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प्राचीन_पञ्जीक_व्याकरण_आ_डिकोडिंग_प्रोटोकॉल.m4a
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- 0:00–0:10आजुक एही समीख्षा सत्र में, हम सब प्राषीन पंजीप के, दीकोड, करबाक, विस्त्रित मार्भ्दर्षिका पर गब करो रहल ची.
- 0:10–0:15तएही समागरी में जे एक ता मुख्यो विषे देखाईदर हो लची
- 0:15–0:20से ई जे ई बहुत रास जानकारी अप पद्दती समबरल अची
- 0:20–0:21मुदा
- 0:21–0:25मुदा एकर संवरचनात्मक प्रवाह पर द्यान देवाक बहुत आवश्चता आचे
- 0:25–0:39एक दम, हमर पहिल्स पष्ट फीट्बैक एची, जि पनजी दीकोड करबाक नियम समागरी में कई ताम बिख्रल अची, जाईसा पाथख के एक था जानकारी प्राप्त कर्मा में बारी भ्रमभर हो लची.
- 0:39–0:46आद जखन हमही पान्दूलीपी से गुज्री रहल चलू उ वू फमर द्यान से हो टीक एही बात पर गेल.
- 0:46–0:51इब बहुत अश्पष्त आची जे लेक्हक लग विष्यक मने अगाद ग्यान आची
- 0:51–0:54बिल्कुल ग्यान अग कोनो कमी नही आची
- 0:54–0:58मुदा जखन पाटक उही ग्यान के विभार में लाने चाहता ची
- 0:58–1:02तो उक्रा लेल मार्ग कनी की कह चाचट दुर्गम भाजाई ता ची
- 1:02–1:06सही कहलो, जा हम सब एक रा भारी की सा देखी
- 1:06–1:09तो अद्ध्याय दूए के अन्त में
- 1:09–1:12बीस्टा रूल्स फो रीटिं देल गिल अची
- 1:24–1:27अगगव इत्टवे पर क्तम नहीं होईता ची
- 1:27–1:29अद्द्याएच चार में
- 1:29–1:33बेसेक उनिट कर नियम सब यलकुल अलग सदेल गेल अची
- 1:33–1:37तई भिख्राओ पाटक लेल इब्रहम पैदा करे टची
- 1:37–1:40जे वास्तविक प्रक्रिया शुरू कत्ते सोएता ची
- 1:40–1:41इक्दम
- 1:41–1:43अगर प्रक्रिया शुरू कत्ते सोई तची
- 1:43–1:44इक्दम
- 1:44–1:48जखन आहा कोनो जटिल वन्शावली के दिकोड करहिल ची
- 1:48–1:54ताहा के अपन पूरा ध्यान उही सामगरी पर केंद्रित राखबाक आवश्च्टा होई तची
- 1:54–1:56नहीं जे पन्ना उलत्बा में
- 1:56–2:05उद्या की हम सब यी वीचार नहीं का सकेची जे लेक्हक शाएद उही नियम सब के संदर्ब का अदार पर उतेई राखने चतिन?
- 2:05–2:08माने संदर्ब का अदार पर कोना
- 2:08–2:13जिना जगन आहा अद्याय दूई में मुल बात पडी रहे लख्छी, तो उतेई उकर नियम अची
- 2:13–2:24अजगन अद्याय तीन में कथिन पाठाश पर जाएची तो उगरा अलग नियम की इक ता क्रमिक शिक्षा या स्तेब बाइ स्तेप लर्णिग काहिस्सा नहीं बहसा कै तची
- 2:25–2:30इटरक एक ता समाने पाट्टे पुस्तक कर लेल ता सहीं भहसा कै तची
- 2:30–2:36मुदा पन्जी दिकोडिं कुनु रेखिय मने लीनिर प्रक्रिया नहीं अची
- 2:36–2:37आच्छा
- 2:37–2:43जगन कुनु शोद करता एक ता वास्तविक पन्जीक पन्ना कोले तजी
- 2:43–2:48तो उक्रा एक संगे मुल एकाई कतिन पाताश असमान नियम
- 2:48–2:50तीनो के आवषकता परे च्ये
- 2:50–3:20उगर देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान �
- 3:20–3:23आहा के एक ता एस पष्ट ड़ाष बोट चाही
- 3:23–3:25तकी हम सब एते इविचार कर सके ची
- 3:25–3:27जे एही भिख्रिल नियमक बदला
- 3:27–3:29एक ता कुएक स्टाट गाएट दिल जाए
- 3:29–3:30कुएक स्टाट गाएट
- 3:30–3:34एक ता कोनो पाथक पहले से पनजी के किचु
- 3:34–3:40उद्याई बाद जाईने तचीन तो उपुरा द्याई नहीं पडीका सीदे एही गाईट को प्योग का सके तची
- 3:40–3:43ये एक ता नीक संदरब गरन्त बनी सके तची
- 3:43–3:49रहां आप नहीं लगाई तची जे केवल एक ता कुएक स्थाड गाएट जोर्ला से
- 3:49–3:52इसमस्या पुन रूप से हल होयत,
- 3:52–3:55इसे केवल एक ता बन्टेड लगाए भेल.
- 3:55–3:58आचा, तो आहा के बिचार से ठोज समवडान की चे?
- 3:58–4:01जब पाट्ख मुल पाट पडी रहाल चातीन,
- 4:01–4:04आओतर अखनो नियम अद्याए दूई,
- 4:04–4:07तीन और चार मे भिख्रल अची,
- 4:07–4:09उभद्की ही जिता
- 4:09–4:11एकर थो समवादान एए ची
- 4:11–4:14जे एही सब भिख्रल नियम के मिला क
- 4:14–4:18एक ता सुद्रिद मास्टर दीकोटिं प्रोटोकाल बनावल जाए
- 4:18–4:20मास्टर दीकोटिं प्रोटोकाल
- 4:20–4:25राई, समगरी की सन्रषनात्मक प्रवाज के ही बदलाबा कवष्चता ची
- 4:37–4:45अगर बाद अद्याय दूई कजे भीस्ता नियम चे तक्रा उही मूल एकाई के पदबाख सामान्ने प्रोटोकोल करूए प्रस्तूत कल जाए.
