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मिथिलाक_पंजी_प्रबंध_आ_प्राचीन_जेनेटिक_विज्ञान.m4a

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Part 2 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 2
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  1. 0:00–0:09कल्पना करु चौदा आम्षताब दिक समय, मने एक ता महिला का हात्छे, एक ता जराइत लोहा राखी दिल जाछ छे.
  2. 0:09–0:14आगिक परिक्षा या त्राल बाई अवर दील जक्रा काल जाए चल.
  3. 0:14–0:19एक दम जा उनक हात जली जाए चे तो उदोषी मानल जिती है.
  4. 0:19–0:23आरोप चे आपन पतिक प्रती निष्थाहीन हो बाक
  5. 0:23–0:27उनका उजराइत लोहा रहात में लेबाक लेल कहल गेल
  6. 0:27–0:31और किचु कालक बाद उनक रहात जली गेल
  7. 0:31–0:34आव, उही समएक नयाई प्रनाली का नूसार
  8. 0:34–0:37तो समाज उनका तुरंत डोषी मानी लेलग हैते
  9. 0:37–0:41अग, मानी ले लग. मुदा एक ता बहुत पेच चल.
  10. 0:41–0:47उ महीला वास्तमे, शारीरिक रूप से कोनो दोसर पूरूष से समबंद नहीं रखने चली.
  11. 0:47–0:52माने उ पुरन रूप से निर्दोष चली. मुदा फिर भी हूनाख हाज जली गल.
  12. 0:52–0:55बापरे, ता कारन की चले कर?
  13. 0:55–0:58कारन इई नेचल जो उ बे वफा चलें
  14. 0:59–1:03बलकी इचल जो हुनका पतिक पारिवारिक डेटा बेस में
  15. 1:03–1:05एक ता ब्यंकर जनेटिक बग आगिल चल
  16. 1:06–1:07जनेटिक बग?
  17. 1:07–1:08चोदा हम शताबदी में?
  18. 1:09–1:09हाँ
  19. 1:10–1:13इखोनो होलीवुट फिल्नगे कता नेचाय, बुजलूू
  20. 1:13–1:43इज़े ख़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उ़ा उग़ा उ़गा उ�
  21. 1:43–1:46जे हमरा सबक इतिहासक द्रिष्टी कोनके बदली कर अखी देचे
  22. 1:47–1:50जकन हमरा सब कुनु विशाल डेटा बेसक गब कर अगी ची
  23. 1:50–1:53तम मन में सिलिकान वली पैगपाएक सरवर रूम
  24. 1:53–1:55आख खलाूट श्टोरेज के चित्रब ऐचे.
  25. 1:55–1:56आप बलकुल.
  26. 1:56–2:26अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ�
  27. 2:26–2:32बिना कुनो कम्पूटर वा सुव्ट्वेरक, इह रजाना वर्षक जनेटिक देटा के सुरक्षित राखल गय.
  28. 2:32–2:37मुदा रुकी जाओ, हमरा उई आगिक परिक्षाक कतापर वापस जे बाखे चे.
  29. 2:37–2:41इदे हमरा एक्दम सकोनो मिस्ट्री ख्लिलर जका आगी रहा लेची.
  30. 2:41–2:49जोन उ महिलान निर्दोष छलीन, तो उ आगिक परिक्षामे फेल की एक भिली, उ जनेटिक बग असल में चल की?
  31. 2:49–2:52आच्छ, ता इी तीरसो चब्विसी सिस्वी गब चै.
  32. 2:53–2:57मित्ला मैं करनात वन्षक राजा हरी सिंदेव कर शासन काल चल.
  33. 2:57–3:03उई समेद़री लोक आपन वन्शावली मोकिक रूपस वा समुह लेक के माद्धिम सर अके चला
  34. 3:03–3:07समुह लेक माने किछ लोकक समु मिलक लिखे चला
  35. 3:07–3:11आ, बिलकु, मुदा मोकिक समरनकत आपन एक टा सीमा हुई चे
  36. 3:11–3:41उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई�
  37. 3:41–3:46उभी बिचारक आरोप लागल आँँँक आगेक परिक्षा देवा के ले कहल गल
  38. 3:46–3:49आजकन हुँँकर हाज्जेली गलक तसम मानी लेलक जो दोशी चते
  39. 3:49–3:55अ, मुदा, उही समे मितला केक्त अट्टिन्त विदूशी महला चलीया लखिमा तगुराईन,
  40. 3:55–4:01उ मी मान सक रवी मिश्रेक की पुत्री आम महा महोपाद्धे रामेशवरक पतनी चलीय,
  41. 4:01–4:04लखिमा तगुराईन एही रहसी को जागर कलनीय.
  42. 4:04–4:05अ, के कहलनी?
  43. 4:05–4:11तर्क्दिलने, जि हरिनात फबयाएक पतनी शररिक रुपस अपवित्र वद दोशी नहीं जलीं
  44. 4:11–4:16मुदा इविवा सन्रचनात्मक रुपसा सपिंद नियमक उलंगन चल
  45. 4:16–4:23दर्म शास्त्र कनुसार सपिंद विवास उपन समबंद अवेद आच्चाईंडाल समान मानल जचल
  46. 4:23–4:24अच्छा
  47. 4:24–4:27तभी कारन्सा शर्रिक दोष नहीं
  48. 4:27–4:30मुदा उही सन्रचनात्मक दोष आवाग कारने
  49. 4:30–4:31हुंकर हाज्जली गे लिक
  50. 4:31–4:33एक दम, इता गजजब भ्यल
  51. 4:33–4:36माने एकोनो कमपुटर सुब्ट्वेर अख
  52. 4:36–4:37उही क्राष जका भ्यल
  53. 4:37–4:40जटै इस सिस्तम बर्सुंसे चली रहल होगी चे,
  54. 4:40–4:43मुदा एजक्हन उ आचानक बन्द पर जाए चे,
  55. 4:43–4:45तकने एंजिन्यर कें पता चले चे,
  56. 4:45–4:48जे सिस्तम अक्ष्टिंग में कते गडबरी चे.
  57. 4:48–4:49बहुत नीक उदारन्दिल हो,
  58. 4:49–4:52हरीनात उपाद्ध्धयाय के गतना,
  59. 4:52–4:56उही प्राछीन समुले कही आमावक्खिक सिस्तम का क्राश च्छल.
  60. 4:56–4:58मुदा एक टा गब कहूँ,
  61. 4:58–5:01राजा हरी सिंदेव यी तब उजी गेला,
  62. 5:01–5:03जे पुरान सिस्तम फेल बहगेल चे.
  63. 5:03–5:07जकन एटिक पाएक विद्वान से इग रहती भहज्चे,
  64. 5:07–5:11अद्या उई नव सिस्तम ताड़ को ना किलनी
  65. 5:11–5:14उई ही संकत के न बहुत गंविर्ता सले ले ले है
  66. 5:14–5:18राजा हरी सिंदेव तुरनत विष्विच्चक्र सम्मेलन बजे ले है
  67. 5:18–5:21इसम्मेलन मदूपनिक जमसाम गाम में बेल चल
  68. 5:21–5:23तो उते एकी निरने लेल गेल?
