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राजा_सलहेसक_न्याय_आ_दबनाक_तन्त्र.m4a
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- 0:00–0:04विमर्श आब विविन्न द्र्ष्टि कोनक एह मंच पर आँग स्वागत अछी
- 0:04–0:07आँजटाई हम सब गहीर विषे सब पर चर्चा करे ची
- 0:07–0:12एक दम ता आँँ जक्हन कोनो राजक न्याय विवस्ता पंगु बजाए
- 0:12–0:17बूजलिये ने, जक हन निर्दोष के अप्रादी गोषिट कर दिल जाए, तन न्याय कोना बेटे च्छेक?
- 0:17–0:22कि न्याय कोनो वक्ती के सत चरीट्रा से अपने आप प्रकाष मे आभी जाए च्छेक?
- 0:22–0:30वाज, मैंने उही न्याय के पावाक लेल कोनो भ्यानक, वाब, रहींसक शक्तिक प्रहार आवश्शक बोज़े चेक.
- 0:30–0:34बलकल, यहे आई हमर सबक विमर्षक केंद्रा ची.
- 0:34–0:40इचर्चा आ गजेंदर ताकुर दवारा समपादेत राजा सलेहेस का लोक गातापर आदारी ताची
- 0:41–0:44जे मुरंके एक ता सादारन दूसाद सिपाही कताची
- 0:45–0:48जे बिना कोनो सिंगासनक लोकक्स मोनक राजा बनला
- 0:48–0:56अंतत है, हूंकर प्रेमि का दवना आपन तन्त्र विद्या से, हूंका राज्जक शड्यन्तर से मुक्त का न्याए दिया लक.
- 0:56–1:02मुदद देखु, एह गात्ठाक अनवेशन करित काल विक्ता बहुत पैग विवाद सामने आबे ताची.
- 1:02–1:06राजा सलहेसके लोक गाता में, अंततह ती वीजैय कखकर अची.
- 1:06–1:10की इस सलहेसक नयाई प्रियता आजन समर्ठनक वीजैय चे,
- 1:10–1:15वा पून रुपेड दबनाक तन्त्र विद्या आ रन्नीतिक वीजैय चे.
- 1:15–1:45अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना �
- 1:45–1:49अगरुपेण तन्त्र रन्नीती अस्त्री शक्तिक विज़ाया चे
- 1:49–1:54अम्रा लगेत अचे जे आहा तन्त्र के बहुत भेशी केंद्र में राखी रहोल चे
- 1:54–1:57मुदा हम्रा मुल बाज से प्रारंभ करे द्योक
- 1:57–2:00सलहेसक मुल सक्ती उनकर जन समर्तन अची
- 2:00–2:06अव, मूरंग का तालुगदार नूरंगी बहादूर तापा का दर्बार में मात्र एकता सिपाही चला
- 2:06–2:08अव, सिपाही चला
- 2:08–2:10अव, उदूसाद जातिक चला
- 2:10–2:11बूजलिये ने?
- 2:11–2:15जे समाज का तताकतित सीमान्तक्रित वर्ग सा आबगेत छे
- 2:15–2:17मुद्दा जन्ता हुनका राजा कहे चल
- 2:17–2:19इकुनो सामान ने बात नहीं आचे
- 2:19–2:22जक्हन लोग कुनो सिपाही का राजा कहे लागे
- 2:22–2:25तो अकर अगर अची जे उही सिपाही के चरित्र में
- 2:25–2:27किछ एहन बात अची
- 2:27–2:29जे लोकक हिरदे पर राज करहल ची
- 2:29–2:31इदा आचे मुदाप
- 2:31–2:39रूकु, जखन तालुगदार थापा एर्षावः, हुनका राजा शब्द हटेबाक लेल दबाओ देलग, तसलहे सकुटर बहुत मार्मिक चल.
- 2:39–2:44उ कहल नहीं, इजन दवारा देल पद्वी आची कोना चोडा बेक्रा?
- 2:44–2:46हम चोडियो दब लोग तक कहबे करात.
- 2:46–2:50बिल्कुल ओद्तर मार्मिक चल मुदा हम्रा लगे तची
- 2:50–2:54आही त्हाम एक तब बहुत पेग बात अंदेखा करेल रही ची
- 2:54–2:55की माने?
- 2:55–2:58आहा की तर्क, जो मूनक राजा चला
- 2:58–3:01सुनाबा मे बहुत आदर स्वादी लगे तची
- 3:01–3:03मुदा वास्तविक्ता की भेल
- 3:03–3:33की उ जन समर्तन हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ�
- 3:33–3:34उ पलायन को रहल चला?
- 3:35–3:37पलायन शब्द तनी भेशी कठोर भागेल
- 3:37–3:40उ बस एक ता नव मारग खोजी रहल चला?
- 3:40–3:42नहीं, यह यतारत चे.
