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गंगा_ब्रिजक_दरारि_आ_भ्रष्ट_व्यवस्था.m4a

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Part 2 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 2
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  1. 0:00–0:02ददिबेट मेहाख स्वागत आचे
  2. 0:02–0:15सोचु जे आहा समचार देखी रहल ची, आद आचानक एक ता कभरी आबईता ची, जे, मतलब करोडो क लागत से बनल एक ता नवग का पौल उदगातन से पहिने ही बरभराक खसी पडल.
  3. 0:15–0:23आई त, मतलब हम्रा सब के लिल कुन नव बाच्च्याने, इत आब एक ता आम यदारत बनी चुकल आची.
  4. 0:23–0:28एक दाम, मदा जगानो पुल ख़सेद आची, ता असल में की ख़सेद आची.
  5. 0:28–0:33की उ मात्र भालु, सिमेंट, लोहक दाचा आची जे दैगेल,
  6. 0:33–0:37वा उकर संख खसेइत अची एक ता पूरा विवस्थक ने तिक्ता
  7. 0:37–0:45आई हम सविमर्ष कर रहल ची गजें़र ताकौरक बहुचर्चित नाटक गंगा ब्रिज्च का उही कडवाय अथ फार
  8. 0:45–0:46बलकुल
  9. 0:46–0:54इन नातक स्वतन्त्रताक बादक भारत में जे विकास के नाम पर ब्रष्टा चार आममानविय भलिदान भहर रहा लगची,
  10. 0:54–0:58उकर एक ता बहुत विदारक छित्र प्रस्थूत कराई दाची.
  11. 0:58–1:04अग, जद्य एक दिस पूलक मरम्मत्ती उद्खातन सपूर्वे चाली रहा लगची,
  12. 1:04–1:09अदोसर दिस सत्ता मुख्य अव्यंता अननेताक अपवित्र गत जोडग,
  13. 1:09–1:13के भीच एक ता इमान्दार एंजिनेर पीसी रहा लगची.
  14. 1:13–1:23ता आईबक विमर्ष्क के खेंदरी ये प्रश्न यी आची जे की इन नाटक मुख्यरूँपसव, व्यक्तिगत ने तिक्ता आसत्यनिश्थाक पतनक कता आची.
  15. 1:23–1:29जते एक ता इमान्दार एंजीन्यराक हत्या असल मे आदर्ष्ख हार थेक.
  16. 1:29–1:59वाज़िया थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी �
  17. 1:59–2:03मत्र एक ता दोखा अचे आ अंत तद ड़ाई जेते.
  18. 2:03–2:07मुदा देखु, हमर परिप्रेक्षे एही सब भिलकु भिन्ना ची.
  19. 2:07–2:12हमर विचार सब इन नाटक नेटिक ताक राजीत के कता चबे नहीं करे.
  20. 2:12–2:16इसल में ब्रष्टचारक दाचागत यादार्त के दिखावात अची.
  21. 2:29–2:33इक ता एहन मजबूरी जेकर भीना इटन्त्र चली ने सकेच
  22. 2:33–2:39अथ तव्यक्तिगत ने तिक्ता एक दब बहुत पेग अक्रूर टन्त्रक अगार ही भाँना भजायता चे
  23. 2:39–2:44हम भूजी रहाल ची, जहा सिस्तमक मजबूरी देस इशारा कर रहाल ची
  24. 2:44–2:47मुदाम आपन तरकक मुल आदार स्पस्ट कर चाहचे.
  25. 2:47–2:49हमर मान ना चे,
  26. 2:49–2:52जे नाटकक मुल सन्देश एही बात में नहेत आची,
  27. 2:52–2:57जे भोतिक निरमान, जिना एगंगापोल, अचारित्रिक निरमान दून्नो अभी नाची.
  28. 2:57–3:01मुदा दून्नू के एक संजोडब कते क्यावारी का चे?
  29. 3:01–3:04देखु आहा एक रह गलक क्हन्द में नहीं देख सकेचे.
  30. 3:04–3:07नाटक में उही इमान्दार इंजिनियराक एक ता समवाद आची,
  31. 3:07–3:10जे हम्रा लेल इस क्रितिक आत्मा आची.
  32. 3:10–3:12उआपन मित्र सो कहे तची,
  33. 3:12–3:14पूलक पाया पाईलक परिबाशा नहीं जे
  34. 3:14–3:18सही तसही रहते अगलत गलती रहते
  35. 3:18–3:20उसमवाद बड्मार्मि कच
  36. 3:20–3:23इग्दम इबात हम्रा सब के भुजवावष्यक अच्छी
  37. 3:23–3:26पाईल में आहाक चत्बो लिखि दिया जे पूल मजबूत अच्छी
  38. 3:26–3:28नेताक दबाव में आखकतबो समज़हता कर लियो,
  39. 3:28–3:32मुदा बहुतिग विग्यान अप्टिखस आख फाईल नहेपड़े तच्छे.
  40. 3:32–3:36ता आजाक आर्थ अच्छे जे प्रक्रती अपना हिसाब सा काज करे तची
  41. 3:36–3:41भिल्कुल, जम भालू भेश्या सिम्ट काम अच्छे तप्पूल खसत
  42. 3:41–3:46इएक ता अकाटे सत्ट्या चे जे क्रहाम सब वस्तुनिष्ट वा अबज्ज्टिव सत्ट्य कहे चे
  43. 3:46–3:49उ समवाद प्रवाव्शाली अवष्य अच्ये
  44. 3:49–3:51मुदा की उ यथार्थवादी अच्यी
  45. 3:51–3:55उ अईंजिनेर कहेट अच्ये जे सही चही रहेद
  46. 3:55–3:59मुदा सत्ता के गल्यारा माँ सही का परिवाशा तैके करे टची
  47. 3:59–4:02इद उता उता इप बैसल लोकक हाथ मे आच्ये
  48. 4:02–4:05मुदा सत्यता कुर्सी सण नहीं बदले चे.
  49. 4:05–4:07उस्सिद्धन्तिक रूपस थी कचे.
  50. 4:07–4:09मुदा आहा थेके दारक उही गपपर द्यां दिया,
  51. 4:09–4:12जकन उह एंजिन्यर सापन मजबूरी कहे तची.
  52. 4:12–4:14उस पष्ट कहे तचे,
  53. 4:14–4:17जे उहो नीक काज करवाख चाहे तची,
  54. 4:17–4:22उएक ता आम लोका कुदारन दैता जेना नीक रोटी बने बलेल हम सब आता चाले चीे.
  55. 4:22–4:26उो हो चाहे तचे जे बालु चालिक नीक पूल बनावे.
  56. 4:26–4:29आ, मुदा उ अन्तता समजोता कर लेच है.
  57. 4:29–4:30मुदा उ विवष की एक आची.
  58. 4:30–4:40कारजन नेता गुन्दा अचीप इंजीनर के कमिशन नहीं देट, तो अकर बच्चक नाम स्कूल सकाती देल जते, आहा एक रा नेतिक पतन कोना कही सकती.
  59. 4:40–4:42ता आहा एक रा की कहब?
  60. 4:42–4:47कमीशना की खेल कोनो एक वक्ती से शुरू नहीं होईता ची
  61. 4:47–4:49इता नीचा सलेका उपर दरी जाईता ची
  62. 4:50–4:52�theke daara ki sambad bujvei tachi
  63. 4:53–4:55जे बेमानी करव कोनो शोक नहीं
  64. 4:55–4:56बाचल रहवाक शरत ची
  65. 4:57–4:58बाचल रहवाक शरत ची
  66. 4:59–5:03तकन की आहा के हिसाप से �theke daar doara kelegele
  67. 5:03–5:05अवी समजोता के सामन ने मानी लेल जाए?
