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मिथिलाक_पंजी_पंद्रह_सय_सालक_हार्ड_ड्राइव.m4a
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- 0:00–0:08कल्पना करू जे एक ता एहन, एक ता एहन हाड़्ड्डाईव आची, जे पन्द्रहा सो साल सा अबी दरी कही रोग क्रष ने भेल चे.
- 0:08–0:11माने बिना कोनो भिजली वा अंटरनेट कर?
- 0:11–0:13आँ, एक दम!
- 0:13–0:16बिना कोनो भिजली बिना कोनो खला। सर्वर कर
- 0:16–0:18इता एहन स्टोरेज सिस्तम
- 0:18–0:21जकर भीतर लाको लोकक आनुवन्षिकी
- 0:21–0:25मैंने हुनकर दीने, विवाहक विवरन, पलायन के इतिहास
- 0:25–0:27सब सुरक्षित राखल अचे
- 0:27–0:57बाप्रे, इसुन्वा में ते एक दं कुनो विग्यान का कत्ष्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट
- 0:57–1:01तब आप दब बद बद शबदषे रफ देख जागन हम सब एही स्रोथ समगरी कगे रही सद देखे ची
- 1:01–1:11तब इं मिठलाक चार्सो पचास इस्वी सलक तब दब आप पचास पुरन जना कहु एक ता सोचल अटलस करूप में सोजा आवाईत ची
- 1:11–1:14यह बड़ सतीक सब्दचे
- 1:14–1:17आप इक टा एहन नक्षा थेग
- 1:17–1:19जे 14-15-15-s over-sak
- 1:19–1:21अनुशार्सित निरन्तरता केन
- 1:21–1:24माने मात्र किछु तालपत्र आबजोज पत्र पर
- 1:24–1:26आपन भीतर समेटने आची
- 1:26–1:29गजंद्र थाकुराक इख्च्ण्ड
- 1:29–1:33उरा सब के औही कोडिंग वेवस्थाग भीदर लोग जाई तची जे इी मुमकिन बनोलक
- 1:34–1:38देखो, एही शोषिल अटलस कषबसब विषिष्ट बात हमरा इलागल
- 1:39–1:44जे जे एक रा देखी का एक ता कमप्रेस्ट जिप फाँल के याद आब जाए तची
- 1:44–1:46जिप प्यल, उखोना?
- 1:46–1:50जेना, जेना, कम्ठुटर में अगत जिप प्यल कभी तर,
- 1:50–1:56हजारो पन्नाग जानकरी, फोटो, दस्तावेज, एक दम सद संखुचित कर देल जाइत अची,
- 1:56–1:58तीक उहेना इपन जी आची.
- 1:58–2:03मुदा जा हमरा सबहके उही एतिहासिक जिप फाइल के अनजिप करवागा ची,
- 2:03–2:08तसब सब पहले वोकर कोडिंग और वोकर भाशा भुज़बावष्यक आची.
- 2:08–2:09एक दम सही भाजलीया.
- 2:09–2:13इकोनो कहानिक पोठी नहीं फीख, जाही में गप्षाप लिखल हो.
- 2:13–2:18इक दम द्याना कर्षन करेवाला बात अची जे इकोनो सहितिक रचना नही थिक
- 2:18–2:24गजेंद्र थाकुर कनुसार पंजी के पदवाक लेल एक ता विषेश द्रिष्टि कोना कावष्वक्ता हूँई तची
- 2:24–2:27माने इक ता विषुद्द देटा बेस थिक
- 2:27–2:41आख, विशुद्द देटाबेस, जगन कोनो वक्ती पन्जि कोनो पंक्ती परनजेरी देईत अचे, तो उक्रा च्छाटा मूल प्रष्नक उत्टर उही एक ता चोट सन पंक्ती में खोजब अनिवार च्यक.
- 2:41–2:43उक्र च्छाटा प्रष्न की की आचे?
- 2:43–3:01इच्छटा प्रश्न चे जे इवेक्ति के थिक ककर सन्तान्तिक, गाम, मूल, वागोत्र की चैक, कि इपंक्ति कोनो विवाहक चर्चा कोर लाची, वाखोनो नव्शाक्खाक शुर्वात कोर लाची, अईद्दितन स्तिति की चैक.
- 3:01–3:05बाप्रे एक जान्कारी एक ता पंगती में?
- 3:05–3:12बलकुल बिना एही प्रष्नकुत्तरक, पंजी मातर किचु नाम कर एक ता अथ फीन जंगल जका लागत.
- 3:12–3:16आ एत या भी काई बात बट पेचिदा ब हो जाएत छे?
- 3:16–3:19श्रोथ सामगरी में जो उदारन देल गे लगे लाची,
- 3:19–3:21अग्रा भिती कम मात चक्रा जाई तच्छे
- 3:22–3:24पन्जी मिस्तानक भारी अबहावक कारने
- 3:25–3:27अथ्ते अदिक संख्षेपन काईल गेल गेला चे
- 3:27–3:30आँ, अएक्स्ट्रीम कोमप्रेश्चन जक्रा कही ची
- 3:30–3:33एक्दम, जेना एक ता चोटसन पंच्ती आची
- 3:33–3:34एक सुत वाई
- 3:34–4:04वो बवागा वो बवागा वो बवागा वो वो बवागा वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो व
- 4:04–4:09इतना संकुचित अची अईतना कम शब्द में लिखल अची
- 4:09–4:11तकी एही में गल्ती हेबाक
- 4:11–4:13वा अर्थक अनर्थक
- 4:13–4:15हेबाक समभावना भेशी नहीं चे
- 4:15–4:18जिना राम सुत शाम लिखबाक बदला में
- 4:18–4:21सीधे सीथा पुड बाक्यमें की एक नलिखल गेल
- 4:21–4:25जे रामक पुत्र शाम्चती आहुंकर विवाई अहिताम्भल
- 4:25–4:27एज ग्यासा स्वबावे का ची
- 4:27–4:30तकी इज जानिबुजी के जटल बनायल गेल चल
- 4:30–4:33जाहिसा आम लोक एक्रा नहीं पडीसकगे
- 4:33–4:34नहीं नहीं
- 4:34–4:37एक्रा आम लोक से नुका बाक लेल नहीं
- 4:37–4:39तो इते कागज वद तालपत्र कते है अभी तै?
- 4:39–4:43अहु वो बजागा लोक ले देटा बचावा क्ले जटिल बनायल गेल.
- 4:43–4:48पंजी कोनो साथारन लोकक पडबाक वा गपशषप करबाक ले नहीं लिखल गेल चल.
- 4:48–4:52इप विशेश रूबसा प्रशिक शिद पंजिकार लोग निकले लिखल गेल चल.
- 4:53–4:57कलपना करो, जे हज्जारो परिवारक, पन्द्रा स्वार्षक वरिशावली
- 4:58–5:01और सबहुक विवाह कविवरन विस्तार से लिखल जाएत,
- 5:01–5:03विवाह कविवरन विस्तार से लिखठ जाएत,
- 5:03–5:06तो एते कागज वद तालपत्र कते इसे अबी तै.
- 5:06–5:10औह, मैंने येख ता लोगिस्टिक समस्या चल.