  69. 5:23–5:25उते इद्यातियासिक निदने लेल गेल,
  70. 5:25–5:28जे आप सा वन्शावली मोखिक नहीं रहात,
  71. 5:28–5:30एक रा लेकित रूप देल जाईते.
  72. 5:30–5:32उपन्जिकार निउक्त के लें,
  73. 5:32–5:36जे राज द्वारा मानेता प्राथ वन्शावली विषेष्यष्यग ज्ड्यादाग.
  74. 5:36–5:39माने, स्तेट अपोविन्तेट जीनी लोगिस्ट्स्
  75. 5:39–5:43आँ, जेना ब्राम्हन सबखके ले ले ल्गुनाकर जा,
  76. 5:43–5:46करन कायस्त सबखके ले ले ल्छष्गर्द्ध,
  77. 5:46–5:51आच्ठ्रीय सबखके ले ले ल्गुजे दद्धके मुख्य पंजीकार बनावल गेल.
  78. 5:51–5:54इई ये एक ता पूर्न संस्त्ताग देटा बेस के नीव चल
  79. 5:54–5:57तीख से अ पंजीकार निुक्त कदेल ही
  80. 5:57–6:02मुता हमर सवाल इई चे जे इगाज व्यावारिक रुपस कोना होई चल
  81. 6:02–6:03कोना मने?
  82. 6:03–6:05जगन कोनो विवात आई होई चल
  83. 6:05–6:09तो उ पंजी कार ताड पत्र पर इक कोना ते करे चला
  84. 6:09–6:13जे इदूनु गोते जनेटिक रुपस दूर चती
  85. 6:13–6:15उनकर आलगारितम वा गनित की चल
  86. 6:15–6:19आचा, उकर लेल उसब एक ताद पर्यार करे चला
  87. 6:19–6:24इउतेड आसल में एक ता बत्तिस पूर्वज का वन्शावली मेट्रिक्स चल
  88. 6:24–6:28रूकीजो, बत्तिस ता पूर्वज का मेट्रिक्स
  89. 6:28–6:31कागजो पिन भिना इकोना समबज है
  90. 6:31–6:32आदाड पत्र पर
  91. 6:32–6:35जगन कोनो विवाह कगप उठहे चल
  92. 6:35–6:39तो पन्जिकार, वर, अक्कन्याक, मात्रिपक्ष्ष, पाज्पीटी,
  93. 6:39–6:44अप्त्रिपक्ष्ष, चोया साथ पीटी का जानकारी का एक ता चाड बन बे चला.
  94. 6:44–6:50इन्यम, मात्रिद, वपंच्मी, चक्त्वा, पित्रत, सब्तमी, भजेत पर आदारी चल.
  95. 6:50–6:54माने माएक दिस्सा पाजपीडी अ पिताख दिस्सा सात पीडी चोडी का.
  96. 6:54–6:55बलकुल.
  97. 6:55–7:00तक कन्या अवर्क क्ल बतिस्ता पुर्खा के एक तनक्षा बनी जैच्छल.
  98. 7:00–7:06इप प्राचीन कालक अनसेस्ट्ट्री डोट्कोम जका भहगेल मुदा उहु से भीषी सक्त.
  99. 7:06–7:08आँ, सक्त्त तच्छल
  100. 7:08–7:12जग कोनो ग़बडी होएत चल, तवोक्रा कोना पक्रल जआएच चल?
  101. 7:12–7:16एही फायर वल के चेक पुझ्ट के सोलग चथी कहल जआएच चल.
  102. 7:16–7:21कन्याक सोलगता विषेश पूर्वज माने, सोलगता नोड निकाल जआएच चल.
  103. 7:21–7:22जैना की?
  104. 7:22–7:28जना पितामह कमातामह कपिता या मातामही कमातामह कमातामह
  105. 7:28–7:30एही तरा का सोलट्त विषिट संबन्द
  106. 7:30–7:34जा एही सोलट्त वती में सक कोनो एक्ता पूर्वाज
  107. 7:34–7:36वरक निषिद पिडि में मिली जाये
  108. 7:36–7:40तो अग्रा स्वजन मानी का विवाज तुरन्त रद कर दे जाये चल
  109. 7:40–7:44बाप्रे एक्ता भी पुर्वज मिली जाये तो विवाह रद
  110. 7:44–7:45आप एक्दम रद
  111. 7:45–7:48और ज़ यी सब का चेक पुआँट पार बहुगेल
  112. 7:48–7:50ज़ कोनो मिलान न नहीं भेल
  113. 7:50–7:53तक नहीं पंजिकार सिद्धान्त पत्र जारी करे चला
  114. 7:53–7:55बिना एही सिद्धान्त पत्र का
  115. 7:55–7:57कोनो भी विवा हवेद मानल जैच्छल
  116. 7:57–8:00मुदा, सर्फ सपिन्द मही
  117. 8:00–8:02हम्रा लागे तची स्रोथ में
  118. 8:02–8:04गोत्र अप्रवर्क सहो उलेक चे
  119. 8:04–8:07बीस्टा गोत्र आउ सहसर सत
  120. 8:07–8:09मूल वुख के सन्रच्ना तयार केल गेल चल
  121. 8:09–8:12मूल क अर्थता हम भूजेच्छी
  122. 8:12–8:16जे आहाक प्रदम पुर्खा माने भीजी पूरुष मुल रुब से कतः सचला.
  123. 8:16–8:20उकर गाउ की चल, मुदा इप रवर की चे.
  124. 8:20–8:23आ, उहो एक ता पैगगगगगगगगग.
  125. 8:23–8:26आहा एम्रा इज समजाओ, जे इगोत्र प्रवर आएक,
  126. 8:26–8:31सोलच अत्तिक जे नियम चे, उकर पाजु कोनो अस्ली विग्यान चै,
  127. 8:31–8:34वा इमातर एक दारमिक कर्मकान्ड चल.
  128. 8:34–8:38इते सब से अकर्षक गब इच्छे, जे इपुरन रूप से विग्यान चे,
  129. 8:38–8:43गोत्र माने भेल, एक ता मुख्य पूरुश पूर्खाक वंच.
  130. 8:43–8:47मुदा प्रवर उही पुर्खासें जुडल प्राचीन रिषीक समूह चे.
  131. 8:47–8:48आच्टा.
  132. 8:48–8:51जेना कोनो गोत्र त्री प्रवर होगत ची.
  133. 8:51–8:54माने तीन रिषी तकोनो पंच्प्रवर.
  134. 8:54–8:57इते सब से अकर्षक गप इचे,
  135. 8:57–9:03जे वत्स्य आसवरना ये दूनू अलग अलग गोत्र चती मुदा दूनू कर प्रवर समान चे
  136. 9:03–9:05समान चे? कोना?