  68. 5:05–5:08हम्रा एदरक भीलकल पचयत नहीं आची,
  69. 5:08–5:10जे सिस्टमक मजबूरीक नाम पर,
  70. 5:11–5:14मदलब व्यक्तिगत डाएत तो समुह मोडल जासके तची.
  71. 5:14–5:16मुदा सिस्टम व्यक्तिसे पैग आची,
  72. 5:16–5:17भासके तची.
  73. 5:17–5:25मुदा नातक पहल दिश्चपर गवर करो, उता सुतन्तरता दिवसक समरन करावल जायत ची जंदा फेरायल जा रहल जी.
  74. 5:25–5:31मुदा प्रिष्ट भूमी में की बहर रहल ची, जे पूल अखंदरी पूरन रूपन बनल हू नहीं आची,
  75. 5:31–5:38जाएक उदगातन सेहो ने भेलाची, उई में चिप पी वा पैच्वर्क लागी रहाची, दरारी के बरल जा रहाची.
  76. 5:38–5:41आप इत एक ता एक ता बहुत पैग विडम बना आची.
  77. 5:41–5:43इक देखावाई तची
  78. 5:43–5:45इदेखावाई तची
  79. 5:45–5:47जे हमर तथा कतित विकास
  80. 5:47–5:49जनम सप पहीने ही विकलावग ची
  81. 5:49–5:51नाटक में एक देख्छन तिख्चन तिपनी करे तची
  82. 5:51–5:53जे सुतन्त्रताक आर्थ
  83. 5:53–5:55मात्र गोरा हाँकिमक स्थान पर
  84. 5:55–5:57कारी हाँकिमक बैसा वाची
  85. 5:57–6:01अहु सम्वात उनी फवयक पुर्न मोह भंग के दिखावाई तच्याज.
  86. 6:01–6:06एक्दम, जो इस थी इए आच्छ, तई विकास मात्र एक्टा जब अच्छे.
  87. 6:06–6:09आज्जा विवस्ता इए मुख्छटा पहिरने आच्छे,
  88. 6:09–6:12उक्रा नोच्बा काज विक्तिगत हिम्मत सहेते.
  89. 6:12–6:16अही तेकिदार जका मजबूरीक रोना रोयलास नहीं
  90. 6:16–6:18आहा अक्रा मुखष्टा कह रहे लची
  91. 6:18–6:23मुदा हम्रा लेल इं मुखष्टा जानी बूजी के गड़ल गेल एक ता हत्यार अच्छे
  92. 6:23–6:25इकोनो सझयोग वो बहुल नैं
  93. 6:25–6:31अगर उदगातन सा पहले तूईट रहल चें यी ता मतलब राज्जक दिजाईन अची
  94. 6:31–6:34राज्जक दिजाईन कनी विस्तार से समजाओ
  95. 6:34–6:39आहा गुरा राकिम सा कारी राकिम के जे बात कहलो, उगडम सकी कचें
  96. 6:39–6:43अगर बवाद्टी बहुतिक निर्मान के विकासक परयाये मान लेल गेल आची
  97. 6:43–6:46अगर अदी अदी एक ता बच्चा की अथार्ट की आपार्ट की आचे
  98. 6:46–6:50उ कहे च्तिन जे एही सद्देस के विकास हेते
  99. 6:50–6:53यह उही नव्सुतन्त्र राज्जेग प्रपिगेंडा आची
  100. 6:53–6:58आप जता पैग पैग बहुतिक निर्मान के विकासक परयाए मान लेल गे लची
  101. 6:58–7:01तीक, मुदा उती एक ता बच्चा की अथार्थ की एचे
  102. 7:01–7:05उ बच्चा कहेत अची जे दूवासा हमार माए के खासी होई चे
  103. 7:05–7:09आई खासी उही विकासक की मत अची जे गरीब चुका रहे लचे
  104. 7:09–7:15इक दम राज शुरुस विकासकना पर आम लोकक जीवन के दाव पर लगवाईत आए लची
  105. 7:15–7:17जखन लो शिक्षी का सवाल उठवाई चहतिन,
  106. 7:17–7:20जे की बिका फैक्टरी आप बिका बान्सा
  107. 7:20–7:22चोटपाइक भेद मेटा जायत,
  108. 7:22–7:24तकन उनका चुप करा देल जायता ची,
  109. 7:24–7:27इकही का जे एक पीडी के त,
  110. 7:27–7:28बलिदान देवपरत.
  111. 7:28–7:31इत उही आमानविया ताक महीमा मन्दन भेल
  112. 7:31–7:35आप जेक्रा अंगरेजी में कोलाट्रल दामेज कहल जाएत अची
  113. 7:35–7:41अर्था जगन कोनो पैग लक्ष्कलेल, साद्दारन, बेकसुर लोकक जान
  114. 7:41–7:45जेवा के सुआबहाविक अस्विकार यमानी लेल जाएत ची
  115. 7:45–7:49राज आपन नागरिक के उही कौलाट्रल दामेच करूप में देखाई तची
  116. 7:49–7:52इव्यक्तिगत नेटिक तक बात ने आची
  117. 7:52–7:55हम मानेच छी जी राज एक ता ब्रामक सपना देखा रहा लची
  118. 7:55–7:58अग गरीप सो खर कीमत वसुल रहा लची
  119. 7:58–8:02मुदा जगन आहा एक राज्जक दिजाईं कही कचोडी देछची
  120. 8:02–8:05तकन आहा अईंजाने में उही निर्मम्ता के
  121. 8:05–8:09वैद बना रहल ची जगरा ओ एंजीनिर के मित्र अपनावे तची
  122. 8:09–8:11मुदा उ मित्र यधार्ट्वादी आची
  123. 8:11–8:13उ मित्र की कहता?
  124. 8:13–8:15उ कहता ची
  125. 8:15–8:20जिस सही या गलतक परिबाशा कुर्सी पर बैसल लोक तैकरे ताछे
  126. 8:20–8:24आहां कद्रिष्टी कोंषा इधार्थवाद भहसा के ताछे
  127. 8:24–8:26मुदा हमरा एक ता बाद भुज़ाो
  128. 8:27–8:29जगन कुर्सी परिबाशा तैकरे ताछे
  129. 8:29–8:35तकन राम दनीजका मज्दूर्क जेहात मशीन में कडी जाईता चे, उकर की होईता चे.
  130. 8:35–8:39देखु, राम दनीच प्रसंग निष्चित रूभ से विच्लित करे वाला आचे.
  131. 8:39–8:44उस शर्व विच्लित करे वाला ना आची, उ मानवी अक्रूर ताक चरम आचे.
  132. 8:44–8:48मज्दुर कहात कती गेले जे, रक्त स्राव भहर हाले जे,
  133. 8:48–8:51और आक अस्पताल पथाईवक बदला में,
  134. 8:51–8:54पट्टी कजगब भोरा बाने के पथा देल जाईते जे.
  135. 8:54–8:57आ, इप पदके ता आत में कापी जाईते जे.
  136. 8:57–8:59कि यक के लेई लेहन?
  137. 8:59–9:01कारन् काम नेरुकप चाही,
  138. 9:01–9:05अगा क्यदार्त्वाद एबात के पच्टेवाग लेल तधयार अची
  139. 9:05–9:09कि यदार्त्वादक नाम पर मान्विय समवेदन रहन्ता के
  140. 9:09–9:11जाईज्थाराराल जासके तची
  141. 9:11–9:13अगा जाईज्थाराराल ची
  142. 9:13–9:16अगा अगा जाईज्थाराराल ची
  143. 9:16–9:19इंजीनेर उते तहाः भाई का प्रष्न करईता जी,
  144. 9:19–9:21जे की इंजीनेरिंका अर्थ इआची,
  145. 9:21–9:23जो मस्दूर अग जानक कोनो मोलने?
