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मिथिला_पञ्जीक_वंशावली_आ_वैवाहिक_संजाल.m4a

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Part 2 · VIDEHA MITHILA MAITHILI DISCUSSION CRITICISM SERIES PART 2
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  1. 0:00–0:07आई हम्रा सब गजेंद्र ताकूर कर, दिकोडिंग दपनजी अप मिठिला कंद पाच कर समिक्षा कर रहल ची,
  2. 0:07–0:14जे मैथिल ब्रामनक वन्शावली अवेवाएक सन्जालक कर एकता विस्त्रित मार्ग दर्षिका आची.
  3. 0:14–0:18अप भिनागोनो विलम्बक सीदे पहल समिक्षा पर चले ची.
  4. 0:18–0:20आप एकदम शुरू करे.
  5. 0:20–0:25देखु पोथियक सन्रचनात्मक प्रवाज अप पहल दू अद्ध्याय दरी तम बहुत नी कची.
  6. 0:25–0:30मुदा तीस्र अद्याय से ये एक्ता नीरस देटा सुची जका बहाजाई तची.
  7. 0:30–0:37हा, न ये बहुत दिल्चस्प बात ची जहा एही दिश द्यान अक्रिष्ट के लो हूँ.
  8. 0:37–0:41मने जकन हम पहिल दू अद्याय पडी रहल चलूँ,
  9. 0:41–0:45ता हम्रा लागल, जे ये एक ता बहतरीन अकादमिक काज अची.
  10. 0:45–0:48बलकोल, उबहुत नीक सा लिखल गेल अची.
  11. 0:48–0:55आद्याए एक और दू में पंजी के दिकोड करबाक लेल जे नीम अस्थापित कैल गेल अची.
  12. 0:55–1:01जहीना आद्या अप्रासुत आवेवाविक सेतु करूप में महिलाक भूमिका
  13. 1:01–1:09एक दम सतीक, उसब इतनेक विस्पष्ट अची जे लगेद अची कोनो रहस्यमए लिपिक व्याकरन सीखिराल ची
  14. 1:09–1:15मुदा जेना हम्रा सब अद्याय तीन सा नाँ दरी पहुचेद ची
  15. 1:15–1:20इपोत्ही आपन उ मार्ग दर्षिकावला स्वरूप चोईद देताची
  16. 1:20–1:23उ आचानक सो केवल वन शावलिक शाखामान
  17. 1:23–1:27जे ना फुल सरा दोम तेकारी या गोडा गातक
  18. 1:27–1:31विस्त्रत आस सगन गद्ये सोची में बडल जाएताची
  19. 1:31–2:01आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ�
  20. 2:01–2:14जो लेखख प्रतेक वन्षच का नाम नालिकता तक यी समगरी समपूल नहीं बहाजाएत, आईन जो खिम्त अची जे देटा कम के लासा एकर अइ तिहासिक महत्वगड़ी जाएत.
  21. 2:14–2:21आहाक यी तर्क एक दम सतिक है आहाम कतो सई नहीं कही रहल चीजी लेखख देटा के हता दे थी
  22. 2:21–2:25अई तिहासिक सत्तिता समजोता नहीं के लिए जासकत अची
  23. 2:25–2:27तफिर आहाक सुजाओ की आची
  24. 2:27–2:33हमर सुजाव इच्छे जे देटा सुची वला द्याय सब के पुनर सन्तूलित काईल जाए.
  25. 2:33–2:38मने सगन वन्शावलिक बीच-बीच मे विष्लेशनात्मक विराम दियोग,
  26. 2:38–2:43जताई पाथख के अद्याय एक कर नियमक मोन पारल जासके.
  27. 2:43–2:45विष्लेशनात्मक विराम?
  28. 2:45–2:47उद्याएक्ता तोस उदारन्सन भूजाएच्छी?
  29. 2:47–2:51अद्याए तीन में जक्शन बादित नहीं करत्ते नहीं अद्याएक्ता तोस उदारन्सन भूजाएच्छी?
  30. 2:51–2:55जोन लेखख बीज भीज में रूकी कर नियमक व्याख्या कर लागता?
  31. 2:55–3:00तिकि ओ वन्शावली इक स्वाभाविक प्रवाह के बादित नहीं करत?
  32. 3:00–3:03आँ एक दम हमर तात पर या उही सूचल.
  33. 3:03–3:07आई, दिको, इग लैए के बादित नहीं करत,
  34. 3:07–3:10बलकी इलए के एक्ता अर्थ देत
  35. 3:10–3:13आव एक्रा एक्ता तोस उदाहरन्सन भुज़ाएच्छी
  36. 3:13–3:18अद्याई तीन में जखन भईया का बारा विवाज का प्रसंग गबेत अची
  37. 3:18–3:20तवर्तमान में इख्यान आची
  38. 3:20–3:23इमात्र एक्ता सुची क्रूप में देल गाल आची
  39. 3:23–3:24बल्कुल!
  40. 3:24–3:26इजे बाराता विवाह भ्यल
  41. 3:26–3:29एक्रा केवल नाम अगामक सुचीक रूप में पड़ब
  42. 3:29–3:31पाथखलेल थखागेवेवला ची
  43. 3:31–4:01मुदा के हां कल्पना का सकत்च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्�
  44. 4:01–4:06अते लेखा की दिखा सकच्छति, जे कोना अप्रा नियमक उप्योग सा?