  137. 9:05–9:10और्व च्यवन बारगव जमदगनी आव आपलावान चती
  138. 9:10–9:14ताही कारन सिन वत्स्य आसवरन गोत्रग भीच विवाह वरजित चे
  139. 9:14–9:19आदूनिक पापूलेशन जनेटिक्स में एक रा, वाई क्रोमोसोम लाईनेज अवोईडन्स कहल जाईत चे.
  140. 9:19–9:22वाई क्रोमोसोम लाईनेज अवोईडन्स?
  141. 9:22–9:25इतो एक दम आदूनिक विग्यान अख्षब्द बबगेल.
  142. 9:25–9:36आप आप बज़ प्रटी मात्र पक्ष्षा पाचु जे बाक जे नियम चे उक्रा सा अहाक अटो सोमल दीने लग बग दीर प्रतिषत सा नीचा ब हो जाएच्चे.
  143. 9:36–9:41रूक, रूक, रूक, इई अटोसोमल दीने वाई क्रोमोसोम अवोएडन्स के तनी सोज बाशा मे समजा।
  144. 9:41–9:45हम्रा लिल, हम्रा जका कते को खलोक ले लि, शब्द बहुत भारी चे
  145. 9:45–9:50एक रा एक दम सादारन बाशा मे बतावब जे इख खाज कोना करे चे
  146. 9:50–9:52एक दम सादारन बाशा मे बूचु
  147. 9:52–9:54जगन कोनो बच्चा के जन्म होईत चे
  148. 9:54–9:56तो उक्रा प्चास प्रतिषत जनेटिक हिस्सा
  149. 9:56–9:58अपन पितासे बहिते चे
  150. 9:58–10:00आप प्चास प्रतिषत मातासा
  151. 10:00–10:01आई तो बुजल चे
  152. 10:01–10:03बस एक रा अटो सोओल दीने कही चे
  153. 10:04–10:04आब सोचु
  154. 10:04–10:09आख पिताम, मने दादा, सा आजा मे कतिक हिस साव, पचीस प्रतिषत.
  155. 10:09–10:10पर दादा सा?
  156. 10:10–10:12बारा पच्प्रतिषत.
  157. 10:12–10:14आच्छा, मने रभ पीटी मे आदा होत जाएच छे?
  158. 10:14–10:44बिल्कुल, आईईटरा एह रपीटी में आदा हुई चाईच लेच लेच जकन पंजीकार पाजबीटी पाचुजाक इचे करेच चला जे कोनो पुरवच समानत नहीं तो ओई सुनिष्टित करेच चला जे कन्या वरक भीज जेनेटिक समानता मातर एक पाजप्रतिषत से भी स
  159. 10:44–10:51अग, मैंने, चोड़ावाश ताबदी में बेना कोना दीने टेस्ट या माईक्रोस्कोप के,
  160. 10:51–10:56उसब एजनेटिक दूरी मेंटेन करबाक सतीग गनेद भुजगेई चला,
  161. 10:56–11:02इतो वाख्के इदगुट शे. मुदा, हम्राई गाप पुरन रुप से पच नहीं रहाला ची.
  162. 11:02–11:04पूरन रूप से पच नहीं रहाला ची.
  163. 11:04–11:06कियक, की बिल?
  164. 11:06–11:07तनी विचार करू,
  165. 11:07–11:09इव्यवेस्ता राजदर्बार से शुवबहिल,
  166. 11:09–11:14कौलीन वर्ग पाग पाग विद्वान आज जमींदार सब एकर हिस्चला.
  167. 11:14–11:15हाई चला.
  168. 11:15–11:16मानव स्वबहाउ चे,
  169. 11:16–11:21जद्यत्य सत्ता आप पईसा होँच्छे, उते ब्रष्टाचार से हो होँच्छे.
  170. 11:21–11:25की आहन न भेल है ते, जे कोनो आमीर परिवारक बेटाक,
  171. 11:25–11:28कोनो गलत जाती वा निषिद पीटी में विवाब हगेल होए,
  172. 11:28–11:32आ उ पंजी कार के गूज देका उहे रिकोड के मिता देलन होए?
  173. 11:32–11:36जिना आए का लोग, तॉटर से पन पुराना कھराब तॉट डिलीट कर दिछती.
  174. 11:36–11:41एक्दम! की समाज अपन दाग के नुकावा कोषिस नीक लग?
  175. 11:41–11:44जा हमरा सब एकर भ्यापक परद्रष्य संजोडी
  176. 11:44–11:46ताहाक इस सवाल बहुत प्रासंगिक छे
  177. 11:46–11:48आखोनो सामान ने समाज में
  178. 11:48–11:50इए एक्दम हो सके चल
  179. 11:50–11:51मुदा एते आबी कप,
  180. 11:51–11:54पंजी प्रवन्दक सबस क्रान्तिकारी
  181. 11:54–11:56आआश्चर ये जनक पक्ष सोजंगा आवाए चे
  182. 12:11–12:16अगर नहीं बलकी उख्रा अट्यांत सावदानी सब दूशन पनजी मे दर्ज किलन.
  183. 12:16–12:21माने उसब समाज के बदनामिक एक ता �alag डस्तावेज बनाक राखलनी,
  184. 12:21–12:25इता कोनो भी कुलीन वर्ग के लेल आत्मगाती कदम जका चे.
  185. 12:25–12:28उआपन खराभी के की एक सहेज कर आखता.
  186. 12:28–12:36कारन इचल, जे उ बुजे चला, जे जं उ सत्ते नुकाले ता, ता जनेटिक मैपिंका पुरा अलगारिदम ही क्रैष कर रेते.
  187. 12:36–12:41उनका सबकलेल, तत थे समाज का आहंकार सब बहुत पेग चल.
  188. 12:41–12:43इत बहुत कहीराई वाला गब भेल.
  189. 12:43–12:47एकर अदूनिक बाशा में नेगेटेव अट्रीब। जीन्यलोगी कहल जाएचे
  190. 12:47–12:51जग कोनो विन्न जाती दर्मोवा, निषिद धरिष्ते डालक भीच विवावेल,
  191. 12:51–12:56तो उक्रा दूशन पनजी में लिखल गेल, जे इदूशन कतेख पीडी दरी रहत,
  192. 12:56–13:00अगर कोनो विषिछ्ट उदारन्च है, जिश्वोट मे देल गेल हूए,
  193. 13:00–13:03और जक्रा से हम्रा सब एक्रा और नीखजगगग बुजी सकी?
  194. 13:03–13:10एक्दम! सबसे पैग और प्रसिद उदारन् नव्य न्याएक के संस्तापक गंगेश उपाद्ध्याए कचे.
  195. 13:10–13:15सब से पेग और प्रस्ध उदाहरन नव्य न्यायक के संस्तापक गंगेश उपाद्ध्याय कचे.
  196. 13:16–13:18जे तत्व छिन्तामनी लिखलनी.
  197. 13:18–13:20आँ तत्व छिन्तामनी जका,
  198. 13:20–13:22उही महान गरन्त करष्ना केलनी,
  199. 13:22–13:25जका दंका पूरा भरत वर्ष्छ में बाजे चिल.