- 3:43–3:44उ मोरंग चोडी रहल चला
- 3:44–3:47जकन राज्जक संयंट्र हूंका कुचले दिलक
- 3:47–3:50तजन्ता सडग पर आभी कहुंका लेल विद्रोह नीके लक
- 3:50–3:55उजन् समर्थन वेबहारीक रूप से निष्प्रभावी चल
- 3:55–3:57तआ आहा कानुसार हुंका के बचै लक
- 3:57–3:59उखुस्मी नामक अस्त्री चल
- 3:59–4:01जे दबना के खबरी दिलक
- 4:01–4:03अदबना आभी कहुंका रोक लक
- 4:03–4:09अदबना केवल हुंका रोक लक नहीं बरू एक ता पैक राजनितिक डाउ के ले लक
- 4:09–4:15उ साथ सो सिपाहिक सर्दार चूहल मल के हता का सल्लेस के सर्दार बने लक
- 4:15–4:19आप एक दरबारक भीतर कुतनिती चल यह माने इचे
- 4:19–4:22तबना एक ता किंग मेकर कभूमी का निरवाह के लक
- 4:22–4:29अदेव उन्नेतिक्ता वा जन समर्त्ठन उनका शक्ती नहीं दिलक, दबनाक रननीती उनका सत्ता में वापसन लक.
- 4:29–4:32आहा की बाड थी कजी जे दबना कुतनीतिक काज के लक.
- 4:33–4:37मुत्ता हम्राई ने भी सर्बाक चाही जे तालुग्दार थापा सलेस सन दराएत की एक चल?
- 4:37–4:42बिल्कुल! इजन समर्त्हन बनाम व्यवावारिक शक्ती के टा गहीर द्वन्द अची.
- 4:42–4:46सत्ता हमेशा लोक्तान्त्रिक वजन समर्तित नाएक सा दराएत अचे.
- 4:46–4:50नोरंगी बहदुर तापा का इर्षा एही बात कप्रमान अचे.
- 4:50–4:52रुएत.
- 4:52–4:52दिखु!
- 4:52–4:59सलहेस उही गाछ जका चला, जकर ज़ी पाताल दरी ग़ल चल, मने जन्ता के मोन में,
- 4:59–5:04तापा जका आन्दी हुंकर पात खसा सके चल, उकर नोकरी चिनी सके चल,
- 5:04–5:07मुदा उही गाछ कज़ी के नहीं उखारी सके चल.
- 5:07–5:10मुदा उगाछ तउकरी चुकल चल.
- 5:10–5:16आजे गाचक बात को रहल ची, उम वरंगक माटी से उक्री कर दरबंगा दिशन जार हल चल.
- 5:16–5:19अख्रल ने चिल, उबस जोंख कहे रहल चल.
- 5:19–5:24ने, ने, यदी दबना उही समें रस्तक्षेप नहीं कराएत,
- 5:24–5:28तर राजा सलहे सक लोक गाता, उते ही उही दिन समाप्त बहुज़ाइत.
- 5:28–5:32दबना उही उख्रल गाजके फिर सरोपी देलक.
- 5:32–5:35आहाजक्र जन्ताक मोन में गडल जडी कोरहे लची,
- 5:35–5:38उख्रा दरबारक जमीन पर थाड कर बाकलेल,
- 5:38–5:41दबनाके अपन प्रभावक उप्योक करे पडल
- 5:41–5:42तीक आची
- 5:42–5:44तब आग कबाग आची आची
- 5:44–5:49जि दबनाक राजनितिक प्रभाव बना सलेहसक जन समरतन पंगुचल
- 5:49–5:52बदा आव हम सब औही गटना दिस चले ची
- 5:52–5:55जो उन करे ही व्यावारिक शक्तिक आस्ली परिक्षा भेल
- 6:08–6:12प्रतिशोद मे उहार चूरा कषलेहसक उच्हन में उका देलक
- 6:12–6:15इस उमान्त क्रित नायक के फसावाक शर्यंट्र चल
- 6:15–6:17भिल्कुल, शर्यंट्र तच्हले है
- 6:17–6:22आजकन राज दरभारक नीम, प्रमान आसाक्षी सब शल्यहसक विरुद भागला
- 6:22–6:26तकन सल्लेहस निर्दोश होई तो अप्रादी बुज्हाईला,
- 6:26–6:29मुदल लोक गाताग जे मुल सन्देश आची,
- 6:29–6:33उई आची जे प्राक्रितिक सत्ते अन्तता प्रकाश्मे आवीते आची.
- 6:33–6:35की बाजी रहाल ची?