- 5:10–5:12एक दं लोगिस्टिक समस्या.
- 5:12–5:15एक ता गाँँए कजानकारी लिखवाक लेल,
- 5:15–5:17ये पुरा पुस्त्त्काल्या का वेचक्ता बहुजाएत
- 5:18–5:21बहुतिक रूप सा उतेक ताल्पत्र जमाकरव
- 5:21–5:23अख्रा सुरक्षित राखव असमभभ वजाएत
- 5:23–5:26ताही लेल एजीन्योलोगिकल शोट हैं विखसित काल गेल
- 5:27–5:27बिल्ल्कुल
- 5:27–5:31सीमित स्थान में अदिक से अदिक जानकारी सहेज्बा कलेल,
- 5:31–5:34पनजीकार समाजक अविषिष्च्ग्य चला,
- 5:34–5:38जक्रा एही व्याक्रन अकोटिंक पुरन जान रहे चल,
- 5:38–5:40ये एक ता संस्त्तागत दाचा चल.
- 5:40–5:44जाही सब हविश्ष्वे विवाहक निम निरदारित कल जासका है
- 5:44–5:47आप जकोनो एक ता अप्रा माने दूसर पतनी
- 5:47–5:52वा सुत शब्द चुट जात, तो पूरा वन्शावली की कडी तूट सके तैछी
- 5:52–5:55आप विवाह में जे रक्त सम्मन्त कर निषेद है ची
- 5:55–5:57उ नियम भशके थे ची
- 5:57–6:02बेश तव ए तप रितारक जटिल डटाबेस आरकितेक्चर भेल
- 6:02–6:05जे बहुत कछोर नियम पर चल
- 6:05–6:08और जखन हमरा सब एही कोडिंके दीकोड करे ची
- 6:08–6:13तव एही डटाबेस एक ता एहन सत्ते सोजा अवेद अजे
- 6:13–6:15जे आश्चरी चकित कर देते थे
- 6:15–6:16उकी
- 6:16–6:17देखो
- 6:17–6:18हम्रा सब जाने ची
- 6:18–6:19जे मितलाक समाज
- 6:19–6:21अटिहासिक रूपसा
- 6:21–6:24एक तपित्र सट्टात्मक समाज रहल आची
- 6:24–6:27जाही में वनशावली पूरुष के नाम सागुबड़े चे
- 6:27–6:28मुदा
- 6:28–6:30मुदा पन्जी मे किचु और अच है?
- 6:30–6:31हाँ.
- 6:31–6:34जखन पन्जीक नक्षा के गेराई सा देखेची,
- 6:34–6:37ता इए अस्पष्ट होईत अची,
- 6:37–6:40जे एही पित्र सत्तात्मक समाजक पन्जी में,
- 6:40–6:45सन्रचनात्मक रूप सा महिलाक भूमी का सबसे महत्टोपोरन अची.
- 6:45–6:49महिलाके बिना इन नक्षा कोनो काजक ने रही जाएत?
- 6:49–6:53इविरोदा भास बडनीगजका उभरी कयवै तचे स्रोथ समगरी में
- 6:53–6:59पन्जिक सन्रचना में आद्ध्या और अपरा सन्शब्दक भारी महत्वाचे
- 6:59–7:01माने मात्र नाम नहीं आची हुंका लोकनेक?
- 7:01–7:06ना है, महिलाक नाम पनजी में मात्र सजावती नहीं होई तची
- 7:06–7:09और आसल में वन्शावलिक पूल छतीन
- 7:09–7:14जे दूटा भिन्न, मूल अ गाँकन एक तुस्रास जोड़इ छतीन
- 7:14–7:18विवाह कर नियम, जेना मात्री पक्ष्सट कत्टक पीडी दरी विवा वरजी तची
- 7:18–7:24इसब एहे पर निरभह करेच छतीन जे पुत्री कते बहाली अ पतनी कते साईली
- 7:24–7:32हम्राई पडी का एना लागल जे पनजी महिलाक नाम अँ अँ इंटनेट वेप पेज का हैपर लिंक जका काज कर अज खाल आची
- 7:32–7:35हाईपर लिंक युप्मा नीक लागल?
- 7:35–8:05आपुरा नेटवक थब हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 8:05–8:35आप आप रिंक अदा और बाज़ा तो वो जोगा तो वो जोगा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा त
- 8:35–8:41सुल्तान्पुर कھन्द मेक्ता वेक्ती चतिन भीया पन्जी मेहुंकर बाराता विवाजा अस्पष्ट उलेक है ची
- 8:41–8:43बाप रे बाराता ब्या?
- 8:43–8:48आही ना विद्द्यानिदी नामक वेक्तिक चारी ता विवाजा कु वरना ना ची
- 8:48–8:50आप बिच्चार करु एही लोगिस्टिक दूस्व्प्न पर
- 8:50–8:55बने एक ता पूरुस सब बाराता रगले वन्शावलिक शाखा बहार आभी रहाल आचे
- 8:55–8:59एक ता पंजी कार लिल तो भारी संकत बागे लते जी उकर सब कही साप कोना राखल जाए
- 8:59–9:01यह ता चमतकार अची एही कोडिंका
- 9:01–9:04जां कोनो वेक्तिग बाराता विवाब हाल आजेद
- 9:04–9:07ता उकर बाराता अलगलक ससुराल बहल
- 9:07–9:10आआ औही बाराता पतनी सजे सन्तान हे ता
- 9:10–9:12उनकर सबका ननीहाल अलगलक बहल
- 9:12–9:13एक दम
- 9:13–9:18बविश्श्य में जगन उही सन्तानक विवाहक बात उठत,
- 9:18–9:20तम मात्रपक्ष दोश सब अच्बाक लेल,
- 9:20–9:23पनजिकार के इस सतीक जानकारी चाही,
- 9:23–9:25जे कोन सन्तान, कोन पतनिक ठेक.
- 9:25–9:27आजे पनजिकार अपरा,
- 9:27–9:31शब्द कप्रियोग कखड उही सब विवाहके,
- 9:31–9:34अपतनिग गाम के अलग अलग दरज नहीं करीता,
- 9:34–9:37तो उसबता शाखा आपस में मिली जाएत.
- 9:37–9:38बलकल मिली जाएत.
- 9:38–9:40ताहे लेल पनजी में,
- 9:40–9:43कमलिनी, हेमवती, तारा, यषोदा,
- 9:43–9:46वा चंद्रावती जेहन पुत्री, वा माताक नाम,
- 9:46–9:52जे एक प्रमुक्तासा अवेत आफी वो मात्र सम्मान देवाखले ले नहीं लिख हल गे लची.
- 9:52–9:57औव! उही देटा बेसक अखंदता असन्रचना के बचे वाखले लची.