  45. 4:06–4:11आप, यी बारहता बिवाह अलग-लग वैवाईक सन्जाल बने लग.
  46. 4:11–4:15एक दम जखन आहा यी बारा बिवाहक विष्लेषन करे ची,
  47. 4:15–4:18ता आहा पाथख के यी भुजा रहल ची,
  48. 4:18–4:21पहिल्दू अद्याय में जे नीम आहा पड़ाला
  49. 4:21–4:24उ वास्तविक जीवन में कोना गठिद बहे रहाल चल.
  50. 4:24–4:26येक तक गजब कविचार अची
  51. 4:26–4:30आए एक रेक ता और उदारन हमरा अद्याय आट्समोना भी रहाल अची.
  52. 4:30–4:31कहो कहो
  53. 4:31–5:01बनेली दियोडी आर राय उपादिवला शाक्ठ, जना राय जेहत सिंख से राय पच्कोडी दरीक जिक रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रह
  54. 5:01–5:05इसा पोथिक जे मुल उदेश्य अचे दिकोडिं उजिवन्त भाओ उद्धध
  55. 5:05–5:16तज़ा लेक्ख एता ए रूक क एविश्लेश नात्मक विराम दे थी, तज़ा एखशन पाथक लेल वास्तविक मार्ग दर्षी का बनल रहत.
  56. 5:16–5:23इसब मात्र किचु समबज़ उपाया ची जखर प्रयोग साँ एखशन आरो रोचक बहसके चे.
  57. 5:23–5:53आप आप आप आप आप आप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अ�
  58. 5:53–5:59तो आप देखाब देखाब जाव जे माद्ध्यम आहा चुने रहल ची उईमे से हो एक ता अन्तर नहीद सीमा आचे.
  59. 6:00–6:02आहा एक दम सही दिशा में सोची रहल ची.
  60. 6:03–6:05और यहमर दोसर समिक्षाक बिन्दू आची.
  61. 6:05–6:15पात्द्खक्लेल एत्टेक जटिल वन्शावली और वैवाएक नेट्वर्क्के बिना कुनु द्रिष्या या ग्राफिकल चार्टक समज़ब अत्यंत कतिन अच्छे.
  62. 6:16–6:19रहा, इस समगरिक एक ता बहुत पयग कमजोरी अच्छी.
  63. 6:19–6:27अद्याय एक अन्त में लेक्खष्वैम का एच्छतिन, जे पन्जी के सुची करूप में नहीं, बलकी नक्षा करूप में पडूए.
  64. 6:28–6:31इबहुत सजीव अ सुद्दर शब्दावली अच्छी नहीं?
  65. 6:31–6:36बिल्ल्कुल, मुदा विदम्मनाई अची जे पुरा पोती केवल गद्दे में लिखाल अची.
  66. 6:37–6:43जखन आहा स्वैम कही रहुल ची जे एक रा नक्षा जका पडु, तब पोती में कोनो नक्षा के नहीं अची.
  67. 6:44–6:46इएक तपएइग बिरोद़ा बहास अची.
  68. 6:46–7:00मुदा की समबव नहीं जे लेखखक नक्षा सताधपरय एक ता मानसिक नक्षा सहुए कि विद्वान पाथक एतेक सगन पाथके पडीका अपन मस्तिषक में उही संजालक निरमान नहीं कसकेच छतिन?
  69. 7:00–7:10अद्दर्क ब्यवावारिक द्रिष्टिकोंचन नीक लागी सकई च्ये, मुदा मानो मस्तिष्क का संज्यान का एक ता सीमा हुई तच्ये.
  70. 7:10–7:15अदा आची, हजारो नामक मान्सिक चाट बनाया बडग कतिन आचे.
  71. 7:15–7:30विद्वान पात्खक लेल से हो चतुरानन कव वन्षज जे अद्ध्याय सात में अची या हरिश्वर भेद्धिनात लाईन्सन सगन नोट्स के केवर शब्द कमाद्यम समुन राखव असमभव अची.
  72. 7:30–7:37जखन आहा गद्यमे 10 ता गाम अ 25 ता वन्षच का नाम एक संगे पड़ित ची,
  73. 7:37–7:42तम वस्तिष्क वोग्रा एक ता नेट्वर कक रूप में प्रोसेस नहीं कपबेट ची.
  74. 7:42–7:48सही बात! आहा एक पाती पडे ची, दो सर दरी जाएज जाएज पहल्वला संबद भिसरी जाएज ची.
  75. 7:48–7:50बलकुल!
  76. 7:50–7:55आह, इबात हम रा स्विकार करे परत, जे विज्वल लरनर कर द्रिष्टी कोन सा,
  77. 7:55–7:58इपात बडमात गूमा देवावाला चे.
  78. 7:58–8:04जे पात्ख संदपृर दिद होए कर कडी सब के जोडवाक प्रैयास कर हलज
  79. 8:04–8:07अक्रा लेल गद दे एक ता ब्वुल भुलया जका जे
  80. 8:07–8:09ता आहा कथ हो सुजाव की आची?