  200. 13:25–13:28उईक्ता बहुत पाइग विद्वान अब रामभन चला
  201. 13:28–13:31मुदा दूशन पंजी में सपश्ट रुब से दर्चेजे
  202. 13:31–13:34वूनक जन्म, वूनक पिताक मरत्युक पाच वर्ष्बाद भेलजल
  203. 13:34–13:36की? पाच वर्ष्बाद
  204. 13:36–13:39राँ और इहो दर्चेजे वूनक माता
  205. 13:39–13:42यह तच्वर्म कारनी माने च्वर्म कार जातिक चलीया
  206. 13:42–13:45बाआप रे, इते खपाएग विद्वानाक इसच्चाई
  207. 13:45–13:52आदूनिक योग ककते को इतिहास कार अविद्वान इगव नुकाबाक बहुत कोशिष केलनें
  208. 13:52–13:56मुदा प्राचीन पंजी कार सब सत्तिः संग कोनो च्वर्चार नहीं
  209. 13:56–14:00हुनका लेल गंगे शौपाद्धयक विद्वता अपनजगा चल
  210. 14:00–14:03मुदा जनेटिक अवन्शावली क सत्तिः अपनजगा
  211. 14:03–14:06इद वाक्के अचमविट करे वाला थत्तिः चै
  212. 14:06–14:10यही तर हैं महां गनितग आरे बध हुनक उन्चालिस पीडिक वन्शावलिक
  213. 14:10–14:12अ विद्यापतिक वन्शावलि से हो
  214. 14:12–14:14यही पनजी सा प्रमानित होएच
  215. 14:14–14:17विद्यापतिक वन्शावलि में किच एहन चलके
  216. 14:17–14:19विद्यापतिक वन्शावलि में यवनी
  217. 14:19–14:21मने मुसलिम महिला दूलती
  218. 14:21–14:23जहां सभहल विवाहक प्रसंखसे हो
  219. 14:23–14:26अस्पष्ट रूपसा दूशन पनजी में दर चै
  220. 14:26–14:30जैसा उपन्न सन्टान के अंतता समाज में एक ता स्थान विटल
  221. 14:30–14:31इई सुन्ला दरीता
  222. 14:31–14:37इवेवस्त्ता एक ता अट्यन्त निश्पक्ष वेग्यानिक अपार्दर्शी अटियास्इक दर्पन लागच्चे.
  223. 14:37–14:43मुदाजय एक एक इवेग्यानिक अनिश्पक्ष शल ता आई इएहन स्तितिमे किए चे.
  224. 14:43–14:45इएक ता महत्वपुन प्रष्ना थाल कराएच्चे.
  225. 14:45–14:49समय एक संग एह व्यवस्त्ठा में से हो खराभी आईल है ते
  226. 14:49–14:55आकी इजनेटिक सुरक्षाक प्रनाली अंतताह समाजिक भेद्बाव अखुरीद के कारन बंगेल
  227. 14:55–14:58इए इतिहासक एक ता बहुत दुखध मोड चे
  228. 14:58–15:0718 मी शताब्दी में दर्बंगाक महराजा माधव सिंके समय में आबी का इब्यवस्ता आपन मुल वेग्यानिक उदेश से बद्के गेल.
  229. 15:07–15:10उईऽी समय शाक्धा पंजी की श्रुवात बेल.
  230. 15:10–15:11अख्रा से की बेल?
  231. 15:11–15:16एकर परिनाम एभेल जे ब्राहमन समाज के विबहिन वर्ग मे बाथ दिलगेल
  232. 15:16–15:21जेना श्रोत्रिय, योग्य, पंजीबद्ध, आज्जैवार
  233. 15:21–15:27आ, बुजबा मे आभी रोल चे जे एक तक खलास सिस्तम वा विएपी कलाब जका बनीगेल
  234. 15:27–15:31जे वेवस्त्ता जनेटिक रूप से स्वस्त रहबाक लेल बनावल गेल चल,
  235. 15:31–15:33उ आप समाजिक स्टेटस का मोहर बनीगल?
  236. 15:33–15:35बिलकुल सही पकर लों वहां
  237. 15:35–15:37आएकर कुप्रभाव एभेल
  238. 15:37–15:39जे समाज में हाईपर गेमी
  239. 15:39–15:41माने उच्छवर्ग में विवाध करवाक
  240. 15:41–15:43इक ता अदी होड मज गेल
  241. 15:43–15:45सब के लगे चल
  242. 15:45–15:46जे आपन भेटीक विवाज
  243. 15:46–15:47कोनो श्रोट्रिये से कर दी
  244. 15:47–15:50जाही सा हुँणकर समाजिक रुट्बा बड़ी जाए
  245. 15:50–15:53कारन, श्रोट्रिये सब सव उच्छवर्ग मानल गेल चल
  246. 15:53–15:55आप एकर परिणाम एभेल
  247. 15:55–15:58जिश्व्रोट्रिय पूरुष सबक मांग बहुत बड़िगेल
  248. 15:58–16:01बहुविवाग का ब्यांकर समस्या जन मिले लक
  249. 16:01–16:04एक इक ता श्रोट्रिय पूरुष दरजनो विवाग करे लागल
  250. 16:04–16:06दरजनो विवाग
  251. 16:06–16:09इतो विनाशकारी बहेगे लेद थि समाजक लेल
  252. 16:09–16:10एक दम
  253. 16:10–16:15ताहीस समाज में बाल विवा, अक्कम उम्रमें विध्वाईवाक बह्यंकर समस्या उत्पन्नवाल.
  254. 16:16–16:19महराजा माधो सिंग एत्वादरी नियम कदगर कर्दलनी,
  255. 16:19–16:24जे सुत्रिय सबक विवागा के लिल, हुनक वेक्तिगद अनुमती अनिवार्यव होगा लिल.
  256. 16:24–16:26जेख्राब परमांगी कहल रही था च्लाने?
  257. 16:26–16:27आप परमांगी
  258. 16:27–16:34इता एक ता क्लासिक केस च्याई जदे कोनो देटा भेसक उप्योग विग्यान का बडला सत्ता अन्यंट्रन कलिल हो में लागल
  259. 16:34–16:37जे पंजी कार कखनो निष्पक्ष वेग्यानिक च्लां
  260. 16:37–16:40उ समयक संग समाजिक पदानुक्रम कर रक्षक बंगिला,
  261. 16:40–16:45तार्पत्र पर लिखल उजनेटिक फायर वाल एक ता समाजिक जनजीर बंगिला.
  262. 16:45–16:46सत्तिगव छे.
  263. 16:46–16:49ता आईईच समय में एह पंजी प्रबंदध्स्तिती चै.