- 6:35–6:38सल्लेहस के सत्तिता आहूंकर शरित्र की शुब्दता है,
- 6:52–6:57इको नो स्वत्धह स्पूर्त प्राक्रितिक नियाए नहीं चल,
- 6:57–7:02जे हार अप बजाय लागल हो, जे हमरा चूहलमल चोरी नयाजी,
- 7:02–7:07आहा सोचो जो औही समया कराज्दर्बार में नयाए कख्राब हिते चल.
- 7:07–7:08कुलीन वरग के
- 7:08–7:14अग, न्याय्वेवस्ता पूर्न रूपेण पूरुष प्रदान और कुलीन वर्ग के निंट्रन मेच्छल,
- 7:14–7:19जगन राजग का न्याय्वेवस्ता विफल भोगेल तकन दबनाखी के लग,
- 7:19–7:24औग राथ पर हात दोकर सत्यक प्रकाश में एवाग प्रतिक्षा नहीं के लग.
- 7:38–7:44तन्त्र तबस एक ता रूकू, इबुजनाई आवश्यक अचे जे तन्त्र एही ताम की आचे.
- 7:44–7:51तन्त्र लोग कता सब में प्राया उही वर्ग के लेल एक ता समानान्तर नयाई विवस्त्ता में काज करे तची,
- 7:51–7:55जक्रा राज्जके नयाले में प्रवेश नहीं भिटेता चे
- 7:55–7:58अदबनाक तन्त्र मन्त्रक परनाम की भाल
- 7:58–8:00चूरडमल खुन भोक्रे लागलाई
- 8:00–8:02उमरन्सन भोगेल चली हम जनाईची
- 8:02–8:06ते इखोनो शान्तिपोण प्राक्रतिक नयाई नहीं चल
- 8:06–8:12इटान्त्रिक् सक्तिक लग, भ्यानक् मुदा अप्यंत आवशक्प्रहार चल,
- 8:12–8:16उही यातना से त्रस्ट भैका चूहर मल सत्यबकी देलक,
- 8:16–8:21ततई दबनाक् सक्तिक विजेय अची, सलहे सक नेतिक्ता का नहीं.
- 8:21–8:26आँ, हम इस्विकार करेत ची जे न्याय प्राप्त करवाग प्रक्रिया में,
- 8:26–8:30रहार भेल, मुदा आम्रा ए बुज्वा में आवी रहाल ची,
- 8:30–8:35जे आहा तन्त्र के केवलेक्ता रहार ची रहाल ची.
- 8:35–8:37ता आहा को ना देक है?
- 8:37–8:39उगर आदार सत्ति होईत्छे
- 8:39–8:41तक्कि आँगा कहाच छाह चे
- 8:41–8:43जे तन्त्र केवल सत्ति के उपस्तिति में काज करे थे
- 8:43–8:45एक दम
- 8:45–8:47दबनाक सादना
- 8:47–8:49सलहे सक सत्तिक लेल एक ता माद्ध्यम मात्र चल
- 8:49–8:51सलहे सक चरित्र हे
- 8:51–8:53उसाद्दे चल
- 8:53–8:58तकी आँ कह चाह चे जे तन्त्र केवल सत्ति के उपस्तिती में काज करे तचे?
- 8:58–9:04एक दम! दबनाक सादना सलहे सक सत्तिक लेल एक ता माद्ध्यम माद्र चल.
- 9:04–9:07सलहे सक चरित्र हे उसाद्ध्यचल.
- 9:07–9:13यदी सलहेस वास्तों में चोर हुईता, की दबनाक तन्तर हुँका बचासके च्छल, कदापी नहीं.
- 9:13–9:15इदो एक ता दार्षनिक द्रिष्टी कोन भेगले?
- 9:15–9:21इस सत्य अची, न्याए उही कारन से भेल, कारन सत्य सलेहेस के पक्ष मेच्छल.
- 9:21–9:28आजा जे दबनाक शक्तिक बात करहल ची उशक्ति सलेहिस क चारित्रिक बल्स आव उर्जच्विच्छल
- 9:28–9:34आजा सत्या और माद्ध्यमक जी संबन्द अस्थापित करहल ची उनीग लगेत आची
- 9:34–9:36मुदा व्यबहारी क्यदार्तिया आची,
- 9:36–9:38जी न्याय तकने भीटे च्यक,
- 9:38–9:42जकन कोनो शक्ती उक्रा लागु करबाक शम्ता रख है तो.
- 9:42–9:45माने, शक्ती बिना सत्ते पंगू आची?
- 9:45–9:46आआ.
- 9:46–9:48यदी आहलग सत्ते आची,
- 9:48–9:50मुदा उक्रा प्रमानित करबाक शम्ता नही,
- 9:50–9:52तर राज्य आहाके फासी पर लटका देत.
- 9:53–9:57दबना कोनो सादारन समरपन भाव वली आबला नारी नहीं चल,
- 9:57–10:00जे केवल सत्यका प्रतिख्षा कराइत तर,
- 10:00–10:02उसक्रिय निंट्रनक प्रती का ची.
