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पंजीक_डिकोडिंग__एकटा_यात्रा.mp4
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- 0:00–0:08नमसकार! आओ, आई हमरा लोकनी, एहे खास चर्चामे, एक ता अच्रच में डाले वाला विष्यपर गपकरी मित्हिलाक पंजी.
- 0:08–0:14बुज्बतर, ये एक ता बहुत प्राचीन आ एक दम कमप्रस्ट सबथा की जीनोम थेक.
- 0:14–0:17जखन, कम्पुटरे काविष्कार गब्पो ने चलने,
- 0:17–0:22ताही से शताब भीो पहले मानव सम्बन्धक एते जटिल नेट्वर्क के माप कयल गे जल.
- 0:22–0:25इकोनो सादारन पोथी वदस्तावेज नहीं अचे,
- 0:25–0:27अब एते एक ता बहुत पहेग प्रष्न उठाईताची
- 0:27–0:31आखिर पंद्रा सो वर्ष्छ दरिक मानव सम्मद्खे कोना माप कायल जासके तची
- 0:31–0:33जर अच चोचो
- 0:33–0:38चार सो पचास इस्वी से लोकर एक दम 2009 इस्वी दरिक
- 0:38–0:40प्राचीन भारतिय वन्शावलिक लिक्वाड
- 0:40–0:46अच्छास इस्वी से लोक्व एक दूहाजा नाँ इस्वी दरिक प्राचीन भारती एवन्शावलिक लिकोड
- 0:46–0:48इक ना चोट मोट काज नहीं आची
- 0:48–0:53एक ता एहन प्रनाली जी एट्टेक पएग समएदरी अनवरत मानव देटा की सुरक्षित रक्षित रक्टगगे
- 0:53–0:58सुईन का कनी आश्चर्यो है तच्छिने, इता एक दम कलपना से बहरिग बात लागगी तच्छि.
- 0:58–1:01एक तब बहुत सुन्दर बात कैल गे लगछी मूल स्द्रोत मैं.
- 1:01–1:05मित्छिलाक पंजी मात्र नामक कोनो सुची नहीं आच्छ.
- 1:05–1:08इव वन्शावलिक रूप में विवस्तिट स्म्रती थेक
- 1:08–1:12मतलप इदूरी लागल पन्ना पर लिखल किछ नाम भर नहीएज
- 1:12–1:18इत भुगोल, गत बन्धन, विवाज, असमाजिक इतिहासक एक ता साँस लैत
- 1:18–1:23तखर बात भुजब जे एई उप्तिप की थेक फेर वन्शावली कोड की दिकोड करव,
- 1:23–1:27गाम का महत्व के देखव आ अंद में समय आ उपादिक ट्रकिं करव.
- 1:27–1:30आव, बिना समय गवाँने आगु बड़ी.
- 1:30–1:34हम्रा लोक गेक पहल खन्द अछी, सब़्दाक जीनोम.
- 1:34–1:38अब दोनो द्रिष्टे कोनक तुलना पध्यान दे आदूनेक वन्शावली या
- 1:38–1:43फामली त्री के देखबा तो उस्सीदा होगे तची पित्र सथात्मक अ उपर सन नीचा आबे तची.
- 1:43–1:47अप दोनो द्रिष्टे कोनक तुलना पद्यान दे
- 1:47–1:50अदूनिक वन्शावली या फामली त्री के देखभा
- 1:50–1:52तो उस्सीथा होई तची
- 1:52–1:55पित्र सथात्मक अ उपर सन नीचा आबे तची
- 1:55–1:58मुदा दोसर देस, मित्लाक पनजी के देख हो
- 1:58–2:03तो उसीदा होई तची, पित्र सथात्मक अ उपर सन नीचा आबे तची.
- 2:03–2:08मुदा दोसर देस मिठलाक पनजी के देखो, एक तप पूरा निट्वक जे का अचे,
- 2:08–2:12आपस में जुडल, मात्र पित्र दुनु पक्ष्ष्ष्ष, अब होगोलिक सहो.