  264. 16:49–16:53बवोतिक रूप से इटाडबत्र सबत नश्ट बहेर हैते
  265. 16:53–16:58एक दम आइस्तिती इचे, जे तिरूता माने मितलाक्षर लिपी के जान
  266. 16:58–17:01जाही में सबता लिखल गेल चले उलुप्त बहुर हाल चे
  267. 17:01–17:06जे पन्जी तालपत्र पर लिखल चल, उक्रा कीडा मकोडा अनमी नस्ट कराज चै.
  268. 17:06–17:08इत बहुत दुखच चै.
  269. 17:08–17:11मुदक किछ उमीद किरन से हो चे.
  270. 17:11–17:13श्रोथ सा हम्रा सब के पता चलेत चे.
  271. 17:13–17:19जे 2009 इश्वी के भीच गजेंद्र थाकृर नागेंद्र कुमार जा,
  272. 17:19–17:23आप पन्जीकार विद्यनन्द जाजका विद्वान लोकनी
  273. 17:23–17:25एही तालपत्र सब के देवनागरी में
  274. 17:25–17:29दिजितल करवाके एक ता पैग आब भागीरत प्रयास किलनें
  275. 17:29–17:31दिजितल माने उक्रा स्कान का का
  276. 17:31–17:33कम्पुटर में सेव किल गेल
  277. 17:33–17:41उ लग बबग ग्यारा हजार सब भेसी पूति के स्कन कैक, एक रग जनेटिक आम्मानव शास्तरिय अद्यान के लेल सुरक्षित किलनी.
  278. 17:41–17:43इप रयास अद्यन्त अवष्यक छल.
  279. 17:43–17:44क्या?
  280. 17:44–17:47कारण इमात्र किछ परिवारग गवप नहीं छे,
  281. 17:47–18:17इसे इसे बुजवा में अबएद चे पनजी प्रबंद एक असादारन वैग्याने कि लिए तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तु
  282. 18:17–18:24ये एक हाँदार साल से बेशी समएदरी बिना कोनो आदनिक तकनिक के चलल.
  283. 18:24–18:25आए एक दम.
  284. 18:25–18:32एक रा एक ता सोट्वेर के रूप में देखी जाए जनेटिक वाईरस के रोखबाक लेल बनाओल गेल चल.
  285. 18:32–18:36दूशन पन्जी उकर क्रश्लोग जल जाए में ग़भडी लिखल जाए चल.
  286. 18:36–18:41मुदा बाद में सोषल इगो, असामाजिक पदानुक्रमक कारन,
  287. 18:41–18:43उहे सिस्तम के हैक कर ले ले ल्गेल.
  288. 18:43–18:46इव्यवस्ता हम्रा सब के इशिक्हाभे च्यए,
  289. 18:46–18:49जि ग्यान अ तकनी कते को उच्क्ये कने होए,
  290. 18:49–18:54जो उख्र समाजिक समानता आन निश्पक्ष्ताक आदार नहीं भेटत,
  291. 18:54–18:58तो उव्यवस्ता अपनन मूल उद्देश सा बभतक जाए चल.
  292. 18:58–19:01तता पी, एकर जे प्रारंविक व्यग्यानिक आदार चल,
  293. 19:01–19:04उ आई दिर आचुक आ आश्चर जजनक चै
  294. 19:04–19:09एक दम इस सब देखी का एक ता पैग प्रष्न थार हो इच्छे
  295. 19:09–19:13जवा चोदवाश चताबदी के एक ता समाज
  296. 19:13–19:16मात्र तारपत्र आ अपनन समरन शक्ती बल पर
  297. 19:16–19:19इत दे पैग जनेटिक मैपिंग का सके चल
  298. 19:19–19:23अदूशन पन्जीजका निश्पक्ष दस्तावेज तयार कर सके चल,
  299. 19:23–19:27ता आई अई अटिटनेट आ आटिटिष्छल अग्टेलजन्स के युग में,
  300. 19:27–19:31हमरा सब एहन की महत्व पुन मान्विए ग्यान गमारहल ची?
  301. 19:31–19:33बहुत नीक प्रष्ट चाईई.
  302. 19:33–19:39मुदा उई इ देटा के प्रमानित करवाखलेल, उकरा एक ता मानविसनदर भदेबाखलेल,
  303. 19:39–19:43अब बना कोनो अहंकारक, उकरा निष्पक्ष रोप से सहेजबाखलेल,
  304. 19:43–19:48उई प्राछीन पंजिकार जका कोनो समर पित विष्लेषक नहीं चे?
  305. 19:48–19:54इप्रश्न हम्रा सब के अपन आदूनिक सुचना संग्रहन प्रनाली पर पुनर विचार करबाकली बिववष करेद चे
  306. 19:54–20:00तब इच्फल मित्ला के आही अभूत इतिहास करेच्ता विस्च्र चर्चा एप पर विचार करत रहुु

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कल्पना करु चौदा आम्षताब दिक समय, मने एक ता महिला का हात्छे, एक ता जराइत लोहा राखी दिल जाछ छे. आगिक परिक्षा या त्राल बाई अवर दील जक्रा काल जाए चल. एक दम जा उनक हात जली जाए चे तो उदोषी मानल जिती है. आरोप चे आपन पतिक प्रती निष्थाहीन हो बाक उनका उजराइत लोहा रहात में लेबाक लेल कहल गेल और किचु कालक बाद उनक रहात जली गेल आव, उही समएक नयाई प्रनाली का नूसार तो समाज उनका तुरंत डोषी मानी लेलग हैते अग, मानी ले लग. मुदा एक ता बहुत पेच चल. उ महीला वास्तमे, शारीरिक रूप से कोनो दोसर पूरूष से समबंद नहीं रखने चली. माने उ पुरन रूप से निर्दोष चली. मुदा फिर भी हूनाख हाज जली गल. बापरे, ता कारन की चले कर? कारन इई नेचल जो उ बे वफा चलें बलकी इचल जो हुनका पतिक पारिवारिक डेटा बेस में एक ता ब्यंकर जनेटिक बग आगिल चल जनेटिक बग? चोदा हम शताबदी में? हाँ इखोनो होलीवुट फिल्नगे कता नेचाय, बुजलूू इज़े ख़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उग़ा उ़ा उग़ा उ़गा उ� जे हमरा सबक इतिहासक द्रिष्टी कोनके बदली कर अखी देचे जकन हमरा सब कुनु विशाल डेटा बेसक गब कर अगी ची तम मन में सिलिकान वली पैगपाएक सरवर रूम आख खलाूट श्टोरेज के चित्रब ऐचे. आप बलकुल. अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ� बिना कुनो कम्पूटर वा सुव्ट्वेरक, इह