- 10:03–10:06मुदा दबनाक चरित्र में जी अगाद समरपन आची,
- 10:06–10:12अखर आहा कुना अंदेखा का सके ची, लोक गाता में सपष्ट उलेक है ची,
- 10:12–10:15जि दबना सलेहे से अनन्य प्रेम करेज चल.
- 10:15–10:19प्रेम करेच चल, मुदा उस सलेच पर निरभर नहीं चल.
- 10:19–10:25मुदा, दबनाक बारा बरस्सक प्रतिख्षा, जाईपर उ बदका जलसा में गीत गवाईताची.
- 10:25–10:30राओ सुरहा बारा बरस्स तोरा लेल आचर बनलाओ, इकी दर्षावेटाची?
- 10:30–10:34इक उकरी प्रतिख्षा, उकर तपस्स्या के दिखावेटाची?
- 10:34–10:37तपस्यात ज्यल, मुदा
- 10:37–10:42आ, आ, एो देखू, जगन राजाक वेद्ध्य उनका सप्रेम करईच्छल,
- 10:42–10:46आद दबनाक औस्विक्रितिक कारन वेद्ध्य आत्म रद्या कर लेल,
- 10:46–10:48तदबना विच्लित नहीं बहल,
- 10:48–10:50उआपन प्रेम में अदिग रहल,
- 10:50–10:55कारन, उ सले सक सक्सत्यस जुडल चल, इस समर्पन है उनकर सक्ती कस्रोता ची.
- 10:55–11:00हम्रा लागाई तची, आहा उही वेद्द्यवाला प्रसंके भिल्कुल विप्री दिशास देखी रहाल ची.
- 11:00–11:02आच्छा, कोना?
- 11:02–11:04आहा जक्र समर्पन कही रहाल ची.
- 11:04–11:09अम उक्रा दबनाक निर्मम सतंट्रता अन्यंद्रनक रूप में देखाईची
- 11:09–11:12उवेद्देक आत्महत्या कोनो सदारन गटन नही आची
- 11:12–11:18इदेखावाईट आची जददबना आपन निरने पर कते कथोर आदिक भास्वाईट आची
- 11:18–11:21अग, मने उ पुरुष सत्ताक सोजा नहीं जुखली
- 11:21–11:22भिलकोल नहीं
- 11:22–11:25दबना काम्रु काम्क्या सत्तन्त्र मन्त्र सीखने चल
- 11:25–11:27जटे पुरुष सत्ताक अदिकार नहीं चलाई तची
- 11:27–11:29मुदा उ तन्त्र सीखने चल
- 11:29–11:30सलेस के लेल
- 11:30–11:32नकी सत्ता करबाक लेल
- 11:32–11:38उ जेकर लेलो सीखने हूँ, मुदा हूंकर प्रेम में एक ता प्रभल नियंत्रन अआ अदिकारक बहावना चल.
- 11:39–11:45जगन सलेस पसी जाए चतिन, तदबना राज दरभार में चमायाचना करे नी जाच्चतिन.
- 11:45–11:47आ, उ कोनो कानुनी पैरवी नहीं करे चतिन.
- 11:47–11:54उ सोजे काली मंदिर जाक सत्ता कसमनानतर इक ता अलोकिक सत्ता ताड कदेच चती
- 11:54–11:58इसलेस का सरल अनिष्क्रीय सवभाव सब हलकल भिल्गना ची
- 11:58–12:01सलेस पूर कता में लगभग निष्क्रीय चती
- 12:01–12:02निष्क्रीयता
- 12:02–12:07अम्रा इश्वद सगोरा पती ची
- 12:07–12:13मुदा उकाजकत करो हल जद ही, प्रतेग भेर कार्य व्यपार दबनाक करो हल जद ही.
- 12:13–12:19हमी स्विकार करे ची, जग गतना करम में दबनाक कबूमी का अत्यंत सक्रिया ची.
- 12:19–12:25मुदा इ निष्क्रियता जग्राहा कही रहल ची, उसलहे सक अस्थित प्रक्या अवस्ता आची.
- 12:25–12:26इक तश्द जगा
- 12:26–12:29शंत अ, इक तश्पाही शंत कोना बहुसके दचे
- 12:29–12:33देखू, जखन हूंका पर हार चोडेबाक आरोप लगए चने
- 12:33–12:36तो, कोनो हिंसक विद्रो नहीं करे चती
- 12:36–12:39और राज दर्बारक दंद स्विकार करे चती
- 12:39–12:44उचाहीता हूँ तो आपन जन समर्ठन का उप्योग का दंगा भडखा सकच्छला. मुदा नहीं?
- 12:44–12:47मुदा इई हुंकर विवष्ता से हो तब हो सके तच्छे.
- 12:47–12:50नहीं. इई हुंकर न्याई प्रियता आची.