- 9:57–10:03आ! जो इस सम नाम हता देल जाएत, ता गाम आ मुलक भीचक समवन्त तूटी जाएत,
- 10:03–10:08आप प्चास वर्ष बाद पते ही न चलत जे कोन गाँ में ब्याख कर अचीत आची
- 10:08–10:09आख कते अनुचित
- 10:09–10:12गजेंद्र ताकुरक विसलेशन इस थापेत करे तची
- 10:12–10:16जे महीला मात्र संटानोट पतिक माद्ध्यम न चलिया
- 10:16–10:19उ समाजेक भुगोलक शिलप कार चलिया
- 10:19–10:20एक दम सही बार्त जची
- 10:20–10:22उनका लोकनिक विवासा
- 10:22–10:24समाजक नक्षा विस्त्रित होट चल
- 10:24–10:25आ एत यह सा
- 10:25–10:26हमर सब
- 10:26–10:28एक ता नव विशै दिस बड़े ची
- 10:28–10:28आ
- 10:28–10:29करन
- 10:29–10:31इजे हाईपर लिंक चल
- 10:31–10:33जि जाम दरगाम के जूरी रहल चल
- 10:33–10:35उ मात्र पर्वार के नहीं जुड़ाई च्छल,
- 10:35–10:37एक गर एक ता दोसर आयाम से हुच्छल,
- 10:37–10:42इब बोदिक आस आमाधिक प्रतिष्टाक एक ता पुरा पदानुक्रम,
- 10:42–10:44मने एक ता हैरारकी के से हो परिभाशित करेच.
- 10:44–10:46इआस पष्ट अची,
- 10:46–10:49जगगन दूटा परीवार विवाह के माद्यम से जुडद,
- 10:49–10:53तो उही में सामाजी किस्तिती आप्रतिष्टाक प्रश्न्त उटवे करत,
- 10:53–10:56आप हम्रा श्रोथ में पड़े का इआश्चरे भेल,
- 10:56–11:01जे पन्जी का आरंब कोनो सादारन गाम या कोनो सादारन किसान से नहीं होईता चे
- 11:01–11:02नहीं नहीं
- 11:02–11:06एकर शुर्वात बद्भव्य असत्ता केंद्रीत ची
- 11:06–11:10दिकौडिं दे पन्जी का दोसर अद्ध्याय एटते सोजा रखे ची
- 11:10–11:18जे पन्जी का आरमब भंगाल के शासक, वलल्ल सेन, आहुंकर दरबारक महान विद्वान, महां महो पाद्धयाई हलायुद से होईता ची.
- 11:18–11:23मने, एक आरसो पचास से बारसो पचीस इस्वी के आस पास.
- 11:23–11:30आई कुनो संयोग नहीं आची, जे किट्ता राजके महान विद्वान से एही सामाजिक डेटा बे सक शुर्वात होगे देट.
- 11:30–11:39एकर अगर अगर एब हेल, जे एही वन्शावली में विद्ध्या, सत्ता, आशामाजिक प्रतिष्टा का बडपेग महत्व चल.
- 11:39–12:09ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ
- 12:09–12:11या आज बाद्दिक उजन्दाई चल
- 12:11–12:16जक्रा लक जेहन उपादि उकर उतने भेसी प्रतिष्था
- 12:16–12:20आई एक ता एक ता बाद द्यान देवा योग्य आची
- 12:20–12:23जे यी उपादि सब मात्र दिखावल लेल नहीं चल
- 12:23–12:24तकी
- 12:24–12:26विवाह में एकर काम चल आज
- 12:26–12:33आईही उपादी का दार पर विवाह का बाजार में उही वेक्तिक वा उही परिवारक मुल्यनिर्दारित होए चल.
- 12:33–12:39एक ता वएया करन का परिवार में ब्याह करव समाज में उच्प्रतिष्थाक गप मानल जाए चल.
- 12:39–12:47पन्जिकार लोकनी समाजक एही बोद्धिक एकोसिस्तम के बड सावदानी सा अपन्ताल पत्र पर दरज करे चला.
- 12:47–12:50मुदद एता हम्रा एक ता बाद पर पेगाश्चर यबहिल.
- 12:50–12:57की एव्याकरन, जोतिषी, भख्त कवी इस अपता पुरान जमानाक मद्धिकालक गबहिल.
- 12:57–13:03जखन हम सब आदूनेक तालक पन्ना पलते थी, ता एक ता एक द्डिशे दिखा पड़ाई ता ची.
- 13:03–13:06आदूनेक काल में ते सब बदलेटा ची.
- 13:06–13:12एक मिनेट तूग, कि एकर आर्थ एब हेल, जे बारा हम शताब दी कोनो संस्क्रित विध्वान
- 13:12–13:16अब भी सम्ष्टाप दि कोनो रेलवे करमचारी
- 13:16–13:20वो बाँक मैनेजर अक विव्रन बिलकुल एक एग व्याक्रनिक धाचामे बरज अची?
- 13:20–13:21एक दम
- 13:21–13:23इत कोनो ताईम त्रावल जैका लागाई तची
- 13:23–13:25जे वलल सेंकर दरबारी
- 13:25–13:27अच्टेट बाँंक कक मैनेजर
- 13:27–13:29ये के किताब में बैसल ज़ती
- 13:29–13:31इपन्जी क सब सब पवें कुभी आची
- 13:31–13:35आगगजिंद ताकृर विष्लेशनाक सब सब पवें क्रहस्योद गातन से हो
- 13:36–13:38पन्जी केवल मद्धिकाल दरी सिमित नहीं रहल
- 13:39–13:40इकोनो मरल दस्तावेज नित्ख
- 13:40–13:42ये क्ता जीवन्त दस्तावेज अची
- 13:42–13:46मने जखन समाज बदलल, तपंजी सोहु बदलल?
- 13:46–13:48आप उई पारमपर एक दाचा में
- 13:48–13:51जाही में कहीो महां महुपाद्ध्याई लिखल जाथ चल
- 13:51–13:54आब भी आ, मैंए एंजीनिर बाइंक मेनेजर प्रफेसर
- 13:54–14:24अद आप बज़़ बज़़ बाज सहो दरज के लेए चे जी यी बाज सहो दरज के लेए चे वाज संजुडल है बाज सहो दरज के लेए चे जी यी बाज सहो दरज के लेए चे यी बाज सहो दरज के लेए चे यी बाज सहो दरज के लेए चे यी बाज सहो दरज के लेए चे �
- 14:24–14:33उनका लोकनिक का काज तत्हस्त बाव सा उही वक्ती के समाज में हुंकर अद्यतन पहिचान, पेशा वा पद के दरज कर अप चल.
- 14:33–14:41जे के हु बंक में काज कर रहा लगची, तो ओ बंक मैनेजर दरज भेल, जे के उ चुनाउ जीतल आची, तो उ विद्धायक दरज भेल.
- 14:41–14:47इखेवल देटा कलेख्षक एक तश्द रूप चल, जाही में पुर्वागर हक कोनो स्थान नहीं चल.
- 14:47–14:57इदद गजबे अनुकुलन शम्तावेल पंजी कर, माने पंजी आपन प्राचीन धाचा के बिना तोडे आदूनिकता के पोड रुपेन आत्मसात कर ले लक.
- 14:57–15:02उ एहन नहीं कहलक जे आब लोग संस्क्रित नहीं पडी रहा लग चे, ता हम नाम नहीं लिखव.
- 15:02–15:08रहा हा, उ उही बैंक मैनेजर वा एंजिनेर के सो हो उत्बे सम्मान सा उई जिप फाणल में जगा दिलग.
- 15:08–15:11इएक ता महत्पुरन बिन्दू अची.