रजाना वर्षक जनेटिक देटा के सुरक्षित राखल गय. मुदा रुकी जाओ, हमरा उई आगिक परिक्षाक कतापर वापस जे बाखे चे. इदे हमरा एक्दम सकोनो मिस्ट्री ख्लिलर जका आगी रहा लेची. जोन उ महिलान निर्दोष छलीन, तो उ आगिक परिक्षामे फेल की एक भिली, उ जनेटिक बग असल में चल की? आच्छ, ता इी तीरसो चब्विसी सिस्वी गब चै. मित्ला मैं करनात वन्षक राजा हरी सिंदेव कर शासन काल चल. उई समेद़री लोक आपन वन्शावली मोकिक रूपस वा समुह लेक के माद्धिम सर अके चला समुह लेक माने किछ लोकक समु मिलक लिखे चला आ, बिलकु, मुदा मोकिक समरनकत आपन एक टा सीमा हुई चे उईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई� उभी बिचारक आरोप लागल आँँँक आगेक परिक्षा देवा के ले कहल गल आजकन हुँँकर हाज्जेली गलक तसम मानी लेलक जो दोशी चते अ, मुदा, उही समे मितला केक्त अट्टिन्त विदूशी महला चलीया लखिमा तगुराईन, उ मी मान सक रवी मिश्रेक की पुत्री आम महा महोपाद्धे रामेशवरक पतनी चलीय, लखिमा तगुराईन एही रहसी को जागर कलनीय. अ, के कहलनी? तर्क्दिलने, जि हरिनात फबयाएक पतनी शररिक रुपस अपवित्र वद दोशी नहीं जलीं मुदा इविवा सन्रचनात्मक रुपसा सपिंद नियमक उलंगन चल दर्म शास्त्र कनुसार सपिंद विवास उपन समबंद अवेद आच्चाईंडाल समान मानल जचल अच्छा तभी कारन्सा शर्रिक दोष नहीं मुदा उही सन्रचनात्मक दोष आवाग कारने हुंकर हाज्जली गे लिक एक दम, इता गजजब भ्यल माने एकोनो कमपुटर सुब्ट्वेर अख उही क्राष जका भ्यल जटै इस सिस्तम बर्सुंसे चली रहल होगी चे, मुदा एजक्हन उ आचानक बन्द पर जाए चे, तकने एंजिन्यर कें पता चले चे, जे सिस्तम अक्ष्टिंग में कते गडबरी चे. बहुत नीक उदारन्दिल हो, हरीनात उपाद्ध्धयाय के गतना, उही प्राछीन समुले कही आमावक्खिक सिस्तम का क्राश च्छल. मुदा एक टा गब कहूँ, राजा हरी सिंदेव यी तब उजी गेला, जे पुरान सिस्तम फेल बहगेल चे. जकन एटिक पाएक विद्वान से इग रहती भहज्चे, अद्या उई नव सिस्तम ताड़ को ना किलनी उई ही संकत के न बहुत गंविर्ता सले ले ले है राजा हरी सिंदेव तुरनत विष्विच्चक्र सम्मेलन बजे ले है इसम्मेलन मदूपनिक जमसाम गाम में बेल चल तो उते एकी निरने लेल गेल? उते इद्यातियासिक निदने लेल गेल, जे आप सा वन्शावली मोखिक नहीं रहात, एक रा लेकित रूप देल जाईते. उपन्जिकार निउक्त के लें, जे राज द्वारा मानेता प्राथ वन्शावली विषेष्यष्यग ज्ड्यादाग. माने, स्तेट अपोविन्तेट जीनी लोगिस्ट्स् आँ, जेना ब्राम्हन सबखके ले ले ल्गुनाकर जा, करन कायस्त सबखके ले ले ल्छष्गर्द्ध, आच्ठ्रीय सबखके ले ले ल्गुजे दद्धके मुख्य पंजीकार बनावल गेल. इई ये एक ता पूर्न संस्त्ताग देटा बेस के नीव चल तीख से अ पंजीकार निुक्त कदेल ही मुता हमर सवाल इई चे जे इगाज व्यावारिक रुपस कोना होई चल कोना मने? जगन कोनो विवात आई होई चल तो उ पंजी कार ताड पत्र पर इक कोना ते करे चला जे इदूनु गोते जनेटिक रुपस दूर चती उनकर आलगारितम वा गनित की चल आचा, उकर लेल उसब एक ताद पर्यार करे चला इउतेड आसल में एक ता बत्तिस पूर्वज का वन्शावली मेट्रिक्स चल रूकीजो, बत्तिस ता पूर्वज का मेट्रिक्स कागजो पिन भिना इकोना समबज है आदाड पत्र पर जगन कोनो विवाह कगप उठहे चल तो पन्जिकार, वर, अक्कन्याक, मात्रिपक्ष्ष, पाज्पीटी, अप्त्रिपक्ष्ष, चोया साथ पीटी का जानकारी का एक ता चाड बन बे चला. इन्यम, मात्रिद, वपंच्मी, चक्त्वा, पित्रत, सब्तमी, भजेत पर आदारी चल. माने माएक दिस्सा पाजपीडी अ पिताख दिस्सा सात पीडी चोडी का. बलकुल. तक कन्या अवर्क क्ल बतिस्ता पुर्खा के एक तनक्षा बनी जैच्छल. इप प्राचीन कालक अनसेस्ट्ट्री डोट्कोम जका भहगेल मुदा उहु से भीषी सक्त. आँ, सक्त्त तच्छल जग कोनो ग़बडी होएत चल, तवोक्रा कोना पक्रल जआएच चल? एही फायर वल के चेक पुझ्ट के सोलग चथी कहल जआएच चल. कन्याक सोलगता विषेश पूर्वज माने, सोलगता नोड निकाल जआएच चल. जैना की? जना पितामह कमातामह कपिता या मातामही कमातामह कमातामह एही तरा का सोलट्त विषिट संबन्द जा एही सोलट्त वती में सक कोनो एक्ता पूर्वाज वरक निषिद पिडि में मिली जाये तो अग्रा स्वजन मानी का विवाज तुरन्त रद कर दे जाये चल बाप्रे एक्ता भी पुर्वज मिली जाये तो विवाह रद आप एक्दम रद और ज़ यी सब का चेक पुआँट पार बहुगेल ज़ कोनो मिलान न नहीं भेल तक नहीं पंजिकार सिद्धान्त पत्र जारी करे चला बिना एही सिद्धान्त पत्र का कोनो भी विवा हवेद मानल जैच्छल मुदा, सर्फ सपिन्द मही हम्रा लागे तची स्रोथ में गोत्र अप्रवर्क सहो उलेक चे बीस्टा गोत्र आउ सहसर सत मूल वुख के सन्रच्ना तयार केल गेल चल मूल क अर्थता हम भूजेच्छी जे आहाक प्रदम पुर्खा माने भीजी पूरुष मुल रुब से कतः सचला. उकर गाउ की चल, मुदा इप रवर की चे. आ, उहो एक ता पैगगगगगगगगग. आहा एम्रा इज समजाओ, जे इगोत्र प्रवर आएक, सोलच अत्तिक जे नियम चे, उकर पाजु