- 12:50–12:53इद्हेर्य, इई अस्सीम सहिंज्शिल्ता,
- 12:53–13:23उदूसाद समाच असम्पुड मिठिला मोरंग में हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ
- 13:23–13:35अगर अतिहासिक यतार्थ वादक द्र्ष्टी से देख़ब एक्ता निम्न वर्ग के सिपाहीक लग राज दर्बार में विद्द्रो करभा कोनु विकल्प चल कहां?
- 13:35–13:38मने आँई कहे चाहे ची जो विवश्षला
- 13:38–14:08बिल्क्ल बिना दबनाक बारा वर्षक अदिक संकल्प अद्द्द्रिक शक्तिक इग गठा एक ता अन्याय पून्त रासदी बनि कर रहे जाएत. चूहर मलक चल सफल भाई जाएत. दबनाक साहस बिना सलहे सक नयाय असमबआव चल. इग गठा हमरा इचिकभाइत अची जे श
- 14:08–14:38अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ�
- 14:38–14:44अगर राजनेते कोशल अगर तान्त्रेख हुंकार से हो उत्बे जीवन्त रहे तची
- 14:44–14:51इलोग गाता पूरुश सद्गुड अएस्ट्ट्री शक्तिक एक डवितिये जटेल सन्तुलन प्रस्तूत करे तची
- 14:51–14:58उआई अई विचार करी जिन्याय प्राब्त करबाकलेल सत्यक होनाई भेशी आवश्यक अची, वा उही सत्यक प्रमानित करबाकलेल सक्ती अरननीतिक होनाई.
- 14:58–15:03मुदा सत्ता, नैतिक्ता, अशक्तिक एक ता गहीर अद्द्यन अची,
- 15:03–15:07हम आहा सब के प्रेड्ट करब जेहां स्वयम इलो गाता के पडी.
- 15:07–15:11हा, आई इ विचार करी, जि नियाय प्राप्त करबाक लेल,
- 15:11–15:13सत्तिक होनाई बेशी आवश्षक अची,
- 15:13–15:18वा उही सत्यक प्रमानित कर बाकलेल सक्ती अरननीतिक होनाई
- 15:18–15:23येक ता बहुत नीक विचार अची जेकर संगम आएक इचर्चा समाप्त करेची
- 15:23–15:25विमर्ष आमन्त्धन निरन्तर चलेत रहत
- 15:25–15:30कारन एही लोग गात्ठा मे अकनो बहुत रास परत अची जक्रा उगार बाकी अची
- 15:30–15:32सुन्बाक लेल बहुत-बहुत द्ध्डिवाद
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विमर्श आब विविन्न द्र्ष्टि कोनक एह मंच पर आँग स्वागत अछी आँजटाई हम सब गहीर विषे सब पर चर्चा करे ची एक दम ता आँँ जक्हन कोनो राजक न्याय विवस्ता पंगु बजाए बूजलिये ने, जक हन निर्दोष के अप्रादी गोषिट कर दिल जाए, तन न्याय कोना बेटे च्छेक? कि न्याय कोनो वक्ती के सत चरीट्रा से अपने आप प्रकाष मे आभी जाए च्छेक? वाज, मैंने उही न्याय के पावाक लेल कोनो भ्यानक, वाब, रहींसक शक्तिक प्रहार आवश्शक बोज़े चेक. बलकल, यहे आई हमर सबक विमर्षक केंद्रा ची. इचर्चा आ गजेंदर ताकुर दवारा समपादेत राजा सलेहेस का लोक गातापर आदारी ताची जे मुरंके एक ता सादारन दूसाद सिपाही कताची जे बिना कोनो सिंगासनक लोकक्स मोनक राजा बनला अंतत है, हूंकर प्रेमि का दवना आपन तन्त्र विद्या से, हूंका राज्जक शड्यन्तर से मुक्त का न्याए दिया लक. मुदद देखु, एह गात्ठाक अनवेशन करित काल विक्ता बहुत पैग विवाद सामने आबे ताची. राजा सलहेसके लोक गाता में, अंततह ती वीजैय कखकर अची. की इस सलहेसक नयाई प्रियता आजन समर्ठनक वीजैय चे, वा पून रुपेड दबनाक तन्त्र विद्या आ रन्नीतिक वीजैय चे. अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना अपना � अगरुपेण तन्त्र रन्नीती अस्त्री शक्तिक विज़ाया चे अम्रा लगेत अचे जे आहा तन्त्र के बहुत भेशी केंद्र में राखी रहोल चे मुदा हम्रा मुल बाज से प्रारंभ करे द्योक सलहेसक मुल सक्ती उनकर जन समर्तन अची अव, मूरंग का