- 15:11–15:15एक तव्यक्ति आई इंजीन्यर या बांक मैनेजर भह सक अगत छे
- 15:15–15:23मुदा पन्जीक लेल ओ एकनो अपन मुल, गोत्र, गाँ अप पत्निक गाँ से जुडलेक्ता करी आची
- 15:23–15:27ओ आपन बोद्धिक अप पेशागत आदुनिक्ता के दारन करी तुए
- 15:27–15:31से हो आपन समाजिक वन्शावलिक जाल से बाहर नहीं आची
- 15:31–15:33पन जी इस साभिट करेत आची
- 15:33–15:37जी आदूनिक हेबा का आरत आपन जर से कटब नहीं आची
- 15:37–15:42मुदा देखु जखन लोग पारमपरिक विद्ध्या से आदूनिक पेशा मेगेल
- 15:42–15:47जेना रेलवे में काजकरे लागल, बैंक मेंगाल, वा नोकरी कले शहर दिसगेल,
- 15:47–15:51तनिष्छित रूप से हुँखर भागोलिक पलायन सोब हे लहे थे.
- 15:51–15:54उस वब एक ही गाउ मितना बैसल रहता.
- 15:54–15:56पलायन तो मानो सब हाव अची.
- 15:56–16:00ता हमर प्रश्न इय आची, जे पनजी जें परमपरेक विवस्ता,
- 16:00–16:02जे एक ता गाँ औं मूल से जोडल आचे,
- 16:02–16:06उईही बहुतिक पलायन अप व्यक्तिक स्थानिये पहचान के,
- 16:06–16:08कोना सहेज ने आची.
- 16:08–16:11इप पलायन के इतिहास पनजी केक ता दोसर बाड,
- 16:11–16:13रास महत्पुन द्ध्याय थेक
- 16:13–16:16पन्जी में स्थानक भववायामी उप्योग बेलाची
- 16:16–16:18कोनु व्यक्तिक नाम से जुडज स्थान
- 16:18–16:21मात्र उकर जनम स्थान नहीं हुईताची
- 16:21–16:22ता और की की हुईताची?
- 16:22–16:23पन्जी में
- 16:23–16:24मूल गाँ
- 16:24–16:32वर्त्मान निवास जक्रा वसु कहल गेल अची, सासुर आप पलायन के स्थान इसव अलगलग रूपे दर जाची.
- 16:32–16:38माने जगोन व्यक्ती नोक्री क्लेल बंगाल चली गेल, तप पंजिकार उकर पाच्जा उते दरी च्रक करेत.
- 16:38–16:42बिल्कुल, स्रोथ में एहन बोछत्रा से विवरन अची
- 16:42–16:47जटे बंगाल, जना मालदा, जलपाय गुडी, पुडन्या
- 16:47–16:50अन निपाल अदी तामलोकक जवाक विस्त्रित लेक है ची
- 16:50–16:55पन्जिकार लोकनी इही प्रवासी परिवारक अद्द्दन स्तिती खोजी के दरज करे चला
- 16:55–16:58बाप रे, इत गी जीप्ये सिस्तमजका भेल
- 16:58–17:04आ, जों कोनो परिवार पूर्विभंगाल चली गेल, ता पन्जी उक्र उते जाकसे हो ट्रक करे थाची
- 17:04–17:09मुदा अकर पुरान मित्लाक मुल पहचानके सहेजने रहात अची
- 17:09–17:16इएक ता आहें जीप्यस सिस्टम चल, जे खुनक रिष्ताके ट्रक करे चल, चाहो वेक्ती दुन्या कोनो कोना में चल जाए.
- 17:16–17:21आ एक ते हमेक ता और चोट मुदब भारी गजब का चीज स्रोत में देखलों
- 17:21–17:23जे भोगोलिक पलायन से जुडे लची
- 17:23–17:25औहाई प्रोक प्रोग
- 17:25–17:26औह औह रहा प्रोग
- 17:26–17:31एकर अर्थ देल गे लची प्रचलित नाम ववपनाम
- 17:31–17:33जेना श्रोत में दर्ज अची
- 17:33–17:41तारादत प्रजण्द, उमानात प्रभबवकु, वा जूलनन्द प्रजदेवानन्द.
- 17:41–17:46जो पंजी एक संशिप्त चल, जटे एक टा शब्द बचावाक होड लागल चल,
- 17:46–17:50तो एक पैग उपनाम कियक दरज कर हल चन.
- 17:50–17:53एकर पच्टा एक तब भड भवहारिक समस्स्या चल
- 17:53–17:54अकी?
- 17:54–17:59समाज में एक ही जका अप्चारिक नाम वला लोक बहुते चला
- 17:59–18:02जिन राम, शिव, क्रिष्न, नारायन
- 18:02–18:04इसब नाम इतिक सादारन चल
- 18:04–18:07जब हाजारो लोकक नाम एही से शुरू होई चल
- 18:07–18:12ताही लिल बिना उपनामक वास्तविक वेक्तिक प्यचान करव असमबभ हो जाए चल.
- 18:12–18:13हाँ एत च्याए.
- 18:13–18:19सोचु, जकं कोनो पंजी कार, कोनो अनजान गाँ में जाए च्यला विवाहक बाद तैकरबाक,
- 18:19–18:21वा वनश्वरेखष लिखवाक लिल.
- 18:21–18:25तो उते जाकः श्री उमानाजा के नहीं खोजी सके चला
- 18:25–18:29करन उही गाम में लोक उनका उही नाम से जान मेंने करे चल
- 18:29–18:32उते लोक उनका बवूक अनाम से जाने चला
- 18:32–18:36रूकू इत एक दम आएक काएलिक अनस्टाग्राम वा तुटरजगा का बहिलना
- 18:36–18:38तुटरजका कोना?
- 18:38–18:42मैंगे जो हम यंटरनेट कर कक्रो मात्र उकर अप्चारिक नाम से
- 18:42–18:46मैंगे उकर रील नेम से कोजब तहेर आजाएप
- 18:46–18:51हम्रा उकर हैंडल वां उस्तानिय उपनाम मैंगे उसर नेम चाही
- 18:51–18:54जक्रा सांवो दिजितल दुन्या में चिनहाए ताची
- 18:54–18:55इक्दम सतीक तुल्ना
- 18:55–18:59प्रो बव्कु, मने उही वक्तिक उवुजर नेम भेल
- 18:59–19:01जाईसा गामवक लोग हुन का चिनहित चल
- 19:01–19:04जब पनजीकार मात्र अप्चारिक नाम याद रखिता
- 19:04–19:07तो उही गामवक अस्ली वेक्तिके हेरा देता
- 19:07–19:09इजे वुजर नेम वला तुल्ना
- 19:09–19:11इक्दम नीक जगा बुजा देत अची
- 19:11–19:13इजे प्रोष अब दची
- 19:13–19:15उओए उजर नेम जगा काज करे चल
- 19:15–19:17जे सिद्धान्त मने कागजी नाम
- 19:17–19:19और व्यवाबारिक्ता
- 19:19–19:20मने गामवक नाम
- 19:20–19:22दूनू के बीच एक्टा सेटू बनावेच्छल
- 19:22–19:28इदेखावत अची जे पनजी केवल कुनो काग जी वन्शावली नच्छल, जो कुनो आलमारी में बन रहें.