  146. 9:24–9:28एक ता इमान्दार व्यक्ती आई आवमान वियता के स्विकार नहीं कर सकेता जी.
  147. 9:29–9:30उकर जे प्रती रोध है जे,
  148. 9:30–9:32उकोन उवेचारिक हद्ट नहीं आजी
  149. 9:32–9:35उ मनुश्टा के अंतिम रक्षक अची
  150. 9:35–9:38मुदा उकरी रक्षक वला रूप की काजा आद?
  151. 9:38–9:42जो उटेके दार अव मित्र जका समजवता कर लेद
  152. 9:42–9:45तो राम्दनी खुन में आपन हाथ सान लेद
  153. 9:45–9:47बुजलिय, हम राम्दनी कतल हाथ
  154. 9:47–9:50अही भोराक निर्मम्ता के कम नाकी रहल ची.
  155. 9:50–9:52मुदा हमी देखावा चाहची जे
  156. 9:52–9:55इवेवस्ता उही खुनके साप कोना करे ताछी.
  157. 9:56–9:59आहा इबुजबाक प्रयास करु जे सिस्तम काम कोना करे ताछी.
  158. 9:59–10:00कोना करे ताछी काज?
  159. 10:01–10:02आमानवियता सा?
  160. 10:02–10:07जखन उ इंजिन्यर प्विलबद प्रमान लोक्क, चीफ इंजिन्यर लग जाई ताची,
  161. 10:07–10:11अ सवाल उठेबगी ताची, जे राम दनिक संग आमान्वियता भे लाची,
  162. 10:11–10:14और पुलग गुन्वद्ता में समजोता बहरा लाची,
  163. 10:14–10:16अगर उगाग चलते विकास रुकत
  164. 10:16–10:19इस आब आद उजिश्टमक सब सब शब पही गध्यार आचे
  165. 10:19–10:22उजानी भूजी का इंजिनेर के अप्रादी साभित कर अची
  166. 10:22–10:23बिलकुल
  167. 10:23–10:25ब्यवस्ता एटेक चला का ची
  168. 10:25–10:27जे उषब्दक अद्ध बदली दैच्छा
  169. 10:27–10:28ब्रादि साभित कर अटाची
  170. 10:28–10:29भिल्कुल
  171. 10:29–10:31ब्यवस्ता एते चलाग आची
  172. 10:31–10:33जे उ शब्दक अद्ध्बदली दैच्चा
  173. 10:34–10:35उआहा के नेटिक्ता के
  174. 10:35–10:38विकासक मारगक बादा बना देटची
  175. 10:38–10:40जे आहा मस्दूरक खुनक बात करव
  176. 10:40–10:43तो वहांके प्रगती विरोदी गोषिद का देत।
  177. 10:43–10:46इद पुरन रूप सा सत्यक मरोड भाभेल
  178. 10:46–10:48इब्यवस्ताक सक्ती आची
  179. 10:48–10:52जे उआपन आमान्वियताके विकासक नाम पर पवित्र का देत आची
  180. 10:52–10:55आहा जेक्रा मनुश्षताक रक्षक कही रहल ची
  181. 10:55–11:00सिस्तम अग्र एक्ता एहन विद्रोही मानेच्च्छे दे सक तरक्ती रोकचाहता ची
  182. 11:00–11:05यी वेचारीक लडाई नहीं आची, यी विमर्षक नियंट्रनक लडाई आची
  183. 11:05–11:10आईहे में अग्चिनिरेक सत्य औही कुर्सिक पावर का गाडी कुछली देल जाए ताची
  184. 11:10–11:15अवही कुर्सिक पावर कतेक नीज अस्टर्त्त्तरी खसी सकेद अची
  185. 11:15–11:19अगर सब सब पहल उदारन नाटक के अन्तिम है साचे
  186. 11:19–11:24जकन मुख्य अवियन्ता गंगा ब्रिज़ पर एक ता पोठी लिख़े चातिन
  187. 11:24–11:28अ मुख्य मंत्री स्वैम अगर विमोचन करावे चातिन
  188. 11:28–11:32आ, उ विमोचन समारोथा पुरा नाटक को सार अची.
  189. 11:32–11:34इस सादारन पाक्शन्द नहीं आची.
  190. 11:34–11:37तीन सोसे भेसी मस्दूरक म्रित्त्यो बेलाची.
  191. 11:37–11:40राम्दनी जका लोकक आंग भंग बेलाची.
  192. 11:40–11:44आ, उही इमान्दार इंजिन्यरग क्रूर रत्या केल गेल अची.
  193. 11:44–11:51आएही सब के पोथी में विकास लेल आवश्षक भलिदान कही कगर्वान विद्केल जारो हल आचे.
  194. 11:51–11:55जेक्रा आहा पाक्श्ण्ड कोहे ची उसिस्तमक सत्या ची.
  195. 11:55–11:58इससत्यक पुल अवमुल्या आची.
  196. 11:58–12:01विवस्ता उही हत्या के केवल दबाईत नही आची.
  197. 12:01–12:04उग्रा एक्ता उच्सव्क्रूप देद अच्छी
  198. 12:04–12:07एतिहासकी पुनर लेक्हन प्रमानित कर अगी जे
  199. 12:07–12:10ब्रष्ट लोग कहन विबध सभाय सके च्छती
  200. 12:10–12:12मुदा हमर तर की अच्छे
  201. 12:12–12:16जे एही चरम पाख्श्डग कारन पाथक्वा दर्ष्चक के भी तर
  202. 12:16–12:21उही इंजीनेरक नेटिकता और भेसी भल्वान भाखा उब्रहेत थची
  203. 12:21–12:25उह मरी का सो हो नेटिक रुप से विज़ेई होई थची
  204. 12:25–12:27आहा एक रप पक्हन्द कोही रहल ची
  205. 12:27–12:31मुदा हा मेक्रा सत्ताक मनो विग्याना किक्ता बहुत गूड प्रक्रिया मनाइच्छी
  206. 12:31–12:36उ मुक्यमन्त्रिक संबादक उलेक करव एते बद्द प्रास्संगी कची
  207. 12:36–12:39मुक्यमन्त्रिक पोठिक विमोचन में की कहे चथी
  208. 12:39–12:42उ कहे चथी जे पूल के खुन चाही
  209. 12:42–12:48आ, उ कहे चथी इगंगा की भुजहाई बिन भली दाने आईपर पूल बनी सकत
  210. 12:48–12:52खून चाही एकरा, इकोनो सामान ने भाशन नहीं आची,
  211. 12:52–12:57इप्राचीन काल सचली आरहल भली प्रताक आदूनिक संस्तागत रुप आची.
  212. 12:57–13:01जद पहले देवता के प्रसन्चर बाकलेल भली देल जाएच चलान,
  213. 13:01–13:06आप विकास नामक आदूनिक देवता के मस्दूरा कुन चाही
  214. 13:06–13:09इस सोच आपने आपने बद्दराव ना आची
  215. 13:09–13:11सबसा खोफनाक हस्चा इए आची
  216. 13:11–13:14ज़ विवस्ता आपन विरोदी के मारेट को ना आची
  217. 13:14–13:17जखन इंजीनिर के मारबाक शड्यन्त रचल जार आची
  218. 13:17–13:20तकन मुक्यमन्त्री स्पष्ट निर्देश दैई चतिन
  219. 13:20–13:24जे एक्रा आत्म हत्या या आतंग्वादी गूशित नहीं करवाग अची.