तालुगदार नूरंगी बहादूर तापा का दर्बार में मात्र एकता सिपाही चला अव, सिपाही चला अव, उदूसाद जातिक चला बूजलिये ने? जे समाज का तताकतित सीमान्तक्रित वर्ग सा आबगेत छे मुद्दा जन्ता हुनका राजा कहे चल इकुनो सामान ने बात नहीं आचे जक्हन लोग कुनो सिपाही का राजा कहे लागे तो अकर अगर अची जे उही सिपाही के चरित्र में किछ एहन बात अची जे लोकक हिरदे पर राज करहल ची इदा आचे मुदाप रूकु, जखन तालुगदार थापा एर्षावः, हुनका राजा शब्द हटेबाक लेल दबाओ देलग, तसलहे सकुटर बहुत मार्मिक चल. उ कहल नहीं, इजन दवारा देल पद्वी आची कोना चोडा बेक्रा? हम चोडियो दब लोग तक कहबे करात. बिल्कुल ओद्तर मार्मिक चल मुदा हम्रा लगे तची आही त्हाम एक तब बहुत पेग बात अंदेखा करेल रही ची की माने? आहा की तर्क, जो मूनक राजा चला सुनाबा मे बहुत आदर स्वादी लगे तची मुदा वास्तविक्ता की भेल की उ जन समर्तन हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ� उ पलायन को रहल चला? पलायन शब्द तनी भेशी कठोर भागेल उ बस एक ता नव मारग खोजी रहल चला? नहीं, यह यतारत चे. उ मोरंग चोडी रहल चला जकन राज्जक संयंट्र हूंका कुचले दिलक तजन्ता सडग पर आभी कहुंका लेल विद्रोह नीके लक उजन् समर्थन वेबहारीक रूप से निष्प्रभावी चल तआ आहा कानुसार हुंका के बचै लक उखुस्मी नामक अस्त्री चल जे दबना के खबरी दिलक अदबना आभी कहुंका रोक लक अदबना केवल हुंका रोक लक नहीं बरू एक ता पैक राजनितिक डाउ के ले लक उ साथ सो सिपाहिक सर्दार चूहल मल के हता का सल्लेस के सर्दार बने लक आप एक दरबारक भीतर कुतनिती चल यह माने इचे तबना एक ता किंग मेकर कभूमी का निरवाह के लक अदेव उन्नेतिक्ता वा जन समर्त्ठन उनका शक्ती नहीं दिलक, दबनाक रननीती उनका सत्ता में वापसन लक. आहा की बाड थी कजी जे दबना कुतनीतिक काज के लक. मुत्ता हम्राई ने भी सर्बाक चाही जे तालुग्दार थापा सलेस सन दराएत की एक चल? बिल्कुल! इजन समर्त्हन बनाम व्यवावारिक शक्ती के टा गहीर द्वन्द अची. सत्ता हमेशा लोक्तान्त्रिक वजन समर्तित नाएक सा दराएत अचे. नोरंगी बहदुर तापा का इर्षा एही बात कप्रमान अचे. रुएत. दिखु! सलहेस उही गाछ जका चला, जकर ज़ी पाताल दरी ग़ल चल, मने जन्ता के मोन में, तापा जका आन्दी हुंकर पात खसा सके चल, उकर नोकरी चिनी सके चल, मुदा उही गाछ कज़ी के नहीं उखारी सके चल. मुदा उगाछ तउकरी चुकल चल. आजे गाचक बात को रहल ची, उम वरंगक माटी से उक्री कर दरबंगा दिशन जार हल चल. अख्रल ने चिल, उबस जोंख कहे रहल चल. ने, ने, यदी दबना उही समें रस्तक्षेप नहीं कराएत, तर राजा सलहे सक लोक गाता, उते ही उही दिन समाप्त बहुज़ाइत. दबना उही उख्रल गाजके फिर सरोपी देलक. आहाजक्र जन्ताक मोन में गडल जडी कोरहे लची, उख्रा दरबारक जमीन पर थाड कर बाकलेल, दबनाके अपन प्रभावक उप्योक करे पडल तीक आची तब आग कबाग आची आची जि दबनाक राजनितिक प्रभाव बना सलेहसक जन समरतन पंगुचल बदा आव हम सब औही गटना दिस चले ची जो उन करे ही व्यावारिक शक्तिक आस्ली परिक्षा भेल प्रतिशोद मे उहार चूरा कषलेहसक उच्हन में उका देलक इस उमान्त क्रित नायक के फसावाक शर्यंट्र चल भिल्कुल, शर्यंट्र तच्हले है आजकन राज दरभारक नीम, प्रमान आसाक्षी सब शल्यहसक विरुद भागला तकन सल्लेहस निर्दोश होई तो अप्रादी बुज्हाईला, मुदल लोक गाताग