कोनो अस्ली विग्यान चै, वा इमातर एक दारमिक कर्मकान्ड चल. इते सब से अकर्षक गब इच्छे, जे इपुरन रूप से विग्यान चे, गोत्र माने भेल, एक ता मुख्य पूरुश पूर्खाक वंच. मुदा प्रवर उही पुर्खासें जुडल प्राचीन रिषीक समूह चे. आच्टा. जेना कोनो गोत्र त्री प्रवर होगत ची. माने तीन रिषी तकोनो पंच्प्रवर. इते सब से अकर्षक गप इचे, जे वत्स्य आसवरना ये दूनू अलग अलग गोत्र चती मुदा दूनू कर प्रवर समान चे समान चे? कोना? और्व च्यवन बारगव जमदगनी आव आपलावान चती ताही कारन सिन वत्स्य आसवरन गोत्रग भीच विवाह वरजित चे आदूनिक पापूलेशन जनेटिक्स में एक रा, वाई क्रोमोसोम लाईनेज अवोईडन्स कहल जाईत चे. वाई क्रोमोसोम लाईनेज अवोईडन्स? इतो एक दम आदूनिक विग्यान अख्षब्द बबगेल. आप आप बज़ प्रटी मात्र पक्ष्षा पाचु जे बाक जे नियम चे उक्रा सा अहाक अटो सोमल दीने लग बग दीर प्रतिषत सा नीचा ब हो जाएच्चे. रूक, रूक, रूक, इई अटोसोमल दीने वाई क्रोमोसोम अवोएडन्स के तनी सोज बाशा मे समजा। हम्रा लिल, हम्रा जका कते को खलोक ले लि, शब्द बहुत भारी चे एक रा एक दम सादारन बाशा मे बतावब जे इख खाज कोना करे चे एक दम सादारन बाशा मे बूचु जगन कोनो बच्चा के जन्म होईत चे तो उक्रा प्चास प्रतिषत जनेटिक हिस्सा अपन पितासे बहिते चे आप प्चास प्रतिषत मातासा आई तो बुजल चे बस एक रा अटो सोओल दीने कही चे आब सोचु आख पिताम, मने दादा, सा आजा मे कतिक हिस साव, पचीस प्रतिषत. पर दादा सा? बारा पच्प्रतिषत. आच्छा, मने रभ पीटी मे आदा होत जाएच छे? बिल्कुल, आईईटरा एह रपीटी में आदा हुई चाईच लेच लेच जकन पंजीकार पाजबीटी पाचुजाक इचे करेच चला जे कोनो पुरवच समानत नहीं तो ओई सुनिष्टित करेच चला जे कन्या वरक भीज जेनेटिक समानता मातर एक पाजप्रतिषत से भी स अग, मैंने, चोड़ावाश ताबदी में बेना कोना दीने टेस्ट या माईक्रोस्कोप के, उसब एजनेटिक दूरी मेंटेन करबाक सतीग गनेद भुजगेई चला, इतो वाख्के इदगुट शे. मुदा, हम्राई गाप पुरन रुप से पच नहीं रहाला ची. पूरन रूप से पच नहीं रहाला ची. कियक, की बिल? तनी विचार करू, इव्यवेस्ता राजदर्बार से शुवबहिल, कौलीन वर्ग पाग पाग विद्वान आज जमींदार सब एकर हिस्चला. हाई चला. मानव स्वबहाउ चे, जद्यत्य सत्ता आप पईसा होँच्छे, उते ब्रष्टाचार से हो होँच्छे. की आहन न भेल है ते, जे कोनो आमीर परिवारक बेटाक, कोनो गलत जाती वा निषिद पीटी में विवाब हगेल होए, आ उ पंजी कार के गूज देका उहे रिकोड के मिता देलन होए? जिना आए का लोग, तॉटर से पन पुराना कھराब तॉट डिलीट कर दिछती. एक्दम! की समाज अपन दाग के नुकावा कोषिस नीक लग? जा हमरा सब एकर भ्यापक परद्रष्य संजोडी ताहाक इस सवाल बहुत प्रासंगिक छे आखोनो सामान ने समाज में इए एक्दम हो सके चल मुदा एते आबी कप, पंजी प्रवन्दक सबस क्रान्तिकारी आआश्चर ये जनक पक्ष सोजंगा आवाए चे अगर नहीं बलकी उख्रा अट्यांत सावदानी सब दूशन पनजी मे दर्ज किलन. माने उसब समाज के बदनामिक एक ता �alag डस्तावेज बनाक राखलनी, इता कोनो भी कुलीन वर्ग के लेल आत्मगाती कदम जका चे. उआपन खराभी के की एक सहेज कर आखता. कारन इचल, जे उ बुजे चला, जे जं उ सत्ते नुकाले ता, ता जनेटिक मैपिंका पुरा अलगारिदम ही क्रैष कर रेते. उनका सबकलेल, तत थे समाज का आहंकार सब बहुत पेग चल. इत बहुत कहीराई वाला गब भेल. एकर अदूनिक बाशा में नेगेटेव अट्रीब। जीन्यलोगी कहल जाएचे जग कोनो विन्न जाती दर्मोवा, निषिद धरिष्ते डालक भीच विवावेल, तो उक्रा दूशन पनजी में लिखल गेल, जे इदूशन कतेख पीडी दरी रहत, अगर कोनो विषिछ्ट उदारन्च है, जिश्वोट मे देल गेल हूए, और जक्रा से हम्रा सब एक्रा और नीखजगगग बुजी सकी? एक्दम! सबसे पैग और प्रसिद उदारन् नव्य न्याएक के संस्तापक गंगेश उपाद्ध्याए कचे. सब से पेग और प्रस्ध उदाहरन नव्य न्यायक के संस्तापक गंगेश उपाद्ध्याय कचे. जे तत्व छिन्तामनी लिखलनी. आँ तत्व छिन्तामनी जका, उही महान गरन्त करष्ना केलनी, जका दंका पूरा भरत वर्ष्छ में बाजे चिल. उईक्ता बहुत पाइग विद्वान अब रामभन चला मुदा दूशन पंजी में सपश्ट रुब से दर्चेजे वूनक जन्म, वूनक पिताक मरत्युक पाच वर्ष्बाद भेलजल की? पाच वर्ष्बाद राँ और इहो दर्चेजे वूनक माता यह तच्वर्म कारनी माने च्वर्म कार जातिक चलीया बाआप रे, इते खपाएग विद्वानाक इसच्चाई आदूनिक योग ककते को इतिहास कार अविद्वान इगव नुकाबाक बहुत कोशिष केलनें मुदा प्राचीन पंजी कार सब सत्तिः संग कोनो च्वर्चार नहीं हुनका लेल गंगे शौपाद्धयक विद्वता अपनजगा चल मुदा जनेटिक अवन्शावली क सत्तिः अपनजगा इद वाक्के अचमविट करे वाला थत्तिः चै यही तर हैं महां गनितग आरे बध हुनक उन्चालिस पीडिक वन्शावलिक अ विद्यापतिक वन्शावलि से हो यही पनजी सा प्रमानित होएच विद्यापतिक वन्शावलि में किच एहन चलके विद्यापतिक वन्शावलि में यवनी मने मुसलिम महिला दूलती जहां सभहल