- 4:45–4:57अखर बाद अद्याय दूई कजे भीस्ता नियम चे तक्रा उही मूल एकाए के पदबाख सामान ने प्रोटोकोल करूप में प्रस्तूत कल जाए.
- 4:57–5:00अग, यी तो बहुत बेवस्तित लगे तची.
- 5:00–5:06आ अन्त में अद्याय तीन कब बारता कदम आ अद्थारता नियम के
- 5:06–5:11अपवाद वाजटेल स्तिती के संभालबाक तरीका के रूप में
- 5:11–5:13उकर थीक नीचा जोडल जाए.
- 5:13–5:17एक रा एक ता इसपर्ष्ट चेक लिस्ट या फ्लो चात करूप में
- 5:17–5:18देल जासके चे.
- 5:18–5:22अहो, एक ता फलो चात, यी ता बहुत खाज का चीज भवजात
- 5:22–5:32एक दम, जों सबता सेटब निर्देश एक ठाउ, एक ता तारकिक पदानुक्रम में रहत, ता पाटख लेल काज शुरूकर भवूत सहथ भजात
- 5:32–5:36इद्र्ष्टिकों निष्चित्रूप से समागरी के बहुत सचक्त बनावत
- 5:36–5:37आँ आँ बूजु
- 5:37–5:42जक्शन आँ नियम सबख के तीन अलगलग अद्ध्याय में बिख्रे देच्छी
- 5:42–5:44ता इपहिने से पाथध के थका देताछी
- 5:44–5:47आँ उन थकावद तबहोई जाए चे
- 5:47–5:50मुदा इप धखावद औही समय आवर भेसी बड़ी जाएत छी,
- 5:50–5:56जगन औही नियम सब के प्रस्थुट करवाक तोन अत्तिदिक नकरात्मक होईत छी.
- 5:56–6:00सर्टीक. आई ई हम्रा सबक दोसर मुख्य बिन्दूपर लोग जाएत छी.
- 6:00–6:07अद्याय तीन में पन्जी कठनाई पर जेक्रा अंग्रेजी में प्रब्लम्स कहल गेल आची
- 6:07–6:10औही पर जे अथ्यदिक जोर देल गेल आची
- 6:10–6:13से पाथक के उच्साह के कम कर सकाए ची
- 6:13–6:16अविश्यक के गती किसे हो दीमा कर देच्छे
- 6:16–6:23अँ, हम नोटिस केल हों, जे बार-बार दप्रोब्लम अग्स, दप्रोब्लम अग्य लिखल गेल अची.
- 6:23–6:28एक दम, समागरी में एजे सोलहत समस्याक सुची लिखल गेल अची,
- 6:28–6:32एस अ एक तब बहुत बारी और नकरात्मक तोन बनेचे.
- 6:32–6:35वाद्धख पूरी तरा हतोट साहीद भूस्व कै तची.
- 6:35–6:36बिल्कुल.
- 6:36–6:41मुदा आया एक रादोसर दूश्टि कून से होता देखाल जासा लगा अगा जाए तची.
- 6:41–6:46यक तचे तावनी होई जे पनजीक परव एक ता असमभव काज आची
- 6:46–6:52यद्दिपी लेक्ख अंप में माने चतिन जे एक कतिनाई ही एकर पद्दती आची
- 6:52–6:54मुदा अते दरी पहुजेद पहुजेद
- 6:54–6:57पाटख पूरी तरा हतोट साहीद भहसो कै तची
- 6:57–6:58बिल्कुल
- 6:58–7:03मुदा, आया, एक्रा दोसर दुष्टि कून से हो ता देखल जासकाई ता ची?
- 7:03–7:04की मतल?
- 7:04–7:08की समस्स्या शब्द का उप्योग करब कोन त्रूती आची?
- 7:08–7:14जकन हम एक्रा समस्या कहे चीए, ता इपाथक के एक्ता विष्लेषनात्मक मान्सिक्ता मे लोग जाए ता ची?
- 7:14–7:19अग, अगा के अखादमिक चुनोती वाली बाद से सहमत ची, मुदा शब्दावली बहत मेठफों होई तची.
- 7:19–7:22अग, शब्द कक्ता असर पडे तची.
- 7:22–7:26अगर अखाद्मिक गमविर्ता के कम कर अदल ची
- 7:26–7:31अगर अखाद्मिक चिनोती वाली बाथ से सहमत ची
- 7:31–7:34मुदा शब्दाओली बहत मेठफुपून होई टचे
- 7:34–7:38अगर अखाद्मिक चिनोती बाद से सहमत ची
- 7:38–7:41मुदा शब्दाओली बहत मेठफुपून होई टचे
- 7:41–7:43अग, शब्द्काखता असर पडेत छे
- 7:43–7:47जखन हम कोनो चीजके सोला भेर समस्स्या कहे ची
- 7:47–7:51ता अव चेतन रूप से हम पाथख के इसन्देश दोरहल ची
- 7:51–7:53जे इप रनाली त्रूटी पूरन चेल
- 7:53–7:57जे इ अटिहासेक लिखवाक एक ता खराब तरी का चल
- 7:57–8:02अग, हम भुजल हूँ. माने हमरा लागे तजी, जिना कोनो गडव़ग़ी अची.
- 8:02–8:08एक दम, जखन की वास्टव में, पनजी कई संकुछित रूप, इजे कमप्रष्षन अचे,
- 8:08–8:12इख कोनो त्रूटी नहीं, बलकी उकर सबसे पैग विषिष्टा चे.
- 8:12–8:14आप, अगर उज़ा बग नहीं फीचा रचे.
- 8:14–8:16अगर वो देखा बग नहीं फीचा रचे.
- 8:16–8:18अगर वो देखा नहीं बग नहीं फीचा रचे.
- 8:18–8:24इक अगज अर समें बचावा के लिल सुचना के सहेज बाक एक ता बहुत उच्छस्तरक तकनीक चल,
- 8:25–8:29एक रा समस्या कहब उही प्राचीन प्रनाली के बुद्द्विमत्ता के नकारा बचे.
- 8:30–8:32आहा इप बहुत गहीरा विचार अचे.