- 2:12–2:15ये केवल बाप सब एता दरिक सीथा लकीर नहीं अच्छी,
- 2:15–2:18यिस समबन्द किक्ता बूनल्गेल विशाल जाल थिक,
- 2:18–2:22जते विवाह आ गामक दिशा से हो पुरा बारी की सदरज रहेत अच्छी.
- 2:22–2:30अब आओ दोसर खंग दिस जदै य हम्रा लोकनी आही पुरा सिस्तमक मास्तर की के खोजब य उप्तीप आखिर अचे की
- 2:30–2:37तब वूज्व यते सबसे महप्वोपुरन बात इचे जे उप्तीप मात्र कुनो पन्नक नीचा देल फुटनोट नहीं आज
- 2:37–2:45एक दम नहीं ये ये ता सहायक ख्रोस्लिंट वन्शावली रिकोडच जे नाम, शाखा, आगाम के भीच एक ता पुलक काज करेताच.
- 2:45–2:51एक रा आप, समबंत के यी प्राचीन अंट्रनेट लिल एक ता अक्तेव नविगेशनल दिवाईज बूजी सकेच्छी.
- 2:51–2:57जए इई उप्टिप नहीं ते इविशाल नेट्वर मात्र किषो अलगलग पन्ना बनी करे जाएत.
- 2:57–3:03तीखची ता एस सा हम्रा लोकनी अबेची तेसर कहन्द पर, वन्शावलीक कोड के क्रक करव.
- 3:03–3:07पन्जी में वन्शावली कपन एक ता बहुत सदहन वयकरन होई ता ची
- 3:07–3:11मातर एक ता पाती में किचु विशेश प्रतिक कमाद्ध्यम सा
- 3:11–3:14कते को अनुच्छेद मैं अर्थ समेटल रहे ता ची
- 3:14–3:19तनी ये मेट्रिक्स के बूजू, सुत्, जे बेटा यो बेटीक लिंक बतावे तची, और दिशा बदले तची.
- 3:19–3:25सा, जे गामग भीज समबंदख पूल बन वे तची, अपर शब्द चे तावनी देता जे,
- 3:25–3:28ये एते सा एक ता और समानन्तर शाखा जुडल आची.
- 3:28–3:32अर दोहित्र, मतलप मात्री पुत्र, यहने बेटीग बेटा
- 3:32–3:39इदोहित्र जहन शब्दक उपस्तिती एक दम स्पष्ट करेता जे मात्री लिंक एह नेट्वोक में कते एक महत्वपून अचल
- 3:39–3:42इसाख्शात समयक पूल्त काज करे चल.
- 3:42–3:45एक यक सगन पाथ में बिना भटकेल रस्ता कोना भितत,
- 3:45–3:50ताहिलेल श्रोट समगरी में इपाच चरनेक कोट ब्रेकर विधि दिल गेल अची.
- 3:50–3:53एक, गाओ या शिर्षकेक पहचान करो.
- 3:53–3:56दूई, पहल वक्तिके खोजो.
- 3:56–3:583. सम्बन्दक शब्द के छिन्हित करो
- 3:58–4:014. गाँवक लिंक के मैप करो
- 4:01–4:055. उपादी या संदर्भ नम्बर के सुरक्षित रखो
- 4:05–4:08ये एक ता एहन अचुक तरीका ची
- 4:08–4:10जक्रा सा कोनो व्यकती
- 4:10–4:14इही गंगोर जंगलजका वन्शावली में कखनो ने बद्की सके चे
- 4:14–4:20आब भूगोल देश्छलेच्छी हमरे लोकनिकर चोथरिम्क्हन्द में गाँ समबन्दक आदार के रूप मैं
- 4:20–4:23पंजी में गाँक नाम मात्र कुनो भोतिक पता नहीं आची
- 4:23–4:26इस सम्रतिक बहुत पैग संच्नरष्ना थेख
- 4:26–4:30पन्जी वस्तुता एक ता नक्षात्धिक, जे समबन थक रेखा किचाईता ची.