  81. 8:09–8:10हमर सुजाव आची
  82. 8:10–8:13जि लेखख आपनो नक्षावाला रूपक के
  83. 8:13–8:17वास्त्विक द्रिष्च्ट चाथ या नेट्वर ग्राफ में परिवर्तित कर थी
  84. 8:17–8:19माने चित्रक रूप में देखावती
  85. 8:19–8:23प्रतेग पैक गाम या मूल के हेटिंग अन्त में
  86. 8:23–8:27एक ता वन्शावली व्रिष्च या वैवाईग ग्राफ शामिल क्यल जाब अगचाई
  87. 8:27–8:32की, हमरा सब एक्रा पोथिक कोनो विषिष्ट हिस्सासा जोडी का देखी सकै ची.
  88. 8:32–8:37जते एक ता चित्र सच्मुच में हाजार सब्द काज कर सकै तची.
  89. 8:37–8:40निष्छित रूप से. अद्याय नाउ दिस देखो.
  90. 8:40–8:43बडगाम दरीहरा खंडक अन्तरगत
  91. 8:43–8:46जखन शुल पानेग विशाल पुत्र समूह
  92. 8:46–8:47खंडवला करमा
  93. 8:47–8:49और गंगोली दिस्विस्तार लेता ची
  94. 8:49–8:51ओते गद दिप़ब
  95. 8:51–8:54कोनो बूल भौलया में रस्ता खुजबार आगा ची
  96. 8:54–8:55इग्दम
  97. 8:55–8:59जा उक्रा एक ता निट्वोक डायग्राम का माद्धिम से दिख्हाल जाए,
  98. 8:59–9:01तब आप थक एक जटके में भूजी जाएत,
  99. 9:01–9:06जे के कर विवाह कते भेल और कताईसा नव शाक्वाक निरमान भेल.
  100. 9:06–9:10उते आहा देखव, जे महिला सब जे पुल का काजकाए रहल चतीन,
  101. 9:10–9:12उ ग्राफ में इक्दम सजीव भवोड़त.
  102. 9:12–9:19आ, जानी रहल ची एकर ले लेखख के कोनो नव आविषकार करबाग आविष्षकता नहीं आची.
  103. 9:19–9:23अद्याए दू में, हलायुद कषाक्हाक लेल,
  104. 9:23–9:26जे एक्टा प्रारंभिक लेखाचित्र देल गेल आची,
  105. 9:26–9:29उग्त बहुत नीक आरंभिक प्रयास अची
  106. 9:29–9:30आव उबहुत नीक अची
  107. 9:30–9:32चार्ट नीच जोडल जासकत अची
  108. 9:32–9:34इप मात्र एक ता उपाय अची
  109. 9:34–9:37मुदा एहे से पाथक क बहुत लाब हैत
  110. 9:37–9:42विज्वौल चार्ट सं देटा क जतिलता इस पष्टता में बड़िली जाए ची
  111. 9:42–9:57इक्डम सतीक, आजाहन इस पश्ट भधय जाई तखी, जे देटाके चित्र कम आद्ध्यम सदेक्ःएब आवश्षक अची, तकन आहाक ध्यान उही देटाक भेटर, जे विषिष्ट नवींत चूपल आची ताही पर से हो जाई तखी.
  112. 9:57–10:01आहा आदूनिक उपादी सबक प्रवेज दिस इशारा कर रहे लचीने
  113. 10:01–10:05आहा आही हमर तेसर समिक्षाक मुख्यबिन्दू अची
  114. 10:05–10:09आदूनिक पेशा आउपादिक समावेशक्त उलेक्त अची
  115. 10:09–10:16अद्याय चार पाच अच्ये में लेक्हक बहुत इस पश्थता सदेखेने चतीन जे पनजी विवस्ता आदूलिक युग में से हो प्रासंगेग ग्रहल
  116. 10:16–10:21भी आ, आम आ, आम ले, रेलवे करमचारी या बांक मैनेजर सन उपादी पारमपर एक पनजी में दर्ज अच्छी
  117. 10:21–10:25बवड़्या करन अ आदहुनिक कालक फिजिक्स का प्यज्टी एक संगे पंजी में दर जची.
  118. 10:26–10:27बलकुल.
  119. 10:28–10:32मुदा आहा पोती मात्र ए बताओ करूकी जाएत अजी,
  120. 10:32–10:36या बांक मैनेजर सन उपादी पारमपर एक पनजी में दरज अची
  121. 10:36–10:38इदेखव अदबुट अची
  122. 10:38–10:40जे प्राषीन कालक वैया करन
  123. 10:40–10:43और आदहूनिक कालक फिजिकस का प्यज्टी
  124. 10:43–10:45एक संगे पनजी में दरज अची
  125. 10:45–10:46बलकु
  126. 10:46–10:48मुदा आहा पोती मात्र
  127. 10:48–10:52ये बताओ करुकी जायतची जे यी निरन्तरता ची
  128. 10:53–10:56यी समगरी एह बात टक विष्लेशन नहीं करे टची
  129. 10:56–11:00जे यी आदूनिक उपादी सब वैवाहिक निरने के कोन प्रभावित केलक
  130. 11:01–11:04मुदा एते हम एक ता प्रश्न उठावे चाहब
  131. 11:04–11:12की पन्जिकार काज्मात्र तत्थ्या दर्ज करव नहीं चल की ओई समास सास्त्री चला जे समाजिक प्रभावक विष्लेशन करता?