- 8:32–8:36ताहां के कहव अच्छे जे इकोनो बग नहीं, फीच्चर अच्छे
- 8:36–8:40एक दम सही, बग नहीं, फीच्चर अच्छे
- 8:40–8:45तेकर समदान की अच्छे, लेक्वक एही खन्द के कोना पुनर गथित को सके चती
- 8:45–8:50जाही सा अकाद्मिक गम्हिरता सोब नल रहे, अटोन से हो सकारात्मक बहुजाई?
- 8:50–8:54एकर बहुथ सीदा अ प्रभाव्शाली समदान एच्ए,
- 8:54–8:58जे एई समस्या सब के कठिनाई के रुप में नहीं,
- 8:58–9:04बलकी पन्जिक विषिष्ट व्याकरन वप्रबन्दन कध सकरात्मक रूप में प्रस्तुत किल जाए.
- 9:04–9:08विषिष्ट व्याकरन अंग्रेजी में स्पष्लाईज्ग्र्मा?
- 9:08–9:13राद्ख के य भुज्हावल जाए, जे उकुनो अशुद्दिजे नहीं लडी रहाल चाती,
- 9:13–9:18बलकी एक ता नव अत्यदिक संखुचद भाशा का व्याक्रन सीख रहाल चाती.
- 9:18–9:21की आईगर की चु विषिष्ट अबहारव्रन दो सकत थी,
- 9:21–9:23जै ईई बदलाओ अभ्यास में कोना काछ करत?
- 9:23–9:28अवष्ष्छ, जेना उन समगरी में एक ता शिर्षख अछी,
- 9:28–9:32अप्तिकल करेक्तर रेकोगनिशन का समस्स्या
- 9:32–9:38तए एक्रा बद्ली का नविगेटिं अप्सिर आट्टेफेक्स के जासके तचे
- 9:38–9:41अप्सिर कोनो पान्दूलिपी के कोना पड़ाई तचे
- 9:41–9:47और आई में कते दबभा वा करेक्तर बदलबाक समभावना रहे तचे
- 9:47–10:17इसे वह दोगागा देगागा था वह दोगागागा था वह दोगागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागा
- 10:17–10:22जाईदरी हम बूजे ची पनजी में सां केवल एक ता पूर्वसर्ग नहीं है
- 10:22–10:23नहीं, एक दम नहीं
- 10:23–10:26इगवों कोनो मूलस्ठान के सुछिट करए तची
- 10:26–10:29गवों कोनो विसिष्ट शाक्खिय समबंद के
- 10:29–10:31तगवों विवाख का दिशा केन
- 10:31–10:35अगर बहु आयामी उप्योग अची
- 10:35–10:37तजग आईक्र समस्या कही ची
- 10:37–10:39तई आप पाथक के ईबुजारहल ची
- 10:39–10:41जे लेखख सबष्त रूप से नहीं लिखलनी
- 10:41–10:42बिल्कुल
- 10:42–10:45मुदा जो आईक्र व्याक्रन कही ची
- 10:45–10:48तई आईई पाथक के बुजारहल ची
- 10:48–10:50जे सुं एक्ता कोड चे
- 10:50–10:53आजकन आहा उ कोड के दीकोड कलेब
- 10:53–10:57ता आहाख समने बहुत रास जानकारी खुजी जाएत
- 10:57–10:58एक्दम सही
- 10:58–11:02मूल तह अद्याए तीन के समस्स्या के बडला
- 11:02–11:05पनजी का बाशा आप रबन्दन के रुप में
- 11:05–11:06पुनर गध्धित की एल जाए
- 11:06–11:10यी च्छछच्छ़ भासाई बडलाओ पाथख के आत्म्विस्वास के भहुत बड़ा देत.
- 11:10–11:19अग, उब अद्द साहित लबाक बदला स्वयम के एक्ता प्राचीन गुप्त भाशा का अनुवादक के रुप मे देखाओ शुरूकरता हा.
- 11:19–11:25इएक्ता शान्दार वैचारिक परिवर्तना ची, अजक्ञन आहा एही नियम अ विषिष्ट व्याक्रन के समजी लिच्ची,
- 11:25–11:30तब पाथक के उही दिकोड केल जानकारी के कतो वेवस्तित करभा कावषकता होई तची.
- 11:30–11:34आजे हमरा सबक तीसर अगला विन्दू से जोडे तची.
- 11:34–11:35एक दम.
- 11:35–11:41जखन हम नकारात्मक समस्स्या के एक ता जटिल मुदातर्प संगत व्याक्रन में बडल देख ची.
- 11:41–11:51तो उई व्याक्रन्के थीख सामजबाक अव्यवाहार में लान्बाक लेल पाथख के एक ता मजबूद द्रिश्य मोडल, माने विज्यल मोडल का अवष्षकता होईता चे.
- 11:51–11:54जे एही समागरी में किछु हद्दरी गायब अच्छी.
- 11:54–12:24अग, गईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई
- 12:24–12:26अगी भिन्नता के प्चान लोगन अचे
- 12:26–12:28आदूनिक फाम्मिट्री
- 12:28–12:30प्राया पित्र सथ्तात्मक
- 12:30–12:32आउपर से नीचा जाते जाते
- 12:32–12:34केवल एक ता कुल नाम अगाम बड़ेता चे
- 12:34–12:36सही, मुदा पनजी प्रनाली
- 12:36–12:38में, रक्त समबंदक
- 12:38–12:40शुद्दता सब बच्बाक लिल
- 12:40–12:46अगर बाद्टा नानी पर नानिक मुल स्थानक सो हो कडाईसे ट्रैकिंकर जाच्छल।
- 12:46–12:54सही कहल वहां, मुदा इतेजे कमी अचे उई जे लेक्ख इद ख़े च्छतिन जे आदूनिक फामली त्री काज नहीं करत,
- 12:54–12:58मुदा उ एकर कोनो वेकल्पिक दिष्य मोडल तुरत नहीं देच्छतिं
- 12:58–13:03अ केवल देवबल लं्मा लंभा पाथ्ध विवरन का बात करेच्छतिं
- 13:03–13:09प्रद्ध लिख्ठ थची जे दोहित्र दूईता परिवारक भीच्क पूल अची
- 13:09–13:12आहक शब्द उही पल के समजारो हैं लगछी
- 13:12–13:16मुदा पात्खक दिमाग उही पल के साख्षा देखे चाहे तजी
- 13:16–13:20एकदम, केवल सब्द साँ उही त्री आयामी समबंद के
- 13:20–13:24मन में कलपित करव पात्खले ले बहुत कलिष्ट अची
- 13:24–13:54इसे अजिन ज़ान बाद्रीग लेल ग़ादा वी लेल तो समथान इए ज़ान बाद्रीग लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा व
- 13:54–13:57के कागज पर कोना रेखांकित करल जाए,
- 13:57–13:59तकर एक ता मानक द्रिष्ष्प्रनाली
- 13:59–14:02बहुत पहलु का द्याय में प्रस्थ। करल जाए.