जे मुल सन्देश आची, उई आची जे प्राक्रितिक सत्ते अन्तता प्रकाश्मे आवीते आची. की बाजी रहाल ची? सल्लेहस के सत्तिता आहूंकर शरित्र की शुब्दता है, इको नो स्वत्धह स्पूर्त प्राक्रितिक नियाए नहीं चल, जे हार अप बजाय लागल हो, जे हमरा चूहलमल चोरी नयाजी, आहा सोचो जो औही समया कराज्दर्बार में नयाए कख्राब हिते चल. कुलीन वरग के अग, न्याय्वेवस्ता पूर्न रूपेण पूरुष प्रदान और कुलीन वर्ग के निंट्रन मेच्छल, जगन राजग का न्याय्वेवस्ता विफल भोगेल तकन दबनाखी के लग, औग राथ पर हात दोकर सत्यक प्रकाश में एवाग प्रतिक्षा नहीं के लग. तन्त्र तबस एक ता रूकू, इबुजनाई आवश्यक अचे जे तन्त्र एही ताम की आचे. तन्त्र लोग कता सब में प्राया उही वर्ग के लेल एक ता समानान्तर नयाई विवस्त्ता में काज करे तची, जक्रा राज्जके नयाले में प्रवेश नहीं भिटेता चे अदबनाक तन्त्र मन्त्रक परनाम की भाल चूरडमल खुन भोक्रे लागलाई उमरन्सन भोगेल चली हम जनाईची ते इखोनो शान्तिपोण प्राक्रतिक नयाई नहीं चल इटान्त्रिक् सक्तिक लग, भ्यानक् मुदा अप्यंत आवशक्प्रहार चल, उही यातना से त्रस्ट भैका चूहर मल सत्यबकी देलक, ततई दबनाक् सक्तिक विजेय अची, सलहे सक नेतिक्ता का नहीं. आँ, हम इस्विकार करेत ची जे न्याय प्राप्त करवाग प्रक्रिया में, रहार भेल, मुदा आम्रा ए बुज्वा में आवी रहाल ची, जे आहा तन्त्र के केवलेक्ता रहार ची रहाल ची. ता आहा को ना देक है? उगर आदार सत्ति होईत्छे तक्कि आँगा कहाच छाह चे जे तन्त्र केवल सत्ति के उपस्तिति में काज करे थे एक दम दबनाक सादना सलहे सक सत्तिक लेल एक ता माद्ध्यम मात्र चल सलहे सक चरित्र हे उसाद्दे चल तकी आँ कह चाह चे जे तन्त्र केवल सत्ति के उपस्तिती में काज करे तचे? एक दम! दबनाक सादना सलहे सक सत्तिक लेल एक ता माद्ध्यम माद्र चल. सलहे सक चरित्र हे उसाद्ध्यचल. यदी सलहेस वास्तों में चोर हुईता, की दबनाक तन्तर हुँका बचासके च्छल, कदापी नहीं. इदो एक ता दार्षनिक द्रिष्टी कोन भेगले? इस सत्य अची, न्याए उही कारन से भेल, कारन सत्य सलेहेस के पक्ष मेच्छल. आजा जे दबनाक शक्तिक बात करहल ची उशक्ति सलेहिस क चारित्रिक बल्स आव उर्जच्विच्छल आजा सत्या और माद्ध्यमक जी संबन्द अस्थापित करहल ची उनीग लगेत आची मुदा व्यबहारी क्यदार्तिया आची, जी न्याय तकने भीटे च्यक, जकन कोनो शक्ती उक्रा लागु करबाक शम्ता रख है तो. माने, शक्ती बिना सत्ते पंगू आची? आआ. यदी आहलग सत्ते आची, मुदा उक्रा प्रमानित करबाक शम्ता नही, तर राज्य आहाके फासी पर लटका देत. दबना कोनो सादारन समरपन भाव वली आबला नारी नहीं चल, जे केवल सत्यका प्रतिख्षा कराइत तर, उसक्रिय निंट्रनक प्रती का ची. मुदा दबनाक चरित्र में जी अगाद समरपन आची, अखर आहा कुना अंदेखा का सके ची, लोक गाता में सपष्ट उलेक है ची, जि दबना सलेहे से अनन्य प्रेम करेज चल. प्रेम करेच चल, मुदा उस सलेच पर निरभर नहीं चल. मुदा, दबनाक बारा बरस्सक प्रतिख्षा, जाईपर उ बदका जलसा में गीत गवाईताची. राओ सुरहा बारा बरस्स तोरा लेल आचर बनलाओ, इकी दर्षावेटाची? इक उकरी प्रतिख्षा, उकर तपस्स्या के दिखावेटाची? तपस्यात ज्यल, मुदा आ, आ, एो देखू, जगन राजाक वेद्ध्य उनका सप्रेम करईच्छल, आद दबनाक औस्विक्रितिक कारन वेद्ध्य आत्म रद्या कर लेल, तदबना विच्लित नहीं बहल, उआपन प्रेम