विवाहक प्रसंखसे हो अस्पष्ट रूपसा दूशन पनजी में दर चै जैसा उपन्न सन्टान के अंतता समाज में एक ता स्थान विटल इई सुन्ला दरीता इवेवस्त्ता एक ता अट्यन्त निश्पक्ष वेग्यानिक अपार्दर्शी अटियास्इक दर्पन लागच्चे. मुदाजय एक एक इवेग्यानिक अनिश्पक्ष शल ता आई इएहन स्तितिमे किए चे. इएक ता महत्वपुन प्रष्ना थाल कराएच्चे. समय एक संग एह व्यवस्त्ठा में से हो खराभी आईल है ते आकी इजनेटिक सुरक्षाक प्रनाली अंतताह समाजिक भेद्बाव अखुरीद के कारन बंगेल इए इतिहासक एक ता बहुत दुखध मोड चे 18 मी शताब्दी में दर्बंगाक महराजा माधव सिंके समय में आबी का इब्यवस्ता आपन मुल वेग्यानिक उदेश से बद्के गेल. उईऽी समय शाक्धा पंजी की श्रुवात बेल. अख्रा से की बेल? एकर परिनाम एभेल जे ब्राहमन समाज के विबहिन वर्ग मे बाथ दिलगेल जेना श्रोत्रिय, योग्य, पंजीबद्ध, आज्जैवार आ, बुजबा मे आभी रोल चे जे एक तक खलास सिस्तम वा विएपी कलाब जका बनीगेल जे वेवस्त्ता जनेटिक रूप से स्वस्त रहबाक लेल बनावल गेल चल, उ आप समाजिक स्टेटस का मोहर बनीगल? बिलकुल सही पकर लों वहां आएकर कुप्रभाव एभेल जे समाज में हाईपर गेमी माने उच्छवर्ग में विवाध करवाक इक ता अदी होड मज गेल सब के लगे चल जे आपन भेटीक विवाज कोनो श्रोट्रिये से कर दी जाही सा हुँणकर समाजिक रुट्बा बड़ी जाए कारन, श्रोट्रिये सब सव उच्छवर्ग मानल गेल चल आप एकर परिणाम एभेल जिश्व्रोट्रिय पूरुष सबक मांग बहुत बड़िगेल बहुविवाग का ब्यांकर समस्या जन मिले लक एक इक ता श्रोट्रिय पूरुष दरजनो विवाग करे लागल दरजनो विवाग इतो विनाशकारी बहेगे लेद थि समाजक लेल एक दम ताहीस समाज में बाल विवा, अक्कम उम्रमें विध्वाईवाक बह्यंकर समस्या उत्पन्नवाल. महराजा माधो सिंग एत्वादरी नियम कदगर कर्दलनी, जे सुत्रिय सबक विवागा के लिल, हुनक वेक्तिगद अनुमती अनिवार्यव होगा लिल. जेख्राब परमांगी कहल रही था च्लाने? आप परमांगी इता एक ता क्लासिक केस च्याई जदे कोनो देटा भेसक उप्योग विग्यान का बडला सत्ता अन्यंट्रन कलिल हो में लागल जे पंजी कार कखनो निष्पक्ष वेग्यानिक च्लां उ समयक संग समाजिक पदानुक्रम कर रक्षक बंगिला, तार्पत्र पर लिखल उजनेटिक फायर वाल एक ता समाजिक जनजीर बंगिला. सत्तिगव छे. ता आईईच समय में एह पंजी प्रबंदध्स्तिती चै. बवोतिक रूप से इटाडबत्र सबत नश्ट बहेर हैते एक दम आइस्तिती इचे, जे तिरूता माने मितलाक्षर लिपी के जान जाही में सबता लिखल गेल चले उलुप्त बहुर हाल चे जे पन्जी तालपत्र पर लिखल चल, उक्रा कीडा मकोडा अनमी नस्ट कराज चै. इत बहुत दुखच चै. मुदक किछ उमीद किरन से हो चे. श्रोथ सा हम्रा सब के पता चलेत चे. जे 2009 इश्वी के भीच गजेंद्र थाकृर नागेंद्र कुमार जा, आप पन्जीकार विद्यनन्द जाजका विद्वान लोकनी एही तालपत्र सब के देवनागरी में दिजितल करवाके एक ता पैग आब भागीरत प्रयास किलनें दिजितल माने उक्रा स्कान का का कम्पुटर में सेव किल गेल उ लग बबग ग्यारा हजार सब भेसी पूति के स्कन कैक, एक रग जनेटिक आम्मानव शास्तरिय अद्यान के लेल सुरक्षित किलनी. इप रयास अद्यन्त अवष्यक छल. क्या? कारण इमात्र किछ परिवारग गवप नहीं छे, इसे इसे बुजवा में अबएद चे पनजी प्रबंद एक असादारन वैग्याने कि लिए तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तुछ तु ये एक हाँदार साल से बेशी समएदरी बिना कोनो आदनिक तकनिक के चलल. आए एक दम. एक रा एक ता सोट्वेर के रूप में देखी जाए जनेटिक वाईरस के रोखबाक लेल बनाओल गेल चल. दूशन पन्जी उकर क्रश्लोग जल जाए में ग़भडी लिखल जाए चल. मुदा बाद में सोषल इगो, असामाजिक पदानुक्रमक कारन, उहे सिस्तम के हैक कर ले ले ल्गेल. इव्यवस्ता हम्रा सब के इशिक्हाभे च्यए, जि ग्यान अ तकनी कते को उच्क्ये कने होए, जो उख्र समाजिक समानता आन निश्पक्ष्ताक आदार नहीं भेटत, तो उव्यवस्ता अपनन मूल उद्देश सा बभतक जाए चल. तता पी, एकर जे प्रारंविक व्यग्यानिक आदार चल, उ आई दिर आचुक आ आश्चर जजनक चै एक दम इस सब देखी का एक ता पैग प्रष्न थार हो इच्छे जवा चोदवाश चताबदी के एक ता समाज मात्र तारपत्र आ अपनन समरन शक्ती बल पर इत दे पैग जनेटिक मैपिंग का सके चल अदूशन पन्जीजका निश्पक्ष दस्तावेज तयार कर सके चल, ता आई अई अटिटनेट आ आटिटिष्छल अग्टेलजन्स के युग में, हमरा सब एहन की महत्व पुन मान्विए ग्यान गमारहल ची? बहुत नीक प्रष्ट चाईई. मुदा उई इ देटा के प्रमानित करवाखलेल, उकरा एक ता मानविसनदर भदेबाखलेल, अब बना कोनो अहंकारक, उकरा निष्पक्ष रोप से सहेजबाखलेल, उई प्राछीन पंजिकार जका कोनो समर पित विष्लेषक नहीं चे? इप्रश्न हम्रा सब के अपन आदूनिक सुचना संग्रहन प्रनाली पर पुनर विचार करबाकली बिववष करेद चे तब इच्फल मित्ला के आही अभूत इतिहास करेच्ता विस्च्र चर्चा एप पर विचार करत रहुु

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