- 14:02–14:05मानक द्रिष्ष्प्रनाली सहां की तात पर याची?
- 14:05–14:07इई वेवहार में कोना दिखाएत?
- 14:07–14:09औह, उह, एकर अर्थ छी,
- 14:09–14:15जए, दिकोडिं करे वाला शोद करता लेल किचो विष्छत ग्राफेक नियम तैकरब.
- 14:15–14:16जिनाकी?
- 14:16–14:20जदे संबंद वापस गुमी के कोनो पूरवज का गाम दरी जाई तच्छी,
- 14:20–14:25तो, अख्रा सीथा लाईनक बदला एक तगोल तीर से दिखाएल जासकाएच.
- 14:25–14:31अहो स्वक्युलर आरो, एकरा से तुरन्त स्पष्ट बहुजाएत, जे ये एक्ता लूप अचे.
- 14:31–14:39अविवाह कलेल, जते दूईता �alag-alag वन्शावली जुडी रहाल अची, सादारन लेक्खाक बदला दोहरी लेक्खा,
- 14:39–14:42मने ौद्बल लाइन को उप्योक का लिए च्छ
- 14:42–14:44इता बहुत सपष्ट कर देत
- 14:44–14:49आज जते सैं, जेहन शवद कोनो स्थान वा मुल गाम के सुचित करत अची
- 14:49–14:52ता उक्रा लेल अलाग रंग वा संकेत
- 14:52–14:56जेना की एक ता च्छोट सन त्रिबुज वा वर्ग का उप्योख का याई जाए.
- 14:56–14:59बाप्रे यी बहुत शक्तिषाली अचे,
- 14:59–15:01यी केवल एक ता चित्र नहीं आचे,
- 15:01–15:03यी स्वयम में एक ता भाशा आचे.
- 15:03–15:04एक दम.
- 15:04–15:06हमर मतलब, सोचु,
- 15:06–15:09जखन कोनो पात्ख दोईत्र का अवदारना पड़ाईताची
- 15:09–15:11आदोनेक वन्ष्व्रिख्ष में,
- 15:11–15:14बेटी का बेटा सीदे अकर निचा आबी जाईताची
- 15:14–15:18जे ब्रामक अचे करन औएक ता बिलकुल नव्मूल
- 15:18–15:20वा गोत्र में चली जाएताची
- 15:20–15:22अदे सा लाईन बडली जाएत च्याएत च्याएत
- 15:22–15:26मदा जा हम आहाक दिश्प्रनालीक उप्योग करेची
- 15:26–15:31ता दोहित्र के यक्ता अलग रंग नोड के रूप में देखायाल जासकेचे
- 15:31–15:34जे दूई ता अलग-लग फामली त्रीक के
- 15:34–15:37जोडेवला एक ता हीपरलिंक जकां काज करत.
- 15:38–15:45भिल्कुल, जक्हन पाथक के चार पीडिक मात्रिक वन्शावली के एक संगे याद राखे परएचे,
- 15:45–15:49तो अकर वरकिंट मैम।री अवर लोड बाजाएचे.
- 15:49–15:51आप, दिमाग पर जोर परेचे.
- 15:51–15:56पात्थ्यविव्रन् पात्थक सब बहुत बेसी मान से कस्रत करभाइत छे
- 15:57–16:01मुदा जक्ञन आहा उई सुचना के एक ता आरेक में बदली देच्ची
- 16:01–16:06ता आहा उई संग्यानात्मक भोज्के कागस पर स्तानात्रित कर देच्ची
- 16:06–16:08इप दब बहुत पेग रहात है थे
- 16:08–16:14एक ता मानक द्रिश्ष प्रनाली नकेवल पाथक के पनजी समज्भा में मददती करत,
- 16:14–16:19बलकी इड्कोट करबाक एक ता सार्व भहोमिक उपकरन सोहो बन जाएत.
- 16:19–16:24शोद करता औई आरेख का उप्योग, अपन शोद पत्र में सोहो कसकच्छती.
- 16:24–16:29आ एद्रिश्छ प्रनाली उई पहल का बिन्दुसन सो हो बहुत नीग जगा जूरे चे
- 16:29–16:33जटे ही हम सब मास्टर दिकोडिंग प्रोटोखाल का बात कैने चलू।
- 16:33–16:36आ, एक दम जोडे ता ची
- 16:36–16:39की हम सब एई नहीं कह सकत ची
- 16:39–16:45जे यी द्रिष्छ प्रनाली उही प्रोटोकोल का अन्तिम चरन अची?
- 16:45–16:50आहा मूल एकाई पधलू हूँ विशिस्ट व्याकरन्सा अगरा दिकोड के लूँ
- 16:50–16:55आहा अंत में अगरा एही मानक द्रिष्छ प्रनाली क उप्योग का के
- 16:55–16:57कागज पर मैप का देलूूूूूूू
- 17:09–17:14बुज्वा में आसानी देद, जे की पडबाक अची, आ उक्रा कोना पडबाक अची,
- 17:14–17:21बलकी इहो बुज्वा में आसानी देद, जे दीकोड कैल जानकारी के सुरक्ष्त अप्रस्तुत कोना करबाक अची.
- 17:21–17:26इएक्ता एहन तूल्केट बनी जायत, जे कोनो भी शोद करताले आमूल्ले होयत.