  220. 13:24–13:28आप खारन जो उक्रा आतंग्वादी वा विद्द्रोही कहल जैते
  221. 13:28–13:31तलोक प्रष्नो उठवैद जे उविद्रोह के खेलक
  222. 13:31–13:32उकर जाज कमां उठतत्
  223. 13:32–13:33सतीक
  224. 13:33–13:37मुक्यमंत्री अ मुक्यावियंता बहुत नीक जका जान अच्छतीन
  225. 13:37–13:39जे जो हत्या कारोप लगले
  226. 13:39–13:40वा उक्रा मारल गेले
  227. 13:40–13:42तो उ महात्मा गान्दी
  228. 13:42–13:43वा जीसस क्राइस्ट बनी जाइत
  229. 13:43–13:45उशहीद बनी जाइत
  230. 13:45–13:47आश्भादत सत तदद दराएते आची?
  231. 13:47–13:52ये एक दम कारन शहीदक विचार अजैए बोजाए तची
  232. 13:52–13:54ते उसब एक्रा की रूप दे तची
  233. 13:54–13:56एक ता दूरगखतना
  234. 13:56–13:59इंजीन्यर के रोडलर सा कुछली देल जाए तची
  235. 13:59–14:01आप फादल में दरज काए तची
  236. 14:01–14:04ये ये महज एक्ता काजक भेरभ्यल असिटन्चल
  237. 14:04–14:06ये एक्ता स्पस्ट जूट्चल
  238. 14:06–14:09मुदा फाएल में तो उही सत्या चीने
  239. 14:09–14:13यी दिखावेत अची जे बेवस्ता कतिक चतृर आप्राजे अची
  240. 14:13–14:15उआहाक प्रानत लेबे करत
  241. 14:15–14:18मुदा उ आहाक शाहदत तक गरीमा सो हो चीन लित
  242. 14:18–14:21उ अहाक इतिहास में हीरो नहीं बने देत
  243. 14:21–14:25बलके एक ता सादारनाक्डा एक ता स्तातिस्टिक बनाके चोडी देत
  244. 14:25–14:28इवयक्तिक पतन वा नेतिक जीत नहीं अची
  245. 14:28–14:31इद्हाचागत क्रूरता पुड विजैय अचे
  246. 14:31–14:35अम एही बाज्सा एंकार नहीं कर रहा थी जे बेवस्ता चतूर अच्छे
  247. 14:35–14:39उ इतिहास के अपन हिसाब सा लिख्वाख का पून प्र्यास कर रहता ची
  248. 14:39–14:42मुदा की उ अप राजया ची
  249. 14:42–14:45की उ मनुश्षक आत्माक के कुछली सकल हम्राने लगेद
  250. 14:45–14:47आहा के आहन की एक लगगे तची?
  251. 14:47–14:50नाटकक अन्तिम दिश्ष्पर जाओ,
  252. 14:50–14:54उता आशाक एक दा बहुत मद्ध्यम मुदा इस पष्ट किरन आची.
  253. 14:54–14:57अन्तिम दिश्ष्ष्प में मस्दूरक उ समवाद मोन पादू,
  254. 14:57–14:59जे आशा मरतने,
  255. 14:59–15:01उकर आवाज दंका में,
  256. 15:01–15:04अद्छ़ोरा में पूलक दरारे में बसी जाएते है.
  257. 15:04–15:07रूकु, हम्रा पूरा करा दिया?
  258. 15:07–15:10इपंक्ती कोनो सादारन प्रलाप नहीं आचे.
  259. 15:10–15:14इप्रमानित करेत आचे, जिस सत्या कभीज नष्ट नहीं भाल आचे.
  260. 15:14–15:19सत्ताक के इतिहास पूनरलेक्हन और रोडल्रक के क्रूर्ता को भावजुद
  261. 15:19–15:23उही मस्धूरक भीतर विद्रोग का आगी सुलग रहाला चे.
  262. 15:23–15:27उएईंजीन्यर मरल जरूर, उग्रा दूर्गखतना से हो साभित का दिल्गल,
  263. 15:27–15:32मुदा उ अपन न्रित्तुसा उही मस्दूरक सब की चेतना की जगागेल
  264. 15:32–15:35एक ते इंजीनेरक मिरित्तु हादार विद्रोग के जनम देद
  265. 15:35–15:40अट्यव्यक्ती हारी कसे हो ने तिक्ता कस्तर पर जीते ही तच्छें
  266. 15:40–15:41हम राक शमा करव
  267. 15:41–15:45मुदा इबहुत किताभी आदरश्वाद भेल
  268. 15:45–15:51हम उही मस्दूरक अंतिम पंक्ती के बिल्कुल दोसर तरहे देखे इच्छी
  269. 15:51–15:56अँ बहुत भ्याना कचे कि आहा उकर अंतिम हाहाकार पर गोर केल हूँ आची
  270. 15:56–15:59उहाहाकार तोकर विद्रोज के स्वर अची
  271. 15:59–16:29अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अ�
  272. 16:29–16:34अगर बलाएक लेल अपन जान्दा दिलक, उतो अगर मसीहा चल?
  273. 16:34–16:38कारन जुथा आशा देबः सब से पेग क्रूरता आचे
  274. 16:38–16:41इबात हमरा सब की गेराई सब वुज़ा परत
  275. 16:41–16:44जखन लोक अनहार मेरहबा का अबविस्त बहजाई तची
  276. 16:44–16:47तखन अखरा दर्ध कम होई तचे
  277. 16:47–16:52मुदा जो आहा उही अनहार मरहल वक्ती के प्रकाषक आशा दखागी,
  278. 16:52–16:59उक्रा विश्वाज दिलावी, जे नयए भिटत, आफ फिर उक्रा आखी के सोजा उही प्रकाषके रोडलर तर कुछली दी,
  279. 16:59–17:01तो उगर तूटी जाइता चे.
  280. 17:01–17:05यह दूखख़ब देबसी हजार गुना बड़ी जाईता चे
  281. 17:05–17:13मस्दूर देखलक जे जे बेक्ती वोकर रक्षक चल, जे फाईलक सतपर अदिक चल, वोकर म्रित्य। कोनो जाच दरे नेवेल
  282. 17:13–17:16तकन वो मस्दूरक पूरन महुभंग बवजाईता चे
  283. 17:16–17:19इता बहुत नेराश्श पूर्न द्रिष्टि कोन भेल
  284. 17:19–17:21और मस्दूरक सम्वाद
  285. 17:21–17:23एही बातक चिटकार आची
  286. 17:23–17:24जे आदर्श्वाद
  287. 17:24–17:27जक्हन बिना दाचागत शक्तिक होईता ची
  288. 17:27–17:31तो के बल गरीब के लिल खटरनाक भ्रम पैदा करे तची
  289. 17:31–17:35जगनो एंजीन्यर कुचलल गेल, तसर्फ एक ता शरीर नाई कुचलल गेल,
  290. 17:35–17:38उही वर्क का समपुटन आशा कुचली देल गेल.
  291. 17:38–17:42इस सिस्तमक अजेयताक सब से क्रूर गोशना आची.
  292. 17:42–17:44एमे कोनो विद्रोज क्भीजना आची,
  293. 17:44–17:47इपुटन आत्म समरपनक चीत कार आची.
  294. 18:01–18:08इसे हो कहीत आची, जो एंजिनेरक हत्या के दुगतना साभित केल जते, तो उक्रा अर्थात विवस्ता के बच्वेइत.
  295. 18:08–18:11आप, उक्रोद ता अची उक्रा में.
  296. 18:11–18:15इजे भीत्रक श्वाग ख्रोद आची एह प्रती रोज अकारन नया ची.