  132. 11:12–11:14आग, कप्रश्नवाजी बची.
  133. 11:14–11:17आजा आप पन्जिकार एई विष्लेशन नहीं केलखेन,
  134. 11:17–11:22तकी प्रस्तुथ समग्रिक लेखख के एह अतिहासिक सीमा से बहार जाकग,
  135. 11:22–11:24एकर समास सास्त्री ये विष्लिशन करवाख चाही,
  136. 11:24–11:29की यी हुंका अपन अदिकार क्षेत्र से बहार जेवाग गप नहीं बज़ाएत?
  137. 11:29–11:31ये एक तबहुत नेक प्रष्ना ची,
  138. 11:31–11:37मुदा हम्रा एी नहीं भूलबाक चाही जे इपोती दीकोडिं का गब करेत अची
  139. 11:37–11:43दीकोड करबाक अची उही नियम के भुजब जे परदाक पाचा काज कर रहे अची
  140. 11:43–11:46माने जे चूपाल अची उक्रा सोजा लाओब
  141. 11:46–12:05अग, जखन कोनो पनजिकार एक ता मलेक उपादी दरज करत अची, तो केवल एक ता तत्ठने दरज कर रहलची, उसमाज में सत्ताक रस्तान्त्रन के दरज कर रहलची. प्राचीन काल में सत्ता विध्वता में चल, ताहिल वया करन महत्पूं चल.
  142. 12:05–12:09आदूनिक काल में सत्ता राजनेतिक आ आर्थिक अची
  143. 12:09–12:10एक दम
  144. 12:10–12:15तक टकी इ नव उपादी सब पारमपरे क विद्वानक हाथ सथता खषकी
  145. 12:15–12:21का आदूनिक नोकर शाहक या राजनेताक हाथ में जिबाक संकेत नहीं अची
  146. 12:21–12:23आखा के गप में गेराई अची
  147. 12:23–12:27इसाख्श एक्ता दूसर निस्कर्ष दिस इशारा करहल अची
  148. 12:27–12:30जे विवाहक जे पारम्पल एक मापदन्द चल
  149. 12:30–12:33उ आदूनिक शिक्षा आप पेशा से तक्रा रहे लचिल.
  150. 12:33–12:38तदनूरुप, हमर सुजाव अची जे एक्ता नव विशाएगत क्शन्द जोडल जाए
  151. 12:38–12:49जत आई एही बातक विष्लेशन होई जे पारमपर एक गोत्र या मूल कन्नीम आ आदूनेक समाजेक आर्थिक इस्तितिक भीच कोना समजस्से या संगर्ष भेल
  152. 12:49–12:59जे हमेक्रा पोथिक उदाहरन सदेकी, तद्याय छे में बाल क्रष्न के भिहार भिदान सबाक का सेवानिव्रत सदस्से करुप में दर्ज केल गेल अच्छी.
  153. 12:59–13:03समागरी के एही बात पर प्रकाष डालबाक चाही,
  154. 13:03–13:07जे की एहन राजनेतिक उपादी प्राप्त भिलाग बाद
  155. 13:07–13:11उही शाखाक वैवाहिक स्थिती में कोनो परिवर्तन आयल?
  156. 13:11–13:11बलकल
  157. 13:11–13:16की हिनकर संजाल, उही पारमपरिक शाखा सबहिन भोगल खेल
  158. 13:16–13:18जे केवल करम कान्द में लागल चल
  159. 13:18–13:24एक ता विद़्ायकक वैवाईक सन्जाल, की एक ता सामान्ने पूरोहितक क सन्जाल सा �alag nahi hai th.
  160. 13:24–13:28एक दाम आ एक ता और गजब कतुलना अद्धाय पाच मे आची.
  161. 13:28–13:34उतया रास्ट पती पूरसकार प्राप्त हेट मास्तर या अगन इंजिन्यर का उलेक है ची.
  162. 13:34–13:35अ, हा!
  163. 13:35–13:40जखन एकर तुन्नाप प्राषीन महाम वह पाद्धिया एस खेल जाईत छी,
  164. 13:40–13:44तब पन्जी कार सब एही आदूनिक उपादी के कत्टिक महत्तो देछ चला,
  165. 13:44–13:47कि यी नव उपादी वाला परिवार सब,
  166. 13:47–13:49विवाहक बजार में अदिक महत्तो पावे लागल चला.
  167. 13:49–13:52इएक्ता बहुत प्रास्ँंगिक प्रश्नाची
  168. 13:52–13:57एक्कर एक्ता संछिप्त तुलनात्मक विस्लेशन समाद्री के बहुत उचास्तर पर लगजाएत
  169. 13:57–13:59इगेवल देटा नहीं आची
  170. 13:59–14:03इप प्मिधलाग बदलगद समाजिक संजचनाक जिवंट प्रमान आची
  171. 14:03–14:10इविश्लेशन के गेराई पाथक के इबुजबामे मदद करत जे आदिर इज़वबख़क अर्थ की अची
  172. 14:10–14:13मात्र तत्यक प्रस्तुती सा अगाबड़ी का
  173. 14:13–14:16तत्यक प्रभाव पर बात करव एही पोठी के
  174. 14:16–14:21इकta मारक दर्षिका सा इकta उत्क्रिष्ट अटियासिक द्रोहर मैं बदली देत.