- 17:26–17:31इसामगरी पहिले सब बहुत शोद पुरन अमहत्व पुरन अची.
- 17:31–17:34इस मित्लाक बोद्धिक अ सामाजिक एतिहास,
- 17:34–17:42जास, जे अट्यंत जटिल अवेग्यानिक चल तक्रा सुरक्षित राखवाक एक्ता पैग असराहनी अप्रयास अची.
- 17:42–17:45आए, एकर महत्व बहुत अची.
- 17:45–17:49ता एकर उप्योगिता आपाटक क अनुबव के ब्रहावव अच्यंत आवश्यक अच्यी
- 17:50–17:53इबदलाव एकर एक्ता अकाद्मिक लेक सब बदल के
- 17:54–17:57एक्ता ब्यवावारिक काज करे योग्या तूल में बदली देत
- 17:57–18:27अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ�
- 18:27–18:43तो सर अद्याय तीन मेजु सोलाता समस्स्या का सुची आची उक्रा नकरात्मक तोंसा बडले कै, पंजी का विषिष्ट व्याक्रन या प्रबंदन का सकारात्मक रुप में प्रस्तुत के रजाए. जालसा एक्ता त्रूटीक बडला एक्ता कोशल बनाई.
- 18:43–18:58अदोहित्र जहन जटिल समबन्दक वरनन के केवल टेक्स तक्सीमित नाराखी का, उक्रा स्पष्ट कर बाकलेल एक ता मानक दिश्प्रनाली विक्सित करके सामगरी में शामिल के लजाए.
- 18:58–19:01हम्रा इप तीनु दिसा हम्रा इप उच्साह वर्दख लागे आची.
- 19:01–19:03अपन स्रोताके प्रोज्स़ाहित करब,
- 19:03–19:06जो एही सुजाव सप्र ग़राई सविचार करती.
- 19:06–19:08आप, यह बहुत जरूरी आची.
- 19:08–19:12आप यहाख सामगरी पहले सबहुत सुद्रद वैचारी कादार पर चाई.
- 19:12–19:16आप यहाख सोद, मितलाक, पनजी विवस्ताक, सुच्मताक के,
- 19:31–19:33समिक्षा सब्त्र किलिल पथाउ
- 19:33–19:35हमरा सब के एकर परिष्कित रूप
- 19:35–19:37देखी कब बहुत प्रसन्नता होएद
- 19:37–19:37अन्त्तद
- 19:37–19:41जखन हम सब पनजीजका जटील समाजिक विवस्ता के
- 19:41–19:42दिकोड कर अच्छी
- 19:42–19:44ते एकता एहन दूनी आच्छे
- 19:44–19:46जटे सीधी लाईन नहीं
- 19:46–19:50बलकी समबंद के एक ता गेर आत्री आयामी जाल आचे.
- 19:50–19:52आख, एक ता बहुत पैक जाल.
- 19:52–19:55आज जक्हन आख लक्स, सही नक्षा, सही व्याक्रन,
- 19:55–19:57आए एक ता स्पष्ट प्रोटोकोल हो,
- 19:57–20:00तो उदूंदल जाल से हो एक दम स्पष्ट,
- 20:00–20:02अजुक एही चर्चालेल बस एदबे
- 20:02–20:05आख समगरिक अगला स्वरूप के प्रतिक्षा रहत
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आजुक एही समीख्षा सत्र में, हम सब प्राषीन पंजीप के, दीकोड, करबाक, विस्त्रित मार्भ्दर्षिका पर गब करो रहल ची. तएही समागरी में जे एक ता मुख्यो विषे देखाईदर हो लची से ई जे ई बहुत रास जानकारी अप पद्दती समबरल अची मुदा मुदा एकर संवरचनात्मक प्रवाह पर द्यान देवाक बहुत आवश्चता आचे एक दम, हमर पहिल्स पष्ट फीट्बैक एची, जि पनजी दीकोड करबाक नियम समागरी में कई ताम बिख्रल अची, जाईसा पाथख के एक था जानकारी प्राप्त कर्मा में बारी भ्रमभर हो लची. आद जखन हमही पान्दूलीपी से गुज्री रहल चलू उ वू फमर द्यान से हो टीक एही बात पर गेल. इब बहुत अश्पष्त आची जे लेक्हक लग विष्यक मने अगाद ग्यान आची बिल्कुल ग्यान अग कोनो कमी नही आची मुदा जखन पाटक उही ग्यान के विभार में लाने चाहता ची तो उक्रा लेल मार्ग कनी की कह चाचट दुर्गम भाजाई ता ची सही कहलो, जा हम सब एक रा भारी की सा देखी तो अद्ध्याय दूए के अन्त में बीस्टा रूल्स फो रीटिं देल गिल अची अगगव इत्टवे पर क्तम नहीं होईता ची अद्द्याएच चार में बेसेक उनिट कर नियम सब यलकुल अलग सदेल गेल अची तई भिख्राओ पाटक लेल इब्रहम पैदा करे टची जे वास्तविक प्रक्रिया शुरू कत्ते सोएता ची इक्दम अगर प्रक्रिया शुरू कत्ते सोई तची इक्दम जखन आहा कोनो जटिल वन्शावली के दिकोड करहिल ची ताहा के अपन पूरा ध्यान उही सामगरी पर केंद्रित राखबाक आवश्च्टा होई तची नहीं जे पन्ना उलत्बा में उद्या की हम सब यी वीचार नहीं का सकेची जे लेक्हक शाएद उही नियम सब के संदर्ब का अदार पर उतेई राखने चतिन? माने संदर्ब का अदार पर कोना जिना जगन आहा अद्याय दूई में मुल बात पडी रहे लख्छी, तो उतेई उकर नियम अची अजगन अद्याय तीन में कथिन पाठाश पर जाएची तो उगरा अलग नियम की इक ता क्रमिक शिक्षा या स्तेब बाइ स्तेप लर्णिग काहिस्सा नहीं बहसा कै तची इटरक एक ता समाने पाट्टे पुस्तक कर लेल ता सहीं भहसा कै तची मुदा पन्जी दिकोडिं कुनु रेखिय मने लीनिर प्रक्रिया