  37. 3:22–3:25दर भार चोर दिलहन अदर भंगत इस प्रस्थान केलने
  38. 3:25–3:28हुनका लिल इनोक्री आब अर्ठहीन भोगेल चल
  39. 3:28–3:31जते नामक बात पर इत्तिक पाएक विवाद भोगेल
  40. 3:31–3:34मुदा हुंकर इस प्रस्थान दबना के मुन में
  41. 3:34–3:36एक तब पाएक हल्चल मचा दिलके
  42. 3:36–3:41आएही खाम्सा दबना अपन तान्त्रिक शक्तिक प्र्योक रबाकलिल विववष बजगच्छन.
  43. 3:42–3:47आव हम सब एईसा आगु बरही ची, अदिके ची जे एकता कुन आगु विखसित हूई तची.
  44. 3:47–3:52तीसर द्याए विश्वास्कात आहार एक ता भ्यँंकर शड्यान्त्र.
  45. 3:52–4:00दबना कोनो सादारनस्त्री नहीं चली है, उ प्राछीन तन्त्र विद्या का गड, कम्रुक कम्मक्या सा तन्त्र मन्त्र सिखने चली है,
  46. 4:00–4:05उ सलहेस के बाट में रोके चत्ठीं आ एक ता पैग वचन देट चत्ठीं,
  47. 4:05–4:13जे उ वर्त्मान सर्दार चूहर मल के हताक सलहेस के राजा का दर्बार में साथ सो सिपाहिक सर्दार बना देतीं।
  48. 4:13–4:17इप्रस्ताव सलहेस का जीवन का दिशा बडली दैत अची।
  49. 4:17–4:24इक तबड़का जल्साहक भीच दबना अपना लेड़ा एक भाव एक दध अत्तिंत मार मिक लोक गीतक माद्ध्यम सवयक्त करे चती.
  50. 4:24–4:28रोउ सुरहा बराबरस तोरा लेल आचर बनलो.
  51. 4:28–4:30इक एबल एक तब गीत नहीं अछी,
  52. 4:30–4:36बलकी हुंकर 12 वर्षक अखन्द प्रतिक्षा समर पन आ एक दम गधर प्रीम कप्रमान आची.
  53. 4:37–4:40मुदा सफलताक संख संख शत्रूता सोवायल,
  54. 4:40–4:45जकन चूहण मल अपन पद सहतल ते एक ता भ्यंकर बडला लेबा कुचक्र रच्लक.
  55. 4:46–4:47शद्यंत्रक चरन दिखू,
  56. 4:47–4:51पहिले उ राजाक रानिक नो लागक हार चूरावे ताइच,
  57. 4:51–4:54फेर उक्रा चूपके सलेसक उच्हेन में नुका देतेज,
  58. 4:54–4:58आ अंत में दरबार में सलेसक हरक तलाशी लेबाक माग करे ताइच.
  59. 4:58–5:01एक दम सतीक शद्यंद्र.
  60. 5:01–5:19यो दूखष्चन आचे जखन तलाशिक दोरान हार सलेसकर गेरूए खोल सक हसी तचे, आब प्रमानत पुरन रूप सचलेसकर विरुद चल, एक ता निर्दोश नायक जे लोकक राजा चल, उक्रा मिथ्फ्या आरोप में फसाकर जेल में बंद कर देल जाये तचे.
  61. 5:19–5:22मुदाकता इते खतम नहीं हूएत अच्छी
  62. 5:22–5:26चार्यम अद्ध्याय जादू से सत्यक उद्गातन
  63. 5:26–5:29जैमे हम सब देखब सत्यक विजगे
  64. 5:29–5:32आप इतर जे सबसर उचक बात अच्छी हिद्रष्च में
  65. 5:32–5:36से एजे कोनो राजाक नियाई प्रनाली काज नहीं आओल
  66. 5:36–5:39दबना अन्याय सहले बिलकुल तधयार नहीं चली
  67. 5:39–5:42उ काली मनदर में भूध प्रेट के जगाके
  68. 5:42–5:44बहयंकर तान्त्रिक साधना शादना शादना शारुकलनें
  69. 5:44–5:48हुंकर शक्तिक प्रबाव से चूहर्णमल खूनकर उल्टी करे लागल
  70. 5:48–5:50औए असहनीय यातना में
  71. 5:50–5:54और अपन पुरा श़्यान्त्र आचोरे एक बात सब के सोज्यान सुएकार कर लिकेए।
  72. 5:54–6:00यही कता के सब सब पएग विषेष्ता आच्छज जिस सत्या अन्याय राजा के दर्बार से नहीं
  73. 6:00–6:04बलकी एक ताइस्त्रीक अटूट प्रेम अट्तान्त्रेक शक्ती से आएल
  74. 6:04–6:10नायक अपन शक्ती से नहीं बलकी नायकाक अदम में सहस अविद्या सबचल.