  175. 14:21–14:22सत्थीक कहलूं.
  176. 14:22–14:28ता एही समिक्षा का मुख्य बिन्दूं और जे तो सुजाओ सब हम्रा सब एते राखलूं
  177. 14:28–14:31उकर संख्षेप एही प्रकार अची.
  178. 14:31–14:37पहल, सगन देटावला अद्धाय में विष्लेशनात्मक विराम शामिल केल जाए,
  179. 14:37–14:44जटे पात्ख नियमक अब्यास कर सकती, जैन हा भईया का बारा विवा के एक ता के स्ट़ी बनाओ.
  180. 14:44–14:46रही, यी बहुत जरुरी आची.
  181. 14:46–14:58तो सर गद्यका स्थान पर नक्षा वन्शावली विरिच्ष आवेवाएक नेवक चाटक द्रिष उप्योख केल जाए सा शूल पानी सन जटल नेवक पाथख के अस्पष्ट रूपेन भुजाए.
  182. 14:58–14:59एक दम.
  183. 14:59–15:13और तेसर पन्जी में आद्धनिक उपादी जैना भी आ, आमले कप्रवेश्सव, समाज आवेवाएक सत्तापर जे वास्तविक प्रभाव पडल तकर गह्राई समष्लेषन कर बालेल एक तनव विषेगत कहन्ध जोडल जाए.
  184. 15:13–15:18इसब सुजाो समागरिक मुल आत्माके बदलवाख लेल ने,
  185. 15:18–15:22बलकी उक्रा आरो सुलभ अप्रभाउशाली बनवाख लेल आची.
  186. 15:22–15:25हम स्रोता जे इस समागरि लिख्लक आची,
  187. 15:25–15:28रिएनका उट्साह पुरवक आमन्त्रित कर आची,
  188. 15:28–15:35जे उ आपन काज मे इज़़प परे मारजन कर के पुना एही कारेक्रम मे समिक्षा लिल पतावती.
  189. 15:35–15:42आहाक देटा संग्रा भेजोड आची, बस उक्रा प्रस्तुत कर बाक तरीका मे एही नवद्द्रिष्ति कोनक आवशकता आची.
  190. 15:42–15:56बेल्कुल, जखन इविष्लेशनात्मक विराम्द्रिश्य, चाट, आदूनिक्ता के गेराईसविष्लेशन एही पोठी मिजुडी जाएत, तकन इशच्मुच मे उनक्षा बनी जाएत, जखर इवादा करे तची.
  191. 15:56–16:04एक ता एहन नक्षा जे ने केवल अतीत के सुरक्षित रख्च्छी बलकी वर्तमानक बदलेच सथा के से हो मापपए तची.
  192. 16:04–16:08आए दھरी एतबस सुन्बाकले बहुत भहुत दन्वाद.

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आई हम्रा सब गजेंद्र ताकूर कर, दिकोडिंग दपनजी अप मिठिला कंद पाच कर समिक्षा कर रहल ची, जे मैथिल ब्रामनक वन्शावली अवेवाएक सन्जालक कर एकता विस्त्रित मार्ग दर्षिका आची. अप भिनागोनो विलम्बक सीदे पहल समिक्षा पर चले ची. आप एकदम शुरू करे. देखु पोथियक सन्रचनात्मक प्रवाज अप पहल दू अद्ध्याय दरी तम बहुत नी कची. मुदा तीस्र अद्याय से ये एक्ता नीरस देटा सुची जका बहाजाई तची. हा, न ये बहुत दिल्चस्प बात ची जहा एही दिश द्यान अक्रिष्ट के लो हूँ. मने जकन हम पहिल दू अद्याय पडी रहल चलूँ, ता हम्रा लागल, जे ये एक ता बहतरीन अकादमिक काज अची. बलकोल, उबहुत नीक सा लिखल गेल अची. आद्याए एक और दू में पंजी के दिकोड करबाक लेल जे नीम अस्थापित कैल गेल अची. जहीना आद्या अप्रासुत आवेवाविक सेतु करूप में महिलाक भूमिका एक दम सतीक, उसब इतनेक विस्पष्ट अची जे लगेद अची कोनो रहस्यमए लिपिक व्याकरन सीखिराल ची मुदा जेना हम्रा सब अद्याय तीन सा नाँ दरी पहुचेद ची इपोत्ही आपन उ मार्ग दर्षिकावला स्वरूप चोईद देताची उ आचानक सो केवल वन शावलिक शाखामान जे ना फुल सरा दोम तेकारी या गोडा गातक विस्त्रत आस सगन गद्ये सोची में बडल जाएताची आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आप आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� आ� जो लेखख प्रतेक वन्षच का नाम नालिकता तक यी समगरी समपूल नहीं बहाजाएत, आईन जो खिम्त अची जे देटा कम के लासा एकर अइ तिहासिक महत्वगड़ी जाएत. आहाक यी तर्क एक दम सतिक है आहाम कतो सई नहीं कही रहल चीजी लेखख देटा के हता दे थी अई तिहासिक सत्तिता समजोता नहीं के लिए जासकत अची तफिर आहाक