- 19:29–19:35नहीं, इएक ता व्यवहारिक समाजी कुपकारन चल, जकर उप्योग जीवन्त समाज में निद दिन होए चल,
- 19:35–19:39पंजी कार के गाँगे चोपाल पर जाके लोग के चिन्भाख रहे चल,
- 19:39–19:41ताईलेल उप्वाम दर्ज करब, उत्वे आवष्ष्चल,
- 19:41–19:43जदक पिताक नाम दर्ज करब.
- 19:43–19:47तजकन हमर सब एई समगर चरचापन नजरी दोडबाए ची,
- 19:47–20:17तगजेंदर थाकुरक एक हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 20:17–20:21अग भ्लोकक पलायनक अ यूजरनेम के इतिहास सब किच एमे दरजजचे.
- 20:22–20:26आप आप में मानव इतिहास के एक ता अबुद्पूर्व प्रेोगची.
- 20:27–20:29इन निशकर्ष बिल्कुल यतारत छी.
- 20:29–20:32इस निशकर्ष बिल्कुल यतारत थाची
- 20:32–20:34इपोती हम्रा सब के इदेखावे तची
- 20:34–20:38जे मित्लाक समाज कोना अपन ज़री सजुडल रही कसो
- 20:38–20:41समय अबहुगोल क अनुसार विस्तार पबैइत रहल
- 20:41–20:44अप पलायन के लक, आदूनिक पदवी प्राप्त के लक
- 20:44–20:46मुदा अपन पहचान नहीं भिसरल.
- 20:46–20:48एक दम आईई सब एक ता एहन,
- 20:48–20:50कोड़ेद व्याकरन में सहेजल गल आईन,
- 20:50–20:52जि पन्द्रसाइ साएस अपन सत्यता
- 20:52–20:54अप्रासंगिक्ता बनाँने आची.
- 20:54–20:56बेना कुन भिजली,
- 20:56–20:58बेना कुन अईटनेट क,
- 20:58–21:02इव्यवस्त्ता पीडिदर पीडि हस्तानान्तरित होईत्रहल.
- 21:02–21:07अन्त मैं, एह विशाल आ एतिहासिक जिप पाल के देख्लापर,
- 21:07–21:11हमर मन में एक ता नूतन अ विचारनिया प्रष्न उठीरहल आचे,
- 21:11–21:13जे हम श्रोता लोकनिक लेल चोडे चाहब.
- 21:13–21:15अखुन प्रश्ना अच्या
- 21:15–21:19अम्रा सबबख आईकालिक समाज देटा पर निरभार अच्ये
- 21:19–21:24मुदा जा इ पुरान तालपत्र अ कागस पर लिखल आनालोग सिस्तम
- 21:24–21:27बिना कुनो सर्वर क्रैश वकुनो त्रुती के
- 21:27–21:34सद्योग जटेल आनुवन्षिक अ समाजिक नेट्वक के एते इक निपुन्तासां सहेज ऽकल,
- 21:34–21:37तक की आएक युग के हमा दिजितल डेटाबेस,
- 21:37–21:41जे महगा महगा कलाउट सर्वर आ राईव पर अचे,
- 21:41–21:48की अपाथ सो या हाजार वर्षका बादो इत भे सुरक्षित आई आपस में जुडल रहत, जितना इप पनजी वेवस्ता आचे,
- 21:48–21:50इप बद भेग प्रष्नाचे,
- 21:50–21:56की प्रविदी सबहरल हमर इन आव्योग बविष्छले एहन कोनो स्थाई नक्षा चोडी पावत,
- 21:56–22:01जेन मितलाक पंजिकार लोकनी सद्यो पहने बिना कोनो कमपुटर अक छोडी गल चती.
- 22:01–22:06इएक ता एहन प्रष्न अचे जाई पर सब के सुझम विमर्ष करबाक चाही.
- 22:06–22:09एक दम इज शुच बाक विशे अचे.
- 22:09–22:14एह गहीर चर्चा में हमर सबक संग बनल रहबाक लेल बहुत-बहुत दन्यवात
Plain text
कल्पना करू जे एक ता एहन, एक ता एहन हाड़्ड्डाईव आची, जे पन्द्रहा सो साल सा अबी दरी कही रोग क्रष ने भेल चे. माने बिना कोनो भिजली वा अंटरनेट कर? आँ, एक दम! बिना कोनो भिजली बिना कोनो खला। सर्वर कर इता एहन स्टोरेज सिस्तम जकर भीतर लाको लोकक आनुवन्षिकी मैंने हुनकर दीने, विवाहक विवरन, पलायन के इतिहास सब सुरक्षित राखल अचे बाप्रे, इसुन्वा में ते एक दं कुनो विग्यान का कत्ष्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट्ट तब आप दब बद बद शबदषे रफ देख जागन हम सब एही स्रोथ समगरी कगे रही सद देखे ची तब इं मिठलाक चार्सो पचास इस्वी सलक तब दब आप पचास पुरन जना कहु एक ता सोचल अटलस करूप में सोजा आवाईत ची यह बड़ सतीक सब्दचे आप इक टा एहन नक्षा थेग जे 14-15-15-s over-sak अनुशार्सित निरन्तरता केन माने मात्र किछु तालपत्र आबजोज पत्र पर आपन भीतर समेटने आची गजंद्र थाकुराक इख्च्ण्ड उरा सब के औही कोडिंग वेवस्थाग भीदर लोग जाई तची जे इी मुमकिन बनोलक देखो, एही शोषिल अटलस कषबसब विषिष्ट बात हमरा इलागल जे जे एक रा देखी का एक ता कमप्रेस्ट जिप फाँल के याद आब जाए तची जिप प्यल, उखोना? जेना, जेना, कम्ठुटर में अगत जिप प्यल कभी तर, हजारो पन्नाग जानकरी, फोटो, दस्तावेज, एक दम सद संखुचित कर देल जाइत अची, तीक उहेना इपन जी आची. मुदा जा हमरा सबहके उही एतिहासिक जिप फाइल के अनजिप करवागा ची, तसब सब पहले वोकर कोडिंग और वोकर भाशा भुज़बावष्यक आची. एक दम सही भाजलीया. इकोनो कहानिक पोठी नहीं फीख, जाही में गप्षाप लिखल हो. इक दम द्याना कर्षन करेवाला बात अची जे इकोनो सहितिक रचना नही थिक गजेंद्र थाकुर कनुसार पंजी के पदवाक लेल एक ता विषेश द्रिष्टि कोना कावष्वक्ता हूँई तची माने इक ता विषुद्द देटा बेस थिक आख, विशुद्द देटाबेस, जगन कोनो वक्ती पन्जि कोनो पंक्ती परनजेरी देईत अचे, तो उक्रा च्छाटा मूल प्रष्नक उत्टर उही एक ता चोट सन पंक्ती में खोजब अनिवार च्यक. उक्र च्छाटा प्रष्न की की आचे? इच्छटा प्रश्न चे जे इवेक्ति के थिक ककर सन्तान्तिक, गाम, मूल, वागोत्र की चैक, कि इपंक्ति कोनो विवाहक चर्चा कोर लाची, वाखोनो नव्शाक्खाक शुर्वात कोर लाची, अईद्दितन स्तिति की चैक. बाप्रे एक जान्कारी एक ता पंगती