  297. 18:15–18:17अम आबे ही विमर्श्वक निशकर्ष्टिस आभीरोल ची
  298. 18:17–18:21हम्रा विचार सा आहा कतोव सिस्टम के मजबूरीक बात करू
  299. 18:21–18:28गजंद्र थाकुर अकी नाटक इस पर्ष्ट्रूप से विक्तिगत नेटिक दाइत्व असत्यके प्रती समर्पडक आवान अची
  300. 18:28–18:31मुदा उ समर्पनक कीमत जान देवया ची.
  301. 18:31–18:34आ, वेवस्ता कत्बो क्रूर की एक ना हुए,
  302. 18:34–18:37इंजीनेरक शहादत ये स्तापित करे तची,
  303. 18:37–18:43जे एक ता वियक्तिक सत्यनिष्ता समगर भ्राष्टतन्त्र के बेनाब कझ चके तची.
  304. 18:43–18:47बिना चारित्रिक निर्माड़, बोदिक निर्माड़ क्वोख्ला पनक यी कहानी हैच.
  305. 18:47–18:54जगन तरी पाईलक सत्यद और पूलक पायक सत्यमे समजस्यन नहेत है, पूल खसत रहते.
  306. 18:54–18:57आहम आपन निसकरस में एही बात पर कायम ची,
  307. 18:57–19:04जिक्रिती मुक्यरुप्से सत्ता पूंजी अनिरमानक भीचक ओई अपवित्र गत्जोडक दस्तावेज अची
  308. 19:04–19:08जिक्रा तोडबक विक्तिगत आदर्षक वश्मे नईच है
  309. 19:08–19:10मुदा कोशिश तो करा परतना?
  310. 19:10–19:12कोशिश भेल अप परिनाम की भेल
  311. 19:12–19:16इई नाटक व्यक्ती बनाम व्यवस्ताक उ अस्मान ने युध अची
  312. 19:16–19:19जत व्यवस्ताः आपन अस्तित्व बच्ट्वाख लेल
  313. 19:19–19:21विद्रोही के नसर्फ कुछ्ली देटची
  314. 19:21–19:25बलकी इतिहास के अपन फिसाप से लिखाई तची
  315. 19:25–19:31उ इमान्दार इंजीन्यर एक ता सिस्टम एर चल, जे क्रा वेवस्ता सपल्ता पूर्वक दिलीट का देलक,
  316. 19:31–19:37आशाग जे खषनेक किरन चे उ अ अगतता उई निर्माम वेवस्ताक रोडलर तर सदायलेल कुछ लाजाई ता ची.
  317. 19:37–20:07या देपी हमान आ आहांके द्रुष्टिकोन में इते क मालेक भिन्नता चे मुदा हम्रा लगाई ता चे जे हम दुनो एही बात पर पूणता सामच्ची जे गंगा ब्रिज केवल एक ता बहुत एक पुलक निरमानक कता नहीं जी इई स्वतन्द्रता के बादक राश्ट्रक ख
  318. 20:07–20:11तीक हम्रा सबक वर्तमान सिस्तम जगका
  319. 20:11–20:14आई इई उगी विकासक पर्दा फाज करी तजी
  320. 20:14–20:18जटा इट भालुक के बडला मज्दूर कुन से सीमेंट साना जाई तजी
  321. 20:18–20:22यद्दपी आशा बनाम सिस्तमक अजेयता पर
  322. 20:22–20:25हम्रा लोकनिक भीज अस्पष्ट असामती बनल रहत.
  323. 20:25–20:29आई असामती बडदेक रुपसा आवश्शक से हो आची,
  324. 20:29–20:33करन सत्यकोनो एक ता रस्तासा न नहीं बहतेत आची.
  325. 20:33–20:35श्रोता के लिल हमी प्रश्न चोडल जार रहल ची,
  326. 20:35–20:38जे असल में दरार कता याची,
  327. 20:38–20:41कि दरार गंगप पुलक उही पाया में आची
  328. 20:41–20:44जटा बालु भेसी आसीमेंट कम आची
  329. 20:44–20:47वा दरार उही सरकारी फाल में आची
  330. 20:47–20:50जे विकासक खोकला परिबाशा गड़े तची
  331. 20:50–20:52इगता बहुत सतीक प्रश्ना चे
  332. 20:52–20:55बारतक हद्दी के वल तूटल नाया चे
  333. 20:55–20:59अखर भीतरक बोन मर्रवा मज्जादरी ब्रष्टाटार से सडी चूकल अचे
  334. 21:00–21:02मुदा अखर दिक कर बाकलेल की चाही
  335. 21:02–21:04उही एंजीनेर जकाम व्यक्तिगत सहस
  336. 21:05–21:07वा समपुन व्यवस्ताक एक तक खतरनाक सरजरी
  337. 21:08–21:09इन निरन आहा सबक अचे
  338. 21:10–21:11इएक ता एहन प्रस्न चे
  339. 21:11–21:16जिक्रा लोक श्रोता सब के आपन चारो दिसक दहत पुल अवेवस्ताके
  340. 21:16–21:19नवर नजरी सदेक वाख्लेल विववस करे तची
  341. 21:19–21:24आईबग दबेट मे आहा सबक संध जुडाबाख्लेल आहक बहुत भुत दहनेवाद
  342. 21:24–21:30इप्रश्नाहा सबक समखषे सोचु विचार करू और अपन सत्यक अनवेशन करू

Plain text

ददिबेट मेहाख स्वागत आचे सोचु जे आहा समचार देखी रहल ची, आद आचानक एक ता कभरी आबईता ची, जे, मतलब करोडो क लागत से बनल एक ता नवग का पौल उदगातन से पहिने ही बरभराक खसी पडल. आई त, मतलब हम्रा सब के लिल कुन नव बाच्च्याने, इत आब एक ता आम यदारत बनी चुकल आची. एक दाम, मदा जगानो पुल ख़सेद आची, ता असल में की ख़सेद आची. की उ मात्र भालु, सिमेंट, लोहक दाचा आची जे दैगेल, वा उकर संख खसेइत अची एक ता पूरा विवस्थक ने तिक्ता आई हम सविमर्ष कर रहल ची गजें़र ताकौरक बहुचर्चित नाटक गंगा ब्रिज्च का उही कडवाय अथ फार बलकुल इन नातक स्वतन्त्रताक बादक भारत में जे विकास के नाम पर ब्रष्टा चार आममानविय भलिदान भहर रहा लगची, उकर एक ता बहुत विदारक छित्र प्रस्थूत कराई दाची. अग, जद्य एक दिस पूलक मरम्मत्ती उद्खातन सपूर्वे चाली रहा लगची, अदोसर दिस सत्ता मुख्य अव्यंता अननेताक अपवित्र गत जोडग, के भीच एक ता इमान्दार एंजिनेर पीसी रहा लगची. ता आईबक विमर्ष्क के खेंदरी ये प्रश्न यी आची जे की इन नाटक मुख्यरूँपसव, व्यक्तिगत ने तिक्ता आसत्यनिश्थाक पतनक कता आची. जते एक ता इमान्दार एंजीन्यराक हत्या असल मे आदर्ष्ख हार थेक. वाज़िया थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी वाद़ा थी � मत्र एक ता दोखा अचे आ अंत तद ड़ाई जेते. मुदा देखु, हमर परिप्रेक्षे एही सब भिलकु भिन्ना ची. हमर विचार सब इन नाटक नेटिक ताक राजीत के कता चबे नहीं करे. इसल में ब्रष्टचारक दाचागत यादार्त के दिखावात अची. इक ता एहन मजबूरी जेकर भीना इटन्त्र चली ने सकेच अथ तव्यक्तिगत ने तिक्ता एक दब बहुत पेग अक्रूर