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मचण्ड_मुतालिफ_आ_न्यायक_भाषाक_संकट.m4a
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- 0:00–0:06इगजेंद्र ताकुरक चर्चित मेथिली नाटक, मच्चंडक, मुख्यबात का एक ता चोट सन सारानश अची.
- 0:06–0:11इग नाटक भाषा, न्याय, भेरोजगारी, अटातंक कब यीचक,
- 0:11–0:13उही जटल संगर्ष के उजागर करे तची,
- 0:13–0:18जटाय एक ता निर्दोष वा बिना कुनो गलती क्य विवस्तामे पसी जाई तची.
- 0:18–0:22पहले आँ न्याय अबहाशा के भीचक संकत के भुजी.
- 0:22–0:26मुतालिप नाम के एक ता भेरोजगार यूवा अची,
- 0:26–0:30तो द्रग्स अखोकर में बारु द्रखबाक आरोप में फसा उल गेल अची.
- 0:30–0:34आप पेग समस्या इए अचीजे उस तानिय भाशा नहीं भुज़े तची.
- 0:34–0:37आनहीं अदालत अखर भाशा बुज़े तची.
- 0:37–0:40माने जे न्याय आगा का बाशा नहीं भुज़े तची,
- 0:40–0:45तकियो न्याय आची? एताय एक तक फुफ्या अदिकारी उक्रा खेनाइक पैकेट देट आची,
- 0:45–0:50जे दिखावाई तची जे भाई बूखा तयाक बाशा सबसे पैग होई तची,
- 0:50–0:53अब बिना बाशाक न्याय मात्रे एक तक उक्ला प्रक्रिया आची.
- 0:53–0:57तो वी बुल्ला जकत तसकर आ आतंक की लीडर रही अग्यान्ता अगरीबी भी पहडा उठाए बच्छती.
- 0:57–1:02एक रहेना बुजुजे बेरुस्गारी खाली कचोरा में आतंक बारुद भरी देट अची.
- 1:02–1:08अबिबुल्ला जगगत तस्कर आ आतंक की लीडर रही अग्यान्ता अगरीभी पहडा उठाई बच्छती
- 1:08–1:13एक रा एना बुजुजे बेरोस्गारी खाली कचोरा में आतंक भारुद भरी देट अची
- 1:13–1:23नात्ठक बहस ये एक दम सपष्ट कदे तचे जे कतो कतो विवस्ताग उपेख्षा अप फसाईवा बलाकाज अस्ली कदरनाक लोग से भेसी कदरनाक बहुजाई तची
- 1:23–1:26अन्ततद समाज में नव अप्रादिक जन्मक बात
- 1:26–1:32देखु जखन मुतलिव जमानत पर बहार अबई तची तो विवस्ताके सोजे चितावनी देट ची
- 1:32–1:36जिक्रा इस समाज फसाएवई तचे अनिर्दोष नहीं माने तची
- 1:36–1:39उ एक दिन मुख्या अप्रादी से भेसी कदरनाग भहुसकई तची
- 1:39–1:47इनाटक देखावे तखीजे अदालत में कखनो कखनो नयाय से पैक गवाही, उबहुजनक पैकेट, वह मानविय समवेदना दजाई तखीजे.
- 1:47–1:56नियाय जब हाशा आम्मानविय समवेदना से वनचित रहत, तो उ समाज के सुरक्षित नहीं, बरु नव अप्रादिग ग़वाग एक ता कार्खाना बनी जात.
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इगजेंद्र ताकुरक चर्चित मेथिली नाटक, मच्चंडक, मुख्यबात का एक ता चोट सन सारानश अची. इग नाटक भाषा, न्याय, भेरोजगारी, अटातंक कब यीचक, उही जटल संगर्ष के उजागर करे तची, जटाय एक ता निर्दोष वा बिना कुनो गलती क्य विवस्तामे पसी जाई तची. पहले आँ न्याय अबहाशा के भीचक संकत के भुजी. मुतालिप नाम के एक ता भेरोजगार यूवा अची, तो द्रग्स अखोकर में बारु द्रखबाक आरोप में फसा उल गेल अची. आप पेग समस्या इए अचीजे उस तानिय भाशा नहीं भुज़े तची. आनहीं अदालत अखर भाशा बुज़े तची. माने जे न्याय आगा का बाशा नहीं भुज़े तची, तकियो न्याय आची? एताय एक तक फुफ्या अदिकारी उक्रा खेनाइक पैकेट देट आची, जे दिखावाई तची जे भाई बूखा तयाक बाशा सबसे पैग होई तची, अब बिना बाशाक न्याय मात्रे एक तक उक्ला प्रक्रिया आची. तो वी बुल्ला जकत तसकर आ आतंक की लीडर रही अग्यान्ता अगरीबी भी पहडा उठाए बच्छती. एक रहेना बुजुजे बेरुस्गारी खाली कचोरा में आतंक बारुद भरी देट अची. अबिबुल्ला जगगत तस्कर आ आतंक की लीडर रही अग्यान्ता अगरीभी पहडा उठाई बच्छती एक रा एना बुजुजे बेरोस्गारी खाली कचोरा में आतंक भारुद भरी देट अची नात्ठक बहस ये एक दम सपष्ट कदे तचे जे कतो कतो विवस्ताग उपेख्षा अप फसाईवा बलाकाज अस्ली कदरनाक लोग से भेसी कदरनाक बहुजाई तची अन्ततद समाज में नव अप्रादिक जन्मक बात देखु जखन मुतलिव जमानत पर बहार अबई तची तो विवस्ताके सोजे चितावनी देट ची जिक्रा इस समाज फसाएवई तचे अनिर्दोष नहीं माने तची उ एक दिन मुख्या अप्रादी से भेसी कदरनाग भहुसकई तची इनाटक देखावे तखीजे अदालत में कखनो कखनो नयाय से पैक गवाही, उबहुजनक पैकेट, वह मानविय समवेदना दजाई तखीजे. नियाय जब हाशा आम्मानविय समवेदना से वनचित रहत, तो उ समाज के सुरक्षित नहीं, बरु नव अप्रादिग ग़वाग एक ता कार्खाना बनी जात.