  75. 6:10–6:15न्याय विवस्ताक विफलताक भीज एकता इस्त्रिक संकलप सत्तिके बाहर अनलगे.
  76. 6:15–6:20इस सच्मे इस्त्री सशक्तिकरन का एकता अदबूत उदारन अचे,
  77. 6:20–6:23जे सद्यों सो समाजके प्रेरिद करेइत आभी रोहल अच्छे.
  78. 6:23–6:28अन्तता न्याई भेल, सलेज के ससमान जेल से चोड दिलगेल,
  79. 6:28–6:31आँूनकर ओदा सो हुब बड़ा दिलगेल.
  80. 6:31–6:34तूसर दिस, जे चूहर्मल शड्यन्द्र कारी चल,
  81. 6:34–6:40उक्रा अपन अप्रादख उचित दन्द भिटल आ उ जेल गेल, ये तैसत्यक पुन विजेब हेल.
  82. 6:40–6:47आब हम सब पहुचे छी अन्तिम खंडदीस, पाचम द्याए एक ता शाश्वत लोक विरासत.
  83. 6:47–6:54जे स्त्री बारवर्ष्धरी प्रतिच्चा के लक, जकर विद्या सलहेस कजीवन आसम्मान दोनो बचो लक.
  84. 6:54–6:57उक्रा सलहेस अंततह अपना लेलनी.
  85. 6:57–7:02मूरंगक जनताक भारी हर्षो लास्क भीच सलहेस आदबनाक विवाह भेल.
  86. 7:02–7:04इखेवल दोगोटेक मिलन नहीं चल,
  87. 7:04–7:08इदा सथ्त्या अप्रेमक अंतिम विजैक एक ता महान उद्सव चल.
  88. 7:08–7:11ता एते सबसमहत्वपूरन बात इच है,
  89. 7:11–7:16जे राजा सलहयस कता खेवल इतिहास कपन्ना में बन्द नहीं आच्छी.
  90. 7:16–7:19उ दूसाद समाज का एक ता अट्यन्तष्रद्ध्या नायक च्छती,
  91. 7:19–7:21उ एक ता एहन वेक्तित वच्छती,
  92. 7:21–7:25जे जाती कसिमा के पार के लोकक रिदे पर राज्के लिन,
  93. 7:25–7:28आहुनक इश्वौर्या अप्रेमक गाता,
  94. 7:28–7:31लोक गीतक रूप में सद्यों साए दहरें जीवित अची.
  95. 7:32–7:37आईू जखन मित्छला आमोरंगक गामक चोपाल पर सलहेस गीतक दून उठही तचे,
  96. 7:37–7:43तब लोक अक मोन में नयाई आप्रेमक औएक अप्यातियास्च्टिक गाता किस्विती एक दम ताजा बहुजाई तची.
  97. 7:43–7:51लोग आईजो पुन श्रद्धा संगवएतची जे उ मनसा राजा चला आ मूने राजा रहता सदा सरवदाक लेल.
  98. 7:51–7:55इविष्लेशन हम सब एही विचार उट्टेजक प्रष्नक संध समापत करब,
  99. 7:55–7:58की वस्तुता हे टा मुकुट संकूनो राजा राजा बने तची,
  100. 7:58–8:04वाओकर अस्ली सक्ता, जन्ताक अटुट विष्वास, न्याई प्रियता और प्रेम सबनेत जी,
  101. 8:04–8:08राजा सलहेस के जीवन एह प्रशनकुत्र बहुत सबष्ट्रुप सदेत जी.
  102. 8:08–8:11एही प्रस्तुतिस सजुडदाक लेल बहुत-बहुत द्हन्निवाद,
  103. 8:11–8:15इक तब अब नद़ा अप सब के सदिखन विचार करे लिल प्रेदिद करेद रहत.