नहीं अची आच्छा जगन कुनु शोद करता एक ता वास्तविक पन्जीक पन्ना कोले तजी तो उक्रा एक संगे मुल एकाई कतिन पाताश असमान नियम तीनो के आवषकता परे च्ये उगर देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान ता देखान � आहा के एक ता एस पष्ट ड़ाष बोट चाही तकी हम सब एते इविचार कर सके ची जे एही भिख्रिल नियमक बदला एक ता कुएक स्टाट गाएट दिल जाए कुएक स्टाट गाएट एक ता कोनो पाथक पहले से पनजी के किचु उद्याई बाद जाईने तचीन तो उपुरा द्याई नहीं पडीका सीदे एही गाईट को प्योग का सके तची ये एक ता नीक संदरब गरन्त बनी सके तची रहां आप नहीं लगाई तची जे केवल एक ता कुएक स्थाड गाएट जोर्ला से इसमस्या पुन रूप से हल होयत, इसे केवल एक ता बन्टेड लगाए भेल. आचा, तो आहा के बिचार से ठोज समवडान की चे? जब पाट्ख मुल पाट पडी रहाल चातीन, आओतर अखनो नियम अद्याए दूई, तीन और चार मे भिख्रल अची, उभद्की ही जिता एकर थो समवादान एए ची जे एही सब भिख्रल नियम के मिला क एक ता सुद्रिद मास्टर दीकोटिं प्रोटोकाल बनावल जाए मास्टर दीकोटिं प्रोटोकाल राई, समगरी की सन्रषनात्मक प्रवाज के ही बदलाबा कवष्चता ची अगर बाद अद्याय दूई कजे भीस्ता नियम चे तक्रा उही मूल एकाई के पदबाख सामान्ने प्रोटोकोल करूए प्रस्तूत कल जाए. अखर बाद अद्याय दूई कजे भीस्ता नियम चे तक्रा उही मूल एकाए के पदबाख सामान ने प्रोटोकोल करूप में प्रस्तूत कल जाए. अग, यी तो बहुत बेवस्तित लगे तची. आ अन्त में अद्याय तीन कब बारता कदम आ अद्थारता नियम के अपवाद वाजटेल स्तिती के संभालबाक तरीका के रूप में उकर थीक नीचा जोडल जाए. एक रा एक ता इसपर्ष्ट चेक लिस्ट या फ्लो चात करूप में देल जासके चे. अहो, एक ता फलो चात, यी ता बहुत खाज का चीज भवजात एक दम, जों सबता सेटब निर्देश एक ठाउ, एक ता तारकिक पदानुक्रम में रहत, ता पाटख लेल काज शुरूकर भवूत सहथ भजात इद्र्ष्टिकों निष्चित्रूप से समागरी के बहुत सचक्त बनावत आँ आँ बूजु जक्शन आँ नियम सबख के तीन अलगलग अद्ध्याय में बिख्रे देच्छी ता इपहिने से पाथध के थका देताछी आँ उन थकावद तबहोई जाए चे मुदा इप धखावद औही समय आवर भेसी बड़ी जाएत छी, जगन औही नियम सब के प्रस्थुट करवाक तोन अत्तिदिक नकरात्मक होईत छी. सर्टीक. आई ई हम्रा सबक दोसर मुख्य बिन्दूपर लोग जाएत छी. अद्याय तीन में पन्जी कठनाई पर जेक्रा अंग्रेजी में प्रब्लम्स कहल गेल आची औही पर जे अथ्यदिक जोर देल गेल आची से पाथक के उच्साह के कम कर सकाए ची अविश्यक के गती किसे हो दीमा कर देच्छे अँ, हम नोटिस केल हों, जे बार-बार दप्रोब्लम अग्स, दप्रोब्लम अग्य लिखल गेल अची. एक दम, समागरी में एजे सोलहत समस्याक सुची लिखल गेल अची, एस अ एक तब बहुत बारी और नकरात्मक तोन बनेचे. वाद्धख पूरी तरा हतोट साहीद भूस्व कै तची. बिल्कुल. मुदा आया एक रादोसर दूश्टि कून से होता देखाल जासा लगा अगा जाए तची. यक तचे तावनी होई जे पनजीक परव एक ता असमभव काज आची यद्दिपी लेक्ख अंप में माने चतिन जे एक कतिनाई ही एकर पद्दती आची मुदा अते दरी पहुजेद पहुजेद पाटख पूरी तरा हतोट साहीद भहसो कै तची बिल्कुल मुदा, आया, एक्रा दोसर दुष्टि कून से हो ता देखल जासकाई ता ची? की मतल? की समस्स्या शब्द का उप्योग करब कोन त्रूती आची? जकन हम एक्रा समस्या कहे चीए, ता इपाथक के एक्ता विष्लेषनात्मक मान्सिक्ता मे लोग जाए ता ची? अग, अगा के अखादमिक चुनोती वाली बाद से सहमत ची, मुदा शब्दावली बहत मेठफों होई तची. अग, शब्द कक्ता असर पडे तची. अगर अखाद्मिक गमविर्ता के कम कर अदल ची अगर अखाद्मिक चिनोती वाली बाथ से सहमत ची मुदा शब्दाओली बहत मेठफुपून होई टचे अगर अखाद्मिक चिनोती बाद से सहमत ची मुदा शब्दाओली बहत मेठफुपून होई टचे अग, शब्द्काखता असर पडेत छे जखन हम कोनो चीजके सोला भेर समस्स्या कहे ची ता अव चेतन रूप से हम पाथख के इसन्देश दोरहल ची जे इप रनाली त्रूटी पूरन चेल जे इ अटिहासेक लिखवाक एक ता खराब तरी का चल अग, हम भुजल हूँ. माने हमरा लागे तजी, जिना कोनो गडव़ग़ी अची. एक दम, जखन की वास्टव में, पनजी कई संकुछित रूप, इजे कमप्रष्षन अचे, इख कोनो त्रूटी नहीं, बलकी उकर सबसे पैग विषिष्टा चे. आप, अगर उज़ा बग नहीं फीचा रचे. अगर वो देखा बग नहीं फीचा रचे. अगर वो देखा