में? बलकुल बिना एही प्रष्नकुत्तरक, पंजी मातर किचु नाम कर एक ता अथ फीन जंगल जका लागत. आ एत या भी काई बात बट पेचिदा ब हो जाएत छे? श्रोथ सामगरी में जो उदारन देल गे लगे लाची, अग्रा भिती कम मात चक्रा जाई तच्छे पन्जी मिस्तानक भारी अबहावक कारने अथ्ते अदिक संख्षेपन काईल गेल गेला चे आँ, अएक्स्ट्रीम कोमप्रेश्चन जक्रा कही ची एक्दम, जेना एक ता चोटसन पंच्ती आची एक सुत वाई वो बवागा वो बवागा वो बवागा वो वो बवागा वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो वो व इतना संकुचित अची अईतना कम शब्द में लिखल अची तकी एही में गल्ती हेबाक वा अर्थक अनर्थक हेबाक समभावना भेशी नहीं चे जिना राम सुत शाम लिखबाक बदला में सीधे सीथा पुड बाक्यमें की एक नलिखल गेल जे रामक पुत्र शाम्चती आहुंकर विवाई अहिताम्भल एज ग्यासा स्वबावे का ची तकी इज जानिबुजी के जटल बनायल गेल चल जाहिसा आम लोक एक्रा नहीं पडीसकगे नहीं नहीं एक्रा आम लोक से नुका बाक लेल नहीं तो इते कागज वद तालपत्र कते है अभी तै? अहु वो बजागा लोक ले देटा बचावा क्ले जटिल बनायल गेल. पंजी कोनो साथारन लोकक पडबाक वा गपशषप करबाक ले नहीं लिखल गेल चल. इप विशेश रूबसा प्रशिक शिद पंजिकार लोग निकले लिखल गेल चल. कलपना करो, जे हज्जारो परिवारक, पन्द्रा स्वार्षक वरिशावली और सबहुक विवाह कविवरन विस्तार से लिखल जाएत, विवाह कविवरन विस्तार से लिखठ जाएत, तो एते कागज वद तालपत्र कते इसे अबी तै. औह, मैंने येख ता लोगिस्टिक समस्या चल. एक दं लोगिस्टिक समस्या. एक ता गाँँए कजानकारी लिखवाक लेल, ये पुरा पुस्त्त्काल्या का वेचक्ता बहुजाएत बहुतिक रूप सा उतेक ताल्पत्र जमाकरव अख्रा सुरक्षित राखव असमभभ वजाएत ताही लेल एजीन्योलोगिकल शोट हैं विखसित काल गेल बिल्ल्कुल सीमित स्थान में अदिक से अदिक जानकारी सहेज्बा कलेल, पनजीकार समाजक अविषिष्च्ग्य चला, जक्रा एही व्याक्रन अकोटिंक पुरन जान रहे चल, ये एक ता संस्त्तागत दाचा चल. जाही सब हविश्ष्वे विवाहक निम निरदारित कल जासका है आप जकोनो एक ता अप्रा माने दूसर पतनी वा सुत शब्द चुट जात, तो पूरा वन्शावली की कडी तूट सके तैछी आप विवाह में जे रक्त सम्मन्त कर निषेद है ची उ नियम भशके थे ची बेश तव ए तप रितारक जटिल डटाबेस आरकितेक्चर भेल जे बहुत कछोर नियम पर चल और जखन हमरा सब एही कोडिंके दीकोड करे ची तव एही डटाबेस एक ता एहन सत्ते सोजा अवेद अजे जे आश्चरी चकित कर देते थे उकी देखो हम्रा सब जाने ची जे मितलाक समाज अटिहासिक रूपसा एक तपित्र सट्टात्मक समाज रहल आची जाही में वनशावली पूरुष के नाम सागुबड़े चे मुदा मुदा पन्जी मे किचु और अच है? हाँ. जखन पन्जीक नक्षा के गेराई सा देखेची, ता इए अस्पष्ट होईत अची, जे एही पित्र सत्तात्मक समाजक पन्जी में, सन्रचनात्मक रूप सा महिलाक भूमी का सबसे महत्टोपोरन अची. महिलाके बिना इन नक्षा कोनो काजक ने रही जाएत? इविरोदा भास बडनीगजका उभरी कयवै तचे स्रोथ समगरी में पन्जिक सन्रचना में आद्ध्या और अपरा सन्शब्दक भारी महत्वाचे माने मात्र नाम नहीं आची हुंका लोकनेक? ना है, महिलाक नाम पनजी में मात्र सजावती नहीं होई तची और आसल में वन्शावलिक पूल छतीन जे दूटा भिन्न, मूल अ गाँकन एक तुस्रास जोड़इ छतीन विवाह कर नियम, जेना मात्री पक्ष्सट कत्टक पीडी दरी विवा वरजी तची इसब एहे पर निरभह करेच छतीन जे पुत्री कते बहाली अ पतनी कते साईली हम्राई पडी का एना लागल जे पनजी महिलाक नाम अँ अँ इंटनेट वेप पेज का हैपर लिंक जका काज कर अज खाल आची हाईपर लिंक युप्मा नीक लागल? आपुरा नेटवक थब हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ आप आप रिंक अदा और बाज़ा तो वो जोगा तो वो जोगा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा तो वो बाज़ा त सुल्तान्पुर कھन्द मेक्ता वेक्ती चतिन भीया पन्जी मेहुंकर बाराता विवाजा अस्पष्ट उलेक है ची बाप रे बाराता ब्या? आही ना विद्द्यानिदी नामक वेक्तिक चारी ता विवाजा कु वरना ना ची आप बिच्चार करु एही लोगिस्टिक दूस्व्प्न पर बने एक ता पूरुस सब बाराता रगले वन्शावलिक शाखा बहार आभी रहाल आचे एक ता पंजी कार लिल तो भारी संकत बागे लते जी उकर सब कही साप कोना राखल जाए यह ता चमतकार अची एही कोडिंका जां कोनो वेक्तिग बाराता विवाब हाल आजेद ता उकर बाराता अलगलक ससुराल बहल आआ औही बाराता पतनी सजे सन्तान हे ता उनकर सबका ननीहाल अलगलक बहल एक दम बविश्श्य में जगन उही सन्तानक विवाहक बात उठत, तम मात्रपक्ष दोश सब अच्बाक लेल, पनजिकार के इस सतीक जानकारी चाही, जे कोन सन्तान, कोन पतनिक ठेक. आजे पनजिकार अपरा, शब्द कप्रियोग कखड उही सब विवाहके, अपतनिग गाम के अलग अलग दरज नहीं करीता, तो उसबता शाखा आपस में मिली जाएत. बलकल मिली जाएत. ताहे लेल पनजी में, कमलिनी, हेमवती, तारा, यषोदा, वा चंद्रावती जेहन पुत्री, वा माताक नाम, जे एक प्रमुक्तासा अवेत आफी वो मात्र सम्मान देवाखले ले नहीं लिख हल गे लची. औव! उही देटा बेसक अखंदता असन्रचना