में अदिग रहल, कारन, उ सले सक सक्सत्यस जुडल चल, इस समर्पन है उनकर सक्ती कस्रोता ची. हम्रा लागाई तची, आहा उही वेद्द्यवाला प्रसंके भिल्कुल विप्री दिशास देखी रहाल ची. आच्छा, कोना? आहा जक्र समर्पन कही रहाल ची. अम उक्रा दबनाक निर्मम सतंट्रता अन्यंद्रनक रूप में देखाईची उवेद्देक आत्महत्या कोनो सदारन गटन नही आची इदेखावाईट आची जददबना आपन निरने पर कते कथोर आदिक भास्वाईट आची अग, मने उ पुरुष सत्ताक सोजा नहीं जुखली भिलकोल नहीं दबना काम्रु काम्क्या सत्तन्त्र मन्त्र सीखने चल जटे पुरुष सत्ताक अदिकार नहीं चलाई तची मुदा उ तन्त्र सीखने चल सलेस के लेल नकी सत्ता करबाक लेल उ जेकर लेलो सीखने हूँ, मुदा हूंकर प्रेम में एक ता प्रभल नियंत्रन अआ अदिकारक बहावना चल. जगन सलेस पसी जाए चतिन, तदबना राज दरभार में चमायाचना करे नी जाच्चतिन. आ, उ कोनो कानुनी पैरवी नहीं करे चतिन. उ सोजे काली मंदिर जाक सत्ता कसमनानतर इक ता अलोकिक सत्ता ताड कदेच चती इसलेस का सरल अनिष्क्रीय सवभाव सब हलकल भिल्गना ची सलेस पूर कता में लगभग निष्क्रीय चती निष्क्रीयता अम्रा इश्वद सगोरा पती ची मुदा उकाजकत करो हल जद ही, प्रतेग भेर कार्य व्यपार दबनाक करो हल जद ही. हमी स्विकार करे ची, जग गतना करम में दबनाक कबूमी का अत्यंत सक्रिया ची. मुदा इ निष्क्रियता जग्राहा कही रहल ची, उसलहे सक अस्थित प्रक्या अवस्ता आची. इक तश्द जगा शंत अ, इक तश्पाही शंत कोना बहुसके दचे देखू, जखन हूंका पर हार चोडेबाक आरोप लगए चने तो, कोनो हिंसक विद्रो नहीं करे चती और राज दर्बारक दंद स्विकार करे चती उचाहीता हूँ तो आपन जन समर्ठन का उप्योग का दंगा भडखा सकच्छला. मुदा नहीं? मुदा इई हुंकर विवष्ता से हो तब हो सके तच्छे. नहीं. इई हुंकर न्याई प्रियता आची. इद्हेर्य, इई अस्सीम सहिंज्शिल्ता, उदूसाद समाच असम्पुड मिठिला मोरंग में हुँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँँ अगर अतिहासिक यतार्थ वादक द्र्ष्टी से देख़ब एक्ता निम्न वर्ग के सिपाहीक लग राज दर्बार में विद्द्रो करभा कोनु विकल्प चल कहां? मने आँई कहे चाहे ची जो विवश्षला बिल्क्ल बिना दबनाक बारा वर्षक अदिक संकल्प अद्द्द्रिक शक्तिक इग गठा एक ता अन्याय पून्त रासदी बनि कर रहे जाएत. चूहर मलक चल सफल भाई जाएत. दबनाक साहस बिना सलहे सक नयाय असमबआव चल. इग गठा हमरा इचिकभाइत अची जे श अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अगर अ� अगर राजनेते कोशल अगर तान्त्रेख हुंकार से हो उत्बे जीवन्त रहे तची इलोग गाता पूरुश सद्गुड अएस्ट्ट्री शक्तिक एक डवितिये जटेल सन्तुलन प्रस्तूत करे तची उआई अई विचार करी जिन्याय प्राब्त करबाकलेल सत्यक होनाई भेशी आवश्यक अची, वा उही सत्यक प्रमानित करबाकलेल सक्ती अरननीतिक होनाई. मुदा सत्ता, नैतिक्ता, अशक्तिक एक ता गहीर अद्द्यन अची, हम आहा सब के प्रेड्ट करब जेहां स्वयम इलो गाता के पडी. हा, आई इ विचार करी, जि नियाय प्राप्त करबाक लेल, सत्तिक होनाई बेशी आवश्षक अची, वा उही सत्यक प्रमानित कर बाकलेल सक्ती अरननीतिक होनाई येक ता बहुत नीक विचार अची जेकर संगम आएक इचर्चा समाप्त करेची विमर्ष आमन्त्धन निरन्तर चलेत रहत कारन एही लोग गात्ठा मे अकनो बहुत रास परत अची जक्रा उगार बाकी अची सुन्बाक लेल बहुत-बहुत द्ध्डिवाद