नहीं बग नहीं फीचा रचे. इक अगज अर समें बचावा के लिल सुचना के सहेज बाक एक ता बहुत उच्छस्तरक तकनीक चल, एक रा समस्या कहब उही प्राचीन प्रनाली के बुद्द्विमत्ता के नकारा बचे. आहा इप बहुत गहीरा विचार अचे. ताहां के कहव अच्छे जे इकोनो बग नहीं, फीच्चर अच्छे एक दम सही, बग नहीं, फीच्चर अच्छे तेकर समदान की अच्छे, लेक्वक एही खन्द के कोना पुनर गथित को सके चती जाही सा अकाद्मिक गम्हिरता सोब नल रहे, अटोन से हो सकारात्मक बहुजाई? एकर बहुथ सीदा अ प्रभाव्शाली समदान एच्ए, जे एई समस्या सब के कठिनाई के रुप में नहीं, बलकी पन्जिक विषिष्ट व्याकरन वप्रबन्दन कध सकरात्मक रूप में प्रस्तुत किल जाए. विषिष्ट व्याकरन अंग्रेजी में स्पष्लाईज्ग्र्मा? राद्ख के य भुज्हावल जाए, जे उकुनो अशुद्दिजे नहीं लडी रहाल चाती, बलकी एक ता नव अत्यदिक संखुचद भाशा का व्याक्रन सीख रहाल चाती. की आईगर की चु विषिष्ट अबहारव्रन दो सकत थी, जै ईई बदलाओ अभ्यास में कोना काछ करत? अवष्ष्छ, जेना उन समगरी में एक ता शिर्षख अछी, अप्तिकल करेक्तर रेकोगनिशन का समस्स्या तए एक्रा बद्ली का नविगेटिं अप्सिर आट्टेफेक्स के जासके तचे अप्सिर कोनो पान्दूलिपी के कोना पड़ाई तचे और आई में कते दबभा वा करेक्तर बदलबाक समभावना रहे तचे इसे वह दोगागा देगागा था वह दोगागागा था वह दोगागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागागा जाईदरी हम बूजे ची पनजी में सां केवल एक ता पूर्वसर्ग नहीं है नहीं, एक दम नहीं इगवों कोनो मूलस्ठान के सुछिट करए तची गवों कोनो विसिष्ट शाक्खिय समबंद के तगवों विवाख का दिशा केन अगर बहु आयामी उप्योग अची तजग आईक्र समस्या कही ची तई आप पाथक के ईबुजारहल ची जे लेखख सबष्त रूप से नहीं लिखलनी बिल्कुल मुदा जो आईक्र व्याक्रन कही ची तई आईई पाथक के बुजारहल ची जे सुं एक्ता कोड चे आजकन आहा उ कोड के दीकोड कलेब ता आहाख समने बहुत रास जानकारी खुजी जाएत एक्दम सही मूल तह अद्याए तीन के समस्स्या के बडला पनजी का बाशा आप रबन्दन के रुप में पुनर गध्धित की एल जाए यी च्छछच्छ़ भासाई बडलाओ पाथख के आत्म्विस्वास के भहुत बड़ा देत. अग, उब अद्द साहित लबाक बदला स्वयम के एक्ता प्राचीन गुप्त भाशा का अनुवादक के रुप मे देखाओ शुरूकरता हा. इएक्ता शान्दार वैचारिक परिवर्तना ची, अजक्ञन आहा एही नियम अ विषिष्ट व्याक्रन के समजी लिच्ची, तब पाथक के उही दिकोड केल जानकारी के कतो वेवस्तित करभा कावषकता होई तची. आजे हमरा सबक तीसर अगला विन्दू से जोडे तची. एक दम. जखन हम नकारात्मक समस्स्या के एक ता जटिल मुदातर्प संगत व्याक्रन में बडल देख ची. तो उई व्याक्रन्के थीख सामजबाक अव्यवाहार में लान्बाक लेल पाथख के एक ता मजबूद द्रिश्य मोडल, माने विज्यल मोडल का अवष्षकता होईता चे. जे एही समागरी में किछु हद्दरी गायब अच्छी. अग, गईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईईई अगी भिन्नता के प्चान लोगन अचे आदूनिक फाम्मिट्री प्राया पित्र सथ्तात्मक आउपर से नीचा जाते जाते केवल एक ता कुल नाम अगाम बड़ेता चे सही, मुदा पनजी प्रनाली में, रक्त समबंदक शुद्दता सब बच्बाक लिल अगर बाद्टा नानी पर नानिक मुल स्थानक सो हो कडाईसे ट्रैकिंकर जाच्छल। सही कहल वहां, मुदा इतेजे कमी अचे उई जे लेक्ख इद ख़े च्छतिन जे आदूनिक फामली त्री काज नहीं करत, मुदा उ एकर कोनो वेकल्पिक दिष्य मोडल तुरत नहीं देच्छतिं अ केवल देवबल लं्मा लंभा पाथ्ध विवरन का बात करेच्छतिं प्रद्ध लिख्ठ थची जे दोहित्र दूईता परिवारक भीच्क पूल अची आहक शब्द उही पल के समजारो हैं लगछी मुदा पात्खक दिमाग उही पल के साख्षा देखे चाहे तजी एकदम, केवल सब्द साँ उही त्री आयामी समबंद के मन में कलपित करव पात्खले ले बहुत कलिष्ट अची इसे अजिन ज़ान बाद्रीग लेल ग़ादा वी लेल तो समथान इए ज़ान बाद्रीग लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा वी लेल ग़ादा व के कागज पर कोना रेखांकित करल जाए, तकर एक ता मानक द्रिष्ष्प्रनाली बहुत पहलु का द्याय में प्रस्थ। करल जाए. मानक द्रिष्ष्प्रनाली सहां की तात पर याची? इई वेवहार में कोना दिखाएत? औह, उह, एकर अर्थ छी, जए, दिकोडिं करे वाला शोद करता लेल किचो विष्छत ग्राफेक नियम तैकरब. जिनाकी? जदे संबंद