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मोरंग छेत्रक अत्यंत सम्रुद आप रबाव शाली मैठिली लोक गात्ठाक एही प्रस्तुती में स्वागत अची. आई हम सब सी दे एक ता एहन एतिहासे कठाक अनवेशन करब, जते तन्त्र विद्या, न्याय, आलोक तन्त्री ए भावनाक अध्वुत विज़े भेल्चल, इकोनो साद्दारन गप नहीं, इई उ कता आची, जि सद्दिो सा लोक खिर्दे में इक्डम भसे लची, आओ बिना कुनो देरीक शुरू करे ची. तीक अच्छे आँ हम सब एही विश्यक गेराई में प्रवेश करी आए ही मूल प्रष्नपर विचार करी जे की इस समबाव अच्छे जे कोनो साद्दारन सिपाही बिना कोनो राज सिंगासन पर भेस ने राजा भजाए इप्रष्नप वास्तव में कताक मूल तनाव के रेखा तुसाद जातिक एक ता अथ्यन्त सुन्दर वीर अन्याई प्रीय सिपाही उनक सरल ता आ लोकक प्रती सीवा भाउ इतिक च्यल जि जन्ता हुनका स्वें मोन कराजा मानी लागल आद � thad hridayak raja इ कोनो राजने तिक पदने च्यल इतलोकष्रद्धासा स्वता हुप्जल एक ता बोहुत पैग समान चल, आ एताई सा हमर कताख पहल अदधाई शुरू होई तची. राज सिंहासन भिना राजा. आई बहुत नीक जंका सबस्ट करेत अच्छे जे उहे समय के समाज में कित टिक तरह के प्रव्रुत्या एक संचली रहल चल. एक दिस देखुता सलहे सक प्रजा के प्रती निस्वार्त सेवा, तो सर देस राजा के वेद्ध्यक अट्यंत दुखदात महत्या, तबनाक अस्विक्रति कारन आपन प्रानत्यागी देलने आत्ते सर्दिसन सत्ता में बैसल्तालुक दारक अत्तिन्त कम्зोर आगंकार. इस सब्ता मिलका कही सके ची जे एकता पैग विप्लवक प्रिष्त भूमी तध्यार कै रहाल चल. एती हमर परीछे होईता ची दबना सा, दबना जी मुरंग राजाक मालिन चल ही, अट्यन्त सुन्दर अट्तेज़स्विनी, उसलहे सा अगाद प्रेम करिचल ही, मुदा सलहे सक्द्यान आपन प्रजाक सिवा मैं एते एक भेशी लींच्छल, जे हुनका दबनाक दिस कोनो द् इर्शा कारन निर्वासन जेना की सत्टाक चरित्र होई तच्छी, अस्तानिय शासक तालोक्दार नूरंगी बहादुर थापसा, इस सहन नईभेल, जे हुनक एक्ता सादारन सिपाही के, जन्ता राजा कही कस समवूदित करें. यही के जन्ता राजा कही कषम्बूदित करें. यह उ तीवर इश्या चल, जते एक टाश्षक का हंकार के लोकक जन्मस सं सीथा टेस पूँचे तची. हुनक ख्रोदखत कुनुसी में नहीं गेल. यह अत्यनत महत्व पूँबनक शन्चल, जखन थापा आदेश देल कै, जे सलहेस आपन नाम सन इराजा शब्द हतालीो. मुदा सलहेसक शान्त आद्द्रिड उत्टर सुन्बायो गय ची. उ कहलनी जे इप पद्वी ची जन्द वारा देल पद्वी. कोना چोड़बेक्रा, हम چोड़ियो देब, लोक तक कहबेकरत, इई हुनक उही शान्त, शक्ती, आल लोकक प्रेम के प्रती हुनक सम्मान के, बहुथ सपष्त रूप से दिखावे तैएच. एही विवादक बाद, सलहीस अथ्ट्ष्छालीं तासा, दर भार चोर दिलहन अदर भंगत इस प्रस्थान केलने हुनका लिल इनोक्री आब अर्ठहीन भोगेल चल जते नामक बात पर इत्तिक पाएक विवाद भोगेल मुदा हुंकर इस प्रस्थान दबना के मुन में एक तब पाएक हल्चल मचा दिलके आएही खाम्सा दबना अपन तान्त्रिक शक्तिक प्र्योक रबाकलिल विववष बजगच्छन. आव हम सब एईसा आगु बरही ची, अदिके ची जे एकता कुन आगु विखसित हूई तची. तीसर द्याए विश्वास्कात आहार एक ता भ्यँंकर शड्यान्त्र. दबना कोनो सादारनस्त्री नहीं चली है, उ प्राछीन तन्त्र विद्या का गड, कम्रुक कम्मक्या सा तन्त्र मन्त्र सिखने चली है, उ सलहेस के बाट में रोके चत्ठीं आ एक ता पैग वचन देट चत्ठीं, जे उ वर्त्मान सर्दार चूहर मल के हताक सलहेस के राजा का दर्बार में साथ सो सिपाहिक सर्दार बना देतीं। इप्रस्ताव सलहेस का जीवन का दिशा बडली दैत अची। इक तबड़का जल्साहक भीच दबना अपना लेड़ा एक