- 4:30–4:32सरिसब या पहीटोल जहन गाँक नाम,
- 4:32–4:37वन्शावली रिकोड के एक जगद हरी रक्बाक लेल आंकर के काजकराईता ची.
- 4:37–4:43आई बहुत ज़रूरी आची के एक रासे एके नामक दूई भिन्न वेक्तिक भीचक अंतर से हो सबष्ट होई ताची.
- 4:43–4:47बिना गाउक यवन्शावली केवल नामक भद्काउ बनी जाएत.
- 4:47–4:51एक ता गाउ कतिको तरहे काजकर सकाई तची.
- 4:51–4:55इए उद्गमक गाँ भाँ सकाईतची, विवाहक गन्तव्यब्वाँ सकाईतची,
- 4:55–4:59मात्री लिंक भाँ सकाईतची, विद्वताक केंद्र भाँ सकाईतची,
- 4:59–5:04या फिर कोनो रियासत या प्रतिष्टाक स्थान्से हो भाँ सकाईतची.
- 5:04–5:09गाँ एही समाजिक मान छित्रन में एक ताई टाईनामिक कोडनेड थिक,
- 5:09–5:14जे केवल स्थान नहीं, बलकी वोही परिवारक पुरा समाजिक यात्रा दिखावे तची.
- 5:14–5:19आब हम्रा लोकनी अंतिम खन्डमे प्रवेश करे ची, समय आ उपादिक ट्रैकिं.
- 5:19–5:27इते हम्रा लोकनी देखबजे पनजी कोड में समय आर समाजिक गतिषील ता कोना स्ताई रूप सा भेख काईल गल अच्छे.
- 5:27–5:31इटाईमलैन प्रमानित करे तची के पनजी एक ता जीविद दस्ता वेज अच्छे.
- 5:31–5:34अहां के एता है प्राचीन संस्क्रिट सुत्रक थीग बगल में अदूनिक दोक्तर या प्रफेशर लिखल बहेत सकेता ची, गजब का बात अची ने,
- 5:34–5:37इविशिस्त उपादि सब देख हूँ जे एही बात की सिद्ध करेता ची,
- 5:37–5:39आरमबिक आजूनिक कालक रियासा तक पहचान
- 5:39–5:44आफेर एक दम 2009 इस वीक आजूनिक प्रफ्ष्टनल मरकर दरी
- 5:44–5:47इस सब बिना वन्शावलिक सिक्डी तोडे एक साद्दर्ज अची
- 5:47–5:51आहां के एताए प्राछीन संस्क्रिच सुत्रक थीग बगल में
- 5:51–5:55आदूनिक, दोक्तर या प्रुफेसर लिखल बहत सकेता ची, गजब का बात अची ने.
- 5:56–5:59इविशिस्त उपादी सब दिखू, जे एही बात की सिद्ध करेता ची,
- 5:59–6:03पन्दित, वेदिक, वएया करन, ताकूर या राजा,
- 6:03–6:06आईतियदर के आदूनिक दोक्तर, प्रुफेसर आ आमे से हो,
- 6:06–6:09इं मितलाक विविद सामाजिक ताना बाना के दिखावेत अची.
- 6:09–6:12इते ये सबसे महत्वोपून बाति आची,
- 6:12–6:18जि विद्वता आप प्रतिष्टा, वन्शावली कुनक्रिष्टाक संख संख एक दम सहज्टा से याट्र करीचन.
- 6:18–6:24के बा कर दि, जि एके एगल जनम कर लिकोडनी, बलकी योगिता असमाजिक पहचानक से हो पुक्ता लिकोड अची.
- 6:24–6:30तएही सब में सब से बेसी आश्चर्ज में डालवलाजे संख्या आची से आची पन्द्रासो.
- 6:30–6:37इपन्द्रासो वर्षक निरन्तर आपस में जुडल मानव, देटाक, आश्चर या जनक विस्तार आचे,
- 6:37–6:41जेक्रा एही वन्शावली प्रनाली सब्हलता पूर्वक सुरक्षित राख्ध्यल,
- 6:41–6:45सद्यों कुत्टल पूतल, यूद्धार परिवर्तनत बावजुद,
- 6:45–6:47इसमबंदक श्रिंख्ला कक्नो नहीं तुटल.