के बचे वाखले लची. आ! जो इस सम नाम हता देल जाएत, ता गाम आ मुलक भीचक समवन्त तूटी जाएत, आप प्चास वर्ष बाद पते ही न चलत जे कोन गाँ में ब्याख कर अचीत आची आख कते अनुचित गजेंद्र ताकुरक विसलेशन इस थापेत करे तची जे महीला मात्र संटानोट पतिक माद्ध्यम न चलिया उ समाजेक भुगोलक शिलप कार चलिया एक दम सही बार्त जची उनका लोकनिक विवासा समाजक नक्षा विस्त्रित होट चल आ एत यह सा हमर सब एक ता नव विशै दिस बड़े ची आ करन इजे हाईपर लिंक चल जि जाम दरगाम के जूरी रहल चल उ मात्र पर्वार के नहीं जुड़ाई च्छल, एक गर एक ता दोसर आयाम से हुच्छल, इब बोदिक आस आमाधिक प्रतिष्टाक एक ता पुरा पदानुक्रम, मने एक ता हैरारकी के से हो परिभाशित करेच. इआस पष्ट अची, जगगन दूटा परीवार विवाह के माद्यम से जुडद, तो उही में सामाजी किस्तिती आप्रतिष्टाक प्रश्न्त उटवे करत, आप हम्रा श्रोथ में पड़े का इआश्चरे भेल, जे पन्जी का आरंब कोनो सादारन गाम या कोनो सादारन किसान से नहीं होईता चे नहीं नहीं एकर शुर्वात बद्भव्य असत्ता केंद्रीत ची दिकौडिं दे पन्जी का दोसर अद्ध्याय एटते सोजा रखे ची जे पन्जी का आरमब भंगाल के शासक, वलल्ल सेन, आहुंकर दरबारक महान विद्वान, महां महो पाद्धयाई हलायुद से होईता ची. मने, एक आरसो पचास से बारसो पचीस इस्वी के आस पास. आई कुनो संयोग नहीं आची, जे किट्ता राजके महान विद्वान से एही सामाजिक डेटा बे सक शुर्वात होगे देट. एकर अगर अगर एब हेल, जे एही वन्शावली में विद्ध्या, सत्ता, आशामाजिक प्रतिष्टा का बडपेग महत्व चल. ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ या आज बाद्दिक उजन्दाई चल जक्रा लक जेहन उपादि उकर उतने भेसी प्रतिष्था आई एक ता एक ता बाद द्यान देवा योग्य आची जे यी उपादि सब मात्र दिखावल लेल नहीं चल तकी विवाह में एकर काम चल आज आईही उपादी का दार पर विवाह का बाजार में उही वेक्तिक वा उही परिवारक मुल्यनिर्दारित होए चल. एक ता वएया करन का परिवार में ब्याह करव समाज में उच्प्रतिष्थाक गप मानल जाए चल. पन्जिकार लोकनी समाजक एही बोद्धिक एकोसिस्तम के बड सावदानी सा अपन्ताल पत्र पर दरज करे चला. मुदद एता हम्रा एक ता बाद पर पेगाश्चर यबहिल. की एव्याकरन, जोतिषी, भख्त कवी इस अपता पुरान जमानाक मद्धिकालक गबहिल. जखन हम सब आदूनेक तालक पन्ना पलते थी, ता एक ता एक द्डिशे दिखा पड़ाई ता ची. आदूनेक काल में ते सब बदलेटा ची. एक मिनेट तूग, कि एकर आर्थ एब हेल, जे बारा हम शताब दी कोनो संस्क्रित विध्वान अब भी सम्ष्टाप दि कोनो रेलवे करमचारी वो बाँक मैनेजर अक विव्रन बिलकुल एक एग व्याक्रनिक धाचामे बरज अची? एक दम इत कोनो ताईम त्रावल जैका लागाई तची जे वलल सेंकर दरबारी अच्टेट बाँंक कक मैनेजर ये के किताब में बैसल ज़ती इपन्जी क सब सब पवें कुभी आची आगगजिंद ताकृर विष्लेशनाक सब सब पवें क्रहस्योद गातन से हो पन्जी केवल मद्धिकाल दरी सिमित नहीं रहल इकोनो मरल दस्तावेज नित्ख ये क्ता जीवन्त दस्तावेज अची मने जखन समाज बदलल, तपंजी सोहु बदलल? आप उई पारमपर एक दाचा में जाही में कहीो महां महुपाद्ध्याई लिखल जाथ चल आब भी आ, मैंए एंजीनिर बाइंक मेनेजर प्रफेसर अद आप बज़़ बज़़ बाज सहो दरज के लेए चे जी यी बाज सहो दरज के लेए चे वाज संजुडल है बाज सहो दरज के लेए चे जी यी बाज सहो दरज के लेए चे यी बाज सहो दरज के लेए चे यी बाज सहो दरज के लेए चे यी बाज सहो दरज के लेए चे � उनका लोकनिक का काज तत्हस्त बाव सा उही वक्ती के समाज में हुंकर अद्यतन पहिचान, पेशा वा पद के दरज कर अप चल. जे के हु बंक में काज कर रहा लगची, तो ओ बंक मैनेजर दरज भेल, जे के उ चुनाउ जीतल आची, तो उ विद्धायक दरज भेल. इखेवल देटा कलेख्षक एक तश्द रूप चल, जाही में पुर्वागर हक कोनो स्थान नहीं चल. इदद गजबे अनुकुलन शम्तावेल पंजी कर, माने पंजी आपन प्राचीन धाचा के बिना तोडे आदूनिकता के पोड रुपेन आत्मसात कर ले लक. उ एहन नहीं कहलक जे आब लोग संस्क्रित नहीं पडी रहा लग चे, ता हम नाम नहीं लिखव. रहा हा, उ उही बैंक मैनेजर वा एंजिनेर के सो हो उत्बे सम्मान सा उई जिप फाणल में जगा दिलग. इएक ता महत्पुरन बिन्दू अची. एक तव्यक्ति आई इंजीन्यर या बांक मैनेजर भह सक अगत छे मुदा पन्जीक लेल ओ एकनो अपन मुल, गोत्र, गाँ अप पत्निक गाँ से जुडलेक्ता करी आची ओ आपन बोद्धिक अप पेशागत आदुनिक्ता के दारन करी तुए से हो आपन समाजिक वन्शावलिक जाल से बाहर नहीं आची पन जी इस साभिट करेत आची जी आदूनिक हेबा का आरत आपन जर से कटब नहीं आची मुदा देखु जखन लोग पारमपरिक विद्ध्या से आदूनिक पेशा मेगेल जेना रेलवे में काजकरे लागल, बैंक मेंगाल, वा नोकरी कले शहर दिसगेल, तनिष्छित रूप से हुँखर भागोलिक पलायन सोब हे लहे थे. उस वब एक ही गाउ मितना बैसल रहता. पलायन तो मानो सब हाव अची. ता हमर प्रश्न इय आची, जे पनजी जें परमपरेक विवस्ता, जे एक ता गाँ औं मूल से जोडल आचे, उईही बहुतिक पलायन अप व्यक्तिक स्थानिये पहचान के, कोना सहेज ने आची. इप