टन्त्रक अगार ही भाँना भजायता चे हम भूजी रहाल ची, जहा सिस्तमक मजबूरी देस इशारा कर रहाल ची मुदाम आपन तरकक मुल आदार स्पस्ट कर चाहचे. हमर मान ना चे, जे नाटकक मुल सन्देश एही बात में नहेत आची, जे भोतिक निरमान, जिना एगंगापोल, अचारित्रिक निरमान दून्नो अभी नाची. मुदा दून्नू के एक संजोडब कते क्यावारी का चे? देखु आहा एक रह गलक क्हन्द में नहीं देख सकेचे. नाटक में उही इमान्दार इंजिनियराक एक ता समवाद आची, जे हम्रा लेल इस क्रितिक आत्मा आची. उआपन मित्र सो कहे तची, पूलक पाया पाईलक परिबाशा नहीं जे सही तसही रहते अगलत गलती रहते उसमवाद बड्मार्मि कच इग्दम इबात हम्रा सब के भुजवावष्यक अच्छी पाईल में आहाक चत्बो लिखि दिया जे पूल मजबूत अच्छी नेताक दबाव में आखकतबो समज़हता कर लियो, मुदा बहुतिग विग्यान अप्टिखस आख फाईल नहेपड़े तच्छे. ता आजाक आर्थ अच्छे जे प्रक्रती अपना हिसाब सा काज करे तची भिल्कुल, जम भालू भेश्या सिम्ट काम अच्छे तप्पूल खसत इएक ता अकाटे सत्ट्या चे जे क्रहाम सब वस्तुनिष्ट वा अबज्ज्टिव सत्ट्य कहे चे उ समवाद प्रवाव्शाली अवष्य अच्ये मुदा की उ यथार्थवादी अच्यी उ अईंजिनेर कहेट अच्ये जे सही चही रहेद मुदा सत्ता के गल्यारा माँ सही का परिवाशा तैके करे टची इद उता उता इप बैसल लोकक हाथ मे आच्ये मुदा सत्यता कुर्सी सण नहीं बदले चे. उस्सिद्धन्तिक रूपस थी कचे. मुदा आहा थेके दारक उही गपपर द्यां दिया, जकन उह एंजिन्यर सापन मजबूरी कहे तची. उस पष्ट कहे तचे, जे उहो नीक काज करवाख चाहे तची, उएक ता आम लोका कुदारन दैता जेना नीक रोटी बने बलेल हम सब आता चाले चीे. उो हो चाहे तचे जे बालु चालिक नीक पूल बनावे. आ, मुदा उ अन्तता समजोता कर लेच है. मुदा उ विवष की एक आची. कारजन नेता गुन्दा अचीप इंजीनर के कमिशन नहीं देट, तो अकर बच्चक नाम स्कूल सकाती देल जते, आहा एक रा नेतिक पतन कोना कही सकती. ता आहा एक रा की कहब? कमीशना की खेल कोनो एक वक्ती से शुरू नहीं होईता ची इता नीचा सलेका उपर दरी जाईता ची �theke daara ki sambad bujvei tachi जे बेमानी करव कोनो शोक नहीं बाचल रहवाक शरत ची बाचल रहवाक शरत ची तकन की आहा के हिसाप से �theke daar doara kelegele अवी समजोता के सामन ने मानी लेल जाए? हम्रा एदरक भीलकल पचयत नहीं आची, जे सिस्टमक मजबूरीक नाम पर, मदलब व्यक्तिगत डाएत तो समुह मोडल जासके तची. मुदा सिस्टम व्यक्तिसे पैग आची, भासके तची. मुदा नातक पहल दिश्चपर गवर करो, उता सुतन्तरता दिवसक समरन करावल जायत ची जंदा फेरायल जा रहल जी. मुदा प्रिष्ट भूमी में की बहर रहल ची, जे पूल अखंदरी पूरन रूपन बनल हू नहीं आची, जाएक उदगातन सेहो ने भेलाची, उई में चिप पी वा पैच्वर्क लागी रहाची, दरारी के बरल जा रहाची. आप इत एक ता एक ता बहुत पैग विडम बना आची. इक देखावाई तची इदेखावाई तची जे हमर तथा कतित विकास जनम सप पहीने ही विकलावग ची नाटक में एक देख्छन तिख्चन तिपनी करे तची जे सुतन्त्रताक आर्थ मात्र गोरा हाँकिमक स्थान पर कारी हाँकिमक बैसा वाची अहु सम्वात उनी फवयक पुर्न मोह भंग के दिखावाई तच्याज. एक्दम, जो इस थी इए आच्छ, तई विकास मात्र एक्टा जब अच्छे. आज्जा विवस्ता इए मुख्छटा पहिरने आच्छे, उक्रा नोच्बा काज विक्तिगत हिम्मत सहेते. अही तेकिदार जका मजबूरीक रोना रोयलास नहीं आहा अक्रा मुखष्टा कह रहे लची मुदा हम्रा लेल इं मुखष्टा जानी बूजी के गड़ल गेल एक ता हत्यार अच्छे इकोनो सझयोग वो बहुल नैं अगर उदगातन सा पहले तूईट रहल चें यी ता मतलब राज्जक दिजाईन अची राज्जक दिजाईन कनी विस्तार से समजाओ आहा गुरा राकिम सा कारी राकिम के जे बात कहलो, उगडम सकी कचें अगर बवाद्टी बहुतिक निर्मान के विकासक परयाये मान लेल गेल आची अगर अदी अदी एक ता बच्चा की अथार्ट की आपार्ट की आचे उ कहे च्तिन जे एही सद्देस के विकास हेते यह उही नव्सुतन्त्र राज्जेग प्रपिगेंडा आची आप जता पैग पैग बहुतिक निर्मान के विकासक परयाए मान लेल गे लची तीक, मुदा उती एक ता बच्चा की अथार्थ की एचे उ बच्चा कहेत अची जे दूवासा हमार माए के खासी होई चे आई खासी उही विकासक की मत अची जे गरीब चुका रहे लचे इक दम राज शुरुस विकासकना पर आम लोकक जीवन के दाव पर लगवाईत आए लची जखन लो शिक्षी का सवाल उठवाई चहतिन, जे की बिका फैक्टरी आप बिका बान्सा चोटपाइक भेद मेटा जायत, तकन उनका चुप करा देल जायता ची, इकही का जे एक पीडी के त, बलिदान देवपरत. इत उही आमानविया ताक महीमा मन्दन भेल आप जेक्रा अंगरेजी में कोलाट्रल दामेज कहल जाएत अची अर्था जगन कोनो पैग लक्ष्कलेल, साद्दारन, बेकसुर लोकक जान जेवा के सुआबहाविक अस्विकार यमानी लेल जाएत ची राज आपन नागरिक के उही कौलाट्रल दामेच करूप में देखाई तची इव्यक्तिगत नेटिक तक बात ने आची हम मानेच छी जी राज एक ता ब्रामक सपना देखा रहा लची अग गरीप सो खर कीमत वसुल रहा लची मुदा जगन आहा एक राज्जक दिजाईं कही कचोडी देछची तकन आहा अईंजाने में उही निर्मम्ता के वैद बना रहल ची जगरा ओ एंजीनिर के मित्र अपनावे तची मुदा उ मित्र यधार्ट्वादी आची उ मित्र की कहता? उ कहता ची जिस सही या गलतक परिबाशा कुर्सी पर बैसल लोक तैकरे ताछे आहां कद्रिष्टी कोंषा इधार्थवाद भहसा के ताछे मुदा हमरा एक ता बाद भुज़ाो जगन कुर्सी परिबाशा तैकरे ताछे तकन राम दनीजका मज्दूर्क जेहात मशीन में कडी जाईता चे, उकर की होईता