भाव एक दध अत्तिंत मार मिक लोक गीतक माद्ध्यम सवयक्त करे चती. रोउ सुरहा बराबरस तोरा लेल आचर बनलो. इक एबल एक तब गीत नहीं अछी, बलकी हुंकर 12 वर्षक अखन्द प्रतिक्षा समर पन आ एक दम गधर प्रीम कप्रमान आची. मुदा सफलताक संख संख शत्रूता सोवायल, जकन चूहण मल अपन पद सहतल ते एक ता भ्यंकर बडला लेबा कुचक्र रच्लक. शद्यंत्रक चरन दिखू, पहिले उ राजाक रानिक नो लागक हार चूरावे ताइच, फेर उक्रा चूपके सलेसक उच्हेन में नुका देतेज, आ अंत में दरबार में सलेसक हरक तलाशी लेबाक माग करे ताइच. एक दम सतीक शद्यंद्र. यो दूखष्चन आचे जखन तलाशिक दोरान हार सलेसकर गेरूए खोल सक हसी तचे, आब प्रमानत पुरन रूप सचलेसकर विरुद चल, एक ता निर्दोश नायक जे लोकक राजा चल, उक्रा मिथ्फ्या आरोप में फसाकर जेल में बंद कर देल जाये तचे. मुदाकता इते खतम नहीं हूएत अच्छी चार्यम अद्ध्याय जादू से सत्यक उद्गातन जैमे हम सब देखब सत्यक विजगे आप इतर जे सबसर उचक बात अच्छी हिद्रष्च में से एजे कोनो राजाक नियाई प्रनाली काज नहीं आओल दबना अन्याय सहले बिलकुल तधयार नहीं चली उ काली मनदर में भूध प्रेट के जगाके बहयंकर तान्त्रिक साधना शादना शादना शारुकलनें हुंकर शक्तिक प्रबाव से चूहर्णमल खूनकर उल्टी करे लागल औए असहनीय यातना में और अपन पुरा श़्यान्त्र आचोरे एक बात सब के सोज्यान सुएकार कर लिकेए। यही कता के सब सब पएग विषेष्ता आच्छज जिस सत्या अन्याय राजा के दर्बार से नहीं बलकी एक ताइस्त्रीक अटूट प्रेम अट्तान्त्रेक शक्ती से आएल नायक अपन शक्ती से नहीं बलकी नायकाक अदम में सहस अविद्या सबचल. न्याय विवस्ताक विफलताक भीज एकता इस्त्रिक संकलप सत्तिके बाहर अनलगे. इस सच्मे इस्त्री सशक्तिकरन का एकता अदबूत उदारन अचे, जे सद्यों सो समाजके प्रेरिद करेइत आभी रोहल अच्छे. अन्तता न्याई भेल, सलेज के ससमान जेल से चोड दिलगेल, आँूनकर ओदा सो हुब बड़ा दिलगेल. तूसर दिस, जे चूहर्मल शड्यन्द्र कारी चल, उक्रा अपन अप्रादख उचित दन्द भिटल आ उ जेल गेल, ये तैसत्यक पुन विजेब हेल. आब हम सब पहुचे छी अन्तिम खंडदीस, पाचम द्याए एक ता शाश्वत लोक विरासत. जे स्त्री बारवर्ष्धरी प्रतिच्चा के लक, जकर विद्या सलहेस कजीवन आसम्मान दोनो बचो लक. उक्रा सलहेस अंततह अपना लेलनी. मूरंगक जनताक भारी हर्षो लास्क भीच सलहेस आदबनाक विवाह भेल. इखेवल दोगोटेक मिलन नहीं चल, इदा सथ्त्या अप्रेमक अंतिम विजैक एक ता महान उद्सव चल. ता एते सबसमहत्वपूरन बात इच है, जे राजा सलहयस कता खेवल इतिहास कपन्ना में बन्द नहीं आच्छी. उ दूसाद समाज का एक ता अट्यन्तष्रद्ध्या नायक च्छती, उ एक ता एहन वेक्तित वच्छती, जे जाती कसिमा के पार के लोकक रिदे पर राज्के लिन, आहुनक इश्वौर्या अप्रेमक गाता, लोक गीतक रूप में सद्यों साए दहरें जीवित अची. आईू जखन मित्छला आमोरंगक गामक चोपाल पर सलहेस गीतक दून उठही तचे, तब लोक अक मोन में नयाई आप्रेमक औएक अप्यातियास्च्टिक गाता किस्विती एक दम ताजा बहुजाई तची. लोग आईजो पुन श्रद्धा संगवएतची जे उ मनसा राजा चला आ मूने राजा रहता सदा सरवदाक लेल. इविष्लेशन हम सब एही विचार उट्टेजक प्रष्नक संध समापत करब, की वस्तुता हे टा मुकुट संकूनो राजा राजा बने तची, वाओकर अस्ली सक्ता, जन्ताक अटुट विष्वास, न्याई प्रियता और प्रेम सबनेत जी, राजा सलहेस के जीवन एह प्रशनकुत्र बहुत सबष्ट्रुप सदेत जी. एही प्रस्तुतिस सजुडदाक लेल बहुत-बहुत द्हन्निवाद, इक तब अब नद़ा अप सब के सदिखन विचार करे लिल प्रेदिद करेद रहत.

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