सुजाओ की आची हमर सुजाव इच्छे जे देटा सुची वला द्याय सब के पुनर सन्तूलित काईल जाए. मने सगन वन्शावलिक बीच-बीच मे विष्लेशनात्मक विराम दियोग, जताई पाथख के अद्याय एक कर नियमक मोन पारल जासके. विष्लेशनात्मक विराम? उद्याएक्ता तोस उदारन्सन भूजाएच्छी? अद्याए तीन में जक्शन बादित नहीं करत्ते नहीं अद्याएक्ता तोस उदारन्सन भूजाएच्छी? जोन लेखख बीज भीज में रूकी कर नियमक व्याख्या कर लागता? तिकि ओ वन्शावली इक स्वाभाविक प्रवाह के बादित नहीं करत? आँ एक दम हमर तात पर या उही सूचल. आई, दिको, इग लैए के बादित नहीं करत, बलकी इलए के एक्ता अर्थ देत आव एक्रा एक्ता तोस उदाहरन्सन भुज़ाएच्छी अद्याई तीन में जखन भईया का बारा विवाज का प्रसंग गबेत अची तवर्तमान में इख्यान आची इमात्र एक्ता सुची क्रूप में देल गाल आची बल्कुल! इजे बाराता विवाह भ्यल एक्रा केवल नाम अगामक सुचीक रूप में पड़ब पाथखलेल थखागेवेवला ची मुदा के हां कल्पना का सकत்च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्च्� अते लेखा की दिखा सकच्छति, जे कोना अप्रा नियमक उप्योग सा? आप, यी बारहता बिवाह अलग-लग वैवाईक सन्जाल बने लग. एक दम जखन आहा यी बारा बिवाहक विष्लेषन करे ची, ता आहा पाथख के यी भुजा रहल ची, पहिल्दू अद्याय में जे नीम आहा पड़ाला उ वास्तविक जीवन में कोना गठिद बहे रहाल चल. येक तक गजब कविचार अची आए एक रेक ता और उदारन हमरा अद्याय आट्समोना भी रहाल अची. कहो कहो बनेली दियोडी आर राय उपादिवला शाक्ठ, जना राय जेहत सिंख से राय पच्कोडी दरीक जिक रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रहे रह इसा पोथिक जे मुल उदेश्य अचे दिकोडिं उजिवन्त भाओ उद्धध तज़ा लेक्ख एता ए रूक क एविश्लेश नात्मक विराम दे थी, तज़ा एखशन पाथक लेल वास्तविक मार्ग दर्षी का बनल रहत. इसब मात्र किचु समबज़ उपाया ची जखर प्रयोग साँ एखशन आरो रोचक बहसके चे. आप आप आप आप आप आप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अप अ� तो आप देखाब देखाब जाव जे माद्ध्यम आहा चुने रहल ची उईमे से हो एक ता अन्तर नहीद सीमा आचे. आहा एक दम सही दिशा में सोची रहल ची. और यहमर दोसर समिक्षाक बिन्दू आची. पात्द्खक्लेल एत्टेक जटिल वन्शावली और वैवाएक नेट्वर्क्के बिना कुनु द्रिष्या या ग्राफिकल चार्टक समज़ब अत्यंत कतिन अच्छे. रहा, इस समगरिक एक ता बहुत पयग कमजोरी अच्छी. अद्याय एक अन्त में लेक्खष्वैम का एच्छतिन, जे पन्जी के सुची करूप में नहीं, बलकी नक्षा करूप में पडूए. इबहुत सजीव अ सुद्दर शब्दावली अच्छी नहीं? बिल्ल्कुल, मुदा विदम्मनाई अची जे पुरा पोती केवल गद्दे में लिखाल अची. जखन आहा स्वैम कही रहुल ची जे एक रा नक्षा जका पडु, तब पोती में कोनो नक्षा के नहीं अची. इएक तपएइग बिरोद़ा बहास अची. मुदा की समबव नहीं जे लेखखक नक्षा सताधपरय एक ता मानसिक नक्षा सहुए कि विद्वान पाथक एतेक सगन पाथके पडीका अपन मस्तिषक में उही संजालक निरमान नहीं कसकेच छतिन? अद्दर्क ब्यवावारिक द्रिष्टिकोंचन नीक लागी सकई च्ये, मुदा मानो मस्तिष्क का संज्यान का एक ता सीमा हुई तच्ये. अदा आची, हजारो नामक मान्सिक चाट बनाया बडग कतिन आचे. विद्वान पात्खक लेल से हो चतुरानन कव वन्षज जे अद्ध्याय सात में अची या हरिश्वर भेद्धिनात लाईन्सन सगन नोट्स के केवर शब्द कमाद्यम समुन राखव असमभव अची. जखन आहा गद्यमे 10 ता गाम अ 25 ता वन्षच का नाम एक संगे पड़ित ची, तम वस्तिष्क वोग्रा एक ता नेट्वर कक रूप में प्रोसेस नहीं कपबेट ची. सही बात! आहा एक पाती पडे ची, दो सर दरी जाएज जाएज पहल्वला संबद भिसरी जाएज