चे. देखु, राम दनीच प्रसंग निष्चित रूभ से विच्लित करे वाला आचे. उस शर्व विच्लित करे वाला ना आची, उ मानवी अक्रूर ताक चरम आचे. मज्दुर कहात कती गेले जे, रक्त स्राव भहर हाले जे, और आक अस्पताल पथाईवक बदला में, पट्टी कजगब भोरा बाने के पथा देल जाईते जे. आ, इप पदके ता आत में कापी जाईते जे. कि यक के लेई लेहन? कारन् काम नेरुकप चाही, अगा क्यदार्त्वाद एबात के पच्टेवाग लेल तधयार अची कि यदार्त्वादक नाम पर मान्विय समवेदन रहन्ता के जाईज्थाराराल जासके तची अगा जाईज्थाराराल ची अगा अगा जाईज्थाराराल ची इंजीनेर उते तहाः भाई का प्रष्न करईता जी, जे की इंजीनेरिंका अर्थ इआची, जो मस्दूर अग जानक कोनो मोलने? एक ता इमान्दार व्यक्ती आई आवमान वियता के स्विकार नहीं कर सकेता जी. उकर जे प्रती रोध है जे, उकोन उवेचारिक हद्ट नहीं आजी उ मनुश्टा के अंतिम रक्षक अची मुदा उकरी रक्षक वला रूप की काजा आद? जो उटेके दार अव मित्र जका समजवता कर लेद तो राम्दनी खुन में आपन हाथ सान लेद बुजलिय, हम राम्दनी कतल हाथ अही भोराक निर्मम्ता के कम नाकी रहल ची. मुदा हमी देखावा चाहची जे इवेवस्ता उही खुनके साप कोना करे ताछी. आहा इबुजबाक प्रयास करु जे सिस्तम काम कोना करे ताछी. कोना करे ताछी काज? आमानवियता सा? जखन उ इंजिन्यर प्विलबद प्रमान लोक्क, चीफ इंजिन्यर लग जाई ताची, अ सवाल उठेबगी ताची, जे राम दनिक संग आमान्वियता भे लाची, और पुलग गुन्वद्ता में समजोता बहरा लाची, अगर उगाग चलते विकास रुकत इस आब आद उजिश्टमक सब सब शब पही गध्यार आचे उजानी भूजी का इंजिनेर के अप्रादी साभित कर अची बिलकुल ब्यवस्ता एटेक चला का ची जे उषब्दक अद्ध बदली दैच्छा ब्रादि साभित कर अटाची भिल्कुल ब्यवस्ता एते चलाग आची जे उ शब्दक अद्ध्बदली दैच्चा उआहा के नेटिक्ता के विकासक मारगक बादा बना देटची जे आहा मस्दूरक खुनक बात करव तो वहांके प्रगती विरोदी गोषिद का देत। इद पुरन रूप सा सत्यक मरोड भाभेल इब्यवस्ताक सक्ती आची जे उआपन आमान्वियताके विकासक नाम पर पवित्र का देत आची आहा जेक्रा मनुश्षताक रक्षक कही रहल ची सिस्तम अग्र एक्ता एहन विद्रोही मानेच्च्छे दे सक तरक्ती रोकचाहता ची यी वेचारीक लडाई नहीं आची, यी विमर्षक नियंट्रनक लडाई आची आईहे में अग्चिनिरेक सत्य औही कुर्सिक पावर का गाडी कुछली देल जाए ताची अवही कुर्सिक पावर कतेक नीज अस्टर्त्त्तरी खसी सकेद अची अगर सब सब पहल उदारन नाटक के अन्तिम है साचे जकन मुख्य अवियन्ता गंगा ब्रिज़ पर एक ता पोठी लिख़े चातिन अ मुख्य मंत्री स्वैम अगर विमोचन करावे चातिन आ, उ विमोचन समारोथा पुरा नाटक को सार अची. इस सादारन पाक्शन्द नहीं आची. तीन सोसे भेसी मस्दूरक म्रित्त्यो बेलाची. राम्दनी जका लोकक आंग भंग बेलाची. आ, उही इमान्दार इंजिन्यरग क्रूर रत्या केल गेल अची. आएही सब के पोथी में विकास लेल आवश्षक भलिदान कही कगर्वान विद्केल जारो हल आचे. जेक्रा आहा पाक्श्ण्ड कोहे ची उसिस्तमक सत्या ची. इससत्यक पुल अवमुल्या आची. विवस्ता उही हत्या के केवल दबाईत नही आची. उग्रा एक्ता उच्सव्क्रूप देद अच्छी एतिहासकी पुनर लेक्हन प्रमानित कर अगी जे ब्रष्ट लोग कहन विबध सभाय सके च्छती मुदा हमर तर की अच्छे जे एही चरम पाख्श्डग कारन पाथक्वा दर्ष्चक के भी तर उही इंजीनेरक नेटिकता और भेसी भल्वान भाखा उब्रहेत थची उह मरी का सो हो नेटिक रुप से विज़ेई होई थची आहा एक रप पक्हन्द कोही रहल ची मुदा हा मेक्रा सत्ताक मनो विग्याना किक्ता बहुत गूड प्रक्रिया मनाइच्छी उ मुक्यमन्त्रिक संबादक उलेक करव एते बद्द प्रास्संगी कची मुक्यमन्त्रिक पोठिक विमोचन में की कहे चथी उ कहे चथी जे पूल के खुन चाही आ, उ कहे चथी इगंगा की भुजहाई बिन भली दाने आईपर पूल बनी सकत खून चाही एकरा, इकोनो सामान ने भाशन नहीं आची, इप्राचीन काल सचली आरहल भली प्रताक आदूनिक संस्तागत रुप आची. जद पहले देवता के प्रसन्चर बाकलेल भली देल जाएच चलान, आप विकास नामक आदूनिक देवता के मस्दूरा कुन चाही इस सोच आपने आपने बद्दराव ना आची सबसा खोफनाक हस्चा इए आची ज़ विवस्ता आपन विरोदी के मारेट को ना आची जखन इंजीनिर के मारबाक शड्यन्त रचल जार आची तकन मुक्यमन्त्री स्पष्ट निर्देश दैई चतिन जे एक्रा आत्म हत्या या आतंग्वादी गूशित नहीं करवाग अची. आप खारन जो उक्रा आतंग्वादी वा विद्द्रोही कहल जैते तलोक प्रष्नो उठवैद जे उविद्रोह के खेलक उकर जाज कमां उठतत् सतीक मुक्यमंत्री अ मुक्यावियंता बहुत नीक जका जान अच्छतीन जे जो हत्या कारोप लगले वा उक्रा मारल गेले तो उ महात्मा गान्दी वा जीसस क्राइस्ट बनी जाइत उशहीद बनी जाइत आश्भादत सत तदद दराएते आची? ये एक दम कारन शहीदक विचार अजैए बोजाए तची ते उसब एक्रा की रूप दे तची एक ता दूरगखतना इंजीन्यर के रोडलर सा कुछली देल जाए तची आप फादल में दरज काए तची ये ये महज एक्ता काजक भेरभ्यल असिटन्चल ये एक्ता स्पस्ट जूट्चल मुदा फाएल में तो उही सत्या चीने यी दिखावेत अची जे बेवस्ता कतिक चतृर आप्राजे अची उआहाक प्रानत लेबे करत मुदा उ आहाक शाहदत तक गरीमा सो हो चीन लित उ अहाक इतिहास में हीरो नहीं बने देत बलके एक ता सादारनाक्डा एक ता स्तातिस्टिक बनाके चोडी देत इवयक्तिक पतन वा नेतिक जीत नहीं अची इद्हाचागत क्रूरता पुड विजैय अचे अम एही बाज्सा एंकार नहीं कर रहा थी जे बेवस्ता चतूर अच्छे उ इतिहास के अपन