- 6:47–6:50सच कहूँ तए इई आपने आप में,
- 6:50–6:52इक ता बहुत पैग मानव उपलब्दी थेक.
- 6:53–6:55इचर्चा समाप्त कर्वासे पहले
- 6:55–6:58इक ता बहुत विचारनीय प्रश्नच चोड जा रहे लखषी.
- 6:58–6:59जए आए कोनु परिवारक
- 7:00–7:02पंद्रासो वरषकर जीनोम माप का यल जाए
- 7:02–7:05तई कोन-कोन समबन्धक उजागर करत.
- 7:05–7:10इई हम्रा लोक्निके एही अतिहासिक नेट्वर के विशाल्ता के बुज्बाकलिल प्रेरिद करे तची.
- 7:10–7:12आब अपने लोक्नि निश्छत्रूप से इज्सुचे देब,
- 7:12–7:19जे हमर लोकनेक वर्तमान पहचान के पाचा कतेक विशाल और अद्रिश्य इतिहास जुडलगची.
- 7:19–7:26कियाग आची नहीं एक ता एहन विशे जे अपन जडेक विशे में आर भेसी जन्बाक लेल उद्सुक बनादी तची.
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नमसकार! आओ, आई हमरा लोकनी, एहे खास चर्चामे, एक ता अच्रच में डाले वाला विष्यपर गपकरी मित्हिलाक पंजी. बुज्बतर, ये एक ता बहुत प्राचीन आ एक दम कमप्रस्ट सबथा की जीनोम थेक. जखन, कम्पुटरे काविष्कार गब्पो ने चलने, ताही से शताब भीो पहले मानव सम्बन्धक एते जटिल नेट्वर्क के माप कयल गे जल. इकोनो सादारन पोथी वदस्तावेज नहीं अचे, अब एते एक ता बहुत पहेग प्रष्न उठाईताची आखिर पंद्रा सो वर्ष्छ दरिक मानव सम्मद्खे कोना माप कायल जासके तची जर अच चोचो चार सो पचास इस्वी से लोकर एक दम 2009 इस्वी दरिक प्राचीन भारतिय वन्शावलिक लिक्वाड अच्छास इस्वी से लोक्व एक दूहाजा नाँ इस्वी दरिक प्राचीन भारती एवन्शावलिक लिकोड इक ना चोट मोट काज नहीं आची एक ता एहन प्रनाली जी एट्टेक पएग समएदरी अनवरत मानव देटा की सुरक्षित रक्षित रक्टगगे सुईन का कनी आश्चर्यो है तच्छिने, इता एक दम कलपना से बहरिग बात लागगी तच्छि. एक तब बहुत सुन्दर बात कैल गे लगछी मूल स्द्रोत मैं. मित्छिलाक पंजी मात्र नामक कोनो सुची नहीं आच्छ. इव वन्शावलिक रूप में विवस्तिट स्म्रती थेक मतलप इदूरी लागल पन्ना पर लिखल किछ नाम भर नहीएज इत भुगोल, गत बन्धन, विवाज, असमाजिक इतिहासक एक ता साँस लैत तखर बात भुजब जे एई उप्तिप की थेक फेर वन्शावली कोड की दिकोड करव, गाम का महत्व के देखव आ अंद में समय आ उपादिक ट्रकिं करव. आव, बिना समय गवाँने आगु बड़ी. हम्रा लोक गेक पहल खन्द अछी, सब़्दाक जीनोम. अब दोनो द्रिष्टे कोनक तुलना पध्यान दे आदूनेक वन्शावली या फामली त्री के देखबा तो उस्सीदा होगे तची पित्र सथात्मक अ उपर सन नीचा आबे तची. अप दोनो द्रिष्टे कोनक तुलना पद्यान दे अदूनिक वन्शावली या फामली त्री के देखभा तो उस्सीथा होई तची पित्र सथात्मक अ उपर सन नीचा आबे तची मुदा दोसर देस, मित्लाक