ची. बलकुल! आह, इबात हम रा स्विकार करे परत, जे विज्वल लरनर कर द्रिष्टी कोन सा, इपात बडमात गूमा देवावाला चे. जे पात्ख संदपृर दिद होए कर कडी सब के जोडवाक प्रैयास कर हलज अक्रा लेल गद दे एक ता ब्वुल भुलया जका जे ता आहा कथ हो सुजाव की आची? हमर सुजाव आची जि लेखख आपनो नक्षावाला रूपक के वास्त्विक द्रिष्च्ट चाथ या नेट्वर ग्राफ में परिवर्तित कर थी माने चित्रक रूप में देखावती प्रतेग पैक गाम या मूल के हेटिंग अन्त में एक ता वन्शावली व्रिष्च या वैवाईग ग्राफ शामिल क्यल जाब अगचाई की, हमरा सब एक्रा पोथिक कोनो विषिष्ट हिस्सासा जोडी का देखी सकै ची. जते एक ता चित्र सच्मुच में हाजार सब्द काज कर सकै तची. निष्छित रूप से. अद्याय नाउ दिस देखो. बडगाम दरीहरा खंडक अन्तरगत जखन शुल पानेग विशाल पुत्र समूह खंडवला करमा और गंगोली दिस्विस्तार लेता ची ओते गद दिप़ब कोनो बूल भौलया में रस्ता खुजबार आगा ची इग्दम जा उक्रा एक ता निट्वोक डायग्राम का माद्धिम से दिख्हाल जाए, तब आप थक एक जटके में भूजी जाएत, जे के कर विवाह कते भेल और कताईसा नव शाक्वाक निरमान भेल. उते आहा देखव, जे महिला सब जे पुल का काजकाए रहल चतीन, उ ग्राफ में इक्दम सजीव भवोड़त. आ, जानी रहल ची एकर ले लेखख के कोनो नव आविषकार करबाग आविष्षकता नहीं आची. अद्याए दू में, हलायुद कषाक्हाक लेल, जे एक्टा प्रारंभिक लेखाचित्र देल गेल आची, उग्त बहुत नीक आरंभिक प्रयास अची आव उबहुत नीक अची चार्ट नीच जोडल जासकत अची इप मात्र एक ता उपाय अची मुदा एहे से पाथक क बहुत लाब हैत विज्वौल चार्ट सं देटा क जतिलता इस पष्टता में बड़िली जाए ची इक्डम सतीक, आजाहन इस पश्ट भधय जाई तखी, जे देटाके चित्र कम आद्ध्यम सदेक्ःएब आवश्षक अची, तकन आहाक ध्यान उही देटाक भेटर, जे विषिष्ट नवींत चूपल आची ताही पर से हो जाई तखी. आहा आदूनिक उपादी सबक प्रवेज दिस इशारा कर रहे लचीने आहा आही हमर तेसर समिक्षाक मुख्यबिन्दू अची आदूनिक पेशा आउपादिक समावेशक्त उलेक्त अची अद्याय चार पाच अच्ये में लेक्हक बहुत इस पश्थता सदेखेने चतीन जे पनजी विवस्ता आदूलिक युग में से हो प्रासंगेग ग्रहल भी आ, आम आ, आम ले, रेलवे करमचारी या बांक मैनेजर सन उपादी पारमपर एक पनजी में दर्ज अच्छी बवड़्या करन अ आदहुनिक कालक फिजिक्स का प्यज्टी एक संगे पंजी में दर जची. बलकुल. मुदा आहा पोती मात्र ए बताओ करूकी जाएत अजी, या बांक मैनेजर सन उपादी पारमपर एक पनजी में दरज अची इदेखव अदबुट अची जे प्राषीन कालक वैया करन और आदहूनिक कालक फिजिकस का प्यज्टी एक संगे पनजी में दरज अची बलकु मुदा आहा पोती मात्र ये बताओ करुकी जायतची जे यी निरन्तरता ची यी समगरी एह बात टक विष्लेशन नहीं करे टची जे यी आदूनिक उपादी सब वैवाहिक निरने के कोन प्रभावित केलक मुदा एते हम एक ता प्रश्न उठावे चाहब की पन्जिकार काज्मात्र तत्थ्या दर्ज करव नहीं चल की ओई समास सास्त्री चला जे समाजिक प्रभावक विष्लेशन करता? आग, कप्रश्नवाजी बची. आजा आप पन्जिकार एई विष्लेशन नहीं केलखेन, तकी प्रस्तुथ समग्रिक लेखख के एह अतिहासिक सीमा से बहार जाकग, एकर समास सास्त्री ये विष्लिशन करवाख चाही, की यी हुंका अपन अदिकार क्षेत्र से बहार जेवाग गप नहीं बज़ाएत? ये एक तबहुत नेक प्रष्ना ची, मुदा हम्रा एी नहीं भूलबाक चाही जे इपोती दीकोडिं का गब करेत अची दीकोड करबाक अची उही नियम के भुजब जे परदाक पाचा काज कर रहे अची माने जे चूपाल अची उक्रा सोजा लाओब अग, जखन कोनो पनजिकार एक ता मलेक उपादी दरज करत अची, तो केवल एक ता तत्ठने दरज कर रहलची, उसमाज में सत्ताक रस्तान्त्रन के दरज कर