हिसाब सा लिख्वाख का पून प्र्यास कर रहता ची मुदा की उ अप राजया ची की उ मनुश्षक आत्माक के कुछली सकल हम्राने लगेद आहा के आहन की एक लगगे तची? नाटकक अन्तिम दिश्ष्पर जाओ, उता आशाक एक दा बहुत मद्ध्यम मुदा इस पष्ट किरन आची. अन्तिम दिश्ष्ष्प में मस्दूरक उ समवाद मोन पादू, जे आशा मरतने, उकर आवाज दंका में, अद्छ़ोरा में पूलक दरारे में बसी जाएते है. रूकु, हम्रा पूरा करा दिया? इपंक्ती कोनो सादारन प्रलाप नहीं आचे. इप्रमानित करेत आचे, जिस सत्या कभीज नष्ट नहीं भाल आचे. सत्ताक के इतिहास पूनरलेक्हन और रोडल्रक के क्रूर्ता को भावजुद उही मस्धूरक भीतर विद्रोग का आगी सुलग रहाला चे. उएईंजीन्यर मरल जरूर, उग्रा दूर्गखतना से हो साभित का दिल्गल, मुदा उ अपन न्रित्तुसा उही मस्दूरक सब की चेतना की जगागेल एक ते इंजीनेरक मिरित्तु हादार विद्रोग के जनम देद अट्यव्यक्ती हारी कसे हो ने तिक्ता कस्तर पर जीते ही तच्छें हम राक शमा करव मुदा इबहुत किताभी आदरश्वाद भेल हम उही मस्दूरक अंतिम पंक्ती के बिल्कुल दोसर तरहे देखे इच्छी अँ बहुत भ्याना कचे कि आहा उकर अंतिम हाहाकार पर गोर केल हूँ आची उहाहाकार तोकर विद्रोज के स्वर अची अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अगी अ� अगर बलाएक लेल अपन जान्दा दिलक, उतो अगर मसीहा चल? कारन जुथा आशा देबः सब से पेग क्रूरता आचे इबात हमरा सब की गेराई सब वुज़ा परत जखन लोक अनहार मेरहबा का अबविस्त बहजाई तची तखन अखरा दर्ध कम होई तचे मुदा जो आहा उही अनहार मरहल वक्ती के प्रकाषक आशा दखागी, उक्रा विश्वाज दिलावी, जे नयए भिटत, आफ फिर उक्रा आखी के सोजा उही प्रकाषके रोडलर तर कुछली दी, तो उगर तूटी जाइता चे. यह दूखख़ब देबसी हजार गुना बड़ी जाईता चे मस्दूर देखलक जे जे बेक्ती वोकर रक्षक चल, जे फाईलक सतपर अदिक चल, वोकर म्रित्य। कोनो जाच दरे नेवेल तकन वो मस्दूरक पूरन महुभंग बवजाईता चे इता बहुत नेराश्श पूर्न द्रिष्टि कोन भेल और मस्दूरक सम्वाद एही बातक चिटकार आची जे आदर्श्वाद जक्हन बिना दाचागत शक्तिक होईता ची तो के बल गरीब के लिल खटरनाक भ्रम पैदा करे तची जगनो एंजीन्यर कुचलल गेल, तसर्फ एक ता शरीर नाई कुचलल गेल, उही वर्क का समपुटन आशा कुचली देल गेल. इस सिस्तमक अजेयताक सब से क्रूर गोशना आची. एमे कोनो विद्रोज क्भीजना आची, इपुटन आत्म समरपनक चीत कार आची. इसे हो कहीत आची, जो एंजिनेरक हत्या के दुगतना साभित केल जते, तो उक्रा अर्थात विवस्ता के बच्वेइत. आप, उक्रोद ता अची उक्रा में. इजे भीत्रक श्वाग ख्रोद आची एह प्रती रोज अकारन नया ची. अम आबे ही विमर्श्वक निशकर्ष्टिस आभीरोल ची हम्रा विचार सा आहा कतोव सिस्टम के मजबूरीक बात करू गजंद्र थाकुर अकी नाटक इस पर्ष्ट्रूप से विक्तिगत नेटिक दाइत्व असत्यके प्रती समर्पडक आवान अची मुदा उ समर्पनक कीमत जान देवया ची. आ, वेवस्ता कत्बो क्रूर की एक ना हुए, इंजीनेरक शहादत ये स्तापित करे तची, जे एक ता वियक्तिक सत्यनिष्ता समगर भ्राष्टतन्त्र के बेनाब कझ चके तची. बिना चारित्रिक निर्माड़, बोदिक निर्माड़ क्वोख्ला पनक यी कहानी हैच. जगन तरी पाईलक सत्यद और पूलक पायक सत्यमे समजस्यन नहेत है, पूल खसत रहते. आहम आपन निसकरस में एही बात पर कायम ची, जिक्रिती मुक्यरुप्से सत्ता पूंजी अनिरमानक भीचक ओई अपवित्र गत्जोडक दस्तावेज अची जिक्रा तोडबक विक्तिगत आदर्षक वश्मे नईच है मुदा कोशिश तो करा परतना? कोशिश भेल अप परिनाम की भेल इई नाटक व्यक्ती बनाम व्यवस्ताक उ अस्मान ने युध अची जत व्यवस्ताः आपन अस्तित्व बच्ट्वाख लेल विद्रोही के नसर्फ कुछ्ली देटची बलकी इतिहास के अपन फिसाप से लिखाई तची उ इमान्दार इंजीन्यर एक ता सिस्टम एर चल, जे क्रा वेवस्ता सपल्ता पूर्वक दिलीट का देलक, आशाग जे खषनेक किरन चे उ अ अगतता उई निर्माम वेवस्ताक रोडलर तर सदायलेल कुछ लाजाई ता ची. या देपी हमान आ आहांके द्रुष्टिकोन में इते क मालेक भिन्नता चे मुदा हम्रा लगाई ता चे जे हम दुनो एही बात पर पूणता सामच्ची जे गंगा ब्रिज केवल एक ता बहुत एक पुलक निरमानक कता नहीं जी इई स्वतन्द्रता के बादक राश्ट्रक ख तीक हम्रा सबक वर्तमान सिस्तम जगका आई इई उगी विकासक पर्दा फाज करी तजी जटा इट भालुक के बडला मज्दूर कुन से सीमेंट साना जाई तजी यद्दपी आशा बनाम सिस्तमक अजेयता पर हम्रा लोकनिक भीज अस्पष्ट असामती बनल रहत. आई असामती बडदेक रुपसा आवश्शक से हो आची, करन सत्यकोनो एक ता रस्तासा न नहीं बहतेत आची. श्रोता के लिल हमी प्रश्न चोडल जार रहल ची, जे असल में दरार कता याची, कि दरार गंगप पुलक उही पाया में आची जटा बालु भेसी आसीमेंट कम आची वा दरार उही सरकारी फाल में आची जे विकासक खोकला परिबाशा गड़े तची इगता बहुत सतीक प्रश्ना चे बारतक हद्दी के वल तूटल नाया चे अखर भीतरक बोन मर्रवा मज्जादरी ब्रष्टाटार से सडी चूकल अचे मुदा अखर दिक कर बाकलेल की चाही उही एंजीनेर जकाम व्यक्तिगत सहस वा समपुन व्यवस्ताक एक तक खतरनाक सरजरी इन निरन आहा सबक अचे इएक ता एहन प्रस्न चे जिक्रा लोक श्रोता सब के आपन चारो दिसक दहत पुल अवेवस्ताके नवर नजरी सदेक वाख्लेल विववस करे तची आईबग दबेट मे आहा सबक संध जुडाबाख्लेल आहक बहुत भुत दहनेवाद इप्रश्नाहा सबक समखषे सोचु विचार करू और अपन सत्यक अनवेशन करू

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