पनजी के देख हो तो उसीदा होई तची, पित्र सथात्मक अ उपर सन नीचा आबे तची. मुदा दोसर देस मिठलाक पनजी के देखो, एक तप पूरा निट्वक जे का अचे, आपस में जुडल, मात्र पित्र दुनु पक्ष्ष्ष्ष, अब होगोलिक सहो. ये केवल बाप सब एता दरिक सीथा लकीर नहीं अच्छी, यिस समबन्द किक्ता बूनल्गेल विशाल जाल थिक, जते विवाह आ गामक दिशा से हो पुरा बारी की सदरज रहेत अच्छी. अब आओ दोसर खंग दिस जदै य हम्रा लोकनी आही पुरा सिस्तमक मास्तर की के खोजब य उप्तीप आखिर अचे की तब वूज्व यते सबसे महप्वोपुरन बात इचे जे उप्तीप मात्र कुनो पन्नक नीचा देल फुटनोट नहीं आज एक दम नहीं ये ये ता सहायक ख्रोस्लिंट वन्शावली रिकोडच जे नाम, शाखा, आगाम के भीच एक ता पुलक काज करेताच. एक रा आप, समबंत के यी प्राचीन अंट्रनेट लिल एक ता अक्तेव नविगेशनल दिवाईज बूजी सकेच्छी. जए इई उप्टिप नहीं ते इविशाल नेट्वर मात्र किषो अलगलग पन्ना बनी करे जाएत. तीखची ता एस सा हम्रा लोकनी अबेची तेसर कहन्द पर, वन्शावलीक कोड के क्रक करव. पन्जी में वन्शावली कपन एक ता बहुत सदहन वयकरन होई ता ची मातर एक ता पाती में किचु विशेश प्रतिक कमाद्ध्यम सा कते को अनुच्छेद मैं अर्थ समेटल रहे ता ची तनी ये मेट्रिक्स के बूजू, सुत्, जे बेटा यो बेटीक लिंक बतावे तची, और दिशा बदले तची. सा, जे गामग भीज समबंदख पूल बन वे तची, अपर शब्द चे तावनी देता जे, ये एते सा एक ता और समानन्तर शाखा जुडल आची. अर दोहित्र, मतलप मात्री पुत्र, यहने बेटीग बेटा इदोहित्र जहन शब्दक उपस्तिती एक दम स्पष्ट करेता जे मात्री लिंक एह नेट्वोक में कते एक महत्वपून अचल इसाख्शात समयक पूल्त काज करे चल. एक यक सगन पाथ में बिना भटकेल रस्ता कोना भितत, ताहिलेल श्रोट समगरी में इपाच चरनेक कोट ब्रेकर विधि दिल गेल अची. एक, गाओ या शिर्षकेक पहचान करो. दूई, पहल वक्तिके खोजो. 3. सम्बन्दक शब्द के छिन्हित करो 4. गाँवक लिंक के मैप करो 5. उपादी या संदर्भ नम्बर के सुरक्षित रखो ये एक ता एहन अचुक तरीका ची जक्रा सा कोनो व्यकती इही गंगोर जंगलजका वन्शावली में कखनो ने बद्की सके चे आब भूगोल देश्छलेच्छी हमरे लोकनिकर चोथरिम्क्हन्द में गाँ समबन्दक आदार के रूप मैं पंजी में गाँक नाम मात्र कुनो भोतिक पता नहीं आची इस सम्रतिक बहुत पैग संच्नरष्ना थेख पन्जी वस्तुता एक ता नक्षात्धिक, जे समबन थक रेखा किचाईता ची. सरिसब या पहीटोल जहन गाँक नाम, वन्शावली रिकोड के एक जगद हरी रक्बाक लेल आंकर के काजकराईता ची. आई बहुत ज़रूरी आची के एक रासे एके नामक दूई भिन्न वेक्तिक भीचक अंतर से हो सबष्ट होई ताची. बिना गाउक यवन्शावली केवल नामक भद्काउ बनी