पलायन के इतिहास पनजी केक ता दोसर बाड, रास महत्पुन द्ध्याय थेक पन्जी में स्थानक भववायामी उप्योग बेलाची कोनु व्यक्तिक नाम से जुडज स्थान मात्र उकर जनम स्थान नहीं हुईताची ता और की की हुईताची? पन्जी में मूल गाँ वर्त्मान निवास जक्रा वसु कहल गेल अची, सासुर आप पलायन के स्थान इसव अलगलग रूपे दर जाची. माने जगोन व्यक्ती नोक्री क्लेल बंगाल चली गेल, तप पंजिकार उकर पाच्जा उते दरी च्रक करेत. बिल्कुल, स्रोथ में एहन बोछत्रा से विवरन अची जटे बंगाल, जना मालदा, जलपाय गुडी, पुडन्या अन निपाल अदी तामलोकक जवाक विस्त्रित लेक है ची पन्जिकार लोकनी इही प्रवासी परिवारक अद्द्दन स्तिती खोजी के दरज करे चला बाप रे, इत गी जीप्ये सिस्तमजका भेल आ, जों कोनो परिवार पूर्विभंगाल चली गेल, ता पन्जी उक्र उते जाकसे हो ट्रक करे थाची मुदा अकर पुरान मित्लाक मुल पहचानके सहेजने रहात अची इएक ता आहें जीप्यस सिस्टम चल, जे खुनक रिष्ताके ट्रक करे चल, चाहो वेक्ती दुन्या कोनो कोना में चल जाए. आ एक ते हमेक ता और चोट मुदब भारी गजब का चीज स्रोत में देखलों जे भोगोलिक पलायन से जुडे लची औहाई प्रोक प्रोग औह औह रहा प्रोग एकर अर्थ देल गे लची प्रचलित नाम ववपनाम जेना श्रोत में दर्ज अची तारादत प्रजण्द, उमानात प्रभबवकु, वा जूलनन्द प्रजदेवानन्द. जो पंजी एक संशिप्त चल, जटे एक टा शब्द बचावाक होड लागल चल, तो एक पैग उपनाम कियक दरज कर हल चन. एकर पच्टा एक तब भड भवहारिक समस्स्या चल अकी? समाज में एक ही जका अप्चारिक नाम वला लोक बहुते चला जिन राम, शिव, क्रिष्न, नारायन इसब नाम इतिक सादारन चल जब हाजारो लोकक नाम एही से शुरू होई चल ताही लिल बिना उपनामक वास्तविक वेक्तिक प्यचान करव असमबभ हो जाए चल. हाँ एत च्याए. सोचु, जकं कोनो पंजी कार, कोनो अनजान गाँ में जाए च्यला विवाहक बाद तैकरबाक, वा वनश्वरेखष लिखवाक लिल. तो उते जाकः श्री उमानाजा के नहीं खोजी सके चला करन उही गाम में लोक उनका उही नाम से जान मेंने करे चल उते लोक उनका बवूक अनाम से जाने चला रूकू इत एक दम आएक काएलिक अनस्टाग्राम वा तुटरजगा का बहिलना तुटरजका कोना? मैंगे जो हम यंटरनेट कर कक्रो मात्र उकर अप्चारिक नाम से मैंगे उकर रील नेम से कोजब तहेर आजाएप हम्रा उकर हैंडल वां उस्तानिय उपनाम मैंगे उसर नेम चाही जक्रा सांवो दिजितल दुन्या में चिनहाए ताची इक्दम सतीक तुल्ना प्रो बव्कु, मने उही वक्तिक उवुजर नेम भेल जाईसा गामवक लोग हुन का चिनहित चल जब पनजीकार मात्र अप्चारिक नाम याद रखिता तो उही गामवक अस्ली वेक्तिके हेरा देता इजे वुजर नेम वला तुल्ना इक्दम नीक जगा बुजा देत अची इजे प्रोष अब दची उओए उजर नेम जगा काज करे चल जे सिद्धान्त मने कागजी नाम और व्यवाबारिक्ता मने गामवक नाम दूनू के बीच एक्टा सेटू बनावेच्छल इदेखावत अची जे पनजी केवल कुनो काग जी वन्शावली नच्छल, जो कुनो आलमारी में बन रहें. नहीं, इएक ता व्यवहारिक समाजी कुपकारन चल, जकर उप्योग जीवन्त समाज में निद दिन होए चल, पंजी कार के गाँगे चोपाल पर जाके लोग के चिन्भाख रहे चल, ताईलेल उप्वाम दर्ज करब, उत्वे आवष्ष्चल, जदक पिताक नाम दर्ज करब. तजकन हमर सब एई समगर चरचापन नजरी दोडबाए ची, तगजेंदर थाकुरक एक हूँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अग भ्लोकक पलायनक अ यूजरनेम के इतिहास सब किच एमे दरजजचे. आप आप में मानव इतिहास के एक ता अबुद्पूर्व प्रेोगची. इन निशकर्ष बिल्कुल यतारत छी. इस निशकर्ष बिल्कुल यतारत थाची इपोती हम्रा सब के इदेखावे तची जे मित्लाक समाज कोना अपन ज़री सजुडल रही कसो समय अबहुगोल क अनुसार विस्तार पबैइत रहल अप पलायन के लक, आदूनिक पदवी प्राप्त के लक मुदा अपन पहचान नहीं भिसरल. एक दम आईई सब एक ता एहन, कोड़ेद व्याकरन में सहेजल गल आईन, जि पन्द्रसाइ साएस अपन सत्यता अप्रासंगिक्ता बनाँने आची. बेना कुन भिजली, बेना कुन अईटनेट क, इव्यवस्त्ता पीडिदर पीडि हस्तानान्तरित होईत्रहल. अन्त मैं, एह विशाल आ एतिहासिक जिप पाल के देख्लापर, हमर मन में एक ता नूतन अ विचारनिया प्रष्न उठीरहल आचे, जे हम श्रोता लोकनिक लेल चोडे चाहब. अखुन प्रश्ना अच्या अम्रा सबबख आईकालिक समाज देटा पर निरभार अच्ये मुदा जा इ पुरान तालपत्र अ कागस पर लिखल आनालोग सिस्तम बिना कुनो सर्वर क्रैश वकुनो त्रुती के सद्योग जटेल आनुवन्षिक अ समाजिक नेट्वक के एते इक निपुन्तासां सहेज ऽकल, तक की आएक युग के हमा दिजितल डेटाबेस, जे महगा महगा कलाउट सर्वर आ राईव पर अचे, की अपाथ सो या हाजार वर्षका बादो इत भे सुरक्षित आई आपस में जुडल रहत, जितना इप पनजी वेवस्ता आचे, इप बद भेग प्रष्नाचे, की प्रविदी सबहरल हमर इन आव्योग बविष्छले एहन कोनो स्थाई नक्षा चोडी पावत, जेन मितलाक पंजिकार लोकनी सद्यो पहने बिना कोनो कमपुटर अक छोडी गल चती. इएक ता एहन प्रष्न अचे जाई पर सब के सुझम विमर्ष करबाक चाही. एक दम इज शुच बाक विशे अचे. एह गहीर चर्चा में हमर सबक संग बनल रहबाक लेल बहुत-बहुत दन्यवात