वापस गुमी के कोनो पूरवज का गाम दरी जाई तच्छी, तो, अख्रा सीथा लाईनक बदला एक तगोल तीर से दिखाएल जासकाएच. अहो स्वक्युलर आरो, एकरा से तुरन्त स्पष्ट बहुजाएत, जे ये एक्ता लूप अचे. अविवाह कलेल, जते दूईता �alag-alag वन्शावली जुडी रहाल अची, सादारन लेक्खाक बदला दोहरी लेक्खा, मने ौद्बल लाइन को उप्योक का लिए च्छ इता बहुत सपष्ट कर देत आज जते सैं, जेहन शवद कोनो स्थान वा मुल गाम के सुचित करत अची ता उक्रा लेल अलाग रंग वा संकेत जेना की एक ता च्छोट सन त्रिबुज वा वर्ग का उप्योख का याई जाए. बाप्रे यी बहुत शक्तिषाली अचे, यी केवल एक ता चित्र नहीं आचे, यी स्वयम में एक ता भाशा आचे. एक दम. हमर मतलब, सोचु, जखन कोनो पात्ख दोईत्र का अवदारना पड़ाईताची आदोनेक वन्ष्व्रिख्ष में, बेटी का बेटा सीदे अकर निचा आबी जाईताची जे ब्रामक अचे करन औएक ता बिलकुल नव्मूल वा गोत्र में चली जाएताची अदे सा लाईन बडली जाएत च्याएत च्याएत मदा जा हम आहाक दिश्प्रनालीक उप्योग करेची ता दोहित्र के यक्ता अलग रंग नोड के रूप में देखायाल जासकेचे जे दूई ता अलग-लग फामली त्रीक के जोडेवला एक ता हीपरलिंक जकां काज करत. भिल्कुल, जक्हन पाथक के चार पीडिक मात्रिक वन्शावली के एक संगे याद राखे परएचे, तो अकर वरकिंट मैम।री अवर लोड बाजाएचे. आप, दिमाग पर जोर परेचे. पात्थ्यविव्रन् पात्थक सब बहुत बेसी मान से कस्रत करभाइत छे मुदा जक्ञन आहा उई सुचना के एक ता आरेक में बदली देच्ची ता आहा उई संग्यानात्मक भोज्के कागस पर स्तानात्रित कर देच्ची इप दब बहुत पेग रहात है थे एक ता मानक द्रिश्ष प्रनाली नकेवल पाथक के पनजी समज्भा में मददती करत, बलकी इड्कोट करबाक एक ता सार्व भहोमिक उपकरन सोहो बन जाएत. शोद करता औई आरेख का उप्योग, अपन शोद पत्र में सोहो कसकच्छती. आ एद्रिश्छ प्रनाली उई पहल का बिन्दुसन सो हो बहुत नीग जगा जूरे चे जटे ही हम सब मास्टर दिकोडिंग प्रोटोखाल का बात कैने चलू। आ, एक दम जोडे ता ची की हम सब एई नहीं कह सकत ची जे यी द्रिष्छ प्रनाली उही प्रोटोकोल का अन्तिम चरन अची? आहा मूल एकाई पधलू हूँ विशिस्ट व्याकरन्सा अगरा दिकोड के लूँ आहा अंत में अगरा एही मानक द्रिष्छ प्रनाली क उप्योग का के कागज पर मैप का देलूूूूूूू बुज्वा में आसानी देद, जे की पडबाक अची, आ उक्रा कोना पडबाक अची, बलकी इहो बुज्वा में आसानी देद, जे दीकोड कैल जानकारी के सुरक्ष्त अप्रस्तुत कोना करबाक अची. इएक्ता एहन तूल्केट बनी जायत, जे कोनो भी शोद करताले आमूल्ले होयत. इसामगरी पहिले सब बहुत शोद पुरन अमहत्व पुरन अची. इस मित्लाक बोद्धिक अ सामाजिक एतिहास, जास, जे अट्यंत जटिल अवेग्यानिक चल तक्रा सुरक्षित राखवाक एक्ता पैग असराहनी अप्रयास अची. आए, एकर महत्व बहुत अची. ता एकर उप्योगिता आपाटक क अनुबव के ब्रहावव अच्यंत आवश्यक अच्यी इबदलाव एकर एक्ता अकाद्मिक लेक सब बदल के एक्ता ब्यवावारिक काज करे योग्या तूल में बदली देत अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ� तो सर अद्याय तीन मेजु सोलाता समस्स्या का सुची आची उक्रा नकरात्मक तोंसा बडले कै, पंजी का विषिष्ट व्याक्रन या प्रबंदन का सकारात्मक रुप में प्रस्तुत के रजाए. जालसा एक्ता त्रूटीक बडला एक्ता कोशल बनाई. अदोहित्र जहन जटिल समबन्दक वरनन के केवल टेक्स तक्सीमित नाराखी का, उक्रा स्पष्ट कर बाकलेल एक ता मानक दिश्प्रनाली विक्सित करके सामगरी में शामिल के लजाए. हम्रा इप तीनु दिसा हम्रा इप उच्साह वर्दख लागे आची. अपन स्रोताके प्रोज्स़ाहित करब, जो एही सुजाव सप्र ग़राई सविचार करती. आप, यह बहुत जरूरी आची. आप यहाख सामगरी पहले सबहुत सुद्रद वैचारी कादार पर चाई. आप यहाख सोद, मितलाक, पनजी विवस्ताक, सुच्मताक के, समिक्षा सब्त्र किलिल पथाउ हमरा सब के एकर परिष्कित रूप देखी कब बहुत प्रसन्नता होएद अन्त्तद जखन हम सब पनजीजका जटील समाजिक विवस्ता के दिकोड कर अच्छी ते एकता एहन दूनी आच्छे जटे सीधी लाईन नहीं बलकी समबंद के एक ता गेर आत्री आयामी जाल आचे. आख, एक ता बहुत पैक जाल. आज जक्हन आख लक्स, सही नक्षा, सही व्याक्रन, आए एक ता स्पष्ट प्रोटोकोल हो, तो उदूंदल जाल से हो एक दम स्पष्ट, अजुक एही चर्चालेल बस एदबे आख समगरिक अगला स्वरूप के प्रतिक्षा रहत