जाएत. एक ता गाउ कतिको तरहे काजकर सकाई तची. इए उद्गमक गाँ भाँ सकाईतची, विवाहक गन्तव्यब्वाँ सकाईतची, मात्री लिंक भाँ सकाईतची, विद्वताक केंद्र भाँ सकाईतची, या फिर कोनो रियासत या प्रतिष्टाक स्थान्से हो भाँ सकाईतची. गाँ एही समाजिक मान छित्रन में एक ताई टाईनामिक कोडनेड थिक, जे केवल स्थान नहीं, बलकी वोही परिवारक पुरा समाजिक यात्रा दिखावे तची. आब हम्रा लोकनी अंतिम खन्डमे प्रवेश करे ची, समय आ उपादिक ट्रैकिं. इते हम्रा लोकनी देखबजे पनजी कोड में समय आर समाजिक गतिषील ता कोना स्ताई रूप सा भेख काईल गल अच्छे. इटाईमलैन प्रमानित करे तची के पनजी एक ता जीविद दस्ता वेज अच्छे. अहां के एता है प्राचीन संस्क्रिट सुत्रक थीग बगल में अदूनिक दोक्तर या प्रफेशर लिखल बहेत सकेता ची, गजब का बात अची ने, इविशिस्त उपादि सब देख हूँ जे एही बात की सिद्ध करेता ची, आरमबिक आजूनिक कालक रियासा तक पहचान आफेर एक दम 2009 इस वीक आजूनिक प्रफ्ष्टनल मरकर दरी इस सब बिना वन्शावलिक सिक्डी तोडे एक साद्दर्ज अची आहां के एताए प्राछीन संस्क्रिच सुत्रक थीग बगल में आदूनिक, दोक्तर या प्रुफेसर लिखल बहत सकेता ची, गजब का बात अची ने. इविशिस्त उपादी सब दिखू, जे एही बात की सिद्ध करेता ची, पन्दित, वेदिक, वएया करन, ताकूर या राजा, आईतियदर के आदूनिक दोक्तर, प्रुफेसर आ आमे से हो, इं मितलाक विविद सामाजिक ताना बाना के दिखावेत अची. इते ये सबसे महत्वोपून बाति आची, जि विद्वता आप प्रतिष्टा, वन्शावली कुनक्रिष्टाक संख संख एक दम सहज्टा से याट्र करीचन. के बा कर दि, जि एके एगल जनम कर लिकोडनी, बलकी योगिता असमाजिक पहचानक से हो पुक्ता लिकोड अची. तएही सब में सब से बेसी आश्चर्ज में डालवलाजे संख्या आची से आची पन्द्रासो. इपन्द्रासो वर्षक निरन्तर आपस में जुडल मानव, देटाक, आश्चर या जनक विस्तार आचे, जेक्रा एही वन्शावली प्रनाली सब्हलता पूर्वक सुरक्षित राख्ध्यल, सद्यों कुत्टल पूतल, यूद्धार परिवर्तनत बावजुद, इसमबंदक श्रिंख्ला कक्नो नहीं तुटल. सच कहूँ तए इई आपने आप में, इक ता बहुत पैग मानव उपलब्दी थेक. इचर्चा समाप्त कर्वासे पहले इक ता बहुत विचारनीय प्रश्नच चोड जा रहे लखषी. जए आए कोनु परिवारक पंद्रासो वरषकर जीनोम माप का यल जाए तई कोन-कोन समबन्धक उजागर करत. इई हम्रा लोक्निके एही अतिहासिक नेट्वर के विशाल्ता के बुज्बाकलिल प्रेरिद करे तची. आब अपने लोक्नि निश्छत्रूप से इज्सुचे देब, जे हमर लोकनेक वर्तमान पहचान के पाचा कतेक विशाल और अद्रिश्य इतिहास जुडलगची. कियाग आची नहीं एक ता एहन विशे जे अपन जडेक विशे में आर भेसी जन्बाक लेल उद्सुक बनादी तची.