रहलची. प्राचीन काल में सत्ता विध्वता में चल, ताहिल वया करन महत्पूं चल. आदूनिक काल में सत्ता राजनेतिक आ आर्थिक अची एक दम तक टकी इ नव उपादी सब पारमपरे क विद्वानक हाथ सथता खषकी का आदूनिक नोकर शाहक या राजनेताक हाथ में जिबाक संकेत नहीं अची आखा के गप में गेराई अची इसाख्श एक्ता दूसर निस्कर्ष दिस इशारा करहल अची जे विवाहक जे पारम्पल एक मापदन्द चल उ आदूनिक शिक्षा आप पेशा से तक्रा रहे लचिल. तदनूरुप, हमर सुजाव अची जे एक्ता नव विशाएगत क्शन्द जोडल जाए जत आई एही बातक विष्लेशन होई जे पारमपर एक गोत्र या मूल कन्नीम आ आदूनेक समाजेक आर्थिक इस्तितिक भीच कोना समजस्से या संगर्ष भेल जे हमेक्रा पोथिक उदाहरन सदेकी, तद्याय छे में बाल क्रष्न के भिहार भिदान सबाक का सेवानिव्रत सदस्से करुप में दर्ज केल गेल अच्छी. समागरी के एही बात पर प्रकाष डालबाक चाही, जे की एहन राजनेतिक उपादी प्राप्त भिलाग बाद उही शाखाक वैवाहिक स्थिती में कोनो परिवर्तन आयल? बलकल की हिनकर संजाल, उही पारमपरिक शाखा सबहिन भोगल खेल जे केवल करम कान्द में लागल चल एक ता विद़्ायकक वैवाईक सन्जाल, की एक ता सामान्ने पूरोहितक क सन्जाल सा �alag nahi hai th. एक दाम आ एक ता और गजब कतुलना अद्धाय पाच मे आची. उतया रास्ट पती पूरसकार प्राप्त हेट मास्तर या अगन इंजिन्यर का उलेक है ची. अ, हा! जखन एकर तुन्नाप प्राषीन महाम वह पाद्धिया एस खेल जाईत छी, तब पन्जी कार सब एही आदूनिक उपादी के कत्टिक महत्तो देछ चला, कि यी नव उपादी वाला परिवार सब, विवाहक बजार में अदिक महत्तो पावे लागल चला. इएक्ता बहुत प्रास्ँंगिक प्रश्नाची एक्कर एक्ता संछिप्त तुलनात्मक विस्लेशन समाद्री के बहुत उचास्तर पर लगजाएत इगेवल देटा नहीं आची इप प्मिधलाग बदलगद समाजिक संजचनाक जिवंट प्रमान आची इविश्लेशन के गेराई पाथक के इबुजबामे मदद करत जे आदिर इज़वबख़क अर्थ की अची मात्र तत्यक प्रस्तुती सा अगाबड़ी का तत्यक प्रभाव पर बात करव एही पोठी के इकta मारक दर्षिका सा इकta उत्क्रिष्ट अटियासिक द्रोहर मैं बदली देत. सत्थीक कहलूं. ता एही समिक्षा का मुख्य बिन्दूं और जे तो सुजाओ सब हम्रा सब एते राखलूं उकर संख्षेप एही प्रकार अची. पहल, सगन देटावला अद्धाय में विष्लेशनात्मक विराम शामिल केल जाए, जटे पात्ख नियमक अब्यास कर सकती, जैन हा भईया का बारा विवा के एक ता के स्ट़ी बनाओ. रही, यी बहुत जरुरी आची. तो सर गद्यका स्थान पर नक्षा वन्शावली विरिच्ष आवेवाएक नेवक चाटक द्रिष उप्योख केल जाए सा शूल पानी सन जटल नेवक पाथख के अस्पष्ट रूपेन भुजाए. एक दम. और तेसर पन्जी में आद्धनिक उपादी जैना भी आ, आमले कप्रवेश्सव, समाज आवेवाएक सत्तापर जे वास्तविक प्रभाव पडल तकर गह्राई समष्लेषन कर बालेल एक तनव विषेगत कहन्ध जोडल जाए. इसब सुजाो समागरिक मुल आत्माके बदलवाख लेल ने, बलकी उक्रा आरो सुलभ अप्रभाउशाली बनवाख लेल आची. हम स्रोता जे इस समागरि लिख्लक आची, रिएनका उट्साह पुरवक आमन्त्रित कर आची, जे उ आपन काज मे इज़़प परे मारजन कर के पुना एही कारेक्रम मे समिक्षा लिल पतावती. आहाक देटा संग्रा भेजोड आची, बस उक्रा प्रस्तुत कर बाक तरीका मे एही नवद्द्रिष्ति कोनक आवशकता आची. बेल्कुल, जखन इविष्लेशनात्मक विराम्द्रिश्य, चाट, आदूनिक्ता के गेराईसविष्लेशन एही पोठी मिजुडी जाएत, तकन इशच्मुच मे उनक्षा बनी जाएत, जखर इवादा करे तची. एक ता एहन नक्षा जे ने केवल अतीत के सुरक्षित रख्च्छी बलकी वर्तमानक बदलेच सथा के से हो मापपए तची. आए दھरी एतबस सुन्बाकले बहुत भहुत दन्वाद.

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